सड़क किनारे हुई हत्या, लोग बनाते रहे वीडियो

दो महीने से भी कम समय में हैदराबाद में दूसरी बार एक शख्स की बीच सड़क पर बेरहमी से हत्या कर दी गई. इस दौरान आस-पास लोग तमाशबीन बनकर खड़े रहे और मोबाइल से वीडियो-तस्वीरें उतारते रहे. कुछ ही समय पहले हैदराबाद के अट्टापुर इलाके में दिनदहाड़े एक शख्स की इसी तरह हत्या की गई थी जिससे पूरे शहर में सनसनी फैल गई थी.

बुधवार को शाम करीब साढ़े सात बजे ओल्ड सिटी में अति व्यस्त मदीना चौराहे के पास भीड़ के बीच एक औटोरिक्शा ड्राइवर ने 35 साल के एक शख्स की चापड़ मारकर हत्या कर दी. आरोपी की पहचान मोहम्मद अब्दुल खाजा (30) के रूप में हुई है जिसने शाकिर कुरैशी नाम के शख्स पर चाकू से कई बार वार किया.

आस-पास गुजरते लोगों ने इस वीभत्स घटना का वीडियो बना डाला लेकिन किसी ने हत्यारे को रोकने और पकड़ने की हिम्मत नहीं की. सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इस वीडियो को देखकर अपराधी के बेखौफ होने का सबूत मिलता है क्योंकि घटना वाली जगह से कुछ मीटर की दूरी पर ही पुलिसकर्मी मौजूद थे लेकिन किसी ने खाजा को रोकने की हिम्मत नहीं जुटाई.

एक ट्रैफिक पुलिस ने खाजा को विक्टिम के पास से धक्का देने की कोशिश की लेकिन वह तुरंत ही वहां से पीछे लौट गया. मीरचौक पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर एस श्रीनिवास गौड़ ने कहा कि खाजा ने कुरैशी पर काबू करते हुए उसे जमीन पर गिरा दिया और सड़क किनारे उसकी हत्या कर दी. पुलिस ने बताया कि दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था.

शुरुआती जांच में सामने आया कि कुरैशी ने खाजा को किराये पर औटोरिक्शा दिया था. खाजा ने किसी दूसरे शख्स को औटो दे दिया था जिससे कुरैशी नाराज हो गया. दोनों विवाद सुलझाने के लिए बुधवार शाम को मिले लेकिन बहस और बढ़ गई. खाजा ने दावा किया कि कुरैशी ने उसे और उसके परिवार को अपशब्द कहे.

पुलिस अधिकारी ने कहा कि कुरैशी पेशे के एक कसाई भी था, वह अपने साथ एक चापड़ लाया था जिसे खाजा ने छीनकर उसकी हत्या कर दी. वीडियो में खाजा शव को लात मारते हुए दिख रहा है, उसकी शर्ट में खून के धब्बे हैं. वह वीडियो में यह कहते हुए सुना जा रहा है कि अगर उसे फांसी दे दी गई तो भी उसे कोई चिंता नहीं.

इसके बाद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और आरोपी को हिरासत में ले लिया. दोनों चंचलगुड़ा के निवासी बताए जा रहे हैं. साउथ जोन के डेप्युटी कमिश्नर अंबर किशोर झा ने कहा कि वह आरोपी से पूछताछ कर और जानकारी निकाल रहे हैं. पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि एक कॉन्स्टेबल के तत्काल ऐक्शन से आरोपी घटनास्थल से 10 मिनट में पकड़ लिया गया जबकि वीडियो में पुलिस के कथन का विरोधाभास करता है.

‘केदारनाथ’ पर चल रहे विवाद पर सारा खान ने तोड़ी चुप्पी

सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान अपनी फिल्म केदारनाथ के साथ बौलीवुड में डेब्यू करने जा रही हैं. इस फिल्म में उनके अपोजिट सुशांत सिंह राजपूत हैं. फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद दर्शकों ने दोनों की काफी तारीफे की. लोगों को इनकी केमेस्ट्री काफी पसंद आई. पर कुछ लोगों ने इसमें केवल नफरत ढूंढी. कुछ हिंदूवादी संगठनों ने इसपर ‘लव जिहाद’ का आरोप लगाया. लोगों का कहना है कि इस फिल्म की वजह से लव जिहाद को बढ़ावा मिलेगा. इस मामले पर लगातार चल रहे विवाद पर आखिरकार सारा ने चुप्पी तोड़ी है.

एक हिंदी चैनल के मुताबिक सारा ने कहा कि ‘अपनी जिंदगी के अनुभवों से मैं ये बता सकती हूं कि ऐसी कोई चीज हमें प्रभावित नहीं करती. हमारी फिल्म लव जिहाद की मानसिकता को बिल्कुल भी बढ़ावा देने वाली नहीं है. ये वाकई इस तरह की फिल्म नहीं है. फिल्म में तो यह दिखाने की कोशिश की गई है कि केदारनाथ की दुनिया, जितनी मुक्कू यानी सारा की है, उतनी ही मंसूर यानी सुशांत की भी है.’

आपको बता दें कि 7 दिसंबर को रिलीज होने वाली इस फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान की अहम भूमिका हैं. 2013 में  केदारनाथ में आई प्राकृतिक आपदा को केंद्र में रख कर बनाई गई इस फिल्म पर केदारनाथ के पुजारियों के एक संगठन ने विरोध जताया है. पुजारियों के संगठन ने धमकी दी है कि अगर इस फिल्म को बैन नहीं किया गया तो वो आंदोलन करेंगे. क्योंकि ये फिल्म लव जिहाद को बढ़ावा देती है. इससे हिंदू भावनाएं आहत होती हैं.

