दिल्ली के पंचशील पार्क में एक्ट्रेस के घर हुई चोरी

बौलीवुड की मशहूर मौडल व टीवी अभिनेत्री अपर्णा कुमार के दिल्ली स्थित घर से लाखों की हीरे जड़ित जूलरी, कैश समेट कर नर्स फरार हो गई. मालवीय नगर के पंचशील पार्क में अभिनेत्री के बुजुर्ग माता पिता अकेले रहते हैं. इतना ही नहीं, बुजुर्ग के अकाउंट से भी लाखों का कैश ट्रांजेक्शन कर लिया गया.

अपर्णा मुंबई में रहती हैं. उनकी देखभाल के लिए अपर्णा ने घर में नर्स रखी हुई थी जो कि मेड के तौर पर भी जौब करती थी. घटना की जानकारी मिलते ही अपर्णा मुंबई से फौरन दिल्ली पहुंची और मालवीय नगर थाने में इस बाबत केस दर्ज कराया.

फिलहाल एक टीम गायब मेड की तलाश में वेस्ट बंगाल भेजी है. मामले में सभी पहलुओं से जांच चल रही है.

पुलिस के मुताबिक, 74 साल के अरुण कुमार व मां सावित्री गुप्ता एस ब्लॉक में रहते हैं. अंजलि नाम की युवती घर में मेड व नर्स के तौर पर जौब पर रखी हुई थी. अपर्णा मुंबई में रहते हुए इन दिनों शूटिंग में बिजी हैं. कुछ दिनों से तबियत ठीक नहीं रहने की वजह से अपर्णा मुंबई से दिल्ली पैरंट्स को देखने आईं. लेकिन घर पहुंचने पर देखा कि मेड गायब है.

अगली सुबह सावित्री नगर स्थित मेड के घर पर अपर्णा पहुंची. जहां मालूम चला कि वह परिवार के साथ कमरा खाली करके कोलकाता जाने की बात कहकर निकली है. बिना बताए इस तरह गायब होने पर शक हुआ.

घर आकर देखा अलमारी से हीरे जड़ित 4 सोने के कड़े, ईयर रिंग, गोल्ड चैन व तमाम जूलरी समेत 5 लाख कैश गायब है. इसके बाद पता चला कि मां के बैंक अकाउंट से भी 4 लाख की ट्रांजेक्शन हुई है.

अपर्णा ने पुलिस को बताया कि उनके पैरंट्स कभी भी औनलाइन बैंकिंग नहीं करते. वहीं पुलिस ने जांच पड़ताल की तो मालूम चला कि मेड को कोई वेरिफिकेशन भी नहीं कराया गया था. इस बारे में मालवीय नगर पुलिस सीसीटीवी कैमरों की मदद भी ले रही है.

अनजान फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट से रहें सावधान..!

चंडीगढ़ की एक युवती को फेसबुक पर विदेशी ‘हैंडसम’ की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करना भारी पड़ गया. पहले कीमती गिफ्ट भेजने, फिर विदेश से भारत आकर पैरंट्स से मुलाकात करने का झांसा देकर करीब साढ़े छह लाख रुपये ऐंठ लिए गए. न गिफ्ट मिला, न परदेसी से मुलाकात हुई. युवती ने स्पेशल सेल की साइबर सेल में पूरे घटनाक्रम का ब्योरा देते हुए कंप्लेंट दी.

पुलिस के मुताबिक, 26 साल की युवती मूलरूप से हरियाणा के सिरसा की रहने वाली है. वह चंडीगढ़ में जौब करती है. कुछ महीने पहले युवती की फेसबुक पर जौहन हैरी से दोस्ती हुई. फेसबुक से चैट वौट्सऐप पर पहुंच गई. युवक शादी की बात कहने लगा. इसके बाद उसने युवती से कहा कि वह गिफ्ट लाया है, जो उसे भेजना चाहता है. जौहन ने युवती को जूलरी और विदेशी मुद्रा से भरा पैकेट भेजने का झांसा दिया.

युवती के मोबाइल पर कौल आई. कौलर ने कहा कि वह मुंबई एयरपोर्ट कस्टम विभाग से बोल रहा है. गिफ्ट के लिए 35 हजार रुपये टैक्स भरना होगा. युवती ने बताए गए बैंक अकाउंट में कैश जमा करा दिया. फिर कौल आई कि और डेढ़ लाख रुपये देने होंगे. युवती ने वह भी दे दिए.

जौहन ने कहा कि वह कुछ दिनों में आ रहा है. उसने टिकट की फोटोकौपी भी दिखाई. तय तारीख पर युवती के पास एक मैडम की कौल आई. उन्होंने कहा कि वह मुंबई एयरपोर्ट से बोल रही हैं. मैडम ने बताया कि जौहन 50 हजार पाउंड लेकर आया है. एक्सचेंज कराने के लिए 2.10 लाख जमा करने होंगे. युवती ने रकम जमा करा दी.

कुछ घंटे बाद जौहन की कौल आई. उसने कहा कि दिल्ली एयरपोर्ट आ चुका है, लेकिन इमीग्रेशन वाले निकलने नहीं दे रहे हैं. पाउंड के बदले ढाई लाख रुपये की डिमांड कर रहे हैं. युवती ने फिर पैसे जमा करा दिए. इसके बाद जौहन भाग गया. उसका नंबर भी बंद हो गया.

बौलीवुड के वो सितारे जो 40 की उम्र में भी हैं सिंगल

बौलीवुड में कई ऐसे सितारें है जो अपनी शादी-शुदा जिंदगी से बेहद खुश है. लेकिन वहीं कुछ ऐसे स्टार्स भी हैं जिनकी उम्र 40 से भी ज्यादा हो चुकी है लेकिन उन्होंने अभी तक शादी नहीं की है. तो चलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं बौलीवुड के ऐसे ही स्टार्स के बारे में जिनकी उम्र 40 साल से ज्यादा हो चुकी है लेकिन वह आज तक भी सिंगल ही हैं.

सलमान खान: बौलीवुड के दंबग खान की शादी एक बेहद अहम मुद्दा बन गई है और उनके प्रशंसकों को काफी उत्सुकता यह जानने की अखिर कब उनका इंतजार खत्म होकर सल्लु भाई शादी के बंधन में बंधेगे.

सलमान खान भारत के सबसे सफल अभिनेताओं में से एक हैं. दंबग खान 52 साल के हो चुके हैं. और उनको अभी भी शादी के करने की कोई जल्दी नहीं है.

तब्बू: बौलीवुड अभिनेत्री तब्बू फिल्म प्रेम में संजय कपूर के प्यार में पागल हो गर्ई थी. आपको बता दें कि तब्बू कर उम्र 45 साल कि है. तब्बू और नागार्जुन एक साथ 10 साल रहे थे लेकिन इन दोनों के प्यार को शादी का मुकाम नहीं मिल पाया था.

उसके बाद तब्बू और अजय देवगन के रिश्ते की बातें खूब चली थी लेकिन फिर यह बातों तक ही रह गई. सिर्फ इतना ही नहीं तब्बू का नाम साजिद नाडियाडवाला से लेकर कई बड़े-बड़े स्टार्स के साथ भी जोड़ा गया था लेकिन तब्बू आज भी सिंगल हैं और तब्बू की माने तो उनका कहना है शादी ही तो है वो तो कभी भी हो जाएगी इतनी भी जल्दी क्या है.

अक्षय खन्ना: बौलीवुड में अपने पिता के दम पर कदम रखने वाले विनोद खन्ना को कोर्ई फायदा नहीं हुआ. अक्षय खन्ना की उम्र 42 साल हो चुकी है और इनका नाम भी कई अभिनेत्रियों के साथ जुड़ा था.

लेकिन शादी की बात को लेकर अक्षय खन्ना का कहना है कि मैं शादी नहीं करना चाहता हूं मैं अपनी सिंगल जिंदगी से कोम्प्रोमाइज बिल्कुल नहीं कर सकता हूं.

सुष्मिता सेन: सुष्मिता सेन दो क्यूट बेबीज की हौट माम हैं लेकिन ये दोनों लड़कियों सुष्मिता ने गोद ली हुई है. बता दें कि सुष्मिता 18 साल की उम्र में ही मिस यूतिवर्स बन गई थी. सुष्मिता सेन की उम्र 42 साल कि है. लेकिन अभी तक उन्होंने शादी नहीं कि है.

अमीषा पटेल: बौलीवुड में अपने करियर की शुरुआत सुपरहिट फिल्म ‘कहो न प्यार है’  से की थी, लेकिन असल जिंदगी में अमीषा को प्यार नहीं मिल सका था.

अमीषा का नाम विक्रम भट्ट के साथ जुड़ा था और इन दोनों के अफेयर की खूब खबरें रहीं थी. बता दें कि अमीषा की उम्र 42 साल की हो चुकी है लेकिन इनका अभी तक शादी का कोई प्लान नहीं है.

करण जौहर: करण जौहर 45 साल के हो चुके हैं. और हाल ही में करण पापा बन गए हैं. बता दें कि करण जौहर के ये दो बेबीज सरोगेसी से हुए हैं लेकिन वह शादी से दूर ही हैं. अब जब भी करण से शादी की बात को लेकर सवाल किया जाता है तो वह कहते हैं कि उनके पास समय नहीं है.

नगमा: नगमा ने फिल्म ‘बागी: अ रिबेल फार लव  से बौलीवुड में कदम रखा है. नगमा का असल नाम नंदिता मोरारजी है. नगमा 41 साल की हो चुकी हैं. वह ‘सुहाग’, ‘कुंवारा’, ‘चल मेरे भाई’, और ‘एक रिश्ता’ जैसी कई फिल्मों में नजर आ चुकी है. नगमा बौलीवुड के साथ-साथ तमिल, तेलुगु और भोजपुरी सिनेमा में भी काम कर चुकी हैं. नगमा ने अभी तक शादी नहीं की है. खबरों की माने तो नगमा का नाम पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली और भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन के साथ जोड़ा जा चुका है.

जबरदस्त एक्शन अवतार में कंगना

बौलीवुड  क्वीन कंगना रनौत की फिल्म “मणिकर्ण‍िका’’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है. तीन मिनट 19 सेकेंड में कंगना रनौत, भव्य अवतार में नजर आ रही हैं. समूचे ट्रेलर में सिर्फ कंगना ही दिख रही हैं. फिल्म में वो ‘झांसी की रानी’ का किरदार निभा रही हैं

कंगना ने इस फिल्म में लीड रोल निभाया है. एक्शन अवतार में कंगना ने बेहतरीन परफौर्मेंस दी है. झांसी की रानी के गेटअप में कंगना का लुक शानदार है. फिल्म में पहली बार योद्धा का रोल अदा कर रहीं कंगना के लिए ये फिल्म एक बड़ा चैलेंज है.

इस फिल्म में कई बड़े स्टार काम कर रहे हैं. इनमें डैनी, अंकिता लोखंडे नजर, सुरेश ओबेराय, कुलभूषण खरबंदा नजर आ रहे हैं. ये फिल्म निर्माण के दौरान से ही चर्चा में रही है.

मणिकर्णिका काफी समय तक विवादों में भी रही. इस फिल्म के निर्देशक कृष ने फिल्म को बीच में ही छोड़ दिया था. इसके बाद फिल्म डायरेक्शन की कमान खुद  कंगना ने अपने हाथ में ली और अब अब उन्हें  इस फिल्म का सह-निर्देशक होने का दर्जा मिलेगा.” फिल्म के निर्माता कमल जैन के अनुसार कंगना ने फिल्म का 70 फीसदी हिस्सा निर्देशित किया है जबकि कुछ हिस्सा कृष के निर्देशन में बना है.

‘दिलवाले’ के बाद इस फिल्म में साथ दिखेंगे शाहरुख-काजोल

बौलीवुड की कुछ सबसे ज्यादा चहेती जोड़ियों में से एक है शाहरुख-काजोल की जोड़ी. ‘दिलावले दुलहनिया ले जाएंगे’, ‘बाजीगर’, ‘कुछ-कुछ होता है’, ‘करन अर्जुन’ जैसी फिल्मों ये दर्शकों के दिल में खास जगह बनाने वाली ये जोड़ी एक बार फिर से बड़े पर्दे पर दिख सकती है.

साल 2017 में इरफान खान की फिल्म ‘हिंदी मीडियम’ आई. फिल्म ने बौक्स औफिस पर अच्छा प्रदर्शन तो किया ही, साथ में दर्शकों का दिल भी जीता. पिछले कुछ दिनों से इसके सिक्वल के आने की चर्चा जोरों पर है. खबरों की माने तो अपनी बीमारी के चलते इरफान इस फिल्म का हिस्सा नहीं बन सकेंगे, जिसके बाद उनकी जगह शाहरुख ले सकते हैं. वहीं लीड एक्ट्रेस के तौर पर काजोल शाहरुख के अपोजिट होंगी.

खबर है कि दोनों ने फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़नी शुरू कर दी है. सब कुछ सही रहा तो जल्दी ही फैंस अपनी पसंदीदा जोड़ी को बड़े पर्दे पर देख सकेंगे.

इससे पहले चर्चा थी कि हिंदी मीडियम के सीक्वल में इरफान खान के साथ सारा अली खान होंगी. सारा, इरफान की बेटी का रोल अदा करेंगी. लेकिन बीमारी की वजह से इरफान ने फिलहाल फिल्मों से दूरी बनाई हुई है. वे लंदन में न्यूरो इंडोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी का इलाज करा रहे हैं.

