‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ पाने वाले बांसुरी वादक नवीन कुमार बने पहले भरतीय

‘रोजा’,‘दिलसे’,‘‘कल हो ना हो’’ और दिल बेचारा’ सहित तकरीबन बीस फिल्मों में बांसुरी बजा चुके तथा ‘नवीन बांसुरी’ सहित कई बांसुरी का इजाद करने वाले बांसुरी वादक व बौलीवुड के मषहूर संगीत ज्ञनवीन कुमार राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी ख्याति अर्जित कर चुके हैं.उन्हे कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है. हाल ही में नवीन कुमार को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए अमरीकी राष्ट्रपति जोसेफ आर. बाइडेन ने ‘प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुरस्कार’ से सम्मानित किया.नवीन कुमार पहले भारतीय हैं,जिन्हे उनके कलात्मक व रचनात्मक योगदान द्वाराअमरीकीराष्ट्पति द्वारासम्मानितकियागया.इतनाही नही नवीन कुमार को मैरी लैंड,यूएसए में मॉन्ट गोमरी काउंटी स्थानीय सरकार द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया.

अपनी मनमोहक संगीत की धुनों के लिए मशहूर नवीन कुमार पिछले चालिस वर्षा से संगीत जगत व बांसुरी वादन के क्षेत्र में लगातार काम करते आ रहे हैं.1984 में महान संगीत कार इलियारा जाने सबसे पहले नवीन कुमार को अपनी कला का प्रदर्षन करने  का अवसर दिया था.उसके बाद उन्होंने ए.आर. रहमान, प्रीतम, शंकर-एहसान-लॉय, साजिद-वाजिद, सलीमसुलेमान,शिवमणि, लुइसबैंक्स, मैंडो लिन श्री निवास और जॉन मैकलॉघलिन जैसे प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ काम किया है..

1992 में सबसे पहले उन्हे फिल्म ‘‘रोजा’’ के लिए बांसुरी बजायी थी. इसके बाद 1995 में ए आर रहमान के निर्देषन में फिल्म ‘बांबे’ के लिए ऑक्रेस्ट्ागीत ‘‘बॉम्बेथीम‘‘ से उन्हे पहचान मिली थी.इसके बाद उन्होने ‘दिलसे’ और ‘ताल’ में भी अपनी बांसुरी का कमाल दिखाया था.लेकिन 2001 में प्रदर्षित फिल्म ‘‘रहना है तेरे दिल में’’ के गीत ‘‘जराजरा..’ में उनके बांसुरीवादन ने तहलका मचा दिया था इसके बाद फिल्म ‘‘ कलहोनाहो’’ का शीर्षक गीत गाया था.फिर ‘दिलबेचारा‘, ‘कभी अलविदा ना कहना‘, ‘रावण‘, ‘जब वी मेट‘ और ‘किसना‘ जैसी कई बड़ी बौलीवुड फिल्मों में वह अपनी कला का जादू विखेर चुके हैं.उन्होंने ए.आर. रहमान के केसाथ 7 अप्रैल 2010 कोलंदन के साउथ बैंक सेंटर में बांसुरी बजायी थी.

संगीत कार नवीन कुमार ऐसे बांसुरी के दीवानों में से हैं,जिन्होने मधुर धुनें बनाने के साथ ही नए वाद्य यंत्र ‘‘तारवालीबांसुरी’ का आविष्कार भी किया.इस आविष्कार के संदर्भ में नवीन कुमार ने एक बार कहा था-‘‘मैं चेन्नई के एक स्टूडियो में बांसुरी का रियाज कर रहा था.तभी मुझे एक नई आवाज सुनायी दी और मुझे अहसास हुआ कि मेरे दोस्त ने जो गिटार पकड़ा हुआ था,उसके तार मेरी बांसुरी की ध्वनि के साथ कंपन कर रहे हैं.मुझे लगा यह मुझे एक नई बांसुरी टोन बना ने में मदद कर सकता है.फिर मैने प्रयोग करना षुरू किया और एक दिन मैने एक नई बांसुरी का इजाद किया,जिसे मैने ‘‘नवीनबांसुरी’नाम दिया.इस बांसुरी में बांसुरी की धुन और तारों का कंपन (बांसुरी के किनारेपर एक तार की नियुक्ति के माध्यम से) की विशेषता है.’’

नवीनकुमार यहींपर नही रूके.उन्होंने पश्चिमी शास्त्रीय बांसुरीपरभी यही तक नीक लागू की और एक कांच की बांसुरी और एक ओवर टोन बांसुरी (जिसमें छेदनहीं है) भी तैयार की है.बांसुरी आविष्कारों के उस्ताद ने अपने प्रयोगों को जारी रखा और पारंपरिक भारतीय पाइपों में एक मधुरस्वर, आलाचीनी बांसुरी को भी शामिल किया.इस संदर्भ में बांसुरी वादक नवीन कुमार कहते हैं-‘‘बांसुरी को लेकर मैने जितने भी प्रयोग किए उसके पीछे मेरा मकसद एक नए स्वर की तलाष करना रहा,जो मूल बांसुरी की मूल ध्वनि को बढ़ा सके.‘‘

नवीन कुमार सिर्फ स्टेज षो और बौलीवुड तक ही सीमित हों,ऐसा नही है.उनके ‘साइलेंसइजब्लिस‘, ‘फ्लुटट्रोनिक्स‘, ‘मेलोडीजऑफलव‘ और ‘कैफे फ्लूड‘ जैसे कई संगीत अलबम भी बाजार में आ चुके हैं.गर्व की बात है कि नवीन कुमार की बहुमुखी प्रतिभा ने अमरीकी राष्ट्रपति बाईडेन को प्रभावित किया.

BB OTT2: घर से आउट होते ही Aaliya Siddiqui ने सलमान खान पर साधा निशाना, कही ये बात

इन दिनों सलमान खान शो चर्चा में चल रहा है शो को शुरु हुए दो हफ्ते हो चुके है और इन दो हफ्तों में शो में उतार-चढ़ाव देखें है शो में हर दिन नए ट्विस्ट और मोड़ देखने को मिल रहे है शो दिन पर दिन हिट होता जा रहा है. ऐसे में शो बीते दिनों शॉकिंग मिड वीक इविक्शन हुआ है जिसमें नवाजुद्दीन सिद्दिकी की एक्स वाइफ आलिया सिद्दिकी को इस शो से बाहर कर दिया. लेकिन मामला यही शांत नहीं हुआ. शो से बाहर आते ही आलिया का इंटरव्यू हुआ है जिसमें उन्होंने बिग बॉस के कंटेस्टेंट को लताड़ा साथ ही सलमान खान पर निशाना साधा और उन्हे बॉयस्ड कह दिया है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Aaliya Siddiqui (@aaliyanawazuddin)

आपको बता दें, कि आलिया सिद्दिकी ने बिग बॉस ओटीटी 2 से बाहर आने के बाद मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में सलमान खान को ‘बायस्ड’ करार दिया. वीकेंड का वार के दौरान आलिया सिद्दिकी को घर में उनके अतीत और शादी में आई दिक्कतों को लेकर बात करने से रोका गया था. इसके बाद उन्हें लगा कि ऐसा करके सलमान खान ने अपने दोस्त नवाजुद्दीन सिद्दिकी की साइड ली थी. आलिया सिद्दिकी ने कहा कि घर में हर कोई अपनी निजी जिंदगी के बारे में बात करता है. जिसमें पूजा भट्ट भी हैं. मगर सिर्फ उन्हें ही निशाना बनाया गया. आलिया सिद्दिकी ने कहा, ‘सलमान जी बिल्कुल बायस्ड होके बोले. वहां एक स्टार ने दूसरे स्टार का सपोर्ट किया है. ये बताता है कि कैसे कोई अपनी शक्ति का इस्तेमाल दूसरे लोगों के लिए करता है. मैं ऐसा कहने से बिल्कुल भी नहीं डरती. क्योंकि मुझे पता है कि मैं सही हूं. शो में हर कोई अपने अतीत और अपनी जिंदगी के बारे में बात करता है.पूजा जी, फलक नाज ने अपने भाई और उनकी जेल के बारे में बात की.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Aaliya Siddiqui (@aaliyanawazuddin)

बिग बॉस ओटीटी 2 में पूजा भट्ट और आलिया सिद्दिकी के बीच अच्छे रिश्ते नहीं रहे. दोनों ने जमकर एक दूसरे को टारगेट किया और एक दूसरे को नॉमिनेट किया था. आलिया सिद्दिकी ने घर से बाहर निकलते ही पूजा भट्ट के कमेंट ‘मैं महेश भट्ट की बेटी हूं’ पर सवाल करते हुए पूछा, ‘उन्होंने मेरे लिए इतना बड़ा स्टेटमेंट यूज किया. जब मैंने खुद को बचाया था. उन्होंने गर्व से कहा कि मैं महेश भट्ट की बेटी हूं. वो खुद एक एक्टर हैं और डायरेक्टर रही हैं और अपने वक्त में एक बड़ी स्टार रही हूं. वो अपना गेम अपनी मैरिट पर क्यों नहीं खेल सकतीं.’

