Saat Kadam Review: Ronit Roy ने फैंस का जीता दिल

रेटिंगः तीन स्टार

निर्माता: वियना मीडिया वर्क्स प्रा.लि.

लेखक व निर्देशक: के मोहित कुमार झा

कलाकारः अमित साध,रोनित रौय, दीक्षा सेठ, रोहिणी बनर्जी, शिल्पी रौय, अशोक सिंह, देवाशीष चौधरी, रीता चक्रवर्ती, करमवीर सिंह, विदिशा घोष व अन्य.

अवधिः चार एपीसोड, कुल अवधि दो घंटे दो मिनट

ओटीटी प्लेटफार्म : Eros Now

फुटबाल खेल के जुनून की पृष्ठ भूमि में पिता पुत्र के रिश्तों की भावना प्रधान व मार्मिक कहानी को वेबसीरीज ‘‘सात कदम’’में लेकर आए हैं लेखक व निर्देशक के मोहित कुमार झा,जिसे eros now पर देखा जा सकता है. इसमें पारिवारिक रिश्तों को भी खूबसूरत चित्रण है. यह फुटबॉल पिच पर लिखी अनसुलझे रिश्तों की ऐसी दास्तान हैं, जिसमें एक पिता का सपना अपने बेटे को एक पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी बनाना है तो वहीं बेटा अधिक से अधिक पैसा कमाने की ख्वाहिश रखता है.

कहानीः

कहानी के केंद्र में अरविंदो पाल (रोनित रौय) और उनका बेटा रवि पाल (अमित साध) है. अरविंदो को फुटबाल के खेल का जुनून है. वह बेहतरीन फुटबाल खिलाड़ी रह चुके हैं. अचानक तांग टूट जाने के कारण राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने का उनका सपना अधूरा रह जाता है. अब वह इस सपने को अपने बेटे रवि के माध्यम से पूरा होते हुए देखना चाहते हैं. अरविंदो की पत्नी रश्मि (रोहिण बनर्जी ) को फुटबाल पसंद नहीं पर अरविंदो छिपकर रवि को फुटबाल की ट्रेनिंग देते रहते हैं. वह अच्छा खिलाड़ी बन चुका है. इस बात से रवि की बहने सलोनी (निहारिका रौय) व सपना (शिल्पी रौय) भी अनजान हैं. उधर सपना का रोमांस साहिल (देवाशीष चौधरी ) संग चल रहा है. जबकि रवि की प्रेमिका किरण बनर्जी (दीक्षा सेठ) है. एक दिन ‘आसनसोल ग्यारह’की फुटबाल टीम के मालिक प्रकाश अग्रवाल (करमबीर सिंह), अरविंदो के घर पहुंचकर अरविंदो को अपनी टीम का कोच बनने का आफर देते हैं. तभी घर में सभी के सामने राज खुलता है कि रवि अच्छा फुटबाल खिलाड़ी है और वह ‘आसनसोल ग्यारह’ की टीम का हिस्सा है. अब अरविंदो इस टीम के कोच बन जाते हैं. अरविंदो चाहते है कि रवि राष्ट्रीय टीम के लिए खेले. पर अचानक कहानी में मोड़ आता है, जब कल कत्ता बागान के मालिक बाबुल बनर्जी (अशोक सिंह) अपनी टीम से रवि को जोड़कर अरविंदो से पुराना बदला लेने का निर्णय लेते हैं. इसके चलते कहानी में कई मोड़ आते हैं.

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लेखन व निर्देशनः

कहानी बहुत ही बेहतरीन है. खेल के जुनून के साथ ही बाप बेटे के रिश्तों की कशमकश और आर्दशों के टकराव का खूबसूरत चित्रण करने में लेखक व निर्देशक कामयाब रहे हैं. मगर पटकथा को थोड़ा कसा जाना चाहिए  था. कई दृश्य काफी इमोशनल हैं. फिल्म का एक संवाद ‘‘गुस्सा और अहंकार के कारण क्या पाया और क्या खो दिया’’ हर इंसान को सोचने पर मजबूर करने वाला है. यह वेब सीरीज एक बेहतरीन संदेश देती है कि आपका लक्ष्य आपके द्वारा चुने गए कुछ कदमों की ही दूरी पर है. पूरी वेब सीरीज मे खेल व भावनाओं के बीच बेहतरीन संतुलन स्थापित किया गया है. निर्देशक मोहित झा कोलकाता शहर के सार को भी बेहतरीन तरीके से इसमें पिरोया है. इसके लिए उन्होने हिंदी के साथ कुछ बंगाली संवाद भी रखे हैं.

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अभिनयः

सपने के टूटने के बाद बिखरने के बावजूद विश्वास न खोने वाले आरविंदो के किरदार में रोनित रौय ने शानदार अभिनय किया है. पिता के सपनों को पूरा करने,पिता पुत्र के आदर्श को निभाने और ढेर सारा पैसा कमाने की कशकमश से घिरे युवक रवि के किरदार में अमित साध ने  खुद को  बेहतरीन अभिनेता साबित किया है. किरण बनर्जी के किरदार में दीक्षा सेठ का भोला प्रदर्शन  का ध्यान खींच ही लेता है. बहनों के किरदार में निहारिका रौय और शिल्पी रौय दोनों ठीक जमे हैं. अन्य कलाकार भी अपनी जगह सही हैं.

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मैंने शो के लिए बुनियादी फिटनेस प्रशिक्षण लिया: सोनाली सेहगल

सोनाली सेहगल फिलहाल विक्रम भट्ट के आगामी वेब शो, ‘अनामिका’ की शूटिंग कर रही हैं, जिसमें सनी लियोन भी हैं. सोनाली श्रृंखला में एक प्रशिक्षित हत्यारे की भूमिका निभाती हैं. यह शो अभिनेत्री के लिए खास है क्योंकि यह पहला प्रोजेक्ट है जहां वह एक्शन सीक्वेंस करती हुई नजर आएंगी.

भूमिका के लिए अपनी तैयारी और नई तकनीकों के बारे में बात करते हुए, सोनाली कहती है, “मैं एक प्रशिक्षित हत्यारे रिया की भूमिका निभा रही हू. वह बेहद तेज और बुद्धिमान है. शो में बहुत सारे रनिंग, फाइट और शूटिंग सीक्वेंस हैं. इसलिए मैंने बंदूक चलाने का प्रशिक्षण लिया जहां मैंने सीखा कि बंदूक कैसे पकड़नी है और इसका उपयोग कैसे करना है. मैंने शो के लिए बुनियादी फिटनेस प्रशिक्षण लिया. इसके अलावा, संयोग से मैं शो से पहले दक्षिण की यात्रा कर रही थी और एक मार्शल आर्ट फॉर्म सीखना चाहती थी इसलिए मैंने कलारीपयट्टू सीखा. यह निश्चित रूप से शूटिंग के दौरान काम आया क्योंकि किसी भी मार्शल आर्ट फॉर्म में आपको सही मुद्रा और सही बॉडी लैंग्वेज मिलती है.”

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एक्शन सीन के बारे में अधिक बात करते हुए, वह कहती हैं, फाइट सीन के लिए, हमारे पास सेट पर प्रशिक्षक थे और किसी भी सीन से पहले, सभी के साथ रिहर्सल होती थी. सनी और मैंने इसे बार-बार दोहराया. प्रशिक्षण पूर्ण पेशेवर मार्गदर्शक और पर्यवेक्षण के तहत हुआ. चूंकि मैं अपने ट्रेनर सौरव राठौर के साथ MMA और कैलिसथनिक्स भी करती हूं, जिसमें ढेर सारे जंप, बॉडी रोल और बॉडी ट्रेनिंग शामिल है, जो कि मेरे हिस्से की शूटिंग के दौरान काम आया. ”

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अभिनेत्री को अपने साइज जीरो होने का विश्वास नहीं होता, वह फिट रहना पसंद करती है. लॉकडाउन के दौरान भी, मैंने यह सुनिश्चित किया कि मैं काम करूं और फिट रहूं. लेकिन मैं ऐसी कोई व्यक्ति नहीं हूं, जो एक बॉडी टाइप होने के बारे में बहुत सख्त है. क्योंकि मेरे लिए, सभी आकार सुंदर हैं. मैंने अपना वजन बढ़ा लिया क्योंकि मैं सब कुछ खाती हुं, लेकिन मैं कसरत भी करती हूं. इस भूमिका के लिए मुझे पतला दिखना था क्योंकि एक हत्यारे के रूप में आप भारी नहीं हो सकते. मुझे दुबला और फुर्तीला होना पड़ा, सोनाली कहती है.

‘प्यार का पंचनामा’ फेम एक्ट्रेस ने केरल में छुट्टियां मनाने के दौरान किया ये काम, देखें Photos

‘प्यार का पंचनामा’और ‘जय मम्मी दी’फेम सोनाली सेहगल उन अभिनेत्रियों में से हैं, जो कि काम की व्यस्तता के बीच यह भी सुनिश्चित करती है कि वह जीवन के संतुलन को बनाए रखे. सोनाली सेहगल हाल ही में केरल में छुट्टियां मनाकर लौटी हैं. सप्ताह भर की यात्रा के दौरान, उन्होंने पहाड़ों, बैकवाटर, हेरिटेज साइट्स पर और अधिक समय बिताया.

सोनाली कहती हैं, ‘‘मुझे भारत में अलग अलग जगह घूमना बहुत पसंद हैं.केरल की यह मेरी पहली यात्रा नहीं थी, इससे पहले मैं लगभग पांच बार केरल जा चुकी हूँ और हर यात्रा के दौरान बहुत अच्छा समय बिताया था. मैं अपनी मां और भाई के साथ एक बार गयी थी. तो वहीं काम और शादियों के सिलसिले में भी केरला गयी थी.लेकिन इस बार मैंने केरला में ज्यादा समय बिताया. इसलिए इस बार मैंने राज्य में शांति से घूमने और स्थानीय संस्कृति का अनुभव करने के लिए थोड़ी लंबी योजना बनाई थी.’’

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सोनाली सेहगल ने केरला में अपनी छुट्टियों की शुरूआत कुमारकोम के साथ की.फिर थेक्कडी, मसाले वालेगांव और कोच्चि गई. एक शौकीन फिटनेस उत्साही, सोनाली ने कुछ वेलनेस सत्रों में भी अपना हाथ आजमाया. केरल में खाना पकाने के सत्र का आनंद लेने वाली अभिनेत्री का कहना है, ‘‘मैंने कुछ योग कक्षाओं में भाग लिया और आयुर्वेदिक मालिश और ध्यान किया. मुझे 50 मील की खाना पकाने की कांसेप्ट का बहुत बढ़िया लगा, जिसमें 50 मील के भीतर से खाना पकाने की सामग्री का स्रोत शामिल है.‘ फार्म-टू-टेबल ‘कांसेप्ट का अनुभव मजेदार रहा.’’

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कोरोना व लॉकडाउन के चलते आम इंसानों के साथ ही सभी कलाकारों के लिए भी कठिन समय था. लेकिन सोनाली कहती हैं,‘‘इस कठिन समय में मुझे बहुत कुछ सीखने में मदद मिली.मैंने इस अवधि के दौरान आभारी होने का मूल्य सीखा. मैंने अपनी माँ के साथ घर पर समय बिताया, खाना बनाया, डांस किया, योग किया और कई वेब सीरीज भी देखे. मैंने अपना यूट्यूब चैनल भी शुरू किया और इसके लिए घर पर शूटिंग और कंटेंट बनाने का आनंद लिया.”

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इन दिनों सोनाली सेहगल ,फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट की आगमी वेब सीरीज ‘अनामिका’को लेकर काफी उत्साहित हैं.

Scam 1992 फेम प्रतीक गांधी इस फिल्म में आएंगे नजर

हंसल मेहता की वेब सीरीज ‘‘स्कैम 1992’’ से शोहरत बटोरने वाले अभिनेता प्रतीक गांधी लगातार नई नई फिल्में अनुबंधित करते जा रहे हैं. अब उन्हे ‘रॉय फिल्मस’ की इनवेस्टिगेटिव कॉमेडी फिल्म ‘‘वो लड़की है कहाँ?” में तापसी पन्नू के साथ काम करने का अवसर मिला है.

मध्य भारत की पृष्ठभूमि वाली इस फिल्म में अभिनेत्री तापसी पन्नू एक चुलबुली पुलिस अधिकारी के किरदार में नजर आएंगी. जबकि अभिनेता प्रतीक गांधी एक ऐसे बिगड़ैल लडके के किरदार में नजर आएंगे, जो तापसी के साथ एक मस्तीभरे सफर पर निकलते हैं. जहां दोनों को पता चलता है कि जीवन के प्रति उनका नजरिया एक दूसरे से बहुत ही अलग है.

बतौर लेखक व निर्देशक अरशद सैयद इस फिल्म से अपनी नई शुरूआत कर रहे हैं. जब दो मुख्य किरदार सफर को एक साथ पूरा करने के लिए मजबूर हो जाते हैं, तब उनका विभिन्न व्यक्तित्व एक मजेदार मोड़ पर टकराता है. इस मोड़ पर छिड़ती है शब्दों की जंग जिसका दर्शक भरपूर आनंद उठाएंगे यह तय है.

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फिल्म के निर्माता सिद्धार्थ रॉय कपूर कहते हैं, “जब अरशद ने हमें अपनी आकर्षक और आनंदमय पटकथा सुनाई,तभी हमें अहसास हो गया था कि हमें इस फिल्म का निर्माण करना है. हम विशेष रूप से तापसी के साथ काम करने के लिए बेहद उत्साहित हैं, जो स्क्रीन पर इतनी ऊर्जा और उल्लास लाती है, और प्रतीक, जिन्होंने स्कैम में अपने अविश्वसनीय प्रदर्शन से हम सभी को आश्चर्यचकित कर दिया. हम इस बात से भी बहुत खुश हैं कि अरशद, जो पहले से ही एक शानदार लेखक के रूप में जाने जाते हैं, अब इस फिल्म के साथ अपने निर्देशन की शुरुआत करेंगे.”

लेखक और निर्देशक अरशद सैयद कहते हैं कि रॉय कपूर फिल्म्स के साथ मिलकर इस फिल्म से निर्देशक के तौर पर कैरियर शुरू करने को लेकर मैं अति उत्साहित हूं. मैं सिद्धार्थ रॉय कपूर का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने फिल्म के प्रति मेरे नजरिए पर अपना विश्वास दिखाया. इसी के साथ मैं तापसी और प्रतीक का भी आभारी हूं कि उन्होंने ने इस फिल्म में जान डाल दी.

आरकेएफ और प्रतीक गांधी के साथ काम करने के लिए उत्साहित तापसी पन्नू का कहती है कि, ‘‘अरशद ने इस फिल्म में जिस तरह से मेरा किरदार लिखा है,वह अद्भुत और अद्वितीय है. निर्माता सिद्धार्थ रॉय कपूर के साथ ही प्रतीक गांधी के साथ काम करने के लिए भी बेहद उत्साहित हूं क्योंकि मुझे स्कैम 1992 में उनकी परफॉर्मेंस बेहद पसंद आई थी.”

प्रतीक गांधी कहते हैं, ‘‘ मैं इस फिल्म का हिस्सा बनने और तापसी, अरशद और सिड की टीम के साथ काम करने के लिए मैं बेहद उत्साहित हूं. मैं स्कैम के बाद कुछ अलग करना चाहता था और यह किरदार मेरी सारी उम्मीदों पर खरा उतरा है. मुझे यकीन है कि यह एक मजेदार यात्रा होगी और मुझे इस फिल्म की शूटिंग शुरू होने का बेसब्री से इंतजार है.’’

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‘पांडेजी जरा संभलके’ में सतीश रे का नया अवतार, देखें Viral पोस्टर

छपरा, बिहार निवासी छब्बीस वर्षीय यूट्यूबर सतीश रे ने बहुत ही कम समय में डिजिटल स्टार बनने के साथ ही बतौर हास्य अभिनेता अपनी एक अलग पहचान बना ली है. सतीश रे द्वारा निभाए गए ‘ईमानदार शर्मा,‘अल्फा पांडे’ और ‘बबन भोला’ जैसे किरदारों को मिली जबरदस्त शोहरत के चलते ही वह स्टार बने हुए हैं.

उनके शो ‘ईमानदार इंटरव्यू’ के साथ साथ भोजपुरी और बिहारी लहजे में उनके बोलने का अंदाज भी देशभर के युवाओं के बीच अपनी पैठ बना चुका है.

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वास्तव में वर्तमान समय में शहरी जिंदगी पूरी तरह से तनावपूर्ण और कई तरह की जटिलताओं से परिपूर्ण है.ऐसे में कुछ पलों के लिए ही सही पर तनाव मुक्त होने के लिए हर इंसान हंसने-हंसाने की जरूरत काफी महसूस करता है.

सतीश रे हर इंसान की इसी जरुरत को पूरा करने के लिए खास हास्य अंदाज के कार्यकम लेकर आए,जिन्हें काफी शोहरत मिली. अब सतीश रे एक हास्य वेब सीरीज ‘‘पांडेजी जरा संभलके‘’में 17 फरवरी से नजर आने वाले हैं. इस सीरीज की कहानी मनोज पांडे (सतीश रे) नामक एक ऐसे शख्स के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपनी प्रेमिका दिबोशी (डॉली चावला) के साथ लिव- इन -रिलेशनशिप में रहता है.

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उसकी ख्वाहिश हमेशा से ही दिबोशी से शादी करने की रही है लेकिन उसकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है जब वह खुद को अपनी बचपन की दोस्त इशिता (कनिका खन्ना) की तरफ आकर्षित पाता है, जिससे वेब सीरीज में हास्य की नई नई परिस्थितियों का निर्माण होता है.

अभिनेता प्रकाश जैस इस सीरीज में सतीश रे के दोस्त नरेश के अहम किरदार में नजर आएंगे. ‘पांडे जी संभलके‘ का निर्माण ‘‘मैत्री फिल्म प्रोडक्शन’’के गनु दादा और अमोल भोसले ने किया है.जबकि इस वेब सीरीज को निर्देशक विनय शांडिल्य और लेखकद्वय निखिल रायबोले औरभूपेंद्रकुमार नंदन हैं.

