राखी सावंत बनीं ‘छप्पन छुरी’, वायरल हुईं फोटोज

बौलीवुड में राखी सावंत एक ऐसा नाम है, जो कि अपने बयानों से नए नए विवाद को जन्म देने और परदे पर बोल्ड सीन्स के लिए जानी जाती हैं. जी हां! बौलीवुड की अति बोल्ड अदाकारा राखी सावंत जब भी परदे पर आती हैं, कुछ न कुछ हंगामा कर ही जाती हैं. अब एक बार फिर वह लोगों को सेक्सी म्यूजिक वीडियो ‘‘छप्पन छुरी’’में अपने सेक्सी लुक के साथ लुभाने आ रही हैं.

हाल ही में फिल्म ‘‘साहेब बीबी और गैंगस्टर’’ की मशहूर गायिका मंदाकिनी बोरा ने एक आइटम नंबर ‘‘छप्पन छुरी’’को अपनी आवाज में रिकार्ड करने के बाद इसका म्यूजिक वीडियो बनाया,तो उन्होंने इस म्यूजिक वीडियों में नृत्य करने के लिए मदमस्त सेक्सी अदाओं को बिखेरने वाली अदाकारा राखी सावंत को ही याद किया.

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दीपक नूर के गीत ‘‘छप्पन छुरी’’ को संगीतकार जावेद हुसैन के निर्देशन में मंदाकिनी बारो ने अपनी आवाज में रिकार्ड किया, जिसका वीडियो निर्देशक राजीव खिंची ने फिल्माया. इस वीडियो में राखी सावंत के सेक्सी लटके झटके के साथ ही मंदाकिनी बोरा, मंदाकिनी बोरा की बहन मयूराक्षी बोरा के साथ ही अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा के डुप्लीकेट भी नजर आएंगे. सूत्रों की माने तो इस म्यूजिक वीडियो के लिए राखी सावंत ने एक दो नहीं बल्कि दस बार ड्रेस बदली हैं.

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ब्लैक बिकिनी में दिशा को देख फैंस ने किए ऐसे कौमेन्ट

बौलीवुड की हौट एक्ट्रेस और करोड़ों दिलों की जान दिशा पाटनी आए दिन चर्चा में रहती हैं. सोशल मीडिया पर दिशा काफी एक्टिव रहती है. फैंस को उनकी बिकिनी फोटोज काफी पसंद आती है.  समय समय पर वो फैंस के लिए फोटोज शेयर करती रहती हैं. इसी के चलते एक फिर दिशा पाटनी ने अपने चाहनेवालों की चाहत पूरी कर दी है. दिशा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर ब्लैक बिकिनी में फोटो शेयर की है, जिसमें वो काफी सेक्सी लग रही हैं. दिशा ने जैसे ही ये फोटो शेयर की फैंस ने कौमेन्ट करना शुरु कर दिया. चलिए देखते है उनकी ये न्यू फोटोज…

बौल्ड अंदाज में दिशा

अपने बौल्ड अंदाज के कारण दिशा सभी की फेवरेट बन गई हैं. दिशा की इस फोटो की बात की जाए तो वो एक पूल के पास खड़ी हुई हैं साथ में उनकी ब्लैक बिकिनी इस पुरे इनवौरमेंट को और भी सेक्सी बना रही हैं. दिशा पाटनी को देखकर ऐसा लग रहा है कि वो अभी-अभी पूल से नहाकर निकली हैं. उन्होंने इस फोटो के लिए एक ब्रांड की बिकिनी पहन रखी है, जिसका वो प्रमोशन करती हैं.

 

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Hello, Summer! ☀️ #MyCalvins @calvinklein

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Merry Christmas to all🧚‍♀️🌸

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दिशा हाल ही में सलमान खान और कटरीना कैफ की ‘भारत’ में नजर आ चुकी है. इस फिल्म में उन पर फिल्माया गया ‘स्लो मोशन’ काफी फेमस हुआ है. इस गाने में उन्होंने सलमान खान के साथ ठुमके लगाए हैं. दिशा की एक्टिंग की सभी ने जमकर तारीफ की है. अब दिशा अपनी अगली फिल्म ‘मलंग’ में व्यास्थ हो गई है. इस फिल्म में उनके साथ आदित्य रौय कपूर और अनिल कपूर जैसे एक्टर  दिखाई देंगे.

क्या मोदी केबिनेट रचेगी ‘नया इतिहास’?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए मंत्रिमंडल से ऐसा कुछ नहीं लगता कि देश में बदलाव की कोई आंधी आएगी. मंत्रिमंडल में अमित शाह का आना केवल यह इशारा करता है कि भारतीय जनता पार्टी अपने फैसलों को सख्ती और मजबूती से लागू करेगी और उन में लचीलापन कम होगा. अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, मेनका गांधी, सुरेश प्रभु, उमा भारती जैसे पुराने अनुभवी नाम गायब हैं. जो नए कैबिनेट लैवल के मंत्री हैं वे आमतौर पर पार्टी की लाइन पर चलने वाले हैं.

वैसे तो यह हमेशा होता रहा है कि हर प्रधानमंत्री अपने चहेतों को ही मंत्रिमंडल में रखता है पर फिर भी मजबूत और बेहद लोकप्रिय प्रधानमंत्री दूसरों के कुछ दबाव में आ कर कुछ समझौते करता है. इस मंत्रिमंडल में समझौता नहीं किया गया है. यह नीतीश कुमार की भी न सुनने की ताकत से साफ है. जनता दल (यूनाइटेड) मंत्रिमंडल में 3 मंत्री पद की मांग कर रहा था पर भाजपा एक ही देने को तैयार थी. हार कर नीतीश कुमार की पार्टी को घर बैठना पड़ा.

सरकार में क्या बदलाव की हवा आएगी यह कम से कम मंत्रियों से तो पता नहीं चलता. लगता है पिछली बार की तरह इस बार भी सारे फैसले नरेंद्र मोदी ही लेंगे और उन के अकेले सलाहकार अमित शाह ही रहेंगे.

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देश के सामने समस्याओं का भंडार है. आज बेरोजगारी बढ़ रही है. किसान परेशान हैं. फैक्टरियां बंद हैं. हां, जनता को वोट देते समय ये मुसीबतें नहीं दिखाई दीं तो कोई वजह नहीं कि प्रधानमंत्री इन पर नींद खराब करें. जनता को देशभक्ति, राष्ट्रवाद और पूजापाठों व आरतियों के झुनझुनों से खुश किया जा सकता है तो क्यों न गिरिराज सिंह जैसों को ऊंचा कद दिया जाए.

देश की जनता, जिन में अब गरीब, फटेहाल और ऊंचों के जुल्मों के सताए शामिल हैं, अगर अपनी जरूरतों को पूरा करवाना नहीं चाहती तो सरकार को सहीतौर पर फिक्र नहीं करनी चाहिए. हमें सदियों से मूर्तियों को पूजने की आदत रही है. हमारे पौराणिक ग्रंथ व्रत व पूजा से हर चीज पाने की कहानियों से भरे पड़े हैं. आज भी अगर इसी तरह सबकुछ मिल सकता है तो फिर जो हो रहा है वही सही है.

उम्मीद करिए कि सरकार वोटरों की मन्नतों को महल्ले के मंदिर की ही तरह पूरा करेगी. वोटरों ने ईवीएम मशीनों पर लाल धागा बांध कर अपना काम तो पूरा कर दिया है न. अब जो होगा वह भाग्य में लिखा है.

मायावती और अखिलेश यादव जैसे नेता अगर खुदकुशी करने पर उतारू हों तो कोई कुछ ज्यादा नहीं कर सकता. 2019 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने साथ मिल कर महागठबंधन बनाया पर उन में उतनी समझ न थी कि लोगों को धर्म के नाम पर जिस तरह बहकाया जा रहा है उस का मुकाबला केवल एक हो कर नहीं, उस धर्म की कमजोरियों को उजागर कर के हो सकता है. अब अगर महागठबंधन से नाराज हो कर मायावती अकेले चुनाव लड़ना चाहती हैं तो यह भाजपा के लिए खुशी की बात है कि उस के बिछाए जाल में चिडि़या खुद आ कर फंस रही है.

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आम चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश में 3 उपचुनावों में भाजपा हारी थी, पर उस ने हिम्मत नहीं हारी थी. उस ने बढ़चढ़ कर मुकाबला किया था. उस ने अपनी ट्रोल फौज को काम पर लगाया. देशभक्ति को भक्ति का नाम दे कर उस बेवकूफ जनता का दिल जीत लिया जिस ने बचपन से हर मुसीबत में पूजा को आखिरी उपाय समझा है.

मायावती और अखिलेश यादव हारे इसलिए कि उन्होंने एक तो कांग्रेस का साथ नहीं लिया और दूसरे कांग्रेस के साथ सुर में सुर मिला कर बात नहीं की. वे बेमतलब की हांकते रहे. उन के चुनाव प्रचार में पैनापन था ही नहीं. भारतीय जनता पार्टी किस तरह काम कर रही है यह उन्होंने न समझा, न समझाने की कोशिश की.

भाजपा की सब से बड़ी पूंजी मंदिरों और आस्था के नाम पर कमाने वालों की वह भीड़ है जो भाजपा के राज में अपने अच्छे दिन देखती है. वे लोग लाखों की गिनती में हैं और घरघर जा कर मेहनत कर सकते हैं. खाली बैठेठाले ये लोग छोटेछोटे समूहों में हर जगह हर समय रहते हैं. ये बातों के धनी हैं. इन के पास हर बात का जवाब है.

दूसरी बड़ी फौज भाजपा के पास छोटेबड़े व्यापारियों की है जो मायावती और अखिलेश यादव जैसों के पास नहीं है. ये व्यापारी अपने से जाति में ऊंचों की बात तो सुन सकते हैं, पर नीचों की नहीं क्योंकि उन पर हुक्म चला कर काम लेना होता है. जब तक कांग्रेस इस की सुविधा दे रही थी, ये कांग्रेस के साथ थे, अब भाजपा इस ऊंचनीच की सुविधा के साथ पूजापाठ का भी इंतजाम करती है तो वे उस के साथ हैं. दलितों, गरीबों और किसानों के लिए तो मायावती और अखिलेश यादव भी कुछ करते नजर नहीं आए.

मायावती का हार के लिए समाजवादी पार्टी के वोटरों को दोष देने से पहले खुद को देखना होगा कि उन्होंने वोटरों के लिए क्या किया. भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद जैसे को नकारना कैसे ठीक हो सकता है सिर्फ इसलिए कि वह उन का मुकाबला न करने लगे?

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उत्तर भारत की चारों बड़ी पार्टियों– कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के साथ दिक्कत यही है कि ये अपने वोटरों को सही रास्ता नहीं दिखा रही हैं. उन्हें समझाने का कोई इंतजाम नहीं कर रही हैं. आज के युग में भी केवल बयान दे देने या ट्विटर पर लिखने से कुछ नहीं होने वाला. घरघर जा कर अपनी बात समझाना जरूरी है और फिलहाल यह गुण केवल भारतीय जनता पार्टी के लाखों धर्म के दुकानदारों में है जिन की मौजमस्ती उन वोटरों के सहारे है जो पैसा भी देते हैं, वोट भी.