 

हद है ऐसी मूर्खता की

सबरीमाला विवाद पर स्मृति ईरानी का यह कहना कि क्यमैं माहवारी से सना खून का सैनिटरी पैड किसी दोस्त के घर ले जा सकती हूं, उन की मूर्खता और दकियानूसीपन की निशानी है. सबरीमाला मंदिर में औरतों का प्रवेश किसी भी वजह से बंद हो पर यह माहवारी के खून से दूषित हो जाने के कारण तो नहीं है.

जहां तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बात है, तो वह बिलकुल सही है क्योंकि औरतों का कहीं भी प्रवेश बंद होना अपनेआप में गलत है. स्मृति ईरानी के यह कहने का कि दोस्त के घर खून का पैड ले कर नहीं जा सकते सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कोई मतलब नहीं है. इस मूर्खतापूर्ण बयान का तो मतलब है कि खून के पैड के साथ कोई भी औरत कहीं भी नहीं जा सकती, मंत्री की कुरसी पर भी नहीं बैठ सकती.

अगर बात केवल खून से सने पैड की होती तो सबरीमाला में औरतों का प्रवेश तभी बंद होना चाहिए था जब वे माहवारी से हों. गर्भवती औरतों को तो शायद प्रवेश मिल जाना चाहिए था.

स्मृति ईरानी का बयान असल में उस मानसिकता की देन है जो ‘घरघर की कहानी’ में जम कर बेची गई थी जिस के हर दूसरे सीन में पूजापाठ थी, जगहजगह मंदिर थे, हर जगह संतोंमहंतों की जयजयकार थी. स्मृति ईरानी को वहीं से संघ ने पकड़ा और इसी कारण जम कर बोलने का मौका दिया. ‘घरघर की कहानी’ में औरतों को आजाद नहीं रस्मों का गुलाम ही दिखाया गया था और आज भी स्मृति ईरानी उस सोच की गुलाम हैं. वैसे तो उन की पूरी पार्टी ही ऐसी है. यहां तक कि कांग्रेस या समाजवादी भी पीछे नहीं हैं.

सबरीमाला में पुजारियों की जिद कि वे मंदिर बंद कर देंगे पर औरतों को घुसने न देंगे असल में सुखद समाचार है. मंदिर तो हर जगह बंद होने चाहिए क्योंकि पिछले 2000 सालों में औरतों ने मंदिरों, मसजिदों और चर्चों में ज्यादा यातनाएं सही हैं, बजाय आम पुरुषों के हाथों. पुरुष उन्हें भोगते हैं तो साथ ही खुश भी रखते हैं. धर्मस्थल उन से लेते हैं देते नहीं.

स्मृति ईरानी का तर्क कुछ ज्यादा ले जाएं तो पुरुष भक्त के शरीर में भी कोई मलमूत्र नहीं रहना चाहिए ताकि देवता दूषित न हो. आजकल पुरुष जो मंदिर में चले जाते हैं वे उस मलमूत्र का क्या करते हैं, यह क्या स्मृति ईरानी बताएंगी?

वीडियो: शिवानी ठाकुर ने भोजपुरी गाने पर बिखेरे जलवे

भोजपुरी एक्टर और गायक खेसारीलाल यादव का गाना ‘रोज रोज सेजिया पे’  को बेहद पसंद किया जा रहा हैं. इतना ही नहीं इस गाने का क्रेज युवाओं में इतना ज्‍यादा बढ़ चुका है कि कई ने तो इस गाने के डांस स्‍टेप को फौलो करके अपने डांस का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया हैं.

आपको बता दें, इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो काफी पसंद किया जा रहा है, जिसे शिवानी ठाकुर नाम के एक यूट्यूब चैनल ने अपलोड किया है. इस वीडियो में एक लड़की छत के ऊपर ‘रोज रोज सेजिया पे’ गाने पर जबरदस्त डांस करती हुई नजर आ रही है, जिनका नाम शिवानी ठाकुर बताया गया है. वैसे, शिवानी पहले भी कई भोजपुरी गानों पर डांस कर चुकी हैं. इस वीडियो को अब तक 833,185  बार देखा जा चुका है और साथ ही काफी प्रतिक्रियाएं भी मिली हैं. इस वीडियो को इसी महीने 16 तारीख को अपलोड किया गया था.

गौरतलब है कि भोजपुरी गानों पर शिवानी का डांस यूट्यूब पर काफी पसंद किया जाता है और यही वजह है कि लोगों ने शिवानी से हिंदी गानों पर भी डांस करने की फरमाइश कर डाली है. बदले में शिवानी ने भी अपने वियुअर्स से हिंदी गाने का नाम पूछा है, जिस पर वह डांस करेंगी. इस वीडियो में शिवानी को शानदार डांस करते हुए देखा जा सकता है. गौरतलब है कि आज सोशल मीडिया पर आए दिन देश के युवाओं का टैलेंट देखने को मिल रहा है. उन्होंने अपना हुनर दिखाने के लिए इंटरनेट को अपना माध्यम बनाया है.

बीएचयू में छात्र आखिर क्यों उतर रहे हैं सड़कों पर

शिक्षा के क्षेत्र में बीएचयू का नाम अदब के साथ लिया जाता है. वाराणसी के गंगा किनारे बसे इस विश्वविद्यालय की ख्याति इसलिए भी है कि यहां देशविदेश के छात्रछात्राएं पढ़ने आते हैं और यहां लगभग हर विषय की तालीम दी जाती है.

पर आजकल यह ख्यातिप्राप्त विश्वविद्यालय पढ़ाई की वजह से नहीं, अंदरूनी राजनीति, कलह, गुटबाजी और लड़ाई झगड़े की वजह से चर्चा में है.

संगीन आरोप

हाल ही में बीएचयू में एक छात्रा ने अपने ही संकाय के एक शिक्षक पर यह आरोप लगाया था कि शोध करने के दौरान उस के साथ शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया. इस पर खूब बवाल काटा गया था. स्थानीय मीडिया ने भी यह खबर खूब उछाला था.

