जब टेनिस प्लेयर की वजह से जेल जाने को मजबूर हुए खेसारी लाल यादव

भोजपुरी इंडस्ट्री के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) आए दिन किसी न किसी वजह से चर्चा में रहते हैं. खेसारी लाल ने अपनी कड़ी मेहनत से भोजपुरी इंडस्ट्री में अलग पहचान बना ली है. दिल्ली में सड़क किनारे बेचा लिट्टी-चोखा बेचने वाला लड़का आज करोड़ों दिलों पर राज करता रहता हैं. खेसारी लाल ने अपनी सिंगिंग और एक्टिंग के दम पर यूपी-बिहार समेत पूरे भारत में अपनी पहचान बनाई है. हालांकि खेसारी लाल का विवादों से गहरा नाता है. कभी पवन सिंह के साथ कोल्ड वॉर तो कभी काजल राघवानी संग प्यार का रिश्ता. इन सभी चीजों के चलते खेसारी लाल को लोगों ने कंट्रोवर्सी किंग का नाम दे दिया है. एक बार टेनिस खिलाड़ी की वजह से खेसारी लाल को जेल भी जाना पड़ा था.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Rishabh 27 (@its_me_rishabh27)


दरअसल, भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव ने टेनिस प्लेयर सानिया मिर्जा के ऊपर एक गाना बनाया था जिसका नाम ‘टेनिस वाली सानिया दूल्हा खोजलीं था. उस वक्त यह सॉन्ग काफी फेमस हुआ था. हालांकि सानिया को खेसारी का ये अंदाज पसंद नहीं आया था. इसी वजह से सानिया ने खेसारी के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया था, जिस वजह से खेसारी को जेल जाना पड़ा था.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Khesari Lal Yadav (@khesari_yadav)


बताते चलें कि भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव (Khesari lal Yadav) ने सलमान खान के शो बिग बॉस 13 में हिस्सा लिया था. इस शो में खेसारी ने जमकर धमाल मचाया था. हालांकि आगे चलकर वो बाहर हो गए थे. लोगों का ये मानना है कि अगर खेसारी गेम को अच्छे से खेलते तो वो आराम से बिग बॉस 13 को अपने नाम कर सकते थे. खेसारी लाल की फैन फॉलोइंग काफी तगड़ी है. इस मामले में वो बॉलीवुड के सितारों को भी टक्कर देते हैं.

50 की उम्र में मलाइका ने रेड साड़ी में दिखाया हुस्न, फोटो हुई वायरल

बौलीवुड की आइटमगर्ल मलाइका अरोड़ा भले ही अब फिल्मों में ज्यादा एक्टिव न हों, लेकिन मीडिया की लाइमलाइट में वे हमेशा बनी रहती हैं. फिलहाल वे एक टीवी शो ‘झलक दिखला जा 11’ को ले कर भी सुर्खियों में बनी हुई हैं, जहां वे जज बनी हुई हैं. हाल में वे ‘झलक दिखला जा’ के सैट पर भी नजर आई थीं, जहां उन्होंने रेड साड़ी में जलवे दिखाए.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)


मलाइका अरोड़ा डांसिंग रिएलिटी शो ‘झलक दिखला जा 11’ के सैट पर नजर आई हैं. मलाइका अरोड़ा की कई तसवीरें क्लिक हुई हैं, जिन में उन्होंने रेड कलर की साड़ी पहनी हुई थी. मलाइका अरोड़ा की साड़ी में कई पोज दिए और अदाएं देख फैंस उन पर कमैंट कर रहे हैं.

मलाइका अरोड़ा की तसवीरों पर एक यूजर ने लिखा है, ‘रेड में पटाखा लगती है.’ मलाइका अरोड़ा की तसवीरों पर एक यूजर ने लिखा है, ’50 में भी चमकती है.’ एक यूजर ने लिखा है, ‘रेड कलर में वाओ.’

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Malaika Arora (@malaikaaroraofficial)


जहां एक ओर मलाइका अरोड़ा अपनी तसवीरों पर फैंस के अच्छे कमैंट पा रही हैं, वहीं दूसरी ओर मलाइका अरोड़ा को लोगों ने ‘बुड्ढी’ कह कर ट्रोल भी किया है. मलाइका अरोड़ा अपनी एज और फैशन को ले कर ट्रोल होती रहती हैं. हालांकि, मलाइका अरोड़ा ट्रोलर्स को सीरियसली नहीं लेती हैं.

मलाइका अरोड़ा ने बीते अक्टूबर में अपना 50वां जन्मदिन मनाया था. मलाइका अरोड़ा इस उम्र में भी नई हीरोइनों को टक्कर देती हैं. वे इन दिनों डांसिंग रिएलिटी शो ‘झलक दिखला जा 11’ को जज करती नजर आ रही हैं. शो के सेट से उन की फोटोज और वीडियोज आती रहती हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)


मलाइका अरोड़ा की पर्सनल लाइफ की बात करें तो वे फिलहाल बौलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर को डेट कर रही हैं. इन दोनों की उम्र में काफी अंतर है. लोग तो यह भी दबी जबान में कह रहे हैं कि जल्दी ही वे दोनों शादी कर सकते हैं.

आवारा : खोखले उसूलों से लड़ता एक नौजवान

Family Story in Hindi: हाजी साहब के 2 बेटे थे. बड़ा इसलाम व छोटा सलमान. हाजी साहब के पुरखे नवाब थे, इसलिए अभी भी उन का रुतबा नवाबों से कम न था. जमीनजायदाद की भी कमी न थी, इसलिए गांव में ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके में उन का रोब था. इसलाम और सलमान की उम्र में सिर्फ एक साल का फर्क था. दोनों ने एकसाथ पढ़ाई शुरू की थी और गांव के ही स्कूल से 10वीं जमात पास की थी. दोनों भाई पढ़ने में होशियार थे. उन के चेहरे बहुतकुछ आपस में मिलतेजुलते थे. धीरेधीरे अब वे जवानी की दहलीज पर पैर रख चुके थे.

हाईस्कूल की पढ़ाई खत्म होते ही हाजी साहब ने उन्हें आगे पढ़ने के लिए बनारस भेज दिया. दोनों भाई कालेज के होस्टल में अलगअलग कमरों में रहने लगे थे.

हाजी साहब उन्हें घर से अलगअलग पैसे भेजते थे, ताकि दोनों में तकरार न हो. बड़ा भाई इसलाम, जहां सिर्फ पढ़ाई में ही दिलचस्पी रखता था, वहीं छोटा भाई सलमान पढ़ाईलिखाई के साथसाथ खेलकूद, सिनेमा वगैरह में भी दिलचस्पी रखता था.

वक्त बीतने पर वे दोनों बीए में दाखिला ले चुके थे. उन की पढ़ाई का आखिरी साल था. दोनों पढ़ाई में ज्यादा ध्यान देने लगे थे.

सलमान जब पढ़ाई से ऊब जाता, तो फिल्म देख लिया करता. उस समय सलमान खान की फिल्म ‘सनम बेवफा’ लगी हुई थी. सलमान उस फिल्म को देखने के लिए मचल उठा.

लेकिन जब सलमान सिनेमाघर पहुंचा, खिड़की पर भारी भीड़ देख कर नाउम्मीद हो गया, लेकिन थोड़ी देर बाद उस ने ब्लैक में टिकट खरीद लिया.

सलमान खुशीखुशी सिनेमाघर के भीतर पहुंच कर सीट पर जा बैठा. फिल्म शुरू हो चुकी थी.

सलमान को हैरानी हो रही थी कि इतनी भीड़ के बावजूद उस के बाईं ओर वाली सीट अभी भी खाली थी.

तभी टिकट चैकर ने टौर्च की रोशनी दिखा कर एक बुरकापोश औरत को उस के बगल वाली सीट पर बैठने का इशारा किया.

सलमान की नजरें उस औरत पर टिक गईं. वह जैसे ही उस के बगल में बैठी, खुशबू का एक झोंका उस की नाक में समा गया. सलमान अब उस औरत का चेहरा देखने को उतावला हो उठा.

अचानक उस औरत ने जब अपना बुरका उठाया, तो सलमान ने अंधेरे के बावजूद यह महसूस किया कि वह कोई औरत नहीं, बल्कि 16-17 साल की एक खूबसूरत लड़की थी.

फिल्म खत्म होते ही सलमान उस लड़की के पीछे हो लिया. उस ने उसे मन का मीत बनाने की ठान ली थी.

वह लड़की एक रिकशे में बैठ चुकी थी. सलमान भी दूसरे रिकशे में बैठ कर उस का पीछा करने लगा.

थोड़ी देर बाद लड़की का रिकशा तवायफ गली की ओर मुड़ चुका था. सलमान एकबारगी चौंका, लेकिन वह उसे पाने के लिए सबकुछ करने को तैयार था.

उस लड़की का रिकशा एक खूबसूरत मकान के आगे रुक चुका था. लड़की ने पैसे दिए और मकान के अंदर चली गई.

रिकशे वाले से ही सलमान को पता चला कि वह लड़की सलमा बाई है और उस जैसी खूबसूरत तवायफ पूरे बनारस में नहीं है.

सलमान को न तो सलमा बाई के पेशे से मतलब था और न ही जातिधर्म से, वह तो उस का दीवाना हो चुका था. उस ने मन में ठान लिया था कि नतीजा चाहे कुछ भी क्यों न निकले, अगर निकाह करेगा तो सिर्फ सलमा बाई से, नहीं तो अपनी जान दे देगा.

सलमान का सलमा बाई के कोठे पर आनाजाना शुरू हो गया. सलमा बाई भी उसे चाहने लगी थी. दोनों एकदूसरे पर जान छिड़कने को तैयार थे. इस बात की खबर सलमान के अब्बाअम्मी के पास भी पहुंच चुकी थी.

‘कैसा आवारा लड़का इस खानदान में पैदा हो गया,’ यह कह कर वे दोनों उसे कोसने लगे थे.

इसलाम ने भी सलमान को बहुत समझाया, समाज के तौरतरीके बताए, लेकिन सलमान पर इस का कोई असर न हुआ.

इस पर सलमान कहता, ‘‘भाईजान, जरा उस लड़की को तो देखिए. क्या उसे इस समाज में जीने का हक नहीं है? आखिर यह समाज ही तो उस का जन्मदाता है.

‘‘इस समाज ने आज तक सदियों से चली आ रही बुराई को इसीलिए तो खत्म नहीं किया कि फिर वह अपनी हवस कहां शांत करेगा. इस गली में समाज के गरीब और अमीर, सभी लोग हवस की झोली फैलाए खड़े रहते हैं.

‘‘इस समाज के ठेकेदारों ने ही अपने फायदे के लिए कुछ उसूल बना दिए हैं. औरत को हमेशा हम ने भोगने वाली चीज समझ, उस के दर्द को कभी नहीं समझ.

‘‘मैं इस समाज के रीतिरिवाजों और खोखले उसूलों के खिलाफ आखिरी दम तक लड़ूंगा, चाहे इस का नतीजा जो भी निकले.’’

इसलाम सलमान की यह दलील सुन कर चुप हो गया.

एक दिन तो हद हो गई, जब सलमा को ले कर सलमान अपने गांव की हवेली पर पहुंचा. अब्बा और अम्मी ने उसे एक पल भी घर में ठहरने नहीं दिया.

लेकिन सलमान भी हार नहीं मानने वाला था. वह गांव के ही बचपन के दोस्त राम के घर जा पहुंचा. राम ने उस की काफी तारीफ की, क्योंकि उस ने भी एक तवायफ से शादी कर के समाज के सारे उसूलों को ठेंगा दिखाया था.

राम ने सलमान के निकाह के सारे इंतजाम किए, लेकिन मुल्ला निकाह कराने को तैयार नहीं हुआ. वह बोला, ‘‘मैं एक तवायफ का निकाह करा कर खुद की नजरों में नहीं गिरना चाहता.’’

राम भी हार मानने वाला नहीं था. उस ने अपने एक दोस्त रहीम को निकाह कराने के लिए तैयार किया, क्योंकि वह सारे नियम जानता था. दोनों का निकाह हो गया. राम ने ही उन्हें खेती करने को अपनी जमीन दे दी.

वक्त के साथ सलमा ने एक बेटे को जन्म दिया. बच्चे को पा कर वे दोनों खुशी से फूले न समाए.

जब यह खबर हवेली पहुंची, तो अब्बा और अम्मी की भी खुशियों का ठिकाना न रहा.

पोते की खबर पाते ही वे उस से मिलने को तड़प उठे. जब उन से नहीं रहा गया, तो वे समाज के सारे नियमों को ताक पर रख कर बहूबेटे को घर ले आए.

आबरू : घर से क्यों भागी निशा

Social Story in Hindi: न जाने कितने लोगों ने हुस्न की उस मलिका को अपना दिल देना चाहा होगा, लेकिन चांद हर किसी को नहीं मिलता. जब वह तंग टीशर्ट और मिनी स्कर्ट पहनती थी, तो देखने वालों का दिल मचल जाता था. जहां एक ओर निशा नशीली आंखों वाली खूबसूरत लड़की थी, वहीं दूसरी ओर हरी चमकीली आंखों वाली रिया की अदा भी मोहक थी. घर से भागी हुई निशा को जब कोई महफूज ठिकाना नहीं मिला, तो उस ने खुराना फर्म में 5 हजार रुपए महीने की नौकरी कर ली. धीरेधीरे निशा का फर्म के मालिक निशांत से मेलजोल का सिलसिला बढ़ने लगा और वह उस की ललचाई निगाहों में बसने लगी.

यह फर्म विदेशों में माल सप्लाई करती थी. उस माल की जांचपड़ताल के लिए विदेशी अफसर 2-4 महीने में दिल्ली पहुंच कर पूरा हिसाबकिताब करते थे.

20 साला रिया भी खुराना फर्म में पहले से काम करती थी. एक दिन जब निशा देर से दफ्तर पहुंची, तो रिया उस पर ताना मारते हुए बोली, ‘‘आ गई हुस्नपरी. भला यहां कौन तुम से देर

से आने की वजह पूछने की हिम्मत करेगा? तुम बौस की चहेती जो बनती जा रही हो.’’

‘‘जलन होती है क्या?’’ निशा ने तिलमिला कर कहा.

‘‘लगता है, तुम बुरा मान गई. मैं तो यों ही मजाक कर रही थी. दरअसल, बौस के कमरे से 2 बार बुलावा आ चुका है. उन्हें किसी फाइल की जरूरत है, जो तुम्हारी टेबल की दराज में बंद है.

‘‘चाबी तुम्हारे पास है, इसलिए उसे खोला कैसे जा सकता था. अब तुम आ गई हो, तो झटपट निकाल कर ले जाओ.’’

‘‘मैं जरा बाथरूम में जा कर मुंह धो लूं. बस में इतनी भीड़ थी कि पसीने से तरबतर हो गई हूं,’’ इतना कह कर निशा बाथरूम से जल्दी निबट कर बौस के केबिन की ओर गई. चपरासी ने मुसकरा कर दरवाजा खोल दिया.

निशा के अंदर जाते ही किसी दूसरे को बौस से मिलने का मौका कम ही मिलता था. अंदर क्या गुल खिलता था, यह बात शायद रिया जानती थी.

केबिन में घुसते ही होंठों पर मुसकराहट लाते हुए निशा बोली, ‘‘सर, मुझे कुछ देर हो गई. कैसे याद किया?’’

बौस ने निशा की ओर देखा. उस ने अपने काले घुंघराले लंबे बालों को कसने के लिए पतला आसमानी रंग का रेशमी फीता बांध रखा था. उस के टौप के ऊपरी 2 बटन खुले थे.

‘‘आओआओ, वहां क्यों खड़ी हो? कुरसी पर बैठो,’’ बौस बोला.

सामने कुरसी पर अदा के साथ बैठते हुए निशा बोली, ‘‘क्या करूं सर, खचाखच भरी बस सामने से निकल गई, चढ़ने का मौका ही नहीं मिला.’’

‘‘कोई बात नहीं. तुम जा कर कुछ देर आराम कर लो, फिर कल वाली दी गई फाइल ले कर आना.’’

कोई दूसरा होता, तो बौस भड़क कर सारा गुस्सा उस पर उतार देते, लेकिन मामला एक हसीना का था, इसलिए वे चुप रह गए.

अपनी सीट पर बैठते ही निशा ने टेबल की दराज खोली, फाइल निकाली. उसी समय बगल में बैठी रिया ने हंसते हुए पूछा, ‘‘क्या कहा बौस ने?’’

‘‘बोलता क्या, मु?ा पर नजरें टिकाईं, तो सबकुछ भूल गया,’’ निशा बोली.

‘‘वह तो मैं जानती थी. तेरी नजरों के तीर ने जब उसे पहले ही घायल कर दिया, तो बोलने के लिए गले की आवाज का रुक जाना कोई बड़ी बात नहीं.’’

‘‘तुम्हें क्यों जलन होती है रिया?’’

‘‘जब किसी से इश्क होता है, तो होंठ सिल जाते हैं और निगाहें बोलना शुरू कर देती हैं. तुम कुछ दिनों में बौस को पहचान लोगी.’’

‘‘मुझे तो नहीं लगता कि बौस की नीयत में कुछ खोट है,’’ निशा बोली.

‘‘यह तुम्हारा भरम है. सच जल्दी ही तुम्हारे सामने आ जाएगा.’’

शाम के 6 बजे तक दफ्तर से तकरीबन सभी लोग जा चुके थे. निशा ने रिया से कहा, ‘‘चलो, हम चल कर किसी पास के रैस्टोरैंट में कुछ खापी लेते हैं. वहीं पर बातें भी होती रहेंगी.’’

‘‘ठीक है,’’ और दोनों बाहर जाने की तैयारी करने लगीं, तभी बौस ने निशा को अपने कमरे में बुलाया.

‘‘लो, बौस को तुम्हारी याद आ गई. अब तो घंटेभर से पहले तुम्हें फुरसत नहीं मिलेगी. तुम बौस से निबटती रहना, मैं अपने क्वार्टर पर जा रही हूं. फिर किसी दिन रैस्टोरैंट में चलेंगे,’’ इतना कह कर रिया चली गई.

‘‘कैसे याद किया सर?’’ निशा ने बौस के कमरे में जा कर पूछा.

‘‘बैठो. आज तुम्हें कुछ जरूरी काम से देर तक रुकना पड़ेगा. तुम थकी होगी, इसलिए मैं ने कौफी मंगाई है.’’

निशा ने अपना हैंडबैग अलग रखा और बौस की टेबल के सामने कुरसी पर इतमीनान से बैठ गई.

थोड़ी देर बाद किसी होटल का बैरा कौफी सैट और नाश्ता डाइनिंग टेबल पर सजाने लगा. साथ में अंगरेजी शराब की बोतल, कांच के गिलास और बर्फ भी थी.

दूसरे दिन रिया ने निशा से 2 घंटा देर से आने की वजह जाननी चाही, तो वह चुप रही. उस दिन बौस भी बहुत देर से दफ्तर पहुंचा था.

‘‘मेरी जान, तुम ने बौस के साथ रातभर क्या गुल खिलाया?’’

‘‘जो भी समझ लो.’’

‘‘उस ने तुम्हें रात को कितने बजे छोड़ा?’’

‘‘3 बज रहे थे. बौस मुझे खुद अपनी कार से घर तक छोड़ने गए थे.’’

‘‘यह तो होना ही था. रातभर काफी परेशान किया होगा, जैसा कि तुम्हारे मुरझाए चेहरे से लग रहा है.’’

‘‘घर पहुंच कर मुझे देर तक नींद नहीं आई. तुम्हारी चेतावनी भी याद आने लगी थी.’’

‘‘और क्या हुआ?’’

‘‘हम दोनों शाम को रैस्टोरैंट में बातें करेंगे. मुझे कुछ जरूरी काम सौंपा गया है,’’ निशा ने धीमी आवाज में कहा.

रिया दिनभर यह जानने को बेचैन थी कि बौस ने निशा पर किस तरह फंदा डाला और उस के साथ क्याक्या हुआ, लेकिन निशा टालती रही.

शाम को दफ्तर खत्म होने के बाद जब लोग घर जाने की तैयारी करने लगे, तब चपरासी ने रिया को खबर दी, ‘‘बौस आप को बुला रहे हैं.’’

उसे जाते देख कर निशा ने कहा, ‘‘लो, आज तुम्हारी बारी है. अच्छी तरह निबट लेना. मैं तो चली.’’

जब रिया बौस के केबिन में पहुंची, तो बौस ने कहा, ‘‘रिया, स्कौटलैंड से वहां की बड़ी फर्म का सचिव पीटर फेरी हमारी कंपनी के माल और फाइलों की जांच करने आया है. दिन में मैं ने उसे फैक्टरी में घुमाफिरा कर तो खुश कर दिया, लेकिन रात में वह होटल नाज में फाइलों की चैकिंग करेगा.

‘‘उस का कमरा नंबर 120 है. तुम्हें फाइलों की चैकिंग इस तरह करानी है, ताकि उसे कोई गड़बड़ी न मिले. तुम

इस मामले में काफी होशियार हो. पिछली रात मैं ने निशा से सारी फाइलें ठीक करा दी हैं.’’

‘‘सर, अगर आप निशा को ही मेरी जगह भेज देंगे, तो अच्छा रहेगा. विदेश से आए लोगों के पास हर बार मुझे ही जाना पड़ता है,’’ रिया ने अपनी बात रखी.

‘‘इसलिए कि तुम उन्हें बेहतर तरीके से खुश करती रही हो. निशा तो अभी ठीक से सीख भी नहीं पाई है.’’

‘‘उन में कुछ लोग ज्यादा ही परेशान  करते हैं,’’ रिया ने कहा.

‘‘नौकरी करनी है, तो यह सब भी बरदाश्त करना पड़ेगा. तुम्हें 10 हजार की तनख्वाह यों ही नहीं दी जाती. मेरा ड्राइवर तुम्हें तुम्हारे घर से होटल पहुंचाएगा. वहां का काम खत्म होने पर वह तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ देगा.

‘‘तुम्हारे खानेपीने का इंतजाम पीटर फेरी के साथ ही रहेगा. अगर वह तुम्हारी सेवा से खुश हो गया, तो अपनी फर्म को और ज्यादा माल विदेश भेजने में सहूलियत होगी,’’ बौस ने समझाया.

‘‘अब मैं जाऊं सर?’’ रिया ने पूछा.

‘‘जाओ. खयाल रखना,’’ बौस ने मुसकरा कर उसे विदा किया.

दूसरे दिन रिया दफ्तर नहीं आई. रातभर उसे होटल नाज में रहना पड़ा था.

तीसरे दिन रिया चहकते हुए निशा से बोली, ‘‘मैं बहुत खुश हूं. मैं तुम से अपनी खुशी का इजहार रैस्टोरैंट में करना चाहती हूं. चलो, वहां चलें.’’

‘‘लेकिन…’’

‘‘इस समय मूड मत खराब करो,’’ कहते हुए रिया निशा को खींच कर रैस्टोरैंट ले गई.

रैस्टोरैंट में रिया ने निशा के लिए कौफी और अपने लिए ह्विस्की और नाश्ते का और्डर दिया.

‘‘आज मैं दफ्तर नहीं जाऊंगी. तुम जा कर बौस को बता देना कि मैं बहुत थकी हुई हूं. वे समझ जाएंगे कि मुझे स्कौटलैंड से आए पीटर फेरी की रातभर सेवा करनी पड़ी थी.’’

‘‘अब मैं समझ,’’ निशा हंसते हुए रिया से बोली.

रिया ने मुसकराते हुए बताया, ‘‘यार, पीटर फेरी तो गजब का मर्द निकला. मैं ने आज तक ऐसा दिलदार मर्द नहीं देखा. वह पूरी रात मेरे जिस्म से खेलता रहा.

‘‘मैं ने उसे कई बार फाइल पढ़ने के लिए कहा, लेकिन नशे में वह केवल हर पन्ने पर सही का निशान लगाते हुए दस्तखत करता रहा.

‘‘वह बारबार मेरी तारीफों के पुल बांधता रहा. उस की बातें सुन कर मैं भी मन ही मन खुश थी. हर औरत अपनी खूबसूरती की तारीफ सुन कर मर्द पर ज्यादा मेहरबान होती है.

‘‘न जाने कब किस मोड़ पर किसी से प्यार हो जाए, यह कहा नहीं जा सकता. हम लाख अपने दिल को समझाएं, नियम और मर्यादा में खुद को बांध कर रखें, मगर दिल अगर किसी पर मरमिटना चाहे, तो दिमाग कुछ नहीं सुनतासोचता.

‘‘उस मर्द के बच्चे ने मेरा सारा जिस्म निचोड़ डाला. जवानी एक ऐसा नशा होती है, जिस में औरत हो या मर्द, दोनों में मदहोशी बनी रहती है.

‘‘सच कहूं, पीटर फेरी इतना खुश था कि वह जातेजाते मेरे पर्स में 20 हजार रुपए रख गया और दोबारा मुझ से ही मिलने का वादा लेता गया.’’

इस के बाद कुछ देर तक दोनों में खामोशी रही, फिर रिया ने निशा से पूछा, ‘‘यार, तुम्हारी रात बौस के साथ कैसी कटी थी?’’

‘‘मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था, क्योंकि जिस दिन ऐसी नौबत आएगी, मैं नौकरी से इस्तीफा दे दूंगी. वैसे, मैं तुम्हें बता दूं कि बौस मेरे साथ शादी करना चाहता है.

‘‘उस रात वह मुझे बारबार यही समझाता रहा कि उस से शादी कर के मैं बेहद खुश रहूंगी, क्योंकि अभी तक उसे ऐसी कोई लड़की पसंद नहीं आई, जिसे वह अपना हमसफर बना सके.

‘‘उस ने मुझे यह भी बताया कि तुम ने उस पर कई बार डोरे डालने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रही.

‘‘सच पूछो, तो तुम ऐसे ही काम निबटाने के लिए फर्म में रखी गई हो. जैसेजैसे फर्म की आमदनी बढे़गी, तुम्हारी तनख्वाह भी बढ़ेगी.

‘‘एक बात याद रखना. इस नौकरी को छोड़ने के बाद तुम्हें ऐसा सुनहरा मौका नहीं मिलेगा. विदेशी लोग तो कभीकभी आते हैं, लेकिन तुम ने दूसरों को ज्यादा जोश दिखाया, तो कहीं की नहीं रहोगी, इसलिए बेहतर होगा कि किसी को अपना जीवनसाथी बना कर इस काम को छोड़ दो.

‘‘कुछ नहीं तो अपने बौस पर ही फंदा कसना शुरू करो. शायद वह तुम्हारे बस में आ जाए, क्योंकि इस कला में तुम काफी माहिर हो.’’

‘‘वह ऐसा नहीं है, जिस पर मेरे हुस्न का जादू चल सके,’’ रिया बोली.

‘‘फिर तुम ने कैसे सोच लिया कि मैं एक ही रात में उस की गुलाम बन गई थी. वह चाहता तो नशे में मेरे साथ बदसुलूकी कर सकता था, पर हिम्मत नहीं बटोर सका.

‘‘जिंदगी में हर किसी का एक सपना होता है. उसे पूरा करने के लिए कुछ लोग तुम्हारा रास्ता चुनते हैं, तो कुछ मेरी तरह कड़ी मेहनत करते हैं,’’ इतना कह कर निशा वहां से चली गई.

चार रोटियां : ललिया के आंचल की चार रोटियां

Story in Hindi

सोशल मीडिया की दोस्ती और अनजाना क्राइम

Crime News in Hindi: अपना समय गुजारने के लिए कुछ महिलाएं सोशल मीडिया (Soical Media) से जुड़ जाती हैं, जो धीरेधीरे उन्हें अच्छा लगने लगता है. मीनू जैन के साथ भी ऐसा ही हुआ. लेकिन यह… मीनू जैन अपने पति रिटायर्ड विंग कमांडर वी.के. जैन (Retired Wing Commander V.K. Jain) के साथ दिल्ली में द्वारका के सेक्टर-7 स्थित एयरफोर्स ऐंड नेवल औफिसर्स अपार्टमेंट में रहती थीं. उन के परिवार में पति के अलावा एक बेटा आलोक और बेटी नेहा है. आलोक नोएडा स्थित एक मल्टीनैशनल कंपनी (Multinational company) में काम करता है, जबकि शादीशुदा नेहा गोवा में डाक्टर है. विंग कमांडर वी.के. जैन एयरफोर्स से रिटायर होने के बाद इन दिनों इंडिगो एयरलाइंस (Indigo Airlines) में कमर्शियल पायलट हैं.

25 अप्रैल, 2019 को वी.के. जैन अपनी ड्यूटी पर थे. फ्लैट में मीनू जैन अकेली थीं. शाम को मीनू जैन को उन के पिता एच.पी. गर्ग ने फोन किया तो बातचीत के दौरान मीनू ने उन्हें बताया कि आज उस की तबीयत कुछ ठीक नहीं है, इसलिए वह आराम कर रही है. दरअसल, उन के पिता उन से मिलने आना चाहते थे. लेकिन जब मीनू ने उन से आराम करने की बात कही तो उन्होंने वहां से जाने का इरादा स्थगित कर दिया.

अगले दिन सुबह एच.पी. गर्ग ने बेटी की खैरियत जानने के लिए उस के मोबाइल पर फोन किया. काफी देर तक घंटी बजने के बाद भी जब मीनू ने उन का फोन रिसीव नहीं किया तो वे परेशान हो गए. कुछ देर बाद वह अपने बेटे अजीत के साथ बेटी के फ्लैट की ओर रवाना हो गए.

मीनू का फ्लैट तीसरे फ्लोर पर था. उन्होंने वहां पहुंच कर देखा तो दरवाजा अंदर से बंद था. कई बार डोरबेल बजाने के बाद भी जब फ्लैट के अंदर से मीनू ने कोई जवाब नहीं दिया तो वह परेशान हो गए. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि मीनू को ऐसा क्या हो गया, जो दरवाजा नहीं खोल रही.

इस के बाद एच.पी. गर्ग ने पड़ोसी योगेश के फ्लैट की घंटी बजाई. योगेश ने दरवाजा खोला तो एच.पी. गर्ग ने उन्हें पूरी बात बताई. स्थिति गंभीर थी, इसलिए उन्होंने अजीत और उस के पिता को अपने फ्लैट में बुला लिया. इस के बाद योगेश की बालकनी में पहुंच कर अजीत अपनी बहन मीनू के फ्लैट की खिड़की के रास्ते अंदर पहुंच गया.

जब वह बैडरूम में पहुंचा तो वहां बैड के नीचे मीनू अचेतावस्था में पड़ी थी. पास में एक तकिया पड़ा था, जिस पर खून लगा हुआ था. यह मंजर देख कर वह घबरा गया. उस ने अंदर से फ्लैट का दरवाजा खोल कर यह जानकारी अपने पिता को दी.

एच.पी. गर्ग और योगेश ने फ्लैट में जा कर मीनू को देखा तो वह भी चौंक गए कि मीनू को यह क्या हो गया. चूंकि वह क्षेत्र थाना द्वारका (दक्षिण) के अंतर्गत आता है, इसलिए पीसीआर की सूचना पर थानाप्रभारी रामनिवास इंसपेक्टर सी.एल. मीणा के साथ मौके पर पहुंच गए.

मौके पर उन्होंने क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को बुलाने के बाद उच्चाधिकारियों को भी सूचना दे दी. डीसीपी एंटो अलफोंस भी घटनास्थल पर पहुंच गए. चूंकि मामला एयरफोर्स के रिटायर्ड अधिकारी के परिवार का था, इसलिए उन्होंने स्पैशल स्टाफ की टीम को भी बुला लिया.

क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम का काम निपट जाने के बाद थानाप्रभारी रामनिवास और स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर नवीन कुमार की टीम ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया. मीनू की हालत और तकिए पर लगे खून को देख कर लग रहा था कि मीनू की हत्या तकिए से सांस रोक कर की गई है.

मीनू का मोबाइल फोन और उस की कीमती अंगूठी गायब थी. इस के बाद जब फ्लैट की तलाशी ली गई तो रोशनदान का शीशा टूटा हुआ मिला. फ्लैट के बाकी कमरों का सारा सामान अस्तव्यस्त था. कुछ अलमारियां खुली हुई थीं और उन में रखे सामान बिखरे हुए थे. किचन के वाश बेसिन में चाय के कुछ कप रखे थे. एक कप में थोड़ी चाय बची हुई थी.

यह सब देख कर पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि हत्यारे जो कोई भी हैं, मीनू जैन उन से न केवल अच्छी तरह परिचित थीं, बल्कि हत्यारों के साथ उन के आत्मीय संबंध भी रहे होंगे. क्योंकि किचन में रखे चाय के कप इस ओर इशारा कर रहे थे. थाना पुलिस ने मौके की जरूरी काररवाई करने के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. फिर एच.पी. गर्ग की शिकायत पर हत्या तथा लूटपाट का मामला दर्ज कर लिया गया.

द्वारका जिले के डीसीपी एंटो अलफोंस ने इस सनसनीखेज हाईप्रोफाइल मामले की तफ्तीश के लिए एसीपी राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित की. इस टीम में इंसपेक्टर नवीन कुमार, इंसपेक्टर रामनिवास तथा इंसपेक्टर सी.एल. मीणा, एसआई अरविंद कुमार आदि को शामिल किया गया.

अगले दिन मृतका मीनू के पति वी.के. जैन ड्यूटी से वापस लौटे तो पत्नी की हत्या की बात सुन कर आश्चर्यचकित रह गए. उन्होंने फ्लैट में रखी सेफ आदि का मुआयना किया तो उस में रखी ज्वैलरी और कैश गायब था. उन्होंने पुलिस को बताया कि उन के फ्लैट से करीब 35 लाख रुपए के कीमती जेवर और कुछ कैश गायब है. इस के अलावा मीनू के दोनों मोबाइल फोन भी गायब थे.

स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर नवीन कुमार ने एसीपी राजेंद्र सिंह के निर्देशन में काम करना शुरू कर दिया. उन्होंने मीनू के दोनों मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई. इस के अलावा एयरफोर्स ऐंड नेवल औफिसर्स अपार्टमेंट सोसायटी के गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली.

सीसीटीवी फुटेज में 2 कारें संदिग्ध नजर आईं, जिन में एक स्विफ्ट डिजायर थी. दोनों कारों की जांच की गई तो पता चला स्विफ्ट डिजायर कार का नंबर फरजी है. टीम को इसी कार पर शक हो गया. जब गेट पर मौजूद गार्ड से स्विफ्ट डिजायर कार के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि 25 अप्रैल, 2019 की दोपहर को करीब 2 बजे एक अधेड़ आदमी मीनू जैन से मिलने आया था. जब उस से रजिस्टर में एंट्री करने के लिए कहा गया तो उस ने तुरंत मीनू जैन को फोन मिला दिया. मीनू ने बिना एंट्री किए उसे अंदर भेजने को कहा.

इस पर गार्ड ने उस व्यक्ति को मीनू के फ्लैट का पता बता कर उन के पास भेज दिया. शाम को दोनों घूमने के लिए सोसायटी से बाहर भी गए थे. यह सुन कर उन्होंने अनुमान लगाया कि मीनू जैन की हत्या में इसी आदमी का हाथ रहा होगा.

फोन की लोकेशन जयपुर की आ रही थी

मीनू जैन के दोनों मोबाइल फोन की काल डिटेल्स से पता चला कि उन का एक फोन घटना वाली रात की सुबह तक चालू था, उस के बाद उसे स्विच्ड औफ कर दिया गया था. जबकि दूसरा फोन चालू था, जिस की लोकेशन जयपुर की आ रही थी.

पुलिस के लिए यह अच्छी बात थी. पुलिस टीम गूगल मैप की मदद से 29 अप्रैल को जयपुर पहुंच गई. फिर दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पुलिस की मदद से जयपुर के मुरलीपुरा इलाके में स्थित स्काइवे अपार्टमेंट में छापा मारा. वहां से दिनेश दीक्षित नाम के एक शख्स को हिरासत में ले लिया. उस के पास से सफेद रंग की वह स्विफ्ट डिजायर कार भी बरामद हो गई जो उस अपार्टमेंट के बाहर खड़ी थी.

जब उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने 25 अप्रैल, 2019 की देर रात दिल्ली में मीनू जैन की हत्या और उस के फ्लैट में लूटपाट करने की बात स्वीकार कर ली.

पुलिस की तहकीकात और आरोपी दिनेश दीक्षित के बयान के अनुसार, मीनू जैन की हत्या के पीछे जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

52 वर्षीय मीनू जैन के पति वी.के. जैन एयरफोर्स में विंग कमांडर पद से रिटायर होने के बाद इंडिगो एयरलाइंस में बतौर पायलट तैनात थे. वह कामकाज के सिलसिले में ज्यादातर बाहर ही रहते थे. उन के दोनों बच्चे बड़े हो चुके थे.

बेटा नोएडा में एक मल्टीनैशनल कंपनी में जौब करता था, जो वीकेंड में अपने मम्मीपापा से मिलने द्वारका आ जाता था. बेटी मोना (काल्पनिक नाम) डाक्टर थी, जो गोवा में रहती थी. ऐसे में मीनू जैन घर पर अकेली रहती थीं. वह अपना समय बिताने के लिए सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहती थीं.

सोशल मीडिया में बने प्रोफाइल पसंद आने पर बड़ी आसानी से नए दोस्त बन जाते हैं. बाद में दोस्ती बढ़ जाने के बाद आप उन से अपने विचार शेयर कर सकते हैं. अगर बात बन जाती है तो चैटिंग करने वाले आपस में अपने पर्सनल मोबाइल नंबर का आदानप्रदान भी कर लेते हैं. इस प्रकार दोस्ती का सिलसिला आगे बढ़ जाता है. मीनू जैन और दिनेश दीक्षित के मामले में भी ऐसा ही हुआ.

खिलाड़ी था दिनेश दीक्षित

जयपुर निवासी 56 वर्षीय दिनेश दीक्षित बेहद रंगीनमिजाज व्यक्ति था. उस ने 2 शादियां कर रखी थीं. उस की एक बीवी अपने 2 बेटों के साथ गांव में रहती थी, जबकि दूसरी बीवी के साथ वह जयपुर में किराए के एक फ्लैट में रहता था. बताया जाता है कि सन 2015 में ठगी के एक मामले में वह जेल भी जा चुका है. 2 साल जेल में रहने के बाद वह सन 2017 में जेल से बाहर आया था. इस के बाद वह अच्छी नस्ल के कुत्ते बेचने का बिजनैस करने लगा था.

इसी दौरान उस की मुलाकात दिल्ली के एक सट्टेबाज से हुई, जिस की बातों से प्रभावित हो कर वह क्रिकेट के आईपीएल मैचों में सट्टा लगाने लगा. इस धंधे की शुरुआत में उसे कुछ फायदा तो हुआ लेकिन बाद में उसे काफी नुकसान हुआ. वह कई लोगों का कर्जदार हो गया. इस कर्ज से उबरने के लिए उस ने अमीर औरतों को अपने जाल में फंसा कर उन से रुपए ऐंठने की योजना बनाई.

इस के बाद उस ने एक सोशल साइट के माध्यम से खूबसूरत और मालदार शादीशुदा औरतों से दोस्ती करनी शुरू कर दी. जल्द ही उस की दोस्ती कई ऐसी औरतों से हो गई, जो खाली समय में सोशल साइट पर दोस्तों के साथ अपना टाइमपास किया करती थीं.

करीब 5 महीने पहले सोशल साइट पर दिनेश दीक्षित और मीनू जैन दोस्त बन गए. अब जब भी खाली वक्त मिलता, दोनों सोशल साइट पर चैटिंग करते रहते थे. इस से उन का मन बहल जाता था और बोरियत महसूस नहीं होती थी. शीघ्र ही उन की दोस्ती गहरी हो गई.

मीनू जैन के पति चूंकि इंडिगो एयरलाइंस में पायलट थे, इसलिए वह घर से अकसर बाहर ही रहते थे. इस बात का फायदा उठा कर मीनू जैन ने पति की अनुपस्थिति में दिनेश दीक्षित को अपने फ्लैट में बुलाना शुरू कर दिया.

भोलीभाली मीनू जैन फंस गईं दिनेश दीक्षित के जाल में

दिनेश ने देखा कि मीनू जैन साफ दिल की भोलीभाली औरत हैं तो वह मन ही मन उन्हें लूटने की योजना बनाने लगा. करीब 5 महीने की दोस्ती के दौरान मीनू जैन को दिनेश दीक्षित पर इस कदर विश्वास हो गया कि जब भी उन के पति और बच्चे घर पर नहीं रहते, वह उसे मैसेज कर के अपने पास बुला लेतीं और फिर दोनों अपने दिल की तमाम हसरतें पूरी कर लिया करते थे.

25 अप्रैल, 2019 को भी वी.के. जैन अपने फ्लैट पर नहीं थे. पति की अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए मीनू जैन ने दिनेश दीक्षित को फ्लैट पर आने का मैसेज भेजा तो वह अपनी सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार से दोपहर के वक्त सोसायटी के गेट पर पहुंच गया.

जब सोसायटी के गेट पर मौजूद गार्ड ने उस का पता पूछा तो उस ने मीनू जैन को फोन कर गार्ड से उन की बात करा दी. मीनू जैन के कहने पर गार्ड ने उस की कार का नंबर रजिस्टर में नोट करने के बाद उसे अंदर जाने को कह दिया.

दिनेश दीक्षित मीनू जैन के फ्लैट में पहुंचा तो उसे सामने देख कर वह बहुत खुश हुईं. चाय और नमकीन लेने के बाद दोनों ही बातों में मशगूल हो गए. लगभग पौने 9 बजे मीनू और दिनेश दोनों डिनर के लिए कार से सोसायटी के बाहर निकले.

करीब आधे घंटे के बाद लौटते समय दिनेश ने मूड बनाने के लिए वोदका की एक बोतल और कुछ स्नैक्स खरीद लिए. सोसायटी में पहुंच कर दोनों ने ड्रिंक करनी शुरू कर दी. अपनी योजना को अंजाम देने के लिए दिनेश दीक्षित ने मीनू जैन को अधिक मात्रा में वोदका पिलाई और खुद कम पी.

रात करीब 2 बजे मीनू जैन शराब के नशे में धुत हो कर शिथिल पड़ गईं तो दिनेश दीक्षित ने मौका देख कर तकिए से उन का मुंह दबा दिया. जब मीनू ने छटपटा कर दम तोड़ दिया तो उस ने बड़े इत्मीनान से उन की सेफ में रखे करीब 50 लाख रुपए के आभूषण और नकदी निकाल ली.

मीनू जैन की अंगुली में एक बेशकीमती अंगूठी थी. उस ने वह अंगूठी भी उतार कर अपने पास रख ली. इस के अलावा उन के दोनों मोबाइल फोन भी उठा लिए. रात भर वह मीनू की लाश के पास बैठ कर शराब पीता रहा और तड़के 5 बजे फ्लैट से सारा लूट का सामान ले कर रोशनदान से बाहर निकल गया. फिर अपनी स्विफ्ट कार से जयपुर के लिए रवाना हो गया.

गुड़गांव के टोल टैक्स से आगे निकलने के बाद उस ने मीनू जैन के एक मोबाइल फोन को स्विच्ड औफ कर दिया. जबकि दूसरे फोन को वह स्विच्ड औफ करना भूल गया. जयपुर पहुंचने के बाद वह पूरी तरह निश्चिंत था कि पुलिस उस तक नहीं पहुंच सकेगी. लेकिन 29 अप्रैल, 2019 को इंसपेक्टर नवीन कुमार की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया. उस के पास से मीनू जैन के यहां से लूटा गया सारा सामान बरामद कर लिया गया.

दिनेश दीक्षित से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे द्वारका (साउथ) थाने के थानाप्रभारी रामनिवास को सौंप दिया. थाना पुलिस ने दिनेश दीक्षित से पूछताछ के बाद उसे द्वारका कोर्ट में पेश कर 2 दिन के रिमांड पर ले लिया.

रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उसे फिर से द्वारका कोर्ट में पेश कर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखने तक दिनेश दीक्षित जेल में बंद था. केस की विवेचना थानाप्रभारी रामनिवास कर रहे थे.  द्य

—घटना में शामिल कुछ पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं.

मुझे मेकअप प्रोडक्ट शेयर करना बिलकुल पसंद नहीं है, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरी एक काफी करीबी दोस्त है. बचपन से ले कर कालेज तक हम ने अपनी हर चीज शेयर की है. बाकी सब तो ठीक है लेकिन उस का मेरा मेकअप प्रोडक्ट शेयर करना मुझे बिलकुल पसंद नहीं. मैंने यह बात उसे बातोंबातों में कई बार बोल भी दी है लेकिन वह नहीं मानती. साफ बोल दूं तो कहीं वह बुरा न मान जाए. क्या करूं, सलाह दें.

जवाब

दोस्ती में अपने सीक्रेट्स और चीजें शेयर करना अच्छी बात है लेकिन मेकअप प्रोडक्ट शेयर करना स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है. इस के अलावा मेकअप प्रोडक्ट शेयरिंग से जुड़ी अन्य बीमारियों में हर्पीस भी शामिल है, जो घावों और खुजली, चकत्ते और सूजन का कारण बनता है. जैसे, आंखों का काजल, आईलाइनर और मस्कारा शेयर करने से लाल आंखें, आंखों में खुजली, जलन, आंख से पानी आना आदि समस्याएं हो सकती हैं. वहीं, लिपस्टिक शेयर करने से हर्पीस समेत कई अन्य इन्फैक्शन हो सकते हैं.
मेकअप ब्रश और ऐप्लिकेटर आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में बैक्टीरिया ले जा सकते हैं, आप अपनी दोस्त को साफसाफ शब्दों में यह बात समझाएं. समझदार होगी तो आप का कहना जरूर मानेगी. तब भी न माने तो कह दें कि आप को स्किन प्रौब्लम हो रही है, इसलिए मेकअप प्रोडक्ट्स शेयर नहीं कर सकती. तब वह बुरा माने या अच्छा, चिंता मत करिए. वैसे, समझदार फ्रैंड है, तो बुरा बिलकुल नहीं मानेगी.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

बाबाओं की अय्याशी, क्यों लुटती गरीब घर की बेटियां

Society News in Hindi: आसाराम (Asaram), रामरहीम (Ram Rahim) व फलाहारी बाबा (Phalhari Baba) के बाद रंगीनमिजाजी में एक और नाम वीरेंद्र दीक्षित (Virender Dixit) का सामने आया. 21 दिसंबर, 2017 को पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर दिल्ली में उस की आध्यात्मिक यूनिवर्सिटी पर छापा मार कर दर्जनों लड़कियों को बाहर निकाला. उन में से कुछ लड़कियों ने मीडिया को बताया कि वह बाबा खुद को कृष्ण व उन्हें अपनी गोपियां बता कर गुप्त ज्ञान व प्रसाद देने के नाम पर उन के साथ मुंह काला करता था. यह असर धर्म की उस अफीम का है, जिस की घुट्टी जीने से मरने तक कदमकदम पर लोगों को पिलाई जाती है. बेकार की बातों को हवा देने वाली तमाम ऊलजुलूल किस्सेकहानियां धर्म की किताबों में भरी पड़ी हैं. बातों की चाशनी चढ़ा कर प्रवचनों में उन्हें दोहराया जाता है. स्वर्ग व मोक्ष मिलने का लालच दे कर लोगों को बहकाया जाता है. सारे दुखों से छुटकारा मिलने का झांसा दे कर उन्हें भरमाया जाता है. इस से ज्यादातर लोग चालबाज बाबाओं की लुभावनी बातों में आ जाते हैं.

इन्हीं बातों के असर से धर्म के दलदल में डूबे लोग सहीगलत में फर्क करना भूल जाते हैं. अपनी बेटियों व पत्नियों को बाबाओं के आश्रमों में ले जा कर कुरबान कर देते हैं.

ऐसी लड़कियां व औरतें बाबाओं के चंगुल में फंस कर जबतब अपनी इज्जतआबरू गंवा देती हैं तो उन्हें बताया जाता है कि वे तो भगवान की हो चुकी हैं, बाहरी दुनिया पाप की गठरी है.

पीडि़त लड़कियों में से ज्यादातर लोकलाज व बलात्कारी बाबाओं व उन के गुंडों के डर से चुप्पी साध जाती हैं. अपनी जबान सिल कर वे हालात से समझौता कर लेती हैं. किसी से कोई शिकायत भी नहीं करतीं. गिरोह की कई मुफ्तखोर सदस्या तो खुद बाहर आने से इनकार कर देती हैं. इतना ही नहीं, उन पाखंडी बाबाओं के हक में बोलने व लड़ने के लिए वे खड़ी हो जाती हैं.

अपने पैर पर कुल्हाड़ी…

देश में तकरीबन 5 फीसदी अमीर, 10 फीसदी मझले व 85 फीसदी गरीब हैं. ये पाखंडी बाबा ज्यादातर निचले व मझले तबके के कम पढ़े लोगों को अपना शिकार बनाते हैं. ज्योतिषी, तांत्रिक व बाबा जानते हैं कि माली तौर परकमजोर लोग ही समस्याओं से ज्यादा घिरे रहते हैं. ऊपर से उन का खुद पर यकीन भी नहीं होता इसलिए वे टोनेटोटके, गंडेतावीज, बाबाओं की मेहरबानी व चमत्कारों में अपने मसलों का हल ढूंढ़ते हैं.

जिस तरह बहुत ज्यादा महंगी गाड़ियां बनाने वाली कंपनियां टैलीविजन पर अपने इश्तिहार इसलिए नहीं देती हैं कि इतनी महंगी गाड़ियां खरीदने वालों के पास टैलीविजन देखने का समय नहीं होता है, उसी तरह पाखंडी बाबा भी ऊंची जाति के रसूखदार व अमीर लोगों को अपना शिकार कम ही बनाते हैं, क्योंकि एक तो वे जल्दी से हर किसी के झांसे में नहीं आते, ऊपर से बाबाओं को भी अपनी पोल खुलने व पकड़े जाने का डर रहता है.

नीचे से ऊपर छलांग

निचले व मझले तबके के ज्यादातर लोग अमीर लोगों की बराबरी के सपने देखते रहते हैं. धर्म के मनगढ़ंत प्रचार से उन्हें लगने लगता है कि करामातों से उन के दुखदर्द मिट जाएंगे. ये बाबा उन की दुनिया बदल देंगे, इसलिए अकसर उपायों के नाम पर वे छलांग लगाने के लिए तैयार हो जाते हैं, चाहे इस के लिए उन्हें कुछ भी कुरबानी क्यों न देनी पड़े.

बहुत से मक्कार बाबाओं के चेलेचपाटे भोलेभाले भक्तों को पटाने में लगे रहते हैं कि तुम तो बहुत खुशनसीब हो. तुम्हारी लड़की को बाबा ने अपनी सेवा के लिए चुना है. ऐसा तो हजारोंलाखों में से किसी एक के साथ होता है. तुम्हें तो खुश होना चाहिए. तुम्हारा नाम होगा. तुम्हारी सारी पुश्तें तर जाएंगी. तुम पर बाबा की खास कृपा बरसेगी.

कई लोग इसी झूठी शान, भरम व अपने भले की उम्मीद में मौत के कुएं में छलांग लगा लेते हैं. धोखेबाज बाबाओं पर भरोसा कर के वे अपने मासूम बीवीबच्चों को उन की शरण में छोड़ देते हैं.

कई बार बाबाओं की ऐश व दौलत देख कर कुछ निकम्मे लोग खुद भी वैसा बनने के सपने देखने लगते हैं. उन्हें आत्मा व परमात्मा के ज्ञान का दौरा सा पड़ने लगता है. किसी के मिलते ही वे उसे ज्ञान देने लगते हैं. यह बात अलग है कि उन के ये हवाई किले पूरे नहीं हो पाते. सभी लोग बाबा तो नहीं बन पाते, लेकिन उन के पक्के चेले जरूर हो कर रह जाते हैं. ये चेले बाबाओं की दुकानदारी चलाने व उसे आगे बढ़ाने में मदद करते हैं.

कथा, कीर्तन, प्रवचन करने और आश्रम वगैरह चला कर धनदौलत कमाने वालों की गिनती तेजी से बढ़ रही है. इस की अहम वजह धर्म के धंधों में बढ़ती चकाचौंध है, इसलिए बहुत से लड़केलड़कियां गेरुए कपड़े पहन कर जल्दी पैसा बनाने की ओर बढ़ रहे हैं. कम उम्र के बहुत से लड़केलड़कियां ऊंचेऊंचे स्टेज से कथाप्रवचन और जागरण कर के माल बटोर रहे हैं.

अब पछताए होत क्या…

धर्म का कारोबार करने वाले धंधेबाज बड़े ही शातिर होते हैं. ये भोलेभाले लोगों में से छांटछांट कर अपने चेलाचेली बना लेते हैं. हद से ज्यादा गरीबी, तालीम व जागरूकता की कमी धर्मांधता की आग में घी का काम करती हैं. मसलन माली तंगी होने से कई लोग लड़की को आज भी बोझ मानते हैं, इसलिए कई मांबाप तो मुफ्त में पढ़ाईलिखाई कराने के लालच में पहले लड़कियों को बाबाओं के आश्रमों में भेज देते हैं, बाद में हंगामा करते हैं.

दरअसल, जवान लड़कियां छांट कर अपनी हवस मिटाने की गरज से पाखंडी बाबाओं ने जाल फैला रखे हैं. धार्मिक तालीम देने के नाम पर उन्होंने अपने आश्रमों में 12वीं जमात तक के कन्या इंटर कालेज खोल रखे हैं.

ज्यादातर निकम्मे, नशेड़ी व गैरजिम्मेदार लोग अब लड़कियों को पालना भी बड़ा मुश्किल काम समझते हैं. इस के बाद उन की शादी करना व दहेज देना उन्हें झंझट लगता है, इसलिए कई बार छुटकारा पाने के लिए भी कुछ लोग अपनी लड़कियों को बाबाओं के आश्रमों में भेज कर बेफिक्र हो जाते हैं.

शिकार की तलाश में मक्कार बाबाओं व उन के चालबाज चेलों का बहुत से घरों में आनाजाना लगा रहता है. भोलीभाली औरतें धार्मिक कर्मकांड, दोष, दुर्भाग्य, नरक व पाप के नाम पर डरीसहमी रहती हैं. वे बाबाओं के दिमाग में घूम रहे शैतान व हैवान को नहीं पहचान पातीं और उन के झांसे में आ कर पैसा व आबरू दोनों गंवा देती हैं.

फैलता जाल

देश के हर हिस्से में शिरडी के सांईं बाबा, वैष्णो देवी, शनि महाराज व बालाजी वगैरह के नाम पर नएनए मंदिर और बाबाओं के आश्रम बढ़ रहे हैं, इसलिए उन के महंतों व पाखंडी बाबाओं की गिनती व उन का जाल भी बढ़ रहा है.

बहुत से शहरोंकसबों में अकसर बाबाओं के कथाप्रवचन होते रहते हैं. खातेपीते घरों की औरतें व मर्द अपने घर में काम छोड़ कर इन बाबाओं के प्रवचन सुनने चले जाते हैं, फिर उन से कान में नाम व मंत्र की दीक्षा लेते हैं.

धर्म की आड़ में बलात्कार करने वाले कई बाबाओं का गिरोह बहुत बड़ा है. शिकायत व जांच के बाद जब ये फंस जाते हैं तो इन के गुंडे शिकायत करने वालों को धमकाते हैं, गवाहों को मार तक देते हैं.

आसाराम के केस में अब तक कई गवाह मारे जा चुके हैं. आसाराम को सलाखों के पीछे पहुंचाने वाली लड़की को भी बदनाम करने व मार देने की धमकी मिली थी, इसलिए उसे 20 दिसंबर, 2017 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में आसाराम व उसके 11 गुरगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराना पड़ा और सरकार को उस की सिक्योरिटी बढ़ानी पड़ी. अपने धन बल व भक्तों की भीड़ वाले वोट बैंक के चलते ज्यादातर नेता इन बाबाओं के तलवे चाटते हैं. भ्रष्ट व कमजोर अफसर इन के खिलाफ सख्त कदम उठाना तो दूर जांच करने से भी कतराते हैं.

ये हैं उपाय

बाबाओं के चक्कर में फंस चुके तमाम लोग आज भी थानाकचहरी के चक्कर काटकाट कर परेशान हैं. उन की बहूबेटियां बरसों से इन दरिंदों के आश्रमों में कैद हैं, मारी जा चुकी हैं या लापता हैं. ये गुनाहगार हत्यारे उन के दस्तखत से जबरन या बहलाफुसला कर लिखाए गए हलफनामों की आड़ में बचने की नाकाम कोशिशें करने में लगे रहते हैं.

पिछले दिनों मेरठ का एक बाबा अपने एक चेले की जवान व बेऔलाद बीवी को औलाद देने का झांसा दे कर अपने साथ ले कर भाग गया.

इतना ही नहीं, पाखंडी बाबा आज भी जेल से बाहर अपना कारोबार धड़ल्ले से चला कर अपनी ऐशगाहों में मौज मार रहे हैं. भोलेभाले भक्त उन पर अंधा भरोसा कर के भेड़ों की तरह मुंड़ रहे हैं.

इस में कुसूर धर्म प्रचार व लोगों की लापरवाही का है. पाखंडी बाबाओं को पकड़ने के ज्यादातर मामले कोर्ट के आदेश से खुले हैं. गैरसरकारी संगठन व महिला आयोग को पहल करनी चाहिए ताकि ढोंगियों व पाखंडियों को उन के किए की सजा मिले, वरना अनगिनत पाखंडी बाबा धर्म की आड़ ले कर अपना घर भरते रहेंगे. वे भोलेभाले लोगों के घर इसी तरह बरबाद करते रहेंगे.

अब तो धर्म का सहारा ले कर कई सालों से सत्ता पाई जा रही है और ऐसे में कौन सी सरकार इन बाबाओं पर नकेल कसेगी? ये तो नेताओं और अफसरों की तरह चाहे जैसे मरजी जनता की जेबें काटेंगे.

शादीशुदा जीवन में हो रही है सैक्स की कमी

Sex News in Hindi: सैक्सलैस विवाह के 70% केस युवा जोड़ों के हैं और यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. इस के लिए एक ही उपाय है कि दूसरी चीजों की तरह सैक्स के लिए भी समय निकालें, क्योंकि जब आप इस का स्वाद जानेंगे तभी इसे करेंगे. कुछ समय एकदूसरे के साथ जरूर बिताएं. कन्फ्यूशियस ने कहा था कि खाना व यौन इच्छा (Sex Desire) दोनों मानव की प्राकृतिक जरूरतें हैं. मनोविज्ञानी (psychologist) और मनोचिकित्सक (psychiatrist) डा. पुलकित शर्मा इस बढ़ते रोग के संबंध में कुछ सवालों के जवाब दे रहे हैं:

सैक्सलैस विवाह सामान्य होने का कोई सूचक है?

हां, है. विवाहित लोग कैरियर के तनाव से घिरे हैं और अब उन के पास अंतरंगता के लिए बिलकुल भी समय नहीं है. दूसरा, अब चिड़चिड़ाहट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. विवादों को सुलझाने के बजाय स्त्री तथा पुरुष सैक्स की इच्छापूर्ति को बाहर ढूंढ़ रहे हैं.

क्यों कोई विवाह सैक्सलैस होता है?  

यदि हम इन बातों को छोड़ दें कि किसी साथी को सैक्स संबंधी या मानसिक समस्या हो तो भी विवाह की शुरुआत सैक्सलैस नहीं होती, लेकिन बाद में हो जाती है. शुरुआत में अपनी यौन क्षमता को ले कर पुरुषों में विशेष घबराहट होती है. उन्हें डर रहता है कि वे अपने साथी को संतुष्ट कर पाएंगे या नहीं और यह डर इतना ज्यादा होता है कि वे अपनी यौन क्रिया को सही अंजाम नहीं दे पाते. शुरुआत में जोड़े सैक्स तथा अपने संबंधों को अच्छा बताते हैं, लेकिन समय के साथ प्यार तो बढ़ता है, परंतु विवाह सैक्सलैस हो जाता है.

तनाव से डिप्रेशन बढ़ता है, जिस से सैक्सुल इच्छा घटती है व प्रदर्शन ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है. तीसरा कारण है पोर्नोग्राफी. यह लोगों की कल्पनाओं को रंग देती है, जिस से वे जो रील में देखते हैं वैसा ही रियल में करने की कोशिश करते हैं.

क्या सैक्सलैस विवाह वाले जोड़े कम खुश रहते हैं?

भले ही रिश्ता अच्छा हो, परंतु सैक्सहीन विवाहित जोड़े नाखुश रहते हैं, क्योंकि सैक्स प्यार व आत्मीयता का जरूरी हिस्सा है. इस विवाह को कोई एक साथी इच्छाहीन व बेकार महसूस करता है.

क्या सैक्स को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है?

हां. बस पहले यह जानने की जरूरत है कि समस्या कहां है? क्या यह समस्या बाह्य है जैसे तनाव, पारिवारिक माहौल आदि. इस बारे में खुल कर बात करें व बिना साथी की इच्छा से कोई फैसला न करें ताकि दूसरा साथी बुरा न महसूस करे. काम का तनाव घटा कर एकदूसरे के साथ ज्यादा समय बिताएं, आपसी विवाद सुलझाएं, यौन क्रियाओं को बढ़ाएं, एकदूसरे की जरूरतों को समझें व इच्छापूर्ति की कल्पना करें, साथी को आराम दें, उसे उत्साहित करें. मनोवैज्ञानिक से सलाह भी ले सकते हैं.

क्या सैक्सहीन विवाह वाले तलाक की ओर बढ़ रहे हैं?

हां, ऐसा हो रहा है, क्योंकि एक साथी अपनेआप को उत्तेजित महसूस करने लगता है या वह महसूस करने लगता है कि उसे धोखा दिया जा रहा है. इसलिए वह भी सैक्स का विकल्प बाहर खोजने लगता है, जिस से बंधेबंधाए रिश्ते में समस्या आने लगती है.

यौन संतुष्टि दर में कमी

भारत में हुए सैक्स सर्वे दर्शाते हैं कि पिछले दशक में यौन संतुष्टि की दर मात्र 29% रह गई. सैक्स से बचने के लिए पत्नियों की पुरानी आदत है कि आज नहीं हनी. आज मुझे सिरदर्द है. 50% पुरुष भी अपनी पत्नी से सैक्स न करने के लिए सिरदर्द का झूठा बहाना बनाते हैं. 43% पति मानते हैं कि उन की आदर्श बिस्तर साथी उन की पत्नी नहीं है. 33% के करीब पत्नियां मानती हैं कि विवाह के कुछ सालों बाद सैक्स अनावश्यक हो जाता है. 14% स्त्रीपुरुषों को नहीं पता कि वे बैडरूम में किस चीज से उत्तेजित होते हैं जबकि 18% के पास कोई जवाब नहीं है कि वे सैक्स के बाद भी संतुष्ट हुए हैं. 60% जोड़े यौन आसन के बारे में कल्पना करते हैं. फिर भी आधे से ज्यादा जोड़े नए आसन के बजाय नियमित आसन ही अपनाते हैं. 39% जोड़े ही यौन संतुष्टि पाते हैं.

क्लासी है मौनी रॉय का रेस्टोरेंट, इतनी स्टाइलिश फोटोज हो रही है वायरल

टीवी सीरियल की जानी-मानी एक्ट्रेस मौनी रॉय अक्सर ही अपने फैशन स्टाइल के लिए जानी जाती है. हाल ही में वो अपने मुंबई के रेस्टोरेंट को लेकर सुर्खियों में है. मौनी रॉय ने मुंबई में रेस्टोरेंट ‘बदमाश’ नाम से खोला है. जिसकी तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. जो कि काफी क्लासी और खूबसूरत तस्वीरें है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by mon (@imouniroy)

मौनी रॉय ने कुछ दिनों पहले ही अपने नए रेस्टोरेंट चेन के लिए एक ग्रैंड पार्टी दी थी. अब एक्ट्रेस के इस नए रेस्टोरेंट चेन की फोटोज फैंस के बीच वायरल हो रही हैं. एक्ट्रेस मौनी रॉय ने अपने नए रेस्टोरेंट चेन की फोटोज फैंस को सोशल मीडिया पर शेयर की है. तस्वीरों में एक्ट्रेस मौनी रॉय फैंस को रेस्टोरेंट खुलने की जानकारी दे रही हैं. मौनी रॉय ने इन तस्वीरों को शेयर कर घर के अंदर की खूबसूरत तस्वीरें फैंस को दिखाई है. जिसकी फोटोज आते ही फैंस का दिल जीत ले गईं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by mon (@imouniroy)


एक्ट्रेस मौनी रॉय ने फोटोज में फैंस को दिखाया है कि उनके क्लासी रेस्टोरेंट का मेन्यू बेहद दिलचस्प है. ये तस्वीरें खुद बयां करती हैं कि यहां का खाना काफी स्वादिष्ट होगा. मौनी रॉय की ये तस्वीरें बयां करती हैं कि एक्ट्रेस के नए रेस्टोरेंट की चेन जंगल थीम से बनी है. जो काफी क्लासी लुक देता है. एक्ट्रेस मौनी रॉय का रेस्टोरेंट बेहद कलरफुल है. इस बात की गवाही सामने आईं ये तस्वीरें देती है.मौनी रॉय की ये तस्वीरें आते ही वायरल होने लगीं. मौनी रॉय की ये तस्वीरें बताती हैं कि उन्होंने रेस्टोरेंट चेन के लिए इंटीरियर का खास ध्यान रखा है. ये एक्ट्रेस की तस्वीरें आते ही छा गईं.

मौनी रॉय के रेस्टोरेंट का नजारा कुछ इस तरह का है. जो बेहद रॉयल लुक लिए हुए है. मौनी रॉय के रेस्टोरेंट की फोटोज फैंस का ध्यान खींच ले गईं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मौनी रॉय के मुंबई में 2 रेस्टोरेंट्स चेन्स हैं. जिसकी तस्वीरें अक्सर एक्ट्रेस सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करती रहती हैं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें