एकता कपूर की “रागिनी” का मालदीव वेकेशन, देखें फोटोज

‘रागिनी एमएमएस रिटर्न्स’ में अपने बोल्ड सीन्स के लिए चर्चाओं में रह चुकी करिश्मा शर्मा एक बार फिर आपको चौकाने आ गई है. आए दिन अपने बोल्ड फोटोज डालने वाली करिश्मा शर्मा ने हाल ही में अपनी बिकिनी फोटोज इंस्टाग्राम पर शेयर की हैं जिसमें करिश्मा काफी सेक्सी दिख रही हैं. फैंस इन फोटोज को काफी पसंद कर रहे हैं. ये फोटोज देख कर आप भी उनके दिवाने हो जायेंगे-

 

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And into the forest I go to lose my mind and find my soul. . . Shot by @aishwarya_nayak_photography

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Thank you,Next 😌 . . Shot by @aishwarya_nayak_photography

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वेकेशन का लुफ्त उठा रही है करिश्मा

हाल ही में करिश्मा वेकेशन मनाने मालदीव गई थी यहा पर उन्होंने काफी एंजौय किया. करिश्मा ने अपने सभी हेप्पी मूमेंन्ट को फैंस के साथ शेयर किया. अपने वेकेशन के दौरान करिश्मा ने कैमरे के सामने जमकर पोज दिए. करिश्मा का ये हौट अंदाज किसी के भी दिल को घायल करने के लिए काफी है.

 

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My smile is beamin’ , my skin is gleaming. . . Shot by @aishwarya_nayak_photography

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Life is about moments; Don’t wait for them, Create them. 🎈 🎈 . . Thank you for taking this one @808.berlin

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बिकिनी लुक में करिश्मा

करिश्मा की बिकिनी पिक्चर्स इतने कमाल के हैं कि, वो सोशल मीडिया पर काफी पसंद किए जा रहे हैं. कुछ दिन पहले करिश्मा ने बाथटब में फोटोशूट करवाया था. जिसमें वो बाथटब में किताबों पढ़ती नजर आई थीं. लोगों को उनकी ये तस्वीरें काफी भा गई थीं.

 

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🧜‍♀️🧜‍♀️🧜‍♀️

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The World is mine, Now Watch me take it. 🙄🌻🌻🌻 Bikini by @misstrillicious

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छोटे परदे से बोल्ड क्वीन तक

करिश्मा छोटे पर्दे का एक जानामाना नाम हैं, उनको “ये है मोहब्बतें” में निगेटिव रोल निभाते हुए देखा गया. उनके इस किरदार को लोगों ने खूब सराहा था.. आपने उनको “पवित्र रिश्ता”, “जिंग प्यार तूने ये क्या किया” और “फियर फाइल्स” जैसे टीवी शोज में काम करते हुए देखा है.

छोटे परदे से बड़े परदे तक

फिल्म ‘प्यार का पंचनामा 2’ में करिश्मा अपनी अदाकारी दिखा चुकी हैं. इस फिल्म में करिश्मा के काम को काफी सराहना मिली थी.

इस शो से मिली पहचान

ALT BALAJI के शो ‘रागिनी एमएमएस रिटर्न्स’ ने करिश्मा को कोफी पौपुलर कर दिया. उनकी एक्टिंग की भी काफी पसंद की गई.

फैशन में पीछे नहीं देसी छोरे

कई साल पुरानी बात है. जब हिंदी फिल्मों में गोविंदा का जलवा था. डेविड धवन की फिल्मों में तो वे एक अलग ही अंदाज में नजर आते थे. उन की अदाकारी और नाच के साथसाथ एक और चीज जो उन्हें दूसरे हीरो से अलग करती थी, वह था उन के हर रंग के कपड़े पहनने का स्टाइल. जो रंग लड़कों के लिए बेकार माने जाते थे, गोविंदा उन्हीं रंगों के कपड़ों जैसे पीली कमीज के नीचे बैंगनी रंग की पैंट या गुलाबी रंग का सूट बड़े परदे पर बड़ी शान से पहनते थे.

स्टाइल आइकन थे गोविंदा

गोविंदा की इस अजीबोगरीब ड्रेसिंग सेंस पर खूब चुटकियां ली जाती थीं. उसी दौर में किसी उभरते सिख फैशन डिजाइनर से जब बोल्ड ड्रेसिंग सेंस वाले फिल्म हीरो का नाम बताने के लिए कहा गया था तब उन्होंने बेझिझक गोविंदा का नाम लिया था. इस की वजह बताते हुए उन्होंने कहा था कि गोविंदा ने उन रंगों के कपड़ों का बाजार भी गरमा दिया है जो दुकानों पर धूल खाता था, लेकिन अब छोटे शहरों या गांवकस्बों के नौजवान धड़ल्ले से उन रंगों के कपड़ों से कमीज या पैंट बनवाते हैं.

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होता क्या है कि जब भी फैशन के बारे में बात की जाती है तो पढ़ेलिखे शहरी नौजवानों की पसंद या नापसंद को ही ध्यान में रखा जाता है जबकि आज भी भारत की ज्यादातर आबादी गांवों में रहती है और वह फैशन के मामले में किसी से कम नहीं है.

गांव में भी छाया शहरी फैशन

हरियाणा के जींद जिले के रत्ता खेड़ा गांव के शक्ति वशिष्ठ का आज के फैशन को ले कर मानना है, “अब गांवदेहात में भी शहरी फैशन घुस चुका है. नई उम्र के लड़के जींस और टीशर्ट पहनते हैं. खेतों में भी अब लड़के काम करते हैं तो वे कुरतापाजामा के अलावा जींस के साथ टीशर्ट या कमीज पहन लेते हैं.
”किसी खास मौके के लिए थोड़ा महंगा कपड़ा खरीदा जाता है. चूंकि फिल्मों का असर फैशन पर सब से ज्यादा रहता है इसलिए गांव के पास के कस्बों या थोड़े बड़े शहरों में कपड़ों की खूब दुकानें खुलने लगी हैं. एक्सपोर्ट के कपड़े भी खूब बिकते हैं.
”चूंकि गांव में अब पढाई का जोर बहुत ज्यादा हो गया इसलिए खुद को फैशन के मुताबिक रखने में अब नौजवान झिझकते नहीं हैं. कपड़ों के अलावा वे अपने जूतेचप्पलों को भी नए चलन के हिसाब से खरीदते हैं.”

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बात भी सही है क्योंकि हमारे देश में हर तरह का फैशन फिल्मी दुनिया से होता हुआ देशभर में अपना सिक्का जमाता है इसलिए ऐसे तबके की अनदेखी नहीं करनी चाहिए जो शहरों में नहीं रहता है या जो खुद के बनाव सिंगार पर ज्यादा पैसे नहीं खर्च कर सकता है.

 देशी छोरों हेयर स्टाइल

2 फिल्मों के हीरो से इस बात को जोड़ते हैं. यहां कपडे की नहीं हेयर स्टाइल की बात हो रही है. हिंदी फिल्म ‘आशिकी’ और ‘तेरे नाम’ में राहुल रॉय और सलमान खान के कपड़ों को तो पसंद किया ही गया था, उन के हेयर स्टाइल ने तो कहर मचा दिया था. हर तीसरा लड़का उस हेयर स्टाइल को अपना चुका था.
आज ही देख लो. रणवीर सिंह के कपड़े और उन का स्टाइल भी बहुत बोल्ड है जिसे हर नौजवान अपनाने की कोशिश करता है फिर वह चाहे सोशल मीडिया पर ट्रोल ही क्यों न हो जाए. वैसे भी अब लड़का देहाती हो या शहरी, फैशन को ले कर सब एकसुर में यह कहने की हिम्मत तो रखते ही हैं कि अपना टाइम आएगा…

Edited By – Neelesh Singh Sisodia 

उस्तादों के उस्ताद…

इसी साल 7 मार्च की बात है. राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना शहर के पुलिस थाने में नागौर जिले के शेरानी आबाद के रहने वाले सुलतान खां ने

एक रिपोर्ट दर्ज कराई. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि वह अपने भाई इरफान के साथ दिल्ली एयरपोर्ट से सऊदी अरब से आए अपने परिचित इरफान और वली मोहम्मद को ले कर अपनी स्कौर्पियो गाड़ी से नागौर जिले के डीडवाना शहर जा रहा था.

शाम करीब 4 बजे नीमकाथाना बाईपास पर बने रेलवे अंडरपास के नीचे उन की स्कौर्पियो गाड़ी के आगे एक कैंपर गाड़ी और पीछे स्विफ्ट कार आ कर रुकीं. दोनों कारों से उतरे लोगों ने हमारी कार रोक ली और हथियार दिखा कर हमें गाड़ी से उतार दिया.

दोनों गाडि़यों से आए बदमाशों ने हम से 30 हजार रुपए नकद, कपड़े, प्रैस, थर्मस, स्पीकर और काजूबादाम वगैरह लूट लिए. इस के बाद बदमाश अपनी कैंपर कार में मेरे भाई इरफान का अपहरण कर ले गए. साथ ही हमें सड़क पर छोड़ कर हमारी स्कौर्पियो भी ले भागे.

पुलिस ने सुलतान खां की रिपोर्ट दर्ज कर ली. हालांकि रिपोर्ट में ऐसी कोई बड़ी बात नहीं थी. कोई बड़ी लूटपाट भी नहीं हुई थी, लेकिन अपहरण का मामला गंभीर था. पुलिस ने तुरंत काररवाई करते हुए इलाके में चारों तरफ नाकेबंदी करवा दी. पुलिस ने अपहृत इरफान की तलाश शुरू की, तो रात को सीकर जिले में ही हांसनाला मंदिर के पास इरफान और लूटी गई स्कौर्पियो गाड़ी मिल गई.स्कौर्पियो गाड़ी में इरफान और वली मोहम्मद से लूटी गई रकम, प्रैस, स्पीकर और थर्मस आदि सामान नहीं मिले. फिर भी लूटी गई गाड़ी और अपहृत युवक के मिल जाने से पुलिस ने राहत की सांस ली. बदमाशों ने इरफान को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया था. न तो उस से कोई मारपीट की गई थी और न कोई धमकी वगैरह दी गई थी.

हालांकि लूटी गई रकम और अन्य सामान बहुत ज्यादा नहीं था, फिर भी यह गंभीर बात थी कि दिनदहाड़े लूट हुई थी. अगर पुलिस साधारण मामला समझ कर कोई काररवाई नहीं करती, तो हो सकता था भविष्य में कोई बड़ी वारदात हो जाती. नीमकाथाना के थाना प्रभारी राजेंद्र यादव ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए लूटपाट की जांच शुरू की.

पुलिस ने जांच शुरू की, तो पता चला लूटपाट करने वाले बदमाशों की दोनों गाडि़यां सुलतान और उस के साथियों की स्कौर्पियो का पीछा करती हुई नीमकाथाना तक आई थीं. सवाल यह था कि सुलतान की स्कौर्पियो का पीछा कहां से किया गया था.

थानाप्रभारी राजेंद्र यादव के दिमाग में एक सवाल बारबार कौंध रहा था कि 2 गाडि़यों में सवार बदमाश केवल 30 हजार रुपए, कपड़े, प्रैस व स्पीकर जैसे छोटेमोटे सामान के लिए दिनदहाड़े लूट की वारदात को क्यों अंजाम देंगे? या तो बदमाशों को सुलतान और उस के साथियों के पास मोटी रकम होने की सूचना थी, जिस की वजह से उन्होंने लूटपाट की. दूसरी बात यह थी कि अगर बदमाशों का मकसद इरफान का अपहरण ही था, तो वे उसे छोड़ क्यों गए? बदमाशों ने इरफान को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाया था. ये सवाल थानाप्रभारी को बारबार परेशान कर रहे थे.

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समझ से परे थी लूट की वारदात

इन सवालों का सही जवाब या तो बदमाशों के पकड़े जाने पर मिल सकता था या फिर इस बारे में पीडि़त ही कुछ बता सकते थे. इसलिए थानाप्रभारी ने रिपोर्ट दर्ज कराने वाले सुलतान खां और उस के साथी इरफान खां से पूछताछ की. लेकिन उन से ऐसी कोई बात पता नहीं चली जिस से बदमाशों और उन के असल मकसद का पता चल सकता.

सुलतान और इरफान ने लूटपाट करने वाले बदमाशों के बारे में कोई भी जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने सीधे तौर पर किसी पर शक भी जाहिर नहीं किया. ऐसी स्थिति में लूटपाट करने वाले बदमाशों को तलाशना पुलिस के लिए चुनौती से कम नहीं था.

नीमकाथाना के थानाप्रभारी राजेंद्र यादव ने सीकर के एसपी डा. अमनदीप सिंह कपूर के सामने हाजिर हो कर अपने दिमाग में उठ रहे सारे सवाल बताए. एसपी साहब भी थानाप्रभारी की बातों से सहमत थे. उन्होंने थानाप्रभारी से इस मामले की फाइल ले कर एफआईआर और इस के बाद की पुलिस की काररवाई पर सरसरी नजर दौड़ाई. उन्हें लगा कि राजेंद्र यादव की बातों में दम है.

एसपी ने थानाप्रभारी से पूछा, ‘‘राजेंद्र, तुम इस केस को कैसे सौल्व करना चाहते हो?’’

‘‘सर, यह केस सौल्व तो तभी होगा जब बदमाश पकड़े जाएंगे.’’ थानाप्रभारी ने एसपी साहब से कहा, ‘‘सर, सब से पहले हमें यह पता लगाना होगा कि सुलतान और उस के साथियों की स्कौर्पियो गाड़ी का पीछा कहां से शुरू किया गया था.’’

अपनी बात जारी रखते हुए थानाप्रभारी ने एसपी साहब से कहा, ‘‘सर, इस के लिए हमें दिल्ली एयरपोर्ट तक जाना पड़ेगा. इस के साथ हमें दिल्ली से नीमकाथाना तक रास्ते में जहांजहां भी सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, वहां पर 7 मार्च की दोपहर की फुटेज देखनी पड़ेगी. इसी से हमे बदमाशों का सुराग मिल सकता है.’’

‘‘राजेंद्र, तुम्हारा आइडिया अच्छा है.’’ एसपी डा. अमनदीप सिंह कपूर ने थानाप्रभारी की हौसलाअफजाई करते हुए कहा, ‘‘तुम जल्दी से जल्दी यह काम पूरा करो. उम्मीद है तुम्हें कामयाबी जरूर मिलेगी.’’

‘‘थैंक यू सर.’’ थानाप्रभारी राजेंद्र यादव ने एसपी साहब को सैल्यूट किया और वहां से निकल गए.

थानाप्रभारी ने नीमकाथाना पहुंचते ही दिल्ली जाने की तैयारी शुरू कर दी. कुछ देर बाद वे अपने 2 मातहतों को ले कर गाड़ी से दिल्ली के लिए रवाना हो गए.

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मिली एक बड़ी सफलता

दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पहुंच कर उन्होंने एयरपोर्ट के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की 7 मार्च की फुटेज निकलवा कर देखी. इस में सुलतान खां और उस के साथियों की स्कौर्पियो के पीछे एक ब्रेजा गाड़ी नजर आई.

इस के बाद पुलिस ने दिल्ली से नीमकाथाना तक के रास्ते में टोलनाके और अन्य जगहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवा कर देखी. इन में भी वह ब्रेजा गाड़ी इरफान व वली मोहम्मद की स्कौर्पियो के पीछेपीछे आती हुई नजर आई.

इस ब्रेजा गाड़ी के नंबर के आधार पर पुलिस ने नागौर जिले के लाडनूं थाना इलाके के तितरी गांव के रहने वाले चैन सिंह राजपूत को पकड़ा. चैन सिंह से पूछताछ की गई, तो सुलतान खान के साथियों से की गई लूट की वारदात की गुत्थी सुलझ गई. लेकिन उस ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर पुलिस भी हैरान रह गई.

थानाप्रभारी राजेंद्र यादव ने एसपी साहब को सारी बातें बताई. एसपी साहब ने राजेंद्र को शाबासी देते हुए चैन सिंह के बताए बाकी अपराधियों को पकड़ने और माल बरामद करने के निर्देश दिए. साथ ही जिले के कुछ अन्य पुलिस अफसरों को सदर थानाप्रभारी के साथ सहयोग करने के लिए लगा दिया.

पुलिस टीमों ने भागदौड़ कर नागौर जिले के डीडवाना थाना इलाके के कोलिया गांव के रहने वाले इकबाल उर्फ भाणू खां, सीकर जिले के रानोली के रहने वाले विजय कुमार उर्फ बिज्जू भाट, नीमकाथाना सदर थाना इलाके के चला गांव निवासी बलराम मील और ढाणी खुड़ालिया तन डहरा जोहड़ी गुहाला के रहने वाले जवान सिंह उर्फ रामस्वरूप जाट को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने गिरफ्तार पांचों आरोपियों की निशानदेही पर डेढ़ करोड़ रुपए की कीमत का 4 किलो 300 ग्राम सोना, वारदात में इस्तेमाल की गईं 3 गाडि़यां ब्रेजा, कैंपर और स्विफ्ट के अलावा 315 बोर का एक कट्टा बरामद किया.

सिर्फ  30 हजार रुपए की लूट का करोड़ों रुपए की लूट में खुलासा होने पर जयपुर रेंज के आईजी एस. सेंगाथिर भी सीकर आ गए. उन्होंने आरोपियों से पूछताछ की और एसपी डा. अमनदीप सिंह कपूर और अन्य मातहत अधिकारियों को बधाई दी.

आरोपियों से पूछताछ में जो कहानी उभर कर सामने आई, वह सोने के तस्करों की आपसी रंजिश की कहानी है. उस्तादों के उस्ताद बनने की यह कहानी सरकारी सिस्टम को भी अंगूठा दिखाती है कि किस तरह विदेशों से तस्करी कर सोना भारत में लाया जा रहा है. इस के अलावा विदेशों में बैठे तस्कर ही अपने सहयोगियों से सोने की लूट भी करवा रहे हैं.

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यह बात किसी से छिपी नहीं है कि विदेशों से रोजाना चोरीछिपे बड़ी मात्रा में सोना भारत लाया जाता है. विदेशों से अधिकांश सोना हवाई मार्ग से ही आता है. तस्करी से जुड़े लोग सोना लाने और कस्टम से बचने के नएनए तरीके अपनाते हैं. कुछ तस्करों की एयरपोर्ट पर सुरक्षा अधिकारियों या एयरलाइंस के कर्मचारियों से मिलीभगत भी होती है. इस से वे सुरक्षित बाहर निकल आते हैं.

राजस्थान में भी सोने की तस्करी करने वाले कई गिरोह सक्रिय हैं. इन गिरोहों के लोग दिल्ली या जयपुर एयरपोर्ट पर सोना ले कर आते हैं. इन में कभीकभी कुछ लोग पकड़े भी जाते हैं, जबकि अधिकांश तस्कर सुरक्षा व्यवस्थाओं को धता बता कर सोना लाने में सफल हो जाते हैं.

सोने की ऐसे होती है तस्करी

सीकर, चूरू व झुंझुनूं जिले के शेखावटी इलाके के करीब 5 लाख लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं. इन में अधिकतर कामगार हैं, जो भवन निर्माण कार्यों से जुड़े हैं. कोई आरसीसी लेंटर डालने का काम करता है, तो कोई टाइल्स लगाने का काम. ये लोग सालछह महीने में एक बार अपने घर आते रहते हैं.

खाड़ी देशों में सक्रिय सोने के तस्कर शेखावटी के इन लोगों को लालच दे कर अपने कैरियर के रूप में इस्तेमाल करते हैं. बदले में इन कैरियर को हवाई टिकट का पैसा और कुछ खर्चा दे दिया जाता है. एयरपोर्ट से बाहर निकलने पर तस्कर गिरोह के लोग इन कैरियरों से सोना ले लेते हैं. एयरपोर्ट पर पकड़े जाने पर कैरियर अगर फंस जाता है, तो बाहर बैठे तस्कर गिरोह के सदस्य अपनी कोशिशें करते हैं. कोशिश कामयाब हो जाती है तो ठीक, वरना ये लोग उस कैरियर से पल्ला झाड़ लेते हैं.

नागौर जिले के खुनखुना थाना इलाके के शेरानी आबाद के रहने वाले शेर मोहम्मद और लाल मोहम्मद सऊदी अरब से कैरियर के माध्यम से तस्करी का सोना मंगवाते हैं. इन में लाल मोहम्मद अब सऊदी अरब में रहता है. जबकि शेर मोहम्मद और लाल मोहम्मद में आजकल रंजिश चल रही है.

रंजिश का कारण यह है कि करीब डेढ़ साल पहले लाल मोहम्मद की ओर से सऊदी अरब से मंगाए गए सोने की लूट हो गई थी. लाल मोहम्मद को इस लूट में शेर मोहम्मद का हाथ होने का शक था. इस के बाद लाल मोहम्मद के साथ एक बार फिर धोखा हो गया. लाल मोहम्मद के लिए सऊदी अरब से तस्करी का सोना ले कर आया एक कैरियर दिल्ली से निर्धारित गाड़ी में न आ कर दूसरी गाड़ी में बैठ कर चला गया था.

बाद में लाल मोहम्मद ने उस का अपहरण कर अपना सोना वसूल किया था. इस मामले में नागौर जिले के खुनखुना थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था. इस में पुलिस ने लाल मोहम्मद, चैन सिंह, मोहम्मद अली, अली मोहम्मद, अब्दुल हकीम आदि के खिलाफ चालान पेश किया था.

आजकल सऊदी अरब में रह कर भी लाल मोहम्मद अपने विरोधी शेर मोहम्मद की गतिविधियों की सारी जानकारियां रखता था. चूरू जिले के बीदासर गांव का रहने वाला वली मोहम्मद 3 साल से सऊदी अरब में रह रहा था. वह वहां आरसीसी लेंटर डालने का काम करता था. बीदासर गांव का ही रहने वाला इरफान करीब 9 महीने से सऊदी अरब में रह कर टाइल्स लगाने का काम करता था.

तस्कर देते हैं लालच

वली मोहम्मद और इरफान भारत में अपने घर आना चाहते थे. सोने के तस्कर शेर मोहम्मद को यह बात पता चली, तो उस ने सऊदी अरब में सक्रिय अपने लोगों के माध्यम से इन दोनों को सोना लाने के लिए राजी कर लिया. उस ने दोनों को सऊदी अरब से दिल्ली तक का हवाई जहाज का फ्री टिकट और दिल्ली से गांव तक जाने के लिए टैक्सी कराने का वादा किया था.

दूसरी तरफ सऊदी अरब में रह रहे शेर मोहम्मद के विरोधी लाल मोहम्मद को यह बात पता चल गई कि बीदासर के इरफान और वली मोहम्मद नाम के 2 युवक शेर मोहम्मद के लिए सोना ले जाएंगे. इस पर लाल मोहम्मद ने योजना बना कर इन दोनों से संपर्क कर उन्हें लालच दिया और अपनी योजना में शामिल कर लिया.

सऊदी अरब में तस्करी के लिए सोने को पिघला कर अलगअलग रूपों में ढाल दिया जाता है. फिर उस सोने को पारे की परत चढ़ा कर ऐसा रंग दे दिया जाता है कि वह एल्युमीनियम नजर आता है. इस एल्युमीनियम रूपी सोने को इलैक्ट्रौनिक सामान का पार्ट बना दिया जाता है. इस तरह इलैक्ट्रौनिक उपकरण के रूप में तस्करी का सोना भारत आता है.

निश्चित दिन सऊदी अरब में शेर मोहम्मद के लोगों ने बीदासर के इरफान और वली मोहम्मद को भारत ले जाने के लिए 7 स्पीकर और एक प्रैस में छिपा कर 5 किलो सोना सौंप दिया. इस के बाद शेर मोहम्मद के लोग इन दोनों से मोबाइल के माध्यम से लगातार संपर्क में रहे. वहीं, लाल मोहम्मद भी इरफान और वली मोहम्मद से संपर्क बनाए हुआ था. इन से लाल मोहम्मद को पता चल गया था कि वे किस दिन कौन सी फ्लाइट से दिल्ली पहुंचेंगे.

स्पीकर में पारे से एल्युमीनियम के रंग में रंगी सोने की प्लेटों को चिपकाया गया था जबकि इलैक्ट्रिक प्रैस में सोने की प्लेट को सिल्वर रंग दे कर नट से कस दिया गया था. इरफान और वली मोहम्मद हवाई जहाज से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतर कर बाहर आ गए. कहा जाता है कि सोने के तस्कर शेर मोहम्मद की दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम व सुरक्षा अधिकारियों से मिलीभगत थी, इसलिए इरफान और वली मोहम्मद को न तो किसी ने रोका और ना ही उन के सामान की जांच की.

सऊदी अरब से सोना ले कर आ रहे इरफान और वली मोहम्मद को दिल्ली से लाने के लिए शेर मोहम्मद ने सुलतान खां और उस के भाई इरफान को स्कौर्पियो गाड़ी ले कर भेजा.

लूटने की बना ली योजना

दूसरी तरफ लाल मोहम्मद ने सऊदी अरब से ईमो कालिंग के जरिए अपने ड्राइवर नागौर जिले के लाडनूं के तितरी निवासी चैन सिंह राजपूत को सोना ले कर आ रहे इरफान और वली मोहम्मद से माल लूटने को कहा.

उस ने चैन सिंह को इरफान और वली मोहम्मद की फोटो सहित फ्लाइट नंबर वगैरह की सारी जानकारी दे दी. इस पर चैन सिंह ने अपने परिचित बदमाशों इकबाल, विजय कुमार उर्फ बिज्जू, जवान सिंह उर्फ रामस्वरूप, बलराम और 3 अन्य लोगों को साथ ले कर सोना लूटने की योजना बनाई.

योजना के मुताबिक चैन सिंह और उस का एक साथी नरेंद्र सिंह ब्रेजा गाड़ी ले कर 7 मार्च को फ्लाइट आने के समय से काफी पहले ही दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच गए. उन्होंने फ्लाइट आने के बाद एयरपोर्ट से बाहर निकल रहे यात्रियों में फोटो के आधार पर इरफान और वली मोहम्मद को पहचान लिया. चैन सिंह व उस का साथी नरेंद्र उन पर नजर रखते रहे.

इरफान और वली मोहम्मद जब सुलतान खां व उस के भाई इरफान के साथ उन की स्कौर्पियो में बैठ गए, तो चैन सिंह व उस का साथी अपनी ब्रेजा गाड़ी से उन के पीछेपीछे चलते रहे. बीचबीच में ये लोग अपने साथियों को सूचना भी देते रहे.

दिल्ली से जयपुर वाले नैशनल हाइवे नंबर 8 पर गुड़गांव, धारूहेड़ा, शाहजहांपुर, नीमराना, बहरोड़ हो कर ये लोग कोटपुतली पहुंच गए. कोटपुतली से नीमकाथाना जाने के लिए हाइवे से अलग रास्ता है. नीमकाथाना में बाइपास पर चैन सिंह के बाकी साथी एक कैंपर और एक स्विफ्ट कार में सोना ला रहे इरफान और वली मोहम्मद की स्कौर्पियो गाड़ी का इंतजार कर रहे थे.

दोनों कैरियरों के साथ सुलतान और उस के भाई की स्कौर्पियो गाड़ी जब नीमकाथाना में रेलवे अंडरपास पर पहुंची, तो चैन सिंह के साथियों ने अपनी दोनों गाडि़यां उन की स्कौर्पियो के आगेपीछे लगा कर सुलतान, उस  के भाई इरफान और दोनों कैरियर वली मोहम्मद व इरफान को गाड़ी से नीचे उतार लिया.

बदमाशों ने इन चारों को अपनी कैंपर गाड़ी में बैठा लिया. इन लोगों ने सुलतान की स्कौर्पियो अपने कब्जे में ले ली. रेलवे अंडरपास से ऊपर चढ़ाई पर सुलतान और उस का भाई इरफान बदमाशों से संघर्ष करने लगे, लेकिन दोनों कैरियर चुपचाप बैठे रहे. इस दौरान बदमाशों की गाड़ी की गति धीमी हो गई, तो दोनों कैरियर इरफान व वली मोहम्मद कूद कर भाग निकले. मौका मिलने पर सुलतान भी किसी तरह बच कर भाग निकला.

बदमाशों ने गाड़ी रोक कर उन्हें पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन शहर के बीच और दिन का समय होने के कारण उन्हें फंसने का डर हुआ. इस पर वे सुलतान के भाई इरफान और उन की स्कौर्पियो को ले कर भाग गए.

बाद में सुलतान ने पुलिस को 30 हजार रुपए नकद और इलैक्ट्रौनिक सामान लूटने और इरफान का अपहरण होने की सूचना दी, तो पुलिस ने नाकेबंदी करा दी. नाकेबंदी के दौरान बदमाश हांसनाला मंदिर के पास इरफान और स्कौर्पियो को छोड़ कर भाग गए.

लेकिन स्कौर्पियो में से वह सारा इलैक्ट्रौनिक सामान ले गए, जो इरफान और वली मोहम्मद सऊदी अरब से लाए थे. इसी इलैक्ट्रौनिक सामान में 5 किलोग्राम सोना छिपा कर रखा हुआ था. सुलतान ने पुलिस में जो रिपोर्ट दर्ज कराई, उस में केवल इलैक्ट्रौनिक सामान लूटने की बात कही थी, सोने का जिक्र नहीं किया था.

बाद में चैन सिंह सहित 5 बदमाशों की गिरफ्तारी से 5 किलोग्राम सोने की लूट का भंडाफोड़ हुआ. बाद में पुलिस ने सऊदी अरब से सोना लाने वाले चूरू के बीदासर निवासी इरफान और वली मोहम्मद को भी गिरफ्तार कर लिया. नागौर जिले के मकराना निवासी एक आरोपी नरेंद्र सिंह को भी पुलिस ने बाद में गिरफ्तार किया.

वह दिल्ली एयरपोर्ट से चैन सिंह के साथ ब्रेजा गाड़ी से सुलतान और दोनों कैरियरों का पीछा कर रहा था. इस वारदात में चैन सिंह के साथ मिल कर लूट व अपहरण की वारदात करने वाले कुछ बदमाश कथा लिखे जाने तक फरार थे. पुलिस उन की तलाश कर रही थी.

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सभी पुलिस वालों को मिली पदोन्नति

इस के साथ ही 700 ग्राम सोने के बारे में भी पता किया जा रहा है. पुलिस ने 6 स्पीकर और एक प्रैस में भरा 4 किलो 300 ग्राम सोना ही बरामद किया है. एक स्पीकर खाली मिला था. पुलिस को अंदेशा है कि आरोपियों ने एक स्पीकर में भरा सोना खुर्दबुर्द कर दिया होगा.

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी विजय कुमार उर्फ बिज्जू भाट राजस्थान के कुख्यात अपराधी आनंद पाल के गिरोह से जुड़ा हुआ था. आनंद पाल के एनकाउंटर के बाद वह राजू ठेहठ गैंग से जुड़ गया. वह अवैध हथियारों की सप्लाई भी करता है. बिज्जू के खिलाफ फायरिंग व लूट के 7 मामले दर्ज हैं. वह 5 हजार रुपए का इनामी बदमाश है.

इकबाल उर्फ भाणू खां नागौर जिले के कुचामन थाने का हिस्ट्रीशीटर है. कुचामन और डीडवाना में उस के खिलाफ  9 मुकदमे दर्ज हैं. चैन सिंह के खिलाफ  खुनखुना व लाडनूं थाने में अपहरण, मारपीट व शराब तस्करी के 8 मामले दर्ज हैं. जवान सिंह उर्फ रामस्वरूप चर्चित भढाढर हत्याकांड का मुख्य आरोपी है. वह लूट व डकैती की कई वारदातों में भी शामिल रहा है.

एसपी डा. अमनदीप सिंह कपूर का दावा है कि शेर मोहम्मद हर साल 5 से 7 बार कैरियरों के माध्यम से सऊदी अरब से सोना मंगवाता है. सोने की तस्करी से जुड़े इस मामले की सीबीआई और फेरा को भी जानकारी दी जाएगी. सोना लूट की यह योजना लाल मोहम्मद ने सऊदी अरब में बैठ कर ही बनाई थी, इसलिए उस के खिलाफ  भी काररवाई की जाएगी.

जयपुर रेंज के आईजी एस. सेंगाथिर ने शेखावटी की अब तक की सब से बड़ी सोने की तस्करी का खुलासा करने वाली पुलिस टीम में शामिल नीमकाथाना के डीएसपी रामावतार सोनी, थानाप्रभारी राजेंद्र यादव, साइबर सेल के सबइंसपेक्टर मनीष शर्मा, हैड कांस्टेबल सुभाषचंद, कांस्टेबल कर्मवीर यादव व मुकेश कुमार की पदोन्नति की सिफारिश करने की बात कही है.

चौथापन

लेखक-सरोज दुबे

वह एक कोने में कुरसी पर बैठे कोई किताब पढ़ रहे थे. अचानक उन्होंने ऊब कर किताब एक ओर  रख दी. आंखों  से चश्मा उतार कर मेज पर रख दिया. रूमाल से आंखें साफ कीं और निरुद्देश्य खिड़की  से बाहर की चहलपहल देखने लगे.

‘‘दादाजी, यह कामिक्स पढ़ कर सुनाइए जरा,’’ उन की 10 वर्ष की नातिन अंजू रंगबिरंगी पुस्तकें लिए कमरे में पहुंच गई.

‘‘लाओ, देखें,’’ उन्होंने बड़े चाव से  पुस्तकें ले लीं.

वह पुस्तकों के चित्र तो देख पा रहे थे, किंतु चश्मा लगाने के बाद भी उन पुस्तकों को पढ़ पाना उन्हें बड़ा कठिन लग रहा था. फिर नाम भी क्या थे पुस्तकों के, ‘आग का दरिया’, ‘अंतरिक्ष का शैतान’.

‘‘छि: छि:… ये क्या हैं? अच्छी पुस्तकें पढ़ा करो, बेटे.’’

‘‘अच्छी कौन सी, दादाजी?’’

‘‘जिस पुस्तक से कोई अच्छी बात सीखने को मिले. बच्चों के लिए तो आजकल बहुत सी पत्रपत्रिकाएं  निकलती हैं.’’

‘‘आप नहीं जानते, दादाजी, ये थ्री डायमेंशनल कामिक्स हैं. इन को पढ़ने के लिए अलग से चश्मा मिलता है. यह देखिए.’’

‘‘अरे, यह कोई चश्मा है? लाल पन्नी लगी है इस में तो. इस से आंखें खराब हो जाएंगी. फेंको इसे.’’

‘‘आप को कुछ नहीं मालूम, दादाजी,’’ अंजू ने उपेक्षा से कहा और पुस्तकें ले कर तेजी से बाहर चली गई.

वह अकुलाए से अपनी जगह पर बैठे रह गए और सोचते रहे. शायद वह वर्तमान से कट चुके हैं. उन का जमाना लद चुका था. उन के सिद्धांत, आदर्श ओैर विचार अब अप्रासंगिक हो चुके थे.

अभी कुछ ही दिन पहले की तो बात थी. उन के बेटे मुन्ना  ने भी यही कहा था. हुआ यों था कि उस दिन वह कारखाने में मौजूद थे. नौकर ने एक ग्राहक को बिल दिया तो उन्हें वह बहुत ज्यादा लगा. वह एक प्रकार से ग्राहक को लूटने जैसा ही  था. उन्होंने नौकर को डांट दिया और जोर दे कर उस से बिल में परिवर्तन करने को कहा.

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उसी दिन मुन्ना रात को घर आने के बाद  उन पर बहुत बिगड़ा था, ‘बाबूजी, आप तो बैठेबिठाए नुकसान करवा देते हैं. क्या जरूरत थी आप को  कारखाने में जा कर कीमत कम करवाने की?’

‘मैं ने तो उचित दाम ही लगाए थे, बेटा. वह नौकर बहुत ज्यादा  बिल बना रहा था.’

‘आप बिलकुल नहीं समझते, बाबूजी. इतना बड़ा कारखाना चलाना आज के जमाने में कितना मुश्किल काम है. अब कामगारों को वेतन कितना बढ़ा कर देना पड़ता है, जानते हैं आप? नई मशीन की किश्त हर माह देनी पड़ती है सो अलग. फिर आयकर भी इसी महीने में भरना है.’

उन की दृष्टि में ग्राहकों से मनमाना पैसा वसूल करने का यह कोई उचित तर्क नहीं था, लेकिन वह चुप ही रह गए.

एक बार वह बीमार पड़ गए थे. 2-3 महीने तक कारखाने नहीं जा सके. बस, तभी अचानक मुन्ना ने उन की गद्दी हथिया ली. फिर मुन्ना यह सिद्ध करने की कोशिश करने लगा कि वह व्यापार में उन से अधिक कुशल है.

जहां उन्हें ग्राहक से 4 पैसे वसूल करने में कठिनाई होती थी वहां मुन्ना बड़ी आसानी से 6 पैसे वसूल कर लेता था. उस ने बैंकों से ऋण ले कर अल्प समय में ही नई मशीनें मंगवा ली थीं. किस आदमी से कैसे काम लिया जा सकता है, इस काम में मुन्ना खुद को उन से कहीं अधिक दक्ष होने का दावा करता था.

जब वह स्वस्थ हो कर कारखाने पहुंचे तो उन्होंने देखा कि कारखाने का शासन सूत्र मुन्ना अपने हाथों में दृढ़ता से थामे हुए है. एक बार हाथों में शासन सूत्र  आने के बाद कोई भी उसे सरलता से वापस नहीं करना चाहता.

अब मुन्ना कारखाने के तमाम कार्य अपनी मरजी से करता था. उन की ठीक सलाह भी उसे अपने मामलों में दखलंदाजी लगती थी. मुन्ना अकसर उन्हें एहसास दिलाता था, ‘बाबूजी, डाक्टर ने आप को पूरी तरह आराम करने के लिए कहा है. आप घर पर रह कर ही आराम किया करें. कारखाने का सारा कारोबार मैं संभाल लूंगा. आप बेकार उधर की चिंता किया करते हैं.’

जब उन की पत्नी इंदू जिंदा थी तो उस का भी यही विचार था. वह प्राय: कहा करती थी, ‘आज नहीं तो कल, मुन्ना को ही तो संभालना है कारखाना. वह व्यापार को बढ़ा ही रहा है, घटा तो नहीं रहा? वैसे भी अब लड़का बड़ा हो गया है. बाप का जूता उस के पैर में आने लगा है. उन्हें खुद आगे हो कर मुन्ना को कारोबार सौंप देना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार आदमी को चौथेपन में सांसारिक झंझटों से संन्यास ले लेना चाहिए.’

और इस तरह बीमारी के दौरान अकस्मात ही उन की इच्छा के विरुद्ध कारखाने से उन का निष्कासन हो गया था.

उन्होंने एक नजर नाश्ते की प्लेट पर डाली. आज फिर घर का नौकर बड़ी उपेक्षा से उन के सामने सिर्फ मक्खन लगे स्लाइस रख गया था. उन के अंदर ही अंदर कुछ घुटने सा लगा था, ‘यह भी कोई नाश्ता है? बाजार से डबलरोटी मंगवाई और चुपड़ दिया उस पर जरा सा मक्खन.’

जब इंदू थी तब उन के लिए बीसियों तरह के तो लड्डू ही बनते थे घर में. मूंग के, मगज के, रवे के वगैरहवगैरह. मठरी, सेव और कई तरह के नमकीन भी परोसे जाते थे उन के आगे. पकवानों का तो कोई हिसाब ही नहीं था और अब मात्र मक्खन लगे डबलरोटी के टुकड़े.

वह खीज उठे और उठ कर सीधे अंदर गए, ‘‘बरसात में डबलरोटी क्यों मंगवाती हो, बहू? घर में ही कुछ मीठा या नमकीन बना लिया करो. कल जो डबलरोटी आई थी उस में फफूंद लगी हुई थी.’’

‘‘डाक्टर ने उन्हें अधिक घीतेल खाने की मनाही कर दी है. अगर आप को डबलरोटी पसंद नहीं है तो आप के लिए दूसरा इंतजाम हो जाएगा,’’ बहू ने रूखेपन से जवाब दिया.

दूसरे दिन उन के लिए जो नाश्ता लगाया गया वह होटल से मंगवाया गया था. एक प्लेट में बेसन का लड्डू तथा थोड़ा सा चिड़वा था. बरसात के कारण चिड़वा बिलकुल हलवा बन गया था. लड्डू बेशक स्वादिष्ठ था, परंतु उस में वनस्पति घी इतनी अधिक मात्रा में था कि खाने के बाद उन्हें बहुत देर तक खट्टी डकारें आती रही थीं.

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वह अपने हालात से परेशान हो कर कई बार सोचते थे कि त्रिवेणी उन के पास रहती तो बड़ा सुविधाजनक होता. वह उन के खानेपीने का कितना खयाल करती थी. भैयाभैया कहते उस की जबान नहीं थकती थी.

सच  पूछो तो अपनी पत्नी इंदू की मौत का आघात वह उसी के सहारे सहन कर गए थे. त्रिवेणी के रहते उन्हें कभी एकाकीपन का एहसास नहीं सालता था.

सब से बड़ी बात यह थी कि तब मुन्ना के उपेक्षित रूखेपन, बहू की अपमानजनक तेजमिजाजी और नाती- नातिनों की बदतमीजियों की ओर उन का ध्यान ही नहीं जाता था. वह तो त्रिवेणी को भेजना ही नहीं चाहते थे, लेकिन बहू ने मुन्ना के ऐसे कान भरे कि उस का घर में रहना असंभव कर दिया.

एक दिन वह शाम की सैर को पार्क की दिशा में जा रहे थे कि मुन्ना ने कार उन के सामने रोक दी, ‘‘आइए, बाबूजी, मैं छोड़ दूं आप को पार्क तक.’’

वह कहना चाहते थे, ‘भाई, पार्क है ही कितनी दूर? मैं घूमने ही तो निकला हूं. खुद चला जाऊंगा,’ पर चाह कर भी कुछ न बोल सके और चुपचाप कार में बैठ गए.

मुन्ना ने जोर से कार का दरवाजा बंद किया. फिर कार चल दी. मुन्ना ने अचानक पूछ लिया, ‘‘बाबूजी, बूआ यहां कब तक रहेंगी?’’

वह चौंके, ‘‘क्यों बेटा? उस से तुम्हें क्या तकलीफ है?’’

‘‘तकलीफ की बात नहीं है, बाबूजी. मां के मरने पर बूआजी आईं तो फिर वापस गईं ही नहीं.’’

‘‘वह तो मैं ही उसे रोके हुए हूं बेटा. फिर उस पर ऐसी कोई बड़ी जिम्मेदारी अभी नहीं है. सो वह हमारे यहां ही रह लेगी.’’

‘‘लेकिन हम उन की जिम्मेदारी कब तक उठाएंगे? उन के अपने बेटाबहू हैं. उन्हें उन के पास ही रहना चाहिए. फिर वह यहां तरीके से रहतीं तो कोई बात नहीं थी पर वह तो हमेशा आप की बहू ममता पर रोब गांठती रहती हैं.’’

मुन्ना के शब्दों ने ही नहीं उस के स्वर ने भी उन्हें आहत कर दिया था. वह जानते थे कि त्रिवेणी पर लगाया गया आरोप झूठा है. आखिर त्रिवेणी उन की एकमात्र बहन है. वह उसे बचपन से जानते हैं. ममता उस के विषय में ऐसी बात कह ही नहीं सकती थी. लेकिन वह चाह कर भी मुन्ना से अपना विरोध प्रकट नहीं कर सके थे. वह जानते थे कि मुन्ना और बहू अब त्रिवेणी को घर में शांति से नहीं रहने देंगे. उसी को ले कर हर समय कलह मची रहेगी. बातबात पर त्रिवेणी को अपमानित किया जाता रहेगा. वह यह ज्यादती सहन नहीं कर सकेंगे. इसीलिए उन्होंने त्रिवेणी को भेज दिया था.

त्रिवेणी चली गई थी. जिस दिन वह गई, उस दिन उन्हें ऐसा लगा मानो इंदू की मौत अभीअभी हुई हो. कितने ही दिनों तक वह अनमने से रहे थे. अब उन्हें पूछने वाला कोई न था. सुबह की चाय के लिए भी तरस जाते थे. वह बारबार बच्चों द्वारा बहू के पास संदेश भेजते रहते, पर वह संदेश अकसर बीच में ही गुम हो जाता था. थक कर वह खुद रसोईघर के द्वार पर जा कर दस्तक देते. जवाब में बहू का तीखा स्वर सुनाई देता, ‘‘आप को चाय नहीं मिली? अंजू से कहा तो था मैं ने. ये बच्चे ऐसे बेहूदे हो गए हैं कि बस… अकेला आदमी आखिर क्याक्या करे? मैं तो काम करकर के मर जाऊंगी, तब ही शांति मिलेगी सब को.’’

वह अपराधी की तरह मुंह लटकाए अपने कमरे में लौट आते थे.

भोजन के समय भी अकसर ऐसा ही तमाशा होता था. कई बार उन के मुंह का कौर विष बन जाता था. पर उस जहर को निगल लेने की मजबूरी उन की जिंदगी की विडंबना बन गई थी.

सुबह के समय वह कितनी ही देर तक गरम पानी के अभाव में बिना नहाए बैठे रहते थे. अब त्रिवेणी तो घर में थी नहीं कि सुबह जल्दी उठ कर गीजर चला देगी. बहू उठती थी पूरे 7 बजे के बाद और नौकर 8 बजे तक आता था.

जब तक पानी गरम होता था, स्नानघर में पहले ही कोई दूसरा व्यक्ति स्नान के लिए घुस जाता था. भला उन्हें कौन सा काम था? उन के जरा देर से नहाने से कौन सा अंतर पड़ जाता. बहू, बच्चे, मुन्ना सब को जल्दी थी, सब कामकाजी आदमी थे. बस, वही बेकार थे.

वह इंतजार में इधरउधर टहलते हुए बारबार नौकर से पूछते रहते थे, ‘‘गोपाल, क्या स्नानघर खाली हो गया?’’

‘‘स्नानघर खाली हो जाएगा तो मैं खुद बता दूंगा आप को, दादाजी,’’ नौकर भी मानो बारबार एक ही प्रश्न पूछे जाने पर उकता कर कह देता था.

और केवल नहानेखाने की ही तो बात नहीं थी. घर की हर गतिविधि में उन्हें पंक्ति के सब से आखिर में खड़ा कर दिया जाता था. घर में उन के दुखसुख का साथी कोई नहीं था.

एक दिन अचानक उन के सिर में भयंकर पीड़ा होने लगी. बड़ा नाती मुकेश कमरे में अपना बल्ला रखने आया. उन्होंने उसे पकड़ कर चापलूसी की, ‘‘बेटे, जरा मेरा सिर तो दबाना. बड़ा दर्द हो रहा है.’’

मुकेश ने अनिच्छा से 2-4 हाथ सिर पर मारे और तत्काल उठ खड़ा हुआ. वह घबरा कर कराहे, ‘‘अरे बस, जरा और दबा दे.’’

‘‘मेरे हाथ दुखते हैं, दादाजी.’’

वह दंग रह गए. फिर दूसरे ही क्षण तमक कर बोले, ‘‘बूढ़े दादा की सेवा करने में तुम्हारे हाथ टूटते हैं? आने दे मुन्ना को.’’

मुकेश ढिठाई से मुसकराता हुआ चला गया. वह पड़ेपड़े मन ही मन कुढ़ते रहे थे. उन्हें अपना बचपन याद आने लगा था. वह कितनी सेवा करते थे अपने बाबा की. रोजाना रात को नियम से उन के हाथपैर दबाया करते थे. बाबा उन्हें अच्छीअच्छी कहानियां सुनाया करते थे.

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बाबा की याद आई तो उन्हें एहसास हुआ कि आज जमाना कितना बदल गया है. मजाल थी तब परिवार के किसी सदस्य की कि बाबा की बात को यों टाल देता.

भोजन के बाद मुन्ना उन के कमरे में आया. पूछा, ‘‘बाबूजी, सुना है, आप ने खाना नहीं खाया है आज?’’

‘‘इच्छा नहीं थी, बेटा. सिर अभी तक बहुत पीड़ा कर रहा है. शायद बुखार आ कर ही रहेगा.’’

वह मुकेश की गुस्ताखी की चर्चा करना चाहते थे, लेकिन कुछ सोच कर चुप रह गए थे. वह जानते थे कि मुन्ना सब कुछ सुन कर तपाक से कहेगा, ‘‘अरे बाबूजी, क्यों बच्चों के मुंह लगते हैं? नौकर से कह दिया होता. वह दबा देता आप का सिर.’’

लेकिन प्रश्न यह था कि क्या नौकर खाली बैठा रहता था उन के लिए? दूध लाओ, सब्जी लाओ, बच्चों को ट्यूशन पढ़ने के लिए छोड़ कर आओ, बहू और बच्चों के कमरे साफ करो, रसोई धोओ. हजार काम थे उस के लिए. वह भला उन का काम कैसे करता?

‘‘दर्द निवारक टिकिया मंगवाई थी न आप ने? 2 गोलियां एकसाथ खा लीजिए. तुरंत आराम आ जाएगा. मैं सुबह डाक्टर को बुलवा कर दिखवा दूंगा. अच्छा, मैं चलता हूं. अगर रात में ज्यादा तकलीफ हो तो हमें आवाज दे दीजिएगा,’’ कह कर मुन्ना चल दिया था.

मुन्ना के पहले उन की 2 बेटियां और थीं. वह सोचते थे कि बेटियां तो पराया धन होती हैं. दूसरे घर चली जाएंगी. उन का बेटा मुन्ना ही बुढ़ापे में उन की सेवा करेगा. उस की बहू आ जाएगी तो वह उन की सेवा करेगी. फिर नातीनातिन हो जाएंगे तो वे बाबाबाबा कहते हुए उन के आगेपीछे घूमेंगे. मुन्ना बचपन में आए- दिन बीमार पड़ जाता था. उन्होंने उस की बड़ी सेवा की थी और धन भी खूब लुटाया था. न जाने कितने दवाखानों की धूल छानी थी. न जाने कितनी मनौतियां मानी थीं. न जाने कितनी रातें जागते हुए गुजार दी थीं. अब उस का रवैया देख कर लगता था कि उन्होंने कितना बड़ा भ्रम पाल लिया था. वह भी कैसे पागल थे.

उन का शरीर बुखार से तप रहा था. कुछ देर तक मुन्ना के कमरे से डिस्को संगीत का शोर और बच्चों के हंगामे की कर्णभेदी आवाजें आती रहीं और उन का सिर दर्द से फटता रहा. फिर खामोशी छा गई. कमरे के सन्नाटे में छत के पंखे की खड़खड़ाहट गूंजती रही. उन्हें लेटेलेटे बारबार यह खयाल सताता रहा कि बहू बेटे को उन से कोई हमदर्दी नहीं है. बहू ने तो एक बार भी आ कर नहीं पूछा उन की तबीयत के विषय में.

एकाएक उन्हें अपना गला सूखता सा महसूस हुआ. लो, कमरे में पानी रखवाना तो वह भूल ही गए थे. अब क्या करें? वह उस बुखार में उठ कर रसोई तक कैसे जा सकेंगे? अचानक उन की नजर शाम को पानी से भर कर खिड़की पर रखे गिलास पर गई. उन्होंने उठ कर वही पानी पी लिया.

वह मन की घबराहट को दूर करने के लिए खिड़की के पास ही खड़े हो गए और सूनी सड़क पर चल रहे इक्कादुक्का लोगों को देखने लगे. काश, वह उन्हें आवाज दे पाते, ‘‘आओ, भाई, मेरे पास बैठो थोड़ी देर के लिए. मेरा मन बहुत घबरा रहा है. कुछ अपनी कहो, कुछ मेरी सुनो.’’

सहसा वह पागलों की तरह हंस पड़े अपने पर. ‘अरे, जिसे छोटे से बड़ा किया, पढ़ायालिखाया, अपने जीवन भर की कमाई सौंप दी, वह बेटा तो चैन की नींद सो रहा है. भला ये अपरिचित लोग अपना काम- धंधा छोड़ कर मेरे पास क्यों बैठने लगे? वह फिर से पलंग पर आ कर लेट गए.’

उन्हें याद आया कि कैसे दिनरात मेहनत कर के उन्होंने कारखाना खड़ा किया था, किस तरह मशीनें खरीदी थीं, किस तरह कारखाने की नई इमारत तैयार की थी, धूप में घूमघूम कर, भूखेप्यासे रहरह कर, देर रात तक जागजाग कर वह किस तरह काम में लगे रहते थे. किस के लिए? मुन्ना के लिए ही तो. अपने परिवार के सुख के लिए ही तो? जिस में वह खुद भी शामिल थे.

अब कहां गया वह सुख? उन के परिवार ने क्या कीमत रखी है उन की या उन के सुख की? वह सब के सामने इतने दीनहीन क्यों बन जाते हैं? क्या वह मुन्ना की कमाई पर पल रहे हैं? क्यों खो दी उन्होंने अपनी शक्ति? नहीं, बहुत हो चुका, वह अब और नहीं सहेंगे.

वह आवेश में उठ कर बैठ गए. क्षण भर में ही उन का शरीर पसीने से लथपथ हो गया. दूसरे दिन सुबह मुन्ना सपरिवार नाश्ता कर रहा था, तभी गोपाल ने आ कर सूचना दी, ‘‘भैयाजी, नाश्ते के बाद आप को दादाजी ने अपने कमरे में बुलाया है.’’

मुन्ना ने नाश्ते के बाद उन के कमरे में जा कर देखा कि वह पलंग पर बैठे कोई किताब पढ़ रहे हैं.

‘‘आओ, मुन्ना बैठो,’’ उन्होंने सामने पड़ी कुरसी की ओर संकेत किया. जाने कितने वर्षों के बाद उन्होंने उसे ‘मुन्ना’ कह कर एकदम सीधे संबोधित किया था.

‘‘कैसी तबीयत है आप की?’’

‘‘तबीयत तो ठीक है. मैं ने एक दूसरी ही चर्चा के लिए तुम्हें बुलवाया था.’’

‘‘कहिए.’’

‘‘यहां इस घर में पड़ेपड़े अब मेरा मन नहीं लगता. स्वास्थ्य भी बिगड़ता रहता है. बेकार पड़ेपडे़ तो लोहा भी जंग खा जाता है, फिर मैं तो हाड़मांस का आदमी हूं. मैं चाहता हूं कि घर से निकलूं और…’’

‘‘इन दिनों मैं भी यही सोच रहा था, बाबूजी,’’ मुन्ना ने उन की बात पूरी होने से पहले ही उचक ली और बड़े निर्विकार भाव से बोला, ‘‘आप का चौथापन है. इस उम्र में लोग वानप्रस्थी हो जाते हैं, घरसंसार को तिलांजलि दे देते हैं. आप भी हरिद्वार चले जाइए और वहां किसी आश्रम में रह कर भगवान की याद में बाकी जीवन बिता दीजिए.’’

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सुनते ही उन्हें जोरों का गुस्सा आ गया. वह क्रुद्ध शेर की तरह गरज उठे, ‘‘मुन्ना, क्या तू ने मुझे उन नाकारा और निकम्मे लोगों में से समझ लिया है, जिन के आगे अपने जीवन का कोई महत्त्व ही नहीं है. अभी मेरे हाथपांव चलते हैं. दुनिया में बहुत से अच्छे काम हैं करने के लिए. मैं घर में निठल्ला नहीं पड़ा रहना चाहता. घर से बाहर निकल कर समाज- सेवा करना चाहता हूं.’’

‘‘तो फिर कीजिए समाजसेवा. किस ने रोका है?’’

‘‘हाथपैरों से तो करूंगा ही समाज- सेवा, मगर उस के लिए कुछ धन भी चाहिए, इसलिए मैं चाहता हूं कि तुम कम से कम 1 हजार रुपए महीना मुझे जेब- खर्च के तौर पर देते रहो.’’

मुन्ना के कान खड़े हो गए, ‘‘1 हजार रुपए, किसे लुटाएंगे इतने पैसे आप?’’

हमेशा की तरह वह कमजोर नहीं पड़े, झुके भी नहीं, बल्कि वह मुन्ना से आंखें मिला कर बोले, ‘‘इस से तुम्हें क्या? त्रिवेणी को भी मैं अपने साथ रखना चाहता हूं. दे सकोगे न तुम मुझे मेरा खर्च?’’

‘‘कैसे दे पाऊंगा, बाबूजी, इतना पैसा? अभी जो मुंबई से नई मशीन मंगवाई हैं, उस का पैसा भी भेजना बाकी है.’’

‘‘तुम खुद मुझे इन झगड़ों से दूर कर चुके हो. यह देखना तुम्हारा काम है. मैं भी कोई मतलब नहीं रखना चाहता कारोबारी बखेड़ों से. मैं इतना जानता हूं कि यह कारखाना मेरा है और मैं चाहूं तो इसे बेच भी सकता हूं या किसी के भी सुपुर्द कर सकता हूं, लेकिन मैं ऐसा नहीं करना चाहता. मेरा तो इतना ही कहना है कि जब तुम लोगों के खर्च के लिए हजारों रुपए महीना निकल सकते हैं तो क्या मेरे लिए 1 हजार रुपए महीना भी आसानी से नहीं निकल सकते? आखिर मैं ने भी बरसों कारखाना चलाया है और अभी भी चलाने की हिम्मत रखता हूं. तुम से नहीं संभलता तो मुझे सौंप दो फिर से.’’

मुन्ना कोई उत्तर नहीं दे सका. वह सिर झुकाए बैठा रहा. कमरे का वातावरण बोझिल हो चला था. फिर मुन्ना ने ही धीरे से कहा, ‘‘अच्छा होता, बाबूजी, आप हरिद्वार…’’

‘‘नहीं, बेटा, मैं जिंदा इनसान हूं. कोई मुरदा नहीं कि हरिद्वार जा कर किसी आश्रम की कब्र में दफन हो जाऊं या घर में समाधि ले कर बैठा रहूं. तुम अपने ढंग से जीना चाहते हो, तो मैं अपने ढंग से.’’

‘‘अच्छा,’’ मुन्ना उठ कर बाहर जाने लगा. उन्होंने उन्नत मस्तक को उठा कर देखा कि वह अब भी सिर नीचा किए कमरे से बाहर जा रहा था.

गरमी में दिखा ‘Bigg boss’ की एक्स कंटेस्टेंट का ग्लैमरस अवतार

डांस इंडिया डांस रिएलिटी पौपुलर होने वाली लौरेन गौटलिब सोशल मीडिया पर हमेशा अपनी फोटोज के कारण चर्चाओं में रहती हैं. लौरेन गौटलिब अमेरिकन-इंडियन मौडल और डांसर है. लौरेन को फिल्म एबीसीडी 2 में देखा गया था जिससे उनको खासी पौपुलेरिटी मिली थी. लौरेन के डांस मूव्ज को देखकर सभी चौक जाते हैं. पहले डांस और फिर एंक्टिंग, लौरेन ने हमेशा खुद को प्रूव किया. शायद यही कारण हैं की लौरेन की फैन फौलोविंग में कमी नहीं आई.

 

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Discovered the beach in NY….another New York Win!!! ☀️👙😛💦

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बोल्ड लुक में लौरेन

लौरेन आए दिन अपनी कई बोल्ड फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं. उनको फोटोज क्लिक करने का बड़ा शौक हैं और इंस्टाग्राम की ये फोटोज इस बात का सबूत हैं. कभी लौरेन सोफे पर खड़े होकर पोज देती, तो कभी भरी दोपहरी में ही स्वीमिंग पूल में चिल करती नजर आती. लौरेन के फैंस इन फोटोज को खासा पसंद कर रहे हैं. लौरेन जहां भी जाती है, वहां पर वह फोटोज क्लिक करवाना नहीं भूलती हैं.

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लौरेन की हौट फोटोज

लौरेन ने बालकनी में खड़े होकर ये बोल्ड फोटो को क्लिक कराया. इस फोटो में वो काफी रिलेक्स्ड नजर आ रही है. लौरेन ने एक और फोटो शेयर की थी जिसमें वो रेड ड्रेस में पौप कौर्न खाती और सेक्सी पौज देती नजर आई.

 

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▪️🌪Swipe left at your own risk 🌪▪️

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सालों पहले किया भारत की ओर रुख

लौरेन सालों पहले ही भारत आ गई थी. उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत छोटे परदे के रिएलिटी शो ‘ So you think you can dance’  से 2005 में की. इसके बाद भी उन्होंने कई और के रिएलिटी शो में भी पार्ट लिया. इसके साथ ही लौरेन ने बौलीवुड में भी कई फिल्में की हैं. साल 2008 में आई हौलीवुड फिल्म ‘Disaster Movie’ से फिल्म डेब्यू किया पर उनको पहचान मिली बौलीवुड फिल्म ‘ABCD-2’ से.  बता दे की लौरेन ‘ABCD’ में भी थी.

 

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Throwback 💋💥❤️ Ang Laga De part 2 / Style – #KamaSutra / #Jhalak / @colorstv / @salmanyusuffkhan

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i will always be unapologetically me – Lauren Gottlieb

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‘हेट स्टोरी’ गर्ल का हौट बिकनी अवतार, फोटोज वायरल

इरोटिक फिल्म‘‘हेट स्टोरी 4’’में एक्टिंग कर अपनी एक अलग पहचान बना चुकी इहाना ढिल्लों हाल ही में माही द्वीप सेशेल्स में मौज मस्ती करते हुए नजर आयी. अपने टाइम को एंजौय करती इहाना की फोटोज सोशल मीडिया में काफी पसंद की जा रही हैं.इन फोटोज में इहाना बिकनी अवतार में जेट स्की की सवारी कर रही हैं. रेड और ब्लू टू पीस बिकनी पहने,आंखों में चश्मा लगाए इहाना ढिल्लों काफी हौट लग रही हैं.

पंजाबी फिल्म से बौलीवुड तक

इहाना ढिल्लों ने पंजाबी फिल्म ‘डैडी कूल मुंडे फूल’,‘टाइगर’ और ‘ठग लाइफ’जैसी तीन फिल्मों में काम करने के बाद 2018 में ‘टी-सीरीज निर्मित और विशाल पंड्या निर्देशित इरोटिक फिल्म‘‘हेट स्टोरी 4’’से बौलीवुड में कदम रखा था. इस फिल्म में इहाना का  एक गाना बेहद पौपुलर हुआ था जिसमें उनके और विवान के बीच काफी बोल्ड सीन दिखाएं गये थे.

 

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Throw me into the wolves and I’ll come back leading the pack 🖤

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‘‘हेट स्टोरी 4’’ से मिली पहचान

इस फिल्म में इहाना ढिल्लों के साथ ही उर्वशी रौतेला,विवान भटीना और करण वाही भी लीड रोल में थे. इस इरोटिक फिल्म में इहाना ढिल्लो ने कारपोरेट लेडी रिशमा का किरदार निभाया था. जो कि बदला लेने के लिए अपने प्रेमी आर्यन (विवान भटीना)की हत्या करने जाती है,जहां आर्यन और उसकी दूसरी प्रेमिका ताशा  (उर्वषी रौतेला)मौजूद है. छीना छपटी में रिशमा खुद  ही गोली का शिकार हो जाती है.

जल्द नजर आयेंगी पंजाबी फिल्म में

इन दिनों इहाना ढिल्लों पंजाबी फिल्म‘‘गुलाम’’के अलावा  शैलेश वर्मा के निर्देशन में फिल्म ‘‘नास्तिक’’कर रही हैं. इस फिल्म में इहाना सिर्फ आइटम नंबर करते हुए नजर आएंगी. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन मेहमान कलाकार हैं.

 

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You just have to trust your own madness 💕 #Shootdiaries💞 #BTS

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Edited By – Neelesh Singh Sisodia 

देवी की कृपा…

लेखक- नीलिमा टिक्कू

‘‘रमियाजी, रुकिए,’’ कानों में मिश्री घोलता मधुर स्वर सुन कर कुछ देर के लिए रमिया ठिठक गई फिर अपने सिर को झटक कर तेज कदमों से चलते हुए सोचने लगी कि उस जैसी मामूली औरत को भला कोई इतनी इज्जत से कैसे बुला सकता है, जिस को पेट का जाया बेटा तक हर वक्त दुत्कारता रहता है और बहू भड़काती है तो बेटा उस पर हाथ भी उठा देता है. बाप की तरह बेटा भी शराबी निकला. इस शराब ने रमिया की जिंदगी की सुखशांति छीन ली थी. यह तो लाल बंगले वाली अम्मांजी की कृपा है जो तनख्वाह के अलावा भी अकसर उस की मदद करती रहती हैं. साथ ही दुखी रमिया को ढाढ़स भी बंधाती रहती हैं कि देवी मां ने चाहा तो कोई ऐसा चमत्कार होगा कि तेरे बेटाबहू सुधर जाएंगे और घर में भी सुखशांति छा जाएगी.

तभी किसी ने उस के कंधे पर हाथ स्वयं रखा, ‘‘रमिया, मैं आप से ही कह रही हूं.’’

हैरानपरेशान रमिया ने पीछे मुड़ कर देखा तो एक युवती उसे देख कर मुसकरा रही थी.

हकबकाई रमिया बोल उठी, ‘‘आप कौन हैं? मैं तो आप को नहीं जानती… फिर आप मेरा नाम कैसे जानती हैं?’’

युवती ने अपने दोनों हाथ आसमान की तरफ उठाते हुए कहा, ‘‘सब देवी मां की कृपा है. मेरा नाम आशा है और हमारी अवतारी मां पर माता की सवारी आती है. देवी मां ने ही तुम्हारे लिए कृपा संदेश भेजा है.’’

रमिया अविश्वसनीय नजरों से आशा को देख रही थी. उस ने थोड़ी दूर खड़ी एक प्रौढ़ महिला की तरफ इशारा किया जोकि लाल रंग की साड़ी पहने थी और उस के माथे पर सिंदूर का टीका लगा हुआ था.

रमिया के पास आ कर अवतारी मां ने आशीर्वाद की मुद्रा में अपना दायां हाथ उठाया. उन की आंखों से आंसू बहने लगे. उन्होंने रमिया को खींच कर अपने गले  लगा लिया और बड़बड़ाने लगीं :

‘‘मैं जानती हूं कि तू बहुत दुखी है. तुझे न पति से सुख मिला न बेटेबहू से मिलता है. शराब ने तेरी जिंदगी को कभी सुखमय नहीं बनने दिया. लेकिन तेरी भक्ति रंग ले आई है. माता का संदेशा आया है. वह तुझ से बहुत प्रसन्न हैं. अब तेरा बेटा सोहन व तेरी बहू कमली तुझे कभी तंग नहीं करेंगे.’’

रमिया हतप्रभ रह गई. देवी मां चमत्कारी हैं यह तो उस ने सुना था पर उन की ऐसी कृपा उस अभागी पर होगी ऐसा सपने में भी उस ने नहीं सोचा था.

अवतारी ने मिठाई का एक डब्बा उसे देते हुए कहा, ‘‘क्या सोचने लगी? तुझे तो खुश होना चाहिए कि मां की तुझ पर कृपा हो गई है. और हां, मैं केवल माता के भक्तों से ही मिलती हूं, नास्तिकों से नहीं. चल, पहले इस डब्बे में से प्रसाद निकाल कर खा ले और इस में कुछ रुपए भी रखे हैं. तू इन रुपयों से अपनी नातिन ऊषा की शादी के लिए जो सामान खरीदना चाहे खरीद लेना.’’

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आश्चर्य में डूबी रमिया ने भक्तिभाव से ओतप्रोत हो डब्बे की डोरी खोली तो उस में तरहतरह की मिठाइयां थीं. एक लिफाफे में 100 रुपए के 10 नोट भी थे. रमिया ने एक टुकड़ा मिठाई का मुंह में डाला और भावावेश में अवतारी के पैर छूने चाहे लेकिन वह तो जाने कहां गायब हो चुकी थीं.

रमिया की नातिन ऊषा का ब्याह होने वाला था. लाल बंगले वाली अम्मांजी ने दया कर के उसे 200 रुपए दे दिए थे. उसी से वह नातिन के लिए साड़ीब्लाउज खरीदने बाजार आई थी. पर यहां देवी कृपा से मिले रुपयों से रमिया ने नातिन के लिए बढि़या सी साड़ी खरीदी, एक जोड़ी चांदी की पायल व बिछुए भी खरीदे. उस के पास 400 रुपए बच भी गए थे. इस भय से रमिया सीधे घर नहीं गई कि बेटेबहू पैसा व सामान ले लेंगे.

सारा सामान अम्मांजी के पास रखने का निश्चय कर रमिया रिकशा कर के लाल बंगले पहुंच गई. उस ने बंगले की घंटी बजाई तो उसे देख कर अम्मांजी हैरान रह गईं.

‘‘रमिया, तू बाजार से इतनी जल्दी आ गई?’’

‘‘हां, अम्मांजी,’’ कहती वह अंदर आ गई. रमिया के हाथ में शहर के मशहूर मिष्ठान भंडार का डब्बा देख कर अम्मांजी हैरान रह गईं.

‘‘क्या तू ने नातिन के लिए सामान लाने के बजाय मेरे दिए पैसों से मंदिर में इतना महंगा प्रसाद चढ़ा दिया?’’

रमिया चहकी, ‘‘अरे, नहीं अम्मांजी, अब आप से क्या छिपाना है. आप तो खुद ‘देवी मां’ की भक्त हैं…’’ और फिर रमिया ने सारी आपबीती अम्मांजी को ज्यों की त्यों सुना दी.

रमिया की बात सुन कर सावित्री देवी चकित रह गईं. रमिया जैसी गरीब और मामूली औरत को भला कोई बेवकूफ क्यों बनाएगा…फिर इतना सबकुछ दे कर वह औरत तो गायब हो गई थी. निश्चय ही रमिया पर देवी की कृपा हुई है. पल भर के लिए सावित्री देवी को रमिया से ईर्ष्या सी होने लगी. वह कितने सालों से देवी के मंदिर जा रही हैं पर मां ने उन पर ऐसी कृपा कभी नहीं की.

सावित्री देवी पुरानी यादों में खो गईं. उन का बेटा मनोज  7वीं कक्षा में पढ़ता था. गणित की परीक्षा से एक दिन पहले वह रोने लगा कि मां, मैं ने गणित की पढ़ाई ठीक से नहीं की है और मैं कल फेल हो जाऊंगा.

‘बेटा, मेरे पास एक मंत्र है’ उन्होंने पुचकारते हुए कहा, ‘तू इस को 108 बार कागज पर लिख ले. तेरा पेपर जरूर अच्छा हो जाएगा.’

मनोज मंत्र लिखने लगा. थोड़ी देर बाद मनोज के पिता कामता प्रसाद फैक्टरी से आ गए. बेटे को गणित के सवाल हल करने के बजाय मंत्र लिखते देख वह गुस्से से बौखला उठे और जोर से एक थप्पड़ मनोज के गाल पर दे मारा. साथ ही पत्नी सावित्री को जबरदस्त डांट पड़ी थी.

‘देखो, तुम अपने मंत्रतंत्र, चमत्कार के जाल में उलझे रहने के बेहूदा शौक पर लगाम लगाओ. अपने बच्चे के भविष्य के साथ मैं तुम्हें किसी तरह का खिलवाड़ नहीं करने दूंगा. दोबारा ऐसी हरकत की तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’

उस दिन के बाद सावित्री ने मनोज को अपनी चमत्कारी सलाह देनी बंद कर दी थी. मनोज पिता की देखरेख में रह कर मेहनतकश नौजवान बन गया था. वहीं सावित्री की सोच ने उसे नास्तिक मान लिया था.

मनोज का विवाह अंजना से हुआ था. अंजना एक पढ़ीलिखी सुशील लड़की थी. पति व ससुर के साथ उस ने भी फैक्टरी का कामकाज संभाल लिया था. अपने विनम्र व्यवहार से उस ने सास को कभी शिकायत का कोई मौका नहीं दिया था लेकिन बहू के साथ रोज मंदिर जाने की उन की हसरत, अधूरी ही रह गई थी. अंजना पूजापाठ से पूरी तरह विरक्त एकएक पल कर्म में समर्पित रहने वाली युवती थी.

मनोज के विवाह को 5 साल हो गए थे. सावित्री एक पोती व पोते की दादी बन चुकी थीं. तभी अचानक हुए हृदयाघात में पति का देहांत हो गया. पिता के जाने के बाद मनोज और अंजना पर फैक्टरी का अतिरिक्त भार पड़ गया था. दोनों सुबह 10 बजे फैक्टरी जाते और रात 7-8 बजे तक घर आते. इसी तरह सालों निकल गए.

सावित्री की पोती अब एम.बी.ए. करने अहमदाबाद गई थी और पोता आई.आई.टी. की कोचिंग के लिए कोटा चला गया था. वह दिन भर घर में अकेली रहती थीं. ऐेसे में रमिया का साथ उन को राहत पहुंचाता था. वह रोज रमिया को ले कर ड्राइवर के साथ मंदिर जाती थीं. मंदिर से उन्हें घर छोड़ने के बाद ड्राइवर दोबारा फैक्टरी चला जाता था. रमिया सब को रात का खाना खिला कर अपने घर जाती थी.

‘‘अम्मांजी, क्या सोचने लगीं’’ रमिया का स्वर सुन कर सावित्री देवी की तंद्रा भंग हुई, ‘‘यह देखो, मैं ने कितनी सुंदर साड़ी, पायल व बिछुए खरीदे हैं लेकिन ये सबकुछ आप अपने पास ही रखना. जब विवाह में जाऊंगी तब यहीं से ले जाऊंगी.’’

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रमिया खुशीखुशी घर के कामों में लग गई. सावित्री कुछ देर तक टेलीविजन देखती रही फिर जाने कब आंखें बंद हुईं और वह सो गईं.

उस दिन रात को जब रमिया अपने घर पहुंची तो यह देख कर हैरान रह गई कि घर में अजीब सी शांति थी. उसे देख कर बहू ने रोज की तरह नाकभौं नहीं सिकोड़ी बल्कि मुसकान बिखेरती उस के पास आ कर बड़े अपनेपन से बोली, ‘‘अम्मां, दिनभर काम कर के आप कितना थक जाती होंगी. मैं ने आज तक कभी आप का खयाल नहीं रखा. मुझे माफ कर दो.’’

आज बेटे ने भी शराब नहीं पी थी. वह भी पास आ कर बैठ गया और बोला, ‘‘मां, तू इतना काम मत किया कर. हम दोनों कमाते हैं. क्या तुझे खाना भी नहीं खिला सकते? क्या जरूरत है तुझे सुबह से रात तक काम करने की?’’

रमिया को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो पा रहा था. सचमुच आज सुबह से चमत्कार पर चमत्कार हो रहा था. यह सोच कर उस की आंखें भर आईं कि बेटेबहू ने आज उस की सुध ली है. स्नेह व अपनेपन की भूखी रमिया बेटेबहू का माथा सहलाते हएु बोली, ‘‘तुम्हें मेरी इतनी चिंता है, देख कर अच्छा लगा. सारा दिन घर में पड़ीपड़ी क्या करूं. काम पर जाने से मेरा मन लग जाता है.’’

दूसरे दिन सुबह जब रमिया ने अपने बेटेबहू के सुधरते व्यवहार के बारे में अम्मांजी को बताया तो वह भी हैरान रह गईं.

रमिया बोली, ‘‘अम्मांजी, मुझे लगता है देवी मां खुद ही इनसान का रूप धारण कर मुझ से मिलने आई थीं.’’

सावित्री के मुख से न चाहते हुए भी निकल गया, ‘‘काश, वह मुझ से भी मिलने आतीं.’’

रमिया के जीवन में खुशियां भर गई थीं. बेटाबहू पूरी तरह से सुधर गए थे. उस का पूरा ध्यान रखने लगे थे. एक दिन वह शाम को डेयरी से दूध ले कर लौट रही थी कि अचानक ही अपने सामने आशा व अवतारी मां को देख कर वह हैरान रह गई. अवतारी मां ने दायां हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में उठा दिया.

रमिया ने भावावेश में उन के पैर पकड़ लिए और बोली, ‘‘आप उस दिन कहां गायब हो गई थीं?’’

अवतारी मां बोलीं, ‘‘अब तुझे कभी कोई कष्ट नहीं होगा. अच्छा, बता तेरी लाल बंगले वाली सावित्री कैसी हैं? माता उन से भी बहुत प्रसन्न हैं.’’

यह सुनते ही हैरान रमिया बोली, ‘‘आप उन के बारे में भी जानती हैं?’’

अवतारी ने अपनी बड़ीबड़ी आंखें फैलाते हुए कहा, ‘‘भला, देवी से उस के भक्त कभी छिप सकते हैं? मैं भी सावत्री से मिलना चाहती हूं लेकिन उन के बेटे व बहू नास्तिक हैं. इसीलिए मैं उन के घर नहीं जाना चाहती.’’

रमिया तुरंत बोली, ‘‘आप अभी चलो. इस समय अम्मांजी अकेली ही हैं. बेटेबहू तो रात 8 बजे से पहले नहीं आते.’’

अवतारी मां ने कहा, ‘‘देख, आज रात मुझे तीर्थयात्रा पर जाना है लेकिन तू भक्त है और मैं अपने भक्तों की बात नहीं टाल सकती इसलिए तेरे साथ चल कर मैं थोड़ी देर के लिए उन से मिल लेती हूं.’’

अवतारी मां से मिल कर सावित्री की खुशी का ठिकाना न रहा. उन्होंने कुछ रुपए देने चाहे लेकिन अवतारी मां नाराज हो उठीं.

सावित्री ने अवतारी मां से खाना खा कर जाने की विनती की तो फिर किसी दिन आने का वादा कर के वह विदा हो गईं.

इस घटना को कई दिन बीत गए थे. एक दिन दोपहर के समय लाल बंगले की घंटी बज उठी. सावित्री ने झुंझलाते हुए बाहर लगे कैमरे में देखा तो बाहर आशा व अवतारी मां को खड़े पाया. उन की झुंझलाहट पलभर में खुशी में बदल गई. उन्होंने बड़ी तत्परता से दरवाजा खोला.

‘‘आप के लिए मां का प्रसाद लाई हूं. मां तुम से बहुत खुश हैं,’’ फिर इधरउधर देखते हुए अवतारी मां बोलीं, ‘‘रमिया दिखाई नहीं दे रही?’’

अम्मांजी चिंतित स्वर में बोलीं, ‘‘अभी कुछ देर पहले उस का बेटा आया था और बता गया है कि रात भर दस्त होने की वजह से उसे बहुत कमजोरी है. आज काम पर नहीं आ पाएगी.’’

अवतारी मां ने कहा, ‘‘चिंता मत करो. वह जल्दी ही ठीक हो जाएगी.’’

सावित्री के पूछने पर कि आप की तीर्थयात्रा कैसी रही, अवतारी मां कुछ जवाब देतीं इस से पहले ही फोन की घंटी घनघना उठी. सावित्री ने ड्राइंगरूम का फोन न उठा कर अपने बेडरूम में जा कर फोन उठाया. उन के बेटे का फोन था. वह कह रही थीं कि बेटा, तू चिंता मत कर, रमिया नहीं आई तो क्या हुआ, मैं कोई छोटी बच्ची तो हूं नहीं जो अकेली डर जाऊंगी.

फिर अपने स्वर को धीमा करते हुए वह बोलीं, ‘‘आनंदजी आए थे और 90 हजार रुपए दे गए हैं. मैं ने उन्हें तेरी अलमारी में रख दिया है.’’

बेटे से बात करते समय सावित्री को लगा कि ड्राइंगरूम का फोन किसी ने उठा रखा है. उन्होंने खिड़की के परदे से झांक कर देखा तो उन का शक सही निकला. फोन आशा ने उठा रखा था और इशारे से वह अवतारी को कुछ कह रही थी. सावित्री देवी तब और स्तब्ध रह गईं. जब उन्होंने अवतारी के पास मोबाइल फोन देखा, जिस से वह किसी को कुछ कह रही थी.

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एसी से ठंडे हुए कमरे में भी सावित्री को पसीने आ गए. उन्होंने जल्दीजल्दी बेटे को दोबारा फोन मिलाया. उधर से हैलो की आवाज सुनते ही वह कुछ बोलतीं, इस से पहले ही अपनी कनपटी पर लगी पिस्तौल का एहसास उन की रूह कंपा गया. आशा ने लपक कर फोन काट दिया था.

दुर्गा मां का अवतार लगने वाली अवतारी अब सावित्री को साक्षात यमराज की दूत दिखाई दे रही थी.

‘‘बुढि़या, ज्यादा होशियारी दिखाई तो पिस्तौल की सारी गोलियां तेरे सिर में उतार दूंगी. चल, अपने बेटे को वापस फोन लगा कर बोल कि तू किसी और को फोन कर रही थी, गलती से उस का नंबर लग गया वरना उस का फोन आ जाएगा.’’

सावित्री कुछ कहतीं इस से पहले ही बेटे का फोन आ गया.

‘‘क्या बात है, अम्मां? फोन कैसे किया था?’’

‘‘काट क्यों दिया…’’ सावित्री देवी मिमियाईं, ‘‘मैं तुम्हारी नीरजा बूआ से बात करना चाह रही थी लेकिन गलती से तेरा नंबर मिल गया.’’

‘‘मुझे तो चिंता हो गई थी. सब ठीक तो है न?’’

‘‘हांहां, सब ठीक है,’’ कहते हुए उन्होंने फोन रख दिया.

अवतारी गुर्राई, ‘‘बुढि़या, झटपट सभी अलमारियों की चाबी पकड़ा दे. जेवर व कैश कहांकहां रखा है बता दे. मैं ने कई खून किए हैं. तुझे भी तेरी दुर्गा मां के पास पहुंचाते हुए मुझे देर नहीं लगेगी.’’

उसी समय उन के 2 साथी युवक भी आ धमके. सावित्री को उन लड़कों की शक्ल कुछ जानीपहचानी लगी.

तभी एक युवक गुर्राकर बोला, ‘‘ए… घूरघूर कर क्या देख रही है बुढि़या? तेरे चक्कर में मैं ने भी तेरी देवी मां के मंदिर में खूब चक्कर लगाए. तू जो अपनी नौकरानी के साथ घंटों मंदिर में बैठ कर बतियाती रहती थी तब तेरे बारे में जानकारी हासिल करने के लिए हम दोनों भी वहीं तेरे आसपास मंडराते रहते थे. तेरी बड़ी गाड़ी देख कर ही हम समझ गए थे कि तू हमारे काम की मोटी आसामी है और हमारे इस विश्वास को तू ने मंदिर के बाहर हट्टेकट्टे भिखारियों को भीख में हर रोज सैकड़ों रुपए दान दे कर और भी पुख्ता कर दिया.’’

सावित्री के बताने पर आननफानन में उन्होंने घर में रखे सारे जेवरात व नकदी समेट लिए. तभी अवतारी जोर से खिलखिलाई, ‘‘बुढि़या, मैं आज तक किसी मंदिर में नहीं गई फिर भी तेरी देवी मां ने तेरी जगह मुझ पर कृपा कर दी. तेरी नौकरानी रमिया के बारे में पता चला कि वह तेरे यहां 20 साल से काम कर रही है. बड़ी नमकहलाल औरत है. उस को भरोसे में ले कर तो तुझे लूट नहीं सकते थे. इसीलिए तुम्हारी धार्मिक अंधता को भुनाने की सोची.

‘‘सच कहती हूं तुम्हारे जैसी धर्म में डूबी भारतीय नारियों की वजह से ही हम जैसे लोगों का धंधा जिंदा है. रमिया के बेटेबहू को भी पिस्तौल की नोक पर मेरे ही साथियों ने कई बार धमकाया था और रमिया समझी कि मां की कृपा से उस के बेटेबहू सुधर गए. कल रात को रास्ते में मैं ने रमिया को जमालघोटा डला प्रसाद दिया था ताकि वह आज काम पर न आ सके.’’

‘‘फालतू समय खराब मत करो,’’ एक युवक चिल्लाया, ‘‘अब इस बुढि़या का काम तमाम कर दो.’’

घबराहट से सावित्री के सीने में जोर का दर्द उठा और वह अपनी छाती पकड़ कर जमीन पर लुढ़क गईं.

पसीने से तरबतर सावित्री को देख अवतारी चहकी, ‘‘इसे मारने की जरूरत नहीं पड़ेगी. लगता है इसे दिल का दौरा पड़ा है. तुरंत भाग चलो.’’

उधर फैक्टरी में अपनी आवश्यक मीटिंग खत्म होने के बाद मनोज ने दोबारा घर फोन किया.

फोन की घंटी लगातार बज रही थी. जवाब न मिलने पर चिंतित मनोज ने पड़ोसी शर्माजी के घर फोन कर के अम्मां के बारे में पता करने को कहा.

पड़ोसिन अपनी बेटी के साथ जब उन के घर पहुंची तो घर के दरवाजे खुले थे और अम्मांजी जमीन पर बेसुध गिरी पड़ी थीं. यह देख कर वह घबरा गई. डरतेडरते वह अम्मांजी के पास पहुंची और देखा तो उन की सांस धीमेधीमे चल रही थी. उन्होंने तुरंत मनोज को फोन किया.

सावित्री को जबरदस्त हृदयाघात हुआ था. उन्हें आई.सी.यू. में भरती कराया गया. गैराज में खड़ी दूसरी गाड़ी गायब थी. 2 दिन बाद उन को होश आया. बेटे को देखते ही उन की आंखों से आंसुओं की अविरल धारा बहने लगी. बेटे ने उन के सिर पर तसल्ली भरा हाथ रखा. सावित्री को पेसमेकर लगाया गया था. धीरेधीरे उन की हालत में सुधार हो रहा था.

रमिया व उन के बयान से पता चला कि लुटेरों के गिरोह ने योजना बना कर कई दिन तक सारी बातें मालूम कर के ही उन की धार्मिकता को भुनाते हुए अपनी लूट की योजना को अंजाम दिया और लाखों रुपए के जेवरात व नकदी लूट ले गए.

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उन की कार शहर के एक चौराहे पर लावारिस खड़ी मिली थी लेकिन लुटेरों का कहीं पता न चला.

दहशत व ग्लानि से भरी सावित्री को आज अपने पति की रहरह कर याद आ रही थी जो हरदम उन्हें तथाकथित साधुओं और उन के चमत्कारों से सावधान रहने को कहते थे. वह सोच रही थीं, ‘सच ही तो कहते थे मनोज के पिताजी कि अंधभक्ति का यह चक्कर किसी दिन उन की जान को सांसत में डाल देगा. अगर पड़ोसिन समय पर आ कर उन की जान न बचाती तो…और अगर वे लुटेरे उन्हें गोली मार देते तो?’

दहशत से उन के सारे शरीर में झुरझुरी आ गई. आगे से वह न तो किसी मंदिर में जाएंगी और न ही किसी देवी मां का पूजापाठ करेंगी.

पढ़ालिखा अमानुष

लेखक- प्रफुल्लचंद्र सिंह 

जूनियर इंजीनियर सुशील कुमार पिछले 2 सालों से मेरठ की ट्यूबवेल कालोनी स्थित सरकारी कालोनी में अपने परिवार के साथ रह रहा था.

उस की नियुक्ति सिंचाई विभाग में थी. उस के परिवार में पत्नी मोनिका उर्फ डौली के अलावा 2 बेटियां और एक बेटा था. सब से बड़ी बेटी सोनी (परिवर्तित नाम) 14 साल की थी.

बात 13 मार्च, 2019 की सुबह करीब 9 बजे की है. जेई सुशील कुमार की पत्नी मोनिका अपनी बड़ी बेटी सोनी के साथ अस्पताल गई थी. थोड़ी देर बाद जब वह घर लौटी तो वहां का खौफनाक मंजर देख कर उस की चीख निकल गई. उस के रोनेबिलखने की आवाजें सुन कर आसपास रहने वाले लोग उस के यहां चले आए. सभी के मन में जिज्ञासा हो गई कि पता नहीं अचानक जेई साहब के यहां क्या हो गया. लेकिन लोगों ने एक कमरे में जब जेई सुशील कुमार की खून से सनी लाश बैड पर पड़ी देखी तो सन्न रह गए. लोग समझ नहीं पा रहे थे कि यह सब कैसे हो गया. कमरे का सारा सामान भी बिखरा हुआ था.

मोनिका ने उसी समय अपने देवर अजय कुमार को फोन कर के  इस घटना की जानकारी दी. बड़े भाई की हत्या होने की बात सुन कर अजय भी अवाक रह गया. अजय सहारनपुर के पास स्थित अपने पैतृक गांव सलोनी में रहता था. भाई का दुखद समाचार सुन कर वह परिवार के अन्य लोगों के साथ मेरठ की तरफ रवाना हो गया. उसी दौरान मोनिका ने थाना सिविल लाइंस में फोन कर के पति की हत्या की सूचना दे दी.

मेरठ के सिविल लाइंस थानाप्रभारी अब्दुर रहमान सिद्दीकी को जैसे ही घटना की जानकारी मिली तो वह अपने स्टाफ के साथ नलकूप विभाग की कालोनी की ओर रवाना हो गए.

थानाप्रभारी ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया. उन्होंने फोरैंसिक टीम तथा डौग स्क्वायड को भी घटनास्थल पर बुला लिया. बैड पर मृतक जेई सुशील कुमार के हाथपैर तथा मुंह कपड़े से बंधे थे तथा उस के गले को किसी तेज धारदार हथियार से रेता गया था.

बैड के अलावा बैडरूम में चारों तरफ खून के छींटे दिख रहे थे तथा कमरे का सामान इधरउधर बिखरा पड़ा था. इस के अलावा जेई साहब के क्वार्टर के सामने वाले एक क्वार्टर के दरवाजे पर भी खून के छींटे दिखाई दिए.

घटनास्थल पर मिले तमाम फोरैंसिक नमूने एकत्र करने के बाद उन्होंने क्वार्टर के दूसरे कमरे का भी मुआयना किया. दरअसल, इस सरकारी क्वार्टर में 2 कमरे थे. दूसरे कमरे का सारा सामान भी बिखरा हुआ था और अलमारी खुली पड़ी थी.

यह सब देख कर ऐसा लग रहा था जैसे हत्या की यह वारदात लूटपाट के इरादे से की गई हो. शायद सुशील कुमार ने लुटेरों का विरोध किया होगा. जिस पर लुटेरों ने उस की निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी होगी.

मृतक की पत्नी मोनिका से जब इस घटना के बारे में थानाप्रभारी ने पूछा तो उस ने रोते हुए बताया कि वह सुबह 9 बजे के आसपास अपनी बड़ी बेटी सोनी के साथ डाक्टर के पास गई थी. उस समय उस के पति चाय पीने के बाद नहाने जाने की तैयारी कर रहे थे. जबकि दोनों छोटे बच्चे घर से बाहर खेलने गए थे.

डाक्टर के पास से जब वह घर लौटी तो देखा कि क्वार्टर के दरवाजे की कुंडी बाहर से बंद थी. दरवाजा खोलने पर उसे बैड पर पति की लाश पड़ी मिली. यह सारी घटना महज आधे घंटे के अंतराल के दौरान घट गई थी.

मृतक की पत्नी और कालोनी के कुछ अन्य लोगों से पूछताछ करने के बाद सुशील कुमार की लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी.

काररवाई के बाद पुलिस ने सुशील कुमार के बैडरूम को अपने कब्जे में ले लिया. वहां पर कुछ पुलिसकर्मियों को निगरानी के लिए छोड़ कर थानाप्रभारी अब्दुर रहमान सिद्दीकी वापस थाने लौट आए. पुलिस ने मोनिका की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या और लूटपाट का मामला दर्ज कर लिया. थानाप्रभारी इस केस की आगे की तहकीकात थाने के ही इंसपेक्टर मुकेश कुमार को सौंप दी.

इंसपेक्टर मुकेश कुमार ने हत्या के इस सनसनीखेज मामले की तफ्तीश को आगे बढ़ाते हुए मृतक जेई के सामने रहने वाले दूसरे जेई भारत यादव को हिरासत में ले लिया. क्योंकि उन के दरवाजे पर खून के छींटे मिले थे. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में जेई भारत यादव ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि सुबह वह अपने र्क्वाटर में मौजूद थे. लेकिन इस दौरान उन्होंने सुशील कुमार के क्वार्टर से चीखने जैसी कोई आवाज नहीं सुनी.

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अलबत्ता मोनिका ने भारत यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भारत यादव के उस के पति से अच्छे संबंध नहीं थे इसलिए इस घटना में उस का हाथ हो सकता है. लेकिन जब अगले 36 घंटे की पूछताछ में इंसपेक्टर मुकेश कुमार को इस घटना में भारत यादव के ऊपर संदेह नहीं हुआ तो उन्होंने उसे शहर में ही रहने की ताकीद कर घर जाने की इजाजत दे दी.

उधर पोस्टमार्टम के बाद सुशील कुमार की लाश अतिम संस्कार के लिए उस के घर वालों को सौंप दी गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि सुशील कुमार की मौत गला कटने के कारण अधिक खून निकल जाने की वजह से हुई थी.

 

काल डिटेल्स में मिला क्लू

पुलिस जांच में यह भी पता चला कि सुबह 9 और साढ़े 9 बजे के बीच कालोनी के लोगों ने किसी को भी मृतक के क्वार्टर की तरफ आतेजाते नहीं देखा था. जब कहीं से कोई क्लू नहीं मिला तो पुलिस ने मृतक सुशील कुमार और उस की पत्नी मोनिका के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई.

मोनिका के मोबाइल की काल डिटेल्स देख कर इंसपेक्टर मुकेश कुमार चौंक उठे. पता चला कि पिछले कुछ महीने से लगातार एक मोबाइल नंबर पर उस की लगातार बातें होती आ रही हैं. बातचीत का यह सिलसिला उस के पति की हत्या के बाद भी जारी था.

पुलिस ने उस मोबाइल नंबर की भी डिटेल निकलवाई तो पता चला यह सिमकार्ड पवन कुमार सैनी के नाम रजिस्टर्ड था, जो राजस्थान के गंगानगर का रहने वाला था.  जब इंसपेक्टर मुकेश कुमार ने मोनिका को थाने में बुला कर इस मोबाइल नंबर के बारे में सख्ती से पूछताछ की तो उस का चेहरा सफेद पड़ गया. उस ने बड़ी ही आसानी से पति की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. पति की हत्या को स्वीकार करते हुए उस ने जो कुछ बताया, सुन कर वहां उपस्थित सभी पुलिस अधिकारी हैरान रह गए.

उस से की गई पूछताछ के बाद उसी दिन पुलिस टीम श्रीगंगानगर पहुंची और वहां से पवन को हिरासत में ले आई. उस से जब इस घटना के बारे में पूछताछ की तो थोड़ी देर तक आनाकानी करने के बाद उस ने मोनिका के साथ मिल कर उस के पति सुशील कुमार की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली.

मेरठ के एसएसपी नितिन तिवारी और एसपी डा. अखिलेश नारायण सिंह ने 16 मार्च, 2019 को एक प्रैस कौन्फ्रैंस आयोजित कर इस सनसनीखेज हत्याकांड का परदाफाश कर दिया.

उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर का एक गांव है सलोनी. यह गांव थाना सरसावाला के अंतर्गत आता है. जेई सुशील कुमार इसी गांव का रहने वाला था. वह अपनी पत्नी मोनिका व 3 बच्चों के साथ मेरठ के सिंचाई विभाग के सरकारी क्वार्टर में रहता था. उस के पास सभी भौतिक सुखसुविधाएं थीं.

मोनिका अपने पति और तीनों बच्चों के साथ बेहद खुश थी. लेकिन पिछले कुछ महीनों से वह पति के चालचलन में कुछ परिवर्तन महसूस कर रही थी.

दरअसल, सुशील ने उस में रुचि लेनी बहुत कम कर दी थी. इस का पता लगाने के लिए जब मोनिका ने एक दिन पति के मोबाइल फोन की जांचपड़ताल की तो एक दिन उसे पता चला कि पति के कुछ महिलाओं के साथ अवैध संबंध हैं, जिन के साथ वह बराबर संपर्क में रहता है.

यह जान कर मोनिका के दिल को बहुत चोट पहुंची. उस ने पति को आकर्षित करने के कई हथकंडे अपनाए, लेकिन सुशील के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया. यह सब देख कर उस ने पति से बदला लेने की ठानी और अपने मोबाइल से एक सोशल साइट पर जा कर दूसरे लड़कों से रोमांटिक चैटिंग करनी शुरू कर दी. सोशल साइट पर उस की मुलाकात पवन कुमार सैनी नाम के युवक से हुई. पवन सैनी राजस्थान के श्रीगंगानगर के गांव नाहरावाली का रहने वाला था.

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मोनिका की पवन से गहरी दोस्ती हो गई. मोनिका को पवन बहुत अच्छा लगा, इसलिए उस ने उस से प्यार का इजहार कर दिया. अब मोनिका पवन से मिलने के लिए उतावली हो रही थी. लिहाजा मोनिका ने एक दिन उसे मेरठ के एक होटल में मिलने के लिए बुलाया.

मोनिका के कहने पर पवन श्रीगंगानगर से चल कर मेरठ के एक होटल में पहुंच गया. मोनिका भी उसी होटल में पहुंच गई. पहली बार मिलने पर दोनों ही बहुत खुश हुए. पवन उम्र में उस से छोटा था.

होटल के बंद कमरे में दोनों ने एकदूसरे पर प्यार लुटाते हुए काफी वक्त गुजारा. एकदूसरे को प्यार करते रहने की कसमें खाईं. इस हसीन और रोमांचक मुलाकात के बाद पवन ने मोनिका से फिर मिलने आने का वादा किया और वापस श्रीगंगानगर लौट गया.

इस घटना के बाद वे दोनों अपनी सुविधा और मौके के अनुसार एक दूसरे को फोन कर अपने दिल की बात कर लेते थे. जब मोनिका के मन में पवन से मिलने की इच्छा हिलोरें मारती तो वह उसे मेरठ बुला लेती थी. पवन अभी कुंवारा था, इसलिए वह खुद भी मोनिका से मिलने की ताक में रहता था.

 

करीब ढाई साल तक अवैध संबंधों का यह सिलसिला बड़ी खामोशी से चलता रहा. मोनिका और पवन दोनों एकदूसरे को पा कर बहुत खुश थे. तभी एक दिन अचानक मोनिका की 14 वर्षीय किशोर बेटी सोनी ने उसे जो कुछ बताया, उसे सुन कर उस के पैरों तले की जमीन खिसक गई.

सोनी ने बताया कि उस के पापा पिछले कुछ महीनों से उस के साथ जबरन गलत काम करते हैं और मना करने पर वह उस के साथ मारपीट करते हैं.

मोनिका ने हिम्मत कर के यह बात पति से पूछी तो उलटे वह आगबबूला हो उठा और चुप रहने को कहा. इतना ही नहीं, उस ने यह भी धमकी दी कि अगर यह बात किसी को बताई तो वह तीनों बच्चों को मौत के घाट उतार देगा.

पानी चढ़ गया सिर से ऊपर

मोनिका ने कई बार पति को समझाने की कोशिश की, लेकिन सुशील अपनी हरकतों से बाज नहीं आया. पानी सिर से ऊपर जाता देख कर मोनिका ने सुशील की इस गंदी हरकत के बारे में अपनी सास परीक्षा देवी को बताया. अपने बेटे की करतूत सुन कर परीक्षा ने ऐसे पढ़ेलिखे बेटे को लानत दी. इतना ही नहीं, उन्होंने बेटे सुशील को समझाने की कोशिश की, मगर वह कुछ भी समझने की जगह उलटे मरनेमारने पर उतारू हो गया.

यह देख कर परीक्षा से बहू मोनिका से कहा कि ऐसे राक्षस का घर में रहना ठीक नहीं है. इसे तो समाज में जिंदा रहने का भी अधिकार नहीं है. सास की बात सुन कर मोनिका मन ही मन बहुत खुश हुई क्योंकि पति के मरने के बाद पूरी तरह से अपने प्रेमी पवन सैनी के साथ रहने की आजादी मिलती.

मोनिका एक तीर से दो शिकार कर रही थी. उसे अब सुशील से नफरत हो चुकी थी. वह सुशील की हत्या करने के बाद पवन के साथ अपनी जिंदगी शुरू करना चाहती थी. मोनिका ने पति को ठिकाने लगाने के बारे में सास से बात की तो उन्होंने मोनिका को कुछ रुपए भी दे दिए ताकि वह किसी और से सुशील की हत्या करा सके.

इस के बाद मोनिका ने पवन को मेरठ बुला कर उस से कहा कि अगर वह उसे हमेशा के लिए पाना चाहता है तो उसे पति को ठिकाने लगाना होगा. आखिर में पवन अपनी माशूका के साथ जिंदगी गुजारने की खातिर उस के पति की हत्या करने के लिए तैयार हो गया. इस काम के लिए मोनिका ने अपनी बड़ी बेटी सोनी को भी शामिल कर लिया.

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बेटी भी हो गई बाप की हत्या में शामिल

दरअसल वह भी अपने बाप के अत्याचारों से इतनी तंग आ चुकी थी कि उसे मौत के घाट उतारने के लिए मम्मी का साथ देने में उस ने एक पल के लिए भी नहीं सोचा.

योजना के अनुसार, 12 मार्च, 2019 को मोनिका का प्रेमी पवन श्रीगंगानगर से मेरठ पहुंचा और वहां एक होटल में ठहर गया. अगले दिन 13 मार्च की सुबह मोनिका ने पवन के मोबाइल पर फोन कर उसे अपने क्वार्टर के बाहर बुला लिया. उस समय लोगों का अधिक आनाजाना नहीं था.

इसी बीच सोनी अपने पापा सुशील के पास पहुंची. सुशील कुमार उस समय अपने बैड पर बैठा हुआ था.  सोनी ने प्यार से मनुहार करते हुए उसे एक खेल खेलने के लिए कहा तो वह इस के लिए फौरन राजी हो गया. दरअसल, वह सोनी को कभी किसी बात के लिए मना नहीं करता था.

इस के बाद पहले तो उस ने पापा सुशील कुमार की दोनों आंखों पर पट्टी बांधी. फिर उस के हाथ और पैरों को भी मजबूती से बांध दिया. तब तक मोनिका भी कमरे में आ गई. उस ने पति को बंधे देखा तो पवन को कमरे में आने के लिए फोन किया.

पवन चाकू ले कर वहां पहुंच गया. पवन को देखकर मोनिका की आंखें चमक उठीं. उस ने पति के सिर को पकड़ कर पीछे की ओर खींचा और पवन को जल्दी से उस की गरदन काटने का इशारा किया. शायद तभी सुशील को अपने साथ कुछ गलत होने का आभास हो गया था, इसलिए वह बचने के लिए छटपटाने लगा. लेकिन उस की बेटी सोनी ने उस के हाथ और पैर पकड़ लिए ताकि पवन आसानी से अपने काम को अंजाम दे सके. तभी पवन ने चाकू से सुशील की गरदन रेत डाली.

जब सुशील की लाश तड़प कर ठंडी पड़ गई तो पवन ने दूसरे कमरे में जा कर अपने कपड़ों से खून साफ किया और वहां से अपने होटल लौट गया. उस के जाने के बाद मोनिका और सोनी ने सुशील के खून के छींटे सामने रहने वाले जेई भारत यादव के दरवाजे पर लगा दिए ताकि साजिश के तहत इस कत्ल का आरोप उस के सिर मढ़ा जा सके.

दरअसल भारत यादव और सुशील के बीच किसी बात को ले कर खटपट होती रहती थी. इस के बाद उस ने घर के कपड़े और अलमारियों का सामान इस प्रकार कमरे में फेंक दिया ताकि यह मामला लूटपाट का लगे. फिर दोनों मांबेटी कमरों का दरवाजा बंद कर अस्पताल जाने के बहाने घर से बाहर निकल गईं. आधे घंटे के बाद दोनों वापस लौट आईं और घर में लूटपाट होने तथा पति की हत्या की झूठी खबर लोगों में फैला दी.

विवेचनाधिकारी इंसपेक्टर मुकेश कुमार ने हत्या में प्रयुक्त चाकू और खून से सने पवन के कपड़े बरामद करने के बाद सुशील कुमार हत्याकांड के दोनों आरोपियों पवन और मोनिका को स्थानीय अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

सोनी को बाल न्यायालय में पेश कर बाल सुधारगृह भेजा गया. बाद में इस हत्याकांड में शामिल चौथी आरोपी जेई सुशील कुमार की मां परीक्षा देवी को भी सहारनपुर स्थित उन के पुश्तैनी घर से गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें भी जेल भेज दिया गया.

 

पुलिस को नचाती रही फर्जी IFS Officer

 लेखक-  प्रगति अग्रवाल 

इसी दौरान अर्दली ने देखा कि पुलिस एस्कार्ट के साथ एक मर्सिडीज वहां आई. मर्सिडीज पर लालबत्ती लगी हुई थी. मर्सिडीज से आगे चालक के पास वाली सीट से एक खूबसूरत नौजवान फुरती से उतरा. उस नौजवान के हाथ में लैपटौप बैग था. उस नौजवान ने मर्सिडीज के पीछे का गेट खोला. कार से एक महिला तेजी से बाहर निकली. महिला की उम्र करीब 32-33 साल थी. उस ने जींस और पूरी आस्तीन की टीशर्ट पहन रखी थी.

  पुलिस की एस्कार्ट गाड़ी और मर्सिडीज पर लगी लालबत्ती देख कर अर्दली समझ गया कि आगंतुक महिला कोई बड़ी अफसर हैं. अर्दली अपने साहब को महिला के बारे में बताने जाता, उस से पहले ही वह महिला तेज कदमों से चलती हुई आई और उस से बोली कि एसएसपी बैठे हैं क्या. अर्दली ने कहा, ‘‘यस मैम, साहब चैंबर में मीटिंग कर रहे हैं.’’

  आगंतुक महिला अर्दली से बिना कुछ कहे सीधे चैंबर का गेट खोल कर अंदर जाने लगी, तो अर्दली ने आगे बढ़ कर गेट खोल दिया. महिला ने चैंबर में घुस कर सामने सीट पर बैठे एसएसपी की ओर अपना हाथ बढ़ाते हुए कहा, ‘‘हैलो वैभव, आई एम जोया खान, औफिसर औफ  इंडियन फौरेन सर्विस.’’

  ‘‘जोया मैम, आप से मिल कर खुशी हुई.’’ एसएसपी वैभव कृष्ण ने अपनी सीट से खड़े हो कर जोया से हाथ मिलाते हुए कहा.

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एसएसपी ने जोया का किया स्वागत

एसएसपी ने जोया को कुरसी पर बैठने का इशारा करते हुए कहा, ‘‘मैम, अभी तक तो आप के ईमेल ही मिले थे या एकदो बार फोन पर बात हुई थी. मुलाकात आज पहली बार हो रही है.’’

  ‘‘वैभव, यार तुम को तो पता है कि इंडियन फौरेन सर्विस में कितनी मारामारी रहती है. हमें आधा समय तो विदेशों में और आधा समय भारत में रहना पड़ता है.’’

  जोया ने एसएसपी पर अपनी रुतबे वाली नौकरी के बारे में बताते हुए कहा, ‘‘मैं विदेश मंत्रालय में जौइंट सेक्रेटरी लेवल की औफिसर हूं. आजकल मेरी पोस्टिंग यूनाइटेड नेशंस में है.’’

  ‘‘मैडम, बाई द वे, आप कौन से बैच की आईएफएस औफिसर हैं?’’ पास ही दूसरी कुरसी पर बैठे एसपी (देहात) विनीत जायसवाल ने जोया से पूछा.

  जोया ने एसपी (देहात) की ओर नजर उठा कर देखा. फिर उन की वरदी पर लगा आईपीएस का बैज देख कर संक्षिप्त सा जवाब दिया, ‘‘2007 बैच.’’

  ‘‘विनीत, आप भी यार हर जगह पुलिस की अपनी इनक्वायरी शुरू कर देते हो.’’ एसएसपी वैभव कृष्ण ने अपने साथी एसपी (देहात) से कहा. फिर जोया खान की ओर मुखातिब हो कर बोले, ‘मैडम, क्या लेंगी? चायकौफी या ठंडा?’

  ‘‘वैभव, ऐसी कोई औपचारिकता नहीं है. फिर भी पहली बार मुलाकात हुई है, इसलिए आप के साथ कौफी पीने में कोई हर्ज नहीं है.’’ जोया ने खिलखिला कर हंसते हुए कहा.

  एसएसपी ने घंटी बजा कर अर्दली से पहले पानी और इस के बाद कौफी लाने को कहा. अर्दली पानी के गिलास रख गया. इस बीच जोया और एसएसपी वैभव कृष्ण कई मुद्दों पर बातें करते रहे. बीचबीच में वहां बैठे एसपी (देहात) विनीत जायसवाल भी अपनी बात कह देते थे.

  कुछ ही देर में अर्दली कौफी ले आया. एसएसपी, एसपी (देहात) और जोया खान बातें करते हुए कौफी सिप करने लगे. कौफी पीते हुए जोया ने एसएसपी से कहा, ‘‘वैभव, मेरी गाड़ी में तोड़फोड़ हो गई थी. इस की रिपोर्ट भी मैं ने बिसरख थाने में दर्ज करा दी थी, लेकिन आप की पुलिस ने अब तक इस मामले में कोई काररवाई नहीं की. आप जरा एक बार अपने स्तर पर इस केस को दिखवाना.’’

  एसएसपी ने जोया को आश्वस्त करते हुए कहा, ‘‘मैडम, मैं इस केस को दिखवा लूंगा.’’

  जोया ने कौफी की आखिरी सिप लेते हुए कप खाली किया और कुरसी से उठते हुए एसएसपी से कहा, ‘‘वैभव, आप से पहली मुलाकात अच्छी रही.’’

  एसएसपी वैभव कृष्ण ने अपनी कुरसी से खड़े हो कर जोया से हाथ मिलाते हुए कहा, ‘‘नाइस टू मीट यू.’’

  जोया एसएसपी से मिल कर तेजी से उन के चैंबर से बाहर निकली और फुरती से अपनी गाड़ी के पास पहुंची. वहां पहले से ही लैपटौप बैग लिए खड़े नौजवान ने तेजी से आगे बढ़ कर गाड़ी का पीछे का गेट खोल दिया. जोया बैठ गई, तो उस की गाड़ी सायरन बजाती चल रही पुलिस की एस्कार्ट गाड़ी के पीछेपीछे चली गई.

  जोया के जाने पर एसपी (देहात) विनीत जायसवाल ने एसएसपी साहब से कहा, ‘‘सर, आप बुरा नहीं मानें, तो एक बात कहना चाहता हूं.’’

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एसपी (देहात) को जोया लगी संदिग्ध

एसएसपी वैभव ने एसपी (देहात) विनीत की ओर सवालिया नजरों से देखकर कहा, ‘‘हां, बताओ क्या कहना चाहते हो.’’

  ‘‘सर, मुझे जोया मोहतरमा पर शक है.’’ एसपी (देहात) ने संदेह जताते हुए कहा, ‘‘जोया मैडम खुद को 2007 बैच की इंडियन फौरेन सर्विस की औफिसर बता रही हैं और उन की उम्र करीब 32-33 साल लगती है. इस का मतलब क्या वे 20-21 साल की उम्र में ही आईएफएस औफिसर बन गईं.’’

  ‘‘विनीत, मुझे भी जोया के हावभाव और बात करने का अंदाज देख कर संदेह हो रहा है. तुम्हारी बात में भी दम नजर आता है.’’ एसएसपी ने कहा, ‘‘मैं जोया खान की असलियत का पता लगवा लेता हूं. सारी सच्चाई सामने आ जाएगी.’’

  एसएसपी वैभव कृष्ण ने उसी दिन अपने कुछ मातहतों को जोया खान की असलियत का पता लगाने का जिम्मा सौंप दिया. साथ ही उन्होंने साइबर एक्सपर्ट टीम को जोया खान के भेजे एक ईमेल की जांच करने को कहा.

  यह ईमेल जोया ने एसएसपी से मुलाकात से कुछ दिन पहले पुलिस एस्कार्ट उपलब्ध कराने के लिए भेजा था. यह ईमेल ह्यद्गष्ह्वह्म्द्बह्ल4ष्द्धद्बद्गद्घञ्चह्वठ्ठद्बह्लद्गस्रठ्ठड्डह्लद्बशठ्ठह्य ह्यद्गष्ह्वह्म्द्बह्ल4ष्शह्वठ्ठष्द्बद्य.शह्म्द्द से भेजा गया था.

  साइबर एक्सपर्ट टीम ने जोया खान की ओर से भेजे ईमेल के संबंध में जांच की, तो पता चला कि यूनाइटेड नेशंस की असली वेबसाइट सिर्फ  222.ह्वठ्ठ.शह्म्द्द है. इसी से मिलतेजुलते नामों से भी कई ईमेल आईडी मिलीं.

  असलियत जानने के लिए डोमेन नेम की जांच कराई गई. इस में पता चला कि जोया ने खुद अपने लैपटौप से बैंक अकाउंट के माध्यम से ह्वठ्ठद्बह्लद्गस्रठ्ठड्डह्लद्बशठ्ठह्यह्यद्गष्ह्वह्म्द्बह्ल4ष्शह्वठ्ठष्द्बद्य. शह्म्द्द नामक वेबसाइट खरीद कर उस से ईमेल बनाया था.

  इस के अलावा दूसरी पुलिस टीम को जोया खान के बारे में कई ऐसी बातें पता चलीं, जिन से यह बात पुख्ता हो रही थी कि जोया खान फरजी आईएफएस अफसर बन कर घूमती है.

फरजी होने के मिले सबूत

सभी तरफ  से जोया खान के बारे में फरजी अफसर होने की पुष्टि होने पर नोएडा पुलिस ने जोया खान को हिरासत में ले कर पूछताछ की, तो उस की जालसाजी की सारी पोल खुल गई. पुलिस ने पूछताछ के बाद जोया खान और उस के पति हर्षप्रताप सिंह को 4 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया.

  पुलिस ने जोया के पास से यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट का फरजी डिप्लोमैटिक आईडी कार्ड, 2 लैपटौप, पिस्टलनुमा लाइटर गन, वाकीटाकी वायरलैस सेट, 4 मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, फरजी ड्राइविंग लाइसैंस सहित यूएन का लोगो लगी मर्सिडीज कार और नीली बत्ती लगी एसयूवी महिंद्रा कार सहित कई अन्य सामान भी बरामद किए.

  फरजी आईएफएस औफिसर जोया खान और उस के पति से पुलिस की पूछताछ के आधार पर जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार है—

जोया मूलरूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली है. मेरठ के कैंट इलाके में सदर बाजार स्थित तिवारी कंपाउंड में उस के पिता का आलीशान बंगला है. उस के पिता ए. खान एमबीबीएस डाक्टर हैं. उन का मेरठ के लालकुर्ती बड़ा बाजार में क्लीनिक है. जोया के पिता डा. ए. खान की इस इलाके में अच्छी शोहरत है. डाक्टरी के पेशे से उन्होंने अच्छीखासी कमाई भी की है.

  डा. ए. खान की 2 बेटियां हैं. बड़ी बेटी जोया ने मेरठ के प्रतिष्ठित स्कूल से प्रारंभिक पढ़ाई की थी. इस के बाद उस ने दिल्ली से ग्रैजुएशन किया. दिल्ली यूनिवर्सिटी से जोया ने पौलिटिकल साइंस में एमए किया. सन 2007 में वह दिल्ली में रह कर सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी करने लगी. इस के लिए उस ने कोचिंग वगैरह भी की. बाद में उस ने यूपीएससी की ओर से आयोजित सिविल सर्विसेज परीक्षा भी दी, लेकिन कामयाब नहीं हो सकी.

  करीब 6-7 साल पहले जोया ने एक बार मेरठ जाने पर अपनी मां को बताया था कि वह हर्षप्रताप सिंह से शादी करेगी. इस पर पिता डा. खान व मां ने बेटी को हर्ष और उस के परिवार से मुलाकात कराने को कहा था, लेकिन जोया ने कभी उन से मुलाकात नहीं कराई.

जोया ने हर्ष से की थी कोर्टमैरिज

जोया ने नवंबर 2013 में हर्षप्रताप सिंह से कोर्टमैरिज की थी. हर्षप्रताप सिंह उस समय स्टेट बैंक औफ  इंडिया में प्रोबेशनरी अफसर की नौकरी छोड़ कर सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी कर रहा था. शादी के बाद हर्ष प्रताप सिंह ने सिविल सर्विस परीक्षा भी दी, लेकिन वह सफल नहीं हो सका. हर्ष प्रताप के पिता उत्तर प्रदेश में एक सरकारी विभाग में जौइंट कमिश्नर हैं.

  जोया खान ने अच्छीखासी पढ़ाई की थी. उस की तमन्ना प्रशासनिक अफसर बनने की थी. लेकिन वह परीक्षा में सफल नहीं हो सकी, तो उसे अपने सपनों पर पानी फिरता नजर आया. पति हर्ष प्रताप भी सिविल सर्विस परीक्षा में पास नहीं हो सका था.

  करीब 2 साल पहले जोया ने अपने सपनों को पूरा करने और अफसरों जैसा रुतबा हासिल करने के लिए फरजीवाड़ा करने की योजना बनाई. उस ने इंटरनेट पर यूनाइटेड नेशंस सिक्युरिटी से संबंधित सारी जानकारियां जुटाईं. इस के बाद उस ने ‘गो डैडी’ डोमेन से फरजी ईमेल आईडी सिक्युरिटी चीफ  यूनाइटेड नेशन सिक्युरिटी काउंसिल डौट ओआरजी के नाम से बनवाई और इसे रजिस्टर्ड करवाया.

  इस के लिए जोया ने यूनाइटेड नेशंस आर्गनाइजेशन के लोगो व अन्य सूचनाएं फरजीवाड़े से हासिल कर उपलब्ध करवाईं. इस के बाद जोया ने खुद का यूनाइटेड नेशंस आर्गनाइजेशन सिक्युरिटी काउंसिल का आईडी कार्ड और विजिटिंग कार्ड बनवाए.

  जोया ने खुद का एक डिप्लोमेटिक आईडी कार्ड भी बनवाया. इस में खुद को न्यूक्लियर पौलिसी अफसर बताया गया. वाशिंगटन से जारी इस आईडी कार्ड में जोया की तैनाती अफगानिस्तान में बताई गई थी.

  इस के बाद जोया ने उत्तर प्रदेश के एक जिले के एसपी को यूनाइटेड नेशंस और्गनाइजेशन सिक्युरिटी काउंसिल के नाम से ईमेल भेज कर पुलिस एस्कार्ट मांगी.

  जोया को इस ईमेल पर पुलिस एस्कार्ट सुविधा मिल गई. पुलिस की सुरक्षा में इधरउधर आनाजाना, हर चौराहे पर पुलिसकर्मियों की ओर से सैल्यूट देने का रुतबा जोया खान को पसंद आ गया.

फरजी अधिकारी बन कर दिखाती थी रुतबा

जोया ने खुद को भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया. मेरठ में भी वह खुद को आईएफएस अफसर बताने लगी. वह किसी को भारतीय विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव बताती, किसी को वह यूनाइटेड नेशंस की सिक्युरिटी काउंसिल की न्यूक्लियर पौलिसी अफसर बताती. जोया ने अपनी मर्सिडीज गाड़ी पर यूनाइटेड नेशंस का लोगो भी लगवा लिया था. एसयूवी कार पर नीली बत्ती लगवा ली थी.

  भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी के रूप में जोया खान मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, गुड़गांव, अलीगढ़, मथुरा, मुरादाबाद आदि जिलों के एसपी या एसएसपी को यूनाइटेड नेशंस सिक्युरिटी काउंसिल के सिक्युरिटी चीफ की ओर से ईमेल भेज कर पुलिस सुरक्षा की मांग करती थी.

जोया खान ने अपने मोबाइल में वाइस कनवर्टर ऐप डाउनलोड कर रखा था. वह इस ऐप के जरिए अधिकारियों से कभी पुरुष और कभी महिला की आवाज में बात करती थी. किसी जिले के एसपी या एसएसपी को ईमेल भेजने के बाद जोया खान उस अधिकारी को फोन करती और ऐप के जरिए आवाज बदल कर पुरुष की आवाज में कहती कि मैं विदेश मंत्रालय की जौइंट सेक्रेटरी जोया खान का पीए बोल रहा हूं, मैडम आप से बात करना चाहती हैं.

  इस के तुरंत बाद जोया खान महिला की आवाज में उस अधिकारी से बात करती. वह धाराप्रवाह अंगरेजी बोलते हुए कई बार फोन पर अधिकारियों को फटकार भी देती थी.

  पत्नी जोया के रुतबे के इस खेल में पति हर्ष को भी मजा आने लगा था. जोया इस खेल में पति को साथ रखना चाहती थी. इसलिए दोनों ने मिल कर एक रास्ता निकाला. इस के मुताबिक जोया आईएफएस अधिकारी बन कर कार में पीछे की सीट पर बैठती थी और हर्ष उस क ा कमांडो बन कर कार चलाता था. हर्ष अपने पास लाइटर पिस्टल और वाकीटाकी रखता था.

  कार से उतर कर जोया जब किसी अधिकारी से मिलने जाती थी, तो हर्ष उस का लैपटौप और डायरी उठा कर चलता था. पुलिस की एस्कार्ट के सामने जोया और हर्ष किसी को यह जाहिर नहीं होने देते कि वे पतिपत्नी हैं. इस दौरान हर्ष जोया को मैडम कह कर कहता था.

अपनी पोल न खुल सके, इस के लिए जोया अपनी कार चलाने के लिए किसी ड्राइवर को नहीं रखती थी. ड्राइवर को रखने से जोया का फरजीवाड़ा उजागर हो सकता था. इसलिए जोया जब भी आईएफएस अफसर बन कर जाती, तो हर्ष ही कार चलाता था. जोया अपने घर में भी किसी पुलिसकर्मी को नहीं आने देती थी.

  इस बीच, जोया अपने पति हर्ष के साथ ग्रेटर नोएडा वेस्ट की प्रिस्टीन एवेन्यू सोसायटी में फ्लैट ले कर रहने लगे. यह फ्लैट जोया ने 6500 रुपए महीने किराए पर ले रखा था. इस सोसायटी में भी जोया ने खुद को आईएफएस अफसर ही बता रखा था.

  जोया हर महीने मेरठ भी आतीजाती रहती थी. मेरठ में भी जोया पुलिस एस्कार्ट लेती थी. इस के लिए वह पहले ही एसएसपी को यूनाइटेड नेशंस का ईमेल भेज देती थी. इसी 26 मार्च को भी जोया मेरठ गई थी और पुलिस सुरक्षा ली थी. इसी दिन वह मेरठ के एसएसपी नितिन तिवारी से भी मिली थी. वह विभिन्न जिलों के पुलिस अधिकारियों को फोन कर अपने निजी काम, किसी मुकदमे की पैरवी आदि के लिए कहती थी.

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सुरक्षा एजेंसियों ने की पूछताछ

इसी साल जनवरी में ग्रेटर नोएडा वेस्ट की प्रिस्टीन एवेन्यू सोसायटी में रात के समय जोया की कार के शीशे किसी ने तोड़ दिए थे. इस पर जोया ने नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण से शिकायत की थी. इस संबंध में जोया ने मुकदमा भी दर्ज कराया था. पुलिस की ओर से कोई काररवाई नहीं करने पर वह 30 मार्च को इसी सिलसिले में एसएसपी वैभव कृष्ण से मिलने उन के औफिस में गई थी.

  जोया का फरजीवाड़ा उजागर होने के बाद पुलिस अब दूसरी सुरक्षा एजेंसियां जांचपड़ताल में जुटी हुई हैं. जोया खान से बरामद लैपटौप और मोबाइल के डेटा की जांच नोएडा एटीएस टीम कर रही है.

  पुलिस यह भी जांच कर रही है कि जोया का संबंध अफगानिस्तान या अन्य किसी देश से तो नहीं है. यह बात भी सामने आई थी कि गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले जोया ने मेरठ में हुई प्रधानमंत्री की रैली के लिए पुलिस से एस्कार्ट मांगी थी. हालांकि पुलिस इस बात से इनकार कर रही है. नोएडा में गिरफ्तारी के बाद जोया के खिलाफ  मेरठ में भी मुकदमा दर्ज किया गया है. इस के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश के उन जिलों में भी जोया के खिलाफ  मुकदमा दर्ज करने की तैयारी चल रही है, जहां जोया ने फरजीवाड़े से पुलिस सुरक्षा हासिल की थी.

  कहा जाता है कि जोया के मातापिता और हर्षप्रताप के पिता को पता चल गया था कि जोया फरजी आईएफएस अफसर बन कर घूमती है. हर्ष के पिता ने बेटे को समझाया भी था, लेकिन सरकारी अफसर का रुतबा और पुलिस वालों के सैल्यूट के आगे उन की समझाइश का कोई मतलब नहीं निकला. कथा लिखे जाने तक दोनों पतिपत्नी जेल में थे.

“कुंडली भाग्य” की “प्रीता” का बिकिनी वाला नया अंदाज

“कुंडली भाग्य” की प्रीता यानी एक्ट्रेस श्रद्धा आर्या कुछ दिन पहले ही मालदीव में वेकेशन मनाने पहुंची थी. जिसकी फोटोज उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर की. ब्लू बिकिनी हो या ब्लेक, श्रद्धा दोनों में फैंस को काफी पसंद आ रही हैं. श्रद्धा का ये बौल्ड अंदाज देखकर आप भी दंग रह जायेंगे. उनका ये लुक सोशल मीडिया पर धमाल मचा रहा हैं.

 

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Glaring up at Ya!!! #💚

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सोशल मीडिया पर एक्टिव

श्रद्धा आए दिन अपने सोशल मीडिया पर वीडियो और फोटोज शेयर करती हैं. शायद यही कारण की उनकी फैन फौलोविंग में कभी कमी नहीं होती. अकेले इंस्टाग्राम पर उनके 1.3 मिलियन फौलोवर्स हैं. टीवी पर हमेशा सीधे साधे रोल में नजर आने वाली श्रद्धा का ये अंदाज उनके फैंस के लिए बिल्कुल नया हैं. श्रद्धा की फोटोज की बात करें तो इंस्टाग्राम पर उनके इंडियन से लेकर वेस्टर्न लुक तक तमाम फोटोज हैं .

 

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#FriYay 🍃

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छुट्टी के कुछ पल

श्रद्धा को हाल ही में एक दिन का औफ मिला था और उन्होंने इस दिन को काफी एंजौय किया. कभी झूले पर तो कभी समुंदर किनारे और कभी स्वीमिंग करते हुए नजर आईं.

 

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So to make you all feel better – Even I am not here anymore! 😪 #vacationhangover 🍃💞 #maldives #seasandandsunshine

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बिकिनी में देखी श्रद्धा

श्रद्धा की बिकिनी वाली फोटोज को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. ब्लू बिकिनी में श्रद्धा स्वीमिंग पूल के किनारे पोज देती नजर आईं. वही एक फोटो में श्रद्धा ब्लेक ड्रेस पहनी हैं, सीढ़ियों पर पोज देती श्रद्धा इस ब्लैक ड्रेस में काफी हौट लग रही हैं.

 

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Maldives Spam Starts Now 🦀 #maldives @adaaranvadoo

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तमिल फिल्म से लेकर छोटे परदे तक

श्रद्धा ने अपने एक्टिंग कैरियर की शुरुआत तमिल फिल्म से की. इसके बाद उन्होंने हिंदी, मलयालम, कनाडा के साथ-साथ पंजाबी फिल्मों में भी काम किया पर छोटे परदे पर उन्होंने रियलिटी शो “इंडियाज सिने स्टार्स की खोज” से की थी. फिलहाल वो “कुंडली भाग्य” सीरियल में नजर आ रही हैं.

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