जब सलमान बने बैकग्राउंड डांसर, देखें वीडियो

देश का सबसे बड़ा उद्योग घराना आजकल मीडिया की लाइमलाइट में है. हम बात कर रहे हैं अंबानी परिवार की. मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी की प्री वेडिंग पार्टी उदयपुर में हुई. इस पार्टी में बौलीवुड से लिए हौलीवुड के सितारों ने शिरकत की.

ईशा अंबानी और आनंद परिमल की प्री वेडिंग कार्यक्रम में कुछ ऐसा देखने को मिला जिसकी कल्पना किसी आम कार्यक्रम में मुश्किल है. इस कार्यक्रम में बौलीवुड के सुपरस्टार एक्टर सलमान खान को स्टेज पर ईशा के भाई अनंत अंबानी के पीछे डांस करते हुए देखा गया. इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. वीडियो में सलमान किसी बौकग्राउंड डांसर की तरह नाच रहे हैं.

इस वीडियो में सलमान नीले रंग के सूट में दिख रहे हैं. अनंत अंबानी गिटार लिए शाहरुख की फिल्म फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ के मशहूर गाने ‘मुझको क्या हुआ है…’ पर डांस कर रहे थे, वहीं सलमान उनके पीछे स्टेज पर नाच रहे हैं.

आम तौर पर किसी भी कार्यक्रम में स्टेज की रौनक रहने वाले सलमान को स्टेज पर पीछे नाचते देखना दर्शकों के लिए कोई मामूली बात नहीं है. और यही वजह है कि इस वीडियो को सोशल मीडिया पर देखा जा रहा है.

अंबानी फैमिली के इस फंक्शन में बौलीवुड हस्तियों का काफी जमावड़ा देखने को मिला. फंक्शन अटेंड करने आए शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय, अभिषेक बच्चन, प्रियंका चोपड़ा, सलमान खान ने भी परफौर्म किया. इनके अलावा सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी, जौन अब्राहम, करण जौहर, वरुण धवन, कैटरीना कैफ और अनिल कपूर जैसे सेलेब्स फंक्शन में दिखे.

विदेश नीति का भटकाव

भारत की विदेश नीति कचरा होती दिख रही है. पाकिस्तान से नरेंद्र मोदी की बढ़ती नाराजगी के कारण भारत ने बंगाल की खाड़ी के चारों तरफ के देशों का एक संगठन बनाया और उस में आर्थिक, सांस्कृतिक व सैन्य सहयोग की बातों की शुरुआत की. पर काठमांडू में हुई बैठक के कुछ दिनों बाद ही पहले मेजबान नेपाल ने न केवल सैन्य सहयोग देने से इनकार कर दिया, वह चीन के साथ भी जा मिला.

बंगलादेश को इस संगठन में शामिल किया गया है. पर जब असम में घुसपैठियों की समस्या सिर पर हो और करीब 40 लाख लोगों को वापस बंगलादेश खदेड़ देने की बात चुनावी लड़ाई के लिए की जा रही हो, तो बंगलादेश कितने दिन चुप बैठेगा. म्यांमार, बंगलादेश व भारत रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे पर भी तेवर अपनाए हुए हैं. श्रीलंका अब अपनेआप को श्रेष्ठ समझता है और उसे हमेशा डर लगता है कि भारत श्रीलंका के तमिलों के साथ मिल कर उस के देश में कुछ उत्पात न मचा दे.

असल में भारत की विदेश नीति अब ढुलमुल हो गई है. यह बिलकुल हिंदू राजाओं की पौराणिक परंपरा पर चलती नजर आ रही है जिस में राजा हर रोज पाला बदलते थे और कोई भी दूरगामी परिणाम की नहीं सोचता था.

भारत ने अब रूस से नाता हलका कर यूरोप और अमेरिका का हाथ पकड़ा है. लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद अविश्वसनीय हैं. वे कहते कुछ हैं, और करते कुछ हैं. रूस अपना साम्राज्य खड़ा करना चाहता है पर उस के पास न पैसा है न सोच. फालतू पैसा अगर किसी के पास है तो वह चीन है. पर भारत व चीन के संबंध सुधरने के आसार नहीं, क्योंकि चीन को पाकिस्तान ज्यादा सुहाता है. चीन और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद भी नहीं है.

भारत की विदेश नीति अब समुद्र में बिना कंपास वाले जहाज की तरह भटक रही है जो कभी इधर तो कभी उधर जा रहा है. गनीमत यही है कि आज विश्व के सभी देशों की मित्रता और संधियां टूट के कगार पर हैं. सो, भारत का पाला बदलना किसी को अखरता नहीं.

विदेश नीति शायद अब देशों के विदेश मंत्रालयों से निकल कर बड़ी कंपनियों के हाथों में चली गई है जो बाजार ढूंढ़ रही हैं और उसी आधार पर देशों में दोस्ती व लड़ाइयां करा रही हैं. इन कंपनियों में सैनिक साजोसामान बनाने वाली भी हैं और गूगल, एपल व फेसबुक जैसी भी. ये तय कर रही हैं कि किस देश की विदेश नीति कैसी हो. हमारी नीति में कोई लोच होगा तो ये अपनेआप ठीक कर देंगी, अपने फायदे के हिसाब से. हो सकता है इसी वजह से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अभी से कह दिया कि वे 2019 का चुनाव नहीं लड़ेंगी. वे नहीं चाहतीं कि उन्हें असफल विदेश मंत्री कह कर निकाला जाए.