विश्वविद्यालय का मुख्य प्रवेश द्वार, जो लंका गेट के नाम से मशहूर है, के समीप ही लड़कियों का छात्रावास है, जहां कुछ दिनों पहले एक छात्रा से छेड़खानी की वजह से भी खूब बवाल मचा था.

नया विवाद

नया विवाद विश्वविद्यालय में चिकित्सा विज्ञान संस्थान के नर्सिंग डिग्री की मान्यता को ले कर है. यहां के नर्सिंग के छात्रों ने सड़कों पर खूब बवाल काटा और कुलपति के खिलाफ नारे लगाए. प्रदर्शन कर रहे छात्रों को प्रौक्टोरियल बोर्ड ने जबरन हटाने का प्रयास किया तो चीफ प्रौक्टर से छात्रों की जबरदस्त नोकझोंक भी हुई.

छात्रों का आरोप है कि डिग्री की मान्यता न होने के चलते छात्रों का भविष्य अंधकारमय है और विश्वविद्यालय प्रशासन को इस की चिंता नहीं है. प्रदर्शन के दौरान कई छात्राएं रो पड़ीं.

दरअसल, बीएचयू आईएमएस के नर्सिंग कालेज का रजिस्ट्रैशन स्टेट मैडिकल फैकल्टी में नहीं हुआ है. इस के चलते नर्सिंग के छात्रछात्राओं का भविष्य अधर में है. नर्सिंग कालेज पहले इंडियन नर्सिंग काउंसिल से संचालित हो रहा था. अभी स्टेट मैडिकल फैकल्टी के अधीन है.

अधर में भविष्य

पंजीकरण न होने से 2015 से 2017 के पास आउट छात्रों की डिग्री मान्य नहीं है. नर्सिंग के छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है और वे कह रहे हैं कि छात्रछात्राएं कोर्ट में जाने के लिए स्वतंत्र हैं और वहीं उन की समस्याओं का समाधान हो सकता है.

बदहाल होती शिक्षा

वैसे, अगर हमारे देश में शिक्षा प्रणाली को देखा जाए तो यहां शैक्षिक व्यवस्था नहीं के बराबर है और करोड़ों छात्र प्राइवेट कालेजों की ओर रूख कर जाते हैं. मगर वहां भी लाखों खर्चने के बाद भी उज्ज्वल भविष्य की गारंटी नहीं होती.

देश के कई जगहों पर बड़ी बड़ी बिल्डिंगें बना कर कालेज और विश्वविद्यालय तक खोल डाले गए हैं, जो अधिकतर फर्जी हैं.

छात्रों को सपने और सब्जबाग दिखा कर ये कालेज मोटी रकम वसूलते हैं और बाद में पता चलता है कि संबद्ध पढाई की तो रजिस्ट्रेशन तक नहीं करवाई गई है.

आखिर कहां जाएं छात्र

शिक्षा की दुनिया में यह कौन नहीं जानता कि बीएचयू एक ख्यातिप्राप्त केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जिस की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठनी चाहिए. इस विश्वविद्यालय ने देश को कई बड़े नाम दिए हैं, जिन्होंने यहीं से पढ़ाई की और देशदुनिया का नाम रौशन किया.

अगर इस विश्वविद्यालय में नर्सिंग की पढ़ाई की सुविधा थी और छात्रछात्राएं पढाई कर रहे थे तो रजिस्ट्रेशन की तमाम औपचारिकताएं पहले ही पूरी कर लेनी चाहिए थी।

सवाल है कि जब नामी विश्वविद्यालय में छात्र पढाई करें और बाद में उन का भविष्य अंधकारमय बन जाए, तो फिर छात्र जाएं तो जाएं कहां?

प्रेमिका से छुटकारा पाने की शातिर चाल

माधुरी जिस उम्र में थी, वह नएनए सपनों, उमंगों, उम्मीदों और उत्साह से लबरेज होती है. उस ने भी भविष्य के लिए ढेरों ख्वाब बुन रखे थे. बीकौम की छात्रा माधुरी सुंदर और हंसमुख स्वभाव की थी. पढ़लिख कर वह एक मुकाम हासिल करना चाहती थी. लेकिन यह ऐसी उम्र है, जब कोई करिश्माई व्यक्ति आकर्षित कर जाता है. फिर तो उसी के लिए दिल धड़कने लगता है. माधुरी के साथ भी ऐसा हुआ था. वह आदमी कौन था, यह सिर्फ माधुरी ही जानती थी, जिसे वह जाहिर भी नहीं होने देना चाहती थी. वह परिवार में सभी की प्रिय थी. मातापिता को अपने बच्चों से ढेरों उम्मीदें होती हैं. माधुरी को भी मांबाप की ओर से पढ़नेलिखने और घूमनेफिरने की इसीलिए आजादी मिली थी कि वह अपना भविष्य संवार सके.

माधुरी दिल्ली से लगे गौतमबुद्ध नगर जिले के रबूपुरा थाना के गांव मोहम्मदपुर जादौन के रहने वाले मुनेश राजपूत की बेटी थी. वह एक समृद्ध किसान थे. वैसे तो यह परिवार हर तरह से खुश था, लेकिन नवंबर, 2016 में एक दिन माधुरी अचानक लापता हो गई तो पूरा परिवार परेशान हो उठा. वह घर नहीं पहुंची तो उसे ढूंढा जाने लगा. काफी प्रयास के बाद भी जब माधुरी का कुछ पता नहीं चल सका तो परिवार के सभी लोग परेशान हो उठे. चूंकि मामला जवान बेटी का था, इसलिए मुनेश ने थाने जा कर बेटी की गुमशुदगी दर्ज करा दी. पुलिस जांच में पता चला कि माधुरी अपने पिता के मोबाइल से किसी को फोन किया करती थी. पुलिस और घर वालों ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह नंबर नजदीक के ही गांव के रहने वाले राहुल जाट का निकला. 27 नवंबर, 2016 को राहुल को खोज निकाला गया.