देश का युवा, गरीब, बेरोजगार, किसान, मजदूर आज सिसक तो नहीं रहा पर खुश नहीं हैं. दोबारा बनी सरकार से भी उस को बहुत खुशी नहीं है पर उस के जख्मों पर कोई और मरहम लगाने वाला भी तो नहीं. मायावती, अखिलेश यादव, राहुल गांधी, तेजस्वी यादव अपने महलों से निकलें तो बात बने. अपने अलगअलग लकड़ी के किलों से चुनावी लड़ाई जीती नहीं जा सकती.

डिलीवरी के बाद फिर हौट लुक में दिखीं ‘अनिता भाभी’

सीरियल “भाभी जी घर पे है” की ‘अनिता भाभी’ (गोरी मेम) यानी सौम्या टंडन टीवी की उन एक्ट्रेस में से एक है जिनकी पौपुलेरिटी किसी भी बौलीवुड सेलेब्स से कम नही हैं. सौम्या की एक्टिंग के साथ-साथ उनकी अदाओं पर भी लोग काफी फिदा हैं. सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहने वाली सौम्या ने हाल ही में एक फोटोशूट कराया हैं जिसमें वो काफी अच्छी लग रही हैं. एक ओर जहां बौलीवुड एक्ट्रेसेस अपनी प्रेगनेन्सी के खूबसूरत पलों को कैमरे में  कैद कर रही हैं. वही दूसरी ओर सौम्या मैटरनिटी लीव कम्पलीट करके सेट पर लौटी है. सौम्या ने हाल ही में “भाभीजी घर पे है” के सेट पर कमबैक किया है. चलिए देखते है उनकी फोटोशूट की कुछ फोटोज…

सौम्या की ड्रेस

इस फोटोशूट में सौम्या ब्लू कलर की वन पीस में बेहद कमाल लग रही थीं. साथ में उनका लाइट मेकअप उनके लुक्स को और भी कौम्प्लिमेंट दे रहा था. सौम्या इन फोटोज में वाकई काफी खूबसूरत नजर आ रही है. सौम्या ने इस फोटोशूट के दौरान अपनी अदाएं दिखाकर लोगों के दिलों पर जादू चलाने की पूरी तैयारी कर डाली है. सौम्या के इस पूरे फोटोशूट में मुस्कुराकर फोटोज में चार चांद लगा दिए है.

वाइट साड़ी में दिखा अलग अंदाज

सौम्या इस वाइट साड़ी लुक में काफी रौयल लग रही हैं. साड़ी में सौम्या कहर बरसा रही हैं, वह काबिलेतारीफ है. इस लुक में के साथ उनका सनग्लास इस लुक को और भी खूबसूरत बना रहा है. साथ मे उनका नेकलेस इस लुक को और भी ज्यादा ग्लैमरस बना रहा है.

महरुन कलर की ड्रेस मे बिखेरे रंग…

 

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There is so much you don’t know about me yet. Photographed by @sachin113photographer Location @1bhkmumbai #shootlife #pic

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इस ड्रेस में सौम्या की खूबसूरती देखते ही बन रही है. जब मौसम हसीन होने लगा तो सौम्या ने और भी फोटोज खिंचवाने का मन बना लिया. इन फोटोज में की स्टाइल काफी पसंद की जा रही हैं.

सौम्या  टौप और जींस लुक  

 

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And some more😊@sachin113photographer lovely work. Thanks

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सौम्या के इस लुक को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. इस ड्रेस मे उनकी फोटोज किसी भी परी से कम नही लग रही है. सौम्या की स्माइल इस फोटो को काफी खूबसूरत बना रही है.

अगर आप चाहते हैं सलमान जैसी बौडी तो फौलो करें ये टिप्स

बौलीवुड के भाई जान यानी सलमान खान 53 साल की उम्र में बौलीवुड के किसी भी यंग एक्टर्स को मात दे रहे है. चाहे उनकी फिटनेस हो या उनकी पौपुलेरिटी वो किसी भी एक्टर से कम नहीं हैं. सलमान खान की फेटनेस के सभी दिवाने है. 90 के दशक से ही अपनी जबरदस्त बौडी के लिए फैंस के बीच सलमान ने एक खास जगह बनाई है. वो पिछले कई सालों से लगातार जिम में जाकर पसीना बहाते हैं, जिससे वो अपने गठीले शरीर को मेंटेन रख सकें. तो चलिए जानते है कि कैसे सलमान खुद को फिट और हेल्दी रखते हैं.

जिम में घंटों पसीना बहाना है जरुरी

यदि आप भी सलमान जैसी बौडी चाहते है तो आपको भी जिम में घंटों पसीना बहाना पड़ेगा. सलमान खान एक भी दिन जिम को मिस नहीं करते हैं. साथ ही वो डायट का खास ख्याल रखते हैं. उनके मजबूत शरीर में जितना योगदान कसरत का है, उतना ही परफेक्ट डायट का है. भारी-भारी वजन उठाने से पहले सलमान खान ट्रेड मिल पर खूब दौड़ते हैं. इससे शरीर की सारी मांस-पेशियां खुल जाती हैं.वो अपने शरीर के ऊपर भाग का जितना ख्याल रखते हैं, उतना ही ख्याल शरीर के निचले भाग का रखते हैं. वो पैरों को मजबूत बनाने के लिए घंटों वर्जिस करते हैं. साथ ही वो अपने बाइसेप्स को शेप में रखने के लिए अलग से एक दिन निकालकर रखते हैं. इस दिन वो केवल अपने हाथों पर ध्यान देते हैं ताकि उनके बाइसेप्स मजबूत बने रहें.