बुजुर्ग दंपती के मुंह पर टेप लगाकर 45 लाख लूटे

वेस्ट दिल्ली के पंजाबी बाग थाना इलाके में रहने वाले बुजुर्ग दंपती को घर में बंधक बनाकर लूट लिया गया. 45 लाख कैश, जूलरी और मोबाइल फोन लूटने का विरोध करने पर उन्हें पीटा भी गया. बाद में दोनों को बाथरूम में बांधकर बंद कर दिया गया. इसके बाद लुटेरों ने आराम से लूटपाट की. करीब 1 घंटे तक बदमाश घर में रहे. उनकी संख्या 3-5 बताई जा रही है. पुलिस का कहना है कि दो बदमाशों ने लूट को अंजाम दिया.

पुलिस के पास रविवार रात 8 बजे के बाद पीसीआर कॉल की गई. पीड़ित शिकायतकर्ता का नाम गिरधारी लाल है. 63 साल के गिरधारी लाल, पत्नी के साथ रहते हैं. वह एक फाइनैंस कंपनी चलाते हैं. रविवार शाम करीब 7:15 बजे किसी ने उनके घर की घंटी बजाई. गेट खोलने से पहले उन्होंने घंटी बजाने वाले से पहचान पूछी. अजनबी ने बताया कि एक ट्रक खरीदने के लिए पैसे लिए थे उसकी किस्त जमा करनी है. गेट खोलने पर दो आदमी घुसे.

कुछ देर तक दोनों ने गिरधारी लाल से इधर-उधर की बातें कीं. इसके बाद उनकी कनपटी पर पिस्टल तान दी. उन्होंने विरोध किया तो उनकी पिटाई भी की गई. इसी बीच, उनकी पत्नी वहां आ पहुंचीं. लुटेरों ने दोनों को बाथरूम ले जाकर बांध दिया. उनके मुंह पर भी टेप चिपका दी गई थी.

पुलिस का कहना है कि लुटेरे जाते-जाते उनके घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर भी अपने साथ ले गए. ऐसे में उनकी पहचान नहीं हो पाई है. लुटेरों ने जिस तरह वारदात को अंजाम दिया उससे लगता है कि उन्हें यह पहले से पता था कि गिरधारी लाल के पास कितना कैश है. बदमाशों ने लूट की वारदात को अंजाम देते हुए उनसे कैश के बारे में पूछा था.

आशंका जताई जा रही है कि कंपनी में ही काम करने वाला कोई कर्मचारी लुटेरों में शामिल हो. कुछ लोगों को शक के दायरे में रखा गया है.

एक घंटे तक रहे घर में

  • 63 साल के गिरधारी लाल, पत्नी के साथ रहते हैं. वह एक फाइनैंस कंपनी चलाते हैं
  • घर में घुसे बदमाशों ने लूट का विरोध करने पर दंपती को पीटा भी
  • पुलिस का कहना है कि 2 बदमाश थे, कुछ लोगों का कहना है कि 3-5 बदमाश थे
  • कुछ देर तक दोनों ने गिरधारी लाल से इधर-उधर की बातें कीं, इसके बाद उनकी कनपटी पर पिस्टल तान दी

दहेज का दावानल

एक समय ऐसा भी था जब मोटरसाइकिल का किसी घर में होना रुतबे की बात मानी जाती थी और अगर किसी को वह दहेज में मिल जाती थी तो पूरे इलाके में मानो मुनादी सी पिट जाती थी.

आज दहेज भी बरकरार है और इस के नाम पर गाड़ी मांगने का रिवाज भी. पर कभीकभार इस मांगने के खेल में पासा उलटा भी पड़ जाता है.

ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ. यहां दहेज को ले कर हुए झगड़े में दूल्हे और बरातियों को बंधक बनाए जाने का मामला सामने आया.

इतना ही नहीं, वधू पक्ष ने महल्ले वालों के साथ मिल कर दूल्हे समेत 4 लोगों के सिर मुंड़वा दिए. मामले की सूचना देर रात पुलिस को हुई तो बंधक बनाए गए बरातियों को छुड़ाया जा सका.

यह था मामला

जानकारी के मुताबिक, खुर्रमनगर इलाके में लड़की के पिता सब्जी बेच कर गुजारा करते हैं. उन का शहीद जियाउल हक पार्क के पास कच्चा मकान है. अपनी बेटी का रिश्ता उन्होंने बाराबंकी के धौकलपुरवा के रहने वाले अब्दुल कलाम से तय किया था. कुछ समय पहले ही मंगनी की रस्म हुई थी. सामाजिक रीतिरिवाजों की लाज बचाने के लिए उन्होंने निकाह के लिए दहेज का सामान जुटाया था.

लड़की के पिता का आरोप है कि निकाह से हफ्ताभर पहले ही लड़के ने दहेज की मांगें बढ़ानी शुरू कर दीं. जैसेतैसे उन्होंने उस की सभी मांगें पूरी करने की कोशिश भी की.

निकाह के दिन दूल्हे ने दहेज का सामान देखा तो ‘पल्सर’ मोटरसाइकिल देख कर कहने लगा कि उसे तो ‘अपाचे’ मोटरसाइकिल चाहिए. इतना ही नहीं, उस ने 4 तोला सोने की चेन की भी मांग रख दी.

दुल्हन के पिता ने बताया कि जब उन्होंने मांग पूरी करने में हाथ खड़े कर दिए तो दूल्हा बरात वापस ले जाने की धमकी देने लगा.

आरोप है कि लड़की वालों ने 25,000 रुपए की मेहर तय की थी. इस पर भी लड़के वालों ने एतराज जताया. उन्होंने निकाहनामा से इस शर्त को हटाने की मांग की.

लड़की के पिता का कहना है कि वे तकरीबन 3 से 4 लाख रुपए दहेज दे रहे थे, लिहाजा 25,000 रुपए मेहर की रकम इस के सामने कुछ नहीं थी.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विवाद के बीच दूल्हा और बराती शराब के नशे में हंगामा करने लगे.  इस के बाद दुलहन पक्ष के लोग भी नाराज होने लगे और बिना निकाह किए जाने पर नतीजा भुगतने की चेतावनी दी गई.

हालात बिगड़ते देख बरातियों ने मौके से भाग निकलने की कोशिश की. इस दौरान दूल्हा और उस का भाई भी भागने लगे तो लड़की के घर वालों ने उन्हें पकड़ लिया. इस के बाद भीड़ ने दूल्हे समेत 4 लोगों के सिर मुंड़वा दिए.

इस पूरे हंगामे पर दुलहन की दादी का कहना था, ‘‘उन्होंने शादी से 5 दिन पहले ये मांगें रखी थीं. जब हम ने कहा कि हम मांग पूरी नहीं कर सकते, तो दूल्हे ने निकाह करने से इनकार कर दिया. मुझे नहीं पता कि उस का सिर किस ने मुंड़वा दिया.’’

दहेज के इस मामले में तो वधू पक्ष ने समाज की परवाह न करते हुए वर पक्ष को सबक सिखा दिया, पर हर बार ऐसा नहीं हो पाता है. एक हैरतअंगेज मामले में ससुराल वालों ने अपनी 2 बहुओं को डेढ़ लाख रुपए में बेच डाला था.

यह केस विरार पुलिस स्टेशन इलाके का था. उन बहुओं को तब पता चला, जब खरीदने वाला उन्हें राजस्थान से वसई ले आया था.

पुलिस ने बताया कि इस मामले में पीडि़ता औरतों के पति, सासससुर समेत 12 लोग शामिल थे. मुंबई के विरार (पश्चिम) इलाके की एमबी स्टेट निवासी 24 साला पीडि़ता ने बताया कि साल 2015 में उस की शादी विरार के रहने वाले संजय मोहनलाल रावल से हुई थी. उस की छोटी बहन की शादी संजय के छोटे भाई वरुण रावल के साथ हुई थी.

वे दोनों बहनें एक ही घर में रहती थीं. शादी के बाद से ससुराल वाले उन दोनों बहनों को दहेज के लिए सताने लगे थे. ससुराल वालों ने उन से अपने मायके से 5 लाख रुपए लाने की डिमांड रखी थी. ऐसा नहीं करने पर उन्हें सताया जाने लगा था.

30 अगस्त को ससुराल वाले किसी बहाने से दोनों बहुओं को राजस्थान ले गए. वहां भी दोनों को मारापीटा गया. जलाने की भी धमकी दी गई. 10 सितंबर को ससुराल वालों ने उन दोनों को ट्रेन में बैठा दिया और अपने घर विरार जाने को कहा. उन के साथ एक अनजान शख्स भी गया था.

दूसरे दिन जब ट्रेन वसई रेलवे स्टेशन पहुंची तो उस आदमी ने उन से मीरा रोड चलने को कहा. इस बात पर उन का झगड़ा हो गया. यह देख कर कुछ लोग बीचबचाव में आ गए.

वहां उस आदमी ने खुलासा किया कि इन औरतों की ससुराल वालों ने इन्हें उसे डेढ़ लाख रुपए में बेचा है और वह इतना बोल कर वहां से चला गया.

इन दोनों मामलों में किसी की जान नहीं गई जबकि दहेज के दावानल में न जाने कितनी विवाहिताएं अपनी जान तक गंवा देती हैं.

नैशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि अलगअलग राज्यों से साल 2012 में दहेज हत्या के 8,233 मामले सामने आए थे. आंकड़ों का औसत बताता है कि हर घंटे में एक औरत दहेज की बलि चढ़ रही है.

केंद्र सरकार की ओर से जुलाई, 2015 में जारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते 3 सालों में देश में दहेज संबंधी कारणों से मौत का आंकड़ा 24,771 था. जिन में से 7,048 मामले सिर्फ उत्तर प्रदेश से थे. इस के बाद बिहार और मध्य प्रदेश में क्रमश: 3,830 और 2,252 मौतों का आंकड़ा सामने आया.

दहेज निषेध अधिनियम

दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के मुताबिक, दहेज लेने, देने या इस के लेनदेन में सहयोग करने पर 5 साल की कैद और 15,000 रुपए तक के जुर्माने की सजा हो सकती है.

दहेज के लिए सताने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए, जो पति और उस के रिश्तेदारों द्वारा जायदाद या कीमती सामान के लिए अवैधानिक मांग के मामले से जुड़ी है, के तहत 3 साल की कैद और जुर्माना हो सकता है.

धारा 406 के तहत लड़की के पति और ससुराल वालों के लिए 3 साल की कैद या जुर्माना या फिर दोनों हो सकती हैं, अगर वे लड़की के स्त्रीधन को उसे सौंपने से मना करते हैं.

यदि किसी लड़की की शादी के 7 साल के भीतर असामान्य हालात में मौत होती है और यह साबित कर दिया जाता है कि मौत से पहले उसे दहेज के लिए सताया गया है, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 304 बी के तहत लड़की के पति और रिश्तेदारों को कम से कम 7 साल से ले कर ताउम्र कैद की सजा हो सकती है.

आज की जिंदगी में बहुत से लोग इतने लालची होते जा रहे हैं कि वे अपने बेटों को दहेज के बाजार में बेचने से भी नहीं हिचकिचाते हैं. बेटे की पढ़ाई पर लगाई गई रकम को वे लड़की वालों से वसूलने की कोशिश करते हैं और जब उन के मुंह खून लग जाता है तो वे लड़की को बाद में भी सताने से बाज नहीं आते हैं. कुछ मामलों में शादी के दौरान ही दूल्हे पक्ष को सबक सिखा दिया जाता है तो कहीं बाद में दुलहनें भी बिकती नजर आती हैं.

अंधविश्वास की चक्की में पिसती जनता

17वीं सदी तक वैज्ञानिक नजरिए न होने से लोग कई तरह की घटनाओं को ले कर अंधविश्वास के शिकार हो जाया करते थे और इस के  पोषक ओझा, गुनी, पांजियार, पंडेपुरोहित आदि का धंधा बड़ी आसानी से चल निकलता था. तकरीबन 18वीं से 19वीं सदी के अंत तक वैज्ञानिक नजरिया खूब फलाफूला और अंधविश्वास को काफी हद तक नुकसान उठाना पड़ा. 20वीं सदी अंधविश्वास के पोषकों के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में खड़ी हो गई. इस सदी के अंतिम 4-5 दशकों में बुद्धिजीवी वर्ग ने अनुभव किया कि जो लोग अंधविश्वास के समर्थन में खड़े हैं वे काफी हद तक विचलित हैं. वैज्ञानिक सूझबूझ ने जितनी बड़ी चुनौती इन प्रतिक्रियावादियों के सामने खड़ी की उतने बड़े पैमाने पर ये तत्त्व तर्क, विवेक और वैज्ञानिक धारणाओं पर प्रहार कर रहे हैं.

अंधविश्वास की पोषक शक्तियों (पंडेपुरोहित, ओझा, गुनी, जोगी आदि) के बेतुके तर्कों और हरकतों के पीछे एक अनपढ़ ही नहीं बल्कि अच्छेखासे पढ़ेलिखे लोग खासकर मध्य और उच्चवर्ग के वैज्ञानिक तक भी पड़े हैं. 21वीं सदी के वैज्ञानिक युग में यह बात अच्छेखासे पढ़ेलिखे को भी गुमराह करती है कि आखिर क्यों एक वैज्ञानिक भी अलौकिक घटनाओं और अंधविश्वास की हरकतों का पक्ष लेता है? बस, यहीं पर एक आम आदमी गुमराह हो कर अंधविश्वास को हवा दे रहा है.

अंधविश्वास से जुड़े मूर्खतापूर्ण विचारों और तर्कहीन कामों को एक भरमाने वाला नाम दे दिया गया है, आस्था.

इस से जुड़ी एक घटना याद आती है. पटना में ओझागुनी सम्मेलन हुआ था जिस में अंधविश्वास को बढ़ावा देने वालों को सम्मान दे कर खुलेआम अंधविश्वास को हवा दी गई थी. देखा जाए तो यह एक तरह से विज्ञान की अति सूक्ष्म खोजों को ठेंगा दिखाने का असफल प्रयास है. 21वीं सदी में अंधविश्वास को बढ़ावा देती यह सामाजिक घटनाएं यही सोचने पर मजबूर करती हैं कि कितनी मानव शक्ति, पैसा और समय जैसे संसाधन ऊलजलूल बातों और धारणाओं पर बरबाद हो रहे हैं.

अंधविश्वास के बलबूते  कमानेखाने वालों की चांदी है तो यह आज के वैज्ञानिक युग में हताशा का ही नतीजा है ताकि नेताओं, मंत्रियों और तथाकथित वैज्ञानिकों को साजिशवश शामिल कर आम लोगों को गुमराह किया जाए. कारण यह कि आम जन की भेड़चाल की बैसाखियों के बिना अंधविश्वास का धंधा फलफूल ही नहीं पाता.

कमाई के जरिए को सूखता देख कर ही धर्म के नाम पर दानपुण्य और चढ़ावे आदि का प्रचारप्रसार पिछले 2-3 दशकों से काफी हद तक फलफूल रहा है.

आम जनता को धन के मोह से दूर रहने का उपदेश देने वाले वैभव और सुखसुविधाओं के सागर में आकंठ डूबे हुए हैं. धर्म के नाम पर ठगी के अनेक अड्डे जगहजगह खुल रहे हैं.

मनोवैज्ञानिक भूमिका

अंधविश्वास की जड़ में 2 बातें खासकर देखी जाती हैं. एक तो डर और दूसरा लालच. इनसान के जीवन में अचानक ही कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं जिन को वैज्ञानिक तर्कों पर आसानी से साबित कर पाना कठिन होता है और यहीं से अंधविश्वास की शुरुआत होती है. प्राकृतिक प्रकोप जैसे सूखा, तूफान, आकाशीय बिजली का गिरना, भूचाल आदि के डर ने इंसान को शुरू से ही अंधविश्वास की ओर धकेला है.

इनसान ने कभी इन कुदरती घटनाओं पर मगजखपाई नहीं की है और उस की इन्हीं मनोवैज्ञानिक कमजोरियों का फायदा आस्था का सहारा ले कर धर्म, तंत्रमंत्र, जादूटोना से जुड़े लोग अकसर उठाते रहे हैं. कुदरती घटनाओं को दैवीय प्रकोप का नाम व डर दे कर इस से जुड़े लालची लोगों के बहकावे में आम लोग आ जाते हैं.

कई बार पढ़ेलिखे लोग अंधविश्वास से जुड़ी बातों की खोजबीन करने की कोशिश भी करते हैं और इस बारे में सवाल भी उठाते हैं मगर धर्मशास्त्र के  नाम पर बेतुके तर्क दे कर धर्म और तंत्रमंत्र से जुड़े लोग उन्हें ऐसा मूर्ख बनाते हैं कि लोग आसानी से उन की बातों के जाल में फंसते चले जाते हैं. जैसे अगर कोई पूछे कि दिव्यदृष्टि नामक भ्रामक अवधारणा की क्या परिभाषा है? इस के उत्तर में कह दिया जाता है कि दिव्यदृष्टि आज की दूरबीन से भी उत्कृष्ट दरजे की वैज्ञानिक खोज थी और यह कि आज का विज्ञान, पुराने समय के विज्ञान से बहुत पीछे है.

राजनीतिक भूमिका

स्वार्थ से भरी राजनीति, धार्मिक अनुष्ठान और इस से जुड़ा अंधविश्वास आज के समय में गिरते नैतिक मूल्यों के साथ इतने घुलेमिले हैं कि एक के अभाव में दूसरा अधूरा लगता है. हम कह सकते हैं कि जिस तरह धार्मिक अनुष्ठानों से अंधविश्वास का चोलीदामन का साथ है उसी तरह आज की शोषक राजनीति धर्म के बिना अधूरी है. यह स्थिति चिंताजनक है लेकिन समस्या यह है कि आज की गंदी राजनीति अंधश्रद्धा के बगैर चल भी तो नहीं पा रही है. धर्म के  शोरशराबे को सत्ता के गलियारों से भी खादपानी मिलता है.

स्वार्थ से भरी राजनीति करने वाले जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाने के लिए धर्म को एक कारगर हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. आज की घोटालेबाज राजनीति के लिए धर्म और अंधविश्वास का शोर एक अनिवार्यता बनता जा रहा है. आवाम के तर्क और विवेक को मारने के लिए अंधविश्वास एक ताकतवर हथियार का काम करता है.

लालच से जुड़ी वोटबटोरू नीति हमारे राजनीतिबाजों को अंधविश्वास फैलाने वाले साधुसंतों की शरण लेने को बाध्य करती है ताकि उन के पिछलग्गुओं के वोट संत के माध्यम से उन की झोली में पड़ते रहें. इसीलिए अंधविश्वास के प्रदर्शनों में राजनीतिबाज हिस्सा लेते देखे जाते हैं.

आर्थिक भूमिका

अनुचित लाभ अंधविश्वास की आर्थिक भूमिका है. जैसेजैसे भेड़चाल के चलते तर्र्कविहीन लोग अंधविश्वास के शिकार हो रहे हैं वैसेवैसे अंधविश्वास के धंधेबाजों की कमाई बढ़ती जा रही है.

दैवीय प्रकोप जैसी डरावनी बातों के चलते हमेशा ही अंधविश्वास फैलाने वालों की चारों उंगलियां घी में रही हैं. आज के समय की स्थिति यही है कि ईमानदारी की दुकानदारी से शायद ही इतना धन जमा हो सके जितना कि धर्म के नाम पर जमा होता है.

अंधविश्वास के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण कैसे विकसित होगा? यह सवाल ही मुख्य समस्या है. इस का एकमात्र हल शिक्षा ही हो सकती है. अंधविश्वास के पीछे भी कई वैज्ञानिक तथ्य छिपे होते हैं. जरूरत है उन्हें खोजने की और अंधविश्वास के विरोध में एक विश्वव्यापी आंदोलन चलाने की.

कार से टच हुई बाइक तो बरसा डालीं गोलियां

राजधानी दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 इलाके में रविवार देर रात एक डिपार्टमेंटल स्टोर के बाहर कार से बाइक टच भर होने के विवाद में युवक की ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई. मृतक युवक की पहचान योगेश (20 )के रूप में हुई. वह चिल्ला गांव में परिवार के साथ रहते थे.

शुरुआती तफ्तीश में पुलिस को पता चला कि योगेश का भाई यहां प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती है. रात के समय योगेश अपने दोस्त अमन के साथ भाई को देखने आए थे. वहीं से वह भाई के लिए जूस, पानी और स्नैक्स लेने मार्केट चले गए. यहां आचार्य निकेतन मार्केट में एक नामी डिपार्टमेंटल स्टोर के बाहर उनकी बाइक सफेद रंग की एक आई20 कार से हल्की सी टच हो गई. इसी बात को लेकर योगेश की कार सवार युवकों से कहासुनी हो गई.

झगड़ा बढ़ा तो कार के अंदर से निकले एक युवक ने योगेश पर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं. हमलावर ने पांच राउंड गोलियां चलाईं, जिनमें से तीन योगेश को लगीं. इसके बाद हमलावर कार में बैठकर फरार हो गए.

रविवार रात करीब सवा 11 बजे जब यह वारदात हुई, योगेश के साथ उसका एक भाई समेत दो और लोग थे. योगेश के भाई ने बताया कि कार सवार युवकों ने पहली गोली उसी की तरफ चलाई थी. वो किसी तरह बच गया. इसी बीच योगेश ने हमलावर को रोकने की कोशिश की तो उसने योगेश पर ही गोलियां बरसा दीं. योगेश तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े थे. दो साल पहले ही शादी हुई थी.

CCTV में दिखी कार और आरोपी

पुलिस हमलावरों की तलाश में जुटी है. डीसीपी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि कार सवार हमलावरों की संख्या 2-3 थी. पुलिस को आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से कार और एक आरोपी की फुटेज मिल गई है. पुलिस रोड रेज और पार्किंग विवाद के साथ साथ दूसरे एंगल को ध्यान में रखकर भी जांच कर रही है.

जितनी तेरी उम्र है उतने मेरे ऊपर केस हैं… और गोलियों से भून डाला

फेज-1 के चिल्ला गांव में सोमवार की सुबह से ही मातम का माहौल था. हर किसी की जुबान पर यहां रहने वाले योगेश का ही जिक्र था, जिसकी रविवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई. सुबह योगेश के घर के ज्यादातर पुरुष सदस्य जहां मॉर्चरी में योगेश की लाश का पोस्टमॉर्टम करवा के बॉडी लेने गए थे, वहीं घर पर महिलाओं का तांता लगा हुआ था.

योगेश तीन भाई बहनों में सबसे बड़े थे और इसीलिए पिता चौधरी नरेंद्र ने कम उम्र में ही उनके कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी डाल रखी थी. दो साल पहले ही उनकी शादी नीरज से हुई थी. उनकी डेढ़ साल की एक बेटी भी है. योगेश के चाचा विनोद कुमार ने बताया कि योगेश ग्रैजुएशन करने के साथ-साथ पिता के प्रॉपर्टी के बिजनेस में भी उनका हाथ बंटा रहे थे. उनका छोटा भाई आकाश (18) और सबसे छोटी बहन प्रियंका (12) भी अभी पढ़ाई ही कर रहे हैं.

योगेश की पत्नी ने बताया कि रविवार शाम 6 बजे के करीब वह बाइक लेकर घर से निकले थे. जाते वक्त वह अपनी पत्नी को कहकर गए थे कि रात को रोटी घर आकर ही खाऊंगा. घर लौटकर उन्हें मंदिर में ज्योत भी जलानी थी.

नीरज ने बताया कि जब रात 10:30 बजे तक भी योगेश घर नहीं आए, तो उन्होंने फोन करके पूछताछ की. योगेश ने बताया कि वह अस्पताल में भर्ती अपने कजिन का हालचाल जानने गए हैं और थोड़ी देर में आ जाएंगे. योगेश देर तक घर नहीं लौटे, तो घरवाले परेशान हो उठे. वो लगातार योगेशन का फोन मिलाते रहे, लेकिन फोन नहीं मिला. करीब दो घंटे बाद दो पुलिसवालों ने घर पहुंचकर बताया कि योगेश का एक्सिडेंट हो गया है और वह अस्पताल में भर्ती है.

अस्पताल पहुंचने पर घरवालों को पता चला कि योगेश का मर्डर किया गया है. योगेश के कजिन मनीष नागर ने बताया कि एक गोली योगेश की पैंट की जेब में रखे उसके मोबाइल को तोड़ती हुई उसके पैर में जा लगी थी, इसीलिए उसका फोन बंद हो गया था.

पहले दोस्त पर की थी फायरिंग, योगेश बीच में आए तो ले ली जान

योगेश (21) नाम के जिस युवक की 4 गोलियां मारकर हत्या की गई, उस घटना के चश्मदीद ने बताया कि आरोपी ने पहली गोली उसी की तरफ चलाई थी, लेकिन वो किसी तरह बच गया और गोली उसे नहीं लगी. इसी बीच योगेश ने उसे रोकने की कोशिश की, तो उसने योगेश पर ही ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं और फिर आरोपी अपने दोस्तों के साथ कार में बैठकर फरार हो गया. वे लोग सफेद रंग की आई-20 कार में सवार होकर आए थे. जिसके बाद चश्मदीद और उसके साथ मौजूद एक अन्य दोस्त मिलकर योगेश को अस्पताल ले गए थे.

रविवार रात सवा 11 बजे के करीब जिस वक्त यह वारदात हुई, उस वक्त योगेश के साथ उसका एक कजिन अमन और किराएदार गोलू भी साथ थे. वारदात के चश्मदीद अमन के मुताबिक, रात को वे लोग घटनास्थल के पास स्थित कुकरेजा हॉस्पिटल में भर्ती अमन के रिश्तेदार के हालचाल जानने के लिए गए थे. रात को जूस और स्नैक्स लेने के लिए वे लोग योगेश की बाइक से पास की चौबीस घंटे खुली रहने वाली एक ग्रॉसरी शॉप पर गए थे. बाइक योगेश ही चल रहा था.

अमन ने बताया कि शॉप पर पहुंचने के बाद गोलू सामान खरीदने के लिए अंदर चला गया और वह योगेश के साथ बाहर बाइक पर ही रुके रहे. तभी एक कार आकर रुकी. बाइक से सटा कर खड़ी की. योगेश ने थोड़ी आगे या पीछे खड़ी करने को कहा. इसी बात को लेकर योगेश की उन लोगों के साथ बहस हो गई. उनमें से एक शख्स ने यह कहकर योगेश को धमकी भी दी कि जितनी तेरी उम्र नहीं है, उतने केस मेरे ऊपर चल रहे हैं. कार में सवार दोनों लड़के बाहर निकल कर योगेश और अमन से झगड़ने और हाथापाई करने लगे फिर फायरिंग शुरू कर दी.

शॉप की वजह से सुरक्षा पर उठे सवाल

युवक की हत्या के बाद इस इलाके के लोग सुरक्षा को लेकर कईं तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं. सबसे ज्यादा सवाल चौबीस घंटे खुली रहने वाली उस ग्रॉसरी शॉप को लेकर ही उठ रहे हैं, जिसके बाहर यह वारदात हुई. इलाके के लोगों के साथ-साथ मृतक के परिजनों, रिश्तेदारों और मार्केट के अन्य दुकानदारों का भी कहना है कि जब से यह शॉप खुली है, तब से इस इलाके की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो गया है, क्योंकि रात 1 बजे के बाद अक्सर वहां ऐसे लड़कों का जमावड़ा लगा रहने लगा है, जो आपराधिक प्रवृत्ति के हैं और छोटी सी बात पर मरने मारने को उतारू हो जाते हैं. इसी वजह से लोग भी रात को बाहर जाने से डरने लगे हैं. हालांकि पुलिस के अधिकारियों का दावा है कि रात को पुलिस की बाइक सवार टीमें इस इलाके में कईं राउंड चक्कर मारती रहती हैं.

हवा होती जेट एयरवेज

10 साल पहले नएनए तरह के उत्पादों के समाचार आते थे, अब पुराने उत्पादों को बनाने वाली कंपनियों की खरीद और बिक्री के आ रहे हैं. एयर इंडिया और जेट एयरवेज जैसी बड़ी एयरलाइंस कंपनियों की बिक्री के समाचार यह साफ करते हैं कि बड़ा बिजनैस चलाना अब आसान नहीं रह गया है.

डीएलएफ, जेपी, यूनिटैक, आम्रपाली जैसे नामी बिल्डरों का पत्ता साफ सा होने लगा है. रुइया, धूत जैसे बड़े उद्योगपति अपनी जायदादें बेच रहे हैं. स्टील कंपनियां बिक रही हैं.

इस सब का एक बड़ा छिपा कारण वह कंप्यूटर टैक्नोलौजी है जिस ने सब को आकर्षित करतेकरते सम्मोहित कर डाला है. दुनिया की हवा यदि कार्बन डाईऔक्साइड, सल्फर, प्लास्टिक, मीथेन से प्रभावित हुई है तो व्यापार व उद्योगजगत कंप्यूटर क्रांति का शिकार हुआ है.

कंप्यूटरों ने निर्माण में अद्भुत क्रांति की है, इस में संदेह नहीं. न केवल उत्पादन का तरीका बदला है, रोजमर्रा का प्रबंधन व वित्तीय सहायता पाने का तरीका भी बदला है. दूसरा पक्ष यह है कि कंप्यूटरों की हर बात की बारीकी से परख करने की क्षमता ने बहुत से दोष पैदा किए हैं. जिन बातों को छोटा समझ कर आगे चला जा सकता था, अब उन्हें ढोना पड़ता है.

हर कंपनी में एक ऐसी बड़ी फौज खड़ी हो गई है जो कंप्यूटर स्क्रीनों पर तथ्यों को तोड़तीमरोड़ती रहती है. उद्योगपतियों और उन के मैनेजरों की छठी इंद्रिय को जंग लग गया और कंप्यूटर रिपोर्ट सर्वोपरि हो गई है.

नई तकनीक का विरोध करने का मतलब एक तरह से राम और कृष्ण की पोल खोलने जैसा हो गया. ‘कंप्यूटर ने कहा है तो सही ही होगा’ का सिद्धांत चलने लगा है और मालिकों के अपने गुण, अनुभव, दूरदृष्टि, सामाजिक उद्देश्य नष्ट हो गए.

दुनिया ने काफी तकनीकी उन्नति की पर उस से ज्यादा स्थिरता को बिगाड़ दिया है. कंप्यूटर के सहारे हरेक की जिंदगी बंध गई है. हम गुलाम हो गए हैं और आसानी से कंप्यूटर द्वारा बहकाए जा सकते हैं.

जेट एयरवेज, जिसे नरेश गोयल ने 25 साल पहले शुरू किया था, एक क्रांति थी. वह एयर इंडिया की सरकारी मोनोपोली का जवाब था. पर गलत प्रबंधन, गलत प्रतियोगिता, कंप्यूटरों पर निर्भरता के कारण न केवल जेट एयरवेज आज खतरे में है, वह दूसरी हवाई कंपनियों के लिए खतरा भी पैदा कर रही है. यदि वह बंद होगी तो दूसरी कंपनियों को कमाई के अवसर मिलेंगे पर यात्रियों को बहुत महंगे टिकट खरीदने पड़ेंगे.

अगर बिना हाईफाई सिस्टमों के यह हवाईसेवा चलती तो शायद ठीक चलती रहती. अंधाधुंध प्रचार और इंटरनैटजनित दामों का आकर्षण बेशक हमारी हवाई यात्राओं को खतरे में डाल रहा है. इंटरनैट पर निर्भरता के कारण बुकिंग तो आसान हो गई पर प्रबंधकों को शिकायतें मिलनी बंद हो गईं. यह इस क्षेत्र के विनाश का बड़ा कारण है.

करण जौहर का असली नाम पता है आपको? उनका नाम है…

क्या आपको पता है कि करण जौहर का असली नाम क्या है? उनका असली नाम ना करण है और ना ही उनकी प्रोडक्शन कंपनी धर्मा प्रोडक्शन से जुड़ा है. एक हिंदी अखबार के कार्यक्रम में उन्होंने अपने असली नाम का खुलासा किया.

अखबार के कार्यक्रम में बतौर अतिथि शरीक हुए करण ने बताया कि धर्मा प्रोडक्शन का नाम उनके नाम पर नहीं पड़ा है, क्योंकि उनका असली नाम करण धरम जौहर है ही नहीं. करण ने बताया कि उनका असली नाम राहुल था. बाद में उनकी मां ने कुंडली के हिसाब से नाम बदल कर करण कर दिया. उनका असली नाम राहुल कुमार जैहर है.

प्रोडक्शन कंपनी का नाम धर्मा प्रोडक्शन पड़ने पर करण ने कहा कि उनके पिता यश जौहर की हिंदुजा परिवार के साथ पार्टनरशिप थी. हिंदुजा परिवार के एक लड़के का नाम धरम हिंदुजा था, जिसके नाम पर उनके कंपनी का नाम पड़ा.

फिल्मों के बारे में बात करते हुए करण ने कई बातों का खुलासा किया. करण ने कहा कि वो फिल्मों में काम करने में कोई दिलचस्पी नहीं रखते, क्योंकि वो बहुत ही बुरे एक्टर हैं. उन्हें शार्ट फिल्में बनाने में भी मजा आता है क्योंकि ऐसा करते वक्त उन पर बौक्स औफिस पर प्रेशर नहीं होता.

लोगों को दीवाना बना रहा इस लड़की का डांस, देखें वीडियो

साल 2017 में रिलीज हुई फिल्म ‘मशीन’ का एक गाना ‘तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त’ लोगों के बीच काफी मशहूर हुआ था. आपको बता दें, यह गाना 23 साल पहले आई फिल्म ‘मोहरा’ की है, जिसमें अक्षय कुमार और रवीना टंडन का डांस काफी लोकप्रिय हुआ था, आज भी लोगों के बीच इस गाने की लोकप्रियता बनी हुई है. लोगों को यह गाना इतना पसंद आया कि वे इस गाने पर अपने डांस के वीडियो बनाकर इंटरनेट पर अपलोड करने लगे. ‘मशीन’ में इसी गाने को थोड़ा नए अंदाज में पेश किया गया.

एक यूट्यूब चैनल मनप्रीत तूर  ने 2017 को एक वीडियो अपलोड किया था, जिसे अब तक इंटरनेट पर तेजी के साथ देखा जा रहा और यही वजह है कि इस वीडियो को अब तक एक करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है. वीडियो में दिए गए डिटेल के मुताबिक डांस करने वाली लड़की का नाम गुरप्रीत धालीवाल है. ‘तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त’ गाने पर गुरप्रीत अपने पार्टनर के साथ मिलकर जबरदस्त डांस करती नजर आ रही हैं, जो इन दिनों इंटरनेट पर लोगों को दीवाना बना रहा है.

फिल्म ‘मशीन’ में  ‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त’ गाने को नेहा कक्कड़ और उदित नारायण ने मिलकर गाया है. इसी साल 3 अप्रैल को यूट्यूब को अपलोड किए गए इस गाने को अब तक 5 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है.

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