भोजपुरी फिल्म ‘घातक’ का ट्रेलर हुआ रिलीज, खतकनाक लुक में नजर आए पवन सिंह

लॉकडाउन के बाद फिल्मों के रिलीज किये जाने की संभावनाओं को देखते हुए सुपरस्टार पवन सिंह (Pawan Singh) की बहुप्रतीक्षित भोजपुरी फिल्म (Bhojpuri Film) ‘घातक’ (Ghatak)  का ट्रेलर इंटरटेन म्यूजिक भोजपुरी (Enterr10 Music Bhojpuri) के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर लौंच कर दिया गया है. इस फिल्म में वह अलग लुक में दर्शकों का मनोरंजन करनें के लिए तैयार दिख रहें हैं.

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फिल्म में पवन सिंह (Pawan Singh) एक मिलिट्रीमैंन (Military Man) के रूप में जबरदस्त एक्शन सीन करते हुए दिख रहें हैं. इस फिल्म में मार-धाड़ और एक्शन के अलावा लव और रोमांस का जबरदस्त तड़का देखनें को मिलेगा. फिल्म के गाने भी बहुत ही कर्णप्रिय हैं जिसमें वह अभिनेत्री सहर आफ्सा (Sahar Afsha) के साथ रोमांस करते हुए नजर आ रहें हैं.

इस फिल्म के निर्माता अभय सिन्हा (Abhay Sinha) के अनुसार लॉकडाउन के बाद भोजपुरी सिनेमा में ‘घातक’ (Ghatak) साबित होगी. साथ ही यह इस साल की सबसे बड़ी एक्‍शन फिल्म भी होगी, इस फिल्म में यूनिक एक्शन के साथ रोचक पटकथा भी मुख्य आकर्षण होगा.

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‘घातक’ (Ghatak) फिल्म का  ट्रेलर लौंच होनें के साथ ही जबरदस्त सुर्खियों में आ गया है. फिल्म का निर्देशन टीनू वर्मा नें किया है और निर्माता अभय सिन्हा हैं. फिल्म का निर्माण यशी फिल्म्स इंटरनेशनल के बैनर तले हुआ है. फिल्म के निर्देशक टीनू वर्मा (Tinu Verma) भी इस फिल्म में जबरदस्त लुक में नजर आ रहें हैं.

 

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इस फिल्म में पवन सिंह के साथ सहर आफ्सा के साथ अमित शुक्ला (Amit Shukla), माणिक (Manik), अमित अर्थबचन (Amit Arthbachan), श्रद्धा नवल (Shrdha Nawal), बृजेश त्रिपाठी (Brijesh Tripathi), नीलम पांडेय (Neelam Pandey), दीप्ती, नागेश मिश्रा (Nagesh Mishra), राज मल्होत्रा (Raj Malhotra), संजीव मिश्रा (Sanjiv Mishra), धामा वर्मा (Dhama Verma), मनीष चतुर्वेदी नजर आएंगे. साथ ही स्पेशल अपीरियंस में चांदनी सिंह (Chandani Singh), ग्लोरी मोहन्ता (Glory Mohanta), नीतिका जायसवाल (Nitika Jaiswal), दीप्ति तिवारी (Deepati Tiwari), रतन जी (Ratan Ji) ख़ुशी (Khushi), राणा (Rana) का भी लाजबाब अभिनय देखनें को मिलेगा.

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फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर (Music Director)  आजाद सिंह (Azad Singh), छोटे बाबा  (Chhote Baba) और रजनीश मिश्रा (Rajnish Mishra) का है. संगीत आजाद सिंह  (Azad Singh), राजेश मिश्रा (Rajesh Mishra), प्रकाश बरौद( Prakash Barud), और अविनाश पाण्डेय (Avinash Pandey) का है. फ़िल्म में गानों को अपना सुर (Singer) पवन सिंह (Pawan Singh), प्रियंका सिंह (Priyanka Singh), आजाद सिंह (Azad Singh) और रजनीश मिश्रा (Rajnish Mishra) नें दिया है.

लॉकडाउन में हनी सिंह ने दिखाया ऐसा बॉडी ट्रांस्फोर्मेशन, Photos देख सभी हुए हैरान

पंजाब के पौपुलर सिंगर और रैपर हनी सिंह (Honey Singh) ने इंडस्ट्री में अपनी अलग ही पहचान बनाई हुई है. जैसा कि हम सब जानते हैं कि पिछले कुछ समय में हनी सिंह की तबीयत काफी खराब हो गई थी जिसकी वजह से उनका शरीर पहले से काफी अलग हो गया था. हनी सिंह (Honey Singh) दिखने में जितने फिट थे उतने ही वे अपनी खराब तबीयत के दैरान अनफिट हो गए थे और उनका शरीर काफी फूल गया था.

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हनी सिंह की फैन फौलोविंग (Fan Following) की बात करें तो उनकी फैन फौलोविंग इतनी जबरदस्त है कि उनके फैंस को उनका बेहद इंतजार था और उनके फैंस हनी सिंह को उसी रूप में देखना चाहते थे जैसे वे पहले दिखाई देते थे तो अब उनके फैंस के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है. हाल ही में हनी सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स (Social Media Accounts) पर अपनी कुछ फोटोज शेयर की हैं जिसे देख सभी हैरान रह हए हैं.

इन फोटोज में हनी सिंह (Honey Singh) ने अपनी गजब की ट्रांस्फोर्मेशन (Transformation) दिखाई है जिससे कि वे एक बार दोबारा अपनी उसी रूप में लौट आए हैं. आपको बता दें कि जब से कोरोना वायरस (Corona Virus) के चलते भारत में लॉकडाउन (Lockdown) हुआ था तभी से हनी सिंह अपनी बॉडी पर काफी मेहनत कर रहे थे और अब नतीजा सबके सामने है. हनी सिंह की इन फोटोज को देखें तो उन्होनें इतनी कमाल की फीजीक (Physique) बनाई है जिससे कि साफ पता चल रहा है कि उन्होनें लॉकडाउन (Lockdown) में काफी मेहनत की है.

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कुछ समय पहले हनी सिंह अपने कमबैक वीडियो “मखना” ‘Makhna’ में दिखाई दिए जिसे उनके फैंस ने उनके हर गाने की तरह काफी प्यार दिया था. इस वीडियो को अब तक करीब 265 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं. इसके बाद भी उन्होनें कई म्यूजिक वीडियो बनाई और फैंस का प्यार लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

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पत्नी के हाथ, पति की हत्या

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक सनसनीखेज घटनाक्रम में पुलिस ने 6 माह बाद एक महिला को अपने ही पति की हत्या के आरोप में गिरफ्तार करके जेल के सीखचों में डाल दिया. ऐसी अनेक घटनाएं अक्सर हमारे आसपास घटित होती है, जिन्हें हम देख कर भी अनदेखा कर देते हैं.उसके पीछे के सत्य को कभी समझने का प्रयास नहीं करते. आज इस रिपोर्ट में हम ऐसे कुछ घटनाक्रमों पर विशेष दृष्टिपात करते हुए आपको बताने का प्रयास करेंगे, जिससे यह संदेश देश दुनिया में पहुंच आखिरकार इसे किस तरह रोका  जा सकता है.

