‘‘बोलो, विपुल, अगर मेरे बस में होगा तो जरूर करूंगा.’’ यहां नवयुग सिटी में सरकार ने प्लाट काटे हैं. डैडी ने नवगांव का मकान बेच कर यहां एक प्लाट खरीदा है और कोठी बनवानी है. आप को मालूम है कि ठेकेदार, मजदूरों के सिर पर बैठना पड़ता है, नहीं तो वे काम नहीं करते. सुबह कुछ देर से आने की इजाजत मांगनी है, शाम को देर तक बैठ कर आफिस का काम पूरा कर लूंगा, कोई काम पेंडिंग नहीं होगा. हम ने यहां किराए पर मकान ले लिया है, शाम को डैडी कोठी के कंस्ट्रेक्शन का काम देख लेंगे. बस, 1 महीने की बात है, सर.’’
मैं ने उस को इजाजत दे दी और सोचने लगा कि 1 महीने में कौन सी कोठी बन कर तैयार होती है, तभी महेश केबिन में आया. ‘‘विपुल अंगरेजों के जमाने का बड़बोला है, जिंदगी में कभी नहीं सुधरेगा.’’
‘‘अब क्या हो गया?’’ ‘‘सर, सेक्टर 20 में तो 25 और 50 गज के प्लाट प्राधिकरण काट रहा है, वहां कौन सी कोठी बनवाएगा. मकान कहते शर्म आती है, इसलिए कोठी कह रहा है. यदि उस की 50 गज में कोठी है, तो सर, मेरा 100 गज का मकान तो महल की श्रेणी में आएगा.’’
मैं महेश की बातें सुन कर हंस दिया और जलभुन कर महेश विपुल को जलीकटी सुनाने लगा. खैर, विपुल ने 1 महीना कहा था, लेकिन लगभग 4 महीने बाद मकान बन कर तैयार हो गया. मकान के गृहप्रवेश पर विपुल ने पूरे स्टाफ को आमंत्रित किया, लेकिन स्टाफ ने कोई रुचि नहीं दिखाई. सब बड़े आराम से आफिस के काम में जुट गए. मेरे कहने पर सब ने एकजुट हो कर विपुल के यहां जाने से मना कर दिया.
‘‘महेश, बड़े प्रेम से विपुल ने गृहप्रवेश पर बुलाया है, हमें वहां जाना चाहिए.’’ ‘‘सर, मुझे चलने को मत कहिए, उस की कोठी मैं बरदाश्त नहीं कर सकूंगा. मैं अपने झोंपड़े में खुश हूं.’’
‘‘महेश, आफिस से 2 घंटे जल्दी चल कर बधाई दे देंगे, उस की कोठी हो या झोंपड़ा, हमें इस से कुछ मतलब नहीं. वह अपनी कोठी में खुश और हम अपने झोंपड़े में खुश.’’
यह बात सुन कर महेश खुशी से उछल पड़ा और बोला, ‘‘कसम लंगोट वाले की, आप की इस बात ने दिल बागबाग कर दिया. अब आप का साथ खुशीखुशी.’’ शाम को 4 बजे हम आफिस से चल कर विपुल की कोठी पहुंचे. 50 गज के प्लाट पर दोमंजिला मकान था विपुल का. महेश ने चुटकी ली, ‘‘यार, कोठी के दर्शन करवा, बड़ी तमन्ना है, दीदार क रने की.’’
‘‘हांहां, देखो, यह ड्राइंगरूम, रसोई, बैडरूम…’’ अपनी आदत से मजबूर साधारण काम को भी बढ़ाचढ़ा कर बताने लगा कि कोठी के निर्माण में 50 लाख रुपए लग गए. ‘‘सुधर जा, विपुल, 5 के 50 मत कर.’’
‘‘नहींनहीं, आप को पता नहीं है कि हर चीज बहुत महंगी है. जिस चीज को हाथ लगाओ, लाखों से कम आती नहीं है,’’ विपुल आदत से मजबूर सफाई देने लगा. ‘‘विपुल, समय बड़ा बलवान है, इतना झूठ बोलना छोड़ दे, एक
दिन तेरा सच भी हम झूठ मानेंगे. सुधर जा.’’ ‘‘बाई गौड, झूठ की बात नहीं है, बिलकुल सच है,’’ विपुल सफाई पर सफाई दे रहा था.
हम ने वहां से खिसकने में ही अपनी बेहतरी समझी. विपुल से बहस करना बेकार था. हम ने उसे शगुन का लिफाफा पकड़ाया और विदा ली. मकान से बाहर आ कर हम दोनों के मुख से एकसाथ बात निकली :
‘‘विपुल कभी नहीं सुधरेगा. बड़बोला था, बड़बोला है और बड़बोला रहेगा.’
बाद तुम्हारी राह देखी थी, तुम्हारा इंतजार किया था, पर तुम्हें आज यों पा कर मैं तुम से नफरत करता हूं. तुम तो वेश्या निकली ज्योति… वेश्या.’’
मेरी बात सुन कर वह कुछ पल खामोश मुझे देखती रही, फिर अचानक खड़े हो कर बिफरते हुए वह बोली, ‘‘ऋषि, मैं वेश्या हूं ठीक कहा, पर तुम यहां एक वेश्या के घर क्या करने आए थे? तुम भी तो उतने ही गिरे हुए हो, जितना मैं, बल्कि मुझ से भी ज्यादा.
‘‘और अब मैं खुद को वेश्या कहने वाले को यहां एक पल भी बरदाश्त नहीं कर सकती, दफा हो जाओ यहां से,’’ इतना कह कर उस ने मुझे धक्का देते हुए वहां से बाहर निकाल कर दरवाजा बंद कर लिया. सच तो यह था कि ज्योति ने आज मुझे आईना दिखा दिया था.
ज्योति के दिखाए गए आईने ने मुझे झकझोर कर रख दिया. मैं ने खुद को बड़ी तेजी से बदल लिया. अब मैं सिर्फ और सिर्फ अपनी पढ़ाई और अस्मिता को समर्पित था.
बीटैक कर के मुझे एक नौकरी मिल गई थी और मैं ने अस्मिता के लास्ट सैमेस्टर के एग्जाम होने के बाद शादी का ऐलान कर दिया. हम दोनों के घर वालों ने हमारी होने वाली शादी को मंजूरी दे दी.
पर हमारे परिवार की एक परंपरा के मुताबिक थोड़ी सी अड़चन आ गई. मेरे ताऊजी के बेटे विवेक भैया, जो जन्म से हमेशा गांव से बाहर ही रहे थे, ने अब तक शादी नहीं की थी और परिवार की परंपरा के मुताबिक जब तक किसी बड़े की शादी न हुई हो छोटे की शादी नहीं हो सकती.
