भरी सभा में उसे गिन कर 50 जूते मारे गए. पीडि़त ब्रजेश कुमार का कुसूर यही था कि उस ने दूसरी जाति की एक लड़की से प्यार किया था. उस लड़की की शादी उस के मातापिता ने दूसरी जगह तय कर दी थी. शायद लड़के वालों को इस लड़केलड़की के प्रेम संबंधों के बारे में जानकारी मिल गई थी जिस की वजह से उन्होंने इस शादी से इनकार कर दिया था. यह मामला जब मुखिया के पास पहुंचा तो उस के दरवाजे पर ही पंचायत बिठाई गई जहां सैकड़ों लोगों के सामने प्रेमी को 50 जूते मारे गए और एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया, जिसे आरोपी और उस के पिता ने दबाव में आ कर स्वीकार भी कर लिया.

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इस घटना का किसी ने वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. जब यह घटना प्रशासन की नजर में आई तो दोषी मुखिया समेत जूते मारने वाले रणजीत कुमार यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. दूसरी घटना बिहार से ही जुड़े सीतामढ़ी जिले की है, जहां आलोक ने अनीता नाम की लड़की के साथ प्रेम विवाह किया. यह बात गांव वालों को रास नहीं आई और आलोक के मातापिता समेत उस जोड़े को मारपीट कर गांव से बाहर कर दिया. आलोक के पिता ने जिला प्रशासन समेत मुख्यमंत्री के ‘जनता दरबार’ तक में इंसाफ की गुहार लगाई लेकिन कामयाबी नहीं मिली. बाद में इस मामले पर कोर्ट ने संज्ञान लिया तब राहत मिली. लेकिन आज भी उस प्रेमी जोड़े का कहीं अतापता नहीं है. गुजरात के दाहोद जिले के एक गांव में एक 30 साल की औरत को अपने प्रेमी के साथ भागने की अजीबोगरीब सजा दी गई. पहले तो उस औरत की जम कर पिटाई की गई, उस के बाद बाल काट कर पति को कंधे पर बिठा कर नाचने के लिए कहा गया. वह औरत लोगों से माफी मांगती रही, लेकिन परिवार वालों ने एक न सुनी और उसे सरेआम नाचने के लिए मजबूर किया गया.

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इसी तरह बिहार के मुजफ्फरपुर के कटरा थाने के तहत एक प्रेमी जोड़े को बिजली के खंभे से बांध कर बेरहमी के साथ पिटाई की गई. इस से भी जब मन नहीं भरा तो दोनों को बतौर जुर्माना 51,000 रुपए देने का फरमान सुनाया गया. इस तरह के मामले पूरे देश से आते रहते हैं. कहीं प्रेमी जोड़ों की परिवार और समाज द्वारा हत्या कर दी जाती है तो कहीं बाल मूंड़ कर जूते की माला पहना कर पूरे गांव में घुमाया जाता है. पंचायतों में इस तरह के जो फैसले लिए जाते हैं, जिन के द्वारा ऐसे फैसले सुनाए जाते हैं, वे गांव के सब से ऊंचे कद के लोग होते हैं. उन की इज्जत पूरे गांव वालों द्वारा की जाती है, तभी तो उन की गिरी हुई बातों को भी पूरा समाज मान लेता है. लेकिन अगर आप गांव के इज्जतदार लोग हैं तो आप की सोच भी ऊंचे दर्जे की होनी चाहिए लेकिन अफसोस, ऐसा हो नहीं पाता है. हम आज भी जातपांत, धर्म की छोटी सोच से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं. प्रेम और विवाह करने के मामले में हमारी सोच अभी भी दकियानूसी है. सच तो यह है कि जब हमारे बच्चे इंजीनियरिंग, डाक्टरी और दूसरी पढ़ाई करने के लिए कालेजों, यूनिवर्सिटियों में जाएंगे तो वहां उन में दोस्ती और प्यार होना लाजिमी है. हम अपने लड़केलड़कियों के हर तरह के बदलाव, खानपान, रहनसहन, उन के बदलते संस्कार को जब स्वीकार कर रहे हैं तो उन के प्यार को भी स्वीकार करना पड़ेगा, तभी हम विकसित और मौडर्न समाज की कल्पना कर सकते हैं. –

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