प्रथम प्रकरण-

छत्तीसगढ़ के जिला चांपा जांजगीर के ग्राम सिवनी में एक शख्स की मृत्यु हो गई. बाद में खुलासा हुआ कि मृत्यु के पीछे शख्स की पत्नी का हाथ है, उसने जहर दिया था.

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दूसरा प्रकरण-

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में एक व्यक्ति की लाश कुएं में मिली. जांच में यह तथ्य सामने आया कि उसकी पत्नी ने ही अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को मौत के घाट उतार दिया.

तीसरा प्रकरण-

सरगुजा संभाग के सूरजपुर में एक 20 वर्ष की महिला ने अपने बुजुर्ग पति की हत्या अपने प्रेमी के साथ मिल करवा दी. क्योंकि उसे प्रेमी मिल जाता और साथ ही पति की नौकरी भी.

यह कहा जा सकता है कि ऐसे अनेक मामले हमारे आसपास आए दिन घटित होते रहते हैं जिसकी तह मे सीधा सीधा किसी महिला का हाथ होता है. मगर समाज में यह माना जाता है कि  पुरुष क्रूर होते हैं और महिला  पर अत्याचार करते हैं. मगर यह भी सच है कि ऐसा बेहद बेहद कम होता है .मगर यह एक सिक्के के दोनों पहलू कहे जा सकते हैं.

मामला एक सिपाही कमल  का

पत्नी द्वारा पति को मौत के घाट उतारने की यह घटना छत्तीसगढ़ के रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र की है. पुलिस का सिपाही, कमल बघेल अपनी पत्नी कीर्ति बंजारे और 2 बच्चों के साथ उरकुरा में रहता था. पता चला अचानक जनवरी महीने में छत से गिर गया था, तत्पश्चात उपचार के दौरान उसकी निजी अस्पताल में मौत हो गई . खमतराई थाना प्रभारी रमाकांत साहू ने हमारे संवाददाता को जो जानकारी दी उसके मुताबिक, सिपाही के पिता ने उसकी पत्नी पर हत्या का आरोप लगाया था, उच्च अधिकारियों को शिकायत के बाद इस मामले में गंभीरता से विवेचना की गई. मामले में नया खुलासा तब हुआ जब मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत बताया गया.

इस मामले के जांच अधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के पश्चात संबंधित चिकित्सक से क्यूरी कराने के साथ विधिक सलाह ली गई . परिस्थिति के अनुसार और पीएम रिपोर्ट के आधार पर सब कुछ धीरे-धीरे सामने आता चला गया और अंततःहत्या का अपराध दर्ज किया गया.

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वाद विवाद बना कारण

मृतक छत्तीसगढ़ की पुलिस में सिपाही था और उसका  पत्नी के साथ अक्सर वाद-विवाद होते रहता था, स्थिति इतनी विषम थी कि पत्नी की शिकायत पर पूर्व में मृतक के खिलाफ  अपराध दर्ज किया गया था. सिपाही की मौत पर हुई जांच में पत्नी द्वारा छत से धकेलना पाया गया, जिसके बाद मृतक की पत्नी कीर्ति बंजारे को गिरफ्तार कर रिमांड पर भेजा गया . इस हत्याकांड में महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सिपाही कमल ने प्रेम विवाह किया था मगर आगे चलकर दोनों की पटी नहीं.

दरअसल,छोटी-छोटी बातों में  बात अक्सर इतनी बढ़ जाती है कि पति-पत्नी में से कोई एक अपराध का रास्ता चुन लेता है और घटना के पश्चात सारा परिवार सफर करता है.

रासलीला बहू की

रासलीला बहू की : भाग 1

रात के 10 बज रहे थे. काली चौड़ी सड़कें स्ट्रीट लाइट की दूधिया रोशनी में नहाई हुई थीं. सड़क पर इक्कादुक्का वाहनों का जानाआना जारी था. खाली पड़ी सड़क पर सफेद रंग की एक वैगनआर कार सामान्य रफ्तार से दौड़ रही थी. कार की ड्राइविंग सीट पर 35 वर्षीय कार्तिक केसरी बैठा था.

उन की बगल वाली सीट पर पत्नी प्रीति बैठी थी. पतिपत्नी दोनों बेहद खुश थे. ये लोग झारखंड की राजधानी रांची से दुर्गा पूजा का सामान खरीद कर घर लौट रहे थे. उन का घर खूंटी जिले के पिठोरिया थाना क्षेत्र के विक्टोरिया में था.

जैसे ही कार्तिक की कार खूंटी जिले के बाड़ू चौक के पास पहुंची, एक मोटरसाइकिल पर सवार 2 युवक उस की कार को ओवरटेक करते हुए सामने आ गए. उन्होंने अपनी बाइक तिरछी कर के कार के आगे खड़ी कर दी.

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बाइक सामने आने से कार्तिक ने अचानक ब्रेक लगा कर कार को रोका. उन की कार बाइक से टकरातेटकराते बची. बाइक से करीब 10 मीटर दूर सफेद रंग की एक स्कौर्पियो कार खड़ी थी.

कार्तिक कुछ समझ पाता, तब तक दोनों बाइक सवार उस के करीब पहुंच गए और गालियां देते हुए उसे कार से बाहर निकलने को कहने लगे. इतने में स्कौर्पियो से भी 2 युवक बाहर निकले. उन में से एक के हाथ में करीब 3 फीट लंबा और मोटा लोहे का रौड था.

कार्तिक समझ गया कि उन की नीयत ठीक नहीं है. पतिपत्नी बुरी तरह से डर गए थे. दोनों कातर निगाहों से एकदूसरे को देखने लगे. कार्तिक समझ नहीं पा रहा था कि क्या करें?

चारों ओर गहरा सन्नाटा पसरा था. दूरदूर तक कोई नहीं दिख रहा था, जिसे मदद के लिए पुकारा जाता. जबकि वे चारों बारबार उसे कार से बाहर निकलने के लिए गालियां दिए जा रहे थे. कार्तिक से जब नहीं रहा गया तो वह कार का दरवाजा खोल कर बाहर आ गया.

जैसे ही वह कार से बाहर निकला, वे चारों हिंसक पशु की तरह उस पर टूट पड़े, उस पर लात और घूंसों की बारिश कर दी. इसी बीच लोहे की रौड वाले युवक ने कार्तिक के सिर के पीछे से जोरदार वार किया.

उस का वार इतना जोरदार था कि एक ही वार में कार्तिक का सिर फट गया. उस के मुंह से दर्दनाक चीख निकली और वह कटे वृक्ष की तरह हवा में लहराता हुआ जमीन पर आ गिरा. जहां वह गिरा, उस के चारों ओर खून फैलने लगा. चारों युवक जब पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि वह मर चुका है तो वे वहां से चले गए.

प्रीति देखती रही पति को पिटते हुए

डरीसहमी प्रीति आंखों के सामने पति पर हुए हमले को देखती रही. हमलावरों के जाने के बाद वह रोती हुई कार से बाहर निकली. पति को हिलाडुला कर देखा. उस के शरीर में कोई हलचल नहीं थी, वह मर चुका था. प्रीति जोरजोर से रोने लगी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि संकट की इस घड़ी में मदद के लिए किसे पुकारे.

रोतेरोते उसे अपनी बहन का बेटा शंकर याद आया. उस ने फोन कर के पूरी बात शंकर को बता दी. मौसी की बात सुन कर शंकर बुरी तरह घबरा गया. उस ने मौसी की हिम्मत बढ़ाई और कहा कि घबराएं नहीं, वह अभी पहुंच रहा है.

शंकर ने फोन काट दिया और घटनास्थल के लिए रवाना हो गया. इस बीच प्रीति ने अपने ससुर जनार्दन केसरी और चचेरे देवर रंजीत को भी फोन कर के घटना की सूचना दे दी थी. सूचना मिलते ही कार्तिक के घर वाले वहां पहुंच गए.

शंकर ने समझदारी दिखाते हुए सब से पहले पतले, रंगीन गमछे से कार्तिक का सिर बांधा, जहां से अभी भी खून बह रहा था. फिर वहां आए लोगों ने आननफानन में कार्तिक को कार में डाला और मेडिका हास्पिटल ले गए, जहां डाक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया. उस समय रात के 12 बज रहे थे और तारीख थी 28 सितंबर, 2019.

वह इलाका कांके थाने में आता था. जैसे ही कार्तिक केसरी की हत्या की सूचना कांके थाने को मिली, थानेदार विनय कुमार सिंह पुलिस टीम के साथ मेडिका हास्पिटल पहुंच गए. हास्पिटल में भारी भीड़ एकत्र थी.

मृतक कार्तिक केसरी कोई सामान्य आदमी नहीं था, वह पिठोरिया का राशन डीलर और सामाजिक कार्यकर्ता था. दूरदूर तक के लोग उस के नाम से वाकिफ थे. उस के जानने वालों को जैसे ही उस की हत्या की सूचना मिली, वे मेडिका हास्पिटल पहुंच गए.

एसओ विनय सिंह भांप गए थे कि अगर अतिरिक्त पुलिस फोर्स नहीं बुलाई गई तो वहां बड़ा हंगामा हो सकता है, इसलिए उन्होंने उसी समय एसएसपी अनीश गुप्ता, एसपी अमित रेणू और डीएसपी-1 नीरज कुमार को वस्तुस्थिति से अवगत करा कर मौके पर पुलिस फोर्स भेजने का आग्रह किया.

एसएसपी अनीश गुप्त ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पिठोरिया थाने के थानेदार विनोद राम को मय फोर्स के अस्पताल भेज दिया. दोनों थानों की पुलिस ने मेडिका अस्पताल पहुंच कर स्थिति को काबू में कर लिया था.

कुछ देर बाद एसपी अमित रेणू और डीएसपी-1 नीरज कुमार भी अस्पताल पहुंच गए. अधिकारियों से कार्तिक के घर वाले एक ही मांग कर रहे थे कि हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए, अन्यथा यहां जमा भीड़ को हम नहीं रोक पाएंगे. फिर इस का जिम्मेदार खुद प्रशासन होगा. अमित रेणू ने पीडि़तों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि कानून की मदद करें. हत्यारे जल्द ही गिरफ्तार कर लिए जाएंगे. कानून को अपने तरीके से काम करने दें.

उस वक्त तो पीडि़त के घरवाले कुछ नहीं बोले, एसपी साहब की बात सुन कर खामोश रह गए और वहां एकत्र लोगों को भी समझा दिया कि कानून को अपना काम करने दें.

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पुलिस ने कार्तिक की लाश को कब्जे में ले कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. एसपी अमित रेणू ने कार्तिक के चचेरे भाई रंजीत से मृतक की किसी से दुश्मनी के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि गांव में उस के जैसा हंसमुख और मिलनसार कोई नहीं था. दुश्मनी का तो कोई सवाल ही नहीं था.

फिर उन्होंने घटना की एकमात्र चश्मदीद मृतक की पत्नी प्रीति से पूछताछ की. प्रीति ने रोतेरोते पुलिस को बताया कि कार्तिक को 4-5 लोगों ने मिल कर लाठी, डंडे और रौड से मारमार कर जख्मी कर दिया था. इस के बाद वे 2 बाइकों से पिठोरिया चौक की ओर भाग निकले थे. दूर होने की वजह से वह उन का चेहरा ठीक से नहीं देख पाई थी.

पूछताछ करने के बाद एसपी अमित रेणू वापस लौट गए. उधर थानाप्रभारी (कांके) विनय कुमार सिंह और एसओ (पिठोरिया) विनोद राम कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मृतक के घर वालों को ले कर घटनास्थल पहुंचे.

घटनास्थल पर काफी दूरी तक खून फैल कर सूख चुका था. साक्ष्य के लिए पुलिस ने खून सनी मिट्टी का नमूना ले कर रख लिया. इस के अलावा वहां पुलिस को कोई और साक्ष्य नहीं मिला. कागजी खानापूर्ति करतेकरते पुलिस को रात के करीब 2 बज गए थे. उसी रात मृतक कार्तिक के पिता जनार्दन केसरी की तहरीर पर पुलिस ने 5 अज्ञात हत्यारों के खिलाफ धारा 302, 201 भादंसं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

पुलिस पर दबाव था हत्यारों को गिरफ्तार करने का

अगली सुबह महावीर मंडल दल के जिला अध्यक्ष कृष्णा नायक और जन वितरण प्रणाली संघ के अध्यक्ष अनिल केसरी ने अपने समर्थकों के साथ पिठोरिया चौक को जाम कर दिया और हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करने लगे.

चौक जाम की सूचना मिलते ही एसपी अमित रेणू वहां पहुंच गए. उन्होंने आंदोलनकारियों से बात की और फिर से भरोसा दिलाया कि हत्यारे चाहे कितने ही ताकतवर क्यों न हों, कानून से बच नहीं सकते. उन्हें जल्दी ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा. एसपी के भरोसा दिलाने के बाद आंदोलनकारियों ने धरना समाप्त किया.

30 सितंबर को कार्तिक केसरी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट की एक कौपी थानाप्रभारी विनय कुमार सिंह के पास थी. उन्होंने रिपोर्ट के एकएक बिंदु को गौर से पढ़ा. रिपोर्ट में मौत का कारण सिर में आई गहरी चोट और अत्यधिक रक्तस्राव बताया गया था. कार्तिक केसरी की हत्या को 3 दिन बीत चुके थे. 3 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई थी. एसएसपी अनीश गुप्ता ने घटना के खुलासे के लिए डीएसपी-1 नीरज कुमार के नेतृत्व में एक टीम गठित की.

इस टीम में एसओ (कांके) विनय कुमार सिंह और उन के तेजतर्रार, भरोसेमंद पुलिसकर्मी शामिल थे. टीम गठित करने के बाद पुलिस ने नए सिरे से घटना की बारीकी से जांच की.

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जानें आगे की कहानी अगले भाग में…

रासलीला बहू की : भाग 3

ऐसा नहीं था कि प्रीति और अंकित के प्यार की बात उन के घर वालों को पता नहीं थी. उन के घर वालों को दोनों के प्रेम संबंध के बारे में सब पता था. इसीलिए प्रीति के घर वाले बेटी की शादी जल्द से जल्द कर देना चाहते थे ताकि आवारा अंकित से बेटी का पीछा छूट जाए.

प्रीति के घरवालों ने अंकित से पीछा छुड़ाने के लिए सन 2011 में उस की शादी पिठोरिया के रहने वाले जनार्दन केसरी के एकलौते बेटे कार्तिक केसरी के साथ कर दी. प्रीति के घर वाले प्रार्थना करते रहे कि बेटी की गृहस्थी बस जाए, उस पर अंकित का बुरा साया न पड़े.

सालों तक प्रीति और अंकित का प्यार राज बना रहा. पति के काम पर जाने के बाद प्रीति अपने आशिक अंकित से फोन पर घंटों बातें करती रहती थी.

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एक बार अंकित प्रेमिका की ससुराल आया तो उस ने अपने सासससुर और पति से उस का परिचय दूर के रिश्ते के भाई के रूप में कराया. इस के बाद अंकित का वहां आनाजाना शुरू हो गया. जिस दिन पति किसी काम से शहर के बाहर गया होता, प्रीति सीधेसादे सासससुर की आंखों में धूल झोंक कर अंकित को फोन कर के बुला लेती और दिन भर उस की बांहों में झूलती.

अंकित के बारबार आने से ससुर जनार्दन को अंकित पर शक हो गया कि वह बारबार क्यों आता है? इस बात को ले कर एक दिन कार्तिक पत्नी से पूछ बैठा कि अंकित बारबार क्यों आता है? मुझे उस के लक्षण कुछ ठीक नहीं लगते. तुम उसे यहां आने से मना कर दो.

प्रीति समझ गई थी पति को उस पर शक हो गया है. उस ने यह बात फोन पर अंकित को बता दी कि कार्तिक को उस पर शक हो गया है. जब तक मैं न कहूं, तब तक यहां मत आना. प्रीति की बात सुन कर अंकित थोड़ा मायूस जरूर हुआ, पर उस ने हिम्मत नहीं हारी.

अंकित भी एक रईस परिवार से था. उस के घर में गाड़ी, नौकर और सुखसुविधा के सभी महंगे सामान थे. रुपएपैसों की कोई कमी नहीं थी. वह दिन भर आवारा दोस्तों के साथ आवारागर्दी करता था. उन पर पानी की तरह पैसे लुटाता था. उस के खास दोस्तों में गांव के विशाल पांडेय, दीपक लिंडा और उज्जवल केसरी शामिल थे. विशाल पेशे से वकील था और उज्जवल केसरी उस का ड्राइवर. इन तीनों से अंकित की प्रेम कहानी छिपी नहीं थी.

प्रीति ने जब से अंकित को ससुराल आने से मना किया था, तब से उस के दिमाग में एक ही ख्याल बारबार आता था कि कार्तिक को हमेशा के लिए रास्ते से हटा दे.

अंकित ने अपने मन की बात दोस्तों से शेयर की, लेकिन दोस्तों ने उसे ऐसा करने से मना कर दिया. विशाल ने उसे समझाया कि बीच का कोई रास्ता निकालते है, जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.

सितंबर, 2019 के दूसरे हफ्ते की बात है. कार्तिक के एक रिश्तेदार के यहां पार्टी का आयोजन था. पार्टी में शहर के बड़ेबड़े लोग शरीक हुए. रात का समय था. पार्टी में आए मेहमान प्लेटों में खाना लिए खाने का लुत्फ ले रहे थे.

पार्टी में कार्तिक ने प्रीति और अंकित को किया जलील

पार्टी में अंकित केसरी भी शामिल था. कार्तिक भी पत्नी को ले कर आया था. पार्टी में पत्नी को छोड़ कर कार्तिक मेहमानों और पुराने दोस्तों से मिलने चला गया. अंकित जानता था कि पार्टी में प्रीति जरूर आएगी. उसी दरमियान उस की नजर प्रीति पर पड़ी तो वह खुशी से उछल पड़ा. अंकित प्लेट में खाना लिए खा रहा था, प्रीति भी उसी की बगल में खड़ी हो कर उसी की प्लेट में खाना खाने लगी. तभी वहां कार्तिक आ गया.

पत्नी को प्रेमी अंकित के साथ एक ही प्लेट में खाना खाते देख कार्तिक गुस्से से पागल हो गया. उस ने मेहमानों के सामने पत्नी और उस के आशिक को खूब झाड़ पिलाई. जो नहीं कहना था, गुस्से में आ कर वह तक कह गया. अंकित और प्रीति के सिर शर्म से झुक गए. अंकित प्रीति की खातिर उस समय अपमान का घूंट पी कर रह गया. लेकिन मन ही मन उस ने फैसला कर लिया कि जिस तरीके से कार्तिक ने भरी महफिल में उन दोनों को अपमानित किया है, उसे उस का फल तो भुगतना ही पड़ेगा. प्रीति भी खून का घूंट पी कर रह गई थी. पार्टी के बाद कार्तिक पत्नी को ले कर घर आ गया. पार्टी में उस ने पत्नी को जो डांट पिलाई थी, सो पिलाई थी, घर आ कर भी उस ने उसे खूब डांटा.

उस ने प्रीति से यहां तक कह दिया कि आज के बाद अगर अंकित से बात करने की कोशिश की या मिली तो उस से बुरा कोई नहीं होगा. वह घर की इज्जत की खातिर अंकित को मार भी सकता है.

पति की धमकी से प्रीति डर गई. उस ने अंकित को फोन कर के सारी बातें बता दीं. साथ ही अंकित को कार्तिक को रास्ते से हटाने के लिए हरी झंडी भी दे दी.

माशूका की ओर से मिली हरी झंडी के बाद अंकित ने अपने दोस्तों के साथ मिल कर कार्तिक की हत्या की योजना बना डाली. योजना के अनुसार, 28 सितंबर, 2019 की सुबह कार्तिक पत्नी के कहने पर उसे साथ ले कर अपनी कार से दुर्गा पूजा का सामान लेने रांची गया. दोनों ने दिन भर खरीदारी की. दुर्गा पूजा पर हर साल खरीदारी करने का जिम्मा कार्तिक का ही था. वह दुर्गा पूजा समिति का अध्यक्ष भी था.

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खैर, खरीदारी कर के रात 8 बजे वह रांची से खूंटी के लिए निकला. इसी बीच पति की आंखों में धूल झोंक कर प्रीति ने अपने आशिक अंकित को बता दिया कि वह रांची से घर के लिए लौट रहे हैं. 2 घंटे में वह खूंटी पहुंच जाएगी.

उधर अंकित ने अपनी स्कौर्पियो कार में विशाल पांडेय को बैठा लिया. विशाल उस का साथ देने के लिए पहले ही हामी भर चुका था. उस ने कार में लाठी, डंडा और लोहे का रौड छिपा दी थी. एक बाइक पर दीपक लिंडा और मुंगेश सवार हो कर अंकित के बताए स्थान कांके थानाक्षेत्र के बाड़ू चौक पर जा कर छिप गए. अंकित भी वहीं आ कर छिप गया.

रात 10 बजे कार्तिक की कार बाड़ू चौक के नजदीक पहुंची तो पहले से घात लगाए बैठे अंकित ने दीपक लिंडा को इशारा कर दिया कि शिकार किसी कीमत पर बचना नहीं चाहिए. तुम कार्तिक की कार ओवरटेक करो, हम पीछे से आते हैं.

दीपक ने वैसा ही किया, जैसा उस से करने को कहा गया. कार्तिक की कार जैसे ही बाड़ू चौक के पास पहुंची, दीपक ने अपनी मोटरसाइकिल से ओवरटेक किया और बाइक कार्तिक की कार के सामने तिरछा कर के खड़ी कर दी. तब तक पीछे से अंकित भी वहां पहुंच गया. इस के बाद अंकित और विशाल पांडेय लाठी, डंडा और रौड ले कर कार्तिक के पास पहुंचे.

कार्तिक को जबरन कार से बाहर निकलने पर मजबूर किया गया. कार से बाहर निकलते ही विशाल ने लोहे की रौड से कार्तिक के सिर पर जोरदार वार किया, जिस से कार्तिक का सिर 2 भागों में बंट गया और उस की मौके पर ही मौत हो गई. कार में बैठी प्रीति पति की पिटाई होते देख मन ही मन खुश हो रही थी कि उस की राह का कांटा हमेशा के लिए निकल गया. अब उसे और अंकित को एक होने से कोई नहीं रोक पाएगा.

बहरहाल, प्रीति ने जिस शातिराना अंदाज में शतरंज की बाजी खेली, कानून के जांबाज नुमाइंदों ने उसी चाल से उस की बाजी पलट दी और प्रीति और अंकित को जेल जाना पड़ा.

10 दिसंबर को विशाल पांडेय को गिरफ्तार किया गया. अंकित और उस के दोनों साथी फरार चल रहे थे. 6 मार्च, 2020 को दीपक लिंडा, उज्जवल केसरी और मुंगेश गिरफ्तार कर लिए गए.

फरार चल रहा अंकित अप्रैल, 2020 के दूसरे सप्ताह में गिरफ्तार हुआ. सभी आरोपियों ने कार्तिक केसरी की हत्या में अपना जुर्म कबूल कर लिया. अंकित ने हत्या में प्रयुक्त लाठी, डंडा और रौड बरामद करा दी थी. कथा लिखे जाने तक सभी आरोपी जेल में बंद थे.

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– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

रासलीला बहू की : भाग 2

घटना की वस्तुस्थिति जानने के लिए पुलिस टीम सब से पहले क्राइम साइट पर पहुंची. अभी तक की जांचपड़ताल में पुलिस को यही पता चला था कि घटना वाली रात पतिपत्नी दोनों रांची से दुर्गा पूजा की खरीदारी कर के घर लौट रहे थे. इसी बीच घटना घटी थी.

लेकिन इस में एक बात खटक रही थी कि हत्यारों ने घटना को लूट की नीयत से तो अंजाम दिया नहीं था. अगर लूट की नीयत से वारदात की गई होती तो कार्तिक की पत्नी के साथ जरूर लूटपाट हुई होती, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ था.

दूसरी बात यह कि पत्नी की आंखों के सामने 4-5 अपराधी लाठी, डंडे और रौड से पति पर हमला करते रहे और पत्नी ने विरोध तक नहीं किया. वह कार में बैठेबैठे पति की हत्या का नजारा देखती रही. यह बात किसी के गले नहीं उतर रही थी.

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तीसरी सब से खास बात यह, जोकि प्रीति ने पूछताछ में बताई थी कि अपराधी 2 बाइकों पर सवार हो कर पिठोरिया चौक की ओर भागे थे. उस मार्ग के सभी सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगालने पर उस रात बताए गए समय पर कोई भी बाइक से भागते हुए नहीं दिखा था. इस का मतलब था कि प्रीति झूठ बोल रही थी. पुलिस को प्रीति पर संदेह हो गया कि इस घटना में उस की कोई भूमिका जरूर है.

सच का पता लगाने के लिए पुलिस ने कार्तिक और उस की पत्नी प्रीति की काल डिटेल्स निकलवाई. प्रीति की काल डिटेल्स देख कर पुलिस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. घटना के समय प्रीति के फोन की लोकेशन मौके पर पाई गई. उस के फोन से घटना के कुछ देर पहले तक एक नंबर पर कई बार काल की गई थी. प्रीति की काल डिटेल्स ने पुलिस के इस शक को और पुख्ता कर दिया कि पति की हत्या में प्रीति का हाथ है. जांचपड़ताल से एक बात तो साफ हो गई थी कि कार्तिक की हत्या प्रेम प्रसंग के चलते हुई थी. लेकिन प्रीति को गिरफ्तार करने से पहले पुलिस उस के खिलाफ सबूत इकट्ठा कर लेना चाहती थी, ताकि अदालत में उस का मखौल न उड़े.

पुलिस ने प्रीति की काल डिटेल्स से नंबर ले कर उस नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई, जिस से प्रीति की घटना के ठीक पहले कई बार बात हुई थी. वह नंबर खूंटी जिले के लोधमा कर्रा के रहने वाले अंकित केसरी उर्फ  बिट्टू का था, जिस से दोनों के बीच बातचीत हुई थी.

पुलिस ने अंकित के घर लोधमा कर्रा में दबिश दी तो वह फरार मिला. घर वालों से पूछताछ पर पता चला कि वह करीब 15 दिनों से कहीं गया हुआ है. कहां गया है, घर वालों को भी नहीं पता था.

प्रीति का प्रेमी अंकित आया संदेह के दायरे में

अंकित का घर से फरार होना पुलिस के शक को मजबूत कर रहा था. पुलिस को लग रहा था इस हत्याकांड में अंकित का हाथ अवश्य है तभी वह घटना के बाद से फरार है. कार्तिक हत्याकांड के खुलासे की एक आखिरी कड़ी मृतक की पत्नी प्रीति ही थी, जिस से पूछताछ कर के घटना से परदा उठ सकता था. वैसे भी 2 सप्ताह बीत चुके थे. घटना के खुलासे के लिए पुलिस पर दबाव था.

10 अक्टूबर, 2019 को पुलिस मृतक की पत्नी प्रीति को विक्टोरिया से हिरासत में ले कर पूछताछ के लिए थाना कांके ले आई. पुलिस ने उस से कड़ाई से पूछताछ शुरू की. लेकिन प्रीति पुलिस को भरमाती रही कि वह निर्दोष है, पति की हत्या में उस का कोई हाथ नहीं है.

पुलिस ने जब उस के सामने अंकित से बातचीत की काल डिटेल्स रखी तो वह घबरा गई. खुद को फंसता देख उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसी के कहने पर उस के प्रेमी अंकित केसरी उर्फ बिट्टू ने अपने साथियों के साथ मिल कर कार्तिक केसरी को मौत के घाट उतारा था.

इस के बाद प्रीति ने घटनाक्रम के बारे में विस्तार से बता दिया. अपने ही सिंदूर को मिटाने वाली पत्नी की करतूतों को जिस ने भी सुना, हैरत में रह गया. बहरहाल, पुलिस ने प्रीति को अदालत के सामने पेश कर जेल भेज दिया. प्रीति से हुई पूछताछ में कई आरोपितों अंकित केसरी उर्फ बिट्टू, उज्जवल केसरी, दीपक लिंडा और विशाल कुमार पांडेय के नाम सामने आए.

पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी की कोशिश में लगी थी. घटना के बाद से ही सभी आरोपी भूमिगत हो गए थे. जब तक पुलिस जांच की प्रक्रिया आगे बढ़े, आइए जानते हैं दिल दहला देने वाली इस कहानी की पृष्ठभूमि—

35 वर्षीय कार्तिक केसरी मूलरूप से खूंटी जिले के पिठोरिया थानाक्षेत्र के विक्टोरिया का रहने वाला था. उस के पिता जनार्दन केसरी क्षेत्र के बड़े काश्तकारों में गिने जाते थे. उन के पास खेती की कई एकड़ जमीन थी, जिस में अच्छी पैदावार होती थी. उन के परिवार में कुल जमा 4 सदस्य थे. 2 पतिपत्नी और 2 संतानें. एक बेटा कार्तिक और दूसरी बेटी. बेटी का विवाह हो चुका था.

पढ़लिख कर कार्तिक भी जवान हो गया था. वह पिता के साथ खेती के कामों में हाथ बंटाता था. एकलौता होने की वजह से उन्होंने बेटे को सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं करने दिया था. उन का कहना था कि हमारे पास सब कुछ तो है, सरकारी नौकरी कर के क्या हासिल होगा.

कार्तिक भी यही सोचता था कि अगर वह नौकरी पर चला गया तो उस के बूढ़े मांबाप की सेवा कौन करेगा. उन के बुढ़ापे की एक आखिरी लाठी तो वही है, इसलिए उस ने कभी भी बाहर जाने की नहीं सोची.

कार्तिक शादी लायक हो चुका था. उस के लिए कई जगह से रिश्ते आ रहे थे. उन्हीं में एक रिश्ता लोधमा कर्रा के कुलहुट्टू से आया था. लड़की खूबसूरत, गुणी तथा संस्कारी बताई गई थी, नाम था प्रीति. जनार्दन केसरी को यह रिश्ता पसंद आ गया. उन्होंने सन 2011 में बेटे को प्रीति संग परिणय सूत्र में बांध दिया. प्रीति ससुराल विक्टोरिया आई तो वह खुश नहीं थी. उस ने जिस खूबसूरत राजकुमार के सपने संजोए थे, वे धरे का धरे रह गए थे. प्रीति के मुताबिक उस का पति भले ही अमीर था, लेकिन खूबसूरती के मामले में बेहद गरीब था. यह अलग बात है कि कार्तिक और उस के घर वाले प्रीति को पलकों पर बैठा कर रखते थे.

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आखिर वह घर की एकलौती बहू थी. कार्तिक तो हर घड़ी उस की फिक्र में रहता था. अच्छे से अच्छा खाना, मनपसंद कपड़े, गहने सब कुछ था प्रीति के पास. फुरसत मिलती तो कार्तिक मांबाप से अनुमति ले कर प्रीति को सिनेमा दिखाने भी ले जाता था. कार्तिक पत्नी को खुश रखने का हरसंभव प्रयास करता था. समय के साथ प्रीति 2 बेटियों निशा (7 साल) और परी (3 साल) की मां बन गई थी.

भले ही प्रीति 2 बेटियों की मां बन गई थी, लेकिन आज भी उस का मन मायके कुलहुट्टू में ही अटका रहता था, क्योंकि वहां उस का प्रेमी दिलबर अंकित केसरी उर्फ बिट्टू रहता था.

बचपन का प्यार था दोनों का

बचपन में प्रीति और अंकित दोनों साथसाथ स्कूल जाया करते थे. वे सच्चे दोस्त थे. अगर किसी दिन प्रीति स्कूल नहीं जाती तो उस दिन अंकित भी कोई न कोई बहाना बना कर स्कूल नहीं जाता था. जिस दिन अंकित स्कूल नहीं जाता था, उस रोज प्रीति पेट दर्द का बहाना बना कर छुट्टी कर लेती थी. ऐसी दोस्ती थी दोनों के बीच. धीरेधीरे दोनों बड़े हुए. फिर पता नहीं कब उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. उन्हें प्यार का एहसास तब हुआ, जब  एक दिन भी न मिल पाते तो बेचैन हो जाते. ये बेचैनी ही उन्हें प्यार होने का एहसास दिला रही थी.

प्रीति और अंकित दोनों एकदूसरे से मोहब्बत करते थे. वे एक जिस्म दो जान थे. अंकित दिल था तो प्रीति धड़कन. उस की नसनस में प्रीति खून बन कर समाई थी. वे दोनों एकदूसरे से इतना प्यार करते थे कि एकदूसरे के बिना जीने की कल्पना ही नहीं करते थे.

स्कूल के दिनों में हुआ प्यार जब कालेज तक पहुंचा तो प्रीति और अंकित संजीदा हो गए. अपने प्यार को दोनों एक खास मुकाम पर ले जाना चाहते थे. चूंकि दोनों एक ही गांव में और पासपड़ोस में रहते थे, इसलिए ऐसा संभव नहीं था.

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जानें आगे की कहानी अगले भाग में…

Dr Ak Jain: नामर्द नहीं हैं बांझ पुरुष, जानें उपाय

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि देश में लगभग 4 करोड़ पुरुषों के बांझ होने का अनुमान है. संतान सुख से वंचित जोड़ों के पुरुष सदस्य शर्म के मारे इलाज के लिए आगे नहीं आते और अपनी निर्दोष पत्नियों को जीवन भर बांझ होने का उलाहना सुनने के लिए बाध्य कर देते हैं  यह जरूरी नहीं है कि जो पुरुष बांझ हो वह नपुंसक भी हो. किसी व्यक्ति का नपुंसक होना और बांझ होना 2 अलगअलग बातें हैं. संभोग न कर पाना नपुंसकता है, लेकिन संभोग शक्ति होते हुए भी स्त्री को गर्भवती न कर पाना बांझपन कहलाता है. कई व्यक्ति, जो ऊपर से स्वस्थ, हृष्टपुष्ट होते हैं और सफल संभोग करते हैं, वे भी संतान सुख से वंचित रहते हैं.

पुरुषों में बांझपन कई कारणों से हो सकता है. कई बार एकसाथ अनेक कारण मिल कर पुरुषों को बांझ कर देते हैं, तो कई बार एक ही कारण इतना सशक्त होता है कि पुरुष बांझ रह जाता है. पुरुषों में बांझपन का सब से बड़ा कारण वीर्य दोष होता है. यदि पुरुष स्वस्थ है तो वीर्य की 15 बूंदों में ही साढ़े 7 करोड़ शुक्राणु होने चाहिए. इन में अधिकांश शुक्राणु स्वस्थ और सक्रिय होने आवश्यक हैं. यदि इन शुक्राणुओं में अधिकांश अस्वस्थ या निष्क्रिय होंगे तो गर्भधारण नहीं होगा.

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शुक्राणु कमजोर होने की वजह से पुरुष अपनी पत्नी को गर्भवती करने में असमर्थ रहते हैं. पुरुषों में बांझपन का सब से बड़ा कारण वीर्य दोष ही होता है.

वीर्य दोष के कई कारण हो सकते हैं जैसे आहारविहार, चोट, मानसिक परेशानी, गलसुआ, बेरिकोसील और एक्सरे के कुप्रभाव की वजह से पुरुष का वीर्य दूषित हो जाता है और वह प्रजनन करने लायक नहीं रह जाता. कई बार यह भी होता है कि शुक्राणु निर्माण की प्रक्रिया बराबर चल रही होती है, लेकिन वीर्य में वे अनुपस्थित रहते हैं तो इस का मतलब यह है कि शुक्राणुओं के वीर्य में मिलने के मार्ग में कहीं अवरोध है. इस अवरोध को आपरेशन द्वारा ठीक कराया जा सकता है.

अगर आप भी ऐसी ही किसी समस्या से जूझ रहे हैं तो संपर्क करिए लखनऊ के डॉक्टर ए. के. जैन से जो पिछले 40 सालों से इन समस्याओं का इलाज कर रहे हैं.

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मानसिक नपुंसकता

पुरुषों में बांझपन का एक कारण उन का नपुंसक होना भी हो सकता है. शारीरिक संरचना में कोई जन्मजात विकार हो तो व्यक्ति संबंध बनाने में सफल नहीं हो पाता. कई बार मानसिक नपुंसकता की वजह से भी वह बांझ रहता है. मानसिक नपुंसकता की वजह से वह संभोग ही नहीं कर पाता है और हर बार वह असफल रहता है. मानसिक नपुंसकता 2 प्रकार की हो सकती है. एक तो यह कि समय पर अंग उत्तेजित ही न हो, इस वजह से संभोग ही न कर पाए. दूसरी स्थिति में जैसेतैसे उत्तेजित तो हो जाता है, लेकिन संबंध बनाने से पूर्व ही वीर्य स्खलित हो जाता है. शीघ्रपतन भी बांझपन का एक कारण बनता है, क्योंकि इस में संबंध बनाने के प्रयास में ही वीर्यपात हो जाता है और ऐसे में शुक्राणु व अंडाणु का संपर्क ही नहीं हो पाता है.

कई बार तो यह भी देखा गया है कि पतिपत्नी दोनों संतानोत्पात्त के लिए पूर्णत: योग्य होते हैं और किसी में कोई दोष नहीं होता, फिर भी बच्चा नहीं होता. इस का सब से बड़ा कारण है कि वे सही समय पर संबंध नहीं बनाते. यह एक संयोग हो सकता है कि जब वे संबंध बनाते हों, उस समय स्त्री के अंडाणु नहीं बनते हों. मानसिक स्थिति और संबंध बनाने के बीच बड़ा नाजुक संबंध है. यदि आप किसी चिंता या तनाव को पालें अथवा व्यग्र या भयग्रस्त हो कर संबंध बनाएंगे, तो स्त्री को गर्भ ठहरना मुशकिल होगा.

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अत्यधिक तनाव

तंबाकू और सिगरेट के अत्यधिक सेवन से वीर्य में शुक्राणुओं की बनावट और संख्या पर दुष्प्रभाव से पुरुषों में बांझपन का खतरा बढ़ा है. पुरुष जननेंद्रिय को गरम कर देने वाले वातावरण में काम करने से भी पुरुष बांझ हो सकता है. यही कारण है कि जिन कारखानों में भट्टियों, जहरीले रसायन तथा एक्सरे जैसी किरणों का प्रयोग होता है, वहां के श्रमिकों के बांझ होने के आसार ज्यादा रहते हैं. लगातार नाइलोन का जांघिया पहनने से भी पुरुष बांझ हो सकते हैं. कई मामलों में पाया गया है कि घर और बाहर के झंझटों से महिलाएं और पुरुष इतने तनावग्रस्त रहते हैं कि शारीरिक क्षमताओं के बावजूद बेमेल मानसिक दशाओं के कारण गर्भधारण नहीं हो पाता. परीक्षणों से यह सिद्ध हुआ है कि ऐसे तनावग्रस्त दंपतियों को यदि एक माह घर से दूर खुशनुमा माहौल में रखा जाए, तो उन्हें संतान प्राप्त हो सकती है.

मधुमेह से भी पुरुषों में बांझपन आ सकता है. इसी प्रकार थायराइड जैसी बीमारी भी पुरुष बांझपन का कारण बन सकती है. जन्मजात शारीरिक नपुंसकता के लिए पुरुषों को चाहिए कि वे किसी कुशल चिकित्सक को बताएं. आजकल चिकित्सा विज्ञान काफी उन्नत है और आपरेशनों के जरिए जन्मजात विकृतियों को ठीक भी किया जा सकता है.

सफल संभोग जरूरी

मानसिक नपुंसकता केवल मनोवैज्ञानिक बीमारी है. शरीर स्वस्थ हो, लेकिन मन अशांत हो तो बात नहीं बन सकती. सफल संभोग के लिए शरीर एवं मन दोनों से व्यक्ति को स्वस्थ एवं प्रसन्न होना चाहिए. तभी वह कुछ कर सकता है. अत: अपने मन से पूर्व अनुभव को त्याग कर पूर्ण आत्मविश्वास के साथ संबंध बनाना चाहिए. फिर देखिए, सारी नपुंसकता छूमंतर. जब भी संबंध बनाएं, दोनों प्रसन्नचित्त हो कर और सारी चिंताओं से मुक्त हो कर भयरहित वातावरण में बनाएं. हो सकता है बात बन जाए. पुरुषों में नपुंसकता और बांझपन दूर करने और संतानसुख का शर्तिया दावा करने वाले अनेक बोगस किंतु आकर्षक विज्ञापन अखबारों में छपते हैं और दीवारों पर पोस्टर के रूप में भी लगते हैं. ये नीमहकीम आप का धन लूटते हैं. यदि आप में कोई कमजोरी है तो किसी योग्य, कुशल एवं अनुभवी चिकित्सक से परीक्षण एवं उपचार कराना चाहिए.

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वीर्य को पुष्ट बनाने तथा शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के लिए कुछ समय के लिए उपचार किया जाता है. इन से शुक्राणु स्वस्थ व गतिशील हो जाते हैं तथा उन की संख्या बढ़ जाती है और वे गर्भधारण कराने में सक्षम हो जाते हैं.

टोनेटोटकों से परहेज

एक बात और जादूटोने से बांझपन दूर नहीं होता. कितने ही टोटके कर लिए जाएं, जब तक पतिपत्नी दोनों पूरी तरह सामान्य नहीं होते, संतान नहीं हो सकती. इसी प्रकार यज्ञ, हवन, व्रत, उपवास और सूर्य उपासना आदि से संतान नहीं हो सकती. यदि कोई खराबी है तो वह उचित उपचार से ही दूर हो सकती है. यदि व्रत और सूर्य उपासना से संतान होती तो आज विश्व में सभी औलाद वाले होते. यदि किसी दंपती को संभोगरत रहने के बावजूद संतान सुख नहीं मिल पा रहा है, तो सब से पहले पुरुष को अपनी जांच करानी चाहिए, क्योंकि पुरुष की जांच सब से सरल है व कम समय में पूरी हो जाती है. यदि जांच में सब कुछ ठीक निकले तो स्त्री की जांच करानी चाहिए.