दफ्तर में प्यार की पींगें पड़ न जाए कैरियर पर भारी

इन्फौर्मेशन टैक्नोलौजी उद्योग के एक जानेमाने नाम फणीश मूर्ति, जो पहले इन्फोसिस और बाद में आई गेट जैसी कंपनियों को नई बुलंदियों तक ले जाने के लिए दुनियाभर में मशहूर रहे हैं, साल 2013 में एक बार फिर एक महिला कर्मचारी के साथ सैक्स संबंध बनाने के आरोप में आई गेट की अपनी नौकरी खो चुके थे. 2002 में उन्हें ऐसे ही एक आरोप के चलते इन्फोसिस से निकाल दिया गया था. उद्योग जगत ने सोचा था कि इस अप्रिय हादसे के बाद वे अपनी हरकतों से बाज आ जाएंगे. लेकिन शायद फणीश किसी दूसरी ही मिट्टी के बने हैं. उन के लिए सुंदर महिलाओं का संसर्ग भी उतना ही जरूरी बन गया है जितना किसी कंपनी के मुनाफे के आंकड़ों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना.

फणीश ने जब इन्फोसिस का अमेरिकी कारोबार संभाला था, तब कंपनी का कुल व्यापार 70 लाख अमेरिकी डौलर ही था, जिसे वे 10 साल के अपने कार्यकाल के दौरान 70 करोड़ डौलर तक पहुंचाने में कामयाब रहे. इस बीच कंपनी की कई महिला कर्मचारियों से उन के शारीरिक संबंध होने की अफवाहें उड़ीं लेकिन बात कभी कोर्टकचहरी तक नहीं पहुंची. लेकिन उन की ऐक्जिक्यूटिव सैके्रटरी रेका मैक्सीमोविच ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगा कर मामला अदालत तक पहुंचा दिया.

रेका ने यह भी आरोप लगाया कि उसे गलत तरीके से कंपनी की नौकरी से निकाल दिया गया था. बहुत मुमकिन है कि फणीश के लिए रेका का रोमांस सिरदर्द बन गया हो और इसीलिए उन्होंने उस से पीछा छुड़ाने के लिए उसे नौकरी से निकाल दिया हो. तब इन्फोसिस के चेयरमैन एन आर नारायणमूर्ति ने कंपनी को बदनामी से बचाने के लिए 30 लाख डौलर की बड़ी रकम रेका को मुआवजे में दे कर कोर्ट के बाहर ही मामले को रफादफा कर दिया था. इस हादसे के बाद ही फणीश को इन्फोसिस की अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा था.

आई गेट के मालिकों से फणीश के जीवन की इतनी बड़ी सचाई छिपी नहीं थी. इतना ही नहीं, उन के आई गेट के सीईओ पद पर कार्य करने के दौरान भी 2004 में फणीश ने इन्फोसिस की ही एक दूसरी महिला कर्मचारी जेनिफर ग्रिफिथ के यौन शोषण के आरोप में लंबे समय से चल रहे मुकदमे से बचने के लिए उसे 8 लाख डौलर की रकम मुआवजे के रूप में चुका कर किसी तरह जेनिफर से अपना पिंड छुड़ाया था.

इन सारे तथ्यों की जानकारी के बावजूद आई गेट ने फणीश की कार्यकुशलता के कारण ही उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी और अपनी विलक्षण प्रतिभा के बल पर वे आई गेट को भी प्रगति की नई डगर पर अग्रसर करने में कामयाब रहे थे. लेकिन इस बार फिर उन की ही एक सहकर्मी ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगा कर इस कंपनी को भी उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने के लिए मजबूर कर दिया.

कंपनी का कहना है कि फणीश ने किसी महिला कर्मचारी से अपने संबंधों की बात कंपनी को न बता कर नियमों को तोड़ा है और इसीलिए उन्हें नौकरी से निकाला जा रहा है. इस बार फणीश की दलील यह है कि यह महिला मुझे ब्लैकमेल कर रही है, तभी तो उस ने मुझ से पैसा ऐंठने के लिए रेका मैक्सोविच के वकील को रखा है. यहां पर यह उल्लेखनीय है कि फणीश को 2 महीने पहले ही इस बात की भनक लग गई थी कि आई गेट को अपनी साख बचाने के लिए उन्हें नौकरी से निकालना पड़ेगा और इसीलिए उन्होंने इन 2 महीनों के दौरान आई गेट के अपने डेढ़ लाख शेयर बेच दिए थे. उन्होंने अपने 1 लाख 4 हजार 459 शेयर 6 मार्च को 18.88 डौलर प्रति शेयर से भाव से बेचे, जिस से उन्हें 10 लाख 17 हजार डौलर की बड़ी रकम मिली. इस के 1 महीने बाद उन्होंने 40 हजार शेयर 17.1 डौलर के भाव से बेच कर 6 लाख 84 हजार डौलर वसूल कर लिए. जैसे ही फणीश को नौकरी से निकालने की खबर बाजार में पहुंची, शेयर के दाम गिर कर 14.82 डौलर पर पहुंच गए. इस बात से अनुमान लगाया जा सकता है कि फणीश कितने तेज व्यापारी हैं, जो अपनी विपरीत परिस्थितियों का भी लाभ उठाना जानते हैं.