फिल्म: Neena Gupta को KISS के बाद करना पड़ा था ये काम, पढ़े पूरी खबर

बॉलीवुड एक्ट्रेस नीना गुप्ता (Neena Gupta) अपने बोल्ड लुक और बेबाक बातों के लिए जानी जाती है उनकी फिल्मों में एक्टिंग भी तारीफें लायक है. अपने बेबाक बयानों से नीना गुप्ता फैंस के होश उड़ा देती है. नीना गुप्ता इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म लस्ट स्टोरीज 2 ( Lust Stories 2) को लेकर सुर्खियों में है. ऐसे में नीना गुप्ता ने अपने कई एक्सपीरियंस शेयर किए है और बताया है कि जब उन्हें पहली बार KISS करनी पड़ी तो वह कैसा फील कर रही थी, इतना ही नहीं उन्हे डेटॉल से कुल्ला भी करना पड़ा था.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Instant Bollywood (@instantbollywood)

आपको बता दें, कि एक्ट्रेस नीना गुप्ता  ने एक  इंटरव्यू में बताया कि वह अपने पहले किसिंग सीन से पहले रात भर सो नहीं पाई थीं. एक्ट्रेस ने बताया, “मेरा बहुत साल पहले एक सीरियल आया था दिलीप धवन के साथ. उसमें पहली बार टीवी में किसिंग सीन था लिप टू लिप. मैं पूरी रात सो भी नहीं पाई थी. मैं किस कैसे करूंगी. मैंने कहा कि तू एक्टर है और तुझे ये करना पड़ेगा. जैसे ही ये सीन खत्म हुआ तो मैं भागकर गई और मैंने डेटॉल से कुल्ला किया.”

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Neena Gupta (@neena_gupta)

नीना गुप्ता की बात सुनकर एक्टर अंगद बेदी (Angad Bedi) हैरान हो गए, जिस पर एक्ट्रेस ने कहा, “हां क्योंकि ये मेरे लिए बहुत मुश्किल था. मेरे लिए ऐसे किसी को किस करना बिल्कुल भी आसान नहीं था, जिसे मैं जानती तक नहीं थी.” बता दें कि एक्ट्रेस नीना गुप्ता ने ‘दिललगी’ नाम के शो में अपने को-एक्टर को लिप किस किया था. एक्ट्रेस ने बताया, “उस जमाने में स्क्रीन पर फिजिकल इंटीमेसी नहीं थी और उस दौरान चैनल ने टीआरपी के लिए ऐसा किया था. लेकिन चैनल का यह प्लान बिल्कुल भी काम नहीं आया. तब पूरा परिवार साथ बैठकर टीवी देखता. उस दौरान लोगों ने किसिंग सीन देखकर आपत्ति जताई थी. बाद में चैनल को यह सीन हटाना पड़ा था.

 

कर्नल के शिकारी बेटे का कारनामा

उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ के वीआईपी व पौश एरिया सिविललाइंस में पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के औफिस, आवास, सर्किट हाउस, पुलिस मुख्यालय, कलेक्ट्रेट, कचहरी और पुलिस लाइन हैं. इसी इलाके में कई समृद्ध लोगों के अपने आवास भी हैं. उन्हीं में से एक आलीशान कोठी नंबर 36/4 थी, जो रिटायर्ड कर्नल देवेंद्र विश्नोई की थी. वह कोई मामूली आदमी नहीं थे. कई साल सेना में नौकरी कर के उन्होंने देश की सेवा की थी.

सन 1971 में हुई भारत पाकिस्तान की जंग में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी. बाद में वह पंजाब में हुए औपरेशन ब्लूस्टार का भी हिस्सा रहे. उन के साहस की निशानियां फोटो और मैडल के रूप में उन के ड्राइंगरूम की दीवारों पर सजे थे. कई सम्मान भी उन्हें मिले थे. कुल मिलाकर उन की पृष्ठभूमि शौर्य, साहस और सम्मान की अनोखी मिसाल थी, उन्हें जानने वाले इन बातों को बखूबी जानते थे.

बात सिर्फ इतनी ही नहीं थी, कर्नल साहब का एकलौता बेटा प्रशांत विश्नोई भी देश का जानामाना शूटर था. मजबूत कदकाठी और रौबदार चेहरे वाले प्रशांत की पत्नी और 2 बेटियां थीं. सभी एक साथ इसी कोठी में रहते थे. कर्नल परिवार के ईंट के भट्ठे और जमीनों के अलावा सिक्योरिटी एजेंसी का बड़ा काम था. विश्नोई परिवार करोड़ों की दौलत का मालिक तो था ही, आसपास उस की शोहरत भी थी.

कर्नल परिवार की लाइफस्टाइल हाईप्रोफाइल थी. आसपास की कोठियों में और भी लोग रहते थे, लेकिन कर्नल परिवार किसी से कोई वास्ता नहीं रखता था. वैसे भी शहरों में लोग इस तरह की जिंदगी जीने के आदी हो गए हैं. पड़ोसी को पड़ोसी की खबर नहीं होती.

हर कोई अपने हिसाब से अपनी जिंदगी जीना चाहता है. किस के यहां क्या हो रहा है, कोई दूसरा नहीं जानता. कर्नल की कोठी की पहचान का एक हिस्सा उन की आधा दरजन से ज्यादा महंगी कारें भी थीं. प्रशांत को कारों का शौक था. इन में लग्जरी कारों के अलावा घने जंगलों व रेगिस्तान में चलने वाली थार नामक जीप भी थी. गाडि़यां बदलती रहती थीं. खास बात यह थी कि इन सभी गाडि़यों के वीआईपी नंबर 0044 ही होते थे.

वक्त कब किस की पहचान किस रूप में सामने ला दे, इस बात को कोई नहीं जानता. 30 अप्रैल, 2017 का सवेरा हुआ तो न सिर्फ तारीख बदली थी, बल्कि कर्नल की कोठी की पहचान भी सनसनीखेज तरीके से बदल गई थी. लोग न केवल हैरान नजरों से कोठी को देख रहे थे बल्कि तरहतरह की बातें भी कर रहे थे. कर्नल साहब की कोठी अचानक ही चर्चाओं का हिस्सा बन गई थी.

दरअसल, 29 अप्रैल की दोपहर देश के गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली डायरेक्टोरेट औफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) की दिल्ली से आई कई टीमें छापा मारने के लिए कर्नल साहब की कोठी पर पहुंच गई थीं. बाकी लोग गाडि़यों में ही बैठे रहे, सिर्फ 4 लोग कोठी के दरवाजे पर गए, डोरबैल बजाई तो नौकर बाहर आया. उस ने पूछा, ‘‘कहिए?’’

चारों में से एक अफसर ने आगे बढ़ कर कहा, ‘‘हमें कर्नल साहब या प्रशांतजी से मिलना है.’’

‘‘आप लोग कहां से आए हैं?’’ नौकर ने अगला सवाल किया.

‘‘दिल्ली से. उन से कहिएगा कि हमारा मिलना जरूरी है.’’

‘‘आप ठहरिए, मैं पूछ कर आता हूं.’’ नौकर ने कहा.

टीम ने नजरें दौड़ाईं, दरवाजों पर हाई क्वालिटी वाले कैमरे लगे थे, जिन का फोकस दोनों रास्तों की ओर था. कुछ ही देर में नौकर ने आ कर उन के लिए दरवाजा खोल दिया. इशारा पा कर टीम के अन्य सदस्य भी दनदनाते हुए अंदर दाखिल हो गए. इतने सारे लोगों को एक साथ देख कर ड्राइंगरूम में बैठे कर्नल देवेंद्र भड़क उठे, ‘‘यह क्या बदतमीजी है, कौन हैं आप लोग?’’

अधिकारियों ने अपना परिचय देने के साथ ही पूछा, ‘‘पहले आप यह बताइए कि प्रशांत कहां हैं?’’

‘‘वह तो घर पर नहीं है.’’

‘‘ठीक है, हमें घर की तलाशी लेनी है.’’ अफसरों ने कहा.

उन लोगों का इतना कहना था कि देवेंद्र गुस्से में आ गए. उन की उम्र काफी हो चुकी थी और आंख का औपरेशन हुआ था. लेकिन आवाज युवाओं जैसी कड़कदार थी. उन्होंने धमकाते हुए कहा, ‘‘खबरदार, अगर ऐसा किया तो ठीक नहीं होगा.’’

‘‘माफ करें, हमें इस बात का पूरा अधिकार है. बेहतर होगा कि आप शांत रहें.’’ अफसरों ने कहा.

टीम को विरोध का सामना करना पड़ सकता था, इसलिए उन्होंने पुलिस अधिकारियों को फोन कर के सूचना दी तो तुरंत पुलिस बल आ गया. देवेंद्र ने पुलिस को भी आड़े हाथों लिया और इधरउधर फोन करने लगे. पुलिस ने उन का मोबाइल और फोन अपने कब्जे में ले लिया. पुलिस और टीम का सख्त रुख देख कर उन्हें शांत हो जाना पड़ा. वैसे भी उन की तबीयत ठीक नहीं थी.

डीआरआई और पुलिस की टीम ने 3 मंजिला कोठी की तलाशी लेनी शुरू की तो वहां जो कुछ मिलना शुरू हुआ, उसे देख उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई. पहली मंजिल पर बने प्रशांत के कमरों से देशीविदेशी हथियारों और कारतूसों का जखीरा मिलता चला गया. हालांकि प्रशांत शूटर थे, लेकिन किसी को भी इतने हथियार रखने की इजाजत नहीं हो सकती. जांच टीम के होश उड़ गए, क्योंकि यह जखीरा इतना ज्यादा था कि पूरे जिले की पुलिस के पास भी शायद इतनी गोलियां नहीं हो सकती थीं.

इतना ही नहीं, कोठी के एक विशेष कमरे में वन्यजीवों के सिर, हड्डियां, खालें व अन्य वस्तुएं मिलीं. खुद टीम को भी उम्मीद नहीं थी कि छापे में इतना कुछ निकलेगा. मामला हथियारों की तस्करी से होता हुआ वन्यजीवों की तस्करी तक पहुंच गया था.

इस के बाद सूचना पा कर पश्चिम क्षेत्र के वन संरक्षक मुकेश कुमार भी अपनी टीम के साथ कर्नल की कोठी पर पहुंच गए. उन के साथ टीम में वन अधिकारी संजीव कुमार, वन्यजीव प्रतिपालक राज सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी हरीश मोहन, वन दरोगा रामगोपाल व वनरक्षक  मोहन सिंह भी थे.

प्रशांत कहां था, इस की किसी को खबर नहीं थी. उस का मोबाइल भी स्विच औफ आने लगा था. संभवत: उसे छापेमारी की खबर लग गई थी. जांच काफी बारीकी से चल रही थी. कोठी के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया था. खबर पा कर मीडिया वाले भी आ गए थे. कोठी के अंदर प्रतिबंधित सामानों का जखीरा मिलता जा रहा था. टीम सब चीजों को सील करती जा रही थी.

टीम ने जो कुछ भी बरामद किया था, उस की किसी को उम्मीद नहीं थी. कोठी से सौ से भी ज्यादा हथियार, जिन में पिस्टल, रिवौल्वर और बड़े हथियार मिले. 2 लाख कारतूस, करीब एक करोड़ रुपए नकद, कैमरे, दूरबीन के अलावा तेंदुए, काले हिरन की खालें, सांभर और काले हिरन के सींग सहित एकएक खोपड़ी, एक हिरन की खोपड़ी, गरदन सींग सहित, सांभर, हिरन के बच्चों की सींगें, चिंकारा हिरन की सींग सहित 4 खोपडि़यां, कुछ बिना सींग वाली हिरन की खोपडि़यां, अन्य कई प्रजातियों के हिरन की खोपडि़यां, वन्य जीवों के 7 दांत, हाथी दांत की मूठ वाला एक चाकू तथा 47 पैकेटों में रखा गया एक क्विंटल से अधिक 117.50 किलोग्राम वन्य जीवों का मांस बरामद किया गया. मांस के ये पैकेट बाकायदा बड़े फ्रीजर में रखे थे.

खास बात यह थी कि बरामद हथियार विदेशों के नामचीन ब्रांड बेरेटा (इटली), बेनेली (इटली), आर्सेनल (इटली), ग्लौक (आस्ट्रिया) और ब्लेजर (जर्मनी) के थे. इंटरनेशनल ब्रांड के बरामद हथियारों की कीमत 25 करोड़ रुपए के आसपास आंकी गई. कर्नल देवेंद्र और उन की पत्नी प्रशांत की करतूतों का हिस्सा थे या नहीं, यह जांच का विषय था. लेकिन वे दोनों बुजुर्ग और बीमार थे, इसलिए उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया.

छापे की यह काररवाई सुबह करीब 5 बजे तक चली. इस के बाद दिन निकलते ही कर्नल साहब की कोठी सुर्खियों में आ गई. कोठी के राज को जान कर पूरा शहर दंग रह गया. डीआरआई के अलावा वन विभाग ने भी मेरठ के थाना सिविल लाइन में प्रशांत के खिलाफ धारा 9, 50, 51, 44, 49(ए), व 49(बी)  वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. मामले की जांच के साथ प्रशांत की तलाश तेज कर दी.

वह विदेश भाग सकता था, इसलिए कोठी से उस का पासपोर्ट पहले ही कब्जे में ले लिया गया था. उस के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर के देश के हवाईअड्डों को सतर्क कर दिया गया था. डीआरआई के अलावा क्राइम ब्रांच, एसटीएफ, वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और दिल्ली पुलिस की स्पैशल सेल को भी प्रशांत की तलाश में लगा दिया गया था. इस बीच डीआरआई के एडीशनल डायरेक्टर राजकुमार दिग्विजय ने बरामदगी के बारे में विधिवत प्रैस को जानकारी दी. डीएफओ अदिति शर्मा के निर्देशन में कोठी से बरामद मांस के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए गए.

प्रशांत की पोल शायद कभी खुल न पाती, अगर दिल्ली में हथियारों के साथ कुछ लोग न पकडे़ गए होते. दरअसल, अप्रैल के अंतिम सप्ताह में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से शूटर अमित गोयल और अनिल के साथ 2 विदेशी नागरिकों को 25 विदेशी हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया था.

ये लोग टर्किश एयरलाइंस से स्लोवेनिया की राजधानी लिजबुलजना से इस्तांबुल होते हुए दिल्ली पहुंचे थे. इन में एक बोरिस सोबोटिक मिकोलिक मध्य यूरोप के स्लोवेनिया का रहने वाला था और हथियारों का बड़ा तस्कर था.

हालांकि इन लोगों ने खुद को इंटरनेशनल शूटर बताया था. पता चला ये शूटरों को दी जाने वाली आयात पौलिसी का लाभ उठा रहे थे, लेकिन इस बार ये हवाईअड्डे की सुरक्षा जांच एजेंसियों को झांसा देने में नाकाम रहे. बरामद हथियारों की कीमत साढ़े 4 करोड़ रुपए थी. इन से पूछताछ हुई तो शूटर प्रशांत के तार इन से जुड़े मिले. मामला गंभीर था, लिहाजा शिकंजा कसने की तैयारी कर ली गई. कई दिनों की रेकी के बाद डीआरआई टीम छापा मारने प्रशांत के घर पहुंच गई.

जांच करने वालों ने कर्नल देवेंद्र से पूछताछ की लेकिन उन्होंने बरामद सामान के बारे में किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार कर दिया. हालांकि उन की साफगोई किसी के गले नहीं उतर रही थी. सब से बड़ा सवाल यह था कि एक सैन्य अधिकारी का बेटा इतने बड़े पैमाने पर तस्करी में कैसे लिप्त हो गया था? इस की गहराई से जांच और प्रशांत की गिरफ्तारी जरूरी थी. जबकि प्रशांत अपने मोबाइल फोन का स्विच औफ कर चुका था.

प्रशांत के नंबर की काल डिटेल्स के आधार पर उस के नेटवर्क की तह में जाने की कोशिश की गई. उस की गिरफ्तारी के लिए डीआरआई टीम के अलावा यूपी एसटीएफ, वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीमें लगी थीं. सभी को उस की सरगर्मी से तलाश थी. लेकिन वह सभी को गच्चा देने में कामयाब रहा.

पुलिस सूचनाओं के आधार पर छापे मारती रही और वह चकमा देने में कामयाब होता रहा. देखतेदेखते एक महीना बीत गया. जांच एजेंसियों के लिए वह चुनौती बना हुआ था. आखिर 1 जून को डीआरआई टीम ने उसे दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में जो कुछ प्रकाश में आया, वह बेहद चौंकाने वाला था. दरअसल, कर्नल देवेंद्र ग्रामीण पृष्ठभूमि से थे. वह मेरठ जिले के ही कस्बा फलावदा के रहने वाले थे. वहां उन की जमीनें थीं. रिटायरमेंट के बाद वह कुछ साल बरेली के समाज कल्याण विभाग में तैनात रहे. इस के बाद करीब 16 साल पहले उन्होंने फलावदा और परीक्षितगढ़ में ब्रिक फील्ड नाम से ईंट के भट्ठे लगाए.

इन भट्ठों में उन्हें घाटा हो गया था, जिस से आर्थिक हालात बिगड़ गए. बाद में पितापुत्र ने बरेली में एक सिक्योरिटी एजेंसी खोली. इस एजेंसी का काम सरकारी टेंडरों के जरिए गार्ड मुहैया कराना था. धीरेधीरे कंपनी का नेटवर्क कई राज्यों में फैल गया. यह काम चल निकला और देखतेदेखते कर्नल के न सिर्फ आर्थिक हालात बदल गए, बल्कि प्रशांत का लाइफस्टाइल भी बदल गया. महंगी कारें उस का शौक बन गईं. प्रशांत शूटिंग के क्षेत्र में भी काफी नाम कमा चुका था.

प्रशांत ने बचपन से ही ऊंचे ख्वाब देखे थे. पिता कर्नल थे, लिहाजा जिंदगी ऐशोआराम में बीती. स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही वह शूटिंग प्रतियोगिताओं में हाथ आजमाने लगा था. सन 2002 में उस का विवाह निधि के साथ हुआ. समय के साथ वह 2 बेटियों का पिता बना. वह बिलियर्ड्स प्लेयर तो था ही, साथ ही राष्ट्रीय स्तर का स्कीट शूटर भी था. इस के तहत 12 बोर से शूटिंग की जाती है.

बिग बोर व .22 कैटेगरी में वह देश के लिए खेल चुका है. पहले वह दिल्ली में रह कर शूटिंग करता था. तब उस ने कई मैडल जीते थे. एक साल पहले उस ने जयपुर में 60वीं नेशनल चैंपियनशिप खेली थी, जिस में उस की 65वीं रैंक आई थी. नेशनल रायफल एसोसिएशन औफ इंडिया ने उसे रिनाउंड शूटर की मान्यता दी हुई थी.

रिनाउंड शूटर को 2 वेपन का लाइसैंस मिल सकता था. अंतरराष्ट्रीय शूटर होने के नाते प्रशांत के नामचीन लोगों से ताल्लुक थे. कई राजनेताओं से भी उस के सीधे रिश्ते थे. इन में स्थानीय नेताओं से ले कर मुख्यमंत्री तक थे. कई बड़े कारोबारी भी उस के संपर्क में रहते थे.

समय के साथ प्रशांत हथियारों और वन्यजीवों की तस्करी करने लगा. यह तस्करी देश से होते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गई. शूटिंग की आड़ में वन्यजीवों का शिकार और तस्करी का धंधा प्रशांत और उस की टीम ने पूरे देश में फैला दिया. वह कितना बड़ा शिकारी और तस्कर बन गया है, इस की खबर आसपास के लोगों को नहीं थी.

पूर्वी उत्तर प्रदेश के जंगलों के अलावा बिहार के जंगल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड के जिम कार्बेट पार्क समेत कई जगहों पर भी प्रशांत व उस के साथियों ने वन्यजीवों का शिकार किया. उस की कोठी तस्करी का अड्डा बन गई.

हथियारों के आयात पर रोक के बावजूद देश में बड़ी आसानी से हथियार आते रहे. इन हथियारों को प्रशांत एजेंटों के माध्यम से मुंहमांगी कीमतों पर बेचता था. जिस हथियार की कीमत विदेश में एक लाख रुपए होती थी, उसे वह 15 से 20 लाख रुपए में बेचता था.

हथियार चूंकि विख्यात कंपनियों के होते थे, इसलिए उन की बड़ी कीमत मिल जाती थी. कई बार हथियारों के पार्ट्स ला कर भी उन्हें जोड़ लिया जाता था.

दरअसल, इस खेल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शूटरों को सीमित मात्रा में विदेशी हथियार लाने की सरकारी छूट का प्रशांत और उस के साथी लाभ उठा रहे थे. कस्टम अधिकारियों को गुमराह कर के ये कम हथियारों की जानकारी दे कर अधिक हथियार भारत लाते थे.

वन्यजीवों का शिकार प्रशांत सिर्फ अपने शौक के लिए ही नहीं करता था, बल्कि उन के मांस की सप्लाई कई नामी होटलों में की जाती थी. हिरनों की लुप्त हो रही प्रजातियों को सहज निशाना बनाया जाता था. वन्यजीवों के मांस और उन के अंगों को कारों के जरिए ही लाया जाता था. प्रशांत ने एक कार में फ्रिजर रखने की व्यवस्था करा रखी थी. कार पर चूंकि आर्मी लिखा होता था, इसलिए चैकिंग में वह कभी नहीं पकड़ा गया.

प्रशांत कई राज्यों में नीलगायों का शिकार करने जा चुका था. उत्तर प्रदेश सहित आसपास के राज्यों में वह किसानों के आमंत्रण पर जाता रहता था. सन 2016 में बिहार सरकार ने भी 5 सौ नीलगायों को मारने के लिए शूटरों की टीम को बुलाया था. उस में प्रशांत भी शामिल था. आरोप है कि इस की आड़ में वह वन्यजीवों का शिकार और उन के अंगों एवं मांस की तस्करी करता था.

सुरक्षा एजेंसियों या स्थानीय पुलिस को कभी उस के गोरखधंधे का पता नहीं चला. लेकिन जब दिल्ली के एयरपोर्ट पर तस्करों की गिरफ्तारी हुई तो उन्होंने प्रशांत का नाम उगल दिया.

पूछताछ के बाद प्रशांत को अगले दिन पटियाला हाउस कोर्ट में मुख्य महानगर न्यायाधीश सुमित दास की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

7 जून को उसे मेरठ की अदालत में पेश किया गया. वन विभाग ने उस के रिमांड की अर्जी लगाई, लेकिन रिमांड नहीं मिल सका. उसे पुन: तिहाड़ जेल भेज दिया गया. प्रशांत ने किनकिन लोगों को हथियार बेचे, मांस की तस्करी कहांकहां की और किन लोगों से उस के तार जुड़े थे, इस सब की गहराई से जांच के लिए उसे रिमांड पर लेने की कोशिश की जा रही थी.

प्रशांत का जो चेहरा समाज के सामने आया है, वह लोगों को सोचने पर मजबूर जरूर कर रहा है कि किस तरह संभ्रांत लोग चौंकाने वाले धंधों में लिप्त होते हैं. वह जो कुछ भी कर रहा था, उस की खबर पड़ोसियों को भी नहीं थी. स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसी भी जिस तरह से उस के धंधे से अनजान थीं, उस से पता चलता है कि वह कितने शातिराना अंदाज में अपने कारनामों को अंजाम दे रहा था.

दूसरी ओर कर्नल देवेंद्र ने बेटे के गोरखधंधे से खुद को अलग बता कर पल्ला झाड़ लिया है. उन का कहना था कि उन्हें पता नहीं था कि उन का बेटा यह सब कर रहा था. वह शर्मिंदा हैं. मेरठ कचहरी में पेशी के दौरान प्रशांत ने खुद को फंसाए जाने का आरोप लगाया. कथा लिखे जाने तक प्रशांत की जमानत नहीं हो सकी थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मेरे और मेरे प्रेमी के बीच कई बार सेक्स हो चुका है और मुझे इस में बेहद आनंद आता है, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 28 साल की महिला हूं. मैं और मेरे पति एक-दूसरे का बहुत खयाल रखते हैं, मगर इधर कुछ दिनों से मैं किसी दूसरे के प्रेम में पड़ गई हूं. हमारे बीच कई बार शारीरिक संबंध भी बन चुके हैं. मुझे इस में बेहद आनंद आता है. मैं अब पति के साथ-साथ प्रेमी को भी नहीं खोना चाहती हूं. बताएं मैं क्या करूं?

जवाब-

आप के बारे में यही कहा जा सकता है कि दूसरे के बगीचे का फूल तभी अच्छा लगता है जब हम अपने बगीचे के फूल पर ध्यान नहीं देते. आप के लिए बेहतर यही होगा कि आप अपने ही बगीचे के फूल तक ही सीमित रहें. फिर सचाई यह भी है कि यदि पति बेहतर प्रेमी साबित नहीं हो पाता तो प्रेमी भी पति के रहते दूसरा पति नहीं बन सकता. विवाहेतर संबंध आग में खेलने जैसा है जो कभी भी आप के दांपत्य को झुलस सकती है.

ऐसे में बेहतर यही होगा कि आग से न खेल कर इस संबंध को जितनी जल्दी हो सके खत्म कर लें. अपने साथी के प्रति वफादार रहें. अगर आप अपनी खुशियां अपने पति के साथ बांटेंगी तो इस से विवाह संबंध और मजबूत होगा.

ये भी पढ़ें-

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का कारण कहीं सेक्स असंतुष्टि तो नहीं

कुछ अरसा पहले आए सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले में धारा 497 को रद्द कर विवाहेतर संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया. उस समय के सीजेआई दीपक मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवाह से बाहर बनाया गया संबंध एक व्यक्तिगत मुद्दा हो सकता है. यह तलाक का आधार तो बन सकता है, परंतु यह अपराध नहीं है.

देश की शीर्ष अदालत के इस फैसले से बहस छिड़ गई है. समाज में बढ़ रहा व्यभिचार समाज के तानेबाने को तोड़ने का कुत्सित प्रयास तो कर रहा है, लेकिन प्रश्न यह भी उठा रहा है कि आखिर बढ़ते व्यभिचार और विवाहेतर संबंध का कारण क्या है?

मानव सभ्यता के विकास के साथ समाज ने शारीरिक संतुष्टि और सेक्स संबंधों की मर्यादा के लिए विवाह नामक संस्था को सामाजिक मंजूरी दी होगी. विवाह के बाद पति और पत्नी के बीच के सेक्स संबंध शुरू में तो ठीक रहते हैं, परंतु समय के साथ सेक्स के प्रति अरुचि व पार्टनर की जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान न दिया जाना कलह के कारण बनते हैं.

आमतौर पर सुखद सेक्स उसी को माना जाता है, जिस में दोनों पार्टनर और्गेज्म पा सकें. यदि पतिपत्नी सेक्स संबंध में एकदूसरे को संतुष्ट कर पाने में सफल होते हैं तो उन के दांपत्य संबंधों की कैमिस्ट्री भी अच्छी रहती है.

राकेश और प्रतिभा की शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं. उन की 2 साल की एक बेटी भी है. परंतु बेटी के जन्म के साथ ही प्रतिभा का ध्यान अपनी बेटी में ही रम गया. पति की छोटीछोटी जरूरतों का ध्यान रखने वाली प्रतिभा अब पति के प्रति बेपरवाह सी हो गई है.

कभी रोमांटिक मूड होने पर राकेश जब सेक्स करने की पहल करता है, तो प्रतिभा उसे यह कह कर झिड़क देती है कि तुम्हें तो बस एक ही चीज से मतलब है. इस से राकेश कुंठित हो कर चिड़चिड़ाने लगता. मन मसोस कर अपनी कामेच्छा दबा लेता. धीरेधीरे सेक्स करने की कुंठा से उस के मन में कहीं और शारीरिक संबंध बनाने के खयाल आने लगे. प्रतिभा जैसी अनेक महिलाओं का यही व्यवहार राकेश जैसे पुरुषों को दूसरी महिलाओं के साथ संबंध बनाने को प्रोत्साहित करता है.

जिस तरह स्वादिष्ठ भोजन करने के बाद कुछ और खाने की इच्छा नहीं होती, ठीक उसी तरह सेक्स क्रिया से संतुष्ट पतिपत्नी अन्यत्र सेक्स के लिए नहीं भटकते. दांपत्य जीवन में सुख प्राप्त करने के लिए पतिपत्नी को अपनी सेक्स जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए. सेक्स की पहल आम तौर पर पति द्वारा की जाती है. पत्नी को भी चाहिए कि वह सेक्स की पहल करे. पतिपत्नी में से किसी के भी द्वारा की गई पहल का स्वागत कर, सेक्स संबंध स्थापित कर, एकदूसरे की संतुष्टि का खयाल रख कर विवाहेतर संबंधों से बचा जा सकता है.

बच्चों के जन्म के बाद भी सेक्स के प्रति उदासीन न हों. सेक्स दांपत्य जीवन का मजबूत आधार है. शारीरिक संबंध जितने सुखद होंगे भावनात्मक प्यार उतना ही मधुर होगा. घर में पत्नी के सेक्स के प्रति रूखे व्यवहार के चलते पति अन्यत्र सुख की तलाश में संबंध बना लेता है. कामकाजी पति द्वारा पत्नी को पर्याप्त समय और यौन संतुष्टि न देने से वह भी अन्य पुरुष से शारीरिक संबंध बना लेती है, जिस की परिणति दांपत्य जीवन में तनाव और बिखराव के रूप में देखने को मिलती है.

स्वाभाविक होता है बदलाव

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि संबंधों में यह बदलाव स्वाभाविक है. शादी के शुरू के सालों में पतिपत्नी एकदूसरे के प्रति जो खिंचाव महसूस करते हैं, वह समय के साथ खत्म होता जाता है और तब शुरू होती है रिश्तों में उकताहट.

आर्थिक, पारिवारिक और बच्चों की परेशानियां इस उकताहट को बढ़ावा देती हैं. फिर इस उकताहट को दूर करने के लिए पतिपत्नी बाहर कहीं सुकून तलाशते हैं, जहां उन्हें फिर से अपने वैवाहिक जीवन के शुरू के वर्षों का रोमांच महसूस हो. यहीं से विवाहेतर संबंधों की शुरुआत होती है.

एक रिसर्च से पता चला है कि अलगअलग लोगों में इन संबंधों के अलगअलग कारण हैं. किसी से भावनात्मक जुड़ाव, सेक्स लाइफ से असंतुष्टि, सेक्स से जुड़े कुछ नए अनुभव लेने की लालसा, वक्त के साथ आपसी संबंधों में प्रेम की कमी, अपने पार्टनर की किसी आदत से तंग होना, एकदूसरे को जलाने के लिए ऐसा करना विवाहेतर संबंधों के कारण होते हैं.

महिलाओं के प्रति दोयमदर्जे की सोच

भारतीय संस्कृति में महिलाओं के प्रति दोयमदर्जे का व्यवहार आज भी देखने को मिलता है. सामाजिक परंपराओं की गहराई में स्त्री द्वेष छिपा है. ये परंपराएं पीढि़यों से महिलाओं को गुलाम से अधिक कुछ नहीं मानती हैं. उन्हें इस तरह ढाला जाता है कि वे अपने शरीर के आकार से ले कर निजी साजसज्जा तक के लिए अनुमति लें.

जो महिला अपने ढंग से जीने के लिए परंपराओं और वर्जनाओं को तोड़ने का प्रयास करती है उस पर समाज चरित्रहीन होने का कलंक लगा देता है. पति को घर में व्यवस्था, पत्नी का समय व बढि़या तृप्तिदायक खाना, सुखचैन का वातावरण और देह संतुष्टि चाहिए. परंतु पति खुद उस की सुखसुविधाओं और शारीरिक जरूरतों का उतना खयाल नहीं रखता. पत्नी से यह चाह जरूर की जाती है कि वह पति की नैसर्गिक इच्छाएं पूरी करती रहे.

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार विवाहेतर संबंधों को रोकने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. यदि आपसी रिश्ते की गरमाहट कम हो गई है तो रिश्ते को पुराने कपड़े की तरह निकाल कर नए कपड़ों की तरह नए रिश्ते बनाना समस्या का हल नहीं है. अपने पार्टनर को समझाने के कई तरीके हैं. उस से बातचीत कर समस्या को सुलझाया जा सकता है. सेक्स को ले कर की गई बातचीत, सेक्स के नएनए तरीके प्रयोग में ला कर एकदूसरे की शारीरिक संतुष्टि से विवाहेतर संबंधों से बचा जा सकता है.

फोरप्ले से और्गेज्म तक का सफर

एक नामी फैशन मैगजीन के सर्वेक्षण के अनुसार महिलाओं के और्गेज्म यानी चरमसुख को ले कर कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं. इस औनलाइन शोध में 18 से 40 साल की आयु वाली 2300 महिलाओं से प्रश्न किए गए, जिन में 67% महिलाओं ने माना कि वे फेक और्गेज्म यानी और्गेज्म होने का नाटक करती हैं. 72% महिलाओं ने माना कि उन का साथी स्खलित होने के बाद उन के और्गेज्म पर ध्यान नहीं देता है. सर्वेक्षण के यह आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर मामलों में पति और पत्नी अकसर सेक्स संबंधों में और्गेज्म तक नहीं पहुंच पाते हैं.

सेक्स को केवल रात्रिकालीन क्रिया मान कर निबटाने से सहसंतुष्टि नहीं मिलती. जब दोनों पार्टनर को और्गेज्म का सुख मिलेगा तभी सहसंतुष्टि प्राप्त होगी. पत्नी और पति का एकसाथ स्खलित होना और्गेज्म कहलाता है. सुखद सेक्स संबंधों की सफलता में और्गेज्म की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है.

सेक्स को शारीरिक तैयारी के साथसाथ मानसिक तैयारी के साथ भी किया जाना चाहिए. यह पतिपत्नी की आपस की जुगलबंदी से ही मिलता है. सेक्स करने से पहले की गई सेक्स से संबंधित छेड़छाड़ भूमिका बनाने में सहायक होती है. कमरे का वातावरण, बिस्तर की जमावट, अंतर्वस्त्र जैसी छोटीछोटी बातें सेक्स के लिए उद्दीपक का कार्य करती हैं.

सेक्स के दौरान घरपरिवार की समस्याएं बीच में नहीं आनी चाहिए. सेक्स संबंध के दौरान छोटीछोटी बातों को ले कर की जाने वाली शिकायतें संबंध को बोझिल बनातीं और सेक्स के प्रति अरुचि भी उत्पन्न करती हैं. सेक्स के लिए नए स्थान और नए तरीकों का प्रयोग कर संबंध को प्रगाढ़ बनाया जा सकता है. सेक्स की सहसंतुष्टि यकीनन दांपत्य जीवन को सफल बनाने के साथसाथ विवाहेतर संबंध बनाने से रोकने में भी मददगार साबित हो सकती है.

धर्मस्थलों में बरबाद होता बुढ़ापा

हर दौर के युवा व्यवस्था, विसंगतियों और भ्रष्टाचार को ले कर आक्रोशित रहते हैं. वे सोचते रहते हैं कि जिस दिन लाइफ सैटल हो जाएगी और वे पारिवारिक व सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर हो जाएंगे उस दिन जरूर इन खामियों से लड़ेंगे. युवाओं के पास क्रांतिकारी विचार तो होते हैं पर वे उपकरण नहीं होते जिन से वे समाज व देश को बदल सकें. ये उपकरण पैसा और वक्त होते हैं.

सेवानिवृत्ति और 60-65 वर्ष की उम्र तक खासा पैसा ये कल के युवा कमा चुके होते हैं और घरगृहस्थी के अलावा नौकरी या व्यवसाय के काफीकुछ अनुभव भी हासिल कर चुके होते हैं. यानी सैटल हो चुके होते हैं. लेकिन जवानी का वह आक्रोश और हालात वे भूल जाते हैं जो उन्हें उद्वेलित करता था और कुछ करने को उकसाता रहता था.

आज के बुजुर्ग यानी गुजरे कल के युवा कोई आंदोलन खड़ा न करें, यह हर्ज की बात नहीं, हर्ज की बात है इन का बेबस हो कर धर्मस्थलों में जा कर वक्त गुजारना, भजन, कीर्तन, पूजापाठ करना. इस से तो कुछ बदलने से रहा पर धर्म के चक्कर में वे खुद बदल कर सामाजिक विसंगतियों को बढ़ावा दे रहे होते हैं. वे खुद नहीं जानते वे क्या कर रहे हैं और न ही उन्हें यह बताने वाला कोई होता है.

बरबादी क्यों

सामाजिक संरचना हर दशक में बदलती है पर जो एक बात उस में स्थिर रहती है वह है वृद्धों की उपेक्षा. दरअसल, वे अनुपयोगी करार दिए जा चुके होते हैं. दिक्कत यह है कि ये वृद्ध भी खुद को अनुपयोगी मान लेते हैं और सुकून की तलाश में भटकते हुए धर्मस्थलों का कारोबार बढ़ाते देखे जा सकते हैं.

हर धर्म में वृद्धों के लिए निर्देश दिए गए हैं कि यह उम्र भजनपूजन, ईश्वरीय ध्यान और तीर्थयात्राओं के अलावा जिंदगीभर के पापों को पुण्यों में तबदील करने की होती है. चूंकि यह काम धर्मस्थलों में ज्यादा से ज्यादा वक्त बिता कर ही हो सकता है, इसलिए अधिकांश वृद्ध भगवान के चरणों मेें जा कर मोक्षमुक्ति की कामना किया करते हैं. चूंकि बगैर दानदक्षिणा के धर्म में कुछ नहीं मिलता, इसलिए जिंदगीभर मेहनत से कमाई आमदनी का बड़ा हिस्सा वे तथाकथित भगवान के तथाकथित दूतों को देते रहते हैं.

इस में कोई शक नहीं कि पहले के मुकाबले बुजुर्ग अब ज्यादा तनहा हो चले हैं क्योंकि संतानें बाहर नौकरी करने चली जाती हैं जिस के बाबत उन्हें रोका भी नहीं जा सकता क्योंकि सवाल जिंदगी और कैरियर का होता है. बच्चों को भले ही न रोक पाएं पर बुजुर्ग खुद को तो धर्मस्थलों में जाने से रोक सकते हैं. ऐसा वे नहीं करते तो जाहिर है खुद मान लेते हैं कि वे अब वाकई किसी काम के नहीं रहे. यानी धर्म और धर्मस्थल निकम्मों व निठल्लों के विषय हैं.

बुजुर्गों की एक बड़ी परेशानी यह है कि वे खाली वक्त कहां जा कर गुजारें कि जिस से वे दिल की बातें किसी से साझा कर सकें. नई दिक्कत यह खड़ी हो गई है कि बढ़ते शहरीकरण ने पासपड़ोस, यारदोस्त और नातेरिश्तेदार तक छीन लिए हैं. ऐसे में बचता है तो धर्मस्थल, जो हर कहीं मिल जाता है.

कहने को धर्मस्थल और मंदिर शांति देते हैं, हालांकि सब से ज्यादा बेचैनी और परेशानी यहीं जा कर महसूस होती है जो दिखती नहीं. यह परेशानी है खाली दिमाग वाले घर में किसी विचार को जगह देने की. ये विचार कर्मकांड के रूप में प्रदर्शित होते हैं. इफरात से मंदिरों में बैठे वृद्ध बेवजह की बातें यानी अज्ञात आशंकाओं को ले कर सोचते, घबराते रहते हैं और अपनी समस्याओं व परेशानियों का हल मूर्तियों यानी पत्थरों में ढूंढ़ने की गलती करने लगते हैं.

विकल्प हैं

इफरात से धर्मस्थल बनाए जाने की वजह यह है कि लोगों, खासतौर से वृद्धों, का पैसा निचोड़ा जा सके. वृद्धों की दयनीय हालत में परिवार और समाज की भूमिका एक अलग बहस का मुद्दा है पर यह बात वृद्धों के सोचने की है कि धर्मस्थलों में जा कर उन्हें क्या हासिल होता है. ‘चूंकि फुरसत है, इसलिए मंदिर चलें’ वाली सोच न केवल उन के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए घातक साबित होती है.

धर्मस्थलों में मोक्ष और मुक्ति का झूठा आश्वासन मिलता है जिस के लिए कीमती वक्त और पैसा बरबाद करने की मानसिकता से किसी को कोई फायदा नहीं होता. उलटे, सामाजिक माहौल और बिगड़ता है. जो वृद्ध खुद को बोझ और अनुपयोगी मान लेते हैं वे एक दफा अगर खुद की ताकत व उपयोगिता पर गौर करें तो वे वाकई समाज और देश के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं. मंदिर के बाहर गिड़गिड़ाते भिखारी को दोचार रुपए दे देना समस्या का हल नहीं है, बल्कि यह पुण्य कमाने का भ्रम या अहंकार भर है.

जवानी और अधेड़ावस्था में जिस वक्त की कमी का रोना वे रोते रहते थे अब जब वह बहुतायत से मिलता है तो क्यों नहीं वे समाजोपयोगी या मनपसंद काम करते. ऐसा नहीं है कि उन की इच्छाशक्ति खत्म हो गई है, बल्कि सच यह है कि धर्मस्थलों में लगातार जाजा कर वे अंधविश्वासों और आशंकाओं की जकड़न में आ जाते हैं.

इस जकड़न से मुक्ति के कई उपाय हैं. इन में से पहला, किसी के लिए कुछ करना और कोई न मिले तो खुद के लिए जीना है. समाज कई जरूरतों का मुहताज है, अधिकांश लोग हैरानपरेशान हैं, ऐसे में बुजुर्ग काफीकुछ कर सकते हैं.

वे गरीब बस्तियों में जा कर बच्चों को पढ़ा सकते हैं, सड़क के किनारे पेड़ लगा कर पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं, जो पैसा दानदक्षिणा में बरबाद करते हैं उस से बीमारों और निशक्तों की मदद कर सकते हैं. लेकिन बजाय ऐसे रचनात्मक और सृजनात्मक काम करने के, वे धर्मस्थलों में वक्त जाया करते हैं. ऐसे में उन पर तरस ही आना स्वभाविक है.

देश में, अपवादस्वरूप ही सही, ऐसे भी वृद्ध हैं जो अपनी उपयोगिता और महत्ता बनाए हुए हैं. ये वे वृद्ध हैं जिन्होंने अनुभव और वक्त का सही इस्तेमाल किया है. रेलवेस्टेशनों पर प्यासों को पानी पिलाना वक्त का सही इस्तेमाल नहीं, तो क्या है. रिटायर्ड लोग अगर रचनात्मक काम और समाजसेवा करने लगें तो देश की हुलिया बदलने में देर नहीं लगने वाली. अगर हरेक वृद्ध वक्त का सही इस्तेमाल करते हुए स्कूलों में जा कर बच्चों को पढ़ाए तो इस से बड़ा पुण्य कोई और हो ही नहीं सकता.

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक पुस्तकालय संचालित करने वाले देवेंद्र शर्मा बताते हैं, ‘‘यह हैरत की बात है कि किताबों और पत्रिकाओं में छिपे और छपे ज्ञान के खजाने को हासिल करने के बजाय वृद्ध मंदिरों में घंटा बजाया करते हैं जबकि पुस्तकालय निशुल्क हैं. मंदिरों में जाने पर कुछ न कुछ पैसा चढ़ाना ही पड़ता है.’’

एक बार दृढ़ और निष्पक्ष हो कर अगर बुजुर्ग अपनी किशोरावस्था व युवावस्था के संकल्पों को याद कर उन पर अमल करने की हिम्मत जुटा पाएं तो देखेंगे कि उन का सपना धर्मस्थल, पूजापाठ और आडंबर तो कतई नहीं थे. उन का सपना भ्रष्टाचार और भेदभावमुक्त देश था जिसे बनाने के लिए यह बेहतर वक्त है. बुढ़ापा  कोई अभिशाप नहीं, बल्कि वह उन्हें कुछ करगुजरने का मौका देता है. यह मौका अगर धर्मस्थलों में जा कर खुद को दिया जाने वाला धोखा बन रहा है तो सच है कि फिर कोई क्या कर लेगा.

ये 6 सकेंत बताते हैं आपके खाने में है जरुरत से ज्यादा नमक

नमक खाने का बेहद ही महत्व रखता है बिना नमक के खाने की आप कल्पना भी नहीं कर सकते है लेकिन ये नमक आपकी सेहत का राज है कि कहीं आप खाने में ज़रुरत से ज्यादा नमक तो नहीं खा रहे है जी हां, कुछ ऐसे सकेंत है जिनसे आप पता लगा सकते है कि आप ज़रुरत से ज्यादा नमक तो नहीं खा रहे है. ऐसा होने से आपके शरीर में कई तरह की बिमारीयां हो सकती है ऐसे में ज़रुरी है कि आप हिसाब से ही नमक खाएं और खुद को हेल्थी रखें.आइए जानते है उन सकेंतों के बारें में जो बताते है नमक की मात्रा आपकी बॉडी में कितनी है.

1. ब्लोटिंग

नमक का सेवन करने से आपको ब्लोटिंग की समस्या का सामना करना पड़ता है. आपने देखा होगा कि खाना खाने के बाद आप सामान्य से अधिक फूले हुए महसूस करते हैं. किडनी में कुछ मात्रा में सोडियम पाया जाता है. ऐसे में जब आप अपने शरीर में और सोडियम डालते हैं तो किडनी को क्षतिपूर्ति के लिए ज्यादा पानी को रोक कर रखना पड़ता है. शरीर में नमक की मात्रा ज्यादा होने पर पानी जरूरत से ज्यादा जमा हो जाता है. यह स्थिति वाटर रिटेंशन या फ्लूइड रिटेंशन कहलाती है.

2. गला सूखना

अगर आपको बार-बार गला सूखता है और ज़रुरत से ज्यादा प्यास लगती है तो ये सकेंत बताता है कि आप अधिक मात्रा में नमक का सेवन कर रहे है.

3. हाई ब्लड प्रेशर

शरीर में अगर अधिक मात्रा में नमक खाया जाए तो, आपको हाई ब्लड प्रेशर का सामना करना पड़ सकता है ब्लड प्रेशर में ये बदलाव किडनी की वजह से होता है बहुत अधिक मात्रा में नमक लेने से किड़नी में से फ्लूइड्स निकलना काफी मुश्किल हो जाता है. जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है.

4. नींद में परेशानी

अगर आप अपने खाने में सोडियम की मात्रा ज्यादा ले रहे है तो आपको नींद ना आने की समस्या उत्पन हो सकती है. रात में सोने से पहले ज्यादा नमक वाली चीजें खाने से नींद ना आना, बेचैनी महसूस होना और रात में बार-बार जगने की समस्या हो सकती है.

5. दिल की बिमारी

नमक की ज्यादा मात्रा में लेना दिल की बिमारीयों का बुलावा देता है इसलिए ज़रुरी है कि आप अपने खाने में नमक की मात्रा का सुंतुलन बनाएं रखे.

6. जी मचलाना

डाइट में अधिक मात्रा में नमक खाने से पेट में अंसुतलन पैदा कर सकता है.जिससे आपको जी मचलाने की समस्या हो सकती है.ऐसे में ज़रुरी है कि आप खाने में नमक की मात्रा को कंट्रोल करें. साथ ही ज़रुरी है कि आप पानी की मात्रा को भी बढ़ाएं ताकि आपका शरीर हाइड्रेट होता रहे है.

BB OTT 2 : जद हदीद ने मांगी मनीषा रानी से फ्रेंच KISS तो, एक्ट्रेस ने कह डाली ये बात

इन दिनों बिग बॉस ओटीटी 2 टीवी की दुनिया में हिट शो चल रहा है जिसे देखने के लिए दर्शक आखें गाड़ाएं रहते है. ऐसे में शो में कंटेस्टेंट एक से बढ़कर एक परफोमेंस दे रहे है. शो में मनीषा रानी हिट चल रही है और जद हदीद के साथ फ्लर्ट करती दिखती है जी हां, शो में मनीषा रानी और जद हदीद के बीच मजाक मस्ती होती रहती है मनीषा रानी कोई भी मौका नहीं छोड़ती है उनके साथ फ्लर्ट करने से. ऐसे में इस बीर मस्ती kiss तक पहुंच गई है जब जद हदीद ने मनीषा से फ्रेंच किस की डिमांड की तो, मनीषा ने कुछ ऐसा जवाब दिया कि लोग उनके फैन हो गए है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Mj حديد (@jadhadid)

आपको बता दें, सलमान खान का शो इन दिनों हिट चल रहा है शो में मजाक, मस्ती और लड़ाई खूब देखने को मिल रही है मनीषा रानी और जद हदीद का मजाक लोगों को खूब पसंद आ रहा है. शो में मनीषा रानी जद को बाबू कह कर पुकारती है. मनीषा हर समय में रोमांस के मूड में रहती है और जद के साथ फ्लर्ट करती दिखती है. इस बार भी कुछ ऐसा हुआ लेकिन फ्लर्ट करते हुए जद नजर आएं और उन्होंने मनीषा से फ्रेंच किस की डिमांड की. जिसे सुनकर मनीषा रानी हैरान हो गई है और अपने घुटने टेक दिए है. इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें जद, मनीषा से किस की डिमांड करते हुए दिख रहे है वही , मनीषा इस पर कहती है कि ये हलवा नहीं है कि ले लो मनीषा, ये चुम्मा है. मनीषा जद को समझाने की कोशिश करती हैं कि ये इंडिया है, यहां ये आम बात नहीं. मनीषा कहती हैं- मैं माथे पर किस के लिए ओके हूं, लेकिन इससे ज्यादा नहीं कर सकती.

इसी बीच में सायरस ब्रोचा कहते हैं, ’10 दिन टाइम वेस्ट किया औह हेड किस हेड किस, वो तो मैं भी कर सकता हूं. सर का कल्चर में हेड किस नहीं होता है. मनीषा कहती हैं, ‘बिहार में हम जहां से आए हैं न वहां माथे पर भी चुम्मा दिया जाए न तो बहुत बड़ी बात है. सिर्फ लवर को किस दिया जाता है.’ जद कहते हैं- हम फ्रेंच किस पर बिलीव करते हैं. जैसे आप किसी व्यक्ति की आत्मा को किस कर रहे हों.’

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Manisha Rani (@manisharani002)

मनीषा कहती हैं, ‘फ्रेंच किस? ई चाहता है कि हम बिहार वापस कभी न जाएं, मेरा माय-बाप निकाल दे मार के. सुनो बाबू मैं फ्रेंच किस के लिए तैयार हूं लेकिन उसके बाद आपको मुझे अपने साथ ही दुबई लेकर चलना होगा. अगर आप तैयार हैं तो मैं करती हूं.’ जद पूछते हैं कि अगर आप किसी को किस करते हैं तो क्या उससे शादी करनी होगी? फलक नाज कहती हैं- हां, इंडिया में ऐसा ही है. इसके बाद वह अपने हाथों से बस उनका चेहरा छूती हैं. बेबीका कहती नजर आ रही हैं- ये करेगी ये करेगी. इसपर मनीषा कहती हैं- तुम रखोगी अपना घर में हमको. मनीषा की इन बातों को सुनकर जद उन्हें गले से लगा लेते हैं. उन्हें ऐसा करते देख कर अकांक्षा जिया से गले लगकर अपना मुंह छिपा लेती हैं. जिया जद से पूछती हैं- जद ये क्या हो रहा है. इस वीडियो को देखकर लोग मनीषा रानी की तारीफें करते नहीं थक रहे. कई लोगों ने तो ये भी कहा है- मनीषा रानी, सिर्फ तुम्हारे लिए हम ये शो देख रहे हैं. लोगों ने मनीषा के बिहार वाले एक्सेंट की भी जमकर तारीफ की है.

अब प्लास्टर ऑफ पेरिस से ड्रेस बनाएंगी उर्फी जावेद, देखें वीडियो

उर्फी जावेद इन दिनों सोशल मीडिया की लाइमलाइट में बनीं हुई है उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर धमाल मचा रही है. उर्फी अपने बेबाक बोल और अतरंगी आउटफिट के लिए जानी जाती है अब हाल ही में उर्फी फिर एक बार अपने फैंस के बीच कुछ अलग हटकर करके दिखाने वाली है. जिसकी वीडियो उर्फी ने शेयर की है. जिसे देख उनके फैंस उतावले हो रहे है और उन्हे जमकर कमेंट कर रहे है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Uorfi (@urf7i)

इन तस्वीरों में उर्फी अपने पूरे बदन पर प्लास्टर ऑफ पेरिस लगाए नजर आ रही है फोटो को देखकर लग रहा है कि एक्ट्रेस अपने किसी नए आउटफिट को बनाने की तैयारी में लगी हुई है. फोटो को शेयर करते हुए उर्फी ने कैप्शन में लिखा है कि कुछ क्रेजी आने वाला है श्वेता महादिक के साथ. इसका इंतजार करें. उर्फी के इन फोटोज पर लोग खूब कमेंट कर रहे है अपनी प्रतिक्रिया दे रहे है. उर्फी की इन फोटो पर एक यूजर कमेंट करते हुए पूछा क्या है ये? प्लास्टर आफ पेरिस है? तो वही एक दूसरे यूजर ने लिखा ये सब बंद कर दो. हाथ जोड़ कर गुजारिश करता हूं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Uorfi (@urf7i)

बता दें कि उर्फी जावेद सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. इंस्टाग्राम पर उन्हें 4.2 मिलियन से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं. एक्ट्रेस का हर एक फोटो और वीडियो आते ही इंटरनेट पर छा जाता है. उर्फी जावेद ने अपने करियर की शुरुआत मॉडल के तौर पर की थी. इसके बाद वह कई टीवी शोज में नजर आईं. उर्फी जावेद ‘मेरी दुर्गा’ और ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ जैसे शोज का हिस्सा रह चुकी हैं. लेकिन एक्ट्रेस के लिए करण जौहर का शो बिग बॉस ओटीटी सीजन भी किया है. इस शो में उर्फी जावेद के टैलेंट को सही पहचान मिली. शो में उर्फी के अतरंगी ड्रेसेस आइडियाज की जमकर सराहना हुई. यूं तो एक्ट्रेस एक हफ्ते के भीतर ही घर से बेघर हो गई थीं, लेकिन शो से निकलने के बाद वह सोशल मीडिया सेंसेशन बन गईं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें