शाहरुख ने पूरी की शादीशुदा जोड़े की ख्वाहिश

बौलीवुड सितारों के घरों के बाहर फैंस का तांता लगा रहता है. इनमें से कुछ सेलिब्रिटिज ऐसे भी हैं जो अपने फैंस को निराश नहीं करते. जब भी उन्हें वक्त मिलता है अपने चाहने वालों को दीदार दे देते हैं. कुछ फैंस की दिवानगी इस हद तक होती है कि वो सितारों से खास मेंशन मिल जाता है. कुछ ऐसा ही मामला हाल ही में शाहरुख के बंगले मन्नत पर देखने को मिला.

कुछ दिनों पहले एक शादीशुदा जोड़े ने शाहरुख के बंगले ‘मन्नत’ के बाहर तस्वीर खींची और ट्विटर पर अपलोड की. शाहरुख ट्विटर पर एक्टिव रहते हैं और अक्सर अपने फैंस को जवाब देते रहते हैं. जब उनके सामने ये तस्वीर आई तो उन्होंने इस तस्वीर पर कमेंट करते हुए ‘गॉड ब्लेस यू’ लिखा.

अपनी तस्वीर को शेयर करते हुए कपल्स ने लिखा था कि , ‘लोग कहते हैं कि शादी के बाद मंदिर जाना चाहिए. लेकिन हम शादी के बाद मन्नत गए. हमें पता है कि आपने हमें देखा और हाथ हिलाया. शुक्रिया, इस दिन को खास बनाने के लिए’. इससे पहले भी जून में इस कपल ने अपनी शादी की बात बताते हुए शाहरुख से ब्लेसिंग्स की अपील की थी.

भाजपा की नई चाल: मूर्ति में सिमटी मंदिर की राजनीति

अयोध्या में शिव सेना का ‘संत सम्मान’ और भारतीय जनता पार्टी की ‘धर्म संसद’ खत्म हो चुकी है. इस बीच अयोध्या का जनजीवन पूरी तरह से ठप हो गया था. सब से ज्यादा बुरा असर स्कूली बच्चों पर पड़ा. निजी स्कूलों और कई सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बंद रही.

शिव सेना के ‘संत सम्मान’ में उद्धव ठाकरे पूरे परिवार के साथ हावी रहे. अयोध्या में पहली बार शिव सेना प्रमुख आए थे. इस के बाद भी जनता का समर्थन उन को नहीं मिला.

शिव सेना ने हमेशा से ही मुंबई में उत्तर भारतीयों का विरोध किया है. ऐसे में उत्तर प्रदेश के लोगों ने शिव सेना को अपना समर्थन नहीं दिया.

‘धर्म संसद’ का आयोजन वैसे तो विश्व हिंदू परिषद का था, पर इस में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की पूरी ताकत लगी थी. संतों से ज्यादा भाजपा नेताओं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऊपर सब की नजर थी.

‘धर्म संसद’ में राम मंदिर को ले कर कोई ठोस बात नहीं हुई. उत्तर प्रदेश की सरकार ने अयोध्या में राम की मूर्ति लगाने का ऐलान किया. ऐसे में राम मंदिर की बात को राम की मूर्ति में बदल दिया गया.

उत्तर प्रदेश सरकार ने 800 करोड़ रुपए की लागत से 221 मीटर ऊंची मूर्ति बनाने की बात कही. इस काम को करने में साढ़े 3 साल का समय बताया गया है.

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर को हाशिए पर रखा था, पर देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्ति लगाने की बात कही थी.

4 साल में गुजरात में सरदार सरोवर बांध के पास वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची मूर्ति लगाई गई. राम की मूर्ति इस से भी बड़ी होगी.

बेअसर रही अयोध्या

अयोध्या की जनता इसे बेमकसद की कवायद बताती है. यहां के लोग मानते हैं कि भीड़ जुटाने से कोर्ट के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ता है. इस से केवल अयोध्या में रहने वालों को परेशानी होती है.

इसी तरह साल 1992 के पहले कई साल तक कारसेवा के बहाने भीड़ जुटाई जाती थी. अब फिर से मंदिर के नाम पर भीड़ जुटाई जा रही है. इस से अयोध्या के रामकोट महल्ले में रहने वाले लोगों को अपने घरों में आनेजाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है.

अयोध्या में रहने वाले व्यापारी भी इस तरह की बंदी से काफी परेशान होते हैं. इन दिनों यहां कारोबार ठप पड़ जाता है. कारोबारी नेता मानते हैं कि अयोध्या के नाम पर पूरे देश में राजनीति होती है, पर इस का बुरा असर केवल अयोध्या के कारोबार पर पड़ता है.

अयोध्या के विनीत मौर्य मानते हैं

कि अयोध्या अब धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक मुद्दा बन कर रह गया है. मंदिर पर राजनीति अब बंद होनी चाहिए.

साफ दिख रहा है कि भाजपा का मकसद मंदिर मुद्दे को साल 2019 के आम चुनावों तक गरम बनाए रखने का है. अयोध्या के बाद ऐसे आयोजन दिल्ली और प्रयाग में भी होंगे.

जनवरी, 2019 में प्रयागराज में कुंभ का आयोजन हो रहा है. यह मार्च, 2019 तक चलेगा. इसी दौरान अदालत में मंदिर मुद्दे की सुनवाई भी चलेगी. इस से समयसमय पर अयोध्या मुद्दा आम लोगों की जिंदगी पर असर करता रहेगा.

हिंदुत्व की राजनीति करने वाले लोग इस का फायदा लेना चाहेंगे, जबकि मंदिर के मुद्दे को देखें तो भाजपा और उस के साथी संगठनों ने मंदिर को ले कर केवल होहल्ला ही मचाया है, कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं.

इस बार मंदिर मुद्दे पर विरोधी दलों की राजनीति बदली हुई है. वे खामोश रह कर भाजपा की शतरंजी चालों को देख रहे हैं.

साल 1998 के बाद भाजपा के नेता अटल बिहारी वाजपेयी 2 बार देश के प्रधानमंत्री बने थे. उन के समय में भी मंदिर बनाने की दिशा में कोई ठोस काम नहीं हुआ था. उस समय भाजपा ने कहा था कि अटल सरकार बहुमत की सरकार नहीं है, इसलिए मंदिर बनवाने की दिशा में कोई कानून नहीं बनाया जा सकता.

लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी की अगुआई में तो केंद्र में भाजपा की बहुमत वाली सरकार बन गई है. इस के बाद भी 4 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है और अब जब 2019 के लोकसभा चुनाव आने वाले हैं तो उसे राम मंदिर की याद आई है. उस ने राम मंदिर बनाने की जगह पर फैजाबाद जिले का नाम बदल कर अयोध्या कर दिया. अब वह राम मंदिर से दूर सरयू नदी के किनारे राम की मूर्ति लगानेकी बात कर रही है. ऐसे में साफ दिखता है कि भाजपा के लिए राम मंदिर एक चुनावी मुद्दे से ज्यादा कुछ नहीं है.

मंदिर और अदालत

राजनीतिक फायदे की नजर से अयोध्या राजनीति के केंद्र में है. भाजपा मंदिर मुद्दे पर जनता को ऐसा बताती है कि जैसे सुप्रीम कोर्ट में यह मुकदमा मंदिर बनाने के लिए है. कोर्ट में मंदिर को ले कर केवल हिंदूमुसलिम ही आमनेसामने हैं.

यह सच नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का मुकदमा इस बात के लिए है कि विवादित जगह किस की है.

दरअसल, इस मुकदमे के 3 पक्षकार हैं. इन में से 2 पक्षकार रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा हिंदुओं की पार्टी है. मुकदमे की तीसरी पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड ही मुसलिम पक्षकार है.

सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा, वह इन तीनों पक्षकारों में से ही किसी के हक में होगा. अगर मंदिर के पक्ष में भी फैसला हो गया तो 2 हिंदू पक्षकारों को राजी करना होगा.

समझने वाली बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी या विश्व हिंदू परिषद ने साल 2010 में हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद भी रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़े से बात करने की कोशिश नहीं की है.

अगर हालिया केंद्र सरकार दोनों हिंदू पक्षकारों से ही बात कर उन्हें एकजुट कर लेती तो भी लगता कि मंदिर बनाने की दिशा में उस ने सही कदम उठाया है.

भाजपा जिस संत समाज की बात कर रही है उस में भी बड़ी तादाद ऐसे संतों की है जो विश्व हिंदू परिषद के विरोधी हैं. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि मंदिर बनाने में भाजपा का क्या रोल होगा?

60 साल की कानूनी लड़ाई के बाद अयोध्या में राम मंदिर का फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने 30 सितंबर, 2010 को सुनाया था. यह फैसला 3 जजों की स्पैशल बैंच द्वारा 8189 पन्नों में सुनाया गया था. फैसला देने वालों में जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस एसयू खान और जस्टिस धर्मवीर शर्मा शामिल थे.

सब से बड़ा फैसला जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने सुनाया था. 5238 पन्नों के फैसले में उन्होंने कहा था, ‘विवादित ढांचे का मध्य गुंबद हिंदुओं की आस्था और विश्वास के अनुसार राम का जन्मस्थान है. यह पता नहीं चल सका कि मसजिद कब और किस ने बनाई लेकिन यह मसजिद इसलाम के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बनी है, लिहाजा मसजिद का दर्जा नहीं दिया जा सकता.’

2666 पन्नों के फैसले में जस्टिस धर्मवीर शर्मा ने कहा था, ‘पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के नतीजों से साफ है कि विवादित ढांचा पुराने निर्माण को गिरा कर बनाया गया था. एएसआई ने साबित किया है कि यहां पर पहले हिंदुओं का बड़ा धार्मिक ढांचा रहा है यानी यहां हिंदुओं का कोई बड़ा निर्माण था.’

285 पन्नों के फैसले में जस्टिस एसयू खान ने कहा, ‘जमीन पर हिंदू, मुसलमान और निर्मोही अखाड़े का बराबर हक है. इसे तीनों में बराबर बांटा जाना चाहिए. अगर किसी पार्टी का हिस्सा कम पड़ता है तो उस की भरपाई केंद्र सरकार द्वारा अधिगृहीत जमीन से दे कर करनी चाहिए.’

अदालत के फैसले के बाद रामलला विराजमान पक्ष को अधिकार मिला कि रामलला जहां पर हैं वहीं विराजमान रहेंगे. जहां रामलला की पूजाअर्चना हो रही है वह स्थल राम जन्मभूमि है.  रामलला को एकतिहाई जमीन भी दी गई.

निर्मोही अखाड़े को रामचबूतरा और सीता रसोई दी गई. साथ ही, एकतिहाई जमीन भी दी गई.

इसी तरह मुकदमे के तीसरे पक्ष सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी एकतिहाई जमीन दी गई है. कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड की अपील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि 1949 में जब मूर्तियां वहां पर रखी गईं, तब मुकदमा दाखिल क्यों नहीं किया गया?

अयोध्या का यह फैसला जितना रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़े और सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए अहम है उस से ज्यादा अहम राजनीतिक दलों के लिए भी है. ऐसे में चुनाव के समय यह राजनीतिक मुद्दा बन जाता है.

अयोध्या मामला: एक नजर में

1528: मुगल बादशाह बाबर ने मसजिद बनवाई. हिंदुओं का दावा है कि इस जगह पर पहले राम मंदिर था.

1859: ब्रिटिश अफसरों ने एक अलग बोर्ड बना कर पूजा स्थलों को अलगअलग कर दिया. अंदर का हिस्सा मुसलिमों को और बाहर का हिस्सा हिंदुओं को दिया.

1885: महंत रघुवर दास ने याचिका दायर कर राम चबूतरे पर छतरी बनवाने की मांग की.

1949: मसजिद के भीतर राम की प्रतिमा प्रकट हुई. मुसलिमों का कहना है कि प्रतिमा हिंदुओं ने रखी.  सरकार ने उस जगह को विवादित बता कर ताला लगा दिया.

1950: मालिकाना हक के लिए गोपाल सिंह विशारद ने पहला मुकदमा दायर किया. अदालत ने प्रतिमा को हटाने पर रोक लगा कर पूजा की इजाजत दी.

1959: निर्मोही अखाड़े ने भी मुकदमा दाखिल किया. उस ने सरकारी रिसीवर हटाने और खुद का मालिकाना हक देने की बात कही.

1961: उत्तर प्रदेश सुन्नी सैंट्रल बोर्ड औफ वक्फ भी विवाद में शामिल हुआ.

1986: फैजाबाद जिला अदालत ने मसजिद के फाटक खोलने और राम दर्शन की इजाजत दी. मुसलिमों ने बाबरी मसजिद ऐक्शन कमेटी बनाई.

1989: विश्व हिंदू परिषद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमा दायर कर मालिकाना हक राम के नाम पर ऐलान करने की गुजारिश की. फैजाबाद जिला कोर्ट में चल रहे सारे मामले इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजे गए.

इसी साल विश्व हिंदू परिषद ने विवादित जगह के पास ही राम मंदिर का शिलान्यास किया.

1990: विश्व हिंदू परिषद की अगुआई में कारसेवकों ने विवादित जगह पर बने राम मंदिर में तोड़फोड़ की. मुलायम सरकार ने गोलीबारी की.

1992: विवादित जगह पर कारसेवकों ने तीनों गुंबद ढहा दिए.

2002: अदालत ने एएसआई को खुदाई कर यह पता लगाने के लिए कहा कि विवादित जगह के नीचे मंदिर था या नहीं. इसी साल हाईकोर्ट के 3 जजों ने मामले की सुनवाई शुरू की.

2010: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने विवादित जगह को 3 हिस्सों में बांटने का आदेश दिया.

अय्याशी की चाहत बनी आफत

मालदार और रसूखदार लोग पैसों के दम पर दुनिया की हर चीज खरीद सकते हैं लेकिन उन की जिंदगी में जरूरी नहीं  कि सैक्स सुख भी वैसा ही हो जैसा कि वे चाहते हैं. पैसे से सैक्स सुख हासिल करना कितना महंगा पड़ता है, यह आएदिन उजागर होता रहता है.

लेकिन यह अंदाजा कोई नहीं लगा पाएगा कि सैक्स सुख जान जाने की वजह भी बन सकता है. लोग यहीं तक उम्मीद कर सकते हैं कि जो पैसे वाले सैक्स का मजा लेने बाजार जाते हैं, पकड़े जाने पर उन के हिस्से में बदनामी ही आती है और एहतियात न बरतें तो उन्हें ब्लैकमेल भी होना पड़ता है, लेकिन मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके के छतरपुर जिले की इस वारदात ने सभी को चौंका दिया कि ऐसा भी हो सकता है.

दास्तां एक सेठ की

आनंद जैन उर्फ सुकुमाल जैन मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके के छतरपुर जिले के जानेमाने लोहा व्यापारी थे.

50 साला इस अधेड़ के पास करोड़ों की दौलत थी और शहर में अच्छीखासी इज्जत भी थी. धार्मिक इमेज वाले आनंद जैन रोजाना मंदिर जाते थे. यहां तक कि रात को दुकान बंद करने के बाद भी वे शहर की पहाड़ी पर बने मंदिर में दर्शन करते हुए घर जाते थे.

9 अक्तूबर, 2018 की रात आनंद जैन की हत्या उन की ही दुकान में हो गई, तो शहरभर में सनाका खिंच गया. उस रात वे घर वालों को ‘थोड़ी देर में वापस आता हूं’ कह कर कहीं चले गए थे.

देर रात तक जब आनंद जैन नहीं लौटे तो घर वालोें को चिंता हुई, क्योंकि बारबार फोन करने पर भी उन का मोबाइल नंबर नहीं लग रहा था.

उन का जवान बेटा पीयूष जैन ढूंढ़ता हुआ दुकान में पहुंचा तो वहां उस ने पिता की खून से लथपथ लाश देखी.

सदमे में आ गए पीयूष जैन ने खुद को संभालते हुए पिता की हत्या की खबर पुलिस और दूसरे जानपहचान वालों को दी तो भीड़ इकट्ठा होना शुरू हो गई.

पुलिसिया जांच में लाश के पास एक हथौड़ा पड़ा मिला जिस से अंदाजा यह लगाया गया कि उसी से हत्यारे ने उन की हत्या की होगी, क्योंकि आनंद जैन का सिर किसी तरबूज की तरह फटा हुआ था.

दुकान की तलाशी लेने पर जो चौंका देने वाली चीजें बरामद हुईं वे थीं औरतों की पहनने वाली एक ब्रा और एक इस्तेमाल किया हुआ कंडोम जिस में वीर्य भरा हुआ था.

ये चीजें हालांकि उन की इज्जतदार और धार्मिक इमेज से मेल खाती हुई नहीं थीं, लेकिन यह अंदाजा लगाना पुलिस वालों की मजबूरी हो गई थी कि जरूर आनंद जैन ने किसी कालगर्ल को बुलाया होगा और उस से किसी बात पर झगड़ा हुआ होगा जो उन की बेरहमी से की गई हत्या की वजह बना, लेकिन जब सच सामने आया तो हर कोई चौंक पड़ा.

यह थी लत

आनंद जैन के मोबाइल फोन के सहारे पुलिस ने चंद घंटों में ही कातिल को ढूंढ़ निकाला जिस के नंबर पर उन की अकसर रात को ही देर तक बातें होती रहती थीं.

वह कातिल एक बेरोजगार नौजवान राजेश रैकवार था जिस की हैसियत राजा भोज जैसे आनंद जैन के सामने गंगू तेली सरीखी भी नहीं थी. पुलिस उसे गिरफ्तार करने तो शक की बिना पर गई थी लेकिन पुलिस वालों को देखते ही उस के होश फाख्ता हो गए और मामूली पूछताछ में ही उस ने खुद मान लिया कि आनंद जैन की हत्या उस ने ही की है.

हत्या क्यों की? इस सवाल के जवाब में राजेश ने जो बताया वह और भी हैरान कर देने वाला था.

बकौल राजेश, ‘‘आनंद जैन उस के साथ सैक्स करते थे और इस के एवज में उसे हर बार के 400 रुपए देते थे.’’

राजेश के मुताबिक, वह कुछ दिनों पहले ही काम मांगने के लिए आनंद जैन की दुकान पर गया था. काम देने में तो उन्होंने मजबूरी जता दी लेकिन उस के हाथ में खर्चे के लिए 200 रुपए रख दिए थे.

राजेश इस बात पर हैरान हुआ था क्योंकि वह जहां भी काम मांगने जाता था वहां लोग उसे झिड़क कर भगा देते थे और 200 रुपए तो दूर की बात है, 2 रुपए भी नहीं देते थे. जितनी इज्जत इन सेठजी ने दी थी, उतनी आज तक किसी बड़े आदमी ने उसे नहीं दी थी.

ज्यादा हैरानी की बात तो यह थी कि इस के एवज में सेठजी उस से कोई हम्माली या बेगारी नहीं करवा रहे थे बल्कि जातेजाते उन्होंने कहा था कि जब भी पैसों की जरूरत पड़े तो ले जाना.

इस बात और हमदर्दी का राजेश पर वाजिब असर पड़ा था कि काश, दुनिया में सभी पैसे वाले आनंद सेठ जैसे हो जाएं तो कहीं बेरोजगारी और जातपांत का नाम नहीं होगा.

अब जरूरत पड़ने पर राजेश आनंद जैन के पास जाने लगा जिन्होंने कभी उसे निराश नहीं किया था. लेकिन अब वे  पैसे लेने उसे रात में बुलाने लगे थे.

ऐसे ही एक दिन बातें करतेकरते आनंद जैन ने उसे अपना हस्तमैथुन करने के लिए कहा तो वह अचकचा उठा. उस ने मना करने की कोशिश की लेकिन आनंद जैन के बारबार कहने पर मना नहीं कर सका.

राजेश को इस बात का भी डर था कि अगर वह मना करेगा तो सेठजी पैसे देना छोड़ देंगे और मुफ्त की मलाई मारी जाएगी. लिहाजा, जब भी देर रात को आनंद जैन फोन कर के उसे बुलाते तो वह उन का हस्तमैथुन कर आता था.

राजेश जैसे बेरोजगार नौजवान के लिए यह कोई घाटे का सौदा नहीं था लेकिन एक रात आनंद जैन ने उस से सैक्स करने की बात कही तो वह सकपका उठा.

भले ही राजेश झुग्गीझोंपड़ी में रहता था लेकिन ऐसा गंदा काम उस ने पहले कभी नहीं किया था. मना कर देने पर आनंद जैन ने उसे पेशकश की कि अगर वह इस के लिए तैयार हो जाए तो वे हर बार 400 रुपए उसे देंगे.

पैसों की जरूरत के चलते राजेश के सामने उन की बात मान लेने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था. लिहाजा, वह इस काम के लिए भी तैयार हो गया. फिर तो आनंद जैन उसे कभी भी दुकान में बुला कर अपनी ख्वाहिश पूरी करने लगे.

इस दौरान वे उसे वैसा ही प्यार करते थे और डौयलौग बोलते थे जैसे कोेई मर्द औरत को प्यार करते वक्त करता और बोलता है.

9 अक्तूबर, 2018 की रात को घर जाने के बाद आनंद जैन को फिर से सैक्स की तलब लगी तो उन्होंने राजेश को फोन किया. इस पर राजेश ने जवाब दिया कि नवरात्र के दिनों में वह ऐसा गंदा काम नहीं कर सकता. इस से व्रत टूट जाएगा.

यह जवाब सुन कर आनंद जैन ने उसे ढील देते हुए कहा कि ठीक है तो फिर हाथ से ही कर जाना.

राजेश के सिर फिर डर का यह भूत सवार हो गया कि अगर नहीं गया तो पैसे मिलना बंद हो जाएगा और इतने पैसे वाले सेठ के लिए लड़कों की क्या कमी, वे किसी दूसरे को फांस लेंगे.

‘सिर्फ हस्तमैथुन ही तो करना है,’ यह सोचते हुए राजेश वारदात की रात उन की दुकान पर पहुंच गया. लेकिन उसे आया देख आनंद जैन ने फिर सैक्स की जिद पकड़ ली तो उस ने साफ मना करते हुए पहले वाला जवाब दोहरा दिया.

इस पर आनंद जैन जबरदस्ती करने लगे तो उसे और गुस्सा आ गया और उस ने दुकान में पड़ा हथौड़ा उठा कर उन के सिर पर दे मारा. सिर तरबूज की तरह फट गया और आनंद जैन जमीन पर गिर कर तड़पने लगे.

आनंद जैन को उन के हाल पर छोड़ कर राजेश उन के पास से 20,000 रुपए और सोने की चैन गले से उतार कर ले गया. गिरफ्तार होने के बाद पुलिस ने वे चीजें बरामद कर लीं.

क्या करें ऐसे मर्द

राजेश अब जेल में बैठा अपने किए पर पछता रहा है, पर सवाल आनंद जैन जैसे खातेपीते रईस मर्दों का है जिन्हें कई वजहों के चलते बीवी या औरतों के साथ सैक्स में मजा नहीं आता तो वे लड़कों को सैक्स सुख का जरीया बना लेते हैं. कई लोग मुंहमांगे पैसे दे कर अपना हस्तमैथुन करवाते हैं तो कई लोग मुखमैथुन और गुदामैथुन करते और करवाते हैं.

रजामंदी से हो तो इस सौदे में कोई हर्ज नहीं क्योंकि अब तो सुप्रीम कोर्ट भी इसे कानूनी मंजूरी दे चुका है लेकिन जबरदस्ती होगी तो ऐसी वारदातें भी होंगी.

ऐसे काम चूंकि चोरीछिपे होते हैं इसलिए किसी को हवा भी नहीं लगती. हवा तब लगती है जब कोई बड़ा कांड हो जाता है.

ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री रह चुके भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता राघवजी भाई का सुर्खियों में रहा था जो अपने घरेलू नौकर राजकुमार के साथ वही सब करते थे जो आनंद जैन राजेश के साथ कर रहे थे.

तब राघवजी की ज्यादतियों से तंग आ गए राजकुमार ने उन की करतूतों की सीडी बना कर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी. इस के चलते राघवजी को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उस कांड की बदनामी का दाग आज तक उन के दामन पर लगा है.

बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही समलैंगिक संबंधों को कानूनी मंजूरी दी तो राघवजी ने राहत की सांस लेते हुए कहा था कि अब उन पर चल रहा धारा 377 का मुकदमा बंद हो जाएगा.

लेकिन लौंडेबाजी के आदी हो गए मर्दों का कोई इलाज नहीं है. भोपाल के सैक्स में माहिर एक नामी डाक्टर की मानें तो यह कोई बीमारी नहीं है लेकिन इस के लिए जोरजबरदस्ती करना ठीक नहीं. दूसरे, नाबालिगों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह अभी भी कानूनन जुर्म है.

इन्हीं डाक्टर का यह भी कहना है कि कई वजहों के चलते कुछ मर्दों को औरतों के साथ सैक्स करने में मजा नहीं आता है इसलिए वे लड़कों को फंसाते हैं. यह उन की मजबूरी हो जाती है.

ज्यादातर मर्द दूसरे के हस्तमैथुन से संतुष्ट हो जाते हैं क्योंकि वह पूरे फोर्स से होता है लेकिन कुछ को सैक्स में ही मजा आता है.

अब कानून भी उन के साथ है लेकिन इस के बाद भी उन्हें फूंकफूंक कर कदम रखने होंगे. इस में उन का पार्टनर ब्लैकमेल भी कर सकता है और नाजायज मांगें भी मनवाने का दबाव बना सकता है क्योंकि उन की कमजोरी वह समझ चुका होता है कि ये पैसे वाले लोग अपने चेहरे से शराफत का नकाब उतरने से बहुत डरते हैं.

चौटाला परिवार में दरार

आया रामों और गया रामों के लिए मशहूर हरियाणा में ओम प्रकाश चौटाला की पार्टी इंडियन नैशनल लोकदल दो फाड़ हो गई है और एक तरफ पिता, जो जेल में हैं और अभय चौटाला हैं तो दूसरी ओर ओम प्रकाश चौटाला के ही दूसरे बेटे अजय चौटाला. दोनों ही पार्टियां लगता है दादा देवीलाल और पिता ओम प्रकाश चौटाला के नाम पर चुनाव में उतरेंगी और अपने पिट्ठुओं को कुछ न कुछ दिलाने की कोशिश करेंगी.

इस देश की राजनीति में टुकड़ेटुकड़े होने की आदत हमारी जाति और गोत्र व्यवस्था और संयुक्त परिवार की साझी मिल्कीयत की देन है. हर जना अपनी डेढ़ ईंट की मसजिद बना कर रहना चाहता?है और मजे की बात है कि महल के बजाय अपने दड़बे में ज्यादा खुश रहता है.

हमारी पार्टियों में फूट होती रहती है. किसी के पास राज करने के अलावा तो कुछ काम है नहीं. जनता को तो इस्तेमाल करते हैं. सब मिल कर जनता की मुसीबतों को कम करें या दूर करें यह गलतफहमी भी हमारे नेता नहीं पालते. जनता तो उन के लिए गुलाम है और हर कोई अपने गुलाम चाहता है, गुलामों के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं.

देवीलाल ने जाटोंयादवों को एक करने की कोशिश की थी पर अपने भले के लिए, उन्हें पट्टी पढ़ा काम करने लायक बना कर, उन की हैसियत बढ़ा कर, उन्हें खुशहाल बनाने के लिए नहीं. ओम प्रकाश चौटाला ने उन के बाद गद्दी संभाली और वही किया और अब ओम प्रकाश चौटाला के दोनों बेटे यही कर रहे हैं. अजय चौटाला और अभय चौटाला का झगड़ा गुलामों को बांटने पर है, गुलाम जनता की खुशहाली को ले कर नहीं है.

ऐसा ही कुछ नीतीश कुमार के राज्य बिहार में हो रहा है जहां बागी आवाजें उठ रही हैं. मायावती मुंह फुलाए घूम रही हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे अपने गुलाम दलितों की अकेली मालकिन हैं और ये गुलाम उन्हीं के बने रहें किसी और पार्टी के निशान पर ठप्पा लगाने की आदत न हो उन में.

इन नेताओं को हारजीत से कोई मतलब नहीं होता. विधानसभा या लोकसभा के चुनावों में हारने के बाद भी उन की नेताजी वाली छवि बनी रहती है, इसीलिए शिवपाल यादव और मुलायम सिंह यादव अलग हो गए हैं क्योंकि अखिलेश यादव अपनी चलाना चाहते हैं.

यह न सोचें कि भाजपा इस से मुक्त है. फर्क यह है कि भाजपा में नागपुर के अलावा सब गुलाम हैं नरेंद्र मोदी भी, अमित शाह भी. इन्होंने हिंदुत्व को मालिक मान लिया और सर संघ संचालक को प्रथम पुजारी, बाकी हाल यहां भी यही है. हिंदू गुलामी करते रहें, हिंदू गुलामों की हैसियत सुधरे या न सुधरे, कोई मतलब नहीं. इन सब दलों के लिए सत्ता जनता के लिए कुछ अपनी मरजी का करने का जरीया नहीं है, जनता से अपना काम करवाने के लिए है.

जय चौटाला, जय यादव, जय हिंदुत्व न बोलो, जयजय पावर बोलो.

देह व्यापार में प्यार की कोई जगह नहीं

10 नवंबर, 2016 को दोपहर के करीब 2 बजे राजस्थान के जिला राजसमंद के थाना केवला की पुलिस को सूचना मिली कि उदयपुर से गोमती जाने वाले फोरलेन नेशनल हाईवे के किनारे पड़ासली भैरूंघाटी के पास एक लाश पड़ी है. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी भरत योगी अधिकारियों को घटना के बारे में बता कर घटनास्थल के लिए रवाना हो गए थे. उन के पहुंचतेपहुंचते एसपी डा. विष्णुकांत भी मौके पर पहुंच गए थे. लाश सड़क से 2 सौ मीटर की दूरी पर एक खाई में पड़ी थी. वह एक औरत की लाश थी, जो टीशर्ट और लैगिंग पहने हुए थी. मृतका का रंग गोरा, कद ठिगना तथा शरीर थोड़ा मोटा था. हाथ की अंगुलियों पर टैटू बने थे और नाखूनों पर नेलपौलिश लगी थी. बालों का रंग भूरा था, जिस से अंदाजा लगाया गया कि बालों पर कलर किया गया होगा. एक कान में बाली थी. गले पर गहरे जख्म थे.

मृतका की उम्र 30-35 साल के बीच थी. लाश के पास बीयर की बोतलें पड़ी थीं. देख कर ही लग रहा था कि हत्या कहीं और कर के लाश वहां ला कर फेंकी गई थी. पहनावे से मृतका मेवाड़ क्षेत्र की नहीं लग रही थी.

अनुमान लगाया गया कि मृतका किसी बड़े शहर की रहने वाली थी. आसपास बड़ा शहर उदयपुर था. गुजरात की सीमा भी नजदीक थी. पुलिस ने घटनास्थल से मिले सबूतों को जुटा कर आसपास के लोगों से लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की, लेकिन कोई भी उस की शिनाख्त नहीं कर सका. इस के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए केवला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मुर्दाघर में रखवा दिया.

लाश देख कर डाक्टरों ने बताया कि मृतका की हत्या 10 से 15 घंटे पहले गला घोंट कर की गई थी. बाद में लाश को राजसमंद के सरकारी अस्पताल भिजवा दिया गया था. इसी के साथ लाश की शिनाख्त होने के बाद ही पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया गया.

पुलिस के सामने समस्या मृतका की शिनाख्त की थी. इस के लिए पुलिस ने लाश के फोटो व वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाल दिए. इस के अलावा उदयपुर, प्रतापगढ़ और डूंगरपुर के सभी थानों को लाश के फोटो भेज कर कहा गया कि मृतका का पता लगाने की कोशिश करें. हो सकता है कहीं उस महिला की गुमशुदगी दर्ज हो. इसी के साथ ही हाईवे पर स्थित नेगडि़या और मांडावाड़ा टोल प्लाजा की सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली गईं.

मृतका की लाश के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर डालने से पुलिस को सूचनाएं मिलीं कि मृतका उदयपुर की हो सकती है. इन्हीं सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने उदयपुर जा कर स्थानीय पुलिस की मदद ली. लाश मिलने के तीसरे दिन यानी 12 नवंबर को पता चला कि वह लाश रोमा उर्फ रेशमा की थी, जो मुंबई की रहने वाली थी.

उदयपुर में रोमा जिस्मफरोशी करती थी. पुलिस ने जिस्मफरोशी करने वाली महिलाओं के संपर्क में रहने वाले कुछ लोगों से पता किया तो उन से रोमा का फोन नंबर मिल गया. उस नंबर को वाट्सऐप वाले दूसरे फोन पर डाला गया तो उस की डीपी में मृतका की तसवीर आ गई. वह लाश रोमा उर्फ रेशमा की ही थी.

इस के बाद पुलिस को यह भी पता चल गया कि रोमा उदयपुर में रेखा उर्फ पूजा छाबड़ा के लिए काम करती थी. रेखा उर्फ पूजा छाबड़ा का नाम उदयपुर पुलिस के लिए नया नहीं था. सैक्स रैकेट के मामले में वह उदयपुर की जानीमानी हस्ती थी. रोमा की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने उसे 12 नवंबर को हिरासत में लिया. उस से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस के बडे़ बेटे अनिल और ड्राइवर धनराज मीणा को भी हिरासत में ले लिया.

उदयपुर पुलिस ने तीनों को राजसमंद की थाना केवला पुलिस को सौंप दिया. पूछताछ के बाद पुलिस ने तीनों को 13 नवंबर को रोमा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. इस पूछताछ में रोमा के मुंबई से उदयपुर आने और जिस्मफरोशी के धंधे की सरगना रेखा के बेटे से प्रेम करने से ले कर हत्या तक की कहानी सामने आ गई.

उदयपुर राजस्थान का पर्यटनस्थल है. यहां रोजाना तमाम देशीविदेशी सैलानी आते हैं. अन्य महानगरों की तरह यहां भी जिस्मफरोशी का कारोबार धड़ल्ले से होता है. उदयपुर की हिरणमगरी कालोनी के सेक्टर-9 की रहने वाली रेखा उर्फ पूजा काफी समय से सैक्स रैकेट चला रही थी.

उस के खिलाफ थाना हिरणमगरी में पीटा के 7 मामले दर्ज हैं. इस के अलावा वह शांतिभंग के मामलों में भी कई बार गिरफ्तार हो चुकी थी. रेखा की उम्र 50 साल के आसपास है. उस की शादी ललित छाबड़ा से हुई थी, जिस से उस के 2 बेटे हुए, बड़ा अनिल और छोटा मनीष.

रेखा पहले उदयपुर की हिरणमगरी के सेक्टर-5 में रहती थी. अभी भी वहां उस का मकान है, जिस में वह लड़कियों से जिस्मफरोशी कराती थी. इसी धंधे की बदौलत उस के संपर्क मुंबई, दिल्ली और कोलकाता की लड़कियों से हो गए थे. उदयपुर के कई नामीगिरामी होटलों के अलावा हाईवे पर स्थित फार्महाउसों व गेस्टहाउसों के संचालकों से उस के संपर्क थे.

जिस्म के शौकीनों के लिए वह मुंबई, दिल्ली और कोलकाता से लड़कियां बुलाती थी. रेखा लड़कियों की खूबसूरती और देह के आधार पर ग्राहकों से रकम वसूलती थी. बाहर से आई लड़कियां कुछ दिन उदयपुर में रह कर लौट जाती थीं.

ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से रेखा फोन कर के लड़कियां बुला लेती थी. इस धंधे से उस ने करोड़ों की दौलत कमाई. इसी कमाई से उस ने उदयपुर के हिरणमगरी के सेक्टर-9 में 3 हजार वर्गमीटर का भूखंड खरीद कर आलीशान कोठी बनवाई. कोठी के बेसमेंट में अनैतिक गतिविधियों के लिए ठिकाने बनवाए. उस ने कोठी में चारों तरफ कैमरे लगवाए, ताकि बाहर की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके. कहा जाता है कि जब रेखा ने यह मकान बनवाना शुरू किया था, उस के कारनामों की वजह से मोहल्ले वालों ने काफी विरोध किया था, लेकिन उस ने आपराधिक लोगों की मदद से सब को चुप करा दिया था. इस मकान की कीमत इस समय करीब 5 करोड़ रुपए है.

रोमा उर्फ रेशमा भी रेखा के बुलाने पर जिस्मफरोशी के लिए मुंबई से उदयपुर आई थी. कहा जाता है कि रोमा मूलरूप से बांग्लादेश की रहने वाली थी. वह गरीबी की वजह से इस दलदल में फंस गई थी.

कुछ दिनों वह कोलकाता में रही, फिर वहां से मुंबई चली गई. अन्य कालगर्ल्स की तरह वह भी बुलाने पर मुंबई से दूसरे शहरों में जाने लगी. इसी तरह रेखा के बुलाने पर वह उदयपुर आई थी.

रोमा को उदयपुर अच्छा लगा, इसलिए वह रेखा के साथ रह कर जिस्मफरोशी करने लगी. शुरू में तो उस के चाहने वाले काफी थे, लेकिन धीरेधीरे उस का शरीर और उम्र बढ़ी तो चाहने वालों की संख्या घटने लगी.

यह सच्चाई भी है कि उम्र बढ़ने के साथ कालगर्ल्स के चहेतों की तादाद कम होने लगती है. रोमा की उम्र जरूर ज्यादा हो गई थी, लेकिन जब वह टाइट वेस्टर्न ड्रैस पहनती थी तो उस के उभार चाहने वालों को आकर्षित करते थे. बालों को भी वह कलर करने लगी थी. फिर भी उस का धंधा टूटता जा रहा था. इस के अलावा जिस्म बेचने के बाद भी उसे पूरा पैसा नहीं मिलता था. उस की कमाई का अधिकांश हिस्सा रेखा रख लेती थी. इसलिए अब उसे इस धंधे में अपना भविष्य खतरे में दिखाई दे रहा था.

रोमा के जो भी आशिक थे, वे सिर्फ उस के जिस्म से मतलब रखते थे. उन में से किसी की नजरों में उसे अपनापन नजर नहीं आता था. रोमा जब से उदयपुर आई थी, रेखा के साथ उसी के घर में रह रही थी. वह उस की आंटी भी थी और मालकिन भी. साथ रहने की वजह से रोमा का आमनासामना रोजाना रेखा के छोटे बेटे मनीष से होता था. कभीकभी रोमा अपने छोटेमोटे काम भी मनीष से करा लेती थी. मनीष को पता ही था कि उस की मां रेखा देहव्यापार कराती है. उस के घर एक से एक खूबसूरत और हर उम्र की लड़कियां आतीजाती रहती थीं.

मनीष करीब 28 साल का युवा था. उस की अपनी शारीरिक जरूरतें थीं. अगर वह चाहता तो घर आने वाली किसी भी कालगर्ल्स से अपनी शारीरिक जरूरत पूरी कर सकता था, लेकिन रोमा उस के दिल में जगह बनाने लगी थी. अपनी जरूरतों के हिसाब से वह भी मनीष से प्यार करने लगी थी. कब दोनों एकदूसरे के प्यार में खो गए, पता ही नहीं चला.

रोमा और मनीष के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. ये संबंध लगातर चलते रहे, जिस से रेखा को उन के संबंधों की जानकारी हो गई. रेखा इस धंधे की खेलीखाई और घाघ औरत थी. उसे पता था कि इस तरह के संबंधों का क्या हश्र होता है. भविष्य के बारे में सोच कर रोमा रेखा की चिंता किए बगैर मनीष के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी.

मनीष से रोमा को गर्भ भी ठहर गया. अब वह मनीष से शादी की बात करने लगी. उसे पता था कि मनीष से शादी करने के बाद वह रेखा की करोड़ों की जायदाद में आधे की हिस्सेदार हो जाएगी. इस के लिए ही वह मनीष पर शादी के लिए दबाव बनाने लगी.

इस बात की भनक रेखा को लगी तो उसे मामला गड़बड़ नजर आने लगा. वह कतई नहीं चाहती थी कि उस का बेटा कालगर्ल्स से शादी करे और उस की जायदाद में हिस्सा मांगे. पहले उसे लगता था कि इस मामले को वह अपने स्तर से निपटा देगी. लेकिन उस की चिंता तब बढ़ गई, जब उस का अपना बेटा मनीष भी रोमा की भाषा बोलने लगा.

रोमा को ले कर घर में लगभग रोज ही झगड़े होने लगे. इस से रेखा परेशान रहने लगी. अब वह रोमा से छुटकारा पाने के उपाय सोचने लगी. काफी सोचविचार कर उस ने फैसला किया कि इस झगड़े की जड़ रोमा है, इसलिए उसे ही मनीष के रास्ते से हटा दिया जाए.

रेखा ने काफी सोचविचार कर साजिश रची. उसी साजिश के तहत उस ने मनीष को तलवारबाजी के एक झगड़े में पुलिस से गिरफ्तार करवा कर जेल भिजवा दिया. मनीष के जेल जाते ही रेखा ने अपने ड्राइवर धनराज मीणा और बड़े बेटे अनिल से बात की. इस के बाद योजना के अनुसार, 9 नवंबर की शाम को धनराज ने रोमा को इतनी शराब पिलाई कि वह सुधबुध खो बैठी. उसी हालत में धनराज और रेखा ने सलवार के नाड़े से रोमा का गला घोंट कर उस की हत्या कर दी. अधिक नशा होने की वजह से वह विरोध भी नहीं कर सकी.

रेखा को पूरा विश्वास हो गया कि रोमा की मौत हो चुकी है तो उस ने अनिल और धनराज से कहा कि वे लाश को गाड़ी से ले जा कर कहीं फेंक आएं. अनिल और धनराज हुंडई आई10 कार की पिछली सीट पर लाश रख कर निकल पड़े. कार धनराज चला रहा था.

दोनों नेगडि़या टोलनाका, नाथद्वारा, राजनगर, केवला होते हुए मांडावाड़ा टोलनाके से हो कर पड़ासली के पास पहुंचे. वहीं हाईवे पर सुनसान जगह देख कर धनराज ने सड़क के किनारे कार रोक दी.

फिर अनिल की मदद से कार की पिछली सीट पर पड़ी रोमा की लाश को निकाल कर हाईवे से करीब 2 सौ मीटर दूर ले जा कर खाई में फेंक दिया. इस तरह लाश को ठिकाने लगा कर दोनों उसी कार और उसी रास्ते से रात में ही घर आ गए.

रोमा की हत्या का खुलासा होने पर पुलिस ने सबूत जुटाने के लिए नेगडि़या टोलनाका व मांडावाड़ा टोलनाका की सीसीटीवी फुटेज की फिर से जांच की तो उन की कार आतीजाती दिखाई दे गई. पुलिस ने दोनों की उस रात की मोबाइल की लोकेशन और काल डिटेल्स भी सबूत के तौर पर जुटाए.

कथा लिखे जाने तक पुलिस यह पता करने की कोशिश कर रही थी कि रोमा कौन थी, वह कहां की रहने वाली थी, उस के परिवार में कोई है या नहीं? अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने रोमा की लाश का पोस्टमार्टम करा कर अंतिम संस्कार करा दिया था.

बहरहाल, देहव्यापार करने वाली रोमा ने कभी नहीं सोचा होगा कि प्यार करने की उसे ऐसी सजा मिलेगी. रोमा के साथ जो हुआ, उस से एक बार फिर साबित हो गया है कि इस तरह की औरतों का कोई भविष्य नहीं होता.

निर्भया कांड पर बनी फिल्म 28 दिसंबर को होगी रिलीज

दिल्ली के दर्दनाक निर्भया कांड से प्रेरित निर्माता तारिक खान और निर्देशक शारीक मिन्हास की फिल्म ‘‘दिल्ली बस’’ 28 दिसंबर 2018 को पूरे भारत में रिलीज हो रही है, इसे विपुल शाह ने प्रस्तुत किया है. निर्भया की पूर्णतिथि पर यह रिलीज हो रही है. यह फिल्म इस घटना की पीड़िता निर्भया को श्रद्धांजलि है.

फिल्म ‘‘दिल्ली बस’’ के निर्देशक शारीक मिन्हास हमेशा देश के ज्वलंत मुद्दों व सत्य घटनाओं पर आधारित फिल्में निर्देशित करते रहे हैं. इस फिल्म से पहले वह गुजरात के गोधरा कांड पर बनी फिल्म ‘चांद बुझ गया’, गुजरात माफिया से प्रभावित फिल्म ‘लतीफ द किंग औफ क्राइम’ और कश्मीर की पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म ‘चिनार दास्तान ए इश्क’ का निर्देशन कर चुके हैं.

फिल्म ‘‘दिल्ली बस’’ की  चर्चा करते हुए निर्देशक शारिक मिन्हास ने कहा कि, ‘‘वर्तमान समय में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार का मुद्दा देश भर में प्रमुख है. निर्भया कांड ने पूरे देश के साथ साथ मुझे भी झकझोर कर रख दिया था. इसने मुझे इतना उद्वेलित किया कि मैं फिल्म के पटकथा व संवाद लेखक अमित गुप्ता व एस के दास से मिला. हम लोगों ने इस केस की एक हजार पन्नों की चार्जशीट का अध्ययन करने के बाद थोड़ी फिल्मी लिबर्टी लेकर फिल्म की कहानी व पटकथा तैयार की है. हमने कोशिश की है कि यह फिल्म कहीं से भी डाक्यूमेंट्री ना लगे. फिल्म पूर्णरूपेण सत्य घटना पर आधारित है. अब हर युवा के साथ ही सरकार को जागृत होना होगा, जिससे इस तरह की घटना पर लगाम लग सके. हम अपनी यह फिल्म निर्भया को ही समर्पित कर रहे हैं, जिसने अपने जीवन व गरिमा के लिए लड़ाई लड़ी. हमें यकीन है कि हमारी फिल्म से समाज पर असर पड़ेगा.’’

हरियाणा निवासी टीवी एंकर दिव्या सिंह ने इस फिल्म में निर्भया का किरदार निभाकर बौलीवुड में कदम रखा है. भुवनेश्वर, ओड़िसा के रेवेन्यू विभाग में ए डी एम के रूप में कार्यरत डा. एस के दास ने फिल्म के क्रिएटिव डायरेक्टर, पटकथा व संवाद लेखक होने के साथ ही फिल्म में पुलिस औफिसर का किरदार भी निभाया है.

फिल्म ‘‘दिल्ली बस’’ के निर्माता तारिक खान और फिल्म के प्रस्तुतकर्ता विपुल आर शाह मूलतः भवन निर्माता हैं.  विपुल शाह कहते हैं – ‘‘पैसा कमाने के बहुत तरीके हैं. लेकिन इस फिल्म से जुड़ने की वजह नारी शोषण के खिलाफ लोगों को जागृत करना है. हमारी इस फिल्म में इस बात को रेखांकित किया गया है कि ऐसे हादसों से कैसे बचा जाए. फिल्म देखते समय दर्शक एक लड़की के दर्द को समझ सकेंगे और ऐसा शर्मनाक व दर्दनाक कार्य करने से बचेंगे.’’

फिल्म के मुख्य कलाकार दिव्या सिंह, अंजन श्रीवास्तव, नीलिमा अजीम, संजय सिंह, एस के दास आादि हैं. इसके निर्माता तारिक खान, निर्देशक शारिक मिल्हाज, प्रस्तुतकर्ता विपुल शाह, कांसेप्ट शारिक मिन्हास, पटकथा व संवाद लेखक अमित गुप्ता व एस के दास, संगीतकार अशफाक हक व आरव, कैमरामैन जहांगीर मुल्ला, एडीटर सुनील यादव तथा लाइन प्रोड्यूसर शाहीद खान हैं.

शाहरुख के बाद रितेश देशमुख बनेंगे ‘बौना’

शाहरुख खान अपनी आने वाली फिल्म जीरो में एक बौने का किरदार निभा रहे हैं. शाहरुख को इस रूप में देखने के लिए दर्शक काफी उत्साहित हैं. वहीं खबर है कि रितेश देशमुख भी बौने के किरदार में जल्दी दिख सकते हैं. फिल्म में रितेश साढ़े तीन फीट के लड़के के किरदार में होंगे.

रितेश ये किरदार एक  रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘मरजावां’ में करने वाले हैं. ये फिल्म लव ट्राएंगल पर बेस्ड है. इस फिल्म में रितेश के अलावा सिद्धार्थ मल्होत्रा, राकुल प्रीत सिंह अहम भूमिका में होंगे. इसमें वो एक विलेन का किरदार निभा रहे हैं. यह दूसरा मौका है जब रितेश-सिद्धार्थ की जोड़ी एक साथ नजर आएंगी. इससे पहले दोनों ने ‘एक विलेन’ में साथ काम किया था.

सूत्रों की माने तो सिद्धार्थ ने इस फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी है. जल्दी ही रितेश भी जल्द इस प्रोजेक्ट के काम पर लग जाएंगे. फिलहाल वो अपने रोल के लिए वर्कशौप्स अटेंड कर रहे हैं और इसके लिए ट्रेनिंग भी ले रहे हैं. इस फिल्म में तारा सुतारिया भी हैं. तारा ‘स्टूडेंट औफ द इयर-2’ से डेब्यू करने वाली हैं. मरजावां उनकी दूसरी फिल्म होगी. ये देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक रितेश को मिनी अवतार में कितना पसंद करते हैं.

भारती सिंह ने किया कपिल-गिन्नी संग डांस

अमृतसर में कपिल शर्मा और गिन्नी चतरथ ने शादी की रिसेप्शन दिया. पार्टी में करीबी दोस्त और रिश्तेदार शामिल हुए. सोशल मीडिया पर कपिल-गिन्नी के वेडिंग रिसेप्शन के वीडियो और फोटो छाए हुए हैं. कपिल के फैनक्लब पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कौमेडियन भारती, कपिल-गिन्नी संग डांस कर रही हैं.

 

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कपिल की शादी में पंजाबी सिंगर गुरदास मान ने स्पेशल परफौर्मेंस दी थी. कपिल के दोस्तों में शामिल सुमोन चक्रवर्ती, कृष्णा अभिषेक, राजीव ठाकुर, भारती सिंह, हर्ष लिंबाचिया. आरती सिंह, सुदेश लहरी, चंदन प्रभाकर और राजीव शादी और रिसेप्शन में शामिल हुए. शादी के बाद कपिल को सोशल मीडिया पर फैंस ढेरों बधाईयां दे रहे हैं.

कपिल अमृतसर के बाद मुंबई में रिसेप्शन पार्टी देंगे. जिसमें बौलीवुड और टीवी जगत के नामी सितारे शिरकत करेंगे. जल्द ही कपिल शर्मा का कौमेडी शो औन-एयर होगा. फैंस को अपने फेवरेट कौमेडियन के कमबैक का बेसब्री से इंतजार है.

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