पर यह अड़चन भी जल्दी ही खत्म हो गई थी. एक दिन विवेक भैया ने फोन कर के कहा कि उन्होंने लखनऊ में एक जूनियर साइंटिस्ट से शादी कर ली है, जो उन के ही डिपार्टमैंट में इस साल आई थी. विवेक भैया वनस्पति अनुसंधान संस्थान में वैज्ञानिक थे.
यों बिना किसी को बताए शादी कर लेने से परिवार के लोग विवेक भैया से थोड़ा नाराज हुए, फिर स्वीकार करते हुए उन्हें बहू के साथ तुरंत घर आने की ताकीद की.
हां, विवेक भैया के इस तरह शादी कर लेने से मैं बहुत खुश था, मेरा रास्ता जो अब साफ हो गया था. यह खबर मैं ने अस्मिता को भी दे दी थी.
मैं और अस्मिता बाजार से भैया और भाभी के स्वागत के लिए जब गुलदस्ता ले कर घर पहुंचे, तो विवेक भैया और भाभी घर आ चुके थे. लोग उन के स्वागत में बिजी थे. लोगों के मुंह से भाभी की खूबसूरती के कसीदे गढ़े जा रहे थे.
मैं ने भाभी को देखने की कोशिश तो की, पर लोगों से घिरे होने की वजह से उन्हें देख ही नहीं पाया. तभी विवेक भैया की नजर मुझ पर पड़ी और वे चिल्ला कर बोले, ‘‘आओ ऋषि, कैसे हो? आ कर अपनी भाभी से मिलो.’’
भाभी से मिलने की खुशी में मैं तेजी से आगे बढ़ा, पर जल्दी ही ठिठक कर खड़ा हो गया.
‘‘ज्योति…’’ मेरे होंठ हलके से हिले. शरीर पूरी तरह से कांप कर रह गया.
हाथ में पकड़े गुलदस्ते को मेरे हाथ से लेते हुए विवेक भैया बोले, ‘‘यह तो मेरे लिए है, अब बोल अपनी भाभी को क्या दोगे?’’
तभी मां ने कहा, ‘‘चलो ऋषि, भाभी के पैर छू कर आशीर्वाद लो… और देख, तो विवेक किस खूबसूरत लड़की को हमारी बहू बना कर लाया है.’’
मैं ने खामोश हो कर ज्योति की तरफ देखा, तो उस ने हलके से बाईं आंख दबा दी.
मुझे खड़ा देख कर मेरी बहन ने हलके से धक्का मार के कहा, ‘‘भैया, अब जल्दी पैर छू कर यहां से हटो. और भी लोग लाइन में लगे हैं भाभी से मिलने को.’’
ज्योति के रूप में भाभी को देख कर सब बहुत खुश हो रहे थे. मैं न चाहते हुए भी आगे बढ़ा और झुक कर अपने हाथ की उंगली को ज्योति के पैर पर टिका दिया.
ज्योति के पैर छूते ही मुझे लगा कि वह ज्वर मेरे शरीर से उतर गया, जो कभी ज्योति ने मेरे शरीर को छू कर दिया था. मैं पलट कर जब वहां से हटा, तो मेरे कानों में ये शब्द गूंज उठे, ‘एक दिन किसी हमजैसी के पैर तू भरी महफिल में छुएगा, उस दिन मुझे याद करना’.
आज मुझे गुंजा की मां याद आ गई थी.
इन दिनों बिग बॉस में नया हंगामा देखने को मिल रहा है बिग बॉस ओटीटी2 हर दिन मीडिया की हेडलाइन में बना रहता है लेकिन इस बार घर में एल्विश यादव और अविनाश के बीच जमकर लड़ाई हुई जिससे देखना काफी दिलचस्प रहा है. एल्विश, अविनाश पर की भड़कते हुए नजर आएं.
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आपको बता दें, कि घर में राशन टास्ट हुआ था.जिसमें अभिषेक को अपने हिसाब से सबको सजा देनी थी. बेबिका से उन्होने कपडे धुलवाएं. मनीषा से उन्होने शू पॉलिश करवाएं.जिया जोकर बनाया था.लेकिन जब अविनाश का सजा का टाइम तो उन्होने मना कर दिया. अविनाश के टास्ट ना करने से घर में प्रीमियम राशन नहीं आया. इस वजह से एल्विश यादव और अभिषेक मल्हान को अविनाश पर खूब गुस्सा आया औऱ उनकी लड़ाई शुरु हो गई.
सबसे ज्यादा अविनाश पर एल्विश भड़कते नजर आए, उन्होने कहा कि तुझे माफी मांगनी चाहिए, लेकिन अविनाश कहते है कि मैं माफी नहीं मागूंगा. एल्विश इस पर भड़क जाते है और कहते है कि तू बहुत नीचे गिर चुका, बेसमेंट से भी नीचे औऱ तुम्हारी सोच भी छोटी है तुम वैसे हो ही नहीं कि किसी के लिए माफी मांगो कि किसी को अपने मन का खाना नहीं मिला है उसके लिए तुम्हे बुरा लगे.
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अविनाश कहते है कि जो करना है कर लें, एल्विश कहते है कि करेंगे, लेकिन टाइम आने पर. भाई जितना ईगो है वो मेरे सामने कुछ नहीं है.अविनाश कहते है कि बकवास कर रहा है तो एल्विश कहते है कि बकवास लग रही है तो कान बंद कर ले. इस तरह दोनों में झड़प शुरु हो गई लेकिन मामला यही शांत नहीं हुआ. जब दोनों आपस में ज्यादा भिड़त नजर आए तो, मनीषा और फुकरा ने उन्हे शांत करने की कोशिश की है.मनीषा कहती है कि वो आपको उकसा रहा है तो एल्विश कहते है कि क्या ही कर लेगा. इसके बाद जैद आकर दोनों को चुप कराते है.फिर मामला शांत हो जाता है.
इन दिनों सलमान खान अपनी आने वाली फिल्म टाइगर 3 को लेकर चर्चाओं में बने हुए है साथ ही वो बिग बॉस ओटीटी 2 को भी होस्ट कर रहे है जिसे लेकर अक्सर सलमान सुर्खियों में रहते है. लेकिन अब सलमान अपनी पिंक पैंट को लेकर चर्चा में बने हुए है. उनकी पिंक पैंट फैन को खूब पसंद आ रही है.
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आपको बता दें, कि बीती रात सलमान खान के भाई अरबाज खान का बर्थडे था, जहां सलमान खान अपनी कार से पहुंचे लेकिन यहा जो खास बात नोटिस करने वाली थी वो थी सलमान खान की पिंक पैंट. जिसपर सबकी नजरे टिकी हुई थी. पिंक पैंट को लेकर सलमान खूब चर्चाएं बटोर रहे है उनकी ये तस्वीर औऱ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है फैंस जमकर कमेंट करते दिख रहे है.
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इन तस्वीरों में सलमान खान काफी स्टाइलिश लग रहे है उनके लुक का हर कोई दिवाना हो रहा है और आज भी कहा जा सकता है कि फैशन के मामले में सलमान खान आज भी टॉप पर है.बताते चले कि सलमान खान और कटरीना कैफ की अपकमिंग फिल्म टाइगर 3 इस साल दिसंबर के महीने में रिलीज हो सकती है. इस मूवी में इमरान हाशमी विलेन का रोल निभाने वाले हैं. साथ ही शाहरुख खान टाइगर 3 में कैमियो भी करेंगे.
बिहार के गया शहर के हाईप्रोफाइल आदित्य मर्डर केस में अदालत ने हत्यारे रौकी उर्फ राकेश रंजन यादव (25 साल), उस के साथी टेनी यादव उर्फ राजीव कुमार (23 साल), उस की मां मनोरमा देवी के सरकारी बौडीगार्ड राजेश कुमार (32 साल) को उम्रकैद तथा रौकी के पिता बिंदी यादव (55 साल) को 5 साल की कैद की सजा सुनाई है.
जदयू की निलंबित एमएलसी मनोरमा देवी और पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष बिंदी यादव के बिगड़ैल बेटे रौकी उर्फ राकेश रंजन यादव ने पिछले साल 7 मई को गया के बड़े कारोबारी श्याम सचदेवा के बेटे आदित्य सचदेवा की गोली मार कर हत्या कर दी थी.
आदित्य की गलती सिर्फ इतनी थी कि वह रौकी की लैंडरोवर कार को ओवरटेक कर के आगे निकल गया था. सत्ता और दौलत के नशे में चूर रौकी को आदित्य की इस हरकत पर इतना गुस्सा आया कि उस ने उसे गोली मार दी थी.
मृतक आदित्य की मां चंदा सचदेवा ने अदालत से अनुरोध किया था कि उन के मासूम बेटे के हत्यारों को फांसी की सजा न दी जाए. वह नहीं चाहतीं कि फांसी दे कर उन की तरह एक और मां की गोद सूनी कर दी जाए.
31 अगस्त को जब आदित्य की हत्या के मामले में रौकी और उस के साथियों को दोषी ठहरा दिया गया तो चंदा सचदेवा ने रोते हुए कहा था कि आखिर उन के बेटे का क्या कसूर था, जो उसे इस तरह मार दिया गया? उस ने तो अभी ठीक से दुनिया भी नहीं देखी थी. बेटे की मौत के बाद से आज तक उन के आंसू नहीं थमे हैं.

शायद जिंदा रहने तक थमेंगे भी नहीं, इसीलिए वह नहीं चाहती थीं कि ऐसा दर्द किसी अन्य मां को मिले. उन्होंने अदालत का फैसला आने से पहले ही कहा था, ‘‘मेरा बेटा तो चला गया, पर मैं किसी और मां को ऐसा दर्द देने या दिलाने के बारे में कतई नहीं सोच सकती. रौकी को अदालत कड़ी से कड़ी सजा दे, पर फांसी न दे.’’ बाद में फैसला आने पर उन्होंने कहा, ‘‘अदालत ने जो फैसला सुनाया है, उस से मैं संतुष्ट हूं.’’
चंदा सचदेवा का कहना सही भी है. जवान बेटे के खोने का दर्द उन से बेहतर और कौन जान सकता है. वह अपना दर्द कम करने के लिए अन्य मां का बेटा नहीं छीनना चाहती थीं.
सरकारी वकील सरताज अली ने बहस के दौरान कहा था कि यह बहुत जघन्यतम मामला है, इसलिए हत्यारे रौकी को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए. जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा था कि यह मामला रेयरेस्ट औफ रेयर नहीं है, इसलिए 3 आरोपियों को उम्रकैद और एक को 5 साल की कैद की सजा दी जाती है.
आदित्य के पिता श्याम सचदेवा कहते ने कहा कि सरकार, पुलिस और प्रशासन ने उन का पूरा साथ दिया. इसी का नतीजा है कि आज उन्हें इंसाफ मिला है. इस हत्याकांड की जांच और सुनवाई के दौरान तमाम उतारचढ़ाव आए. वारदात के 3 दिनों बाद 10 मई को रौकी को गिरफ्तार किया गया था. 6 जून को सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी. मुख्य आरोपी रौकी की जमानत की अर्जी को गया सिविल कोर्ट ने खारिज कर दिया था. इस के बाद रौकी ने पटना हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी.
19 अक्तूबर, 2016 को वहां से जमानत मिल गई थी. हाईकोर्ट द्वारा जमानत देने के विरोध में बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट गई, जहां रौकी की जमानत रद्द कर दी गई तो उसे दोबारा जेल जाना पड़ा. इस मामले में 29 लोगों की गवाही हुई थी.
पिछले साल 7 मई की रात 8-9 बजे के बीच गया के कारोबारी श्याम कुमार सचदेवा का बेटा आदित्य सचदेवा अपने दोस्त की मारुति स्विफ्ट कार बीआर-02ए सी2699 से बोधगया से गया स्थित अपने घर की ओर आ रहा था.
वह अपने दोस्तों के साथ बर्थडे पार्टी में बोधगया गया था. रास्ते में जेल के पास ही सत्तारूढ़ दल जदयू की एमएलसी मनोरमा देवी के बेटे रौकी अपनी लैंडरोवर कार से आदित्य की कार को ओवरटेक करने की कोशिश करने लगा.
काफी देर तक आदित्य ने उसे आगे नहीं जाने दिया. जब खाली सड़क मिली, रौकी ने उस की कार को ओवरटेक कर के आदित्य की कार रुकवा ली. इस के बाद उस ने उसे कार से उतार कर जम कर पिटाई की.
पिटाई के बाद आदित्य और उस के साथियों ने उन से माफी मांग ली. वे अपनी कार की अेर जाने लगे तो बाहुबली बाप के बिगड़ैल बेटे रौकी ने पीछे से गोली चला दी, जो आदित्य के सिर में जा लगी. वह जमीन पर गिर पड़ा. थोड़ी देर तक वह तड़पता रहा, उस के बाद प्राण त्याग दिए.
आदित्य के दोस्तों के बताए अनुसार, रात पौने 8 बजे के करीब उन की कार ने एक लैंडरोवर एसयूवी कार को ओवरटेक किया. इस के बाद वह कार उन की गाड़ी के आगे जाने के लिए रास्ता मांगने लगी. उस कार से आगे निकल कर उन की कार सिकरिया मोड़ से गया शहर में पुलिस लाइन की ओर मुड़ गई.
इस के कुछ देर बाद लैंडरोवर कार आदित्य की स्विफ्ट कार के बगल में आई तो उस में बैठे लोगों ने शोर मचाते हुए कार रोकने का इशारा किया. कार चला रहे नासिर ने गाड़ी रोक दी तो उस कार से 4 लोग नीचे उतरे. उन में रौकी, बौडीगार्ड, ड्राइवर और एक अन्य आदमी था, जिसे वे नहीं पहचानते थे.

रौकी ने आदित्य की पिटाई तो की ही, पिस्तौल की बट से नासिर पर भी हमला किया, जिस से उस ने गाड़ी को भगाने की कोशिश की. गाड़ी कुछ ही दूर गई थी कि पीछे से गोली चलने की आवाज आई. वह गोली आदित्य को लगी, जिस वह सीट पर ही लुढ़क गया.
हत्या के इस मामले में पुलिस ने रौकी उर्फ राकेश रंजन यादव, उस के पिता और मनोरमा देवी के पति बिंदेश्वरी यादव उर्फ बिंदी यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. मनोरमा देवी का सरकारी बौडीगार्ड राजेश कुमार भी हत्या के इस मामले में शामिल था.
पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया था. उस के पास से 70 राउंड गोली और कारबाइन जब्त कर ली गई थी. उस पर आरोप था कि उस ने रौकी को गोली चलाने से रोका नहीं था.
एडीजे मुख्यालय सुनील कुमार ने बताया था कि हथियार की फोरैंसिक जांच में पता चला था कि बौडीगार्ड के हथियार से गोली नहीं चलाई गई थी. पूछताछ में बौडीगार्ड ने बताया था कि रौकी ने ही आदित्य पर गोली चलाई थी.
रौकी के पिता बिंदी यादव का पुराना आपराधिक रिकौर्ड रहा है. वह और उस का बेटा रौकी, दोनों ही रिवौल्वर रखते थे. गया के थाना रामपुर में आदित्य के भाई आकाश सचदेवा की ओर से आदित्य की हत्या का मुकदमा अपराध संख्या 130/2016 पर आईपीसी की धारा 341, 323, 307, 427, 120बी और 27 आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज किया गया था.
जबकि पुलिस यह मुकदमा दर्ज करने में टालमटोल कर रही थी. लेकिन आदित्य के घर वालों का कहना था कि जब तक मुकदमा दर्ज नहीं होगा, वे लाश का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे. सियासी और प्रशासनिक दांवपेच चलते रहे. पुलिस ने 5 बार मुकदमे का मजमून बदलवाया.
आदित्य के पिता श्याम कुमार सचदेवा गया के बड़े कारोबारी हैं. वह मूलरूप से पंजाब के रहने वाले हैं. थाना कोतवाली के स्वराजपुरी रोड पर महावीर स्कूल के पास उन की सचदेवा इंटरप्राइजेज के नाम से पाइप की दुकान है.
आदित्य ने गया के नाजरथ एकेडमी कौनवेंट स्कूल से 12वीं की परीक्षा दी थी. उस की मौत के बाद उस का परीक्षाफल आया था. आदित्य के चाचा राजीवरंजन के अनुसार, उन का परिवार करीब 65 साल पहले पाकिस्तान से आ कर गया में बसा था.
आदित्य से पहले उन के परिवार के एक अन्य सदस्य की हत्या हो चुकी थी. सन 1987 में उन के बड़े भाई हरदेव सचदेवा के बेटे डिंपल की हत्या पतरातू में कर दी गई थी. इस के बाद उन के छोटे भाई के छोटे बेटे को मार दिया गया.
7 मई को आदित्य की हत्या हुई थी. 10 और 11 मई की रात 2 बजे के करीब रौकी को उस के पिता बिंदी यादव के मस्तपुरा स्थित मिक्सचर प्लांट से गिरफ्तार किया गया था. उस के पास से हत्या में इस्तेमाल की गई विदेशी रिवौल्वर और गोलियों से भरी मैगजीन बरामद की गई थी. उस के पिस्तौल का लाइसैंस दिल्ली से जारी किया गया था.
पूछताछ में रौकी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. लेकिन बाद में वह अपने अपराध से मुकर गया था. उस का कहना था कि उस ने आदित्य की हत्या नहीं की. घटना के समय वह दिल्ली में था. वह तो मां के बुलाने पर गया आया था. अपनी मां के कहने पर ही उस ने आत्मसमर्पण किया था, पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया.
जबकि एसएसपी का कहना था कि रौकी को गिरफ्तार किया गया था. आदित्य की हत्या के बाद एमएलसी मनोरमा देवी का पूरा परिवार और राजनीति चौपट हो गई. पहले बेटा रौकी हत्या के मामले में जेल गया, उस के बाद उस के पति बिंदी यादव को भी पुलिस ने हत्यारों को छिपाने और भगाने के आरोप में सलाखों के पीछे पहुंचा दिया था.
इस के बाद रौकी की खोज में जब पुलिस ने मनोरमा के घर छापा मारा तो रौकी तो वहां नहीं मिला, लेकिन उन के घर से विदेशी शराब की 6 बोतलें बरामद हुई थीं. राज्य में शराबबंदी के बाद सत्तारूढ़ दल के एमएलसी के घर से शराब की बोतलें मिलने से सरकार को छीछालेदर से बचाने के लिए तुरंत मनोरमा देवी को जदयू से निलंबित कर दिया गया था.
मनोरमा देवी के घर से शराब मिलने के बाद आननफानन उन की गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया गया था. 11 मई को जिला प्रशासन, पुलिस और उत्पाद विभाग के अफसरों की मौजूदगी में मनोरमा देवी के घर को सील कर दिया गया था, जबकि वह फरार थीं. जिस घर से शराब बरामद हुई थी, वह मनोरमा देवी के नाम था, इसलिए इस मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया. बाद में उन्हें गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया था.
पुलिस जांच से पता चला था कि रौकी ने जिस रिवौल्वर से आदित्य की हत्या की थी, वह इटली की बरेटा कंपनी का था. वह .380 बोर का था. पुलिस सूत्रों के अनुसार, आदित्य की हत्या करने के बाद रौकी पटना समेत राज्य के कई स्थानों पर छिपता रहा.
हत्या करने के तुरंत बाद रौकी भाग गया था. इस के बाद वह दिल्ली जाना चाहता था, लेकिन अचानक उस का प्लान बदल गया और वह गया चला गया. गिरफ्तारी के बाद उसे गया सैंट्रल जेल में रखा गया था, जहां उसे कैदी नंबर 22774 की पहचान मिली थी.
उस के बाहुबली पिता बिंदी यादव को कैदी नंबर 22758 की पहचान मिली थी. दोनों को जेल के एक ही वार्ड में रखा गया था. आदित्य हत्याकांड की जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ था कि देशद्रोह के आरोपी बिंदी यादव को किस तरह से सरकारी बौडीगार्ड मुहैया कराया गया था.
जिला सुरक्षा समिति ने 9 फरवरी, 2016 को बिंदी यादव को भुगतान के आधार पर एक पुलिसकर्मी मुहैया कराया था. बिंदी पर आरोप था कि उस ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा-माओवादी को प्रतिबंधित बोर की कई हजार गोलियां और हथियार उपलब्ध कराए थे. इस मामले में वह लंबे समय तक गया जेल में बंद रहा था.
सवाल-
मैं अपने बौयफ्रेंड से बहुत दुखी हूं. वह अपने कैरियर को ले कर बहुत परेशान रहता है. इस टैंशन के चलते वह मेरे साथ किसी भी पल को एंजौय नहीं करता. एंजौय करना तो बहुत दूर की बात है वह तो मुझे गर्लफ्रैंड की तरह ट्रीट तक नहीं करता. सैक्स के बाद वह चादर तान कर सो जाता है, जब भी हम मिलते हैं तो कभी हग नहीं करता, न ही हाथ पकड़ता है. वह मुझे मैसेजेस भी तब करता है जब मैं उसे गुस्से में कुछ कह देती हूं.
मैं उस से प्यार करती हूं और उस का चेहरा देखते ही, उस से बात करते ही मेरे चेहरे पर खुशी आ जाती है, लेकिन मैं इस रिलेशनशिप में खुश नहीं हूं. उस का मेरे प्रति इस तरह का फीका व्यवहार अब मुझ से सहा नहीं जाता. क्या मुझे उस से ब्रेकअप कर लेना चाहिए?
जवाब-
आप के बौयफ्रैंड का अपने करियर को ले कर चिंतित होना जायज है लेकिन आप के प्रति जो उस का व्यवहार है, न तो वह जायज है और न ही ऐक्सैप्टेबल. रिलेशनशिप्स काफी कौंप्लिकेटेड होती हैं और इन्हें पटरी पर चलाते रहने के लिए यह बहुत जरूरी है कि एफर्ट्स दोनों तरफ से बराबर होते रहें.
आप के बौयफ्रैंड की यदि आप के प्रति कोई जवाबदेही या अच्छा व्यवहार नहीं है तो आप को उस से इस बारे में बात करनी चाहिए. यदि वह आप के विचार जान कर यह कहता है कि ब्रेकअप करने के बजाय वह खुद को सुधारेगा और आप को खुश रखेगा तो रिलेशनशिप को मौका दे कर देखिए. यदि उसे आप के होने या न होने से फर्क न पड़े तो ब्रेकअप कर आगे बढि़ए. रिलेशनशिप में खुश रहने का अधिकार आप दोनों को बराबर है.
इस दुनिया में किसी के लिए भी सब से मीठा एहसास होता है प्यार. आप किसी शख्स को दिल से चाहें और वह भी आप को उतनी ही निष्ठा के साथ प्रेम करे, तो इस से अच्छी और कोई फिलिंग हो ही नहीं सकती. प्रेम करने वाला बदले में प्रेम की ही आस रखता है. लेकिन इंसान प्यार में हमेशा वफादार रहे यह जरूरी नहीं है. विश्वासघात, बेवफाई, धोखा, चीटिंग ये सब सिर्फ शब्द नहीं हैं, बल्कि मजबूत से मजबूत रिश्ते की नींव हिलाने के लिए काफी हैं. कई लोग अपने पार्टनर को चीट करते हैं. एक स्टडी के मुताबिक, कुछ सालों में ऐसे काफी सारे केसेस सामने आए हैं, जिन में अकसर शादी के बाद पार्टनर चीट करते हैं और आज के समय तो ये समस्या बेहद आम हो गई है.
लेकिन इस बात का पता लगाना कि आप का पार्टनर वास्तव में आप के साथ चीट कर रहा है या नहीं, जानना थोड़ा मुश्किल है. कटाकटा रहना, आदतों में एकदम से बदलाव, काफी हद तक रिलेशनशिप में चीटिंग को दर्शाता है. आप का पार्टनर विश्वासपात्र है या नहीं और कहीं वह आप को धोखा तो नहीं दे रहा. जानिए इन संकेतों से जो बताते हैं कि कहीं आप का पार्टनर आप के साथ चीटिंग तो नहीं कर रहा.
व्यवहार में बदलाव: सब से बड़ी पहचान यही है कि पार्टनर के व्यवहार में बदलाव होने लगता है. ‘मैं बोर हो गया हूं’ जैसे शब्दों से समझ में आने लगता है कि कहीं कुछ तो गड़बड़ है. दीप्ति माखीजा के अनुसार, पार्टनर जब चीट करने लगता है तो अपनेआप ही कुछ क्लू या बातें सामने आने लगती हैं, जिन्हें बस समझने की देरी है. जैसे उस के बोल होने लगते हैं, ‘तुम्हें बोलने का तरीका नहीं है? अपना वजन कम करो, मोटी हो गई हो. साथ ही, आप के पार्टनर आप की तुलना किसी दूसरेतीसरे से करने लगते हों. बेवजह आप की गलती निकालने लगे हों, आप की किसी एक छोटी सी गलती पर आप को गैरजिम्मेदार ठहराने लगे हों, तो आप को सचेत हो जाना चाहिए. खास कर तब जब ऐसा पहले कभी नहीं होता था. यह न समझें कि अब वह ऐसा कर के आप को शर्मिंदा महसूस कराने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसा कोई इंसान तभी करता है जब वह अपने पुराने रिश्ते को तोड़ कर किसी और के साथ रिश्ते बनाना चाहता है.
दिनचर्या में बदलाव: दैनिक दिनचर्या में लगातार आने वाले बदलाव भी पार्टनर के आप को धोखा देने के संकेत हो सकते हैं. जैसे, अचानक अपने वार्डरोब में कपड़ों को बदलना, खुद पर ज्यादा ध्यान देने लगना. आईने में खुद को निहारते रहना, आप के आने पर सतर्क हो जाना इत्यादि यदि ऐसा होता है तो समझा जाए कि कुछ तो गड़बड़ है. पहले की तरह आप में रुचि न दिखाना, क्योंकि पहले आप दोनों एकदूसरे के नजदीक जाने के बहाने ढूंढा करते थे और अब आप का पार्टनर आप से दूर जाने के बहाने ढूंढने लगें. कमिटमैंट से घबराने लगे तो समझिए वह आप को धोखा दे रहे हैं. इस के अलावा आप से बेवजह लड़ाइयां होने लगना. आप के हर काम में नुक्स निकालने लगना. पहले की तरह व्यक्तिगत बातें, कैरियर संबंधित बातें आदि आप से साझा न करने लगें, तो समझ लीजिए कि वह आप से दूर होने की कोशिश कर रहे हैं.
आप के प्रति प्यार कम होना: पहले जहां आप की हर बातें उन्हें प्यारी लगती थी. पर अब आप की हर बात पर वह झल्लाने लगें. मूवी देखने या कहीं बाहर जाने में आनाकानी करने लगें. ज्यादा समय औफिस में बिताने लगें. इन बातों से साफ पता चलता है कि आप का पार्टनर आप को चीट कर रहा है. हो सकता है आप का पार्टनर किसी और बात को ले कर परेशान हो या कुछ और वजह हो सकती है. लेकिन इस सब के साथ आप का पार्टनर कोई फैसला लेने में आप से आप की राय नहीं पूछते या आप से अपनी बातें शेयर नहीं करते, तो यह धोखे का संकेत हो सकता है.
फोन से जुड़े सवाल: यदि आप अपने पार्टनर की फोन से जुड़ी गतिविधियों में बदलाव को नोटिस करते हैं, तो यह धोखा देने का संकेत हो सकता है. जैसे आप का पार्टनर जरूरत से ज्यादा फोन पर व्यस्त रहने लगे. औफिस में उन का फोन कईकई घंटों तक व्यस्त आता हो. आप से अपने फोन और मैसेज छिपाने लगे हों. फोन का पासवोर्ड बदल दिया हो और आप को अपना पासवोर्ड न बताएं और न ही अपना फोन छूने दें, तो यह धोखे का संकेत हो सकता है. इस के अलावा उन की सोशल मीडिया की आदतों में भी बदलाव हो सकता है, जैसे ज्यादा फोटो अपलोड करना या बारबार अपनी प्रोफाइल बदलते रहना, बारबार मैसेज अलर्ट चेक करना, जैसे कई छोटेछोटे बदलाव धोखे का संकेत हो सकते हैं.
छोटीछोटी बातों पर झूठ बोलने लगना: यदि आप का साथी आप से हर छोटीछोटी बात पर झूठ बोलने लगे, बातें छिपाने लगे, तो समझिए जरूर कुछ गड़बड़ है.
आंखें चुराने लगे: यदि आप का साथी आप से बात करने से बचने लगे या बात करते वक्त अपनी आंखें न मिला पाए, इधरउधर देखने लगे, आप की बातों को अनसुना करने लगे, आप की किसी भी बात को गंभीरता से न ले, वही काम करे जो आप को पसंद नहीं है, अपनी गलती न मानने के बजाए आप की ही गलती निकालने लगे, आप का फोन न उठाए और न ही आप के किसी मैसेज का जवाब दे, तो समझ लेना चाहिए कि आप का पार्टनर आप को नजरअंदाज करने की कोशिश कर रहा है.
धोखा देने वाला हमेशा कोई करीबी ही होता है और शायद यही वजह है कि जब इंसान को धोखा मिलता है तो सबकुछ बिखर जाता है. खासतौर पर जब धोखा देने वाला आप का पार्टनर हो.
पूरा समय लें: अगर आप अपने पार्टनर के धोखा देने की बात से परेशान हैं तो जल्दबाजी करने से बचें. पूरा समय लें. आप को किसी से भी इस बारे में बात करने की जरूरत नहीं है. अपने पार्टनर से तो बिलकुल नहीं. आप को गुस्सा तो आ रहा होगा, लेकिन नाराजगी में कहे शब्द नुकसान अधिक पहुंचाते हैं.
न बहस करे न लड़े: विरोध दर्ज करना जरूरी है और सामने वाले को भी तो पता चलना चाहिए कि कुछ ऐसा हुआ है जिस की वजह से आप परेशान हैं. लेकिन अपनी आवाज और शब्दों पर संयम रखें. पार्टनर को यह जरूर बताएं कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं.
‘वो’ को दोष न दें: ज्यादातर मामलों में धोखा देने वाले पार्टनर को दोषी मानने के बजाए उस लड़की या लड़के को दोषी मान लिया जाता है, जिस की वजह से धोखा दिया गया. ऐसा करना सही नहीं है. क्योंकि जो शख्स आप के प्यार को झुठला कर आगे निकल गया, तो गलती उस की ही है.
अपने मामले में किसी और को बोलने न दे: अगर आप चाहते हैं कि आप के और आप के पार्टनर के बीच सब कुछ ठीक हो जाए तो बेहतर यह होगा कि आप इस बात की चर्चा किसी और से न करें. किसी तीसरे को इन बातों में शामिल करना आप के लिए ही खतरनाक हो सकता है.
एक मौका और दें: अगर आप को लगे कि आप के पार्टनर को अपनी गलती का एहसास हो गया है और वह सब कुछ ठीक करना चाहता है तो उसे वक्त दें. हो सकता है सब फिर पहले जैसा हो जाए. इस के लिए आप दोनों का साथ रहना और साथ वक्त बिताना जरूरी है, ताकि आप दोनों के बीच की गलतफहमी खत्म हो सके.
पीआरपी (प्लेटलेट-रीच प्लाज्मा) थेरेपी में त्वचा को नया रूप देने के लिए प्लेटलेट और प्लाज्मा (रक्त के भीतर मौजूद तत्व) की उपचारात्मक शक्ति का इस्तेमाल किया जाता है. प्लेटलेट्स रक्त में पाई जाने वाली एक प्रकार की कोशिकाएं हैं. इनमें वृद्धि करने की शक्ति होती है और वे चोट के क्षेत्र में थक्का बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं, इसलिए रक्त स्राव रोक देते हैं. प्लाज़्मा रक्त का तरल हिस्सा है.
हमारी उम्र बढ़ने के साथ ही त्वचा के नीचे स्थित ऊतकों से वसा की मात्रा कम होने लगती है. इसके साथ ही सूर्य की रोशनी और प्रदूषण की वजह से होने वाले नुकसान के कारण रेखाओं और झुर्रियों के साथ त्वचा की चमक खो जाती है, जिसके कारण हम वृद्ध और थके हुए नजर आते हैं. पीआरपी थेरेपी में हमारे रक्त में पाई जाने वाली वृद्धि की क्षमताओं का इस्तेमाल कर त्वचा की खोई हुई टेक्सचर, टोन और प्राकृतिक चमक को वापस पाने में मदद मिलती है.
यह एक साधारण प्रक्रिया है और इसे एक से दो घंटे के वक्त में किया जा सकता है. लोकल एनेस्थेटिक क्रीम को चेहरे या जिस भी हिस्से का इलाज किया जाना है, वहां लगाया जाता है और उसे करीब 1 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है. इसी बीच हाथ की बड़ी नसों में से एक में से 10-20 मिली रक्त निकाला जाता है और लाल रक्त कणिकाओं व अन्य में से प्लेटलेट्स एवं प्लाज़्मा को अलग करने के लिए अपकेंद्रित किया जाता है.
प्लेटलेट और प्लाज़्मा युक्त इस फ्लूइड को बहुत ही बारीक सूई का इस्तेमाल कर त्वचा के भीतर डाल दिया जाता है. इससे प्लेटलेट के वृद्धि के कारक और साइटोकींस में तेजी आती है जिससे सुधार की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है और कोलाजेन बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है. कोलाजेन त्वचा की मदद करता है और बारीक लकीरों और झुर्रियों में सुधार होता है. सुधार की प्रक्रिया की वजह से बेहतर हुआ रक्त प्रवाह त्वचा की टोन और टेक्स्चर बेहतर होता है और त्वचा को सेहतमंद और युवा चमक मिलती है.
पीआरपी थेरेपी एक से अधिक बार की जाती है और सर्वश्रेष्ठ परिणाम देने के लिए इसकी सलाह दी जाती है. प्रक्रिया के बाद त्वचा को मामूली रूप से कुछ नुकसान देखने को मिल सकता है. अच्छी तरह सुधार के लिए त्वचा को कुछ दिनों तक सूर्य की रोशनी से बचाना महत्वपूर्ण है. फैक्टर 50 सनब्लाक क्रीम का इस्तेमाल लाभदायक साबित हो सकता है.
करीब 40 फीसदी महिलाओं को यौन संबंधी गड़बड़ियों की वजह से मनोवैज्ञानिक परेशानी होती है, लेकिन बहुत कम महिलाएं ही चिकित्सकीय मदद लेती हैं. आरगैज्मिक परेशानी बहुत ही सामान्य दिक्कत है और अब इसे ओ-शाट की मदद से ठीक किया जा सकता है. ओ-शाट या आरगैज्म शाट का इस्तेमाल महिलाओं में यौन संबंधी परेशानियों के उपचार में और योनि को आरगैज्म हासिल करने में मदद करने में किया जाता है.
प्लेटलेट-रीच प्लाज्मा (पीआरपी) को मरीज के रक्त में से निकाला जाता है और क्लिटरिस के आसपास के हिस्से और योनि के भीतर पहुंचा दिया जाता है. शाट मरीज की बांह से निकाले गए रक्त में मौजूद प्लेटलेट का इस्तेमाल कर काम करता है. इस रक्त को अपकेंद्रण के लिए रख दिया जाता है जो प्लेटलेट रीच प्लाज्मा (पीआरपी) बनाते हैं. इसे योनि के विशेष हिस्से में पहुंचा दिया जाता है और मरीज सिर्फ एक शाट ले सकती हैं या फिर इससे अधिक शाट के लिए भी आ सकती है, जिसे मौजूदा पीआरपी से ही तैयार किया जाएगा.
लक्ष्य नई कोशिकाओं की वृद्धि में तेजी लाना और इंजेक्टेड हिस्से को संवेदनशील बनाना है. इसका असर करीब एक वर्ष तक रहता है. इस प्रक्रिया के बाद आरगैज्म अधिक मजबूत और जल्दी होता है, प्राकृतिक लुब्रिकेशन और उत्तेजना बेहतर होती है. लोकल एनेस्थेटिक के अंतर्गत इस प्रक्रिया में 40 मिनट लगते हैं और मरीज आराम से घर जा सकती हैं.
आमतौर पर देखा गया है कि युवतियां पहले तो किसी युवक की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाती हैं या उस की दोस्ती कबूल कर लेती हैं. बाद में उन का यह दोस्ताना रिश्ता शारीरिक संबंधों तक पहुंच जाता है. यह युवक भी जानता है और युवती भी कि उन की शादी हो नहीं सकती, इस के बावजूद दोनों संबंध बना कर सुख भोगते रहते हैं. सामान्यत: कोई युवक शादी का झांसा दे कर या बहलाफुसला कर युवती से शारीरिक संबंध नहीं बनाता, लेकिन वक्त आने पर युवतियां उस पर शादी का झांसा दे कर बलात्कार करने या यौन शोषण का आरोप लगा कर उसे जेल भिजवाने से भी नहीं हिचकतीं.
कुछ प्रकरणों में तो युवतियों का कहना होता है कि पिछले 5 साल से वह शादी का झांसा दे कर यौन शोषण कर रहा था. प्रश्न यह है कि यदि वह बलात्कार था, तो 5 साल तक वे चुप क्यों बैठी रहीं? क्यों न पहले दिन या पहली बार में एफआईआर दर्ज कराई गई? इन 5 साल में उन्होंने कई बार संबंध बनाए, तब तो उसे कोई आपत्ति नहीं हुई, तो फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि रजामंदी को बलात्कार का स्वरूप दे कर उसे फंसा दिया?
कुछ युवतियां पैसे वाले लड़कों से दोस्ती करती हैं या उन्हें अपने प्रेमजाल में फंसाती हैं. उन के साथ हमबिस्तर होती हैं और उन के पैसों पर ऐश करती हैं. जब सामने वाला हाथ खींच लेता है, तो वह उसे ब्लैकमेल करने लगती हैं कि या तो वह उस की आर्थिक जरूरतें पूरी करता रहे या फिर झूठे मुकदमे में फंसने के लिए तैयार रहे?
अब यदि युवक ब्लैकमेल से बचने के लिए उसे धनराशि देता है तो उस की कभी खत्म न होने वाली चाहत बढ़ती जाती है, जो आर्थिक दृष्टि से उसे खोखला कर देती है. ऐसे में जिस दिन वह पैसे देना बंद कर देता है, उस पर शादी करने का झांसा दे कर बलात्कार करने का आरोप मढ़ दिया जाता है.
शादी का झांसा या वादा कर यौन शोषण करने के आरोप प्राय: बेतुके, झूठे और बेबुनियाद होते हैं. युवक लाख सफाई दे, रजामंदी से संबंध बनाने की दुहाई दे, लेकिन उसे सुनता कौन है, नतीजतन, बेकुसूर युवक को सजा हो जाती है.
यदि यह मान भी लिया जाए कि कभी युवक ने शादी करने का वादा किया था और अब उस से मुकर रहा है, तो यह वादाखिलाफी तो हो सकती है, पर बलात्कार नहीं. क्या वादाखिलाफी और बलात्कार एक ही अपराध है? तो फिर उसे बलात्कार के जुर्म में क्यों सलाखों के पीछे डाला जाए?
बलात्कार वह होता है जब कोई बलपूर्वक या डराधमका कर किसी युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाता है. मैडिकल जांच से पता चल सकता है कि वह बलात्कार था या आपसी सहमति का नतीजा, क्योंकि बलात्कार में छीनाझपटी, कपड़ों का फटना, प्रजनन अंग में जख्म होना आदि बातें उजागर होती हैं, लेकिन यदि दोनों की सहमति से संबंध बनते हैं तो इस तरह के कोई लक्षण नजर नहीं आते.
जो युवती युवक पर शादी का झांसा दे कर संबंध बनाने जैसे इलजाम लगाती है, कोई उस से पूछे कि वह झांसे में आई क्यों? वह नासमझ तो है नहीं? यदि नाबालिग है तो यह उम्र नहीं शारीरिक संबंध बनाने की, उस ने अपनी सहमति क्यों दी? यदि वह बालिग है तो अपना भलाबुरा खुद जानती है, इस के लिए वह तैयार क्यों हुई?
आजकल मौडर्न सोसायटी या बड़े शहरों में साथ पढ़ने वाले अथवा नौकरीपेशा युवकयुवतियों में ‘लिव इन रिलेशनशिप’ में रहने का चलन बढ़ रहा है. अपने घरपरिवार से दूर युवकयुवती एक कमरे में, एक छत के नीचे बगैर शादी किए रहते हैं, ऐसे युवकयुवतियां शादी को एक बंधन मानते हैं और इस बंधन में बंधना नहीं चाहते, पर शादी के बाद मिलने वाला सुख भोगना चाहते हैं.
न तो उन्हें ‘लिव इन’ में रहने के लिए कोई विवश करता है और न ही शारीरिक संबंध बनाने के लिए. रही बात शादी का झांसा देने की, तो इस का प्रश्न ही पैदा नहीं होता, क्योंकि शादी नहीं करनी थी, तभी तो वे ‘लिव इन’ में साथ हैं. इसलिए 10 साल तक ‘लिव इन’ में रहने के बाद युवक पर यौन शोषण का आरोप लगाना सरासर नाइंसाफी है.
एक बात यह भी है कि ‘लिव इन’ में रहने वाली युवतियां हों या युवक मौजमस्ती के लिए वे गर्भनिरोधक गोलियों अथवा अन्य साधनों का इस्तेमाल करते हैं ताकि गर्भ न ठहरे. जरा गौर कीजिए, क्या आज तक किसी ने कंडोम का इस्तेमाल कर बलात्कार किया है? तो फिर यह बलात्कार या यौन शोषण कैसे हो सकता है?
कई बार मंगेतर प्रेमीप्रेमिका जब एकांत में होते हैं तो परिस्थितिवश उन के कदम बहक जाते हैं और वे शादी का इंतजार किए बगैर शारीरिक संबंध बना लेते हैं. ऐसे में युवती या उस के परिजन उस से शादी करना नहीं चाहते तो उलटे उस पर बलात्कार का आरोप लगा कर उस से मुक्ति पाने का प्रयास करते हैं.
यदि आप शादी से पूर्व शारीरिक संबंध बनाने को गलत मानती हैं तो संबंध न बनाएं. एक सीमा तक ही उसे शारीरिक स्पर्र्श करने दें. शारीरिक संबंधों को ‘शादी के बाद’ के लिए छोड़ सकती हैं.
कोई भी युवक, प्रेमी या मंगेतर तब तक संबंध नहीं बनाता, जब तक कि युवती राजीखुशी तैयार नहीं होती या अपनी मौन स्वीकृति’ नहीं दे देती. यदि युवक पहल करता है और वह उस का मजा लेते हुए उसे सब कुछ करने देती है, तो फिर यह बलात्कार कैसे हुआ?
इस तरह के बलात्कार या यौन शोषण के मुकदमे दर्ज कराने वाली युवतियां खुद भी जानती हैं कि वह बलात्कार नहीं था. कई प्रकरणों में तो युवती उसे बलात्कार सिद्ध करने में असफल रही या युवक ने यह सिद्ध कर दिया कि जो कुछ हुआ वह दोनों की सहमति से हुआ. ऐसे में न्यायालय युवती को बलात्कार का झूठा मुकदमा दर्ज करने पर फटकार लगाता है तथा युवक को बरी कर देता है.
राजस्थान के बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी का मानना है कि छोटी उम्र में अगर जानेअनजाने में भी सहमति से संबंध बनाएं जाएं, तो उसे दुष्कर्म नहीं मानना चाहिए.
इस के व्यावहारिक पहलू को समझने की जरूरत है. ऐसे मामलों में अकसर युवक के खिलाफ पोक्सो ऐक्ट के तहत मामला दर्ज हो जाता है और उसे जीवन भर परेशानी होती है.
राजस्थान के राजसमंद जिले में अपने दौरे में अधिकारियों के साथ बैठक में मनन चतुर्वेदी ने कहा कि आजकल जितने भी पोक्सो ऐक्ट में दुष्कर्म के प्रकरण दर्ज हो रहे हैं जिन में बालक को दोषी ठहराया जा रहा है, उन में परामर्श की जरूरत है ताकि गलती दोबारा न हो.
मनन चतुर्वेदी ने आगे कहा कि उन्होंने कई आदिवासी इलाकों का दौरा किया और मातापिता तथा किशोरगृहों में रह रहे बच्चों से बात की, तो सामने आया कि उन्हें यह पता ही नहीं है कि वे क्या गलती कर बैठे हैं. उन्होंने कहा कि वे पोक्सो ऐक्ट को गलत नहीं मानतीं, लेकिन यह ऐक्ट लगाने से पहले बच्चों को समझाने की जरूरत भी है.
बच्चे फिल्में देख कर या किसी परिस्थिति में संबंध बना लेते हैं, मगर इस में कहीं न कहीं एकदूसरे की रजामंदी जरूर है. इस के लिए न सिर्फ स्वयंसेवी संगठनों की जिम्मेदारी से परामर्श देते हुए लोगों को प्रेरित करना होगा बल्कि पुलिस व प्रशासन को भी ध्यान देना चाहिए. चतुर्वेदी के बयान पर राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने कहा कि देखना होगा कि चतुर्वेदी ने किस संदर्भ में यह बयान दिया है.