हर मुद्दे पर खुल कर बोल रहे हैं राहुल गांधी

उत्तर प्रदेश में अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सेना में अग्निवीर योजना, बेरोजगारी, अडानी, राम मंदिर और जातीय गणना पर खुल कर बोला. प्रदेश में इस यात्रा में पार्टी नेता प्रियंका गांधी को भी शामिल होना था, लेकिन तबीयत ठीक न होने के चलते वे शामिल नहीं हो सकी थीं.

16 फरवरी, 2024 को ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ ने देश के सब से ज्यादा लोकसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में प्रवेश किया था. यह यात्रा बिहार से चंदौली के रास्ते उत्तर प्रदेश पहुंची थी, जहां यात्रा का तय कार्यक्रम ‘तिरंगा सैरेमनी’ हुआ, जिस में बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय को तिरंगा सौंपा था.

इस मौके पर राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना और दूसरे कई नेता हाजिर रहे थे.

चंदौली पहुंच कर राहुल गांधी ने सैयद राजा शहीद स्मारक पर शहीदों को नमन किया. राहुल गांधी ने कहा, ‘‘एक विचारधारा भाई को भाई से लड़ाती है और आप की जेब से पैसा निकाल कर चुनिंदा अरबपतियों को दे देती है, वहीं दूसरी विचारधारा नफरत के बाजार में मुहब्बत की दुकान खोलती है और आप का हक आप को वापस लौटाती है.’’

‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी ने लोगों से पूछा कि देश में फैली नफरत की क्या वजह है? इस पर जवाब मिला कि देश में फैल रही नफरत की वजह डर है और इस डर की वजह नाइंसाफी है.

आज देश के हर हिस्से में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक लैवल पर नाइंसाफी हो रही है. देश में किसानों और गरीबों की जमीनें छीन कर अरबपतियों को दी जा रही हैं. महंगाई और बेरोजगारी बढ़ती जा रही है.

मोदी सरकार की अग्निपथ योजना को नौजवानों के साथ धोखा बताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अग्निवीर को न कैंटीन सुविधा मिलेगी, न पैंशन मिलेगी और न शहीद का दर्जा मिलेगा. यह नौजवानों के साथ धोखा है.

मोदी सरकार अग्निपथ योजना इसलिए लाई, ताकि देश के रक्षा बजट से पैसा हमारे जवानों की रक्षा, उन की ट्रेनिंग और पैंशन में न जाए. रक्षा के सभी कौंट्रैक्ट अडानी की कंपनी के पास हैं. मोदी सरकार हिंदुस्तान के बजट का पूरा पैसा अडानी को देना चाहती है, इसलिए अग्निवीर योजना लाई गई.

राहुल गांधी ने आगे कहा कि मोदी सरकार चाहती है कि सब लोग ठेके के मजदूर बनें. नौजवानों को सेना, रेलवे और पब्लिक सैक्टर में नौकरी नहीं मिल रही, क्योंकि मोदी सरकार चाहती है कि नौजवान ठेके पर ही काम करें.

आज हिंदुस्तान में 2-3 अरबपतियों को पूरा फायदा मिल रहा है और नौजवानों का ध्यान भटका कर उन का भविष्य छीना जा रहा है. केंद्र में ‘इंडिया’ की सरकार आने पर पूरे हिंदुस्तान में खाली पड़े सरकारी पदों पर भरती की जाएगी.

राहुल गांधी ने आगे यह भी कहा, ‘‘कुछ ही दिनों पहले हम ने किसानों के लिए एमएसपी की लीगल गारंटी दी है. हम कानूनी गारंटी देंगे कि हिंदुस्तान के किसानों को सही एमएसपी दी जाए.

‘‘मैं आप से यह कहना चाहता हूं कि सामाजिक अन्याय हो रहा है, आर्थिक अन्याय हो रहा है, किसानों के खिलाफ अन्याय हो रहा है.’’

राहुल गांधी ने जनता से सवाल किया कि नरेंद्र मोदी ने किसानों का कितना कर्जा माफ किया?

जनता की भीड़ ने कहा, ‘जीरो. एक रुपया नहीं किया.’

राहुल गांधी ने दूसरा सवाल किया, ‘हिंदुस्तान के 20-25 अरबपतियों का कितना कर्जा माफ किया?’

भीड़ से जवाब आया, ‘16 लाख करोड़ रुपए.’

मीडिया पर तंज कसते हुए राहुल गांधी बोले, ‘‘हम ने किसानों का कर्जा माफ किया, 72,000 करोड़ रुपए हम ने माफ किए और उस टाइम सारे मीडिया ने कहा कि देखो, यूपीए की सरकार पैसा जाया कर रही है, किसानों को आलसी बना रही है. तो जब किसानों का कर्जा माफ होता है तो मीडिया कहती है कि किसानों को आलसी बनाया जा रहा है और जब नरेंद्र मोदी 15-20 लोगों का 16 लाख करोड़ रुपए का कर्जा माफ करते हैं, तो फिर ये एक शब्द नहीं कहते.’’

जनता की भीड़ ने कहा, ‘मोदी मीडिया, गोदी मीडिया एक शब्द नहीं कहता.’

जनता के यह कहने पर राहुल गांधी बोले, ‘‘तो इसी अन्याय के खिलाफ हम ने यह यात्रा निकाली है.’’

कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके राहुल गांधी ने आगे कहा कि मीडिया में कभी किसान या मजदूर का चेहरा नहीं दिखाई देगा. राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में अडानी, अंबानी, अरबपति, फिल्मी सितारे दिखे, लेकिन कोई गरीब, किसान, बेरोजगार, दुकानदार या मजदूर नहीं दिखा.

भागीदारी न्याय का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि देश में पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों की आबादी 73 फीसदी है. मगर इन वर्गों की कहीं भी भागीदारी नहीं है.

इन वर्गों को कुछ नहीं मिल रहा है. यह नाइंसाफी है. जाति जनगणना से पता चलेगा कि देश में कितने पिछड़े, दलित और आदिवासी हैं. किस वर्ग के पास कितना पैसा है.

जाति जनगणना देश का ऐक्सरे है. इस से पता लग जाएगा कि सोने की चिडि़या का पैसा किस के हाथ में है. यह क्रांतिकारी कदम है. केंद्र में ‘इंडिया’ की सरकार आने पर पूरे देश में जाति जनगणना कराई जाएगी.

एकतरफा नहीं, दोनों की मंजूरी से Enjoy करें सेक्स

पार्टनर के साथ संबंध बनाना एक सुखद अनुभूति प्रदान करता है. लेकिन इसमें आनंद के लिए शारीरिक जुड़ाव के साथसाथ भावनात्मक लगाव होना भी बहुत जरुरी होता है तभी इसका जी भरकर मज़ा लिया जा सकता है. लेकिन कई बार पार्टनर को सेक्स के दौरान इतना अधिक दर्द महसूस होता है कि वे सेक्स से कतराने लगती है और यह पल उसके लिए खुशी देने के बजाए दर्द देने वाला एहसास बनकर रह जाता है. ऐसे में अगर आप इस पल का बिना किसी रूकावट आनंद लेना चाहते हैं तो अपनाएं ये टिप्स.

1. लुब्रीकेंट से लें मजा

प्लेज़र के लिए कुछ भी करने से शर्माए नहीं बल्कि वो सब करें जिससे दोनों को मज़ा आए और आप उस पल को याद कर पूरा दिन खुद को फ्रेश फील कर सकें. जैसे आप लुब्रीकेंट का इस्तेमाल करें. ये आपको जेल फौर्म, सिलिकौन फौर्म या ऑयल बेस्ड फौर्म में मिल जाएगा. इसे सेक्स के दौरान महिला व पुरुष दोनों इस्तेमाल कर सकते है. इसके इस्तेमाल से पेनिटेशन के दौरान वेजिना सेक्स के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है. क्योंकि इससे खिंचाव व इरिटेशन जो कम होती है. कई महिलाओं को सेक्स के दौरान यह समस्या आती है कि उनकी वेजिना ड्राई हो जाती है. ऐसा अक्सर एस्ट्रोजन लेवल के कम होने के कारण होता है.

2. दोनों का मूड होना जरूरी

सेक्स का आनंद तभी भरपूर लिया जा सकता है जब दोनों की मरज़ी हो वरना सेक्स एकतरफा बनकर रह जाता है. इसके लिए जब आप पार्टनर के करीब जाएं तो उसकी इच्छा व मूड जानें. अगर लगे कि मूड सेक्स के अनुकूल है तो सेक्स आपको वो मज़ा दे देगा जिसकी आपको इच्छा थी. यकीन मानिये ये अनुभूति आपको दर्द का अनुभव भी नहीं होने देगी.

3. माहौल हो अनुकूल

शादी के बाद कपल हनीमून पर बेहतर जगह व माहौल में एकदूसरे के करीब आने के साथ एकदूसरे को जानने की कोशिश करते हैं और उनके ये दिन उनकी ज़िन्दगी के यादगार पल बन जाते हैं. ऐसे में जब भी आप पार्टनर के साथ संबंध बनाएं और उसे यादगार बनाना चाहे तो ध्यान रखें कि कमरे का माहौल खुशनुमा व सैक्स के अनुकूल हो. इससे पार्टनर दिल से उस पल को एन्जॉय कर पाएगा. और यह सभी जानते हैं कि जो चीज़ दिल से महसूस होती है उसमें दर्द की नहीं बल्कि प्यार की अनुभूति होती है.

4. करें प्यार से शुरुआत

सेक्स के लिए लुब्रिकेशन बहुत जऱूरी होता है और इसके लिए पहले पार्टनर के साथ आप शारीरिक जुड़ाव बनाएं. जैसे उसके हाथपैरों पर स्पर्श आदि करें . इससे पार्टनर सेक्स के लिए तैयार हो जाता है और फिर पार्टनर के साथ सेक्स का जो मज़ा आता है उसका कहना ही क्या.

5. प्यारप्यारी बातों से लाएं करीब

जब भी आपका सेक्स का मूड हो तो अपने पार्टनर से प्यार भरी बातें करें. जैसे तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो, तुम्हारे हाथ कितने सौफ्ट हैं , तुम्हे तो आज जी भरकर देखने को दिल कर रहा है. आपकी ऐसे बातें न चाहते हुए भी उसे सेक्स करने के लिए मजबूर कर देगी और वे खुद ब खुद आपके करीब आने को मज़बूर हो जाएगी. आप भी तो यही चाहते है न.

बतूल बी : कैसे छला एक अनपढ़गंवार ने सबको

महल्ले की सभी औरतें अच्छी पढ़ीलिखी थीं, पर फिर भी बतूल बी जैसी अनपढ़गंवार औरत उन्हें छल कैसे लेती थी. वह थी तो घरों का काम करने वाली, पर उन घरों में घुस कर वह उन के बारे में जान लेती थी. फिर कुछ ऐसा कर देती थी कि हर घर में उसी की चर्चा छिड़ी रहती थी. बतूल बी ऐसा क्या करती थी?

ट्रक कब का आ चुका था. सीएनजी की लंबी लाइन के चलते निकलने में देर हो गई. रात को साढ़े 11 बजे हम नए शहर के नए मकान में पहुंचे. खाना रास्ते में ही खा लिया था. किसी तरह पलंग डाले और सो गए.

सवेरे हैदर ने फोन कर के थाने से 3 सिपाहियों को बुला लिया. दोपहर तक बहुत सा सामान उन्होंने तरतीब से लगा दिया. एक सिपाही होटल से खाना ले आया. फिर तीनों को छुट्टी देते हुए वहीदा ने किसी मेड को लाने के लिए कहा. रसोईघर का सब सामान धोपोंछ कर लगाना था, जो उस के अकेले के बस का रोग न था.

आधा घंटा आराम कर के वहीदा आसिया और इमरान को मैसेज करने बैठ गई. बदली का हुक्म आने के तुरंत बाद से पार्टियों और भोज के न्योतों का जो सिलसिला बंधा था, वह ट्रक में सामान भर कर रवाना हो जाने के बाद ही रुका था. सवेर नाश्ता एक के यहां, दोपहर का खाना किसी दूसरी जगह तो रात का भोजन तीसरी जगह. रात में वहीदा इतना थक जाती थी कि बच्चों को लंबा मैसेज लिखना भी उस से नहीं हो पाता था.

वहीदा मोबाइल में बिजी थी कि तभी 2 सिपाही आ गए. एक औरत भी साथ आई थी. वहीदा को हैरानी हुई. सिपाही ने बताया कि वह औरत इसी महल्ले में काम करती है. उस ने खुद ही पुकार कर काम करने की इच्छा जाहिर की, तो वे उसे ले आए.

वहीदा को मोबाइल पर बिजी देख कर हैदर ने उस से पूछताछ शुरू की, ‘‘इस महल्ले में किसकिस के घर काम करती हो?’’

‘‘खान मजिस्ट्रेट के यहां, नीली हवेली वालों के यहां, वे जो बड़े इंजीनियर साहब हैं न, उन के यहां और वे जो दोनों कालेज में पढ़ाते हैं, उन के यहां भी. सच तो यह है कि महल्ले में जितने भी बड़े लोग हैं, उन सब के यहां मैं ही काम करती हूं,’’ उस औरत ने बड़ी शान से बताया.

‘‘सामने वालों के घर काम नहीं करतीं क्या?’’ हैदर ने संकेत से पूछा. उन से हैदर की जानपहचान थी. उन्हीं की मदद से हमें यह मकान मिला था.

बहुत ही राजभरे अंदाज से वह औरत आवाज दबा कर बोली, ‘‘सुना है, साहब के चचा ससुर ने किसी गाने वाली से निकाह किया है. मैं ऐसे घरों में काम नहीं करती.’’

वह खनकती हुई आवाज और राजभरा अंदाज देख कर वहीदा को मोबाइल रख देना पड़ा. नजर उठाई तो देखा, बड़ेबड़े लाल फूलों वाली कसी हुई साड़ी, उसी रंग का फैशन वाला आस्तीन का ब्लाउज, छोटे से जूड़े में फूल लगाया हुआ, आंखों में काजल की गहरी लकीर, होंठ पान की लाली से लाल, एक पैर पीछे कर के दीवार से टिकी वह औरत हथेली पर तंबाकू मलते हुए खड़ी थी.

जब उस ने वहीदा को अपनी ओर देखते पाया, तो बोली, ‘‘मैडमजी, हम सैयदों के खानदान से हैं. हमारा काम भी बहुत अच्छा है. इधर एक जज साहब के यहां मैं काम करती थी. बदली हो जाने से वे चले गए. 4 साल बाद और भी बड़े साहब बन कर लौटे तो बोले, ‘बतूल बी को बुलाओ. हमारे घर का काम तो बस वही कर सकती है.’ ऐसा नाम है हमारा.’’

वहीदा ने अनसुनी करते हुए कहा, ‘‘दोनों समय के बरतन, कपड़े होंगे, रोज पोंछा लगाना होगा. सारी शैल्फें भी साफ करोगी. घर में हम

2 ही लोग हैं, पर बरतन 4 के सम झ कर चलो. छुट्टियों में मेहमान आते हैं. हां, बरतनों में प्लास्टिक की सारी बालटियां, कुरसियां भी चमकानी पड़ेंगी. ऐसा न हो कि बाद में तकरार करो कि ये बरतनों में नहीं आते.’’

‘‘नहीं बीबीजी,’’ कल्ले में तंबाकू भरते हुए वह बोली, ‘‘मैं तकरार नहीं करती. मेरा रिकौर्ड है, एक बार जिस का काम पकड़ लिया, फिर छोड़ा नहीं.’’

तब वहीदा क्या जानती थी कि उस ने यह रिकौर्ड कैसे बनाया है. 1,500 रुपए पर बात तय हो गई. बतूल बी काम पर आने लगी.

हैदर पुलिस महकमे में थे. एक जगह पर 2-3 साल से ज्यादा न रह पाते थे. आसिया और इमरान के स्कूल में जाने के काबिल होते ही वहीदा ने उन्हें बोर्डिंग स्कूल में भेज दिया. हर शहर के माहौल में जो भिन्नता और शिक्षण संस्थाओं में लैवल का जो फर्क होता है, उस से बच्चे तालमेल नहीं बैठा पाते. बच्चों के जाने से वह अकेली हो जाती, तो किसी न किसी प्राइवेट कालेज में समय गुजारने को नौकरी कर लेती.

दूसरे दिन बतूल बी काम पर आई. आते ही पूछा, ‘‘मैडमजी, आप सैयद हैं या शेख?’’

वहीदा ने तेज आवाज में कहा, ‘‘मैं सैयद हूं या शेख, तुम्हें इस से क्या? काम करना है करो, बेकार की बातें पूछने की कोई जरूरत नहीं,’’ वहीदा को गुस्सा तो बहुत आया. चली है काजल की कोठरी में घुसने और चाहती है कालिख भी न लगे.

तीसरे दिन बतूल बी बोली, ‘‘आप के बच्चे नहीं हैं क्या? कितने साल हुए आप की शादी को? मेरे मामू तावीज देते हैं. कहें तो ले आऊं?’’

वहीदा ने कहा, ‘‘तुम्हें फिक्र करने की जरूरत नहीं. मेरे 2 जुड़वां बच्चे हैं आसिया और इमरान, 10 साल के. बोर्डिंग में पढ़ते हैं. छुट्टियों में यहां आते हैं. हम लोग भी मिलने जाते हैं उन से.’’

फर्श पोंछतेपोंछते वह वहीं बैठ गई. कमर में खोंसी हुई थैली निकाल कर वह तंबाकू रगड़ते हुए बोली, ‘‘आप को बच्चों की याद नहीं आती? मुझे तो कोई लाख रुपए दे, तब भी अपने बच्चों को नजरों से दूर न भेजूं. आप का मन कैसे होता है?’’

वहीदा ने उसे घूर कर देखा, ‘‘मेरे बच्चे पढ़ेंगेलिखेंगे, बड़े आदमी बनेंगे, उन का भविष्य बनाने के लिए कुछ बलिदान तो देना ही होगा. तुम्हारी लड़कियां गंदी बहती हुई नाक लिए तुम्हारे साथ बरतन मांजती फिरती हैं. तुम उन्हें स्कूल क्यों नहीं भेजती?’’

‘‘वे जाती ही नहीं तो मैं क्या करूं?’’ वहीदा की बात उड़ा कर वह अपने काम में लग गई.

धीरेधीरे वहीदा बतूल बी को सम झ रही थी. उसे इधर की उधर और उधर की इधर लगाने का बहुत  शौक था. दोपहर का समय वहीदा का लिखनेपढ़ने का होता. तब इस की कैंची की तरह चलती जबान उसे बहुत बुरी लगती.

एक दिन वह बोली, ‘‘आप 2 लोग हैं घर में. पर इतने सारे बरतन निकलते हैं आप के. खान मजिस्ट्रेट के घर में मियांबीवी और 3 बच्चे हैं. मुट्ठीभर चावल पकाती हैं और बैगन की सब्जी.’’

वहीदा ने टोका, ‘‘बतूल बी, दूसरों के घर में क्या पकता है और क्या नहीं, मु झे इस से कोई मतलब नहीं.’’

वह मन मार कर चुप रह गई. वहीदा ने सोचा कि वह उन का स्वभाव सम झ गईर् होगी, पर कुत्ते की दुम तो टेढ़ी रहती है. 3 दिन बाद फिर वही मुद्दा निकाल बैठी.

‘‘आप की मैं सब जगह तारीफ करती हूं मैडमजी. वह 2 नंबर के मकान वाले हैं न, इमली के पेड़ के सामने वाला मकान है, एक से एक बढि़या सिंगार कर के निकलती हैं मांबेटी. पर मकान देखो तो जैसे कबाड़खाना, रसोईघर के बरतन काले कीट…’’

वहीदा ने उसे डांट दिया, ‘‘बतूल बी, मैं ने कह दिया है न तुम से. मेरी तारीफ कहीं मत करो, न दूसरों की बातें मु झे बताओ. और देखो, मु झे कालेज का बहुत काम रहता है. चुपचाप अपना काम कर के चली जाया करो.’’

वैसे, बतूल बी के काम से वहीदा को कोई शिकायत नहीं थी, इसीलिए एक दिन सामने के मकान वाली मिसेज कादरी ने जब कहा कि आप ने बतूल बी को काम पर लगा कर अच्छा नहीं किया, तो वहीदा चौंक गई.

उन्होंने आगे बताया, ‘‘अभी नयानया आप के घर का काम पकड़ा है, इसलिए कुछ दिन बराबर काम पर आएगी, फिर शादीब्याह या बीमारी का बहाना बना कर चली जाया करेगी. समय पर नहीं आएगी. आप उस से कुछ कहेंगी तो काम छोड़ देगी. दूसरी किसी को अपनी जगह पर काम भी नहीं करने देगी. लड़ झगड़ कर, मार कर भगा देगी.

‘‘आप को उसे उस की सभी गलतियों के साथ स्वीकारना पड़ेगा. बड़ी चच्ची और बेगम खान के साथ यही हुआ. महीनाभर दोनों ने खुद काम किया, फिर हार कर उसे बुलाना पड़ा.’’

वहीदा यह सुन कर दंग रह गई. धीरेधीरे महल्ले की दूसरी औरतों से भी बतूल बी की बातें सुनने को मिलीं.

वहीदा ने सोचा, ‘मैं तो उस से ज्यादा बोलती नहीं. जब तकरार की नौबत  आएगी, तब देखा जाएगा.’

उस दिन मिसेज कादरी के बेटे के जन्मदिन की पार्टी में महल्ले की तकरीबन सभी औरतें आई थीं. वहीदा ने एक खास बात नोट की. बेगम खान और बड़ी चच्ची ने उन से बात नहीं की. खदीजा बेगम के बात करने का ढंग ऐसा था, जैसे किसी बात की टोह में लगी हों.

अगर इन लोगों ने अपने घमंड में ऐसा किया होता तो वहीदा उन को अनदेखा कर देती, पर उन्हें लगा जैसे वे सब उन के बारे में किसी भरम का शिकार हैं.

पार्टी के बाद वहीदा ने मिसेज कादरी को यह बात बता कर सचाई का पता करने को कहा. मिसेज कादरी ने 2 दिन बाद उन्हें जोकुछ बताया, उसे सुन कर वे हैरान रह गई. तुरंत उन्होंने मिसेज खान, बड़ी चच्ची, खदीजा बेगम और उन तीनों को, जिन के घर बतूल बी काम करती थी, अपने घर बुलाया.

कोरोना हटने के बाद जैसे बहुत सारे राज फाश हुए थे, वैसे ही उन सब के मिलबैठने से बतूल बी की लगाईबु झाई के अनेक राज सामने आए. उन सब को मालूम हुआ कि उस अनपढ़गंवार औरत द्वारा वे सब कैसी छली गई हैं.

मिसेज खान को बतूल बी ने बताया कि मैं यानी वहीदा कहती है कि वे एक समय खा कर पैसे बचाती हैं, इसीलिए सोने से लदी रहती हैं, बड़ी चच्ची को बताया कि मैं उन के बनठन कर घूमने पर एतराज करती हूं.

वहीदा ही नहीं, बल्कि सब की पोल वहां खुल गई. जिन घरों में बतूल बी काम करती थी, उन सब की बात वह इधर से उधर करती थी. कभी पूरी सच्ची बात बता कर, कभी बात का बतंगड़ बना कर उस ने सब के मन एकदूसरे की ओर से फेर दिए थे. वैसे भी बात को नमकमिर्च लगा कर बताने की कला पीढ़ी दर पीढ़ी इन लोगों में चली आती है.

सब की बात सुन कर वहीदा ने कहा, ‘‘हमारे लिए यह शर्म की बात है कि एक साधारण मेड द्वारा हम छले जाएं. कुसूर बहुतकुछ हमारा भी है. हम क्यों इसे बढ़ावा देते हैं? हमें चाहिए कि जैसे ही यह दूसरों की बुराइयां करने लगे, इसे रोक दो.

हम दूसरों की बात बड़े शौक से सुनते हैं, पर दूसरे हमारे बारे में कुछ बोलें, यह हमें सहन नहीं होता. हमारी इसी सोच का फायदा बतूल बी ने उठाया है.’’

बड़ी चच्ची ने वहीदा का समर्थन किया. वे बोलीं, ‘‘जो हुआ सो हुआ. अब यह बताओ कि किया क्या जाए? उसे सबक कैसे सिखाया जाए?’’

वहीदा ने कहा, ‘‘हम सब बतूल बी को एक महीने का नोटिस दे दें. इस एक महीने में वह दूसरे महल्ले में काम ढूंढ़ ले. एक महीने में वह अपनी आदतें सुधार लेगी तो उसे काम पर से नहीं हटाएंगे.’’

वहीदा की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि बतूल बी वहां आ गई. सब को वहां देख वह कुछ घबराई, कुछ हैरान हुई.

वह सिर  झुका कर बरतन उठाने चली ही थी कि वहीदा ने पुकार लिया और कहा, ‘‘बतूल बी, हम सब को तुम्हारी लगाईबु झाई का पता चल चुका है. अब तुम कहीं और काम ढूंढ़ लो. ठीक एक महीने बाद तुम को इन सातों घरों से जवाब मिल जाएगा.

रही तुम्हारे इस रिकौर्ड की बात कि तुम किसी दूसरी मेड को काम नहीं करने दोगी, तो अच्छी तरह सुन लो कि हम ने उस का भी इंतजाम कर लिया है. एक महीने बाद मेरे 2 सिपाही तुम्हें इस महल्ले में घुसने भी नहीं देंगे.’’

पासा पलट चुका था. बतूल बी खामोश खड़ी रही.

एक हफ्ते बाद हैदर के नाम क्वार्टर अलौट हो गया. वहीदा ने वह महल्ला छोड़ दिया. कोई 2 महीने बाद ईद

मिलने महल्ले में गई तो पता चला कि बतूल बी अब सीधी हो गई है और उस ने मिसेज कादरी के घर का भी काम पकड़ लिया है.

दोहरी जिंदगी: शादीशुदा मोनू और रिहाना का क्या रिश्ता था

मोनू की शादी कुछ महीने पहले सायरा से हुई थी, जो काफी खूबसूरत थी, पर उस की छोटी बहन रिहाना कहीं ज्यादा खूबसूरत थी. सायरा पेट से हो चुकी थी. कुछ ही महीने में उस की डिलीवरी होने वाली थी. इस वजह से घर का कामकाज करना अब सायरा के बस की बात नहीं थी. लिहाजा, सायरा ने अपने काम में हाथ बंटाने के लिए रिहाना को बुला लिया.

रिहाना मेहनती होने के साथसाथ चंचल और खुली सोच वाली लड़की थी. यही वजह थी कि जल्दी ही रिहाना अपने जीजा मोनू से काफी घुलमिल गई और दोनों आपस में हंसीमजाक करने लगे.

एक दिन रिहाना बाथरूम में नहा रही थी और जानबूझ कर तौलिया बाहर भूल गई थी. उस ने अपनी दीदी को आवाज लगाई, पर वह सो रही थी. मोनू सामने सोफे पर बैठा कुछ काम कर रहा था.

इतने में रिहाना ने अपने जीजा मोनू से कहा, ‘‘जीजू, बाहर तौलिया रखा है, जरा मुझे दे दो.’’

मोनू ने कहा, ‘‘क्यों? तुम खुद आ कर ले लो.’’

रिहाना बोली, ‘‘अगर मैं ऐसे ही आ गई, तो आप के होश उड़ जाएंगे.’’

मोनू बोला, ‘‘क्यों…? ऐसा क्या है तुम में?’’

रिहाना ने कहा, ‘‘वह तो मुझे देख कर ही पता चलेगा.’’

मोनू ने जोश में आते हुए कहा, ‘‘ठीक है, तुम आ जाओ. मैं भी तो देखूं कि आखिर कैसी लगती है मेरी साली बिना कपड़ों के.’’

रिहाना बोली, ‘‘जीजू, मजाक मत करो. जल्दी से तौलिया दो. कभी मौका मिलेगा, तो मैं आप को अपना जलवा जरूर दिखाऊंगी.’’

मोनू ने कहा, ‘‘ठीक है, मैं तुम्हारे जलवे का इंतजार करूंगा. मैं भी तो देखना चाहता हूं कि आखिर हमारी साली कैसे जलवा दिखाएगी,’’ यह कहते हुए उस ने तौलिया रिहाना को देते हुए उस का हाथ पकड़ लिया.

रिहाना ने घबराते हुए कहा, ‘‘क्या कर रहे हो आप? दीदी आ जाएंगी.’’

मोनू ने कुछ नहीं सुना और बोला, ‘‘कितना कमसिन हाथ है,’’ कहते हुए उस ने रिहाना के दोनों हाथ चूम लिए.

रिहाना सिहर उठी और जल्दी से उस ने अपना हाथ अंदर खींच लिया. मोनू सायरा के पास चला गया, जो गहरी नींद में सो रही थी.

कुछ ही देर में रिहाना बाथरूम से बाहर आई और सीधे सायरा के कमरे में पहुंची. मोनू वहीं बैठा था.

मोनू की नजर जैसे ही रिहाना पर पड़ी, उस के होश उड़ गए. रिहाना के गोरे गालों पर पानी की बूंदें ऐसे लग रही थीं मानो मोतियों से उस का चेहरा सजा हो. गीले कपड़ों में उस का गुलाबी बदन ऐसे दिख रहा था मानो कोई हूर जन्नत से उतर कर उस के सामने आ गई हो.

तभी रिहाना ने चुटकी बजा कर अपने जीजा का ध्यान तोड़ा और बोली, ‘‘क्या हुआ? अभी यह हाल है कि अपनी सुधबुध खो बैठे हो, तो गौर करो कि जब कभी मुझे उस हालत में देख लिया, जिस हालत में दीदी को रात को बिस्तर पर देखते हो, तो आप का क्या हाल होगा.’’

मोनू के पास रिहाना के इस सवाल का कोई जवाब न था. वह तो रिहाना का मस्त हुस्न देख कर उस का दीवाना बन बैठा था.

तभी रिहाना ने सायरा को उठाया और कहा, ‘‘दीदी, नाश्ता कर लो. जीजू कब से तुम्हारे उठने का इंतजार कर रहे हैं.’’

सायरा जल्दी से उठी और फ्रैश हुई. इतने में रिहाना नाश्ता ले कर आ गई. उस ने अपनी दीदी को नाश्ता कराया और एक नजर अपने जीजू पर डाली तो देखा कि उस के जीजू किसी खयाल में गुम हैं.

दरअसल, मोनू तो रिहाना के गदराए बदन और उस के हुस्न को पाने का तानाबाना बुन रहा था. रिहाना समझ चुकी थी कि जीजू उस के हुस्न के दीवाने हो गए हैं.

तभी सायरा बोली, ‘‘क्या हुआ? तबीयत तो सही है न? आज काम पर नहीं जाना है क्या? अभी तक नाश्ता लिए ऐसे ही बैठे हो… कोई टैंशन है क्या?’’

मोनू ने हड़बड़ा कर कहा, ‘‘नहीं… औफिस में एक जरूरी काम था, उसे पूरा नहीं किया और मैं भूल गया. सोच रहा हूं कि उसे पूरा कैसे करूं…’’

सायरा बोली, ‘‘ठीक है, अब तुम औफिस जाओ और अपना अधूरा काम पूरा करो.’’

थोड़ी देर में मोनू औफिस चला गया, पर आज उस का मन काम में

नहीं लग रहा था. वह तो अपनी साली रिहाना की याद में गुमसुम हो कर रह गया था.

जल्द ही वह समय भी आ गया, जब सायरा को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भरती करना पड़ा. कुछ ही घंटों में सायरा ने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया, जिसे पा कर पूरा घर खुश हो गया.

2-3 दिन बाद सायरा और उस की बच्ची अस्पताल से घर वापस आ गईं. रिहाना अब अपनी बहन सायरा के साथ उस के कमरे में ही सोती थी, क्योंकि देर रात किसी चीज की जरूरत होती तो रिहाना ही उसे लाती थी.

रिहाना मौका देख कर अपने मोनू को छेड़ती रहती थी, ‘‘क्या बात है जीजू, रातभर सोए नहीं क्या, जो आंखें लाल हो रही हैं… लगता है कि दीदी के बिना नींद नहीं आई. और आएगी भी कैसे, उन से लिपट कर सोने की जो आदत पड़ी है,’’ कह कर उस ने अंगड़ाई लेते हुए आगे कहा, ‘‘मु?ा से आप का यह दुख देखा नहीं जा रहा है. दिल करता है कि दीदी की कमी को मैं तुम्हारी बांहों में आ कर पूरी कर दूं, ताकि आप को चैन की नींद आ सके.’’

मोनू बोला, ‘‘अगर तुम्हें मेरा इतना ही खयाल है, तो रात को मेरे पास आती क्यों नहीं?’’

रिहाना ने रिझाते हुए कहा, ‘‘आ तो जाऊं, पर डर लगता है कि कहीं मेरे कुंआरे बदन की तपिश से आप जल न जाओ. मेरे बदन की एक झलक से तो आप अपनी सुधबुध ही खो बैठे थे.’’

मोनू ने ताना मारते हुए कहा, ‘‘तुम बस अपनी दीदी का ही खयाल रखोगी, कुछ खयाल अपने जीजू का भी रख लिया करो. क्यों इस बेचारे को तड़पा रही हो.’’

रिहाना ने कहा, ‘‘तरस तो बहुत आता है आप पर, मगर डर लगता है कि कहीं मुझ कुंआरी को भी मां न बना दो, तब मैं किसी को मुंह दिखाने के लायक भी नहीं रहूंगी.’’

मोनू ने रिहाना से कहा, ‘‘तुम मुझ पर भरोसा रखो. तुम बिनब्याही मां नहीं बनोगी, मैं इस बात का पूरा खयाल रखूंगा.’’

रिहाना चहक कर बोली, ‘‘तो ठीक है, आप इंतजाम करो. मैं मौका देख कर आज आप का अकेलापन दूर कर दूंगी,’’ कहते हुए वह दूसरे कमरे में चली गई.

रात को मोनू औफिस से आ कर सायरा के कमरे में गया. सायरा और बच्ची सो रही थी.

मोनू अपने कमरे में गया और कपड़े बदलने लगा, तभी रिहाना खाना ले कर उस के कमरे में पहुंच गई और जैसे ही उस की नजर बिना कमीज के मोनू पर पड़ी, तो वह शरमा कर वापस मुड़ी.

तभी मोनू ने उस का हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी बांहों में खींचता हुआ बोला, ‘‘हमें कब अपने हुस्न का जलवा दिखाओगी मेरी जान…’’

रिहाना ने मोनू की बांहों से आजाद होते हुए कहा, ‘‘सब्र करो. सब्र का फल मीठा होता है,’’ फिर वह कमरे से बाहर चली गई.

रात का 1 बजा था. सायरा और बच्ची दोनों गहरी नींद में सो रही थीं. रिहाना चुपके से उठी और मोनू के कमरे के पास जा कर? झाकने लगी.

मोनू की आंखों से भी नींद कोसों दूर थी. वह मोबाइल फोन पर ब्लू फिल्म देख रहा था. कान में ईयरफोन लगा था. रिहाना कब उस के कमरे में दाखिल हुई, उसे पता ही नहीं चला.

रिहाना ने भी चुपके से मोनू के मोबाइल पर अपनी नजरें जमा दीं. जैसे ही उस ने स्क्रीन पर सैक्सलीला देखी, उस की हवस भड़कने लगी और वह सिसकियां भरने लगी. करवट बदलते समय मोनू की नजर रिहाना पर पड़ी, तो वह हड़बड़ा कर बैठ गया.

रिहाना हवस भरी नजरों से मोनू को देखने लगी. मोनू ने फौरन रिहाना का हाथ पकड़ा और उसे अपने बिस्तर पर खींचते हुए अपनी बांहों में भर लिया.

रिहाना ने पूछा, ‘‘क्या देख रहे थे?’’

मोनू बोला, ‘‘कुछ नहीं… नींद नहीं आ रही थी, तो टाइमपास कर रहा था.’’

रिहाना ने हंसते हुए कहा, ‘‘बहुत अच्छा टाइमपास कर रहे थे.’’

मोनू ने बिना कुछ जवाब दिए रिहाना के होंठों पर अपने होंठ रख दिए. रिहाना सिहर उठी. मोनू ने उस के होंठों को आजाद करते हुए उस की गरदन पर चुम्मों की बौछार कर दी.

रिहाना बोली, ‘‘क्या इरादा है जनाब का…’’

मोनू ने कहा, ‘‘आज इरादा मत पूछो. मुझे वह सब करने दो, जिस के लिए मैं बेकरार हूं.’’

रिहाना ने कहा, ‘‘मुझे डर लगता है कि कहीं मैं पेट से हो गई तो…?’’

‘‘मैं ने उस का इंतजाम कर लिया है,’’ मोनू ने उसे कंडोम का पैकेट दिखाते हुए कहा.

रिहाना शरमा गई और मोनू के गले लग गई. मोनू भी मचल उठा और वह रिहाना के एकएक कर के सारे कपड़े उतारने लगा.

रिहाना का गोरा और गदराया बदन देख कर मोनू मचल उठा और उस के बदन के हर हिस्से को चूमने और चाटने लगा. मोनू की इस हरकत ने रिहाना को इस कदर तड़पा दिया कि वह अपने होश ही खो बैठी और मोनू को अपने ऊपर खींचने लगी.

मोनू पूरी तरह जोश में भरा हुआ था. उस ने उसे अपनी बांहों में कस कर पकड़ा. रिहाना शुरू में तो तड़प उठी, पर जल्द ही उसे भी मजा आने लगा.

थोड़ी देर में वे दोनों बिस्तर पर निढाल पड़े थे. रिहाना ने एक अलग ही मजा महसूस किया. उस ने मोनू के गाल को चूमते हुए कहा, ‘‘मजा आ गया. आप ने जो सुख मुझे दिया है, उसे मैं कभी नहीं भूल सकती. मैं आप से बहुत प्यार करती हूं, कभी मुझे अपने से दूर मत करना.’’

मोनू बोला, ‘‘मैं भी तुम से बहुत प्यार करता हूं. मुझे छोड़ कर कभी मत जाना.’’

इस के बाद रिहाना चुपचाप अपने कमरे में चली गई और अपनी बहन सायरा के पास जा कर लेट गई, जो अभी तक गहरी नींद में सोई हुई थी.

इस तरह मोनू अपनी घरवाली और साली दोनों के मजे लूट रहा था. सायरा इन सब बातों से अनजान थी. पर यह राज कब तक छिपता.

हर रात की तरह आज भी रिहाना चुपके से मोनू के कमरे में आई. उन

दोनों ने अपनेअपने कपड़े उतारे और कामलीला में मगन हो गए.

तभी सायरा की आंख खुल गई. उसे प्यास लगी थी. रिहाना का कुछ अतापता न था, इसलिए वह खुद उठ कर पानी लेने रसोईघर में चली गई.

रसोईघर से लग कर ही मोनू का वह कमरा था, जहां आजकल वह सो रहा था. सायरा जब दरवाजे के पास से गुजरी तो उस ने कमरे के भीतर से एक अजीब सी आवाज आती हुई सुनी. उस के पैर वहीं थम गए और वह कान लगा कर गौर से सुनने लगी.

रिहाना की सिसकियां सुन कर सायरा दंग रह गई. जैसे ही उस ने दरवाजे पर हाथ लगा कर धकेला, वह खुल गया. अंदर का नजारा देख कर सायरा दंग रह गई. मोनू और रिहाना सैक्स करने में इस तरह मदहोश थे कि उन्हें सायरा के आने का पता ही न चला.

सायरा चीखी, ‘‘तुम दोनों को शर्म नहीं आती.’’

मोनू और रिहाना सायरा की आवाज सुन कर एकदूसरे से अलग होते हुए अपनेअपने कपड़े उठाने लगे.

सायरा मोनू से बोली, ‘‘मुझे धोखा दे कर अपनी साली से नाजायज रिश्ता कायम करते हुए तुम्हें शर्म नहीं आई.

‘‘और रिहाना, तुम तो मेरी बहन थी. अपनी ही बहन के सुहाग के साथ यह सब करने से पहले तुम्हें एक बार भी अपनी बहन का खयाल नहीं आया.

मैं अभी अब्बा को तुम दोनों की यह घिनौनी हरकत बताती हूं.’’

मोनू के पास अपनी सफाई के कोई शब्द नहीं थे. वह चोर की तरह चुप खड़ा रहा.

रिहाना ने कहा, ‘‘मैं इन से प्यार करती हूं और ये भी मुझ से प्यार करते हैं.’’

तभी मोनू भी तपाक से बोला, ‘‘मैं रिहाना से प्यार करता हूं और उस के बिना नहीं रह सकता.’’

सायरा चिल्लाई, ‘‘और मेरा और मेरी बच्ची का क्या?’’

मोनू ने कहा, ‘‘मैं तुम्हें भी अपने साथ रखूंगा. तुम्हारा पूरा खर्च उठाऊंगा और तुम्हें भी बराबर प्यार दूंगा.’’

सायरा गुस्से से लालपीली होती हुई बोली, ‘‘रखो अपना खर्चा अपने पास. और रही प्यार की बात, अगर तुम मुझ से प्यार करते तो मुझे धोखा दे कर मेरी ही बहन के साथ मुंह काला नहीं करते. प्यार करने वाले अपने प्यार को धोखा नहीं देते. मुझे तुम्हारे साथ एक पल भी नहीं रहना.’’

कुछ देर के बाद सायरा के अब्बू और भाई आ गए और मोनू को बुराभला कहते हुए सायरा और रिहाना को वहां से ले गए.

कुछ दिन बाद सायरा ने मोनू पर केस कर दिया और वह मुकदमे में उलझ कर रह गया.

इस दोहरे प्यार ने मोनू से उस का सबकुछ छीन लिया. उस की इस हरकत से उस की बीवी सायरा, साली रिहाना और वह मासूम बच्ची, जो अभी पैदा ही हुई थी, सब की जिंदगी बरबाद हो कर रह गई.

नई चादर: विधवा शरबती की मुसीबत

बस, इतनी सी थी उस की खूबसूरती की जमापूंजी, मगर करमू जैसे मरियल से अधेड़ के सामने तो वह सचमुच अप्सरा ही दिखती थी. आगे चल कर सब ने शरबती की सीरत भी देखी और उस की सीरत सूरत से भी चार कदम आगे निकली. अपनी मेहनतमजदूरी से उस ने गृहस्थी ऐसी चमकाई कि इलाके के लोग अपनीअपनी बीवियों के सामने उस की मिसाल पेश करने लगे.

करमू की बिरादरी के कई नौजवान इस कोशिश में थे कि करमू जैसे लंगूर के पहलू से निकल कर शरबती उन के पहलू में आ जाए. दूसरी बिरादरियों में भी ऐसे दीवानों की कमी न थी. वे शरबती से शादी तो नहीं कर सकते थे, अलबत्ता उसे रखैल बनाने के लिए हजारों रुपए लुटाने को तैयार थे.

धीरेधीरे समय गुजरता रहा और शरबती एक बच्चे की मां बन गई. लेकिन उस की देह की बनावट और कसावट पर बच्चा जनने का रत्तीभर भी फर्क नहीं दिखा. गांव के मनचलों में अभी भी उसे हासिल करने की पहले जैसे ही चाहत थी. तभी जैसे बिल्ली के भाग्य से छींका टूट पड़ा. करमू एक दिन काम की तलाश में शहर गया और सड़क पार करते हुए एक बस की चपेट में आ गया. बस के भारीभरकम पहियों ने उस की कमजोर काया को चपाती की तरह बेल कर रख दिया था.

करमू के क्रियाकर्म के दौरान गांव के सारे मनचलों में शरबती की हमदर्दी हासिल करने की होड़ लगी रही. वह चाहती तो पति की तेरहवीं को यादगार बना सकती थी. गांव के सभी साहूकारों ने शरबती की जवानी की जमानत पर थैलियों के मुंह खोल रखे थे, मगर उस ने वफादारी कायम रखना ही पति के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि समझते हुए सबकुछ बहुत किफायत से निबटा दिया.

शरबती की पहाड़ सी विधवा जिंदगी को देखते हुए गांव के बुजुर्गों ने किसी का हाथ थाम लेने की सलाह दी, मगर उस ने किसी की भी बात पर कान न देते हुए कहा, ‘‘मेरा मर्द चला गया तो क्या, वह बेटे का सहारा तो दे ही गया है. बेटे को पालनेपोसने के बहाने ही जिंदगी कट जाएगी.’’

वक्त का परिंदा फिर अपनी रफ्तार से उड़ चला. शरबती का बेटा गबरू अब गांव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ने जाने लगा था और शरबती मनचलों से खुद को बचाते हुए उस के बेहतर भविष्य के लिए मेहनतमजदूरी करने में जुटी थी. उन्हीं दिनों उस इलाके में परिवार नियोजन के लिए नसबंदी कैंप लगा. टारगेट पूरा न हो सकने के चलते जिला प्रशासन ने आपरेशन कराने वाले को एक एकड़ खेतीबारी लायक जमीन देने की पेशकश की.

एक एकड़ जमीन मिलने की बात शरबती के कानों में भी पड़ी. उसे गबरू का भविष्य संवारने का यह अच्छा मौका दिखा. ज्यादा पूछताछ करती तो किस से करती. जिस से भी जरा सा बोल देती वही गले पड़ने लगता. जो बोलते देखता वह बदनाम करने की धमकी देता, इसलिए निश्चित दिन वह कैंप में ही जा पहुंची. शरबती का भोलापन देख कर कैंप के अफसर हंसे.

कैंप इंचार्ज ने कहा, ‘‘एक विधवा से देश की आबादी बढ़ने का खतरा कैसे हो सकता है…’’

कैंप इंचार्ज का टका सा जवाब सुन कर गबरू के भविष्य को ले कर देखे गए शरबती के सारे सपने बिखर गए. बाहर जाने के लिए उस के पैर नहीं उठे तो वह सिर पकड़ कर वहीं बैठ गई.

तभी एक अधेड़ कैंप इंचार्ज के पास आ कर बोला, ‘‘सर, आप के लोग मेरा आपरेशन नहीं कर रहे हैं.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘कहते हैं कि मैं अपात्र हूं.’’

‘‘क्या नाम है तुम्हारा? किस गांव में रहते हो?’’

‘‘सर, मेरा नाम केदार है. मैं टमका खेड़ा गांव में रहता हूं.’’

‘‘कैंप इंचार्ज ने टैलीफोन पर एक नंबर मिलाया और उस अधेड़ के बारे में पूछताछ करने लगा, फिर उस ने केदार से पूछा, ‘‘क्या यह सच है कि तुम्हारी बीवी पिछले महीने मर चुकी है?’’

‘‘हां, सर.’’

‘‘फिर तुम्हें आपरेशन की क्या जरूरत है. बेवकूफ समझते हो हम को. चलो भागो.’’

केदार सिर झुका कर वहां से चल पड़ा. शरबती भी उस के पीछेपीछे बाहर निकल आई. उस के करीब जा कर शरबती ने धीरे से पूछा, ‘‘कितने बच्चे हैं तुम्हारे?’’

‘‘एक लड़का है. सोचा था, एक एकड़ खेत मिल गया तो उस की जिंदगी ठीकठाक गुजर जाएगी.’’

‘‘मेरा भी एक लड़का है. मुझे भी मना कर दिया गया… ऐसा करो, तुम एक नई चादर ले आओ.’’

केदार ने एक नजर उसे देखा, फिर वहीं ठहरने को कह कर वह कसबे के बाजार चला गया और वहां से एक नई चादर, थोड़ा सा सिंदूर, हरी चूडि़यां व बिछिया वगैरह ले आया.

थोड़ी देर बाद वे दोनों कैंप इंचार्ज के पास खड़े थे. केदार ने कहा, ‘‘हम लोग भी आपरेशन कराना चाहते हैं साहब.’’

अफसर ने दोनों पर एक गहरी नजर डालते हुए कहा, ‘‘मेरा खयाल है कि अभी कुछ घंटे पहले मैं ने तुम्हें कुछ समझाया था.’’

‘‘साहब, अब केदार ने मुझ पर नई चादर डाल दी है,’’ शरबती ने शरमाते हुए कहा.

‘‘नई चादर…?’’ कैंप इंचार्ज ने न समझने वाले अंदाज में पास में ही बैठी एक जनप्रतिनिधि दीपा की ओर देखा.

‘‘इस इलाके में किसी विधवा या छोड़ी गई औरत के साथ शादी करने के लिए उस पर नई चादर डाली जाती है. कहींकहीं इसे धरौना करना या घर बिठाना भी कहा जाता है,’’ उस जनप्रतिनिधि दीपा ने बताया.

‘‘ओह…’’ कैंप इंचार्ज ने घंटी बजा कर चपरासी को बुलाया और कहा, ‘‘इस आदमी को ले जाओ. अब यह अपात्र नहीं है. इस की नसबंदी करवा दें… हां, तुम्हारा नाम क्या है?’’

‘‘शरबती.’’

‘‘तुम कल फिर यहां आना. कल दूरबीन विधि से तुम्हारा आपरेशन हो जाएगा.’’

‘‘लेकिन साहब, मुझे भी एक एकड़ जमीन मिलेगी न?’’

‘‘हां… हां, जरूर मिलेगी. हम तुम्हारे लिए तीसरी चादर ओढ़ने की गुंजाइश कतई नहीं छोड़ेंगे.’’

शरबती नमस्ते कह कर खुश होते हुए कैंप से बाहर निकल गई तो उस जनप्रतिनिधि ने कहा, ‘‘साहब, आप ने एक मामूली औरत के लिए कायदा ही बदल दिया.’’

‘‘दीपाजी, यह सवाल तो कायदेकानून का नहीं, आबादी रोकने का है. ऐसी औरतें नई चादरें ओढ़ओढ़ कर हमारी सारी मेहनत पर पानी फेर देंगी. मैं आज ही ऐसी औरतों को तलाशने का काम शुरू कराता हूं,’’ उन्होंने फौरन मातहतों को फोन पर निर्देश देने शुरू कर दिए. दूसरे दिन शरबती कैंप में पहुंची तो वहां मौजूद कई दूसरी औरतों के साथ उस का भी दूरबीन विधि से नसबंदी आपरेशन हो गया.

कैंप की एंबुलैंस पर सवार होते समय उसे केदार मिला और बोला, ‘‘शरबती, मेरे घर चलो. तुम्हें कुछ दिन देखभाल की जरूरत होगी.’’

‘‘मेरी देखभाल के लिए गबरू है न.’’

‘‘मेरा भी तो फर्ज बनता है. अब तो हम लिखित में मियांबीवी हैं.’’

‘‘लिखी हुई बातें तो दफ्तरों में पड़ी रहती हैं.’’

‘‘तुम्हारा अगर यही रवैया रहा तो तुम एक बीघा जमीन भी नहीं पाओगी.’’

‘‘नुकसान तुम्हारा भी बराबर होगा.’’

‘‘मैं तुम्हें ऐसे ही छोड़ने वाला नहीं.’’

‘‘छोड़ने की बात तो पकड़ लेने के बाद की जाती है.’’

शरबती का जवाब सुन कर केदार दांत पीस कर रह गया. कुछ साल बाद गबरू प्राइमरी जमात पास कर के कसबे में पढ़ने जाने लगा. एक दिन उस के साथ उस का सहपाठी परमू उस के घर आया.

परमू के मैलेकुचैले कपड़े और उलझे रूखे बाल देख कर शरबती ने पूछा, ‘‘तुम्हारी मां क्या करती रहती है परमू?’’

‘‘मेरी मां नहीं है,’’ परमू ने मायूसी से बताया.

‘‘तभी तो मैं कहूं… खैर, अब तो तुम खुद बड़े हो चुके हो… नहाना, कपड़े धोना कर सकते हो.’’

परमू टुकुरटुकुर शरबती की ओर देखता रहा. जवाब गबरू ने दिया, ‘‘मां, घर का सारा काम परमू को ही करना होता है. इस के बापू शराब भी पीते हैं.’’

‘‘अच्छा शराब भी पीते हैं. क्या नाम है तुम्हारे बापू का?’’

‘‘केदार.’’

‘‘कहां रहते हो तुम?’’

‘‘टमका खेड़ा.’’

शरबती के कलेजे पर घूंसा सा लगा. उस ने गबरू के साथ परमू को भी नहलाया, कपड़े धोए, प्यार से खाना खिलाया और घर जाते समय 2 लोगों का खाना बांधते हुए कहा, ‘‘परमू बेटा, आतेजाते रहा करो गबरू के साथ.’’

‘‘हां मां, मैं भी यही कहता हूं. मेरे पास बापू नहीं हैं, तो मैं जाता हूं कि नहीं इस के घर.’’

‘‘अच्छा, इस के बापू तुम्हें अच्छे लगते हैं?’’

‘‘जब शराब नहीं पीते तब… मुझे प्यार भी खूब करते हैं.’’

‘‘अगली बार उन से मेरा नाम ले कर शराब छोड़ने को कहना.’’ इसी के साथ ही परमू और गबरू के हाथों दोनों घरों के बीच पुल तैयार होने लगा. पहले खानेपीने की चीजें आईंगईं, फिर कपड़े और रोजमर्रा की दूसरी चीजें भी आनेजाने लगीं. फिर एक दिन केदार खुद शरबती के घर जा पहुंचा.

‘‘तुम… तुम यहां कैसे?’’ शरबती उसे अपने घर आया देख हक्कीबक्की रह गई.

‘‘मैं तुम्हें यह बताने आया हूं कि मैं ने तुम्हारा संदेश मिलने से अब तक शराब छुई भी नहीं है.’’

‘‘तो इस से तो परमू का भविष्य संवरेगा.’’

‘‘मैं अपना भविष्य संवारने आया हूं… मैं ने तुम्हें भुलाने के लिए ही शराब पीनी शुरू की थी. तुम्हें पाने के लिए ही शराब छोड़ी है शरबती,’’ कह कर केदार ने उस का हाथ पकड़ लिया.

‘‘अरे… अरे, क्या करते हो. बेटा गबरू आ जाएगा.’’

‘‘वह शाम से पहले नहीं आएगा. आज मैं तुम्हारा जवाब ले कर ही जाऊंगा शरबती.’’

‘‘बच्चे बड़े हो चुके हैं… समझाना मुश्किल हो जाएगा उन्हें.’’

‘‘बच्चे समझदार भी हैं. मैं उन्हें पूरी बात बता चुका हूं.’’

‘‘तुम बहुत चालाक हो. कमजोर रग पकड़ते हो.’’

‘‘मैं ने पहले ही कह दिया था कि मैं तुम्हें छोड़ूंगा नहीं,’’ केदार ने उस की आंखों में झांकते हुए कहा. शरबती की आंखें खुद ब खुद बंद हो गईं. उस दिन के बाद केदार अकसर परमू को लेने के बहाने शरबती के घर आ जाता. गबरू की जिद पर वह परमू के घर भी आनेजाने लगी. जब दोनों रात में भी एकदूसरे के घर में रुकने लगे तो दोनों गांवों के लोग जान गए कि केदार ने शरबती पर नई चादर डाल दी है.

परमू, गबरू और केदार बहुत खुश थे. खुश तो शरबती भी कम नहीं थी, मगर उसे कभीकभी बहुत अचंभा होता था कि वह अपने पहले पति को भूल कर केदार की पकड़ में आ कैसे गई?

एक दिन अपने लिए : आभा किसे पहचान नहीं पाई

‘कल संडे है. सोनू की भी छुट्टी है. अलार्म बंद कर के सोती हूं,’ सोचते हुए आभा मोबाइल की तरफ बढ़ी, मगर फिर एक बार व्हाट्सऐप चैक कर लें सोच उस ने हरे से सम्मोहक आइकोन पर क्लिक कर दिया. स्क्रोल करतेकरते एक अनजान नंबर से आए मैसेज पर अंगूठा रुक गया.

‘‘कैसी हो आभा?’’ पढ़ कर एकबार को तो आभा समझ नहीं पाई कि किस का मैसेज है, फिर डीपी पर टैब किया. तसवीर कुछ जानीपहचानी सी लगी.

‘‘अरे, यह तो अनुराग है,’’ आभा के दिमाग को पहचानने में ज्यादा मशकक्त नहीं करनी पड़ी.

‘‘फाइन,’’ लिख कर आभा ने 2 अंगूठे वाली इमोजी के साथ रिप्लाई सैंड कर दी.

‘‘क्या हुआ? किस का मैसेज था?’’ मां ने अचानक आ कर पूछा तो आभा को लगा मानो चोरी पकड़ी गई हो.

‘‘यों ही…कोई अननोन नंबर था,’’ कह कर आभा ने बात टाल दी.

‘‘अच्छा सुनो सोनू को सुबह 4 बजे जगा देना. उसे अपने फाइनल ऐग्जाम के प्रोजैक्ट पर काम करना है. और हां 1 कप चाय भी बना देना ताकि उस की नींद खुल जाए…’’ मां ने उसे आदेश सा दिया और फिर सोने चली गईं.

अलार्म बंद करने को बढ़ता आभा का हाथ रुक गया. उस ने मोबाइल को चार्जिंग में लगा दिया ताकि कहीं बैटरी लो होने के कारण वह स्विच औफ न हो जाए वरना नींद खुलेगी और फिर 4 बजे नहीं जगाया तो सोनू नाराज हो कर पूरा दिन मुंह फुलाए घूमता रहेगा. मां नाराज होंगी सो अलग. यह और बात है कि इस चक्कर में उसे रातभर नींद नहीं आई. वैसे नींद न आने का एक कारण अनुराग का मैसेज भी था.

आभा रातभर अनुराग के बारे में ही सोचती रही. अनुराग उस के कालेज का दोस्त था. एकदम पक्के वाला… शायद कुछ और समय दोनों ने साथ बिताया होता तो यह दोस्ती प्यार में बदल सकती थी, मगर कालेज के बाद अनुराग सरकारी नौकरी की तैयारी करने के लिए कोचिंग लेने दिल्ली चला गया. न इकरार का मौका मिला और न ही इजहार का… एक कसक थी जो मन में दबी की दबी ही रह गई.

इसी बीच आभा के पिता की एक ऐक्सीडैंट में मृत्यु हो गई और अपनी मां के साथसाथ छोटे भाई सोनू की जिम्मेदारी भी उस पर आ गई. पिता के जाने के बाद मां अकसर बीमार रहने लगी थीं. सोनू उन दिनों छठी कक्षा की परीक्षा देने वाला था.

आभा का अपने पिता की जगह उन के विभाग में नौकरी मिल गई. वह जिंदगी की गुत्थी सुलझाने के फेर में उलझती चली गई. 10 साल बाद आज अचानक अनुराग के मैसेज ने उस के दिल में खलबली सी मचा दी थी.

‘कल दिन में बात करूंगी,’ सोचते हुए आखिर उसे नींद आ ही गई.

घरबाहर संभालती आभा हर सुबह 5 बजे बिस्तर छोड़ देती और फिर यह उसे रात 11 बजे ही नसीब होता. औफिस जाने से पहले नाश्ते से ले कर लंच तक का काम उसे निबटाना होता.

9 बजे तक वह भी औफिस के लिए निकल लेती, क्योंकि 10 बजे बायोमैट्रिक प्रणाली से अपनी उपस्थिति दर्ज करवानी होती है. उस के बाद कब शाम के 6 बज जाते हैं, पता ही नहीं चलता. घर लौटने पर 1 कप गरम चाय का प्याला जरूर उसे मां के हाथ का मिलता जिसे पी कर वह फिर से रिचार्ज हो कर अपने मोर्चे पर तैनात होने यानी रसोई में जाने के लिए कमर कस लेती.

जैसेतैसे रात के 11 बजे तक कंप्यूटर की तरह खुद को शटडाउन दे कर चार्जिंग में लगा देती है ताकि अगले दिन के लिए बैटरी पूरी तरह चार्ज रहे. यही है उस की दिनचर्या… कभीकभार मेहमानों के आ जाने या मां की बीमारी बढ़ जाने आदि पर यह और भी ज्यादा हैक्टिक हो जाती है. फिर तो बस शरीर मानो रोबोट ही बन जाता है. अंतिम बार खुद के लिए कब कुछ लमहे निकाले थे, याद ही नहीं पड़ता…

बस, इसी तरह मशीन सी चलती जिंदगी में अचानक अनुराग के मैसेज ने जैसे लूब्रिकैंट का काम किया.

सुबह के लगभग 11 बजे जब आभा औफिस के रूटीन काम से थोड़ा फ्री हुई तो उसे अनुराग का खयाल आया. मोबाइल में उस के रात वाले मैसेज को ढूंढ़ कर फोन नंबर एक कागज पर लिखा और डायल कर दिया. जैसे ही फोन के दूसरी तरफ घंटी बजी, उस के दिल की धड़कनें भी तेज हो गईं.

‘‘कैसी हो आभा?’’ स्नेह से भरी आवाज सुन कर आभा खिल उठी.

‘‘थोड़ी व्यस्त… थोड़ी मस्त…’’ अपना कालेज के जमाने वाला डायलौग मार कर वह खिलखिला पड़ी. अनुराग ने भी उस की हंसी में भरपूर साथ दिया. दोनों काफी देर तक इधरउधर की बातें करते रहे. आभा के पिता की मृत्यु की खबर सुन कर अनुराग उस के प्रति सहानुभूति से भर उठा. आभा ने भी उस के परिवार के बारे में जानकारी ली और फिर आगे भी संपर्क में रहने का वादा करने के साथ फोन रख दिया.

अनुराग से बात करने के बाद आभा को लगा कि जिस तरह मशीनों में तकनीकी खामियां आती हैं और उन्हें मरम्मत की जरूरत पड़ती है ठीक उसी तरह उस के मन को भी मैकेनिक की जरूरत थी. तभी तो आज पुराने दोस्त से बात कर के उस का मन भी कितना हलका हो गया. ठीक वैसे ही जैसे ओवरहालिंग के बाद मशीनें स्मूद हो जाती हैं

लगभग रोज आभा और अनुराग की फोन पर बात होने लगी. वक्त और संपर्क की खाद और पानी मिलने से यह रिश्ता भी पुष्पितपल्लवित होने लगा. कभीकभी आभा के मन में अनुराग को पाने की ख्वाहिश बलवती होने लगती, मगर उस की पत्नी का खयाल कर के वह अपने मन को समझा लेती थी.

‘‘सुनो, औफिशियल काम से तुम्हारे शहर में आया हूं… होटल राजहंस… शाम को मिल सकती हो?’’ अनुराग के अचानक आए इस प्रस्ताव से आभा चौंक गई.

‘‘हां, मगर… किसी ने देख लिया तो… बिना मतलब बवाल हो जाएगा… किसकिस को सफाई दूंगी… तुम तो जानते हो, यह शहर बहुत बड़ा नहीं है…’’ आभा ने कह तो दिया मगर उस के दिल और दिमाग में जंग जारी थी. मन ही मन वह भी अनुराग का साथ चाहती थी.

‘‘क्या तुम रह पाओगी बिना मिले जबकि तुम्हें पता है कि मैं तुम से कुछ ही मिनट्स की दूरी पर हूं,’’ अनुराग ने प्यार से कहा.

‘‘अच्छा ठीक है… मैं शाम को 5 बजे आती हूं?’’ आखिर आभा का दिल उस के दिमाग से जंग जीत ही गया.

इतने बरसों बाद प्रिय को सामने देख कर आभा भावुक हो गई और अनुराग की बांहों में समा गई. अनुराग ने भी उसे अपने घेरे में कस लिया और फिर उस के माथे पर एक चुंबन अंकित कर दिया.

दोनों लगभग घंटेभर तक साथ रहे. कौफी पी और बहुत सी बातें कीं. अनुराग की ट्रेन शाम 7 बजे की थी, इसलिए आभा ने उस से फिर मिलने का वादा करते हुए विदा ली.

इसी तरह 6 महीने बीत गए. फोन पर बात और वीडियो चैट करतेकरते दोनों काफी नजदीक आ गए थे. कभीकभी दोनों बहुत ही अंतरंग बातें भी कर लेते थे, जिन्हें सुन कर आभा के शरीर में झनझनाहट सी होने लगती थी.

एक रोज जब अनुराग की पत्नी अपने मायके गई हुई थी तब वह आभा के साथ देर रात वीडियो पर चैट कर रहा था.

‘‘अनुराग, अपनी शर्ट उतार दो,’’ अचानक आभा ने कहा.

अनुराग ने एक पल सोचा और फिर शर्ट उतार दी. उस के बाद पाजामा भी.

‘‘अब तुम्हारी बारी है…’’ अनुराग ने कहा तो आभा का चेहरा शर्म से लाल हो गया. उस ने तुरंत चैट बंद कर दी मगर अब आभा का युवा मन अनुराग की कामना और भी तीव्रता से करने लगा. सोनू और मां की जिम्मेदारियों के कारण वह अपनी शादी के बारे में सोच नहीं पा रही थी. मगर उस की अपनी भी कुछ कामनाएं थीं जो रहरह कर सिर उठाती थीं.

‘काश, उसे सिर्फ एक दिन भी अनुराग के साथ बिताने को मिल जाए. इस एक दिन में वह अपनी पूरी जिंदगी जी लेगी. अनुराग का प्रेम अपने मनमस्तिष्क में समेट लेगी,’ आभा कल्पना करने लगी. वह ऐसी संभावनाएं तलाशने लगी कि उसे यह मौका हासिल हो सके. वह नहीं जानती थी कि कल क्या होगा, मगर एक रात वह अपनी मरजी से जीना चाहती थी.

उस ने एक दिन डरतेडरते अपनी यह कल्पना अनुराग के साथ साझा की तो वह भी राजी हो गया. तय हुआ कि दोनों दूर के किसी तीसरे शहर में मिलेंगे.

अनुराग के लिए तो यह ज्यादा मुश्किल नहीं था, लेकिन आभा का बिना कारण बाहर जाना संभव नहीं था. मगर तकदीर भी शायद आभा पर मेहरबान होना चाह रही थी. अत: उसे एक दिन उस के लिए देना चाह रही थी ताकि वह अपनी कल्पनाओं में रंग भर सके.

आभा के औफिस में वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ. आभा ने शतरंज में भाग लिया. अधिक महिला प्रतिभागी न होने के कारण उस का चयन राज्य स्तर पर विभागीय प्रतिभागी के रूप में हो गया. इस प्रतियोगिता का फाइनल राउंड जयपुर में होना था, जिस में भाग लेने के लिए आभा को 2 दिनों के लिए जयपुर जाना था.

आभा ने टूरनामैंट की डेट फिक्स होते ही अनुराग को बता दिया. हालांकि आभा सहित सभी प्रतिभागियों के ठहरने की व्यवस्था विभाग के गैस्ट हाउस में की गई थी, मगर आभा ने अपनी सहेली के घर रुकने की खास परमिशन अपने लीडर से ले ली.

आभा अपने साथियों के साथ बस से सुबह 6 बजे जयपुर पहुंच गई. अनुराग की ट्रेन 10 बजे आने वाली थी. आभा ठीक 10 बजे रेलवे स्टेशन पहुंच गई. फिर अनुराग के साथ एक होटल में पतिपत्नी के रूप में चैकइन किया. थोड़ी देर बातें करने के बाद आभा ने उस से विदा ली, क्योंकि दोपहर बाद उस का मैच था. हालांकि दोनों ही अब दूरी बरदाश्त नहीं कर पा रहे थे, मगर जिस बहाने ने उन्हें मिलाया था उसे निभाना भी तो जरूरी था वरना पूरी टीम को उस पर शक हो जाता.

आभा ने बेमन से अपना मैच खेला और पहले ही राउंड में बाहर हो गई. उस ने टीम लीडर से तबीयत खराब होने का बहाना बनाया और 2 ही घंटों में वापस होटल आ गई. अनुराग ने उसे देखते ही बांहों में भर लिया और उस के चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी. आभा ने उसे कंट्रोल किया. वह इन लमहों को चाय की चुसकियों की तरह घूंटघूंट पी कर जीना चाहती थी. आभा की जिद पर दोनों मौल में घूमने चले गए. रात 9 बजे डिनर करने के बाद जब वे रूम में आए तो अनुराग ने उस की एक न सुनी और सीधे बिस्तर पर खींच लिया और उस पर बरस पड़ा. आभा प्यार की इस पहली बरसात में पूरी तरह भीग गई.

उस के बाद रातभर दोनों जागते रहे और रिमझिम फुहारों का आनंद लेते रहे. सुबह दोनों ने एकसाथ शावर लिया और नहातेनहाते एक बार फिर प्यार के दरिया में तैरने लगे. आभा पूरी तरह तृप्त हो चुकी थी. आज उसे लगा मानो उस की हर इच्छा पूरी हो गई. अब उसे अधिक की चाह नहीं थी.

इसी बीच आभा के टीम लीडर का फोन आ गया. उन्हें 10 बजे रवाना होना था. आभा ने अनुराग के होंठों को एक बार भरपूर चूसा और दोनों होटल से बाहर आ गए. अनुराग ने उस के लिए कैब बुला ली थी.

‘‘कैसा रहा तुम्हारा यह अनुभव?’’ अनुराग ने शरारत से पूछा.

‘‘मैं ने आज जाना है कि कभीकभी फूलों को तोड़ कर खुशबू हवा में बिखेर देनी चाहिए… कभीकभी किनारों को तोड़ कर बहने में कोई बुराई… खुद के लिए चाहने में कुछ भी अपराध नहीं…बेशक समाज इसे नैतिकता के तराजू में तोलता है, मगर मैं ने अपने मन की सुनी और मुझे उसी का पलड़ा भारी लगा,’’ आभा ने अनुराग का हाथ थाम कर दार्शनिक की तरह कहा.

अनुराग उस की बात को कितना समझा, कितना नहीं यह मालूम नहीं, मगर आभा आज एक दिन अपने लिए जी कर बेहद खुश थी. अब वह एकबार फिर से तैयार थी. बाकी सब के लिए जीने की खातिर.

सबक: संध्या का कौनसा राज छिपाए बैठा था उसका देवर

संध्या की आंखों में नींद नहीं थी. बिस्तर पर लेटे हुए छत को एकटक निहारे जा रही थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे, जिस से वह आकाश के चंगुल से निकल सके. वह बुरी तरह से उस के चंगुल में फंसी हुई थी. लाचार, बेबस कुछ भी नहीं कर पा रही थी. गलती उस की ही थी जो आकाश को उसे ब्लैकमेल करने का मौका मिल गया. वह जब चाहता उसे एकांत में बुलाता और जाने क्याक्या करने की मांग करता. संध्या का जीना दूभर हो गया था. आकाश कोई और नहीं उस का देवर ही था. सगा देवर. एक ही घर, एक ही छत के नीचे रहने वाला आकाश इतना शैतान निकलेगा, संध्या ने कल्पना भी नहीं की थी. वह लगातार उसे ब्लैकमेल किए जा रहा था और वह कुछ भी नहीं कर पा रही थी. बात ज्यादा पुरानी नहीं थी. 2 माह पहले ही संध्या अपने पति साहिल के साथ यूरोप ट्रिप पर गई थी. 50 महिलापुरुषों का गु्रप दिल्ली इंटरनैशनल एअरपोर्ट से रवाना हुआ.

15 दिनों की यात्रा से पूर्व सब का एकदूसरे से परिचय कराया गया. संध्या को उस गु्रप में नवविवाहित रितू कुछ अलग ही नजर आई. उसे लगा रितू के विचार काफी उस से मिलते हैं. बातबात पर खिलखिला कर हंसने वाली रितू से वह जल्द ही घुलमिल गई. रितू का पति प्रणव भी काफी विनोदी स्वभाव का था. हर बात को जोक्स से जोड़ कर सब को हंसाने की आदत थी उस की. एक तरह से रितू और प्रणव में सब को हंसाने की प्रतिस्पर्धा चलती थी. संध्या इस नवविवाहित जोड़े से खासी प्रभावित थी. संध्या और उस के पति साहिल के बीच वैसे तो सब कुछ सामान्य था, लेकिन जब भी वह रितू और प्रणव की जोड़ी को देखती आहें भर कर रह जाती. प्रणव के विपरीत साहिल गंभीर स्वभाव का इंसान था, जबकि संध्या साहिल से अलग खुले विचारों वाली थी. यूरोप यात्रा के दौरान ही संध्या, रितू और प्रणव इतना घुलमिल गए कि विभिन्न पर्यटन स्थलों में घूम आने के बाद भी होटल के रूम में खूब बातें करते, हंसीमजाक होता. साहिल संध्या का हाथ पकड़ खींच कर ले जाता. वह कहता कि चलो संध्या, बहुत देर हो गई. इन्हें भी आराम करने दो. हम भी सो लेते हैं. गु्रप लीडर ने सुबह जल्दी उठने को बोला है.

मगर संध्या को कहां चैन मिलता. वह अपने रूम में आ कर भी मोबाइल पर शुरू हो जाती. वहाट्सऐप पर शुरू हो जाता रितू से जोक्स, कौमैंट्स भेजने का सिलसिला. रितू ने संध्या के फेसबुक पर फ्रैंड रिक्वैस्ट भेज डाली. संध्या ने तुरंत स्वीकार कर ली. दिन में जो फोटोग्राफी वे लोग करते उसे वे व्हाट्सऐप पर एकदूसरे को भेजते. फोटो पर कौमैंट्स भी चलते. रात को रितू और संध्या के बीच व्हाट्सऐप पर घंटों बातें चलतीं. जोक्स से शुरू हो कर, समाजपरिवार की बातें होतीं. धीरेधीरे यह सिलसिला व्यक्तिगत स्तर पर आ गया. एकदूसरे की पसंद, रुचि से ले कर स्कूलकालेज की पढ़ाई, बचपन में बीते दिनों की बातें साझा करने लगीं.

एक रात रितू ने व्हाट्सऐप पर संध्या के सामने दिल खोल कर रख दिया. शादी से पहले के प्यार और शादी तक सब कुछ बता दिया. शादी से पहले रितू की लाइफ में प्रणव था. दोनों एक ही कालेज में पढ़ते थे. दोनों का परिवार अलगअलग धर्म और जाति का था. उन के प्यार में कुछ अड़चनें आईं. शादी को ले कर दोनों परिवारों में तकरार हुई पर आखिर रितू और प्रणव ने सूझबूझ दिखाते हुए अपनेअपने परिवार को मना लिया. रितू और प्रणव की शादी हो गई.व्हाट्सऐप पर रितू की लव स्टोरी पढ़ कर संध्या के मन में हलचल पैदा हो गई. उसे अपना अतीत याद हो आया. उस रात उस का मन किया वह भी रितू को वह सब कुछ बता दे जो उस का अतीत है, लेकिन वह हिम्मत नहीं कर पाई कि पता नहीं रितू क्या सोचेगी. वह उस के बारे में न जाने क्या धारणा बना ले. अजीब सी हलचल मन में लिए संध्या सो गई.

अगली रात संध्या अपनेआप को रोक नहीं पाई. रोज की तरह व्हाट्सऐप पर बातों का सिलसिला चल ही रहा था कि मौका देख कर संध्या ने लिख डाला कि मेरा भी एक अतीत है रितू. मैं भी किसी से प्यार करती थी. पर वह प्यार मुझे नहीं मिल सका.

रितू ने आश्चर्य वाला स्माइली भेजा और लिखा कि बताओ कौन था वह? क्या लव स्टोरी है तुम्हारी?

फिर संध्या ने रितू को अपनी लव स्टोरी बताने का सिलसिला शुरू कर दिया. वह मेरे कालेज में ही था. उस का नाम संजय था. हम दोनों एकदूसरे से बहुत प्यार करते थे. हर 1-2 घंटे में मोबाइल पर हमारी बातें नहीं होतीं, तो लगता बहुत कुछ अधूरा है लाइफ में. दोनों में खूब बातें होतीं और तकरार भी. दुनिया से बेखबर हम अपने प्यार की दुनिया में खोए रहते. हमारा प्यार सारी हदें पार कर गया. विश्वास था कि घर वाले हमारी शादी को राजी हो जाएंगे. इसी विश्वास को ले कर मैं ने खुद को संजय को सौंप दिया. संध्या ने रितू को व्हाट्सऐप पर आगे लिखा, उस दिन पापा ने मुझ से कहा कि बेटी, तुम्हारी पढ़ाई पूरी हो चुकी है. हम चाहते हैं कि अब अच्छा सा लड़का देख कर तुम्हारी शादी कर दें. मैं एकाएक पापा से कुछ नहीं बोल पाई. बस, इतना ही कहा कि पापा मुझे नहीं करनी शादी. अभी मेरी उम्र ही क्या हुई है.

इस पर पापा ने कहा कि उम्र और क्या होगी? 25 साल की तो हो चुकी हो. जब मैं ने कहा कि नहीं पापा, मुझे नहीं करनी शादी तो वे हंस पड़े. बोले सच में अभी बच्ची हो. मैं ने पापा की बात को गंभीरता से नहीं लिया, पर वे मेरी शादी को ले कर गंभीर थे. एक दिन पापा ने मुझे बताया कि एक अच्छे परिवार का लड़का है तेरे लायक. किसी बड़ी कंपनी में सौफ्टवेयर इंजीनियर है. 25 लाख का पैकेज है. वे अगले हफ्ते तुझे देखने आ रहे हैं. पापा की बात सुन कर मैं अवाक रह गई. मुझ से रहा नहीं गया. मैं ने हिम्मत जुटा कर पापा से कहा कि पापा, मैं एक लड़के से प्यार करती हूं. आप उन से बात कर लीजिए. पापा मेरी तरफ देखते रह गए. उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि उन की नजर में मैं सीधीसादी नजर आने वाली लड़की किस हद तक आगे बढ़ चुकी हूं.

पापा ने पूछा कि कौन है वह लड़का? मैं ने संजय का नाम, पता बताया तो पापा का गुस्सा बढ़ गया कि कभी उस परिवार में अपनी बेटी का रिश्ता नहीं करूंगा. मैं अंदर तक हिल गई. मुझे लगा मेरे सपने रेत से बने महल की तरह धराशायी हो जाएंगे. मैं ने तो संजय को सब कुछ सौंप दिया था. धरती हिलती हुई नजर आई उस दिन मुझे.

पापा और सब घर वालों ने 2-4 दिन में ऐसा माहौल बनाया कि मेरी और संजय की शादी नहीं हो पाई. अगले हफ्ते ही साहिल और उस के घर वाले मुझे देखने आ गए. मुझे पसंद कर लिया गया. रिश्ता पक्का हो गया. पापा ने सख्त हिदायत दी कि संजय का जिक्र भूल कर भी कभी न करूं. इस तरह मेरी शादी साहिल से हो गई. मैं अतीत भूल कर अपना घर बसाने में लग गई. शादी को 2 साल हो चुके हैं. संध्या ने रितू से व्हाट्सऐप पर अपने अतीत की बातें शेयर की और संजय का वह फोटो भेजा जो उस ने संजय के फेसबुक अकाउंट से डाउनलोड किया था.

‘‘अरे वाह, मैडम तुम ने तो बखूबी हैंडल कर लिया लाइफ को,’’ रितू ने संध्या की कहानी सुन कर लिखा.

इसी तरह हंसीमजाक और व्यक्तिगत बातें शेयर करते हुए यूरोप का ट्रिप पूरा हो गया. जब वे वापस घर पहुंचे तो संध्या और साहिल थक कर चूर हो चुके थे. तब रात के 2 बज रहे थे. सुबह देर तक सोते रहे. सास ने दरवाजा खटखटाया कि संध्या, साहिल उठ जाओ… सुबह के 11 बज चुके हैं. नहा कर नाश्ता कर लो. संध्या हड़बड़ा कर उठी. फटाफट फ्रैश हो कर तैयार हुई और किचन में आ गई. नाश्ता तैयार कर डाइनिंग टेबल पर लगाया तब तक साहिल भी तैयार हो चुका था. दोनों ने नाश्ता किया. तभी संध्या को खयाल आया कि मोबाइल कहां है. उस ने इधरउधर देखा पर नहीं मिला. आखिर कहां गया मोबाइल? उसे ध्यान आ रहा था कि रात को जब आई थी तो डाइनिंग टेबल पर रखा था.

‘‘संध्या मैं औफिस जा रहा हूं. आज बौस आ रहे हैं. 3 बजे उन के साथ मीटिंग है,’’ साहिल ने घर से निकलते हुए कहा.

‘‘ठीक है.’’

साहिल के जाने के बाद संध्या मोबाइल ढूंढ़ने में जुट गई. हर जगह देखा. वह अपने देवर आकाश के कमरे में जा पहुंची कि कहीं उस ने देखा हो. वह उस के कमरे में पहुंची तो मोबाइल आकाश के हाथों में देखा. वह मोबाइल स्क्रीन पर व्हाट्सऐप पर मैसेज पढ़ रहा था. वह मैसेज जो संध्या ने रितू को लिखे थे. वह सब कुछ पढ़ चुका था और मोबाइल को साइड में रखने ही जा रहा था.

‘‘आकाश, क्या कर रहे हो? मेरा मोबाइल तुम्हारे पास कहां से आया? क्या देख रहे थे इस में?’’ संध्या ने पूछा तो हमउम्र देवर आकाश के होंठों पर कुटिल मुसकान दौड़ गई.

‘‘कुछ नहीं भाभी, बस आप की लव स्टोरी पढ़ रहा था. आप के लवर का फोटो भी देखा. बहुत स्मार्ट है वह. क्या नाम था उस का संजय?’’ आकाश ने कहा तो संध्या की आंखों के सामने अंधेरा छा गया.

‘‘कुछ नहीं है… आकाश वे सब मजाक की बातें थीं,’’ संध्या ने गिड़गिड़ाते हुए कहा.

‘‘अगर भैया को ये सब मजाक की बातें बता दूं तो…?’’ आकाश ने तिरछी नजरें करते हुए कहा. उस की आंखों में शरारत साफ नजर आ रही थी.

संध्या को आकाश के इरादे नेक नहीं लगे. उसे अफसोस था कि उस ने किसी अनजानी दोस्त के सामने क्यों अपने अतीत की बातें व्हाट्सऐप पर लिखी. लिख भी दी थीं तो डिलीट क्यों नहीं कीं.

‘‘तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे आकाश. यह मजाक अच्छा नहीं है तुम्हारे लिए,’’ संध्या ने सख्त लहजे में कहा.

यह सुन कर आकाश अपनी औकात पर उतर आया, ‘‘भाभी जान, क्यों घबराती हो, ऐसा कुछ नहीं करूंगा. आप बस देवर को खुश कर दिया करो.’’

संध्या गुस्सा पीते हुए बोली, ‘‘मुझे क्या करना होगा? तुम क्या चाहते हो?’’

‘‘भाभी, इतना बताना पड़ेगा क्या आप को? आप शादीशुदा हैं. शादी से पहले भी आप काफी ज्ञान रखती थीं,’’ आकाश ने बेशर्मी से कहा.

संध्या को लगा वह बहुत बड़े जाल में फंसने जा रही है. अब करे भी तो क्या करे?

‘‘क्या सोच रही हो संध्या? आकाश अचानक भाभी से संध्या के संबोधन पर उतर आया.

‘‘मुझे सोचने का वक्त दो आकाश,’’ संध्या ने कहा.

‘‘ओके, नो प्रौब्लम. जैसा तुम्हें ठीक लगे. पर याद रखना मेरे पास बहुत कुछ है. भैया को पता चल गया तो धक्के मार कर घर से निकाल देंगे तुम्हें.’’

‘‘पता है, तुम किस हद तक नीचता कर सकते हो,’’ संध्या ने रूखे स्वर में कहा.

संध्या अब क्या करे? कैसे पीछा छुड़ाए आकाश से? वह देवरभाभी के रिश्ते को कलंकित करने पर उतारू था. वह जब भी मौका मिलता संध्या का रास्ता रोक कर खड़ा हो जाता कि क्या सोचा तुम ने?

आकाश मोबाइल पर संध्या को कौल करता, ‘‘इतने दिन हो गए, अभी तक सोचा नहीं क्या? क्यों तड़पा रही हो?’’

संध्या पर आकाश लगातार दबाव बढ़ा रहा था. उस का जीना दूभर हो गया. इसी उधेड़बुन में वह करवटें बदल रही थी. उस की नींद उड़ चुकी थी. वह सुबह तक किसी निर्णय पर पहुंचना चाहती थी. उस के सामने दुविधा यह थी कि वह खुद को बचाए या आकाश की वजह से परिवार में होने वाले विस्फोट से बचे. वह चाहती थी किसी तरह आकाश को समझा सके, ताकि यह बात अन्य सदस्यों तक नहीं पहुंचे, लेकिन करे तो क्या करें. अचानक उस के दिमाग में एक विचार कौंधा. हां, यही ठीक रहेगा. उस ने मन ही मन सोचा और गहरी नींद में सो गई. अगले दिन संध्या ने घर का कामकाज निबटाया और अपनी सास से बोली, ‘‘मम्मीजी, मुझे मार्केट जाना है कुछ घर का सामान लाने. घंटे भर में वापस जा जाऊंगी.’’

फिर संध्या जब घर लौटी तो उस के चेहरे पर चिंता की लकीरों के बजाय चमक थी. उस ने पढ़ा था कि राक्षस को मारने के लिए मायावी होना ही पड़ता है. वह आकाश को भी उसी के हथियार से मारेगी… उस का सामना करेगी. मार्केट से वह अपने मोबाइल में वायस रिकौर्डिंग सौफ्टवेयर डलवा आई. कुछ देर बाद ही आकाश ने घर से बाहर जा कर संध्या के मोबाइल पर कौल की. संध्या पूरी तरह तैयार थी.

‘‘हैलो संध्या क्या सोचा तुम ने?’’ आकाश ने पूछा.

‘‘मुझे क्या करना होगा?’’ संध्या ने पूछा.

‘‘कुछ नहीं बस वही सब… तुम्हें बताना पड़ेगा क्या?’’

‘‘हां, बताना पड़ेगा. मुझे क्या पता तुम क्या चाहते हो?’’

‘‘तुम मेरे साथ…’’ और फिर सब कुछ बताता चला गया आकाश. कब, कहां, क्या करना होगा.

‘‘और अगर मैं मना कर दूं तो क्या करोगे?’’ संध्या ने पूछा.

‘‘कुछ नहीं तुम्हारी लव स्टोरी सब को बता दूंगा.’’

संध्या गुस्से से चिल्ला पड़ी, ‘‘जाओ, सब को बताओ. परंतु एक बात याद रखना तुम जो मुझे ब्लैकमेल कर रहे हो न मैं इस की शिकायत पुलिस में करूंगी. ऐसी हालत कर दूंगी कि कई जन्मों तक याद रखोगे.’’

‘‘कैसे करोगी?’’ क्या प्रूफ है तुम्हारे पास?’’ आकाश ने कहा.

‘‘घर आ कर देख लेना यों कायरों की तरह घर से बाहर जा कर क्या बात कर रहे हो,’’ संध्या का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था.

शाम को आकाश घर आया. संध्या ने मौका मिलते ही धीमे से कहा ‘‘पू्रफ दूं या वैसे ही मान जाओगे? तुम ने जो भी बातें की हैं वह सब मोबाइल में रिकौर्ड हैं और इस की सीडी अपने लौकर में रख ली है.’’

आकाश को विश्वास नहीं हो रहा था कि संध्या इस कदर पलटवार करेगी. वह चुपचाप अपने कमरे में खिसक गया. संध्या आज अपनी जीत पर प्रसन्न थी. व्हाट्सऐप के जरीए जो मुसीबत उस पर आई थी, वह उस से छुटकारा पा चुकी थी.

Anant Ambani की कॉकटेल पार्टी में बौलीवुड़ सितारों ने दी धमाकेदार एंट्री, देखें इनसाइड फोटोज

भारत के जानेमाने कारोबारी मुकेश अंबानी हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में रहते है. इन दिनों उनके बेटे अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट के प्री-वेडिंग की खबरें खूब वायरल हो रही है. जी हां, प्री-वेंडिंग फक्शन में बीती रात कॉकटेल पार्टी का भी खास आयोजन किया गया था. जहां कई फिल्मी सितारों की इनसाइड फोटोज सामने आने लगी है.

 

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गुजरात के जामनगर में आयोजित हुए अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की इस कॉकटेल पार्टी में कई सितारों ने धमाकेदार एंट्री की. जिसकी तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर आते ही छाने लगी हैं. सामने आईं इन तस्वीरों में फिल्मी सितारे अनंत अंबानी के प्री-वेडिंग पार्टी में एन्जॉय करते दिखे है.

 

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इस फंक्शन में सबसे पहले करीना कपूर खान अपने परिवार के साथ इस खास फंक्शन में पहुंची. जहां अनंत अंबानी-राधिका मर्चेंट के प्री-वेडिंग फंक्शन में खान फैमिली ने एक साथ तस्वीरें क्लिक करवाईं. अदाकारा करीना कपूर खान यहां डिजायनर और रेडी टू वियर साड़ी पहनकर पहुंचीं. जिसमें वो बला की खूबसूरत और ग्लैमरस लग रही थी. वही, इस पार्टी में एक्ट्रेस आलिया भट्ट में ब्लैक गाउन पहने दिखीं. उनकी यहां से मस्ती करते हुए ये तस्वीर सोशल मीडिया पर आई है. इतना ही नहीं, मुकेश अंबानी के बेटे अनंत और राधिका के प्री-वेडिंग सेलिब्रेशन में कॉकटेल पार्टी के लिए फेसबुक के फाउंडर मार्क जकरबग भी यहां पहुंचे थे.

 

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पार्टी में मास्टर ब्लास्टर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी भी अपनी पत्नी साक्षी के साथ पहुंचे थे. जहां दोनों ने एक दूसरे का साथ क्लासी तस्वीरें क्लिक करवाईं. इस पार्टी की जान दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह लगे. बता दें, अपनी प्रेग्नेंसी की खबर देने के बाद उन्होंने पहली बार इस पार्टी में हिस्सा लिया है. जहां हर किसी की नजर इन पर टिकी हुई थी.

समंदर किनारे नम्रता मल्ला ने डांस कर लगाई आग, किलर मूव्स ने जीता सबका दिल

भोजपुरी की बोल्ड एक्ट्रेस नम्रता मल्ला हमेशा ही अपनी हौट वीडियो के लिए जानी जाती है. अपनी कड़ी मेहनत और लगन से उसने अपनी अलग पहचान बनाई है. एक्ट्रेस ने बहुत कम समय में लोगों के दिलों में एक खास जगह बना ली है. यूपी-बिहार के लोग नम्रता मल्ला की हर अदा पर फैन फिदा है. नम्रता मल्ला ने पहले पवन सिंह से लेकर खेसारी लाल यादव तक के साथ मन्यूजिक वीडियोज में काम किया है. वहीं, नम्रता मल्ला सोशल मीडिया की दुनिया में भी छाई रहती है. इस बीच भोजपुरी की क्वीन नम्रता मल्ला का एक वीडियो सामने आया है. जिसमें वे ऐसा डांस करती नजर आ रही है. कि सभी लोगों की धड़क्कने बड़ गई है.

 

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आपको बता दें, कि नम्रता मल्ला ने सोशल मीडिया पर एक बार फिर फैंस को विजुअल ट्रीट दिया है. भोजपुरी एक्ट्रेस नम्रता मल्ला ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है. जिसमें वे समंदर किनारे बोल्ड डांस करती नजर आ रही है. वीडियो में नम्रता मल्ला ने बिकनी कैरी की हुई है. जिसमें वे किलर मूव्स देती हुई दिख रही है. जिसे देख लोग पानी-पानी हो गए है. नम्रता मल्ला का ये बोल्ड लुक देख लोग घायल हो गए है. एक्ट्रेस नम्रता मल्ला के इस क्लिप पर फैंस जमकर कमेंट करते हुए नजर आए है.

 

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बताते चलें कि नम्रता मल्ला की फैन फॉलोइंग काफी अच्छी है. इस मामले में वो टॉप पर हैं. इंस्टाग्राम पर नम्रता मल्ला को 2.6 मिलियन से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं. नम्रता मल्ला की कोई भी तस्वीर इंटरनेट पर आते ही वायरल हो जाती हैं. इतना ही नहीं, वे अपनी फिटनेस वीडियो भी अपडेट करती रहती है.

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के मार्केट पर एआई की सेंध

अब एआई से सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनाए जा रहे हैं. ये हूबहू इंसानों जैसे दिखाई दे रहे हैं. भारत में नैना, कायरा, श्रव्या इन्फ्लुएंसर के मार्केट में उतर चुकी हैं. कहीं ये इन्फ्लुएंसर्स के मार्केट में सेंध न लगा दें.

गुलाबी ब्लोंड हेयर, शार्प नोज, सधे होंठ और सुराहीदार गरदन. रोलर कोस्टर सा जिस्म ऐसा कि कोई भी फिसल जाए पर जब पता चले कि सोशल मीडिया पर एटाना लोपेज नाम की यह लड़की रियल नहीं, बल्कि एआई की दुनिया की इल्यूजन है जिसे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में परोस दिया गया है तो हर कोई अपना माथा पकड़ लेगा.

आखिर कैसे इतनी हूबहू इंसान जैसी कोई चीज बनाई जा सकती है जिस के एक्सप्रैशन, अदाएं सब इंसान जैसे हों, जो आंखों से इशारा करती हो, नाचती हो, होंठ हिलाती हो और मदमस्त हो. यह कमाल एआई ने किया है. पत्थर की मूरत में जान फूंकने को सच मान लेने वाले इस अंधविश्वासी समय में एआई लोहे में जान फूंक रहा है. उस के रोबोट्स टैनिस व चैस खेल रहे हैं, खाना बना रहे हैं, नाच रहे हैं और अब कंपनियों के प्रचार के लिए रील भी बना रहे हैं.

एटाना लोपेज एआई अवतार में चर्चा का विषय काफी पहले बन चुकी थी. एटाना लोपेज एआई वाली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर है. अपनी प्रोफाइल में वह खुद को वर्चुअल सोल बताती है. इस ने अभी सिर्फ 73 पोस्ट किए हैं पर इन 73 पोस्ट्स में इसे 2 लाख 72 हजार लोगों ने फौलो किया है. खुद को फिटनैस मौडल बताने वाली एटाना ने हर एक पोस्ट पर हजारों लाइक्स और शेयर पाए हैं और उन्हें शेयर किया गया है.

एटाना लोपेज इंस्टाग्राम के अलावा ट्विटर, टिकटौक पर भी है. ट्विटर पर खुद को स्पैनिश गौड्स औफ टैंपटेशन बताती है, वहां इंटिमेट और सिडक्टिव कंटैंट डालती है. इस के अलावा वह गेमिंग, फिटनैस की शौकीन भी है.

नाम भी पैसा भी

द फाइनैंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एटाना लोपेज को एड एजेंसी क्लूपलैस की कोफाउंडर डिआना नूनेज ने बनाया है. नूनेज का कहना है कि वे इन्फ्लुएंसर्स की दिनोंदिन बढ़ती फीस से परेशान थीं. इस का कोई हल निकालने के लिए उन्होेंने एआई की सहायता से वर्चुअल इंफ्लुएंसर बनाने की सोची और एआई अवतार एटाना लोपेज को गढ़ दिया.

अब खबर यह है कि गुलाबी बालों वाली लोपेज हर महीने 9 लाख रुपए कमा रही है. सोशल मीडिया पर कंपनियां भी लोपेज से अपने प्रोडक्ट्स का प्रचार करवाने को हंसीखुशी पैसा देने को तैयार हैं.

पेटीएम फाउंडर और सीईओ विजय शेखर शर्मा ने एक्सो पर एक पोस्ट में लोपेज का जिक्र करते हुए लिखा था कि कैसे ह्यूमन इन्फ्लुएंसर के बजाय एआई इन्फ्लुएंसर्स आने वाले समय में मार्केटिंग के लिए फायदेमंद हैं.

एआई अवतार धीरेधीरे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की जगह लेता जा रहा है. सिर्फ एटाना लोपेज ही नहीं, इस फेहरिस्त में एक बड़ा नाम लू दो मगालू का है. उस के 68 लाख फौलोअर्स हैं. अपने पेज में वह ब्यूटी प्रोडक्ट्स का प्रचार करती है. इस के फीचर इंसानों जैसे नहीं हैं पर यह रिप्लिका बेहद फेमस है.

इसी तरह लिलमिकेला है जो 19 साल की है. जिस का जन्म 2016 में इंस्टाग्राम पर हुआ. अपने प्रोफाइल पर उस ने हैशटैग ‘ब्लैक लाइव मैटर’ लिखा हुआ है. जाहिर है यह इन्फ्लुएंसर अमेरिका में हो रहे ब्लैक पर अत्याचार पर स्टैंड लेती है. इस के इंस्टाग्राम पर 27 लाख फौलोअर्स हैं, वहीं टिकटौक पर 35 लाख और फेसबुक पर 11 लाख. यह हूबहू इंसानों जैसी है. इस की पोस्ट में दिखाई देता है कि यह पब्लिक प्लेस में घूमती है. अलगअलग जगहें ट्रैवल करती है. साथ में कंपनियों और रैस्तरां का प्रचार भी करती है.

2019 में सुपरमौडल बेला हदीद ने केल्विन क्लेन के विज्ञापनों में लिलमिकेला के साथ तसवीर खिंचवाई, जिस पर तब बात उठी थी कि यह भविष्य की एक झलक है. आज वह झलक इसलिए भी सच साबित होती दिखाई दे रही है कि यह इन्फ्लुएंसर बड़ेबड़े स्टार्स के साथ पोडकास्ट करते हुए भी नजर आ रही है.

भारत में एआई इन्फ्लुएंसर की धूम

सोशल मीडिया पर एआई इन्फ्लुएंसर सिर्फ विदेशों में ही फेमस नहीं हो रहे, इंडिया भी इस मामले में पीछे नहीं है. नैना, कायरा, टिया शर्मा और श्रव्या वे नाम हैं जो अपनी धाक जमा चुके हैं. 22 साल की नैना जो झांसी से मुंबई आई है और उस का सपना एक ऐक्ट्रैस व मौडल बनने का है. लेकिन नैना की यह स्टोरी उतनी ही फेक है जितनी वह खुद है. वह एआई से तैयार की गई है.

भारत में नैना असल और नकल के बीच बनी लाइन को ब्लर करने का काम करती है. वह खुद को भारत की पहली एआई सुपरस्टार कहती है. उस के लुक्स, हरकतें सब असल ह्यूमन की तरह हैं. उसे देख कर कोई कह नहीं सकता कि यह नकली होगी.

नैना पैपराजी से बात करती है, सैलिब्रिटी की तरह फोटो खिंचवाती है. वह ‘द नैना शो’ के नाम से पोडकास्ट चलाती है जहां सान्या मल्होत्रा, सियामी खेर जैसी बौलीवुड सैलिब्रिटीज आती हैं. वह हर तरह की वीडियो बनाती है और बताती है कि साड़ी कैसे पहनी जाए, स्टाइलिस्ट और ट्रैंडी कैसे बना जाए, बाल कैसे बनाए जाएं और मिनिमम ज्वैलरी से अच्छा लुक कैसे बनाया जाए. यानी यह एआई की जीतीजागती इन्फ्लुएंसर है जो फैशन के बारे में जानकारी देती है.

जाहिर है, एआई अब इन्फ्लुएंसर के मार्केट पर सेंध लगाने जा रहा है. कंपनियां भी इसे बढि़या चांस की तरह देख रही हैं क्योंकि इन्फ्लुएंसर्स जिस तरह किसी प्रोडक्ट के प्रचार के लिए मोटी फीस ले रहे हैं उस के मुकाबले इस तरह के डमी या डोपलैंगर्स ज्यादा किफायती साबित हो रहे हैं.

तकनीक है कमाल की

हिमांशु ने माया, ब्लैंडर और अनरियल इंजन जैसे 3डी डिजाइन टूल्स का यूज कर 2022 में कायरा को बनाया था. इन टूल्स ने वीडियो गेम और मार्वल फिल्मों में यूज की जाने वाली तकनीक के जैसे ही कायरा के चेहरे और बौडी पार्ट्स को तराशने में मदद की. वहीं दूसरी तरफ वे बताते हैं कि श्रव्या को 2023 में केवल जेनरेटिव एआई का यूज कर के बनाया गया जो बिलकुल ही रीयलिस्टिक है.

3डी टैक्नोलौजी के माध्यम से पहले कायरा जैसे डोपलैंगर्स बनाए जाते थे जिस में काफी मेहनत और रिसौर्सेज लगते थे, हालांकि इस के बावजूद कायरा से मेकर्स को फायदा हुआ है. उस ने लोरियल पेरिस, बोट, टाइटन, रियलमी और अमेरिकन टूरिस्टर जैसे बड़े ब्रैंडों के साथ कोलैबोरेट किया. कायरा के कुछ प्रचार वीडियो को 35 मिलियन यानी साढ़े 3 करोड़ से अधिक बार देखा गया है. अब एआई की हैल्प से आसानी और किफायत में ये बनाए जा रहे हैं जो ज्यादा रियल दिखाई देते हैं.

एआई इन्फ्लुएंसर कहीं न कहीं रियल इन्फ्लुएंसर्स के लिए बड़ी चुनौती साबित होते जा रहे हैं. क्योंकि अधिकतर इन्फ्लुएंसर्स का कंटैंट एकजैसा होता है. उन में वैराइटी और क्रिएटिविटी की कमी होती है. किसी ट्रैंडिंग सौंग पर अपना शरीर और होंठ हिला लेना उन्हें कंटैंट लगता है.

आमतौर पर इन्फ्लुएंसर्स के लिए रील का कंटैंट यही है तो इस अनुसार इस से कहीं ज्यादा अच्छा कंटैंट एआई देने में सक्षम है. आज एआई इस फील्ड में घुस रहा है. इस तरह के इन्फ्लुएंसर्स गढ़ने में कई हाईप्रोफाइल टीम जुट गई हैं. उन की टीम ऐसे एआई मौडल बनाने पर काम कर रही है जो एक कमांड में कुछ सैकंड के छोटे रील व वीडियो बनाने में सक्षम हों.

अलग यह है कि एआई इन्फ्लुएंसर्स कई भाषाओं में कंटैंट दे सकते हैं. इन के पास भाषा की रुकावट नहीं है. इन के पास उम्र की भी सीमा नहीं है. ये आज जिस तरह दिखाई दे रहे हैं, हर समय उसी तरह दिखाई दे सकते हैं. इसलिए इस तरह के इन्फ्लुएंसर्स ग्लोबली पौपुलर होने का दमखम रखते हैं. यही कारण भी है कि एटाना लोपेज, लिलमिकेला ग्लोबली फेमस हैं.

नामचीन भी एआई की दुनिया में

और तो और, अब फेमस सैलिब्रिटीज ने भी अपना एआई अवतार बनाना शुरू कर दिया है, जिस में बौलीवुड स्टार सनी लियोनी का नाम जुड़ा है. उस ने अपने डोपलैंगर अवतार पर कहा कि, ‘मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि यह मैं हूं. अब जब आप चाहें मुझ से बात कर सकते हैं और देख सकते हैं.’ इस इंस्टा पोस्ट पर उन्होंने ञ्चद्मड्डद्वशह्लश.ड्डद्ब को टैग किया.

पिछले साल साइंस फिक्शन पौपुलर वैब सीरीज ‘ब्लैक मिरर’ का 6ठा सीजन आया था. उस में पहले एपिसोड ‘जोआन इज औफुल’ में इसी तरह के एआई अवतार की तरफ इशारा किया गया था. उस में दिखाया गया था कि कैसे एआई की मदद से अब परदे पर एआई सैलिब्रिटीज दिखाई जाएंगी जो हूबहू असल सैलिब्रिटीज की तरह ही होंगी. इस में रियल ऐक्ट्रैस के साथ कौन्ट्रैक्ट साइन होता है, फिर उस का एआई क्लोन बना कर फिल्म बना दी जाती है. यह सब आने वाले टाइम में सच साबित हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता.

लेकिन शुरुआत अभी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ हो गई है, जहां उन का बाजार अब छिनता दिखाई दे रहा है. हालांकि इस तरह के एआई इन्फ्लुएंसर के साथ समस्या यह है कि ये चाहे परोस कैसा भी कंटैंट रहे हों, इन की बुनियाद झूठ पर टिकी होगी और कहे या बताए पर जल्दी भरोसा नहीं किया जा सकता. लेकिन सोशल मीडिया की बाढ़ में कौन,कब, कहां मिक्स हो जाए, पता नहीं चलता.

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