एक समय ऐसा भी था जब मोटरसाइकिल का किसी घर में होना रुतबे की बात मानी जाती थी और अगर किसी को वह दहेज में मिल जाती थी तो पूरे इलाके में मानो मुनादी सी पिट जाती थी.

आज दहेज भी बरकरार है और इस के नाम पर गाड़ी मांगने का रिवाज भी. पर कभीकभार इस मांगने के खेल में पासा उलटा भी पड़ जाता है.

ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ. यहां दहेज को ले कर हुए झगड़े में दूल्हे और बरातियों को बंधक बनाए जाने का मामला सामने आया.

इतना ही नहीं, वधू पक्ष ने महल्ले वालों के साथ मिल कर दूल्हे समेत 4 लोगों के सिर मुंड़वा दिए. मामले की सूचना देर रात पुलिस को हुई तो बंधक बनाए गए बरातियों को छुड़ाया जा सका.

यह था मामला

जानकारी के मुताबिक, खुर्रमनगर इलाके में लड़की के पिता सब्जी बेच कर गुजारा करते हैं. उन का शहीद जियाउल हक पार्क के पास कच्चा मकान है. अपनी बेटी का रिश्ता उन्होंने बाराबंकी के धौकलपुरवा के रहने वाले अब्दुल कलाम से तय किया था. कुछ समय पहले ही मंगनी की रस्म हुई थी. सामाजिक रीतिरिवाजों की लाज बचाने के लिए उन्होंने निकाह के लिए दहेज का सामान जुटाया था.

लड़की के पिता का आरोप है कि निकाह से हफ्ताभर पहले ही लड़के ने दहेज की मांगें बढ़ानी शुरू कर दीं. जैसेतैसे उन्होंने उस की सभी मांगें पूरी करने की कोशिश भी की.

निकाह के दिन दूल्हे ने दहेज का सामान देखा तो ‘पल्सर’ मोटरसाइकिल देख कर कहने लगा कि उसे तो ‘अपाचे’ मोटरसाइकिल चाहिए. इतना ही नहीं, उस ने 4 तोला सोने की चेन की भी मांग रख दी.

दुल्हन के पिता ने बताया कि जब उन्होंने मांग पूरी करने में हाथ खड़े कर दिए तो दूल्हा बरात वापस ले जाने की धमकी देने लगा.

आरोप है कि लड़की वालों ने 25,000 रुपए की मेहर तय की थी. इस पर भी लड़के वालों ने एतराज जताया. उन्होंने निकाहनामा से इस शर्त को हटाने की मांग की.

लड़की के पिता का कहना है कि वे तकरीबन 3 से 4 लाख रुपए दहेज दे रहे थे, लिहाजा 25,000 रुपए मेहर की रकम इस के सामने कुछ नहीं थी.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विवाद के बीच दूल्हा और बराती शराब के नशे में हंगामा करने लगे.  इस के बाद दुलहन पक्ष के लोग भी नाराज होने लगे और बिना निकाह किए जाने पर नतीजा भुगतने की चेतावनी दी गई.

हालात बिगड़ते देख बरातियों ने मौके से भाग निकलने की कोशिश की. इस दौरान दूल्हा और उस का भाई भी भागने लगे तो लड़की के घर वालों ने उन्हें पकड़ लिया. इस के बाद भीड़ ने दूल्हे समेत 4 लोगों के सिर मुंड़वा दिए.

इस पूरे हंगामे पर दुलहन की दादी का कहना था, ‘‘उन्होंने शादी से 5 दिन पहले ये मांगें रखी थीं. जब हम ने कहा कि हम मांग पूरी नहीं कर सकते, तो दूल्हे ने निकाह करने से इनकार कर दिया. मुझे नहीं पता कि उस का सिर किस ने मुंड़वा दिया.’’

दहेज के इस मामले में तो वधू पक्ष ने समाज की परवाह न करते हुए वर पक्ष को सबक सिखा दिया, पर हर बार ऐसा नहीं हो पाता है. एक हैरतअंगेज मामले में ससुराल वालों ने अपनी 2 बहुओं को डेढ़ लाख रुपए में बेच डाला था.

सरस सलिल विशेष

यह केस विरार पुलिस स्टेशन इलाके का था. उन बहुओं को तब पता चला, जब खरीदने वाला उन्हें राजस्थान से वसई ले आया था.

पुलिस ने बताया कि इस मामले में पीडि़ता औरतों के पति, सासससुर समेत 12 लोग शामिल थे. मुंबई के विरार (पश्चिम) इलाके की एमबी स्टेट निवासी 24 साला पीडि़ता ने बताया कि साल 2015 में उस की शादी विरार के रहने वाले संजय मोहनलाल रावल से हुई थी. उस की छोटी बहन की शादी संजय के छोटे भाई वरुण रावल के साथ हुई थी.

वे दोनों बहनें एक ही घर में रहती थीं. शादी के बाद से ससुराल वाले उन दोनों बहनों को दहेज के लिए सताने लगे थे. ससुराल वालों ने उन से अपने मायके से 5 लाख रुपए लाने की डिमांड रखी थी. ऐसा नहीं करने पर उन्हें सताया जाने लगा था.

30 अगस्त को ससुराल वाले किसी बहाने से दोनों बहुओं को राजस्थान ले गए. वहां भी दोनों को मारापीटा गया. जलाने की भी धमकी दी गई. 10 सितंबर को ससुराल वालों ने उन दोनों को ट्रेन में बैठा दिया और अपने घर विरार जाने को कहा. उन के साथ एक अनजान शख्स भी गया था.

दूसरे दिन जब ट्रेन वसई रेलवे स्टेशन पहुंची तो उस आदमी ने उन से मीरा रोड चलने को कहा. इस बात पर उन का झगड़ा हो गया. यह देख कर कुछ लोग बीचबचाव में आ गए.

वहां उस आदमी ने खुलासा किया कि इन औरतों की ससुराल वालों ने इन्हें उसे डेढ़ लाख रुपए में बेचा है और वह इतना बोल कर वहां से चला गया.

इन दोनों मामलों में किसी की जान नहीं गई जबकि दहेज के दावानल में न जाने कितनी विवाहिताएं अपनी जान तक गंवा देती हैं.

नैशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि अलगअलग राज्यों से साल 2012 में दहेज हत्या के 8,233 मामले सामने आए थे. आंकड़ों का औसत बताता है कि हर घंटे में एक औरत दहेज की बलि चढ़ रही है.

केंद्र सरकार की ओर से जुलाई, 2015 में जारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते 3 सालों में देश में दहेज संबंधी कारणों से मौत का आंकड़ा 24,771 था. जिन में से 7,048 मामले सिर्फ उत्तर प्रदेश से थे. इस के बाद बिहार और मध्य प्रदेश में क्रमश: 3,830 और 2,252 मौतों का आंकड़ा सामने आया.

दहेज निषेध अधिनियम

दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के मुताबिक, दहेज लेने, देने या इस के लेनदेन में सहयोग करने पर 5 साल की कैद और 15,000 रुपए तक के जुर्माने की सजा हो सकती है.

दहेज के लिए सताने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए, जो पति और उस के रिश्तेदारों द्वारा जायदाद या कीमती सामान के लिए अवैधानिक मांग के मामले से जुड़ी है, के तहत 3 साल की कैद और जुर्माना हो सकता है.

धारा 406 के तहत लड़की के पति और ससुराल वालों के लिए 3 साल की कैद या जुर्माना या फिर दोनों हो सकती हैं, अगर वे लड़की के स्त्रीधन को उसे सौंपने से मना करते हैं.

यदि किसी लड़की की शादी के 7 साल के भीतर असामान्य हालात में मौत होती है और यह साबित कर दिया जाता है कि मौत से पहले उसे दहेज के लिए सताया गया है, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 304 बी के तहत लड़की के पति और रिश्तेदारों को कम से कम 7 साल से ले कर ताउम्र कैद की सजा हो सकती है.

आज की जिंदगी में बहुत से लोग इतने लालची होते जा रहे हैं कि वे अपने बेटों को दहेज के बाजार में बेचने से भी नहीं हिचकिचाते हैं. बेटे की पढ़ाई पर लगाई गई रकम को वे लड़की वालों से वसूलने की कोशिश करते हैं और जब उन के मुंह खून लग जाता है तो वे लड़की को बाद में भी सताने से बाज नहीं आते हैं. कुछ मामलों में शादी के दौरान ही दूल्हे पक्ष को सबक सिखा दिया जाता है तो कहीं बाद में दुलहनें भी बिकती नजर आती हैं.

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