अब हिना खान चलीं छोटे से बड़े पर्दे की ओर

बिग बौस 11 फेम और ‘कसौटी जिंदगी की’ जैसे प्रोग्राम से अपने करियर की शुरुआत करने वाली एक्ट्रेस हिना खान अब बड़े पर्दे की ओर रुख कर रही हैं. राधिका मदन, आम्ना शरीफ और यामी गौतम के बाद हिना भी उन एक्ट्रेसेस की लिस्ट में शामिल होंगी, जो छोटे से बड़े पर्दे की ओर रुख करेंगी. खबरों की माने तो हिना, हुसैन खान द्वारा निर्देशित फिल्म से बौलीवुड में कदम रखेंगी. ये फिल्म महिला मुद्दों पर केंद्रीत होगी.

फिल्म की शूटिंग कश्मीर में चल रही है. इस फिल्म में फरीदा जलाल भी हैं. मजेदार बात तो यह है कि टीवी के परदे के बाहर हिना खान की इमेज एक फैशनिस्ट लड़की की है. मगर नब्बे के दशक के कश्मीर की पृष्ठभूमि की कहानी वाली इस फिल्म में वह एक ऐसी युवा साधारण कश्मीरी लड़की का किरदार निभा रही हैं, जो कि जिम्मेदार और आत्मनिर्भर है. फिल्म का पहला शेड्यूल पूरा हो गया है. फिल्म का नाम तय नही है. पर पूरी फिल्म कश्मीर में फिल्मायी जाएगी और हिना खान के करियर की यह पहली फिल्म होगी.

bollywood debut of hina khan

आपको बता दें कि हिना खान ‘खतरों के खिलाड़ी’ की कंटेस्टेंट रह चुकी हैं. इसके अलावा वो बिग बौस 11 की पहली रनर-अप थी. छोटे पर्दे पर आने से पहले वो म्यूजिक एलबम वीडियोज में दिखती थी. इसी दौरान वो एकता कपूर की नजर में आई और एकता ने उन्हें ‘कसौटी जिंदगी की’ में कास्ट किया.

 

अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में धूम मचाती श्वेता रोहिरा और सोनू निगम की लघु फिल्म ‘‘स्पौटलेस’’

मशहूर रंगकर्मी भरत दाभोलकर के निर्देशन में नाटक ‘‘दैट माई गर्ल’’ से शोहरत बटोरने के बाद अब श्वेता रोहिरा अपनी लघु फिल्म ‘स्पौटलेस’’ के कारण अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सूर्खियां बटोर रही हैं. इस लघु फिल्म में श्वेता रोहिरा के संग गायक व अभिनेता सोनू निगम ने भी अभिनय किया है.

अब तक यह फिल्म तीन अंतरराष्ट्रीय व दो राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में दिखाई जाने के बाद प्रशंसा बटोर चुकी है.श्वेता रोहिरा कहती हैं- ‘‘जब अभिनेत्री के तौर पर प्रशंसा मिलती है तो बहुत अच्छा लगता है. इस फिल्म में सोनू निगम के साथ काम करना एक यादगार अनुभव रहा.इसी के साथ मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला.

बता दें, सलमान खान के मुंहबोली बहन के नाम से भी श्वेता रोहिरा मशहूर हैं. हाल ही में श्वेता अपने पति पुलकित सम्राट से अलग हुई हैं. इन दोनों के बीच तलाक की वजह पुलकित सम्राट का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर बताया गया था. एक्ट्रेस यामी गौतम के साथ उनके अफेयर की खूब चर्चा रही थी. इस ब्रेकअप को लेकर सलमान खान काफी नाराज रहे हैं और इसी के बाद से पुलकित सम्राट को बड़े बैनर की फिल्में मिलनी भी बंद हो गईं.

शराब का शबाब

ड्रग्स और सिगरेट की तरह शराब भी जानलेवा होती है पर शराब के व्यापारियों को इस साजिश में विशेषज्ञता हासिल है कि उन्होंने लगभग सारी दुनिया में इस जानलेवा नशे को रोजमर्रा के जीवन की जरूरत बनवा दिया है. हाल यह है कि भारत जैसे पुरातनपंथी देश में भी बच्चों के जन्मदिन के मौकों पर अब बड़ों को खुलेआम शराब परोसना फैशन या शान नहीं, बल्कि जरूरत समझी जाती है.

आयरलैंड ने शराब के कुप्रभावों के प्रति अपने देशवासियों में जागरूकता फैलाने की मुहिम शुरू की है. वहां शराब के विज्ञापनों पर पाबंदी लगा दी गई है. दुकानों में शराब का सैक्शन अलग बनाया जा रहा है और शराब की बोतल पर हैल्थ वार्निंग का स्टिकर चिपकाया जाना जरूरी कर दिया गया है. शराब न केवल कैंसर, किडनी के रोगों के लिए जिम्मेदार है, बल्कि शराब पी कर गाड़ी चलाने यानी ड्रंक ड्राइविंग करने के कारण दुर्घटना हाने की आशंका प्रबल हो जाती है.

सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में कहा था कि देश में हाईवे के दोनों तरफ 500 मीटर के भीतर शराब की दुकान न हो ताकि सड़क पर वाहन चलाते समय शराब के ठेके ड्राइवरों को ललचाएं नहीं. इस से कोई बड़ा फर्क पड़ा हो, इस का आंकड़ा तो नहीं है पर कम से कम शराब की लटकी बोतलें अब रास्ते में नहीं दिखतीं. कहने वाले कहते रहें कि शराब जोशीला ड्रिंक है पर असल में इस में कुछ भी जोश नहीं है. यह शरीर के लिए किसी तरह भी लाभदायक नहीं.

शराब कंपनियों ने जबरदस्त प्रचार के बल पर इसे घरघर पहुंचाया है. उन्होंने फिल्म कंपनियों को मुफ्त शराब दे कर, उन्हें हर मौके पर शराब की बोतलें खुलवाते दिखा कर, इसे मान्यता दिला दी है. पानी की जगह शराब को पीते दिखा कर शराब कंपनियां भरपूर कमाई कर रही हैं. सरकार चुप है क्योंकि उसे टैक्स मिलता है और सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत.

शराब का शिकार इस का सेवन करने वाले ही नहीं, बल्कि उन के परिवार की औरतें और बच्चे भी होते हैं. परिवार की आमदनी शराब में बह जाती है और घर की शांति भी. शराब के चलते दुर्घटना होने या गंभीर बीमारी होने से मौत हो जाए, तो और ही मुसीबत होती है. आयरलैंड की सरकार ने एक एनजीओ के दबाव में अपने देश में अच्छा कदम उठाया है पर शराब कंपनियों से टकराना आसान नहीं है. शराब आज तकरीबन सारी दुनिया में शबाब पर है.

ईशनिंदा से क्यों डरते हैं धर्म के ठेकेदार?

धर्म ताश के पत्तों के महल की तरह है इसीलिए धर्म की जरा सी बुराई से उस के ठेकेदार थर्रा उठते हैं और इकट्ठा हो कर होहल्ला मचाने लगते हैं. उन्हें इस बात का डर रहता है कि धर्म की बुराई से कहीं पोलपट्टी न खुल जाए. धर्म और उस के ठेकेदारों की असलियत सामने न आ जाए.

पाकिस्तान में इन दिनों ऐसा ही हो रहा है. वहां की सुप्रीम कोर्ट ने ईशनिंदा के मामले में एक ईसाई औरत आसिया बीबी को बरी कर दिया तो देशभर में प्रदर्शन और हिंसा का दौर शुरू हो गया. बेवकूफों की भीड़ सड़कों पर आ गई. कट्टरपंथी संगठनों के नेता और उन की पिछलग्गू जमात जजों के खिलाफ प्रदर्शन करने लगी.

पाकिस्तान में भी कई जगहों पर आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाएं हुईं. 4 राज्यों में धारा 144 लागू करनी पड़ी. कई इलाकों में सरकार को इंटरनैट सेवाएं बंद कर देनी पड़ीं. कुछ राज्यों में ट्रेनें और स्कूल भी बंद कर दिए गए.

पंजाब प्रांत में हाई अलर्ट घोषित किया गया. लाहौर, कराची, पेशावर, फैसलाबाद समेत 10 से ज्यादा बड़े शहरों में पुलिस ने कर्फ्यू लगा दिया और जनसभाएं करने पर भी रोक लगा दी थी.

अदालत ने आसिया बीबी की फांसी की सजा को जैसे ही पलटा, कई शहरों में मसजिदों से लोगों को इकट्ठा होने के ऐलान होने लगे. कुछ ही देर में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और आगजनी करने लगे.

प्रदर्शनों के चलते कई हाईवे बंद कर दिए गए. कट्टरपंथियों ने यहां तक कह दिया कि जज और सेना प्रमुख मुसलिम ही नहीं हैं.

हालात इतने ज्यादा बिगड़ गए थे कि प्रधानमंत्री इमरान खान को सामने आना पड़ा. उन्होंने कहा कि जजों ने जो फैसला दिया?है, वह इसलामी कानून के मुताबिक ही है. इसे सभी को स्वीकार करना चाहिए.

दरअसल, मामला साल 2010 का है. ईसाई धर्म से ताल्लुक रखने वाली 4 बच्चों की मां आसिया बीबी का अपने मुसलिम पड़ोसियों से झगड़ा हो गया था.

सिया बीबी की गलती महज इतनी थी कि उन्होंने कुएं के पास मुसलिम औरतों के लिए रखे गिलास से पानी पी लिया था.

मुसलिमों ने कहा कि गिलास नापाक हो गया. आसिया बीबी उन्हें समझाने लगीं और उन्होंने ईसा मसीह और पैगंबर मोहम्मद की तुलना कर दी. इस के बाद पड़ोसियों ने उन पर ईशनिंदा कानून के तहत मामला दर्ज करा दिया.

निचली अदालत ने ईशनिंदा के आरोप में आसिया बीबी को फांसी की सजा सुना दी थी लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. इस दौरान मुसलिम उदारवादी नेताओं और दुनियाभर के मानवाधिकारों के पक्षधर लोगों के बीच आसिया बीबी की फांसी को रद्द करने की मांग उठने लगी.

साल 2011 में पंजाब के गवर्नर रह चुके सलमान तासीर की उन के बौडीगार्ड ने इसीलिए हत्या कर दी थी  कि उन्होंने आसिया बीबी की रिहाई की वकालत की थी. इस के साथसाथ वे तालिबान जैसे कट्टरपंथियों और मुल्लामौलवियों को जरा भी तवज्जुह नहीं देते थे. वे उन की बुराई करने से भी नहीं डरते थे. आसिया बीबी की पैरवी करने की वजह से अल्पसंख्यक मंत्री शाहबाज भट्टी की भी हत्या कर दी गई थी.

दरअसल, साल 1982 में तानाशाह जियाउल हक ने ईशनिंदा को लागू किया था. पाकिस्तान पीनल कोड में 295बी जोड़ कर ईशनिंदा कानून बनाया गया था. इस से पहले साल 1860 में ब्रिटिश शासन ने धर्म से जुड़े अपराधों के लिए यह कानून बनाया था लेकिन उस समय इस का मकसद धार्मिक दंगे और हिंसा को रोकना था.

साल 1982 में जियाउल हक सरकार ने संशोधन कर के कुरान के अपमान को अपराध की श्रेणी में रख दिया. साल 1986 में ईशनिंदा कानून में धारा 295सी भी जोड़ दी गई और पैगंबर मोहम्मद के अपमान पर उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान किया गया.

यह कानून अभी भी 70 से ज्यादा देशों में है. साल 1986 के पहले तक पाकिस्तान में ईशनिंदा के मामले कम ही आते थे. साल 1927 से साल 1985 तक सिर्फ 58 मामले ही अदालत में पहुंचे थे, पर इस के बाद ऐसे मामलों की बाढ़ सी आ गई. 4000 से ज्यादा मामले अदालतों में पहुंचे. हालांकि अभी तक ईशनिंदा मामले में किसी को फांसी नहीं दी गई है. ज्यादातर की मौत की सजा माफ हो गई है.

सुप्रीम कोर्ट से रिहा होने के बाद आसिया बीबी ने कहा, ‘‘मैं इस बात पर भरोसा ही नहीं कर पा रही हूं कि मुझे आजादी मिल गई है. इस देश में हमारी जिंदगी बहुत मुश्किलों से गुजरी है.’’

उधर फैसले के भारी विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस मियां साकिब निसार ने कहा कि अगर किसी के खिलाफ लगे आरोप कोर्ट में साबित नहीं होते हैं तो कोर्ट उस को सजा कैसे दे सकता है. मैं और बैंच के जज पैगंबर को प्यार करते हैं. हम उन के सम्मान में बलिदान को तैयार हैं पर हम सिर्फ मुसलिमों के जज नहीं हैं.

भारत और पाकिस्तान में धर्म के धंधेबाजों की ताकत बढ़ी है और उन की पोलपट्टी नहीं खुले, इस पर वे चौकन्ने रहते हैं. धर्म के नाम पर भीड़ को भड़काना आसान होता है.

भारत में भी नई सोच के लोगों को कट्टरपंथियों की ओर से मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं. धर्म और ईश्वर पर टिप्पणी करने वालों को कोर्टकचहरी में घसीट लिया जाता है. उन्हें धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने जैसे मामलों में परेशान किया जाता है.

दरअसल, धर्म और ईश्वर के नाम पर मौज उड़ाने वाले पोल खुलने से हमेशा डरे रहते हैं. ऐसे लोग धर्मांधों को बेवकूफ बना कर ईश्वर, पैगंबर वगैरह का डर दिखा कर, लालच दे कर अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं. जब कोई धर्म और ईश्वर की असलियत की पोल खोलता है तो वे घबरा उठते हैं. उन्हें अपनी सत्ता डोलती नजर आती है और वे धर्म पर खतरे का ऐलान करते हुए भीड़ को भड़का कर हिंसा की ओर झोंक देते हैं.

जो दिखाई न दे, जिस के वजूद पर सवाल उठ खड़े हों और वैज्ञानिक नजरिए से उस के आधार का कोई पुख्ता सुबूत न हो, उस पर विश्वास और आस्था के नाम पर दुनिया आपस में मारकाट, हिंसा पर उतर जाए तो इसे हद दर्जे की बेवकूफी ही माना जाना चाहिए.

दुनियाभर में यह बेवकूफी सदियों से चलती आई है. जब तक लोगों के दिमाग से धर्मांधता का अंधेरा पूरी तरह नहीं हटेगा, तब तक धर्म के नाम पर हिंसा होती रहेगी. यह अंधेरा पढ़ाईलिखाई ही दूर कर सकती है.

ये भी छू सकते हैं आसमान

जहां एक ओर पूरे देश में धर्म और अंधविश्वास फैलाए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों ने मिल कर बिहार के औरंगाबाद जिले के 40 सरकारी स्कूलों में 2 दिवसीय विज्ञान कांग्रेस सह विज्ञान मेले का आयोजन कराया.

सीएसआईआर, दिल्ली के सीनियर साइंटिस्ट गौहर रजा ने बच्चों को बताया कि जिस का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं हो, उन चीजों को नहीं मानना चाहिए.

श्रीकृष्ण साइंस सैंटर, पटना से आए मोहम्मद आफताब हुसैन ने बच्चों को विज्ञान पर आधारित पानी से लिखना, पानी को रंगीन बनाना, पानी से हवन जलाना, बोतल से गुब्बारा फुलाना, प्लास्टिक के पाइप से बाजा बनाना जैसे डैमो दिखाए और किन वजहों से ऐसा होता है, उन के बारे में भी रोचक ढंग से जानकारी दी.

‘किलकारी’ संस्था के सुधीर कुमार व ‘प्रथम’ संस्था के सरोज कुमार और सुरेश ने बच्चों को ताली बजाना, खेलखेल में विज्ञान, कागज से तितली और खरगोश वगैरह बनाना सिखाया. बच्चों को तरहतरह की दूसरी रोचक जानकारियां भी दी गईं.

घुमंतू वैज्ञानिक सीताराम के डायरैक्शन में कैनवास पर पेंटिंग बनाई गई. ‘कला जत्था’ की टीम के रामेश्वर विश्वकर्मा, सोहराई और फिरोज ने कार्यक्रम में चार चांद लगाने का काम किया.

बच्चों के द्वारा 40 स्टौल लगाए गए जिन में किसी ने हाइड्रोलिक ब्रिज बनाया, तो किसी ने जेसीबी का मौडल. इस के अलावा बच्चों के द्वारा कबाड़ से जुगाड़ के तहत बनाए गए दूसरे सामान देख कर लोग दंग थे. बुक स्टाल भी लगाए गए जिन में काफी तादाद में किताबें रखी गई थीं.

आयोजन समिति के सूत्रधार ‘पीस’ संस्था के डायरैक्टर गालिब साहब ने बताया कि एक सर्वे में आया है कि सरकारी स्कूल के बच्चे विज्ञान और गणित में राष्ट्रीय औसत से काफी कम हैं. बच्चों में विज्ञान के प्रति जागरूकता लाने के लिए जनता की मदद से यह आयोजन किया गया. डीएम राहुल रंजन महिवाल ने कहा कि सरकारी स्कूल के बच्चे भी चांदसितारे छू सकते हैं.

मील का पत्थर होगा सर्व शिक्षा अभियान के सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी राजेश कुमार मांझी ने कहा कि इस तरह का कार्यक्रम खासकर कस्तूरबा गांधी स्कूल और सरकारी स्कूल के छात्रछात्राओं के बीच विज्ञान को बढ़ावा देने और लोगों में फैले अंधविश्वास को दूर भगाने की यह कोशिश मील का पत्थर साबित होगी.

वहीं प्रखंड प्रमुख जनाब आरिफ रिजवी ने कहा कि मुझे पहले यकीन ही नहीं हो रहा था कि निहायत गरीब घर के छात्रछात्राएं इतने बेहतर विज्ञान पर आधारित एक से एक मौडल बना पाएंगे.

आनंद संगीत महाविद्यालय के डायरैक्टर अरविंद कुमार वर्मा ने कहा कि अगर आने वाली नई पीढ़ी विज्ञान को अच्छी तरह से समझती है तो समाज से फैला अंधविश्वास और आस्था के नाम पर चल रहे व्यापार पर रोक लगेगी. इस तरह के कार्यक्रमों को गांवदेहात से ले कर महानगरों तक में शिक्षण संस्थानों समेत आम लोगों तक ले जाने की जरूरत है, वरना यहां तो मंत्री के द्वारा बारिश होने के लिए मेढ़क की शादी कराई जाती है.

इंटरनेशन तैराक की कातिल माशूका

23 जनवरी, 2017 की सुबह की बात है. बिहार के भागलपुर के लोदीपुर थानांतर्गत कवाली नदी के किनारे कुछ बच्चे बेर तोड़ रहे थे तभी किसी की नजर पास की झाड़ी में पड़ी एक लाश पर गई. लाश देखते ही डर कर बच्चे वहां से भाग गए. उन्होंने यह बात अपने जानने वालों को बताई तो गांव के कुछ लोग उस जगह पहुंच गए, जहां लाश पड़ी थी. वहीं से किसी ने फोन कर के यह जानकारी लोदीपुर थाने में दे दी. सुबह 10 बजे के करीब पुलिस को जैसे ही लाश मिलने की सूचना मिली तो थानाप्रभारी भारतभूषण पुलिस टीम के साथ नदी के किनारे पहुंच गए.

वहां झाडि़यों में करीब 35 साल के एक युवक की लाश पड़ी थी. वह युवक विकलांग था. उस के दोनों हाथ नहीं थे. उस का चेहरा तेजाब से झुलसा हुआ सा लग रहा था. लाश से दुर्गंध आ रही थी. इस से लग रहा था कि उस की हत्या कई दिन पहले की गई थी.

