Father’s Day Special – विटामिन-पी: संजना ने कैसे किया अस्वस्थ ससुरजी को ठीक

संजनाटेबल पर खाना लगा रही थी. आज विशेष व्यंजन बनाए गए थे, ननदरानी मिथिलेश जो आई थी.

‘‘पापा, ले आओ अपनी कटोरी, खाना लग रहा है,’’ मिथिलेश ने अरुणजी से कहा.

‘‘दीदी, पापा अब कटोरी नहीं, कटोरा खाते हैं. खाने से पहले कटोरा भर कर सलाद और खाने के बाद कटोरा भर फ्रूट्स,’’ संजना मुसकराती हुई बोली.

‘‘अरे, यह चमत्कार कैसे हुआ? पापा की उस कटोरी में खूब सारे टैबलेट्स, विटामिन, प्रोटीन, आयरन, कैल्सियम होता था… कहां, कैसे, गायब हो गए?’’ मिथिलेश ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘बेटा यह चमत्कार संजना बिटिया का है,’’ कहते हुए वे पिछले दिनों में खो गए…

नईनवेली संजना ब्याह कर आई, ऐसे घर में जहां कोई स्त्री न थी. सासूमां का देहांत हो चुका था और ननद का ब्याह. घर में पति और ससुरजी, बस 2 ही प्राणी थे. ससुरजी वैसे ही कम बोलते थे और रिटायरमैंट के बाद तो बस अपनी किताबों में ही सिमट कर रह गए थे.

संजना देखती कि वे रोज खाना खाने से पहले दोनों समय एक कटोरी में खूब सारे टैबलेट्स निकाल लाते. पहले उन्हें खाते फिर अनमने से एकाध रोटी खा कर उठ जाते. रात को भी स्लीपिंग पिल्स खा कर सोते. एक दिन उस ने ससुरजी से पूछ ही लिया, ‘‘पापाजी, आप ये इतने सारे टेबलेट्स क्यों खाते हैं.’’

‘‘बेटा, अब तो जीवन इन पर ही निर्भर है, शरीर में शक्ति और रात की नींद इन के बिना अब संभव नहीं.’’

‘‘उफ पापाजी, आप ने खुद को इन का आदी बना लिया है. कल से आप मेरे हिसाब से चलेंगे. आप को प्रोटीन, विटामिन, आयरन, कैल्सियम सब मिलेगा और रात को नींद भी जम कर आएगी.’’

अगले दिन सुबह अरुणजी अखबार देख रहे थे तभी संजना ने आ कर कहा, ‘‘चलिए पापाजी, थोड़ी देर गार्डन में घूमते हैं, वहां से आ कर चाय पीएंगे.’’

संजना के कहने पर अरुणजी को उस के साथ जाना पड़ा. वहां संजना ने उन्हें हलकाफुलका व्यायाम भी करवाया और साथ ही लाफ थेरैपी दे कर खूब हंसाया.

‘‘यह लीजिए पापाजी, आप का कैल्सियम, चाय इस के बाद मिलेगी,’’ संजना ने दूध का गिलास उन्हें पकड़ाया.

नाश्ते में स्प्राउट्स दे कर कहा, ‘‘यह लीजिए भरपूर प्रोटींस. खाइए पापाजी.’’

लंच के समय अरुणजी दवाइयां निकालने लगे, तो संजना ने हाथ रोक लिया और कहा, ‘‘पापाजी, यह सलाद खाइए, इस में टमाटर, चुकंदर है, आप का आयरन और कैल्सियम. खाना खाने के बाद फू्रट्स खाइए.’’

अरुणजी उस की प्यार भरी मनुहार को टाल नहीं पाए. रात को भोजन भी उन्होंने संजना के हिसाब से ही किया. रात को संजना उन्हें फिर गार्डन में टहलाने ले गई.

‘‘चलिए पापा, अब सो जाइए.’’

अरुणजी की नजरें अपनी स्लीपिंग पिल्स की शीशी तलाशने लगीं.

‘‘लेटिए पापाजी, मैं आप के सिर की मालिश कर देती हूं,’’ कह कर उस ने अरुणजी को बिस्तर पर लिटा दिया और तेल लगा कर हलकेहलके हाथों सिर का मसाज करने लगी. कुछ ही देर में अरुणजी की नींद लग गई.

‘‘संजना, बेटी कल रात तो बहुत ही अच्छी नींद आई.’’

‘‘हां पापाजी, अब रोज ही आप को ऐसी नींद आएगी. अब आप कोई टैबलेट नहीं खाएंगे.’’

‘‘अब क्यों खाऊंगा. अब तो मुझे रामबाण औषधि मिल गई है,’’ अरुणजी गार्डन जाने के लिए तैयार होते हुए बोले.

‘‘थैंक्यू भाभी,’’ अचानक मिथिलेश की आवाज ने अरुणजी की तंद्रा भंग की.

‘‘हां बेटा, थैंक्स तो कहना ही चाहिए संजना बेटी को. इस ने मेरी सारी टैबलेट्स छुड़वा दीं. अब तो बस मैं एक ही टैबलेट खाता हूं,’’ अरुणजी बोले.

‘‘कौन सी?’’ संजना ने चौंक कर पूछा.

‘‘विटामिन-पी यानी भरपूर प्यार और परवाह.’’

Father’s Day Special – हमारी अमृता : क्या मंदबुृद्धि अमृता को मिला पिता का प्यार ?

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Bigg Boss OTT 2: मिया खलीफा की होगी एंट्री! घर की पहली तस्वीर आई सामने

सलमान खान का विवादित शो बिग बॉस ओटीटी 2 जल्द ही शुरु होने जा रहा है. इस शो के कंटेस्टेंट की लिस्ट भी सामने आ चुकी है. वही मेकर्स ने घर की पहली झलक भी दिखाई है. अब लोगों को इसके प्रोमों को बेसब्री से इंतजार है. इसी बीच खबरे आ रही है कि एडल्ट स्टार मिया खलीफा भी इस शो का हिस्सा बनेंगी. वाइल्ड कार्ड एंट्री लेंगी.हालांकि इस बात की अभी पुष्टी नहीं हुई है.

 

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आपको बता दें, कि एक रिपोर्ट के अनुसार मिया खलीफा को शो के लिए अप्रोच किया गया है.उनके और मेकर्स के बीच बात-चीत चल रही है.हालांकि इस पर कोई ऑफिशियल बयान सामने नहीं आया है.लेकिन खबर ये है कि उनकी शो में एंट्री होगी. बतौर वाइल्ड कार्ड एंट्री होगी.वहीं, इस शो को सलमान खान होस्ट करने वाले है. पहले करण जौहर किय़ा करते थे. ये पहली बार होगा जब सलमान बिगबॉस सीजन 2 को होस्ट करेंगे.

 

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बता दें, कि बिग बॉस सीजन 2 को 17 जून से जियो सिनेमा पर फ्री देख सकते है. शो के कंटेस्टेंट्स अविनाश सचदेव, आकांक्षा पुरी, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की पत्नी आलिया सिद्दीकी, जिया शंकर, बेबिका धुर्वे, मनीषा रानी, पलक पुरसवानी, फलक नाज़ हैं.

जब लड़की ने किया सरेआम शाहरुख खान को Kiss, वीडियो हुआ वायरल

बॉलीवुड के किंग खान कहे जाने वाले शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) किसी पहचान के मोहताज नहीं है शाहरुख खान के लाखों-करोड़ो फैन है जो उन्हे बेहद पसंद करते है और उनकी एक झलक पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते है ऐसा ही एक वाक्या हाल ही में हुआ. जब शाहरुख खान एक इवेंट में पहुंचे थे. जी हां, यहां शाहरुख खान की फैन एक लड़की ने शाहरुख खान को किस कर दिया. जिसके बाद शाहरुख खान भड़कते नजर आए.

आपको बता दें, कि शाहरुख खान दुबई के इवेंट में पहुंचे थे. जहां लाखों की तदाद में शाहरुख खान को देखने के लिए भीड़ उमड़ गई थी, वही इनमें सबसे ज्यादा लड़किया शामिल थी. शाहरुख खान को देख लड़कियां उनकी तरफ भगती नजर आई और किसी ने उनसे हाथ मिलाया तो, एक लड़की ने उन्हे किस कर डाला. जिस वीडियो को देख शाहरुख खान के फैन भङ़कते नजर आ रहे है. यहां तक की खुद शाहरुख खान भी इस हरकत पर लडकी पर भड़कते नजर आए. अब ये वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.

लोगों ने किए ऐसे कमेंट

शाहरुख खान  के इस वीडियो पर लोग उस महिला पर जमकर भड़क रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “अगर यही हरकत कोई लड़का किसी एक्ट्रेस के साथ करता तो पता नहीं लोग उसे क्या-क्या कहते.” तो वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा, “क्या शाहरुख खान को किस करने से पहले लड़की ने एक्टर से परमिशन ली थी.” एक और यूजर ने वीडियो पर कमेंट करते हुए लिखा, “अगर यही घटना किसी महिला सेलेब्रिटी के साथ किसी पुरुष ने की होती तो आज की हेडलाइन्स कुछ ऐसी होतीं, ‘सेलिब्रिटीज को पुरुषों द्वारा छेड़ा गया.'”

 

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शाहरुख खान की अगली फिल्म

वर्क फ्रंट की बात करें तो शाहरुख खान इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘जवान’ को लेकर सुर्खियों में हैं. एटली कुमार द्वारा निर्देशित इस फिल्म में शाहरुख खान के साथ एक्ट्रेस नयनतारा और सान्या मल्होत्रा भी लीड रोल में नजर आएंगी. फिल्म में एक्टर विजय सेतुपति नेगेटिव किरदार में होंगे. यह फिल्म 7 सितंबर को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज होगी.

प्रेमी ही था मां बेटी का हत्यारा

इसी साल 15 मार्च को रोजाना की तरह कुछ चरवाहे जब अपने पशुओं के साथ गोमती नदी के राजघाट से सटे देवगांव के जंगल में पहुंचे तो एक चरवाहे कि नजर जंगली झाडि़यों के बीच लहूलुहान पड़ी एक महिला और एक बच्ची पर चली गई. देखने से ही लग रहा था कि वे मर चुकी हैं. लाश देखते ही चरवाहा चीख पड़ा. उस ने आवाज दे कर अपने साथियों को बुलाया और उन्हें भी लाशें दिखाईं. लाशें देख कर सभी चरवाहे जंगल से बाहर आ गए और यह बात अन्य लोगों को बताई. उन्हीं में से किसी ने थाना कुमारगंज पुलिस को फोन कर के जंगल में लाशें पड़ी होने की सूचना दे दी.

उधर झाडि़यों में 2 लाशें पड़ी होने की खबर पा कर गांव के भी तमाम लोग पहुंच गए. जंगल में 2 लाशें पड़ी होने की सूचना मिलते ही थाना कुमारगंज के थानाप्रभारी सुनील कुमार सिंह पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. लाशों के निरीक्षण में उन्होंने देखा कि महिला और बच्ची को चाकुओं से बुरी तरह गोद कर मारा गया था. जिस की वजह से दोनों लाशें बुरी तरह से लहूलुहान थीं. लाशों के आसपास भी काफी खून फैला था. महिला की उम्र 35 साल के आसपास थी, जबकि बच्ची करीब 5 साल की थी.

मौके के निरीक्षण में सुनील कुमार सिंह के हाथ ऐसा कुछ लहीं लगा, जिस से यह पता चलता कि मृतका और बच्ची कौन थीं, उन की हत्या किस ने और क्यों की?

उन्होंने घटना की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को दे दी थी, साथ ही दोनों लाशों के फोटोग्राफ कराने के बाद उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की तैयारी शुरू कर दी. अब तक मौके पर एसएसपी अनंतदेव सहित अन्य पुलिस अधिकारी भी आ गए थे. उन्होंने मौके का निरीक्षण कर के इस मामले का जल्दी खुलासा करने का निर्देश दिया.

उच्चाधिकारियों के जाने के बाद लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा कर सुनील कुमार सिंह भी थाने लौट आए. उन के लिए सब से बड़ी चुनौती थी दोनों लाशों की पहचान कराना. इस के लिए उन्होंने अपने खास मुखबिरों को मदद ली, साथ ही खुद भी अपने स्तर से जानकारी जुटाने लगे. उन का ध्यान बारबार बच्ची पर जा रहा था. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उस मासूम से हत्यारे की क्या दुश्मनी थी, जिस ने उसे भी नहीं छोड़ा.

सुनील कुमार सिंह दोनों लाशों की शिनाख्त को ले कर उलझे थे कि तभी एक बुजुर्ग थाने आया. उस ने अपना नाम मूसा खां बताते हुए कहा, ‘‘साहब, मैं ही वह अभागा हूं, जिस की बेटी इशरत जहां की लाश देवगांव के जंगल में पड़ी मिली थी.’’

इतना कह कर वह फफकफफक कर रोने लगा. थानाप्रभारी ने उसे ढांढस बंधाया तो उस ने सिसकते हुए कहा, ‘‘साहब, मेरी बेटी इशरत और उस की मासूम बच्ची को मुन्ना ने मारा है, उस ने उस की जिंदगी खराब कर दी थी. अल्लाह उसे कभी माफ नहीं करेगा…’’

सुनील कुमार सिंह ने उसे ढांढस बंधाते हुए कुर्सी पर बैठने का इशारा किया. इस के बाद पानी मंगा कर पिलाया. फिर उस की पूरी बात सुनने के बाद साफ हो गया कि देवगांव के जंगल में महिला और बच्ची की जो लाशें मिली थीं, वे मूसा खां की बेटी और नातिन की थीं, साथ यह भी कि उन्हें मारने वाला इशरत जहां का प्रेमी मुन्ना था.

दोनों लाशों की शिनाख्त हो जाने के बाद सुनील कुमार सिंह ने मूसा खां से विस्तार से पूछताछ की. इस के बाद मूसा खां से तहरीर ले कर मुन्ना के खिलाफ मांबेटी की हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच की जिम्मेदारी खुद संभाल ली.

सुनील कुमार सिंह ने इस मामले की जांच शुरू की तो पता चला कि इशरत की हत्या प्रेमसंबंधों के चलते हुई थी. जिस मुन्ना से वह प्रेम करती थी, वह उसी के पड़ोस में रहता था. लेकिन घटना के बाद से वह नजर नहीं आ रहा था. सुनील कुमार सिंह का सारा ध्यान मुन्ना पर था, क्योंकि उसी के पकड़े जाने पर इस अपराध से परदा उठ सकता था.

16 अप्रैल, 2017 को मुन्ना पुलिस के हाथ लग गया. मुखबिर ने थानाप्रभारी को सूचना दी थी कि इशरत और उस की बेटी का हत्यारा मुन्ना भेलसर में मौजूद है. यह जानकारी मिलते ही सुनील कुमार सिंह बिना देर किए अपनी टीम के साथ भेलसर पहुंच गए और मुन्ना को गिरफ्तार कर लिया.

भेलसर इलाका फैजाबाद जिले के रुदौली कोतवाली के अंतर्गत आता था. पुलिस टीम मुन्ना को गिरफ्तार कर थाना कुमारगंज ले आई. पूछताछ में पहले तो मुन्ना खुद को पाकसाफ बताता रहा. उस ने इशरत की हत्या पर दुखी होने का नाटक भी किया. लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे उस का यह नाटक ज्यादा देर तक नहीं चल सका.

कुछ ही देर में सवालोंजवाबों में वह इस कदर उलझ गया कि उस के पास इशरत की हत्या का अपना अपराध स्वीकार करने के अलावा कोई चारा ही नहीं बचा. अपना अपराध स्वीकार कर के उस ने इशरत जहां और उस की मासूम बेटी की हत्या की जो कहानी सुनाई, उसे सुन कर सभी का कलेजा दहल उठा.

उत्तर प्रदेश के जनपद अमेठी के थाना शुक्ला बाजार का एक गांव है किशनी. सभी जातियों की मिश्रित आबादी वाले इस गांव में मुसलिमों की आबादी कुछ ज्यादा है. इसी गांव के रहने वाले मूसा खां के परिवार में पत्नी सहित 5 लोग थे. जैसेतैसे उन्होंने सभी बच्चों का घर बसा दिया था. केवल इशरत जहां ही बची थी, जिस के लिए वह रिश्ता ढूंढ रहा था.

मूसा खां के पड़ोस में ही मुन्ना का घर था. पड़ोसी होने के नाते दोनों परिवारों का एकदूसरे के घरों में आनाजाना था. मुन्ना दरी बुनाई का काम करता था. इशरत भी दरी बुनाई करने जाती थी. इसी के चलते दोनों के बीच प्रेम का बीज अंकुरित हुआ.

पहले दोनों एकदूसरे को देख कर केवल हंस कर रह जाया करते थे. लेकिन धीरेधीरे यही हंसी प्यार में बदलने लगी. संयोग से एक दिन मुन्ना काम से घर लौट रहा था तो पीछेपीछे इशरत भी आ रही थी.

सुनसान जगह देख कर मुन्ना ने अपने कदमों की रफ्तार कम कर दी. फिर जैसे ही इशरत उस के करीब आई, उस ने इधरउधर देख कर इशरत का हाथ पकड़ लिया और बिना कुछ सोचेसमझे कहा, ‘‘इशरत, मैं तुम से प्यार करता हूं. अगर तुम मुझे नहीं मिली तो मैं अपनी जान दे दूंगा. बोलो, क्या तुम भी मुझ से प्यार करती हो?’’

मुन्ना के मुंह से ये बातें सुन कर इशरत कुछ कहने के बजाय अपना हाथ छुड़ा कर ‘हां’ में सिर हिला कर तेजी से अपने घर की ओर चली गई. मुन्ना इतने से ही उस के मन की बात समझ गया. वह समझ गया कि इशरत भी उसे चाहती है. लेकिन जुबान नहीं खोलना चाह रही.

उस दिन शाम ढले मुन्ना किसी बहाने से इशरत के घर पहुंच गया और मौका देख कर उस ने इशरत को अपनी बांहों में भर कर चूम लिया. मुन्ना के अचानक इस व्यवहार से इशरत सहमी तो जरूर, मगर हिली नहीं. वह बस इतना ही बोली, ‘‘धत, कोई देख लेगा तो कयामत आ जाएगी.’’

यह सुन कर मुन्ना ने इशरत को बांहों से आजाद कर दिया और अपने घर चला गया. उस दिन दोनों की आंखों से नींद कोसों दूर थी. किसी तरह रात कटी और सुबह हुई तो मुन्ना उस दिन काम पर रोज से पहले ही पहुंच गया. उस की नजरें इशरत को ही ढूंढ रही थीं. इशरत आई तो वह खुशी से झूम उठा. उस दिन दोनों का ही मन काम में नहीं लग रहा था.

जल्दीजल्दी काम निपटा कर जब इशरत घर जाने को तैयार हुई तो मुन्ना भी उस के पीछेपीछे चल पड़ा. कुछ दूर जाने के बाद एकांत मिलने पर मुन्ना ने इशरत का हाथ पकड़ कर बैठा लिया. वहां बैठ कर दोनों काफी देर तक बातें करते रहे. मुन्ना बारबार अपने प्रेम की दुहाई देते हुए एक साथ जीनेमरने की कसमें खाता रहा.

मुन्ना की बातें सुन कर इशरत खुद को रोक नहीं पाई. उस ने कहा, ‘‘मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकती. अब तुम्हारे बगैर एक भी पल काटना मुश्किल होने लगा है. तुम जल्दी से अपने घर वालों से बात कर के उन्हें मेरे अब्बू के पास मेरा हाथ मांगने के लिए भेजो, ताकि जल्दी से हमारा निकाह हो सके.’’

उस दिन के बाद दोनों का मिलनाजुलना कुछ ज्यादा ही बढ़ गया. शादी की बात आने पर मुन्ना आजकल कह कर टाल जाता. इशरत मुन्ना के फरेब को भांप नहीं पा रही थी और अपने भावी खुशनुमा जीवन के तानाबाना बुनने में लगी थी. दोनों में प्रेम बढ़ा तो शारीरिक संबंध भी बन गए.

यह इस घटना से 6-7 साल पहले की बात है. पहले तो प्यार समझ कर इशरत मुन्ना को अपना तन समर्पित करती रही. लेकिन धीरेधीरे उसे लगने लगा कि मुन्ना उस से नहीं, बल्कि उस के शरीर से प्यार करता है, वह उस से निकाह नहीं करना चाहता. वह मुन्ना पर निकाह के लिए जोर देने लगी.

लेकिन मुन्ना का तो इशरत से मन भर चुका था. उस ने चुपके से संजीदा खातून से निकाह कर लिया और रुदौली में जा कर रहने लगा. संयोग से सन 2012 में इशरत गर्भवती हो गई. उस के घर वालों को इस बात का पता चला तो उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई.

बहरहाल, कोई चारा न देख इशरत के घर वालों ने मुन्ना पर शादी के लिए दबाव बनाना शुरू किया. लेकिन वह अपने और इशरत के संबंधों से साफ मुकर गया. ऐसे में कोई चारा न देख इशरत के अब्बा मूसा खां ने मुन्ना के खिलाफ 3 सितंबर, 2012 को भादंवि की धारा 376, 504, 506 के तहत थाना शुक्ला बाजार में मुकदमा दर्ज करा दिया, जिस में मुन्ना को जेल हो गई.

इधर मुन्ना जेल गया, उधर इशरत जहां ने एक बच्ची को जन्म दिया. मुन्ना जमानत पर जेल से बाहर आ गया. उस का मुकदमा चल रहा था. उस की अगली तारीख 23 मार्च, 2017 को थी. फिर से जेल जाने के डर से पहले तो मुन्ना ने इशरत के अब्बा के सामने पैसा ले कर सुलह कर लेने का प्रस्ताव रखा. लेकिन मूसा खां ने उस के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए कहा, ‘‘तुम इशरत और अपने बीच के संबंधों को स्वीकार करते हुए बच्ची महलका को अपनी औलाद के रूप में स्वीकार करो, तभी हम मुकदमे में सुलह करने पर विचार कर सकते हैं.’

लेकिन मुन्ना संजीदा खातून से शादी कर चुका था, इसलिए उस ने मूसा की शर्त को स्वीकार तो नहीं किया, विचार करने की बात कह कर टाल गया और इशरत को झांसे में ले कर उस से पुन: संबंध बना लिए. इशरत मुन्ना के इस फरेब को समझ नहीं पाई और उसे विश्वास था कि मुन्ना उसे अपना लेगा.

इधर मुकदमे की तारीख करीब आती जा रही थी. उसी दिन फैसला होना था. ऐसे में एक सोचीसमझी साजिश के तहत 15 मार्च को मुन्ना इशरत को यह कह कर अपने साथ ले गया कि चलो हम सुलह कर लेते हैं और दिल्ली चल कर निकाह कर वहीं कमरा ले कर रहते हैं. मुन्ना के मुंह से सुलह की बात सुन कर इशरत खुशी से झूम उठी और तपाक से बोली, ‘‘चलो, कहां चलें?’’

इशरत की हां से खुश हो कर मुन्ना बोला, ‘‘पहले हम दोनों किसी सुनसान स्थान पर चल कर बैठ कर बातें करेंगे, उस के बाद आगे की सोचेेंगे.’’

मुन्ना इशरत को साथ ले कर गोमती नदी के राजघाट होते हुए देवगांव की ओर चल पड़ा. थोड़ी दूर चलने के बाद उस ने इशरत से कहा, ‘‘इशरत, तुम इस जंगल के रास्ते चलो, मैं गाड़ी ले कर रोड के रास्ते से आ रहा हूं.’’

इशरत अपनी 5 साल की बेटी महलका को साथ ले कर पूरी तरह से बेपरवाह हो कर जंगल के रास्ते से चल पड़ी. वह तेजी से कदम बढ़ाते हुए चली जा रही थी कि तभी कुछ दूरी पर मुन्ना बाइक खड़ी कर के हाथ में चाकू लिए इशरत जहां के करीब आया और पीछे से उस की गर्दन पर धड़ाधड़ वार करने शुरू कर दिए.

चाकू के वार से इशरत निढाल हो कर गिर पड़ी. अचानक हुए हमले से उसे कुछ सोचनेसमझने का समय तक नहीं मिल पाया. उस की मासूम बेटी महलका ने मां को जमीन पर गिरते देखा तो मुन्ना के पैर पकड़ कर रोने लगी.

इंसान से हैवान बन चुके मुन्ना को उस मासूम पर भी रहम नहीं आया. उस ने सोचा कि इसे ले कर कहां जाऊंगा. उस ने उस मासूम का भी गला काट कर उसे मौत की नींद सुला दिया. फिर दोनों लाशों को वहीं झाडि़यों में छिपा कर खून से सनी अपनी शर्ट और चाकू को भी वहीं छिपा दिया.

इस के बाद अपनी मोटरसाइकिल यूपी 44 एस 9123 से वहां से भाग निकला. यह तो संयोग था कि घटना के कुछ ही देर बाद चरवाहों की नजर मांबेटी की लाशों पर पड़ गई और उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी अन्यथा वे दोनों जंगली जानवरों का निवाला बन जातीं तो शायद यह राज ही दफन हो कर रह जाता.

पुलिस के अनुसार, घटना के एक दिन पहले ही मुन्ना की बीवी संजीदा खातून ने एक बच्ची को जन्म दिया था. इधर इस मामले में जब उस का नाम प्रकाश में आया तो पुलिस उस के पीछे पड़ गई. यह देख कर वह अपने घर से फरार हो गया. पुलिस ने उस के घर सहित अन्य संभावित स्थानों पर कई बार दबिश दी, लेकिन वह पुलिस को चमका देता रहा.

16 अप्रैल को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उसे रुदौली कोतवाली के भेलसर स्थित एक प्राइवेट नर्सिंगहोम के पास की एक चाय की दुकान से गिरफ्तार कर लिया था, जहां उस की बीवी संजीदा खातून भरती थी. पुलिस को देख कर मुन्ना भागने लगा था, लेकिन पुलिस टीम ने उसे घेराबंदी कर के पकड़ लिया था.

उस की तलाशी ली गई तो उस के पास से आधार कार्ड और 250 रुपए नकद मिले थे. बाद में पुलिस ने उस की निशानदेही पर घटनास्थल के पास से खून से सनी उस की शर्ट और चाकू बरामद कर लिया था. उसे मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां उस ने मांबेटी की हत्या का अपना अपराध स्वीकार करते हुए पूरी कहानी सुनाई थी. इस के बाद उसे सक्षम न्यायालय में पेश किया गया,जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

जब भी मैं सैक्सुअली उपन्यास पढ़ती हूं योनि से डिस्चार्ज होने लगता है, क्या करूं?

सवाल
मैं 19 साल की युवती हूं. इधर कुछ समय से जब भी मैं कोई सैक्सुअली रोमांटिक उपन्यास पढ़ती हूं या कोई ऐसेवैसे चित्र देखती हूं तो मेरे शरीर में अजीब सी हलचल मच जाती है. मन में कामुक विचार गहरा उठते हैं और योनि से डिस्चार्ज होने लगता है. समझ में नहीं आ रहा कि क्या करूं? घर में कोई ऐसा नहीं जिस से यह बात बांट सकूं. कृपया मार्गदर्शन करें?

जवाब
आप बिलकुल परेशान न हों. मन में कामुक विचार जाग्रत होने पर योनि की तरलता का बढ़ना बिलकुल स्वाभाविक है. इस का संबंध मस्तिष्क में पाए जाने वाले सैक्स सैंटर से है. जब भी यह सैंटर उत्तेजित होता है, स्पाइनल कोर्ड और कुछ विशेष तंत्रिकाओं में अपने आप आवेग उत्पन्न होता है और उस से प्रेरित संदेश से पेट के निचले भाग के अंगों में खून का दौरा बढ़ जाता है.

इसी से योनि के भीतर लबलबापन उत्पन्न हो जाता है और यह भीतर ही भीतर तरल हो उठती है. यह प्राकृतिक मैकेनिज्म शारीरिक मिलन की क्रिया को सहज बनाने के लिए रचा गया है.

डिजिटल सेक्स के जाल में फंसते युवा

आजकल सबकुछ डिजिटल हो रहा है. स्कूलकालेज, औफिस, पुलिस स्टेशन, अदालत सबकुछ डिजिटल हो रहे हैं, ठीक इसी प्रकार संबंध भी डिजिटल हो रहे हैं. शादीब्याह के न्योते हों या कोई अन्य खुशखबरी या फिर शोक समाचार सबकुछ ईमेल, व्हाट्सऐप, एसएमएस, ट्विटर या फेसबुक के जरिए दोस्तों और सगेसंबंधियों तक पहुंचाया जा रहा है. मिठाई का डब्बा या खुद कार्ड ले कर पहुंचने की परंपरा धीरेधीरे लुप्त हो रही है.

कुछ ऐसा ही प्रयोग युवक-युवतियों के संबंधों में भी हो रहा है. ऐसे युवकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो यौन सुख के लिए वास्तविक सेक्स संबंधों के बजाय डिजिटल सेक्स और औनलाइन पोर्नोग्राफी पर ज्यादा निर्भर हैं. ऐसे युवकों को वास्तविक दुनिया के बजाय आभासी दुनिया के सेक्स में ज्यादा आनंद आता है और ज्यादा आसानी महसूस होती है. इन्हें युवतियों को टैकल करना और उन से भावनात्मक व शारीरिक संबंधों का निर्वाह करना बेहद मुश्किल लगता है, इसलिए ये उन से कन्नी काटते हैं. पढ़ेलिखे और शहरी लोगों में डिजिटल सेक्स की आदत ज्यादा देखी जाती है. मनोवैज्ञानिक इन्हें ‘हौलो मैन’ यानी खोखला आदमी कहते हैं. ऐसे लोगों को वास्तविक यौन सुख या इमोशनल सपोर्ट तो मिल नहीं पाता नतीजतन ये ऐंग्जायटी और डिप्रैशन का शिकार होने लगते हैं और भावनात्मक रूप से टूट जाते हैं.

मुंबई की काउंसलर शेफाली, जो ‘टीन मैटर्स’ पुस्तक की लेखिका भी हैं, हफ्ते में कम से कम एक ऐसे युवक से जरूर मिलती हैं, जो पोर्न देखने का अभ्यस्त होता है और वास्तविक सेक्स से कतराता है. दरअसल, युवावस्था में लगभग हर युवक डिजिटल सेक्स का शौकीन होता है. कुछ युवक इस के इतने अभ्यस्त हो जाते हैं कि उन्हें इस का नशा हो जाता है और वे सामाजिक जीवन से कतराने लगते हैं. उन्हें जो युवतियां मिलती भी हैं उन में वे आकर्षण नहीं ढूंढ़ पाते, क्योंकि उन की ब्रैस्ट या अन्य अंग पोर्न ऐक्ट्रैस जैसे नहीं होते. कई बार घर वालों के कहने या सामाजिक दबाव में आ कर ये शादी तो कर लेते हैं, लेकिन अपनी बीवी से इन की ज्यादा दिन तक पटरी नहीं बैठती, क्योंकि ये अपनी बीवी के साथ सेक्स संबंध बनाते वक्त उस से पोर्न जैसी ऊटपटांग हरकतें और वैसी ही सैक्सुअल पोजिशंस चाहते हैं. कोई भी बीवी यह सब कब तक बरदाश्त कर सकती है? नतीजतन या तो बीवी इन्हें छोड़ देती है या फिर ये खुद ही ऊब कर अलग हो जाते हैं.

व्यवहार विशेषज्ञों के मुताबिक इंटरनैट पर पोर्न साइट्स की बाढ़, थ्रीडी सेक्स गेम, कार्टून सेक्स गेम, वर्चुअल रिएलिटी सेक्स गेम और अन्य तरहतरह की पोर्न फिल्में जिन में एक युवती या युवक को 3-4 लोगों के साथ सेक्स संबंध बनाते हुए दिखाया जाता है, ने युवाओं के दिमाग को बुरी तरह डिस्टर्ब कर के रख दिया है. स्मार्टफोन पर आसानी से इन की उपलब्धता ने स्थिति ज्यादा बिगाड़ दी है. यह स्थिति सिर्फ भारत की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की है. ‘मेन (डिस) कनैक्टेड : हाउ टैक्नोलौजी हैज सबोटेज्ड व्हाट इट मीन्स टू बी मेल’ में मनोविज्ञानी फिलिप जिम्वार्डो ने लिखा है, ‘औनलाइन पोर्नोग्राफी और गेमिंग टैक्नोलौजी पौरुष को नष्ट कर रही है. अलगअलग देशों के 20 हजार से ज्यादा युवाओं पर किए गए सर्वे में हम ने पाया कि आसानी से उपलब्ध पोर्न से हर देश में पोर्न एडिक्टों की भरमार हो गई. यूथ्स को युवतियों के साथ यौन संबंध बनाने के बजाय पोर्न देखते हुए हस्तमैथुन करने में ज्यादा आनंद आता है.’

मेन (डिस) कनैक्टेड की सह लेखिका निकिता कूलोंबे कहती हैं, ‘इंटरनैट युवाओं को अंतहीन नौवेल्टी और वर्चुअल हरमखाने की सुविधा देता है. 10 मिनट में ये यूथ इतनी निर्वस्त्र और सेक्सरत युवतियों को देख लेते हैं, जितनी इन के पुरखों ने ताउम्र नहीं देखी होंगी.’

व्यवहार विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में कई यूथ ऐसे मिलेंगे जो स्क्रीन पर चिपके रहेंगे और सोशल साइट्स पर तो युवतियों से खूब गुफ्तगू करेंगे, लेकिन वास्तविक दुनिया में उन्हें युवतियों के सामने जाने पर घबराहट होती है और ये अपनी भावनाएं उन के साथ शेयर करने का सही तरीका नहीं ढूंढ़ पाते.

ये युवा फेस टू फेस बात करने के बजाय फेसबुक, व्हाट्सऐप, टैक्स्ट मैसेज या मोबाइल फोन का सहारा लेते हैं. जाहिर सी बात है कि ये युवतियों के सामने नर्वस हो जाते हैं और उन से संबंध बनाने से कतराते हैं. पोर्न से उन्हें तत्काल आनंद और संतुष्टि मिलती है, जबकि वास्तविक दुनिया में सेक्स संबंध बनाने से पहले मित्रता, प्रेम, आत्मीयता या शादीविवाह जरूरी होता है.

डिजिटल सेक्स का यह एडिक्शन युवतियों की तुलना में युवकों को अधिक प्रभावित करता है. इस की वजह यह है कि इंटरनैट पोर्न में यौन संबंधों का आनंद उठाते हुए युवकों को ही अधिक दिखाया जाता है.

मनोवैज्ञानिक कहते हैं, ‘‘हमारे देश में सेक्स के बारे में बात करना एक प्रकार से गुनाह माना जाता है. ऐेसे में यूथ्स के लिए अपनी सैक्सुअल जिज्ञासाओं को शांत करने का सब से आसान जरिया इंटरनैट पोर्न ही है. इस का एक दुष्प्रभाव यह है कि ये युवक इन पोर्न क्लिपिंग्स या फिल्मों के जरिए सेक्स ज्ञान प्राप्त करने के बजाय मन में ऊटपटांग ग्रंथियां पाल लेते हैं.’’

पोर्न नायक के अतिरंजित मैथुन और उस के यौनांग के अटपटे साइज को ले कर ये युवा अपने मन में हीनभावना पाल लेते हैं और खुद को नाकाबिल या कमजोर मान कर युवतियों का सामना करने से कतराते हैं. ये युवक अपने छोटे लिंग और कथित शीघ्रपतन की समस्या को ले कर अकसर मनोवैज्ञानिक या सेक्स विशेषज्ञों के चक्कर काटते नजर आते हैं. कुछ युवा तो झोलाछाप डाक्टरों या तंत्रमंत्र के चंगुल में भी फंस जाते हैं.

‘इंडिया इन लव’ की लेखिका इरा त्रिवेदी के मुताबिक डिजिटल सेक्स के मकड़जाल में फंस कर कई यूथ्स तो अपनी बसीबसाई गृहस्थी को भी तबाह कर बैठते हैं. दरअसल, पोर्न फिल्मों में हिंसक यौन संबंध दिखाए जाते हैं, जिन में युवतियों को जानवरों की तरह ट्रीट किया जाता है और उन के चीखनेचिल्लाने के बावजूद उन के साथ जबरन सेक्स करते दिखाया जाता है.

हाल ही में कोलकाता में एक महिला ने तलाक की अपील करते हुए शिकायत की कि उस का पति पोर्न फिल्मों के ऐक्शन उस पर दोहराना चाहता है. अजीबोगरीब आसनों में सेक्स करना चाहता है, जिसे सहन करना उस के बस की बात नहीं. पति के साथ यौन संबंध बनाने में उसे न तो रोमांस का अनुभव होता है, न ही आनंद आता है बल्कि सेक्स संबंध उस के लिए टौर्चर बन चुके हैं.

कुछ हद तक डिजिटल सेक्स की इस आधुनिक बीमारी का शिकार कई महिलाएं बन चुकी हैं. गायनोकोलौजिस्ट बताती हैं कि उन के पास कुछ महिलाएं वैजाइनल ब्यूटीफिकेशन के उपाय पूछने भी आती हैं, तो कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो अपने पति से संतान तो चाहती हैं मगर सेक्स नहीं करना चाहतीं. संतान की उत्पत्ति के लिए वे कृत्रिम रूप से गर्भाधान करना चाहती हैं.

82 वर्षीय जिंबारडो कहते हैं कि युवाओं को डिजिटल सेक्स के इस मकड़जाल से निकालने के लिए वास्तविक दुनिया में इन्वौल्व होने के लिए प्रेरित करना पड़ेगा. उन्हें डिजिटल दुनिया से दूर रहने और अपने जैसे हाड़मांस के दूसरे लोगों से मिलनेजुलने और खासकर युवतियों से मिलनेजुलने के लिए प्रेरित करना पड़ेगा.

पोर्न फैक्ट, जो चौंकाते हैं

–  आमतौर पर हम पोर्न की खपत विदेश में ज्यादा मानते हैं, लेकिन 2014 में हुए एक औनलाइन सर्वे में ‘पोर्नहब’ ने पाया कि भारत पोर्न कंटैंट का सब से बड़ा उपभोक्ता है.

–  भारतीय डैस्कटौप के बजाय स्मार्टफोन पर पोर्न ज्यादा देखते हैं.

–  देशभर में आंध्र प्रदेश के लोग पोर्न हब पर सब से कम समय 6 मिनट 40 सैकंड बिताते हैं जबकि पश्चिम बंगाल में रोज 9 मिनट 5 सैकंड और असम में यह आंकड़ा 9 मिनट 55 सैकंड का है.

– सनी लियोनी अब तक की सब से फेवरिट पोर्न स्टार है.

– दुनिया के ज्यादातर देशों में पोर्न फिल्म सोमवार को देखी जाती है जबकि भारत में शनिवार को.

Father’s Day Special: लाडो का पीला झबला

न जाने कितनी ख्वाहिशें  दम तोड़ती हैं दिल में, तब कहीं परवरिश होती है मुकम्मल. सुबहसुबह ही शाहिस्ता ने सोहेल से कहा, ‘‘आज वक्त निकाल कर अपने लिए नई पतलून ले आइए. अब तो रफू के धागे भी जवाब दे चुके हैं.’’

सोहेल ने बड़ी बुलंद आवाज में कहा, ‘‘बेगम का हुक्म सिरआंखों पर. आज तो दिन भी बाजार का.’’

हर जुमेरात पर शहर के छोर पर नानानानी पार्क के पास वाली सड़क पर बाजार लगता था. सोहेल ने जल्दीजल्दी अपना काम खत्म कर के बाजार का रुख कर लिया. दिमाग में हिसाब चालू था. 2 ईद गुजर चुकी थीं, उसे खुद के लिए नया जोड़ा कपड़ा लिए हुए. इस बार 25 रुपए बचे हैं, महीने के हिसाब से…

पूरे 12 किलोमीटर चलने के बाद बाजार आ ही गया. शाम बीतने को थी. अंधेरा हो चुका था. बाजार ट्यूबलाइट और बल्ब की रोशनी से जगमगा रहा था.

सोहेल ने अपनी जेब की गहराई के मुताबिक दुकान समझी और यहांवहां नजर दौड़ाने लगा. अचानक उस की नजर एक तरफ सजे हुए झबलों पर पड़ी. नीले, लाल, हरे, पीले और बहुत से रंग.

दुकानदार ने सोहेल को कुछ पतलूनें दिखाईं. मोलभाव शुरू हुआ. 20 रुपए की पतलून तय हुई.

सोहेल ने पूछा, ‘‘भाई, बच्चों के वे रंगबिरंगे झबले कितने के हैं?’’

दुकानदार ने कहा, ‘‘25 के 3. कोई मोलभाव नहीं हो पाएगा इस में.’’सोहेल ने जेब से पैसे निकाले और 3 झबले ले लिए. 12 किलोमीटर चल के घर आतेआते रात काफी हो चली थी. घर का दरवाजा खटखटाते ही शाहिस्ता ने दरवाजा तुरंत खोला, मानो वह दरवाजे से चिपक कर ही खड़ी थी.

सोहेल ने पूछा, ‘‘हमारी लाडो सो गई क्या?’’

शाहिस्ता ने जवाब दिया, ‘‘वह तो कब की सो गई. मैं तो तुम्हारी नई पतलून का इंतजार कर रही थी.’’

सोहेल ने हंसते हुए जवाब दिया, ‘‘बेगम, आप का इंतजार और लंबा हो गया.’’

शाहिस्ता ने पैकेट खोला और उस में से निकले 3 झबले. उस ने बिना कुछ कहे खाना निकालना सही समझा. खाना लगा कर उस ने सिलाई मशीन में तेल डाला, काला धागा निकाला और पुरानी पतलून को रफू करने लगी.

सोहेल ने खाना खाते हुए मुसकरा कर कहा, ‘‘लाडो के ऊपर पीला झबला तो बड़ा ही खूबसूरत लगेगा. क्यों शाहिस्ता…’’

शाहिस्ता ने दांतों से धागा काटते हुए कहा, ‘‘लो, तुम्हारी पतलून फिर से तैयार हो गई.’’

Father’s Day Special- मरीचिका: बेटी की शादी में क्यों दीवार बना एक बाप?

रूपाली के पांव जमीन पर कहां पड़   रहे थे. आज उसे ऐसा लग रहा था मानो सारी खुशियां उस की झोली में आ गिरी थीं. स्कूलकालेज में रूपाली को बहुत मेधावी छात्रा नहीं समझा जाता था. इंजीनियरिंग में दाखिला भी उसे इसलिए मिल गया क्योंकि वहां छात्राओं के लिए आरक्षण का प्रावधान था. हां, दाखिला मिलने के बाद रूपाली ने पढ़ाई में अपनी सारी शक्ति झोंक दी थी. अंतिम वर्ष आतेआते उस की गिनती मेधावी छात्रों में होने लगी थी.

कालेज के अंतिम वर्ष में कैंपस चयन के दौरान अमेरिका की एक मल्टीनैशनल कंपनी ने उसे चुन लिया तो उस के हर्ष की सीमा न रही. कंपनी ने उसे प्रशिक्षण के लिए अमेरिका के अटलांटा स्थित अपने कार्यालय भेजा. वहां से प्रशिक्षण ले कर लौटने पर रूपाली को कंपनी ने उसी शहर में स्थित अपने कार्यालय में ही नियुक्त कर दिया. आसपास की कंपनियों में उस के कई मित्र व सहेलियां काम करते थे. कुछ ही दिनों बाद रूपाली का घनिष्ठ मित्र प्रद्योत भी उसी कंपनी में नियुक्ति पा कर आ गया तो उसे लगा कि जीवन में और कोई चाह रह ही नहीं गई है. 23 वर्ष की आयु में 8 लाख रुपए प्रतिवर्ष का वेतन तथा अन्य सुविधाएं. प्रद्योत जैसा मित्र तथा मित्रों व संबंधियों द्वारा प्रशंसा की झड़ी. ऐसे में रूपाली के मातापिता भी कुछ कहने से पहले कई बार सोचते थे.

‘‘हमारी रूपाली तो बेटे से बढ़ कर है. पता नहीं लोग क्यों बेटी के जन्म पर आंसू बहाते हैं,’’ पिता गर्वपूर्ण स्वर में रूपाली की गौरवगाथा सुनाते हुए कहते. कंपनी 8 लाख रुपए सालाना वेतन देती थी तो काम भी जम कर लेती थी. रूपाली 7 बजे घर से निकलती तो घर लौटने में रात के 10 बज जाते थे. सप्ताहांत अगले सप्ताह की तैयारी में बीत जाता. फिर भी रूपाली और प्रद्योत सप्ताह में एक बार मिलने का समय निकाल ही लेते थे. मां वीणा और पिता मनोहर लाल को रूपाली व प्रद्योत के प्रेम संबंध की भनक लग चुकी थी. इसलिए उन्हें दिनरात यही चिंता सताती रहती थी कि कहीं ऐसा न हो कि कोई कुपात्र लड़का उन की कमाऊ बेटी को ले उड़े और वे देखते ही रह जाएं.

उधर अच्छी नौकरी मिलते ही विवाह के बाजार में रूपाली की मांग साधारण लड़कियों की तुलना में कई गुना बढ़ गई थी. अब उस के लिए विवाह प्रस्तावों की बाढ़ सी आने लगी थी. वीणा और मनोहर लाल का अधिकांश समय उन प्रस्तावों की जांचपरख में ही बीतता. समस्या यह थी कि जो भी प्रस्ताव आते उन की तुलना, जब वे अपनी बेटी के साथ करते तो तमाम प्रस्ताव उन्हें फीके जान पड़ते. ऐसे में रूपाली ने जब प्रद्योत के साथ  विवाह करने की बात उठाई तो मां  वीणा के साथ पिता मनोहर लाल भी भड़क उठे. ‘‘माना कि कालेज के समय से तुम प्रद्योत को जानती हो, पर तुम ने उस में ऐसा क्या देखा जो उस से विवाह करने की बात सोचने लगीं?’’ मनोहर लाल ने गरज कर पूछा.

‘‘पापा, उस में क्या नहीं है? वह सभ्य, सुसंस्कृत परिवार का है. उस का अच्छा व्यक्तित्व है. सब से बड़ी बात तो यह है कि वह हर क्षण मेरी सहायता को तत्पर रहता है और हम एकदूसरे को बहुत चाहते भी हैं.’’

‘‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई अपने बारे में इस प्रकार के निर्णय लेने की? कान खोल कर सुन लो, यदि तुम ने मनमानी की तो समझ लेना कि हम तुम्हारे लिए मर गए,’’ मनोहर लाल के तीखे स्वर ने रूपाली को बुरी तरह डरा दिया.

‘‘पापा, आप एक बार प्रद्योत से मिल तो लें, मुझे पूरा विश्वास है कि आप उस से प्रभावित हुए बिना नहीं रहेंगे.’’

‘‘इतना समझाने के बाद भी तुम ने प्रद्योत के नाम की रट लगा रखी है? वह न हमारी भाषा बोलता है न हमारे क्षेत्र का है. हमारे रीतिरिवाजों तक को नहीं जानता. एक साधारण से परिवार के प्रद्योत में तुम्हें बड़ी खूबियां नजर आ रही हैं. कमाता क्या है वह? तुम से आधा वेतन है उस का. हम तुम्हारी खुशी के लिए तुम्हारे छोटे भाईबहन का भविष्य दांव पर नहीं लगा सकते,’’ मनोहर लाल का प्रलाप समाप्त हुआ तो रूपाली फूटफूट कर रो पड़ी. पिता का ऐसा रौद्ररूप उस ने पहले कभी नहीं देखा था.

मांदेर तक उस की पीठ पर हाथ फेर कर उसे चुप कराती रहीं, ‘‘तू तो मेरी बहुत समझदार बेटी है. ऐसे थोड़े ही रोते हैं. तेरे पापा तेरी भलाई के लिए ही कह रहे हैं. कल ही कह रहे थे कि हमारी रूपाली ऐसीवैसी नहीं है. 8 लाख रुपए प्रतिवर्ष वेतन पाती है. वे तो ऐसा वर ढूंढ़ रहे हैं जो कम से कम 20 लाख प्रतिवर्ष कमाता हो.’’

‘‘मां, मैं भी पढ़ीलिखी हूं, अपने पैरों पर खड़ी हूं. जब आप ने मुझे हर क्षेत्र में स्वतंत्रता दी है तो अपना जीवनसाथी चुनने में क्यों नहीं देना चाहतीं?’’ रूपाली बिलख उठी थी.

‘‘क्योंकि हम तुम्हारा भला चाहते हैं. विवाह के बारे में उठाया गया तुम्हारा एक गलत कदम तुम्हारा जीवन तबाह कर देगा,’’ मां ने पुन: उसे समझाया.

मनोहर लाल ने भी पत्नी की हां में हां मिलाई.

‘‘आप का निर्णय सही ही होगा, इस का भरोसा आप दिला सकते हैं?’’ रूपाली आंसू पोंछ उठ खड़ी हुई.

‘‘देखा तुम ने?’’ मनोहर लाल बोले, ‘‘कितनी ढीठ हो गई है तुम्हारी बेटी. यह इस का ऊंचा वेतन बोल रहा है. अपने सामने तो किसी को कुछ समझती ही नहीं. पर मैं एक बात पूर्णतया स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि अपनी इच्छा से इस ने विवाह किया तो मेरा मरा मुंह देखेगी.’’

‘‘रूपाली, मैं तुझ से अपने सुहाग की भीख मांगती हूं. तू ने कुछ ऐसावैसा किया तो तेरे छोटे भाईबहन अनाथ हो जाएंगे,’’ मां वीणा ने बड़े नाटकीय अंदाज में अपना आंचल फैला दिया.

उस दिन बात वहीं समाप्त हो गई. अब दोनों ही पक्षों को एकदूसरे की चाल की प्रतीक्षा थी. रूपाली अपनी दिनचर्या में व्यस्त हो गई. यों उस ने प्रद्योत को सबकुछ बता दिया था. अब प्रद्योत को अपने परिवार की चिंता सताने लगी थी. हो सकता है वे भी इस विवाह को स्वीकार न करें.

‘‘यदि मेरे मातापिता ने भी इस विवाह का विरोध किया तो हम क्या करेंगे, रूपाली?’’ प्रद्योत ने प्रश्न किया.

‘‘विवाह नहीं करेंगे और क्या. तुम्हें नहीं लगता कि अभी हमें 4-5 वर्ष और प्रतीक्षा करनी चाहिए. शायद तब तक हमारे मातापिता भी हमारी पसंद को स्वीकार करने को तैयार हो जाएं,’’ रूपाली ने स्पष्ट किया.

‘‘तुम ठीक कहती हो. सच कहूं, तो मैं ने अभी तक विवाह के बारे में सोचा ही नहीं है,’’ प्रद्योत ने उस की हां में हां मिलाई तो रूपाली एक क्षण के लिए चौंकी अवश्य थी फिर एक फीकी सी मुसकान फेंक कर उठ खड़ी हुई.

उस के मातापिता का वरखोजी अभियान पूरे जोरशोर से चल रहा था. उन की 8 लाख रुपए प्रतिवर्ष वेतन पाने वाली बेटी के लिए योग्य वर जुटाना इतना सरल थोड़े ही था. अधिकतर तो उन के मापदंडों पर खरे ही नहीं उतरते थे. जो उन्हें पसंद आते उन के समक्ष इतनी शर्तें रख दी जातीं कि वे भाग खड़े होते. कोई 1-2 ठोकबजा कर देखने पर खरे उतरते तो उन्हें ई-मेल, पता आदि दे कर रूपाली से संपर्क करने की अनुमति मिलती.

अपने एक दूर के संबंधी के पुत्र मधुकर को मनोहर लाल ने भावी वरों की सूची में सब से ऊपर रखा था. इस बीच प्रद्योत को एक अन्य कंपनी में नौकरी मिल गई थी और वह शहर छोड़ कर चला गया था.

 

मनोहर लाल ने मधुकर के मातापिता से स्पष्ट कह दिया था कि उन की लाड़ली बेटी रूपाली हैदराबाद छोड़ कर मुंबई नहीं जाएगी. मधुकर को ही मुंबई छोड़ कर हैदराबाद आना पड़ेगा. मधुकर और उस के मातापिता के लिए यह आश्चर्य का विषय था. उन्होंने तो यह सोच रखा था कि रूपाली विवाह के बाद मधुकर के साथ रहने आएगी. पर मनोहर लाल ने साफ शब्दों में बता दिया था कि इतनी अच्छी नौकरी छोड़ कर रूपाली कहीं नहीं जाएगी. मधुकर ने रूपाली को समझाने का प्रयत्न अवश्य किया था पर उस ने साफ शब्दों में कह दिया कि वह चाह कर भी मातापिता की इच्छा के विरुद्ध कुछ नहीं करेगी. बात आईगई हो गई थी. दोनों ही पक्ष एकदूसरे की ओर से पहल की आशा लगाए बैठे थे. दूसरे पक्ष की शर्तें मानने में उन का अहं आड़े आता था. फिर तो यह सिलसिला चल निकला, सुयोग्य वर ढूंढ़ा जाता. शुरुआती बातचीत के बाद फोन नंबर, ई-मेल आईडी आदि रूपाली को सौंप दिए जाते. विचारों का आदानप्रदान होता. घंटों फोन पर बातचीत होती पर बात न बनती.

अब मनोहर बाबू जेब में रूपाली का फोटो और जन्मपत्रिका लिए घूमते. अब उन की शर्तें कम होने लगी थीं. स्तर भी घटने लगा था. अब उन्हें रूपाली से कम वेतन वाले वर को स्वीकार करने में भी कोई एतराज नहीं था.

इसी प्रकार 4 साल बीत गए पर कहीं बात नहीं बनती देख मनोहर लाल ने रूपाली के छोटे भाई व बहन के विवाह संपन्न करा दिए. अब रूपाली के लिए वर खोजने की गति भी धीमी पड़ने लगी थी. न जाने क्यों उन्हें लगने लगा था कि रूपाली का विवाह असंभव नहीं पर कठिन अवश्य है.

उस दिन सारा परिवार छुट्टी मनाने के मूड में था. मां वीणा ने रात्रिभोज का उत्तम प्रबंध किया था. मनोहर लाल नई फिल्म की एक सीडी ले आए थे.

फिल्म शुरू ही हुई थी कि दरवाजे की घंटी बजी.

‘‘कौन?’’ मां वीणा ने झुंझलाते हुए दरवाजा खोला तो सामने एक आकर्षक युवक खड़ा था.

‘‘कहिए?’’ मां ने युवक से प्रश्न किया.

‘‘जी, मैं रूपाली का मित्र, 2 दिन पहले ही आस्ट्रेलिया से लौटा हूं.’’

अपना नाम सुनते ही रूपाली दरवाजे की ओर लपकी थी.

‘‘अरे, प्रद्योत तुम? कहां गायब हो गए थे. मैं ने कई मेल भेजे पर सब व्यर्थ.’’

‘‘अब तो मैं स्वयं आ गया हूं मिलने. रूपाली, मेरी नियुक्ति इसी शहर में हो गई है,’’ प्रद्योत का उत्तर था.

कुछ देर बैठने के बाद उस ने जाने की अनुमति मांगी तो मनोहर लाल और वीणा ने उसे रात्रि भोज के लिए रोक लिया.

‘‘कहां रहे इतने दिन? और आज इस तरह अचानक यहां आ टपके?’’ एकांत मिलते ही रूपाली ने आंखें तरेरीं.

‘‘तुम ने खुद ही प्रतीक्षा करने के लिए कहा था. पर अब मैं और प्रतीक्षा नहीं कर सकता इसलिए तुम्हारा हाथ मांगने स्वयं ही चला आया,’’ प्रद्योत बोला तो रूपाली की आंखें डबडबा आईं.

‘‘मेरे मातापिता नहीं मानेंगे,’’ किसी प्रकार उस ने वाक्य पूरा किया.

‘‘मैं ने सब सुन लिया है. हम से पूछे बिना ही तुम ने कैसे सोच लिया कि हम नहीं मानेंगे,’’ दोनों का वार्त्तालाप सुन कर मनोहर लाल बोले थे.

‘‘पता नहीं मेरा वेतन रूपाली के वेतन से अधिक है या कम. हमारी भाषाक्षेत्र सब अलग है. पर मैं आप को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं आप की बेटी को सिरआंखों पर बिठा कर रखूंगा,’’ प्रद्योत ने हाथ जोड़ कर कहा तो मनोहर लाल ने उसे गले लगा लिया.

‘‘मैं भी न जाने किस मृगमरीचिका में भटक रहा था. बहुत देर से समझ में आया कि मन मिले हों तो अन्य किसी वस्तु का कोई महत्त्व नहीं होता,’’ मनोहर लाल बोले.

रूपाली कभी प्रद्योत को तो कभी अपने मातापिता को देख रही थी. उस की आंखों में सैकड़ों इंद्रधनुष झिल- मिला उठे थे.

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