अमेरिका जैसे देशों में महिला कर्मचारियों का यौन शोषण करने के खिलाफ कड़े कानून हैं, जबकि हमारे देश में ऐसे कारगर कानूनों का अभाव है और इसीलिए आज भी हमारे यहां अकसर बौस अपनी महिला कर्मचारियों का यौन शोषण बेखौफ करता रहता है. यह मामला एकतरफा बिलकुल नहीं होता, कई बार महिला कर्मचारी भी प्रमोशन की सीढि़यां जल्दीजल्दी चढ़ने के लिए बौस को रिझाने की कोशिश करती रहती है.

ऐसा ही मुंबई की एक बड़ी कंपनी का मामला पिछले दिनों सामने आया था जिस में कंपनी के एक चोटी के अधिकारी का अपनी सैके्रटरी से चक्कर शुरू हो गया था. उस अधिकारी ने थोड़े से समय में ही अपनी सेक्रेटरी को एक सुंदर घर और एक कार तो खरीद कर दे ही डाली, साथ ही उसे एक ऊंचा ओहदा दे कर हमेशा के लिए उस की जिंदगी संवार दी. अगर फणीश भारत में काम कर रहे होते तो शायद उन्हें कंपनी से कभी निकाला ही नहीं जाता, इस के बदले कितनी ही महिला कर्मचारियों को उन की ज्यादतियां बरदाश्त करनी पड़ रही होतीं. कड़े कानूनों के कारण ही उन्हें 2 बार न सिर्फ अपनी 2 नौकरियां छोड़नी पड़ीं, बल्कि बड़ीबड़ी रकमें मुआवजे के तौर पर देनी भी पड़ीं.

भारत में युवाओं की संख्या दफ्तरों में बढ़ती जा रही है. ऐसे में लड़केलड़कियों के बीच संबंध कायम होना स्वाभाविक है. कई बार ऐसा देखा जाता है कि दफ्तर की यही जानपहचान आगे चल कर रोमांस और फिर शादी में परिवर्तित हो जाती है. भारत में कंपनियां अकसर इस तरह के विवाहों और रोमांस पर पाबंदी नहीं लगातीं, लेकिन फिर भी कर्मचारियों की कार्यक्षमता को बढ़ाए रखने के लिए अकसर इस बात का ध्यान रखा जाता है कि पतिपत्नी को एक ही विभाग में न रखा जाए. माइक्रोसौफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स व मेलिंडा का रोमांस भी दफ्तर में जन्मा था, जो आखिर एक सफल पतिपत्नी के रिश्ते में परिवर्तित हो गया. अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा को भी उन की पत्नी मिशेल एक दफ्तर में साथसाथ काम करने के दौरान ही मिलीं थीं. इस तरह की प्रेम कहानियों पर भला किसे आपत्ति हो सकती है, लेकिन बात तब समस्या बन जाती है जब यह संबंध केवल वासनापूर्ति के लिए कायम किया जाता है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्ंिलटन, आईएमएफ के पूर्व प्रमुख डोमिनीक स्ट्रौसकान व लेखक डैविड डैवीडार ऐसे ही वासनापूर्ति वाले संबंधों के कुछ उदाहरण हैं, जिन में पुरुष हस्तियों ने अपने पद व शक्ति का दुरुपयोग कर के अपने नीचे काम करने वाली लड़कियों का शोषण किया.

जहां तक हमारे देश में दफ्तरों में होने वाले रोमांस का सवाल है, एम्सटरडम की एक कंपनी रैनस्टैंड द्वारा 2012 में किए गए एक सर्वेक्षण से यह तथ्य उजागर हुआ है कि हमारे यहां 70 प्रतिशत कर्मचारी दफ्तर में रोमांस कर चुके थे. यह संख्या जापान (33 प्रतिशत) तथा लक्समबर्ग (36 प्रतिशत) जैसे अन्य देशों के मुकाबले बहुत ज्यादा है. शायद इस का कारण यही है कि हमारे देश में इस संबंध में कोई स्पष्ट नीति नहीं अपनाई गई है.

हमारी कंपनियां भी इस मामले में कोई कड़ा रुख अपनाना पसंद नहीं करतीं. एक वरिष्ठ अधिकारी के शब्दों में, ‘‘भारत में दफ्तर में पनपा रोमांस कभी कोर्टकचहरी तक नहीं पहुंचा और उस की वजह से किसी कंपनी को कभी कोई भारी मुआवजा भी नहीं चुकाना पड़ा. शायद इसीलिए कंपनियां ऐसे मामलों को गंभीरता से नहीं लेतीं. इस के विपरीत अकसर दफ्तर को रोमांस व अपना सही पार्टनर ढूंढ़ने का एक सही स्थान माना जाता है.

‘ट्रूलीमैडलीडीपली’ नामक डेटिंग की एक वैबसाइट के संस्थापक चैतन्य रामलिंगेगोवड़ा का इस विषय में कहना है, ‘‘लोग अकसर रोज 8-10 घंटे अपने दफ्तर में बिताते हैं. इस के अलावा उन का 1 से 2 घंटे का समय दफ्तर आनेजाने में व्यतीत हो जाता है. इस सब के बाद रोमांस व लाइफपार्टनर ढूंढ़ने के लिए उन के पास समय ही कहां बचता है. इसलिए वे इस कमी को दफ्तर में ही पूरी करने की कोशिश करते हैं.’’

भारत में खासतौर पर आईटी उद्योग से जुड़े लोग इस बात को स्वीकार करते हैं कि प्यार व काम दफ्तर में सही ढंग से चल सकते हैं और इस से कंपनी को कोई नुकसान पहुंचने की संभावना नहीं है. उदाहरण के तौर पर याहू इंडिया में औफिस में पनपने वाले संबंधों पर कोई रोकटोक नहीं है. इस कंपनी के ह्यूमन रिसोर्सेज विभाग के प्रमुख अनिरुद्ध बनर्जी का कहना है, ‘‘हम कर्मचारियों के साथसाथ कौफी पीने या सिगरेट पीने जाने या महिला व पुरुष कर्मचारियों के साथसाथ बाहर जाने को कतई बुरा नहीं मानते.’’ इस विषय में एक अन्य प्रमुख कंपनी एनआईआईटी के वाइसप्रेसिडैंट प्रतीक चटर्जी ने अपने विचार कुछ इस तरह व्यक्त किए, ‘‘हम अपने कर्मचारियों की बहुत इज्जत करते हैं और अगर वे अपने जीवनसाथी को काम के दौरान कंपनी में से ही चुन लेते हैं, तो हम उन का स्वागत करते हैं.’’

अंत में इस विषय में सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है कि एक ओर जहां दफ्तर का रोमांस, जो आखिरकार विवाहबंधन में परिणित हो जाता है, दो व्यक्तियों के जीवन में एक सार्थक भूमिका निभा सकता है, वहीं दूसरी तरफ दफ्तर में होने वाला यौन शोषण कैंसर जैसी किसी बीमारी से कम नहीं, जो न केवल संबंधित महिला के जीवन को नीरसता में बदल देता है, बल्कि उस दफ्तर के पूरे माहौल को भी दूषित कर देता है.

अकेली स्त्री को अपनानी चाहिए दूरदर्शिता

कनकप्रभा के पति 2 करोड़ रुपए से ज्यादा की दौलत पत्नी के नाम छोड़ गए थे. किसी फिल्मी चरित्र की भांति पिता के जीवनकाल में ही 1 बेटा 10वीं में फेल हो जाने के बाद घर से भाग गया था जिस का आज तक पता नहीं चला. दूसरा बेटा एक ज्वैलर के साथ दक्षिण अफ्रीका जा कर रहने लगा. सुना है, उस ने वहां निजी व्यवसाय शुरू कर लिया है और वहीं की एक युवती से विवाह कर घर बसा लिया है.

अकेलेपन से परेशान हो कर कनकप्रभा घर के पास स्थित एक आश्रम में जाने लगी. एक दिन उस ने अपनी कथाव्यथा आश्रम के धर्मगुरु को कह सुनाई. धर्मगुरु ने सहानुभूति जताई और प्रवचनों के माध्यम से सुनियोजित तरीके से उस में वितृष्णा का भाव जागृत कर संपूर्ण संपत्ति ट्रस्ट के नाम करवा ली. सबकुछ दान कर देने के बाद पिछले 6 वर्षों से कनकप्रभा आश्रम की शरणागत है. 62 साल की उम्र में पति द्वारा छोड़ी गई लाखों रुपए की संपत्ति के बावजूद, पाईपाई को मुहताज कनकप्रभा आश्रम में दासी की भांति काम करने को मजबूर है क्योंकि नियमानुसार सारी संपत्ति ट्रस्ट के नाम से अंतरित हो चुकी है.

