पार्श्व गायन का एक नया धुमकेतु- ऋषि राज सिंह

ऋषि राज सिंह एक नाम है, आने वाले युग के पार्श्व गायन के एक नये धूमकेतु का. ऋषि इंडियन आइडल में 2 अप्रैल रविवार को विजेता घोषित किए गए और 25 लाख रुपए नगद एक चमचमाती कार के साथ नए भविष्य की दहलीज पर खड़े हैं.

सोनी टीवी पर पर प्रसारित होने वाले ‘इंडियन आइडल’ के 13 वें सीजन के विजेता बन गए हैं अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में जन्मे पढ़ें लिखे ऋषि राज सिंह. रविवार 2 अप्रैल2023 की देर रात प्रतियोगिता के अंतिम चरण में एक लंबे चरमोत्कर्ष के सफर के बाद ऋषि सिंह विजेता घोषित किए गए. विजेता बनने तक का सफर ऋषि सिंह अपने शब्दों में बताते हैं – यह ऐसा रोमांच से भरा रहा जिसकी उन्होंने अपने जीवन में कभी कल्पना भी नहीं की थी, बॉलीवुड के एक से बढ़कर एक सितारों से आमना सामना, उनके सामने अपना प्रदर्शन करना और फिर विजेता घोषित होना उनकी जीवन के लिए अहम स्थान रखता है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऋषि सिंह की जीत पर ट्वीट कर लिखा, -“आपकी अटूट संगीत साधना को समर्पित उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश समेत पूरे संगीत जगत को गर्व है. मां सरस्वती की कृपा आप पर बनी रहे, आपकी स्वर्णिम सफलता का क्रम अनवरत चलता रहे, यही कामना है. ” देश की संगीत के नए सितारे ऋषि सिंह अयोध्या के रहवासी हैं. और आपका पूरा नाम है -ऋषि राज सिंह . उनकी गायिकी के मुरीद क्रिकेट खिलाड़ी विराट कोहली से लेकर सुभाष घाई और राकेश रोशन जैसे बड़े फिल्म निर्माता भी हैं. मजे की बात है कि ऋषि सिंह ने इससे पूर्व इंडियन आइडल के 11वें सीजन के लिए भी आडिशन दिया था, लेकिन उस वक्त वे आडिशन के चौथे दौर में बाहर हो गए थे.

‘इंडियन आइडल’ के हाल के सीजन में ऋषि ने मंच साझा कर रहे हम उम्र सोनाक्षी कर, शिवम सिंह, चिराग कोटवाल, बिदिप्ता चक्रवर्ती और देवोस्मिता राय को काफी पीछे छोड़ विजेता बन गए . दरअसल ऋषि सिंह इस शो की शुरुआत से ही काफी लोकप्रिय हो गए थे. ऋषि सिंह से जब इंडियन आइडल के संदर्भ में उनकी भविष्य की योजना के बारे में पूछा गया तो इस बात का खुलासा किया – वह एक बार फिर इस शो में आना चाहते हैं. मगर एक नए स्वरूप में. इंडियन आइडल में एक जज बन कर.

इंडियन आइडल के संदर्भ में महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ऋषि सिंह को इस कार्यक्रम को निरंतर देखने वाले दर्शकों की तरफ से सबसे ज्यादा मत मिले थे. विजेता घोषित होने के बाद ऋषि को 25 लाख रुपए की पुरस्कार राशि और एक चमचमाती कार मिली. इस जीत के बाद ऋषि को सोनी म्यूजिक इंडिया के साथ काम करने का मौका भी मिला हैं. प्रसन्नता जाहिर करते हुए करते हुए ऋषि सिंह ने बताया कि जब उनका नाम विजेता के रूप में घोषित किया गया तो वह अपने आंसू नहीं रोक पाए . दरअसल यह खुशी के आंसू थे जिसके लिए उसने न जाने कितने सपने सजाए थे कितनी बड़ी बड़ी चुनौतियां थी मगर सब को पार करते हुए आखिरकार विजेता बन ही गया.

ऋषि सिंह की प्रारंभिक शिक्षा कैंब्रियन स्कूल से हुई है. शिक्षा हासिल करने के बाद वह फिलहाल देहरादून के हिमगिरी विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं. प्रतियोगिता के दौरान मंच पर ही उनके जीवन का एक रहस्य खुला कि उनकी सगी मां ने अनाथ ही छोड़ दिया था. उनके माता-पिता ने उन्हें गोद लिया है, जिसके लिए उन्हें ताने भी सुनने पड़े. ऋषि ने कहा कि अगर मेरे इन माता-पिता ने उन्हें पाला न होता को वह कहीं अनाथालय के अंधेरे में रह रहे होते.

ऋषि सिंह ने कहा, ‘इस शो से मेरा एक खास रिश्ता जुड़ गया है. इस शो ने मुझे विशिष्ट पहचान दी है. मैं इस शो में दोबारा आना चाहता हूं, लेकिन प्रतियोगी के रूप में नहीं बल्कि एक जज के रूप में. जब भी यह दिन मेरी जिंदगी में आएगा, उस दिन मुझे ऐसा लगेगा कि मैंने सच में जिंदगी में कोई बड़ा मुकाम हासिल किया है. विशेष ने बताया कि ऋषि सिंह ने बताया कि इंडियन आइडल के इस मंच को यादें कभी भुलाई नहीं जा सकती जहां उन्हें उनके प्रतिभागी प्यारे दोस्त मिले और बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारों का सानिध्य मिला.

उर्फी जावेद को पछाड़ जाह्नवी कपूर ने दिखाया बोल्ड लुक, ग्रीन ड्रेस में उड़ाए लोगों के होश

ऐसा कोई ही मौका होगा कि स्टार किड्स मीडिया की लाइमलाइट ना चुराते हो, ऐसी ही एक जाह्नवी कपूर स्टार किड है जो मीडिया की लाइमलाइट में आ जाती है जिनका बोल्ड लुक लोगों को अपनी दिवाना बना देता है हाल ही में एक्ट्रेस एक इवेंट पर पहुंची जहां उनके लुक की चर्चाएं सोशल मीडिया पर जोरों-शोरों से हो रही है इतना ही नहीं, उनकी तुलना उर्फी जावेद से हो रही है. आइए आपको बताते है पूरी खबर.

 

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आपको बता दें, कि जाह्नवी कपूर एक फैशन इवेंट पर पहुंची जहां उन्होंने ग्रीन क्लर की ड्रेस पहनी हुई थी. इस इवेंट में अपने बोल्ड लुक को लेकर एक्ट्रेस सुर्खियों में आ गई. उनकी ये तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर खलबली मचा रहे है फैंस इन फोटो पर जमकर प्यार लुटा रहे है. एक्ट्रेस  जाह्नवी कपूर ने इस फैशन इवेंट में कटी-फटी ड्रेस में बोल्ड पोज मारे थे. जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर अब वायरल होने लगी हैं.

कटी-फटी ड्रेस में दिए बोल्ड पोज

जाह्नवी कपूर लेटेस्ट फोटोज में फ्रंट ओपन ड्रेस में नजर आई हैं. जिसमें काफी कट्स लगे हुए हैं. अदाकारा की ये ड्रेस देखकर लोगों को उर्फी जावेद की याद आने लगी. एक्ट्रेस अपनी इन ताजा तस्वीरों में कर्वी फिगर को फ्लॉन्ट करती नजर आईं. जाह्नवी कपूर की ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर आते ही वायरल होने लगी हैं. अदाकारा की तस्वीरों पर फैंस जमकर कमेंट्स कर रहे हैं.

 

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बॉलीवुड फिल्म स्टार जाह्नवी कपूर ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपना बोल्ड अवतार दिखाया है. जिन्हें देख एक्ट्रेस के फैंस भी शॉक्ड रह गए. हालांकि कई लोग ऐसे भी हैं जो एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर के इस लुक की तारीफ करते दिखे. जबकि, कुछ लोगों ने जमकर अदाकारा जाह्नवी कपूर को ट्रोल भी किया.

क्या Kick 2 में नजर आएंगे बिग बॉस फेम आसिम रियाज! मेकर्स ने किया खुलासा

इन दिनों सलमान खान मीडिया की लाइमलाइट में बने हुए है उनकी फिल्म किसी का भाई किसी की जान को लेकर सलमान सुर्खियों में है उनकी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत की है. फिल्म को रीलिज हुए 6 दिन हो चुके है फिल्म कमाई करने में जुटी हुई ऐसे में सलमान खान की किक 2 फिल्म की चर्चा ने भी तुल पकड़ लिया है और मेकर्स ने इस पर बड़ा बयान देकर फैंस को नाखुश कर दिया है.

 

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आपको बता दें,कि इन दिनों सलमान खान की आने वाली फिल्म किक2 की चर्चाएं जोरो-शोरों से हो रही है जिसमे मेकर्स ने बड़ा बदलाव किया है औऱ बिग बॉस फेम आसिम रियाज को लेने का फैसला किया है. जिसके बाद से आसिम रियाज के फैंस काफी खुश नजर आ रहे थे. इस खबर के सामने आने के बाद मेकर्स ने इसको लेकर एक ट्वीट किया है. जिसमें उन्होंने एक खबर को ट्वीट करते हुए लिखा, हम फिल्म की स्क्रिप्ट काम कर रहे हैं और ये खबर सच नहीं है. इस ट्वीट ये साफ हो गया है कि आसिम रियाज इस फिल्म का हिस्सा नहीं होंगे.

सलमान खान फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ और ‘किक 2’ के अलावा टाइगर 3 में भी नजर आने वाले है. इस फिल्म में सलमान खान के साथ-साथ कटरीना कैफ भी अहम रोल में दिखाई देंगी. सलमान खान की फिल्म टाइगर 3 भी इसी साल यानी 2023 में बड़े पर्दे पर रिलीज होने वाली है. इस फिल्म में शाहरुख खान और सलमान खान की जोड़ी एक बार फिर साथ नजर आएगी. जानकारी के लिए बता दें कि शाहरुख खान इस फिल्म में कैमियो करने वाले हैं.

तारीफ को सिर पर नहीं बैठाना चाहिए -पूजा हेगड़े

खूबसूरत फिल्म हीरोइन पूजा हेगड़े के ऐक्टिंग कैरियर की शुरुआत साल 2012 में तमिल फिल्म ‘मुगामांडी’ से हुई थी, फिर साल 2014 में 2 तेलुगु फिल्में ‘ओका लैला कोसुम’ और ‘मुकुंडा’ में काम कर के पूजा हेगड़े ने दक्षिण भारतीय फिल्मों में अपने पैर जमा लिए थे.

पूजा हेगड़े तेलुगु फिल्मों में महेश बाबू से ले कर प्रभास तक हर मैगास्टार के साथ काम कर चुकी हैं. हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने साल 2016 में फिल्म ‘मोहनजोदाड़ो’ से कदम रखा था. इस के 3 साल बाद 2019 में आई फिल्म ‘हाउसफुल 4’ से उन की पहचान बनी थी, लेकिन साल 2022 में आई उन की फिल्में ‘राधेश्याम’, ‘बीस्ट’ और ‘सर्कस’ फ्लौप रही थीं.

हाल ही में रिलीज हुई सलमान खान की फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ में पूजा हेगड़े उन की हीरोइन बनी हैं. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश :

सवाल: आप के फिल्म कैरियर का टर्निंग पौइंट क्या रहा है?

जवाब-सब से बड़ा टर्निंग पौइंट तो रणबीर कपूर के साथ एक इश्तिहार करना रहा है, जो जबरदस्त कामयाब हुआ था. दूसरा टर्निंग पौइंट अलु अर्जुन के साथ तेलुगु फिल्म ‘दुवाडा जगन्नाधम’ रही. इस फिल्म ने अपनी लागत का 3 गुना से ज्यादा कमाया था. इस फिल्म के बाद मेरे पास ढेर सारी फिल्मों के औफर आ गए थे.

सवाल: साल 2022 में आप की ‘राधेश्याम’ और ‘सर्कस’ जैसी फिल्में बौक्स औफिस पर नहीं चली थीं. एक कलाकार के तौर पर आप को कैसा महसूस हुआ था?

जवाब-ईमानदारी से कहूं तो ऐसे में बहुत बुरा लगता है, क्योंकि हम ने बड़ी मेहनत से अपना काम किया होता है. मगर मेरा मानना है कि हमें यह भी सोचना चाहिए कि क्या हम ने अपनी तरफ से अपना सौ फीसदी दिया है? जब आप के काम की तारीफ हो, तो उसे सुन कर आगे बढ़ जाना चाहिए. उस तारीफ को अपने सिर पर नहीं बैठा लेना चाहिए.

सवाल: ‘किसी का भाई किसी की जान’ एक मल्टीस्टारर फिल्म है. इस तरह की फिल्में करते समय आप खुद को कितना सुरक्षित महसूस करती हैं?

जवाब-मेरे दिमाग में इस तरह की बातें कभी नहीं आती हैं. मुझे डर नहीं लगता है. जब हम किसी फिल्म में काम करना स्वीकार करते हैं, तो यह देखते हैं कि हम हर सीन में दर्शकों को क्या दे रहे हैं. मेरी सोच यह है कि जब हर सीन अच्छा होगा, तो फिल्म अपनेआप अच्छी बन जाएगी.

सवाल: सह कलाकार के तौर पर सलमान खान कैसे हैं?

जवाब-मुझे उन के साथ काम कर के बहुत अच्छा लगा. वे ईमानदार हैं. उन के दिमाग में जोकुछ होता है, उसे वे कह देते हैं. यह बात मुझे भी पसंद आई. उन्होंने फिल्म के दौरान मेरी काफी मदद की. मैं ने उन से काफीकुछ सीखा है.

सवाल: किसी किरदार को निभाने के लिए आप किस तरह की तैयारियां करती हैं?

जवाब-यह इस बात पर निर्भर करता है कि किरदार क्या है. मैं ने एक फिल्म में एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया है, जो मर रही है. उस किरदार को निभाने से पहले मैं ने कई किताबें पढ़ी थीं. मैं ने कुछ मरीजों की आटोबायोग्राफी पढ़ कर यह समझने की कोशिश की थी कि उस समय मरीज की अपनी भावनाएं क्या होती हैं, उन के अहसास क्या होते हैं.

सवाल: आप के और क्याक्या शौक हैं?

जवाब-मुझे किताबें पढ़ना बहुत अच्छा लगता है. मैं मोबाइल पर वीडियो गेम्स काफी खेलती हूं. मुझे पार्टियों में जाना पसंद नहीं है.

सवाल: आप ने दक्षिण भारत और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई स्टार कलाकारों के साथ काम कर लिया है. अब कोई ऐसा कलाकार है, जिस के साथ आप काम करना चाहती हैं?

जवाब-मैं अमिताभ बच्चन सर के साथ एक फिल्म करना चाहती हूं. दक्षिण भारत में नानी और यश के साथ भी काम करना है.

सवाल: दक्षिण भारत की फिल्में अब पैन इंडिया के तौर पर रिलीज हो रही हैं. इस बदलाव को आप किस तरह से देखती हैं?

जवाब-यह सब बहुत अच्छा हो रहा है. इस की वजह से एक अच्छा कंटैंट हर भाषा के दर्शकों तक पहुंच पा रहा है. इस से फिल्म प्रोड्यूसर अपनी अगली फिल्म में ज्यादा पैसा लगा सकता है.

सवाल: आप की आने वाली फिल्म कौन सी है?

जवाब-मैं दक्षिण भारत में महेश बाबू के साथ एक फिल्म कर रही हूं, जिस का नाम अभी तय नहीं है.

सनकियों की साजिश : हत्या की अनोखी कहानी

ब्रिटेन के पूर्वी क्षेत्र लिंकनशायर स्थित उपनगरीय इलाके स्पालडिंग में एक पौश कालोनी है डा. वसन एवेन्यू. इसी कालोनी में स्थित एक 2 मंजिले मकान से 15 अप्रैल, 2016 की दोपहर को मांबेटी की खून से लथपथ लाशें मिलने से कालोनी में सनसनी फैल गई थी. लोगों को इस बात पर हैरानी हो रही थी कि किस ने मांबेटी की हत्या कर दी?

उन्हें तब और हैरानी हुई, जब पुलिस ने मकान से एक किशोर प्रेमी जोड़े को हिरासत में लिया. पुलिस को पड़ोसियों से पूछताछ में पता चला कि मरने वाली महिला 49 वर्षीया एलिजाबेथ एडवर्ट उर्फ लिज और उन की 13 साल की बेटी केटी थी, जो एक स्कूल में खाना परोसती थी. मांबेटी इस मकान में लंबे समय से रह रही थीं.

लिज के पति पीटर एडवर्ट उस से अलग रहते थे. उन की विवाहिता बड़ी बेटी मैरी काट्टिंघम भी दूसरे इलाके में अपने परिवार के साथ रहती थी. 15 अप्रैल, 2016 को जब पुलिस उस 2 मंजिला मकान का दरवाजा तोड़ कर अंदर दाखिल हुई तो निचले तल पर एक किशोर जोड़ा गद्दे पर आराम फरमाते मिला. पुलिस ने उस से पूछा, ‘‘एलिजाबेथ कहां है?’’

लड़के के साथ मौजूद लड़की ने बगैर किसी हड़बड़ाहट और डर के हाथ से सीढि़यों की तरफ इशारा करते हुए धीमे से कहा, ‘‘ऊपर.’’

पुलिस ने लड़के से पूछा, ‘‘उन के साथ क्या हुआ है?’’

लड़के ने भी लड़की की तरह शांत भाव से कहा, ‘‘ऊपर जा कर देख क्यों नहीं लेते?’’

पुलिस को उन का व्यवहार कुछ अटपटा सा लगा. कुछ पुलिसकर्मी सीढि़यों के जरिए ऊपरी मंजिल पर पहुंचे तो वहां एलिजाबेथ उर्फ लिज और उन की बेटी केटी की लाश उन के कमरों में पड़ी मिलीं. लिज के शरीर पर तेजधार हथियार के गहरे निशान थे, जो गले के अतिरिक्त शरीर के दूसरे ऊपरी हिस्से पर भी थे.

इसी तरह के जख्म केटी के भी शरीर पर थे. ऐसा लग रहा था, जैसे उन पर हत्यारे ने चाकू से ताबड़तोड़ वार किए हों.

पुलिस ने मकान में मौजूद लड़की और लड़के को हिरासत में ले लिया था. दोनों से पूछताछ की गई तो उन्होंने मां बेटी की हत्या का अपराध आसानी से स्वीकार कर लिया था. वह पुलिस से इतने इत्मीनान से बात कर रहे थे, जैसे इन्होंने कोई अपराध किया ही न हो. उन्होंने अपने बारे में बताया कि उन का इरादा नींद की ज्यादा गोलियां खा कर आत्महत्या करने का था.

पुलिस ने उन के पास से एक डायरी बरामद की थी, जिस में उन्होंने एक स्यूसाइड नोट भी लिखा था. उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त की थी कि खुदकुशी के बाद उन की लाशों को जला कर उस की राख उन के पसंदीदा जगहों पर बिखेर दी जाए.

लिखे गए कुछ अन्य वाक्यों से लग रहा था कि उन्हें न तो जीवन से प्यार था और न ही भविष्य की कोई योजना थी. न जीने की तमन्ना थी और न ही कोई महत्त्वाकांक्षा. दोनों लाशों को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया था कि उन की हत्या धारदार चाकू से गला रेत कर की गई थी.

पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले कर अदालत में उन के बयान कराए तो लड़के ने तो अपना अपराध स्वीकार कर लिया, लेकिन लड़की हत्या में शामिल होने से इनकार कर रही थी. वारदात के समय उन की उम्र महज 14 साल थी. पुलिस के सामने लड़की की भूमिका काफी अस्पष्ट होने से तहकीकात करना एक चुनौती बन गई थी.

पुलिस को उन पर जघन्य हत्या का दोष लगाने के साथसाथ उन के नाबालिग होने का भी खयाल रखना था. उन के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन की पहचान भी पुलिस छिपा रही थी. जांच करने वाली टीम ने पाया था कि दोनों एक किस्म के मनोरोगी और जीवन से हताश प्रेमीयुगल थे. उन की हरकतें जितनी बचकानी थीं, उतने ही वे इस उम्र में ही सब कुछ हासिल करने की तमन्ना रखते थे.

इस मनोविज्ञान की गुत्थी के साथ दोहरे हत्याकांड को सुलझाने में जासूसी और फोरैंसिक जांचकर्ताओं की खास टीम के अतिरिक्त मनोचिकित्सक तक की मदद ली गई. पुलिस ने छानबीन में पाया कि लिज और आरोपी लड़की के बीव किसी बात को ले कर कोई पुराना विवाद चल रहा था.

उसी विवाद ने उस लड़की को इस कदर सनकी बना दिया था कि उस ने मांबेटी की हत्या की साजिश रच डाली. उस ने अपने साथ पढ़ने वाले प्रेमी को हत्या के लिए राजी कर लिया. इस संबंध में कुल 12 विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों में 7 पुरुष और 5 महिलाओं द्वारा जुटाए गए तथ्यों और तर्कों की मदद से मामले की तह तक पहुंचना संभव हो सका था.

पुलिस की प्राथमिक रिपोर्ट और अदालत में दिए गए उन के बयानों के आधार पर लड़के को 8 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में ले कर ट्रायल पर भेज दिया गया था. बाद में पूरी तहकीकात की जिम्मेदारी मुख्य जांचकर्ता इंसपेक्टर मार्टिन हैल्वे को सौंप दी गई थी. जांच जब आगे बढ़ी तो नाबालिग लडकी को भी आरोपी बना दिया गया. इस के बाद लड़की के बयान के आधार पर हत्याओं की गुत्थी परतदरपरत उधड़ने लगी.

यह जान कर सभी को हैरानी हुई कि हत्याएं बहुत ही साधारण अपमान का बदला लेने के लिए की गई थीं. इस से पहले हम उन परिस्थितियों पर गौर करना चाहेंगे, जिन की वजह से हत्यारा लडका और उस की प्रेमिका कू्रर बनी.

बात सितंबर, 2013 की है. हायर सैकेंडरी स्कूल की एक 12 वर्षीया छात्रा एक दिन अपनी कक्षा में काफी आक्रामक थी. उस ने स्कूल के अनुशासन को नजरअंदाज करते हुए आक्रोश में एक कुरसी इस कदर धकेली कि उस से एक सहपाठी छात्र को जोर की टक्कर लग गई. इस से लड़का तमतमाया हुआ उस पर उबल पड़ा.

लड़की साथियों के बीच तमाशा बन गई. स्थिति को भांप कर उस ने झट से सौरी बोल दिया. लड़का भी दूसरे सहपाठियों के समझानेबुझाने पर शांत हो गया. बात आईगई हो गई, लेकिन इस घटना ने दोनों के बीच आकर्षण के बीज अंकुरित कर दिए. बाद में उन के बीच दोस्ती हो गई, जो जल्द ही एकदूसरे पर अथाह विश्वास करने वाली गहराई तक पहुंच गई.

इसी बीच वे एकदूसरे से प्रेम करने लगे, जिस का अहसास उन्हें जल्द हो गया. वे साथसाथ घूमनेफिरने लगे. हालांकि लड़का जितना गंभीर और शांत स्वभाव का था, लड़की उतनी ही चुलबुली और अपनी मनमर्जी की मालकिन थी. अपनी बातें मनवाना और इच्छा पूरी करना वह भलीभांति जानती थी. आगे बढ़े कदम को पीछे हटाना तो जैसे उस ने सीखा ही नहीं था. यही कारण था कि जल्द ही उस ने लड़के को अपने रंग में रंग लिया.

उन के बीच प्रेम पनपा तो वे पढ़ाई के प्रति असहज और लापरवाह हो गए. स्कूल परिसर में उन की अनुशासनहीनता की कई शिकायतें आईं. जिस ने भी उन्हें समझाने की कोशिश की, वे उस से उलझ पडे़. लड़का भी अपनी प्रेमिका के प्रभाव में आ कर आक्रामक तेवर वाला बन गया.

यही वजह थी कि एक दिन लड़का अनियंत्रित हिंसक प्रवृत्ति दिखाने और अनुशासनहीनता के आरोप में स्कूल से निकाल दिया गया. यह बात लड़की के दिल में चुभ गई, क्योंकि उसे लड़के से मिलनेजुलने में परेशानी होने लगी थी.

लड़की 6 साल की उम्र से ही अपने परिवार के लिए सिरदर्द बनी रहती थी. तब उस के असामान्य व्यवहार को देखते हुए उस का मनोचिकित्सक से इलाज भी कराया गया था. डाक्टर ने उस की अच्छी देखभाल की सलाह दी थी.

हत्याकांड की घटना से ठीक एक साल पहले भी उसे मानसिक उपचार के लिए स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य सेवा केंद्र में भरती कराया गया था. कुछ महीने तक उस का उपचार चला. उस में सुधार होने के बावजूद मनोचिकित्सक ने उस की मनोस्थिति के स्तर को 10 में से 2 अंक दे कर चिंता का विषय बताया था. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उस की अच्छी देखभाल और विशेषज्ञ की मदद लेने की सलाह दी गई. उस के पिता वेल्डर थे. वह ड्रग लेता था और इस कारण वह पत्नी और 2 साल की बेटी को छोड़ कर कहीं चला गया था. बड़ी होने पर वही लड़की अकेलेपन की भावना से भर गई थी, जिस से उस में आक्रामक तेवर आ गए थे.

लड़के की परवरिश भी असामान्य तरीके से हुई थी और उस का बचपन काफी अशांत किस्म का था. उस की मां की आकस्मिक मौत हो गई थी. तब वह मात्र 5 साल का था और उस ने अपने पिता को घर में रहते हुए शायद ही कभी भरी नजरों से देखा हो. उस के पिता हमेशा काम के सिलसिले में यात्राओं पर रहते थे, जिस से उस का बचपन भी एकाकीपन में गुजरा था. अदालत में केस चला तो वकीलों ने भी इस हत्याकांड की पृष्ठभूमि के 2 मुख्य कारणों की ओर संकेत किए.

पहले कारण में सामाजिक और पारिवारिक संस्कार के साथ मानवीयता को पोषित करने वाले मनोवैज्ञानिक विकास की समस्या को रेखांकित किया. जबकि दूसरा कारण नाबालिग लड़की के मन में गहराई तक बैठ चुकी डिनर लेडी लिज के साथ पुराने विवाद से संबंधित था.

पूछताछ में आरोपी लड़की ने बताया था कि एक बार उस की लिज के साथ जबरदस्त बहस हो गई थी. लड़की का व्यवहार और स्कूल में अनुशासनहीनता लिज को पसंद नहीं थी. उस ने उसे कड़ी फटकार लगाई थी. तभी लड़की ने खुद को बेहद अपमानित महसूस किया था और उस ने लिज से हर कीमत पर बदला लेने की ठान ली थी.

जांच और हत्यारे द्वारा अदालत में दिए गए बयान के मुताबिक प्रेमी युगल ने हत्या की योजना मैकडोनाल्ड के एक आउटलेट में बैठ कर 11 अप्रैल, 2016 को बनाई थी. उसी दिन उन्होंने हत्या के बाद खुदकुशी करने की शपथ भी ली थी. योजना को अंजाम देने के लिए दोनों 13 अप्रैल की रात को लिज के घर के एक अलग हिस्से में चोर की भांति जा घुसे थे.

लड़के ने पीठ पर टांगने वाले बैग में एक टीशर्ट में लपेट कर तेज धार के 4 चाकू रख लिए थे. उन में 8 इंच के 2 चाकुओं में काला हत्था लगा था, जबकि 2 मध्यम आकार के चाकू थे. लड़की ने बताया था कि उस का प्रेमी जब लिज की हत्या को अंजाम दे रहा था, तब अपने बचाव के लिए वह काफी संघर्ष कर रही थी. वह शोर मचा रही थी.

लड़के ने उस की आवाज को रोकने के लिए चाकू से गले की नली काट दी ताकि दूसरे कमरे में सो रही उस की बेटी तक उस की आवाज न पहुंचे. लिज की हत्या करने के बाद उन्होंने उस की बेटी केटी को भी मौत की नींद सुला दिया था. विशेषज्ञों ने इसे उस की अपरिपक्व मानसिकता और मन में दबे आक्रोश को दर्शाने वाला मनोविज्ञान बताया था.

उस के बारे में जांच करने वालों ने पाया था कि उसे बचपन से ही किसी भी तरह की रोकटोक पसंद नहीं थी. वह हमेशा अपनी मनमरजी की मालकिन बनी रहना चाहती थी. वह लिज से बदला लेना चाहती थी. इस के लिए उस ने अपने सहपाठी को उकसाया. जांच के बाद लड़की भी हत्या की आरोपी करार दे दी गई थी. जबकि पक्ष के वकीलों द्वारा उसे विक्षिप्त और सनकी साबित करने की भी कोशिश की गई थी.

इस के बावजूद फोरैंसिक मनोचिकित्सक के एक सलाहकार डा. फिलिप जोसेफ ने अदालत में तर्क दिया था कि उस के दावे के मुताबिक वे मानसिक विकार से पीडि़त नहीं थे. अगर वे अपने मन में जहरीले रिश्ते, भावना और विचार नहीं रखते तो बहुत संभव था कि ये हत्याएं नहीं होतीं. पर कुटिल मन वाले 2 व्यक्ति एक साथ होते हैं, तब ऐसी घटनाओं को बढ़ावा मिलता है.

अदालत ने विभिन्न बयानों के आधार पर पाया था कि लड़की और लड़का सितंबर, 2013 से गाहेबगाहे मिलतेजुलते रहे, लेकिन मई 2015 तक उन के संबंधों में मधुरता नहीं बन पाई थी. इस दौरान वे बातबात पर उलझते भी रहते थे, जो एक तरह से नाबालिगों में होता है. उन के व्यवहार में हमेशा आक्रोश बना रहता था. लड़की ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा था कि उसी ने लड़के को हत्या के लिए प्रेरित किया था.

उस ने यह भी माना था कि लड़के के साथ उस ने केवल एक बार यौनसंबंध बनाया था, वह भी हत्या के बाद. उस का कहना था कि हत्या की रात वह उस से बहुत प्रभावित हुई थी, क्योंकि उस ने उस की इच्छा पूरी कर दी थी. न्यायाधीशों की बेंच ने पाया था कि दोनों के संबंधों में एकदूसरे के प्रति विश्वास की भावना नवंबर, 2015 से मार्च 2016 के बीच पनपी थी.

यह भी स्पष्ट हुआ था कि हत्या में उस की भूमिका पूरी तरह से बदले की भावना से ग्रसित थी. तमाम गवाहों के बयान, तहकीकात के सभी जांच बिंदुओं, तर्कों, तथ्यों और आरोपियों के बयानों के आधार पर 18 अक्तूबर, 2016 को नाटिंघम क्राउन कोर्ट में ढाई घंटे तक लंबी बहस चली. कोर्ट में न्यायाधीशों की बेंच द्वारा इसे बहुत ही असाधारण मामला बताया गया.

न्यायाधीश जस्टिस हड्डन ने प्रेमी युगल को हत्या का दोषी ठहराते हुए उन्हें आजीवन कैद की सजा सुनाई थी. वे 9 नवंबर, 2016 को 20 साल के लिए जेल भेज दिए गए. फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इस मामले में कई पहलू एकदूसरे से अलग थे और यह असाधारण ढंग से एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई हत्या थी. दोनों हत्यारे सजा के वक्त भले ही नाबालिग थे, लेकिन जब वे जेल से छूटेंगे, तब उन की उम्र 35 साल हो जाएगी.

मैं लोगों के सामने अपनी बात रखने में घबरा जाता हूं और मेरे पसीने छूटने लगते हैं, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं एक गरीब घर का होनहार लड़का हूं और पढ़ाई में भी अच्छा हूं. मेरी दिक्कत यह है कि मैं लोगों के सामने अपनी बात रखने में घबरा जाता हूं. मेरे पसीने छूटने लगते हैं. अभी मेरी उम्र 17 साल है. मुझे लगता है कि आगे यह समस्या मुझे और भी दुखी करेगी. कोई उपाय बताएं?

जवाब-

आप खुद को होनहार होने का सर्टिफिकेट जिस बिना पर दे रहे हैं, वही यह बात है जो आप दूसरों के सामने अपनी बात रखने में घबरा जाते हैं, लेकिन यह कोई बड़ी समस्या नहीं है. आप लोगों में उठेंबैठें और धीरेधीरे अपनी बात सामने रखें.

दरअसल, आप में आत्मविश्वास की कमी है और गरीब होना इस की वजह हो सकती है, पर ध्यान रखें, गरीब होने का बोलने से कोई लेनादेना नहीं है.

आगे यह समस्या परेशान करेगी, आप का यह अंदाजा सही है, इसलिए अभी से इसे काबू करें. स्कूल के प्रोग्रामों में हिस्सा लें और मंच से बोलना सीखें. एकाध बार दिक्कत होगी, पर जब आत्मविश्वास आ जाएगा, तब यह समस्या दूर हो जाएगी.

जानें पत्नी को सेक्स के लिए कैसे मनाएं

सुबह से शाम तक मन होता है कि एकदूसरे को जितना महसूस कर सकते हैं करते रहें, हर पल साथ रहें, सेक्स एन्जौए करें. लेकिन, शादी को जब कुछ महीने या कहें साल गुजर जाते हैं तो सेक्स के प्रति पत्नी की उदासीनता बढ़ती जाती है. घर के काम, बच्चों की जिम्मेदारी और रोमांस के लगभग खत्म होने के साथ ही उस की सेक्स की इच्छा भी खत्म होने लगती है. ऐसे में पति के लिए बहुत जरूरी है कि वह अपनी पत्नी को सेक्स के लिए इस तरह मनाए कि वह सेक्स के लिए केवल हां न कहे बल्कि पूरी तरह उस का आनंद भी ले.

रोमांस को रखें बरकरार

अकसर पति काम से थक हारकर घर आता है तो खाना खा कर सीधा बिस्तर पर पसर जाता है. वह उम्मीद करने लगता है कि पत्नी बिस्तर पर आए और वे दोनों सेक्स करना शुरू कर दें. लेकिन, ऐसे में या तो पत्नी सेक्स के लिए स्पष्टरूप से मना कर देगी या फिर फिर हां कहेगी भी तो बेमन से. इस तरह पति खुद भी सेक्स का लुत्फ़ नहीं उठा पाते. पति होने के नाते आप का काम सीधा सेक्स करना ही नहीं है बल्कि उस से पहले थोड़ा रोमांस करना भी है. पत्नी कोई काम कर रही हो तो उसे जा कर थोड़ा छेड़ आएं, कभी उस की बाहें पकड़ें तो कभी उस के कान में फुसफुसाएं कि वह कितनी खूबसूरत लग रही है. उस के लिए उस की पसंद की चीज़े लाएं तो कभी उस के खाने की तारीफ कर दें. ऐसे रोमांस बरकरार रहेगा और सेक्स के लिए पत्नी का मन भी करेगा.

पत्नी को नजरअंदाज न करें

आप यदि हर बात पर पत्नी को उलाहनाएं देते रहते हैं, उस की बुराई करते हैं, उस की बातों, चिंताओं और परेशानियों पर गौर नहीं करते तो भला कैसे वह अपना दिमाग खाली कर पाएगी और सेक्स में मन लगा पाएगी? आप की पत्नी वैसे आप के लिए हर काम करती है लेकिन  सेक्स ऐसी क्रिया है जिसे यदि वह न करना चाहे तो उस का शरीर भी ‘न’ की मुद्रा में आ जाता है. इसलिए जरूरी है कि आप अपनी पत्नी को केवल अपनी जरुरत न समझें बल्कि उस पर ध्यान दें और उसे खुश रखने की कोशिश करें.

प्यार का इजहार करना न भूलें

किसी महान व्यक्ति का कहना है कि सेक्स के समय किया गया प्यार का इजहार असल में प्यार नहीं होता, वह उस मोमेंट की नजाकत में निकले कुछ शब्दभर होते हैं जो किसी के भी मुंह से निकल सकते हैं. इसलिए कभी भी अपने प्यार का इजहार सेक्स के समय के लिए बचाकर न रखें बल्कि अपनी पत्नी को जब मौका मिले बताएं कि आप उस से कितना प्यार करते हैं. इस से उसे आप के प्रति प्यार भी उभरेगा और सेक्स के लिए उस में उत्सुकता भी जागेगी.

खुद की ग्रूमिंग पर ध्यान दें

वह आप की पत्नी है तो इस का मतलब यह नहीं की आप यह सोचें कि जैसे हैं वैसे ही वह आप को पसंद करे. माना आप दोनों पतिपत्नी हैं लेकिन इस का मतलब यह तो नहीं कि आप अपनी तरफ से कोई एफर्ट डाले ही न. अच्छे कपड़े पहनें, अपने इंटिमेट एरिया को क्लीन रखें, दांत, नाक, सब साफ़ रखें. खुद को साफसुथरा और आकर्षित बनाएंगे तो आप की पत्नी भी आप की तरफ आकर्षित होगी.

सेक्स में पत्नी की इच्छाओं का ध्यान रखें

आप की पत्नी को सेक्स से ओर्गास्म या प्लेजर नहीं मिलता तो वह सेक्स के प्रति हमेशा उदासीन ही रहेगी. इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि सेक्स करते समय आप वह पोजेज व मूव्स भी करें जो आप की पत्नी को पसंद हों. उसे वहांवहां छुएं जहां उसे सब से ज्यादा प्लेअजर मिलता हो, शरीर में सनसनी होती हो. सेक्स के समय इतने वाइल्ड भी न हों कि पत्नी को दर्द या तकलीफ हो. औरतों को सेक्स जितना ही मजा फोरप्ले में आता है या कहें उस से ज्यादा ही, तो फोरप्ले को इगनोर न करें. यह सब कर के यकीनन आप की पत्नी का सेक्स करने का मन होगा और वह आप को मना नहीं करेगी.

पोंगापंथ : अंधविश्वास की चोटी पर चोट

देश के कुछ हिस्सों से औरतों की चोटी काटे जाने की अनगिनत घटनाएं सामने आ चुकी हैं. कहा जा रहा है कि पीड़ित लड़कियों और औरतों को रात में अचानक महसूस हुआ कि कोई उन का गला दबा रहा है, फिर वे बेहोश हो गईं. बाद में दूसरे लोगों ने देखा कि बिस्तर पर उन के बाल कटे पड़े थे.

इस तरह की घटनाएं राजस्थान के गांवों से शुरू हो कर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और बिहार तक में फैलती गईं. कोई इसे ओझाओंतांत्रिकों की करतूत बता रहा था, तो कोई अनजानी ताकतों का प्रकोप.

आगरा में तो एक बूढ़ी औरत को चोटी काटने वाली डायन बता कर मार डाला गया. लोगों ने इस से बचने के लिए अपनेअपने घरों के दरवाजों पर हलदी और मेहंदी के छापे बनाए, साथ ही, नीम के डंठल लगाए.

अंधविश्वास की पायदान

सितंबर, 1995 की एक सुबह गणेश की मूर्ति के चम्मच से दूध पीने की खबर बहुत तेजी से फैली. असर यह हुआ कि देश के करोड़ों लोग मंदिरों में जा कर गणेश की मूर्ति को दूध पिलाने लगे.

साल 2001 में ‘मंकीमैन’ की अफवाह ने जोर पकड़ा था. दिल्ली में सैकड़ों लोगों पर मंकीमैन ने तथाकथित रूप से हमला किया था.

हालांकि लोगों ने दावा किया था कि उन्होंने मंकीमैन को दौड़तेभागते और छतों को लांघते दूर से देखा था. बाद में बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा मामला अफवाह साबित हुआ था.

साल 2002 में उत्तर प्रदेश में मुंहनोचवा का खौफ फैला हुआ था. कहा जा रहा था कि एक आदमी, जिस का मुंह जानवर जैसा है, लोगों के मुंह नोच कर चला जाता है और जिस के भी मुंह पर वह हमला करता है, उस के ऐसे जख्म हो जाते हैं, जो कभी ठीक नहीं होते. पुलिस प्रशासन इसे अफवाह करार देता रहा और लोगों को समझाता रहा.

साल 2006 में एक दिन अचानक हजारों लोग मुंबई के एक समुद्र तट पर जुटने लगे. मोबाइल से ले कर ईमेल के जरीए लोगों तक यह खबर पहुंचने लगी कि समुद्र का पानी मीठा हो गया है और भीड़ इस मीठे पानी का स्वाद चखने और भर कर ले जाने के लिए उमड़ पड़ी. यह भी अफवाह का एक पहलू था.

साल 2016 में नोटबंदी के दौरान अचानक यह खबर उड़ने लगी थी कि बाजार से नमक खत्म हो रहा है. इस के लिए कहा गया कि नमक की किल्लत हो गई है और यह जल्द ही एक हजार रुपए किलो में मिलेगा. हो सकता है कि यह मिलना ही बंद हो जाए.

यह अफवाह उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा तक फैली. अफवाह के बाद दुकानों पर नमक खरीदने वालों की लंबी लाइनें लग गईं, जबकि असल में ऐसी कोई किल्लत नहीं थी.

चोटी का मामला चोटी पर

हाल ही में देश के बहुत से इलाकों में औरतों के कटे बाल मिलने के मामले सामने आए, जिस ने दहशत का माहौल पैदा कर दिया. आखिर कौन काट रहा था औरतों के बाल?

बाड़मेर की इस वारदात के बाद तो राजस्थान के ही नागौर, बीकानेर, जैसलमेर समेत पश्चिमी राजस्थान यानी मारवाड़ के कई इलाकों से ऐसे तमाम किस्सेकहानियों और अफवाहों की झड़ी सी लग गई थी.

इस के बाद हरियाणा के झज्जर, मेवात, रोहतक वगैरह जिले के गांवों में औरतों की चोटी काटने की घटनाएं हुईं. धीरेधीरे चोटी काटने की घटनाएं गुरुग्राम के आसपास के गांवों में भी होने लगीं.

हरियाणा में गुरुग्राम के भीमगढ़ इलाके की 53 साला सुनीता देवी ने कहा, ‘‘एक तेज रोशनी से मैं बेहोश हो गई. एक घंटे बाद मुझे पता चला कि मेरे बाल काट लिए गए थे.’’

अफवाह फैलाई जा रही थी कि पहले औरतों के सिर में तेज दर्द होता है, फिर वे बेहोश हो जाती हैं और तब उन की चोटी काट दी जाती है.

औरतों के मुताबिक, यह कोई बुरी आत्मा थी, जिस की नजर उन के बालों पर थी. इस तथाकथित आत्मा से बचने के लिए कहीं लड़कियां अपनी चोटी में नीबूमिर्च लटका रही थीं, तो कहीं पैरों में महावर लगा रही थीं. घरों की दीवारों पर हाथों के हलदी और गेरू से छापे लगाए जा रहे थे. औरतें डर के मारे सिर पर कपड़ा बांध कर सो रही थीं.

किसी औरत ने कहा कि वह कुत्ता देखने के बाद बेहोश हुई, तो किसी ने कहा कि उसे किसी ने अंधेरे में धक्का दिया, जिस के चलते वह गिर पड़ी और बेहोश हो गई. जो बात समान रूप से सही थी, वह यह थी कि चोटी काटे जाने से पहले पीडि़त औरत का बेहोश होना.

हालांकि फिलहाल दावे के साथ यह नहीं कहा जा सकता कि यही सच था. एक बात यह भी समझने की थी कि जिन औरतों की चोटी कटने की बातें सामने आईं, वे बेहद गरीब और अनपढ़ थीं.

मौजूदा दौर में इस तरह की घटनाएं हमारी तरक्की पर सवालिया निशान लगाती हैं. आज भी नरबलि और डायन हत्या जैसी घटनाएं घट रही हैं.

पिछले साल झारखंड में 5 औरतों की डायन बता कर हत्या कर दी गई थी. वहीं उत्तर प्रदेश के सीतापुर इलाके में एक परिवार ने तांत्रिक की सलाह पर अपनी ही बच्ची की बलि चढ़ा दी थी.

पुलिस ने इन मामलों की जांच की, लेकिन न तो कुछ सुराग मिला और न ही कोई चश्मदीद गवाह. ऐसे में चोटी कटने की घटनाओं को ले कर यह तय होना मुश्किल हो पा रहा था कि ये पूरी तरह से कोरी अफवाह हैं और अपराधियों का कोई ऐसा गैंग नहीं है या फिर यह वाकई एक सोचीसमझी खुराफाती साजिश के तहत किया जा रहा है.

सवाल यह भी है कि अगर इस के पीछे किसी गैंग का हाथ था, तो वह ऐसा क्यों कर रहा था?

गुरुग्राम की एक घटना के मुताबिक, आशा देवी के ससुर सूरज पाल ने बताया कि एक रात आशा देवी के बाल कट जाने के बाद उन्होंने आशा और घर की दूसरी औरतों को उत्तर प्रदेश में एक रिश्तेदार के घर पर भेज दिया था. इस हमले के बाद वे डरी हुई थीं. उन्हें कुछ हफ्तों के लिए घर से दूर रहने को कहा गया था.

सूरज पाल ने कहा कि उस दिन वे घर पर थे, जबकि आशा देवी रात के 10 बजे किसी काम से घर के बाहर थीं. जब वे आधा घंटे तक नहीं लौटीं, तब वे उन्हें ढूंढ़ने निकले. ढूंढ़ने पर बाथरूम में वे बेहोश पड़ी मिलीं. उन के सिर के कटे बाल जमीन पर बिखरे पड़े थे.

तकरीबन एक घंटे बाद होश में आने पर आशा देवी ने बताया कि उन पर किसी औरत ने हमला किया था. सबकुछ केवल 10 सैकंड में ही हो गया.

इसी तरह के कुछ मामले गुरुग्राम से 70 किलोमीटर दूर रेवाड़ी जिले के देहात के इलाकों में भी देखे थे.

गुरुग्राम में ही एक औरत ने यह बताया कि उस ने एक बिल्ली की आकृति को अपने ऊपर हमला करते देखा और पाया कि उस के बाल कट गए, जो कि नामुमकिन सा लगता है.

इसी तरह एक और पीडि़त औरत का कहना था, ‘‘मैं पड़ोसी के घर जा रही थी, जब किसी ने पीछे से मेरे कंधे को थपथपाया. मैं पीछे मुड़ी, तो कोई नहीं था. इस के बाद क्या हुआ, मुझे कुछ याद नहीं. बस अपनी चोटी कटी हुई पाई.’’

विज्ञान के हवाले से अगर हम मानवशास्त्र के वैज्ञानिक पक्ष के हवाले से कहें, तो मास हिस्टीरिया इनसानी जिंदगी का एक कड़वा सच है, जो विकसित समाज में भी देखा जाता है.

19वीं सदी के आखिर में लंदन में ‘जैक: द रिपर’ नामक एक सीरियल किलर की दहशत छाई रही, जो कुछ समय बाद खुद ब खुद खत्म हो गई.

दरअसल, हमारे अचेतन मन में न जाने क्याक्या चीजें चलती रहती हैं. ऐसे में किसी भी बेतुकी हरकत पर बहुत सारे लोग एकसाथ चर्चा करने लगें, तो वह मास हिस्टीरिया में बदल जाती है. इस की जद में आ कर कई लोग जो सुनते हैं, वही करने लग जाते हैं.

मनोवैज्ञानिक इस को सामूहिक उन्माद या सामूहिक विभ्रम बताते हैं. इस नजरिए से भी जांच की जरूरत है कि कहीं कोई अंधविश्वासी समूह या संगठन तो इस के पीछे नहीं है, जिस का कि कोई फायदा छिपा हो?

लगातार फैल रही इस अफवाह के खिलाफ हरियाणा और पंजाब में काम करने वाली तर्कशील सोसाइटी सामने आई. इस सोसाइटी ने ऐलान किया है कि अगर चोटी कटने की घटना के पीछे कोई भूतप्रेत या दैवीय ताकत का हाथ साबित कर दे, तो उसे एक करोड़ रुपए का इनाम दिया जाएगा.

मुमकिन है कि चोटी काटने का मामला किसी आत्मा व डायन से जुड़ा हुआ न हो कर, बल्कि कुछ असामाजिक तत्त्वों की मिलीजुली चाल हो, जो अंधविश्वास फैला कर अपना पुश्तैनी धंधा, जो मंदा हो चला है, पटरी पर लाने के लिए लोगों को समयसमय पर इस तरह परेशान कर अंधविश्वास के पौधे को हराभरा रखना चाहता हो, जिस से कि समाज पर उन की बादशाहत बनी रहे.

कई लोग इस अंधविश्वास की आड़ में पुरानी दुश्मनी भी साधते हैं. बहुत साल पहले मुंहनोचवा का भी खौफ इसी तरह फैला था. वह भी हमारे आसपास रहने वाले कुछ लोगों की ही करतूत थी.

हल है आसान

यह दुख की बात है कि हमारी सरकारें एक तरफ तो वैज्ञानिक सोच बढ़ाने का दम भरती हैं, वहीं दूसरी तरफ आज भी अखबारों, टैलीविजन चैनलों से ले कर सड़कों, चौराहों, गलियों में तांत्रिकोंओझाओं के बड़ेबड़े इश्तिहार छाए रहते हैं. इन में मनचाहा प्रेम विवाह कराने, गृहक्लेश से मुक्ति दिलाने, सौतन का नाश करने, शत्रुमर्दन, गड़े धन की प्राप्ति जैसे तमाम दावे किए जाते हैं. अशिक्षा और परेशानियों में जकड़े हुए लोग इन के पास राहत पाने जाते हैं और ठगी के शिकार होते हैं.

सरकार हो या समाज, सभी को मिल कर यह सोचने की जरूरत है कि आखिर कब तक हमारा समाज इस तरह की मुसीबतों में फंसता रहेगा?

\ऐसे लोगों की धरपकड़ खुद समाज ही कर सकता है. पुलिस को आमजन को सतर्क करना चाहिए. अफवाहों के सिरपैर नहीं होते. उन की काया नहीं होती, जिसे पुलिस पकड़ सके. हां, उसे प्रभावित इलाकों में लगातार गश्त और छोटीछोटी महल्ला स्तरीय सजगता बैठकें करनी चाहिए, ताकि बदमाशों में डर बना रहे.

ऐसे ही मौकों पर सिविल डिफैंस के कार्यकर्ता काम आते हैं. एनजीओ को सक्रिय किया जा सकता है. यह समस्या अफवाहों की देन है, इसलिए उन्हें ही काबू करने की कोशिश होनी चाहिए.

सतर्कता और समझदारी से जिस तरह मुंहनोचवा का खौफ खत्म हुआ, वैसे ही चोटी कटवा की अफवाहों को भी सब को मिलजुल कर खत्म करना होगा.

आकाशीय बिजली : अंधविश्वास का गोबर

अप्रैल-मई से लेकर के अब आने वाले अगस्त माह तक आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं आम हो जाती है. पानी बरसात के साथ आकाश से बिजली गिरने की घटनाएं एक सतत प्रक्रिया के तहत होती रहती है. मगर इसके साथ ही जाने कितने लोग इस विद्युत की चपेट में आकर के अकाल मौत के ग्रास बन जाते हैं. मगर छत्तीसगढ़ सहित देश के कुछ आदिवासी राज्यों में आकाशीय बिजली की घटना के बाद मृत शरीर को गोबर में दफन करने का  अंधविश्वास पाया जाता है और यह माना जाता है कि गोबर में दफन करने के बाद मृत व्यक्ति जिंदा हो जाते हैं ऐसे ही जाने कितने अंधविश्वासों में आज विज्ञान के युग में भी जब घटनाएं घटित होती है तो स्पष्ट हो जाता है कि हमारा देश अभी भी किस तरह अशिक्षा के अंधेरे में है.

प्रथम घटना

-झारखंड के एक गांव रिसदी में बिजली गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई. उसके अंतिम संस्कार की बजाय परिजनों ने उसे गोबर का लेप लगाकर के दो दिनों तक घर में रखा.

दूसरी घटना

– छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक महिला की बिजली की चपेट में आकर जब मौत हो गई तो उसे गोबर और मूत्र से नहलाया गया और यह बताया गया कि इससे महिला जीवित हो जाएगी मगर ऐसा नहीं हुआ.

 तीसरी घटना

– छत्तीसगढ़ के बस्तर में अंधविश्वास के कारण आकाशीय बिजली से जब मवेशी मर गए तो उन्हें गोबर के गड्ढे में दफन कर दिया गया और माना गया कि इससे मवेशी पुनः जीवित हो जाएंगे मगर ऐसा नहीं हुआ.

छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार जैसे कुछ आदिवासी राज्यों में अभी भी अनेक अंधविश्वास अपनी पराकाष्ठा पर है. ऐसे में आदिवासी अंचल में ऐसी घटना दुर्घटना में मृत व्यक्तियों को जिंदा करने का प्रयास किया जाता है. हाल ही में छत्तीसगढ़ के सरगुजा के मनेंद्रगढ़ जिला के सोनबरसा ग्राम में ऐसी घटना घटित हुई जब दो सौतेले भाई आकाशीय बिजली की चपेट में आकर मृत हो गए.

 बरसात में बिजली: बचाव के उपाय

बरसात के मौसम में आए दिन आकाशीय बिजली की घटनाएं होती रहती हैं. और इसकी चपेट में आकर लोग और मवेशी मौत का ग्रास बन जाते हैं . दरअसल, इसके लिए सरकार भी सिर्फ कुछ मुआवजा दे कर के खामोश हो जाती है मगर सबसे बड़ी आवश्यकता है आकाशीय बिजली से बचने के लिए उपायों का प्रचार प्रसार. आज हम इस आलेख में अंधविश्वास को बताते हुए यह भी बताने का प्रयास कर रहे हैं कि आकाशीय बिजली से बचाव किस तरह किया जा सकता है. जैसा कि हम जानते हैं कि अगर पानी बरसात का मौसम है और बिजली कड़क रही है तो हमें घर से बाहर ही नहीं निकलना चाहिए और अगर हम घर से बाहर है तो सुरक्षित स्थान को ढूंढ लेना चाहिए और अगर हम कहीं बाहर हैं तो बिजली कड़कने के दरमियान पहले ही ऊंकडु बैठ जाना चाहिए. यही इसका सबसे वैज्ञानिक बचाव का सटीक उपाय है. मगर आमतौर पर लोग पानी बरसात बिजली गिरने की घटनाओं के समय किसी पेड़ की ओट में खड़े हो जाते हैं और आकाशीय बिजली की चपेट में आ जाती है.

छतीसगढ़ के सरगुजा संभाग के मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिला में 22 अप्रेल 2023 ग्राम सोनवर्षा में आकाशीय बिजली गिरने की घटना घटित हुई दो चचेरे भाई  एक पेड़ के नीचे खड़े हो गए अकाशी बिजली के शिकार बन गए. हमारे संवाददाता को पुलिस अधिकारियों ने बताया मनेन्द्रगढ़ ब्लाक के सोनवर्षा गांव के दो भाइयों आशीष टोप्पो और सियोन टोप्पो की मृत्यु आकाशीय बिजली की चपेट में आने से हो गई थी. दोनों लाशों को जिंदा करने की उम्मीद से दोनों शवों को कई घण्टे तक गोबर में दफन कर दिया गया. लेकिन फिर भी कोई हलचल जब दोनों शवों में नही हुई तो गोबर के कब्र से शवो को निकाला गया. पुलिस जब मौके पर पहुंची तो उस समय भी दोनों भाइयों के शव गोबर में गड़े हुए थे. पुलिस ने समझाइश दी और पंचनामा बनाया. उसके बाद अंतिम संस्कार गाँव मे ही कर दिया गया. गोबर के कब्र में जब शवो को डाला गया तो इस दौरान गांव वाले इस अंधविश्वास को देखने भारी संख्या में जुट गए थे . इस घटना के परिप्रेक्ष्य में पुलिस अधिकारी विवेक शर्मा के मुताबिक- दरअसल, आज भी छत्तीसगढ़ में पुरानी परंपराएं हैं अशिक्षा के कारण कभी-कभी ऐसी घटनाएं हो जाती हैं आज आवश्यकता शिक्षा और जनजागरण की है.

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ गुलाब राय पंजवानी के मुताबिक आदिवासी प्रांतों में अभी भी सुदूर ग्रामों में अंधविश्वास के कारण आकाशीय बिजली की घटना के पश्चात परिजन मृत शरीर को गोबर और मूत्र में लपेटते हैं और और माना जाता है कि इससे मृत व्यक्ति जिंदा हो जाएगा मगर अब धीरे-धीरे जागृति आ रही है.

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