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हिजाब : भाग 3 – क्या बंदिशों को तोड़ पाई चिलमन?

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मुझे एक दोस्त की बेहद जरूरत थी. नयनिका से मिलतेमिलाते सालभर होने को था. बचपन का सूत्र कहूं या हम दोनों की सोच की समानता दोनों ही एकदूसरे की दोस्ती में गहरे उतर रहे थे.

मैं जिस वक्त उस के घर गई वह अपनी पढ़ाई की तैयारी में व्यस्त थी. नयनिका कमर्शियल पायलट के लाइसैंस के लिए तैयारी कर रही थी. हम दोनों उस के बगीचे में आ गए थे. रंगबिरंगे फूलों के बीच जब हम जा बैठे तो कुछ और करीबियां हमारे पास सिमट आईं. उस की आंखों में छिपा दर्द शायद मुझे अपना हाल सुनाने को बेताब था. शायद मैं भी. बरदाश्त की वह लकीर जब तक अंगारा नहीं बन जाती, हम उसे पार करना नहीं चाहतीं, हम अपने प्रियजनों के खिलाफ जल्दी कुछ बुरा कहना-सुनना भी नहीं चाहते.

मैं ने उस से पूछा, ‘‘उदास क्यों रहती हो हमेशा? तैयारी तो अच्छी चल रही न?’’

उस ने कहा, ‘‘कारण है, तभी तो उदास हूं… कमर्शियल पायलट बनने की कामयाबी मिल भी जाए तो हजारों रुपए लगेंगे इस की ट्रेनिंग में जाने को. बड़े भैया ने तो आदेश जारी कर दिया है कि बहुत हो गया, हवा में उड़ना… अब घरगृहस्थी में मन रमाओ.’’

‘‘हूं, दिक्कत तो है… फिर कर लो शादी.’’

‘‘क्यों, तुम मान रही हो वाकर से शादी और बुटीक की बात? वह तुम्हारे

हिसाब से, तुम्हारी मरजी से अलग है… अमेरिका में हर महीने लाखों कमाने वाले खूबसूरत इंजीनियर से शादी वैसे ही मेरी मंजिल नहीं. जो मैं बनना चाहती हूं, वह बनने न देना और सब की मरजी पर कुरबान हो जाना… यह इसलिए कि एक स्त्री की स्वतंत्रता मात्र उस के सिंदूर, कंगन और घूमनेफिरने के लिए दी गई छूट या रहने को मिली छत पर ही आ कर खत्म हो जाती है.’’

‘‘वाकई तुम प्लेन उड़ा लोगी,’’

मैं मुसकराई.

वह अब भी गंभीर थी. पूछा, ‘‘क्यों? अच्छेअच्छे उड़ जाएंगे, प्लेन क्या चीज है,’’ वह उदासी में भी मुसकरा पड़ी.

‘‘क्या करना चाहती हो आगे?’’

‘‘कमर्शियल पायलट का लाइसैंस मिल जाए तो मल्टीइंजिन ट्रैनिंग के लिए न्यूजीलैंड जाना चाहती हूं. पापा किसी तरह मान भी जाएं तो भैया यह नहीं होने देंगे.’’

‘‘क्यों, उन्हें इतनी भी क्या दिक्कत?’’

‘‘वे एक सामान्य इंजीनियर मैं कमर्शियल पायलट… एक स्त्री हो कर उन से ज्यादा डेयरिंग काम करूं… रिश्तेदारों और समाज में चर्चा का विषय बनूं? बड़ा भाई क्यों पायलट नहीं बन सका? आदि सवाल न उठ खड़े हों… दूसरी बात यह है कि अमेरिका में उन का दोस्त इंजीनियर है. अगर मैं उस दोस्त से शादी कर लूं तो वह अपनी पहचान से भैया को अमेरिका में अच्छी कंपनी में जौब दिलवाने में मदद करेगा. तीसरी बात यह है कि इन की बहन को मेरे भैया पसंद करते हैं और शादी करना चाहते हैं, जो अभी अमेरिका में ही जौब कर रही है.’’

‘‘उफ, बड़ी टेढ़ी खीर है,’’ मैं बोल पड़ी.

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‘‘सब सधे लोग हैं… पक्के व्यवसायी… मैं तो उस दोस्त को पसंद भी नहीं करती और न ही वह मुझे.’’

‘‘हम ही नहीं सीख पा रहे दुनियादारी.’’

‘‘सीखना पड़ेगा चिलमन… लोग हम जैसों के सिर पर पैर रख सीढि़यां चढ़ते रहेंगे… हम आंसुओं पर लंबीलंबी शायरियां लिख उन पन्नों को रूह की आग में जलाते जाएंगे.’’

‘‘तुम्हें मिलाऊंगी अर्क से… आने ही वाला है… शाम को उस के साथ मुझे डिनर पर जाना पड़ेगा… भैया का आदेश है,’’ नयनिका उदास सी बोली जा रही थी.

मैं अब यहां से निकलने की जल्दी में थी. मेरी मोहलत भी खत्म होने को आई थी.

‘ये सख्श कौन? अर्क साहब तो नहीं? फुरसत से बनाया है बनाने वाले ने,’ मैं मन ही मन अनायास सोचती चली गई.

अर्क ही थे महाशय. 5 फुट 10 इंच लंबे, गेहुंए रंग में निखरे… वाकई खूबसूरत नौजवान. उन्हें देखते मैं पहली बार छुईमुई सी हया बन गई… न जाने क्यों उन से नजरें मिलीं नहीं कि चिलमन खुद आंखों में शरमा कर पलकों के अंदर सिमट गई.

अर्क साहब मेरे चेहरे पर नजर रख खड़े हो गए. फिर नयनिका की ओर मुखाबित हुए, ‘‘ये नई मुहतरमा कौन?’’

‘‘चिलमन, मेरी बचपन की सहेली.’’

अर्क साहब ने हाथ मिलाने को मेरी ओर हाथ बढ़ाया. मैं ने हाथ तो मिलाया, पर फिर घर वालों की याद आते ही मैं असहज हो गई. मैं ने जोर दे कर कहा, ‘‘मैं चलूंगी.’’

नयनिका समझ रही थी, बोली, ‘‘हां, तुम निकलो.’’

अर्क मुझ पर छा गए थे. मैं नयनिका से मन ही मन माफी मांग रही थी, लेकिन इस अनजाने से एहसास को जाने क्यों अब रोक पाना संभव नहीं था मेरे लिए.

कुछ दिनों बाद नयनिका ने खुशखबरी सुनाई. उस की लड़ाई कामयाब हुई थी… उसे मल्टी इंजिन ट्रेनिंग के लिए राज्य सरकार के खर्चे पर न्यूजीलैंड भेजा जाना था.

इस खुशी में उस ने मुझे रात होटल में डिनर पर बुलाया.

उस की इस खबर ने मुझ में न सिर्फ उम्मीद की किरण जगाई, बल्कि काफी हिम्मत भी दे गई. मैं ने भी आरपार की लड़ाई में उतर जाने को मन बना लिया.

होटल में अर्क को देख मैं अवाक थी और नहीं भी.

हलकेफुलके खुशीभरी माहौल में नयनिका ने मुझ से कहा, ‘‘तुम दोनों को यहां साथ बुलाने का मेरा एक मकसद है. अर्क और तुम्हारी बातों से मैं समझने लगी हूं कि यकीनन तुम दोनों एकदूसरे को पसंद करते हो वरना अर्क माफी मांगते हुए तुम्हारे मोबाइल नंबर मुझ से न मांगते… चिलमन, अर्क जानते हैं मैं किस मिट्टी की बनी हूं… यह घरगृहस्थी का तामझाम मेरे बस का नहीं है… सब लोग एक ही सांचे में नहीं ढल सकते… मैं अभी न्यूजीलैंड चली जाऊंगी, फिर आते ही पायलट के काम में समर्पण. चिलमन तुम अर्क से आज ही अपने मन की बात कह दो.’’

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अर्क खुशी से सुर्ख हो रहे थे. बोले, ‘‘अरे, ऐसा है क्या? मैं तो सोच रहा था कि मैं अकेला ही जी जला रहा हूं.’’

कुछ देर चुप रहने के बाद अर्क फिर बोले, ‘‘नयनिका के पास बड़े मकसद हैं.’’

मेरे मुंह से अचानक निकला, ‘‘मेरे पास भी थे.’’

‘‘तो बताइए न मुझे.’’

नयनिका ने कहा, ‘‘जाओ उस कोने वाली टेबल पर और औपचारिकता छोड़ कर बातें कर लो.’’

अर्क ने पूरी सचाई के साथ मेरा हाथ थाम लिया था… विदेश जा कर मेरे कैरियर को नई ऊंचाई देने का मुझ से वादा किया.

इधर शादी के मामले में अर्क ने नयनिका के घर वालों का भी मोरचा संभाला.

अब थी मेरी बारी. अर्क का साथ मिल गया तो मुझे राह दिख गई.

घर से निकलते वक्त मन भारी जरूर था, लेकिन अब डर, बेचारगी की जंजीरों से अपने पैर छुड़ाने जरूरी हो गए थे.

कानपुर से दिल्ली की फ्लाइट पकड़ी हम ने. फिर वक्त से अमेरिकन एयरवेज में दाखिल हो गए.

साहिबा आपा को फोन से सूचना दे दी कि अर्क के साथ मैं अपनी नई जिंदगी शुरू करने अमेरिका जा रही हूं. वहां माइक्रोबायोलौजी ले कर काम करूंगी और अर्क को खुश रखूंगी.’’

साहिबा आपा जैसे आसमान से गिरी हों. हकला कर पूछा, ‘‘यह क्या है?’’

हमारी आजादी हिजाब हटनेभर से नहीं है आपा… हमारी आजादी में एक उड़ान होनी चाहिए.

आपा के फोन रख देने भर से हमारी आजादी की नई दास्तां शुरू हो गई थी.

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सौतेली: भाग 3

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रवानगी से पहली रात को शेफाली के कमरे में वंदना आई तो वह बहुत गंभीर थी. उस की तरफ देख कर वंदना बोली, ‘‘जाने से पहले मैं तुम को कुछ समझाना चाहती हूं. मेरी बात पर अमल करना, न करना तुम्हारी मर्जी होगी. जीवन के सच से मुंह मोड़ना और हालात का सामना करने के बजाय उस से दूर भागना समझदारी नहीं. जिस को तुम ने देखा नहीं, जाना नहीं, उस के लिए नफरत क्यों? नफरत इसलिए क्योंकि उस के साथ ‘सौतेली’ शब्द जुड़ा है. प्यार और नफरत करने का तुम को हक है. किंतु तब तक नहीं जब तक तुम किसी को देख या जान न लो. अगर तुम्हारे पापा ने किसी दूसरी औरत से शादी कर के तुम्हारा दिल दुखाया है तो इस का मतलब यह नहीं कि तुम अपने घर पर अपना हक छोड़ दो. तुम को परीक्षाएं देने के बाद अपने घर वापस जाना ही है. यह पक्का इरादा कर लो. अपनों पर नाराज हुआ जाता है, उन को छोड़ा नहीं जाता. रही बात तुम्हारे पापा के साथ शादी करने वाली दूसरी औरत, मेरा मतलब तुम्हारी सौतेली मां से है. एक बार उस को भी देख लेना. अगर वह सचमुच तुम्हारी सोच के मुताबिक बुरी हो तो उस को घर से बाहर का रास्ता दिखलाने का इंतजाम कर देना. इस के लिए तुम को अपने पापा से भी झगड़ना पडे़ तो कोई हर्ज नहीं.’’

जब वंदना अपनी बात कह रही थी तो शेफाली हैरानी से उस के चेहरे को देख रही थी. वंदना की बातों से उस को एक बल मिल रहा था.

शेफाली को लग रहा था वंदना ठीक कह रही है. वह अपना घर क्यों छोडे़. उस को हालात का सामना करना चाहिए था. फिर उस औरत से नफरत कैसी जिसे अभी उस ने देखा भी नहीं था.

अगले दिन सुबह वंदना चली गई.

कुछ भी नहीं होते हुए वंदना कुछ दिनों में ही अपनेपन का जो कोमल स्पर्श शेफाली को करवा गई थी उस को भूलना मुश्किल था. यही नहीं वह शेफाली की दिशाहीन जिंदगी को एक दिशा भी दे गई थी.

परीक्षाओं के शुरू होते ही शेफाली ने जानकी बूआ से घर जाने की बात कह दी और थोड़ाथोड़ा कर के अपना सामान पैक करना शुरू कर दिया.

परीक्षाएं खत्म होते ही शेफाली अपने घर को रवाना हुई तो जानकी बूआ खुद उस को अमृतसर जाने वाली बस में बैठाने के लिए बस अड्डे पर आई थीं.

बस जब चल पड़ी तो शेफाली के मन में कई सवाल बुलबुले बन कर उभरने लगे कि पापा उस का सामना कैसे करेंगे, उस का सौतेली मां से सामना कैसे होगा? वह कैसा व्यवहार करेंगी?

शेफाली जानती थी कि उस को बस में बैठाने के बाद बूआ ने फोन पर इस की सूचना पापा को दे दी होगी. शायद घर में उस के आने के इंतजार में होंगे सभी…

सामान का बैग हाथ में लिए घर के दरवाजे के अंदर दाखिल होते एक बार तो शेफाली को ऐसा लगा था कि किसी बेगानी जगह पर आ गई है.