58 वर्षीया वंदना के पति श्यामजी सरकारी अधिकारी थे. 2 पढ़ेलिखे, सुयोग्य बेटों का परिवार था. दोनों आईटी इंजीनियर थे, सो अच्छे पैकेज पा कर सपरिवार अमेरिका जा कर बस गए. श्यामजी स्वाभिमानी थे. अंतर्मन से तो उन्हें बेटेबहुओं की प्रतीक्षा रहती थी किंतु वे उन के समक्ष झुकने व मिन्नतें करने को तैयार न थे. आखिरकार मौन प्रतीक्षारत श्यामजी का 6 वर्ष पूर्व निधन हो गया.

पत्नी के लिए वे 50 लाख रुपए की एफडी और 50 लाख रुपए का फ्लैट छोड़ गए. वंदना को आशा थी कि पिता के गुजर जाने के बाद बेटे अब जिम्मेदारी महसूस करेंगे किंतु उन्हें मां से अधिक जायदाद की जिम्मेदारी महसूस हुई. वे वंदना की वेदना तनिक भी नहीं समझ पाए. एक बार दोनों बेटे आए, मां को भरमा कर संपत्ति हस्तगत की और वृद्धाश्रम में भरती करवा कर चलते बने. विगत 4 साल से वृद्धाश्रम में रह रही वंदना पथराई निगाहों से बेटों की राह तक रही हैं.

भारत का सामाजिक तानाबाना न्यूनाधिक रूप से आज भी ऐसा है जिस में अधिकांश महिलाएं पिता या पति पर ही आर्थिक रूप से निर्भर होती हैं. वक्त की मार से वे पतिहीन हो जाएं तो उस के बाद उन्हें पुत्र व पुत्रवधू के शरणागत होना पड़ता है.

कुछ ऐसे उदाहरण भी देखने को मिलते हैं कि कुछ पतिपत्नी, जो स्वाभिमानी किस्म के होते हैं अथवा परिस्थितिवश अकेले रहने हेतु बाध्य होते हैं, उन में पति की मृत्यु होने के बाद पत्नी अकेले रहने को अभिशप्त हो जाती है और अवसादवश विक्षिप्तता की शिकार बन जाती है. बहुत बार तो ऐसी एकाकी स्त्रियां नौकरों, चोरलुटेरों, स्वजनों या असामाजिक तत्त्वों की शिकार बन कर जान से हाथ धो बैठती हैं.

एक सर्वेक्षण के मुताबिक, देशभर में लगभग 2 करोड़ महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें पति की मृत्यु के बाद पति द्वारा छोड़ी गई संपत्ति, दायित्व का स्वयं ही प्रबंधन करना होता है. नैसर्गिक रूप से यह सहारा वे पुत्रपौत्रों से प्राप्त करने का प्रयास करती हैं स्त्री की यही निर्भरता कई बार उस के लिए घातक सिद्ध होती है जब भावी मालिक, पहले ही मालिक बन जाने की आकांक्षा में सबकुछ हड़प जाते हैं.

भोपाल के एक विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र के अनुसार, धीरेधीरे क्षरित हो रही संयुक्त परिवार प्रथा के चलते 90 के दशक के बाद से सामाजिक परिस्थितियों व सोच में तेजी से बदलाव आया है. ‘पारिवारिक अवलंबन’ के घटते आधार के परिणामस्वरूप अधिकतर पुरुष असुरक्षा के भय से जमीनजायदाद, पैंशन या फंड आदि के रूप में इतनी संपत्ति अवश्य छोड़ जाना चाहते हैं जिस से आश्रिता पत्नी या अन्य आसानी से भरणपोषण कर सकें और उन्हें आर्थिक रूप से किसी की दया पर निर्भर न रहना पड़े.

आर्थिक नियोजन संस्थान के सलाहकारों के आकलन के अनुसार, उच्चमध्यम परिवार का मुखिया जो सामान्यतया 50 हजार रुपए महीना कमाता है, औसतन 25 लाख रुपए तक का मकान और 10-15 लाख रुपए का कोष परिवार के लिए छोड़ कर जाता है. यदि पति द्वारा छोड़ी गई संपत्ति व कोष का विवेकपूर्ण नियोजन कर इस्तेमाल किया जाए तो महिला का शेष जीवन सुगमता से गुजारने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है लेकिन दुख की बात है कि मुश्किल से 2-3 फीसदी महिलाएं ही ऐसा कर पाने में सफल होती हैं.

