Short Story In Hindi: रहने के लिए एक मकान

Short Story In Hindi: मैं अपने गांव लौटने लगा तो मेरे आंखों में आंसू झिलमिला रहे थे. मेरे दोहेते अपने घर के बालकनी से प्रेम से हाथ हिला रहे थे,”बाय ग्रैंड पा, सी यू नाना…”

धीरेधीरे मैं बस स्टैंड की ओर चल दिया.

मैं मन ही मन सोचने लगा,’बस मिले तो 5 घंटे में मैं अपने गांव पहुंच जाऊंगा. जातेजाते बहुत अंधेरा हो जाएगा, फिर बस स्टैंड पर उतर कर वहां एक होटल है. उस में कुछ खापी कर औटो से अपने घर चला जाऊंगा.’

2 साल पहले मेरी पत्नी बीमार हो कर गुजर गई. तब से मैं अकेला ही हूं. मेरे गांव का मकान पुस्तैनी है. उस की छत टिन की है. पहले घासपूस की छत थी.

जब एक बार बारिश में बहुत परेशानी हुई तब टिन डलवा दिया था. मेरा एक भाई था वह भी कुछ साल पहले ही चल बसा था. अब इस घर में आखिरी पीढ़ी का रहने वाला सिर्फ मैं ही हूं.

मेरी इकलौती बेटी बड़े शहर में है अत: वह यहां नहीं आएगी. जब बारिश होती है तो छत से यहांवहां पानी टपकता है. एक बार इतनी बारिश हुई कि दूर स्थित एक बांध टूट गया और कमर भर पानी मकान के अंदर तक जा घुसा था. कई बार सोचा घर की मरम्मत करा दूं पर इस के लिए भी एकाध लाख रूपए तो चाहिए ही.

मैं सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हुआ हूं अत: मुझे पैंशन मिलती है. उम्र के साथ दवा भी खाने होते हैं मगर फिर भी इस खर्च के बाद थोड़ाबहुत बच जरूर जाता है.

2 महीने में एक बार मैं शुक्रवार को दोहेतो को देखने की उत्सुकता में बेटी के घर जा कर 2-3 दिन ठहर कर खुशीखुशी दिन बिता कर मैं वापस आ जाता हूं. इस से ज्यादा ठहरना मुझे ठीक नहीं लगता.

मेरे दामाद अपना प्रेम या विरोध कुछ भी नहीं दिखाते. मैं घर में प्रवेश करता तो एक मुसकान छोड़ अपने कमरे में चले जाते.

दामाद शादी के समय बिल्डिंग बनाने वाली बड़ी कंपनी में सीनियर सुपरवाइजर थे. जो मकान बने वे बिक न सके. बैंक से उधार लिए रुपए को न चुकाने के कारण कंपनी बंद हो गई थी. तब से वह रियल ऐस्टेट का ब्रोकर बन गया.

“कुदरत की मरजी से किसी तरह सब ठीकठाक चल रहा है पापा,” ऐसा मेरी बेटी कहती.

पति की नौकरी जब चली गई थी तब मेरी बेटी दोपहर के समय टीवी सीरियल न देख कर सिलाई मशीन से अड़ोसपड़ोस के बच्चों व महिलाओं के कपड़े सिल कर कुछ पैसे बना लेती.

“पापा, आप ने कहा था ना कि बीए कर लिया है तो अब बेकार मत बैठो, कुछ सीखना चाहिए. तब मैं सिलाई सीखी. वह अब मेरे काम आ रही है पापा,” भावविभोर हो कर वह कहती.

पिछली बार जब मैं गया था तो दोहेतो ने जिद्द की, “नानाजी, आप हमारे साथ ही रहो. क्यों जाते हो यहां से?”

बच्चे जब यह कह रहे थे तब मैं ने अपने दामाद के चेहरे को निहारा. उस में कोई बदलाव नहीं.

मेरी बेटी रेनू ही आंखों में आंसू ला कर कहती,”पापा… बच्चों का कहना सही है. अम्मां के जाने के बाद आप अकेले रहते हैं जो ठीक नहीं. आप बीमार भी रहते हो.”

वह कहती,”पापा, हमारे मन में आप के लिए जगह है पर घर में जगह की कमी है. आप को एक कमरा देना हो तो 3 रूम का घर चाहिए. रियल ऐस्टेट के बिजनैस में अभी मंदी है. तकलीफ का जीवन है. इस घर में बहुत दिनों से रहते आए हैं अत: इस का किराया भी कम है. अभी इस को खाली करें तो दोगुना किराया देने के लिए लोग तैयार हैं. क्या करें? इस के अलावा मेरा सिरदर्द जबतब आ कर परेशान करता है.”

मैं बेटी को समझाता,”बेटा रो मत. यह सब कुछ मुझे पता है. अब गांव में भी क्या है? मुझे तुम्हारे साथ ही रहना है ऐसा भी नहीं. पड़ोस में एक कमरे का घर मिल जाए तो भी मैं रह लूंगा. मैं अभी ₹21 हजार पैंशन पाता हूं. ₹6-7 हजार भी किराया दे कर रह लूंगा. अकेला तो हूं. तुम्हारे पड़ोस में रहूं तो मुझे बहुत हिम्मत रहेगी,” यह कह कर मैं ने बेटी का चेहरा देखा.

“अरे, जाओ पापा… अब सिंगलरूम कौन बनाता है? सब 2-3 कमरों का बनाते हैं. मिलें तो भी किराया ₹10 हजार. यह सब हो नहीं सकता पापा,” कह कर बेटी माथे को सहलाने लग जाती.

अगली बार जब मैं बेटी के घर गया, तब एक दिन सुबह सैर के लिए निकला. अगली 2 गलियों को पार कर चलते समय एक नई कई मंजिल मकान को मैं ने देखा जो कुछ ही दिनों में पूरा होने की शक्ल में था.

उस में एक बैनर लगा था,’सिंगल बैडरूम का फ्लैट किराए पर उपलब्ध है.’

मुझे प्रसन्नता हुई और उत्सुकता भी. वहां एक बैंच पर सिक्योरिटी गार्ड बैठा था. मैं ने उस से जा कर पूछताछ की.

“दादाजी, उसे सिंगल बैडरूम बोलते हैं. मतलब एक ही हौल में सब कुछ होता है. 1-2 से ज्यादा नहीं रह सकते. आप कितने लोग हैं?” वह बोला.

“मैं बस अकेला ही हूं. मेरी बेटी पड़ोस में ही रहती है. इसीलिए यहां लेना चाहता हूं.”

“अच्छा फिर तो ठीक है. घर को देखिएगा…” कह कर अंदर जा कर चाबी के गुच्छों के साथ बाहर आया.

दूसरे माले में 4 फ्लैट थे.

“इन चारों के एक ही मालिक हैं. 3 फ्लैटों के पहले ही ऐडवांस दे चुके हैं.”

उस ने दरवाजे को खोला. लगभग 250 फुट चौड़ा और लंबा एक हौल था. उस में एक तरफ खाना बनाने के लिए प्लेटफौर्म आधी दीवार खींची थी. दूसरी तरफ छोटा सा बाथरूम बड़ा अच्छा व कंपैक्ट था.

“किराया कितना है?” मैं ने पूछा.

“मुझे तो कहना नहीं चाहिए फिर भी ₹ 7 हजार होगा क्योंकि इसी रेट में दूसरे फ्लैट भी दिए हैं. ऐडवांस ₹50 हजार है. रखरखाव के लिए ₹500-600 से ज्यादा नहीं होगा. मतलब सबकुछ मिला कर ₹7-8 हजार के अंदर हो जाएगा दादाजी,” वह बोला.

“ठीक है भैया, इसे मुझे दिला दो. मालिक से कब बात करें?”

“अभी बात कर लो. एक फोन लगा कर बुलाता हूं. आप बैठिए,” वह बोला.”

वहां एक प्लास्टिक की कुरसी थी. मैं उस पर बैठ कर इंतजार करने लगा.

सिक्योरिटी गार्ड ने बताया,“वे खाना खा रही हैं. 10-15 मिनट में पहुंच जाएंगी. तब तक आप यह अखबार पढ़िए.”

मालिक से बात कर किराया थोड़ा कम करने के बारे में पूछ लूंगा. फिर एक औटो पकड़ कर घर जा कर लड़की को भी ला कर दिखा कर तय कर लेंगे. बेटी इस मकान को देख कर आश्चर्य करेगी.

ऐडवांस के बारे में कोई बड़ी समस्या नहीं है. मैं पास के एक बैंक में हर महीने जो पैसे जमा कराता हूं उस में ₹30 हजार के करीब तो होंगे ही.बाकी रुपयों के लिए पैंशन वाले बैंक से उधार ले लूंगा. फिर एक दिन शिफ्ट हो जाऊंगा.

यहां आने के बाद एक आदमी का खाना और चाय का क्या खर्चा होगा?

‘आप खाना बनाओगे क्या पापा,’ ऐसा डांट कर बेटी प्यार से खाना तो भिजवा ही देगी.

खाना बनाने का काम भी बच जाएगा. पास में लाइब्रैरी तो होगा ही. वहां जा कर दिन कट जाएगा.

सामने की तरफ थोड़ी दूर पर एक छोटा सा टी स्टौल था. मैं ने सोचा 1 कप चाय पी कर हो आते हैं. तब तक मकानमालकिन भी आ ही जाएगी.

वहां कौफी की खुशबू आ रही थी | मैं ने सोचा कि कौफी पी लूं. यहां रहने आ जाऊंगा तो नाश्ते और चाय की कोई फिकर नहीं रहेगी.

पैसे दे कर वापस आया तो सिक्योरिटी गार्ड बोला,“घर के औनर आ गए हैं. वे ऊपर गए हैं. आप वहीं चले जाइए.”

मैं धीरेधीरे सीढ़ियां चढ़ने लगा. ऊपर पहुंच कर औनर को नमस्कार बोला.

पीठ दिखा कर खड़ी वह महिला धीरे से मुड़ी तो वह मेरी बेटी रेणू थी. Short Story In Hindi

13 साल बाद लौटा Son of Sardaar, आखिरी बार नजर आएंगे मुकुल देव

साल 2012 में आई अजय देवगन, सोनाक्षी सिन्हा और संजय दत्त की फिल्म ‘सन औफ सरदार’ (Son of Sardaar) ने दर्शकों का खूब एंटरटेन किया था. इस फिल्म में ‘अजय देवगन’ (Ajay Devgn), ‘संजय दत्त’ (Sanjay Dutt), ‘सोनाक्षी सिन्हा’ (Sonakshi Sinha), ‘जूही चावला’ (Juhi Chawla), ‘मुकुल देव’ (Mukul Dev) और ‘विंदू दारा सिंह’ (Vindu Dara Singh) जैसे कमाल के एक्टर्स थे जिन्होनें अपनी एक्टिंग स्किल्स और कौमिक टाइमिंग्स से हमें खूब हंसाया था. इस फिल्म में गेस्ट अपीयरेंस में सलमान खान भी नजर आए थे.

लंदन में हुई ‘सन औफ सरदार 2’ की शूटिंग

हाल ही में फिल्म ‘सन औफ सरदार’ (Son of Sardaar) के मेकर्स ने इस फिल्म के सीक्वैल ‘सन औफ सरदार 2’ (Son of Sardaar 2) का ट्रेलर यूट्यूब पर रिलीज किया जिसे लोगों के मिक्सड रिएक्शंस मिल रहे हैं. जहां पिछली बार ‘सन औफ सरदार’ (Son of Sardaar) की शूटिंग पंजाब में की गई थी, तो वहीं इस बार इस फिल्म की शूटिंग पंजाब के साथसाथ लंदन में भी की गई है. बात करें अगर इस फिल्म की कास्ट की तो इस में ‘अजय देवगन’ (Ajay Devgn), ‘संजय दत्त’ (Sanjay Dutt), ‘मृणाल ठाकुर’ (Mrinal Thakur), ‘रवि किशन’ (Ravi Kishan) के साथ कई बेहतरीन ऐक्टर्स शामिल हैं.

आखिरी बार इस फिल्म में दिखाई देंगे ऐक्टर मुकुल देव

आप को बता दें, ‘सन औफ सरदार’ (Son of Sardaar) की तरह ‘सन औफ सरदार 2’ (Son of Sardaar 2) में भी ऐक्टर ‘मुकुल देव’ (Mukul Dev) हैं और यह फिल्म उन की जिंदगी की आखिरी फिल्म है, क्योंकि ‘मुकुल देव’ (Mukul Dev) अब इस दुनिया में नहीं हैं. ऐक्टर ‘मुकुल देव’ (Mukul Dev) ने फिल्म ‘सन औफ सरदार’ (Son of Sardaar) में अहम किरदार निभाया था और अपनी कौमेडी से दर्शकों को खूब एंटरटेन किया था, लेकिन उन्होंने इसी साल 23 मई को दुनिया को अलविदा कह दिया.

क्या कर पाएगी यह फिल्म दर्शकों को एंटरटेन

सन और सरदार 2‘ (Son of Sardaar 2) के ट्रेलर को अब तक यूट्यूब पर 2.7 करोड़ से भी ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. यह फिल्म 25 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है, तो अब देखने वाली बात यह होगी कि ‘सन औफ सरदार 2’ (Son of Sardaar 2) दर्शकों को कितना एंटरटेन कर पाती है.

Family Murder: दामाद की बेरहमी से हत्या, शव के किए तीन टुकड़े

Family Murder: मंजू पूरी रात अपने बेटे संजय के घर लौटने का इंतजार करती रही, लेकिन वह नहीं लौटा. सुबह होने पर मंजू ने संजय के दोस्तों से बेटे के बारे में पता किया तो दोस्तों ने बताया कि उस के 3-4 दोस्त उसे अपने साथ ले कर कहीं गए थे. मंजू ने उन दोस्तों के बारे में पता लगाना शुरू किया तो जो बात मालूम हुई, उसे सुन कर वह परेशान हो उठी.  उसे जानकारी मिली कि वहीदा का भाई सलीम संजय को शराब पिलाने की पार्टी में शामिल होने के लिए अपने साथ ले गया था. सलीम के साथ और भी युवक थे. वह संजय के ऊपर यह सोच कर झुंझला रही थी कि जब जाना ही था तो क्या उसे साथ जाने के लिए सलीम ही मिला था.

क्योंकि सलीम की बहन वहीदा को ले कर संजय की उस से दुश्मनी चल रही थी. अब मंजू का मन तरहतरह की आशंकाओं से घिरने लगा. उसे बेटे के गायब होने के पीछे किसी साजिश की बू आने लगी. सलीम अपने अब्बा फजरुद्दीन, मां मदीना और बहन वहीदा के साथ हरियाणा के जिला फरीदाबाद की नेहरु कालोनी में मंजू के पड़ोस में ही रहता था. मंजू का मन नहीं माना तो देर शाम वह सलीम के घर पहुंच गई. उस ने सलीम से पूछताछ की तो उस ने बताया कि वह संजय को अपने साथ ले कर तो जरूर गया था, मगर पार्टी खत्म होने के बाद घर जाने की बात कह कर संजय कहां चला गया, यह उसे नहीं मालूम.

जब संजय के बारे में कहीं से कोई जानकारी नहीं मिली तो 19 अगस्त को मंजू थकहार कर बेटे की गुमशुदगी दर्ज कराने थाना डबुआ कालोनी पहुंची. पुलिस ने जब उस से किसी पर शक होने के बारे में पूछा तो उस ने शक जाहिर किया कि उस के बेटे को गायब करने में पड़ोस में रहने वाले सलीम और उस के पिता फजरुद्दीन का हाथ हो सकता है. फजरुद्दीन उस की इसलिए हत्या करना चाहता था, क्योंकि संजय ने उस की मरजी के खिलाफ उस की बेटी वहीदा से लव मैरिज कर ली थी. मंजू की शिकायत पर उसी दिन डबुआ थाने में भादंवि की धारा 346 के तहत मुकदमा दर्ज कर संजय की तलाश शुरू कर दी. संजय 16 अगस्त, 2018 से गायब था. उसे गायब हुए 3 दिन गुजर चुके थे. पुलिस ने संजय के सभी दोस्तों से पूछताछ की लेकिन उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.

थानाप्रभारी ने यह सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी. तब अपर पुलिस उपायुक्त (एनआईटी) निकिता अग्रवाल ने इस हत्याकांड के रहस्य से परदा उठाने के लिए एक टीम का गठन किया, जिस में एसआई ब्रह्मप्रकाश, ओमप्रकाश, एएसआई कप्तान सिंह, हैडकांस्टेबल ईश्वर सिंह, कांस्टेबल संदीप, रविंद्र, अनिल कुमार, बिजेंद्र, संजय आदि शामिल थे. इस टीम का नेतृत्व पुलिस इंसपेक्टर नवीन पाराशर कर रहे थे. उन्होंने मृतक संजय की मां मंजू तथा परिवारजनों से घटनाक्रम के बारे में पूछताछ की, तब उन्हें पता चला कि संजय ने अपने पड़ोस में रहने वाली दूसरे समुदाय की वहीदा से उस के परिजनों की मरजी के खिलाफ घर से भाग कर शादी कर ली थी.

इसी वजह से लड़की के भाई और अब्बा उस की जान के दुश्मन बने हुए थे. पुलिस आयुक्त अमिताभ ढिल्लो ने क्राइम ब्रांच (डीएलएफ) को भी थाना पुलिस के साथ जांच में लगा दिया. 3 टुकड़ों में मिली (Murder Story) लाश   मुकदमा दर्ज होने के तीसरे दिन 21 अगस्त को पता चला कि किसी युवक की लाश सैनिक कालोनी से थोड़ी दूर झाडि़यों में पड़ी है. यह जानकारी मिलने पर पुलिस टीम सैनिक कालोनी के पास उस जगह पर पहुंची, जहां लाश पड़ी होने की सूचना मिली थी. पुलिस को वहां एक युवक की सड़ीगली लाश मिली. लाश काफी विकृत अवस्था में थी. वह 3 टुकड़ों में थी.

लाश देख कर लग रहा था कि उस की हत्या कई दिन पहले हुई होगी. इस सड़ीगली लाश की शिनाख्त मंजू ने अपने गुमशुदा बेटे संजय के रूप में की. पुलिस ने जरूरी काररवाई कर लाश पोस्टमार्टम के लिए रोहतक पीजीआई भेज दी और एफआईआर में आईपीसी की धारा 302 जोड़ दी गई. लाश बरामद होने के बाद पुलिस ने आरोपी फजरुद्दीन और उस के बेटे की तलाश शुरू कर दी. उसी दिन पुलिस को सलीम के बारे में एक गुप्त सूचना मिली, जिस के आधार पर पुलिस ने सलीम को गिरफ्तार कर लिया. उसे उसी दिन कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया गया.

सलीम से की गई पूछताछ के बाद पुलिस ने अगले दिन उस के पिता फजरुद्दीन उर्फ फजरू तथा सुमित उर्फ सोनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया. सभी आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने संजय की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. संजय की हत्या के पीछे की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली.  मंजू अपने 2 बेटों संजय और अजय के साथ फरीदाबाद की नेहरू कालोनी में किराए के मकान में रहती थी. उस के पति रूप सिंह की कई साल पहले मौत हो चुकी थी. उस के पड़ोस में फजरुद्दीन अपने परिवार के साथ रहता था. दोनों परिवार अलगअलग समुदाय के थे लेकिन उन के बीच काफी अपनापन था. त्यौहारों के मौकों पर वे एकदूसरे की खुशी में जरूर शरीर होते थे.

पारिवारिक संबंध होने की वजह से दोनों ही परिवारों का एकदूसरे के यहां खूब आनाजाना था. फजरू की बेटी वहीदा बला की हसीन होने के साथसाथ बालिग हो चुकी थी. उधर मंजू का बेटा संजय भी 23 साल का हो चुका था. दोनों ही एकदूसरे को जीजान से प्यार करने लगे थे. दोनों का प्यार गुपचुप तरीके से काफी दिनों से चल रहा था. फजरुद्दीन और उस की बेगम मदीना को बेटी के प्रेम प्रसंग की जानकारी नहीं थी. वे समझते थे कि दोनों बच्चे यूं ही आपस में कभीकभार मिलने पर हंसीठिठोली कर लेते हैं. उन्होंने कभी भी इन संबंधों के बारे में ध्यान नहीं दिया था.

गहराता गया प्यार सब कुछ ठीक ही चल रहा था. इधर वहीदा और संजय का प्यार और गहराता जा रहा था. उन्होंने आपस में शादी करने का फैसला कर लिया था लेकिन उन की शादी के बीच धर्म और समाज की अदृश्य दीवार सामने आ रही थी, जिसे किसी भी हालत में गिराना असंभव ही नहीं बल्कि एकदम से नामुमकिन था. इसलिए संजय का वहीदा ने आपस में सोचविचार कर अपने घरों से भाग कर कहीं बाहर   शादी करने की योजना तैयार कर ली. फिर योजना के अनुसार, वे पहली सितंबर, 2017 को किसी काम के बहाने अपनेअपने घरों से बाहर निकले. कालोनी से काफी दूर जा कर वहीदा संजय से लिपटते हुए बोली, ‘‘संजय, मुझे अपने साथ एक ऐसी दुनिया में ले चलो जहां हमारे प्यार के बीच कोई दीवार न बन सके.’’

संजय ने उसे विश्वास दिलाते हुए कहा, ‘‘वहीदा, तुम चिंता मत करो. अब दुनिया की कोई ताकत हमें जुदा नहीं कर सकती.’’

वहीदा को अपने प्यार पर खुद से बढ़ कर भरोसा था, इसलिए उस ने खुद को अपने प्रेमी संजय के भरोसे छोड़ दिया. संजय उसे ले कर राजस्थान स्थित अपने पैतृक गांव पहुंचा. वहां कुछ दिन रुकने के बाद उस ने वहीदा से कोर्टमैरिज कर ली. शादी के अगले दिन वहीदा घर की अन्य औरतों के परिधान के अनुसार अपनी गोरी कलाई में चूड़ा, मांग में सिंदूर, हाथ में मेहंदी लगा कर संजय के सामने पहुंची तो इस रूप में देख कर उस की आंखें फटी की फटी रह गईं. वह दुलहन के शृंगार में और भी ज्यादा खूबसूरत दिख रही थी. संजय वहीदा को अपनी पत्नी बना कर अपने आप को दुनिया का सब से भाग्यशाली समझने लगा. दोनों वहीं रहने लगे. चूंकि उस ने घर से भाग कर शादी की थी, इसलिए घर से कम ही निकलती थी.

संजय पर हुआ शक उस का डर बेवजह नहीं था. उधर वहीदा के घर नहीं लौटने पर मदीना और उस के शौहर फजरुद्दीन को जैसे सांप सूंघ गया. उन्हें यह भी पता लग गया कि संजय भी घर से गायब है. अब उन के लिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि जरूर संजय की वहीदा को भगा कर ले गया होगा. किसी तरह उन लोगों ने संजय के राजस्थान स्थित पैतृक गांव की भी जानकारी हासिल कर ली. फिर फजरू ने अपने जानकार लोगों को राजस्थान भेजा लेकिन काफी कोशिश के बाद भी वे वहीदा का पता नहीं लगा सके. आखिर निराश हो कर वे घर लौट आए. वहीदा अपनी अम्मी मदीना को बहुत प्यार करती थी. कुछ महीने गुजरने के बाद वहीदा को जब अम्मी की याद आई तो उस ने अम्मी के फोन पर संपर्क कर बताया कि वह इस संजय के साथ है और यहां बेहद खुश है. इसलिए वह उस की जरा भी चिंता न करें.

मंजू को भी बेटे ने फोन कर पूरी घटना के बारे में जानकारी दे दी थी. मंजू वहीदा को बहू के रूप में स्वीकार कर लिया था. जब संजय ने बताया कि करवाचौथ पर उस ने उस के लिए व्रत रखा और चांद निकलने पर पानी का घूंट हलक के नीचे उतारा तो बेटे के प्रति बहू के मन में प्रेम देख कर मंजू की खुशी के मारे आंखें भर आईं. उस ने फोन पर वहीदा से काफी देर तक बातें कीं और उसे सदा सुहागिन रहने का आशीर्वाद दिया. इस के बाद मंजू की अपने बेटेबहू से अकसर बातचीत होती रहती थी. संजय इसलाम धर्म स्वीकारने को था तैयार कुछ दिनों के बाद वहीदा के पांव भारी हो गए तो संजय के लिए उस की देखभाल करना कठिन हो गया. एक दिन वह वहीदा को ले कर फरीदाबाद लौट गया ताकि घर पर मां उस की ठीक से देखभाल करती रहे.

संजय और वहीदा के घर में आने की बात सुन कर वहीदा के अम्मीअब्बू संजय के घर आ कर अपनी बेटी और संजय से मिले. संजय उन का अपराधी था, इसलिए वह उन की हर शर्त माने के लिए तत्पर था. फजरू और उस की बेगम मदीना ने आपस में बातें करने के बाद संजय से कहा कि अगर उसे वहीदा के संग जीवन गुजारना है तो वह इसलाम धर्म अपना ले. संजय के ऊपर वहीदा की मोहब्बत का नशा इस कदर चढ़ा था कि वह उस के लिए धर्म परिवर्तन के लिए तैयार हो गया. लेकिन इस में पेंच तक फंस गया जब संजय के मामा और चाचा ने इस का जम कर विरोध किया. उन के विरोध के कारण संजय का धर्म परिवर्तन नहीं हो सका. इसी घटनाक्रम के बीच मदीना ने जबरन वहीदा का गर्भपात करवा दिया. इन बातों से दुखी और परेशान हो कर संजय का परिवार दूसरी जगह शिफ्ट हो गया.

दूसरी जगह जाने के बाद भी दोनों परिवारों के बीच उपजा तनाव कम नहीं हुआ. कुछ दिनों के बाद वहीदा को फिर गर्भ ठहर गया. इस का पता चलते ही फजरू ने वहीदा और संजय को अलग होने का फैसला सुना दिया. संजय की हत्या होने से 2 महीने पहले एक दिन फजरू और उस के दोनों बेटे संजय और वहीदा को ले कर उन के बीच तलाक कराने कोर्ट गए लेकिन संजय ने वहीदा को तलाक देने से इनकार कर दिया. अलबत्ता अपने अम्मीअब्बा के द्वारा संजय की हत्या कर दिए जाने की धमकी से डर कर वहीदा संजय के घर से अपने घर लौट गई. वहीदा के चले जाने के बाद संजय की दुनिया एकदम वीरान हो गई. बुरी तरह हताश और निराश हो कर संजय फरीदाबाद को छोड़ कर राजस्थान चला गया, जबकि उस की मां, भाई और बहन ने नेहरू कालोनी में रहना जारी रखा.

15 अगस्त, 2018 को वहीदा के भाई सलीम ने राजस्थान में रह रहे संजय को फोन कर के बताया कि मामला अब शांत हो गया है, इसलिए बात को खत्म करने के लिए फरीदाबाद लौट आओ. आखिर साजिश में फंस गया संजय अगले दिन संजय यह सोच कर फरीदाबाद आ गया कि जल्दी से यह मामला निपट जाए तो वहीदा और वह दोनों शांति के साथ अपना जीवन गुजार सकेंगे. उसे क्या मालूम था कि सलीम और उस का बाप उस की हत्या के लिए उसे मामला खत्म करने का सुनहरा ख्वाब दिखा रहे थे. संजय उन की चाल में बुरी तरह फंस गया. उसी दिन सलीम संजय को अपनी मोटरसाइकिल पर बिठा कर शराब पार्टी में शामिल होने की बात कह कर अपने साथ ले गया. सलीम संजय को 3 नंबर पहाड़ी की सुनसान जगह पर ले गया, जहां पर उस का पिता फजरू, दोस्त सुमित और मोहम्मद अली उन के आने का इंतजार कर रहे थे.

सुमित उर्फ सोनी और मोहम्मद अली सलीम के दोस्त थे. चारों ने पहले तो मीठीमीठी बातों में फंसा कर उसे इतनी अधिक शराब पिला दी कि वह अपनी सुधबुध खो बैठा. इस के बाद सभी ने संजय की इतनी पिटाई की कि वह अधमरा हो गया. पिटतेपिटते संजय जब बेहोश हो गया तो सलीम ने चाकू से गोद कर उसे मौत (Murder Story) के घाट उतार दिया. झाडि़यों में डाल दिए. फिर सभी वहां से फरार हो गए.

पुलिस ने सलीम, फजरुद्दीन उर्फ फजरू और सुमित उर्फ सोनी से पूछताछ करने के बाद उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. इस के 2 दिन बाद ही पुलिस ने चौथे आरोपी मोहम्मद अली को भी गिरफ्तार कर उस से पूछताछ की. उस ने भी अपना अपराध कबूल कर लिया. पुलिस ने उसे भी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया. कथा लिखने तक चारों आरोपी जेल में बंद थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, कथा में वहीदा परिवर्तित नाम है. Family Murder

Romantic Story In Hindi: सजा – क्या सुमित के साथ अंकिता ने खत्म किया अपना रिश्ता

Romantic Story In Hindi: वेटर को कौफी लाने का और्डर देने के बाद सुमित ने अंकिता से अचानक पूछा, ‘‘मेरे साथ 3-4 दिन के लिए मनाली घूमने चलोगी?’’ ‘‘तुम पहले कभी मनाली गए हो?’’

‘‘नहीं.’’ ‘‘तो उस खूबसूरत जगह पहली बार अपनी पत्नी के साथ जाना.’’

‘‘तब तो तुम ही मेरी पत्नी बनने को राजी हो जाओ, क्योंकि मैं वहां तुम्हारे साथ ही जाना चाहता हूं.’’ ‘‘यार, एकदम से जज्बाती हो कर शादी करने का फैसला किसी को नहीं करना चाहिए.’’

सुमित उस का हाथ पकड़ कर उत्साहित लहजे में बोला, ‘‘देखो, तुम्हारा साथ मुझे इतनी खुशी देता है कि वक्त के गुजरने का पता ही नहीं चलता. यह गारंटी मेरी रही कि हम शादी कर के बहुत खुश रहेेंगे.’’ उस के उत्साह से प्रभावित हुए बिना अंकिता संजीदा लहजे में बोली, ‘‘शादी के लिए ‘हां’ या ‘न’ करने से पहले मैं तुम्हें आज अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में कुछ बातें बताना चाहती हूं, सुमित.’’

सुमित आत्मविश्वास से भरी आवाज में बोला, ‘‘तुम जो बताओगी, उस से मेरे फैसले पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है.’’ ‘‘फिर भी तुम मेरी बात सुनो. जब मैं 15 साल की थी, तब मेरे मम्मीपापा के बीच तलाक हो गया था. दोनों के स्वभाव में जमीनआसमान का अंतर होने के कारण उन के बीच रातदिन झगड़े होते थे.

‘‘तलाक के 2 साल बाद पापा ने दूसरी शादी कर ली. ढेर सारी दौलत कमाने की इच्छुक मेरी मां ने अपना ब्यूटी पार्लर खोल लिया. आज वे इतनी अमीर हो गई हैं कि समाज की परवा किए बिना हर 2-3 साल बाद अपना प्रेमी बदल लेती हैं. हमारे जानकार लोग उन दोनों को इज्जत की नजरों से नहीं देखते हैं.’’ अंकिता उस की प्रतिक्रिया जानने के लिए रुकी हुई है, यह देख कर सुमित ने गंभीर लहजे में जवाब दिया, ‘‘मैं मानता हूं कि हर इंसान को अपने हिसाब से अपनी जिंदगी के फैसले करने का अधिकार होना ही चाहिए. तलाक लेने के बजाय रातदिन लड़ कर अपनीअपनी जिंदगी बरबाद करने का भी तो उन दोनों के लिए कोई औचित्य नहीं था. खुश रहने के लिए उन्होंने जो रास्ता चुना, वह सब को स्वीकार करना चाहिए.’’

‘‘क्या तुम सचमुच ऐसी सोच रखते हो या मुझे खुश करने के लिए ऐसा बोल रहे हो?’’ ‘‘झूठ बोलना मेरी आदत नहीं है, अंकिता.’’

‘‘गुड, तो फिर शादी की बात आगे बढ़ाते हुए कौफी पीने के बाद मैं तुम्हें अपनी मम्मी से मिलाने ले चलती हूं.’’ ‘‘मैं उन्हें इंटरव्यू देने के लिए बिलकुल तैयार हूं,’’ सुमित बोला तो उस की आंखों में उभरे प्रसन्नता के भाव पढ़ कर अंकिता खुद को मुसकराने से नहीं रोक पाई.

आधे घंटे बाद अंकिता सुमित को ले कर अपनी मां सीमा के ब्यूटी पार्लर में पहुंच गई.

आकर्षक व्यक्तित्व वाली सीमा सुमित से गले लग कर मिली और पूछा, ‘‘क्या तुम इस बात से हैरान नजर आ रहे हो कि हम मांबेटी की शक्लें आपस में बहुत मिलती हैं?’’ ‘‘आप ने मेरी हैरानी का बिलकुल ठीक कारण ढूंढ़ा है,’’ सुमित ने मुसकराते हुए जवाब दिया.

‘‘हम दोनों की अक्ल भी एक ही ढंग से काम करती है.’’ ‘‘वह कैसे?’’

‘‘हम दोनों ही ‘जीओ और जीने दो’ के सिद्धांत में विश्वास रखती हैं. उन लोगों से संबंध रखना हमें बिलकुल पसंद नहीं जो हमारी जिंदगी में टैंशन पैदा करने की फिराक में रहते हों.’’ ‘‘मम्मी, अब सुमित से भी इस के बारे में कुछ पूछ लो, क्योंकि यह मुझ से शादी करना चाहता है,’’ अंकिता ने अपनी बातूनी मां को टोकना उचित समझा था.

‘‘रियली, दिस इज गुड न्यूज,’’ सीमा ने एक बार फिर सुमित को गले से लगा कर खुश रहने का आशीर्वाद दिया और फिर अपनी बेटी से पूछा, ‘‘क्या तुम ने सुमित को अपने पापा से मिलवाया है?’’ ‘‘अभी नहीं.’’

सीमा मुड़ कर फौरन सुमित को समझाने लगी, ‘‘जब तुम इस के पापा से मिलो, तो उन के बेढंगे सवालों का बुरा मत मानना. उन्हें करीबी लोगों की जिंदगी में अनावश्यक हस्तक्षेप करने की गंदी आदत है, क्योंकि वे समझते हैं कि उन से ज्यादा समझदार कोई और हो ही नहीं सकता.’’ ‘‘मौम, सुमित यहां आप की शिकायतें सुनने नहीं आया है. आप उस के बारे में कोई सवाल क्यों नहीं पूछ रही हैं?’’ अंकिता ने एक बार फिर अपनी मां को विषय परिवर्तन करने की सलाह दी.

‘‘ओकेओके माई डियर सुमित, मुझे तो तुम से एक ही सवाल पूछना है. क्या तुम अंकिता के लिए अच्छे और विश्वसनीय जीवनसाथी साबित होंगे?’’ ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि शादी के बाद हम बहुत खुश रहेंगे,’’ सुमित ने बेझिझक जवाब दिया.

‘‘मैं नहीं चाहती कि अंकिता मेरी तरह जीवनसाथी का चुनाव करने में गलती करे. मेरी सलाह तो यही है कि तुम दोनों शादी करने का फैसला जल्दबाजी में मत करना. एकदूसरे को अच्छी तरह से समझने के बाद अगर तुम दोनों शादी करने का फैसला करते हो, तो सुखी विवाहित जीवन के लिए मेरा आशीर्वाद तुम दोनों को जरूर मिलेगा.’’

‘‘थैंक यू, आंटी. मैं तो बस, अंकिता की ‘हां’ का इंतजार कर रहा हूं.’’ ‘‘गुड, प्लीज डोंट माइंड, पर इस वक्त मैं जरा जल्दी में हूं. मैं ने एक खास क्लाइंट को उस का ब्राइडल मेकअप करने के लिए अपौइंटमैंट दे रखा है. तुम दोनों से फुरसत से मिलने का कार्यक्रम मैं जल्दी बनाती हूं,’’ सीमा ने बारीबारी दोनों को प्यार से गले लगाया और फिर तेज चाल से चलती हुई पार्लर के अंदरूनी हिस्से में चली गई.

बाहर आ कर सुमित सीमा से हुई मुलाकात के बारे में चर्चा करना चाहता था, पर अंकिता ने उसे रोकते हुए कहा, ‘‘मैं लगे हाथ अपने पापा को भी तुम्हारे बारे में बताने जा रही हूं. मेरे फोन का स्पीकर औन है. हमारे बीच कैसे संबंध हैं, यह समझने के लिए तुम हमारी बातें ध्यान से सुनो, प्लीज.’’ अंकिता ने अपने पापा को सुमित का परिचय देने के बाद जब उस के साथ शादी करने की इच्छा के बारे में बताया, तो उन्होंने गंभीर लहजे में कहा, ‘‘तुम सुमित को कल शाम घर ले आओ.’’

‘‘जरा सोचसमझ कर हमें घर आने का न्योता दो, पापा. आप मेरी जिंदगी में दिलचस्पी ले रहे हैं, यह देख कर आप की दूसरी वाइफ नाराज तो नहीं होंगी न?’’ अंकिता के व्यंग्य से तिलमिलाए उस के पापा ने भी तीखे लहजे में कहा, ‘‘तुम बिलकुल अपनी मां जैसी बददिमाग हो गई हो और उसी के जैसे वाहियात लहजे में बातें भी करती हो. पिता होने के नाते मैं तुम से दूर नहीं हो सकता, वरना तुम्हारा बात करने का ढंग मुझे बिलकुल पसंद नहीं है.’’

‘‘आप दूर जाने की बात मत करिए, क्योंकि आप की सैकंड वाइफ ने आप को मुझ से पहले ही बहुत दूर कर दिया है.’’ ‘‘देखो, यह चेतावनी मैं तुम्हें अभी दे रहा हूं कि कल शाम तुम उस के साथ तमीज से पेश…’’

‘‘मैं कल आप के घर नहीं आ रही हूं. सुमित को किसी और दिन आप के औफिस ले आऊंगी.’’ ‘‘तुम बहुत ज्यादा जिद्दी और बददिमाग होती जा रही हो.’’

‘‘थैंक यू एेंड बाय पापा,’’ चिढ़े अंदाज में ऐसा कह कर अंकिता ने फोन काट दिया था.

अपने मूड को ठीक करने के लिए अंकिता ने पहले कुछ गहरी सांसें लीं और फिर सुमित से पूछा, ‘‘अब बताओ कि तुम्हें मेरे मातापिता कैसे लगे? क्या राय बनाई है तुम ने उन दोनों के बारे में?’’ ‘‘अंकिता, मुझे उन दोनों के बारे में कोई भी राय बनाने की जरूरत महसूस नहीं हो रही है. तुम्हें उन से जुड़ कर रहना ही है और मैं उन के साथ हमेशा इज्जत से पेश आता रहूंगा,’’ सुमित ने उसे अपनी राय बता दी.

उस का जवाब सुन अंकिता खुश हो कर बोली, ‘‘तुम तो शायद दुनिया के सब से ज्यादा समझदार इंसान निकलोगे. मुझे विश्वास होने लगा है कि हम शादी कर के खुश रह सकेंगे, पर…’’ ‘‘पर क्या?’’

‘‘पर फिर भी मैं चाहूंगी कि तुम अपना फाइनल जवाब मुझे कल दो.’’ ‘‘ओके, कल कब और कहां मिलोगी?’’

‘‘करने को बहुत सी बातें होंगी, इसलिए नेहरू पार्क में मिलते हैं.’’ ‘‘ओके.’’

अगले दिन रविवार को दोनों नेहरू पार्क में मिले. सुमित की आंखों में तनाव के भाव पढ़ कर अंकिता ने मजाकिया लहजे में कहा, ‘‘यार, इतनी ज्यादा टैंशन लेने की जरूरत नहीं है. तुम मुझ से शादी नहीं कर सकते हो, अपना यह फैसला बताने से तुम घबराओ मत.’’ उस के मजाक को नजरअंदाज करते हुए सुमित गंभीर लहजे में बोला, ‘‘कल रात को किसी लड़की ने मुझे फोन कर राजीव के बारे में बताया है.’’

‘‘यह तो उस ने अच्छा काम किया, नहीं तो आज मैं खुद ही तुम्हें उस के बारे में बताने वाली थी,’’ अंकिता ने बिना विचलित हुए जवाब दिया. ‘‘क्या तुम उस के बहुत ज्यादा करीब थी?’’

‘‘हां.’’ ‘‘तुम दोनों एकदूसरे से दूर क्यों हो गए?’’

‘‘उस का दिल मुझ से भर गया… उस के जीवन में दूसरी लड़की आ गई थी.’’ ‘‘क्या तुम उस के साथ शिमला घूमने गई थी?’’

‘‘हां.’’ ‘‘क्या तुम वहां उस के साथ एक ही कमरे में रुकी थी?’’

उस की आंखों में देखते हुए अंकिता ने दृढ़ लहजे में जवाब दिया, ‘‘रुके तो हम अलगअलग कमरों में थे, पर मैं ने 2 रातें उस के कमरे में ही गुजारी थीं.’’ उस का जवाब सुन कर सुमित को एकदम झटका लगा. अपने आंतरिक तनाव से परेशान हो वह दोनों हाथों से अपनी कनपटियां मसलने लगा.

‘‘मैं तुम से इस वक्त झूठ नहीं बोलूंगी सुमित, क्योंकि तुम से… अपने भावी जीवनसाथी से अपने अतीत को छिपा कर रखना बहुत गलत होगा.’’ ‘‘मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि मैं क्या कहूं. मैं तुम्हें बहुत चाहता हूं. तुम से शादी करना चाहता हूं, पर…पर…’’

‘‘मैं अच्छी तरह से समझ सकती हूं कि तुम्हारे मन में इस वक्त क्या चल रहा है, सुमित. अच्छा यही रहेगा कि इस मामले में तुम पहले मेरी बात ध्यान से सुनो. मैं खुद नहीं चाहती हूं कि तुम जल्दबाजी में मुझ से शादी करने का फैसला करो.’’ बहुत दुखी और परेशान नजर आ रहे सुमित ने अपना सारा ध्यान अंकिता पर केंद्रित कर दिया.

अंकिता ने उस की आंखों में देखते हुए गंभीर लहजे में बोलना शुरू किया, ‘‘राजीव मुझ से बहुत प्रेम करने का दम भरता था और मैं उस के ऊपर आंख मूंद कर विश्वास करती थी. इसीलिए जब उस ने जोर डाला तो मैं न उस के साथ शिमला जाने से इनकार कर सकी और न ही कमरे में रात गुजारने से. ‘‘मैं ने फैसला कर रखा है कि उस धोखेबाज इंसान को न पहचान पाने की अपनी गलती के लिए घुटघुट कर जीने की सजा खुद को बिलकुल नहीं दूंगी. अब तुम ही बताओ कि मुझे क्या करना चाहिए?

‘‘क्या मैं आजीवन अपराधबोध का शिकार बन कर जीऊं? तुम्हारे प्रेम का जवाब प्रेम से न दूं? तुम से शादी हो जाए, तो हमेशा डरतीकांपती रहूं कि कहीं से राजीव और मेरे अतीत के नजदीकी रिश्तों के बारे में तुम्हें पता न लग जाए? ‘‘मैं चाहती हूं कि तुम भावुक हो कर शादी के लिए ‘हां’ मत कहो. तुम्हें राजीव के बारे में पता है… मेरे मातापिता के तलाक, उन की जीवनशैली और उन के मेरे तनाव भरे रिश्तों की जानकारी अब तुम्हें है.

इन सब बातों को जान कर तुम्हारे मन में मेरी इज्जत कम हो गई हो या मेरी छवि बिगड़ गई हो, तो मेरे साथ सात फेरे लेने का फैसला बदल दो.’’ अंकिता की सारी बातें सुन कर सुमित जब खामोश बैठा रहा, तो अंकिता उठ कर खड़ी हो गई और बुझे स्वर में बोली, ‘‘तुम अपना फाइनल फैसला मुझे बाद में फोन कर के बता देना. अभी मैं चलती हूं.’’

पार्क के गेट की तरफ बढ़ रही अंकिता को जब सुमित ने पीछे से आवाज दे कर नहीं रोका, तो उस के तनमन में अजीब सी उदासी और मायूसी भरती चली गई थी. आंखों से बह रही अविरल अश्रुधारा को रोकने की नाकामयाब कोशिश करते हुए जब वह आटोरिकशा में बैठने जा रही थी, तभी सुमित ने पीछे से आ कर उस का हाथ पकड़ लिया. उस की फूली सांसें बता रही थीं कि वह दौड़ते हुए वहां

पहुंचा था. ‘‘तुम्हें मैं इतनी आसानी से जिंदगी से दूर नहीं होने दूंगा, मैडम,’’ सुमित ने उस का हाथ थाम कर भावुक लहजे में अपने दिल की बात कही.

‘‘मेरे अतीत के कारण तुम हमारी शादी होने के बाद दुखी रहो, यह मेरे लिए असहनीय बात होगी. सुमित, अच्छा यही रहेगा कि हम दोस्त…’’ उस के मुंह पर हाथ रख कर सुमित ने उसे आगे बोलने से रोका और कहा, ‘‘जब तुम चलतेचलते मेरी नजरों से ओझल हो गई, तो मेरा मन एकाएक गहरी उदासी से भर गया था…वह मेरे लिए एक महत्त्वपूर्ण फैसला करने की घड़ी थी…और मैं ने फैसला कर लिया है.

‘‘मेरा फैसला है कि मुझे अपनी बाकी की जिंदगी तुम्हारे ही साथ गुजारनी है.’’ ‘‘सुमित, भावुक हो कर जल्दबाजी में…’’

उस के कहे पर ध्यान दिए बिना बहुत खुश नजर आ रहा सुमित बोले जा रहा था, ‘‘मेरा यह अहम फैसला दिल से आया है, स्वीटहार्ट. अतीत में किसी और के साथ बने सैक्स संबंध को हमारे आज के प्यार से ज्यादा महत्त्व देने की मूढ़ता मैं नहीं दिखाऊंगा. विल यू मैरी मी?’’ ‘‘पर…’’

‘‘अब ज्यादा भाव मत खाओ और फटाफट ‘हां’ कर दो, माई लव,’’ सुमित ने अपनी बांहें फैला दीं. ‘‘हां, माई लव,’’ खुशी से कांप रही आवाज में अपनी रजामंदी प्रकट करने के बाद अंकिता सुमित की बांहों के मजबूत घेरे में कैद हो गई. Romantic Story In Hindi

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