महंगाई की आह, सरकार तानाशाह

आज औसत भारतीय की जिंदगी में समस्याओं की बाढ़ ही है. आएदिन नित नई समस्याएं आती हैं और परेशान भारतीयों को और ज्यादा हैरान कर के चली जाती हैं. पर, कुछ समस्याएं तो हमारी जिंदगी में घर कर के बैठ जाती हैं. आज महंगाई एक ऐसी ही समस्या है, जो लगातार विकट रूप लेती जा रही है.

महंगाई कई बुरे नतीजों को जन्म देती है. जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से आम जनता को जिंदगी गुजारना बड़ा ही मुश्किल हो जाता है. मध्यम तबके की समस्याएं भयानक रूप ले लेती हैं. छाती फाड़ कर काम करने पर भी गरीबों को पेटभर भोजन नहीं मिलता है. आम परिवारों के बच्चों को पोषक आहार न मिलने से उन का उचित विकास नहीं हो पाता है.

गरीब परिवार के लड़केलड़कियों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देनी पड़ती है. लड़कियों के हाथ समय पर पीले नहीं हो पाते हैं. मध्यम तबके के लोग कर्ज के बोझ से दब जाते हैं. चोरी, रिश्वतखोरी, डकैती, तस्करी, गुंडागीरी जैसी सामाजिक बुराइयों के पीछे महंगाई का ही हाथ होता है. मगर, सरकार चैन की नींद सो रही है.

सवाल हर जगह से उठाए जा रहे हैं, क्योंकि यह लोकतंत्र है, मगर हाय रे… एक तो करेला, दूसरे नीम चढ़ा. हमारी सरकार और नादान कैबिनेट के पास चीजें महंगी होने की बेवकूफाना वजहें मौजूद हैं, मगर उन्हें रोकने का एक भी उपाय नहीं है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का वह बयान ही ले लीजिए, जो एक समय में देशविदेश में खूब वायरल हुआ था. तब संसद में प्याजलहसुन की कीमत आसमान छूने के सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा था, “मैं क्या करूं, अगर लहसुन 500 रुपए किलो है. हमारे घर में तो सदियों से लहसुन कोई नहीं खाता.”

अच्छा अब उन बाबा रामदेव का क्या करें, जो बहुत सारी बीमारियों से बचने पर बात करते हुए लहसुन खाने को कहते हैं और लहसुन का तेल बना कर बदन की मालिश करने को कहते हैं? वैसे, एक बेतुका बयान बाबा रामदेव ने भी दिया था, जो खूब वायरल हुआ था कि ‘दाल तो पानी जैसी पतली ही खानी चाहिए, गाढ़ी दाल नुकसान करती है’.

आज बाजार में सब्जियों, फलों, दूध और उस से बने सामान, अंडे, मछली और मीट की कीमतें पिछले 10 साल की तुलना में कई गुना ज्यादा बढ़ गई हैं. इस महंगाई का असर सब से ज्यादा गरीब तबके पर पड़ता है.

सोचिए कि महज 100 रुपए रोजाना की आमदनी पर गुजारा करने वाले देश के 120 करोड़ निचले तबके के लोग अपना पेट कैसे भरते होंगे? जाहिर है कि इन तमाम लोगों को शायद एक समय या दोनों समय खाली पेट ही तरसना पड़ता होगा.

दिल्ली में साधारण सी दुकानों में भी चाय का एक कप 10 रुपए से कम पर नहीं मिलता. अब तो आलू और प्याज की कीमतें भी बढ़ गई हैं. दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली और मीट के दामों ने मध्यम वर्ग के लोगों की जिंदगी भी मुश्किल बना दी है. यह न तो भीख मांग सकता है, न चोरी कर सकता है, न बोल सकता है, न ही आह भर सकता है, पर सरकार की आंखों पर ऐसा परदा पड़ा है कि वह हर चीज से बेखबर है.

सरकार की लोकल लैवल पर ही स्टौक जमा करने वालों और आढ़तियों से पूरी जुगलबंदी रहती है और हमारे भारत मे तो कारोबारियों की यह खास धूर्तता है कि बाजार में एक बार खुदरा कीमतें बढ़ने के बाद वे भरसक इस कोशिश में लगे रहते हैं कि दाम कम न हों. मसलन, आप ही बताएं कि आज तक क्या दूध, मक्खन, पनीर, घी के दाम कभी कम हुए हैं?

यह सरकार अपने पहले और दूसरे कार्यकाल में बारबार लोगों को कितना झूठा दिलासा देती रही है कि बस अब कुछ समय के बाद कीमतें गिरने लगेंगी, मगर कीमतें सरकार को मुंह चिढ़ाती रहती हैं और सरकार चुपचाप देखती रहती है.

अब एक और नौटंकी शुरू हो जाती है कि सरकार के पाले और पुचकारे हुए धर्मगुरु मैदान में अपनी मां समान सरकार की इज्जत बचाने के लिए सामने आ जाते हैं और ऐसे ऊलजुलूल बयान देने लगते हैं कि जनता को ज्यादा नहीं खाना चाहिए, पर नादान लोग ज्यादा खुराक लेने लगे हैं, इसलिए मांग की तुलना में सप्लाई कम हुई है.

यह कुछ वैसा ही कहना है, जो अमेरिका जैसे पश्चिमी देश कहते रहे हैं कि भारत और चीन में लोग पहले की तुलना में ज्यादा खाने लगे हैं, इसलिए महंगाई बढ़ रही है. यह देखसुन कर बहुत हंसी और गुस्सा दोनों ही आते हैं, पर सवाल वहीं का वहीं रह जाता है कि समस्या तो सामान की बाजार में उपलब्धता का है, उस की सप्लाई का है, जिसे प्रभावित कर कीमतें बढ़ाई जाती हैं.

इस सब के बावजूद आज भी सरकार अगर ईमानदारी से चाहे तो इसी पल से कीमतों को कंट्रोल कर सकती है, मगर इस के लिए उसे अपने कुछ अति मुंह लगे अंबानी और अडानी जैसों को डपट कर, फटकार कर खूब कड़े कदम उठाने पड़ेंगे.

हमारे यहां पाखंड भरा वादा कारोबार, आयातनिर्यात में दिशाहीनता, बेहिसाब जमाखोरी और जबरदस्त कालाबाजारी की समस्याएं भी दीमक बन रही हैं. सरकार यहां भी सुधार कर सकती है. इस से मंहगाई पर कुछ तो अंकुश लगेगा. कहीं दाल 200 रुपए किलो तक स्थिर हो गई तो आने वाली पीढ़ियां दाल का नाम और रंग तक नहीं जान सकेंगी, जबकि भारत एक कृषि प्रधान देश है.

आखिर कब पड़ती है किसी और की जरूरत

Sex News in Hindi: वैवाहिक जीवन (Married Life) में सैक्स की अहम भूमिका होती है. लेकिन यदि पति किसी ऐबनौर्मल सैक्सुअल डिसऔर्डर (Abnormal Sexual Disorder) से ग्रस्त हो, तो पत्नी की जिंदगी उम्र भर के लिए कष्टमय हो जाती है. (Sexologist) सैक्सोलौजिस्ट डा. सी.के. कुंदरा ऐबनौर्मल सैक्सुअल डिसऔर्डर के बारे में बताते हुए कहते हैं कि उन की क्लीनिक में शादी के बाद कृष्णानगर की मृदुला अपनी मां के साथ आई. हुआ यह था कि शादी के बाद मृदुला एकदम बुझीबुझी सी मायके आई, तो उस की मां उसे देख कर परेशान हो गईं. लेकिन मां के लाख पूछने पर भी उस ने कोई वजह नहीं बताई. उस ने अपनी सहेली आशा को बताया कि वह अब ससुराल नहीं जाना चाहती, क्योंकि उस के पति महेश उस से संबंध बनाने के दौरान उस के यौनांग में बुरी तरह से चिकोटी काटते हैं और पूरे शरीर को हाथ फेरने के बजाय नाखूनों से खरोंचते हैं. जिस से घाव बन जाते हैं, हलका खून निकलता है. उसे देख कर महेश खुश होते हैं. फिर संबंध बनाते हैं. यह कह कर मृदुला रोने लगी. डा. कुंदरा ने आगे बताया कि आशा ने जब उस की मां को यह बात ताई तो वे मृदुला को ले कर मेरे पास आईं.

मृदुला की तरह कई महिलाएं अपनी पीड़ा को व्यक्त नहीं कर पाती हैं. मृदुला का पति ऐबनौर्मल सैक्सुअल डिसऔर्डर से ही पीडि़त था. इस स्थिति में स्त्री के लिए पूरी जिंदगी ऐसे पुरुष के साथ बिताना असंभव हो जाता है. उसे ऐसे किसी व्यक्ति की जरूरत महसूस होने लगती है, जो उस के मन की बात को समझे और उसे क्या करना चाहिए, इस के बारे में बताए.

कारण

सैक्सोलौजिस्ट डा. रामप्रसाद शाह के मुताबिक, ऐबनौर्मल सैक्सुअल डिसऔर्डर से व्यक्ति कई कारणों से ग्रसित होता है:

सैक्सफेरामौन: यानी गंध के प्रति कामुकता. ऐेसे पुरुष स्त्री देह की गंध से उत्तेजित हो कर सैक्स करते हैं. ऐसे में कोई भी स्त्री, जिस की देह गंध से ऐसा व्यक्ति उत्तेजित हुआ हो, उसे हासिल करने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है.

ऐक्सेसिव डिजायर: दीपक की उम्र 60 साल से ऊपर है. इस के बावजूद भी वह घर से बाहर सब्जी बेचने वाली, घरों में काम करने वाली और सस्ती कालगर्ल से कभीकभी सुबह तो कभी रात भर रख कर संबंध बनाता है. संबंध बनाने के लिए वह शराब का भी सहारा लेता है. घर वाले उस से परेशान रहते हैं, इसलिए उस से अलग और दूर रहते हैं. ऐसे शारीरिक संबंध बनाने वाला व्यक्ति ऐक्सेसिव डिजायर  पीडि़त होता है.

फेटिशिज्म: इस में व्यक्ति उन चीजों के प्रति आकर्षित रहता है, जो उस की सैक्स इच्छाओं को पूरा करने में सहायक होती हैं. जैसे सैक्सी किताबें, महिलाओं के अंडरगारमैंट्स और दोस्तों से सैक्स की बातें करना.

लक्ष्मी नगर की निशा का कहना है कि उस के पति दिनेश हमेशा दोस्तों के साथ किनकिन महिलाओं के साथ सहवास कबकब और कैसेकैसे किया जैसी बातें हमेशा करते हैं. उस के बाद वह निशा से संबंध बनाने की कोशिश करते हैं. ऐसे व्यक्ति महिलाओं को छिप कर देखने के साथ उन के साथ संबंध बनाने के लिए आतुर भी रहते हैं.

बस्टियैलिटी: ऐसे पुरुष पर सैक्स इतना हावी हो जाता है कि वह किसी से भी सहवास करने में नहीं झिझकता. जयपुर का रमेश अपनी इसी आदत की वजह से अपनी साली की 14 साल की लड़की से शारीरिक संबंध बना बैठा. ऐसे पुरुषों द्वारा अकसर रिश्तों की मर्यादा को ताक पर रख कर ऐसे संबंध बनाए जाते हैं. ऐसे में असहाय महिलाएं, लड़कियां, यहां तक कि पशु भी गिरफ्त में आ जाते हैं.

ऐग्जिबिशनिज्म: इस से ग्रस्त व्यक्ति अपने गुप्तांग को महिला या छोटेछोटे बच्चेबच्चियों को जबरदस्ती दिखाता है. इस से उसे खुशी के साथ संतुष्टि भी मिलती है. लेकिन इस से अप्रत्यक्ष रूप से ही सही हानि होती है इसलिए इसे अब गैरकानूनी की धारा में रखा जाता है. इस में जुर्माना और कैद भी है.

पीडोफीलिया: इस सैक्सुअल डिसऔर्डर से पीडि़त पुरुष अकसर छोटी उम्र की लड़कियों व लड़कों से संबंध बना कर अपनी कामवासना को संतुष्ट करता है. नरेंद्र की उम्र 50 के ऊपर हो चुकी थी पर वह बारबार 14 से 15 साल की नाबालिग लड़की से शारीरिक संबंध बनाने की लालसा रखता था. आखिर उस ने नाबालिग से संबंध बना ही डाला और कई दिनों तक सहवास करता रहा. अंत में पकड़े जाने पर नेपाल की जेल में 14 साल की सजा काट रहा है.

वैवाहिक रेप

हालांकि यह अजीब सा लगता है कि विवाह के बाद पति द्वारा पत्नी का रेप. लेकिन इस में कोई दोराय नहीं कि आज भी कई विवाहित महिलाओं को इस त्रासदी से गुजरना पड़ता है, क्योंकि अकसर पति अपनी पत्नी की इच्छाओं, भावनाओं को भूल कर जबरन यौन संबंध बनाता है. यह यौन शोषण और बलात्कार की श्रेणी में आता है. हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 375 और 379 के तहत पत्नी को अधिकार है कि वह ऐसा होने पर कानूनी तौर पर तलाक ले सकती है.

समाधान

सैक्सोलौजिस्ट डा. रामप्रसाद शाह का कहना है कि ऐसी स्थिति में नईनवेली दुलहन को संयम से काम लेना चाहिए. वह पति की उपेक्षा न कर के व ताना न दे कर प्यार से उसे समझाए.

सामान्य सहवास के लिए प्रेरित करे. ऐसे लोगों का मनोचिकित्सक द्वारा इलाज किया जा सकता है. ऐसे मरीज की काउंसलिंग की जाती है और बीमारी किस हद तक है पता चलने पर सलाह दी जाती है. अगर पति तब भी ठीक न हो और मानसिक व शारीरिक पीड़ा पहुंचाए, तो पत्नी तलाक ले कर अपनी जिंदगी को नई दिशा दे सकती है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि मस्तिष्क में स्थित न्यूरो ट्रांसमीटर में किसी प्रकार की खराबी, मस्तिष्क में रासायनिक कोशिकाओं में कमी, जींस की विकृति आदि इस समस्या की वजहें होती हैं और अकसर 60 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्ति इस के शिकार होते हैं. गलत संगत, अश्लील किताबें पढ़ना, ब्लू फिल्में देखना आदि भी इस में सहायक होते हैं.

मैं तीसरा बच्चा चाहती हूं पर बच्चा ठहर नहीं रहा है, मैं क्या करूं?

सवाल-

मेरी 2 बेटियां हैं. बड़ी 14 साल की और छोटी 11 साल की. घर में सब ताना मारते हैं कि बेटा क्यों नहीं है. मैं तीसरा बच्चा चाहती हूं, पर बच्चा ठहर नहीं रहा है. मैं क्या करूं?

जवाब-

आजकल के जमाने में 2 बच्चे पालने में ही पसीने छूट जाते हैं. लड़के की चाहत में और जोखिम न उठाएं. अगर पेट से हो भी गईं और तीसरी औलाद भी लड़की हुई तो आप क्या करेंगी? आप लोगों के ताने नजरअंदाज करते हुए अपनी दोनों लड़कियों को ही पढ़ालिखा कर काबिल बनाएं.

बदनसीब बाप : साबिर क्यों था अपने बेटों का कुसूरवार

साबिर बिजनौर जिले के एक शहर में अपने परिवार के साथ रहता था. घर में बीवी शबनम और 2 बेटों तसलीम और शमीम के अलावा कोई और नहीं था.

साबिर का लकड़ी पर नक्काशी करने का कारोबार था. वह लकड़ी की जूलरी बनाता और उन पर नक्काशी कर के खूबसूरत डिजाइन तैयार करता था, जिसे वह ऐक्सपोर्ट कर के अच्छाखासा पैसा कमा लेता था.

घर में किसी चीज की कोई कमी न थी. उस के दोनों बेटे भी बड़े होशियार थे और बचपन से ही उस के काम में हाथ बंटाते थे. यही वजह थी कि जवान होतेहोते वे भी अच्छे कारीगर बन गए थे.

साबिर बचपन से ही अपने बड़े बेटे तसलीम से ज्यादा प्यार करता था. इस की वजह यह थी कि छोटा बेटा शमीम पिछले कुछ समय से आवारा लड़कों की संगत में रहता था और खूब फुजूलखर्ची करता था, जबकि तसलीम अपने बाप की हर बात मानता था और बिना उन की मरजी के कोई काम नहीं करता था.

ज्योंज्यों छोटा बेटा शमीम बड़ा होता जा रहा था, उस के खर्चे भी बढ़ते जा रहे थे. आवारा दोस्तों ने उसे निकम्मा बना दिया था. बाप की डांटडपट से तंग आ कर वह अपने दोस्तों के साथ मुरादाबाद चला गया और काफी अरसे तक वहीं रहा. वह जो कमाता था उसे अपने आवारा दोस्तों के साथ रह कर घूमनेफिरने पर खर्च कर देता था.

बड़ा बेटा तसलीम अपने अब्बा के साथ रह कर उन के हर काम में हाथ बंटाता था, जिस की वजह से उन का कामधंधा जोरों पर था और खूब तरक्की हो रही थी. अब्बा ने अपने भाई की बेटी सायरा से तसलीम का रिश्ता तय कर दिया था.

कुछ महीनों के बाद तसलीम की शादी थी, इसलिए छोटा बेटा शमीम भी घर आया हुआ था. घर में खुशी का माहौल था, पर शमीम मुरादाबाद जा कर और ज्यादा बिगड़ गया था. वह बदचलन भी हो गया था.

घर में मेहमानों का आनाजाना शुरू हो गया था. शादी में कुछ दिन बाकी रह गए थे. शमीम अपने चाचा के घर अपनी होने वाली भाभी सायरा से मिलने गया था.

जब शमीम घर पहुंचा, तो घर पर कोई नहीं था. बस, सायरा ही अकेली वहां थी, बाकि सब लोग शादी की खरीदारी के लिए बाजार गए थे.

सायरा शमीम को जानती थी, इसलिए उस ने शमीम को अंदर आने दिया और उसे बैठा कर चाय बनाने रसोईघर में चली गई.

कुछ देर बाद जब सायरा चाय बना कर वापस आई, तो पसीने की बूंदें उस के चेहरे पर मोतियों की तरह चमक रही थीं. रसोईघर की गरमी की वजह से उस का चेहरा सुर्ख हो गया था. गुलाबी होंठ ऐसे खिल रहे थे, जैसे कोई गुलाब हो.

शमीम सायरा को एकटक देखता रहा. इतनी हसीन लड़की को देख कर उस के अंदर का शैतान जाग उठा.

शमीम के दिल में हलचल मच चुकी थी. उस ने बिना वक्त गंवाए सायरा को अपनी बांहों में भर लिया और उस के होंठों पर चुंबनों की बौछार कर दी. उस की यह हरकत देख कर सायरा ने शोर मचाना शुरू कर दिया.

आवाज सुन कर आसपास के लोग आ गए और शमीम को पकड़ कर उस के घर ले गए और पूरा वाकिआ साबिर को बताना शुरू कर दिया.

साबिर ने शमीम को डांटते हुए घर से धक्के मार कर भगा दिया और बाद में अपनी जायदाद से भी बेदखल कर दिया. उस ने अपना घर अपने बड़े बेटे तसलीम के नाम कर दिया.

अगले दिन तसलीम की बरात जाने वाली थी. घर के सभी लोग अपनेअपने काम में मसरूफ थे कि तभी घर के पास एक गली से तसलीम के चीखने की आवाज आई.

लोग उधर दौड़े तो देखा कि तसलीम खून में लथपथ पड़ा कराह रहा था और उस के पास हाथ में चाकू लिए शमीम खड़ा हुआ चिल्ला रहा था, ‘‘मेरा हिस्सा तू कैसे ले सकता है? यह घर मेरा भी है. तू अकेला इस का मालिक कैसे बन सकता है? मैं अपने हिस्से के लिए किसी की भी जान ले सकता हूं…’’

किसी ने फौरन पुलिस को फोन कर दिया और कुछ लोगों ने हिम्मत कर के शमीम को पकड़ लिया.

तसलीम को अस्पताल में भरती कराया गया, पर कुछ ही देर में ही उस ने दम तोड़ दिया.

शमीम को पुलिस ने गिरफ्तार कर हत्या का मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया.

बदनसीब बाप की दोनों औलादें उस से जुदा हो गईं. एक जेल पहुंच गया और दूसरा दुनिया ही छोड़ कर चला गया.

साबिर इस घटना के लिए खुद को कुसूरवार मान रहा था और लोगों से कहता फिरता था, ‘‘मैं ने खुद अपने बेटे को मार डाला. छोटे बेटे का हिस्सा अगर बड़े बेटे के नाम न करता, तो आज वह उस के खून का प्यासा न होता और ऐसा कदम न उठाता…’’

अंधा प्यार : क्या जायज था राबिया का गुलछर्रे उड़ाना

राजू की शादी खुशी से तकरीबन एक साल पहले हुई थी. खुशी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के एक गांव में अपने परिवार के साथ रहती थी. राजू से शादी होने के बाद वह उस के साथ मुंबई आ गई थी.

राजू काम में ज्यादा बिजी रहता था, पर जब भी वह घर आता, तो हर वक्त खुशी को अपनी बांहों मे भरे रहता था और उसे कभी यह अहसास नहीं होने देता था कि वह घर पर कम वक्त देता है.

राजू खुशी का बहुत ध्यान रखता था. घर के कामों में भी पूरी मदद करता था. उसे जिस चीज की जरूरत होती, उसे फौरन हाजिर करता था.

खुशी एक दिन नहा कर बाथरूम से निकल ही रही थी कि वह फिसल कर गिर पड़ी और उस के पैर की हड्डी टूट गई. डाक्टर ने उस के पैर पर प्लास्टर चढ़ा दिया और डेढ़ महीना बिस्तर से उठने को मना कर दिया.

घर आ कर खुशी ने राजू से कहा, ‘‘क्यों न एक महीने के लिए अपनी मां को यहां बुला लूं?’’

राजू ने कहा ‘‘हमारा घर छोटा है, इस में तुम्हारी मां कैसे एडजस्ट करेंगी?’’

खुशी बोली, ‘‘वह सब तुम मु झ पर छोड़ दो. हम तीनों यहीं सो जाया करेंगे.’’

राजू ने कुछ सोच कर कहा, ‘‘ठीक है, जैसी तुम्हारी मरजी. हम तो तुम्हारे गुलाम हैं. तुम्हें जैसा अच्छा लगे वही करो.’’

कुछ ही दिनों में खुशी की मां राजू के घर आ गईं. रात में तीनों फर्श पर बिस्तर बिछा कर सो गए. एक तरफ खुशी की मां, बीच में खुशी और दूसरी तरफ राजू. इस तरह तीनों ने एडजस्ट कर लिया. अगले दिन से ही खुशी की मां राबिया ने घर का सारा कामकाज संभाल लिया.

राजू की सास राबिया में एक अजीब सी कशिश थी. खुशी और उन्हें देख कर कोई भी यह नहीं कहता था कि वे दोनों मांबेटी हैं, बल्कि ऐसा लगता था, जैसे वे बहनें हों.

राबिया देखने में भी खुशी से बहुत ज्यादा खूबसूरत थीं. गदराया बदन, गुलाबी गाल, सुर्ख होंठ उन की खूबसूरती में चार चांद लगाए रहते थे.

रात का समय था. वे तीनों सो रहे थे. इसी बीच खुशी को बाथरूम जाना था. राबिया उसे सहारा दे कर बाथरूम ले गईं और उस के आने के इंतजार में बिस्तर पर आ कर लेट गईं.

नींद में करवट बदलते वक्त राजू का हाथ अपनी सास की छाती से छू गया. राजू ने उन्हें खुशी सम झ कर अपनी बांहों में भर लिया और उन के बदन को सहलाने लगा.

राबिया राजू के मजबूत हाथों की छुअन पाते ही मदहोश होने लगीं. उन्हें एक अजीब सा मजा महसूस होने लगा और धीरेधीरे उन्होंने अपने बदन को राजू की बांहों में धकेल दिया.

राजू हरकत कर रहा था और राबिया पूरी तरह मदहोश हो रही थीं. उन्होंने राजू को अपनी बांहों में पकड़ लिया और उस के होंठों पर अपने होंठ रख कर चुंबनों की बौछार कर दी.

इसी बीच राजू की नींद खुल गई. बांहों में अपनी सास राबिया को देख पहले तो वह थोड़ा हिचकिचाया, पर जल्द ही राबिया ने उस के बदन को चूम कर उस की हिचकिचाहट दूर कर दी.

अभी वे दोनों एकदूसरे के बदन से लिपटे हुए ही थे कि खुशी ने आवाज लगाई, ‘‘अम्मी, मु झे सहारा दो.’’

खुशी की आवाज सुन कर वे दोनों हड़बड़ा कर एकदूसरे से अलग हुए और दोनों के बदन की जलती हुई आग जहां की तहां थम कर रह गई.

उस रात राबिया ठीक से सो नहीं पाईं. उन्हें रहरह कर राजू के मजबूत हाथों की पकड़ सताने लगी थी.

राबिया एक जवान औरत थी. उन के बदन की आग को बूढ़ा शौहर ठंडा नहीं कर पाता था, क्योंकि उम्र के ज्यादा अंतर के हिसाब से राबिया की जवानी जब उफान पर थी, तब उन का शौहर बूढ़ा हो चुका था.

अगले दिन जब राबिया सुबह उठीं, तो उन्होंने तिरछी नजरों से राजू को देखा, जो नजरें चुरा कर उन्हें ही घूर रहा था. राबिया ने आज राजू को नाश्ता देते वक्त अपनापन जाहिर किया और उसे बड़े प्यार से नाश्ता कराया.

दोनों तरफ से नजरों ही नजरों में एकदूसरे के लिए चाहत गोते मार रही थी और दोनों मिलने के लिए मौके की तलाश में थे. जब रहा नहीं गया, तब राबिया ने राजू से कह दिया, ‘‘मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती. मु झे किसी भी कीमत पर तुम्हारा प्यार चाहिए. उस के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूं.’’

राजू ने कहा, ‘‘ठीक है, मैं आज नींद की गोली लाता हूं. तुम उसे खुशी के दूध में मिला कर दे देना. जब वह गहरी नींद में सो जाएगी, तब हम एक हो जाएंगे.’’

राबिया ने रात को खुशी के दूध में नींद की गोली डाल दी और उसे वह दूध पिला दिया. जब खुशी गहरी नींद में सो गई, तब राबिया बिना वक्त गंवाए राजू के पास आ गईं और उस पर चुंबनों की बौछार करने लगीं.

आज वे रिश्तों की हर हद को पार करने का इरादा कर चुकी थीं. बरसों से थमी अपने जिस्म की आग को वे राजू जैसे जवां मर्द से ठंडा करने के लिए बेताब हो रही थीं. इस बेताबी में उन्होंने राजू के जिस्म के हर हिस्से को चूमचूम कर लाल कर दिया.

राजू राबिया का गोरा और गदराया बदन देख कर ऐसा दीवाना हुआ कि वह भी सासदामाद के रिश्ते को भूल गया और राबिया को अपनी बांहों में भर कर उन के अंगों से खेलने लगा.

राजू की इस हरकत से राबिया मदहोश होने लगीं. राजू ने पूरी ताकत से राबिया को जकड़ कर ऐसा सुख दिया, जो उन्हें अभी तक नहीं मिला था.

अब तो वे दोनों एकदूसरे के ऐसे दीवाने हो गए कि जब भी वक्त मिलता, वे एक हो जाते.

कहते हैं कि गलत काम करने में भले ही कितनी भी सावधानी बरतें, मगर एक न एक दिन वह गलत काम सामने आ ही जाता है. ऐसा ही कुछ राबिया और राजू के साथ भी हुआ.

खुशी का पैर अब सही हो चुका था. उसे चलनेफिरने में कोई तकलीफ नहीं थी. राबिया को वहां 4 महीने गुजर चुके थे. उन का मन अब वहां से जाने को नहीं कर रहा था.

खुशी ने एक दिन राबिया से पूछा, ‘‘अम्मी, आप का टिकट निकलवा दूं? कब जाने का इरादा है? घर पर अब्बा भी अकेले हैं.’’

राबिया बोलीं, ‘‘तुम मु झे अपने घर से भगाना चाहती हो क्या? जब तक तुम बिलकुल सही नहीं हो जाती, मैं तुम्हें छोड़ कर नहीं जाऊंगी.’’

खुशी बोली, ‘‘मैं तो अब ठीक हो गई हूं. चलफिर भी सकती हूं.’’

इस पर राबिया ने कहा, ‘‘ठीक है, मैं तुम्हें बताती हूं.’’

राबिया राजू को छोड़ कर जाना नहीं चाहती थीं. राजू ने इन 4 महीनों में राबिया को जो जिस्मानी सुख दिया था, वे उसे खोना नहीं चाहती थीं. उन के बेजान जिस्म को राजू ने अपने प्यार से तराश कर एक नई महक भर दी.

आज राबिया अपने दामाद राजू की इतनी दीवानी हो चुकी थीं कि जो उन्हें उस से दूर करने की कोशिश करता, वे उसे अपना सब से बड़ा दुश्मन सम झने लगी थीं.

राजू भी अपनी सास का ऐसा दीवाना बना हुआ था कि अब उसे अपनी बीवी से भी कोई लगाव नहीं था. वह तो बस अपनी सास राबिया के गोरे और गदराए बदन का दीवाना बना बैठा था.

शाम का समय था. हलकीहलकी बारिश हो रही थी. राजू भीग चुका था. आज वह काम से जल्दी घर आ गया था. उस ने घर की डोरबैल बजाई. सामने राबिया खड़ी थीं. उन के बाल बिखरे हुए थे.

बाल हटाते हुए जैसे ही राबिया ने अपना मुसकराता हुआ चेहरा राजू के सामने किया, राजू दीवानों की तरह देखता ही रह गया और बोला, ‘‘वाह, क्या नजारा है. ऐसा लग रहा है, जैसे कोई चांद बादलों को चीरता हुआ सामने आ गया हो.’’

राजू अंदर आया. उस के कपड़े पूरी तरह भीग चुके थे. शरीर का हर अंग साफसाफ नजर आ रहा था. राबिया बोलीं, ‘‘जल्दी कपड़े बदलो, नहीं तो बीमार पड़ जाओगे.’’

राजू ने इधरउधर देखा. खुशी वहां नहीं थी. वह वहीं कपड़े उतारने लगा. राबिया तौलिए से उस के बाल सुखाने लगीं. राबिया के छूने से राजू का हर अंग मचलने लगा. दोनों एकदूसरे का प्यार पाने के लिए उतावले हो उठे.

जल्द ही राजू और राबिया ने अपनेअपने कपड़े उतारे और एकदूसरे को बेतहाशा चूमने लगे. जल्दीजल्दी में घर का दरवाजा बंद करने का भी उन्हें खयाल न रहा. वे दोनों एकदूसरे को बेतहाशा चूम रहे थे और अपनी रासलीला में इतने मगन थे कि उन्हें कुछ होश न था.

इतने में खुशी वहां आ गई. उस ने जैसे ही दरवाजा धकेला, तो अंदर का नजारा देख उस के होश उड़ गए.

खुशी अपनी मां पर चिल्लाते हुए बोली, ‘‘तुम्हें मेरा ही घर मिला था बरबाद करने को. अपने ही दामाद से नाजायज रिश्ता बनाते हुए तुम्हें शर्म नहीं आई.’’

इस के बाद खुशी राजू पर बरसते हुए बोली, ‘‘तुम्हें अपनी मां जैसी सास के साथ यह सब करते हुए शर्म आनी चाहिए. लानत है तुम जैसे शौहर पर, जो अपनी सास के साथ ऐसा घिनौना रिश्ता बना रहे हो. अभी मैं तुम दोनों की काली करतूत अब्बा को बताती हूं,’’ कहते हुए खुशी अपने अब्बा के पास फोन करने ही वाली थी कि राबिया ने खुशी के सिर पर पास रखे गमले से ऐसी चोट की कि वह नीचे गिर पड़ी.

राजू ने फौरन खुशी के हाथ से फोन छीन लिया और उस का गला दबाने लगा.

राबिया खुशी के हाथपैर पकड़ कर चिल्लाने लगी, ‘‘राजू, मार दो इसे. इस के जीतेजी हम एक नहीं हो सकते. अगर यह जिंदा रही, तो हमारी असलियत सब को बता देगी,’’ और उस के बाद राजू और राबिया ने मिल कर खुशी को मौत के घाट उतार दिया.

खुशी की लाश घर में पड़ी थी. उसे देख कर वे दोनों इस चिंता में थे कि अब इस का क्या करें और कैसे पुलिस से बचें? देह की प्यास बु झाने के चक्कर में उन दोनों ने अपने रिश्ते को तो शर्मसार किया ही, साथ ही एक मां ने अपने नाजायज रिश्ते के चलते अपनी ही बेटी का खून कर दिया.

उर्फी ने किया शौक्ड, टॉपलेस होकर प्लास्टिक से ढकी बौड़ी

टीवी एक्ट्रेस फेम उर्फी जावेद अपनी यूनिक ड्रेस को लेकर हमेशा मीडिया की लाइमलाइट में रहती हैं. उर्फी जावेद कब किस चीज से अपनी ड्रेस तैयार कर लें कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता है. उर्फी जावेद अक्सर अपने अतरंगी ड्रेसिंग सेंस की झलक सोशल मीडिया पर दिखाती रहती हैं. ऐसा उर्फी ने एक बार फिर सबको हैरान कर दिया है. एक ऐसा वीडियो शेयर किया है. जिसे देख सभी शौक्ड़ है.

 

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जी हां, टौपलेस होकर उर्फी ने चम्मचों से अपने बदन को ढ़का है. उर्फी जावेद ने प्लास्टिक के चम्मच का इस्तेमाल कर अपने बदन को कवर किया है. उर्फी जावेद के वीडियो पर लोग जमकर रिएक्शन दे रहे हैं. उर्फी जावेद के फैंस जहा उनकी क्रिएटिविटी की तारीफ कर रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया के तमाम यूजर्स ने उन्हें ट्रोल किया है.

उर्फी जावेद ने शुक्रवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि वह अपने साथियों के साथ प्लास्टिक के स्पून की ड्रेस बना रही हैं. इसके बाद उर्फी जावेद टॉपलेस होकर प्लास्टिक स्पून से बनी यूनिक ड्रेस को पहने नजर आ रही हैं. उर्फी जावेद ने अपनी नई ड्रेस के वीडियो के साथ लिखा है, ‘स्पूनफुल’ उर्फी जावेद का बोल्ड अंदाज वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. उर्फी जावेद के इस वीडियो पर लोग कमेंट कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा है, ‘समंदर के प्लास्टिक कचरे से बनी जलपरी.’ एक यूजर ने लिखा है, ‘ये जरूर दूसरे गोला से आई है.’ एक यूजर ने लिखा है, ‘बेशर्मी की झाड़ू.’ एक यूजर ने लिखा है, ‘भिखारी.

 

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वर्क फ्रंट की बात करें तो उर्फी जावेद ने साल 2016 में टीवी इंडस्ट्री में शो ‘बड़े भैया की दुल्‍हनिया’ से अपने करियर की शुरुआत की थी. उर्फी जावेद ने कई टीवी शोज में काम किया है.उर्फी जावेद कई रियलिटी शोज में भी नजर आ चुकी हैं. हालांकि, उर्फी जावेद के अपने यूनिक ड्रेसिंग और फैशन सेंस से काफी ज्यादा पॉपुलैरिटी मिली है.

मन्नारा चोपड़ा को सताने पर बोलीं प्रियंका चोपड़ा की मां, ईशा-अंकिता को लगाई फटकार

इन दिनों बिग बौस सीजन 17 का अच्छा खासा बज बन हुआ है टीवी से लेकर सोशल मीडिया पर कंटस्टेंट को लेकर बवाल मचा हुआ है, वही इस बात से तो सभी वाकिफ है. इस शो में ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा की कजिन मनारा चोपड़ा इन दिनों बिग बॉस 17 में छाई हुई हैं. एक्ट्रेस मनारा चोपड़ा का गेम दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है. जिसके बाद एक्ट्रेस ने फिनाले वीक में भी अपनी जगह बना ली है. इसी बीच प्रियंका चोपड़ा की मां मधु चोपड़ा भी अपने घर की बेटी के समर्थन में आ खड़ी हुई हैं.

 

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आपको बता दें कि बीते दिनों टॉर्चर टास्क के बाद मनारा चोपड़ा और बाकी घरवालों के बीच बड़ा झगड़ा देखने को मिला था. जिसमें मनारा चोपड़ा अपने दोस्त मुनव्वर फारुकी को बचाने के लिए उनकी गोद में बैठी नजर आई थी. जिस पर टीम बी के सदस्य अंकिता, ईशा और आयशा खान ने काफी बवाल मचाया था. इस घटना का एक एडिटेड वीडियो अब मनारा चोपड़ा ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया. इस वीडियो को शेयर कर अदाकारा की टीम ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘शर्म करो सभी. हम इसे गेम नहीं कहते. हम हर किसी की असलियत यहां देख रहे हैं.’

मनारा चोपड़ा के इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो पर लोगों ने जमकर कमेंट्स कर रहे है. इसमें  प्रियंका चोपड़ा की मां मधु चोपड़ा का भी नाम है. उन्होंने इस वीडियो पर कमेंट कर लिखा, ‘हे भगवान. वो बिल्कुल जंगली की तरह बर्ताव कर रहे हैं.’ मनारा चोपड़ा के इंस्टाग्राम पर शेयर किया ये वीडियो अब एंटरटेनमेंट न्यूज वर्ल्ड में छाया हुआ है.

 

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प्रियंका चोपड़ा की मामी की बेटी मनारा चोपड़ा अब शो के फिनाले में पहुंच गई हैं. वो टॉर्चर टास्क में अपनी परफॉर्मेंस से लोगों का दिल जीत ले गईं. इसके साथ ही अब वो टॉप 5 कंटेस्टेंट्स की लिस्ट का हिस्सा बन गई हैं. मनारा चोपड़ा को उनके परिवार से लेकर फैंस भी खूब सपोर्ट कर रहे हैं. इसके साथ ही अब हर किसी की नजर मनारा चोपड़ा पर टिकी है. क्या वो बिग बॉस 17 का विनर बन पाएंगी या नहीं. ये बात हर किसी के बीच उत्सुकता पैदा कर रही है.

तंत्रमंत्र से पत्नी की मौत

कई बार कोई जानलेवा बीमारी किसी इनसान को तंत्रमंत्र के रास्ते पर ले जाती है. आज हम भले ही मौडर्न जमाने में जीने की बातें करते हों, फिर भी समाज में अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि लोग कई बार इलाज कराने के बदले तंत्रमंत्र के चक्कर में पड़ जाते हैं और आखिर में नतीजा उन की बरबादी के रूप में ही सामने आता है.

एक ऐसे ही मामले में गरीब आटोरिकशा ड्राइवर को पैर की बीमारी से पीडि़त अपनी पत्नी का 6 महीने तक इलाज कराने पर भी जब कोई नतीजा हाथ न लगा, तो उस ने तंत्रमंत्र का सहारा लिया, जो उस की पत्नी के लिए जानलेवा साबित हुआ.

दरअसल, आनंदनगर चार रास्ता के कृष्ण अपार्टमैंट्स में रहने वाले देशराजभाई सरोज की पत्नी खुशियाल

6 महीने से पैर के दर्द से परेशान थी. पहले तो फैमिली डाक्टर से दवा ली, बाद में प्राइवेट अस्पताल मेें इलाज कराया, लेकिन पैर के दर्द से राहत न मिली.

इस से देशराज और खुशियाल बहुत परेशान हो गए. इस दौरान उन को किसी ने बताया कि शायद गठिया का दर्द होगा. उन को पता चला कि जूना वाडज में गठिया की बीमारी का इलाज होता है.

देशराज अपनी पत्नी खुशियाल को रविवार के दिन सुबह जूना वाडज में गठिया के इलाज के लिए ले गया. वहां मिले आदमी ने खुशियाल को शाहपुर में कालू शहीद की दरगाह पर ले जाने की सलाह दी.

देशराज और खुशियाल को तो जैसे डूबते को तिनके का सहारा मिल गया. कालू शहीद की दरगाह पर खुशियाल के ऊपर तंत्रमंत्र का काम शुरू हो गया.

खुशियाल को एक कमरे में ले जाया गया. कमरे का दरवाजा बंद कर दिया गया. बाद में अंदर जलते कोयले में लाल रंग का कोई पाउडर डाल कर इलाज  शुरू हुआ.

इस दौरान खुशियाल बेहोश हो गई. थोड़ी देर बाद उस आदमी ने खुशियाल को घर ले जाने को कहा और यह भी कहा कि वह जल्दी ही ठीक हो जाएगी.

देशराज अपनी पत्नी खुशियाल को आटोरिकशा में घर ले जा रहा था, तब रास्ते में ही उस की हालत बिगड़ने लगी.

खुशियाल का इलाज पहले जिस अस्पताल में चल रहा था, उसे वहां ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डाक्टर ने खुशियाल को मरा हुआ बता दिया.

यह सुन कर देशराज की तो मानो दुनिया ही लुट गई. अपनी पत्नी की मौत से दुखी और गुस्साए देशराज ने आनंदनगर पुलिस स्टेशन में तंत्रमंत्र करने वाले शख्स के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई.

देशराज को इंसाफ मिलेगा या नहीं, यह तो बाद की बात है, लेकिन उस ने तंत्रमंत्र के चक्कर में पड़ कर अपनी पत्नी को जरूर खो दिया.

तालिबान ने लड़कियों से ज्यादा पढ़ने का हक छीना

भा रत की केंद्र सरकार कितना ही गरीबों की भलाई की स्कीमों का ढोल पीट ले, पर एक कड़वी हकीकत यह भी है कि आज भी गरीबी और सामाजिक भेदभाव के चलते दलित और आदिवासी बच्चियों की पढ़ाई छोड़ने की दर सब से ज्यादा है. सरकारी स्कूलों में ऐसी बच्चियों के साथ मिड डे मील परोसने तक में भेदभाव किया जाता है.

कितनी हैरत और शर्म की बात है कि देश आजाद होने के इतने साल बाद आज भी कोई बच्चा नाम और जाति सब से पहले सीखता है और दूसरे बच्चे किस जाति के हैं, यह भी वह अपनेआप सीख जाता है. यही फर्क आगे स्कूली जीवन में भी दिखता है, तभी तो वंचित समाज की लड़कियां जल्दी पढ़ाई छोड़ देती हैं और उन के घर बैठने से या तो वे बाल मजदूरी करती हैं या फिर जल्दी ही कम उम्र में ब्याह दी जाती हैं.

पर भारत का पड़ोसी देश अफगानिस्तान तो एक कदम और आगे निकल गया है. आप ही सोचिए कि सालभर पढ़ाई करने के बाद जब कोई बच्चा इम्तिहान पास करता है, तो नई जमात में पहुंचने का जोश और खुशी हद पर होती है. भविष्य के सुंदर सपने आंखों में तैरते हैं, मगर अफगानिस्तान में छठी जमात पास करने वाली लड़कियों की आंखों में आंसू हैं. वजह, अफगानिस्तान का दमनकारी तालिबानी शासन छठी जमात के बाद लड़कियों को आगे पढ़ने की इजाजत नहीं देता.

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में रहने वाली 13 साला सेतायेश साहिबजादा अपने भविष्य को ले कर चिंतित है और अपने सपनों को पूरा करने के लिए स्कूल न जा पाने के चलते उदास है.

सेतायेश साहिबजादा कहती है, ‘‘मैं अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकती. मैं टीचर बनना चाहती थी, लेकिन अब मैं पढ़ नहीं सकती, स्कूल नहीं जा सकती.’’

13 साल की बहारा रुस्तम काबुल के बीबी रजिया स्कूल में 11 दिसंबर, 2023 को आखिरी बार स्कूल गई थी. उसे पता है कि उसे अब आगे पढ़ने का मौका नहीं दिया जाएगा. तालिबान के राज में वह फिर से क्लास में कदम नहीं रख पाएगी. उस की सारी सहेलियां छूट जाएंगी. अब वह उन के साथ खेल नहीं पाएगी. उन से अपने सुखदुख नहीं बांट पाएगी.

लड़कियों की पढ़ाई पर रोक

अफगानी लड़कियां तालिबानी शासन, जो शरीयत पर चलता है, के तहत छठी जमात पास करने के बाद घरों में कैद कर दी जाएंगी. उन की शादी हो जाएगी, फिर वे बच्चे पैदा करेंगी, नौकरों की तरह ताउम्र किसी दूसरे के घर के काम करेंगी, मारीपीटी जाती रहेंगी, फिर एक दिन मर कर जलील जिंदगी से छुटकारा पा लेंगी.

अफगानी औरतें एक ऐसी जिंदगी जी रही हैं, जहां वे अपना कोई फैसला नहीं ले सकती हैं. किसी के आगे अपनी कोई राय नहीं रख सकती हैं. अपनी मरजी से कोई काम नहीं कर सकती हैं. उन्हें कोई हक नहीं है. वे सार्वजनिक जगहों पर नहीं जा सकतीं. उन्हें नौकरियों से बैन कर उन के घरों तक ही सिमटा दिया गया है.

अफगानिस्तान में इस साल लड़कियों व औरतों की एक पीढ़ी से पढ़ाईलिखाई का हक छीन लिया गया है. अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो अफगानिस्तान में महिला डाक्टर, महिला नर्सें नहीं होंगी. महिलाओं की गर्भ संबंधी दिक्कतों का इलाज, बच्चे की डिलीवरी सब अशिक्षित घरेलू दवाएं करेंगी. वे बचेंगी या मरेंगी, इस की चिंता किसी को नहीं है. शरीयत का शासन अफगानी औरतों की जिंदगी को उस काल में धकेल रहा है, जब इनसान जंगलों में रहा करता था.

धर्म की सत्ता

धर्म की बुनियाद पर खड़े हुए देश और दुनिया में जहां भी धर्म सत्ता चला रहा है, उस देश और समाज में औरतों की औकात दासी की है. वे सिर्फ आदमी के हुक्म की गुलाम हैं. आदमी औरत को घर में कैद कर के रखे, जब चाहे उस के जिस्म को रौंदे, सालदरसाल उस से बच्चे पैदा करवाए, यह आदमी के लिए धर्मसम्मत है. वह हुक्म देता है कि औरत उस का घर साफ करे, उस के लिए लजीज खाना पकाए, बरतन मांजे, उस के बच्चे पाले, उस के घर वालों की खिदमत करे और अगर उस ने इस में कहीं कोई कोताही दिखाई, तो आदमी हंटरों की मार से उस का पूरा जिस्म लहूलुहान कर दे या उसे गोली से उड़ा दे, इस की इजाजत धर्म देता है.

औरत के लिए धर्म से बड़ा दुश्मन कोई नहीं है. अपनी बीवी का दूसरे मर्द से बलात्कार कराने का रास्ता धर्म बताता है. अपनी पत्नी को गर्भावस्था में छोड़ देने और उसे जंगल जाने के लिए मजबूर करने पर धर्म पुरुष की बुराई नहीं करता, बल्कि उसे पुरुषोत्तम बना देता है. एक स्त्री को भरी सभा में नंगा करने पर तमाम धार्मिक लोगों की जबान तालू से चिपक जाती है.

बड़ेबड़े हथियार उठाने वाले सूरमाओं के हाथों को लकवा मार जाता है, नसों का खून बर्फ हो जाता है. धर्म के हाथों औरत की इस बदहाली की कहानियों से धर्मग्रंथ भरे पड़े हैं और मूर्ख औरतें ऐसे धर्मग्रंथों को सिर पर उठाए फिरती हैं.

अफगानिस्तान में जब तालिबानी अपना दबदबा कायम करने की कोशिशों में थे, तब शरीयत का शासन चाहने वालों में औरतें भी शामिल थीं. हैरानी होती है कि जिस धर्म को हथियार बना कर प्राचीनकाल से मर्द औरत पर हावी रहा, उस पर जोरजुल्म करता रहा, उस को अपना गुलाम बनाए रखा, उस धर्म का त्याग करने के बजाय औरत दिनरात उस के महिमामंडन और प्रसार में क्यों लगी है?

दुनियाभर में चाहे कोई भी धर्म हो, औरतें बढ़चढ़ कर खुशीखुशी सारे कर्मकांडों को पूरा करती हैं. क्या औरतों को आज तक यह समझ में नहीं आया कि धर्म की जंजीरों में उन की खुशहाली और आजादी दम तोड़ रही हैं? क्या औरत कभी यह बात समझोगी कि अनपढ़ लोग कभी भी आजाद और खुशहाल नहीं हो सकते? फिर वह अफगानिस्तान हो या भारत.

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