98 फीसदी महिलाएं तो सबकुछ हो कर भी धनहीन रहने को विवश होती हैं. कनकप्रभा जैसी धर्मभीरुओं के उदाहरण भी देखने को मिलते हैं जिन की संपत्तियां अनाधिकृत रूप से धर्मगुरुओं द्वारा हरण कर ली जाती हैं.

इसलिए आवश्यक है कि पति अपने जीवनकाल में ही पत्नी को अपनी चलअचल संपत्ति के अधिकारपत्रों, उन के नामांकन आदि से परिचित रखे. इस में पति से अधिक पत्नी का कर्तव्य बनता है कि वह जागरूक रह कर, रुचि के साथ संपत्ति विवरणों की जानकारी हासिल करे. पतिपत्नी को चाहिए कि वे सदैव चलअचल संपत्ति की वसीयत बनवाएं और उन्हें अद्यतन करवाते रहें.

यह तो हुई स्थायी संपत्ति की बात, जहां तक तरल कोष (नकद, बैंक खाते, पौलिसी, शेयर, फंड, भविष्य निधि आदि) की बात है, उन में भी नामांकन किया जाना आवश्यक है और इन सब की जानकारी कम से कम पत्नी को अवश्य होनी चाहिए. भावुकता का दामन छोड़ कर नामांकन में बच्चों के बजाय पत्नी का नाम ही करवाना श्रेयस्कर है.

देखने में आया है कि कई बार भवन, वाहन या अन्य संपत्ति पर पति द्वारा बैंक, बीमा कंपनी या वित्तीय संस्थान से कर्ज लिया हुआ होता है और उस के चुकता किए बिना ही पति की मृत्यु हो जाती है. ऐसी स्थिति में पत्नी को ही पति द्वारा लिया गया कर्ज चुकाना पड़ता है.यदि कर्ज चुकाने की स्थिति नहीं है तो बेहिचक वित्तीय संस्थान को बता दिया जाना चाहिए ताकि संपत्ति अधिगृहीत कर उस के बेचने से कर्ज चुकता होने के बाद शेष बची राशि आप को मिल सके.

यदि कोई संपत्ति ऐसी है जिस की वसीयत नहीं है तो जागरूकता का परिचय देते हुए यथोचित समयावधि में सक्षम अधिकारी के समक्ष पति के मृत्यु प्रमाणपत्र सहित दावा पेश करें क्योंकि पति द्वारा अर्जित संपत्ति में पत्नी व बच्चों का समान हक होता है.

पिछले कुछ सालों में बने 2 कानूनों ने संपत्ति का हक दिलवाने के मामलों में महिलाओं की राह और भी आसान कर दी है. विधवाओं के लिए तो ये विशेष हितकारी सिद्ध हुए हैं. उन में से एक तो है, ‘घरेलू हिंसा अधिनियम’, जिस ने उन के आवास और संपत्ति में हक पाने के अधिकार को मजबूत किया है और दूसरा है ‘हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (2005).’ इस के अंतर्गत विवाहित महिलाओं को भी पूर्वजों (मायके) की संपत्ति में बराबर का हक दे दिया गया है जबकि इस से पहले संपत्ति में यह अधिकार केवल अविवाहित महिलाओं के लिए ही था.

परेशानी तब होती है जब पत्नी के नाम पर संपत्ति होने के बावजूद पति के शोककाल में झूठा विश्वास जमा कर बच्चे या निकटस्थ रिश्तेदार पीएफ, ग्रैच्युटी, मुआवजा राशि, अवकाश, नकदीकरण पर अपना हक जमा लेते हैं. इसलिए शोकाकुल रहते हुए भी भविष्य के प्रति पर्याप्त सजग रहें और उन्हें सही बैंक खाते में जमा करवाएं, दुरुपयोग न होने दें. याद रहे, बेटेबहुओं के लाख कहने पर भी स्त्रीधन यानी गहनों पर अधिकार बनाए रखें, अन्यथा वे आसानी से हड़पे जा सकते हैं.

शोककाल में मनोभावों पर नियंत्रण रखें. दुखकाल में स्वाभाविक रूप से वितृष्णाभाव जागृत होते हैं जिन का कई धूर्त पंडित, धर्मगुरु अनुचित लाभ उठाने में प्रयोग करते हैं, इसलिए उन से पूरी तरह सावधान रहें.

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