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वकील साहब के खतरनाक शौक : भाग 1

(कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां)

लेखक- निखिल अग्रवाल

इसी साल मई की बात है. तारीख थी 28. जगह राजस्थान के पाली जिले का सोजत सिटी. सोजत सिटी की मेहंदी पूरे देश में प्रसिद्ध है. इसी सोजत सिटी थाना क्षेत्र में चंडावल के पास एक गांव है छितरिया. इस गांव की सरहद में मुख्य सड़क मार्ग से सटी हुई एक बावड़ी है.

गरमी का मौसम होने के कारण आसपास के गांवों के लोग सुबह इस बावड़ी की तरफ टहलने चले जाते हैं. उस दिन टहलने आए लोगों ने बावड़ी के पानी में एक इंसान की लाश तैरती देखी. लोगों ने लाश को पहचानने की कोशिश की, लेकिन आसपास के गांवों का कोई भी व्यक्ति उस की शिनाख्त नहीं कर सका. लोगों ने इस की सूचना पुलिस को दे दी.

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सूचना मिलने पर सोजत सिटी थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई. पुलिस ने गांव वालों की मदद से बावड़ी से लाश निकलवाई. मृतक के सिर और गले में चोटों के गंभीर घाव थे.

पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से लाश के बारे में पूछा. कुछ पता नहीं चलने पर आसपास के गांवों के लोगों को बुला कर लाश की शिनाख्त कराने का प्रयास किया गया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली. इस पर सोजत सिटी थानाप्रभारी रामेश्वरलाल भाटी ने उच्चाधिकारियों को इस घटना की सूचना दे दी. इस से पहले 27 मई की रात को करीब 9-साढ़े 9 बजे पाली जिले में ही जैतारण थाना इलाके के चांवडिया कलां, अगेवा के पास मेगा हाइवे पर एक जलती हुई कार मिली थी. इस जलती हुई कार का वीडियो रात को ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था.

पुलिस को सूचना मिली, तो मौके पर पहुंची. वहां पुलिस ने आसपास पता करने का प्रयास किया, लेकिन न तो यह पता चला कि कार किस की है और न ही इस बात की जानकारी मिली कि कार में किस ने आग लगाई थी. पुलिस को कार के आसपास कोई आदमी भी नहीं मिला. रात ज्यादा हो गई थी. इसलिए एक कांस्टेबल को मौके पर छोड़ कर जैतारण थाना पुलिस थाने लौट गई थी.

जलती हुई कार मिलने के दूसरे दिन सुबह ही बावड़ी में लाश मिलने की सूचना पर सोजत सिटी डीएसपी डां. हेमंत जाखड़ और एसपी राहुल कोटोकी मौके पर पहुंचे. उन्होंने भी मौकामुआयना किया, लोगों से पूछताछ की. लाश के कपड़ों की तलाशी ली गई, लेकिन ऐसी कोई चीज नहीं मिली जिस से उस शख्स की पहचान हो पाती. अंतत: पुलिस ने लाश को सोजत अस्पताल भिजवा दिया.

पुलिस अधिकारियों को संदेह हुआ कि जलती हुई मिली कार और बावड़ी में मिली लाश का आपस में कोई संबंध हो सकता है. हालांकि इन दोनों जगहों के बीच करीब 15 किलोमीटर का फासला था. फिर भी संदेह की अपनी वजह थी.

पाली जिले के पुलिस अफसर दोनों मामलों की कडि़यां जोड़ने के प्रयास में जुटे थे, इसी बीच सूचना मिली कि जोधपुर जिले के बिलाड़ा में रहने वाले वकील नारायण सिंह राठौड़ 27 मई की दोपहर से लापता हैं. इस सूचना से पुलिस को संदेह हुआ कि लाश कहीं वकील साहब की ही तो नहीं है. पाली जिले की पुलिस ने जोधपुर जिले की पुलिस को इत्तला कर वकील नारायणसिंह के परिवार वालों को सोजत सिटी बुलवाया.

दोपहर में वकील साहब के परिवार वाले सोजत सिटी पहुंच गए. पुलिस ने उन्हें सुबह चंडावल के पास छितरिया गांव की सरहद में बावड़ी में मिली लाश दिखाई. लाश देखते ही परिवार वालों ने रोनापीटना शुरू कर दिया. लाश वकील साहब की ही थी.

लाश की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने वकील साहब के परिवार वालों को जैतारण ले जा कर वह कार दिखाई, जो एक दिन पहले रात को चांवडि़या कलां की अगेवा सरहद में मेगा हाइवे पर जलती हुई हालत में मिली थी. कार वकील साहब की ही निकली.

पाली पुलिस ने जोधपुर के बिलाड़ा से आए वकील साहब के बेटे सतपाल सिंह राठौड़ से वकील साहब के लापता होने के बारे में सारा किस्सा पूछा.

सतपाल सिंह राठौड़ ने रोतेबिलखते बताया कि उन के 68 वर्षीय पिता नारायण सिंह बिलाड़ा के जानेमाने वकील रहे हैं. वकील साहब सोने का हार और अन्य भारीभरकम आभूषण पहनने के शौकीन थे. वे करीब सवा, डेढ़ किलो सोने के आभूषण पहनते थे. इसलिए उन्हें बिलाड़ा और आसपास ही नहीं जोधपुर तक के लोग ‘गोल्डन मैन’ के नाम से जानते थे.  सोने के आभूषण पहन कर वे लोगों के साथ फोटो सेशन भी कराते थे. वे फोटो सेशन का 2-4 हजार रुपया भी लेते थे.

कहां गए, वकील साहब

बेटे सतपाल सिंह ने पुलिस को बताया कि उन के पिता नारायण सिंह 27 मई को दोपहर करीब एक बजे किसी पार्टी में जाने की बात कह कर घर से गए थे. वे दोपहर ढाई बजे वापस घर लौट आए थे. इस के कुछ ही देर बाद उन के पास किसी का फोन आया था.

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फोन आने के बाद वकील नारायण सिंह ने घर पर करीब एक किलो वजनी सोने का हार, साफे पर लगने वाली सोने की कलंगी सहित सोने के अन्य आभूषण पहने. इस के बाद दोपहर करीब 3-पौने 3 बजे वह परिवार वालों को यह कह कर घर से निकले कि किसी ने फोटो खिंचवाने के लिए बुलाया है. फोटो खिंचवा कर वापस लौट आऊंगा. वे घर से अपनी नैनो कार में गए थे.

दोपहर करीब 3 बजे घर से निकले वकील साहब जब रात तक वापस घर नहीं पहुंचे, तो परिवार वालों को चिंता हुई. चिंता होना स्वाभाविक था. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था कि वकील साहब बिना बताए घर से बाहर रहे हों. अगर उन्हें बाहर रहना भी पड़ता था, तो परिवार वालों को इस की सूचना जरूर देते थे.

उस दिन न तो वकील साहब ने कोई सूचना दी और न ही यह बता कर गए कि कहां जा रहे हैं. परिवार वालों ने उन के मोबाइल पर बात करने का प्रयास किया, लेकिन काफी प्रयासों के बाद भी बात नहीं हो सकी. वकील साहब की चिंता में परिवार वालों ने पूरी रात सोतेजागते गुजारी. चिंता इस बात की थी कि वकील साहब ने सवा-डेढ़ किलो सोने के आभूषण पहने हुए थे.

रात तो जैसेतैसे निकल गई. दूसरे दिन 28 मई को सुबह भी घर वालों को वकील साहब की कोई खैरखबर नहीं मिली. न ही उन से मोबाइल पर बात हुई. थकहार कर परिवार वालों ने सुबह ही बिलाड़ा पुलिस थाने में वकील साहब की गुमशुदगी दर्ज करा दी. इस बीच, पाली जिले से पुलिस की सूचना मिलने के बाद वकील साहब के परिवार वाले सोजत आ गए थे.

लाश और कार की पहचान होने के बाद वकील साहब के बेटे सतपाल सिंह राठौड़ ने उसी दिन सोजत सिटी थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी. उन्होंने रिपोर्ट में कहा कि उन के पिता नारायण सिंह की हत्या लूट के मकसद से की गई थी. वे करीब सवा किलो सोने के आभूषण पहने हुए थे.

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जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

वकील साहब के खतरनाक शौक

ड्रग्स: खूबसूरत मॉडल कनेक्शन से ट्विस्ट!

छत्तीसगढ़ मे ड्रग्स की चौपड़ बिछी हुई है जिसका धीरे-धीरे खुलासा हो रहा है मगर आश्चर्य और चिंता का सबब यह है कि छत्तीसगढ़ में वर्षों से यह खेल चल रहा है मगर शासन प्रशासन को मानो कोई खबर ही नहीं अब जिस तरीके से मामला उजागर हो रहा है उससे स्पष्ट है कि ड्रग्स कनेक्शन में खूबसूरत लड़कियां नेता पैसों वाले बिगड़े लड़के सभी कुछ है अर्थात आदिवासी राज्य कहलाने वाला छत्तीसगढ़ पंजाब और गुजरात बिहार जैसे राज्यों के पीछे पीछे चल रहा है और यहां की युवा भी नशीली पदार्थों का सेवन करते हुए अपने अस्तित्व को चौपट करने में लगे हुए हैं.

ड्रग्स गैंग से एक बड़ा सनसनीखेज खुलासा हुआ है. गैंग में जुड़ी एक मॉडल लड़की गिरफ्तार की गयी है, ये रायपुर की टीम ने भिलाई से निकिता पंचाल नाम की इस लड़की को गिरफ्तार किया है. ड्रग्स रैकेट के टॉप पैडलर्स के साथ ये लड़की सीधे संपर्क में थी. बड़े रसूखदारों लोगों से जुड़ी ये लड़की सोशल मीडिया में भी बेहद एक्टिव है। फेसबुक में इस लड़की के कई पुलिस अफसर भी फ्रेंड हैं। निकिता के बारे में जानकारी है कि वो एक ड्रग पैडलर्स  की गर्लफ्रेंड है और दोनों मिलकर ड्रग्स का ये धंधा किया करते थे.

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पुलिस को इस लड़की के रैकेट में शामिल होने की जानकारी आशीष से पूछताछ के बाद लगी थी, पुलिस तीन-चार दिन इसे ट्रैस कर रही थी, आज इस लड़की को पुलिस ने उसके घर से गिरफ्तार किया है। पुलिस बताती है कि बड़ी पार्टियों और रसूखदार उद्योगपतियों नेताओं को निकिता ने ड्रग सप्लाई किया है.  उसने रायपुर, बिलासपुर के अलावे भिलाई में कई ठिकानों पर ड्रग्स की कई खेप डिलेवर की है. कई दफा निकिता पंचाल अपने ब्वायफ्रेंड के साथ गोवा सहित कई बड़े शहरों का टूर कर चुकी है.

निकिता के पिता छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट में कार्यरत हैं और वो खुद डीजे है, लिहाजा बड़े-बड़े पार्टियों और रसूखदारों के साथ वो संपर्क में थी. पुलिस ने  उसकी गिरफ्तारी के बाद जेल चली गई है. पुलिस इस लड़की की गिरफ्तारी के बाद गैंग से जुड़ी अन्य आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.

हाईप्रोफाइल पार्टियों में नशा  बांटती माडल

छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बाहुल्य प्रांत एक पढ़ी-लिखी शिक्षित लड़की रुपयों की खातिर हाईप्रोफाइल पार्टियों में कोकीन जैसे मादक द्रव्य सप्लाई करती थी, अपने परिचय के अमीर बच्चों में ड्रग्स बांटती और लोगों को इसके आनंद के लिए प्रेरित करती थी. लड़की का पार्टियों में आना-जाना था और इसी दौरान  युवाओं को अपने नशीले संजाल में  फंसा लिया करती थी. वह दिखावे के लिए इवेंट अरेंज्ड करती थी जानकारी के अनुसार राजधानी रायपुर, व बिलासपुर के होटलों में परफॉर्म कर चुकी है. ज्ञात रहे कि छत्तीसगढ़ में  पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया था, इनमें एक लड़की का खास फ्रेंड है.

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रायपुर पुलिस ने पेशे से स्वयं को मॉडल बता रही उक्त लड़की को गिरफ्तार किया है. उस पर आरोप है कि वह पार्टियों में ड्रग्स सप्लाई करती थी. उसके निशाने पर अमीर घर के नौनिहालों युवा होते लड़के हुआ करते थे. यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि सोशल मीडिया में उसके बहुतायत में फॉलोवर हैं.  यह भी की कि फिल्मी दुनिया की एक्ट्रेस जैसे डांस मूव्स के साथ वह वीडियो भी अपलोड किया करती थी, जिस पर लाइक्स और कमेंट की झड़ी लग जाती थी. कुल मिलाकर अपने हुस्न के जलवे से युवाओं को नशे के जाल में फंसा दिया विषकन्या एक ऐसी उदाहरण बन कर उभरी है जो छत्तीसगढ़ में दुर्लभ है . शायद इसीलिए यह सुर्खियों में आ गई  है.

हमारे संवाददाता को पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नशे का आदी बनाने का यह काम वह विगत दो साल से बेधड़क कर रही थी. पुलिस ने अब तक की जांच में पाया कि केस में गिरफ्तार हो चुके 11 युवकों के संपर्क में ये लड़की भी थी .लड़की ने अनेक रईस वह रसूखदार परिवारों के युवक-युवतियों से दोस्ती कर रखी थी. उन्हें कोकीन देकर नशे का आदी बनाने का काम कर रही थी, ताकि वो ड्रग्स लेते रहें और उसकी झोली पैसों से भरती रहे रहे.

चौंकाने वाले तथ्य  उजागर

नशे के इस संजाल में पहले फंसकर और फिर युवाओं को फंसाने वाली निकिता पंचाल नामक यह युवा राजधानी रायपुर के एनआईटी संस्थान में पढ़ाई पूरी कर चुकी है. और पेशे से इंजीनियर है. बताया जाता है कि विलासिता पूर्ण जिंदगी जीने की आदी हो चुकी निकिता धीरे धीरे स्वयं पहले नशे की संजाल में फंसाई गई और आगे उसे मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जाने लगा कोकीन आदि की सप्लाई में मिल रहे अच्छे खासे पैसों के लालच में वह इसमें डूबती चली गई.यह सारी कहानी यह बताती है कि आजकल का युवा कैसे  चंद पैसों के लालच में अपना और अपने आसपास के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने में कोताही नहीं करता. पुलिस जानकारी के अनुसार आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के इस मादक पदार्थ कारोबार में लगे और भी कुछ लोगों को के कारोबार में लगे लोगों का चेहरे पर से पर्दा उठने वाला है.

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फेसबुक फ्रैंडशिप : वर्चुअल वर्ल्ड की दुनिया

फेसबुक फ्रैंडशिप : भाग 3

लड़का कौफीहाउस में काफी देर इंतजार करता रहा. तभी उसे सामने आती एक मोटी सी औरत दिखी जिस का पेट काफी बाहर लटक रहा था. हद से ज्यादा मोटी, काली, दांत बाहर निकले हुए थे. मेकअप की गंध उसे दूर से आने लगी थी. ऐसा लगता था कि जैसे कोई मटका लुढ़कता हुआ आ रहा हो. वह औरत उसी की तरफ बढ़ रही थी. अचानक लड़के का दिल धड़कने लगा इस बार घबराहट से, भय से उसे  कुछ शंका सी होने लगी. वह भागने की फिराक में था लेकिन तब तक वह भारीभरकम काया उस के पास पहुंच गई.

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‘‘हैलो.’’

‘‘आप कौन?’’ लड़के ने अपनी सांस रोकते हुए कहा.

‘‘तुम्हारी फेसबुक…’’

‘‘लेकिन तुम तो वह नहीं हो. उस पर तो किसी और की फोटो थी और मैं उसी की प्रतीक्षा में था,’’ लड़के ने हिम्मत कर के कह दिया. हालांकि वह समझ गया था कि वह बुरी तरह फंस चुका है.

‘‘मैं वही हूं. बस, वह चेहरा भर नहीं है. मैं वही हूं जिससे इतने दिनों से मोबाइल पर तुम्हारी बात होती रही. प्यार का इजहार और मिलने की बातें होती रहीं. तुम नंबर लगाओ जो तुम्हें दिया था. मेरा ही नंबर है. अभी साफ हो जाएगा. कहो तो फेसबुक खोल कर दिखाऊं?’’

‘‘कितनी उम्र है तुम्हारी?’’ लड़के ने गुस्से से कहा. लड़के ने उस के बालों की तरफ देखा. जिन में भरपूर मेहंदी लगी होने के बाद भी कई सफेद बाल स्पष्ट नजर आ रहे थे.

‘‘प्यार में उम्र कोई माने नहीं रखती, मैं ने यह पूछा था तो तुम ने हां कहा था.’’

‘‘फिर भी कितनी उम्र है तुम्हारी?’’

‘‘40 साल,’’ सामने बैठी औरत ने कुछ कम कर के ही बताया.

‘‘और मेरी 20 साल,’’ लड़के ने कहा.

‘‘मुझे मालूम है,’’ महिला ने कहा.

‘‘आप ने सबकुछ झूठ लिखा अपनी फेसबुक पर. उम्र भी गलत. चेहरा भी गलत?’’

‘‘प्यार में चेहरे, उम्र का क्या लेनादेना?’’

‘‘क्यों नहीं लेनादेना?’’ लड़के ने अब सच कहा. अधेड़ उम्र की सामने बैठी बेडौल स्त्री कुछ उदास सी हो गई.

‘‘अभी तक शादी क्यों नहीं की?’’

‘‘की तो थी, लेकिन तलाक हो गया. एक बेटा है, वह होस्टल में पढ़ता है.’’

‘‘क्या?’’ लड़के ने कहा, ‘‘आप मेरी उम्र देखिए? इस उम्र में लड़के सुरक्षित भविष्य नहीं, सुंदर, जवान लड़की देखते हैं. उम्र थोड़ीबहुत भले ज्यादा हो लेकिन बाकी चीजें तो अनुकूल होनी चाहिए. मैं ने जब अपनी फैंटेसी में श्रद्धा कपूर बताया, तभी तुम्हें समझ जाना चाहिए था.’’

‘‘तुम सपनों की दुनिया से बाहर निकलो और हकीकत का सामना करो? मेरे साथ तुम्हें कोई आर्थिक समस्या नहीं होगी. पैसों से ही जीवन चलता है और तुम मुझे यहां तक ला कर छोड़ नहीं सकते.’’

लड़के को उस अधेड़ स्त्री की बातों में लोभ के साथ कुछ धमकी भी नजर आई.

‘‘मैं अभी आई, जाना नहीं.’’ अपने भारीभरकम शरीर के साथ स्त्री उठी और लेडीज टौयलेट की तरफ बढ़ गई. लड़के की दृष्टि उस के पृष्ठभाग पर पड़ी. काफी उठा और बेढंगे तरीके से फैला हुआ था. लड़का इमेजिन करने लगा जैसा कि फैंटेसी करता था वह रात में.

लटकती, बड़ीबड़ी छातियों और लंबे उदर के बीच में वह फंस सा गया था और निकलने की कोशिश में छटपटाने लगा. कहां उस की वह सुंदर सपनीली दुनिया और कहां यह अधेड़ स्त्री. उस के होंठों की तरफ बढ़ा जहां बाहर निकले बड़बड़े दांतों को देख कर उसे उबकाई सी आने लगी. अपने सुंदर 20 वर्ष के बेटे को देख कर मां अकसर कहती थी, मेरा चांद सा बेटा. अपने कृष्णकन्हैया के लिए कोई सुंदर सी कन्या लाऊंगी, आसमान की परी. इस अधेड़ स्त्री को मां बहू के रूप में देखे तो बेहोश ही हो जाए?

लड़के को लगा फिर एक आंधी चल रही है और अधेड़ स्त्री के शरीर में वह धंसता जा रहा है. अधेड़ के शरीर पर लटकता हुआ मांस का पहाड़ थरथर्राते हुए उसे निगलने का प्रयास कर रहा है. उसे कुछ कसैलाविषैला सा लगने लगा. इस से पहले कि वह अधेड़ अपने भारीभरकम शरीर के साथ टौयलेट से बाहर आती, लड़का उठा और तेजी से बाहर निकल गया. उस की विशालता की विकरालता से वह भाग जाना चाहता था. उसे डर नहीं था किसी बात का, बस, वह अब और बरदाश्त नहीं कर सकता था.

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बाहर निकल कर वह स्टेशन की तरफ तेज कदमों से गया. उस के शहर जाने वाली ट्रेन निकलने को थी. वह बिना टिकट लिए तेजी से उस में सवार हो गया. सब से पहले उस ने इंटरनैट की दुनिया से अपनेआप को अलग किया. अपनी फेसबुक को दफन किया. अपना मेल अकाउंट डिलीट किया. अपने मोबाइल की सिम निकाल कर तोड़ दी. जिस से वह उस खूबसूरत लड़की से बातें किया करता था जो असल में थी ही नहीं. झूठफरेब की आभासी दुनिया से उस ने खुद को मुक्त किया. अब उसे घर पहुंचने की जल्दी थी, बहुत जल्दी. वह उन सब के पास पहुंचना चाहता था, उन सब से मिलना चाहता था, जिन से वह दूर होता गया था अपनी सोशल साइट, अपनी फेसबुक और ऐसी ही कई साइट्स के चलते.

वह उस स्त्री के बारे में बिलकुल नहीं सोचना चाहता था. उसे नहीं पता था कि लेडीज टौयलेट से निकल कर उस ने क्या सोचा होगा. क्या किया होगा? बिलकुल नहीं. लेकिन सुंदर लड़की बनी अधेड़ स्त्री तो जानती होगी कि जिस के साथ वह प्रेम की पींगे बढ़ा रही है, वह 20 वर्ष का नौजवान है और आमनासामना होते ही सारी बात खत्म हो जाएगी.

सोचा तो होगा उस ने. सोचा होता तो शायद वह बाद में स्थिति स्पष्ट कर देती या महज उस के लिए यह एक एडवैंचर था या मजाक था. कही ऐसा तो नहीं कि उस ने अपनी किसी सहेली से शर्त लगाई हो कि देखो, इस स्थिति में भी जवान लड़के मुझ पर मरते हैं. यह भी हो सकता है कि उसे लड़के की बेरोजगारी और अपनी सरकारी नौकरी के चलते कोई गलतफहमी हो गई हो. कहीं ऐसा तो नहीं कि वह केवल शारीरिक सुख के लिए जुड़ रही हो, कुछ रातों के लिए.

हां, इधर लडके को याद आया कि उस ने तो शादी की बात की ही नहीं थी. वह तो केवल होटल में मिलने की बात कर रही थी. शादी की बात तो मैं ने शुरू की थी. कहीं ऐसा तो नहीं कि अधेड़ स्त्री अपने अकेलेपन से निबटने के लिए भावुक हो कर बह निकली हो. अगर ऐसा है, तब भी मेरे लिए संभव नहीं था. बात एक रात की भी होती तब भी मेरे शरीर में कोई हलचल न होती उस के साथ.

उसे सोचना चाहिए था. मिलने से पहले सबकुछ स्पष्ट करना चाहिए था. वह तो अपने ही शहर में थी, मैं ने ही बेवकूफों की तरह फेसबुक पर दिल दे बैठा और घर से झूठ बोल कर निकल पड़ा. गलती मेरी भी है. कहीं ऐसा तो नहीं…सोचतेसोचते लड़का जब किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा तो फिर उस के दिमाग में अचानक यह खयाल आया कि पिताजी के पूछने पर वह क्या बहाना बनाएगा और वह बहाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने लगा.

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फेसबुक फ्रैंडशिप : भाग 2

तब लड़के के मन में खयाल आया कि एक ही शहर के होने में बहुत समस्या है. जो लड़की की समस्या है वही लड़के की भी है. लड़के ने हिम्मत कर के पूछ तो लिया, लेकिन लड़की ने कहा कि फेसबुक फ्रैंड हो तो फेसबुक पर मिलो. अपनी बात कहने के बाद लड़के ने भी सोचा कि यदि उसे भी कोई घर का या परिचित देख लेता तो प्रश्न तो करता ही. भले ही वह कोई भी जवाब दे देता लेकिन वह जवाब ठीक तो नहीं होता. यह तो नहीं कह देता कि फेसबुक फ्रैंड है. बिलकुल नहीं कह सकता था. फिर बातें उठतीं कि जब इस तरह की साइड पर लड़कियों से दोस्ती हो सकती है तो और भी अनैतिक, अराजक, पापभरी साइट्स देखते होंगे.

ऐसे में दूसरे शहर की वीर, साहसी, दलबल, विचारधारा, जाति, धर्म सब देखते हुए जिस में चेहरे का मनोहारी चित्र तो प्रमुख है ही, फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी जाती है और लड़की की तरफ से भी तभी स्वीकृति मिलती है जब उस ने सारा स्टेटस, फोटो, योग्यता, धर्म, जाति आदि सब देख लिया हो. और वह भी किसी कमजोर व एकांत क्षणों से गुजरती हुई आगे बढ़ती गई हो. लड़की क्यों इतना डूबती जाती है, आगे बढ़ती जाती है. शायद तलाश हो प्रेम की, सच्चे साथी की. उसे जरूरत हो जीवन की तीखी धूप में ठंडे साए की.

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और जब बराबर लड़की की तरफ से उत्तर और प्रश्न दोनों हो रहे हो. मजाक के साथ, ‘‘मेरे मोबाइल में बेलैंस डलवा सकते हो?’’ और लड़के ने तुरंत ‘‘हां’’ कहा. लड़की ने हंस कर कहा कि मजाक कर रही हूं. तुम तो इसलिए भी तैयार हो गए कि इस बहाने मोबाइल नंबर मिल जाएगा. चाहिए नंबर?

‘‘हां.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘बात करने के लिए.’’

‘‘लेकिन समय, जो मैं बताऊं.’’

‘‘मंजूर है.’’

और लड़की ने नंबर भी भेज दिया. अब मोबाबल पर भी अकसर बातें होने लगीं. बातों से ज्यादा एसएमएस. बात भी हो जाए और किसी को पता भी न चले. बातें होती रहीं और एक दिन लड़की की तरफ से एसएमएस आया.

‘‘कुछ पूछूं?’’

‘‘पूछो.’’

‘‘एक लड़की में क्या जरूरी है?’’

‘‘मैं समझा नहीं.’’

‘‘सूरत या सीरत?’’

लड़के को किताबी उत्तर ही देना था हालांकि देखी सूरत ही जाती है. सिद्धांत के अनुसार वही उत्तर सही भी था. लड़के ने कहा, ‘‘सीरत.’’

‘‘क्या तुम मानते हो कि प्यार में उम्र कोई माने नहीं रखती?’’

‘‘हां,’’ लड़के ने वही किताबी उत्तर दिया.

‘‘क्या तुम मानते हो कि सूरत के कोई माने नहीं होते प्यार में?’’

‘‘हां,’’ वही थ्योरी वाला उत्तर.

और इन एसएमएस के बाद पता नहीं लड़की ने क्या परखा, क्या जांचा और अगला एसएमएस कर दिया.

‘‘आई लव यू.’’

लड़के की खुशी का ठिकाना न रहा. यही तो चाहता था वह. कमैंट्स, शेयर, लाइक और इतनी सारी बातें, इतना घुमावफिराव इसलिए ही तो था. लड़के ने फौरन जवाब दिया, ‘‘लव यू टू.’’

रात में दोनों की एसएमएस से थोड़ीबहुत बातचीत होती थी, लेकिन इस बार बात थोड़ी ज्यादा हुई. लड़की ने एसएमएस किया, ‘‘तुम्हारी फैंटेसी क्या है?’’

‘‘फैंटेसी मतलब?’’

‘‘किस का चेहरा याद कर के अपनी कल्पना में उस के साथ सेक्स…’’

लड़के को उम्मीद नहीं थी कि लड़की अपनी तरफ से सेक्स की बातें शुरू करेगी, लेकिन उसे मजा आ रहा था. कुछ देर वह चुप रहा. फिर उस ने उत्तर दिया, ‘‘श्रद्धा कपूर और तुम.’’

लड़की की तरफ से उत्तर आया, ‘‘शाहरुख.’’

फिर एक एसएमएस आया, ‘‘आज तुम मेरे साथ करो.’’ लड़की शायद भूल गई थी उस ने जो चेहरा फेसबुक पर लगाया है वह उस का नहीं है. एसएमएस में लड़की ने आगे लिखा था, ‘‘और मैं तुम्हारे साथ.’’

‘‘हां, ठीक है,’’ लड़के का एसएमएस पर जवाब था.

‘‘ठीक है क्या? शुरू करो, इतनी रात को तो तुम बिस्तर पर अपने कमरे में ही होंगे न.’’

‘‘हां, और तुम?’’

‘‘ऐसे मैसेज बंद कमरे से ही किए जाते हैं. ये सब करते हुए हम अपने मोबाइल चालू रख कर अपने एहसास आवाज के जरिए एकदूसरे तक पहुंचाएंगे.’’

‘‘ठीक है,’’ लड़के ने कहा. फिर उस ने अपने अंडरवियर के अंदर हाथ डाला. उधर से लड़की की आवाजें आनी शुरू हुईं. बेहद मादक सिसकारियां. फिर धीरेधीरे लड़के के कानों में ऐसी आवाजें आने लगीं मानो बहुत तेज आंधी चल रही हो. आंधियों का शोर बढ़ता गया.

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लड़के की आवाजें भी लड़की के कानों में पहुंच रही थीं, ‘‘तुम कितनी सुंदर हो. जब से तुम्हें देखा है तभी से प्यार हो गया. मैं ने तुम्हें बताया नहीं. अब श्रद्धा के साथ नहीं, तुम्हारे साथ सैक्स करता हूं इमेजिन कर के. काश, किसी दिन सचमुच तुम्हारे साथ सैक्स करने का मौका मिले.’’

लड़की की आंधीतूफान की रफ्तार बढ़ती गई, ‘‘जल्दी ही मिलेंगे फिर जो करना हो, कर लेना.’’

थोड़ी देर में दोनों शांत हो गए. लेकिन अब लड़का सैक्स की मांग और मिलने की बात करने लगा. जिस के लिए लड़की ने कहा, ‘‘मैं तैयार हूं. तुम दिल्ली आ सकते हो. हम पहले मिल लेते हैं वहीं से किसी होटल चलेंगे.’’

लड़के ने कहा, ‘‘मुझे घर वालों से झूठ बोलना पड़ेगा और पैसों का इंतजाम भी करना पड़ेगा. हां, संबंध बनने के बाद शादी के लिए तुरंत मत कहना. मैं अभी कालेज कर रहा हूं. प्राइवेट जौब में पैसा कम मिलेगा. और आसानी से मिलता भी नहीं है काम, लेकिन मेरी कोशिश रहेगी कि…’’

लड़की ने बात काटते हुए कहा, ‘‘तुम आ जाओ. पैसों की चिंता मत करो. मेरे पास अच्छी सरकारी नौकरी है. शादी कर भी ली तो तुम्हें कोई आर्थिक समस्या नहीं होगी.’’

‘‘मैं कोशिश करता हूं.’’ और लड़के ने कोशिश की. घर में झूठ बोला और अपनी मां से इंटरव्यू देने जाने के नाम पर रुपए ले कर दिल्ली चला गया. पिताजी घर पर होते तो कहते दिखाओ इंटरव्यू लैटर. लौटने पर पूछेंगे तो कह दूंगा कि गिर गया कहीं या हो सकता है कि लौटने पर सीधे शादी की ही खबर दें. लड़का दिल्ली पहुंचा 6 घंटे का सफर कर के.

घर पर तो जा नहीं सकते. घर का पता भी नहीं लिखा रहता है फेसबुक पर. सिर्फ शहर का नाम रहता है. यह पहले ही तय हो गया था कि दिल्ली पहुंच कर लड़का फोन करेगा. और लड़के ने फोन कर के पूछा, ‘‘कहां मिलेगी?’’

‘‘कहां हो तुम अभी?’’

‘‘स्टेशन के पास एक बहुत बड़ा कौफी हाउस है.’’

‘‘मैं वहीं पहुंच रही हूं.’’

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लड़के के दिल की धड़कनें बढ़ने लगीं. उस के सामने लड़की का सुंदर चेहरा घूमने लगा. लड़के ने मन ही मन कहा, ‘‘कदकाठी अच्छी हो तो सोने पर सुहागा.’’

जानें आगे क्या हुआ कहानी के अगले भाग में…

फेसबुक फ्रैंडशिप : भाग 1

शुरुआत तो बस यहीं से हुई कि पहले उस ने फेस देखा और फिदा हो कर फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी. रिक्वैस्ट 2-3 दिनों में ऐक्सैप्ट हो गई. 2-3 दिन भी इसलिए लगे होंगे कि उस सुंदर फेस वाली लड़की ने पहले पूरी डिटेल पढ़ी होगी. लड़के के फोटो के साथ उस का विवरण देख कर उसे लगा होगा कि ठीकठाक बंदा है या हो सकता है कि तुरंत स्वीकृति में लड़के को ऐसा लग सकता है कि लड़की उस से या तो प्रभावित है या बिलकुल खाली बैठी है जो तुरंत स्वीकृति दे कर उस ने मित्रता स्वीकार कर ली.

यह तो बाद में पता चलता है कि यह भी एक आभासी दुनिया है. यहां भी बहुत झूठफरेब फैला है. कुछ भी वास्तविक नहीं. ऐसा भी नहीं कि सभी गलत हो. ऐसा भी हो सकता है कि जो प्यार या गुस्सा आप सब के सामने नहीं दिखा सकते, वह अपनी पोस्ट, कमैंट्स, शेयर से जाहिर करते हो. अपनी भावनाएं व्यक्त करने का साधन मिला है आप को, तो आप कर रहे हैं अपने को छिपा कर किसी और नाम, किसी और के फोटो या किसी काल्पनिक तसवीर से.

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यदि अपनी बात रखने का प्लेटफौर्म ही चाहिए था तो उस में किसी अप्सरा की तरह सुंदर चेहरा लगाने की क्या जरूरत थी? आप कह सकती हैं कि हमारी मरजी. ठीक है, लेकिन है तो यह फर्जी ही. आप साधारण सा कोई चित्र, प्रतीक या फिर कोई प्राकृतिक तसवीर लगा सकते थे. खैर, यह कहने का हक नहीं है. अपनी मरजी है. लेकिन जिस ने फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी उस ने उस मनोरम छवि को वास्तविक जान कर भेजी न आप को?

आप शायद जानती हो कि मित्र संख्या बढ़ाने का यही साधन है, तो भी ठीक है, लेकिन बात जब आगे बढ़ रही हो तब आप को समझना चाहिए कि आगे बढ़ती बात उस सुंदर चित्र की वजह से है जो आप ने लगाई हुई है अपने फेसबुक अकांउट पर. आप ने अपने विषय में ज्यादा कोई जानकारी नहीं लिखी. आप से पूछा भी मैसेंजर बौक्स पर जा कर. और पूछा तभी, जब बात कुछ आगे बढ़ गई थी. कोई किसी से यों ही तो नहीं पूछ लेगा कि आप सिंगल हो. और आप का उत्तर भी गोलमोल था. यह मेरा निजी मामला है. इस से हमारी फेसबुक फ्रैंडशिप का क्या लेनादेना?

बात लाइक और कमैंट्स तक सीमित नहीं थी. बात मैसेंजर बौक्स से होते हुए आगे बढ़ती जा रही थी. इतनी आगे कि जब लड़के ने मोबाइल नंबर मांगा तो लड़की ने कहा, ‘‘फोन नहीं, मेल से बात करो. फोन गड़बड़ी पैदा कर सकता है. किस का फोन था, कौन है वगैराहवगैरहा.’’

अब मेल पर बात होने लगी. शुरुआत में लड़के  ने फेस देखा. मित्र बन जाने पर लड़के ने विवरण देखा उसे पसंद आया. उसे किसी बात की उम्मीद जगी. भले ही वह उम्मीद एकतरफा थी. उसे नहीं पता था शुरू में कि वह जिस दुनिया से जुड़ रहा है वहां भ्रम ज्यादा है,  झूठ ज्यादा है. पहले लड़की के हर फोटो, हर बात पर लाइक, फिर अच्छेअच्छे कमैंट्स और शेयर के बाद निजी बातें जानने की जिज्ञासा हुई दोनों तरफ से. हां, यह सच है कि पहल लड़के की तरफ से हुई. लड़के ही पहल करते हैं. लड़कियां तो बहुत सोचनेविचारने के बाद हां या नहीं में जवाब देती हैं.

बात आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी लड़के पर ही आती है समाज, संस्कारों के तौर पर. तो शुरुआत लड़के ने ही की. इंटरनैट की दुनिया में आ जाने के बाद भी समाज, संस्कार नहीं छूट रहे हैं यानी 21वीं सदी में प्रवेश किंतु 19वीं सदी के विचारों के साथ. फेसबुक पर सुंदर चेहरे से मित्रता होने  पर लड़के के अंदर उम्मीद जगी. विस्तृत विवरण देख कर उस ने हर पोस्ट पर लाइक और सुंदर कमैंट्स के ढेर लगा दिए. बात इसी तरह धीरेधीरे आगे बढ़ती रही. लड़की के थैंक्स के बाद जब गुडमौर्निंग, गुडइवनिंग और अर्धरात्रि में गुडनाइट होने लगी तो किसी भाव का उठना, किसी उम्मीद का बंधना स्वाभाविक था. लगता है कि दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई है. लड़के को तो यही लगा.

लड़के ने विस्तृत विवरण में जाति, धर्म, शिक्षा, योग्यता, आयु सब देख लिया था. पूरा स्टेटस पढ़ लिया था और उस को ही अंतिम सत्य मान लिया था. जो बातें स्टेटस मेें नहीं थीं, उन्हें लड़का पूछ रहा था और लड़की जवाब दे रही थी. जवाब से लड़के को स्पष्ट जानकारी तो नहीं मिल रही थी लेकिन कोई दिक्कत वाली बात भी नजर नहीं आ रही थी. फेसबुक पर ऐसे सैकड़ों, हजारों की संख्या में मित्र होते हैं सब के. आमनेसामने की स्थिति न आए, इसलिए एक शहर के मित्र कम ही होते हैं. होते भी हैं तो लिमिट में बात होती है. सीमित लाइक या कमैंट्स ही होते हैं खास कर लड़केलड़की के मध्य.

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लड़का छोटे शहर का था. विचार और खयालात भी वैसे ही थे. लड़कियों से मित्रता होती ही नहीं है. होती है तो भाई बनने से बच गए तो किसी और रिश्ते में बंध गए. नहीं भी बंधे तो सम्मानआदर के भारीभरकम शब्दों या किसी गंभीर विषय पर विचारविमर्श, लाइक, कमैंट्स तक. ऐसे में और उम्र के 20वें वर्ष में यदि किसी दूसरे शहर की सुंदर लड़की से जब बात इतनी आगे बढ़ जाए तो स्वाभाविक है उम्मीद का बंधना.

फोटो के सुंदर होने के साथसाथ यह भी लगे कि लड़की अच्छे संस्कारों के साथसाथ हिम्मत वाली है. किसी विशेष राजनीतिक दल, जाति, धर्म के पक्ष या विपक्ष में पूरी कट्टरता और क्रोध के साथ अपने विचार रखने में सक्षम है और आप की विचारधारा भी वैसी ही हो. आप जब उस की हर पोस्ट को लाइक कर रहे हैं तो जाहिर है कि आप उस के विचारों से सहमत हैं. लड़की की पोस्ट देख कर आप उस के स्वतंत्र, उन्मुक्त विचारों का समर्थन करते हैं, उस के साहस की प्रशंसा करते हैं और आप को लगने लगता है कि यही वह लड़की है जो आप के जीवन में आनी चाहिए. आप को इसी का इंतजार था.

बात तब और प्रबल हो जाती है जब लड़का जीवन की किसी असफलता से निराश हो कर परिवार के सभी प्रिय, सम्माननीय सदस्यों द्वारा लताड़ा गया हो, अपमानित किया गया हो, अवसाद के क्षणों में लड़के ने स्वयं को अकेला महसूस किया हो और आत्महत्या करने तक का विचार मन में आ गया हो. तब जीवन के एकाकी पलों में लड़के ने कोई उदास, दुखभरी पोस्ट डाली हो. लड़की ने पूछा हो कि क्या बात है और लड़के ने कह दिया हाले दिल का. लड़की ने बंधाया हो ढांढ़स और लड़के को लगा हो कि पूरी दुनिया में बस यही है एक जीने का सहारा.

लड़के ने पहले अपने ही शहर में महिला मित्र बनाने का प्रयास किया था, जिस में उसे सफलता भी मिली थी. लड़की खूबसूरत थी. पढ़ीलिखी थी. स्टेटस में खुले विचार, स्वतंत्र जीवन और अदम्य साहस का परिचय होने के साथ कुछ जबानी बातें भी थीं. लड़के ने इतनी बार उस लड़की का फोटो व स्टेटस देखा कि दोनों उस के दिलोदिमाग में बस गए. फोटो कुछ ज्यादा ही. अपने शहर की वही लड़की जब उसे रास्ते में मिली तो लड़के ने कहा, ‘‘नमस्ते कल्पनाजी.’’

लड़की हड़बड़ा गई, ‘‘आप कौन? मेरा नाम कैसे जानते हैं?’’

लड़के ने खुशी से अपना नाम बताते हुए कहा, ‘‘मैं आप का फेसबुक फ्रैंड.’’

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और लड़की ने गुस्से में कहा, ‘‘फेसबुक फ्रैंड हो तो फेसबुक पर ही बात करो. घर वालों ने देख लिया तो मुश्किल हो जाएगी. उन्हें फेसबुक का पता चलेगा तो वह अकाउंट भी बंद हो जाएगा. चार बातें अलग सुनने को मिलेंगी. वे कहेंगे स्वतंत्रता दी है तो इस का यह मतलब नहीं कि तुम लड़कों से फेसबुक के जरिए मित्रता करो. उन से मिलो…और प्लीज, तुम जाओ यहां से, मैं नहीं जानती तुम्हें. क्या घर से मेरा निकलना बंद कराओगे? घर पर पता चल गया तो घर वाले नजर रखना शुरू कर देंगे.’’ फिर, घर वालों का प्रेम, विश्वास और भी बहुतकुछ कह कर लड़की चली गई.

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थाई गर्ल की कातिल सहेली

थाई गर्ल की कातिल सहेली : भाग 3

(कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां)

सहेली आईडा को आया लालच

आईडा का टूरिस्ट वीजा 26 सितंबर को खत्म हो रहा था. उसे वीजा की अवधि बढ़वानी थी. इस के लिए उस ने किसी एजेंट से भी बात कर ली थी. वीजा बढ़वाने के लिए उसे पैसों की जरूरत थी.

इस के अलावा थाईलैंड के बानपाको में रहने वाले उस के भाई ने गाड़ी का एक्सीडेंट कर दिया था. उस की गाड़ी पुलिस ने जब्त कर ली. भाई की गाड़ी छुड़वाने के लिए भी आईडा को पैसे चाहिए थे. आईडा ने अपने 2-4 परिचितों से पैसे उधार मांगे, लेकिन उसे कहीं से मदद नहीं मिली.

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उसे पता था कि वनिडा अच्छा पैसा कमाती है. वह ठाठ से रहती और खूब खर्च करती है. थाईलैंड में अपने घर भी पैसा भेजती है. उसे पता था कि वनिडा का वीजा 20 सितंबर को खत्म हो रहा है और वह वापस थाईलैंड जाना चाहती है. इस से आईडा को अनुमान था कि वनिडा के पास अभी काफी पैसा होगा. इसलिए उस ने वनिडा को शराब पिला कर उसे लूटने की योजना बनाई.

आईडा ने वनिडा से 5 सितंबर की रात को पार्टी करने की बात तय कर ली. योजना के तहत आईडा रात करीब साढ़े 9 बजे वनिडा के घर पहुंची. दोनों ने शराब व वोदका पी. नशीले पदार्थ वाले हुक्के के भी कश लगाए.

इस बीच वे मछली वगैरह भी खाती रहीं. आईडा ने जानबूझ कर वनिडा को ज्यादा शराब पिलाई. वनिडा जब बेसुध हो गई, तो आईडा वनिडा का कीमती माल तलाश करने लगी.

इस बीच, उसे खयाल आया कि अगर वनिडा को होश आ गया, तो वह चिल्लाएगी. इस से वह पकड़ी जाएगी. अगर उसे अभी होश नहीं आया, तो सुबह कीमती सामान नहीं मिलने पर वह सीधा उस पर चोरी का आरोप लगाएगी.

इस से बचने के लिए आईडा ने वनिडा का काम तमाम करने का फैसला किया. उस ने कमरे में गद्दे पर बेसुध पड़ी वनिडा का कंबल से गला दबा दिया. इस के बाद उस पर टिश्यू पेपर और नायलोन का कंबल डाल कर लाइटर से आग लगा दी. ज्यादा नशे में होने से बेसुध होने के कारण वनिडा चीखपुकार भी नहीं सकी. वह जिंदा ही जल गई.

वनिडा को जला कर आईडा ने उस के 3 आईफोन और सोने की चेन सहित करीब 2 लाख रुपए का कीमती सामान बटोरा और तड़के अपने कमरे पर आ गई. अपने कमरे में उस ने वनिडा की सोने की चेन चावल के डब्बे में छिपा कर रख दी.

आईडा इतनी शातिर थी कि 6 सितंबर को सुबह जब कमरे में वनिडा का जला हुआ शव मिला, तो पुलिस की काररवाई के दौरान वह थाईलैंड की अन्य महिलाओं के साथ मृतका को श्रद्धांजलि देने के लिए हाथ जोड़े वहां कई घंटे तक खड़ी रही. इस दौरान उस ने किसी को भी शक नहीं होने दिया.

वनिडा की मर्डर मिस्ट्री का रहस्य उस की रूममेट रूंघटीथा म्याऊ से पूछताछ के बाद सुलझा. म्याऊ ने पुलिस को बताया कि वह वनिडा की मृत्यु के बाद भरूच से सूरत आई थी. भरूच से वह काफी सामान लाई थी. वनिडा के कमरे में आग लगने के कारण वहां सामान नहीं रख सकी, तो वह आईडा के कमरे पर सामान रखने गई. आईडा के मकान मालिक ने ज्यादा सामान कमरे में रखने से मना कर दिया.

आईडा ने स्वीकारा अपराध

इस पर म्याऊ ने अपना कुछ गैरजरूरी सामान अपने आटोचालक को दे दिया. इस दौरान आईडा ने भी आटो चालक को एक बैग दे कर कहा कि वह बाद में ले लेगी. आटोचालक ने आईडा का दिया बैग और म्याऊ का दिया सामान ला कर अपने घर पर रख दिया. स्पा में काम करने वाली थाईलैंड की युवतियों ने अपने आटोचालक तय कर रखे हैं. उन्हें जब भी कहीं आनाजाना होता है, तो फोन कर के उन्हें बुला लेती हैं.

म्याऊ ने पुलिस को यह भी बताया कि वनिडा के पास 3 मोबाइल फोन और सोने की चेन थी, जो गायब हैं. रुपएपैसे और अन्य कीमती सामान के बारे में म्याऊ को ज्यादा पता नहीं था.

म्याऊ से पूछताछ के बाद पुलिस ने आटो चालक से पूछताछ की. उस ने म्याऊ और आईडा की ओर से दिए गए सामान के बारे में बता दिया. पुलिस ने उस के घर जा कर सामान चेक किया, तो उस बैग में वनिडा का मोबाइल मिला, जो आईडा ने उसे दिया था.

पहले से ही शक के दायरे में चल रही आईडा पर पुलिस का संदेह पुख्ता हो गया. पुलिस को आईडा से पूछताछ में काफी पापड़ बेलने पड़े. उस ने हिंदी, गुजराती या अंग्रेजी भाषा समझने से इनकार कर दिया. वह केवल थाई भाषा ही बोलती रही.

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उस से पूछताछ के लिए दुभाषिए की मदद लेनी पड़ी. वह बारबार वनिडा की हत्या से साफ इनकार करते हुए पुलिस से सबूत बताने की बात कहती रही.

विदेशी युवती का मामला होने के कारण पुलिस उस से सख्ती भी नहीं कर पा रही थी. पुलिस ने उस के घर की तलाशी ली, तो चावल के डब्बे से वनिडा की सोने की चेन बरामद हो गई. कुछ अन्य सामान भी मिल गया. पुलिस ने उसे रात साढ़े 9 बजे वनिडा के घर आने और तड़के करीब साढ़े 4 बजे मुंह ढक कर जाने के सीसीटीवी फुटेज दिखाए. इस के बाद उस ने वनिडा की हत्या करने की बात कबूल कर ली. आईडा से उस ताले की चाबी भी बरामद हो गई, जो वह वनिडा की हत्या के बाद उस के कमरे के बाहर लगा कर आई थी.

पुलिस ने आईडा को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस को अन्य लोगों से पता चला कि आईडा के खिलाफ मलेशिया और जापान में जुआ का अड्डा चलाने के आपराधिक मामले दर्ज हैं. पुलिस इन मामलों का पता लगाने का प्रयास कर रही है.

बहरहाल, आईडा ने छोटे से लालच में अपनी ही सहेली का खून कर दिया. पैसे कमाने आई आईडा को अब भारत में अपने किए की सजा भुगतनी होगी.

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थाई गर्ल की कातिल सहेली : भाग 2

(कहानी सौजन्य-मनोहर कहानियां)

फोरैंसिक विशेषज्ञों ने कहा कि मौके के हालात से लगता है कि इस में कोई और शामिल हो सकता है, जिस ने युवती को जलाया. युवती ने खुद ऐसा नहीं किया होगा. जलाने में संभवत: ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल किया गया होगा. शव को जलने में 2 से 3 घंटे का समय भी लगा होगा. वनिडा का शव जिस गद्दे पर मिला, वह रुई का था. आग केवल गद्दे तक ही लगी थी, पूरे कमरे में नहीं फैली थी.

फोरैंसिक एक्सपर्ट ने दी चौंकाने वाली रिपोर्ट

कमरे के बाहर से ताला लगा होना भी संदेह पैदा कर रहा था. कोई भी व्यक्ति बाहर से ताला लगा कर केवल तभी सोता है, जब या तो उस का कोई साथी उसी के सामने बाहर गया हो और उसे वापस आना हो.

अथवा ऐसा तब होता है जब अंदर वाले को किसी से डर या खतरा हो, तब वह किसी से बाहर का ताला लगवा सकता है. लेकिन पुलिस को ऐसा भी कोई आदमी नहीं मिला, जिस से वनिडा ने कमरे का बाहर का ताला लगवाया हो.

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विशेषज्ञों ने माना कि जलते समय युवती होश में नहीं थी. संभवत: वह गहरे नशे में रही होगी. इसीलिए वह जलने पर न तो चीखीचिल्लाई और न किसी ने उस की कोई आवाज सुनी थी.

फोरैंसिक विशेषज्ञ हत्या की आशंका जताते हुए अपने तर्क दे रहे थे, लेकिन हत्या का मामला दर्ज करने से पहले पुलिस सबूत जुटाना चाहती थी. इसलिए पुलिस ने दक्षिण गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (डीजीवीसीएल) के बिजली अधिकारियों से भी मौका निरीक्षण कराया, ताकि पता चल सके कि शार्ट सर्किट तो नहीं हुआ था. जांच पड़ताल के बाद बिजली अधिकारियों ने साफ कर दिया कि कमरे में शार्ट सर्किट नहीं हुआ था.

शव मिलने के तीसरे दिन पुलिस ने 16 लोगों से अलगअलग पूछताछ की. इन में वनिडा की रूममेट, उसे घर और स्पा ले जाने वाले आटो चालक, सहेलियों और सीसीटीवी फुटेज में नजर आए संदिग्ध लोग शामिल थे.

पुलिस ने वनिडा के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स भी निकलवाई. इस बीच, पुलिस ने वनिडा के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार कर दिया. पुलिस ने विसरा और अन्य सैंपल जांच के लिए एफएसएल भिजवा दिए.

पुलिस की जांचपड़ताल में पता चला कि करीब 27 साल की वनिडा एक साल पहले टूरिस्ट वीजा पर सूरत आई थी. वह 3-4 महीने से नगीन भाई पटेल के मकान में किराए के कमरे में रहती थी. उस के साथ थाईलैंड की ही निवासी रूंघटीथा म्याऊ नाम की युवती भी रहती थी.

फोरैंसिक विभाग ने प्राथमिक जांच रिपोर्ट पुलिस को दी. इस में मौत का कारण तो नहीं बताया गया, लेकिन यह जरूर कहा गया कि जलाते समय युवती जीवित थी. उस की श्वास नली में कार्बन मिला है. कोई व्यक्ति जिंदा जलता है, तो उस की सांस की नली में कार्बन पाया जाता है. यह हो सकता है कि युवती को बेहोश कर या कोई मादक पदार्थ पिला कर जलाया गया हो.

मामला विदेशी युवती की मौत का था. इसलिए पुलिस सभी एंगल से मामले की जांच कर रही थी. लोगों से पूछताछ में पुलिस को कुछ ऐसी बातें पता चलीं, जिस से पुलिस ने माना कि वनिडा की हत्या हुई होगी. हत्या के एंगल से जांच की गई, तो यह माना गया कि कातिल बहुत शातिर है.

उस ने वनिडा को जलाने के लिए पैट्रोल या केरोसिन के बजाय शराब, नेल पेंट, डिओड्रेंट या किसी अन्य बिना गंध वाले ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल किया होगा, क्योंकि पैट्रोल व केरोसिन की गंध दूर तक फैलती है.

11 सितंबर को उमरा थाना पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ वनिडा की हत्या का मामला दर्ज कर लिया. हत्या का मामला एफएसएल की प्राथमिक रिपोर्ट व डीजीवीसीएल के बिजली अधिकारियों की रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर दर्ज किया गया.

80 से ज्यादा लोगों से की पूछताछ

लगभग 80 से ज्यादा लोगों से की गई पूछताछ और 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखने के बाद पुलिस ने 2 लोगों पर शक की सुई टिका दी. इन में एक आईडा थी और दूसरा चेतन. थाईलैंड की ही रहने वाली आईडा मृतका वनिडा की अच्छी दोस्त थी.

वह भी वनिडा की ही तरह एक स्पा सैंटर में काम करती थी. वहीं, चेतन वनिडा के मकान के पास ही रहता था. चेतन ने ही वनिडा को 5 सितंबर को आखिरी काल की थी. चेतन सूरत के ही एक स्पा में मैनेजर की नौकरी करता है.

पुलिस ने अपने मुखबिर लगाए और इन दोनों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी. निगरानी रखने के बाद पुलिस ने चेतन को शक के दायरे से बाहर कर आईडा पर सारा ध्यान केंद्रित कर दिया.

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पुलिस की ओर से जरूरी सबूत जुटाने के बाद सूरत के पुलिस कमिश्नर अजय तोमर ने 14 सितंबर, 2020 को वनिडा की हत्या का खुलासा कर दिया. पुलिस ने आईडा को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस की जांचपड़ताल और आईडा से की गई पूछताछ में वनिडा की हत्या की जो कहानी उभरकर सामने आई, वह इस प्रकार है –

थाईलैंड की रहने वाली वनिडा और आईडा अच्छी दोस्त थीं. दोनों लगभग हमउम्र थीं. दोनों की ही शादी हो चुकी थी. वनिडा का एक बेटा है. पति और बेटा थाईलैंड में रहते हैं. वनिडा पैसा कमाने के मकसद से टूरिस्ट वीजा पर भारत आई थी. वह स्पा का काम जानती थी. भारत में स्पा सेंटरों में विदेशी युवतियों की सब से ज्यादा मांग रहती है. परिचित थाई युवतियों के माध्यम से वह सूरत आ गई. सूरत में उसे एक स्पा सेंटर में काम मिल गया. स्पा में वह अच्छा पैसा कमा रही थी. उसे किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी.

आईडा भी थाईलैंड से टूरिस्ट वीजा पर सूरत आई थी. वह भी शादीशुदा थी लेकिन वह करीब एक साल से अपने पति से अलग रहती थी. उस का पति थाईलैंड में रहता है.

एक देश की होने और एक ही काम करने के कारण वनिडा और आईडा में अच्छी दोस्ती हो गई. आईडा भी मगदल्ला गांव में ही किराए के मकान में थी. वनिडा व आईडा के मकान के बीच 10 मिनट का पैदल का रास्ता है.

दोनों सहेलियों को एकदूसरे की सारी बातें पता थीं. वे कभीकभी अपने कमरे पर पार्टी कर लेती थीं. थाईलैंड के खानपान के लिहाज और स्पा मसाज के पेशे से जुड़ी होने के कारण सिगरेट पीना, वोदका, बीयर, और शराब पीने के अलावा हुक्के के कश लगाना तथा झींगा मछली वगैरह खाना इन का शौक था. इन की पार्टी करीब 11-12 बजे शुरू हो कर भोर होने तक चलती थी.

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