रियल लाइफ में इतनी हॉट है Anupama की ये एक्ट्रेस, डिपंल का निभाती है रोल

Anupama आज के टाइम में सभी का फेवरेट शो बन चुका है घर-घर इस शो की पहचान है इतना ही नहीं, इस सीरियल के स्टार भी काफी हिट है जिन्हे दर्शक खूब प्यार लूटाते है. ऐसे ही अनुपमा को कोसने वाली एक्ट्रेस डिंपल, यानी की निशी सक्सेना दर्शको को खूब पसंद आती है चाहे सीरियल में उनका नेगेटिव रोल ही क्यो ना हो. लेकिन आज हम निशी सक्सेना के बारे में बताएंगे कि वो रियल लाइफ में कितनी हॉट है अनुपमा यानी रूपाली गागुली के कितनी करीब है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Nishi Saxena (@nishisaxenaa)

आपको बता दें, कि टीवी इंडस्ट्री में आने से पहले निशी सक्सेना एक टिकटॉकर हुआ करती थी. टिकटॉक पर निशी सक्सेना के लाखो फॉलोअर्स हुआ करते है. निशी सक्सेना भोपाल की रहने वाली हैं. एक्ट्रेस ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वह अपने होमटाउन भोपाल में एक शूट के लिए गई थीं, तब वहां पर उन्हें ‘अनुपमा’ की टीम का कॉल आया था. उन्हें मेकर्स ने डिंपल का रोल ऑफर किया था. निशी सक्सेना ने ‘अनुपमा’ में रोल मिलने वाली बात किसी को नहीं बताई थी.उन्होंने इस बात का अंदाजा अपने परिवार को भी नहीं दिया था. निशी ने परिवार से छुपकर इस सीरियल का ऑडिशन दिया था.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Nishi Saxena (@nishisaxenaa)

घरवालो से क्यो छुपाया ऑडिशन

निशी सक्सेना ने बताया था कि मीटिंग और मॉक शूट के बाद जब उन्हें ये रोल मिल गया था, वह तब तक चुप रहीं. उन्होंने परिवार को कुछ नहीं बताया। शो की शूटिंग शुरू होने के बाद ही उन्होंने परिवार को इसकी जानकारी दी. निशी ने एक इंटरव्यू में परिवार से ‘अनुपमा’ के ऑफर छुपाने की बात की थी. एक्ट्रेस ने बताया था कि अनुपमा उनके परिवार का फेवरेट सीरियल है. वह नहीं चाहती थीं कि अगर वह ऑडिशन में रिजेक्ट हो जाए तो उनके मां-पापा उदास हो.

रियल लाइफ में हॉट है डिंपल

निशी सक्सेना पूरे सीरियल में रुपाली गांगुली को कोसती नजर आती हैं, लेकिन रियल लाइफ में निशी और रुपाली का बॉन्ड काफी शानदार हैं. दोनों अक्सर पार्टी में फोटोज क्लिक करवाती हैं. निशी सक्सेना सीरियल ‘अनुपमा’ में सूट-सलवार या फिर साड़ी पहने ही दिखती हैं, लेकिन रियल लाइफ में वह काफी बोल्ड हैं. निशी अक्सर पार्टीज मे शॉर्ट ड्रेस में स्पॉट होती है.

हर युवा को जाननी चाहिए कंडोम से जुड़ी ये जानकारियां

मां बनने की खुशी से भला कौन वंचित रहना चाहता है? मगर सही वक्त और सही स्थिति का होना बहुत जरूरी है. सेक्स के दौरान या उसके बाद तमाम सुविधा-असुविधा के बारे में जानकारी रखना बहुत आवश्यक है. तभी एक परिवार सफल व सुखी परिवार बना रह सकता है. यह जिम्मेदारी सिर्फ एक पार्टनर की नहीं बल्कि दोनों की, बराबर की है. युवाओं को अकसर इस संबंध में सही जानकारी नहीं होती. यहां प्रस्तुत है इस संबंध में वैज्ञानिक जानकारी ताकि कई तरह के रोगों और असमय गर्भधारण से बचा जा सके.

कंडोम को हमेशा तवज्जो देना क्यों जरूरी है?

सेक्स हर हाल में शारीरिक संबंध है जो अपने साथ-साथ कई किस्म की बीमारियां भी लिए होता है. जरा सी लापरवाही किसी की पूरी दुनिया बदल सकती है. किसी के जीवन का अंत भी हो सकता है. इसलिए सेक्स के बारे में सोचने के साथ ही कंडोम के बारे में सोचना जरूरी है. क्योंकि इससे ही सुरक्षित सेक्स संभव है. संक्रामक बीमारियों से बचने के लिए कंडोम एक बेहतर विकल्प है.

