लेखक- मधु शर्मा कटिहा
अगले दिन सुबह से ही प्रेमा को हिदायतें देते हुए वह सारे बंगले में घूम रही थी. आर्यन मोबाइल में लगा हुआ था. दोस्तों के बधाई संदेशों का जवाब देते हुए कुछ की मांग पर विवाह के फोटो भी भेज रहा था. वान्या को प्रेमा के साथ घुलतामिलता देख उसे एक सुखद एहसास हो रहा था.
इतना विशाल बंगला वान्या ने पहले कभी नहीं देखा था. जब 2 दिन पहले उस ने बंगले में इधरउधर खड़े हो कर खींची अपनी कुछ तसवीरें सहेलियों को भेजी थीं तो वे आश्चर्यचकित रह गईं थीं. उसे ‘किले की महारानी’ संबोधित करते हुए मैसेजेस कर वे रश्क कर रहीं थी. इतने बड़े बंगले का मालिक आर्यन आखिर उस जैसी मध्यवर्गीय से संबंध जोड़ने को क्यों राजी हो गया? और तो और कोरोना के बहाने शादी की जल्दबाजी भी की उस ने.
वान्या का मन बेहद अशांत था. प्रेमा के साथसाथ घर में घूमते हुए लगभग 2 घंटे हो चुके थे. रहस्यमयी निगाहों से वह घर को टटोल रही थी. बैडरूम के पास वाले एक कमरे में चंबा की सुप्रसिद्ध कशीदाकारी ‘नीडल पेंटिंग’ से कढ़ी हुई हीररांका की खूबसूरत वौल हैंगिंग में उसे आर्यन और अपनी सौतन दिख रही थी. पहली बार लौबी में घुसते ही दीवार पर टंगी मौडर्न आर्ट की जिस पेंटिंग के लाल, नारंगी रंग उसे रोमांटिक लग रहे थे, वही अब शंका के फनों में बदल उसे डंक मार रहे थे. बैडरूम में सजी कामिलिप्त युगल की प्रतिमा, जिसे देख परसों वह आर्यन से लिपट गई थी आज आंखों में खटक रही थी. ‘क्या कोई अविवाहित ऐसा सामान सजाने की बात सोच सकता है? शादी तो यों हुई कि चट मंगनी पट ब्याह, ऐसे में भी आर्यन को ऐसी पेंटिंग खरीद कर सजाने के लिए समय मिल गया… हैरत है.’ घर की एकएक वस्तु आज उसे काटने को दौड़ रही थी. ‘कैसा बेकार सा है यह मनहूस घर’ वह बुदबुदा उठी.
लगभग सारे घर की सफाई हो चुकी थी. केवल एक ही कमरा बचा था, जो अन्य कमरों से थोड़ा अलग, ऊंचाई पर बना था. पहाड़ के उस भाग को मकान बनाते समय शायद जानबूझ कर समतल नहीं किया गया होगा. बाहर से ही छत से थोड़ा नीचे और बाकी मकान से ऊपर उस कमरे को देख वान्या बहुत प्रभावित हुई थी. प्रेमा का कहना था कि उस बंद कमरे में कोई आताजाता नहीं इसलिए साफसफाई की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन वान्या तो आज पूरा घर छान मारना चाहती थी. उस के जोर देने पर प्रेमा झाड़ू, डस्टर और चाबी ले कर कमे की ओर चल दी. लकड़ी की कलात्मक चौड़ी लेकिन कम ऊंचाई वाली सीढ़ी पर चढ़ते हुए वे कमरे तक पहुंच गए. प्रेमा ने दरवाजे पर लटके पीतल के ताले को खोला और दोनों अंदर आ गए.
ये भी पढ़ें- मजाक: म से मछली म से मगरमच्छ
कमरे में अखरोट की लकड़ी से बनी एक टेबल और लैदर की कुरसी रखी थी. काले रंग की वह कुरसी किसी भी दिशा में घूम सकती थी. पास ही ऊंचे पुराने ढंग के लकड़ी के पलंग पर बादामी रंग की याक के फर से बनी बहुत मुलायम चादर बिछी थी. कुछ फासले पर रखी एक आराम कुरसी और कपड़े से ढके प्यानों को देख वान्या को वह कमरा रहस्य से भरा हुआ लगने लगा. दीवार पर घने जंगल की खूबसूरत पेंटिंग लगी थी. वान्या पेंटिंग को देख ही रही थी कि दीवार के रंग का एक दरवाजा दिखाई दिया. ‘कमरे के अंदर एक और कमरा’ उस का दिमाग चकरा गया. तेजी से आगे बढ़ कर उस ने दरवाजे को धक्का दे दिया. चर्र की आवाज करता हुआ दरवाजा खुल गया.
छोटा सा वह कमरा खिलौनों से भरा हुआ था, उन में अधिकतर सौफ्ट टौयज थे.
पास ही आबनूस का बना एक वार्डरोब था, वान्या ने अचंभित हो कर वार्डरोब खोलने का प्रयास किया, लेकिन वह खुल नहीं रहा था. पीतल के हैंडल को कस कर पकड़ जब उस ने अपना पूरा दम लगाया तो वार्डरोब झटके से खुल गया और तेज धक्का लगने के कारण अंदर से कुछ तसवीरें निकल कर गिर गईं. वान्या ने झुक कर एक फोटो उठाया तो सन्न रह गई. आर्यन एक विदेशी लड़की के साथ हाथों में दस्ताने पहने बेहद खुश दिख रहा था. बदहवास सी वह अन्य तसवीरें उठा ही रही थी कि प्रेमा की आवाज सुनाई दी, ‘‘मेम साब, इस कमरे में क्या कर रहीं हैं आप?’’
ये भी पढ़ें- हास्य कहानी: बिटिया और मैं
वान्या ने झटपट सारी तसवीरें वार्डरोब में वापस रख दीं.
‘‘यहां की सफाई करनी होगी. मोबाइल के जमाने में यहां कौन सी फोटो रखी हैं? सामान को निकाल कर इस रैक को साफ कर लेते हैं.’’ अपने को संयत कर वान्या ने वार्डरोब की ओर इशारा कर दिया.
‘‘नहीं, ऐसा मत कीजिए. आप जल्दीजल्दी मेरे साथ अब नीचे चलिए. साहब आ गए तो…’’
‘‘साहब आ गए तो क्या हो जाएगा? घर साफ करना है या नहीं?’’ वान्या बेचैनी और गुस्से से कांपने लगी.



