Serial Story- लौटते हुए: भाग 1

राइटर- अंजुला श्रीवास्तव

रेल पूरी रफ्तार से दौड़ रही थी, सबकुछ पीछे छोड़ते हुए, तेज बहुत तेज. अचानक ही उस की स्पीड धीरेधीरे कम होने लगी. कोई छोटा सा स्टेशन था. रेल वहीं रुक गई. भीड़ का एक रेला सा मेरे डब्बे में चढ़ आया. मु झे हंसी आने को हुई यह सोच कर कि इन यात्रियों का बस चले तो शायद एकदूसरे के सिर पर पैर रख कर भी चढ़ जाएं.

अचानक एक चेहरे को देख कर मैं चौंकी. वह अरुण था. वह भी दूसरे यात्रियों के साथ ऊपर चढ़ आया था. उसे देखते ही दिसंबर की कड़कड़ाती ठंड में भी मुझे पसीना आ गया. शायद उस ने मुझे अभी नहीं देखा था, यह सोच कर मैं ने राहत की सांस ली ही थी कि अचानक वह पलटा. डब्बे में सरसरी दृष्टि फिराते हुए जैसे ही उस की नजर मुझ पर पड़ी, वह चौंक कर बोला, ‘‘रेखा, तुम?’’

मैं अपनेआप को संयत करने की कोशिश करने लगी. इस तरह कभी अरुण से मिलना होगा, इस की तो मैं ने कल्पना भी नहीं की थी. मुझे लगने लगा, दुनिया बहुत छोटी है जहां बिछड़े हुए साथी कहीं न कहीं आपस में मिल ही जाते हैं.

अरुण भी खुद को संभालने की कोशिश कर रहा था. बोला, ‘‘सौरी, मैं ने आप को देखा नहीं था, वरना मैं इस डब्बे में न चढ़ता. खैर, अगला स्टेशन आने पर मैं डब्बा बदल लूंगा.’’

उस के मुंह से अपने लिए ‘आप’ सुनते ही मु झे एक धक्का सा लगा. मैं सोचने लगी, ‘घटनाएं आदमी को कितना बदल देती हैं. समय की धारा में संबंध, रिश्तेनाते, यहां तक कि संबोधन भी बदल जाते हैं. कल तक मैं अरुण के लिए ‘तुम’ थी और आज?’ मेरे मुंह से एक सर्द आह निकलतेनिकलते  रह गई.

‘‘यह रेल मेरी बपौती नहीं है,’’ मैं ने स्वर को यथासंभव सहज बनाते हुए कहा. लेकिन अपने हावभाव को छिपाने में मैं असमर्थ रही.

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अरुण के साथ ही डब्बे में 2-4 बदमाश टाइप के लड़के भी चढ़ आए थे. पहले उन की तरफ मेरा ध्यान नहीं गया था. अरुण को देखते ही मैं अपने होश खो बैठी थी. लाल कमीज पहने एक युवक मु झ से सट कर बैठ गया. अरुण ने भी उसे देखा था, लेकिन उस ने फौरन ही मेरी तरफ से मुंह फेर लिया था. शायद उसे उस युवक का मेरे साथ इस तरह सट कर बैठना बरदाश्त नहीं हुआ था.

लेकिन मैं चाहती थी कि अरुण मेरी तरफ देखे. उस ने अखबार के पीछे अपना चेहरा छिपा लिया था. लेकिन मैं जानती थी कि वह अखबार नहीं पढ़ रहा होगा, चोर नजरों से मुझे ही देख रहा होगा. 2 साल अरुण के साथ रही हूं, सबकुछ भूल कर, सिर्फ उसी की बन कर. शायद अरुण अपनी आदत भूल चुका हो, मुझे किसी और के साथ बात करते देखते ही उसे गुस्सा आ जाता था. जिद्दी बच्चे जैसा ही तो व्यवहार रहा है उस का. जो आदत उस की 26 साल में बनी थी वह 2 साल म%8

Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: बबीता जी से ‘जेठालाल’ हो गए थे नाराज! पढ़ें खबर

छोटे पर्दे का मशहूर कॉमेडी सीरियल ‘तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा’ (Tarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) दर्शकों के बीच काफी मशहूर है. इस शो में जेठालाल और बबीता जी की जोड़ी को दर्शक खूब पसंद करते हैं.

दरअसल जेठालाल और बबीता जी के प्यार भरी नोंक-झोंक फैंस का दिल जीत लेती है. लेकिन आज आपको बताते हैं, दोनों के रियल लाइफ से जुड़े दिलचस्प किस्से, जिसे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे. खबरों के अनुसार, एक फोटो की वजह से जेठालाल ने बबीता जी से बात करनी छोड़ दी थी.

 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेट पर जेठालाल यानी दिलीप जोशी के कुछ दोस्त उनसे मिलने आए थे. वे मुनमुन दत्ता के भी फैन थे. और वो लोग उनके साथ फोटो क्लिक करवाना चाहते थे.  दिलीप जोशी उनके साथ एक्ट्रेस के पास पहुंचे, लेकिन मुनमुन दत्ता ने  खराब मूड का हवाला देकर फोटो नहीं खिंचवाई.

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खबर ये भी आ रही थी कि दिलीप जोशी को मुनमुन दत्ता की ये बात बुरी लग गई. और दोनों के बीच बातचीत बंद हो गई थी. हालांकि ये बात कुछ साल पहले की है. बताया जा रहा है कि अब उनके बीच सबकुछ सही है. शो में जेठालाल और बबीता जी की मस्‍ती फैंस को बेहद पसंद आती है.

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बता दें कि मुनमुन दत्ता और दिलीप जोशी शो ‘हम सब बाराती’ में साथ नजर आए थे. इसके बाद दोनों ‘तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा’ में साथ दिखाई दे रहे हैं. शो में उन्हें खूब पसन्द किया जाता है. शो में जेठालाल और बबीता जी की फ्लर्टिंग दर्शकों को खूब भाता है.

Amrita Rao ने शेयर की बेटे की पहली तस्वीर, क्यूटनेस ने जीता फैंस का दिल

बॉलीवुड एक्ट्रेस अमृता राव  नवंबर 2020 में एक बेटे को जन्म दिया था. और यह खुशखबरी उन्होंने सोशल मीडिया पर फैंस के साथ शेयर की थी. फैंस को उनके बेटे की तस्वीर देखने का बेसब्री से इंतजार था.

तो अब ये इंतजार खत्म हुआ. क्योंकि अमृता राव के पति आरजे अनमोल ने बेटे वीर के जन्म के  4 महीने बाद पहली तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है. जी हां, अमृता राव और आरजे अनमोल के बेटे की पहली तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. फैंस इस तस्वीर को खूब पसंद कर रहे हैं.

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आरजे अनमोल ने बेटे की पहली तस्वीर ट्विटर अकाउंट पर शेयर की है. अमृता के बेटे की ये पहली फोटो फैन्स को बहुत पसंद आ रही है.

तो वहीं अमृता ने भी इस फोटो को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है. फोटो को शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा है कि, hello world, meet our son #veer, अपना आशीर्वाद दे.

 

रिपोर्ट्स के अनुसार एक्ट्रेस ने अपने बेटे के बारे में बात की थी और बताया था कि कैसे बेबी होने के बाद जिंदगी बदल जाती है और कितनी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं. अमृता राव ने ये भी कहा कि मैं हर रोज बेटे वीर को देखती हूं और सोचती हूं कि क्या यह सच में है?  बेबी, आपको सबसे पहली चीज टाइम मैनेजमेंट और अनुशासन सिखाता है. मदरहुड, कई सारे इमोशन्स से भरा होता है.

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वर्कफ्रंट की बात करे तो अमृता राव ने बॉलीवुड की कई हिट फिल्मों में काम किया है, लेकिन फिल्म विवाह से वह काफी मशहूर हुईं.  फैंस को फिल्म में अमृता का पूनम वाला किरदार काफी पंसद आया था. अमृता राव ने साल 2016 में आरजे अनमोल से शादी की थी. दोनों ने शादी से पहले 7 साल तक एक-दूसरे को डेट किया था.

Crime Story- रसूखदारों की घिनौनी कहानी: भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

रामबिहारी का घर में एक स्पैशल रूम था. इस रूम में उस ने 5 सीसीटीवी कैमरे लगवा रखे थे. घर के बाहर भी कैमरा लगा था. कमरे में लैपटाप, डीवीआर व हार्ड डिस्क भी थी. आनेजाने वालों की हर तसवीर कैद होती थी. हनक बनाए रखने के लिए उस ने कार खरीद ली थी और लाइसैंसी पिस्टल भी ले ली थी. रामबिहारी अवैध कमाई के लिए अपने घर पर जुआ की फड़ भी चलाता था. उस के घर पर छोटामोटा नहीं, लाखों का जुआ होता था. खेलने वाले कोंच से ही नहीं, उरई, कालपी और बांदा तक से आते थे. जुए के खेल में वह अपनी ही मनमानी चलाता था.

जुआ खेलने वाला व्यक्ति अगर जीत गया तो वह उसे तब तक नहीं जाने देता था, जब तक वह हार न जाए. इसी तिकड़म में उस ने सैकड़ों को फंसाया और लाखों रुपए कमाए. इस में से कुछ रकम वह नेता, पुलिस, गुंडा गठजोड़ पर खर्च करता ताकि धंधा चलता रहे.

रामबिहारी राठौर जाल बुनने में महारथी था. वह अधिकारियों, कर्मचारियों एवं सामान्य लोगों के सामने अपने रसूख का प्रदर्शन कर के उन्हें दबाव में लेने की कोशिश करता था. बातों का ऐसा जाल बुनता था कि लोग फंस जाते थे. हर दल के नेताओं के बीच उस की घुसपैठ थी. उस के रसूख के आगे पुलिस तंत्र भी नतमस्तक था. किसी पर भी मुकदमा दर्ज करा देना, उस के लिए बेहद आसान था.

रामबिहारी राठौर बेहद अय्याश था. वह गरीब परिवार की महिलाओं, युवतियों, किशोरियों को तो अपनी हवस का शिकार बनाता ही था, मासूम बच्चों के साथ भी दुष्कर्म करता था. वह 8 से 14 साल की उम्र के बच्चों को अपने जाल में फंसाता था.

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बच्चे को रुपयों का लालच दे कर घर बुलाता फिर कोेल्ड ड्रिंक में नशीला पाउडर मिला कर पीने को देता. बच्चा जब बेहोश हो जाता तो उस के साथ दुष्कर्म करता. दुष्कर्म के दौरान वह उस का वीडियो बना लेता.

कोई बच्चा एक बार उस के जाल में फंस जाता, तो वह उसे बारबार बुलाता. इनकार करने पर अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देता, जिस से वह डर जाता और बुलाने पर आने को मजबूर हो जाता. वह जिस बच्चे को जाल में फंसा लेता, उसे वह दूसरे बच्चे को लाने के लिए कहता. इस तरह उस ने कई दरजन बच्चे अपने जाल में फंसा रखे थे, जिन के साथ वह दरिंदगी का खेल खेलता था. अय्याश रामबिहारी सैक्सवर्धक दवाओं का सेवन करता था. वह किसी बाहरी व्यक्ति को अपने कमरे में नहीं आने देता था.

रामबिहारी राठौर के घर सुबह से देर शाम तक कम उम्र के बच्चों का आनाजाना लगा रहता था. उस के कुकृत्यों का आभास आसपड़ोस के लोगों को भी था. लेकिन लोग उस के बारे में कुछ कहने से सहमते थे. कभी किसी ने अंगुली उठाई तो उस ने अपने रसूख से उन लोगों के मुंह बंद करा दिए. किसी के खिलाफ थाने में झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी तो किसी को दबंगों से धमकवा दिया. बाद में उस की मदद का ड्रामा कर के उस का दिल जीत लिया.

लेकिन कहते हैं, गलत काम का घड़ा तो एक न एक दिन फूटता ही है. वही रामबिहारी के साथ भी हुआ. दरअसल रामबिहारी ने मोहल्ला भगत सिंह नगर के 2 लड़कों राजकुमार व बालकिशन को अपने जाल में फंसा रखा था और पिछले कई साल से वह उन के साथ दरिंदगी का खेल खेल रहा था.

इधर रामबिहारी की नजर उन दोनों की नाबालिग बहनों पर पड़ी तो वह उन्हें लाने को मजबूर करने लगा. यह बात उन दोनों को नागवार लगी और उन्होंने साफ मना कर दिया. इस पर रामबिहारी ने उन दोनों के अश्लील वीडियो वायरल करने तथा उन्हें जेल भिजवाने की धमकी दी.

रामबिहारी की धमकी से डर कर राजकुमार व बालकिशन प्रजापति मोहल्ले के 2 दबंगों के पास पहुंच गए और रामबिहारी के कुकृत्यों का चिट्ठा खोल दिया. उन दबंगों ने उन दोनों बच्चों को मदद का आश्वासन दिया और रामबिहारी को ब्लैकमेल करने की योजना बनाई.

योजना के तहत दबंगों ने राजकुमार व बालकिशन की मार्फत रामबिहारी के घर में चोरी करा दी. उस के बाद दबंगों ने रामबिहारी से 15 लाख रुपयों की मांग की. भेद खुलने के भय से रामबिहारी उन्हें 5 लाख रुपए देने को राजी भी हो गया. लेकिन पैसों के बंटवारे को ले कर दबंगों व पीडि़तों के बीच झगड़ा हो गया.

इस का फायदा उठा कर रामबिहारी थाने पहुंच गया और चोरी करने वाले दोनों लड़कों के खिलाफ तहरीर दे दी. तहरीर मिलते ही कोंच पुलिस ने चोरी गए सामान सहित उन दोनों लड़कों को पकड़ लिया. पुलिस ने जब पकड़े गए राजकुमार व बालकिशन से पूछताछ की तो रामबिहारी राठौर के घिनौने सच का परदाफाश हो गया.

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पुलिस जांच में लगभग 300 अश्लील वीडियोे सामने आए हैं और लगभग 50 बच्चों के साथ उस ने दुष्कर्म किया था. जांच से यह भी पता चला कि रामबिहारी पोर्न फिल्मों का व्यापारी नहीं है. न ही उस के किसी पोर्न फिल्म निर्माता से संबंध हैं. रामबिहारी का कनेक्शन बांदा के जेई रामभवन से भी नहीं था. 13 जनवरी, 2021 को पुलिस ने अभियुक्त रामबिहारी राठौर को जालौन की उरई स्थित कोर्ट में मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रोंं पर आधारित

आज का इंसान: भाग 3

‘‘ ‘नमस्ते सर,’ दोनों हाथ जोड़ कर उस ने मेरा अभिवादन किया. चेहरे पर कोई भी भाव ऐसा नहीं जिस से शर्म का एहसास महसूस हो. मैं कभी अपनी पत्नी का मुंह देख रहा था और कभी उस का. गृहस्थी की दहलीज पार कर के जा चुका इंसान क्या इस लायक है कि उसे मैं अपने घर के अंदर आने दूं और पानी का घूंट भी पिलाऊं.

‘‘ ‘सुनयना यहां है क्या? घर पर है नहीं न…घर की चाबियां हों तो दे दीजिए… मैं ने फोन कर के उसे बता दिया था…मां को साथ लाया हूं…वह बाहर गाड़ी में हैं. कहां गई है वह? क्या मार्केट तक गई है?’

‘‘इतने ढेर सारे सवाल एकसाथ… उस के हावभाव तो इस तरह के थे मानो पिछले 3-4 महीने में कहीं कुछ हुआ ही नहीं है. पल भर को मेरा माथा ठनका. गिरीश के चेहरे का आत्मविश्वास और अधिकार से परिपूर्ण आवाज कहीं से भी यह नहीं दर्शा रही, जिस का उल्लेख सुनयना रोरो कर करती रही थी. उठ कर मैं बाहर चला आया. सचमुच गाड़ी में उस की बीमार मां थी.

‘‘ ‘वह तो अपने भाई के घर गई है और घर की चाबियां उस ने हमें दीं नहीं… आइए, अंदर आ जाइए.’

‘‘ ‘नहीं सर, मुझे तो मां को सीधे अस्पताल ले जाना है. कितनी लापरवाह है यह लड़की, जिम्मेदारी का जरा सा भी एहसास नहीं,’ भन्नाता हुआ गिरीश चला गया.

‘जिम्मेदारी का एहसास क्या सिर्फ सुनयना के लिए? तब यह एहसास कहां था जब वह अपने बच्चे का दर्द सह रही थी.’ मैं ने सोचा फिर सहसा लगा, नहीं, कहीं मैं ही तो बेवकूफ नहीं बन गया इस लड़की के हाथों. हम तो उसी नजर से गिरीश को देख रहे हैं न जिस नजर से सुनयना हमें देखना सिखा रही है. सच क्या है शायद हम पतिपत्नी आज भी नहीं जानते.

‘‘ ‘दिमाग हिल गया है मेरा,’ मेरी पत्नी ने अपना फैसला सुना दिया, ‘मुझे तो लग रहा है कि जो कहानी सुनयना हमें सुनाती रही है वह कोरी बकवास है. 4 महीने में उस ने हमें कोई भनक ही नहीं लगने दी और क्याक्या करती रही. क्या गारंटी है सच ही बोल रही है. आज के बाद इस लड़की से मेलजोल समाप्त. हम इस दलदल में न ही पड़ें तो अच्छा है.’

‘‘जिम्मेदारी का एहसास गिरीश को न होता तो क्या बीमार मां को ढो कर उस शहर से इस शहर में लाता. सुनयना के घर से कुछ लूटपाट कर ही ले जाना होता तो क्या उस के घर का ताला न तोड़ देता. आखिर वह मालिक था.

‘‘दूसरी सुबह मैं अस्पताल उस पते पर गया जहां गिरीश गया था. बीमार मां की बगल में चुपचाप बैठा था वह. हिम्मत कर के मैं ने इतना ही पूछा, ‘4 महीने हो गए गिरीश, तुम एक बार भी नहीं आए. सुनयना बीमार थी…तुम ने एक बार हम से भी बात नहीं की.’

‘‘ ‘आप भी तो यहां नहीं थे न. आप का भाई बीमार था, आप 4 महीने से अपने घर बरेली चले गए थे. मैं किस से बात करता और सुनयना बीमार है मुझे तो नहीं पता. मैं तो तब से बस, मां के साथ हूं, नौकरी भी नहीं बची मेरी. सुनयना मां को यहां लाने को मान जाती तो इतनी समस्या ही न होती. अब क्या मांबाप को मैं सड़क पर फेंक दूं या जिंदा ही जला आऊं श्मशान में. क्या करूं मैं…आप ही बताइए?

‘‘ ‘इस लड़की से शादी कर के मैं तो कहीं का नहीं रहा. 4 साल से भोग रहा हूं इसे. किसी तरह वह जीने दे मगर नहीं. न जीती है न जीने देती है.’

‘‘ ‘घर आ कर पत्नी को बताया तो वह भी अवाक्.’’

‘‘ ‘हमारा कौन सा भाई बीमार था बरेली में…हम 4 महीने से कहीं भी नहीं गए…यह कैसी बात सुना रहे हैं आप.’

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‘‘जमीन निकल गई मेरे पैरों के नीचे से. लगता है हम अच्छी तरह ठग लिए गए हैं. हमारे दुलार का अच्छा दुरुपयोग किया इस लड़की ने. अपने ही चरित्र की कालिख शायद सजासंवार कर अपने पति के मुंह पर पोतती रही. हो सकता है गर्भपात की दवा खा कर बच्चे को खुद ही मार डाला हो और हर रोज नई कहानी गढ़ कर एक आवरण भी डालती रही और हमारी हमदर्दी भी लेती रही. सुरक्षा कवच तो थे ही हम उस के लिए.

‘‘अपना हाथ खींच लिया हम दोनों ने और उस पर देखो, उस ने हम से बात भी करना जरूरी नहीं समझा. आफिस में भी बात कर के इतना नहीं पूछती कि हम दोनों उस से बात क्यों नहीं करते. गिरीश आया था और हम उस से मिले थे उस के बारे में जब पता चल गया तब से वह तो पूरी तरह अनजान हो गई हम से.’’

विजय सारी कथा सुना कर मौन हो गया और मैं सोचने लगा, वास्तव में इंसान जब बड़ा चालाक बन कर यह सोचता है कि उस ने सामने वाले को बेवकूफ बना लिया है तो वह कितने बड़े भुलावे में होता है. अपने ही घर का, अपनी ही गृहस्थी का तमाशा बना कर गिरीश और सुनयना ने भला विजय का क्या बिगाड़ लिया. अपना ही घर किस ने जलाया मैं भी समझ नहीं पाया.

गिरीश सच्चा है या सुनयना कौन जाने मगर यह एक अटूट सत्य है कि हमेशाहमेशा के लिए विजय का विश्वास उन दोनों पर से उठ गया. कभी सुनयना पर भरोसा नहीं किया जा सकता और कोई क्यों किसी पर भरोसा करे. हम समाज में हिलमिल कर इसीलिए रहते हैं न कि कोई हमारा बने और हम किसी के बनें. हम सामाजिक प्राणी हैं और हमें हर पल किसी दूसरे इंसान की जरूरत पड़ती है.

कभी किसी का सुखदुख हमारे चेतन को छू जाता है तो हम उस की पीड़ा कम करने का प्रयास करते हैं और करना ही चाहिए, क्योंकि यही एक इंसान होने का प्रमाण भी है. किसी की निस्वार्थ सेवा कर देना हमारे गले का फंदा तो नहीं बन जाना चाहिए न कि हमारी ही सांस घुट जाए. तकलीफ तो होगी ही न जब कोई हमारे सरल स्वभाव का इस्तेमाल अपनी जरूरत के अनुसार तोड़मोड़ कर करेगा.

खट्टी सी, खोखली मुसकान चली आई मेरे भी होंठों पर. विजय की पारखी आंखों में एक हारी हुई सी भावना नजर आ रही थी मुझे. पुन: पूछा उस ने, ‘‘है न कितना मुश्किल किसी को पहचान पाना आजकल? आज का इंसान वास्तव में क्या अभिनेता नहीं बनता जा रहा?’’

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आज का इंसान: भाग 2

‘‘खाली जेब मांबाप की सेवा कैसे करेगा? क्या उन्हें समझ में नहीं आता. 3 महीने होने को आए क्या नौकरी अभी तक बच रही होगी जो वह…

‘‘सुनयना का रोनाधोना चलता रहा और इसी बीच उस का अविकसित गर्भ चलता बना. पूरा दिन मेरी पत्नी उस के साथ अस्पताल में रही. इतना सब हो गया पर उस का पति नहीं आया. किंकर्तव्य- विमूढ़ होते जा रहे थे हम.

‘‘ ‘क्या तुम दोनों में सब ठीक चल रहा है? कैसा इंसान है वह जिसे न अपने बच्चे की परवाह है न पत्नी की.’ एक दिन मैं ने पूछ लिया.

‘‘हैरानपरेशान थे हम. 2-3 दिन सुनयना हमारे ही घर पर रही. उस के बाद अपने घर चली गई. यह कहानी क्या कहानी है हम समझ पाते इस से पहले एक दिन सुनयना ने हमें बताया कि वह हम से इतने दिन तक झूठ बोलती रही. दरअसल, उस का पति किसी और लड़की के साथ भाग गया है और उस के मातापिता भी इस कुकर्म में उस के साथ हैं.

‘‘हम पतिपत्नी तो जैसे आसमान से नीचे गिरे. सुनयना के अनुसार उस के मायके वाले अब पुलिस केस बनाने की सोच रहे हैं. जिस लड़की के साथ गिरीश भागा है वे भी पूरा जोर लगा रहे हैं कि गिरीश पकड़ा जाए और उसे सजा हो. हक्केबक्के रह गए हम. हैरानी हुई इस लड़की पर. बाहरबाहर क्या होता रहा इस के साथ और भीतर यह हमें क्या कहानी सुनाती रही.

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‘‘सुनयना का कहना है कि वह शर्म के मारे हमें सच नहीं बता पाई.

‘‘  ‘अब तुम क्या करोगी…ऐसा आदमी जो तुम्हें बीच रास्ते में छोड़ कर चला गया, क्या उसे साथ रखना चाहोगी?’

‘‘ ‘महिला सेल में भी मेरे भाई ने रिपोर्ट दर्ज करवा रखी है. बस, मेरा ही इंतजार है. जैसे ही केस रजिस्टर हो जाएगा वह और उस के मातापिता 7 साल के लिए अंदर हो जाएंगे. वकील भी कर लिया है हम ने.’

‘‘ ‘परेशान हो गए थे हम.

‘‘ ‘तुम नौकरी करोगी या अदालतों और वकीलों के पास धक्के खाओगी. रुपयापैसा है क्या तुम्हारे पास?’

‘‘ ‘रुपयापैसा तो पहले ही गिरीश निकाल ले गए. लौकर भी खाली कर चुके हैं. मेरे नाम तो बस 1 लाख रुपए हैं.’

‘‘मैं सोचने लगा कि अच्छा हुआ जो बच्चा चल बसा. ऐसे पिता की संतान का क्या भविष्य हो सकता था. यह अकेली लड़की बच्चे को पालती या नौकरी करती.

‘‘ ‘गिरीश को सजा हो जाएगी तो उस के बाद क्या क रोगी. क्या तलाक ले कर दूसरी शादी करोगी? भविष्य के बारे में क्या सोचा है?’

‘‘ ‘मेरी बूआ कनाडा में रहती हैं, उन्होंने बुला भेजा है. मैं ने पासपोर्ट के लिए प्रार्थनापत्र भी दे दिया है.’

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‘‘मेरी पत्नी अवाक् थीं. यह लड़की पिछले 3-4 महीने से क्याक्या कर रही है हमें तो कुछ भी खबर नहीं. सेवा, देखभाल करने को हम दोनों और वह सब छिपाती रही मुझ से और मेरी पत्नी से भी. इतना बड़ा दिल और गुर्दा इस लड़की का जो अपने टूटे घर का सारा संताप पी गई.

‘‘मुझे कुछ ठीक नहीं लगा था. इस लड़की के बारे में. ऐसा लग रहा है कि सच हम आज भी नहीं जानते हैं. यह लड़की हमें आज भी सब सच ही बता रही होगी विश्वास नहीं हो रहा मुझे. वास्तव में सच क्या होगा कौन जाने.

‘‘बड़बड़ा रही थीं मेरी पत्नी कि कोई बखेड़ा तो हमारे गले नहीं पड़ जाएगा? कहीं यह लड़की हमें इस्तेमाल ही तो नहीं करती रही इतने दिन. इस से सतर्क हो जाना चाहते थे हम. एक दिन पूछने लगी, ‘आप ही बताइए न, मैं क्या करूं. गिरीश अब पछता रहे हैं. वापस आना चाहते हैं. उन्हें सजा दिलाऊं या माफ कर दूं.’

‘‘ ‘इस तरह की लड़ाई में जीत तो बेटा किसी की नहीं होती. लड़ने के लिए ताकत और रुपयापैसा तुम्हारे पास है नहीं. मांबाप भी जिंदा नहीं हैं जो बिठा कर खिलाएंगे. भाईभाभी कब तक साथ देंगे? और अगर इस लड़ाई में तुम जीत भी गईं तो भी हाथ कुछ नहीं आने वाला.’

‘‘ ‘गिरीश को स्वीकार भी तो नहीं किया जा सकता.’

‘‘ ‘मत करो स्वीकार. कौन कह रहा है कि तुम उसे स्वीकार करो पर लड़ने से भी मुंह मोड़ लो. उस के हाल पर छोड़ दो उसे. दूसरी शादी कर के घर बसाना आसान नहीं है. डाल से टूट चुकी हो तुम…अब कैसे संभलना है यह तुम्हें सोचना है. अदालतों में तो अच्छाखासा तमाशा होगा, अगर सुलहसफाई से अलग हो जाओ तो…’

‘‘ ‘मगर वह तो तलाक देने को नहीं मान रहा न. वह साथ रहना चाहता है और अब मैं साथ रहना नहीं चाहती. धमकी दे रहा है मुझे. घर की एक चाबी तो उस के पास भी है न, अगर मेरे पीछे से आ कर सारा सामान भी ले गया तो मैं क्या कर लूंगी.’

‘‘ ‘इस महल्ले के सभी लोग जानते हैं कि वह तुम्हारा पति है. कोई क्यों रोकेगा उसे, ऐसा है तो तुम घर के ताले ही बदल डालो फिर कैसे आएगा.’

‘‘ताले बदलवा लिए सुनयना ने. 2 छुट्टियां आईं और सुनयना अपने भाई के घर चली गई. रात 8 बजे के करीब अपने दरवाजे पर गिरीश को देख हम हैरान रह गए. एक चरित्रहीन…अपनी पत्नी को बीच रास्ते छोड़ देने वाला इंसान मेरे दरवाजे पर खड़ा था.

Crime Story- रसूखदारों की घिनौनी कहानी: भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

इस सच को जानने के लिए रामबिहारी को गिरफ्तार करना आवश्यक था. लेकिन रामबिहारी को गिरफ्तार करना आसान नहीं था. क्योंकि वह सत्ता पक्ष का नेता था और सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं से उस के ताल्लुकात थे. उस की गिरफ्तारी से बवाल भी हो सकता था. अत: इंसपेक्टर खान ने इस प्रकरण की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी.

सूचना पाते ही एसपी डा. यशवीर सिंह, एएसपी डा. अवधेश कुमार, डीएसपी (कोंच) राहुल पांडेय तथा क्राइम ब्रांच प्रभारी उदयभान गौतम कोतवाली कोंच आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने दोनों युवकों राजकुमार तथा बालकिशन से घंटों पूछताछ की फिर सफेदपोश नेता को गिरफ्तार करने के लिए डा. यशवीर सिंह ने डीएसपी राहुल पांडेय की निगरानी में एक पुलिस टीम का गठन कर दिया तथा कोंच कस्बे में पुलिस बल तैनात कर दिया.

12 जनवरी, 2021 की रात 10 बजे पुलिस टीम रामबिहारी के भगत सिंह नगर मोहल्ला स्थित घर पर पहुंची. लेकिन वह घर से फरार था. इस बीच पुलिस टीम को पता चला कि रामबिहारी पंचानन चौराहे पर मौजूद है. इस जानकारी पर पुलिस टीम वहां पहुंची और रामबिहारी को नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया.

उसे कोतवाली कोंच लाया गया. इस के बाद पुलिस टीम रात में ही रामबिहारी के घर पहुंची और पूरे घर की सघन तलाशी ली. तलाशी में उस के घर से लैपटाप, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन, डीवीआर, एक्सटर्नल हार्ड डिस्क तथा नशीला पाउडर व गोलियां बरामद कीं. थाने में रामबिहारी से कई घंटे पूछताछ की गई.

रामबिहारी राठौर के घर से बरामद लैपटाप, पेन ड्राइव, मोबाइल, डीवीआर तथा हार्ड डिस्क की जांच साइबर एक्सपर्ट टीम तथा झांसी की फोरैंसिक टीम को सौंपी गई. टीम ने झांसी रेंज के आईजी सुभाष सिंह बघेल की निगरानी में जांच शुरू की तो चौंकाने वाली जानकारी मिली. फोरैंसिक टीम के प्रभारी शिवशंकर ने पेन ड्राइव व हार्ड डिस्क से 50 से अधिक पोर्न वीडियो निकाले. उन का अनुमान है कि हार्ड डिस्क में 25 जीबी अश्लील डाटा है.

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इधर पुलिस टीम ने लगभग 50 बच्चों को खोज निकाला, जिन के साथ रामबिहारी ने दरिंदगी की औरउन के बचपन के साथ खिलवाड़ किया. इन में 36 बच्चे तो सामने आए, लेकिन बाकी बच्चे शर्म की वजह से सामने नहीं आए. 36 बच्चों में से 18 बच्चों ने ही बयान दर्ज कराए. जबकि 3 बच्चों ने बाकायदा रामबिहारी के विरुद्ध लिखित शिकायत दी.

इन बच्चों की तहरीर पर थानाप्रभारी इमरान खान ने भादंवि की धारा 328/377/506 तथा पोक्सो एक्ट की धारा (3), (4) एवं आईटी एक्ट की धारा 67ख के तहत रामबिहारी राठौर के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उसे न्यायसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

भाजपा नेता रामबिहारी के घिनौने सच का परदाफाश हुआ तो कोंच कस्बे में सनसनी फैल गई. लोग तरहतरह की चर्चाएं करने लगे. किरकिरी से बचने के लिए नगर अध्यक्ष सुनील लोहिया ने बयान जारी कर दिया कि भाजपा का रामबिहारी से कोई लेनादेना नहीं है. रामबिहारी ने पिछले महीने ही अपने पद व प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसे मंजूर कर लिया गया था.

इधर सेवानिवृत्त कानूनगो एवं उस की घिनौनी करतूतों की खबर अखबारों में छपी तो कोंच कस्बे में लोगों का गुस्सा फट पड़ा. महिलाओं और पुरुषों ने रामबिहारी का घर घेर लिया और इस हैवान को फांसी दो के नारे लगाने लगे. भीड़ रामबिहारी का घर तोड़ने व फूंकने पर आमादा हो गई. कुछ लोग उस के घर की छत पर भी चढ़ गए. लेकिन पुलिस ने किसी तरह घेरा बना कर भीड़ को रोका और समझाबुझा कर शांत किया.

कुछ महिलाएं व पुरुष कोतवाली पहुंच गए. उन्होंने रामबिहारी को उन के हवाले करने की मांग की. दरअसल, वे महिलाएं हाथ में स्याही लिए थीं, वे रामबिहारी का मुंह काला करना चाहती थीं. लेकिन एसपी डा. यशवीर सिंह ने उन्हें समझाया कि अपराधी अब पुलिस कस्टडी में है. अत: कानून का उल्लंघन न करें. कानून खुद उसे सजा देगा. महिलाओं ने एसपी की बात मान ली और वे थाने से चली गईं.

रामबिहारी राठौर कौन था? वह रसूखदार सफेदपोश नेता कैसे बना? फिर इंसान से हैवान क्यों बन गया? यह सब जानने के लिए हमें उस के अतीत की ओर झांकना होगा.

जालौन जिले का एक कस्बा है-कोंच. तहसील होने के कारण कोंच कस्बे में हर रोज चहलपहल रहती है. इसी कस्बे के मोहल्ला भगत सिंह नगर में रामबिहारी राठौर अपनी पत्नी उषा के साथ रहता था. रामबिहारी का अपना पुश्तैनी मकान था, जिस के एक भाग में वह स्वयं रहता था, जबकि दूसरे भाग में उस का छोटा भाई श्यामबिहारी अपनी पत्नी व बच्चों के साथ रहता था.

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रामबिहारी पढ़ालिखा व्यक्ति था. वर्ष 1982 में उस का चयन लेखपाल के पद पर हुआ था. कोंच तहसील में ही वह कार्यरत था. रामबिहारी महत्त्वाकांक्षी था. धन कमाना ही उस का मकसद था. चूंकि वह लेखपाल था, सो उस की कमाई अच्छी थी. लेकिन संतानहीन था. उस ने पत्नी उषा का इलाज तो कराया लेकिन वह बाप न बन सका.

उषा संतानहीन थी, सो रामबिहारी का मन उस से उचट गया और वह पराई औरतों में दिलचस्पी लेने लगा. उस के पास गरीब परिवारों की महिलाएं राशन कार्ड बनवाने व अन्य आर्थिक मदद हेतु आती थीं. ऐसी महिलाओं का वह मदद के नाम पर शारीरिक शोषण करता था. वर्ष 2005 में एक महिला ने सब से पहले उस के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया. लेकिन रामबिहारी ने उस के घरवालों पर दबाव बना कर मामला रफादफा कर लिया.

कोंच तहसील के गांव कुंवरपुरा की कुछ महिलाओं ने भी उस के खिलाफ यौनशोषण की शिकायत तहसील अफसरों से की थी. तब रामबिहारी ने अफसरों से हाथ जोड़ कर तथा माफी मांग कर लीपापोती कर ली. सन 2017 में रामबिहारी को रिटायर होना था. लेकिन रिटायर होने के पूर्व उस की तरक्की हो गई. वह लेखपाल से कानूनगो बना दिया गया. फिर कानूनगो पद से ही वह रिटायर हुआ. रिटायर होने के बाद वह राजनीति में सक्रिय हो गया. उस ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली.

कुछ समय बाद ही उसे कोंच का भाजपा नगर उपाध्यक्ष बना दिया गया. रामबिहारी तेजतर्रार था. उस ने जल्द ही शासनप्रशासन में पकड़ बना ली. उस ने घर पर कार्यालय बना लिया और उपाध्यक्ष का बोर्ड लगा लिया. नेतागिरी की आड़ में वह जायजनाजायज काम करने लगा. वह कोंच का रसूखदार सफेदपोश नेता बन गया.

अगले भाग में पढ़ें- रामबिहारी राठौर के घिनौने सच का परदाफाश हो गया

Crime Story- रसूखदारों की घिनौनी कहानी: भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

रिटायर्ड कानूनगो  और नेता रामबिहारी राठौर अय्याश प्रवृत्ति का था. वह नाबालिग बच्चों के साथ न सिर्फ कुकर्म करता था बल्कि वीडियो भी बना लेता था. फिर एक दिन ऐसा हुआ कि…

10जनवरी, 2021 की सुबह 9 बजे रिटायर्ड कानूनगो रामबिहारी राठौर कोतवाली कोंच पहुंचा. उस समय कोतवाल इमरान खान कोतवाली में मौजूद थे. चूंकि इमरान खान रामबिहारी से अच्छी तरह परिचित थे. इसलिए उन्होंने उसे ससम्मान कुरसी पर बैठने का इशारा किया. फिर पूछा, ‘‘कानूनगो साहब, सुबहसुबह कैसे आना हुआ? कोई जरूरी काम है?’’

‘‘हां सर, जरूरी काम है, तभी थाने आया हूं.’’ रामबिहारी राठौर ने जवाब दिया.

‘‘तो फिर बताओ, क्या जरूरी काम है?’’ श्री खान ने पूछा.

‘‘सर, हमारे घर में चोरी हो गई है. चोर एक पेन ड्राइव और एक हार्ड डिस्क ले गए हैं. हार्ड डिस्क के कवर में 20 हजार रुपए भी थे. वह भी चोर ले गए हैं.’’ रामबिहारी ने जानकारी दी.

‘‘तुम्हारे घर किस ने चोरी की. क्या किसी पर कोई शक वगैरह है?’’ इंसपेक्टर खान ने पूछा.

‘‘हां सर, शक नहीं बल्कि मैं उन्हें अच्छी तरह जानतापहचानता हूं. वैसे भी चोरी करते समय उन की सारी करतूत कमरे में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद है. आप चल कर फुटेज में देख लीजिए.’’

‘‘कानूनगो साहब, जब आप चोरी करने वालों को अच्छी तरह से जानतेपहचानते हैं और सबूत के तौर पर आप के पास फुटेज भी है, तो आप उन का नामपता बताइए. हम उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लेंगे और चोरी गया सामान भी बरामद कर लेंगे.’’

‘‘सर, उन का नाम राजकुमार प्रजापति तथा बालकिशन प्रजापति है. दोनों युवक कोंच शहर के मोहल्ला भगत सिंह नगर में रहते हैं. दोनों को कुछ दबंगों का संरक्षण प्राप्त है.’’ रामबिहारी ने बताया.

चूंकि रामबिहारी राठौर  कानूनगो तथा वर्तमान में कोंच नगर का भाजपा उपाध्यक्ष था, अत: इंसपेक्टर इमरान खान ने रामबिहारी से तहरीर ले कर तुरंत काररवाई शुरू कर दी. उन्होंने देर रात राजकुमार व बालकिशन के घरों पर दबिश दी और दोनों को हिरासत में ले लिया. उन के घर से पुलिस ने पेन ड्राइव व हार्ड डिस्क भी बरामद कर ली. रामबिहारी के अनुरोध पर पुलिस ने उस की पेन ड्राइव व हार्ड डिस्क वापस कर दी.

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पुलिस ने दोनों युवकों के पास से पेन ड्राइव व हार्ड डिस्क तो बरामद कर ली, लेकिन 20 हजार रुपया बरामद नहीं हुए थे. इंसपेक्टर खान ने राजकुमार व बालकिशन से रुपयों के संबंध में कड़ाई से पूछा तो उन्होंने बताया कि रुपया नहीं था. कानूनगो रुपयों की बाबत झूठ बोल रहा है. वह बड़ा ही धूर्त इंसान है.

इंसपेक्टर इमरान खान ने जब चोरी के बाबत पूछताछ शुरू की तो दोनों युवक फफक पड़े. उन्होंने सिसकते हुए अपना दर्द बयां किया तो थानाप्रभारी के आश्चर्य का ठिकाना न रहा. दोनों ने बताया कि रामबिहारी इंसान नहीं बल्कि हैवान है. वह मासूमों को अपने जाल में फंसाता है और फिर उन के साथ कुकर्म करता है.

एक बार जो उस के जाल में फंस जाता है, फिर निकल नहीं पाता. वह उन के साथ कुकर्म का वीडियो बना लेता फिर ब्लैकमेल कर बारबार आने को मजबूर करता. 8 से 14 साल के बीच की उम्र के बच्चों को वह अपना शिकार बनाता है. गरीब परिवार की महिलाओं, किशोरियों और युवतियों को भी वह अपना शिकार बनाता है.

राजकुमार व बालकिशन प्रजापति ने बताया कि रामबिहारी राठौर पिछले 5 सालों से उन दोनों के साथ भी घिनौना खेल खेल रहा है. उन दोनों ने बताया कि जब उन की उम्र 13 साल थी, तब वे जीवनयापन करने के लिए ठेले पर रख कर खाद्य सामग्री बेचते थे.

एक दिन जब वे दोनों सामान बेच कर घर आ रहे थे, तब पूर्व कानूनगो रामबिहारी राठौर ने उन दोनों को रोक कर अपनी मीठीमीठी बातों में फंसाया. फिर वह उन्हें अपने घर में ले गया और दरवाजा बंद कर लिया. फिर बहाने से कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला कर पिला दिया. उस के बाद उस ने उन दोनों के साथ कुकर्म किया. बाद में उन्होंने विरोध करने पर फरजी मुकदमे में फंसा देने की धमकी दी.

कुछ दिन बाद जब वे दोनों ठेला ले कर जा रहे थे तो नेता ने उन्हें पुन: बुलाया और कमरे में लैपटाप पर वीडियो दिखाई, जिस में वह उन के साथ कुकर्म कर रहा था. इस के बाद उन्होंने कहा कि मेरे कमरे में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और मैं ने तुम दोनों का वीडियो सुरक्षित रखा है. यदि तुम लोग मेरे बुलाने पर नहीं आए तो यह वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दूंगा.

इस के बाद नेताजी ने कुछ और वीडियो दिखाए और कहा कि तुम सब के वीडियो हैं. यदि मेरे खिलाफ किसी भी प्रकार की शिकायत किसी से की, मैं उलटा मुकदमा कायम करा दूंगा. युवकों ने बताया कि डर के कारण उन्होंने मुंह बंद रखा. लेकिन नेताजी का शोषण जारी रहा. हम जैसे दरजनों बच्चे हैं, जिन के साथ वह घिनौना खेल खेलता है.

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उन दोनों ने पुलिस को यह भी बताया कि 7 जनवरी, 2021 को नेता ने उन्हें घर बुलाया था, लेकिन वे नहीं गए. अगले दिन फिर बुलाया. जब वे दोनों घर पहुंचे तो नेता ने जबरदस्ती करने की कोशिश की. विरोध जताया तो उन्होंने जेल भिजवाने की धमकी दी.

इस पर उन्होंने मोहल्ले के दबंग लोगों से संपर्क किया, फिर नेता रामबिहारी का घिनौना सच सामने लाने के लिए दबंगों के इशारे पर रामबिहारी की पेन ड्राइव व हार्ड डिस्क उस के कमरे से उठा ली. यह दबंग, रामबिहारी को ब्लैकमेल कर उस से लाखों रुपया वसूलना चाहते थे.

पूर्व कानूनगो व भाजपा नेता रामबिहारी का घिनौना सच सामने आया तो इंसपेक्टर इमरान खान के मन में कई आशंकाएं उमड़ने लगीं. वह सोचने लगे, कहीं रामबिहारी बांदा के इंजीनियर रामभवन की तरह पोर्न फिल्मों का व्यापारी तो नहीं है. कहीं रामबिहारी के संबंध देशविदेश के पोर्न निर्माताओं से तो नहीं.

अगले भाग में पढ़ें- पुलिस टीम ने पूरे घर की सघन तलाशी ली

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