शेफाली के मन में अपने पिता और सौतेली मां के प्रति नफरत कूटकूट कर भरी थी. वह घर लौटना ही नहीं चाहती थी, क्योंकि सौतेली मां की कल्पना मात्र ही उसे भीतर तक हिला देती. पर अजनबी मित्र की सलाह पा कर शेफाली असमंजस में थी.
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