 

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#Beinghumanecycle #lovecareshare #electrictransport #ecofriendly #futuretransport #cleangreen

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साइकिलिंग करते हैं भाईजान

सलमान जिस दिन काम के कारण जिम नहीं जा पाते हैं, उस दिन साइकिलिंग करते हैं. जिससे उनके पूरे शरीर की वर्जिस हो जाती है. रोज जिम करना कभी-कभी बोरिंग हो जाता है, जिस कारण वो जिम में भी दोस्तों के साथ मस्ती करते रहते हैं. इसके साथ ही सलमान केवल मशीनों के ही भरोसे नहीं रहते हैं. वो कभी-कभी अखाड़े में भी अपने हाथ आजमा लेते हैं.

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सलमान बौलीवुड के अकेले ऐसे खान हैं जो न्यू-कमर्स को जिम में ट्रेनिंग देने से गुरेज नहीं करते हैं. उन्हें जब भी मौका मिलता है वो अपने जूनियर्स को ट्रेनिंग देने लगते हैं.

देसी बौयज के लिए परफेक्ट है टीवी के ‘कार्तिक’ के लुक्स

टीवी के पौपुलर सीरियल ‘ऐ रिश्ता क्या कहलाता हैं’ में ‘कार्तिक गोयनका’ के रोल में नजर आने वाले मौसीन खान की एक्टिंग के तो सभी दिवाने है लेकिन अगर उनके फैशन सेंस की बात करें तो वो किसी भी बौलीवुड एक्टर से कम नही हैं. वैसे तो मौसीन हर लुक्स में कमाल लगते है और इस बात का सबूत हैं उनके इंस्टाग्राम अकाउंट. पर आज हम उनके कुछ इंडियन लुक्स लेकर आए है जिसे आप शादी के सीजन मे ट्राय कर सकते है.

प्रिंटेड कुर्ता वीथ पठानी सलवार

 

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Happy Valentines Day Guys😚😙😗

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पठानी सूट यू तो किसी भी इंडियन फंक्शन में अच्छे लगते है पर मौसीन के इस पठानी की बात अलग है. इस पठानी सूट में उन्होंने क्रीम कलर के प्रिंटेड कुर्ता के साथ ग्रीन कलर का पठानी सलवार इस ड्रेस को और भी ज्यादा क्लासी  बना रहा हैं जिसे आप मेहंदी या हल्दी फंक्शन पर ट्राय कर सकते हैं.

दुल्हें का सेहरा

 

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#suitup coz Its #time

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यदि आप की शादी नजदीक और अब तक आपके कपड़े डिसाइड नही हुए है तो मौसीन को ये दुल्हें मीया लुक आपके लिए परफेक्ट है. इस लुक को आप ट्राय करके जरुर तारिफे बटौरेंगे.

घर की शादी में ट्राय करें ये लुक

 

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“Your Omen is with yourselves” 36:19 Quran sharif . 📷: @vedishnaidu @styledbysaloni Outfit : @millionairebombay

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घर की शादी में किसी के पास समय होता नहीं होता ऐसे में क्या पहना जाए ये सबसे बड़ा सवाल होते है. तो मौसीन का ये लुक आपकी जरुर हेल्प कर सकता है. इस लुक को आप शादी के किसी भी फंक्शन पर ट्राय कर सकते हैं.

फ्रेंड की शादी में करे ये लुक ट्राय

अगर शादी आपके बेहद करीब दोस्त की शादी हैं  और आप कुछ स्पेशल पहनना चाहचते है तो मौसीन को ये इंडियन लुक को फौलो कर सकते हैं. ब्लू कलर कट शेरवानी शादी के फंक्शन में काफी अच्छी  लगेंगी

रिंग टोन्स के गाने, बनाएं कितने अफसाने

लेखक- ममता मेहता

कब से कह रहा हूं कि इस टंडीरे को हटा कर मोबाइल फोन ले लो, पर नहीं, चिपके रहेंगे अपने उन्हीं पुराने बेमतलब, बकवास सिद्धांतों से. मेरे सभी दोस्तों के पापा अपने पास एक से बढ़ कर एक मोबाइल रखते हैं और जाने क्याक्या बताते रहते हैं वे मुझे मोबाइल के बारे में. एक मैं ही हूं जिसे ढंग से मोबाइल आपरेट करना भी नहीं आता.’’

अंदर से अपने लाड़ले का पक्ष लेती हुई श्रीमतीजी की आवाज आई, ‘‘अब घर में कोई चीज हो तब तो बच्चे कुछ सीखेंगे. घर में चीज ही न होगी तो कहां से आएगा उसे आपरेट करना. वह तो शुक्र मना कि मैं थी तो ये 2-4 चीजें घर में दिख रही हैं, वरना ये तो हिमालय पर रहने लायक हैं… न किसी चीज का शौक न तमन्ना…मैं ही जानती हूं किस तरह मैं ने यह गृहस्थी जमाई है. चार चीजें जुटाई हैं.’’

श्रीमतीजी की आवाज घिसे टेप की तरह एक ही सुर में बजनी शुरू हो उस से पहले ही मैं ने सुनाने के लिए जोर से कहा, ‘‘घर में घुसते ही गरमगरम चाय के बजाय गरमागरम बकवास सुनने को मिलेगी यह जानता तो घर से बाहर ही रहता.’’

श्रीमतीजी दांत भींच कर बोलीं, ‘‘आते ही शुरू हो गया नाटक. जब घर में कोई चीज लेने की बात होती है तो ये घर से बाहर जाने की सोचना शुरू कर देते हैं.’’

मैं कुछ जवाब देता इस से पहले ही अपना पप्पू बोल पड़ा, ‘‘पापा, ये लैंड लाइन फोन आजकल किसी काम के नहीं रहे हैं. आजकल तो सभी कंपनियां बेहद सस्ते दामों पर मोबाइल उपलब्ध करवा रही हैं. आप अब एक मोबाइल फोन ले ही लो.’’

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इस तरह मैं श्रीमतीजी और पप्पू के बनाए चक्रव्यूह में ऐसा फंसा कि मुझे मोबाइल फोन लेना ही पड़ा. अब जितनी देर मैं घर में रहता हूं, पप्पू मोबाइल से चिपका रहता है. पता नहीं कहांकहां की न्यूज निकालता, मुझे सुनाता. एसएमएस और गाने तो उस के चलते ही रहते.

यह सबकुछ कुछ दिनों तक तो मुझे भी बड़ा अच्छा लगा था, कहीं भी रहो, कभी भी, कैसे भी, किसी से भी कांटेक्ट  कर लो. पर कुछ ही दिनों में उलझन सी होने लगी. कहीं भी, कभी भी, किसी का भी फोन आ जाता. थोड़ी देर की भी शांति नहीं. सच तो यह है कि मोबाइल पर बजने वाली रिंग टोन मुझे परेशानी में डालने लगी थी.

एक दिन मेरे दफ्तर में एक जरूरी मीटिंग थी कि कंपनी की सेल को कैसे बढ़ाया जाए. सुझाव यह था कि कर्मचारियों के काम के घंटे बढ़ा दिए जाएं और उन्हें कुछ बोनस दे दिया जाए. अभी इस पर बातचीत चल ही रही थी कि मेरा मोबाइल बजा, ‘…बांहों में चले आओ हम से सनम क्या परदा…’

मीटिंग में बैठे लोग मूंछों में हंसी दबा रहे थे और मैं खिसिया रहा था. फोन घर से था. मैं ने फोन सुनने के बजाय स्विच आफ कर दिया. मुझे लगा कि मेरे ऐसा करने से वे समझ जाएंगे कि मैं किसी काम में व्यस्त हूं. पर नहीं, जैसे ही मैं ने सहज होने का असफल प्रयास करते हुए चर्चा शुरू करने की कोशिश की, रिंग टोन फिर से सुनाई पड़ी, ‘…बांहों में चले आओ…’

‘‘सर,’’ मीटिंग में मौजूद एक सज्जन बोले, ‘‘लगता है आज भाभीजी आप को बहुत मिस कर रही हैं. हमें कोई एतराज नहीं अगर इस मीटिंग को हम कल अरेंज कर लें.’’

मैं ने हाथ के इशारे से उन्हें रोकते हुए जल्दी से फोन उठाया और जरा गुस्से से भर कर बोला, ‘‘क्या आफत है, जल्दी बोलो. मैं इस समय एक जरूरी मीटिंग में हूं.’’

‘‘कुछ नहीं. मैं  कह रही थी कि आज शाम को मेरी कुछ सहेलियां आ रही हैं तो आप आते समय बिल्लू चाट भंडार से गरम समोसे लेते आना,’’ श्रीमतीजी गरजते स्वर में बोलीं.

अब मौजूद सदस्यों की व्यंग्यात्मक हंसी के बीच चर्चा आगे बढ़ाने की मेरी इच्छा ही नहीं हुई सो मीटिंग बरखास्त कर दी. घर आ कर मैं ने पप्पू को आड़े हाथों लिया कि मेरे मोबाइल पर फिल्मी गानों की रिंग टोन लेने की जरूरत नहीं है, सीधीसादी कोई रिंग टोन लगा दे, बस. बेटे ने सौरी बोला और चला गया.

अगले दिन मुझे एक गांव में परिवार नियोजन पर भाषण देने जाना था. अपने भाषण से पहले मैं कुछ गांव वालों के बीच बैठा उन्हें  यह समझा रहा था कि ज्यादा बच्चे हों तो व्यक्ति न उन की देखभाल अच्छी तरह से कर सकता है न उन्हें अच्छे स्कूल में पढ़ा सकता है. बच्चे ज्यादा हों तो घर में एक तरह से शोर ही मचता रहता है और अधिक बच्चों का असर घर की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है.

अभी मैं और भी बहुत कुछ कहता कि मेरे मोबाइल की रिंग टोन बज उठी, ‘बच्चे मन के सच्चे, सारे जग की आंख के तारे….’ और इसी के साथ वहां मौजूद सभी गांव वाले खिलखिला कर हंस पड़े. कल ही पप्पू को रिंग टोन बदलने के लिए डांटा था तो वह मुझे इस तरह समझा रहा था कि बच्चों को डांटो मत. इच्छा तो मेरी हुई कि मोबाइल पटक दूं पर खुद पर काबू पाते हुए मैं ने कहा, ‘‘बच्चे 1 या 2 ही अच्छे होते हैं. ज्यादा नहीं,’’ और फोन सुनने लगा.

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घर पहुंचने पर मैं ने बेटे को फिर लताड़ा तो वह बिना कुछ बोले ही वहां से हट गया. मेरे साथ दिक्कत यह थी कि मुझे अच्छी तरह से मोबाइल आपरेट करना नहीं आता था. मुझे सिर्फ फोन सुनने व बंद करने का ही ज्ञान था. इसलिए भी रिंग टोन के लिए मुझे बेटे पर ही निर्भर रहना पड़ता था. अब उसे डांटा है तो वह बदल ही देगा यह सोचता हुआ मैं वहां से चला  गया था.

हमारी कंपनी ने मुंबई के बाढ़  पीडि़तों को राहत सामग्री पहुंचाने का जिम्मा लिया था. सामग्री बांटने के दौरान मैं भी वहां मौजूद था जहां वर्षा से परेशान लोग भगवान को कोसते हुए चाह रहे थे कि बारिश बंद हो. तभी मेरे मोबाइल की रिंग टोन पर यह धुन बज उठी, ‘बरखा रानी जरा जम के बरसो…’

यह रिंग टोन सुन कर लोगों के चेहरों पर जो भाव उभरे उसे देख कर मैं फौरन ही अपने सहायक को बाकी का बचा काम सौंप कर वहां से हट गया.

अब की बार मैं ने पप्पू को तगड़ी धमकी दी और डांट की जबरदस्त घुट्टी पिलाई कि अब अगर उस ने सादा रिंग टोन नहीं लगाई तो मैं इस मोबाइल को तोड़ कर फेंक दूंगा.

कुछ दिनों तक सब ठीकठाक चलता रहा. मैं निश्ंिचत हो गया कि अब वह रिंग टोन से बेजा छेड़छाड़ नहीं करेगा.

एक सुबह उठा तो पता चला कि हमारे घर से 2 घर आगे रहने वाले श्यामबाबू का 2 घंटे पहले हृदयगति रुक जाने से देहांत हो गया है. आननफानन में मैं वहां पहुंचा. बेहद गमगीन माहौल था. लोग शोक में डूबे मृतक के परिवार के लोगों को सांत्वना दे रहे थे कि तभी मेरे मोबाइल की रिंग टोन बज उठी, ‘चढ़ती जवानी मेरी चाल मसतानी…’

मैं लोगों की उपहास उड़ाती नजरों से बचते हुए फौरन घर पहुंचा और पहले तो बेटे को बुरी तरह से डांट लगाई फिर वहीं खड़ेखड़े उस से रिंग टोन बदलवाई.

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अब पप्पू ने मेरे मोबाइल से छेड़छाड़ तो बंद कर दी है पर घर में उस ने एक नई तान छेड़ दी है कि अब मुझे भी मोबाइल चाहिए. क्योेंकि मेरे सभी दोस्तों के पास मोबाइल है. सिर्फ एक मैं ही ऐसा हूं जिस के पास मोबाइल नहीं है. मेरे पास अपना मोबाइल होगा तो मैं जो गाना चाहूं अपने मोबाइल की रिंग टोन पर फिट कर सकता हूं.

श्रीमतीजी हर बार की तरह इस बार भी बेटे के पक्ष में हैं और मैं सोच रहा हूं कि मैं तो बिना मोबाइल के ही भला हूं. क्यों न विरासत मेें रिंग टोन के साथ यही मोबाइल बेटे को सौंप दूं.

‘‘गेम्स आफ थ्रोन्स’’ के एक्टर के साथ नजर आएंगे आर माधवन

मशहूर बौलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों के एक्टर आर माधवन अब निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने जा रहे हैं. वह एक बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म ‘रौकेट्री: द नांबी इफेक्ट’ का निर्माण व निर्देषन करने जा रहे हैं.वह इसे एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म के रूप में बनाने जा रहे हैं.इसके लिए आर. माधवन ने अपनी इस फिल्म मे अभिनय करने के लिए हौलीवुड फिल्म ‘‘गेम्स आफ थ्रोन्स’’ के अभिनेता रोन डोनाची तथा हौलीवुड फिल्म ‘‘डाउनटोन अब्बे’’ फेम अभिनेता फिलिस लोगान को जोड़ा है.

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इस बात की सूचन खुद आर माधवन ने इंस्टाग्राम पर फोटो डालते हुए दी है. जबकि अब तक बौलीवुड के गलियारों में चर्चा रही है कि शाहरूख खान फिल्म ‘रौकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ में अतिथि भूमिका निभा सकते हैं.पर रोन डोनाची और फिलिस लोगान के नवीनतम रोमांचक विकास के साथ इसे जोड़ा गया है, जिससे इस फिल्म से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई है. ‘रौकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ मशहूर वैज्ञानिक और एयर स्पेसइंजीनियर नंबी नारायणन के जीवन पर आधारित है.इस वैज्ञानिक पर जासूसी का आरोप लगाया गया और उन्हें 1994 में गिरफ्तार कर लिया गया.

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नंबी नारायण का किरदार आर माधवन और नम्बी की पत्नी का किरदार सिमरन बग्गा निभाएंगी. आर माधवन और सिमरन बग्गा 17 साल बाद एक साथ बडे़ पर्दे पर दिखाई देंगी. आर माधवन ने इसे हिंदी, तमिल और अंग्रेजी भाषा में 2019  के अंत तक प्रदर्शित करने की योजना बनायी है.’

Edited by – Neelesh Singh Sisodia 

मौत का तांडव और नीतीश का मजाक

किसी के बस में नहीं कि मासूम बच्चों को काल के गाल में जाने से रोक ले. एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या 113 हो गयी है, वहीं अस्पतालों में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है. खबर लिखे जाने तक 414 बच्चे अस्पतालों में भर्ती हैं.

बिहार में हर साल यह आपदा आती है. सैकड़ों बच्चे मौत के मुंह में समा जाते हैं. हर साल हो-हल्ला मचता है और हर साल मौतों पर सियासत होती है, लेकिन इस आपदा से निपटने के इंतजाम कभी नहीं होते हैं. ‘स्वस्थ भारत – स्वच्छ भारत’ के ढोल-नगाड़े बजाने वाले भी अच्छी तरह जानते हैं कि पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाएं बद से बदतर हालत में हैं. उत्तर प्रदेश और बिहार की खस्ताहाली तो बयान करने लायक ही नहीं है, मगर इस दुर्दशा से उबरने की कोई राजनीतिक इच्छा दिखती नहीं है. न राज्य स्तर पर और न ही केन्द्रीय स्तर पर. बिहार का स्वास्थ्य विभाग तो खुद आईसीयू में है, आखिरी सांसें ले रहा है, वह क्या मरते हुए बच्चों को जीवनदान देगा? यहां अस्पतालों में न डॉक्टर्स हैं, न दवाएं, न इंजेक्शन, न मरीजों के लिए पर्याप्त बेड.

वर्ष 2012 में इसी मुजफ्फरपुर में एनसिफलाइटिस के चलते 120 बच्चों ने अपनी जानें गंवायी थीं. वर्ष 2013 में 39 बच्चे मर गये. 2014 में यहां 90 बच्चे खत्म हो गये. 2015 में 11 और 2016 में 4 बच्चे मारे गये. वर्ष 2017 में 11 बच्चे इनसिफलाइटिस से मरे तो 2018 में 7 बच्चों की जानें गयी. मगर इस बार तो आंकड़ा बेहद डरावना है. यह सिर्फ मुजफ्फरपुर के आंकड़े हैं. अन्य जिलों में भी मौतों का आंकड़ा भयावह है. वैशाली, मोतीहारी, गया, चम्पारण और बेगूसराय में भी लगातार मौतें हुई हैं. इस वक्त भी यह जिले इस बीमारी की चपेट में हैं.

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गौरतलब है कि बिहार में कोई पच्चीस साल पहले इनसिफलाइटिस की बीमारी ने दस्तक दी थी, मगर इन पच्चीस सालों में इस बीमारी से बचाव को लेकर न तो कोई विशेष शोध हुआ, न कोई सही इलाज ढूंढा जा सका और न ही बीमारी से बचाव के लिए लोगों में जागरूकता फैलायी गयी. अभी भी बीमारी की सटीक वजह बता पाने में शासन-प्रशासन, डॉक्टर्स सभी अक्षम हैं. कोई कह रहा है कि इसकी वजह गर्मी है, कोई कहता है गन्दगी है, कोई मच्छरों को दोष दे रहा है तो कोई लीची जैसे फल को बीमारी को कारण बता रहा है. जब वजह ही नहीं मालूम तो इलाज क्या करेंगे?

किसी मां की कोख उजड़ जाने से ज्यादा दुखदायी कुछ नहीं हो सकता है. आज अपने बच्चों को खो देने वाली सैकड़ों मांओं की तड़प, आंसुओं और विलाप से बिहार ही नहीं, पूरे देश की फिजा गमगीन है, मगर व्यवस्था, सरकार और नेताओं की संवेदनशीलता नहीं जागती. सौ बच्चों की मौत के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अचानक नींद से जाग कर श्री कृष्ण मेडिकल कालेज अस्पताल का दौरा करने पहुंच जाते हैं और वहां खड़े-खड़े ऐलान कर देते हैं कि एक साल के अन्दर एसकेएमसीएच में 2500 बेड का वार्ड और मरीजों के परिजनों के लिए धर्मशाला बनायी जाएगी. यहां 1500 बेड का सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल बनेगा, जहां मरीजों को सारी सुविधाएं मिलेंगी. नीतीश कुमार को भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह सपने बेचने का शौक चर्राया हुआ है. विधानसभा चुनाव से पहले अपनी इमेज चमकाने की लोलुपता में नितीश कुमार ने सोचा कि उनका यह ऐलान अगले दिन के अखबारों की सुर्खियां बनेगा और इसकी ओट में बच्चों की मौत का हाहाकार कुछ कम सुनायी देगा. कितनी घिनौनी मानसिकता है. जनता और मीडिया को गुमराह करने की नीच सोच. 2500 बेड का अस्पताल बनाने का बड़ा सपना तानने वाले नीतीश कुमार ने यह नहीं बताया कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा? सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल के एक बेड के पीछे औसतन अस्सी लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक लागत आती है, जिसमें डॉक्टर, उपकरण, दवाएं, सुविधाएं, नर्स आदि का खर्चा जुड़ा होता है. ऐसे में अगर 2500 बेड वाले अस्पताल के लिए नितीश कुमार 2500 करोड़ रुपये कहां से लाएंगे? क्या पूरे बिहार के बजट को अस्पताल में झोंक देंगे? नितीश कुमार चौदह साल से बिहार के मुख्यमंत्री हैं. हर साल गर्मी और बरसात के मौसम में बिहार इसी आपदा से दो-चार होता है, मगर नीतीश कुमार स्वास्थ्य बजट को लगातार घटाते जा रहे हैं. 2016-17 की तुलना में इस 2017-18 का हेल्थ बजट 1000 करोड़ रुपया कम हो गया था. जब बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं, बीमारों, हताहतों की संख्या लगतार बढ़ रही है तो हेल्थ बजट को 1000 करोड़ रुपया कम क्यों किया गया, इसका जवाब नीतीश कुमार नहीं देते हैं.

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गौरतलब है कि एक अस्पताल में 500 से ज्यादा बेड नहीं लगाये जाते हैं, ऐसे में 2500 बेड्स के लिए तो नितीश कुमार को पांच अस्पताल बनवाने पड़ेंगे. मान लीजिए अस्पताल बन गये तो राज्य में इतने डॉक्टर्स और नर्स कहां हैं, जो मरीजों का इलाज करें? अभी जितने अस्पताल हैं और उनमें जितने बच्चे भर्ती हैं, उनको देखने के लिए ही पर्याप्त डॉक्टर्स नहीं हैं. आमतौर पर तीन बेड पर एक डॉक्टर होना चाहिए, तो नितीश कुमार यह बताएं कि 2500 बेड के लिए 800 डॉक्टर्स कहां से लेकर आएंगे? जहां मौजूदा अस्पतालों में मरीजों के लिए डॉक्टर्स, बेड, दवाएं, इंजेक्शन, ग्लूकोज की बोतलें, जांच के उपकरण तक नहीं हैं वहां पांच नये अस्पताल खोलकर नीतीश सरकार इन चीजों की आपूर्ति कैसे कर पाएगी? सिर्फ अस्पताल बना कर उनकी फोटो अखबारों में प्रकाशित कर अपनी राजनीति चमकाने की मंशा ही है या सचमुच बिहार की जनता के लिए कुछ करना भी है? देश में बहुत से अस्पताल बन कर तैयार हैं, मगर चल नहीं रहे हैं, क्योंकि न पर्याप्त संख्या में डॉक्टर्स हैं, न अन्य सुविधाएं. ऐसे में नितीश कुमार की घोषणा बेहद शर्मनाक और दुख व दर्द में तड़प रही बेहाल जनता से मजाक से ज्यादा कुछ नहीं है.

हर मौके के लिए परफेक्ट है राजकुमार राव के ये 4 लुक

राजकुमार राव ने बेहद कम समय में ही बौलीवुड पर के स्टार के रुप में जगह बनाई. साल 2010 में फिल्म लव सेक्स और धोखा से बौलावुड में डेब्यू करने वाले राजकुमार ने कई सारी हिट फिल्मों दी हैं. साल 2013 में जब काय पो छे! रिलीज होते  ही राजकुमार लोगों के दिलों पर राज करने लगें. अभी तक राजकुमार राव ने करीब 20 फिल्में की है जिसमें से आधी से ज्यादा बौक्स औफिस पर कमाल कर चुकि हैं. फिल्में में कमाल की एक्टिंग के साथ राजकुमार का फैशन सेंस भी काफी पौपुलर हैं. बौलीवुड के किसी भी इवेंट पर राजकुमार की स्टाइल के अलग ही जलवे होते हैं. इसलिए आज हम लाए है  राजकुमार राव के कुछ फैशन लुक्स जो आप किसी मौके पर ट्राय कर सकते हैं.

राजकुमार का टी-शर्ट लुक

 

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O Stree agle saal phir aana. Pic credit @rohit1610 make up @nitin.ntd @hair by @vijay.p.raskar

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मौनसून शुरु होने वाला है ऐसे में लाइट  कपड़ें पहनना ना सिर्फ आपकी स्किन बल्कि आपके फैशन के लिए भी काफी जरुरी हैं. राजकुमार राव के इस लुक को ट्राय कर आप और भी ज्यादा फैशनेबल लग सकती हैं. वाइट कलर की इस टी-शर्ट लुक में राजकुमार काफी अच्छे लग रहे हैं.

ओवर शर्ट वीथ वाइट टी-शर्ट

यदि आप सिंपलीसिटी को पसंद करते है तो राजकुमार का ये लुक आपके लिए परफेक्ट है. इस लुक को आप कौलेज और कौचिंग टाईम में यूज कर लड़कियों के दिल पर छा सकते हैं. इस लुक में राजकुमार काफी इंटेलिजेंट और पढ़ाकु स्टूडेंट लग रहे हैं.

हुडी का फैशन का कमबैक

 

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#Repost @officialhumansofbombay . . . “Growing up, I was fascinated with Shah Rukh Sir–I used to stare at his posters & think that if an outsider could make it as big as him, then maybe there was hope for me. It wasn’t rosy though–I didn’t get work after I came to Mumbai. I only got small jobs–I’d be like the 10th person standing in a random newspaper ad! I made 8-10k a month–but there were days when I didn’t have money & I’d call my friends saying, ‘Can I come over to eat?’ Giving up wasn’t an option. There was never a plan B. I was constantly on the hunt for auditions–I met with countless ADs & casting directors. They would call me in for small roles & I’d try to convince them to let me audition for the bigger parts–I was turned down. But I wasn’t demotivated. I persistently followed up with Atul Mongia till he finally called me to audition for Love Sex aur Dhokha. A week went by & I hadn’t heard back–that’s when I questioned, ‘Will they call?’ Then it happened…everything I worked for culminated in that one moment. I was at home when I got the most important call of my life. The words were, ‘Ho gaya, you got the film!’ I fell to my knees, cried & called my mom. The movie released & that’s when the doors opened. But I’ll tell you a stand out moment–it was sometime after Queen. I was shooting in Mehboob & heard that Shah Rukh Sir was there too. So I thought this was my chance–maybe I could meet him. I sent a message across–I didn’t think he’d know me, but he called me to his trailer. He knew my entire bio! He made me feel so special–I was already a fan, but that day I was probably his biggest. I was nervous and in awe throughout. I once spoke to his posters & now there he was, in front of me. How can I even explain what that felt like? What’s ironic is, that the people who in the beginning weren’t interested in me for a lead role–today offer me films. I’m the same actor, the same person, but now I’m offered the roles. I’ve believed in my craft, even when things weren’t going well. I just knew–I put it out in the Universe & attracted it. Remember, no matter what anyone says, no one will believe in you, the way YOU do–so hustle & let the Universe do the rest.”

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राजकुमार के इस लुक को फैंस ने काफी पसंद किया हैं. इस लुक में उन्होंने पीला हुडी पहने हुआ है, जिसमें वो काफी क्यूट नजर आ रहे हैं, लड़कों का ये लुक लड़कियां काफी पसंद आता हैं. वाईट और ब्लू रेड स्ट्रीप वाले शूज के साथ ये लिक को और भी कौम्प्लिमेंट दे रहा है.

फुल स्लीवस टी- शर्ट है ट्रेंड में

 

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#Stree ka #Purush. Thank you my wonderful stylist and friend @ishabhansali.

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मौनसून के साथ आता है थोड़ी सी ठंड, इसलिए राजकुमार का ये लुक इस सीजन के लिए परफेक्ट हैं. ग्रे कलर की शर्ट  के साथ चेक ओवर कोट इस लुक के साथ काफी अच्छा लग रहा हैं.

तो आप भी राजकुमार राव के इन लुक्स को फौलो करके बन सकते है स्टाइल आइकन.

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