संक्रामक रोग, असमय प्रेग्नेंसी के बारे में दोनो सोचें

इन सब विषयों के बारे में सोचना सिर्फ महिलाओं की ही जिम्मेदारी नहीं है. दरअसल लोगों की इस पर अपनी-अपनी राय है कि कंडोम, प्रेग्नेंसी आदि यह सब पुरुषों के सोचने का विषय है. वास्तव में संक्रामक रोगों से बचाव और असामयिक प्रेग्नेंसी की समस्या दोनो की ही समस्या है. विशेषतौर पर महिलाओं को इस मामले में मुखर होने की जरूरत है.

कंडोम न मिलने की स्थिति में क्या करना चाहिए?

कंडोम एक ऐसा सुरक्षा कवच है जिसकी तुलना मंे कोई और गर्भनिरोधक नहीं है. हालांकि गर्भनिरोधक कई मौजूद हैं मगर बिना किसी रिस्क फैक्टर के कंडोम का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका कोई दुष्परिणाम नहीं होता. लेकिन कोई ऐसी स्थिति आ जाए जब सेक्स करने के दौरान कंडोम न हो तो क्या किया जाए? बाजार में कई दूसरे गर्भनिरोधक भी आपके काम आ सकते हैं. ध्यान रखें यह गर्भनिरोधक सिर्फ गर्भ ठहरने की आशंका को ही सुनिश्चित करते हैं. इनमें किसी किस्म की दूसरी सुरक्षा नहीं होती.

क्या पहली बार सेक्स में ही कोई महिला गर्भवती हो सकती है?

यह एक ऐसा सवाल है जिसका कोई जवाब नहीं है. इसलिए युवाओं का यह जानना बहुत जरूरी है कि चाहे आप पहली बार सेक्स कर रहे हों या दसवीं बार, कंडोम का इस्तेमाल करना न भूलें. हालांकि यह थोड़ी परेशान करने वाली बात लग सकती है कि पहली बार सेक्स में भी कंडोम का इस्तेमाल किया जाए? लेकिन हकीकत यही है कि अगर अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहते हैं तो कंडोम का उपयोग बिना झिझक करें.

कंडोम कहां से खरीदे जा सकते हैं? क्या कंडोम अलग-अलग प्रकार के भी होते हैं?

कंडोम कोई ऐसी अंजान चीज नहीं है जिसे खरीदने के लिए मुश्किल सामने आती है. यह आपको कहीं भी आसानी से उपलब्ध हो सकता है. कैमिस्ट की दुकान से इसे आसानी से खरीदा जा सकता है. जब आप सेक्स से नहीं शरमाते तो किसी के सामने एक शब्द ‘कंडोम’ कहने में शरम कैसी?

अब जहां तक बात है इसके प्रकार की तो विभिन्न प्रकार के कंडोम मार्केट में उपलब्ध हैं. अपनी सहूलियत के अनुसार जो पसंद हो, उसका इस्तेमाल कर सकते हैं. उनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

मैटीरियलः ज्यादातर कंडोम लैटेक्स और पाॅलीयूरीथेन से बने होते हैं. लैटेक्स के द्वारा बनाए गए कंडोम ज्यादा मजबूत होते हैं. प्रेग्नेंसी और संक्रामक रोगों से दूसरों के मुकाबले यह ज्यादा सुरक्षा प्रदान करते हंै.

साइजः बाजार में अलग-अलग लम्बाई का कंडोम उपलब्ध होता है. कोई छोटे होते हैं, कई ज्यादा लम्बे होते हैं तो कई की चैड़ाई ज्यादा होती है तो कुछ पतले होते हैं. अगर पैकेट में लिखा है ‘लार्ज’ अथवा ‘स्माॅल’ इसका मतलब उसकी लम्बाई से नहीं बल्कि चैड़ाई से है. कंडोम खरीदते वक्त बिना शरमाएं अपने शिश्न के साइज अनुसार ही कंडोम खरीदें.

लुब्रीकेटः लुब्रीकेट यानी चिकनाई. कुछ कंडोम ऐसे भी होते हैं जिसमे जरा भी चिकनाहट नहीं होती. जबकि कुछ में सिलिकन बेस्ड लुब्रीकेंट्स होते हैं तो कुछ में वाॅटर बेस्ड लुब्रीकेंट्स होते हैं.

कलर्डः लैटेक्स या कंडोम का वास्तविक रंग क्रीमी व्हाईट होता है. लेकिन बाजार में कंडोम अलग-अलग रंगों में भी उपलब्ध हैं.

फ्लेवर्डः कुछ सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन, ओरल सेक्स की वजह से भी फैलते हैं. सो, अगर ओरल सेक्स के दौरान भी कंडोम का उपयोग किया जाए तो अच्छा है. कई दफा लोगों को लैटेक्स की गंध और उसका स्वाद पसंद नहीं आता. इसलिए फ्लेवर्ड कंडोम बेहतर विकल्प हैं.

कंडोम कितना कारगर है?

वास्तव में यह निर्भर करता है उपयोग करने वाले पर. अगर कंडोम का उपयोग सही मायने में किया जाए तो 94प्रतिशत से लेकर 97प्रतिशत तक तमाम समस्याओं से निजात दिलाता है. प्रेग्नेंसी या संक्रामक रोग, सभी से निजात दिलाने में यह कारगर साबित हुआ है. एचआईवी से तो यह लगभग 100प्रतिशत तक राहत देता है. कुछ लोग मानते हैं कि कुछ वायरस हैं जिनके सामने कंडोम असफल है, जबकि ऐसा नहीं है.

क्या दो कंडोम का इस्तेमाल एक कंडोम के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद है?

नहीं. ऐसा बिल्कुल नहीं है. दो कंडोम पहनकर सेक्स करने से कई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं. मसलन दोनों कंडोम घिसने के कारण फट सकते हैं. साथ ही यह किसी भी व्यक्ति के लिए सहज नहीं है. दो कंडोम पहनकर सेक्स करने में असुविधा होती है.

फीमेल कंडोम क्या है?

मेल कंडोम की ही तरह बाजार में फीमेल कंडोम भी मौजूद है. फीमेल कंडोम एक पाउच की तरह होता है. इसे वैजाइना में फिट किया जाता है.

कंडोम कैसे पहना जाता है?

ध्यान रखें कंडोम का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है. उससे भी जरूरी है उसका सही से इस्तेमाल करना. शिश्न और योनि के बीच संपर्क होने से पहले ही कंडोम को लगाया जाना चाहिए. अन्यथा प्रेग्नेंसी या संक्रामक रोगों से बचना मुश्किल हो सकता है.

पुरुष को कंडोम तब लगाना चाहिए जब उसका शिश्न लम्बा और खड़ा हो जाए. कंडोम को खोलते समय दांत का उपयोग न करें; क्योंकि हो सकता है कि आपके दांतों की वजह से कंडोम में दरार पड़ जाए और वह आपको न दिखे.

अगर कंडोम फट जाए?

अगर सेक्स के दौरान कंडोम फट जाए तो तुरंत वहीं सेक्स प्रक्रिया रोक दें और नए कंडोम का इस्तेमाल करें. कई दफा ऐसा होता है कि आपके महसूस हो रहा है कि कंडोम फट गया है, जबकि ऐसा नहीं होता. कई बार यह मात्र एक वहम होता है. मगर बेहतर है कि रह-रहकर कंडोम को चेक करते रहें. अगर सेक्स के दौरान लगे कि आपका वीर्य कहीं न कहीं से निकलकर योनि के अंदर प्रवेश कर चुका है तो बेहतर है तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करें या किसी प्रिकाॅशनरी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करें. इसी से बचाव हो सकता है.

क्या ओरल सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल जरूरी है?

हां, कई डिजीज ऐसे होते हैं जो ओरल सेक्स से शरीर के अंदर प्रवेश कर सकते हैं. इसलिए कंडोम का उपयोग अवश्य करें.

सेक्स करना कब रोकना चाहिए?

पुरुषों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि जब वह अपना शिश्न गुदा से या योनि से बाहर निकालने वाला हो तो उसे कंडोम को पकड़ लेना चाहिए. इसे आहिस्ता से निकालने के बाद सावधानीपूर्वक किसी सही जगह पर फेकना चाहिए. कंडोम को यूज करने के बाद टायलेट में न फेंके और न ही यादगार के रूप मेें अपने कमरे में सजाने का सामान बनाएं. उसे डस्टबिन में ही फेंके.

सोने से पहले अगर पी लेंगे चाय तो होंगे ये पांच बड़े फायदे

चाय के बारे में अक्सर आपने सुना होगा कि ये नुकसान देती है ज्यादा चाय आपके शरीर में गैस बनाती है लेकिन अगर आप ये सुने की चाय पीने बडे फायदे भी होते है तो ज़रुर ही आप अपना सर पकड़ लेंगे.आज हम इस आर्टिकल में सोने से पहले चाय पीने के फायदे बताएंगे. जिससे आप जानकर चाय पीने से कतराएंगे नहीं.

-अगर आप तनाव के दौर से गुजर रहे हैं. ऑफिस में स्ट्रेस हो या घर पर तनाव हो और उसका असर अगर आपकी नींद पर है तो सोने से पहले चाय का सेवन कर सकते हैं

-हर एक शख्स की चाहत होती है कि उसे बेहतरीन नींद आए. अगर आप नींद की समस्या से दो चार हो रहे हों तो चाय के जरिए उस परेशानी से पार पा सकते हैं.

-सोने से पहले  चाय पीने का फायदा इम्यून सिस्टम को भी होता है, रोगों से लड़ने की क्षमता में इजाफा होता है.इससे आपको कोल्ड, कफ या हल्के पेट दर्द से राहत मिल सकती है.

-सोने से पहले चाय पीने का असर त्वचा की चमक और बालों पर भी देखा जा सकता है. चमकती त्वचा और बाल घने होते हैं, बालों में चमक भी आती है

-आप बबूने के फूल की चाय, लैवेंडर चाय और पेपरमिंट चाय सोने से पहले इस्तेमाल में ला सकते हैं. इनके जरिए ना सिर्फ प्रतिरोधक क्षमता में विकास होता है बल्कि दूसरी समस्याओं से भी आराम मिलता है.

मेरा एक्स अब मेरे साथ एक बार फिर रिलेशनशिप में आना चाहता है, मैं क्या करूं?

सवाल-

मेरा एक्स अब मेरे साथ एक बार फिर रिलेशनशिप में आना चाहता है. उस का कहना है कि वह मुझ से कभी मूव औन नहीं कर पाया और न ही मुझे भूल पाया है. वहीं, मैं तो कब की उस से मूव औन कर चुकी हूं, यहां तक कि कुछ महीनों पहले एक लड़के को डेट भी किया था. फिलहाल मैं सिंगल हूं.

हम दोनों के ब्रेकअप की वजह उस का मुझे ले कर हमेशा कन्फ्यूज्ड रहना था. क्या पता अब वह क्लियर हो गया हो. क्या यह सही रहेगा कि मैं सिंगल तो हूं ही तो अपने एक्स के साथ ही रिलेशनशिप में आ जाऊं?

जवाब-

अगर आप रिलेशनशिप में इसलिए आना चाहती होतीं कि आप भी उस से उतना ही प्यार करती हैं जितना वह करता है तो मेरा सुझाव होता कि बिलकुल आइए, रिलेशनशिप में आखिर बुराई क्या है. लेकिन, आप के मन में अब अपने एक्स के लिए कोई प्यार नहीं है और शायद रिस्पैक्ट भी नहीं है तभी तो आप बिना फीलिंग्स उस के साथ रिलेशनशिप में आना चाहती हैं.

आप जानती हैं कि वह आप से प्यार करता है और आप अब नहीं करतीं. हो सकता है कि उस का कन्फ्यूजन आप को ले कर खत्म हो गया हो लेकिन क्या अब आप कन्फ्यूज्ड नहीं हैं? यह तो बिल्कुल हिस्टरी रिपीट करने वाली बात हो गई. तब शायद आप को तकलीफ हुई थी, अब आप अपने एक्स को तकलीफ देंगी.

वैसे भी एक्स के साथ एक बार फिर किसी रिश्ते में बंधने से पहले सोच लेना चाहिए. यह बौलीवुड या टीवी सीरियल नहीं है, असल जीवन बेहद उलझा हुआ होता है. जब तक मन से आप बिलकुल तैयार न हों, फीलिंग्स एक सी न हों, तब तक एक्स से दूरी बनाए रखने में ही फायदा है. बिना बात खुद हर्ट होना या उसे हर्ट करना बेतुका है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें-  सरस सलिल-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

डायन के नाम पर हत्याएं : दर्द की 9 सच्ची घटनाएं

राजस्थान में डायन के नाम पर गांवदेहात की औरतों की लगातार हो रही दर्दभरी हत्याओं से अंधविश्वास पर लगाम लगाने में पुलिस प्रशासन की नाकामी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

प्रदेश में अंधविश्वास व अंधश्रद्धा के नाम पर हर साल दर्जनों जानें चली जाती हैं, पर सरकार चुप है. हाईकोर्ट के दखल से पुलिस प्रशासन में फौरी तौर पर ही थोड़ी हरकत दिखाई दी है.

दर्द की 9 सच्ची घटनाएं

उदलपुरा, भीलवाड़ा. करेड़ा तहसील के उदलपुरा गांव की गीता बलाई की जिंदगी उसी के परिवार वालों ने छीन ली. पति के कम दिमाग होने के चलते वह घर और खेती का सारा काम संभाल रही थी, जो शायद उस की जेठानी को पसंद नहीं आया.

गीता पर डायन होने का आरोप लगा कर वह उसे घनोप माता ले गई. यहां नवरात्र में उसे 11 दिनों तक भूखाप्यासा रखा गया.

गीता कुएं पर पानी पीने गई तो उसे धक्का दे कर कुएं में धकेल दिया गया. उस सूखे कुएं में एक पेड़ पर उस की लाश 10 दिनों तक अटकी पड़ी रही.

जेठानी ने गांव पहुंच कर गीता बलाई को चरित्रहीन बताते हुए यह कह दिया कि वह तो कहीं भाग गई है. गीता के भाई बालू ने उस की गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया लेकिन पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की.

जेठानी ने पंचायत में उसे मारने की बात कबूल ली, लेकिन पुलिस के सामने वह मुकर गई. पुलिस उस के खिलाफ कोई सुबूत नहीं जुटा पाई.

बालवास, भीलवाड़ा. यह घटना भी भीलवाड़ा जिले के बालवास गांव की है. नंदू देवी का परिवार पिछले 5 साल से गांव के बाहर जंगल में रहने को मजबूर है. पड़ोसी डालू का बेटा क्या बीमार हुआ, एक ओझा जिसे जादूटोने से मुक्ति दिलाने का देवता माना जाता है, ने इस का इलजाम गरीब नंदू देवी के सिर रख दिया. उस के बाद तो पूरे गांव ने उसे बुरी तरह पीटा.

अपने 3 बेटों के साथ अगर नंदू देवी किसी तरह जंगल में भाग कर नहीं जाती, तो शायद उसे मौत के घाट उतार दिया जाता.

जब भी नंदू देवी किसी अजनबी को देखती है तो हाथ जोड़ कर बस एक ही सवाल करती है, ‘‘मैं डायन होती तो क्या आज मेरा खुद का परिवार जिंदा रहता?’’

पुर रोड, भीलवाड़ा. भीलवाड़ा शहर के पुर रोड पर भोली 12 साल से अकेली रह रही थी. समाज के कुछ लोगों ने डायन बता कर उसे सताना शुरू किया. उस के परिवार ने 5 बार पंचायत बुलाई लेकिन 3 लाख रुपए खर्च करने के बाद भी पंच पटेलों ने उसे डायन की बदनामी से आजाद नहीं किया.

गांव की 5 औरतें भोली का साथ देने आईं, तो उन्हें भी डायन बता दिया गया. पढ़ीलिखी बहू हेमलता ने साथ दिया तो मायके वालों ने भी उस से नाता तोड़ लिया.

आज भोली अपने पति प्याराचंद के साथ अलग मकान में रहती है. पुलिस इस मामले में चुप्पी साधे हुए है.

बोरड़ागांव, भीलवाड़ा. बोरड़ागांव की 96 साल की गुलाबीबाई की दास्तां बहुत ही दर्दनाक है. पति की मौत के बाद उस के परिवार वालों ने उसे डायन बता कर दरबदर कर दिया.

गुलाबीबाई को डायन बताने वाले लोगों ने उस की 6 बीघा जमीन और पुश्तैनी मकान पर भी कब्जा कर लिया. 11 साल पहले गुलाबीबाई के भतीजों ने उसे पीटपीट कर गांव से बाहर निकाल दिया.

गुलाबीबाई के लिए कानूनी कार्यवाही में मदद कर रहे दूर के एक रिश्तदार बंसी का पुश्तैनी मकान बिक चुका है. मामला दर्ज होने के बावजूद पुलिस प्रशासन ने कभी भी गुलाबीबाई की हालत जानने की कोशिश नहीं की.

सेमलाट, भीलवाड़ा. ससुराल वालों के जोरजुल्म की शिकार पारसी पिछले 2 साल से पिता के घर में रह रही है. उस की शादी रायपुर के तिलेश्वर गांव के मुकेश से हुई थी. घर में 2 बकरियां क्या मरीं कि पारसी को डायन बना दिया गया. पीटपीट कर रात में ही उसे घर से बाहर निकाल दिया गया. परिवार ने थाने में मामला दर्ज कराया, पर पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की.

अगरपुरा, भीलवाड़ा. भीलवाड़ा जिले की सुहाणा तहसील के अगरपुरा गांव की विधवा रामगणी के परिवार पर डायन के नाम पर काफी जोरजुल्म हुआ. रामगणी के पति और 2 बेटों की मौत के बाद उस की पुश्तैनी जमीन हथियाने के लिए पड़ोसियों ने उस के साथ पूरे परिवार की औरतों को डायन ऐलान कर दिया.

रामगणी के बेटे उदयलाल ने थाने में मामला दर्ज कराया, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई. दबंग लोगों ने उस के पूरे परिवार को गांव से अलगथलग कर दिया.

टाणका गांव, राजसमंद. डायन करार दे दी गई नोजीबाई के जले हाथ आज भी उस पर हुए जुल्म की कहानी बयां करते हैं. डायन बता कर गांव के दबंगों ने उसे गरम सलाखों से दागा, जिस के निशान आज भी मौजूद हैं.

गांव के एक दबंग परिवार में एक मौत हुई और आरोप नोजीबाई पर लगा दिया गया. फिर जोरजुल्म का सिलसिला चल पड़ा. उस के हाथों को अंगारों से जलाया गया. पुलिस में शिकायत की गई, पर कार्यवाही जीरो रही.

थाली का तलागांव, राजसमंद. राजसमंद जिले के थाली का तलागांव की केशीबाई ने 3 साल से खुद को घर में ही कैद कर रखा है. 8 नवंबर, 2014 को पूरे गांव ने उसे डायन बता कर नंगा कर के गधे पर बिठा कर 3 गांवों में घुमाया था. वह रोतीगिड़गिड़ाती रही, लेकिन वहशी भीड़ उस का दर्द सुनने की जगह उस पर पत्थर बरसाती रही. उसे मरा हुआ समझ कर भीड़ रास्ते में ही फेंक गई. बाद में किसी ने अस्पताल पहुंचाया.

केशीबाई की जिंदगी तो बच गई, लेकिन उस घटना का सदमा दिल पर ऐसा लगा कि 3 साल में उस ने घर से बाहर कदम नहीं रखा. गांव में किसी आदमी ने फांसी लगा ली, तो उसे डायन बता दिया गया था. पुलिस तमाशबीन बनी रही.

देवलगांव, डूगंरपुर. एक भोपे के आदेश पर डूंगरपुर जिले के देवलगांव में 4 औरतों को डायन करार दे दिया गया. मार्च, 2016 में गांव की काली, कमला, बसंती और मीरा को उन के ही परिवार के लोगों ने डायन बता कर सताया. पंचायत और पुलिस तमाशबीन बनी रही.

भोपों के आदेश पर दर्जनों औरतों को डायन बता कर सताया जाता है. इन्हीं भोपों ने फरमान सुना कर भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ व राजसमंद जिलों में पिछले कुछ सालों में 105 से ज्यादा औरतों को डायन बना दिया. 22 औरतों को गांव से बाहर निकाल दिया और 8 औरतों को पीटपीट कर मार डाला गया.

उधर बवाल बढ़ने पर राजस्थान हाईकोर्ट और महिला आयोग ने संज्ञान लिया. कोर्ट ने भोपों के खिलाफ कार्यवाही की रिपोर्ट मांगी है. साथ ही, निर्देश दिए कि भोपें किसी को डायन न बताएं.

इस आदेश व जांचपड़ताल का पलीता तब लगा जब पिछले दिनों उदयपुर जिले के बिचला फुला गांव में 70 साला चंपा को डायन बता कर पीटपीट कर उस की हत्या कर दी. भोपों इस चंपा के पड़ोसी शंकर लाल मीणा के परिवार ने इस काम को अंजाम दिया. यह आदमी अपने बीमार बेटे को ठीक करना चाहता था. पुलिस ने हर मामले की तरह इस की भी जांच शुरू कर दी.

क्या है कानून

राजस्थान डायन प्रताड़ना निवारण अधिनियम की धारा 6(1) के अनुसार, खुद को भोपों या किसी अलौकिक या जादुई शक्ति का स्वामी बताना अपराध है. इस के लिए 3 साल की सजा देने का कानून है.

डायन प्रताड़ना निवारण अधिनियम की धारा 6(3) के मुताबिक, कोई भी शख्स किसी को डायन के कहर से छुड़ाने के लिए कोई पूजापाठ करता है, तो उसे 3 से

7 साल की सजा देने का कानून है. डायन प्रताड़ना निवारण अधिनियम की धारा 7 के मुताबिक, डायन के नाम पर जोरजुल्म करने से मौत होने पर इस से जुड़े हर शख्स को 7 साल से ताउम्र कैद की सजा देने का कानून है.

डायन के नाम पर किसी को सताने के खिलाफ कानून बने 2 साल हो गए हैं, मगर अब तक 50 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. इस के बावजूद न तो भोपों के खिलाफ कोई कार्यवाही हो रही है और न ही डायन के नाम पर जोरजुल्म कर चुके अपराधियों के खिलाफ. कानून को ठेंगा दिखा कर पूरे समाज में अंधविश्वास का जाल फैलाया जा रहा है. इस के बावजूद पूरा प्रशासन, पुलिस, राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन खामोश हैं.

Raksha bandhan: अब हमारी बारी है-भाइयों ने बनाया बहन को सफल

Story in Hindi

तहखाने: क्या अंशी दोहरे तहखाने से आजाद हो पाई? – भाग 1

रंगों को मुट्ठी में भर कर झुके हुए आसमान को पाना मुश्किल है क्या? या बदरंग चित्रों की कहानी दोहराव के लिए परिपक्व है? इन चित्रों की दहशत अब उस के मन की मेड़ों से फिसलने लगी है.

दौड़ते विचारों के कालखंड अपनी जगह पाने को अधीर हो डरा रहे हैं कि अंशी ने आईने को अपनी तरफ मोड़ लिया है. पूरी ताकत से वह उस कालखंड़ के टुकड़े करना चाहती है. अब चेहरा साफ दिखाई दे रहा है.साहस और आत्मविश्वास से ओतप्रोत. खुद को भरपूर निहार कर जीन्स को ठीक किया है. नैट के टौप के अंदर पहनी स्पैगिटी को चैक किया.

ठुड्डी को गले से लगा कर भीतर की तरफ झांका. सधे हुए उभारों और कसाब में रत्तीभर ढील की गुंजाइश नहीं है. संतुष्टि के पांव पसारते ही होंठों को सीटीनुमा आकृति में मोड़ कर सीधा किया.

लिपिस्टिक का रंग कपड़ों से मेल खा रहा है. ‘ वो ‘ के आकार में आईब्रो फैलाने और सिकोड़ने की कोई खास वजह नहीं है, फिर भी बेवजह किए गए कामों की भी वजह हुआ करती है.

कलाई पर गोल्डन स्टोन की घड़ी को कसते हुए अंशी ने पैर से ड्रायर खोल कर सैंडिल निकाले, उन्हें पहनने का असफल प्रयास जानबूझ कर किया गया. पहनने तक ये प्रयास जारी रहा. इस के पीछे जो भी वजह रही हो, मगर पुख्ता वजह तो व्यस्तता प्रदर्शित करना ही है.

सुरररर… सुररररर कर बौडी
स्प्रे कंधों के नीचे, बांहों पर छिड़का और फिर उस के धुएं से ऊपर से नीचे तक नहा ली है.

इस बार आईने ने खुद उसे निहारा, “गजब, क्या लग रही हो यार?”

सामने लगा ड्रेसिंग टेबल का आईना बुदबुदा उठा… जो भी हो, ऐसा तो होना ही था.

अंशी एक मौडर्न गर्ल है. मौडर्निटी का हर गुण उस के भीतर समाया हुआ है, यही जरूरी है. छोटे कपड़े, परंपरावादी सोच से इतर खुले विचार, मनपसंद कामों की सक्रियता, दबाव के बगैर जिंदगी को जीना और सब से महत्वपूर्ण खुद को पसंद करना, हर बौल पर छक्का जड़ने की काबिलीयत. बौस तो क्या, पूरा स्टाफ चारों खाने चित्त.

खुद की आइडियल खुद,दफ्तर का आकर्षण और दूसरा खिताब झांसी की रानी का. किसी की हिम्मत नहीं कि अंशी को उस की मरजी के बगैर उसे शाब्दिक या अस्वीकारिए नजरिए से छू भी ले. हां, जब मन करे तो वह छू सकती है, खरौंच सकती है सदियों से पड़ी दिमाग में धूल की परतों को.

बोलने की नजाकत और चाल की अदायगी में माहिर हो कर आधुनिकता की सीढ़ियों पर चढ़ना बेहद
आसान है. हालात मुट्ठी में करना कौन सा बड़ा काम है? अपनी औकात का फंदा गले में लगा कर क्यों
मरती हैं औरतें? ढील देती हुई बेचारगी को चौतरफा से घेरे रहती हैं, ताकि ये उन के हाथ में रहे और वह
जूझती रहें ताउम्र अपने ही बुने फंदों में.

औरत बेचारी, अबला सब कोरी बकवास. सब छलावा है जंग में उतरने की पीड़ा से बचने का. और फिर कौन सा बच पाती हैं? एक पूरा तानेबानों का दरिया उन के इर्दगिर्द फैला होता है, जिस में फंसी निकलने की झटपटाहट ताउम्र जीने देती है उन्हें.

वाह री औरत… कौनसी मिट्टी की बनी है रे तू? शिकायत है तुझे उस समाज से, जिस की सृजनकर्ता है तू और उस की डोर को तू ने ही ढीली छोड़ कर अपनी ऊंचाइयों में उड़ने दिया और बैठीबैठी देखती रही हवाओं का रुख.

I&B ने सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज (ओटीटी) पुरस्कार के पहले संस्करण के लिए प्रविष्टियां जमा करने की तारीख आगे बढ़ाई

नई दिल्ली: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज (ओटीटी) पुरस्कार के पहले संस्करण की प्रविष्टियों को ऑनलाइन जमा करने की अंतिम तिथि 25 अगस्त से बढ़ाकर 4 सितंबर 2023 शाम 6 बजे तक कर दिया है. हालांकि सीरीज की हार्डकॉपी 12 सितंबर 2023 तक जमा की जा सकती है.
12 सितम्बर, 2023 को अवकाश घोषित होने की स्थिति में, अगले कार्य दिवस को आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि माना जाएगा.
प्रविष्टियां जमा करने की अंतिम तारीख आगे बढ़ाने का निर्णय मंत्रालय द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिया गया है कि अधिक से अधिक संख्या में वेब सीरीज इन पुरस्कारों में भाग ले सकें. इन पुरस्कारों का उद्देश्य ओटीटी प्लेटफॉर्म की सृजनात्मक क्षमता को पहचानना है जो कि पिछले दो वर्षों के दौरान कई गुना बढ़ गई है.
मनोरंजन उद्योग की प्रतिष्ठित हस्तियों वाली एक जूरी, सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज का चयन करेगी. विजेता को 54वें भारत अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रमाण पत्र के साथ नकद पुरस्कार के रूप में 10 लाख रुपये से सम्मानित किया जाएगा.
पुरस्कार का पाने के लिए, वेब सीरीज का निर्माण मूल रूप से किसी भी भारतीय भाषा में होना चाहिए. सीरीज मूल रचना पर आधारित होनी चाहिए जो कमिशन्ड या प्रोड्यूस्ड की गई हो. इसके अतिरिक्त, श्रृंखला को केवल ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जारी करने के उद्देश्य से सह-निर्मित, लाइसेंस प्राप्त या अधिग्रहित होना चाहिए.
साथ ही साथ, पुरस्कार के पात्र होने के लिए, प्रविष्टि के सभी एपिसोडों (वेब श्रृंखला/सीज़न) को 1 जनवरी, 2022 से 31 दिसंबर, 2022 तक एक ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ भी हो जाना चाहिए.
पुरस्कारों के लिए पात्रता का अधिक विवरण सूचना और प्रसारण मंत्रालय, राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम और आईएफएफआई https://bestwebseriesaward.com/ वेबसाइटों पर उपलब्ध है. पुरस्कार के नियम और अधिनियम को यहां से प्राप्त किया जा सकता है.

63 की उम्र में भी इतनी हॉट सलमान खान की ये Ex-Girlfriend, तस्वीर देख होश उड़ जाएगें

सलमान खान नाम कई एक्ट्रेस के साथ जुड़ चुका है ऐसे में से एक नाम संगीता बिजलानी है जो इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई है जिनके चर्चे जोरो-शोरो से हो रहे है. एक्ट्रेस संगीता बिजलानी हाल ही में एक इवेंट में पहुंची जहां उनकी हॉट ड्रेस ने उनपर चार चांद लगा दिए. देखने वाले उन्हे 63 साल की नहीं समझ रहे थे. बल्कि 26 साल की समझ रहे थे. संगीता बिजलानी के फैन उनकी फोटोज पर जमकर कमेंट करते दिख रहे है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)

आपको बता दें, कि संगीता बिजलानी एक इवेंट में पहुंची थी, जहां उनके फैन उन्हे देख हैरान हो गए थे. वही मीडिया उन्हे देख काफी एक्टिव हो गई थी.सभी संगीता की फोटोड खीचंने लगे. अब उनकी यही तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है. लोग इन फोटोज पर जमकर कमेंट कर रहे है. संगीता बिजलानी ने डीप नेक शिमरी ड्रेस पहनी हुई है. जिसमें वह बेहद ही हॉट नजर आ रही है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Sangeeta Bijlani (@sangeetabijlani9)

संगीता बिजलानी का नाम सलमान खान के साथ जुड़ चुका है.यंग ऐज में संगीता बिजलानी और सलमान खान एक-दूसरे से प्यार किया करते थे.दोनों ने शादी करने का फैसला भी किया था. लेकिन दोनों ने का रिश्ता शादी तक नहीं पहुंच पाया. हालांकि अब संगीता बिजलानी को यू देख सबको उनके पुराने दिन याद आ गए. और उनकी तस्वीरों पर जमकर कमेंट करने लगे. संगीता बिजलानी को लेकर एक फैन ने लिखा है, ‘ओल्ड इज गोल्ड.’ एक फैन ने लिखा है, ‘संगीता बिजलानी के लिए उम्र सिर्फ एक नंबर है. बता दें, सलमान खान और संगीता बिजलानी आज भी अच्छे दोस्त है उनकी बॉन्डिंग देखने वाली होती है.

 

देर रात पार्टी में स्पॉट हुए पलक तिवारी और इब्राहिम अली खान, मीडिया ने किया कैप्चर

पलक तिवारी अक्सर ही अपनी फोटोज को लेकर सोशल मीडिया पर छाई रहती है. वह हमेशा ही मीडिया की लाइमलाइट में बनीं रहती है कभी अपने अफेयर को लेकर तो कभी फिल्मो में डेब्यू को लेकर. ऐसा ही इन दिनों एक बार फिर पलक तिवारी को इब्राहिम अली खान के साथ स्पॉट किया गया. जहां दोनों एक ही पार्टी में शामिल हुए थे. देखें उनकी तस्वीरें.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)

आपको बता दें, कि पलक तिवारी इस पार्टी में अपनी दोस्त के साथ पहुंची थी. इन फोटोज में पलक तिवारी डीपनेक ड्रेस पहने दिखाई दीं. पलक तिवारी की ये ड्रेस आते ही छा गई. पलक तिवारी की ये बोल्ड ड्रेस लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच रही है. पलक तिवारी की ड्रेस की फैंस तारीफ करते दिखे.इस पार्टी में पलक और इब्राहिम दोनों साथ दिखाई दिए. जिसके बाद से दोनों के अफेयर की चर्चा ने जो पकड़ लिया है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Palak Tiwari (@palaktiwarii)

इब्राहिम अली खान अपने इस नए लुक में बेहद हैंडसम लग रहे थे. इब्राहिम अली खान का ये लुक लोगों को काफी पसंद आया. वही पलक तिवारी को भी लोग खूब पसंद करते है उनके स्टाइल की सभी जगह तारीफ होती है. बता दें, किसी का भाई किसी जान से पलक ने बॉलीवुड में डेब्यू किया है जहां उनकी एक्टिंग को काफी पसंद किया गया है. अब देखना ये होगा कि दोनों के अफेयर की चर्चा में कितनी सच्चाई है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें