प्रीत या नादानी : इश्क के चक्कर में हत्या

दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जालंधर से करीब 50 किलोमीटर पहले ही जिला जालंधर की तहसील है थाना फिल्लौर. इसी थाने का एक गांव है शाहपुर. इसी गांव के 4 छात्र थे- हनी, रमेश उर्फ गगू, तजिंदर उर्फ राजन और निशा. 15 से 17 साल के ये सभी बच्चे फिल्लौर के ही एक सरकारी स्कूल में पढ़ते थे.

एक ही गांव के होने की वजह से इन सभी का आपस में गहरा लगाव था. साथसाथ खेलना, साथसाथ खाना, साथसाथ पढ़ने जाना. लेकिन ज्योंज्यों इन की उम्र बढ़ती गई, त्योंत्यों इन के मन में तरहतरह के विचार पैदा होने लगे.

हनी के घर वालों की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, जबकि रमेश और राजन अच्छे परिवारों से थे. हनी के पिता हरबंसलाल की फिल्लौर बसअड्डे के पास फ्लाई ओवर के नीचे पंचर लगाने की छोटी सी दुकान थी. उसी दुकान की आमदनी से घर का खर्चा चलता था.

जबकि राजन और रमेश के पिता के पास खेती की अच्छीखासी जमीनों के अलावा उन का अपना बिजनैस भी था. इसलिए राजन तथा रमेश जेब खर्च के लिए घर से खूब पैसे लाते थे और स्कूल में अन्य दोस्तों के साथ खर्च करते थे.

शुरुआत में निशा हनी के साथ ज्यादा घूमाफिरा करती थी, पर बाद में उस का झुकाव रमेश की ओर से हो गया. धीरेधीरे हालात ऐसे बन गए कि इन चारों छात्रों के बीच 2 ग्रुप बन गए. एक ग्रुप में अकेला हनी रह गया था तो दूसरे में राजन, रमेश और निशा.

रमेश और निशा अब हर समय साथसाथ रहने लगे थे. दोनों के साथ राजन भी लगा रहता था. तीनों ही साथसाथ फिल्म देखने जाते. हनी को एक तरह से अलग कर दिया गया था. इस बात को हनी समझ रहा था. निशा ने हनी से मिलनाजुलना तो दूर, बात तक करना बंद कर दिया था.

एक दिन हनी ने फोन कर के निशा से कहा, ‘‘हैलो जानेमन, कैसी हो और इस समय क्या कर रही हो?’’

‘‘कौन…हनी?’’ निशा ने पूछा.

‘‘और कौन होगा, जो इस तरह तुम से बात करेगा. मैं हनी ही बोल रहा हूं.’’ हनी ने कहकहा लगाते हुए कहा, ‘‘अच्छा बताओ, तुम इस समय कहां हो? आज हमें पिक्चर देखने चलना है.’’

‘‘हनी, मैं तुम से कितनी बार कह चुकी हूं कि मुझे फोन कर के डिस्टर्ब मत किया करो. मैं तुम से कोई वास्ता नहीं रखती, फिर भी तुम मुझे परेशान करते हो. आखिर क्या बिगाड़ा है मैं ने तुम्हारा…?’’ निशा ने झुंझलाते हुए कहा.

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‘‘अरे डार्लिंग, परेशान मैं नहीं, तुम कर रही होे. आखिर तुम्हें मेरे साथ फोन पर दो बातें करने में इतनी तकलीफ क्यों होती है, जबकि दूसरे लड़कों के साथ आवारागर्दी करती रहती हो. तब तुम्हें कोई परेशानी नहीं होती.’’ हनी ने कहा तो उस की इन बातों से निशा खामोश हो गई. फिर उस ने हिम्मत जुटा कर कहा, ‘‘सुनो हनी, तुम जिन लड़कों की बात कर रहे हो, वे मेरे दोस्त हैं. अब तुम यह बताओ, मैं किसी के भी साथ घूमूंफिरूं, इस में तुम्हें क्या परेशानी है? यह मेरी मरजी है. मेरे दोस्त सभ्य परिवारों से हैं, समझे.’’

निशा की बात सुन कर हनी को गुस्सा तो बहुत आया, पर कुछ सोच कर उस ने अपने गुस्से पर काबू करते हुए कहा, ‘‘हां, सही कह रही हो. भला मैं कौन होता हूं. पर तुम शायद यह भूल गई कि तुम और तुम्हारे जो दोस्त हैं, वे मेरे ही गांव के हैं.’’

‘‘इस का मतलब तुम मुझे धमकी दे रहे हो?’’ निशा ने उत्तेजित हो कर कहा.

‘‘मैं तुम्हें कोई धमकी नहीं दे रहा. तुम ना जाने क्यों नाराज हो रही हो.’’ हनी ने कहा.

इस के बाद निशा थोड़ा नार्मल हुई तो हनी ने कहा, ‘‘अरे पगली, मुझे इस से कोई ऐतराज नहीं है. तुम किसी के साथ भी घूमोफिरो. मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि थोड़ा टाइम मुझे भी दे दिया करो. बात यह है कि आज मैं ने पिक्चर का प्रोग्राम बनाया है. तुम मेरे साथ पिक्चर देखने जालंधर चलो. मैं फिल्लौर बसअड्डे पर तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं.’’

‘‘ठीक है, मैं आ रही हूं, लेकिन आइंदा जो भी प्रोग्राम बनाना, मुझ से पूछ कर बनाना.’’ निशा ने कहा.

‘‘ओके जानेमन, मैं आइंदा से ध्यान रखूंगा. तुम टाइम पर बसअडडे आ जाना. बाकी बातें वहीं करेंगे.’’ हनी ने कहा.

निशा समझ गई कि हनी उसे ब्लैकमेल कर रहा है, इसलिए न चाहते हुए भी मजबूरी में उसे उस के साथ फिल्म देखने जाना पड़ा. इस के बाद यह नियम सा बन गया.

हनी जब भी निशा को बुलाता, न चाहते हुए भी उसे उस की बात माननी पड़ती. निशा जानती थी कि अगर उस ने उस की बात नहीं मानी तो इस का क्या परिणाम हो सकता है. क्योंकि हनी ने उस से स्पष्ट कह दिया था कि अगर उस ने उस की कोई बात नहीं मानी तो वह उस के और रमेश के संबंधों के बारे में उस के मातापिता से बता देगा.

उधर रमेश और उस के दोस्त को पता चल गया था कि निशा हनी के साथ घूमती है. यह बात उन्हें अच्छी नहीं लगी. इसलिए उन्होंने निशा को धमकी दी कि अगर उस ने हनी से बोलना बंद नहीं किया तो नतीजा ठीक नहीं होगा. निशा ने यह बात रमेश को नहीं बताई थी कि वह हनी के साथ अपनी मरजी से नहीं जाती, बल्कि यह उस की मजबूरी है.

निशा पेशोपेश में पड़ गई. वह जानती थी कि जिस दिन उस ने हनी से बोलना बंद किया, उसी दिन वह उस के मांबाप से उस की शिकायत कर देगा. लेकिन ऐसा कब तक चलता. एक न एक दिन इस बात का भांडा फूटना ही था.

यही सोच कर एक दिन निशा ने यह बात रमेश और राजन को बता दी कि हनी उसे किस तरह ब्लैकमेल कर रहा है. यह सुन कर रमेश और राजन का खून खौल उठा. उन्होंने उसी दिन हनी को रास्ते में घेर लिया. उन्होंने उसे धमकाते हुए कहा, ‘‘तुम निशा से दूर ही रहो, वरना यह तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा. तुम लापता हो जाओगे और तुम्हारे मांबाप तुम्हें ढूंढते रह जाएंगे.’’

दोनों की इस धमकी से उत्तेजित होने के बजाय हनी ने उन्हें समझाते हुए कहा, ‘‘देखो रमेश, हम सब दोस्त हैं और एक ही गांव के रहने वाले हैं. बचपन से साथसाथ खेलेकूदे हैं और पढ़ेलिखे हैं. अब यह बताओ कि तुम निशा के साथ बातें करते हो, घूमने जाते हो, मैं ने कभी बुरा माना तो फिर मेरे बात करने पर तुम्हें भी बुरा नहीं मानना चाहिए.’’

‘‘अच्छा तो पंक्चर लगाने वाले का बेटा मेरी बराबरी करेगा?’’ रमेश ने नफरत से यह बात कही. इस के बावजूद हनी ने मुसकराते हुए जवाब दिया, ‘‘रमेश बात हम लोगों के बीच की है, इसलिए इस में बड़ों को मत घसीटो.’’

बहरहाल, उस दिन तो मामला यहीं पर शांत हो गया. लेकिन हनी और रमेश के बीच कड़वाहट पैदा हो गई. आगे चल कर इस कड़वाहट का क्या नतीजा निकलेगा, कोई नहीं जानता था. हनी ने कुछ दिनों तक निशा से बात नहीं की.

7 जुलाई, 2017 को हनी ने निशा को फोन कर के मिलने के लिए कहा. इस बार निशा ने उस से मिलने से साफ मना कर दिया. हनी को गुस्सा आ गया. उस ने उसी दिन रमेश और निशा के प्रेमप्रसंग की बात निशा के पिता को बता दी.

बेटी की बदचलनी के बारे में जान कर मांबाप की नींद उड़ गई. निशा घर लौटी तो उन्होंने उसे डांटा. उस ने लाख सफाई दी, पर उन्होंने उस की बात पर विश्वास न करते हुए उसे घर में कैद कर दिया. यह बात जब रमेश और राजन को पता चली तो दोनों हनी के पास जा पहुंचे. दोनों पक्षों में काफी तूतूमैंमैं हुई और अंत में एकदूसरे को देख लेने की धमकी देते हुए अपनेअपने घर चले गए.

अगले दिन यानी 8 जुलाई, 2017 की शाम साढ़े 6 बजे हनी के पिता हरबंशलाल ने कहा, ‘‘जा बेटा, हवेली जा कर पशुओं के लिए चारा काट दे. पशु भूखे होंगे.’’

पिता के कहने पर हनी चारा काटने के लिए हवेली चला गया. चारा काटने का काम ज्यादा से ज्यादा एक घंटे का था. लेकिन जब हनी साढ़े 8 बजे तक घर नहीं लौटा तो हरबंशलाल को चिंता हुई. पहले तो उन्होंने अपने छोटे बेटे को हवेली जाने को कहा, फिर उसे रोक कर खुद ही उठ कर चल पड़े.

वहां हनी नहीं दिखा. उस ने चारा काट कर पशुओं को डाल दिया था. चारा काटने के बाद वह कहां चला गया, वह इस बात पर विचार करने लगे. उन्हें लगा ऐसा तो नहीं कि वह घर चला गया हो. वह घर लौट आए.

पर हनी घर नहीं आया था. उन्होंने उसे इधरउधर देखा, लेकिन वह कहीं दिखाई नहीं दिया. अब तब तक रात के 10 बज चुके थे. हनी के मातापिता के अलावा गांव के अन्य लोग भी रात के 1 बजे तक उसे गांव और आसपास ढूंढते रहे. पर हनी का कहीं पता नहीं चला. थकहार कर सब सो गए.

अगले दिन सुबह जब हनी के दोस्तों रमेश, राजन आदि को उस के गायब होने का पता चला तो सभी हनी के घर जमा हो गए. वे सब भी उसे खोजने लगे.

अगले दिन सुबह गांव का ही ओंकार सिंह अपने खेतों पर गया तो उस के खेत के दूसरे छोर पर नहर के पास एक जगह किसी आदमी का कटा हुआ कान पड़ा दिखाई दिया. वहीं पर काफी मात्रा में खून बिखरा था. खून देख कर ओंकार सिंह सोच रहा था कि यह सब वह किस ने किया होगा, तभी हरबंशलाल, रमेश, राजन तथा अन्य लोग हनी को तलाशते हुए वहां पहुंच गए.

कान और खून वाली जगह उन्होंने भी देखी, पर एक अकेले कान को देख कर कुछ कहा नहीं जा सकता था कि कान किस का होगा. खेत में कुछ दूरी पर खून से सनी एक चप्पल देख कर हरबंशलाल के मुंह से चीख निकल गई. वह कान को भले ही नहीं पहचान पाए थे, पर वह चप्पल उन के बेटे हनी की थी. कुछ दिनों पहले ही उन्होंने खुद वह चप्पल हनी को खरीद कर दी थी.

कान वाली जगह से खून टपकता हुआ खेत के बाहर तक गया था. सभी ने टपकते खून का पीछा किया तो वह नहर के किनारे तक टपका हुआ मिला. अनुमान लगाया गया कि मरने वाला जो भी था, उस की हत्या करने के बाद लाश को ले जा कर नहर में फेंक दिया गया था.

कुछ लोग गोताखोरों को बुलाने चले गए तो कुछ लोग पुलिस को सूचना देने थाने चले गए. पर गोताखोर और पुलिस आती, उस के पहले ही अपनी दोस्ती का फर्ज निभाते हुए रमेश और राजन नहर में कूद गए और लाश ढूंढने लगे.

सूचना मिलने पर थाना फिल्लौर के थानाप्रभारी राजीव कुमार अपनी टीम के साथ नहर पर पहुंच गए. गोताखोर भी आ कर नहर में लाश ढूंढने लगे. कुछ देर बाद गोताखोर नहर से लाश निकाल कर बाहर आ गए. लाश देख कर हरबंशलाल पछाड़ खा कर गिर गए. क्योंकि वह लाश और किसी की नहीं, उन के बेटे हनी की थी.

थानाप्रभारी ने लाश मिलने की सूचना अधिकारियों को दे दी. सूचना पा कर डीएसपी (फिल्लौर) बलविंदर इकबाल सिंह, सीआईए इंचार्ज हरिंदर गिल भी मौके पर पहुंच गए. लाश का मुआयना करने पर उस का एक कान गायब मिला. गरदन भी पूरी तरह कटी हुई थी. वह सिर्फ खाल से जुड़ी थी.

लाश व कान को बरामद कर पुलिस काररवाई में जुट गई. खेत से खूनआलूदा मिट्टी भी अपने कब्जे में ले कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. पुलिस ने हरबंशलाल की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201, 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी.

15 साल के हनी की हत्या के विरोध में लोगों ने बाजार बंद कर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. सूरक्षा की दृष्टि से एसपी (जालंधर) बलकार सिंह ने फिल्लौर और शाहपुर में भारी मात्रा में पुलिस तैनात कर दिया. इस के अलावा एसपी ने लोगों को आश्वासन दिया कि जल्द ही केस का खुलासा कर अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

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उन के आश्वासन के बाद लोग शांत हुए. एसपी बलकार सिंह ने डीएसपी गुरमीत सिंह और डीएसपी बलविंदर इकबाल सिंह की अगुवाई में पुलिस टीमों का गठन किया, जिस में सीआईए इंचार्ज हरिंदर गिल, एसआई ज्ञान सिंह, एएसआई लखविंदर सिंह, परमजीत सिंह, हंसराज सिंह, हवलदार राजिंदर कुमार, निशान सिंह, प्रेमचंद और सिपाही जसविंदर कुमार को शामिल किया गया.

पुलिस ने सब से पहले मृतक हनी के यारदोस्तों से पूछताछ की. इस में निशा को ले कर रमेश और राजन की नाराजगी वाली बातें निकल कर सामने आईं. यह बात भी सामने आई कि इस हत्या से एक दिन पहले रमेश और हनी के बीच जम कर कहासुनी हुई थी.

संदेह के आधार पर पुलिस ने रमेश को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया. पर उस की हिमायत में लगभग पूरा गांव थाने पहुंच गया. दबाव बढने पर पुलिस को तफ्तीश बीच में छोड़ कर उसे घर भेजना पड़ा.

हरबंशलाल ने अपने बयान में बताया था कि रात को जिस समय वह उसे तलाश रहे थे, उन्होंने अपने फोन से हनी को कई बार फोन किया था, पर हर बार फोन बंद मिला था. थानाप्रभारी राजीव कुमार ने हनी के फोन नंबर की काल डिटेल्स निकलवा कर चेक की तो उस में अंतिम फोन रमेश के फोन से गई थी.

रमेश के अलावा 4 नंबर और भी थे. डीएसपी गुरमीत सिंह ने राजन, रमेश सहित उन चारों लड़कों को उठवा लिया. इस बार थाने के बजाय उन्हें किसी अन्य जगह ले जाया गया. वहां हनी की हत्या के संबंध में पूछताछ की गई तो रमेश अधिक देर तक नहीं टिक सका. उस ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए हनी की हत्या की जो सनसनीखेज कहानी सुनाई, उसे सुन कर सभी सन्न रह गए.

रमेश और हनी के बीच निशा को ले कर खींचातानी चल रही थी. निशा और रमेश, दोनों के दिलों में इस बात को ले कर एक डर बैठा हुआ था कि हनी कभी भी उन की पोल गांव वालों या निशा के मांबाप के सामने खोल सकता है. ऐसा ही हुआ भी. हनी ने 7 जुलाई को जब निशा के घर वालों को निशा और रमेश के संबंधों की बात बता दी तो रमेश यह सहन नहीं कर सका.

रमेश ने उसी समय राजन के साथ मिल कर हनी को रास्ते से हटाने की योजना बना डाली. निशा को समझा कर उसे घर भेजते समय रमेश ने कहा, ‘‘तू चिंता मत कर, जल्द ही हनी की दर्दनाक चीखों की आवाज तेरे कानों को सुनाई देगी.’’

और फिर उसी शाम वह अपना फोन निशा के घर जा कर जबरदस्ती उसे दे आया. निशा की मां ने उस समय उसे बहुत डांटा था, पर वह वहां से भाग गया था. रमेश और राजन यह बात अच्छी तरह जानते थे कि हनी शाम को किस समय हवेली में चारा लेने जाता है.

दोनों दातर (दरांती) ले कर 8 जुलाई को हनी के पीछेपीछे पहुंच गए. हनी शाम 8 बजे जैसे ही हवेली से  घर जाने के लिए निकला दोनों ने उस का रास्ता रोक कर दोस्ताना लहजे में  कहा, ‘‘सौरी यार हनी, बेवजह तेरे साथ गरमागरमी कर ली, यार हमें माफ कर दे. हमें निशा से बात करने में कोई ऐतराज नहीं. तू कहे तो अभी के अभी तेरी निशा से बात करा दूं.’’

बात करतेकरते दोनों हनी को खेतों की तरफ ले गए. चलते हुए रमेश ने अपने उस फोन का नंबर मिलाया, जो वह निशा को दे आया था. उधर से जब निशा ने फोन उठाया तो रमेश ने कहा, ‘‘निशा, लो अपने पुराने साथी से बात करो.’’

हनी फोन अपने कान से लगा कर निशा से बातें करने लगा, तभी रमेश ने पीछे से दातर का एक भरपूर बार हनी के उस कान पर किया, जिस पर उस ने फोन लगा रखा था. एक ही वार में हनी का कान कट कर दूर जा गिरा और उस के मुंह से एक जोरदार चीख निकली.

इस के बाद रमेश और राजन ने यह कहते हुए हनी पर लगातार वार करने शुरू कर दिए कि ‘‘साले और कर निशा से बात.’’

हनी कटे हुए पेड़ की तरह जमीन पर गिर गया. कुछ ही देर में उस की मौत हो गई. हनी की हत्या कर के राजन और रमेश ने उस की लाश को घसीट कर पास वाली नहर में फेंक दिया और अपनेअपने घर चले गए.

पुलिस ने 11 जुलाई, 2017 को रमेश और राजन को हनी की हत्या के अपराध में गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया. रमेश की उम्र 17 साल और राजन की उम्र 15 साल थी. अब यह अदालत तय करेगी कि उन पर काररवाई कोर्ट में चलेगी या बाल न्यायालय में.

रिमांड के बीच पुलिस ने वह दातर बरामद कर लिया था, जिस से हनी की हत्या की गई थी. इस के बाद पुलिस ने रमेश और राजन को बाल न्यायालय में पेश कर बालसुधार गृह भेज दिया.

पुलिस ने पूछताछ के लिए निशा को भी थाने बुलाया था कि इस अपराध में उस की भी तो कोई भूमिका नहीं है? पर थाने आते ही वह डर के मारे बेहोश हो गई. पुलिस ने उसे अस्पताल में भरती कराया. उस की हालत में सुधार होने पर उस से पूछताछ की गई, पर वह बेकुसूर थी, इसलिए उसे घर भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में रमेश, राजन तथा निशा बदले हुए नाम हैं.

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यह अभिनेत्री लोगों को अपने हुस्न के जाल में फंसाती थी और फिर…

‘शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, दाना डालेगा मगर उस में फंसना नहीं’. आमतौर पर यह है तो एक कहावत ही पर कुछ ऐसा ही करती थी गुजरात की एक मौडल और गुजाराती अलबम में काम करने वाली अभिनेत्री संजना उर्फ संजू, जिस के फेंके जाल में लोग आसानी से फंस जाते थे.

जाल में फंसाती थी

छरहरी बदन और नायाब हुस्न वाली संजना यह बात अच्छी तरह जानती थी कि वे उन मर्दों को अपने हुस्न के जाल में आसानी से फंसा सकती है, जिन्हें शराब के बाद शबाब की दरकार होती है. इस अभिनेत्री की जद में या तो धन्नासेठ होते थे या फिर नवाबजादे.

‘वंस मोर बेवफा’ और ‘जानू दगाबाज’ जैसी गुजराती अलबम में काम करने वाली इस अभिनेत्री को गुजरात के अहमदाबाद में पुलिस ने गिरफ्तार किया तो कई सनसनीखेज खुलासे हुए.

दो पल का मजा और…

आरोप है कि यह अभिनेत्री पहले एक डांस शो आयोजित करती थी. डांस शो की जानकारी कुछ ही लोगों को होती थी. वहां नशे में ‘मस्ती’ की खुराक दी जाती थी, जिस में मदमस्त हो कर अमीरजादे इस अभिनेत्री के साथ हमबिस्तर होने को बेताब हो जाते थे. फिर शुरू हो जाता था एक खतरनाक खेल, जिस में गोते लगा रहा शख्स इस बात से अनजान ही रहता कि कमरे में उन दोनों के अलावा एक और शख्स मौजूद है जो तीसरी आंख यानी कैमरे से वीडियो बनाने और तसवीरें कैद करने मेंं लगा रहता.

बहुतों को बनाया निशाना

बाद में दोनों मिल कर लोगों को ब्लैकमेल करते और बदले में मोटी रकम वसूलते. लड़की चूंकि निहायत ही खूबसूरत हुस्न की मलिका थी और अभिनेत्री व मौडल, लिहाजा शराब और शबाब के शौकीनों के लिए वहां जन्नत सा माहौल होता होगा, इस में शक नहीं.

रास न आया परिवार

पुलिस पूछताछ में जो बात सामने आई वह भी हैरान करने वाली है. इस अभिनेत्री की पहले शादी हो चुकी थी. पति अच्छा खाताकमाता था. कुछ समय बाद बेरोजगार हो गया तो अभिनेत्री के सपने धराशाई होते दिखे. वह पति से अलग रहने लगी और मोइन नाम के एक शख्स के संपर्क में आई.

अपराधी का साथ

मोइन एक अपराधी किस्म का व्यक्ति था, जिस के साथ मिल कर अभिनेत्री ने नया खेल खेलने की सोची. मोइन ग्राहक फंसाता था और उसी को घास डालता था जो धन्नासेठ, इज्जतदार, रईसजादे तो हो पर शराब और शबाब का शौकीनदार भी हो.

पुलिस ने कुछ यों बिछाया जाल

कुछ लोग लुटेपिटे तो पुलिस को कई शिकायतें मिलीं. लिहाजा, पुलिस ने भी अपना जाल बिछाया और इस अभिनेत्री को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिसिया दबिश से मोइन भी नहीं बच पाया और वह भी जल्द ही गिरफ्तार हो गया.

फिलहाल, पुलिस तफ्तीश कर रही है कि इस हमाम में कितने लोग नंगे हुए और कितने लुटेपिटे.

चैन से रहने के लिए सावधान रहिए

* अनजान महिला से दूर रहें और सैक्स संबंध उस से न बनाएं जिन्हें आप नहीं जानते.

* शराब व नशे से दूर रहें.

* दलालों के चक्कर में पडऩे से बचें.

* सैक्स संबंध तब तक अपराध नहीं है जब यह सहमति से किया गया हो और दोनों बालिक हों.

देखिए ‘बदनाम मुन्नी’ के जबरदस्त ठुमके

बौलिवुड एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा डांस और फिटनेस अपने स्टाइल के लिए काफी मशहूर हैं. मलाइका अरोड़ा ने जब भी किसी फिल्म आइटम सौन्ग किया है तो फिल्म बेशक चले न चले लेकिन उनका डांस सुपरहिट रहा है.

आपको बता दें, हाल ही में मलाइका अरोड़ा ने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर एक बदलाव किया है, उन्होंने खान सरनेम को हटा दिया. मलाइका अरोड़ा ने ऐसा अरबाज खान से तलाक के एक साल बाद किया है. लेकिन इसी बीच है. मलाइका अरोड़ा का ‘इंडियाज गौट टैलेंट’ का एक वीडियो वायरल हो रहा है.

 

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इस वीडियो में डांस की मल्लिका मलाइका अरोड़ा ‘दिलबर’  सौन्ग पर जमकर थिरक रही हैं. मलाइका अरोड़ा इस गाने पर ऐसा कमाल का डांस कर रही हैं कि जज करण जौहर उन्हें एकटक देखते ही रह जाते हैं. मलाइका अरोड़ा का ये अंदाज काफी पसंद किया जा रहा है. इस वीडियो को लगभग 72 हजार से ज्यादा बार देखा जा चुका है.

भोजपुरी फिल्‍म ‘दबंग सरकार’ के लिए अक्षरा सिंह ने दी शुभकामनाएं

भोजपुरी एक्टर खेसारीलाल यादव की फिल्‍म ‘दबंग सरकार’ 30 नवंबर को रिलीज हुई. आपको बता दें, भोजपुरी इंडस्‍ट्री के दूसरे स्‍टार भी दर्शकों से इस फिल्‍म को देखने की अपील कर रहे हैं. इनमें एक नाम भोजपुरी की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्री अक्षरा सिंह का भी शामिल हो गया है.

अक्षरा ने  खेसारीलाल यादव की फिल्‍म ‘दबंग सरकार’ की सफलता की कामना की है और कहा कि मुझे समय मिला तो उनकी फिल्‍म जरूर देखने जाउंगी. इस फिल्‍म के साथ मेरी बेस्‍ट विशेज हैं. अक्षरा सिंह इन दिनों अपनी फिल्‍म की शूटिंग में व्‍यस्‍त हैं. रिपोर्टस के अनुसार अक्षरा ने कहा कि हर किसी की फिल्‍में चलने चाहिए, चाहे वो नए कलाकारा हों या सुपरस्‍टार. इससे हमारी इंडस्‍ट्री ग्रो करेगी, जो सबों के लिए अच्‍छा है.

बता दें कि ‘दबंग सरकार’ को भोजपुरी सिनेमा की सबसे महंगी फिल्‍म बताई जा रही है. ‘दबंग सरकार’ के निर्माता दीपक कुमार और राहुल वोहरा हैं और निर्देशक योगेश राज मिश्रा हैं. फिल्‍म में भोजपुरी के सुपर स्‍टार खेसारीलाल यादव पुलिस औफिसर की भूमिका में नजर आ रहे हैं.

जेल भेजे गए राजपाल यादव, जानिए क्यों

बौलीवुड के कौमेडी किंग राजपाल यादव आजकल एक मुश्किल में फंसें हुए हैं, जिसके लिए उन्हें जेल जाना होगा. ये मामला एक चेक बाउंस का है, जिसमें कोर्ट के सामने समझौते की रकम ना दे पाने की वजह से दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को तीन महीने जेल की सजा सुनाई है.

दरअसल मामला ये है कि इंदौर निवासी सुरेन्द्र सिंह से राजपाल यादव ने पांच लाख रुपये उधार लिए थे. इस रकम की वापसी के लिए राजपाल से सुरेन्द्र को 5 लाख का एक एक्सिस बैंक का चेक दिया. खाते में पर्याप्त बैलेंस ना होने के कारण सितंबर 2015 में चेक बाउंस हुआ. इसके बाद सुरेन्द्र ने अपने वकील के माध्यम से राजपाल को कानूनी नोटिस भेजा. इसके बाद भी राजपाल ने जवाब में परिवादी को भुगतान नहीं किया. इस पर सुरेन्द्र ने राजपाल के खिलाफ जिला कोर्ट में परिवाद दायर कर दिया.

आपको बता दें हाल ही में आई निर्देशक शैलेन्द्र सिंह राजपूत की फिल्म ‘इंग्लिश की टांय टांय फिस्स’ में राजपाल यादव, दर्शकों को अपनी जबर्दस्त कौमेडी का फुल डोज देते हुए नजर आएंगे.

छेड़छाड़ एक सामाजिक रोग

साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली मनीषा शाह होनहार छात्रा थी. वह डाक्टर बनने का सपना देखती थी. अपने इस सपने को पूरा करने के लिए वह कड़ी मेहनत से पढ़ाई करती थी. गरीबी उस की राह में बाधा नहीं बनी. उस के इंटरमीडिएट में अच्छे मार्क्स आए, जिस से उस के हौसलों में इजाफा हो गया, लेकिन एक ही झटके में उस का सपना तिनकातिनका हो गया. बिस्तर पर अब उस की जिंदगी दूसरों के सहारे की मुहताज हो चुकी है. पढ़ाई की बात करने पर उस की आंखों से आंसू छलक आते हैं. परिवार के साथ गरीबी पूरी बेरहमी से पेश आ रही है.

बमुश्किल दो वक्त की रोटी और उन दवाओं का इंतजाम हो पाता है, जो मनीषा को जिंदा रखने के लिए जरूरी हैं. सभी की कोशिश मनीषा की जिंदगी बचाने की है. वक्त के साथ मनीषा को दर्द के दरिया से नजात मिल कर सब ठीक भी हो जाए, लेकिन वह टीस कभी नहीं जाएगी जो एक शोहदे ने उसे दी. वह सभ्य समाज में उस छेड़छाड़ का शिकार हुई जो युवाओं के लिए फैशन बन गया है.

यह कोढ़ग्रस्त इंसानियत की हकीकत है कि हर मिनट कोई न कोई युवती या महिला किसी न किसी कुंठित मानसिकता के हैवान का खुलेआम शिकार हो रही है. बेटियों की सुरक्षा को ले कर चिंता अभिभावकों की भी स्थायी फिक्र बन चुकी है. हकीकत के नैतिक पतन रूपी इस आईने से रूबरू और जागरूक के लिए कोई बुलंद आवाज नहीं उठती. नतीजतन, इस रोग का दायरा बढ़ता जा रहा है.

दरअसल, मनीषा मौडर्न शहर का लिबास पहने दिल्ली से सटे नोएडा के मोरना गांव की रहने वाली है. उस के इलैक्ट्रीशियन पिता दिहाड़ी पर काम करते हैं. इस परिवार की पूरी दुनिया महज एक कमरे में सिमटी हुई है.

बचपन से ही गरीबी का सामना करने वाली मनीषा पढ़लिख कर परिवार का सहारा बनना चाहती है. हौसलों को वक्त के साथ वह पंख भी दे रही थी. गांव के 2 युवक मनीषा को परेशान करते थे और वह उन का विरोध करती थी. 19 मई की रात जब वह घर की छत पर थी, तो उन शरारती युवकों ने वहां पहुंच कर उस के साथ छेड़छाड़ कर दी.

उस ने विरोध किया, तो उन्होंने उसे छत से धक्का दे दिया, जिस से मनीषा के सिर, कमर व शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं. सिर पर लगी गहरी चोट से उस का दिमागी संतुलन गड़बड़ा गया, जिस की वजह से कभीकभी वह खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाती. अस्पताल का खर्च ज्यादा था लिहाजा, छुट्टी करा कर मनीषा को घर में रखा गया, लेकिन इलाज जारी रहा. बेटी के इलाज में पिता कर्जदार हो चुके हैं. सीबीएसई बोर्ड की इंटरमीडिएट की परीक्षा में 94 प्रतिशत मार्क्स लाने वाली मनीषा इलाज और हौसले से शायद उन बुलंदियों को छू सके जिन का कभी उस ने ख्वाब देखा था. हालांकि आरोपी युवकों को पुलिस जेल भेज चुकी है.

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तमाशबीन जनता

छेड़छाड़ की घटना की मनीषा इकलौती शिकार हो, ऐसा नहीं है. समाज में ऐसी घटनाओं का दायरा बढ़ता जा रहा है. युवतियां और महिलाएं छेड़छाड़ की शिकार हो रही हैं. कामकाजी महिलाएं व छात्राएं आएदिन इस कड़वी हकीकत से दोचार होती हैं.

छेड़छाड़ करने वालों के हौसले इतने बुलंद हैं कि न उन्हें समाज का डर होता है न कानून का. समाज तमाशा देखने का आदी हो चुका है और कानून अपराध होने पर ही अपना काम करता है. वह भी तब, जब बात हद से पार हो जाए.

इलाहाबाद की रहने वाली छात्रा रीना को स्कूल जाने से अब डर लगता है. उस के मातापिता हर वक्त बेटी को ले कर चिंतित रहते हैं, क्योंकि उन का एक ऐसी घटना से सामना हुआ, जिस ने उन की चिंता को और भी बढ़ा दिया. रीना को स्कूल आतेजाते कुछ शरारती युवक परेशान करते थे. पहले उस ने यह सब नजरअंदाज किया, लेकिन जब उन की हरकतें ज्यादा बढ़ गईं तो उस ने अपने पिता को सारी बातें बताईं. उन्होंने 3 युवकों की शिकायत पुलिस से की, लेकिन जब उन युवको को इस का पता चला, तो वे बौखला गए और उन्होंने रीना के घर पहुंच कर धावा बोल दिया. गालीगलौज करते हुए उसे जान से मारने की भी धमकी दी. बाद में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, लेकिन रीना के मन में एक अनजाना भय स्थायी रूप से घरघर गया है.

छेड़छाड़ की शिकार युवतियों को अकसर मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है, जिस के चलते यह अपमान और खतरा बरदाश्त से बाहर हो जाता है और वे घातक कदम भी उठा लेती हैं.

सहारनपुर जिले के सीकरी की रहने वाली 11वीं की एक छात्रा को 2 युवक अकसर परेशान करते थे. उस के विरोध के बावजूद युवकों की छेड़छाड़ बढ़ती गई. उस ने पिता से उन की शिकायत की, तो उन्होंने युवकों को अपनी हरकतों से बाज आने की सख्त चेतावनी दी. कुछ दिन तो सब ठीक रहा, लेकिन युवक फिर से अपनी हरकतों पर उतर आए.

उन की छेड़छाड़ से वह युवती इतनी परेशान हो गई कि एक दिन उस ने अपने घर में ही फांसी का फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली. समाज में छेड़छाड़ से परेशान युवतियों द्वारा इस तरह के घातक कदम उठाने के मामलों का ग्राफ बढ़ रहा है. हालांकि, हिम्मत हारने के बजाय युवतियों को हालात का जम कर मुकाबला करना चाहिए.

मजबूरी की मार

बहुत से मामलों में युवतियां छेड़छाड़ सहने को मजबूर होती हैं. मुसीबत की वजह से वे कई बार खुल कर विरोध नहीं कर पातीं. दबंग व बुलंद हौसले वाले शरारती तत्त्व उन्हें तरहतरह से परेशान करते हैं. ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति और भी भयावह है. दबंग चाहते हैं कि युवतियां उन की छेड़छाड़ को बरदाश्त करें. उन की बात न मानने या विरोध करने पर नौबत मारपीट या हिंसा तक आ जाती है.

पीलीभीत जिले के मल्लपुर गांव की एक 13 वर्षीय किशोरी शाम को नल पर पानी भरने गई. तो एक दबंग ने उस के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी. वह खींच कर उसे पास के एक कमरे में ले गया. किशोरी ने जब इस की शिकायत अपने परिवार से करने की धमकी दी, तो वह हिंसक हो गया और उस पर उस ने मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी. जलती हालत में वह चीखते हुए भागी और बाहर आ कर गिर गई. लोगों ने मुश्किल से आग बुझा कर उसे अस्पताल पहुंचाया. बाद में पुलिस ने उस दबंग को गिरफ्तार कर लिया.

किस राह किस के साथ छेड़छाड़ हो जाए इसे कोई नहीं जानता. सहारनपुर जिले में एक भिखारी महिला के साथ भी एक युवक ने छेड़छाड़ कर दी. महिला के विरोध के बाद युवक को पुलिस के हवाले कर दिया गया. छेड़छाड़ के मामलों में आरोपी अंजाम भुगतने तक की धमकियां देते हैं.

ऐसे मामलों में पीडि़ता यदि पुलिस के पास जाती है, तो उसे कई बार बदनामी का डर दिखाया जाता है. कितने ही मामले ऐसे होते हैं जिन्हें पुलिस गंभीरता से नहीं लेती और आरोपी को सिर्फ चेतावनी दे कर छोड़ देती है. वह फिर कभी किसी के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा, इस की कोई गारंटी नहीं होती.

अमूमन छेड़छाड़ करने वाले पुलिस के इस लचीले रवैए का फायदा उठाते हैं. लोगों की भी यह प्रवृत्ति बन गई है कि यदि किसी सार्वजनिक स्थल पर किसी के साथ छेड़छाड़ हो रही हो, तो वे दखल देने से गुरेज करते हैं. घर, स्कूल, दफ्तर या बाजार आतेजाते महिलाओं व युवतियों के मन में छेड़छाड़ का डर बना ही रहता है. छेड़छाड़ किसी सभ्य समाज की पहचान नहीं हो सकती. यह न सिर्फ किसी युवती के लिए बल्कि समाज के लिए भी बड़ी फिक्र होनी चाहिए.

एक तरह का मनोरोग

महिलाएं व युवतियां अकसर सब से अधिक सार्वजनिक स्थलों पर छेड़छाड़ का शिकार होती हैं. किसी को छू कर निकलना, पीछा करना, सीटी बजाना, सांकेतिक टिप्पणी करना या अश्लील इशारा करना इसी श्रेणी में आता है. इस की शिकार महिलाएं कई बार इसे नजरअंदाज करने की कोशिश करती हैं. विरोध करने पर ऐसा करने वाले अकसर सरल तरीका खोजते हैं. कई बार वे शिकार महिला को ही झूठा साबित करने पर अड़ जाते हैं. तमाशबीन लोग पचड़े में नहीं पड़ना चाहते. उन की यह सोच छेड़छाड़ करने वालों को हिम्मत देती है.

चिकित्सकों की राय में महिलाओं पर बुरी नजर रखने और उन से छेड़छाड़ करने वाले वास्तव में एक तरह के मानसिक रोग से पीडि़त होते हैं. ऐसी विकृत मानसिकता के लोगों के दिमाग में कुछ गलत विचार चल रहे होते हैं. किसी भी विपरीतलिंगी को देख कर गलत विचारों की शृंखला और बढ़ जाती है. मौका लगते ही वे छोटीबड़ी हरकत करते हैं. यदि कोई विरोध करता है, तो अनजान बनने का नाटक करते हैं. पीडि़ता यदि कमजोर हो, तो वह कुंठित हो कर घातक कदम उठाने से भी नहीं चूकते.

क्या कहता है कानून

छेड़छाड़ को ले कर कानून बेहद सख्त है और समयसमय पर उस में बदलाव भी किया गया है. बावजूद इस के छेड़छाड़ का मर्ज समाज में बढ़ रहा है.

अधिवक्ता राजेश द्विवेदी बताते हैं कि पहले छेड़छाड़ के मामले में अधिकतम 2 साल की कैद की सजा का प्रावधान था, लेकिन निर्भया कांड के बाद कानून में हुए बदलाव के बाद अब छेड़छाड़ के मामले में अपराध की गंभीरता के हिसाब से व्याख्या की गई है. अलगअलग सैक्शन में सजा का प्रावधान भी अलग हैं. दोषी को 1 से ले कर 7 साल तक की सजा हो सकती है. इतना ही नहीं, धारा 354 व उस के सैक्शन के अंतर्गत आने वाले इस अपराध को गैर जमानती अपराध माना गया है.

कानून के तहत किसी महिला को गलत मंशा से छेड़ना, आपत्तिजनक इशारा करना, मरजी के खिलाफ पौर्न दिखाना, जबरन किसी के कपड़े उतारना, उसे उकसाना, किसी का आपत्तिजनक फोटो लेना, उन्हें बांटना, किसी का पीछा करना या जबरन बात करने का प्रयास करना अपराध है. ऐसे में कोई भी महिला शिकायत दर्ज करा सकती है.

छेड़छाड़ के मामलों को ले कर अदालतें भी गंभीर रहती हैं. एक मामले में कोर्ट की यह टिप्पणी कथित सभ्य समाज को आईना दिखाने के लिए काफी है, जिस में कहा गया कि किसी महिला के साथ छेड़छाड़ या उस का पीछा करना उस के जीने के अधिकार का उल्लंघन है. पुलिस महिलाओं को ऐसा सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराए कि वे कहीं भी बेखौफ आजा सकें.

महिला आईपीएस मंजिल सैनी कहती हैं कि छेड़छाड़ के मामले में पीड़िता को तुरंत पुलिस की मदद लेनी चाहिए.

किराएदार : प्यारा या आफत

छोटा शहर और बड़ा मकान. सासससुर रहे नहीं और दोनों बच्चे बाहर चले गए. बेटी अपनी ससुराल और बेटा आगे की पढ़ाई करने के लिए किसी दूसरे शहर या देश. पूरा घर सायंसायं करता है. और तो और घर की ठीक से साफसफाई भी नहीं हो पाती. रिटायरमैंट में अभी 5 साल बाकी हैं. इतने बड़े घर में रहते हुए सरोज को बड़ा अकेलापन महसूस होता था. दोनों पतिपत्नी आखिर करें तो क्या करें. दोनों हिस्सों के बीच पार्टीशन करवा लिया ताकि दोनों परिवारों की प्राइवेसी बनी रहे. घर के बाहर टू-लेट का बोर्ड टांगते ही किराएदारों की लाइन लग गई.

राजेश और सीमा भी मकान देखने आए थे. मकान तो खैर सभी को पहली ही नजर में पसंद आ जाता था मगर यह परिवार सरोज को भी पसंद आ गया था. खासकर सीमा की 8 माह की बिटिया ने सरोज को अपने मोहपाश में बांध लिया था. सबकुछ तय हो जाने के बाद 11 महीने के किराएनामे पर दोनों तरफ से हस्ताक्षर हुए और 4 दिन बाद ही राजेश अपनी छोटी सी फैमिली के साथ घर में पहले किराएदार के रूप में शिफ्ट हो गया.

सरोज की यों भी किसी के फटे में टांग अड़ाने की आदत नहीं थी, इसलिए सबकुछ बहुत सही चल रहा था. सीमा की तरफ से आती उस की बिटिया की किलकारी से घर में रौनक होने लगी. घर भी साफसुथरा रहने लगा और सब से बड़ी बात कि सरोज को कभीकभार दुलारने के लिए एक नन्ही साथी मिल गई थी.

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संबंधों का बेजा इस्तेमाल

एक दिन जैसे ही सरोज औफिस से आई, दरवाजे पर दस्तक हुई. देखा तो सीमा खड़ी थी अपनी बिटिया के साथ. ‘‘आंटी, मैं जरा बाजार तक हो कर आती हूं, आप प्लीज पीहू को रख लेंगी?’’

हालांकि सरोज का मन नहीं था, वह थकी होने के कारण आराम से बैठ कर पति के साथ चाय पीने के मूड में थी मगर शिष्टाचारवश मना नहीं कर सकी और पीहू को गोद में ले लिया. सरोज की पूरी शाम पीहू को संभालने में बीत गई. कहीं उस ने पानी बिखेरा तो कहीं शूशू किया. उस के चक्कर में सरोज रात का खाना भी नहीं बना सकी जिस से पति नाराज हुए सो अलग.

इस के बाद तो अकसर ही सीमा पीहू को उन्हें थमा कर सैरसपाटे पर, कभी पिक्चर तो कभी बाजार और सहेलियों के यहां जाने लगी. सरोज सीधीसादी महिला थी, कुछ कह नहीं सकी और किराएनामे के अनुसार, 11 महीने से पहले मकान खाली भी नहीं करवा सकती थी. धीरेधीरे सरोज को सीमा से मन ही मन डर लगने लगा. जब भी दरवाजे पर दस्तक होती, वह सहम उठती कि कहीं सीमा पीहू को न थमा दे. किराएदार सरोज के गले की हड्डी बन गए जिसे न उगलते बन रहा था, न निगलते.

लक्ष्मी की कहानी भी कोई अलग नहीं थी, पति के रिटायरमैंट के बाद अतिरिक्त आमदनी के विकल्प में उन्होंने अपने घर के 2 कमरे किराए पर दे दिए. उन्होंने कालेज स्टूडैंट्स को किराएदार के रूप में चुना ताकि मकान खाली करवाने में ज्यादा दिक्कत न आए. मगर देर रात तक आने वाली तेज म्यूजिक की आवाज ने उन की रातों की नींद हराम कर दी. आएदिन लड़के पार्टियां करते थे. कभीकभी शराबकबाब भी चलता था. और तो और, किराया भी टाइम पर नहीं मिलता था. ऐसे में उन्हें अपने फैसले पर पछतावा हो रहा था.

किराएदार सलमा का अनुभव तो सब से ही अलग था. हुआ यों कि सबकुछ देखभाल कर उस ने अपना खाली पड़ा मकान किराए पर दे दिया और खुद बेटे के पास रहने दिल्ली चली गई. किराया हर 6 माह का एडवांस देने की बात तय हुई थी. पहली छमाही के बाद जब वह अपने शहर किराया लेने और मकान को संभालने के उद्देश्य से गई तो किराएदार ने उन्हें यह कहते हुए खाली हाथ लौटा दिया कि मकान में काफी टूटफूट थी. मरम्मत और रंगरोगन करवाने में सारा किराया ऐडजस्ट हो गया. सलमा से कुछ भी कहते नहीं बना. उस ने अगले 6 महीने में उन्हें मकान खाली करवाने का नोटिस देने में ही भलाई समझी.

मगर ऐसा हमेशा नहीं होता कि किराएदार आफत का पिटारा ही होते हों. कई बार ये बहुत प्यारे भी होते हैं. मीनल कभी सावित्री देवी की किराएदार रही थीं. आज भी उन का रिश्ता फोन के माध्यम से जुड़ा हुआ है. मीनल ने एक बहू की तरह उन का खयाल रखा था तो सावित्री ने भी उसे नासमझ उम्र में बच्चे पालने सिखाए थे. मीनल के बच्चे आज भी उन्हें दादी कहते हैं.

सामंजस्य जरूरी

मीना बरसों से अपने मकान में पेइंग गेस्ट रखती आई है. वह सिर्फ कामकाजी महिलाओं और लड़कियों को ही रखती है. अपने उसूलों की पक्की मीना किराएनामे के नियमों में जरा भी लापरवाही या ढील बरदाश्त नहीं करती. साथ ही, वह अपनी तरफ से भी किसी को शिकायत का मौका नहीं देती. न तो किसी को ज्यादा मुंह लगाती है और न ही किसी को नजरअंदाज करती है. इसी का नतीजा है कि बरसों बाद भी जब वे किराएदार उस शहर में आती हैं तो मीना से मिले बिना नहीं जातीं.

मकान मालिक और किराएदार का रिश्ता बेहद नाजुक होता है. किराएदार को एक ऐसे मकान से लगाव रखना होता है जिसे छोड़ कर जाना निश्चित है. वहीं मकान मालिक को भी अपने खूनपसीने की कमाई से बना मकान ऐसे व्यक्ति को सौंपना होता है जिसे उस मकान से दिली लगाव नहीं होता. दोनों को ही एकदूसरे पर भरोसा करना होता है. तो ऐसा क्या करें कि दोनों के बीच टकराव की स्थिति न आए, मकान खाली करने के  बाद भी दिलों में जगह बनी रहे.

यदि आप मकान मालिक हैं

– अपनी और किराएदार दोनों की निजता का सम्मान करें यानी मकान का जो हिस्सा आप किराए पर देना चाहते हैं, कोशिश करें कि उस का प्रवेश आप के घर के अंदर से न हो, कमरे ऊपरी मंजिल पर हैं तो सीढि़यां बाहर से रखें और निचली मंजिल पर हों तो दोनों हिस्सों के बीच एक पार्टीशन अवश्य हो जो इन्हें एकदूसरे से अलग करता हो.

– अपनी प्राथमिकता तय करें कि आप मकान को किराए पर क्यों देना चाहते हैं. अकेलापन दूर करने के लिए, आय के अतिरिक्त स्रोत के लिए या फिर उस की देखभाल करवाने के लिए. किराएदार चुनते समय अपनी प्राथमिकता को ध्यान में रखें.

– किराए पर मकान देने से पहले सभी आपसी शर्तें तय कर लें कि आप उन से क्या चाहते और क्या नहीं चाहते हैं. उन पर स्वयं भी कायम रहें और किराएदार को भी पाबंद करें. सभी शर्तों को किराएनामे में दर्ज करें और दोनों पक्षों व गवाहों की उपस्थिति में किरायानामा पंजीकृत करवाएं.

– किराएदार से एक निश्चित दूरी बना कर रखें यानी न तो उस के व्यक्तिगत मामलों में आप हस्तक्षेप करें और न ही उसे ये अधिकार दें. महल्ले में यहांवहां पीठ पीछे उस की चुगली या बुराई न करें.

– सामान्य शिष्टाचार अवश्य निभाएं, जैसी हारीबीमारी में उस की मदद करें. सामाजिक और बड़े पारिवारिक समारोह में किराएदार को भी आमंत्रित करें. अत्यंत निजी समारोह में यह आवश्यक नहीं है.

– समयसमय पर किराएदार बदलते रहें वरना कई बार दबंग किस्म के लोगों से मकान खाली करवाना मुश्किल हो जाता है.

– किराएदार के बिजलीपानी आदि के कनैक्शन अलग रखें ताकि बिलों के भुगतान में कोई झंझट न हो.

– मकान के रखरखाव के बारे में पहले ही तय कर लें ताकि सलमा की तरह कड़वा अनुभव न हो.

– मकान देने से पहले ही किराएदार के संबंध में आवश्यक जानकारी जुटा लें. उस के पहचानपत्र की पड़ताल कर लें. आजकल तो पुलिस वैरिफिकेशन भी आवश्यक हो गया है.

– किराएदार से मोह का नहीं, स्नेह का रिश्ता रखें. उस से साफ कह दें कि आप को क्याक्या नापसंद है.

– कभीकभार किराएदार के साथ बैठ कर चाय पिएं.

– यदि किराएदार के बच्चे छोटे हैं तो उन से प्रेमभाव रखें, मगर उतना ही जितना आप की पर्सनललाइफ को डिस्टर्ब न करे.

– सभी सावधानियों के बाद भी यदि किराएदार से पटरी न बैठे तो किराएनामे के अनुसार नोटिस दे कर उस से मकान खाली करने को कह दें. मगर यहां भी इंसानियत के नाते, एक बार उस की भी अवश्य सुनें. यदि उसे कुछ समय की मुहलत चाहिए तो सहानुभूतिपूर्वक विचार करें.

यदि उपरोक्त इन बातों का खयाल रखेंगी तो आप का किराएदार प्यारा सा होगा, आफत का पिटारा नहीं.

साली के जिस्म की चाहत ने जीजा से कराया जुर्म

उत्तर प्रदेश पुलिस में हैडकांस्टेबल शिवकुमार की पोस्टिंग शिकोहाबाद के सीओ औफिस में थी. उन का घर वहां से कोई 60-65 किलोमीटर दूर आगरा में था. वहीं से वह रोजाना अपनी ड्यूटी पर आतेजाते थे. परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटियां संगम और ज्योति तथा एक बेटा अमरेंद्र कुमार था. परिवार के साथ वह हंसीखुशी से जिंदगी बिता रहे थे. उन्होंने तीनों बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ायालिखाया था. बड़ी बेटी शादी लायक हुई तो उस की शादी उन्होंने अपने जिगरी दोस्त कुलदीप शैली के बेटे अशोक शैली से कर दी. कुलदीप गाजियाबाद के नेहरूनगर में रहते थे. उन की भी 2 बेटियां परविंद्र और पूजा तथा एक बेटा अशोक था. बेटी परविंद्र का विवाह उन्होंने बुलंदशहर के रहने वाले पंकज के साथ किया था.

संगम की शादी के समय उस की छोटी बहन ज्योति महज 12 साल की थी. अशोक गाजियाबाद में किसी फैक्ट्री में काम करता था. संगम और अशोक का जीवन काफी खुशहाल था. शादी के साल भर बाद ही अशोक एक बेटी का पिता बन गया था. वह जबतब अपनी पत्नी और बेटी के साथ ससुराल आता रहता था. शिवकुमार का बेटा अमरेंद्र एक दवा कंपनी में एमआर था. अशोक की बहन पूजा की शादी में निमंत्रण पा कर शिवकुमार पूरे परिवार के साथ आए थे. शादी में लहंगाचोली पहने ज्योति बहुत खूबसूरत लग रही थी. हालांकि उस की उम्र 14-15 साल थी, पर हृष्टपुष्ट शरीर की वजह से वह जवान लग रही थी. ऐसे में ज्योति की नजर अपने जीजा अशोक से टकराई तो उस की नजरों में उसे कुछ अजीब सा दिखाई दिया. क्योंकि इस के पहले अशोक ने कभी उसे इस तरह नहीं देखा था. चूंकि शादी अशोक की बहन पूजा की थी, इसलिए उस पर काफी जिम्मेदारियां थीं. वह भागदौड़ में लगा था. ऐसे में अशोक कई बार साली से टकराया. एक बार हिम्मत कर के उस ने ज्योति का हाथ पकड़ कर सहलाते हुए कहा, ‘‘ज्योति, आज तुम बड़ी सुंदर लग रही हो. किस पर बिजली गिराने का इरादा है ’’ जीजा की बात सुन कर ज्योति घबरा गई. झटके से अपना हाथ छुड़ा कर वह चली गई. उस का दिल जोरों से धड़क उठा था. वह समझ गई कि जीजा की नीयत ठीक नहीं है.

ज्योति सोच में डूबी थी कि जीजा उसे अजीब नजरों से क्यों देख रहे थे उसे लगा कि शायद उन्होंने मजाक किया होगा  इस बात को दिमाग से निकाल कर वह शादी के कार्यक्रमों में एंजौय करने लगी. लेकिन अशोक ने तो मन ही मन कुछ और ही सोच लिया था. शादी निपट जाने के बाद थकेहारे लोग आराम करने की सोच रहे थे, जबकि शिवकुमार अपने परिवार के साथ घर जाना चाहते थे, लेकिन कुलदीप ने उन्हें एक दिन और रुकने की बात कह कर रोक लिया. इस से अशोक को खुशी हुई, क्योंकि उस का दिल अपनी नाबालिग साली ज्योति पर आ गया था. वह किसी भी तरह उसे हासिल करना चाहता था. शादी की भागदौड़ में सभी काफी थक गए थे. इसलिए खापी कर सभी जल्दी ही सो गए. अशोक के लिए यह अच्छा मौका था. उस ने धीरे से ज्योति को उठा कर कहा, ‘‘चलो, तुम से कुछ बात करनी है.’’

डरीसहमी ज्योति के मुंह से आवाज तक नहीं निकली. उसे एकांत में ले जा कर अशोक उस के शरीर से छेड़छाड़ करने लगा. ज्योति ने विरोध किया तो उस ने कहा, ‘‘चुप रहो, अगर कोई जाग गया तो तुम्हारी ही बदनामी होगी.’’ ज्योति जानती थी कि अगर वह शोर मचाएगी तो घर के लोग उस की बात पर विश्वास नहीं करेंगे. क्योंकि सभी अशोक पर बहुत विश्वास करते थे. आखिर अशोक ने ज्योति को डराधमका कर अपनी हवस पूरी कर ली. यही नहीं, उस ने मोबाइल फोन से उस की कुछ आपत्तिजनक तसवीरें भी खींच लीं. अपना सब कुछ गंवा कर ज्योति कमरे में आ गई. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे  अशोक ने उसे धमकी दे रखी थी कि अगर उस ने किसी को कुछ बताया तो वह उसे बदनाम कर देगा.

ज्योति खामोश थी. उस के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था. बेटी को परेशान देख कर मां मुन्नी ने पूछा तो उस ने तबीयत खराब होने का बहाना बना दिया. घर आ कर ज्योति ने राहत की सांस ली. उस ने तय कर लिया कि अब वह जीजा से कभी बात नहीं करेगी. अपने साथ घटी घटना के बारे में उस ने घर वालों से इसलिए नहीं बताया कि कहीं बहन का घर न टूट जाए. इसलिए चुप रह कर वह अपनी पढ़ाई में लग गई. कुछ दिन इसी तरह बीत गए. जीजा का कोई फोन नहीं आया तो उसे लगा कि शायद उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया है. लेकिन यह उस की भूल थी. अशोक को इधर गाजियाबाद के एक फार्महाउस में मैनेजर की नौकरी मिल गई थी. एक दिन वह अकेला ही ससुराल पहुंचा. उसे देख कर ज्योति डर गई.

‘‘अरे ज्योति, तुम इधरउधर क्यों भाग रही हो आओ, बैठो मेरे पास.’’ अशोक ने उस का हाथ पकड़ कर पास बैठाते हुए कहा. मुन्नी भी वहीं बैठी थी. इस की असल वजह क्या है, यह मुन्नी को पता नहीं था, इसलिए वह हंसने लगी. क्योंकि जीजासाली के बीच हंसीमजाक होना आम बात है. उस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. खाना खाने के बाद अशोक जाने लगा तो उस ने ज्योति से चुपके से कहा, ‘‘मैं ने आगरा के कुंदु कटरा स्थित एक होटल में कमरा बुक करा रखा है, तुम वहां आ जाना. मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा.’’

ज्योति ने हिम्मत कर के कहा, ‘‘मैं वहां नहीं आऊंगी.’’

इस पर अशोक ने टेढ़ी नजरों से देखते हुए कहा, ‘‘तो फिर अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना. मेरी मानो तो तुम्हारा आना ही ठीक रहेगा. मैं होटल में तुम्हारा इंतजार करूंगा.’’ न चाहते हुए भी ज्योति को होटल जाना पड़ा. अशोक होटल के गेट पर ही मिल गया. उस का हाथ पकड़ कर वह उसे उस कमरे में ले गया, जो उस ने पहले से बुक करा रखा था. कमरे में पहुंच कर उस ने ज्योति के सामने एक कागज रख दिया, जिस पर कुछ टाइप किया हुआ था. ज्योति ने पूछा, ‘‘यह क्या है ’’

‘‘यह हमारी शादी का प्रमाण पत्र है. इस पर तुम दस्तखत कर दो.’’ अशोक ने कहा. ज्योति ने दस्तखत करने से मना करते हुए कहा, ‘‘आप तो दीदी के पति हैं, हमारी शादी कैसे हो सकती है ’’

‘‘देखो ज्योति, मैं तुम से प्यार करता हूं. तुम्हारे बिना जी नहीं सकता, इसलिए मैं तुम्हें अपनी पत्नी बनाना चाहता हूं.’’

‘‘मुझे यह बेहूदगी पसंद नहीं है.’’ कह कर ज्योति कमरे से बाहर जाने लगी तो अशोक ने उसे पकड़ कर बैड पर ही पटक दिया और गुर्राते हुए कहा, ‘‘अगर तुम ने मेरी बात नहीं मानी तो मैं तुम्हारे पूरे परिवार को खत्म कर दूंगा.’’

उस की धमकी से डर कर ज्योति ने उस कागज पर दस्तखत कर दिए. ज्योति मजबूर थी, इस का फायदा उठाते हुए अशोक ने उस के साथ जबरदस्ती की. उस ने उस की अश्लील वीडियो भी बना ली. ज्योति उस के जाल में पूरी तरह फंस चुकी थी. चाह कर भी वह नहीं निकल पा रही थी. उस के एक ओर कुआं था तो दूसरी ओर खाई. वह जीजा का शोषण सहती रही. मुन्नी कभीकभी पूछती भी कि वह परेशान क्यों रहती है तो वह पढ़ाई का बहाना बना देती. अशोक का जब भी उस के पास फोन आता, वह अवसाद से घिर जाती. वह उसे होटल में बुलाता. उस का वीडियो वायरल करने की धमकी दे कर अशोक उस के साथ मनमानी करता. इसी तरह 2 साल गुजर गए. अशोक की हिम्मत बढ़ती गई. ज्योति इंटरमीडिएट में आ गई थी. पढ़ाई में उस का मन बिलकुल नहीं लगता था. वह यही सोचती थी कि दुराचारी जीजा से कैसे छुटकारा मिले  उसे अब खुद से नफरत होने लगी थी.

सब कुछ चलता रहा. घर वाले बेटी पर हो रहे अत्याचार से बेखबर थे. बेटी भी अपना मुंह खोलने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी. उसी बीच ज्योति की जिंदगी में नागेंद्र आ गया. वह ज्योति को अच्छा लगता था. दोचार मुलाकातों के बाद दोनों के बीच गहरा प्यार हो गया. नागेंद्र के प्यार से ज्योति का खोया आत्मविश्वास वापस लौटने लगा. इस के बाद जब भी अशोक का फोन आता, वह फोन रिसीव नहीं करती. अशोक की समझ में यह नहीं आ रहा था कि ज्योति ऐसा क्यों कर रही है  यह जानने के लिए एक दिन वह अपनी ससुराल पहुंच गया. उसे इस बार देख कर ज्योति ने तय कर लिया कि वह उस से बिलकुल नहीं डरेगी. मौका देख कर जब अशोक ने उसे होटल चलने को कहा तो उस ने साफ मना कर  दिया. अशोक ने उसे धमकाया तो उस ने कहा, ‘‘जीजा मेहरबानी कर के अब छोड़ दो मुझे.’’ अशोक ने उसे मोहब्बत की दुहाई दी, पर वह नहीं मानी. वह नाराज हो कर चला गया. ज्योति के व्यवहार से उसे लगा कि जरूर कोई उस की जिंदगी में आ गया है. अशोक ज्योति की सहेली के दोस्त सुमित को जानता था. उस ने जब सुमित को फोन किया तो उसे पता चला कि सचमुच ही ज्योति के जीवन में कोई और आ गया है. सच्चाई पता चलने पर अशोक को ज्योति पर बहुत गुस्सा आया.

इस के बाद ज्योति ने अपने प्रेमी नागेंद्र को सारी बात बता दी. उस ने ज्योति की हिम्मत बढ़ाते हुए कहा कि वह हमेशा उस के साथ है. अशोक से उसे डरने की जरूरत नहीं है. इस के बाद अशोक अपने आखिरी हथियार का उपयोग करते हुए धमकी देने लगा कि अगर उस ने उस की बात नहीं मानी तो वह उस के नंगे फोटो इंटरनेट पर डाल देगा. ज्योति ने साफ कह दिया, ‘‘जीजा, तुम्हें जो करना हो करो, मैं अब तुम से बिलकुल नहीं मिल सकती.’’ आखिर अशोक ने अंजाम की चिंता किए बिना ज्योति को सबक सिखाने की ठान ली. 9 सितंबर, 2016 को ज्योति कालेज के लिए निकली तो गली में खड़े कुछ लड़कों ने उसे देख कर कटाक्ष किया. वह उन की बातों का विरोध करने के बजाय आगे बढ़ गई. तभी उस के मोबाइल पर उस के भाई का फोन आया. भाई ने उसे तुरंत घर वापस आने को कहा.

ज्योति घर पहुंची तो उस ने देखा मां और भाई गुस्से में हैं. भाई ने उसे कई तमाचे जड़ दिए. भाई के गुस्से को देख कर ज्योति समझ गई कि जरूर जीजा ने उस का अश्लील वीडियो वायरल कर दिया है, जिसे घर वालों ने देख लिया है. ज्योति ने रोरो कर मां और भाई को जीजा की सारी करतूतें बता दीं. असलियत जान कर दोनों ने अपना सिर पीट लिया. ज्योति ने कहा कि वह जीजा की धमकियों से डर गई थी, जिस की वजह से उस ने किसी को कुछ नहीं बताया था. शिवकुमार उस समय ड्यूटी पर थे. अमरेंद्र ने पिता को फोन कर के सारी बात बताई तो उन्होंने कहा कि वह ज्योति को ले कर थाना सदर जाए और पुलिस को सारी बात बता कर रिपोर्ट दर्ज करा दे. अमरेंद्र बहन को ले कर थाना सदर पहुंचा और थानाप्रभारी अशोक कुमार सिंह को सारी बात बता दी. थानाप्रभारी ने उस की बात सुन कर भादंवि की धारा 376, 506, 420, 67, 72 के तहत अशोक सैली के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. शिवकुमार और मुन्नी दामाद की इस हरकत से बहुत आहत हुए थे. पर उस ने काम ही ऐसा किया था, जो क्षमा करने लायक नहीं था. अगले दिन आगरा सदर बाजार पुलिस ने गाजियाबाद से अशोक को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में अशोक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. पति की करतूत से संगम को अफसोस है. बहरहाल कथा संकलन तक अशोक जेल में था.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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