राहुल के साथ माधुरी भी थी. दोनों ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर घर वाले दंग रह गए. दोनों एकदूसरे से प्रेम करते थे. यही नहीं, उन्होंने आर्यसमाज मंदिर में विवाह भी कर लिया था. राहुल ने अपने 3 दोस्तों की मदद से माधुरी को भगाया था. मामला 2 अलगअलग जातियों का था. माधुरी के घर वाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे. वे बेटी द्वारा उठाए गए इस कदम से काफी आहत थे. बात मानमर्यादा और इज्जत की थी, इसलिए दोनों पक्षों के बीच आस्तीनें चढ़ गईं. इस मुद्दे पर पंचायत बैठी, जिस ने फैसला लिया कि दोनों ही अब एकदूसरे से कोई वास्ता नहीं रखेंगे. घर वालों ने माधुरी को डांटाफटकारा और जमाने की ऊंचनीच समझा कर इज्जत का वास्ता दिया. इस पर उस ने वादा किया कि अब वह कोई ऐसा कदम नहीं नहीं उठाएगी, जिस से उन की इज्जत पर आंच आए.

किस के दिमाग में कब क्या चल रहा है, यह कोई दूसरा नहीं जान सकता. माधुरी बिलकुल सामान्य जिंदगी जी रही थी. इस घटना को घटे अभी एक महीना भी नहीं बीता था कि 23 दिसंबर, 2016 की दोपहर माधुरी अचानक फिर लापता हो गई. उस के इस तरह अचानक घर से लापता होने से घर वाले परेशान हो उठे. उन्होंने अपने स्तर से उस की खोजबीन की. लेकिन जब वह शाम तक नहीं मिली तो उन का सीधा शक उस के प्रेमी राहुल पर गया.

माधुरी के घर वालों ने थाने जा कर राहुल और उस के दोस्तों के खिलाफ नामजद तहरीर दे दी. राहुल का चूंकि माधुरी से प्रेमप्रसंग चल रहा था और एक बार वह उसे ले कर भाग चुका था, इसलिए कोई भी होता, उसी पर शक करता. गुस्सा इस बात का था कि समझाने के बावजूद उस ने वादाखिलाफी की थी. इस बात से माधुरी के घर वाले ही नहीं, गांव वाले भी नाराज थे. शायद इसीलिए सभी माधुरी को जल्द से जल्द ढूंढ कर लाने को पुलिस से कहने लगे थे. पुलिस ने माधुरी के घर वालों से नंबर ले कर उस की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि अभी भी माधुरी की राहुल से बातचीत होती रहती थी. गायब होने वाले दिन भी उस की राहुल से बात हुई थी.

पुलिस ने राहुल और उस के दोस्तों को थाने ला कर पूछताछ की. लेकिन इन लोगों ने माधुरी के गायब होने में अपना हाथ होने से साफ मना कर दिया. इस पूछताछ में पुलिस को भी लगा कि इन लोगों का माधुरी के गायब होने में हाथ नहीं है तो उस ने उन्हें छोड़ दिया. कई दिन बीत गए, माधुरी का कुछ पता नहीं चला. घर वाले राहुल और उस के साथियों के छोड़े जाने से खिन्न थे. मुनेश के पड़ोस में ही रहता था हेमंत कौशिक उर्फ टिंकू, जो शादीशुदा ही नहीं, 2 बच्चों का बाप था. वह कंप्यूटर और मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता था. पड़ोसी होने के नाते वह माधुरी के घर वालों की हर तरह से मदद कर रहा था.

हेमंत ने मुनेश को सलाह दी कि इस मामले में थाना पुलिस राहुल के खिलाफ काररवाई नहीं कर रही है तो चल कर पुलिस के बड़े अधिकारियों से मिला जाए. उस की बात घर वालों को ठीक लगी तो गांव के कुछ लोगों को साथ ले कर मुनेश एसएसपी औफिस जा पहुंचे. अपनी बात मनवाने के लिए इन लोगों ने धरनाप्रदर्शन भी किया. इस का नतीजा यह निकला कि एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने इस मामले में एसपी (देहात) सुजाता सिंह को काररवाई करने के निर्देश दिए. मामला तूल पकड़ता जा रहा था, इसलिए सुजाता सिंह ने थानाप्रभारी शाबेज खान को माधुरी की गुमशुदगी वाले मामले की गुत्थी सुलझाने को तो कहा ही, खुद भी इस मामले पर नजर रख रही थीं.

पुलिस एक बार फिर राहुल को पकड़ कर थाने ले आई. एसपी सुजाता सिंह ने खुद उस से पूछताछ की. राहुल का कहना था कि पंचायत के बाद वह माधुरी से कभी नहीं मिला तो पुलिस ने उस के ही नहीं, उस के दोस्तों के भी मोबाइल फोनों की लोकेशन निकलवाई. इस से पता चला कि राहुल ही नहीं, उस के दोस्त भी माधुरी के लापता होने वाले दिन घर पर ही थे. कई लोग इस बात की तसदीक भी कर रहे थे. जांच में यह बात सच पाई गई, इसलिए पुलिस उलझ कर रह गई. जबकि माधुरी के घर वाले यह बात मानने को तैयार नहीं थे. लेकिन अब तक राहुल के पक्ष में भी कुछ लोग उतर आए थे, इसलिए पुलिस को विरोध और आरोपों का सामना करना पड़ रहा था. कभीकभी परेशान हो कर पुलिस फरजी खुलासा करते हुए निर्दोषों को जेल भेज देती है. लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ. एसपी सुजाता सिंह ने तय कर रखा था कि वह जो भी काररवाई करेंगी, सबूतों के आधार पर ही करेंगी. माधुरी के घर वाले चाहते थे कि राहुल और उस के साथियों को जेल भेजा जाए, लेकिन पुलिस के पास उन के खिलाफ एक भी सबूत नहीं था.