जांच में उस लाश की पुष्टि इंटरनैशनल तैराक और बिहार सरकार के सचिवालय में क्लर्क की नौकरी करने वाले विनोद कुमार सिंह के रूप में हुई. विनोद मूलरूप से सीवान जिले के बड़ा सिकवा इलाके के नौतन बाजार में रहने वाले रामजी सिंह का बेटा था. वह पश्चिम बंगाल के 24 परगना के स्कूल में अध्यापक थे. पुलिस ने खबर भेज कर रामजी सिंह को बुलवा लिया. बेटे की लाश देख कर वह फूटफूट कर रोने लगे. मौके की काररवाई पूरी कर के पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

पुलिस ने रामजी सिंह से बात की तो उन्होंने बताया कि विनोद का लोदीपुर की रहने वाली वौलीबौल खिलाड़ी रंजना कुमारी से प्रेम चल रहा था. 6 जनवरी, 2017 से ही वह पटना से लापता था. तब 13 जनवरी को उन्होंने उस के गायब होने की सूचना सचिवालय थाने में दी. इस के 8 दिन बाद भी जब विनोद के बारे में जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने विनोद के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करा दी. एफआईआर दर्ज कराते हुए उन्होंने रंजना कुमारी, उस के पिता, मां, बहनोई और फुफेरे भाई पर अपहरण की आशंका जताई थी.

इंटरनैशनल तैराकी में मुकाम बना चुके विनोद को इसी उपलब्धि पर सचिवालय भवन में जल संसाधन विभाग में सन 2012 में क्लर्क की नौकरी मिली थी. विनोद के करीबी लोगों ने पुलिस को बताया कि वह रंजना को तैराकी सिखाता था. उसी दौरान दोनों करीब आए. दोनों चोरीछिपे मिलते रहते थे और धीरेधीरे उन का प्यार परवान चढ़ गया. विनोद शादीशुदा ही नहीं, बल्कि 2 बच्चों का पिता था. बेटा मिलन सिंह 7 साल का और बेटी गुनगुन 4 साल की है. विनोद की बीवी वीणा अपने ससुर के साथ ही 24 परगना में ही रहती है.

इस के बावजूद भी उस का रंजना से चक्कर चल रहा था. विनोद अपने परिवार के साथ पटना के राजवंशी नगर मोहल्ले में रहता था. उस के साथ उस का भांजा अंकित भी रहता था. विनोद के पिता ने पुलिस को बताया कि रंजना का मकसद विनोद के पैसों पर कब्जा जमाना था. रंजना सीतामढ़ी के डीएवी स्कूल में टीचर थी. विनोद जहां इंटरनैशनल डिसएबल स्विमर था तो वहीं रंजना स्टेट लेवल की वौलीबाल खिलाड़ी रह चुकी थी. विनोद के साथ पटना में रहने वाले उस के भांजे अंकित ने बताया कि जब विनोद गायब हुआ था तो उस दौरान वह पटना में नहीं था. वह कोलकाता जाने की बात कह कर पटना से निकले थे. पर बाद में पता चला कि वह कोलकाता पहुंचे ही नहीं.

जांच की इसी कड़ी में पुलिस को पता चला कि पहली जनवरी, 2017 को विनोद पर मोबाइल छीनने का आरोप लगा था. 2 लोग उसे पीटने पर उतारू थे. उन से जान बचा कर विनोद किसी तरह तिलकामांझी थाने के पास पहुंच गया. तब पुलिस ने उसे बचाया था. जो लोग उस की पिटाई करने पर उतारू थे उन्होंने पुलिस को बताया कि एक बैंक के एटीएम बूथ के पास विनोद ने किसी लड़की का मोबाइल फोन छीना है.

उन की यह बात सुन कर पुलिस भी चौंकी क्योंकि जिस आदमी के दोनों हाथ ही कंधों से न हों, वह किसी का मोबाइल कैसे छीन सकता है. तब उन दोनों युवकों ने पुलिस की उस लड़की से भी बात कराई. जिस का मोबाइल छीनने का वह आरोप लगा रहे थे. वह लड़की रंजना ही निकली और जो 2 आदमी विनोद को पीट रहे थे उन में एक रंजना का बहनोई और दूसरा मौसेरा भाई था.

रंजना ने पुलिस को बताया कि विनोद ने उस का मोबाइल छीना नहीं था बल्कि कई दिन पहले ले लिया था जो अब लौटा नहीं रहा है. पुलिस ने विनोद से मोबाइल फोन ले कर रंजना के बहनोई को दे दिया.

रंजना और उस के घर वाले चाहते थे कि विनोद रंजना का पीछा छोड़ दे. लेकिन विनोद नहीं मान रहा था. उस से पीछा छुड़ाने के लिए उन्होंने उस पर लूटपाट का झूठा आरोप लगाया था.

विनोद ने पुलिस को बताया कि रंजना उस की बीवी है, जो लोदीपुर इलाके में रहती है. वह नए साल पर उसे गिफ्ट देने आया था. इतना ही नहीं उस ने अपने मोबाइल में रंजना की और अपनी विवाह की तसवीरें भी दिखाईं.

विनोद तैराकी के बटरफ्लाई स्ट्रोक में माहिर था. उस ने सन 2005 और 2008 के बीजिंग पैरा ओलांपिक के अलावा 2011 में कई नैशनल और इंटरनैशनल तैराकी प्रतियोगिताओं में भाग लिया था. कई प्रतियोगिताओं में वह भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुका था. सन 2006 में मलेशिया में आयोजित ऐशियाई खेलों में भी उस ने भाग लिया था.

इस के बाद सन 2007 में ताइवान में आयोजित वर्ल्ड ऐम्प्यूटी स्पोर्ट और जरमन ओपन में हिस्सा ले चुका था. 2008 में वह तैराकी का इंटरनैशनल चैंपियन बना था. जर्मनी में तैराकी प्रतियोगिता में उसे गोल्ड मैडल मिला था. उस की इस उपलब्धि पर बिहार और बंगाल सरकार ने उसे कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया था.

साल 2012 में विनोद को खेल कोटा से बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग में क्लर्क की नौकरी मिली थी. शनिवार और रविवार को वह कोलकाता जा कर तैराकी का अभ्यास करता था.

अपनी विकलांगता को अपना हथियार बनाने वाले विनोद ने कभी हिम्मत नहीं हारी. उस के दोनों हाथ नहीं थे इस के बावजूद भी वह पैरों से ही सारा काम कर लेता था. घरेलू काम हो चाहे औफिस का काम हो, वह सारा काम पैरों से ही करता था. मोबाइल फोन से ले कर कंप्यूटर तक वह बिना किसी अवरोध के पैरों से ही चला लेता था.

रंजना के पिता राधाकृष्ण मंडल स्वास्थ्य विभाग में नौकरी करते थे. वह रिटायर हो चुके हैं. चूंकि विनोद के पिता ने रंजना के घर वालों पर ही आरोप लगाया था इसलिए पटना के एसएसपी मनु महाराज के निर्देश पर पुलिस ने रंजना, उस के पिता राधाकृष्ण मंडल, मां सबरी देवी, बहनोई शंभू मंडल को हिरसत में ले कर पूछताछ की तो उन्होंने विनोद की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. पूछताछ में पता चला कि खेल कोटे के तहत नौकरी का फार्म भरने के लिए रंजना बिहार सचिवालय में गई तो वहीं पर उस की मुलाकात विनोद से हुई थी. बाद में दोनों के बीच संबंध और गहरे हो गए.

रंजना ने कई चौंकाने वाली बातें पुलिस को बताईं. उस ने बताया कि वह विनोद से प्यार करती थी. पर उस ने खुद के शादीशुदा होने की बात उस से छिपाई. जब उसे पता चला कि विनोद 2 बच्चों का बाप है तो उस ने विनोद से दूरी बनानी शुरू कर दी.

रंजना के फोन में विनोद के साथ खींचे गए कुछ फोटो खास पलों के थे. विनोद ने उस का फोन अपने पास रख लिया. वह उन फोटो को सार्वजनिक करने की धमकी दे कर रंजना पर शादी का दबाव बना रहा था. पर रंजना उस से शादी तो दूर बल्कि उस से मिलना तक नहीं चाहती थी. बाद में रंजना की नौकरी सीतामढ़ी के डीएवी स्कूल में लग गई. लेकिन विनोद उस से मिलने उस के स्कूल में भी पहुंच जाता था.

रंजना ने बताया कि विनोद पैरों से ही मोबाइल फोन को पकड़ कर सेल्फी भी खींच लेता था. इतना ही नहीं वह पैरों से ही सिगरेट जला कर पी लेता था. कई बार जब वह उस से मिलने भागलपुर पहुंचता था और उस के घर वाले घर का दरवाजा नहीं खोलते थे तो वह बरामदे में ही घंटों बैठा रहता था. उस दौरान वह पैरों से ही माचिस जला कर सिगरेट जला लेता था और कश पर कश लेता रहता था.

रंजना की मां सबरी देवी ने रोतेरोते पुलिस से कहा कि परिवार की इज्जत बचाने के लिए गलत काम करना पड़ा. विनोद रंजना को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार को ब्लैकमेल कर रहा था. रंजना और विनोद के रिश्तों की वजह से समाज में उस के परिवार की काफी बदनामी हो रही थी. छोटी बेटी का विवाह पक्का हो चुका था. विनोद की धमकी के बाद परिवार के लोगों को इस बात का अंदेशा था कि कहीं विनोद की वजह से बेटी का रिश्ता न टूट जाए. इसलिए परिजनों ने विनोद को यह समझाने की कोशिश की बेटी की शादी तक चुप रहे पर वह कुछ सुनने को तैयार नहीं था.

रंजना की बहन की शादी की तारीख जैसेजैसे नजदीक आती जा रही थी वैसेवैसे रंजना के घर वाले परेशान हो रहे थे. क्योंकि विनोद रंजना पर साथ रहने का दबाव  बढ़ा रहा था. 6 मार्च, 2017 को रंजना की बहन की शादी की तारीख निश्चित हो गई. रंजना को डर लगने लगा था कि विनोद और उस के अवैध संबंधों की बात बहन के ससुराल वालों को पता चल गई तो शादी टूट सकती है.

रंजना ने मिलने के लिए उसे भागलपुर बुलाया ताकि उसे बैठा कर समझाया जाए. विनोद 6 जनवरी को ही भागलपुर रेलवे स्टेशन पहुंच गया. उस समय रात हो गई थी इसलिए वह रेलवे स्टेशन पर ही रुक गया था. 7 जनवरी को वह रंजना से मिलने पहुंच गया. काफी समझाने के बाद भी विनोद अपनी जिद पर अड़ा रहा.

7 जनवरी की सुबह विनोद ने अपने पिता से बात की. पिता को जब पता चला कि वह भागलपुर में रंजना के पास गया है तो उन्होंने उस से कहा कि वह तुरंत लौट आए. पर विनोद ने कहा कि रंजना के भाई बिट्टू ने मिलने के लिए बुलाया है उस से बातचीत कर के लौट आऊंगा.

इस के बाद विनोद ने रंजना के मौसेरे भाई बिट्टू को फोन कर के कहा कि रंजना के मांबाप से बोल दो कि रंजना से उस की शादी हो चुकी है और अब जल्द से जल्द वह उस की विदाई कर दें. रंजना के बहनोई शंभू मंडल ने पुलिस के सामने कबूल कर लिया कि उस ने रंजना के मौसेरे भाई कमल किशोर उर्फ बिट्टू और उस के एक दोस्त संजीव के साथ मिल कर विनोद का कत्ल किया था. कत्ल के दौरान रंजना वहां मौजूद नहीं थी.

सभी ने पकड़ कर विनोद को जमीन पर पटक दिया. रंजना की मां और संजीव ने उस के पैर पकड़ लिए और बिट्टू उस का गला घोंटने लगा. शंभू ने विनोद के मुंह में गमछा ठूंस कर नाक दबा ली. कुछ ही देर में दम घुटने से विनोद की मौत हो गई. चूंकि रंजना ने ही मिलने के लिए विनोद को भागलपुर बुलाया था इस से वह साबित हो गया कि वह भी विनोद की हत्या की साजिश में शामिल थी.

पुलिस ने सभी अभियुक्तों से पूछताछ कर उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

राजन साही ने किया पारुल चौहान का कन्यादान

‘स्टार प्लस’ के सर्वाधिक लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘यह रिश्ता क्या कहलाता है’ में नायरा की सास का किरदार निभाते हुए नजर आ रहीं और मूलतः लखीमपुर खीरी निवासी अभिनेत्री पारुल चौहान ने 12 दिसंबर को सुबह आठ से दस बजे के बीच अपने प्रेमी चिराग ठक्कर के संग मुंबई के इस्कौन मंदिर में शादी की.

इस अवसर पर पारुल चौहान की इच्छा के मुताबिक सीरियल ‘यह रिश्ता क्या कहलाता है’ के निर्माता व निर्देशक राजन साही ने पारुल चौहान का कन्यादान किया. इस वक्त पारुल चौहान ने लाल रंग की बनारसी साड़ी पहन रखी थी. उसके इन दोनों ने कोर्ट मैरिज भी की. शादी का पहला रिसेप्शन 16 दिसंबर को लखीमपुर में आयोजित होगा.

parul chauhan married chirag thakkar

शादी के वक्त शिवांगी जोशी, अली हसन, सचिन त्यागी, शिल्पा रायजादा, मोहेना कुमारी, लता सभरवाल, ऋषि देव व समीर ओंकार भी मौजूद थे.

उससे पहले मेंहदी व संगीत की रस्म भी हुई. मेंहदी की रस्म के वक्त पारुल चौहान ने पीले रंग का लहंगा पहना था. मेहंदी की रस्म पर पारुल चौहानकी दोस्त शिल्पा रायजादा, माही शर्मा व टिया गंडवानी ने शिरकत की.

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शादी संपन्न होने के बाद पारुल चौहान ने कहा- ‘ईश्वर की अनुकंपा से सब कुछ सही समय व सही ढंग से संपन्न हुआ. मुझे खुशी है कि मैने अपने पसंदीदा पुरूष से शादी रचाई. मैने जो चाहा था, ईश्वर ने उससे कहीं ज्यादा दे दिया. मै अपने दर्शकों व प्रशंसकों की आभारी हूं. मै अपने मेंटर व पिता तुल्य राजन साही का भी शुक्रिया अदा करती हूं. मैं शादी करके ज्यादा दिन की छुट्टी नहीं ले रही हूं. मैंने सात दिन की छुट्टी ली है. सात दिन बाद शूटिंग करना शुरू करुंगी. लेकिन नए वर्ष पर एक सप्ताह की छुट्टी लेकर हनीमून पर जाने वाली हूं.’

ज्ञातव्य है कि चिराग ठक्कर और पारुल चौहान की प्रेम कहानी 2015 में शुरू हुई थी. खुद पारुल चौहान बताती हैं- ‘मैं चिराग को तीन वर्ष से और उनके परिवार को दो साल ग्यारह माह से जानती हूं. परिवार के हर सदस्य का स्वभाव मुझे पता है, इसलिए शादी के बाद मेरे सामने कोई समस्या नहीं आएगी. परिवार के हर सदस्य का मुझे सहयोग मिलने वाला है. चिराग में इतनी अच्छाईयां हैं कि उन्हे गिनाया नही जा सकता.’

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तीस साल की पारुल चौहान ने 2007 में सीरियल ‘सपना बाबुल का ..बिदाई’ से करियर शुरू किया था. उसके बाद वह ‘रिश्तों से बड़ी प्रथा’, ‘पुनर्विवाह’, ‘एक नई उम्मीद’, ‘मेरी आशिकी तुमसे’ सहित कई सीरियलों में अभिनय कर चुकी हैं. जबकि चिराग ठक्कर ‘बड़े अच्छे लगते हैं’, ‘अमिता का अमित’ जैसे सीरियलों में अभिनय कर चुके हैं.

जानिए रजनीकांत फिल्मों में कभी क्यों नहीं मरते

सुपरस्टार रजनीकांत अपने आप में एक ब्रांड हैं. रजनी के नाम पर फिल्में सुपरहिट होती हैं. वो दुनिया भर में अपने अंदाज के लिए फेमस हैं. रजनीकांत की फैन फौलोइंग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उनकी फिल्म रिलीज होती है तो फैंस सुबह पांच बजे ही सिनेमाघर के बाहर पहुंच जाते हैं और सिनेमाघर मालिकों को शो तभी शुरू करना पड़ता है.

हाल ही में 2.0 की रिलीज के दौरान ऐसा ही देखने को मिला. इस फिल्म को देखने दर्शक सुबह 4 बजे ही सिनेमाघरों में पहुंच गए थे. रजनी को बड़े पर्दे पर देख लोगों की दिवानगी इस कदर बढ़ जाती है कि वो पर्दे पर सिक्के उछालने लगते हैं. यही कारण रहा कि एक सिनेमाघर का पर्दा फट गया, जिसके बाद रजनीकांत की फिल्मों में दर्शकों को सिक्का ले जाने पर मनाही हो गई. ये उन चुनिंदा कलाकारों में से एक हैं जो 60 की उम्र में भी लीड रोल करते हैं.

अक्सर फिल्मों में रजनीकांत को मरते हुए नहीं दिखाया जाता है. इसका कारण फिल्म के फ्लौप होने का डर होता है. निर्देशकों को ये डर रहता है कि अगर वो अपनी फिल्म में रजनीकांत को मरता हुआ दिखाते हैं तो उनकी फिल्म फ्लौप हो जाएगी. जिसके कारण पिछले कई सालों में किसी भी फिल्म में उन्हें मरते हुए नहीं दिखाया गया.

मूल रूप से मराठी होने का बाद भी रजनी ने आज तक मराठी फिल्में नहीं की हैं. इसके अलावा वो, कन्‍नड़, मलायलम, बंगाली और अंग्रेजी फिल्‍मों में काम कर चुके हैं. हाल ही में रिलीज हुई उनकी फिल्म 2.0 ने बौक्स औफिस के कई रिकौर्ड तोड़ दिये हैं. ये फिल्म अगले साल चीन में रिलीज होगी.

संस्कृति की यह कैसी रक्षा

देशभर में अराजकता इतनी बढ़ गई है कि कहीं भी कोई युवा जोड़ा अब सुरक्षित नहीं रह गया है. नैतिकता के नाम पर गांवगांव, कसबेकसबे में गुंडों के गुट राह चलते किसी भी जोड़े को पकड़ लेते हैं और उन पर इम्मोरल होने का आरोप लगा कर तुरंत सजा देते हैं. वे खुद बच निकलते हैं क्योंकि इसे संस्कृति की रक्षा करने के लिए किया गया काम जो कहा जाता है.

आजकल ऐसे बहुत से वीडियो वायरल हो रहे हैं जिन में खेतों में 3-4 लड़के किसी जोड़े को पकड़ कर मारतेपीटते हैं, लड़की का रेप करते हैं, वीडियो बनाते हैं और फिर दनदनाते हुए निकल ही नहीं जाते, वीडियो को पोस्ट भी कर देते हैं. उन्हें मालूम है कि आज के माहौल में उन्हें कोई नहीं पकड़ेगा.

छत्तीसगढ़, जहां भारतीय जनता पार्टी का राज है, के कोरबा क्षेत्र में 19 साल के एक लड़के ने बिना कारण आत्महत्या कर ली. मातापिता हैरान थे कि क्या हुआ. 10 दिनों बाद पता चला जब एक लड़की पुलिस थाने पहुंची कि सुनसान रास्ते में 2 लड़कों ने उस का रेप किया था और उस के साथ मौजूद लड़के, जिस ने आत्महत्या कर ली, को रेप होते हुए देखने को मजबूर किया था.

इस शर्मिंदगी को वह लड़का सह नहीं पाया और उस ने आत्महत्या कर ली. लड़की इस अपराधभाव से मुक्त नहीं हो पाई और 10 दिनों बाद उस ने कटघोरा के पुलिस स्टेशन पहुंच कर शिकायत दर्ज करा दी.

एक तरफ देश में बेटी बचाओ के नारे लगाए जा रहे हैं, दूसरी ओर बेटियों का खुलेआम नैतिकता के नाम पर बलात्कार किया जा रहा है. दोस्ती करना और प्रेम करना हर युवा का अधिकार है पर पाखंड के पुजारी इस प्रेम पर पाबंदी लगाना चाहते हैं ताकि विवाह केवल जातियों में, कुंडलियां मिला कर, दानदक्षिणा दे कर ही हो. दरअसल, यह संस्कृति बचाओ अभियान नहीं है, बल्कि यह व्यापार बचाओ अभियान है.

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