Crime Story- रसूखदारों की घिनौनी कहानी: भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

रामबिहारी का घर में एक स्पैशल रूम था. इस रूम में उस ने 5 सीसीटीवी कैमरे लगवा रखे थे. घर के बाहर भी कैमरा लगा था. कमरे में लैपटाप, डीवीआर व हार्ड डिस्क भी थी. आनेजाने वालों की हर तसवीर कैद होती थी. हनक बनाए रखने के लिए उस ने कार खरीद ली थी और लाइसैंसी पिस्टल भी ले ली थी. रामबिहारी अवैध कमाई के लिए अपने घर पर जुआ की फड़ भी चलाता था. उस के घर पर छोटामोटा नहीं, लाखों का जुआ होता था. खेलने वाले कोंच से ही नहीं, उरई, कालपी और बांदा तक से आते थे. जुए के खेल में वह अपनी ही मनमानी चलाता था.

जुआ खेलने वाला व्यक्ति अगर जीत गया तो वह उसे तब तक नहीं जाने देता था, जब तक वह हार न जाए. इसी तिकड़म में उस ने सैकड़ों को फंसाया और लाखों रुपए कमाए. इस में से कुछ रकम वह नेता, पुलिस, गुंडा गठजोड़ पर खर्च करता ताकि धंधा चलता रहे.

रामबिहारी राठौर जाल बुनने में महारथी था. वह अधिकारियों, कर्मचारियों एवं सामान्य लोगों के सामने अपने रसूख का प्रदर्शन कर के उन्हें दबाव में लेने की कोशिश करता था. बातों का ऐसा जाल बुनता था कि लोग फंस जाते थे. हर दल के नेताओं के बीच उस की घुसपैठ थी. उस के रसूख के आगे पुलिस तंत्र भी नतमस्तक था. किसी पर भी मुकदमा दर्ज करा देना, उस के लिए बेहद आसान था.

रामबिहारी राठौर बेहद अय्याश था. वह गरीब परिवार की महिलाओं, युवतियों, किशोरियों को तो अपनी हवस का शिकार बनाता ही था, मासूम बच्चों के साथ भी दुष्कर्म करता था. वह 8 से 14 साल की उम्र के बच्चों को अपने जाल में फंसाता था.

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बच्चे को रुपयों का लालच दे कर घर बुलाता फिर कोेल्ड ड्रिंक में नशीला पाउडर मिला कर पीने को देता. बच्चा जब बेहोश हो जाता तो उस के साथ दुष्कर्म करता. दुष्कर्म के दौरान वह उस का वीडियो बना लेता.

कोई बच्चा एक बार उस के जाल में फंस जाता, तो वह उसे बारबार बुलाता. इनकार करने पर अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देता, जिस से वह डर जाता और बुलाने पर आने को मजबूर हो जाता. वह जिस बच्चे को जाल में फंसा लेता, उसे वह दूसरे बच्चे को लाने के लिए कहता. इस तरह उस ने कई दरजन बच्चे अपने जाल में फंसा रखे थे, जिन के साथ वह दरिंदगी का खेल खेलता था. अय्याश रामबिहारी सैक्सवर्धक दवाओं का सेवन करता था. वह किसी बाहरी व्यक्ति को अपने कमरे में नहीं आने देता था.

रामबिहारी राठौर के घर सुबह से देर शाम तक कम उम्र के बच्चों का आनाजाना लगा रहता था. उस के कुकृत्यों का आभास आसपड़ोस के लोगों को भी था. लेकिन लोग उस के बारे में कुछ कहने से सहमते थे. कभी किसी ने अंगुली उठाई तो उस ने अपने रसूख से उन लोगों के मुंह बंद करा दिए. किसी के खिलाफ थाने में झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी तो किसी को दबंगों से धमकवा दिया. बाद में उस की मदद का ड्रामा कर के उस का दिल जीत लिया.

लेकिन कहते हैं, गलत काम का घड़ा तो एक न एक दिन फूटता ही है. वही रामबिहारी के साथ भी हुआ. दरअसल रामबिहारी ने मोहल्ला भगत सिंह नगर के 2 लड़कों राजकुमार व बालकिशन को अपने जाल में फंसा रखा था और पिछले कई साल से वह उन के साथ दरिंदगी का खेल खेल रहा था.

इधर रामबिहारी की नजर उन दोनों की नाबालिग बहनों पर पड़ी तो वह उन्हें लाने को मजबूर करने लगा. यह बात उन दोनों को नागवार लगी और उन्होंने साफ मना कर दिया. इस पर रामबिहारी ने उन दोनों के अश्लील वीडियो वायरल करने तथा उन्हें जेल भिजवाने की धमकी दी.

रामबिहारी की धमकी से डर कर राजकुमार व बालकिशन प्रजापति मोहल्ले के 2 दबंगों के पास पहुंच गए और रामबिहारी के कुकृत्यों का चिट्ठा खोल दिया. उन दबंगों ने उन दोनों बच्चों को मदद का आश्वासन दिया और रामबिहारी को ब्लैकमेल करने की योजना बनाई.

योजना के तहत दबंगों ने राजकुमार व बालकिशन की मार्फत रामबिहारी के घर में चोरी करा दी. उस के बाद दबंगों ने रामबिहारी से 15 लाख रुपयों की मांग की. भेद खुलने के भय से रामबिहारी उन्हें 5 लाख रुपए देने को राजी भी हो गया. लेकिन पैसों के बंटवारे को ले कर दबंगों व पीडि़तों के बीच झगड़ा हो गया.

इस का फायदा उठा कर रामबिहारी थाने पहुंच गया और चोरी करने वाले दोनों लड़कों के खिलाफ तहरीर दे दी. तहरीर मिलते ही कोंच पुलिस ने चोरी गए सामान सहित उन दोनों लड़कों को पकड़ लिया. पुलिस ने जब पकड़े गए राजकुमार व बालकिशन से पूछताछ की तो रामबिहारी राठौर के घिनौने सच का परदाफाश हो गया.

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पुलिस जांच में लगभग 300 अश्लील वीडियोे सामने आए हैं और लगभग 50 बच्चों के साथ उस ने दुष्कर्म किया था. जांच से यह भी पता चला कि रामबिहारी पोर्न फिल्मों का व्यापारी नहीं है. न ही उस के किसी पोर्न फिल्म निर्माता से संबंध हैं. रामबिहारी का कनेक्शन बांदा के जेई रामभवन से भी नहीं था. 13 जनवरी, 2021 को पुलिस ने अभियुक्त रामबिहारी राठौर को जालौन की उरई स्थित कोर्ट में मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रोंं पर आधारित

आज का इंसान: भाग 3

‘‘ ‘नमस्ते सर,’ दोनों हाथ जोड़ कर उस ने मेरा अभिवादन किया. चेहरे पर कोई भी भाव ऐसा नहीं जिस से शर्म का एहसास महसूस हो. मैं कभी अपनी पत्नी का मुंह देख रहा था और कभी उस का. गृहस्थी की दहलीज पार कर के जा चुका इंसान क्या इस लायक है कि उसे मैं अपने घर के अंदर आने दूं और पानी का घूंट भी पिलाऊं.

‘‘ ‘सुनयना यहां है क्या? घर पर है नहीं न…घर की चाबियां हों तो दे दीजिए… मैं ने फोन कर के उसे बता दिया था…मां को साथ लाया हूं…वह बाहर गाड़ी में हैं. कहां गई है वह? क्या मार्केट तक गई है?’

‘‘इतने ढेर सारे सवाल एकसाथ… उस के हावभाव तो इस तरह के थे मानो पिछले 3-4 महीने में कहीं कुछ हुआ ही नहीं है. पल भर को मेरा माथा ठनका. गिरीश के चेहरे का आत्मविश्वास और अधिकार से परिपूर्ण आवाज कहीं से भी यह नहीं दर्शा रही, जिस का उल्लेख सुनयना रोरो कर करती रही थी. उठ कर मैं बाहर चला आया. सचमुच गाड़ी में उस की बीमार मां थी.

‘‘ ‘वह तो अपने भाई के घर गई है और घर की चाबियां उस ने हमें दीं नहीं… आइए, अंदर आ जाइए.’

‘‘ ‘नहीं सर, मुझे तो मां को सीधे अस्पताल ले जाना है. कितनी लापरवाह है यह लड़की, जिम्मेदारी का जरा सा भी एहसास नहीं,’ भन्नाता हुआ गिरीश चला गया.

‘जिम्मेदारी का एहसास क्या सिर्फ सुनयना के लिए? तब यह एहसास कहां था जब वह अपने बच्चे का दर्द सह रही थी.’ मैं ने सोचा फिर सहसा लगा, नहीं, कहीं मैं ही तो बेवकूफ नहीं बन गया इस लड़की के हाथों. हम तो उसी नजर से गिरीश को देख रहे हैं न जिस नजर से सुनयना हमें देखना सिखा रही है. सच क्या है शायद हम पतिपत्नी आज भी नहीं जानते.

‘‘ ‘दिमाग हिल गया है मेरा,’ मेरी पत्नी ने अपना फैसला सुना दिया, ‘मुझे तो लग रहा है कि जो कहानी सुनयना हमें सुनाती रही है वह कोरी बकवास है. 4 महीने में उस ने हमें कोई भनक ही नहीं लगने दी और क्याक्या करती रही. क्या गारंटी है सच ही बोल रही है. आज के बाद इस लड़की से मेलजोल समाप्त. हम इस दलदल में न ही पड़ें तो अच्छा है.’

‘‘जिम्मेदारी का एहसास गिरीश को न होता तो क्या बीमार मां को ढो कर उस शहर से इस शहर में लाता. सुनयना के घर से कुछ लूटपाट कर ही ले जाना होता तो क्या उस के घर का ताला न तोड़ देता. आखिर वह मालिक था.

‘‘दूसरी सुबह मैं अस्पताल उस पते पर गया जहां गिरीश गया था. बीमार मां की बगल में चुपचाप बैठा था वह. हिम्मत कर के मैं ने इतना ही पूछा, ‘4 महीने हो गए गिरीश, तुम एक बार भी नहीं आए. सुनयना बीमार थी…तुम ने एक बार हम से भी बात नहीं की.’

‘‘ ‘आप भी तो यहां नहीं थे न. आप का भाई बीमार था, आप 4 महीने से अपने घर बरेली चले गए थे. मैं किस से बात करता और सुनयना बीमार है मुझे तो नहीं पता. मैं तो तब से बस, मां के साथ हूं, नौकरी भी नहीं बची मेरी. सुनयना मां को यहां लाने को मान जाती तो इतनी समस्या ही न होती. अब क्या मांबाप को मैं सड़क पर फेंक दूं या जिंदा ही जला आऊं श्मशान में. क्या करूं मैं…आप ही बताइए?

‘‘ ‘इस लड़की से शादी कर के मैं तो कहीं का नहीं रहा. 4 साल से भोग रहा हूं इसे. किसी तरह वह जीने दे मगर नहीं. न जीती है न जीने देती है.’

‘‘ ‘घर आ कर पत्नी को बताया तो वह भी अवाक्.’’

‘‘ ‘हमारा कौन सा भाई बीमार था बरेली में…हम 4 महीने से कहीं भी नहीं गए…यह कैसी बात सुना रहे हैं आप.’

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‘‘जमीन निकल गई मेरे पैरों के नीचे से. लगता है हम अच्छी तरह ठग लिए गए हैं. हमारे दुलार का अच्छा दुरुपयोग किया इस लड़की ने. अपने ही चरित्र की कालिख शायद सजासंवार कर अपने पति के मुंह पर पोतती रही. हो सकता है गर्भपात की दवा खा कर बच्चे को खुद ही मार डाला हो और हर रोज नई कहानी गढ़ कर एक आवरण भी डालती रही और हमारी हमदर्दी भी लेती रही. सुरक्षा कवच तो थे ही हम उस के लिए.

‘‘अपना हाथ खींच लिया हम दोनों ने और उस पर देखो, उस ने हम से बात भी करना जरूरी नहीं समझा. आफिस में भी बात कर के इतना नहीं पूछती कि हम दोनों उस से बात क्यों नहीं करते. गिरीश आया था और हम उस से मिले थे उस के बारे में जब पता चल गया तब से वह तो पूरी तरह अनजान हो गई हम से.’’

विजय सारी कथा सुना कर मौन हो गया और मैं सोचने लगा, वास्तव में इंसान जब बड़ा चालाक बन कर यह सोचता है कि उस ने सामने वाले को बेवकूफ बना लिया है तो वह कितने बड़े भुलावे में होता है. अपने ही घर का, अपनी ही गृहस्थी का तमाशा बना कर गिरीश और सुनयना ने भला विजय का क्या बिगाड़ लिया. अपना ही घर किस ने जलाया मैं भी समझ नहीं पाया.

गिरीश सच्चा है या सुनयना कौन जाने मगर यह एक अटूट सत्य है कि हमेशाहमेशा के लिए विजय का विश्वास उन दोनों पर से उठ गया. कभी सुनयना पर भरोसा नहीं किया जा सकता और कोई क्यों किसी पर भरोसा करे. हम समाज में हिलमिल कर इसीलिए रहते हैं न कि कोई हमारा बने और हम किसी के बनें. हम सामाजिक प्राणी हैं और हमें हर पल किसी दूसरे इंसान की जरूरत पड़ती है.

कभी किसी का सुखदुख हमारे चेतन को छू जाता है तो हम उस की पीड़ा कम करने का प्रयास करते हैं और करना ही चाहिए, क्योंकि यही एक इंसान होने का प्रमाण भी है. किसी की निस्वार्थ सेवा कर देना हमारे गले का फंदा तो नहीं बन जाना चाहिए न कि हमारी ही सांस घुट जाए. तकलीफ तो होगी ही न जब कोई हमारे सरल स्वभाव का इस्तेमाल अपनी जरूरत के अनुसार तोड़मोड़ कर करेगा.

खट्टी सी, खोखली मुसकान चली आई मेरे भी होंठों पर. विजय की पारखी आंखों में एक हारी हुई सी भावना नजर आ रही थी मुझे. पुन: पूछा उस ने, ‘‘है न कितना मुश्किल किसी को पहचान पाना आजकल? आज का इंसान वास्तव में क्या अभिनेता नहीं बनता जा रहा?’’

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आज का इंसान: भाग 2

‘‘खाली जेब मांबाप की सेवा कैसे करेगा? क्या उन्हें समझ में नहीं आता. 3 महीने होने को आए क्या नौकरी अभी तक बच रही होगी जो वह…

‘‘सुनयना का रोनाधोना चलता रहा और इसी बीच उस का अविकसित गर्भ चलता बना. पूरा दिन मेरी पत्नी उस के साथ अस्पताल में रही. इतना सब हो गया पर उस का पति नहीं आया. किंकर्तव्य- विमूढ़ होते जा रहे थे हम.

‘‘ ‘क्या तुम दोनों में सब ठीक चल रहा है? कैसा इंसान है वह जिसे न अपने बच्चे की परवाह है न पत्नी की.’ एक दिन मैं ने पूछ लिया.

‘‘हैरानपरेशान थे हम. 2-3 दिन सुनयना हमारे ही घर पर रही. उस के बाद अपने घर चली गई. यह कहानी क्या कहानी है हम समझ पाते इस से पहले एक दिन सुनयना ने हमें बताया कि वह हम से इतने दिन तक झूठ बोलती रही. दरअसल, उस का पति किसी और लड़की के साथ भाग गया है और उस के मातापिता भी इस कुकर्म में उस के साथ हैं.

‘‘हम पतिपत्नी तो जैसे आसमान से नीचे गिरे. सुनयना के अनुसार उस के मायके वाले अब पुलिस केस बनाने की सोच रहे हैं. जिस लड़की के साथ गिरीश भागा है वे भी पूरा जोर लगा रहे हैं कि गिरीश पकड़ा जाए और उसे सजा हो. हक्केबक्के रह गए हम. हैरानी हुई इस लड़की पर. बाहरबाहर क्या होता रहा इस के साथ और भीतर यह हमें क्या कहानी सुनाती रही.

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‘‘सुनयना का कहना है कि वह शर्म के मारे हमें सच नहीं बता पाई.

‘‘  ‘अब तुम क्या करोगी…ऐसा आदमी जो तुम्हें बीच रास्ते में छोड़ कर चला गया, क्या उसे साथ रखना चाहोगी?’

‘‘ ‘महिला सेल में भी मेरे भाई ने रिपोर्ट दर्ज करवा रखी है. बस, मेरा ही इंतजार है. जैसे ही केस रजिस्टर हो जाएगा वह और उस के मातापिता 7 साल के लिए अंदर हो जाएंगे. वकील भी कर लिया है हम ने.’

‘‘ ‘परेशान हो गए थे हम.

‘‘ ‘तुम नौकरी करोगी या अदालतों और वकीलों के पास धक्के खाओगी. रुपयापैसा है क्या तुम्हारे पास?’

‘‘ ‘रुपयापैसा तो पहले ही गिरीश निकाल ले गए. लौकर भी खाली कर चुके हैं. मेरे नाम तो बस 1 लाख रुपए हैं.’

‘‘मैं सोचने लगा कि अच्छा हुआ जो बच्चा चल बसा. ऐसे पिता की संतान का क्या भविष्य हो सकता था. यह अकेली लड़की बच्चे को पालती या नौकरी करती.

‘‘ ‘गिरीश को सजा हो जाएगी तो उस के बाद क्या क रोगी. क्या तलाक ले कर दूसरी शादी करोगी? भविष्य के बारे में क्या सोचा है?’

‘‘ ‘मेरी बूआ कनाडा में रहती हैं, उन्होंने बुला भेजा है. मैं ने पासपोर्ट के लिए प्रार्थनापत्र भी दे दिया है.’

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‘‘मेरी पत्नी अवाक् थीं. यह लड़की पिछले 3-4 महीने से क्याक्या कर रही है हमें तो कुछ भी खबर नहीं. सेवा, देखभाल करने को हम दोनों और वह सब छिपाती रही मुझ से और मेरी पत्नी से भी. इतना बड़ा दिल और गुर्दा इस लड़की का जो अपने टूटे घर का सारा संताप पी गई.

‘‘मुझे कुछ ठीक नहीं लगा था. इस लड़की के बारे में. ऐसा लग रहा है कि सच हम आज भी नहीं जानते हैं. यह लड़की हमें आज भी सब सच ही बता रही होगी विश्वास नहीं हो रहा मुझे. वास्तव में सच क्या होगा कौन जाने.

‘‘बड़बड़ा रही थीं मेरी पत्नी कि कोई बखेड़ा तो हमारे गले नहीं पड़ जाएगा? कहीं यह लड़की हमें इस्तेमाल ही तो नहीं करती रही इतने दिन. इस से सतर्क हो जाना चाहते थे हम. एक दिन पूछने लगी, ‘आप ही बताइए न, मैं क्या करूं. गिरीश अब पछता रहे हैं. वापस आना चाहते हैं. उन्हें सजा दिलाऊं या माफ कर दूं.’

‘‘ ‘इस तरह की लड़ाई में जीत तो बेटा किसी की नहीं होती. लड़ने के लिए ताकत और रुपयापैसा तुम्हारे पास है नहीं. मांबाप भी जिंदा नहीं हैं जो बिठा कर खिलाएंगे. भाईभाभी कब तक साथ देंगे? और अगर इस लड़ाई में तुम जीत भी गईं तो भी हाथ कुछ नहीं आने वाला.’

‘‘ ‘गिरीश को स्वीकार भी तो नहीं किया जा सकता.’

‘‘ ‘मत करो स्वीकार. कौन कह रहा है कि तुम उसे स्वीकार करो पर लड़ने से भी मुंह मोड़ लो. उस के हाल पर छोड़ दो उसे. दूसरी शादी कर के घर बसाना आसान नहीं है. डाल से टूट चुकी हो तुम…अब कैसे संभलना है यह तुम्हें सोचना है. अदालतों में तो अच्छाखासा तमाशा होगा, अगर सुलहसफाई से अलग हो जाओ तो…’

‘‘ ‘मगर वह तो तलाक देने को नहीं मान रहा न. वह साथ रहना चाहता है और अब मैं साथ रहना नहीं चाहती. धमकी दे रहा है मुझे. घर की एक चाबी तो उस के पास भी है न, अगर मेरे पीछे से आ कर सारा सामान भी ले गया तो मैं क्या कर लूंगी.’

‘‘ ‘इस महल्ले के सभी लोग जानते हैं कि वह तुम्हारा पति है. कोई क्यों रोकेगा उसे, ऐसा है तो तुम घर के ताले ही बदल डालो फिर कैसे आएगा.’

‘‘ताले बदलवा लिए सुनयना ने. 2 छुट्टियां आईं और सुनयना अपने भाई के घर चली गई. रात 8 बजे के करीब अपने दरवाजे पर गिरीश को देख हम हैरान रह गए. एक चरित्रहीन…अपनी पत्नी को बीच रास्ते छोड़ देने वाला इंसान मेरे दरवाजे पर खड़ा था.

Crime Story- रसूखदारों की घिनौनी कहानी: भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

इस सच को जानने के लिए रामबिहारी को गिरफ्तार करना आवश्यक था. लेकिन रामबिहारी को गिरफ्तार करना आसान नहीं था. क्योंकि वह सत्ता पक्ष का नेता था और सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं से उस के ताल्लुकात थे. उस की गिरफ्तारी से बवाल भी हो सकता था. अत: इंसपेक्टर खान ने इस प्रकरण की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी.

सूचना पाते ही एसपी डा. यशवीर सिंह, एएसपी डा. अवधेश कुमार, डीएसपी (कोंच) राहुल पांडेय तथा क्राइम ब्रांच प्रभारी उदयभान गौतम कोतवाली कोंच आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने दोनों युवकों राजकुमार तथा बालकिशन से घंटों पूछताछ की फिर सफेदपोश नेता को गिरफ्तार करने के लिए डा. यशवीर सिंह ने डीएसपी राहुल पांडेय की निगरानी में एक पुलिस टीम का गठन कर दिया तथा कोंच कस्बे में पुलिस बल तैनात कर दिया.

12 जनवरी, 2021 की रात 10 बजे पुलिस टीम रामबिहारी के भगत सिंह नगर मोहल्ला स्थित घर पर पहुंची. लेकिन वह घर से फरार था. इस बीच पुलिस टीम को पता चला कि रामबिहारी पंचानन चौराहे पर मौजूद है. इस जानकारी पर पुलिस टीम वहां पहुंची और रामबिहारी को नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया.

उसे कोतवाली कोंच लाया गया. इस के बाद पुलिस टीम रात में ही रामबिहारी के घर पहुंची और पूरे घर की सघन तलाशी ली. तलाशी में उस के घर से लैपटाप, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन, डीवीआर, एक्सटर्नल हार्ड डिस्क तथा नशीला पाउडर व गोलियां बरामद कीं. थाने में रामबिहारी से कई घंटे पूछताछ की गई.

रामबिहारी राठौर के घर से बरामद लैपटाप, पेन ड्राइव, मोबाइल, डीवीआर तथा हार्ड डिस्क की जांच साइबर एक्सपर्ट टीम तथा झांसी की फोरैंसिक टीम को सौंपी गई. टीम ने झांसी रेंज के आईजी सुभाष सिंह बघेल की निगरानी में जांच शुरू की तो चौंकाने वाली जानकारी मिली. फोरैंसिक टीम के प्रभारी शिवशंकर ने पेन ड्राइव व हार्ड डिस्क से 50 से अधिक पोर्न वीडियो निकाले. उन का अनुमान है कि हार्ड डिस्क में 25 जीबी अश्लील डाटा है.

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इधर पुलिस टीम ने लगभग 50 बच्चों को खोज निकाला, जिन के साथ रामबिहारी ने दरिंदगी की औरउन के बचपन के साथ खिलवाड़ किया. इन में 36 बच्चे तो सामने आए, लेकिन बाकी बच्चे शर्म की वजह से सामने नहीं आए. 36 बच्चों में से 18 बच्चों ने ही बयान दर्ज कराए. जबकि 3 बच्चों ने बाकायदा रामबिहारी के विरुद्ध लिखित शिकायत दी.

इन बच्चों की तहरीर पर थानाप्रभारी इमरान खान ने भादंवि की धारा 328/377/506 तथा पोक्सो एक्ट की धारा (3), (4) एवं आईटी एक्ट की धारा 67ख के तहत रामबिहारी राठौर के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उसे न्यायसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

भाजपा नेता रामबिहारी के घिनौने सच का परदाफाश हुआ तो कोंच कस्बे में सनसनी फैल गई. लोग तरहतरह की चर्चाएं करने लगे. किरकिरी से बचने के लिए नगर अध्यक्ष सुनील लोहिया ने बयान जारी कर दिया कि भाजपा का रामबिहारी से कोई लेनादेना नहीं है. रामबिहारी ने पिछले महीने ही अपने पद व प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसे मंजूर कर लिया गया था.

इधर सेवानिवृत्त कानूनगो एवं उस की घिनौनी करतूतों की खबर अखबारों में छपी तो कोंच कस्बे में लोगों का गुस्सा फट पड़ा. महिलाओं और पुरुषों ने रामबिहारी का घर घेर लिया और इस हैवान को फांसी दो के नारे लगाने लगे. भीड़ रामबिहारी का घर तोड़ने व फूंकने पर आमादा हो गई. कुछ लोग उस के घर की छत पर भी चढ़ गए. लेकिन पुलिस ने किसी तरह घेरा बना कर भीड़ को रोका और समझाबुझा कर शांत किया.

कुछ महिलाएं व पुरुष कोतवाली पहुंच गए. उन्होंने रामबिहारी को उन के हवाले करने की मांग की. दरअसल, वे महिलाएं हाथ में स्याही लिए थीं, वे रामबिहारी का मुंह काला करना चाहती थीं. लेकिन एसपी डा. यशवीर सिंह ने उन्हें समझाया कि अपराधी अब पुलिस कस्टडी में है. अत: कानून का उल्लंघन न करें. कानून खुद उसे सजा देगा. महिलाओं ने एसपी की बात मान ली और वे थाने से चली गईं.

रामबिहारी राठौर कौन था? वह रसूखदार सफेदपोश नेता कैसे बना? फिर इंसान से हैवान क्यों बन गया? यह सब जानने के लिए हमें उस के अतीत की ओर झांकना होगा.

जालौन जिले का एक कस्बा है-कोंच. तहसील होने के कारण कोंच कस्बे में हर रोज चहलपहल रहती है. इसी कस्बे के मोहल्ला भगत सिंह नगर में रामबिहारी राठौर अपनी पत्नी उषा के साथ रहता था. रामबिहारी का अपना पुश्तैनी मकान था, जिस के एक भाग में वह स्वयं रहता था, जबकि दूसरे भाग में उस का छोटा भाई श्यामबिहारी अपनी पत्नी व बच्चों के साथ रहता था.

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रामबिहारी पढ़ालिखा व्यक्ति था. वर्ष 1982 में उस का चयन लेखपाल के पद पर हुआ था. कोंच तहसील में ही वह कार्यरत था. रामबिहारी महत्त्वाकांक्षी था. धन कमाना ही उस का मकसद था. चूंकि वह लेखपाल था, सो उस की कमाई अच्छी थी. लेकिन संतानहीन था. उस ने पत्नी उषा का इलाज तो कराया लेकिन वह बाप न बन सका.

उषा संतानहीन थी, सो रामबिहारी का मन उस से उचट गया और वह पराई औरतों में दिलचस्पी लेने लगा. उस के पास गरीब परिवारों की महिलाएं राशन कार्ड बनवाने व अन्य आर्थिक मदद हेतु आती थीं. ऐसी महिलाओं का वह मदद के नाम पर शारीरिक शोषण करता था. वर्ष 2005 में एक महिला ने सब से पहले उस के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया. लेकिन रामबिहारी ने उस के घरवालों पर दबाव बना कर मामला रफादफा कर लिया.

कोंच तहसील के गांव कुंवरपुरा की कुछ महिलाओं ने भी उस के खिलाफ यौनशोषण की शिकायत तहसील अफसरों से की थी. तब रामबिहारी ने अफसरों से हाथ जोड़ कर तथा माफी मांग कर लीपापोती कर ली. सन 2017 में रामबिहारी को रिटायर होना था. लेकिन रिटायर होने के पूर्व उस की तरक्की हो गई. वह लेखपाल से कानूनगो बना दिया गया. फिर कानूनगो पद से ही वह रिटायर हुआ. रिटायर होने के बाद वह राजनीति में सक्रिय हो गया. उस ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली.

कुछ समय बाद ही उसे कोंच का भाजपा नगर उपाध्यक्ष बना दिया गया. रामबिहारी तेजतर्रार था. उस ने जल्द ही शासनप्रशासन में पकड़ बना ली. उस ने घर पर कार्यालय बना लिया और उपाध्यक्ष का बोर्ड लगा लिया. नेतागिरी की आड़ में वह जायजनाजायज काम करने लगा. वह कोंच का रसूखदार सफेदपोश नेता बन गया.

अगले भाग में पढ़ें- रामबिहारी राठौर के घिनौने सच का परदाफाश हो गया

Crime Story- रसूखदारों की घिनौनी कहानी: भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

रिटायर्ड कानूनगो  और नेता रामबिहारी राठौर अय्याश प्रवृत्ति का था. वह नाबालिग बच्चों के साथ न सिर्फ कुकर्म करता था बल्कि वीडियो भी बना लेता था. फिर एक दिन ऐसा हुआ कि…

10जनवरी, 2021 की सुबह 9 बजे रिटायर्ड कानूनगो रामबिहारी राठौर कोतवाली कोंच पहुंचा. उस समय कोतवाल इमरान खान कोतवाली में मौजूद थे. चूंकि इमरान खान रामबिहारी से अच्छी तरह परिचित थे. इसलिए उन्होंने उसे ससम्मान कुरसी पर बैठने का इशारा किया. फिर पूछा, ‘‘कानूनगो साहब, सुबहसुबह कैसे आना हुआ? कोई जरूरी काम है?’’

‘‘हां सर, जरूरी काम है, तभी थाने आया हूं.’’ रामबिहारी राठौर ने जवाब दिया.

‘‘तो फिर बताओ, क्या जरूरी काम है?’’ श्री खान ने पूछा.

‘‘सर, हमारे घर में चोरी हो गई है. चोर एक पेन ड्राइव और एक हार्ड डिस्क ले गए हैं. हार्ड डिस्क के कवर में 20 हजार रुपए भी थे. वह भी चोर ले गए हैं.’’ रामबिहारी ने जानकारी दी.

‘‘तुम्हारे घर किस ने चोरी की. क्या किसी पर कोई शक वगैरह है?’’ इंसपेक्टर खान ने पूछा.

‘‘हां सर, शक नहीं बल्कि मैं उन्हें अच्छी तरह जानतापहचानता हूं. वैसे भी चोरी करते समय उन की सारी करतूत कमरे में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद है. आप चल कर फुटेज में देख लीजिए.’’

‘‘कानूनगो साहब, जब आप चोरी करने वालों को अच्छी तरह से जानतेपहचानते हैं और सबूत के तौर पर आप के पास फुटेज भी है, तो आप उन का नामपता बताइए. हम उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लेंगे और चोरी गया सामान भी बरामद कर लेंगे.’’

‘‘सर, उन का नाम राजकुमार प्रजापति तथा बालकिशन प्रजापति है. दोनों युवक कोंच शहर के मोहल्ला भगत सिंह नगर में रहते हैं. दोनों को कुछ दबंगों का संरक्षण प्राप्त है.’’ रामबिहारी ने बताया.

चूंकि रामबिहारी राठौर  कानूनगो तथा वर्तमान में कोंच नगर का भाजपा उपाध्यक्ष था, अत: इंसपेक्टर इमरान खान ने रामबिहारी से तहरीर ले कर तुरंत काररवाई शुरू कर दी. उन्होंने देर रात राजकुमार व बालकिशन के घरों पर दबिश दी और दोनों को हिरासत में ले लिया. उन के घर से पुलिस ने पेन ड्राइव व हार्ड डिस्क भी बरामद कर ली. रामबिहारी के अनुरोध पर पुलिस ने उस की पेन ड्राइव व हार्ड डिस्क वापस कर दी.

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पुलिस ने दोनों युवकों के पास से पेन ड्राइव व हार्ड डिस्क तो बरामद कर ली, लेकिन 20 हजार रुपया बरामद नहीं हुए थे. इंसपेक्टर खान ने राजकुमार व बालकिशन से रुपयों के संबंध में कड़ाई से पूछा तो उन्होंने बताया कि रुपया नहीं था. कानूनगो रुपयों की बाबत झूठ बोल रहा है. वह बड़ा ही धूर्त इंसान है.

इंसपेक्टर इमरान खान ने जब चोरी के बाबत पूछताछ शुरू की तो दोनों युवक फफक पड़े. उन्होंने सिसकते हुए अपना दर्द बयां किया तो थानाप्रभारी के आश्चर्य का ठिकाना न रहा. दोनों ने बताया कि रामबिहारी इंसान नहीं बल्कि हैवान है. वह मासूमों को अपने जाल में फंसाता है और फिर उन के साथ कुकर्म करता है.

एक बार जो उस के जाल में फंस जाता है, फिर निकल नहीं पाता. वह उन के साथ कुकर्म का वीडियो बना लेता फिर ब्लैकमेल कर बारबार आने को मजबूर करता. 8 से 14 साल के बीच की उम्र के बच्चों को वह अपना शिकार बनाता है. गरीब परिवार की महिलाओं, किशोरियों और युवतियों को भी वह अपना शिकार बनाता है.

राजकुमार व बालकिशन प्रजापति ने बताया कि रामबिहारी राठौर पिछले 5 सालों से उन दोनों के साथ भी घिनौना खेल खेल रहा है. उन दोनों ने बताया कि जब उन की उम्र 13 साल थी, तब वे जीवनयापन करने के लिए ठेले पर रख कर खाद्य सामग्री बेचते थे.

एक दिन जब वे दोनों सामान बेच कर घर आ रहे थे, तब पूर्व कानूनगो रामबिहारी राठौर ने उन दोनों को रोक कर अपनी मीठीमीठी बातों में फंसाया. फिर वह उन्हें अपने घर में ले गया और दरवाजा बंद कर लिया. फिर बहाने से कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला कर पिला दिया. उस के बाद उस ने उन दोनों के साथ कुकर्म किया. बाद में उन्होंने विरोध करने पर फरजी मुकदमे में फंसा देने की धमकी दी.

कुछ दिन बाद जब वे दोनों ठेला ले कर जा रहे थे तो नेता ने उन्हें पुन: बुलाया और कमरे में लैपटाप पर वीडियो दिखाई, जिस में वह उन के साथ कुकर्म कर रहा था. इस के बाद उन्होंने कहा कि मेरे कमरे में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और मैं ने तुम दोनों का वीडियो सुरक्षित रखा है. यदि तुम लोग मेरे बुलाने पर नहीं आए तो यह वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दूंगा.

इस के बाद नेताजी ने कुछ और वीडियो दिखाए और कहा कि तुम सब के वीडियो हैं. यदि मेरे खिलाफ किसी भी प्रकार की शिकायत किसी से की, मैं उलटा मुकदमा कायम करा दूंगा. युवकों ने बताया कि डर के कारण उन्होंने मुंह बंद रखा. लेकिन नेताजी का शोषण जारी रहा. हम जैसे दरजनों बच्चे हैं, जिन के साथ वह घिनौना खेल खेलता है.

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उन दोनों ने पुलिस को यह भी बताया कि 7 जनवरी, 2021 को नेता ने उन्हें घर बुलाया था, लेकिन वे नहीं गए. अगले दिन फिर बुलाया. जब वे दोनों घर पहुंचे तो नेता ने जबरदस्ती करने की कोशिश की. विरोध जताया तो उन्होंने जेल भिजवाने की धमकी दी.

इस पर उन्होंने मोहल्ले के दबंग लोगों से संपर्क किया, फिर नेता रामबिहारी का घिनौना सच सामने लाने के लिए दबंगों के इशारे पर रामबिहारी की पेन ड्राइव व हार्ड डिस्क उस के कमरे से उठा ली. यह दबंग, रामबिहारी को ब्लैकमेल कर उस से लाखों रुपया वसूलना चाहते थे.

पूर्व कानूनगो व भाजपा नेता रामबिहारी का घिनौना सच सामने आया तो इंसपेक्टर इमरान खान के मन में कई आशंकाएं उमड़ने लगीं. वह सोचने लगे, कहीं रामबिहारी बांदा के इंजीनियर रामभवन की तरह पोर्न फिल्मों का व्यापारी तो नहीं है. कहीं रामबिहारी के संबंध देशविदेश के पोर्न निर्माताओं से तो नहीं.

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आज का इंसान: भाग 1

‘‘किसी के भी चरित्र के बारे में सहीसही अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल काम है. चेहरे पर एक और चेहरा लगाए आजकल हर इंसान बहुरूपिया नजर आता है. अंदर कुछ बाहर कुछ. इंसान को पहचान पाना आसान नहीं है.’’

विजय के इन शब्दों पर मैं हैरान रह गया था. विजय को इंसान की पहचान नहीं हो पा रही यही वाक्य मैं समझ नहीं पाया था. विजय तो कहता था कि चाल देख कर मैं इंसान का चरित्र पहचान सकता हूं. सिर्फ 10 मिनट किसी से बात करूं तो सामने वाले का आरपार सब समझ लूं. नजर देख कर किसी की नियत भांप जाने वाला इंसान यह कैसे कहने लगा कि उस से इंसान की पहचान नहीं हो पा रही.

मुझे तो यह सुन कर अच्छा नहीं लगा था कि हमारा पारखी हार मान कर बैठने वाला है वरना कहीं नई जगह जाते. नया रिश्ता बनता या नए संबंध बनाने होते तो हम विजय को साथ ले जाते थे. इंसान की बड़ी परख जो है विजय को और वास्तव में इंसान वैसा ही निकलता भी था जैसा विजय बताता था.

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‘‘आज का इंसान बहुत बड़ा अभिनेता होता जा रहा है, हर पल अभिनय करना ही जिस का चरित्र हो उस का वास्तविक रूप नजर आएगा भी कैसे. अपने सहज रूप में कोई है कहां. एक ही व्यक्ति तुम से मिलेगा तो राम लगेगा, मुझ से मिलेगा तो श्याम बन कर मिलेगा. मतलब होगा तो तुम्हारे पैरों के नीचे बिछ जाएगा, मतलब निकल जाएगा तो तुम्हारे पास से यों निकल जाएगा जैसे जानता ही नहीं. एक ही इंसान के चरित्र के इतने ज्यादा पहलू तो कैसे पहचाने कोई, और कैसे अपने दायित्व का निर्वाह करे कोई?’’

‘‘क्या हुआ? किसी ने कुछ चालाकी की है क्या तुम्हारे साथ?’’

‘‘मुझ से चालाकी कर के कोई मेरा क्या बिगाड़ लेगा. भविष्य के लिए उस ने अपना ही रास्ता बंद कर लिया है. सवाल चालाकी का नहीं बल्कि यह है कि दूसरी बार जरूरत पड़ेगी तो मेरे पास किस मुंह से आएगा जबकि मेरे जैसा इंसान अपनी जेब से पैसे खर्च कर के भी सामने वाले की मदद करने को तैयार रहता है. बदले में मैं किसी से क्या चाहता हूं…कोई प्यार से बात कर ले या नजर आने पर हाथ भर हिला दे बस. क्या मुसकरा भर देना भी बहुत महंगा होता है जो किसी का हाथ ही तंग पड़ जाए?’’

‘‘किस की बात कर रहे हो तुम?’’

‘‘सुनयना की. मेरे साथ आफिस में है. 4-5 महीने पहले ही दिल्ली से ट्रांसफर हो कर आई थी. उस का घर भी मेरे घर के पास ही है. नयानया घर बसा है यही सोच कर हम पतिपत्नी देखभाल करते रहे. उस का पति भी जब मिलता बड़े प्यार से मिलता. एक सुबह आया और कहने लगा कि उस की मां बीमार है इसलिए उसे कुछ दिन छुट्टी ले कर घर जाना पड़ेगा, पीछे से सुनयना अकेली होगी, हम जरा खयाल रखें. हम ने कहा कोई बात नहीं. अकेली जान है हम ही खिलापिला दिया करेंगे.

‘‘मेरी श्रीमती ने तो उसे बच्ची ही मान लिया. 10-15 दिन बीते तो पता चला सुनयना का पांव भारी है. श्रीमती लेडी डाक्टर के पास भी ले गईं. हमारी जिम्मेदारी बढ़ गई. नाश्ते का सामान भी हमारे ही घर से जाने लगा. अकेली लड़की कहीं भूखी ही न सो जाए… रात को रोटी भी हम ही खिलाते. महीना भर बीत गया, उस का पति वापस नहीं आया.

‘‘ ‘अब इस के पति को आ जाना चाहिए. उधर मां बीमार है इधर पत्नी भी अस्वस्थ रहने लगी है. इन्हें चाहिए पूरा परिवार एकसाथ रहे. ऐसी कौन सी कंपनी है जो 2-2 महीने की छुट्टी देती है…क्या इस के पति को नौकरी नहीं करनी है जो अपनी मां के पास ही जा कर बैठ गया है.’

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‘‘मेरी पत्नी ने जरा सा संशय जताया. पत्नी के मां बनने की खबर पर भी जो इंसान उसे देखने तक नहीं आया वह कैसा इंसान है? इस परदेस में उस ने इसे हमारे सहारे अकेले छोड़ रखा है यही सोच कर मैं भी कभीकभी पूछ लिया करता, ‘सुनयना, गिरीश का फोन तो आता रहता है न. भई, एक बार आ कर तुम से मिल तो जाता. उसे जरा भी तुम्हारी चिंता नहीं है… और उस की नौकरी का क्या हुआ?’

‘‘2 महीने बीततेबीतते लेडी डाक्टर ने अल्ट्रासाउंड कर बच्चे की जांच करने को कहा. श्रीमती 3-4 घंटे उस के साथ बंधी रहीं. पता चला बच्चा ठीक से बढ़ नहीं रहा. 10 दिन बाद दोबारा देखेंगे तब तक उस का बोरियाबिस्तर सब हमारे घर आ गया. सुनयना का रोनाधोना चालू हुआ जिस पर उस के पति पर हमें और भी क्रोध आता. क्या उसे अपनी पत्नी की चिंता ही नहीं. मैं सुनयना से उस के पति का फोन नंबर मांगता तो वह कहती, उस की घरेलू समस्या है, हमें बीच में नहीं पड़ना चाहिए. वास्तव में सुनयना के सासससुर यहां आ कर उन के साथ रहना ही नहीं चाहते जिस वजह से बेटा पत्नी को छोड़ उन की सेवा में व्यस्त है.

Crime Story: अपनों की दुश्मनी

Crime Story: अपनों की दुश्मनी- भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

नीरज को पड़ोस में रहने वाले गहरे दोस्त विजय की बहन कोमल से प्यार हो गया तो दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली. इस से कोमल के भाई विजय के दिल में इंतकाम की ऐसी आग भड़की कि…

उस दिन तारीख थी पहली जनवरी, 2021. नए साल का पहला दिन होने की वजह से लोग अपनेअपने अंदाज में सेलीब्रेशन में जुटे थे. पानीपत की बधावा राम कालोनी की रहने वाली कोमल वर्मा भी नए साल के सेलीब्रेशन की तैयारी में जुटी थी.

कोमल के सासससुर और जेठजेठानी उस का हाथ बंटा रहे थे. काम करतेकरते कोमल की नजर बारबार मुख्यद्वार की ओर चली जाती थी. वह पति नीरज के आने की बाट जोह रही थीं.

कोमल मन ही मन सोच रही थी, ‘अपनीअपनी ड्यूटी से जेठजी और ससुर घर आ गए, ये (नीरज) ही घर नहीं लौटे. आज तो जल्दी घर आने के लिए कह गए थे. कितने लापरवाह हो गए हैं, न ही काल कर के बताया कहां हैं.’

कोमल ने कई बार नीरज का फोन नंबर डायल किया, लेकिन फोन हर बार स्विच्ड औफ मिला. उस समय रात के करीब साढ़े 9 बज रहे थे. नीरज घर लौटने में कभी इतनी देर नहीं करता था. कोमल परेशान थी.

परेशान कोमल कमरे से निकली और ससुर के कमरे में जा कर उन्हें पूरी बात बताई तो वह भी परेशान हो गए. उन्होंने भी अपने फोन से नीरज के मोबाइल पर काल की तो उस का फोन बंद था.

पिता विकासचंद ने बड़े बेटे जगदीश को उस का पता लगाने के लिए भेजा. जगदीश बाइक ले कर अकेला ही भाई को ढूंढने निकल गया. उस समय रात के करीब 10 बज रहे थे.

वह घर से 500 मीटर दूर गया होगा, तभी भावना चौक मोड़ पर सड़क के बीच खून में डूबे एक युवक को देख जगदीश रुक गया. वह युवक उस का छोटा भाई नीरज था और उस की मौत हो चुकी थी.

पल भर के लिए जगदीश के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया. बाइक से नीचे उतर कर वह भाई की लाश से लिपट गया और जोरजोर से चीखनेचिल्लाने लगा. जब थोड़ी देर बाद वह सामान्य हुआ तो फोन कर के पूरी बात पापा को बता दी. जगदीश के मुंह से नीरज की मौत की बात सुन कर पिता के हाथ से मोबाइल गिरतेगिरते बचा.

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बदहवास विकासचंद के मुंह से एक ही शब्द निकला,  ‘हाय! मेरे साथ इतना बड़ा अनर्थ क्यों हो गया?’ वह सिर पर हाथ रख फफकफफक कर रोने लगे.

अचानक विकासचंद को रोता देख घर वाले घबरा गए. आखिर ऐसा क्या हुआ जो वह दहाड़ मार कर रोने लगे. कोमल ने फोन उठा कर देखा तो पता चला काल उस के जेठ जगदीश ने की थी. कोमल ने जेठ को फोन मिला कर पूछा कि आप ने पापाजी से ऐसा क्या कह दिया तो उस ने कोमल को सब बता दिया.

जेठ की बात सुन कर कोमल जैसे काठ हो गई. उस के हाथ से फोन छूट कर फर्श पर जा गिरा. वह बदहवास हो कर गिर पड़ी और बेहोश हो गई. थोड़ी देर बाद जब उसे होश आया तो दहाड़ मारमार कर रोने लगी.

जवान बेटे की मौत की खबर सुन कर विकासचंद इतना साहस नहीं जुटा पाए कि बेटे की लाश तक जा सकें. घर में कोहराम मच गया था. अचानक रोनेचिल्लाने की आवाज सुन कर पड़ोसी जुट गए.

जब उन्होंने नीरज की हत्या की बात सुनी तो वे भी दंग रह गए. पड़ोसी घटनास्थल पर पहुंच गए, जहां जगदीश भाई की लाश के पास बैठा रो रहा था.

पड़ोसियों ने घटना की सूचना पुलिस कंट्रोलरूम को दे दी. घटना बधावा राम कालोनी के पास घटी थी. यह इलाका सिटी थाने में आता था. इसलिए कंट्रोलरूम ने घटना की सूचना वायरलैस के जरिए सिटी थाने को दे दी.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी योगेश कटारिया अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. रात होने के बावजूद वहां काफी लोग जुट गए थे. थानाप्रभारी कटारिया ने लाश का निरीक्षण किया. हत्यारों ने नीरज के सीने और पेट में ताबड़तोड़ चाकू घोंप कर बड़ी बेरहमी से उस का कत्ल किया था.

जब थानाप्रभारी ने जगदीश से नीरज की किसी से दुश्मनी की बात पूछी तो वह चीखता हुआ बोला, ‘‘मेरे भाई को उन के सालों ने ही मार डाला. हमें जिस बात का डर था आखिरकार वहीं हुआ. भाई की सुरक्षा के लिए थाने में कई बार एप्लीकेशन भी दी थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. अगर काररवाई हुई होती तो आज मेरा भाई जिंदा होता.’’ कह कर जगदीश रोने लगा.

बहरहाल, थानाप्रभारी योगेश कटारिया ने जगदीश की पूरी बात सुनी. उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त काररवाई का आश्वासन दिया और इस की सूचना डीएसपी वीरेंद्र सैनी, एसपी और एसएसपी को दे दी.

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सूचना मिलने के बाद आला अफसर मौके पर पहुंच गए. इधर मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाप्रभारी कटारिया ने फटाफट लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दी.

उस के बाद नीरज के भाई जगदीश की तहरीर पर पुलिस ने मृतक के साले विजय उर्फ छोटा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर के आगे की काररवाई शुरू कर दी. पुलिस को सारी काररवाई करतेकरते रात के 2 बज गए थे.

नए साल के पहले दिन ने ही विकासचंद वर्मा की खुशियों में ग्रहण लगा दिया था. कुछ क्षण पहले तक जहां घर वालों की खिलखिलाहट से घर गुलजार था, वहां पल भर में मातम छा गया था.

नीरज की मौत के गम में सब का बुरा हाल था. कोमल की आंखें रोरो कर सूज गई थीं. दोनों ने डेढ़ साल पहले ही लव मैरिज की थी. जिस दिन कोमल के साथ नीरज की शादी हुई थी, उसी दिन उस के भाई विजय ने नीरज को शहर छोड़ देने की धमकी दी थी. ऐसा न करने पर उस बुरा अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी थी.

खैर, मुकदमा दर्ज कर के पुलिस नीरज के कातिलों की सुरागरसी में जुट गई. घटनास्थल से थोड़ी दूर एक गली में एक घर के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगा था. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को खंगाला. फुटेज में मुंह ढंके 2 युवक तेजी से घटनास्थल से गली की ओर भागते दिख रहे थे.

उस फुटेज में भाग रहे युवकों की जब पुलिस ने जगदीश से शिनाख्त कराई तो वह पहचान गया. उन दोनों युवकों में से एक विजय उर्फ छोटा था, जबकि दूसरा उस का ममेरा भाई पवन था. दोनों ही विजय नगर के रहने वाले थे.

3 जनवरी, 2021 की सुबहसुबह सीआईए-2 सतीश कुमार वत्स के नेतृत्व में सिटी थाने की पुलिस ने विजय नगर में पवन और विजय के घर पर दबिश दे कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें थाने ले आई.

थाने ला कर पुलिस ने दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की तो विजय ने अपना जुर्म कबूल कर लिया.

पूछताछ में उस ने पुलिस को बताया, ‘‘वह और नीरज पड़ोसी थे. दोनों ही पचरंगा बाजार में हैंडलूम पर काम करते थे. नीरज ने विश्वासघात कर मेरी बहन कोमल से प्रेम विवाह कर लिया था.

‘‘कहता था उस का जीजा लगता है. यह बात कांटे की तरह मेरे सीने में चुभती थी. मैं ने उसे शहर छोड़ने के लिए कहा था लेकिन दोनों ने शहर नहीं छोड़ा. इस से समाज और दोस्तों में हमारी बदनामी हो रही थी, इसलिए मैं ने यह कदम उठाया और उसे मार डाला. मुझे इस का कोई मलाल नहीं है.’’

विस्तार से पूछने के बाद इस हत्याकांड की पूरी कहानी इस तरह सामने आई—

23 वर्षीय नीरज वर्मा मूलरूप से पानीपत के सिटी थाने के बधावा राम नगर मोहल्ले में परिवार के साथ रहता था. नीरज विकासचंद का दूसरे नंबर का बेटा था. नीरज से बड़ा जगदीश और उस से छोटी एक बेटी थी.  दोनों बेटे अपनी काबिलियत के बल पर अपने पैरों पर खड़े थे. विकासचंद को अपने दोनों बेटों पर बहुत नाज था. उन की एक आवाज पर दोनों बेटे तैयार खड़े रहते थे.

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शिवाकांत विकासचंद के पड़ोसी थे. दोनों पड़ोसियों में गहरी छनती थी. दोनों परिवारों का एकदूसरे के घरों में आनाजाना था. दोनों ही परिवार एकदूसरे के सुखदुख में एकदूसरे की मदद करते थे. लगता ही नहीं था कि 2 अलगअलग परिवार हैं.

अगले भाग में पढ़ें- कोमल घर से अचानक गायब हो गई

Crime Story: अपनों की दुश्मनी- भाग 2

सौजन्य- सत्यकथा

शिवाकांत एक फैक्ट्री में नौकरी करते थे. उन के परिवार में कुल 5 सदस्य थे. पतिपत्नी और 3 बच्चे. 2 बेटे और एक बेटी. बेटों में सब से बड़ा विजय था. फिर बेटी कोमल, उस से छोटा एक और बेटा.

शिवाकांत का बड़ा बेटा विजय और विकासचंद का मझला बेटा नीरज दोनों हमउम्र थे. एकदूसरे के घर आतेजाते दोनों में गहरी दोस्ती हो गई थी. उठनाबैठना, खेलनाकूदना और पढ़नालिखना सब साथसाथ होता था. दोनों परिवार एकदूसरे के बच्चों पर, उन की दोस्ती पर फख्र करते थे.

आहिस्ताआहिस्ता कोमल बचपन को पीछे छोड़ जवानी की दहलीज पर आ खड़ी हुई थी. कोमल के दमकते चेहरे और महकते बदन की खुशबू से नीरज पिघल गया था.

रेशमी जुल्फों वाली खूबसूरत कोमल की मोहिनी सूरत उस के दिल में घर कर गई थी. कोमल भी छिपछिप कर नीरज को प्रेमिल नजरों से देखती थी.

कोमल नीरज को दिल की गहराई से प्यार करने लगी थी. प्यार की आग दोनों दिलों में सुलग रही थी. बस, थोड़ी सी हवा मिलने की जरूरत थी ताकि दोनों अपने प्यार का इजहार कर सकें.

एक दिन मौका देख कर दोनों ने अपने दिलों का हाल एकदूसरे के सामने बयान कर दिया. उस दिन के बाद से दोनों की दुनिया ही बदल गई. आलम यह हो गया था कि एकदूसरे को देखे बिना पल भर जीने की कल्पना नहीं कर सकते थे. किसी न किसी बहाने दोनों मिल ही लेते थे.

नीरज और कोमल दोनों की मोहब्बत जवां हो रही थी. प्रेम के रथ पर सवार दोनों भविष्य की कल्पनाओं में रमे हुए थे. एक दिन दोपहर का वक्त था. नीरज कोमल के भाई विजय से मिलने उस के घर आया.

इत्तफाक से उस समय घर पर न तो विजय था और न ही उस के पापा. घर पर कोमल की मां और कोमल थी. नीरज को देख कर कोमल का चेहरा खिल उठा तो नीरज के होंठों पर भी मुसकान उतर आई.

नीरज ने कोमल से विजय के बारे में पूछा तो उस ने जवाब दिया ‘नहीं हैं’. यह सुन कर नीरज को बड़ी तसल्ली हुई कि आज वह कोमल से दिल खोल कर प्यारभरी बातें करेगा. कोमल की मां ने बेटी और नीरज को बात करते देखा तो वहां से उठ कर घर के कामों में जुट गई.

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वह जानती थी कि दोनों भले ही जवान हो गए हैं लेकिन उन के बीच के रिश्ते एकदम पाकसाफ हैं. उन्हें क्या पता था कि उन की बेटी उन की पीठ पीछे नीरज संग इश्क लड़ा रही है.

कोमल ने कमरे का दरवाजा भिड़ा दिया. कमरे में उन दोनों के अलावा कोई नहीं था. कोमल की गोरी कलाइयों को नीरज अपने हाथों में लिए उस की आंखों में आंखें डाले उसे एकटक देख रहा था. तभी कोमल बोली, ‘‘ऐसे क्या देख रहे हो?’’

‘‘एकदम चुप रहो, कुछ मत कहो, इन झील सी आंखों में आज उतर जाने दो मुझे.’’ नीरज ने जवाब दिया.

‘‘ऐसे ही देखना है तो मुझ से शादी क्यों नहीं कर लेते?’’ वह बोली.

‘‘वह भी कर लूंगा. थोड़ा और सब्र करो.’’ नीरज ने कहा.

‘‘सब्र ही तो नहीं होता मुझ से अब. तुम्हारी दूरियां मुझ से बरदाश्त नहीं होतीं. रात को बिस्तर पर जाती हूं तो तुम्हारी यादें मुझे सोने नहीं देतीं, नश्तर बन कर दिल में चुभती हैं.’’

‘‘कुछ ऐसा ही मेरा भी हाल है लेकिन मैं चाहता हूं तुम्हें तुम्हारे घर से विदा करा कर ले जाऊं.’’

‘‘तब तो तुम्हारे सपने धरे के धरे रह जाएंगे.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘तुम तो जानते हो हमारे घर वाले इस रिश्ते के लिए कभी भी राजी नहीं होंगे.’’ कोमल बोली.

‘‘क्यों राजी नहीं होंगे? आखिर क्या कमी है मुझ में?’’ नीरज की बात सुन कर कोमल उदास हो गई.

‘‘ऐसे भी नादान नहीं हो तुम. क्या तुम नहीं जानते कि हमारे घर वाले जातपात को ले कर कितने संजीदा हैं. हम दोनों की जाति अलग हैं. पापा और भैया इस रिश्ते के लिए कभी तैयार नहीं होंगे.’’

‘‘मैं तुम से वादा करता हूं कोमल कि मैं तुम्हें अपना जीवनसाथी बना कर रहूंगा. हमें एक होने से कोई नहीं रोक सकता. यह मेरा तुम से वादा है.’’

इस के बाद दोनों घंटों प्यारभरी बातें करते रहे. फिर नीरज कोमल से साथसाथ जीनेमरने की कसमें खा कर अपने घर वापस लौट आया, कोमल भी अपनी मां के पास दूसरे कमरे में चली आई. उस समय वह बहुत खुश थी.

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धीरेधीरे नीरज और कोमल के प्यार के चर्चे पूरी कालोनी में फैल गए. यह बात कोमल के भाई विजय तक पहुंची तो वह नीरज पर भड़क उठा.

उसे नीरज से ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी कि वह दोस्ती की आड़ में विश्वासघात करेगा. उस दिन से विजय ने नीरज पर नजरें गड़ा दीं कि वह कब उस के घर आता है, कब बहन से मिलता है. वह उसे रंगेहाथ पकड़ना चाहता था.

विजय के रवैए से नीरज को लगा कि विजय उस के प्यार के बारे में जान चुका है. यह बात नीरज ने कोमल को बताई और उसे सावधान भी कर दिया. उस दिन के बाद से कोमल और नीरज दोनों सब की नजरों से बच कर मिलने लगे.

विजय के साथसाथ उस के मांबाप को भी दोनों पर शक हो गया था. शिवाकांत ने सोचा कि इस से पहले कि कोई ऊंचनीच हो जाए, उन्हें ठोस कदम उठाना होगा.

चूंकि विजय और नीरज दोनों के परिवार पड़ोसी थे और उन में संबंध भी गहरे थे. लेकिन नीरज के कारण उन के रिश्तों में खटास आ गई थी. नीरज के पिता विकासचंद बेटे की करतूत से शर्मसार थे. नीरज और कोमल के प्यार के रिश्ते ने दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी की दीवार खड़ी कर दी थी.

विजय के पिता शिवाकांत सुलझे हुए सिद्धांतवादी इंसान थे. समझदारी का परिचय देते हुए उन्होंने वहां से हटना ही मुनासिब समझा. उन्होंने वहां का मकान छोड़ दिया और परिवार सहित विजय नगर में आ कर रहने लगे. विजय भी यही चाहता था कि नीरज की परछाईं कोमल पर न पड़े.

पिता के फैसले से विजय बहुत खुश था. खुश इसलिए कि अब वह नीरज से खुल कर इंतकाम ले सकता था. क्योंकि नीरज की वजह से उस के परिवार की मोहल्ले में बदनामी हुई थी. बात घटना से 3 महीने पहले की है. कोमल घर से अचानक गायब हो गई. विजय को पूरा शक था कि कोमल को नीरज ही भगा ले गया है.

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अगले भाग में पढ़ें- नीरज ने कोमल से कोर्टमैरिज कर ली

Crime Story: अपनों की दुश्मनी- भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

विजय नीरज की तलाश में जुटा तो नीरज अपने घर पर ही मिल गया लेकिन कोमल वहां नहीं मिली. इस पर उस ने नीरज से पूछा कि उस की बहन को कहां छिपा कर रखा है, बता दे नहीं तो इस का अंजाम बहुत बुरा होगा. नीरज ने उस से साफ शब्दों में कह दिया कि न तो वह कोमल के बारे में जानता है और न ही उसे कहीं छिपाया है. उस से जो बन पड़े, कर ले. वह गीदड़भभकियों से डरने वाला नहीं है. उस के बाद विजय वहां से वापस घर लौट आया.

नीरज ने विजय से झूठ बोला था. जबकि उस ने कोमल को अपने घर में ही छिपा कर रखा था. उस के घर वालों को पता था कि कोमल और नीरज एकदूसरे से प्रेम करते हैं. उन्होंने नीरज को समझाया भी था कि वह जिद छोड़ दे. लेकिन नीरज ने मांबाप की बातों को दरकिनार करते हुए कह दिया कि वह कोमल से प्यार करता है और शादी भी उसी से करेगा. आखिरकार मांबाप को बेटे के सामने झुकना पड़ा.

घर वाले जानते थे कि कोमल को ज्यादा दिनों तक छिपा कर नहीं रख सकते. एक न एक दिन भेद खुल ही जाएगा. तब मामला बिगड़ सकता है.

कोमल की सुरक्षा को देखते हुए विकासचंद ने उसे हिसार में अपने एक परिचित के घर भेज दिया. इधर विजय कोमल को ढूंढता रहा, लेकिन कोमल का कहीं पता नहीं चला. इसी तरह डेढ़ महीना बीत गया.

समाज में बदमानी के डर से उस ने जानबूझ कर कोमल के गायब होने का मुकदमा दर्ज नहीं कराया था. वह जानता था कि अगर मामला पुलिस में चला गया तो इज्जत की धज्जियां उड़ जाएंगी. इसलिए उस के घर वाले अपने हिसाब से उस की तलाश करते रहे.

आखिरकार नीरज ने कोमल से कोर्टमैरिज कर ली. डेढ़ महीने बाद नवंबर, 2020 के आखिरी हफ्ते में विजय को कहीं से भनक लगी कि कोमल नीरज के साथ उस के घर में ही रह रही है. दोनों ने चंद दिनों पहले कोर्टमैरिज भी कर ली है.

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खबर सौ फीसदी सच थी. नीरज और कोमल कोर्टमैरिज कर चुके थे और पतिपत्नी के रूप में रह रहे थे. विजय को यह बात बरदाश्त नहीं हुई. उस ने नीरज और कोमल दोनों को रास्ते से हटाने की योजना बना ली.

अपनी योजना में विजय उर्फ छोटा ने अपने ममेरे भाई पवन को भी शामिल कर लिया. पवन अपने परिवार के साथ जावा कालोनी में रहता था.

पवन अपराधी प्रवृत्ति का था. उस के खिलाफ पानीपत के कई थानों में गंभीर अपराध के मुकदमे दर्ज थे. पुलिस के लिए वह वांछित था.

बेटी के घर छोड़ कर जाने से मांबाप दुखी थे. उन्होंने उसे उस के हाल पर छोड़ दिया. उन का तर्क था कि जब बेटी ने ही उन की पगड़ी की लाज नहीं रखी तो वह उस के लिए चिंता क्यों करें. लेकिन विजय अपनी जिद पर

अड़ा था कि कोमल और नीरज ने जो भी किया है वह माफ करने लायक नहीं है. पहले वह नीरज को रास्ते से हटाएगा फिर कोमल को उस के किए की सजा देगा.

योजना बनाने के बाद विजय ने अपना काम छोड़ दिया और नीरज की निगरानी में जुट गया कि वह घर से कब निकलता है, कहांकहां जाता है, रात में नौकरी से घर कब लौटता है. डेढ़

महीने तक विजय और पवन ने नीरज की रेकी की. जब वे पूरी तरह आश्वस्त हो गए तो नए साल के पहले दिन नीरज की हत्या की योजना बनाई ताकि विकासचंद के घर की खुशियां मातम में बदल जाएं. पहली जनवरी, 2021 की रात विजय और पवन बधावा राम कालोनी की उस गली में घात लगा कर बैठ गए, जिस से नीरज अपनी बाइक से आताजाता था.

नीरज जैसे ही कालोनी के मोड़ पर पहुंचा विजय और पवन उस की बाइक के सामने आ खड़े हुए. अचानक दोनों ने धक्का दिया तो नीरज बाइक सहित नीचे गिर गया.

दोनों उस पर टूट पड़े और चाकुओं से ताबड़तोड़ प्रहार कर उस की हत्या कर दी. फिर भावना चौक गली के रास्ते भाग निकले. ज्यादा खून बहने से कुछ ही पलों में नीरज की मौत हो गई.

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विजय और पवन दोनों भाग कर राजाखेड़ी गांव की तरफ एक खेत में जा कर छिप गए. फिर दोनों ने शराब पी और नीरज की मौत का जश्न मनाया. नीरज की वजह से उन की बदनामी हो रही थी.

बदनामी का एक विकेट गिर गया था. अब कोमल को मौत के घाट उतारने की बारी थी, जिस के चलते परिवार ने खून के आंसू रोए थे.

इस से पहले कि दोनों अपने इस खतरनाक मकसद में कामयाब हो पाते, थानाप्रभारी योगेश कटियार ने 3 जनवरी, 2021 को सेक्टर-24 के एमजेआर स्कूल के पास से दोनों को गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल लिया और हत्या में इस्तेमाल चाकू भी बरामद करा दिया. विजय को नीरज की मौत का कोई अफसोस नहीं था. अफसोस इस बात का था कि कोमल जिंदा बच गई थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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