बात माधुरी की बरामदगी की भी थी. इस के लिए राहुल के पास कोई सुराग नहीं था. माधुरी कहां चली गई थी, इस बात को कोई नहीं जानता था. उस का प्रेम प्रसंग राहुल से था और राहुल को ही उस की खबर नहीं थी. पुलिस के लिए यह मामला काफी पेचीदा हो गया था. इस बीच पुलिस को पता चला कि माधुरी चोरीछिपे मोबाइल फोन इस्तेमाल करती थी. पुलिस को लगा कि इस से कोई सुराग मिल सकता है. लेकिन घर वालों को माधुरी का मोबाइल नंबर पता नहीं था. पुलिस ने गांव के टावर से जितने भी मोबाइल नंबर इस्तेमाल हो रहे थे, सभी का डाटा निकलवाया. यह संख्या 3 हजार से अधिक थी, लेकिन पुलिस को उम्मीद थी कि इस से कोई न कोई सुराग जरूर मिल जाएगा.

पुलिस ने मोबाइल नंबरों को खंगाला तो उन में 2 मोबाइल नंबर एक ही सीरीज के मिले. उन नंबरों को संदिग्ध मान कर जांच शुरू की गई. इस में खास बात यह थी कि माधुरी के लापता होने के 2 दिनों बाद दोनों नंबर बंद कर दिए गए थे. पुलिस ने उन नंबरों की आईडी निकलवाई तो वे जनपद पीलीभीत के एक ही पते पर लिए गए थे. सिमकार्ड लेते वक्त जो पहचानपत्र दिया गया था, वह भी फरजी था. पुलिस ने आईएमईआई नंबर के जरिए मोबाइल का पता किया तो पता चला कि जिस मोबाइल में दोनों सिम में से एक सिम का उपयोग हो रहा था, उसी टावर के अंतर्गत उस में दूसरा नंबर चल रहा था. पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह माधुरी के पड़ोसी हेमंत का निकला. इस से हेमंत शक के दायरे में आ गया. 7 जनवरी, 2017 को थानाप्रभारी शाबेज खान एसआई श्रीपाल सिंह, नरेश कुमार, कांस्टेबल जकी अहमद और जितेंद्र को साथ ले कर गांव पहुंचे और पूछताछ के लिए हेमंत को हिरासत में ले लिया.

पूछताछ में हेमंत शातिर खिलाड़ी निकला. उस के न केवल माधुरी से प्रेमसंबंध थे, बल्कि उसी ने सुनियोजित तरीके से माधुरी की हत्या कर के उस की लाश को ठिकाने लगा दिया था. आपराधिक घटनाओं पर आधारित टीवी सीरियलों और फिल्मों से शातिर सोच पैदा कर के उस ने पूरी योजना बनाई थी. उस के प्रेम में अंधी हो चुकी माधुरी उस के इशारों पर नाचने वाली कठपुतली बन चुकी थी तो राहुल मोहरा. माधुरी के लिए हेमंत ही वह आकर्षक करिश्माई आदमी था, जिस का राज माधुरी ने अपने सीने में दफन कर रखा था. हेमंत की निशानदेही पर पुलिस ने गांव के ही एक खेत से माधुरी के शव को बरामद कर लिया था. पुलिस ने शव का पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया, साथ ही हेमंत के खिलाफ अपराध संख्या 2/2017 पर धारा 364, 302 और 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था.

पुलिस ने हेमंत से विस्तार से पूछताछ की तो एक ऐसे शातिर दिमाग इंसान की कहानी निकल कर सामने आई, जिस ने एक लड़की को प्यार के जाल में फांस कर पहले उस की भावनाओं और विश्वास को छला, उस के बाद उसे मौत की चौखट पर पहुंचा दिया. पड़ोसी होने के नाते माधुरी और हेमंत के घर वालों का एकदूसरे के यहां आनाजाना था. करीब 10 महीने पहले हेमंत ने माधुरी पर डोरे डालने शुरू किए. माधुरी उम्र के नाजुक मोड़ पर थी. उस ने हेमंत का झुकाव अपनी ओर देखा तो वह भी उस की ओर आकर्षित हो गई. बहुत जल्दी दोनों के प्रेमसंबंध बन गए. हेमंत माधुरी को केवल मौजमस्ती का साधन बनाना चाहता था, लेकिन माधुरी उस से दिल से प्यार कर बैठी.

दिल के हाथों मजबूर हो कर माधुरी राह भटक गई. उन के रिश्ते की कोई मंजिल नहीं थी. बात एक ही गांव, पड़ोस और अलगअलग जाति की थी, इस से भी बड़ी बात यह थी कि हेमंत शादीशुदा ही नहीं, 2 बच्चों का बाप था. माधुरी इन बातों को भूल गई और उस के साथ जीनेमरने की कसमें खा लीं. हेमंत शातिर था. वह आपराधिक टीवी सीरियलों से भी खासा प्रभावित था. हेमंत किसी खतरे में नहीं पड़ना चाहता था, इसलिए उस ने फरजी आईडी पर 2 मोबाइल नंबर लिए. एक नंबर उस ने अपने पास रखा और दूसरा माधुरी को देते हुए कहा, ‘‘माधुरी, इस नंबर से मेरे सिवा किसी और से बात मत करना.’’