पापा उस के इंतजार में ड्राइंगरूम में ही बैठे थे. उन के साथ मानसी और अंकुर भी थे जोकि दौड़ कर उस से लिपट गए.

उन को प्यार करते हुए शेफाली की नजरें पापा से मिलीं. चाह कर भी शेफाली मुसकरा नहीं सकी. उस ने केवल इतना ही कहा, ‘‘हैलो पापा, कैसे हैं आप?’’

‘‘अच्छा हूं. अपनी सुनाओ. सफर में कोई तकलीफ तो नहीं हुई?’’

‘‘नहीं…और होती भी तो अब कोई फर्क नहीं पड़ता. मुझ को कुछ समय से तकलीफें बरदाश्त करने की आदत पड़ चुकी है,’’ कोशिश करने पर भी अपने गुस्से और आक्रोश को छिपा नहीं सकी शेफाली.

इस पर पापा ने मानसी और अंकुर से कहा, ‘‘तुम दोनों जा कर जरा अपनी दीदी का कमरा ठीक करो, मैं तब तक इस से बातें करता हूं.’’

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पापा का इशारा समझ कर दोनों तुरंत वहां से चले गए.

‘‘मैं जानता हूं तुम मुझ से नाराज हो,’’ उन के जाने के बाद पापा ने कहा.

‘‘मुझ को बहाने के साथ घर से बाहर भेज कर मेरी ममी की जगह एक दूसरी ‘औरत’ को दे दी पापा और इस के बाद भी आप उम्मीद करते हैं कि मुझ को नाराज होने का भी हक नहीं?’’

‘‘यह मत भूलो कि वह ‘औरत’ अब तुम्हारी नई मां है,’’ पापा ने शेफाली को चेताया.

इस से शेफाली जैसे बिफर गई और बोली, ‘‘मैं इस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं करूंगी, पापा,’’

‘‘मैं इस के लिए तुम पर जोर भी नहीं डालूंगा, मगर तुम उस से एक बार मिल लो…शिष्टाचार के नाते. वह ऊपर कमरे में है,’’ पापा ने कहा.

‘‘मैं सफर की वजह से बहुत थकी हुई हूं, पापा. इस वक्त आराम करना चाहती हूं. इस बारे में बाद में बात करेंगे,’’ शेफाली ने अपने कमरे की तरफ बढ़ते हुए रूखी आवाज में कहा.

शेफाली कमरे में आई तो सबकुछ वैसे का वैसा ही था. किसी भी चीज को उस की जगह से हटाया नहीं गया था.

मानसी और अंकुर वहां उस के इंतजार में थे.

कोशिश करने पर भी शेफाली उन के चेहरों या आंखों में कोई मायूसी नहीं ढूंढ़ सकी. इस का अर्थ था कि उन्होंने मम्मी की जगह लेने वाली औरत को स्वीकार कर लिया था.

‘‘तुम दोनों की पढ़ाई कैसी चल रही है?’’ शेफाली ने पूछा.

‘‘एकदम फर्स्ट क्लास, दीदी,’’ मानसी ने जवाब दिया.

‘‘और तुम्हारी नई मम्मी कैसी हैं?’’ शेफाली ने टटोलने वाली नजरों से दोनों की ओर देख कर पूछा.

‘‘बहुत अच्छी. दीदी, तुम ने मां को नहीं देखा?’’ मानसी ने पूछा.

‘‘नहीं, क्योंकि मैं देखना ही नहीं चाहती,’’ शेफाली ने कहा.

‘‘ऐसी भी क्या बेरुखी, दीदी. नई मम्मी तो रोज ही तुम्हारी बातें करती हैं. उन का कहना है कि तुम बेहद मासूम और अच्छी हो.’’

‘‘जब मैं ने कभी उन को देखा नहीं, कभी उन से मिली नहीं, तब उन्होंने मेरे अच्छे और मासूम होने की बात कैसे कह दी? ऐसी मीठी और चिकनीचुपड़ी बातों से कोई पापा को और तुम को खुश कर सकता है, मुझे नहीं,’’ शेफाली ने कहा.

शेफाली की बातें सुन कर मानसी और अंकुर एकदूसरे का चेहरा देखने लगे.

उन के चेहरे के भावों को देख कर शेफाली को ऐसा लगा था कि उन को उस की बातें ज्यादा अच्छी नहीं लगी थीं.

मानसी से चाय और साथ में कुछ खाने के लिए लाने को कह कर शेफाली हाथमुंह धोने और कपडे़ बदलने के लिए बाथरूम में चली गई.

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सौतेली मां को ले कर शेफाली के अंदर कशमकश जारी थी. आखिर तो उस का सामना सौतेली मां से होना ही था. एक ही घर में रहते हुए ऐसा संभव नहीं था कि उस का सामना न हो.

मानसी चाय के साथ नमकीन और डबलरोटी के पीस पर मक्खन लगा कर ले आई थी.

भूख के साथ सफर की थकान थी सो थोड़ा खाने और चाय पीने के बाद शेफाली थकान मिटाने के लिए बिस्तर पर लेट गई.

मस्तिष्क में विचारों के चक्रवात के चलते शेफाली कब सो गई उस को इस का पता भी नहीं चला.

शेफाली ने सपने में देखा कि मम्मी अपना हाथ उस के माथे पर फेर रही हैं. नींद टूट गई पर बंद आंखों में इस बात का एहसास होते हुए भी कि? मम्मी अब इस दुनिया में नहीं हैं, शेफाली ने उस स्पर्श का सुख लिया.

फिर अचानक ही शेफाली को लगा कि हाथ का वह कोमल स्पर्श सपना नहीं यथार्थ है. कोई वास्तव में ही उस के माथे पर धीरेधीरे अपना कोमल हाथ फेर रहा था.

चौंकते हुए शेफाली ने अपनी बंद आंखें खोल दीं.

आंखें खोलते ही उस को जो चेहरा नजर आया वह विश्वास करने वाला नहीं था. वह अपनी आंखों को बारबार मलने को विवश हो गई.

थोड़ी देर में शेफाली को जब लगा कि उस की आंखें जो देख रही हैं वह सच है तो वह बोली, ‘‘आप?’’

दरअसल, शेफाली की आंखों के सामने वंदना का सौम्य और शांत चेहरा था. गंभीर, गहरी नजरें और अधरों पर मुसकराहट.

‘‘हां, मैं. बहुत हैरानी हो रही है न मुझ को देख कर. होनी भी चाहिए. किस रिश्ते से तुम्हारे सामने हूं यह जानने के बाद शायद इस हैरानी की जगह नफरत ले ले, वंदना ने कहा.

‘‘मैं आप से कैसे नफरत कर सकती हूं?’’ शेफाली ने कहा.

‘‘मुझ से नहीं, लेकिन अपनी मां की जगह लेने वाली एक बुरी औरत से तो नफरत कर सकती हो. वह बुरी औरत मैं ही हूं. मैं ही हूं तुम्हारी सौतेली मां जिस की शक्ल देखना भी तुम को गवारा नहीं. बिना देखे और जाने ही जिस से तुम नफरत करती रही हो. मैं आज वह नफरत तुम्हारी इन आंखों में देखना चाहती हूं.

‘‘हम जब पहले मिले थे उस समय तुम को मेरे साथ अपने रिश्ते की जानकारी नहीं थी. पर मैं सब जानती थी. तुम ने सौतेली मां के कारण घर आने से इनकार कर दिया था. किंतु सौतेली मां होने के बाद भी मैं अपनी इस रूठी हुई बेटी को देखे बिना नहीं रह सकती थी. इसलिए अपनी असली पहचान को छिपा कर मैं तुम को देखने चल पड़ी थी. तुम्हारे पापा, तुम्हारी बूआ ने भी मेरा पूरा साथ दिया. भाभी को सहेली के बेटी बता कर अपने घर में रखा. मैं अपनी बेटी के साथ रही, उस को यह बतलाए बगैर कि मैं ही उस की सौतेली मां हूं. वह मां जिस से वह नफरत करती है.

‘‘याद है तुम ने मुझ से कहा था कि मैं बहुत अच्छी हूं. तब तुम्हारी नजर में हमारा कोई रिश्ता नहीं था. रिश्ते तो प्यार के होते हैं. वह सगे और सौतेले कैसे हो सकते हैं? फिर भी इस हकीकत को झुठलाया नहीं जा सकता कि मैं मां जरूर हूं, लेकिन सौतेली हूं. तुम को मुझ से नफरत करने का हक है. सौतेली मांएं होती ही हैं नफरत और बदनामी झेलने के लिए,’’ वंदना की आवाज में उस के दिल का दर्द था.

‘‘नहीं, सौतेली आप नहीं. सौतेली तो मैं हूं जिस ने आप को जाने बिना ही आप को बुरा समझा, आप से नफरत की. मुझ को अपनेआप पर शर्म आ रही है. क्या आप अपनी इस नादान बेटी को माफ नहीं करेंगी?’’ आंखों में आंसू लिए वंदना की तरफ देखती हुई शेफाली ने कहा.

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‘‘धत, पगली कहीं की,’’ वंदना ने झिड़कने वाले अंदाज से कहा और शेफाली का सिर अपनी छाती से लगा लिया.

प्रेम के स्पर्श में सौतेलापन नहीं होता. यह शेफाली को अब महसूस हो रहा था. कोई भी रिश्ता हमेशा बुरा नहीं होता. बुरी होती है किसी रिश्ते को ले कर बनी परंपरागत भ्रांतियां.

सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड : मनोज सिंह टाइगर को मिला बेस्ट पौपुलर कामेडियन अवार्ड

सरस सलिल की ज्यूरी द्वारा वर्ष 2019 में भोजपुरी भाषा में प्रदर्शित फिल्मों के स्क्रीनिंग के आधार पर जिन एक्टर्स को अवार्ड दिया गया उसमें अलग अलग कैटेगरी में कई मशहूर एक्टर्स शामिल रहें. इसी कड़ी में कामेडी के लिए भी अभिनेताओं को अवार्ड से नवाजा गया. जिसमें मशहूर कामेडियन मनोज सिंह टाइगर ‘बतासा चाचा’ को बेस्ट पापुलर कामेडियन का अवार्ड दिया गया मनोज सिंह टाइगर को बतासा चाचा का उप नाम निरहुआ रिक्शावाला के किरदार से मिला जो आज उनकी पहचान बन चुका है मनोज सिंह टाइगर लखनऊ में हो रहे बीआईपीएल के चलते अवार्ड शो में नहीं पहुँच पाए थे ऐसे में उन्हें यह अवार्ड एक फिल्म की शूटिंग के दौरान फिल्म शेट पर जाकर दिया गया .

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अगर अभिनेता मनोज सिंह टाइगर की बात करें तो उनकी अब तक ढाई सौ से भी अधिक फ़िल्में प्रदर्शित हो चुकी हैं. उन्होंने भोजपुरी में कामेडी को एक अलग ही पहचान दी है. पहले भोजपुरी में कामेडी का पैमाना नहीं हुआ करता था इसी लिए भोजपुरी में कामेडियन को मजाक बनाया जाता रहा. भोजपुरी कामेडियन को को नाडा पहना कर मजाक का पार्ट बनाया जाता था. लेकिन मनोज सिंह टाइगर के भोजपुरी कामेडी में आने के बाद अब भोजपुरी में भी कामेडियन का लेवल वालीवुड के परेश रावल, राजपाल यादव और संजय मिश्रा सरीखे कलाकारों की तरह बढ़ा है.

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मनोज सिंह टाइगर जिस तरह फिल्मों में वयस्त है उसी तरह वह थियेटर में भी सक्रिय रहतें है. उनका कहना ही की थियेटर मेरी आत्मा में बसा है,या कह लिया जाए की थियेटर मेरी कमजोरी और मजबूरी है. थियेटर के बिना मुझे जिदंगी अधूरी लगती है. जब भी मुझे कहीं से थियेटर में मंच पर प्रस्तुति के लिए ऑफर मिलता है तो मै सारे काम छोड़ कर थियेटर पर अपने नाटकों के मंचन के लिए पहुँच जाता हूँ. जहाँ तक थियेटर का फिल्मी कैरियर में लाभ मिलने की बात है तो थियेटर ही तो है जिसने मुझे फिल्मों में अपनी अलग पहचान दी.उनका कहना है की  थियेटर के चलते फिल्म में शूट के दौरान गलतियाँ कम होती है. मै अगर सच कहूँ तो मुझे फिल्मों में लाने का श्रेय मेरे रंगकर्म को ही जाता है. मेरा नाटक मांस का रुदन खासा सफल रहा है और इसे मैंने लगभग देश के सभी हिस्सों में प्ले किया है. वह कहते हैं की मै जीवन भर थियेटर करते रहना चाहता हूं.

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उन्होंने भोजपुरी की पूरी तरह से कामेडी फिल्म लागल रहा बतासा में लीड रोल किया था जिसे दर्शकों ने खूब सराहा था और फिल्म हिट रही थी. सरस सलिल अवार्ड ज्यूरी द्वारा उन्हें इसी फिल्म के लिए अवार्ड के लिए चुना गया.

Saras Salil Bhojpuri Cine Award: इस फिल्म के लिए मिला रितु सिंह को ‘बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड’

भोजपुरी सिने जगत की सनसनी और फेयर लवली गर्ल के नाम से चर्चित अभिनेत्री रितु सिंह को सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड के पहले सीजन में बेस्ट ऐक्ट्रेस का अवार्ड मिला. यह अवार्ड ज्यूरी ने उनकी फिल्म स्पेशल इनकाउन्टर  में उनके दमदार अभिनय के लिए दिया गया. इस फिल्म में रितु ने पुलिस अधिकारी की भूमिका में दर्शकों का मन मोह लिया था. रितु ने लगभग सभी बड़े भोजपुरी अभिनेताओं के साथ काम किया है. फिल्मों में उनके नेचुरल अभिनय और खूबसूरती के लोग दीवाने है. इस वजह से रितु सिंह फिल्मकारों के सबसे पसंदीदा हिरोईनों में शुमार हैं.

इस फिल्म का निर्देशन अरुण राज नें किया है जो उनके निर्देशन में पहली फिल्म है. फिल्म के निर्माता गणेश गुप्ता हैं. इस फिल्म में कई भोजपुरी सितारे हैं, फिल्म में रितु सिंह के अलावा, सीमा सिंह, राकेश मिश्रा, नें का भी दमदार अभिनय देखने को मिला था.

Saras Salil Bhojpuri Cine Award: धामा वर्मा बने बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर औफ द ईयर

इस फिल्म में सभी कलाकारों ने दमदार अभिनय किया था. फिल्म में जहाँ मशहूर अभिनेता अनूप अरोड़ा पूरे फिल्म में छाये रहे वहीँ राकेश मिश्र और रितु सिंह की जोड़ी नें भी खूब धमाल मचाया था. फिल्म में आइटम गर्ल सीमा सिंह का आइटम सॉंग भी धूम मचाने में कामयाब रहा.

फिल्म में रितु सिंह जहाँ पुलिस इंस्पेक्टर के रूप में अपराधियों से पंगा लेती दिखीं वहीँ वह राकेश मिश्रा के साथ रोमांस के सीन में भी दर्शकों को लुभाने में कामयाब रहीं. इस फिल्म में रितु की एक्टिंग के चलते फिल्म सुपरहिट रही थी.

आने वाले महीनों में रितु सिंह की कई फ़िल्में प्रदर्शन के लिए तैयार है. अभी हाल में ही रितु सिंह ने नेपाल से सटे जिले सिद्धार्थनगर में बाप जी की शूटिंग पूरी की है. जिसमें उनके अपोजिट खेसारीलाल हैं वहीँ फिल्म में मनोज सिंह टाइगर, बृजेश त्रिपाठी, सीपी भट्ट, संजय वर्मा का जोरदार अभिनय देखने को मिलेगा.

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अवार्ड के साथ इंस्टाग्राम पर पोस्ट फोटो-

 

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Thanku so much #sarassalilmagazine #sarassalilteam for #bestactressaward thanku #brihaspati jee…🙏

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आम्रपाली दुबे और अक्षरा सिंह पुराना वीडियो फिर वायरल…

वैसे तो भोजपुरी के सभी गानों में कुछ ना कुछ अलग होता है जिसके चलते वो लोगों के दिमाग में बस जाता हैं. भोजपुरी के ऐसे कई गाने है जो हर डिजे और डांस लवर की पहली पसंद हुआ करता हैं. ऐसा ही एक गाना है भौजपुरी फिल्मों की सबसे पौपुलर एकट्रेसेस आम्रपाली दुबे और अक्षरा सिंह का. इस गाने में भोजपुरी फिल्मों की दो बड़ी अभिनेत्रियों के बीच शानदार जुगलबंदी देखने को मिली है. हाल ही में दोनों का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियों को लोग खासा पसंद कर रहे हैं.

वीडियो ने मचाई धूम

इस वीडियो में ये दोनों एक्ट्रेसेस डांस में एक-दूसरे को टक्कर दे रही हैं. साड़ी पहनकर अक्षरा और आम्रपाली एक ही जैसे डांस स्टेप्स करती दिखाई दे रही हैं. वहीं इन दोनों का ये अंदाज फैंस को बहुत पसंद आ रहा है. ये भोजपुरी गाना अब तक लाखों लोग देख चुके हैं. अक्षरा ने इस वीडियो में ब्लू साड़ी तो वही आम्रपाली ने ग्रीन साड़ी पहनी है जिसमें दोनों बला की खूबसूरत लग रही है.

‘सहेली के होली’

अक्षरा और आम्रपाली दोनों को भोजपुरी फिल्मों का बेहतरीन सिंगर और डांसर माना जाता  है. वायरल हो रहे इस गाने का टाइटल ‘सहेली के होली’ है. इस गाने पर दोनों एक्ट्रेसेस के बीच डांस का जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है. दोनों ने ही अपने डांस और अदाओं से जमकर धमाल मचाया. यहां तक कि ये तय करना मुश्किल हो रहा है कि कौन बेहतरीन डांसर है. अक्षरा और आम्रपाली दोनों ने इस वीडियों में अपने डांसिंग टैलेंट को साबित किया है.

 

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Aap sabhi logon ko Hanuman Jayanti ki dher saari shubhkamnayein 🙏 #sankatmochan #naamtihaaro #jaihanuman 🙏😍

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छोटे पर्दे से की शुरुआत

बेहद ही कम समय में अक्षरा और आम्रपाली सभी की चहेती बन गई है. दोनों से अपने कैरियर की शुरुआत छोटे पर्दे से की थी. आज इन दोनों को भोजपुरी जान कहां जा सकता है क्योंकि जिस भी फिल्में अक्षरा और आम्रपाली फिल्म हिट होना लाजमी हैं.

बरसात में इन 4 चीजों से बचें

बरसात के मौसम में घर के बाहर पैर रखते ही कीचड़, नालों का गंदा पानी, कूड़े के ढेर से उठती सड़ांध से दिमाग खराब हो जाता है. बारिश की बूंदों से गरमी से राहत मिलती है लेकिन इस मौसम में पनपने वाली कई बीमारियों से बचना बेहद जरूरी है. आइए, जानते हैं दिल्ली के वरिष्ठ फिजिशियन व कार्डियोलौजिस्ट डा. के के अग्रवाल से कि इन बीमारियों से कैसे बचें.

1. लेप्टोस्पायरोसिस

इस बीमारी में बुखार आता है और आंखों में सूजन आती है. यह बीमारी जानवरों के मलमूत्र से फैलने वाले लेप्टोस्पाइश नामक बैक्टीरिया के कारण होती है. खासकर यह चूहों से होती है. चूहे जब पानी में या अन्य जगह पेशाब करते हैं तो आप के पैरों के माध्यम से, विशेषकर यदि आप के पैरों में घाव हैं तो, उस पेशाब के कीटाणु जिस्म में घुस जाते हैं. इस मौसम में जलभराव व बहते पानी के कारण यह संक्रमण पानी में मिल कर उसे दूषित कर देता है. इस वजह से इस बीमारी की आशंका अधिक रहती है.

बारिश के मौसम में नंगेपैर चलना ठीक नहीं रहता, हमेशा जूते, चप्पल, दस्ताने, चश्मा, मास्क आदि लगाएं. तालाबों, पूलों व नदियों आदि के  पास जाने, मृत जानवरों को छूने से बचें. घावों की नियमित साफसफाई करते रहें.

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2. मलेरिया

बारिश की वजह से जगहजगह सड़कों व नालों में पानी जमा हो जाता है और गंदे पानी में मच्छर पनपने शुरू हो जाते हैं, जिन में से कुछ मलेरिया के भी मच्छर होते हैं. इस मौसम में दिल्ली में डेंगू व चिकनगुनिया, गुजरात में जिका और पूर्वोत्तर में मलेरिया का जबरदस्त आतंक रहता है.

मच्छर को घर में या बाहर पनपने न दें. छोटे व बड़े बरतन में पानी को ढक कर रखें. पानी की टंकी को बराबर साफ करते रहें. मांसपेशियों में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार आना मलेरिया के लक्षण हो सकते हैं.

3. डायरिया, टायफायड व जौंडिस

ये तीनों बीमारियां दूषित पानी पीने से होती हैं. इस मौसम में उबला पानी पिएं. अच्छी तरह पका हुआ खाना खाएं. सब्जी को छील कर या अच्छी तरह धो कर पकाएं और ठंडा खाना हमेशा गरम कर के ही खाएं.

सर्दीजुकाम, गले में खराश या बुखार हो तो टायफायड के लक्षण हो सकते हैं. उलटी, कमजोरी या फिर आंखों व हाथ के नाखूनों में पीलापन आना जौडिंस के लक्षण हैं.

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4. स्नेक पौयजनिंग

बरसात में बिलों में पानी घुसने से अकसर सांप बाहर निकल आते हैं. यदि सांप काट ले तो तुरंत अस्पताल जाएं नजदीकी डाक्टर को दिखाएं. फिल्मों में जो दिखाया जाता है कि सांप काटने से मुंह से जहर खींच लेते हैं, ऐसा कतई न करें.

Edited by – Neelesh Singh Sisodia

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