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‘कॅफे स्टुडिओज’ के बैनर तले बनी सीरीज ‘पांडे जी जरा संभलके‘ 17 फरवरी से Mx प्लेयर पर स्ट्रीम होगी. इस सीरीज का पोस्टर वैलेंटाइन डे के दूसरे दिन जारी होते ही वायरल हो गया.

वेब सीरीज Purushapur में बोल्ड सीन का है भरमार, पढ़ें रिव्यू

रेटिंग: आधा स्टार

निर्माता :श्रेष्ठा भावना ,सचिन मोहिते वह आकांक्षा शुक्ला

निर्देशक : शचिंद्र वत्स

कलाकार : अनु कपूर, शिल्पा शिंदे ,मिलिंद सोमन ,साहिल  सेठिया, पालोमी दास, अनंत जोशी, शाहिर शेख, फ्लोरा सैनी ,लाल आदित्य, अस्मिता बक्शी ,कशिश राय वह अन्य

अवधि :7 एपिसोड ,(1 एपिसोड 28 मिनट बाकी लगभग 19 मिनट) कुल अवधि 2 घंटा 22 मिनट

ओटीटी प्लेटफार्म: आल्ट बालाजी और जी5

पुरुष प्रधान काल्पनिक राज्य पौरुषपुर की सेक्स व समलैंगिक संबंधों से सराबोर वेब सीरीज  पौरुषपुर लेकर शचिन्द वत्स आए हैं. यह लिंग असमानता के खिलाफ जंग ,पुरुष सत्ता, राज्य ,धोखे और बदले की फेंटेसी वेब सीरीज है.यह स्त्री के सम्मान, बोरिस के अपमान और मोहब्बत की लड़ाई है.

कहानी:

यह कहानी है दुष्ट कामुकता में डूबे रहने वाले राजा भद्र प्रताप (अन्नू कपूर) की, जिनकी पहली पत्नी मीरा वती (शिल्पा शिंदे) है. मगर राजा भद्र प्रताप कई शादियां कर चुके हैं. और हर रानी राजा के साथ सुहागरात मनाने के बाद राजमहल से गायब हो जाती है .पर हर बार राजा भद्र प्रताप के लिए नई रानी  को लेकर मीरावती ही लाती है. मीरा वती सत्ता की भूखी है  और गुप्त राजनीतिक षड्यंत्र रचती रहती है .राजा भद्र प्रताप औरतों को महज बिस्तर का खिलौना व पैर की जूती समझते हैं .राजकुमार रणविजय को राज महल की एक दासी कला (पालोमी दास) से प्यार है .राजकुमार रणविजय (आदित्य लाल )हर दिन अपने कमरे में कला को नि: वस्त्र बैठाकर तस्वीर बनाता है .इसकी भनक मीरावती को लग जाती है .तब मीरा वती, कला को रानी बनाने का आश्वासन देकर उसे महाराजा भद्र प्रताप की रानी बना देती है .और रणविजय के कान भर देती है. मगर भद्र प्रताप और कला की सुहागरात के दूसरे दिन रणविजय ,कला से कह देता है कि धोखे की शादी को नहीं मानता और वही उसका प्यार है. दोनों पानी के अंदर एकजुट होते हैं. राजा कला को मौत की सजा सुनाते हैं. पर फांसी के फंदे से एक नकाबपोश( शाहिर शेख )उसे बचाकर किन्नर बोरीस( मिलिंद सोमन) के नगर घर में पहुंचा देता है .बोरिस हिजड़ा है, पर उसका नगर घर वेश्यालय है. जहां वह सभी को मार्शल आर्ट व युद्ध की कौशल की भी शिक्षा देता है . वहीं दूसरा नकाबपोश उर्फ वीर सिंह ,रणविजय को तहखाने में पहुंचा देता है .जहां भद्र प्रताप की दूसरी रानी नयनतारा (फ्लोरा सैनी ) है.भानु (शाहिर शेख), राजकुमार आदित्य का जुनून है, मीरा वती का प्यार है और बारिश की मोहब्बत है .यानी कि भानु के इन सभी के साथ सेक्स  संबंध है. उधर मीरावती का अपनी दासी संग समलैंगिक संबंध है.वीर सिंह ,नयनतारा का मंगेतर है ,जिसे भद्र प्रताप ने जबरन उठाकर अपनी रानी बना लिया था. राजा भद्र प्रताप के राज्य में औरतों को सिर उठाने की इजाजत नहीं. इन सबके बीच बोरिस व राजा भद्र प्रताप की दुश्मनी है .राजा भद्र प्रताप को खत्म करने के लिए महारानी मीरावती ,बोरिस से मदद मांगती है. पर राजा भद्र प्रताप को बोरिस के हाथों मरवाने के बाद बोरिस की भी हत्या करवा देती है.

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लेखन :

पितृसत्तात्मक सोच का विरोध और नारी उत्थान के नाम पर बनी पीरियड ड्रामा वेब सीरीज महज ब्लू फिल्म /सौफ्टपोर्न के अलावा कुछ नहीं है. हर एपिसोड में कम से कम 10 मिनट के सेक्स, संभोग, समलैंगिक सेक्स संबंध वाले दृश्य है .पटकथा का स्तर घटिया है. कहां कहानी के नाम पर शून्य है. संवाद भी सेक्स से सराबोर व साधारण है. लेखक ने शिल्पा शिंदे के किरदार महारानी मीरावती को नारी उत्थान का प्रतीक बताया है, मगर राजा भद्र प्रताप  की हवस व  प्रताड़ना के लिए नई-नई रानियां लड़कियां चुनकर वही लाती हैं, इसे उनका नारी उत्थान का कदम कहां जाएं? राजा की हवस का शिकार करवाने के बाद रानी को गायब कर बोरिस के वेश्या घर में पहुंचाना भी क्या नारी उत्थान है ? पर लेखक कि सोच यही है. लेखक निर्देशक का सारा ध्यान स्त्री देह कामोत्तेजक दृश्य और समलैंगिक स्त्री पुरुष के रति प्रसंग दिखाने पर पूरा ध्यान है ,परिणामता कहानी बिखरती रहती है .लेखकों ने सेक्स से भरपूर अश्लील दृश्यों के बनिस्बत कहानी पर ध्यान दिया होता, तो यह वेब सीरीज ठीक-ठाक बन जाती. संवाद के नाम पर अति सस्ती लाइनें हैं .किसी भी किरदार की कहानी उभर कर नहीं आती. यहां तक कि राज महल के षड्यंत्र भी ढंग से उजागर नहीं होते.

कला निर्देशक नितिन देसाई ने बेहतरीन काम किया है, जिससे वेब सीरीज की भव्यता है. घटिया ग्राफिक हैं.

निर्देशन

निर्देशन सही नहीं है. पर एडिटिंग जबरदस्त है .हर दृश्य को भव्यता के साथ फिल्माया गया है. वैसे भी कई फिल्मों व सीरियल के एडिटर शचींद्र वत्स ने पहली बार निर्देशन में कदम रखा है .यह वेब सीरीज देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या शचिंद्र वत्स अपनी पहचान सौफ्ट पोर्न वेब सीरीज फिल्म निर्देशक के रूप में स्थापित करना चाहते हैं.

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परिवार या बच्चों के साथ इसे नहीं देखा जा सकता.

शायद एकता कपूर और शोभा कपूर इस तरह की अश्लील वेब सीरीज  के साथ अपना नाम जोड़ने में शर्म महसूस करने लगी हैं. इसीलिए आल्ट बालाजी ने भले ही वेब सीरीज पौरुषपुर का निर्माण किया है, पर निर्माता के रूप में आल्ट बालाजी या शोभा कपूर या एकता कपूर का नाम नहीं दिया है. वैसे पौरुष पुरुष ने तो उल्लू एप को भी पीछे छोड़ दिया है.

अभिनय

जहां तक अभिनय का सवाल है 60 वर्ष की उम्र पार कर चुके दुष्ट, हवशी, कामुक राजा भद्र प्रताप के किरदार में अनु कपूर फिट नहीं बैठते. .औरतों को प्रताड़ित करने कि जिन दश्य को अनु कपूर ने निभाया है, कम से कम उन से ऐसी उम्मीद ना थी. अनु कपूर जैसे सम्मानित कलाकार ने इस अश्लील और सेक्स से सराबोर सीरीज में अभिनय क्या सोचकर किया है? यह समझ से परे है. इस सीरीज के  लगभग हर अश्लील दृश्य में उन्हें देखकर अविश्वसनीय लगता है. शिल्पा शिंदे रानी कम दासी ज्यादा नजर आती हैं. किन्नर बोरस के किरदार में मिलिंद सोमन का अभिनय जबरदस्त है. नाक में नथनी और माथे पर बिंदी लगाए  बोरस के रूप में मिलिंद सोमन लोगों का ध्यान बरबस आकर्षित करता है. नयनतारा के किरदार में फ्लोरा सैनी के हिस्से करने को कुछ रहा ही नहीं .अफसोस की बात है कि अन्नू कपूर शिल्पा शिंदे मिलिंद सोमन शाहिर शेख जैसे उत्कृष्ट व दिग्गज कलाकारों ने उस सॉफ्ट पॉर्न वेब सीरीज में अभिनय करने के लिए तैयार हुए.

Web Series Review – ‘द मिसिंग स्टोन’

रेटिंगः डेढ़ स्टार

निर्माताः श्वेता शिंदे व संजय खंबे

निर्देशक : विशाल भूरिया व आलोक नायक

कलाकारः वरूण सोबती, बिदिता बाग, राशी मल, साकिब अयूब, विट्ठल काले व पल्लवी पाटिल

अवधि : लगभग दो घंटे, पांच एपीसोड

ओटीटी प्लेटफार्म : एमएक्स प्लेअर्स

विशाल भूरिया और आलोक नायक एक रहस्य व रोमांचक वेब सीरीज ‘‘द मिसिंग स्टोन’’लेकर आए हैं.

कहानीः

साहिर(वरूण सोबती) और ध्वनि(बिदिता बाग) सफल वैवाहिक जिंदगी जी रहे हैं. पर ‘मिसकरेज’/ गर्भपात होने के बाद साहिर व ध्वनि के बीच दूरियां बढ़ सी जाती हैं, पर साहिर की दिलचस्पी ध्वनि की छोटी बहन पायल (राशी मल ) में बढ़ जाती है. यूं तो पायल का रोमांस रायन(साकिब अयूब) के साथ भी चल रहा है. ध्वनि के हर जन्मदिन पर उसकी बहन पायल सरप्राइज देती रहती है. इस बार ध्वनि के जन्मदिन से एक सप्ताह पहले ही पायल व रायन लोनावाला के फार्म हाउस गए थे. रायन ने ही खबर दी कि पायल से उसका रिश्ता टूट गया और वह वापस अपने घर आ गया है. जबकि पायल ने फोन करके ध्वनि को बताया कि वह गोवा जा रही है. मगर कुछ देर बाद पायल घबड़ायी हुई ध्वनि को वीडियो फोन करती है. मगर फोन कट जाता है. ध्वनि इस संबंध में साहिर से बात करती है. उसके बाद अपना जन्म दिन मनाने के ध्वनि, साहिर के साथ लोनावाला के फार्म हाउस पहुंचते हैं, मगर वहां पायल नही पहुंचती और न ही पायल का कोई फोन आता है. अब ध्वनि व साहिर, पायल को लेकर चिंतित होते हैं. दोनों का शक फार्म हाउस के केअर टेकर सोमनाथ (विट्ठल काले) पर जाता है. साहिर की गैर मौजूदगी में ध्वनि, सोमनाथ की पत्नी हेमा (पल्लवी पाटिल ) से बातचीत करती है और उसे इस बात का अहसास हो जाता है कि पायल जिंदा नहीं है. उसके बाद वह रायन को फोन करके फार्म हाउस पर बुलाती है. फिर सच सामने आता है.

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लेखन व निर्देशनः

एक बहुत ही पुरानी व घिसी पिटी कहानी है. इस तरह की कहानी पर कई तरह हौरर फिल्में भी बन चुकी हैं. पटकथा बहुत ही सतही स्तर की है. लौक डाउन के माहौल में इसे फिल्माया गया है, पर आकर्षित नहीं करती है.

अभिनयः

वरूण सोबती, बिदिता बाग व विट्ठल काले के अलावा किसी का भी अभिनय प्रभावित नही करता.

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Web Series Review : सैंडविच फार एवर

रेटिंगःएक स्टार

निर्माताः इंद्राणी चैधरी

निर्देशकः रोहण सिप्पी

कलाकार- अतुल कुलकर्णी, लुबना सलीम, अहाना कुमरा, कुणाल राय कपूर, जाकिर हुसेन, दिव्या सेठ शाह

अवधि : 28 से 35 मिनट के पंद्रह एपीसोड

ओटीटी प्लेटफार्मः सोनी लिव

शादी के बाद पति व पत्नी की जिंदगी में दोनों के माता पिता की दखलअंदाजी के चलते किस तरह के हास्य के दृश्य पैदा हो सकते है. उसी पर निर्देशक रोहण सिप्पी हास्य प्रधान वेब सीरीज ‘‘सैंडविच फार एवर’ लेकर आए हैं, जो कि आज यानी 25 दिसंबर से स्ट्रीम हो रही है.

कहानीः 

कहानी मुंबई में रह रहे समीर (कुणाल राय कपूर) व नैना (अहना कुमरा) की है, जो कि एक दूसरे से प्रेम करते हैं और अपने माता पिता की रजामंदी से विवाह के बंधन में बंध जाते हैं. नैना के पिता वी के सरनाइक (अतुल कुलकर्णी) कभी सेना में थे, अब अवकाश प्राप्त कर चुके हैं. उनकी मां मंजरी ज्योतिषी (लुबना सली) हैं.जबकि समीर के माता पिता कानपुर में रहते हैं. समीर के पिता डा. गिरजा शास्त्री (जाकिर हुसेन ) अवकाश प्राप्त कर चुके हैं. और उन्हे साठ हजार रूपए पेंशन मिलती है. जबकि समीर की मां संयुक्ता (दिव्या सेठ शाह) हैं. संयुक्ता और डा. गिरजा के बीच हमेशा अनबन बनी रहती है.

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जब वी के सरनाइक को पता चलता है कि उनकी बेटी समीर उससे विवाह करना चाहती है, तो वह समीर को घर पर मिलने बुलाते हैं. समीर बताता है कि वह किराए के मकान में रहते हैं और उनके माता पिता कानपुर मे रहते हैं. होली व दिवाली के अवसर पर दो चार दिन के लिए वह मुंबई आते हैं. उसके पास कोई नौकरी नहीं है. वह वीडियो गेम डेवलपर है. अपनी बेटी नैना की खुशी के लिए वी के सरनाइक अपने पड़ोसी का घर उनके लिए खरीद देते हैं. पर तभी समीर के माता पिता मुंबई आ जाते हैं. और ऐलान कर देते हैं कि वह अपने बेटे समीर व बहू नैना के ही साथ मुंबई मे रहेंगें. पर समीर व नैना दोनों ऐसा नहीं चाहते. तब वी के सरनाइक समीर के माता पिता के लिए भी अपने दूसरे पड़ोसी का फ्लैट खरीदवा देते हैं. इसके बाद हर एपीसोड में समीर व नैना के माता पिता उनकी बेहतरी के लिए कुछ न कुछ करते हैं, जो कि उन्हे पसंद नहीं आता है और हास्य के क्षण पैदा होते हैं.

मसलन, शादी के बाद समीर की मां व नैना के पिता द्वारा उनके घर के लिए फर्नीचर खरीदकर लाना, हनीमून के लिए शिमला जाने के कार्यक्रम में रोड़ा, रद्द, समीर के हाथ से नैना की जीत हुई बैंडमिंटन ट्राफी का टूटना, समीर के पापा का सियापा, डा.गिरजा वी के सरनाइक का शराब पीना और दोष समीर पर लगना, समीर व नैना द्वारा घर काम के लिए पंद्रह हजार रूपए पर कमला को नौकरानी रखना, समीर का नैना के जन्मदिन पर उपहार न लाना, जैसे घटनाक्रमों के माध्मय से हर एपीसोड में हास्य के क्षण पैदा होते हैं.

लेखन व निर्देशन

हास्य के नाम पर घटिया लेखन की मिसाल है यह सिअकाम वाली वेब सीरीज. इसका एक भी दृष्य हंसाने में कामयाब नही होता. पर फूहड़ता परोसी गयी है.किसी भी एपीसोड का एक भी दृष्य ऐसा नही हैं, जिसे देखकर दर्शक को हंसी आए या उसके चेहरे पर स्निग्ध मुस्कान आ जाए. मगर हर एपीसोड में पृष्ठभूमि में हंसी के फव्वारे व अविश्सनीय दृश्यों को भरकर दर्शकों को हंसाने का असफल प्रयास किया गया है. हर एपीसोड को पांच सात मिनट के बेतरतीब तरीके के छोटे छोटे कामेडी स्टिक में बांटा गया है. हर कलाकार मूखर्तापूर्ण हरकतें करते हुए हंसाने का असफल प्रयास करता रहता है. समीर बेवजह सेक्सी हरकतें करता रहता है. फूहड़ता की सारी हदें हर किरदार पार करता नजर आता है. अफसोस लेखक व निर्देशक ने इस वेब सीरीज के संग कई बेहतरीन कलाकारों को जोड़ा, मगर लेखक व निर्देशक उनका सही उपयोग नही कर पाए.

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अभिनय

कुणाल राय कपूर ने महज अपने आपको इसमें दोहराया है. उनके अभिनय में कोई नवीनता नहीं है. पता नहीं क्यों उन्हे गलत फहमी है कि लोग उनकी उटपटांग व सेक्सी हरकते करते हुए देखना चाहते हैं. नैना के किरदार में अहना कुमरा महज सेक्सी व सुंदर नजर आयी हैं. जबकि उनमें अभिनय प्रतिभा की कमी नही है, मगर वह पता नही क्यों अपनी अभिनय प्रतिभा की बनिस्बत अपनी सेक्सी अदाओं व कम वस्त्र पहनने को ही अहमियत देती हैं. वी के सरनाइक के किरदार में प्रतिभाशाली अभिनेता अतुल कुलकर्णी को देखकर समझ में नहीं आता कि उन्होंने इस वेब सीरीज से जुड़ने का फैसला क्यों किया ? जिन दर्शकों ने कुछ समय पहले वेब सीरीज ‘बंदिश बैंडिट’ में अतुल कुलकर्णी को देखकार उनके अभिनय के कसीदे पढ़ते हुए नहीं थक रहे थे, वह यकीन नही कर पा रहे हैं कि उन्ही अतुल कुलकर्णी ने ऐसा फूहड़ अभिनय किया है. मंजरी के किरदार में लुबना सलीम के हिस्से भी फूहड़ व अविश्वसनीय दृस्य ही आए हैं.

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‘द गाॅन गेम’ : कोरोना के वक्त बेहतरीन प्रयोग

रेटिंगः ढाई स्टार

निर्माताः बोधट्री मीडिया के लिए सुकेश मोटवानी व अन्य.

निर्देशकः निखिल नागेश भट्ट

कलाकार: संजय कपूर,लुबना सलीम, रूखसार रहमान,श्वेता त्रिपाठी शर्मा,दिवेंदु भट्टाचार्य, इंद्रनील सेन गुप्ता, श्रिया पिलगांवकर,अर्जुन माथुर व अन्य.

अवधिः लगभग आधे घंटे के चार एपीसोड

ओटीटी प्लेटफार्मः वूट

कोरोना वायरस की महामारी के चलते पूरे विश्व में संकट की घड़ी है. ऐसे ही संकट के दौर में पूरे विश्व में कुछ बेहतरीन फिल्में बनायी गयी है, जो साबित करती हैं कि स्मार्ट फोन व स्मार्ट गजेट के चलते हम अकेले या असहाय नही है. हम चाहें तो बहुत कुछ बेहतरीन रचनात्मक काम कर सकते हैं. इसका उदाहरण ओटीटी प्लेटफार्म ‘‘वूट’’ पर आयी चार एपीसोड वाली वेब सीरीज ‘‘द गाॅन गेम’’ भी है.

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कोरोना काल में फिल्मायी गयी रहस्य व रोमांच से भरपूर वेब सीरीज ‘‘द गाॅन गेम’’ की कहानी का ताना बुना इस तरह से बुना गया है कि किसी भी कलाकार को दूसरे कलाकार के समक्ष आने की जरूरत नहीं पड़ी. इसमें अलग अलग किरदार निभाने वाले सभी कलाकार अपने टेलीफोन के वीडियो कॉल के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े रहते हैं.

कहानीः

यह कहानी है अमीर उद्योगपति  राजीव गुजराल (संजय कपूर) और सुनीता गुजराल (रुखसार रहमान) के परिवार की. राजीव के परिवार में उनका बेटा साहिल गुजराल (अर्जुन माथुर), बेटी अमारा गुजराल (श्वेता त्रिपाठी शर्मा), साहिल की पत्नी सुहानी (श्रिया पिलगांवकर)  हैं. सुहानी सोशल मीडिया की दीवानी है.साहिल व उसकी पत्नी मुंबई में रहते हैं. अमारा बंगलोर में है,जबकि उसका पूर्व प्रेमी और साहिल का दोस्त डा प्रतीक जिंदल (इंद्रनील सेनगुप्ता) भी मुंबई में है. एडवोकेट सुभाष चैधरी (दिव्येंदु भट्टाचार्य) का आरोप है कि राजीव गुजराल ने उसके करोड़ों रूपए डुबा दिए हैं और अब एडवोकेट चैधरी बार बार राजीव व साहिल को पैसे वापस देने के लिए धमकाता रहता है. कहानी 21 मार्च 2020 को भारत में कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन से शुरू होती है.

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साहिल बैंकॉक से लौटकर अपने कमरे में कैद हो जाता है. उसे लगता है कि वह कोरोना का शिकार हो गया है. देखते-देखते उसकी तबीयत खराब होती है. वह कोविड अस्पताल जाता है और वहां से 26 मार्च को उसकी मौत की खबर आती है. अस्पताल से सीधे उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाता है, जिसमें परिवार का कोई सदस्य शामिल नहीं हो पाता. कहानी बहुत आम लगती है, पर ऐसा नही है.साहिल मरा है या जिंदा है, इसको लेकर कहानी आगे बढ़ती है. सवाल है कि साहिल जिंदा है तो कहां है? शक की सुई एडवोकेट चैधरी पर जाती है. पर डिजिटल व इंटरनेट तकनीक में माहिर आमरा को अहसास होता है कि उसका भाई साहिल जिंदा है. वह अपने कुछ दोस्तों की मदद से अपनी तफतीश शुरू करती है. कई रहस्यमय चीजें सामने आती हैं. फिर शक की सुई डाॅ.प्रतीक और साहिल की पत्नी सुहानी कपूर ग्रोवर पर जाकर टिकती है.राजीव ग्रोवर की पहली पर पुलिस हरकत में आती है और साहिल व सुहानी से पूछताछ शुरू होती है, तो कहानी कुछ अलग ही मोड़ ले लेती है. मामला सो करोड़ का भी आता है? आखिर यह सौ करोड़ का मसला क्या है? रहस्य गहराता जाता है कि आखिर इन सबके पीछे कौन है?

लेखन व निर्देशनः

‘‘द गाॅन गेम’’ नाटकीय घटनाक्रमों से ओत प्रोत रहस्य रोमांच प्रधान वेब सीरीज है. पहले सीजन का पहला एपीसोड साधारण है, मगर दूसरा, तीसरा और चैथा एपीसोड दर्शकों को बांधकर रखता है.कहानी इतनी तेज गति से भागती है कि दर्शक को सोचने का मौका ही नही मिलता. दर्शक जो सोचता है, उसके विपरीत चीज सामने आकर चैंकाती हैं. लेकिन इसमें रोमांच का घोर अभाव है. इसमें लेखक व निर्देशक ने ‘हैकर’ का किरदार डालकर मजा किरकिरा कर दिया, यदि हैकर न होता, तो यह वेब सीरीज ज्यादा मजेदार बन जाती.

इस कहानी में कलाकारों के साथ स्मार्ट फोन,स्मार्ट गैजेट्स भी अहम किरदार निभाते हंै.हर कलाकार ने अकेले ही शूटिंग की है,ऐसे में निर्देषक और एडीटर  का कार्य और कौशल काफी अहम हो जाता है और इस तराजू पर दोनों खरे उतरे हैं.

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यह वेब सीरीज से इस बात का भी अहसास कराती है कि हम सभी इस अत्याधुनिक युग में स्मार्ट फोन,स्मार्ट गैजेट व डिजिटल के चंगुल में किस तरह कैद होकर रह गए हैं. हम इन किरदारों को उतना ही देख पाते हैं,जितना वह स्वयं हमें दिखाते हैं.

अभिनयः

संजय कपूर, लुबना सलीम, रूखसार रहमान, श्वेता त्रिपाठी शर्मा, इंद्रनील सेन गुप्ता, श्रिया पिलगांवकर, अर्जुन माथुर हर कलाकार ने अच्छा अभिनय किया है. देखिए,कैमरे के सामने दो या तीन कलाकार एक्शन पर रिएक्शन करते हुए अभिनय करते हैं, यहां हर कलाकार अकेला था. ऐसे में अभिनय करना ज्यादा कठिन था,पर सभी ने बेहतरीन काम किया है. दिवेंदु भट्टाचार्य के किरदार की जरुरत समझ से परे है.

डेंजरस : सेक्स से सराबोर प्रभावहीन

रेटिंग :  डेढ़ स्टार

निर्माता : मीका सिंह और विक्रम भट्ट

लेखक : विक्रम भट्ट

निर्देशक:  भूषण पटेल

कलाकार : बिपाशा बसु, करण सिंह ग्रोवर, नताशा सूरी,  सुयश रॉय, सोनाली राउत, नितिन राउत

अवधि : 2 घंटे 4 मिनट, 7 चैप्टर

ओटीटी प्लेटफॉर्म : एमएक्स प्लेयर

सेक्स और पैसे की हवस के चलते गरीब ही नहीं अमीर से अमीर इंसान भी किस हद तक गिर सकते हैं, उसी पर विक्रम भट्ट (Vikram Bhatt) और भूषण पटेल अपराध व रोमांच प्रधान वेब सीरीज “डेंजरस” (Dangerous) लेकर आए हैं. यह बोल्ड वेब सीरीज 14 अगस्त से ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘एमएक्स प्लेयर’ पर मुफ्त में देखी जा सकती हैं.

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कहानी :

यह कहानी है लंदन में रह रहे उद्योगपति आदित्य धनराज (करण सिंह ग्रोवर) की. एक  दिन उनकी पत्नी दिया (सोनाली राउत) का अपरहण हो जाता है. पुलिस में आदित्य धनराज द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस हरकत में आती है. पुलिस अधिकारी नेहा (बिपाशा बसु) इसकी जांच शुरू करती हैं .नेहा, आदित्य धनराज की पूर्व प्रेमिका है .जांच शुरू होती  है ,तो पता चलता है कि आदित्य व दिया के बीच आए दिन झगड़े हुआ करते थे. दिया को अपने पिता के पैसे का घमंड है . आदित्य की ‘बैंकरप्ट’ कंपनी को दिया ने ही बचाया. दिया ड्रग्स व्हाट डिप्रेशन की शिकार है. उधर आदित्य ने अपने मित्र विशाल को दिया की कार का ड्राइवर बनाकर दिया पर नजर रखने के लिए नियुक्त किया है .पर दिया और विशाल एक साथ गायब होते हैं.जांच के दौरान सेक्स, डिप्रेशन, हत्याओं के कई घटनाक्रमों के बाद अंततः दिया के अलावा अपहरणकर्ता भी मारा जाता है.

लेखन:

रहस्य, रोमांच और हॉरर कहानियों को गढ़ने और ऐसी फिल्मों के निर्माण व निर्देशन में विक्रम भट्ट को महारत हासिल है. मगर बतौर लेखक विक्रम भट्ट ‘डेंजरस’ में बुरी तरह से मात खा गए हैं. पटकथा काफी गड़बड़ है. पहले एपिसोड/ चैप्टर में ही दर्शक समझ जाता है कि इसका अंत क्या होगा? तीन एपिसोड तक तो कहानी कसी हुई है, पर इसके बाद लेखक व निर्देशक की पकड़ ढीली हो जाती है. कहानी व दृश्यों के स्तर पर कुछ भी  नयापन नहीं है.

निर्देशन:

भूषण पटेल का निर्देशन कसा हुआ है. मगर पटकथा की कमजोरी के चलते उनके हाथ बंधे हुए नजर आते हैं. कहानी करण सिंह ग्रोवर व बिपाशा बसु के ही ईद गिर्द घूमती है.निर्देशक ने बोल्ड के नाम पर भरपूर सेक्स परोसा है.हर किरदार सिर्फ सेक्स और पैसे के पीछे भागते नजर आ रहा है .अफसोस ऐसा नहीं हो सकता. पूरी सीरीज देखने के बाद अहसास होता है कि यह 2 घंटे की बॉलीवुड मसाला फिल्म थी, जिसे 15 से 20 मिनट के साात भागों में विभाजित कर वेब सीरीज के रूप में ‘एमएक्स प्लेयर’ पर रिलीज किया गया है.

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लंदन की खूबसूरत लोकेशन  लोगों को पसंद आ सकती है. तो वही बोल्ड दृश्यों के शौकीन ही इसे देखना चाहेंगे, अन्यथा यह वेब सीरीज टॉर्चर है. इसके अलावा बच्चों या परिवार के साथ न देखने में ही समझदारी है.

अभिनय :

बिपाशा बसु और करण सिंह ग्रोवर दोनों निजी जीवन में पति पत्नी है और लंबे समय बाद यह जोड़ी पर्दे पर आयी है. मगर लोगों का ध्यान इन दोनों के बीच की ‘हॉट केमिस्ट्री’ ही खींचती है . विशाल के किरदार में अभिनेता सुयश राय  लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं. नवोदित अभिनेता सुयश राय एक परिपक्व अभिनेता के रूप में उभरते हैं. दीया के छोटे से किरदार में सोनाली राउत के हिस्से कुछ खास करने को रहा ही नहीं. आदित्य धनराज की सेक्रेटरी गौरी के किरदार में नताशा सूरी अपने अभिनय का प्रभाव छोड़ने में असफल रही हैं .

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