जेल में बंद कैदियों की दास्तान

मुझे अपनी सहेली, जो कि जज हैं, के साथ जेल में सैक्स अपराधों के आरोपों में बंद कैदियों से बात करने का मौका मिला था. एक 24 साल के कैदी ने बताया, ‘‘मैं गांव का रहने वाला हूं. शहर में मैं एक कारखाने में काम करता था. मैं जिस मकान में रहता था, वे दोनों पति पत्नी ही उस मकान में रहते थे. उन की शादी को कई साल हो चुके थे, मगर उन के कोई बच्चा नहीं हुआ था.

‘‘30 साला मकान मालिक भी एक कारखाने में चौकीदारी करता था और रात की ड्यूटी करता था. एक रात जब वह ड्यूटी पर चला गया, तो वह मेरे कमरे में आई. उस समय मैं शराब पी रहा था. उस ने इतने झीने कपड़े पहन रखे थे कि उस के शरीर के सभी मादक अंग साफ साफ दिखाई दे रहे थे.

‘‘वह मुझे देख कर मुस्कराने लगी.  मैं हैरानी से उस की ओर देखने लगा, तो वह हंसते हुए बोली, ‘मुझे नहीं पिलाओगे क्या?’

‘‘इतना सुन कर मैं ने उसे एक पैग बनाया, तो उसे पी कर वह मुझ से बुरी तरह से लिपट कर बोली, ‘मैं अब रातभर तुम से मजे लूंगी. मेरा पति तो कुछ कर नहीं पाता है. वह जरा सी देर में पस्त हो जाता है. मैं प्यासी ही रह जाती हूं.’

‘‘इतना कह कर वह मेरा हाथ पकड़ कर बिस्तर पर ले गई और फिर हम दोनों ने वह किया, जो हमें नहीं करना चाहिए था. उस के बाद तो हम दोनों का यह रोजाना का ही खेल हो गया था.

‘‘एक साल तक हम दोनों का यह खेल चलता रहा, मगर एक रात उस का पति अचानक गांव से लौट आया.

‘‘मकान की एक चाबी उस के पास थी. जब कमरे में उस की बीवी नहीं मिली, तो वह मेरे कमरे पर आया. मेरे कमरे की लाइट जली हुई थी और कमरे का गेट भी खुला हुआ था.

‘‘मैं और उस की बीवी अपने खेल में मस्त थे. यह देख कर उस ने अपने रिश्तेदारों को वहां पर बुला लिया.

‘‘जब उस की बीवी ने उन्हें देखा, तो वह रोते हुए उन से बोली, ‘यह मुझे रोजाना जबरदस्ती पकड़ लेता है. मैं मना करती हूं, तो यह मेरे पति को जान से मारने की धमकी देता है. मैं डर कर इसकी हवस का शिकार होती हूं. इसे खूब मारो और पुलिस के हवाले कर दो, तभी इस नीच से हमारा पीछा छूटेगा.’

‘‘उस की इन बातों को सुन कर उस के पति और रिश्तेदारों ने मुझे खूब मारा और फिर पुलिस के हवाले कर दिया था.

‘‘मेरे बारे में जब मां बाप को मालूम हुआ, तो उन्होंने दुखी हो कर खुदकुशी कर ली. मकान मालकिन के चक्कर में मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई है,’’ कहते हुए वह कैदी बुरी तरह रोने लगा.

एक 55 साला कैदी से भी बात करने का मौका मिला. वे बोले, ‘‘मैं एक गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्राचार्य था. मैं अनुशासनप्रिय था. मेरी इस बात के चलते शहर से रोजाना स्कूल आने वाली 2 टीचर मुझ से नाराज रहती थीं. वे रोज ही देर से स्कूल आती थीं.

‘‘एक दिन देर से आने वाली एक टीचर को अपने कमरे में बुला कर डांटा, तो उस ने अपना ब्लाउज और साड़ी फाड़ कर बुरी तरह से दहाड़ मार कर रोते हुए ‘बचाओ बचाओ’ की आवाज लगा कर स्टाफ को वहां बुला लिया.

‘‘जब स्टाफ वहां आया, तो उस ने रोते हुए बताया कि मैं उसकी आबरू से खिलवाड़ कर रहा था. दूसरी टीचर भी सभी से कह रही थी कि यही हरकत मैं कई बार उस से भी कर चुका हूं.

‘‘तब तक गांव के और लोग भी वहां आ गए थे. उन्होंने मुझे टीचर के नाम पर  कलंक मान कर उसी समय पुलिस को फोन कर मुझे गिरफ्तार करा दिया था.

‘‘बाद में मुझे पता चला कि उन्हें अपनी एक रिश्तेदार प्राचार्य को मेरे उस स्कूल में लाना था, ताकि वे अपनी मनमरजी से स्कूल आएंजाएं.’’

उन प्राचार्य की दास्तान सुन कर मुझे और मेरी जज सहेली को यकीन ही नहीं हो पा रहा था कि स्कूल के एक अनुशासनप्रिय प्राचार्य के साथ ऐसी भी घिनौनी साजिश रच कर उन की जिंदगी बरबाद करने वाली टीचर भी शिक्षा विभाग में मौजूद हैं.

फिर हमें सैक्स अपराध के आरोप में जेल में बंद एक 40 साला कैदी ने बताया, ‘‘मैं अपने एक दोस्त की मदद करने की भूल की सजा भुगत रहा हूं.

‘‘उस की छोटी बहन की शादी थी. उस ने कहा कि मैं पैसे उधार ले कर उस की मदद कर दूं. मैं ने किसी जान पहचान वाले से पैसे उधार ले कर उस की मदद कर दी.

‘‘उस की बहन की शादी को काफी समय हो गया था, मगर मेरे उस दोस्त ने मुझे एक भी पैसा नहीं लौटाया था.

‘‘एक दिन मैं ने उस दोस्त से पैसे मांगे, तो वह साफ मुकर गया कि मैं ने उसे पैसे दिए ही नहीं थे.

‘‘मैं ने उसे याद दिलाते हुए पैसों के लिए कहा, तो दोस्त और उस की बीवी ने मुझे सैक्स अपराध के आरोप में जेल भिजवाने की साजिश रची.

‘‘मुझे उस की बीवी ने अपने घर बुलाया. मैं जब उस के घर गया, तो वह बड़े प्यार से बोली, ‘तुम्हारे दोस्त तो पैसों के इंतजाम के लिए बाहर गए हुए हैं.  3-4 दिन बाद लौटेंगे. तब तक आप यहीं रहें. मुझे मर्द के साथ सोए बगैर रात में नींद नहीं आती है. रातभर खूब मजे लेंगे,’ कह कर उस ने मुझे शराब पिलाई.

‘‘शराब पिलाने के बाद वह मुझ से बोली कि मैं उसे अपनी गोद में उठा कर पलंग पर ले जाऊं और उस के बदन के कपड़ों को फाड़ते हुए ऐसा करूं, जैसे तुम मुझ से जबरदस्ती कर रहे हो.

‘‘उस की इन बातों को सुन कर मैने ऐसा ही किया था. जब वह दर्द से चिल्लाने लगी, तो उस का पति आ गया.

‘‘अपनी बीवी को इस हालत में देख वह बौखला गया. बोला, ‘तू ने मेरी बीवी के साथ यह क्या किया. अभी तुझे गिरफ्तार कराता हूं,’ कह कर उस ने मुझे गिरफ्तार करा दिया.’’

उस कैदी की दुखभरी दास्तान सुन कर मैं और मेरी जज सहेली अपने दिल में सोच रहे थे कि यह कैसा जमाना आ गया है कि किसी पर रहम खा कर उस की मदद करते हैं, तो मदद पाने वाला अपनी मदद करने वाले के खिलाफ ही साजिश रच कर उस की जिंदगी तबाह कर देता है.

जेल से लौटते समय मैं और मेरी जज सहेली जेल में बंद सैक्स अपराधों के इन आरोपी कैदियों की दास्तान सुन कर इसी नतीजे पर पहुंचे थे कि सैक्स अपराध के ये ज्यादातर आरोपी कैदी दूसरों की साजिश के शिकार हो कर ऐसी बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हो रहे हैं.

सेक्स के दौरान नारियल तेल का इस्तेमाल कितना सुरक्षित है

कुछ महिलाएं वेजाइनल ड्राइनैस की शिकार होती हैं. जिसकी वजह से उन्हें सेक्स के समय दर्द महसूस होता है. इस तकलीफ भरे अनुभव से बचने के लिए विशेषज्ञ सेक्‍स के समय ल्‍यूब्‍स यानी ल्‍यूब्रिकेंट्स का इस्‍तेमाल करने की सलाह देते हैं. पर ऐसे कुछ नैचुरल ल्यूब्रिकेंट्स है जिनको आप आसानी से खरीद कर इस्तेमाल कर सकती हैं. नारियल तेल भी उन्हीं नैचुरल ल्यूब्रिकेंट्स में से एक है. नारियल तेल अन्‍य वौटर और सिलिकौन बेस्‍ड ल्‍यूब्‍स के तुलना में बेहतर माना जाता है.

आइए जानते हैं वेजाइना की सेंसिटिव स्किन के लिए यह कितना लाभदायक है…

नारियल तेल का इस्तेमाल बालों के सौंदर्य, चेहरे की खूबसूरती, जलने पर और कुकिंग औयल के तौर पर किया जाता रहा है. लेकिन नारियल के तेल को आप ल्यूब्रिकेंट्स की तरह भी इस्तेमाल कर सकती है. अधिकतर महिलाएं ल्यूब्स का इस्तेमाल करने से डरती है. उन्हें लगता है मार्केट में मिलने वाला ल्यूब्रिकेंट्स से उन्हें नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे में ल्यूब्रिकेंट्स के तौर पर नारियल तेल का इस्तेमाल करना हानिकारक नहीं है.

इंटरकोर्स में होती है आसानी

ल्यूब्रिकेंट्स एक ऐसा पदार्थ है जिसके इस्तेमाल से इंटरकोर्स काफी आरामदायक बन जाता है. लेकिन बहुत सी महिलाएं ल्यूब्रिकेंट्स खरीदने से पहले बहुत सोचती है कहीं इससे उनको कोई नुकसान तो नहीं पहुंचेगा, प्राइवेट पार्ट पर किसी प्रकार की एलर्जी तो नहीं हो जाएगी. अगर आपके मन में भी यह सभी सवाल है और आप ल्यूब्रिकेंट नहीं खरीदना चाहती तो आप नैचुरल ल्यूब्स यानी नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकती है. दरअसल, नारियल तेल ल्यूब्रिकेंट्स की तरह ही सेंसेशन बढ़ाता है और आपकी सेक्स लाइफ को उतना ही मज़ेदार.

कई महिलाएं नारियल तेल इस्तेमाल करने से भी डरती है. आइए जानते है नारियल तेल वेजाइना के लिए कितना सेफ है.

नारियल का तेल एक नैचुरल प्रदार्थ है साथ ही इसमें प्रिजर्वेटिव्स भी नहीं होते, ल्यूबृकेंट्स से यह बहुत सस्ता होता है. इसकी खास बात यह है कि नैचुरल के साथ इसमें एंटीमाइक्रौबियल और एंटीफंगल प्रौपर्टीज भी होती हैं. वौटर और सिलिकौन बेस्ड ल्यूब्स की तुलना में यह गाढ़ा और लौन्ग लास्टिंग होता है. इसमें मौइश्चराइजिंग प्रौपर्टीज भी होती है जो बौडी पार्ट को मौइश्चराइज करने का काम भी करता है.

कब नहीं करना चाहिए नारियल तेल का इस्तेमाल

  • अगर आपको वजाइनल यीस्ट इन्फेक्शन हो जाता है तो नारियल तेल का इस्तेमाल ल्यूब के तौर पर न करें, इससे आपकी वेजाइना का पीएच बिगड़ सकता है।
  • अगर आप नारियल तेल का इस्तेमाल कर रही है तो लैटेक्स कौन्डम का यूज न करें. दरअसल, तेल के संपर्क में आने से लैटेक्स की खराब होने की संभावना हो जाती है, इससे कौन्डम ब्रेक भी हो जाता है जिससे महिला कि प्रेग्नेंट होने कि संभावना बढ़ जाती है.
  • नारियल तेल का इस्तेमाल सिर्फ पौलियूरेथेन कौन्डम्स के साथ करना चाहिए.
  • यदि आप नारियल तेल का इस्तेमाल कर रही है तो कोशिश करें वर्जिन नारियल तेल हो. यह रिफाइंड नारियल तेल से जादा लाभदायक होता है.

Mother’s Day Special: मां की उम्मीद

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परिणीति-राघव चड्डा हुए दिल्ली के लिए रवाना, जाने कब होगी सगाई

इन दिनों अगर कोई सोशल मीडिया पर चर्चा में बना हुआ है तो, वह आमआदमी पार्टी के नेता राघव चढ्ड़ा और परिणीति चौपड़ा. जी हां, कपल इन दिनों सुर्खियो में बने हुए है पहले साथ आईपीएल देखने महोली पहुंचे थे. जहां लोगो ने भाभी जिंदाबाद के नारे लगाएं थे. लेकिन अब दोनों को मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया है दोनों की जल्द ही सगाई होने वाली है जिसके लिए दिल्ली पहुंचे है.

 

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आपको बता दे, कि एक्ट्रेस परिणीति चौपड़ा और राघव चढ्ड़ा इन दिनों मीडिया की लाइमलाइट में बने हुए है. दोनों अपनी शादी को लेकर सुर्खियों में है अब खबर है कि दोनों दिल्ली के लिए रवाना हुए है जहां उनकी 13 मई को सगाई होने जा रही है ये फोटो हाल ही की जहां दोनों को एक साथ स्पॉट किया गया है.

बता दें, कि परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा हाल ही में मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए. यह दोनों एक ही गाड़ी में एयरपोर्ट पर पहुंचे थे. इस तस्वीर में परिणीति चोपड़ा ने लाल रंग का सूट कैरी किया हुआ है फोटो में परिणीति आंखों पर काला चश्मा लगाए नजर आ रही हैं. जिसमें वह बेहद ही खूबसूरत लग रही हैं. इस फोटो में परिणीति अपने बालों को संवारती नजर आ रही हैं. फोटो में देखा जा सकता है कि राघव ने ब्लैक शर्ट और पैंट पहना है, जिसमें वह बेहद ही हैंडसम लग रहे हैं. इस तस्वीर में परिणीति चोपड़ा अपने होने वाले मंगेतर राघव चड्ढा संग नजर आ रही हैं।. फोटो में राघव परिणीति को निहारते नजर आ रहे हैं.

 

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राघव और परिणीति को देखते ही फैंस दोनों से तरह-तरह के सवाल करने लगते हैं. एक पैपराजी ने पूछा कि शादी कब है? तो वहीं किसी ने पूछा, ‘शादी में आप हमें बुलाएंगे क्या?’ हालांकि पैप्स की बातों पर ना तो राघव और ना ही परिणीति कोई भी रिएक्शन देते हैं. राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा की इन तस्वीरों पर फैंस खूब रिएक्ट कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “ये पैप्स तो परिणीति से भी ज्यादा एक्साइटेड हैं.” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, “ये दोनों साथ में बहुत क्यूट लग रहे हैं.” राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा की जोड़ी को लोग खूब पसंद करते हैं। दोनों की तस्वीरों आते ही इंटरनेट पर छा जाती हैं.

साड़ी में बला की खूबसूरत दिखीं भोजपुरी एक्ट्रेस Monalisa , इस शो के लिए कराया फोटोशूट

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी एक्ट्रेस मोनालिसा इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई है एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती है.हाल ही में एक्ट्रेस ने एक वीडियो शेयर किया है जिसे देख फैंस पागल हो गए है और जमकर कमेंट्स बरसा रहे है एक्ट्रेस की कुछ फोटो भी सोशल मीडिया पर छाई हुई है जो कि चर्चा का विषय बन गई है.

 

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आपको बता दे, कि हाल ही में एक्ट्रेस मोनालिसा ने फोटोशूट कराया है जिसमें वो बला की खूबसूरत नजर आ रही है. एक्ट्रेस ने साड़ी कैरी की हुई है. साथ में बाल खुले हुए है. जिसमें मोनालिसा साड़ी में किसी अप्सारा से कम नहीं लग रही है. बता दें कि मोनालिसा ने इन फोटोज को टीवी शो बेकाबू के सेट से शेयर किया है. फैंस एक्ट्रेस के इस पोस्ट पर प्यार बरसाते हुए जमकर कमेंट कर रहे हैं.

 

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बताते चलें कि भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. एक्ट्रेस अक्सर अपने फैंस के साथ तस्वीरें और वीडियोज शेयर करती रहती हैं जिसे देखते ही लोग घायल हो जाते हैं. बता दें कि इन दिनों मोनालिसा टीवी शोज में अपना जलवा बिखेर रही हैं. उनकी एक्टिंग को लोग काफी पसंद कर रहे हैं.मालूम हो कि मोनालिसा ने भोजपुरी इंडस्ट्री में काफी सालों तक काम किया हैं. एक्ट्रेस ने पवन सिंह से लेकर खेसारी लाल यादव तक के साथ काम किया है. आज भी यूपी-बिहार के लोगों में मोनालिसा को लेकर एक अलग क्रेज है.

मां की दी कुरबानी

24 अगस्त, 2015. शाजापुर शहर में डोल ग्यारस की धूम मची थी. गलीमहल्लों में ढोलढमक्का व अखाड़ों के साथ डोल निकाले जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर मुसलिम समुदाय ईद की तैयारी में मसरूफ था.

25 अगस्त, 2015 की ईद थी. सो, हंसीखुशी से यह त्योहार मनाए जाने की तैयारी में जुटा यह समुदाय खरीदफरोख्त में मशगूल था.

कुरबानी के लिए बकरों को फूलमालाओं से सजा कर सड़कों पर घुमाया जा रहा था. बाजार में खुशनुमा माहौल था. कपड़े और मिठाइयों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ लगी हुई थी.

शाजापुर के एक महल्ले पटेलवाड़ी के बाशिंदे इरशाद खां ने इस खुशनुमा माहौल में एक ऐसी दिल दहलाने वाली वारदात को अंजाम दे दिया कि सुनने वालों की रूह कांप गई.

इरशाद खां ने अपने पड़ोसी आजाद की बकरी को गुस्से में आ कर छुरे से मार डाला. शायद वह बकरी इरशाद के घर में घुस गई थी और उस ने कुछ नुकसान कर दिया होगा, तभी इरशाद खां ने यह कांड कर दिया.

अपनी बकरी के मारे जाने की खबर लगते ही आजाद आपे से बाहर हो गया और उन दोनों के बीच तकरार शुरू हो गई. नौबत तूतूमैंमैं के बाद हाथापाई पर आ गई.

इरशाद खां की 65 साला मां रईसा बी भी यह माजरा देख रही थीं. इरशाद खां द्वारा बकरी मार दिए जाने के बाद वे मन ही मन डर गई थीं. कोई अनहोनी घटना न घट जाए, इस के मद्देनजर वे अपने बेटे पर ही बरस पड़ीं. वे चिल्लाचिल्ला कर इरशाद खां को गालियां देने लगीं.

यह बात शाम की थी. हंगामा बढ़ता जा रहा था. इरशाद खां के सिर पर जुनून सवार होता जा रहा था. मां का चिल्लाना और गालियां बकना उसे नागवार लगा. पहले तो वह खामोश खड़ाखड़ा सुनता रहा, फिर अचानक उस का जुनून जब हद से ज्यादा बढ़ गया, तो वह दौड़ कर घर में गया और वही छुरा उठा लाया, जिस से उस ने बकरी को मार डाला था.

लोग कुछ समझ पाते, इस के पहले इरशाद खां ने आव देखा न ताव और अपनी मां की गरदन पर ऐसा वार किया कि उन की सांस की नली कट गई. खून की फुहार छूटने लगी और वे कटे पेड़ की तरह जमीन पर गिर पड़ीं. उन का शरीर छटपटाने लगा.

इस खौफनाक मंजर को देख कर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए. रईसा बी का शरीर कुछ देर छटपटाने के बाद शांत हो गया. मामले की नजाकत देखते हुए इरशाद खां वहां से भाग खड़ा हुआ.

रईसा बी के बड़े बेटे रईस को जब इस दिल दहलाने वाली वारदात का पता चला, तो वह भागाभागा घर आया. तब तक उस की मां मर चुकी थीं.

बेटे रईस ने इस वारदात की रिपोर्ट कोतवाली शाजापुर पहुंच कर दर्ज कराई. पुलिस ने वारदात की जगह पर पहुंच कर कार्यवाही शुरू की. हत्या के मकसद से इस्तेमाल में लाए गए छुरे की जब्ती कर के पंचनामा बनाया गया. मौके पर मौजूद गवाहों के बयान लिए गए. इस के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए डा. भीमराव अंबेडकर जिला अस्पताल भेजा गया.

इरशाद खां वहां से फरार तो हो गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद पुलिस ने उसे दबोच कर अपनी गिरफ्त में ले लिया.

शाजापुर जिला कोर्ट में यह मामला 2 साल तक चला. जज राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने मामले की हर पहलू से जांच करते हुए अभियोजन पक्ष की दलीलों से सहमत होते हुए इरशाद खां को मां की गरदन काट कर हत्या करने के जुर्म में कुसूरवार पाया.

8 सितंबर, 2017 को जज ने फैसला देते हुए उसे ताउम्र कैद की सजा सुनाई. यह सजा भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सुनाई गई.

साथ ही, कुसूरवार पर 2 हजार रुपए का जुर्माना किया गया. जुर्माना अदा न करने पर 2 साल की अलग से कैद की सजा सुनाई गई.

ईद के मौके पर एक बेटे ने बकरे की जगह अपनी मां की कुरबानी दे कर रोंगटे खड़े कर देने वाले कांड को अंजाम दिया.

वही मां, जिस ने उसे 9 महीने पेट में रखा. पालपोस कर उस की हर मांग पूरी करते हुए बड़ा किया. लेकिन शाजापुर में एक बेटे की इस दरिंदगी ने मां की मम?ता को तारतार कर दिया.

गुस्से में उठाया गया यह कदम उस परिवार पर भारी पड़ गया. मां जान से हाथ धो बैठी, जबकि उस के कत्ल के इलजाम में बेटा जेल चला गया.

मैं अपने प्रेमी के साथ संबंध बना चुकी हूं, क्या मेरे होने वाले पति को इस का पता चल जाएगा?

सवाल
मैं 23 साल की हूं. मैं अपने प्रेमी के साथ हमबिस्तरी कर चुकी हूं. 6 महीने बाद मेरी शादी होने वाली है. क्या मेरे होने वाले पति को इस बात का पता चल जाएगा?

जवाब
आप बेफिक्र रहें. पति को इस बारे में नहीं बताएंगी, तो उन्हें कभी पता नहीं चलेगा, क्योंकि अंग की नाजुक झिल्ली अकसर शादी से पहले खेलकूद के दौरान या साइकिल चलाते वक्त अपनेआप फट जाती है.

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शादी एक ऐसा समय है जब लड़का-लड़की एक साथ एक बंधन में बंधकर पूरा जीवन साथ में बिताने का वादा करते हैं. शादी को पुरूष आमतौर पर शारीरिक तौर पर अधिक देखते हैं. शादी का मतलब अधिकतर पुरूषों के लिए सेक्स संबध बनाना ही होता है लेकिन वे ये बात भूल जाते हैं कि शारीरिक संबंध से अधिक महत्वपूर्ण आत्मिक संबंध होता है.

यदि महिला और पुरूष आत्मिक रूप से एक दूसरे से संतुष्ट‍ है तो फिर शारीरिक संबंधों में भी कोई दिक्कत नहीं होती. शादी से पहले यानी सगाई के बाद लड़के और लड़की को एकसाथ खूब समय बिताने को मिलता है लेकिन इसका ये अर्थ नहीं कि वे शादी से पहले फिजीकल रिलेशन बना ले या फिर प्री मैरिटल सेक्सू करें. शादी से पहले संयम बरतना जरूरी है. आइए जानें शादी और संयम के बारे में कुछ और दिलचस्प बातों को.

सगाई और शादी के बीच में संयम के बारे में कुछ और दिलचस्प बातें 

– सगाई के बाद लड़के और लड़की को आपस में एक-दूसरे से मिलना चाहिए और एक-दूसरे को जानना चाहिए, लेकिन इसके साथ ही उन्हें संयम बरतना भी जरूरी है.

– यदि शादी से पहले फिजीकल रिलेशन बनाने के लिए लड़का-लड़की में से कोई भी पहल करता है तो दूसरे को मना करना चाहिए नहीं तो इससे इंप्रेशन अच्छा नहीं पड़ता.

– दोनों को समझना चाहिए कि प्री मैरिटल सेक्स से पहले उन्हें आपस में एक-दूसरे को जानने-सूझने का मौका मिला है जिससे वे पहले एक-दूसरे की पसंद-नापसंद इत्यादि के बारे में जान पाएं.

– ये जरूरी है कि मिलने वाले समय को लड़के व लड़की को समझदारी से बिताना चाहिए न कि फिजूल की चीजों में खर्च करना चाहिए.

– शादी से पहले संयम बरतने से न सिर्फ दोनों के रिश्तों में मजबूती आती है बल्कि दोनों का एक-दूसरे पर विश्वास भी बना रहता है. इसके साथ ही संबंधों में अंतरंगता का महत्व भी बरकरार रहता है.

– प्रीमैरिटल सेक्स में हालांकि कोई बुराई नहीं लेकिन दोनों के रिश्ते पर शादी के बाद मनमुटाव का ये कारण बन सकता है.

– रिश्तों में खुलापन जरूरी है. चाहे तो शादी से पहले आप चीजों को डिस्कस कर सकते हैं. एक-दूसरे के साथ समय व्यतीत कर सकते हैं. एक-दूसरे के साथ घूम-फिर सकते हैं लेकिन इसके लिए जरूरी नहीं कि फिजीकल रिलेशन ही बनाया जाए.

– शादी से पहले फिजीकल रिलेशन से रिश्तों में अवसाद पैदा होने की संभावना बनी रहती है क्योंकि इसके बाद हर समय मन में एक डर और बैचेनी रहने लगती है. इसीलिए इन सबसे बचना जरूरी है.

– सेक्ससुअल रिलेशंस आपके रिश्ते में करीबी ला भी सकते हैं और दूरी बढ़ा भी सकते हैं इसीलिए कोई भी कदम उठाने से पहले सोच-समझ कर विचार करना आवश्यक है.

शादी से पहले संयम बरतने में कोई नुकसान नहीं है बल्कि रिश्तों की मजबूती के लिए यह अच्छा है.

क्या जिम जाने वाला अग्रेसिव होता है?

कुछ साल पहले की बात है. मैं दिल्ली देहात के एक गांव में एक इंटरनैशनल पहलवान के सगाई समारोह में गया था. वहां कई नामचीन लोग आए थे और माहौल बड़ा खुशनुमा था कि अचानक वहां कुछ नौजवान लड़कों का ग्रुप आया. सभी गांवदेहात के थे, पर पैसे वाले भी दिख रहे थे.

हैरत की बात थी कि उन नौजवानों में से कइयों के पास महंगी और मौडर्न पिस्टल थीं और ज्यादातर जिम में जा कर बौडी बनाए हुए थे. उन में जो लड़का सब से बीच में चल रहा था, वह बहुत हैंडसम था और उस की बौडी के तो कहने ही क्या. उस की महंगी शर्ट से बौडी के कट्स साफसाफ दिख रहे थे.

वे लड़के वहां कुछ देर रहे, चंद लोगों और दूल्हे से मुलाकात की और फिर अपनी महंगी गाड़ियों में चले गए.

यह सोच कर मेरे मन में सवाल उठा था कि जो लोग जिम जा कर बौडी बनाते हैं, क्या वे सभी अग्रेसिव होते हैं या हो जाते हैं? वजह, जो लड़के शादी में आए थे, वे दिखने में बदमाश जैसे नहीं थे, पर हाथ में पिस्टल और कसी हुई बौडी से ऐसा लग था कि अगर कोई उन से पंगे लेगा तो वे उसे छोड़ेंगे नहीं.

पैसे दे कर जिम में बौडी बनाने का चलन आजकल बहुत ज्यादा बढ़ गया है. बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि छोटे कसबों में भी अब जिम खुलने लगे हैं. वहां ज्यादातर लड़के इसलिए बौडी बनाने जाते हैं कि दुनिया पर उन का रोब जमे, खासकर जवान लड़कियों पर. जब उन की बौडी दिखाने लायक बन जाती है, तो उन में अकड़ आ जाती है. पर क्या इस के पीछे कोई अग्रेशन होती है, जो उन्हें जिम तक ले जाती है?

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अंजू गुप्ता

इस मसले पर मुंबई के ‘आइडियल बौडी फिटनैस’ जिम में फिटनैस इंस्ट्रक्टर अंजू गुप्ता ने बताया, “जिम जाने से अग्रेशन का कुछ लेनादेना नहीं है, बल्कि जिम जाने से बौडी में जो बदलाव आता है, उस से तो बहुत अच्छा महसूस होता है.

“अमूमन जिम जाने वाले लोग अपने रूटीन को ले कर बहुत अनुशासित होते हैं, तो शायद देखने वाले को लगे कि वे अग्रेसिव हैं. एक बात और है कि जब जिम जाने वाले लोग किसी स्ट्रिक्ट डाइट पर होते हैं, तो उन का मैटाबौलिक रेट बढ़ जाता है, हार्ट रेट ज्यादा हो जाती है, पर यह फिटनैस का हिस्सा है.

“लेकिन अगर हम किसी एक तरह के ऐक्सरसाइज स्टाइल को अपनाते हैं तो ब्रेन को उसी की आदत पड़ जाती है, जिस से अग्रेशन बढ़ने का डर बना रहता है, इसलिए हमेशा जिम और ऐक्सरसाइज के बारे में ही नहीं सोचना चाहिए. अपने को दूसरे ऐसे काम में बिजी रखना चाहिए, जो मन को शांत करते हैं. इस के अलावा खानपान का भी खास ध्यान चाहिए.”

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कपिल गुप्ता

फरीदाबाद के 47 साल के कारोबारी कपिल गुप्ता अपने कालेज के दिनों से जिम में जाने लगे थे. एक समय ऐसा था जब वे अपने सिक्स पैक्स एब्स के लिए जाने जाते थे. तब उन्होंने अपना वजन 106 किलो से घटा कर 82 किलो किया था.

कपिल गुप्ता ने बताया, “मैं जिम में तरहतरह के लोगों से मिला हूं, पर मेरी नजर में कोई ऐसा नहीं आया, जो जिम जौइन करने के बाद अग्रेसिव हुआ हो. हां, अगर कोई शुरू से ही अग्रेसिव सोच का रहा होगा तो कहा नहीं जा सकता.

“जिम अपने शरीर को सेहतमंद रखने की ठीक वैसे ही जगह है, जैसे कोई दूसरे खेल की जगह. यहां आने वाले लोगों का मकसद यही रहता है कि वे अच्छी बौडी बनाएं और अपनी फिटनैस बरकरार रखें.

“जहां तक किसी के अग्रेसिव होने की बात है तो अगर कोई अपने स्वभाव से अग्रेसिव है, तो वह जिम क्या कहीं भी जैसे अपने घर, औफिस, बाजार या फिर किसी दूसरी जगह वैसा ही बरताव करेगा. यह तो बच्चों पर भी लागू होता है. अगर किसी बच्चे में एनर्जी ज्यादा है तो वह दूसरे बच्चों के मुकाबले अग्रेसिव होता है. अगर उस अग्रेसिवनैस का सही से इस्तेमाल किया जाए तो बच्चा शांत रहता है.

“हां, अगर जिम में कोई ऐक्सरसाइस के लिए सप्लीमैंट्स लेता है तो कभीकभार उस के साइड इफैक्ट के तौर पर ऐसे लोग अग्रेसिव हो जाते हैं, पर यह नहीं कहा जा सकता है कि जिम जाने वाले लोग अग्रेसिव हो जाते हैं या होते हैं.”

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निश्चिंत कटोच

भारत के अल्ट्रा रनर निश्चिंत कटोच एक समय अपने ज्यादा वजन से परेशान थे. उन्होंने अपनी लगन से खुद में इस हद तक बदलाव किया कि वे आज कईकई किलोमीटर तक आसानी से दौड़ लेते हैं. इस सब बदलाव में जिम ने बड़ा रोल निभाया है.

निश्चिंत कटोच ने बताया, “यह सब वर्कआउट की इंटैंसिटी पर डिपैंड करता है. हार्ड ट्रेनिंग ऐक्सरसाइज से टैस्टोस्टेरोन के कुदरती लैवल में बढ़ोतरी होती है, जिस से अग्रेशन का लैवल बढ़ सकता है. इस पर कंट्रोल करने का तरीका यही है कि वर्कआउट और इंटैंसिटी में बैलैंस बनाया जाए. गुड मैंटल हैल्थ के लिए वर्कआउट को इस ढंग से करना चाहिए कि जिम जाने वाला अग्रेसिव न हो.”

इस मुद्दे पर एक बात बहुत ज्यादा अहम है कि जिम जाने वाले लोगों में से बहुत से ऐसे होते हैं, खासकर नौजवान, जो बौडी बनाने को ही जिंदगी की सब से बड़ी कामयाबी मानते हैं और उन के पास ऐसी कोई उपलब्धि नहीं होती है, जिस पर वे या उन का परिवार गर्व कर सके.

जानिए आखिर कैसे होती है परफेक्ट Kiss

हांगकांग, सिंगापुर, कनाडा, औस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन में 10,000 से ज्यादा लोगों के सर्वे से पता चला है कि एक परफेक्ट किस क्या होता है. हर देश में सर्वे के रिजल्ट जरा अलग हैं, लेकिन एक बात तो स्पष्ट है कि जब आप किसी को डेट कर रहे होते हैं तो मिलने और फिर मुलाकीात के बाद किस करना सभी को पसंद आता है. और पहला किस तो दोनों के ही लिये बहुत महत्वपूर्ण और यादगार होता है.

किस का अध्ययन करने वाले philematologists के अनुसार दुनिया में 90 फीसदी लोग किस करते हैं. हम यहां आपको बता रहे हैं कि दस हजार लोगों के अनुसार परफेक्ट किस क्या होता.

1. जरूरी नही कि सब डेट के अंत में किस करना चाहें

हैरानी की बात है कि सर्वे से पता चला है कि हर कोई जरूरी नहीं कि डेट के खत्म होने पर किस करना पसंद करता हो. सिर्फ 41 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे डेट के अंत में किस करना पसंद करेंगे. सर्वे में ये नहीं बताया गया कि बाकी (59%) क्या चाहते हैं. दिलचस्प बात ये है कि डेट खत्म होने पर किस करने वालों का प्रतिशत 50 से कम है.

2. 2 से 5 सैकंड का होता है परफेक्ट किस

सर्वे के अनुसार 61 फीसदी पुरुष और महिलाओं का मानना है कि डेट खत्म होने पर बस 2 से 5 सैकंड का किस ही परफेक्ट होता है. सवाल ये है कि पांच सैकंड में क्या कोई फीलिंग हो सकती है?

3. मुंह से बदबू सबसे बदतर

इससे कोई चौंकेगा नहीं क्योंकि कोई भी नहीं चाहता कि जिसे वह किस कर रहा है उसके मुंह से बदबू आए. 38 फीसदी लोगों का मानना है बदबू से बदतर और कुछ हो नहीं सकता और इनकी शिकायत भी यही है. हमारा सुझाव है कि अगर आप सिगरेट पीते हैं तो डेट पर जाने के पहले नींबू जरूर चूस कर जाएं.

4. किस करना नहीं आता तो कोई बात नहीं रिश्ते नहीं टूटेंगे

हम सभी चाहते हैं कि हमें ऐसा कोई मिले जो बिल्कुल वैसे ही किस करे जैसा हम करते हैं लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. लेकिन उन लोगों को डरने की जरूरत नहीं है जिन्हें ठीक से किस करना नहीं आता. सर्वे के अनुसार 32 फीसदी पुरुष अपनी महिला को ठीक से किस करना सिखाने में दिलचस्पी रखते हैं जबकि 38 फीसदी महिलाएं अपने पार्टनर को किस सीखने के लिये समय देने को तैयार हैं.

5. लोग सिर्फ होंठों पर ही किस नहीं चाहते

हालंकि होंठ ऐसी जगह है जहां अक़्सर लोग किस करते हैं या चाहते हैं लेकिन सिंगापुर, हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया में लोग माथे पर किस करना या करवाना ज्यादा पसंद करते हैं. अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में गाल पर किस करना, करवाना पसंद किया जाता है.

6. दो तरह से किस करने/करवाने का इशारा

हांगकांग, सिंगापुर, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में अगर कोई किस चाहता है तो वह आंखों में आंखें डालकर देखेगा/देखेगी हालंकि कितनी देर तक देखेगा/देखेगी, ये सर्वे में साफ नही है. अमेरिका और कनाडा में लोग इस मामले में लोग जरा निर्लज्ज होते हैं यानी तपाक से किस.

7. टंग किसिंग

कहते हैं टंग किसिंग फ्रांस की देन है लेकिन ये बस उसी देश में पसंद की जाती है क्योंकि बाकी दुनिया टंग किसिंग की कोई खास दीवानी नहीं है. हांगकांग और सिंगापुर में 44 फीसदी लोगों को लाइट और सहज किस पसंद है, लेकिन हां थोड़ा बहुत टंग का स्पर्श चलेगा. ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन में 46 फीसदी टंग के बगैर डीप किस पसंद करते हैं.

बड़ा सवाल : नाच पर आंच क्यों

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के ब्लौक छपारा की भीमगढ़ कालोनी में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से आ कर रह रही लता डांस पार्टी में 40 लोग थे. इन में नौजवान लड़कियों की तादाद ज्यादा थी. भीमगढ़ कालोनी में पार्टी के सदस्यों ने डेरा डाला. किराए पर लिए गए कच्चेपक्के मकानों में बुनियादी सहूलियतों का टोटा था, पर इन्हें इस से कोई खास फर्क पड़ा, हो ऐसा लगा नहीं. अस्थायी गृहस्थी में जरूरत का सारा सामान था, मसलन खाना बनाने के बरतन, कपड़े रखने के लिए पेटियां, सूटकेस और इन के लिए सब से ज्यादा अहम मेकअप का सामान जो करीने से सजा कर रखा गया था. डांसरों की नई चमकीली ड्रैसें संभाल कर दीवार के सहारे टांग दी गई थीं. 3-4 अधनंगे बच्चे भी इन के साथ थे जो दिनभर हुड़दंग मचाते रहते थे पर गांव के दूसरे बच्चे इन के साथ नहीं खेलते थे, जिस का इन्हें मलाल था.

बच्चे तो ठहरे बच्चे, जो यह नहीं समझ पाए कि गांव के बच्चों को उन से दूर रहने की नसीहत और समझाइश दी गई है. पर बिगड़ते माहौल का अंदाजा डांस पार्टी की उम्रदराज मुखिया यानी मैनेजर जोति बाई को था और कमसिन, खूबसूरत, तीखे नैननक्श वाली डांसर रति को भी. पर इन्हें इस तरह के एतराज का तजरबा है, लिहाजा इन्होंने कोई खास तवज्जुह गांव वालों के एतराज पर नहीं की. फिर भी एक चिंता तो लग ही गई थी.

छपारा में डेरा डालने से पहले ये लोग थाने गई थीं और वहां अपनी आमद दर्ज कराई थी. आमद के साथ मुंहजबानी यह ब्योरा भी इन्होंने थानाध्यक्ष को दिया था कि हम नाचनेगाने वाले लोग हैं और हर साल यहां आ कर ठहरा करते हैं. ऐसा एहतियात के तौर पर इसलिए किया गया था कि अगर इस इलाके में कोई जुर्म हो तो गांव वाले उस का ठीकरा डांस पार्टी के सिर पर न फोड़ दें और दूसरा मकसद इस से भी ज्यादा अहम, अपने ग्रुप की सुरक्षा का था.

लता डांस पार्टी के आ जाने की खबर मिनटों में इलाके में फैल गई थी और अपने डेरे पर पहुंचने के तुरंत बाद ही जोतिबाई को बुकिंग मिलनी शुरू हो गई थीं. कुछ पुराने जान पहचान वाले लोग खासतौर से मिलने आए थे जिन्होंने यह तसल्ली कर ली थी कि डांस पार्टी साल के आखिर तक तो रुकेगी ही, और अगर काम मिलता रहा तो होली तक भी रुक सकती है.

डांस पार्टी के आ जाने की खबरभर से न केवल छपारा बल्कि आसपास के गांवों में भी रौनक सी आ गई थी. गांव देहातों में अब गणेश और दुर्गा की झांकियां इफरात से लगने लगी हैं जिन में तबीयत से नाच गाना होता है. कुकुरमुत्ते सी उग रही धार्मिक समितियों में राजनेता वोट पकाते हैं, पंडे पुजारी दक्षिणा झटकते हैं और आमलोग झांकी में बैठी मूर्ति के पांव पड़ कर सीधे जा पहुंचते हैं स्टेज के नीचे खासतौर से बने पंडाल में, जहां फिल्मी गानों की तर्ज पर रति के साथ दूसरी डांसर्स थिरक रही होती हैं.

डेरे पर डांस पार्टी की सुबह नहीं होती, बल्कि सीधे दोपहर होती है, क्योंकि नाचगाने का प्रोग्राम सुबह तक चलता है. इस दौरान गांव की आबादी के मुताबिक, 4-5 सौ से ले कर 2 हजार तक की तादाद में बैठे लोग अपने पसंदीदा गाने की फरमाइश स्टेज तक पहुंचाते और खूब नोट भी लुटाते हैं.

रातभर फरमाइशी गानों पर डांस पेश करते करते इन डांसर्स का अंग अंग दुखने लगता है पर इन का जोश कम नहीं होता. एक एक कर ये स्टेज पर आ कर नाचती हैं, कभी 2-4 के समूह में भी डांस पेश करती हैं.

कौन हैं ये

केवल राजनांदगांव या छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के अधिकांश जिलों में ऐसी हजारों डांस पार्टियां हैं जो तकरीबन 8 महीने मध्य प्रदेश के किसी जिले में जा कर अपना डेरा डालती हैं और अपना पेट पालती हैं. इन डांसरों में कुछ आदिवासी जाति की लड़कियां हैं तो कुछ दूसरी छोटी जाति की भी हैं. गानेबजाने का जरूरी सामान डांस पार्टी अपने साथ ले कर चलती है.

नाचगाना इनका पुश्तैनी पेशा है. इन के समूह में मर्द कहने भर को होते हैं जिन का काम बाहरी भागदौड़ करना और डांस के दौरान स्टेज के नीचे तैनात रहना होता है, जिस से कभी कोई झगड़ा फसाद हो तो ये हालत संभाल लें. जब लड़कियां डांस कर रही होती हैं तब ये फरमाइशी पर्चियां बटोर रहे होते हैं.

ग्रुप की मुखिया जोति बाई बताती हैं, ‘‘हम तो अपनी दादी नानी के जमाने से इसी तरह प्रोग्राम देते चले आ रहे हैं. यही हमारा पेशा है. इस के अलावा हमें कुछ और पता नहीं.’’ हां, इतना जरूर है कि पहले ग्रुप का नाम डांस पार्टी न हो कर नौटंकी हुआ करता था जिन में गानों के साथ साथ कुछ पुराने जमाने के नाटक भी खेला करते थे.

डांस कहां से सीखा? पूछने पर रति झिझकती हुए बताती है, ‘‘उस ने डांस बचपन से बुआओं और मौसियों से सीखा है और लगभग सभी हिट फिल्मी गानों पर वह नाच लेती है. पहले टेपरिकौर्डर और कैसेट से गाने सुन अभ्यास करती थी पर अब सीडी व पैनड्राइव आ गई हैं जिन के जरिए वह नाचगानों का अभ्यास करती है.’’ रति आगे बताती है, ‘‘एक प्रोग्राम की बुकिंग 2-3 हजार रुपए की होती है पर पार्टी तगड़ी हो तो 8-10 हजार रुपए तक मिल जाते हैं.’’

ये पैसे न्योछावर के पैसों से अलग होते हैं जिन्हें ज्यादा से ज्यादा झटकने की हर डांसर कोशिश करती है कि भीड़ का दिल जीत सके क्योंकि पैसा अच्छे डांस पर ज्यादा बरसता है. एक प्रोग्राम में 4-5 हजार रुपए की न्योछावर मिलनी आम बात है. डेरे पर जा कर पूरे पैसे का हिसाब होता है और रकम सब में बराबर बंट जाती है. कुछ सीनियर डांसर्स को कुछ ज्यादा पैसा मिलता है क्योंकि वे अपने नाम से जानी जाती हैं और भीड़ जमा करने में उन की भूमिका अहम होती है.

नहीं हैं धंधेवालियां हम

रति और जोति दोनों मानती हैं कि हर किसी को उन्हें और उन के पेशे को ले कर गलतफहमी हो जाती है, जिसे वे जल्द दूर भी कर देती हैं. जब गांव वालों को बात समझ आ जाती है तो फिर कोई झंझट नहीं रह जाता. इसके बाद भी कुछ लोग पेशकश कर ही देते हैं जिन्हें ये  सख्ती दिखाते झिड़क देती हैं.

जोति और रति को भी अपना इतिहास पूरा नहीं मालूम जिस की उन्हें जरूरत भी महसूस नहीं होती पर अंगरेजों के जमाने से कुछ छोटी जाति वाले नाचगा कर अपना पेट भरते रहे हैं. पहले ये लोग जमींदारों या दूसरे पैसे वालों के यहां शादी ब्याह या दूसरे मौकों पर नाचते थे लेकिन जैसे जैसे वक्त गुजरता गया वैसे वैसे इन के पेशे में भी तबदीलियां आती गईं.

जमींदारी खत्म हुई तो ये लोग दूसरे सूबों में जा कर नाच गाना करने लगे और अब हालत यह है कि इन की जाति की लड़कियां मुंबई के डांस बारों तक जा पहुंची हैं. कुछ नागपुर, पुणे सहित महाराष्ट्र के दूसरे बड़े शहरों के डांसबार में पहुंच गई हैं. पर अधिकांश लड़कियां शहर जाना ठीक नहीं समझतीं, ये किसी मंडली में ही खुद को महफूज महसूस करती हैं.

कमाई ज्यादा नहीं

पैसा इन पर बरसता जरूर है लेकिन वह इतना नहीं होता कि ये लोग शान की जिंदगी जी पाएं. पेट भरने लायक ही ये कमा पाती हैं. इन लड़कियों के सपने बहुत बड़े नहीं हैं. कभी कभार शौकिया तौर पर ये कोई बड़ा शहर घूम आती हैं, वरना इन का पूरा वक्त अपनी डांस पार्टी के साथ घूमते रह कर प्रोग्राम करने और बारिश के 4 महीने अपने गांव में गुजारने में बीतते हैं. बारिश में चूंकि कमाई नहीं होती, इसलिए बाकी 8 महीने कमाया पैसा खर्च हो जाता है.

कुछ डांसर्स ने स्कूल का मुंह देखा है पर सिर्फ 2-4 साल के लिए ही. इस के बाद घुंघरुओं ने इन्हें जकड़ा तो जवानी कब आ कर चली गई, इन्हें पता भी नहीं चला. 35-40 वर्ष की होते होते कुछ डांसर्स शादी कर लेती हैं. बाद में यही अपनी डांस पार्टी बना लेती हैं क्योंकि तब तक इन्हें प्रोग्रामों और दूसरे कई मसलों का तजरबा हो जाता है.

कमाई का बड़ा हिस्सा ड्रैस और मेकअप के आइटमों पर खर्च हो जाता है. एक डांसर बताती है, ‘‘और कोई शौक हमें नहीं है, चांदी के गहने जरूर हम बनवाती हैं, यही हमारी बचत है जो बुढ़ापे में हमारा सहारा बनती है.’’

यह डांसर बताती है कि उस की दादी नानी सस्ते कौस्मेटिक प्रौडक्ट इस्तेमाल करती थीं पर ये लोग ब्रैंडेड प्रौडक्ट इस्तेमाल करती हैं.

बड़े शहरों के मुकाबले कस्बों में प्रोग्राम करना ये ज्यादा पसंद करती हैं क्योंकि वहां आमदनी ज्यादा होती है और अन्य अड़चनें भी कम रहती हैं. 6-8 महीने में ये तकरीबन 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी गांवों में प्रोग्राम दे आती हैं.

छोटी जगहों में नाच गाने का चलन ज्यादा होने लगा है और लोगों के पास वक्त भी खूब होता है. नाच गाने के शौकीन लोग रातरातभर बैठे डांस का लुत्फ उठाते हैं और दिल खोल कर डांसरों पर पैसे लुटाते रहते हैं.

बावजूद इस के यानी हाड़ तोड़ मेहनत के, इन डांसरों की कमाई इतनी नहीं है कि ये बुढ़ापे को ले कर बेफिक्र हो सकें. इसलिए इन की हर मुमकिन कोशिश यह रहती है कि उम्र यानी जवानी रहते ज्यादा से ज्यादा पैसा कमा लें.

मुसीबतें भी कम नहीं

ये डांस पार्टियां कहीं भी जाएं, परेशानियां और मुसीबतें साए की तरह इन के पीछे लगी रहती हैं. कहीं पुलिस वाले परेशान करते हैं तो कहींकहीं स्थानीय रसूखदार नाक में दम कर डालते हैं.

डांसरों के साथ छेड़ छाड़ आम बात है, जिस की ये इतनी आदी हो जाती हैं कि ये उस का लुत्फ उठाने लगती हैं. हालांकि डांस के जलसों में भारी भीड़ के चलते कोई खास खतरा इन्हें नहीं रहता लेकिन दिक्कत उस वक्त पेश आती है जब गुंडे मवाली टाइप के लोग इन के डेरे के बाहर चक्कर काटना शुरू कर देते हैं.

ऐसे वक्त में डांस पार्टी की उम्रदराज औरतें काफी काम आती हैं जो इन शोहदों और लफंगों को ऐेसे काबू करती हैं कि ये दोबारा डेरे के पास नहीं फटकते. पर ऐसा करते वक्त इन्हें काफी सब्र, समझदारी और दिमाग से काम लेना पड़ता है. अगर चक्कर काटने वाले रसूखदारों के बेटे हों तो उन से निबटना थोड़ा मुश्किल होता है और उन्हें फटकारने पर कभीकभी लेने के देने पड़ जाते हैं.

आजकल गांवों में सभी नेता हो गए हैं जिन की पहुंच ऊपर तक होती है. लिहाजा, वे बेइज्जत किए जाने पर हल्ला मचा देते हैं कि ये डांस पार्टियां माहौल खराब कर रही हैं. वे लोग प्रचार यह करते हैं कि इन डेरों पर नाचने वालियां नहीं, बल्कि धंधेवालियां हैं. लिहाजा, इन्हें भगाया जाए.

एक बड़ी परेशानी उस वक्त भी खड़ी हो जाती है जब गांव या कसबे के किसी बाहुबली का संदेश आ जाता है कि साहब अकेले में अपनी हवेली पर डांस देखना चाहते हैं और इस बाबत मुंहमांगी रकम देने को तैयार हैं. रंगीन मिजाज रसूखदारों की हवेली में जा कर डांस करना खतरे वाला काम होता है क्योंकि नशे में वे मनमानी पर उतारू हो आएं तो उन से निबटना आसान काम नहीं होता. ऐसी हालत में कई बार डांसरों को वह सब झेलना पड़ता है जिस से वे खुद को अब तक बचाए रखे थीं.

इन परेशानियों से बचने के लिए ये उन बड़े लोगों से दूर ही रहती हैं जो भीड़ में अक्सर डांस देखना अपनी तौहीन समझते हैं.

छपारा की भीमगढ़ कालोनी के लोगों ने थाने जा कर इस डांस पार्टी की शिकायत की थी कि इन लोगों के यहां आने से माहौल खराब हो रहा है. इस पर भीमगढ़ पुलिस चौकी के इंचार्ज जी पी शर्मा ने शिकायत करने वालों से पूछा था कि आप ही बताइए, किस कानून के तहत इन पर इल्जाम लगा कर कार्यवाही की जाए. ये लोग अपना हुनर दिखा कर पेट पाल रहे हैं और कानून हर किसी को इस की इजाजत देता है.

इस पर गांव वालों ने सरपंच राजकुमारी काकोडि़या की अगुआई में यह शिकायत की थी कि इन लोगों के खुले में शौच जाने से गंदगी फैलती है जबकि उन की पंचायत निर्मल ग्राम पंचायत है.

छोटी जाति से चिढ़

इस इल्जाम में कोई खास दम नहीं था, इसलिए पुलिस वालों ने इस पर भी ध्यान नहीं दिया. लेकिन हर कोई जानता है कि इन डांसर्स से चिढ़ की एक अहम वजह उन की छोटी जाति का होना भी है.

चिढ़ भी इतनी कि छोटी जाति वालों को सार्वजनिक स्थलों से पानी नहीं भरने दिया जाता. उन के साथ होने वाला जातिगत भेदभाव किसी सुबूत का भले मुहताज नहीं हो, लेकिन छपारा के मामले से एक बात यह भी हैरत अंगेज तरीके से लगातार हुई कि सार्वजनिक शौचालयों तक में इन के साथ भेदभाव होने लगा है.

अगर इन डांसरों के खुले में शौच जाने से ग्राम पंचायत निर्मल नहीं रह जाती है तो इन्हें सार्वजनिक शौचालयों में क्यों नहीं जाने दिया गया, इस सवाल का जवाब शायद ही कोई सरपंच दे पाए.

हकीकत यह है कि चूंकि ये आदिवासी और दूसरी छोटी जाति की थीं, इसलिए आंख में खटक रही थीं. ये बिंदास हो कर नाच का अपना हुनर पेश कर रही थीं, इसलिए इन्हें माहौल खराब करने वाली कहा गया. सालों से यह डांस पार्टी यहां आ रही है और सभी तरह के लोग इन के डांस का लुत्फ उठाते हैं. धार्मिक जलसे इन से आबाद होने लगे, इसलिए कई ऊंची जाति वाले भी इन की तरफदारी करने लगे हैं क्योंकि उन की खुदगरजी इन से जुड़ी है और पूरी भी होती है. इसीलिए इन्हें आसानी से खदेड़ा नहीं जा सकता.

चिंता की बात, कला में भी भेदभाव है. किसी सरकारी या गैर सरकारी बड़े जलसे में कोई नामी डांसर स्टेज पर डांस पेश करे तो उस का नाम और फोटो अखबारों में छपता है और टीवी चैनल्स में भी उन्हें दिखाया जाता है. पीढि़यों से नाच रही जोति और रति बाई का डांस, डांस नहीं है बल्कि माहौल खराब करने वाला पेशा है, जबकि उन के बारे में ऐसा कहा जाता है, तो तय है दोहरापन लोगों की सोच में है. जिन्हें सरकार बड़े बड़े इनाम, तमगे और खिताब दे दे वह कला हो जाती है और ये कलाकार, जिन के हिस्से में हवाईयात्रा, बड़े बंगले और एयरकंडीशन वगैरा तो दूर की चीजें हैं, पेटभर खाने के लाले पड़े रहते हैं, जाने क्यों कलंक करार दिए जाने लगते हैं.

छपारा के एक युवा पत्रकार हाशिम खान की मानें तो यह छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार की हकीकत उजागर करती बात है कि वहां के बाशिंदों को रोजगार के लिए यहां वहां भटकना पड़ रहा है. जाहिर है सरकारी योजनाओं का फायदा इन्हें नहीं मिल पा रहा है जिन्हें ले कर बड़ेबड़े दावे किए जाते हैं. इन के बच्चे पढ़ नहीं पा रहे, इस की जिम्मेदारी किस की है, कहां गया सर्वशिक्षा अभियान और रोजगार का वादा. इन बातों पर गौर किया जाना चाहिए.

हाशिम का जोश और आरोप अपनी जगह ठीक है पर गड़बड़ ऊपर से भी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परंपरागत व्यवसायों को बढ़ावा देने की बात करते रहते हैं लेकिन वह राज मिस्त्रियों और कुम्हारों तक में सिमटी रहती है.

देशभर में एक अंदाजे के मुताबिक, घुमक्कड़ नाचनेगाने वालियों की तादाद सवा करोड़ से भी ज्यादा है पर इन के लिए न कुछ सोचा जा रहा, न ही कुछ किया जा रहा. मानो नाचगाना कोई गुनाह हो.

गांव गांव घूम कर आम और खास लोगों का दिल बहलाने वाली ये डांसर्स उम्रभर तपती हैं, तब कहीं जा कर अपना और अपने घरवालों का पेट भर पाती हैं. इस पर भी तरह तरह की जिल्लतें, जलालतें और दुश्वारियां इन्हें उठानी पड़ती हैं.

इन्हें समाज में बराबरी का दर्जा या इज्जत न मिले, यह खास हर्ज की बात नहीं, हर्ज की बात है इन्हें दोयम दर्जे का मानना, इन्हें धकियाना व धकेलना और इन पर घटिया इलजाम लगाना.

बदलाव इतनाभर आया है जो इन के लिहाज से अच्छा है या बुरा, यह तय कर पाना मुश्किल है कि अब धार्मिक जलसे छोटी जाति वाले भी करने लगे हैं और झांकियों में भी अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करने लगे हैं, इसलिए वे इन छोटी जाति वालों व डांसर्स को बुलाने लगे हैं, नचाने लगे हैं और पैसा बरसाने लगे हैं. यह बात ऊंची जाति वालों को रास नहीं आ रही, मानो भगवान को पूजने और खुश करने का हक उन्हीं को है.

धर्म के नाम पर छोटी जाति वाले कैसेकैसे ठगे जा रहे हैं, यह अलग मुद्दा है पर इन डांसर्स का इस में अहम रोल है जो गणेश और दुर्गा की झांकियों में नाचगा कर रौनक ला देती हैं.

नोटबंदी की मार

छपारा की डांस पार्टी शिकायतों और दबाव में आ कर नहीं गई, पर 8 नवंबर की नोटबंदी इन डांसर्स को भी महंगी पड़ी. जैसे ही बड़े नोटों का चलन बंद हुआ तो अफरा तफरी मच गई और नोटों की कमी की मार इन छोटे स्तर की डांसर्स पर भी पड़ी. मुंबई के डांस बार हों या देहात के नाचने गाने वाले कलाकार, सभी को पैसों के लाले पड़ गए.

छोटी जगहों में डांसरों पर छोटे नोट ज्यादा लुटाए जाते हैं. जब उन का ही टोटा पड़ गया तो इस डांस पार्टी ने राजनांदगांव वापस जाने में ही भलाई समझी.

अब आने वाले कल को ले कर जोति बाई पसोपेश में है कि क्या होगा. सालभर की कमाई का कोटा पूरा नहीं हुआ था. इसलिए खानेपीने की समस्या सब लोगों के सामने मुंहबाए खड़ी है. नोटों की किल्लत के चलते इन का पूरा हिसाब किताब गड़बड़ा गया है.

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