बांझ दंपतियों के लिए टेस्ट ट्यूब द्वारा बच्चे को जन्म देने की पद्धति एक वरदान है, किंतु अत्यधिक खर्चीली होने के कारण गरीब और मध्यवर्गीय दंपतियों के लिए टेस्ट ट्यूब बेबी पाना एक सपना हो गया है. इस प्रणाली में लगभग 40 हजार रुपए लगभग खर्च आता है. चूंकि इस पद्धति में  20% मामलों में ही सफलता मिलती है इसलिए बेहतर है कि बांझ दंपती इस खर्चीली विधि को अपनाने के बजाय बच्चा गोद लेने की सामाजिक प्रथा को अपनाएं.

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लखनऊ के डॉक्टर ए. के. जैन, पिछले 40 सालों से इन सभी समस्याओं का इलाज कर रहे हैं. तो आप भी पाइए अपनी सभी  सेक्स समस्या का बेहतर इलाज अंतर्राष्ट्रीय ख्याति एवं मान्यता प्राप्त डॉ. जैन द्वारा. 

सुशांत के घर पहुंची टीवी एक्ट्रेस रतन राजपूत, वीडियो शेयर कर बताई ये बातें

बौलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की आत्महत्या के बाद इंडस्ट्री से जुड़ी कई सच्चाईयां सामने आई हैं. जहां एक तरफ सभी को लगता है कि बौलीवुड में खूब पैसा और फेम है तो वहीं दूसरी तरफ सच्चाई कुछ और ही है. खूब सारा पैसा और फेम के साथ साथ इंडस्ट्री में तनाव और डिप्रेशन की भी कोई कमी नहीं है. कुछ बड़े एक्टर्स, डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स ने सभी को अपनी मुट्ठी में किया हुआ है जिसकी वजह से जो एक्टर्स किसी फिल्मी बैकग्राउंड से नहीं आते उन्हें इन लोगों द्वारा सिर्फ और सिर्फ टौर्चर और बेइज्जती ही मिलती है.

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एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) ने जब से अपने मुंबई वाले घर में खुद को फांसी लगाई है तभी से ही सभी लोग बौलीवुड इंडस्ट्री में हो रहे नेपोटिज्म (Nepotism) को लेकर काफी भड़के हुए हैं. जैसा कि हम सब जानते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत पटना, बिहार के रहने वाले थे तो ऐसे में कई स्टार्स सुशांत के घर उनके परिवार वालों से मिलने भी पहुंचे इन में से भोजपुरी इंडस्ट्री के सुपरस्टार खेसारीलाल यादव (Khesarilal Yadav) और अक्षरा सिंह (Akshara Singh) का भी नाम शामिल है.

इसी कड़ी में एक और एक्ट्रेस सुशांत के घर उनके परिवार वालों से मिलने पहुंची और उनका नाम है रतन राजपूत (Ratan Rajput). एक्ट्रेस रतन राजपूत सुशांत के घर उनके परिवार वालों को हिम्मत देने पहुंची थी पर उनका कहना है कि उल्टा उनके पिता से मिलकर उन्हें खुद हिम्मत मिली है. रतन राजपूत (Ratan Rajput) ने सुशांत के परिवार वालों से मिलने के बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर की है जिसमें वे कह रही हैं कि, “जब मैं सुशांत के घर जा रही थी तो काफी घबराई हुई थी कि मैं उनसे क्या बात करूंगी. लेकिन, वहां जाकर मेरी घबराहट दूर हो गई और मुझे लग रहा है था कि मैं अंकल से हिम्मत पा रही हूं. अंकल एक अलग तरह के इंसान हैं, इतने शांत और स्थिर हैं. पता नहीं अनकहा कुछ कहते हैं… उनकी पूरी एनर्जी ही अलग है.”

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कुछ हादसे एक प्रकार का अविश्वास पैदा कर जाते हैं। खुद तो जैसे तैसे सम्भल जाता है इंसान …पर अब परिवार का विश्वास कैसे जीता जाये? वो दुखी होकर कहते हैं… तुम लोग असल ज़िंदगी में भी Acting करते हो क्या? कुछ महीन और महत्वपूर्ण सवाल उठ खड़े हुए हैं! अपना और अपने परिवार का ख्याल रखें please 🙏 #ithinkofmyfamily

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इसी बारे में बात करते हुए रतन राजपूत (Ratan Rajput) ने कहा कि, “अंकल को देखकर बहुत कुछ चेंज हुआ है और मैं जो अंदर से कमजोर हो गई थी वो अब ठीक हुई हूं. मैं वहां सिर्फ इतना ही कह पाई कि मैं हमेशा पटना आती हूं और जब भी आऊंगी तो आपसे मिलने जरूर आऊंगी. सुशांत के पिता बहुत पॉजिटिव हैं. सुशांत को जरूर न्याय मिलेगा.”

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सरकार द्वारा टिक-टॉक बैन होने पर बिग बौस 13 विनर सिद्धार्थ शुक्ला का आया बयान, कही ये बड़ी बात

जैसा कि हम सब जानते हैं कि भारत और चीन के बीच इस समय काफी अनबन चल रही है और ऐसे में हमारे देश के जवान बोर्डर पर खड़े हमारी रक्षा करने के एक भी मौका नहीं छोड़ रहे. बोर्डर पर खड़े जवान अपनी जान की बाज़ी लगा कर हमारी रक्षा कर रहे हैं तो इसी के चलते सरकार ने चीन के साथ सभी बिजनेस खत्म करने का सोचा है. 29 जून को सरकार ने अपना पहला कदम उठाते हुए टिक-टॉक (Tik-Tok) समेत 59 ऐप्स को इंडिया में बैन कर दिया है.

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टिक-टॉक (Tik-Tok) का प्रयोग सबसे ज्यादा इंडिया में हो रहा था क्योंकि यहां आम आदमी से लेकर सेलेब्रिटीज तक सभी लोग अपने एंटरटेंमेंट के लिए इस ऐपलिकेशन का इस्तेमाल करते थे. अब जो कि सरकार ने इन सभी चीनी ऐप्स को बंद करने का फैसला किया है तो काफी लोग इस फैसले में सरकार का सपोर्ट कर रहे हैं.

 

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If life’s a sport …. play it with sportsman spirit….. 😉

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ऐसे में बिग बॉस सीजन 13 (Bigg Boss 13) के विनर सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla) भी इस बारे में बात करते हुए सामने आए हैं. एक इंटरव्यू में बात करते हुए सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla) ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है. सिद्धार्थ शुक्ला का कहना है कि वह टिक-टॉक (Tik-Tok) पर थे लेकिन उस पर कभी उन्होनें वीडियोज नहीं बनाई और ना ही उन्हें टिक-टॉक वीडियोज देखना पसंद था.

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With no football in sight … that’s the best I could do with my jersey 😉

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इसी बारे में सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla) ने आगे बात करते हुए कहा कि यह भारतीय कंपनियों के लिए अच्छा अवसर है और उन्हें लोगों के लिए इस तरह की ऐप बनानी चाहिए जिससे की बाहर के देशों को नहीं बल्कि अपने ही देश को फायदा हो और लोगों के मनोरंजन में भी कोई कमी नहीं आनी चाहिए. सिद्धार्थ शुक्ला के अलावा रश्मि देसाई (Rashmi Desai), निया शर्मा (Nia Sharma) सहित कई टीवी स्टार्स ने सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा किए और सरकार के फैसले की सराहना की.

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