‘‘मैं भला किसी और से बातें क्यों करूंगी. वैसे भी मेरे लिए अब तुम ही सब कुछ हो.’’ माधुरी ने कहा ही नहीं, किया भी ऐसा ही. माधुरी फोन को छिपा कर रखती थी. उस से वह केवल हेमंत से ही बातें करती थी या एसएमएस करती थी. दोनों का संबंध इतना गुप्त था कि किसी को कानोंकान खबर नहीं थी. दोनों चूंकि पड़ोसी थे, इसलिए उन के संबंधों पर किसी ने कभी शक भी नहीं किया. इस मामले में हेमंत काफी सतर्क रहता था. हेमंत गांव से बाहर कंप्यूटर और मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता था. वह सुबह घर से निकलता था तो शाम को ही वापस आता था. इस दौरान वह मोबाइल से माधुरी से जम कर बातें करता था और उस के प्यार के सपनों को पंख लगाता था. आखिर एक दिन माधुरी ने उस से कह ही दिया कि वह हमेशा के लिए उस की होना चाहती है. हेमंत ने भी ऐसा करने का वादा कर लिया. उस ने सोचा कि वक्त आने पर वह माधुरी से पीछा छुड़ा लेगा, लेकिन माधुरी की सोच ऐसी नहीं थी. वह उसे अपना सब कुछ मान चुकी थी, इसलिए प्यार की बातों के दौरान एक दिन उस ने हेमंत से पूछ लिया, ‘‘तुम कभी मुझे धोखा तो नहीं दोगे ’’

‘‘मैं ने तुम्हें धोखा देने के लिए प्यार नहीं किया माधुरी. मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूं.’’

‘‘हम शादी कब करेंगे ’’

‘‘तुम जानती हो माधुरी कि यह सब इतना आसान नहीं है. इस के लिए हमें इंतजार करना होगा.’’ हेमंत ने उसे यह कह कर टाल तो दिया, लेकिन वह यह सोच कर चिंतित जरूर हो उठा कि माधुरी उस की पत्नी बनने का पक्का इरादा बना चुकी है.

इस के बाद आए दिन माधुरी हेमंत से शादी की बातें करने लगी. एक दिन बातोंबातों में माधुरी ने उस से कहा कि राहुल उसे पसंद करता है तो यह सुन कर वह खुश हो गया, क्योंकि इस से उसे माधुरी से छुटकारा पाने की राह सूझ गई. उस ने कहा, ‘‘माधुरी, तुम राहुल से भी बातें कर लिया करो, अब वही हमारी शादी कराएगा.’’

‘‘मतलब ’’ माधुरी ने पूछा.

‘‘यह मैं तुम्हें समय आने पर बताऊंगा. मैं जैसा कह रहा हूं, तुम वैसा ही करती रहो. उस के बाद हमें शादी से कोई नहीं रोक सकेगा. तुम अपने पिता के नंबर से उस से बातें किया करो.’’ माधुरी ने ऐसा ही किया. वह पिता के नंबर से राहुल को फोन करने लगी. दरअसल राहुल सीधासादा लड़का था. उसे पता नहीं था कि वह मोहरा बन रहा है. हेमंत के कहने पर माधुरी ने राहुल के सामने शादी का प्रस्ताव रखा. दोनों ही जानते थे कि घर वाले उन की शादी के लिए कभी तैयार नहीं होंगे. इस का एक ही उपाय था कि भाग कर शादी की जाए. माधुरी ने अधिक दबाव डाला तो राहुल इस के लिए तैयार हो गया. हेमंत ने माधुरी को समझाया, ‘‘तुम्हें राहुल से शादी भी करनी है और पकड़ी भी जाना है. इस से सब को विश्वास हो जाएगा कि राहुल तुम्हारा प्रेमी है. फिर एक दिन हम दोनों घर से भाग कर शादी कर लेंगे, जिस का सारा शक राहुल पर जाएगा. उस के जेल जाने पर मामला अपने आप शांत हो जाएगा.’’

हेमंत दिमाग से माधुरी के साथ खेल रहा था, जबकि वह दिल की खुशी के चक्कर में अच्छाबुरा सोचे बिना डगमगा गई. वह उसे अपने इशारों पर नचा रहा था. माधुरी उस की हर बात मानती थी और हद दरजे का विश्वास करती थी. हेमंत के कहे अनुसार, माधुरी राहुल के साथ भागी भी और शादी भी कर ली. दोनों पकड़े भी गए. उन्हें पकड़वाने में हेमंत ने ही अहम भूमिका निभाई थी. उस ने माधुरी से पीछा छुड़ाने की योजना मन ही मन पहले ही तैयार कर ली थी. इतना सब तमाशा होने के बाद वह घर आई तो उस ने हेमंत को शादी की बात याद दिलाई. बदनामी, परिवार की डांटफटकार माधुरी ने सिर्फ हेमंत से शादी करने के लिए सही थी. हेमंत उसे प्यार से समझाबुझा कर पीछा छुड़ाने के बजाए उस के सपनों को और भी ऊंचाई दे कर बरगलाने का काम करता रहा. उस के कहने पर माधुरी राहुल से पिता के मोबाइल से बातें करती रही.

22 दिसंबर को हेमंत ने माधुरी से कहा था कि अगले दिन वह घर से निकल कर गांव के बाहर तय जगह पर पहुंच जाए. उसे लगता था कि माधुरी ऐसा नहीं करेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. माधुरी उस के झूठे प्यार में अंधी हो चुकी थी. वह उस खेत पर पहुंच गई, जहां उस ने पहुंचने को कहा था. माधुरी ने यह बात हेमंत को फोन कर के बता भी दी. वह खेत गांव के किसान डंकारी सिंह का था. हेमंत ने पहले ही तय कर लिया था कि उसे क्या करना है. माधुरी उस के गले की फांस बन चुकी थी. शाम करीब 4 बजे वह खेत पर पहुंचा और माधुरी को कंबल तथा बाजार से ला कर खाना दे आया.

हेमंत ने उसे समझाने के बजाए बरगलाते हुए कहा, ‘‘माधुरी, मैं माहौल देख लूं. पहले तो राहुल को जेल भिजवाना जरूरी है. उस के बाद हम निकल चलेंगे. लेकिन तब तक तुम्हें यहीं रहना होगा.’’

माधुरी ने इस कड़ाके की ठंड में वह रात अकेली खेतों में बिताई. हेमंत उस के लिए खाना पहुंचाता रहा. किसी को उस पर शक न हो, इस के लिए वह माधुरी के घर वालों के साथ खड़ा रहा और उन्हें राहुल के खिलाफ भड़काता रहा. 2 दिन बीत गए. अब माधुरी को खेत में रहना मुश्किल लगने लगा. आखिर उस के सब्र का बांध टूट गया.

तीसरे दिन यानी 26 दिसंबर की शाम माधुरी हेमंत से चलने की जिद करने लगी तो प्यार जताने के बहाने उस ने दुपट्टे से उस का गला कस दिया. हेमंत का यह रूप देख कर माधुरी के होश उड़ गए. बचाव के लिए विरोध करते हुए उस ने हाथपैर भी चलाए, लेकिन हेमंत ने गले में लिपटा दुपट्टा पूरी ताकत से कस दिया था, जिस से छटपटा कर उस ने दम तोड़ दिया. हत्या कर के हेमंत ने अपने और माधुरी के मोबाइल का सिमकार्ड तोड़ दिया और घर आ गया. रात को वह बहाने से निकला और गड्ढा खोद कर लाश को दफना दिया. इस के बाद वह सामान्य जिंदगी जीने लगा.

लोगों के शक से बचने के लिए वह अपने काम पर भी जाता और माधुरी के पिता के साथ बैठ कर माधुरी को ले कर फिक्र भी जताता. हेमंत को पूरा विश्वास था कि वह कभी पकड़ा नहीं जाएगा. उसे लगता था कि दबाव में आ कर पुलिस राहुल और उस के दोस्तों को जेल भेज देगी. उस के बाद माधुरी की खोजबीन ठंडे बस्ते में चली जाएगी. इसीलिए उस ने माधुरी के घर वालों को पुलिस अधिकारियों के यहां प्रदर्शन करने के लिए उकसाया था.

यह अलग बात थी कि एसपी सुजाता सिंह की समझ से पुलिस ने किसी दबाव में काम नहीं किया और वह पकड़ में आ गया. यह भी सच है कि अगर पुलिस बारीकी से जांच न करती तो हेमंत कभी पकड़ा न जाता. उस की फरेबी फितरत और हैवानियत ने पूरे गांव को हैरान कर दिया. पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. कथा लिखे जाने तक उस की जमानत नहीं हो सकी थी. माधुरी हेमंत जैसे शातिर के झांसे में न आई होती और बिना डगमगाए अपने भविष्य को संवारने में लगी होती तो यह नौबत कभी न आती.

हेमंत जैसे लोग अपनी घिनौनी सोच को पूरी करने के लिए भोलीभाली लड़कियों को फंसाने का काम करते हैं. जरूरत है, लड़कियों को ऐसे लोगों से सावधान रहने की.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

योगी के बोल : दलित हैं हनुमान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रा योगी आदित्यनाथ चुनाव प्रचार में ‘स्टार प्रचारक’ माने जाते हैं. भाजपा के लिये प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद उनकी नम्बर दो की रेटिंग है. योगी को संत मान कर लोग उम्मीद करते है कि वह कुछ गंभीर मुद्दों पर बात करेगे. योगी अपने बडबोलेपन की वजह से हास्य परिहास का विषय होकर रह जा रहे है. राजस्थान के चुनावी प्रचार में योगी ने अलवर में कहा कि ‘हनुमान दलित थे’. योगी संत है. धर्म के बड़े जानकार हैं. ऐसे में यह भी नहीं कहा जा सकता है कि वह गलत बोल रहे होंगे. योगी के बयान को तर्क के आधर पर देखे तो यह बात सही भी लगती है. हनुमान जंगल और पहाड़ पर रहते थे. ऐसे में हनुमान दलित से अधिक आदिवासी माने जा सकते हैं. ऐसे में उनको दलित यानि एससी की जगह पर एसटी माना जा सकता था. योगी ने हनुमान को दलित, वनवासी, गिरवर और वंचित भी कहा है.

जिस तरह से हनुमान को राम का भक्त यानि दास बताया गया उससे भी साफ लगता है कि वह सवर्ण जाति के राजा राम की सेवा ही करते थे. हनुमान को हमेशा राम के पैरों के पास ही बैठा देखा गया है. अगर पूजा की नजर से देखें तो हनुमान ही सबसे उपेक्षित दिखते हैं. सभी भगवान की पूजा के लिये बड़े बड़े मंदिर बनते हैं, हनुमान अकेले ऐसे हैं जिनकी पूजा करने के लिये भव्य मंदिर की जरूरत नहीं है. कहीं भी किसी भी जगह पर ईट और पताका मतलब लाल कपड़े की झंडी लगाकर पूजा शुरू की जा सकती है. ऐसे में वह सवर्ण देवताओं के मुकाबले दलित ही लगते हैं.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर विरोधी दलों से पहले सवर्णों का ही विरोध शुरू हो गया है. राजस्थान की ब्राह्मण सभा ने योगी को कानूनी नोटिस भेजा है. योगी सरकार के अंदर काम करने वाले डाक्टर राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोपफेसर मनोज दीक्षित ने अपनी फेसबुक वाल पर लिखा ‘देवी देवता आपके लिये राजनीति का विषय हो सकते है पर हमारे लिये वह आस्था का विषय है. ऐसे में देवीदेवताओं में जाति और धर्म न तलाशें.’

योगी के बयान पर भाजपा के ही सांसद उदित राज ने कहा ‘योगी के बयान से साफ हो गया कि रामराज में भी दलित थे. जाति व्यवस्था थी. संविधान कहता है कि जाति के नाम पर वोट नहीं मांगने चाहिये, जाति के आधार पर वोट ज्यादा पड़ते हैं. योगी का बयान उसी अपील के लिये देखा जा सकता है.’ राजस्थान के चुनाव में दलित वोट की नजर से इस बयान को देखा जा रहा है. अब केवल हनुमान को दलित नहीं माने जाते बल्कि राक्षसों को दलित माना जाता है. योगी के इस बयान से यह साफ हो गया है कि रामराज में भी जाति प्रथा थी.

सीएम से मिलने आए शख्स के पास मिला जिंदा कारतूस

सीएम हाउस में अरविंद केजरीवाल से मिलने पहुंचे एक शख्स की तलाशी के दौरान जेब से कारतूस मिलने पर हड़कंप मच गया. घटना को सीएम की सुरक्षा से जोड़कर फिर से सवाल उठने लगे. वजह ये कि एक हफ्ते के अंदर दूसरा वाकया है.

इससे पहले 20 नवंबर को दिल्ली सचिवालय में सीएम अरविंद केजरीवाल पर मिर्च फेंकने की वारदात हो चुकी है. अब सोमवार सुबह मुख्यमंत्री दरबार में उनके निवास पर इमामों के प्रतिनिधिमंडल के साथ एक शख्स मिलने पहुंचा था. मिर्ची अटैक के बाद सीएम से मिलने वालों की अब बारीकी से तलाशी ली जाती है.

गेट में एंट्री होने से पहले जब उसकी तलाशी ली गई तो उसके पर्स में रखा .32 बोर का एक कारतूस बरामद किया गया. फौरन उसे हिरासत में लेकर सीनियर अफसरों को इस बारे में इत्तला दी. तुरंत थाने लाकर पूछताछ की गई. सीएम की सुरक्षा से जुड़ा हुआ था, इसलिए अन्य खुफिया एजेंसियों के अलावा स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच ने भी आरोपी से छानबीन की. सिविल लाइंस पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है.

पुलिस अफसरों के मुताबिक, पूछताछ में उसकी पहचान लोनी निवासी मोहम्मद इमरान (39) के रूप में हुई. ये पूरा वाकया सोमवार सुबह करीब 11:15 बजे का है. आरोपी इमरान दिल्ली वक्फ बोर्ड के तहत काम करने वाले 12 अन्य इमामों के साथ अपनी सैलरी बढ़वाने की बात करने सीएम के जनता दरबार में पहुंचा था. गेट पर पहुंचने पर सुरक्षा कर्मियों ने सभी की तलाशी ली. इमरान के पर्स में कुछ सख्त चीज महसूस हुई. पुलिस ने पर्स को चेक किया.

उसमें देखा कि .32 बोर का कारतूस है. आरोपी ने बताया कि वह करोल बाग की मस्जिद बावली वाली में मुअज्जिन का काम करता है. दो-तीन पहले मस्जिद के दानपात्र में कोई कारतूस को डाल गया था. मस्जिद के इमाम ने कारतूस उसे देखकर उसे यमुना में फेंकने के लिए कहा था. लेकिन बजाए कारतूस यमुना में फेंकने के उसने अपने पर्स में रख लिया. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अवैध रूप से कारतूस रखने का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है. पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है.

हो रही है सीएम को मारने की साजिश : आप

आम आदमी पार्टी ने सीएम पर लगातार हो रहे हमलों को बीजेपी की साजिश बताया है. आप के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भरद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सीएम केजरीवाल को मारने की साजिश की जा रही है. बीते सोमवार को एक व्यक्ति सीएम के घर में जिंदा कारतूस लेकर घुस जाता है. सीएम का घर दिल्ली पुलिस की निगरानी में है. अंदर जाने से पहले कई प्रकार की जांच से होकर गुजरना पड़ता है, फिर कैसे ये व्यक्ति जिंदा कारतूस घर के अंदर तक लेकर चला जाता है. विधानसभा के विशेष सत्र में भी यह मुद्दा उठाया गया था.

आप प्रवक्ता ने कहा कि पिछले साढ़े तीन साल में केजरीवाल पर चार बार हमला हो चुका है. कुछ साल पहले छत्रसाल स्टेडियम में सीएम पर जो हमला हुआ था, उस मामले में हमलावर को पुलिस ने घटना स्थल पर ही गिरफ्तार कर लिया, लेकिन आज तक उस केस में चार्जशीट फाइल हुई है. सीएम ने विधानसभा में भी कहा था कि उन पर हमले के दो ही कारण हो सकते हैं. पहला यह कि पीएम नरेंद्र मोदी खुद ये हमले प्रायोजित करवा रहे हैं या फिर पीएम दिल्ली के सीएम की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी नाकाम साबित हो रहे हैं. अब सवाल ये उठता है कि जो पीएम एक मुख्यमत्री को सुरक्षा देने में नाकाम साबित हो रहा हो, क्या वो देश की आम जनता को सुरक्षा दे पाएगा.

दक्षिणी दिल्ली के लोकसभा प्रभारी राघव चड्ढा ने कहा कि आप सभी को पता है कि दिल्ली के सीएम पर लगातार हमले हो रहे हैं. अभी कुछ दिन पहले ही सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन में बीजेपी के सांसद मनोज तिवारी अपने कुछ समर्थकों के साथ जबर्दस्ती प्रोग्राम में आकर हंगामा करते हैं, सीएम पर बोतलें फेंकी जाती हैं. उसके बाद दिल्ली सचिवालय में सीएम पर अटैक होता है. उन्होंने कहा कि यह सब एक साजिश के तहत हो रहा है. दूसरे कई राज्यों में बीजेपी की सरकार है, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई व्यक्ति बीजेपी के किसी मुख्यमंत्री के घर में इस प्रकार का कोई जान लेवा समान लेकर घुस गया हो. हमने कभी नहीं सुना कि कोई व्यक्ति इस प्रकार से कारतूस लेकर शिवराजसिंह चौहान, वसुंधरा राजे या फिर रमन सिंह के घर में घुसा हो.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें