बिपाशा ने शेयर किया बेटी देवी का क्यूट वीडियो, फैंस लुटा रहे प्यार

बॉलीवुड इंडस्ट्री की पॉपुलर जोड़ी बिपाशा बसु और करण सिंह ग्रोवर इन दिनों अपनी बेटी को लेकर चर्चा में चल रहे है उनकी बेटी मीडिया की लाइमलाइट में छाई हुई है. दोनों कपल सोशल मीडिया पर अपनी बेटी की वीडियो औऱ फोटो शेयर करते रहते है बता दे, कि पिछले साल नवंबर में ये कपल बेटी के माता-पिता बने थे. अपनी बेटी का नाम कपल ने देवी रखा है जिसकी हाल ही में एक वीडियो शेयर किया गया है जिसमे देवी बेहद ही क्यूट लग रही है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Bipasha Basu (@bipashabasu)

आपको बता दें, कि बिपाशा बसु ने मंगलवार को अपनी बेटी देवी का क्यूट वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया था. जिस वीडियो में बेबी देवी बेहद ही प्यारी लग रही है वह पालने में पेट के बल लेटी हुई नजर आ रही है. पालने के बाहर कई खिलौने लटक रहे है जो कि वीडियो को औऱ भी बेहतर बना रहा है पालने का रंग पिंक है बेबी देवी उसमें लेटी हुई है. बता दें, कि बैकग्राउंड में एक ओंकार बज रहा है. बिपाशा बसु ने इसके साथ कैप्शन लिखा है, ‘ब्लिस. देवी के इस वीडियो को फैंस पसंद कर रहे हैं और कमेंट कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा है,’ प्यारा सा बेबी।’ एक यूजर ने लिखा है,’कितनी प्यारी है.’ एक यूजर ने लिखा है, ‘बच्ची को आशीर्वाद।’ एक यूजर ने लिखा है, ‘क्यूट.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Bipasha Basu (@bipashabasu)

कैसे शुरु हुई दोनों की लव स्टोरी

साल 2015 में अलोग मूवी में बिपाशा बसु और करण सिंह ग्रोवर ने एक साथ काम किया था जहां से दोनों की लव स्टोरी की शुरुआत हुई थी जिसके बाद साल 2016 में दोनों ने शादी करने का फैसला ले लिया था. कपल की शादी के छह साल बाद दोनों साल 2022 में एक बेटी के पैरेट्स बनें. वही दोनों के वर्क फ्रंट की बात करें तो, करण सिंह ग्रोवर फिल्म ‘फाइटर’ और फिल्म ‘3 देव’ में नजर आने वाले हैं। वहीं, बिपाशा बसु पिछली बार साल 2020 में वेब शो ‘डेंजरस’ में दिखाई दी थीं.

Virushka का वीडियो हुआ वायरल, क्रिकेट छोड़ बैडमिंटन के मैदान में उतरे कोहली!

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी और बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा इन दिनों सुर्खियों में बने हुए कभी उनका डांस वीडियो वायरल होता है तो कभी उनका खेल का वीडियो लोगों का काफी पसंद आता है हाल ही में कपल का जिम में पंजाबी गाने पर डांस करते हुए एक वीडियो वायरल हुआ थी. जिसके बीच एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है बता दे, कपल हाल ही में बेंगलुरु में एक प्रमोशनल इवेंट में पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने एक टीम बनाकर बैडमिंटन खेला. जिनका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Virat Kohli (@virat.kohli)

आपको बता दे, कि अनुष्का औऱ विराट अक्सर ही सुर्खियो में बने रहते है कपल की वीडियो फैंस को बेहद पसंद आती है फैंस दोनों को एकसाथ देखने के लिए हमेशा की उत्सुक रहते है हाल ही में विराट कोहली को क्रिकेट छोड़ बैंडमिंटन खेलते देखा गया. जिसमें वो पत्नी अनुष्का के साथ टीम बनाकर खेलते नजर आ रहे है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि विराट और अनुष्का एक दूसरे कपल के साथ बैडमिंटन एंजॉय कर रहे हैं तो वहीं आसपास खड़े लोग उन्हें चीयर कर रहे हैं। वीडियो में अनुष्का और विराट काफी खुश नजर आ रहे हैं। विरल भयानी द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि जहां विराट कोहली और अनुष्का शर्मा यह बैडमिंटन का गेम जीत जाते हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)

यूजर्स ने किए कैमेंट्स 

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के इस वीडियो पर एक यूजर ने कमेंट करते हए लिखा, “फेवरेट कपल” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने रेड हार्ट का इमोजी बनाया। वहीं इस वीडियो के सामने आने के बाद कुछ लोग अनुष्का शर्मा का मजाक भी उड़ाते नजर आए। एक यूजर ने लिखा, “अनुष्का तो दिन ब दिन पतली होती जा रही है, ये कैसी फिटनेस है भाई?” वर्क फ्रंट की बात करें तो फिलहाल विराट कोहली आईपीएल में व्यस्त हैं तो वहीं अनुष्का शर्मा अपनी अपकमिंग फिल्म ‘चकड़ा एक्सप्रेस’ को लेकर सुर्खियों में हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by AnushkaSharma1588 (@anushkasharma)

पत्नी बनने की जिद ने करवाया कत्ल

11 दिसंबर, 2016 की बात है. उत्तर प्रदेश के जिला शिकोहाबाद के थाना मक्खनपुर के 2 कांस्टेबल क्षेत्र में रात्रि गश्त पर निकले थे, तभी उन्होंने मक्खनपुर गांव के ही एक अधबने मकान से जबरदस्त धुआं उठते देखा. वे दोनों उस मकान में घुसे तो प्लास्टिक की बोरियों में आग लगी देखी. उन्होंने इस की सूचना थानाप्रभारी देवेंद्र सिंह और अग्निशमन दल को फोन कर के दे दी. कुछ ही देर में थानाप्रभारी वहां पहुंच गए. उन्होंने जब गौर किया तो उन्हें इंसान के पैर दिखे जिन में बिछुए थे. वह समझ गए कि यह किसी महिला की लाश है. तब तक अग्निशमन दल की टीम भी वहां आ चुकी थी. टीम ने जब आग बुझाई तो वहां वास्तव में एक महिला की लाश निकली. वह लाश झुलस चुकी थी. फिर भी चेहरा इतना तो बचा था कि उस की शिनाख्त हो सकती थी.

गांव के जो लोग वहां इकट्ठे थे, उन से लाश की शिनाख्त कराई तो इकबाल ने उस की पुष्टि अपनी भाभी नरगिस के रूप में की. उस ने बताया कि भाई महबूब की मौत के बाद यह रशीद के साथ रहती थी. रशीद शिकोहाबाद के रुकुनपुरा का रहने वाला था और शिकोहाबाद शहर में संदूक बनाने का काम करता था. प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को काफी जानकारी मिल चुकी थी, इसलिए पुलिस ने मौके की जरूरी काररवाई पूरी कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

अज्ञात हत्यारे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने रशीद की तलाश में उस के रुकुनपुरा स्थित घर पर दबिश दी पर वह घर पर नहीं मिला. शिकोहाबाद में जो उस की संदूक की दुकान थी, वह भी बंद मिली. इस से पुलिस को उस पर पूरा शक होने लगा.

रशीद के जो भी ठिकाने थे, पुलिस ने उन सभी जगहों पर उसे तलाशा पर उस का पता नहीं चला. उस ने अपना मोबाइल फोन भी बंद कर रखा था. ऐसे में थानाप्रभारी ने सादे कपड़ों में एक कांस्टेबल को उस के घर पर नजर रखने के लिए लगा दिया.

करीब 15 दिन बाद आखिर एक मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने रशीद को शिकोहाबाद के बसस्टैंड से हिरासत में ले लिया. वह वहां दिल्ली जाने वाली बस का इंतजार कर रहा था. थाने ला कर जब उस से नरगिस की हत्या के सिलसिले में पूछताछ की गई तो उस ने स्वीकार कर लिया कि उस के सामने हालात ऐसे बन गए थे, जिस से उसे उस की हत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा. इस के बाद उस ने उस की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

नरगिस पश्चिम बंगाल के रहने वाले सलीम की बेटी थी. सलीम मेहनतमजदूरी कर के जैसेतैसे परिवार का पालनपोषण कर रहे थे. आज भी ऐसे युवक, जिन की किसी वजह से शादी नहीं हो पाती है, वे पश्चिम बंगाल, बिहार और उड़ीसा जैसे राज्यों का रुख करते हैं. इन राज्यों के कुछ करीब अभिभावक अपनी बेटी के भविष्य को देखते हुए बेटियों का हाथ उन युवकों के हाथ में दे देते हैं. वे बाकायदा सामाजिक रीतिरिवाज से शादी करते हैं. इसी तरह नरगिस की शादी भी उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के रामगढ़ के रहने वाले महबूब से हुई थी.

महबूब का अपना निजी घर था, जहां वह अपने 5 भाइयों के साथ रहता था. कालांतर में उस के 3 बड़े भाई मुंबई चले गए. घर में वह और उस का छोटा भाई इकबाल ही रह गया था. दोनों भाई मजदूरी कर के अपना घर चला रहे थे. नरगिस के आ जाने से उन्हें समय पर पकीपकाई रोटी मिल जाती थी. समय बीतता गया और नरगिस 4 बच्चों की मां बन गई.

नरगिस पति के साथ खुश थी. मांबाप के घर गरीबी के अलावा कुछ नहीं था पर यहां पति और देवर अपनी कमाई ला कर उस के हाथ पर रखते तो वह खुश हो जाती. उस ने भी अपनी जिम्मेदारी से घरगृहस्थी को अच्छे से संभाल लिया था.

महबूब मजदूरी कर के जब घर लौटता तो वह थकामांदा होता था. लेकिन पिछले कुछ दिनों से उस की तबीयत खराब रहने लगी थी. वह शारीरिक रूप से भी कमजोर हो गया था. उसे सांस फूलने की शिकायत हो गई थी. इस की वजह से उस का काम पर जाना भी मुश्किल हो गया था. फिर एक दिन ऐसा आया कि उस ने खाट पकड़ ली. इस के बाद वह फिर उठ नहीं सका.

पति के बीमार होने के बाद नरगिस परेशान रहने लगी. देवर जो कमा कर लाता, उस से घर का खर्च ही चल पाता था. पैसे के अभाव में वह पति का इलाज तक नहीं करा पा रही थी. फिर मजबूरी में उस ने चूड़ी के कारखाने में काम करना शुरू कर दिया. धीरेधीरे गृहस्थी की गाड़ी फिर पटरी पर आ गई पर महबूब को बीमारी ने बुरी तरह जकड़ लिया और इलाज के अभाव में एक दिन उस की मौत हो गई.

पति का साया सिर से उठने के बाद नरगिस बुरी तरह टूट गई और बुरे दिनों में देवर इकबाल ने भी उस का साथ छोड़ दिया. नरगिस को बच्चों की चिंता खाए जा रही थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. इसी बीच एक दिन उस की मुलाकात रशीद नाम के एक आदमी से हुई. रशीद रुकुनपुरा थाना शिकोहाबाद का रहने वाला था और मक्खनपुर में संदूक बनाने का काम करता था.

रशीद के साथ नरगिस की मुलाकात तब हुई जब वह अपनी एक पड़ोसन के लिए संदूक खरीदने उस की दुकान पर गई थी. रशीद को अचानक नरगिस अच्छी लगने लगी थी. वह उस से बात करना चाहता था पर उस दिन साथ में दूसरी औरत होने की वजह से बात नहीं कर सका. लेकिन बातचीत कर के उसे पता लग गया था कि वह फिरोजाबाद के रामगढ़ थाने के पास की गली में रहती है.  नरगिस को देखने के बाद रशीद के दिल में खलबली मच गई थी. वह उस से मिलना चाहता था, इसलिए एक दिन वह दुकान बंद कर के थाना रामगढ़ के नजदीक पहुंच कर आसपास के लोगों से नरगिस के बारे में पूछने लगा. लेकिन कोई उसे कुछ नहीं बता पाया. फिर अचानक उसे गली की नुक्कड़ पर नरगिस मिल गई.

नरगिस ने उसे देखा तो कहा, ‘‘अरे, तुम यहां कैसे?’’

‘‘अपने किसी दोस्त से मिलने आया था.’’ रशीद ने बहाना बनाया.

नरगिस ने उसे अपने घर चलने को कहा तो वह उस के साथ चल दिया.

नरगिस के घर पहुंच कर रशीद ने उस के हालात का जायजा लिया. उस के प्रति सहानुभूति दिखाई तो नरगिस के दिल में रुका हुआ लावा भी फूट पड़ा. उस ने बताया कि शौहर की मौत के बाद जिंदगी बहुत मुश्किल हो गई है. रशीद ने महसूस किया कि नरगिस को भी किसी मर्द के सान्निध्य की जरूरत है. इसी का उस ने फायदा उठाने का फैसला लिया. पर नरगिस का दिल टटोलना भी जरूरी था, लिहाजा उस दिन वह कुछ ही देर में फिर से मिलने का वादा कर के चला आया. उस ने नरगिस को अपना मोबाइल नंबर दे दिया और कहा जब भी किसी चीज की जरूरत हो, वह उस से बेझिझक कह सकती है.

नरगिस को भी एक दोस्त की जरूरत थी, अत: धीरेधीरे वे दोनों मोबाइल पर दिल की बातें करने लगे. रशीद जब नरगिस के घर जाता तो बच्चों के लिए कुछ खानेपीने की चीजें भी ले जाता. इस से नरगिस के बच्चे भी उस के साथ घुलमिल गए थे. बातचीत के दौरान नरगिस को यह जानकारी हो गई थी कि रशीद शादीशुदा ही नहीं, 2 बच्चों का बाप भी है. लेकिन उसे तो एक सहारे की जरूरत थी इसलिए उस का रशीद के प्रति झुकाव बढ़ता गया. एक दिन नरगिस देर शाम को उस की दुकान पर आई. कुछ देर बाद जब वह जाने लगी तो रशीद ने उस का हाथ पकड़ लिया और आई लव यू कहते हुए अपने मन की बात कह डाली. नरगिस ने उसे घूर कर देखा और तमक कर बोली, ‘‘कुछ देर बाद तुम घर आ जाना. मैं खाना बना कर रखूंगी. तभी बात करेंगे.’’ इस के बाद वह चली गई.

रशीद का दिल बल्लियों उछल रहा था. नरगिस जैसी हसीन औरत का सामीप्य जो उसे मिलने वाला था. उस समय वह भूल गया कि शिकोहाबाद में उस की पत्नी और बच्चे भी हैं. रशीद ने उस दिन अन्य दिनों की अपेक्षा पहले ही दुकान बंद कर दी. फिर कुछ देर इधरउधर टहलता रहा. हलका अंधेरा होने पर उस ने नरगिस के घर का रुख कर दिया. जब वह उस के घर पहुंचा तो देखा कि उस के बच्चे सो चुके थे और वह उस का इंतजार कर रही थी.

औपचारिक बातचीत के बाद नरगिस ने खाना लगा दिया. रशीद ने नरगिस को भी साथ बैठा कर खाना खिलाया. खाना खाने के बाद वह उसे कमरे में ले आई. अब कमरे में रशीद और नरगिस के अलावा तनहाई थी जो उन्हें कोई गुनाह करने को उकसा रही थी. उस रात उन्होंने अपनी हसरतें पूरी कीं. रात काली और लंबी जरूर थी लेकिन उन के लिए खुशनुमा थी. सुबह रशीद ने चलते समय कुछ रुपए नरगिस के हाथ में रखते हुए कहा, ‘‘ये खर्चे के लिए हैं.’’ फिर बोला, ‘‘तुम खाना बहुत अच्छा बनाती हो.’’ नरगिस भी हंसते हुए बोली, ‘‘आज से तुम्हें ये खाना रोज मिलेगा.’’

रशीद चला गया पर नरगिस का अधूरापन पूरा कर गया था. वह खुश थी. उसे एक सहारा मिल गया था. शाम को उस ने खाना बनाया और टिफिन ले कर रशीद की दुकान पर पहुंच गई. उसे देखते ही रशीद बोला, ‘‘अरे तुम यहां, मैं तो अपने घर शिकोहाबाद जाने वाला था.’’

‘‘हां, चौंक क्यों रहे हो. जब रोज शाम का खाना तुम्हें यहीं मिल जाया करेगा. तब शिकोहाबाद जा कर क्या करोगे.’’ वह बोली.

इस के बाद नरगिस का रशीद की दुकान पर आनाजाना होने लगा. रशीद को जब रोजाना ही शाम का खाना मिलने लगा तो उस ने शिकोहाबाद में अपने घर जाना बंद कर दिया. कई दिनों तक वह घर नहीं गया तो उस की पत्नी सलमा को चिंता होने लगी. उस ने पति को फोन किया तो रशीद ने दुकान पर काम ज्यादा होने का बहाना कर दिया. फिर एक दिन रशीद नरगिस को बताए बिना अपने घर चला गया. नरगिस जब खाना ले कर उस की दुकान पर पहुंची तो दुकान का ताला बंद देख कर उस ने रशीद को फोन मिलाया. तब उसे उस के घर जाने की जानकारी मिली. अगले दिन रशीद आया तो नरगिस ने उस से शिकायत की.

उस ने रशीद से कहा कि उस का रोजरोज दुकान पर आना ठीक नहीं है. उस ने उसे मक्खनपुर में ही किराए का कमरा लेने की सलाह दी. रशीद को उस की सलाह उचित लगी. इसलिए उस ने मक्खनपुर में किराए का कमरा ले लिया. अब नरगिस वहीं शाम का खाना ले कर पहुंच जाती और फिर सारी रात प्रेमी के आगोश में होती थी. करीब 6 महीने तक उन दोनों के बीच गुपचुप तरीके से संबंध बने रहे. कभीकभी नरगिस यह सोच कर डरती थी कि कहीं रशीद उसे छोड़ न दे. उस का रशीद पर कोई कानूनी हक तो था नहीं, जो वह उस पर अधिकार जताती. वह रशीद के मन की बात टटोलना चाहती थी. एक दिन बातों ही बातों में नरगिस ने उस की पत्नी सलमा के बारे में कुछ कह दिया तो रशीद भड़क उठा. नरगिस को लगा कि अभी सही वक्त नहीं आया है. रशीद को अपना बनाने में कुछ वक्त देना होगा और कुछ ऐसा करना होगा जिस से वह पत्नी को छोड़ उसी का हो जाए.

वक्त आगे बढ़ रहा था पर नरगिस के गलीमोहल्ले वालों में नरगिस और रशीद के संबंधों की बात फैल गई थी. इकबाल चूंकि रिक्शा चला कर देर रात को लौटता था इसलिए उसे भाभी के बारे में कुछ भी पता नहीं था. एक दिन एक पड़ोसी ने उस से कहा, ‘‘इकबाल, तुम अपनी भाभी पर नजर रखो. कहीं किसी दिन वह बच्चों को छोड़ कर भाग गई तो बच्चे तुम्हारे गले पड़ जाएंगे.’’ यह सुन कर इकबाल चिंतित हो उठा. उस ने उस पड़ोसी से पूछताछ की तो उसे भाभी की सच्चाई पता चली. यह बात इकबाल को पसंद नहीं आई. उस ने नरगिस को समझाने की कोशिश की तो नरगिस ने घूर कर उस की ओर देखते हुए कहा, ‘‘भाई की मौत के बाद तुम ने कभी जानने की कोशिश की कि मैं किस हाल में रहती हूं, बल्कि घर की जिम्मेदारी उठाने के बजाय तुम ने मुझे अकेला छोड़ दिया. बेहतर यही है कि तुम मेरी जिंदगी में टांग मत अड़ाओ.’’

इकबाल के पास इस का कोई जवाब नहीं था. अब नरगिस के मन में एक ही ख्वाहिश थी और वह यह थी कि रशीद की रखैल से अब बीवी कैसे बने. वह रशीद को बताती कि उस के मोहल्ले वाले और देवर उस के खिलाफ हो रहे हैं. तब रशीद उसे समझाता कि जमाना तो कुछ न कुछ कहता ही है. हमें जमाने से लड़ना थोड़े ही है. रशीद की बातों से नरगिस को समझ में आने लगा था कि वह उसे सिर्फ इस्तेमाल कर रहा है. वह रिश्ते के प्रति गंभीर नहीं है और न ही उस का उस से निकाह करने का ही कोई इरादा है. इधर रशीद सोच रहा था कि वह नरगिस से मोहब्बत करता है और बदले में उस का खर्चा उठाता है. इतना ही बहुत है. दोनों के बीच की कशमकश रिश्ते में खटास ला रही थी. अब तो नरगिस उसे शिकोहाबाद जाने से भी रोकती थी.

इसी बीच रशीद की बीवी को भनक लग गई कि उस के शौहर ने फिरोजाबाद में भी कोई औरत रखी हुई है. यह जानकारी मिलते ही सलमा परेशान हो गई और एक दिन जब रशीद घर आया तो उस ने साफ कह दिया कि वह अपने मायके चली जाएगी और मांबाप को सब कुछ बता देगी. सलमा की इस धमकी से रशीद परेशान हो गया. वह दो नावों पर सवार था. अब उसे डूबने से डर लगने लगा. नरगिस इतनी करीब आ चुकी थी कि उसे छोड़ना भी मुश्किल था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. इधर नरगिस ने भी तय कर लिया कि वह सलमा को रशीद की जिंदगी से निकाल देगी. एक दिन उस ने रशीद से साफसाफ कह दिया, ‘‘बहुत हो गया. अब तुम्हें फैसला करना ही होगा.’’

‘‘कैसा फैसला?’’ रशीद चौंकते हुए बोला.

‘‘आखिर मैं कब तक तुम्हारी रखैल बन कर रहूंगी. सलमा को तलाक दो और मुझ से निकाह करो.’’ नरगिस अपनी बातों पर जोर देते हुए बोली. रशीद को नरगिस की यह बात इतनी बुरी लगी कि उस ने उस के गाल पर एक तमाचा जड़ दिया और कहा, ‘‘आगे से कभी सलमा को तलाक देने की बात मुंह से मत निकालना.’’

नरगिस को भी गुस्सा आ गया. वह बोली, ‘‘तुम ने मुझे मारने की हिम्मत की. अब मैं भी बताती हूं कि या तो मुझ से निकाह करो वरना मैं कुछ भी कर सकती हूं.’’

रशीद नरगिस की धमकी से डर गया कि कहीं यह उस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज न करा दे. वह किसी चक्कर में नहीं पड़ना चाहता था. इसलिए उस ने अपना व्यवहार सामान्य कर के उसे समझाया. पर मन ही मन उस ने उस से छुटकारा पाने का फैसला कर लिया. वह इस का उपाय ढूंढने लगा. रशीद ने अब नरगिस से मिलनाजुलना कम कर दिया. वह दुकान बंद कर के किराए के कमरे पर आने के बजाए शिकोहाबाद स्थित अपने घर चला जाता था. नरगिस के पूछने पर कोई न कोई बहाना बना देता था. नरगिस रशीद को खोना नहीं चाहता थी क्योंकि वह घर चलाने के पैसे जो देता रहता था.

नरगिस से अवैध संबंधों की बात रशीद की ससुराल तक पहुंच गई थी. अब रशीद को बदनामी से भी डर लगने लगा. वह समझ गया कि इस की वजह से समाज और रिश्तेदारी में उस की बेइज्जती हो सकती है इसलिए नरगिस नाम के कांटे को जीवन से जल्द निकालने का उस ने फैसला ले लिया. इस के बाद किसी न किसी बात को ले कर उस का नरगिस से झगड़ा होने लगा. तनाव की वजह से उस का धंधा भी चौपट हो चुका था. जिस मकान को उस ने नरगिस को किराए पर दिलाया था, वहां के आसपड़ोस वालों को भी दोनों के झगड़े की जानकारी हो चुकी थी, पर कोई भी उन के मामले में दखल नहीं देता था. जिस मकान में नरगिस रहती थी, वह अधबना था. मकान मालिक वहां नहीं रहता था.

12 दिसंबर, 2016 को दुकान बंद कर के रशीद नरगिस के पास कमरे पर पहुंचा. खाना खाने के बाद नरगिस ने पूछा, ‘‘तुम ने फैसला कर लिया?’’ ‘‘कैसा फैसला? देखो नरगिस, मैं तुम जैसी औरत के लिए अपने बीवीबच्चों को हरगिज नहीं छोड़ सकता.’’ वह दृढ़ता से बोला. ‘‘मुझ जैसी औरत….आखिर तुम कहना क्या चाहते हो? पहले तो बड़ीबड़ी बातें करते थे. इस का मतलब यह हुआ कि अब तक तुम केवल मेरा इस्तेमाल कर रहे थे. ठीक है, अब देखना मैं क्या करती हूं.’’ कह कर जैसे ही वह उठने लगी, रशीद ने उसे धक्का दे कर गिरा दिया और झट से उस के सीने पर बैठ गया. वह उस का गला तब तक दबाए रहा जब तक वह मर नहीं गई. कुछ ही देर में नरगिस की लाश सामने थी और जुनून उतर चुका था. पुलिस का डर उसे सताने लगा था. लाश ठिकाने लगाने के लिए वह उसे अधबने कमरे में ले गया और उस पर वहां मौजूद प्लास्टिक की बोरियां डाल कर आग लगा दी. इस के बाद वह वहां से फरार हो गया.

कुछ देर बाद गश्ती सिपाही वहां से गुजर रहे थे तो मकान से धुआं निकलता देख वे मकान के अंदर चले गए. तब मामला दूसरा ही सामने आया.

रशीद से पूछताछ कर पुलिस ने उसे 28 दिसंबर, 2016 को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है.?

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

माहवारी- मर्ज पर भारी

तकरीबन 15 साल की सुमन डाक्टर के सामने बैठी थी. डाक्टर ने उस से पूछा, ‘‘क्या तुम शादीशुदा हो?’’

सुमन ने सवालिया नजरों से अपनी मां की तरफ देखा. तबीयत खराब होने से भला शादी का क्या कनैक्शन? उस ने ‘नहीं’ में सिर हिलाया.

डाक्टर ने सुमन को बाहर भेज कर मां से धीमी आवाज में कुछ पूछा. इस से आसपास बैठे दूसरे मरीजों में खुसुरफुसुर होने लगी.

दरअसल, पिछले 2 महीने से सुमन की माहवारी मिस हो रही थी. उस ने यह बात अपनी मां को बताई और घबराई मां उसे ले कर डाक्टर के पास आ पहुंची.

छोटे से कसबे की रहने वाली सुमन इस बात से बिलकुल बेखबर थी कि वहां मौजूद बाकी लोग उसे कैसी नजरों से देख रहे थे. उस के जेहन में बारबार यही सवाल उठ रहा था कि डाक्टर ने ऐसा क्यों पूछा कि शादी हुई है या नहीं?

लड़कियों से ऐसे सवाल सिर्फ गांवों या छोटे शहरों में ही नहीं पूछे जाते हैं, बल्कि बड़े शहरों का भी यही हाल है.

‘‘मैं एक सिंगल लड़की हूं. पिछले दिनों मेरे पीरियड्स मिस हो गए और मैं डाक्टर के पास गई. मैं यह उम्मीद ले कर गई थी कि डाक्टर मेरी परेशानी का हल बताएंगी, मु झे दवाएं देंगी, मेरी मदद करेंगी, लेकिन हुआ उलटा.

‘‘उन्होंने मुझ से अजीब से सवाल किए. जैसे कि क्या मेरी शादी हो गई है? क्या मेरा बौयफ्रैंड है? क्या मैं सैक्स करती हूं? क्या मेरे मातापिता को इस बारे में मालूम है? मैं डाक्टर के इस रवैए से हैरान थी.’’

यह वाकिआ सीमा के साथ हुआ. वह इस से बेहद खफा है और चाहती है कि डाक्टर कुंआरी या सिंगल लड़कियों से ऐसे सवाल न पूछें और न ही उन्हें ‘नैतिकता’ का पाठ पढ़ाएं.

सैक्सुअल हैल्थ से जुड़ी परेशानी  पर डाक्टर अकसर ही शादी से जुड़े  सवाल करती हैं. कायदे से यह पूछा जाना चाहिए कि क्या आप सैक्सुअली ऐक्टिव हैं?

गाइनोकोलौजिस्ट डाक्टर विमला जयपुर के वात्सल्य हैल्थ सैंटर में मरीजों को देखती हैं. उन के यहां शहरी के साथसाथ जयपुर के गांवदेहात के इलाकों से भी मरीज आते हैं.

डाक्टर विमला का मानना है कि डाक्टरों के लिए मरीज की सैक्स लाइफ और सैक्सुअल ऐक्टिविटी के बारे में जानना जरूरी होता है.

वे यह भी मानती हैं कि मरीज शादीशुदा है या नहीं, वह सैक्सुअली कितनी ऐक्टिव है, ऐसी बातों से डाक्टर का बहुत ज्यादा मतलब नहीं होना चाहिए.

उन्होंने आगे बताया, ‘‘मैं अपने यहां आने वाली लड़कियों को सेफ सैक्स की सलाह देती हूं. एक बालिग लड़की ‘सही’ और ‘गलत’ का फैसला खुद ले सकती है. लड़कियों की माहवारी मिस हो जाना ही सैक्सुअल हैल्थ से जुड़ा मसला नहीं है. इस के अलावा भी कई दिक्कतें हो सकती हैं, जैसे अंग के इंफैक्शन से फैलने वाली बीमारियां.’’

डाक्टरों का ऐसा बरताव निजी क्लिनिकों और छोटे अस्पतालों तक सिमटा हुआ नहीं है, बल्कि बड़े अस्पतालों में भी लड़कियों को इस तरह के सवालों का सामना करना पड़ता है.

23 साल की सोनम बताती है कि डाक्टर यह मान कर चलते हैं कि कोई सैक्स तभी करता है, जब उस की शादी हो जाती है.

जयपुर में रहने वाली 25 साल की सोनम अपने अनुभव सा झा करते हुए कहती है, ‘‘वेजाइनल इंफैक्शन होने पर मैं एक गाइनोकोलौजिस्ट के पास गई. मैं ने उन से पूछा कि कहीं यह एसटीडी तो नहीं है?’’

उस की बात सुन कर डाक्टर ने कहा, ‘‘अगर तुम शादीशुदा नहीं हो, तो एसटीडी का सवाल ही नहीं उठता.’’

सोनम कहती है कि डाक्टर यह मान कर चलते हैं कि कोई सैक्स तभी करता है, जब उस की शादी हो जाती है. मु झे उन के बरताव पर बहुत गुस्सा आया और मैं ने इस बारे में अपना गुस्सा जाहिर करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी लिख डाली.

जयपुर के कांवटिया हौस्पिटल में तैनात डाक्टर आरके चिरानियां ने काफी समय तक ऐसे मामलों को हैंडल किया है. वे कहते हैं, ‘‘गाइडलाइंस की बात करें तो छोटीमोटी दिक्कतों के लिए हमें मरीज के अलावा किसी और से बात करने की जरूरत नहीं होती. लेकिन बात अगर बच्चा ठहरने तक पहुंच जाए, तो लड़की के पार्टनर या किसी करीबी को बताना जरूरी हो जाता है.

‘‘कई बार गांवों की ऐसी लड़कियां मेरे पास आती थीं, जिन्हें पता ही नहीं होता था कि वे पेट से हैं. उन्हें बस इतना पता होता था कि उन के पेट में दर्द हो रहा है. ऐसे में उन के मातापिता से बात करना मजबूरी हो जाती थी.’’

डाक्टर आरके चिरानियां इस के पीछे तर्क देते हैं कि किसी को बिना बताए बच्चा गिराना खतरनाक होता है. इस में मौत का डर भी होता है.

‘मर्दाना कमजोरी का शर्तिया इलाज’, ‘सैक्स रोगी मिलें’, ‘जवानी में भूल की है तो न पछताएं’ जैसे इश्तिहार गांवकसबों और बड़े शहरों में जगहजगह दीवारों पर देखने को मिल जाते हैं. लेकिन जहां बात लड़कियों  की आती है, तो हर तरफ चुप्पी छा जाती है या फिर इशारों में बातें होने लगती हैं.

हमारे डाक्टर भी उसी समाज से आते हैं, जहां से हम. मैडिकल साइंस और विज्ञान उन्हें इस काबिल तो बनाता है कि वे बीमारी पहचान सकें, इलाज कर सकें, लेकिन शायद वे यह सम झने में नाकाम होते हैं कि उन का काम यहीं तक है, फैसले सुनाने या मोरल साइंस पर लैक्चर देने का नहीं.

अब यह सवाल उठता है कि क्या हम ऐसे समाज की कल्पना कर सकते हैं, जहां लड़कियां बेझिझक हो कर अपनी सैक्स से जुड़ी तकलीफों के बारे में बात कर पाएं? कम से कम वे डाक्टरों से अपनी तकलीफ खुल कर बता पाएं?

मेरी बीवी खूबसूरत है, फिर भी जब मैं किसी खूबसूरत जवान लड़की को देखता हूं, तो मेरा मन उस के लिए मचलने लगता है मैं क्या करूं?

सवाल


मेरी बीवी खूबसूरत है, फिर भी जब मैं किसी खूबसूरत जवान लड़की को देखता हूं, तो मेरा मन उस के लिए मचलने लगता है. मैं क्या करूं?

जवाब


किसी पराई खूबसूरत लड़की को जीभर कर देखने में तो हर्ज नहीं है, मगर उसे हासिल करने की बात सोचना बेवकूफी है, क्योंकि ऐसा होना कोई हंसीखेल नहीं है. आप अपनी खूबसूरत बीवी में मन लगाएं और दूसरी औरतों के बारे में सोचना छोड़ दें.

ये भी पढ़ें…

महेंद्र थाने में आ कर बैठा ही था कि एक सिपाही ने उसे खबर दी, ‘‘साहब, निजामुद्दीन से अहमदाबाद आने वाली ‘राजधानी ऐक्सप्रैस’ ट्रेन में एक आदमी बेहोशी की हालत में मिला है.’’

यह सुन कर महेंद्र को आज से एक साल पहले की घटना याद आ गई. तब उस की बेरावल रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ के थानेदार के रूप में नईनई पोस्टिंग हुई थी.

एक दिन की बात है. सुबहसुबह थाने के एक सिपाही ने आ कर बताया, ‘साहब, राजकोट से सोमनाथ आने वाली पैसेंजर ट्रेन में एक लड़की बेहोश पड़ी मिली है.’

यह सुन कर महेंद्र तुरंत उस सिपाही के साथ चल पड़ा. उस ने देखा कि इंजन से पीछे वाले डब्बे में एक लड़की, जिस की उम्र 22-23 साल होगी, ऊपर वाली बर्थ पर बेहोशी की हालत में पड़ी थी.

महेंद्र के साथ गए सिपाही रामलाल ने कहा, ‘साहब, मुझे तो मामला जहरखुरानी का लगता है. इस के पास कोई सामान भी दिखाई नहीं दे रहा है.’

महेंद्र ने रामलाल से कहा, ‘इसे तुरंत डाक्टर के पास ले जाओ और होश में आने पर मुझे बताना.’

दिन के तकरीबन 10 बजे रामलाल ने बताया, ‘साहब, उस लड़की को होश आ गया है और अब वह ठीक है.’

महेंद्र ने रामलाल से कहा, ‘उस लड़की को थाने ले आओ.’

जब वह लड़की थाने आई, तो बेहतर दिख रही थी.

महेंद्र ने पूछा, ‘क्या नाम है तुम्हारा?’

उस लड़की ने बताया, ‘मेरा नाम राजबाला है और मैं राजस्थान के भरतपुर इलाके की रहने वाली हूं.’

यह पूछने पर कि यहां और इस हालत में वह कैसे पहुंची, तो उस ने बताया कि वह प्रेमी के साथ घर से भाग कर आई है, लेकिन उस के प्रेमी ने रास्ते में उसे नशीली दवा खिला दी और उस के जेवर व पैसे ले उड़ा.

महेंद्र ने उस लड़की के मातापिता का मोबाइल नंबर पूछा, तो उस ने कहा, ‘साहब, उन्हें मत बताइए. मैं खुद ही अपने घर चली जाऊंगी.’

पता नहीं उस की बातों में क्या जादू था कि महेंद्र उस की बात मान गया.

उस लड़की ने कहा, ‘मेरे सिर में अभी भी थोड़ा दर्द है. आराम कर के मैं अपने घर चली जाऊंगी.’

महेंद्र ने रामलाल से कहा, ‘इसे मेरे रैस्टहाउस में लिटा दो. बाद में किसी ट्रेन में बिठा देना.’

महेंद्र अपने काम में लग गया, लेकिन उस के मन में राजबाला के प्रति काम भावना जाग गई थी. रात को तकरीबन 8 बजे वह अपने रैस्टहाउस में पहुंचा, तो राजबाला पलंग पर बैठी थी.

महेंद्र ने पूछा, ‘कैसी तबीयत है?’

उस ने बताया, ‘पहले से ठीक है.’

महेंद्र ने कहा, ‘रुको, मैं तुम्हारे लिए खानेपीने का इंतजाम करता हूं.’

इस के बाद महेंद्र ने बाहर आ कर एक सिपाही को बुलाया और उस लड़की के लिए खाना और अपने लिए शराब मंगाई. महेंद्र ने एक सिपाही के घर पर बैठ कर पहले जम कर शराब पी और वहीं बैठ कर खाना खाया.

रात के तकरीबन साढ़े 11 बजे महेंद्र अपने रैस्टहाउस में पहुंचा, तो देखा कि राजबाला खाना खा कर सो चुकी थी.

एक तो शराब का नशा, ऊपर से एक जवान लड़की का शबाब… महेंद्र ने आते ही दरवाजा बंद किया और राजबाला पर झपट पड़ा.

अचानक हुई इस हरकत से वह जाग गई, लेकिन महेंद्र उसे कहां छोड़ने वाला था. वह रोतीगिड़गिड़ाती रही, पर महेंद्र पर इस का कोई असर न हुआ. वह उस पर छाता गया और अपनी मंजिल पा कर ही उस से अलग हुआ.

वह बेचारी महेंद्र से अलग हो कर एक कोने में जा कर रोने लगी. महेंद्र अपनी हवस मिटाने के बाद सो गया.

सुबह तकरीबन 9 बजे एक सिपाही ने महेंद्र को जगाया. वह अधनंगी हालत में बिस्तर पर पड़ा था. महेंद्र ने जागते ही उस लड़की के बारे में पूछा, तो सिपाही ने कहा, ‘मुझे तो कुछ नहीं मालूम साहब. रात को वह इसी कमरे में ही तो सोई थी. जब आप सुबह से नहीं दिखे, तो मैं आप को देखने चला आया.’

अचानक महेंद्र का ध्यान हाथों पर गया, तो चौंक गया. उस की दोनों अंगूठियां और घड़ी गायब थी. पैंट में रखा पर्स भी नदारद था. अलमारी खुली पड़ी थी. वहां जा कर देखा, तो 50 हजार रुपए भी गायब थे.

महेंद्र ने अपना सिर पकड़ लिया. उसे समझ में आ गया कि उस ने उस लड़की का नहीं, बल्कि उस लड़की ने उस का शिकार किया था.

बड़ी औरतों के शिकार कम उम्र के लड़के

योगिता 48 साल की एक बेहद खूबसूरत औरत है. उस का चेहरा देख कर कोई भी उस की असली उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकता. अपने पति हरीश की अचानक हुई मौत के बाद से योगिता उस का पूरा कारोबार खुद ही संभाल रही है. कारोबार में योगिता को कोई बेवकूफ नहीं बना सकता. लेकिन उस में एक खास कमजोरी है, कम उम्र के लड़कों से दोस्ती करना. अपने स्टाफ में योगिता ज्यादातर 20 से 25 साल की उम्र के स्मार्ट व खूबसूरत कुंआरों को ही रखती है.

योगिता इस बारे में कहती है कि ऐसे लड़के जोशीले होते हैं. वे ज्यादा मेहनत से काम करते हैं और ईमानदार भी होते हैं. लेकिन खुद उस के स्टाफ के ही लोग दबी जबान में कुछ और ही कहते हैं. इन लोगों का मानना है कि योगिता आजाद तबीयत की औरत है और उसे अलगअलग मर्दों के साथ बिस्तरबाजी करने की आदत है.

इसी तरह नीलम एक मध्यवर्गीय औरत है. उस की उम्र 36 साल है और उस की शादी को तकरीबन 10 साल हो चुके हैं. वह 2 बच्चों की मां भी बन चुकी है, लेकिन अपनी भोली शक्लसूरत के चलते वह अभी भी काफी जवान व खूबसूरत नजर आती है.

नीलम के पति रमेश की पोस्टिंग दूसरे शहर में है, जहां से वह महीने में 1-2 बार ही घर आ पाता है. नीलम और दोनों बच्चे चूंकि घर में अकेले रहते थे, इसलिए रमेश ने एक 19 साल के लड़के सुनील को एक कमरा किराए पर दे दिया. वह स्नातक की पढ़ाई करने के लिए गांव से शहर आया था.

पति की गैरहाजिरी में नीलम अपना ज्यादातर समय सुनील के साथ ही गुजारने लगी. एक रात नीलम की जिस्मानी प्यास इस हद तक बढ़ गई कि उस ने बच्चों के सो जाने के बाद सुनील को अपने कमरे में ही बुला लिया.

सुनील कुछ देर तक तो झिझकता रहा, लेकिन नीलम के मस्त हावभाव आखिरकार उसे पिघलाने में कामयाब हो ही गए. फिर नीलम ने अपना बदन सुनील को सौंप दिया.

इस के बाद तो वे दोनों आएदिन मौका निकाल कर एकदूसरे के साथ सोने लगे. काफी दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा, पर सुनील की असावधानी से उन का भांड़ा फूट गया. फिर तो सुनील को काफी बेइज्जत हो कर उस मकान से निकलना पड़ा.

दिनेश ने अपने घर में काम करने के लिए एक 18 साल का पहाड़ी नौकर रामू रखा हुआ था. लेकिन उस के काम से दिनेश खुश नहीं थे. रामू न केवल काम से जी चुराता था, बल्कि दिनेश ने 2-3 बार उसे अपने घर की छोटीमोटी चीजें चुराते हुए भी पकड़ा था.

दिनेश उसे निकालने की सोच रहे थे, लेकिन उस की पत्नी हेमलता ने रोक दिया. आखिरकार एक दिन दफ्तर में अचानक तबीयत खराब होने के चलते दिनेश दोपहर में ही घर आ गया. घर आ कर उस ने अपनी 34 साला बीवी हेमलता को बिना कपड़ों के बिस्तर पर नौकर के साथ सोए हुए देख लिया.

दरअसल, हेमलता दिनेश की दूसरी बीवी थी. अधिक उम्र के पति से जिस्मानी संतुष्टि न मिल पाने के चलते हेमलता ने अपने कम उम्र, लेकिन शरीर से तगड़े नौकर को ही अपना आशिक बना लिया था.

इस तरह की तमाम घटनाएं हमारे समाज की एक कड़वी सचाई बन चुकी हैं, जिस से इनकार नहीं किया जा सकता.

कौन हैं ऐसी औरतें

 अपनी जिस्मानी जरूरतें पूरी करने के लिए ऐसे लड़कों को अपना शिकार बनाने वाली इन औरतों में समाज के हर तबके की औरतें शामिल हैं. इन में एक काफी बड़ा तबका माली रूप से अमीर और ज्यादा पढ़ीलिखी औरतों का है. ऐसी औरतें अपनी जिंदगी को अपनी मरजी से ही गुजारना चाहती हैं.

दूसरी बात यह भी है कि माली रूप से आत्मनिर्भर हो जाने के बाद लड़कियों में अपनी एक अलग सोच पैदा हो जाती है और वे शादी नामक संस्था को फालतू मानने लगती हैं.

जब सारी जरूरतें बगैर शादी किए ही पूरी होने लगें, तो फिर कोई खुद को एक बंधन में क्यों उलझाना चाहेगा? इस के अलावा ऐसी औरतें जवान लड़कों से संबंध कायम करने में सब से आगे हैं, जिन के पतियों के पास धनदौलत की तो कमी नहीं है. लेकिन अपनी बीवियों के लिए समय की कमी है.

इन दोनों के अलावा एक तबका ऐसा भी है, जो कि खुद पहल कर के लड़कों को अपने प्रेमजाल में फंसाने की कोशिश करता है. ये वे औरतें हैं, जो कि किसी मजबूरी के चलते आदमी के साथ का सुख नहीं पातीं.

परिवार में पैसे की कमी के चलते या ऐसी ही किसी दूसरी मजबूरी के चलते जिन लड़कियों की शादी समय से नहीं हो पाती और शरीर की भूख से परेशान हो कर जो मजबूरन किसी आदमी के साथ संबंध बना लेती हैं, उन्हें भी इसी तबके में रखा जा सकता है.

कम उम्र ही क्यों

यह एक सचाई है कि अगर कोई औरत खासकर वह 30-32 साल से ऊपर की है, अपनी इच्छा से किसी पराए मर्द से संबंध बनाने की पहल करती है, तो उस के पीछे खास मकसद जिस्मानी जरूरतों को पूरा करना होता है.

हकीकत यही है कि एक 30-35 साल की खेलीखाई और अनुभवी औरत को पूरा सूख अपने हमउम्र मर्द के साथ ही मिल सकता?है, जिसे बिस्तर के खेल का पूरा अनुभव हो. लेकिन कई औरतें ऐसी भी होती हैं, जो कि अनुभव व सलीके के बजाय केवल तेजी और जोशीलेपन पर कुरबान होती हैं.

स्टेटस सिंबल के लिए

 भारतीय समाज काफी तेजी से बदल रहा है. कभी अमीर लोग खूबसूरत लड़कियों को रखैल बना कर रखते थे, उसी तर्ज पर आजकल अमीर औरतों के बीच सेहतमंद जवान मर्द को बौडीगार्ड के रूप में रखना शान समझा जाने लगा है.

लेकिन वजह चाहे कोई भी हो, अपनी उम्र से छोटे लड़कों के साथ दोस्ती करना और उन के बदन का सुख लूटना ऊपरी तौर पर कितना भी मजेदार नजर आए, लेकिन हकीकत में यह बेहद खतरनाक है.

महिलाएं चाहती हैं कि सेक्स के बारे में ये 10 बातें जरूर जानें पुरुष

सेक्स के दौरान क्या आपको भी कभी-कभी नहीं लगता कि काश आपका पार्टनर आपके दिल की बात पढ़ ले? हां, तो आप अकेली ही ऐसी नहीं हैं! यहां हम उन 10 बातों की सूची पेश कर रहे हैं, जिनके बारे में हर महिला चाहती है कि उनका पार्टनर जरूर जानें.

  1. हमें सुरक्षित रहना बहुत पसंद है. तो जब भी हम सेक्स का आनंद ले रहे हों आप इस बात का पूरा ध्यान रखिए कि आपने प्रोटेक्शन का इस्तेमाल किया है.
  2. आपको मालूम होना चाहिए कि सेक्स कोई प्रतियोगिता नहीं है, जिसमें आपको फिनिश लाइन पर पहुंचने की जल्दी है और जैसे हम स्टार्टिंग लाइन पर ही खड़े रहना चाहते हैं. यह साथ-साथ साथ चलने की बात है.
  3. सेक्स एक टू-वे प्रक्रिया है. यदि इसमें हमने आपको किसी खास तरह का सुख दिया है तो हमें भी वैसा ही सुख देना आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए.
  4. यह ठीक है कि कभी-कभार हमें वाइल्ड सेक्स पसंद आता है, पर अक्सर हम इसे पसंद नहीं करते हैं!
  5. साइज हमारे लिए मायने नहीं रखता, पर ये बात जरूर बहुत मायने रखती है कि आपके पास है जो है, आपने उसका सही इस्तेमाल किया है या नहीं.
  6. जब हम बिस्तर पर हों तो हमें आपकी पूर्व प्रेमिका का जिक्र पूरी तरह नापसंद है. जी हां, पूरी तरह.
  7. यदि आप कुछ नया करना चाहते हैं या कोई चीज आपको पसंद नहीं आ रही है तो हमसे बात करें. क्योंकि हमें भी आपकी ही तरह दिमाग पढ़ना नहीं आता.
  8. बिस्तर पर कोई अजीबोगरीब ट्रिक बिना हमारी जानकारी में लाए न करें. वहां बेहूदे सप्राइजेज हमें अच्छे नहीं लगते हैं.
  9. सबसे खास बात ये कि वह सेशन जिसमें हम दोनों सहज और संतुष्ट हों, उससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता. हम बिल्कुल नहीं चाहते हैं कि यह किसी ऐड्वेंचर की तरह हो.
  10. ये जानना बहुत जरूरी है कि हमें सेक्स के बाद का प्यार-दुलार बहुत पसंद है. यदि यह एक औपचारिक रिश्ता है तो हम ऐसा न कर पाना समझ सकते हैं, लेकिन यदि हमें आपके साथ समय बिताते हुए काफी वक्त गुजर चुका है तो हम इस प्यार से क़तई वंचित नहीं रहना चाहते.

सत्यपाल मलिक का सच और सीबीआई

कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी के प्रिय पात्र रहे सतपाल मलिक अपने कड़वे बोलों के कारण संभवत नरेंद्र मोदी की आंखों की किरकिरी बन गए हैं. यही कारण है कि एक बहुचर्चित न्यूज पोर्टल में साक्षात्कार के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने बतौर मेहमान उन्हें बुला भेजा है. मजे की बात यह है कि सत्यपाल मलिक ने सीबीआई इस निमंत्रण को अपने ट्विटर हैंडल पर बड़ी गर्मजोशी के साथ शेयर करते हुए फिर कुछ  कड़वा बोल दिया है जिसके कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी और भारतीय जनता पार्टी अब उनके सीधे निशाने पर है.

जैसा कि अब यह बात सभी जानते हैं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो हो या फिर प्रवर्तन निदेशालय अर्थात ईडी के दुरपयोग के आरोप केंद्र सरकार पर कुछ ज्यादा ही लगने लगे हैं ऐसे में सत्य पाल मलिक की छवि कुछ इस तरह की है कि सीबीआई द्वारा उन्हें भ्रष्टाचार के एक मामले में बुलाने की खबर की प्रतिक्रिया नरेंद्र मोदी के लिए सकारात्मक नहीं की जा सकती. आज देश के आम आवाम के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और नेता भी यह सोचने लगे हैं कि देश में यह कैसी उल्टी गंगा बहा रही है और नरेंद्र दामोदरदास मोदी पर उंगलियां उठने लगी है. आज हम पाठकों के लिए सत्यपाल मलिक के बरक्स कुछ ऐसी जानकारियां लेकर आए हैं जिन्हें पढ़ समझकर आप स्वयं निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि आखिर देश में क्या चल रहा है.

दरअसल, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने जम्मू- कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक को केंद्र शासित प्रदेश में हुए कथित बीमा घोटाले के सिलसिले में कुछ सवालों के जवाब मांगे हैं.सात महीने में यह दूसरी दफा है, जब सत्यपाल मलिक से सीबीआई पूछताछ करेगी. बिहार, जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय के राज्यपाल के रूप में जिम्मेदारियां समाप्त होने के बाद पिछले साल अक्तूबर में मलिक से पूछताछ की गई थी . सीबीआइ की ताजा कार्रवाई ‘द वायर’ को मलिक द्वारा दिए गए साक्षात्कार के महज एक सप्ताह बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो का नोटिस मिल गया है.

दूसरी तरफ जैसा कि सत्यपाल मलिक का स्वभाव है उन्होंने  कहा है कि मैंने सच सच बोल दिया है, हो सकता है, इसलिए मुझे बुलाया गया हो. मैं तो किसान का बेटा हूं, मैं घबराऊंगा नहीं, सीबीआइ ने सरकारी कर्मचारियों के लिए  सामूहिक चिकित्सा बीमा योजना के ठेके देने और जम्मू-कश्मीर में कीरू जलविद्युत परियोजन से जुड़े 2,200 करोड़ रुपए के निर्माण कार्य भ्रष्टाचार के सत्यपाल मलिक के आरोपों के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की थीं. इधर  सत्यपाल मलिक ने दावा किया कि उन्हें 23 अगस्त, 2018 से 30 अक्तूबर 2019 के बीच जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने रूप में कार्यकाल के दौरान दो फाइलों को मंजू देने के लिए 300 करोड़ रुपए की रिश्वत की पेशकश की गई थी. पाठकों को बता दें कि दूसरी प्राथमिकी की जलविद्युत परियोजना के सिविल कामकाज ठेके देने में कथित अनियमितताओं से जुड़ी है. सत्यपाल मलिक ने हाल ही में एक विवादास्पद साक्षात्कार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधा था और विशेष रूप से जम्मू कश्मीर में शासन चलाने के तरीके को लेकर उसकी आलोचना की थी.

मलिक के कथन से  उल्टा संदेश               

सीबीआइ के पूछताछ के लिए बुलाने संबंधी घटनाक्रम पर कभी मोदी के खास खास रहे सत्यपाल मलिक ने कहा कि सीबीआइ ने ‘कुछ स्पष्टीकरण’ के लिए अपने अकबर रोड स्थित गेस्ट हाउस में उपस्थित होने को कहा है.  सत्यपाल मलिक ने कहा है कि मैं राजस्थान जा रहा हूं, इसलिए मैंने उन्हें 27 से 29 अप्रैल की तारीख दी है.’ उन्होंने ट्वीट किया कि वह सच के साथ खड़े हैं. मलिक ने ‘हैशटैग सीबीआइ के साथ ट्वीट किया, ‘मैंने सच बोलकर कुछ लोगों के पाप उजागर किए हैं. कुल मिलाकर के जहां एक तरफ दिल्ली में शासन कर रही आप पार्टी के अरविंद केजरीवाल सहित उसके कई नेताओं पर सीबीआई और ईडी की गाज को हमने देखा है दूसरी तरफ बिहार में लालू परिवार भी सीबीआई और ईडी से घिरा हुआ है. छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार के कई चेहरे इनकी जद में है. यह कहा जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से हटकर अन्य सभी पार्टियों के ऊपर एक तरह से सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने दबिश दे रही है. इन सबके बीच सत्यपाल मलिक एक ऐसा चेहरा है जो अपने कार्य शैली के कारण देशभर में जाने जाते हैं उन्होंने अपनी बेबाक टिप्पणियों से लोकतंत्र को सींचने का काम किया है, ऐसी शख्सियत पर सीबीआई का फंदा सुर्खियां बटोर रहा है. देखना यह होगा कि आगे चलकर सत्यपाल मलिक खामोश हो जाते हैं या फिर और भी ज्यादा बेबाकी से अपनी बात को देश के सामने रखते हैं.

Anupamaa: क्या मिल पाएंगे अनुज और अनुपमा! शो में आया नया मोड़

इऩ दिनों अनुपमा शो कुछ अलग ही ट्रेक पर चल रहा है शो में हर दिन नए मोड़ आ रहे है शो में दिखाया जा रहा है कि अनुज और अनुपमा एक दूसरे से अलग है औऱ दोनों ही एक -दूसरे की ढलक का इतंजार कर रहे है जिसका असर शो की टीआरपी पर पड़ रहा है. बीते दिन भी रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में देखने को मिला कि अनुज के आने के चंद देर बाद अनुपमा वहां आ जाती है और उसे अनुज के बारे में पता चल जाता है. लेकिन बरखा अपनी हरकतों से बाज नहीं आती और अनुपमा को बाहर ही रोक देती है. हालांकि रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में आने वाले ट्विस्ट यहीं पर खत्म नहीं होते है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by anupama (@anupamaa.2023)

आपको बता दे, कि रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में देखने को मिलेगा कि बरखा अनुपमा को बाहर रोककर साइन कराने की कोशिश करती है. लेकिन अंकुश हार नहीं मानता. वह पहले अनुज को अनुपमा से जाकर मिलने के लिए कहता है. यहां तक कि उसे धक्का भी मार देता है. लेकिन अनुज के न सुनने पर वह अनुपमा का हाथ पकड़कर उसे केबिन तक ले आ जाता है और अंदर जाने के लिए कहता है. यहां बरखा और मुंबई में माया परेशान हो रहे होते हैं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by anupama (@anupamaa.2023)

अनुपमा’ में जल्द देखने को मिलेगा कि अनुपमा जैसे ही केबिन का दरवाजा खोलेगी, उसे अनुज वहां नजर नहीं आएगा. ऐसे में एक पल के लिए अनुपमा का दिल टूट जाएगा. लेकिन वह मन में ही सोच लेगी कि आज कान्हा जी अनुज को मेरे घर तक ले आए हैं तो जल्द ही किस्मत हमें मिला भी देगी. वहीं दूसरी ओर अनुज सोचता है कि मैं तुम्हारा सामना नहीं कर सकता, लेकिन तुम्हें बहुत प्यार करता हूं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें