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मनोहर कहानियां – औनर किलिंग: धर्म की भेंट चढ़ा प्यार

ईद के अगले दिन 4 मई, 2022 की रात को करीब 9 बजे का वक्त था. तेलंगाना में हैदराबाद के सरूरनगर इलाके की मेन सड़क पर गाडि़यों का आवागमन लगातार बना हुआ था. पैदल यात्रियों की भी भीड़भाड़ थी. तहसीलदार औफिस से ठीक पहले चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल के ग्रीन होने के इंतजार में हर तरह की छोटीबड़ी गाडि़यां खड़ी थीं. कुछ पैदल लोग सड़क पार कर रहे थे, जबकि कुछ सड़क के किनारे खड़े थे.
ग्रीन सिग्नल होने का इंतजार स्कूटी पर बैठे एक नवविवाहिता जोड़े को भी था. वह युवक कोई और नहीं बिलियमपुरम नागराजू था, जिस ने आशरीन सुलताना के साथ हाल ही में प्रेम विवाह किया था. शादी के बाद आशरीन ने अपना नाम पल्लवी रख लिया था.

गहरे सांवले रंग के नागराजू के साथ पीछे चिपक कर बैठी गोरीचिट्टी पल्लवी साइड मिरर में अपनी सूरत निहार रही थी. तभी युवक पत्नी से मुसकराते हुए बोला, ‘‘अपनी खूबसूरती आईने को दिखा रही हो या मुझे?’‘‘अरे नहीं जी, मुहांसे देख रही हूं. कुछ ज्यादा ही निकल आए हैं,’’ पल्लवी बोली.
‘‘देसी उपाय करो, ठीक हो जाएंगे. वैसे तुम इस में भी गजब की सुंदर दिखती हो,’’ नागराजू ने मजाक किया.‘‘अच्छाजी! तुम तो दादी अम्मा की तरह बोलते हो,’’ पल्लवी भी मजाकिया लहजे में बोली. तभी सिग्नल की लाइट ग्रीन हो गई.

पल्लवी ने नागराजू की कमर कस कर पकड़ ली और उस ने स्कूटी तेजी से आगे बढ़ा दी. स्कूटी के अचानक तेज होने से पल्लवी थोड़ा पीछे की ओर झुक गई और संभलती हुई बोली, ‘‘गिराने का इरादा है क्या?’’‘‘तुम्हें कैसे गिरा सकता हूं, तुम तो मेरी जान हो.’’ नागराजू प्यार जताते हुए बोला.
‘‘अच्छा ऐसा है क्या?’’पल्लवी का बोलना था कि उस के पति नागराजू ने स्कूटी को अचानक ब्रेक लगा दिया.‘‘अरे..अरे…अब क्या हुआ?’’ पल्लवी ने तेज आवाज में पूछा, लेकिन तब तक वह स्कूटी से नीचे धड़ाम से गिर चुकी थी. नागराजू भी उस से अलग जा गिरा था.

पल्लवी को मामूली चोट आई थी. तुरंत खुद को संभालती हुई उठ खड़ी हुई. जबकि नागराजू उस से थोड़ा दूर गिरा हुआ ही था. वह उठने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उठ नहीं पा रहा था. 2 युवक उसे घेरे खड़े थे.
एक बोला, ‘‘उठ हरामजादे… कुत्ते की औलाद. चला है इश्क लड़ाने. आज देखता हूं तुझे कौन बचाता है.’’
आशरीन उर्फ पल्लवी को आवाज जानीपहचानी लगी. उसे समझने में देर नहीं लगी. यह उस के बड़े भाई मोबिन की आवाज थी. वह हाथ में रौड लिए था.पल्लवी ने तुरंत उस के पैर पकड़ लिए, ‘‘भाई छोड़ दे. अब ये मेरे शौहर हैं. तुम्हारे दूल्हाभाई. मत मार इन्हें. तुझे जो कुछ कहना है मुझ से कह…’’

आशरीन उर्फ पल्लवी की बात अनसुनी कर गुस्से में चाकू पकड़े दूसरे युवक ने उसे खींच कर अलग कर दिया. चीखता हुआ गुस्से में बोला, ‘‘चल हट यहां से, आज इस का काम तमाम कर के ही दम लूंगा. बड़ी मुश्किल से महीने भर बाद हाथ लगा है.’’‘‘छोड़ दे भाई, इन्हें छोड़ दे. हमारी शादी हो चुकी है,’’ पल्लवी गिड़गिड़ाई.‘‘चल भाग यहां से हरामजादी, कुतिया कहीं की. भाग जा, वरना तुझे भी नहीं छोड़ूंगा. मुसलमानों में लड़कों की कमी हो गई है, जो तूने इस हिंदू से शादी की है. और वह भी नीची जाति के लड़के से. आज पकड़ में आया है, अब इस की खैर नहीं.’’ गुस्से में आगबबूला युवक ने अपने पति की जान की भीख मांगती बहन आशरीन को जोर का धक्का दिया.

खुद को संभालती पल्लवी कभी अपने पति को रौड से पीट रहे भाई की तरफ भागती तो कभी चाकू लिए दूसरे हमलावर को पकड़ने की कोशिश करती. लेकिन वह कोशिश के बाद भी सड़क पर जख्मी छटपटाते पति को नहीं बचा पा रही थी.तब तक वहां चारों ओर काफी भीड़ इकट्ठी हो गई थी. उन में अधिकतर मारपीट, हंगामे और खूनखराबे का तमाशा देख रहे थे तो कुछ लोगों ने अपनेअपने मोबाइल से वीडियो बनानी शुरू कर दी थी.जबकि हताश और विचलित पल्लवी जमा भीड़ में सभी से हाथ जोड़ कर पति को बचाने की गुहार लगा रही थी. गिड़गिड़ा रही थी कि कोई तो उस के पति को खून के प्यासे दरिंदों से बचा ले.

हमलावरों की आंखों में उतर आया था खून पल्लवी ने रौड से पिटाई कर रहे भाई के हाथ पकड़ लिए. रौड छीनने की कोशिश करती हुई बोली, ‘‘छोड़ दो, इन्हें छोड़ दो. जैसा तुम कहोगे मैं वैसा ही करूंगी. तुम चाहते हो कि मैं घर लौट जाऊं तो चलती हूं. मैं तुम्हारी हर बात मानने को तैयार हूं, लेकिन इन्हें छोड़ दो.’’
निर्दयी बने दोनों हमलावरों की आंखों में तो खून उतर आया था. एक ने युवती को भी रौड से पीट डाला, जबकि दूसरे ने नागराजू को चाकुओं से ताबड़तोड़ वार करते हुए गोद डाला.नागराजू की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. बर्बरता का यह मंजर करीब 20 मिनट तक चलता रहा, लेकिन तमाशबीन लाश बने रहे और दोनों हत्यारे चाकू और रौड लहराते हुए वहां से फरार हो गए.

थोड़ी देर में ही घटनास्थल पंजाल अनिल कुमार कालोनी की मेनरोड पर सरूरनगर थाने की पुलिस आ गई. थानाप्रभारी के. सीथाराम को 23 वर्षीय आशरीन सुलताना उर्फ पल्लवी ने सब कुछ बता दिया.
आशरीन ने थानाप्रभारी को यह भी बताया उन्होंने इसी साल 31 जनवरी को हैदराबाद के एक आर्यसमाज मंदिर में हिंदू रीतिरिवाज से 25 वर्षीय बिलियमपुरम नागराजू के साथ शादी कर ली थी. इस के एक दिन पहले ही उस ने अपना हिंदू नाम पल्लवी रख लिया था.आशरीन के अलावा घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की गई. इसी के साथ घटना की सूचना तत्काल पुलिस के उच्च अधिकारियों को दे दी गई. साथ ही लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. पुलिस के सामने सब से पहली चुनौती वारदात के बाद फरार हमलावरों की गिरफ्तारी की थी.

मामला तुरंत राज्य के गृह मंत्रालय तक जा पहुंचा और इस घटना की राजनीतिक गलियारे में चर्चा होने लगी. तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन ने इस मामले में राज्य सरकार से डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी. इसे हिंदूमुसलिम और दलित की हत्या के नजरिए से देखा जाने लगा.इस बीच तेलंगाना में भाजपा नेताओं ने हमलावरों के खिलाफ सख्त काररवाई की मांग की. तेलंगाना के भाजपा विधायक राजा सिंह ने हत्या की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी की मांग की.

डीसीपी सुनप्रीत सिंह और एलबी नगर के एसीपी पी. श्रीधर रेड्डी के आदेश पर पुलिस टीम बनाई गई और सीसीटीवी के फुटेज निकलवाए गए. सीसीटीवी की फुटेज के अनुसार, घटना की रात नागराजू आशरीन के साथ अपनी बहन के घर से अपने घर लौट रहा था. उसे सरूरनगर में हमलावरों ने रास्ते में रोक लिया था.
सीसीटीवी कैमरों और मोबाइल वीडियो में कैद हमले के कथित दृश्यों में 2 लोग नागराजू की बेरहमी से पिटाई करते हुए दिख रहे थे, जिस से वह खून से लथपथ हो गया.

अगले रोज 5 मई, 2022 को सरूरनगर पुलिस ने नागराजू की बेरहमी से हत्या करने वाले दोनों हमलावर गिरफ्तार कर लिए. इस संबंध में सरूरनगर पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 302 और एससी/एसटी (पीओए) संशोधन अधिनियम 2015 की धारा 3 (2) (वी) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया.

आरोपी हुए गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हैदराबाद के बालानगर इलाके के गुरुमूर्ति नगर में रहने वाले सैय्यद मोबिन अहमद (30 साल) और रंगारेड्डी जिले के शेरिलिंगमपल्ली के तारानगर इलाके के रहने वाले मोहम्मद मसूद अहमद (29 साल) के रूप में हुई.सैय्यद मोबिन अहमद आशरीन का भाई था. वह एक फल विक्रेता है, जबकि अन्य गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद मसूद पेशे से मोटर मैकेनिक है. मृतक नागराजू मलकपेट के एक मारुति शोरूम में मार्केटिंग का काम करता था. वह अनुसूचित जति माला समुदाय से आता था.

आशरीन ने घटना के पीछे के कारण के बारे में बताया. बड़ा भाई सैयद मोबिन अहमद को उस के नागराजू से प्रेमसंबंध पसंद नहीं थे. वह उस का घोर विरोधी बना हुआ था. वह बारबार कहता था कि नागराजू पढ़ालिखा है तो क्या हुआ, है तो नीची जाति का. हमें अपनी कौम में रहना है, यहीं जीना है, यहीं मरना है तब दूसरी कौम से रिश्ता क्यों बनाएं?

मोबिन ने उसे शादी से पहले इस के खिलाफ चेतावनी दी थी. फिर 30 जनवरी, 2022 को उस ने घर छोड़ दिया. तब वह अपना मोबाइल फोन साथ नहीं ले जा पाई थी.वारदात के दिन वह पति नागराजू के साथ स्कूटर से अपने किराए के कमरे पर जा रही थी. सरूरनगर के अनिल कुमार कालोनी के पास उसे हमलावारों ने रोक लिया था. अचानक उन पर हमले होने लगे थे. 2 हमलावर थे, जिन में वह सिर्फ भाई को ही पहचान पाई. दूसरे को वह नहीं जानती है.साथ ही आशरीन ने यह भी कहा कि उस ने मदद के लिए वहां खड़े तमाशबीनों से भी भीख मांगी थी, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया, जबकि उस के पति नागराजू को सब के सामने सिग्नल पर पीटा जा रहा था.

आशरीन ने नागराजू की हत्या का आरोप सीधेसीधे अपने भाई मोबिन अहमद और उस के साथी मोहम्मद मसूद पर लगाया. वह रोरो कर कहने लगी, ‘‘मैं हत्यारों से अपने पति के जान की भीख मांगती रही. लेकिन दोनों कसाई बने रहे. मेरे पति को उन्होंने चाकुओं से गोद दिया. मेरी आंखों के सामने मेरे पति की हत्या कर दी.’’

वीडियो हुआ वायरल

इस हत्याकांड के वीडियो में नागराजू की हत्या करता आशरीन का भाई साफ दिख रहा था. आशरीन अपने भाई से पति को बचाने की कोशिश करती दिख रही थी, लेकिन हत्यारोपी उसे धक्का मार कर दूर झटक देता है और जमीन पर पड़े नागराजू के सिर पर वार करता रहता है. यह वीडियो किसी छत से शूट किया गया था.वारदात में आशरीन ने नागराजू द्वारा सुने गए अंतिम शब्द के बारे में भी बताया कि उस का पति भी जान बचाने की भीख मांग रहा था, ‘‘मुझे क्यों मार रहे हो, मुझे छोड़ दो, जाने दो. मैं तुम्हारा जीजा हूं.’’
इस के बावजूद नागराजू के साले मोबिन का दिल नहीं पसीजा था. वह गैरधर्म में हुई शादी से बहुत गुस्से में था. गुस्सा इतना था कि साथी के साथ मिल कर अपनी ही बहन का सुहाग उजाड़ दिया.

आशरीन बताती है कि नागराजू अपने प्यार की खातिर अपना धर्म बदलने को भी राजी था. वह इसलाम धर्म कुबूलने को तैयार थे. फिर भी उस का भाई नहीं माना. आशरीन ने बताया कि शादी से पहले ही उस ने नागराजू को कहा था कि उस के घर वाले इस शादी से खुश नहीं हैं और वे उस की जान भी ले सकते हैं. इस पर नागराजू ने कहा था कि उसे किसी बात की परवाह नहीं है. वह जिए या मरे, हर हाल में आशरीन के साथ ही रहना चाहता है.नागराजू सिकंदराबाद के मरेडपल्ली का रहने वाला था और पुराने शहर मलकपेट में एक कार शोरूम में सेल्समैन का काम करता था. इस मामले को ले कर एसीपी पी. श्रीधर रेड्डी ने जांच की.

जांच में पाया कि हत्या से एक महीने पहले से मोबिन ने आशरीन और नागराजू का पता लगाने के लिए पहली फरवरी, 2022 को बालानगर पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी. साथ ही अपने स्तर से उन्हें तलाश रहा था, लेकिन इस में उसे सफलता नहीं मिल पा रही थी.

यूं शुरू हुई मोहब्बत की दास्तान

आशरीन ने नागराजू से प्यार किया था. इस प्यार के लिए उन्होंने धर्म और जाति की सभी बंदिशों से टकराने की हिम्मत जुटाई थी. शादी के बाद दोनों ने जिंदगी भर साथ रहने के वादे किए थे, कसमें खाई थीं.
वे अपने वादे निभाते भी जा रहे थे, लेकिन उन के सपने हमेशा टूटते भी रहे. …और वह काला दिन भी आ गया, जब उन के सारे सपने सब के सामने मिट्टी में मिल गए. सारे सपने अपने प्रियतम के खून में तब मिल गए, जब उस की आंखों के सामने नागराजू की हत्या हो गई.

नागराजू की हत्या की एकमात्र वजह उस का एक मुसलिम लड़की से प्रेम करना, उस से शादी करना ही था. दोनों के परिवार उन की शादी से खुश नहीं थे. आशरीन के भाई की नाराजगी तो कुछ अधिक ही थी, जबकि आशरीन अपनी जिंदगी नागराजू के साथ ही गुजारना चाहती थी.

हैदराबाद से करीब 80 किलोमीटर दूर है तालुका विकाराबाद. इसी तालुका में एक गांव मारपल्ली है. यही नागराजू का गांव है. आशरीन का गांव गानपुर यहां से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर है. नागराजू हत्याकांड के बाद दोनों के परिवार अपनेअपने गांवसे दूर जा कर कहीं छिप गए. दोनों गांवों में हिंदू और मुसलमानों की आबादी लगभग बराबर है.आशरीन और नागराजू एकदूसरे को तब से जानते हैं, जब वे किशोर उम्र के थे. दोनों ने एक साथ स्कूल और कालेज में पढ़ाई की. वहीं से उन के बीच दोस्ती हुई और फिर वे प्रेमीयुगल बन गए.

नागराजू ने की थी घर वालों को मनाने की कोशिश

नागराजू को आशरीन इसलिए पसंद थी, क्योंकि सारे दोस्तों में एक वही थी, जो उसे इंसान की तरह समझती थी, उस ने कभी भी उसे नीची जाति के नजरिए से नहीं देखा. बल्कि उसे हमेशा अधिकार के लिए लड़ने की हिम्मत बढ़ाती रहती थी.2 साल पहले नागराजू ने आशरीन से कहा कि वह बड़े शहर में जा कर नौकरी करना चाहता है. वहीं रह कर पहले कोई प्राइवेट जौब कर लेगा और अच्छी सरकारी नौकरी के लिए तैयारी करेगा. इसी बीच कोरोना का दौर आ गया और उस की योजना धरी की धरी रह गई. पढ़ाई भी पिछड़ गई.

एक रोज आशरीन ने नागराजू को फोन पर बताया कि उस के घर वाले शादी करने के लिए लड़का देख रहे हैं. इसलिए वह अपने घर वालों से बात करे.नागराजू ने अपने मातापिता से आशरीन से शादी के बारे में जिक्र किया. दूसरी तरफ आशरीन ने अपनी मां से नागराजू की तारीफ करते हुए उस से निकाह करवाने की मिन्नत की. दोनों के घर वालों ने उन की शादी से इनकार कर दिया. दोनों ने एक ही वजह बताई, ‘‘हमारी कौम अलगअलग है. यह नहीं हो सकता.’’

इस पर नागराजू ने आशरीन की मां से कहा कि वह आशरीन के लिए इसलाम धर्म अपनाने को राजी है.
कुछ इसी तरह की बात आशरीन ने नागराजू की मां से कही थी. उन्होंने साफ लहजे में कहा था कि वह नागराजू से शादी करने और उन के परिवार में घुलमिल कर रहने के लिए हिंदू धर्म अपनाने को राजी है. संयोग से धर्म परिवर्तन करने के मामले में आशरीन ने ही पहल की और और हिंदू नाम पल्लवी रख लिया.
आशरीन ने अपने प्यार के लिए धर्म के बंधनों को तोड़ दिया था. कहने को तो नागराजू और आशरीन के बीच धर्म कभी भी कोई परेशानी नहीं था क्योंकि दोनों एकदूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे, किंतु सामाजिक और पारिवारिक संतुष्टि के लिए आशरीन ने अपने प्यार के लिए धर्म के बंधनों को तोड़ दिया था.

आर्यसमाज मंदिर में की थी शादी

आशरीन हमेशा ही विरोध करने वालों को कहती थी, ‘मुझे राजू के हिंदू होने से कोई समस्या नहीं थी. मैं हमेशा सिर्फ यह सोचती थी कि वो मेरे लिए हैं. हिंदूमुसलिम जैसा कुछ भी हमारे बीच नहीं था. हम दोनों एकदूसरे को समझते थे और हंसीखुशी अपनी जिंदगी बिता रहे थे.’कहने को तो प्यार के सहारे उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया, लेकिन हर कोई आशरीन और नागराजू की तरह नहीं सोचता है, कुछ लोग जो धर्म और जाति को इज्जत से जोड़ कर देखते हैं, उन्हें नागराजू और आशरीन जैसों के सपनों को मौत के घाट उतारने में पलभर भी नहीं लगता.

हैदराबाद के लक्ष्मीनगर इलाके में एक आर्यसमाज मंदिर से उन्हें बाकायदा शादी का सर्टिफिकेट दिया गया और वहां के पंडित एम. रविंद्र ने दोनों की वैदिक रीति और गायत्री मंत्रोच्चारण के साथ शादी करवाई. इस मंदिर में शादी के लिए बहुत से लोग आते हैं, जिन में अंतरधार्मिक विवाह वाले भी होते हैं.
वहां शादी के रीतिरिवाज शुरू करने से पहले लड़कालड़की को समझाया भी जाता है. बाकायदा उन की काउंसलिंग की जाती है.उन के परिवार और परिवार के विचारों के बारे में पूछा जाता है. आर्यसमाज मंदिर में शादी करने से पहले शख्स को हिंदू धर्म अपनाना होता है. आशरीन ने ऐसा करने का फैसला किया था. जब कोई ईसाई और मुसलिम शादी करते हैं तो उन्हें हिंदू धर्म में परिवर्तन करना होता है. हिंदू धर्म अपनाने के लिए उन्हें कुछ चीजें करनी होती हैं. जो हिंदू धर्म स्वीकार करते हैं, सिर्फ वही यहां शादी कर सकते हैं.

आशरीन और नागराजू की शादी के समय भी ऐसा ही हुआ. उन्होंने भी गायत्री मंत्र का जाप किया. ये बातें पुजारी एम. रविंद्र ने बताईं. उन्होंने बताया कि हर जोड़े की तरह नागराजू और आशरीन को भी इस बारे में सब कुछ बताया और समझाया गया था.आशरीन मोबिन की तीसरी और छोटी बहन है. परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी मोबिन पर है. उस का फल का कारोबार है और परिवार का खर्च वही उठाता है. एक तरह से घर पर उस के फैसले को ही महत्त्व दिया जाता है. वह आशरीन से 2 बड़ी बहनों की शादियां कर चुका था.

मोबिन ने आशरीन की शादी के बाद अपनी शादी की योजना बनाई थी. इसी बीच उसे पता चला कि उस की बहन आशरीन पास के गांव के ही नागराजू से प्यार करती है.दूसरी कौम का होने के चलते मोबिन ने उसे समझाया था. जब वह भाई की बात मानने को राजी नहीं हुई, तब उस ने उस की पिटाई भी कर दी थी.
उस के बाद ही आशरीन ने घर छोड़ने का निर्णय ले लिया था और 30 जनवरी, 2022 की रात करीब 8 बजे किसी को बिना बताए घर से निकल गई थी. साथ में नागराजू भी था. अगले दिन उस ने हिंदू परंपरा के अनुसार पुराने हैदराबाद स्थित आर्यसमाज मंदिर में नागराजू से शादी कर ली थी. आशरीन के घर वालों को जब उस शादी की जानकारी हुई, तब उन्होंने नागराजू से अपनी बहन को छोड़ने के लिए दबाव बनाया. लेकिन नागराजू और उस के परिवार ने इनकार कर दिया. इस के बाद ही मोबिन ने नागराजू को मारने की योजना बनाई.

ऐप से तलाशा नागराजू को

आशरीन उर्फ पल्लवी और नागराजू की तलाश करने के लिए आरोपियों ने ‘फाइंड माई डिवाइस’ नाम के ऐप का इस्तेमाल किया. इस का खुलासा मोबिन ने रिमांड के दौरान पुलिस से पूछताछ में किया.
उस ने बताया कि वह अपने साथी के साथ मिल कर करीब एक महीने से नागराजू की तलाश में जुटा हुआ था. वारदात से पहले उन्होंने नागराजू की हत्या के लिए उसे ट्रैक करने की कोशिश की. उस का पता लगाने के लिए मोबाइल स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया.हालांकि हत्या के दिन आरोपी ने पहले कार शोरूम के बाहर की हत्या करने की कोशिश की थी, जहां नागराजू काम करता था. वहां ट्रैफिक अधिक होने के चलते वह वारदात को अंजाम नहीं दे पाया.

जब आशरीन और नागराजू को मोबिन के योजना की भनक लगी, तब वे सरूरनगर आ गए. वहीं नागराजू ने एक कार के शोरूम में नौकरी कर ली. उधर मोबिन नागराजू की तलाश में लगा रहा.रिपोर्ट के अनुसार, मोबिन ने अपनी बहन के मोबाइल से नागराजू का नंबर निकाल लिया था. आशरीन के फोन में तलाशी के दौरान नागराजू की मेल आईडी भी मिल गई थी. इस के बाद उस ने फाइंड माई डिवाइस ऐप डाउनलोड किया और नागराजू को ट्रैक करने के लिए उस के मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का यूज किया.
उस के बाद वह करीब एक हफ्ते तक नागराजू की तलाश में जुटा रहा. इस के लिए ऐप पर नजर बनाए रखी. वहीं से मोबिन को नागराजू की लोकेशन सरूरनगर की मिली. उस के बाद मोबिन ने 4 मई, 2022 को अपने साथी को फोन कर सरूरनगर बुलाया.

आंखों के सामने घूमता है वह खौफनाक मंजर

मोबिन के कहने पर उस का साथी मसूद अहमद आने को राजी हो गया. दोनों एक साथ बस से लोहे की रौड और चाकू ले कर मियापुर पहुंच गए. मियांपुर से मोबिन अपने एक अन्य साथी के साथ सरूरनगर के लिए रवाना हुआ. वहां उन्होंने फाइंड माई डिवाइस ऐप के जरिए नागराजू की सटीक लोकेशन का पता कर लिया.ऐप में नागराजू की लोकेशन कालोनी के मेनरोड पर मूसाराम बाग में दिखी. मोबिन जब वहां पहुंचा, तब नागराजू दिख गया. उस के साथ आशरीन भी थी.

इस के बाद बाइक पर सवार मोबिन और मसूद ने मिल कर स्कूटी चला रहे नागराजू और आशरीन को रोका. स्कूटी के एक झटके में रुकते ही मोबिन ने नागराजू के सिर पर लोहे की रौड से वार कर दिया. एक ही वार में नागराजू सड़क पर गिर गया. इस के बाद मोबिन और मसूद रौड और चाकू से नागराजू पर ताबड़तोड़ हमला करने लगे.अपनी आंखों के सामने अपने पति की न सिर्फ मौत, बल्कि बर्बर हत्या देखने वाली आशरीन का अब कोई ठौरठिकाना तक नहीं बचा है.

वह कहती है, ‘‘मैं अपने भाई से मिलना चाहती हूं. मैं राजू के बिना जिंदा नहीं रहना चाहती. लेकिन मैं अपने भाई से बहुत नाराज हूं और सिर्फ यही एक कारण है कि मैं जिंदा हूं. जिस तरह से उस ने राजू को… मेरे पति को मारा, मैं भी उस को उसी तरह मारना चाहती हूं. उसे भी मेरा दर्द महसूस होना चाहिए.’’
पूरी तरह टूट चुकी आशरीन जब भी अपनी बातें बताने लगती है, उस समय भी उस के चेहरे पर दर्द साफ नजर आ जाता है. उसे देख कर ऐसा लगता है मानो कोई तूफान उस की सारी खुशियां उड़ा ले गया हो. उस की बेजार हो चुकी जिंदगी का कोई भी अंदाजा लगा सकता है. वह जिस से भी मिलती है, अपना वही दर्द दोहराती है.

तमाशबीन भीड़ से भी है पल्लवी को शिकायत

आशरीन का दर्द कुछ इस तरह रहरह कर सामने आ जाता है, ‘‘उस सड़क पर पैदल और बाइक पर बहुत सारे लोग थे, लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया. मैं ने उन से विनती की, उन के पैर छुए, लेकिन किसी ने हमले को रोकने की कोशिश नहीं की. मेरे पति को लोहे की रौड से इतना पीटा जा
रहा था कि उस का मांस बाहर आ गया था.‘‘जब तक लोग मदद के लिए आते, तब तक मेरे पति की मौत हो चुकी थी. अगर सभी ने शुरू में आरोपियों पर पथराव किया होता तो हमले को रोका जा सकता था. कुछ हमलावरों को रोकने के लिए कितने लोगों की जरूरत है?’’ पल्लवी पूछती है, ‘‘क्या यह समाज में किसी के जीवन का मूल्य है? हम जिस जगह पर हैं, वह कोई समाज नहीं है?’’
इस के साथ ही नाराजगी भरा सवाल भी पूछती है, ‘‘मेरे पति की मृत्यु के बाद उस के शरीर के चारों ओर लगभग 100 लोग जमा हो गए. जब हमला चल रहा था, तब ये लोग क्यों नहीं रुके और मदद करने की कोशिश क्यों नहीं की?’’

पुलिस से की थी सुरक्षा की मांग

आशरीन ने बताया कि वह और नागराजू जानते थे कि जनवरी में शादी के बाद से वे खतरे में हैं और इस के लिए उन्होंने पुलिस सुरक्षा भी मांगी थी.नागराजू के घर वाले भी युवा सदस्य की इस तरह हत्या किए जाने से काफी खफा हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अनुरोध करने पर हत्यारे को जरा भी दया नहीं आई. लड़की का भाई तो पूरा कसाई ही बन गया था.नागराजू की बहन रमा देवी काफी गुस्से में कहती हैं, ‘‘पुलिस सुरक्षा मांगने के बावजूद, मेरे भाई को मार दिया गया. पुलिस ने अपनी ड्यूटी क्यों नहीं की, सुरक्षा की उन की दलील को क्यों नजरअंदाज किया?’’

इस सवाल पर सुरक्षा की गुहार करने वाले मोमिनपेट पुलिस स्टेशन ने चुप्पी साध ली है. हालांकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इसे गंभीरता से लिया है. इसे ‘संदिग्ध औनर किलिंग’ बताते हुए तेलंगाना के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.आयोग ने मुख्य सचिव से यह बताने का अनुरोध किया है कि क्या राज्य सरकार की अंतरजातीय/अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में औनर किलिंग की ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई नीति है? साथ ही डीजीपी से जांच, पीडि़त की पत्नी और परिवार की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी गई है. कहा गया है. यही नहीं तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने
भी घटना पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

नागराजू के पुश्तैनी गांव में उस की कब्र बनाई गई है. उल्लेखनीय है कि भारत में कुछ अनुसूचित जाति के लोगों को भी दफनाए जाने की परंपरा है. नागराजू की कब्र पर उस के पूरे परिवार सहित आशरीन ने भी कई दिनों तक श्रद्धांजलि के फूल चढ़ाए.गांव वाले और नागराजू के रिश्तेदार बताते हैं कि वह 2 साल पहले गांव छोड़ कर पढ़ाई के सिलसिले में हैदराबाद चला गया था. आशरीन के साथ अच्छी जिंदगी शुरू करने के लिए दोनों ने वहां से निकल कर शादी कर ली थी.

परेशानियों से दूर रहने के लिए दोनों कुछ दिनों तक विशाखापट्टनम में भी रहे. इस के बाद वे यह सोच कर हैदराबाद लौट आए कि यह जगह भी सुरक्षित होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.नागराजू के दादा नागरपल्ली जगन की आंखें नम हो जाती हैं. वे नागराजू की कब्र से हटने का नाम ही नहीं लेते हैं. उन्होंने बताया कि नागराजू ने परिवार को अपनी शादी के बारे में नहीं बताया था. हालांकि उन्हें आशरीन के परिवार के विरोध के बारे में पता था.इस बारे में जगन कहते हैं कि मसला ये नहीं है कि हम पसंद करते हैं या नहीं करते हैं. हमें इस बारे में तब पता चला, जब उन की शादी हो गई. उन्होंने घर पर कुछ भी नहीं बताया था. लड़की मुसलमान थी और वो हिंदू. लड़की का परिवार एक हिंदू लड़के से उन की शादी के लिए तैयार नहीं था और शायद यही वजह रही होगी कि नागराजू ने इस बारे में अपने घर में नहीं बताया था. वह डर गया था.
उन के रिश्ते और शादी के बारे में गांव के पूर्व सरपंच मोहम्मद कलीमुद्दीन की भी अपनी राय है. वे कहते हैं, ‘‘आशरीन के घर वाले जब पुलिस स्टेशन पहुंचे, तब उन्हें बताया गया कि लड़कालड़की बालिग हैं. इस पर आशरीन के भाई का गुस्सा बना रहा. आशरीन के घर वालों ने दोनों का रिश्ता तोड़ने की बहुत कोशिशें कीं.’’

आशरीन के घर वाले इस शादी से अपने समाज में काफी आलोचना झेलने लगे थे.
वे आशरीन को वापस अपने घर ले जाना चाहते थे.कलीमुद्दीन ने भी परिवार को राजी करने की बहुत कोशिश की, लेकिन शर्त रखी कि वे अगर शांति से आएं तभी इस मसले का कोई समाधान निकाला जा सकता है.लेकिन जिस समय कलीमुद्दीन ये सब बातें उन्हें समझा रहे थे, उन्हें खुद भी अंदाजा नहीं था कि 3 महीने बाद ऐसा कुछ हो जाएगा.अंतरधार्मिक विवाह करने पर औनर किलिंग का यह कोई पहला मामला नहीं है. हैदराबाद ही नहीं, देश के हर राज्य में इस तरह के मामले आए दिन होते रहते हैं.
आधुनिक भारत का गौरव समझने वाले इस दकियानूसी समाज को अपराध का रास्ता अपनाने के बजाय अपनी सोच में बदलाव करना होगा. इस के अलावा पुलिस को भी ऐसे जोड़ों की सुरक्षा की मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए वरना ऐसी घटनाएं होती रहेंगी और नेता राजनीतिक रोटियां सेंकते रहेंगे.
बहरहाल, पुलिस ने हत्यारोपियों से विस्तार से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया

करमवती

सफर कुछ थम सा गया- भाग 2 : क्या जया के पतझड़ रूपी जीवन में फिर बहारें आ पाईं

‘‘तुम भाभी की चिंता मत करो. मैं इन्हें घर ले जाता हूं.’’

सूरज चला गया. फिर थोड़ी देर बाद  जीप सूरज के घर के सामने रुकी.

‘‘आओ भाभी, गृहप्रवेश करो. चलो,

मैं ताला खोलता हूं. अरे, दरवाजा तो अंदर से बंद है.’’

दोस्त ने घंटी बजाई. दरवाजा खुला तो 25-26 साल की एक स्मार्ट महिला गोद में कुछ महीने के एक बच्चे को लिए खड़ी दिखी.

‘‘कहिए, किस से मिलना है?’’

दोस्त हैरान, जया भी परेशान.

‘‘आप? आप कौन हैं और यहां क्या कर रही हैं?’’ दोस्त की आवाज में उलझन थी.

‘‘कमाल है,’’ स्त्री ने नाटकीय अंदाज में कहा, ‘‘मैं अपने घर में हूं. बाहर से आप आए और सवाल मुझ से कर रहे हैं?’’

‘‘पर यह तो कैप्टन सूरज का घर है.’’

‘‘बिलकुल ठीक. यह सूरज का ही घर है. मैं उन की पत्नी हूं और यह हमारा बेटा. पर आप यह सब क्यों पूछ रहे हैं?’’

दोस्त ने जया की तरफ देखा. लगा, वह बेहोश हो कर गिरने वाली है. उस ने लपक कर जया को संभाला, ‘‘भाभी, संभालिए खुद को,’’ फिर उस महिला से कहा, ‘‘मैडम, कहीं कोई गलतफहमी है. सूरज तो शादी कर के अभी लौटा है. ये उस की पत्नी…’’

दोस्त की बात खत्म होने से पहले ही वह चिल्ला उठी, ‘‘सूरज अपनी आदत से बाज नहीं आया. फिर एक और शादी कर डाली. मैं कब तक सहूं, तंग आ गई हूं उस की इस आदत से…’’

जया को लगा धरती घूम रही है, दिल बैठा जा रहा है. ‘यह सूरज की पत्नी और उस का बच्चा, फिर मुझ से शादी क्यों की? इतना बड़ा धोखा? यहां कैसे रहूंगी? बाबूजी को फोन करूं…’ वह सोच में पड़ गई.

तभी एक जीप वहां आ कर रुकी. सूरज कूद कर बाहर आया. दोस्त और जया को बाहर खड़ा देख वह हैरान हुआ, ‘‘तुम दोनों इतनी देर से बाहर क्यों खड़े हो?’’

तभी उस की नजर जया पर पड़ी. चेहरा एकदम सफेद जैसे किसी ने शरीर का सारा खून निचोड़ लिया हो. वह लपक कर जया के पास पहुंचा. जया दोस्त का सहारा लिए 2 कदम पीछे हट गई.

‘‘जया…?’’ इसी समय उस की नजर घर के दरवाजे पर खड़ी महिला पर पड़ी.

वह उछल कर दरवाजे पर जा पहुंचा,

‘‘आप? आप यहां क्या कर रही हैं? ओ नो… आप ने अपना वार जया पर भी

चला दिया?’’

औरत खिलखिला उठी.

थोड़ी देर बाद सभी लोग सूरज के ड्राइंगरूम में बैठे हंसहंस कर बातें कर रहे थे. वही महिला चाय व नाश्ता ले कर आई, ‘‘क्यों जया, अब तो नाराज नहीं हो? सौरी, बहुत धक्का लगा होगा.’’

इस फौजी कालोनी में यह एक रिवाज सा बन गया था. किसी भी अफसर की शादी हो, लोग नई बहू की रैगिंग जरूर करते थे. सूरज की पत्नी बनी सरला दीक्षित और रीना प्रकाश ऐसे कामों में माहिर थीं. कहीं पहली पत्नी बन, तो किसी को नए पति के उलटेसीधे कारनामे सुना ऐसी रैगिंग करती थीं कि नई बहू सारी उम्र नहीं भूल पाती थी. इस का एक फायदा यह होता था कि नई बहू के मन में नई जगह की झिझक खत्म हो जाती थी.

जया जल्द ही यहां की जिंदगी की अभ्यस्त हो गई. शनिवार की शाम क्लब जाना, रविवार को किसी के घर गैटटुगैदर. सूरज ने जया को अंगरेजी धुनों पर नृत्य करना भी सिखा दिया. सूरज और जया की जोड़ी जब डांसफ्लोर पर उतरती तो लोग देखते रह जाते. 5-6 महीने बीततेबीतते जया वहां की सांस्कृतिक गतिविधियों की सर्वेसर्वा बन गई. घरों में जया का उदाहरण दिया जाने लगा.

खुशहाल थी जया की जिंदगी. बेहद प्यार करने वाला पति. ऐक्टिव रहने के लिए असीमित अवसर. बड़े अफसरों की वह लाडली बेटी बन गई. कभीकभी उसे वह पहला दिन याद आता. सरला दीक्षित ने कमाल का अभिनय किया था. उस की तो जान ही निकल गई थी.

2 साल बाद नन्हे उदय का जन्म हुआ तो उस की खुशियां दोगुनी हो गईं. उदय एकदम सूरज का प्रतिरूप. मातृत्व की संतुष्टि ने जया की खूबसूरती को और बढ़ा दिया. सूरज कभीकभी मजाक करता, ‘‘मेम साहब, क्लब के काम, घर के काम और उदय के अलावा एक बंदा यह भी है, जो घर में रहता है. कुछ हमारा भी ध्यान…’’

 

ई. एम. आई. – भाग 1: क्या लोन चुका पाए सोम और समिधा?

रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म की एक बेंच पर सोम और समिधा बैठे हुए अम्मां बाबूजी की गाड़ी के आने का इंतजार कर रहे थे. कुहरे के कारण गाड़ी 4 घंटे लेट थी. सोम गहरे सोच में था.

वह मन ही मन बढ़ने वाले खर्च को सोच कर गुणाभाग में लगा हुआ था.

‘‘समिधा, इस ई.एम.आई. के कारण हम लोगों के हाथ हमेशा बंधे रहते हैं.’’

‘‘तुम भी सोम न जाने क्याक्या सोचते रहते हो. इसी के जरिए तो हम लोगों ने सुखसुविधा की चीजें जोड़ ली हैं, नहीं तो भला क्या मुमकिन था?’’

‘‘समिधा, अम्मांबाबूजी पहली बार अपने घर आ रहे हैं. ध्यान रखना, अम्मां नाराज न होने पाएं.’’

‘‘सोम, तुम यह बात कम से कम 15 बार कह चुके हो. तुम्हारी अम्मां तुनकमिजाज हैं, यह मुझे अच्छी तरह मालूम है.’’

सोम चुप हो कर बैठ गया.

उस के मन में डर था कि अम्मां और समिधा की कैसे निभेगी, क्योंकि अम्मां को उस के हर काम में मीनमेख निकालने की आदत है. समिधा भी बहुत जिद्दी है. सोम उसे 2 साल तक मां न बनने की बात कह रहा था, लेकिन उस ने चुपचाप अपनी मनमानी कर ली. यह राज तो तब खुला जब एक दिन उस ने समिधा से कहा कि उस का प्रमोशन हुआ है, उस की तनख्वाह भी बढ़ जाएगी. तभी हंस कर बोली थी वह, ‘‘आप का एक प्रमोशन और हुआ है.

‘‘वह क्या?’’ पूछने पर समिधा शरमाते हुए बोली थी, ‘‘आप पापा बनने वाले हैं.’’

सुन कर वह घबरा गया था, ‘‘नहींनहीं, अभी यह सब नहीं. अभी मेरे लिए तुम्हारी नौकरी बहुत जरूरी है. तुम औफिस जाओगी तो बच्चे को कौन रखेगा?’’

निश्चिंत हो कर वह बोली थी, ‘‘मैं ने अम्मां से बात कर ली है, वे अब यहीं रहेंगी. बच्चे को वे ही संभालेंगी.’’

दोनों में अच्छीखासी बहस हो गई थी. सोम का कहना था कि उस की और अम्मां की पटेगी नहीं.

समिधा का कहना था कि वह अम्मां को अच्छी तरह समझती है, वे उसे अकेला छोड़ कर गांव कभी नहीं जाएंगी.

सोम गंभीर हो कर अपनी और समिधा की मुलाकात और शादी के बारे में सोचने लगा. उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे कल की ही बात हो.

समिधा सोम के औफिस में ही काम करती थी. वह गोरे रंग एवं तीखे नैननक्श वाली लड़की थी. काम के सिलसिले में उसे सोम के पास बारबार जाना पड़ता था. दोनों ही साधारण परिवार से थे. मिलतेजुलते कब एकदूसरे के आकर्षण में बंध गए, उन्हें पता ही नहीं लगा.

ई. एम. आई. – भाग 2 : क्या लोन चुका पाए सोम और समिधा?

समिधा का पहले शरमाना, फिर मुसकराना, फिर साथ में कौफी पीना और फिर बाइक पर लिफ्ट… चूंकि दोनों की पृष्ठभूमि लगभग एक सी थी, अत: प्यार परवान चढ़ने लगा. औफिस में दोनों के बारे में चर्चा होने लगी थी. कुछ दिन बाद अचानक समिधा ने औफिस आना बंद कर दिया, तो सोम परेशान हो उठा. उस ने समिधा के घर का पता लगाया और बेचैन हालत में उस के घर पहुंच गया. वह एक कालोनी में अपनी बूआ के साथ रहती थी. उस के मांबाप बचपन में ही गुजर गए थे. बूआ ने ही उसे पढ़ाया लिखाया था. बूआ एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका थीं. समिधा और बूआ दोनों एकदूसरे का सहारा थीं. मेवा मिठाई, पकवान तो उन के पास नहीं था, परंतु दाल रोटी अच्छी तरह से चल रही थी.

सोम को देखते ही समिधा की बूआ सरिताजी की त्योरियां चढ़ गई थीं. छूटते ही उन्होंने प्रश्नों की झड़ी लगा दी थी कि कहां रहते हो? घर पर कौनकौन है? समिधा से क्यों मिलने आए हो? तुम्हारी तनख्वाह कितनी है? आदिआदि.

सोम के माथे पर पसीना आ गया था. वह उस घड़ी को कोसने लगा था, जब उस ने समिधा के घर की ओर रुख किया था. परंतु वह अपनी अम्मां के ऐसे तेवरों से वाकिफ था, इसलिए उस ने धैर्यपूर्वक उन्हें उत्तर दिए.

जब सरिताजी थोड़ी आश्वस्त हुईं तो बोलीं, ‘‘इसे तो 1 हफ्ते से बुखार आ रहा था. इसीलिए औफिस नहीं जा रही थी. अब बुखार ठीक हो गया है, इसलिए कल से यह औफिस जाएगी,’’ फिर चेतावनी भरे स्वर में बोलीं, ‘‘मुझे लड़के लड़कियों की दोस्ती पसंद नहीं है. लड़के कुछ दिन तो लड़कियों से प्यार का नाटक करते हैं, फिर जब दूसरी पर दिल आ जाता है तो पहले वाली की ओर मुड़ कर भी नहीं देखते.’’

सोम की तो स्पष्टवादी सरिताजी के सामने बोलती ही बंद हो गई थी. सरिताजी उठ कर अंदर चली गईं तब समिधा ने फुसफुसा कर उस से कहा, ‘‘आप को यहां आने की क्या जरूरत थी? बूआ ने इतनी बातें कह डालीं आप से, मैं उन की ओर से क्षमा मांगती हूं.’’

सोम ने दबे स्वर में कहा, ‘‘तुम्हारा मोबाइल बंद था, इसलिए मैं घबरा गया था. अच्छा अब मैं चलता हूं.’’ वह खड़ा ही हुआ था कि तभी बूआ चायनाश्ता ले कर आ गईं. बोलीं, ‘‘क्यों बेटा, तुम मेरी बात का बुरा मान गए क्या? मेरी जवान बेटी है, सुंदर भी है इसलिए डरती हूं, कहीं किसी गलत लड़के के चक्कर में न पड़ जाए. लंबाचौड़ा दहेज देने की हैसियत तो मेरी है नहीं कि यह राजकुमार का ख्वाब देखे. कोई पढ़ालिखा, खाताकमाता लड़का मिल जाए, जो इस का ध्यान रखे, इस को इज्जत दे, बस यही चाहती हूं मैं. पढ़ालिखा कर काबिल बना दिया है मैं ने इसे, अपने पैरों पर खड़ी हो गई है यह.’’

सोम ने उन लोगों से विदा ली. सरिताजी की स्पष्टवादिता से वह उन का कायल हो गया. एक मां के दर्द को उस ने गहराई से अनुभव किया था. उसी क्षण उस ने मन ही मन समिधा से शादी का निर्णय कर लिया था. अम्मांबाबूजी से आज्ञा लेना तो मात्र औपचारिकता थी.

अगले दिन वह औफिस गई तो सोम से आंखें मिलाने में सकुचा रही थी, परंतु वह उस को देखते ही खुश हो गया. लंच के समय समिधा ने पुन: उस से बूआ की बातों के लिए माफी मांगी, परंतु सोम ने तो उस के समक्ष शादी का प्रस्ताव ही रख दिया. वह खुशी से झूम उठी, उसे अपने पर विश्वास नहीं हो रहा था.

एक हफ्ते बाद ही सोम छुट्टी ले कर अपने गांव गया. वहां उस ने अम्मांबाबूजी को उस का फोटो दिखा कर पूछा, ‘‘यह लड़की कैसी है?’’ दोनों ने फोटो देखा फिर एकसाथ बोल पड़े, ‘‘दहेज कितना मिलेगा?’’

वह बोला, ‘‘दहेज. लेकिन मैं तो बिना दहेज लिए ही शादी करूंगा.’’

बाबूजी भड़क उठे, ‘‘तुम्हारा तो दिमाग खराब हो गया है. मेरे पास क्या रकम गड़ी है, जो मैं शादी में खर्च करूंगा? अभी तक सुनंदा के विवाह का कर्ज चुका रहा हूं. ब्याज बढ़ता जा रहा है. मुझे नहीं चाहिए तुम्हारा रुपया. तुम्हें जो नकद मिले उस से तुम शहर में अपने लिए घर ले लेना.’’

‘‘आप मेरे घर की चिंता न करें. किस्तों में फ्लैट मैं ले चुका हूं. आप दहेज की बात करते हैं, वह तो नौकरी कर रही है, सारी जिंदगी कमा कर दहेज देती रहेगी.’’

बाबूजी चीखते हुए बोले, ‘‘जब तुम ने सब तय कर लिया है, तो मुझ से हामी भरवाने की क्या जरूरत है. भाड़ में जाओ, जो चाहे वह करो.’’

सोम ने अगली सुबह की ट्रेन पकड़ी और दिल्ली लौट आया. उस के बाद 3-4 बार वह जल्दीजल्दी फिर गांव गया. अम्मां बाबूजी को तरहतरह से समझाने का प्रयास करता रहा, परंतु हठी बाबूजी का मन नहीं पसीजा.

 

प्यार की तलाश- भाग 1 : अतीत के पन्नों में खोई क्या थी नीतू की प्रेम कहानी?

मेरी कक्षा में पढ़ने वाली नीतू मेरे बैंच से दाईं वाली पंक्ति में, 2 बैंच आगे बैठती थी. वह दिखने में साधारण थी पर उस में दूसरों से हट कर कुछ ऐसा आकर्षण था कि जब मैं ने पहली बार उसे देखा तो बस देखता ही रह गया… वह अपनी सहेलियों के साथ हंसतीखिलखिलाती रहती और मैं उसे चोरीछिपे देखता रहता.

नीतू मेरी जिंदगी में, उम्र के उस मोड़ पर जिसे किशोरावस्था कहते हैं और जो जवानी की पहली सुबह के समान होती है, उस सुबह की रोशनी बन कर आई थी वह. उस सुखद परिवर्तन ने मेरे जीवन में जैसे रंग भर दिया था. मैं हमेशा अपने में मस्त रहता. पढ़ाई में भी मेरा ध्यान पहले से अधिक रहता. मम्मीपापा टोकते, उस से पहले ही मैं पढ़ने बैठ जाता और सुबहसुबह स्कूल जाने के लिए हड़बड़ा उठता.

आज सोचता हूं तो लगता है, काश, वक्त वहीं ठहर जाता. नीतू मुझ से कभी जुदा न होती, पर जीवन के सुनहरे दिन, कितने जल्दी बीत जाते हैं. मेरा स्कूली जीवन कब पीछे छूट गया, पता ही नहीं चला.

मैट्रिक की परीक्षा के बाद, नीतू जैसे हमेशा के लिए मुझ से जुदा हो गई. मैं उस के घर का पता जानता था, लेकिन जब यह पता चला कि नीतू कालेज की पढ़ाई के लिए अपने मामा के यहां चली गई है तो मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर पाया. मेरे पास कुछ था तो बस उस की यादें, उस के लिखे खत और स्कूल में मिली वह तसवीर, जिस में साथ पढ़ने वाले सभी विद्यार्थी और शिक्षक एक कतार में खड़े थे और नीतू एक कोने में खड़ी मुसकरा रही थी.

मैं नीतू की यादों में खोया, डायरी के पन्ने पलटता जा रहा था, तभी दरवाजे पर दस्तक सुन कर चौंक गया. नजरें उठा कर देखा तो सामने सुनयना खड़ी थी. अचानक उसे देख कर मैं हड़बड़ा गया, ‘‘कहिए, क्या बात है?’’ मैं ने डायरी बंद करते हुए कहा.

‘‘क्या मैं अंदर आ सकती हूं…’’ सुनयना मेरी मनस्थिति भांप कर मुसकराते हुए बोली.

‘‘हां… हां, आइए न बैठिए,’’ मैं ने जैसे शरमा कर कहा.

‘‘मैं ने आप को डिस्टर्ब कर दिया. शायद आप कुछ लिख रहे थे…’’ सुनयना डायरी की ओर देख रही थी.

‘‘बस डायरी है…’’ मैं ने डायरी पर हाथ रखते हुए कहा.

‘‘अरे वाह, आप डायरी लिखते हैं, क्या मैं देख सकती हूं?’’ सुनयना की आंखों में पता नहीं क्यों चमक आ गईर् थी.

‘‘किसी की पर्सनल डायरी नहीं देखनी चाहिए,’’ मैं ने मुसकरा कर मना करने के उद्देश्य से कहा क्योंकि वैसे भी वह डायरी मैं उसे नहीं दिखा सकता था.

‘‘क्या हम इतने गैर हैं?’’ सुनयना नाराज तो नहीं लग रही थी पर अपने चिरपरिचित अंदाज में मुंह बना कर बोली.

‘‘मैं ने ऐसा तो नहीं कहा,’’ मैं ने फिर मुसकराने का प्रयास किया.

‘‘खैर, छोडि़ए. पर कभी तो मैं आप की डायरी पढ़ कर ही रहूंगी,’’ सुनयना के चेहरे पर अब बनावटी नाराजगी थी. उस ने अपनी झील जैसी बड़ीबड़ी आंखों से मुझे घूरते हुए कहा, ‘‘…अभी चलिए, आप को बुलाया जा रहा है.‘‘

बैठक में भैयाभाभी सभी बैठे हुए थे. अंत्याक्षरी खेलने का कार्यक्रम बनाया गया था पर मेरा मन तो कहीं दूर था, लेकिन मना कैसे करता? न चाह कर भी खेलने बैठ गया. सुनयना पूरे खेल के दौरान, अपने गीतों से मुझे छेड़ने का प्रयास करती रही.

सुनयना मेरी भाभी की छोटी बहन थी. अपने नाम के अनुरूप ही उस की गहरी नीली झील सी आंखें थीं. वह थी भी बहुत खूबसूरत. उस के चेहरे से हमेशा एक आभा सी फूटती नजर आती. उस के काले, घने, चमकदार बाल कमर तक अठखेलियां करते रहते. वह हमेशा चंचल हिरनी के समान फुदकती फिरती. वह बहुत मिलनसार और बिलकुल खुले दिल की लड़की थी. यही वजह थी कि उसे सब बहुत पसंद करते थे और मजाक में ही सही, पर सभी ये कहते, इस घर की छोटी बहू कोई बनेगी तो सिर्फ सुनयना ही बनेगी. मैं सुन कर बिना किसी प्रतिक्रिया के चुपचाप रह जाता पर कभीकभार ऐसा लगता जैसे मेरी इच्छा, मेरी भावनाओं से किसी को कोईर् लेनादेना नहीं है पर मैं दोष देता तो किसे देता. किसी को तो पता ही नहीं था कि मेरे दिल में जो लड़की बसी है, वह सुनयना नहीं नीतू है.

प्यार की तलाश- भाग 3 : अतीत के पन्नों में खोई क्या थी नीतू की प्रेम कहानी?

मेरा मन घृणा और दुख से भर उठा. मैं किसी तरह खुद को संभालते हुए अखबार को कुरसी पर ही रख कर, धीरेधीरे उठा और अपने कमरे में जा कर फिर बिस्तर पर लुढ़क गया. ऐसा महसूस हो रहा था, जैसे मेरे अंदर थोड़ी सी भी जिजीविषा शेष न हो, जैसे मैं दुनिया का सब से दीन आदमी हूं, आंखों से अपनेआप आंसू छलके जा रहे थे.

सामने टेबल पर वही तसवीर थी. जिस में नीतू अब भी मेरी ओर देख कर मुसकरा रही थी, जैसे मेरे जज्बातों से मेरे दिल के दर्द से, उसे कोईर् लेनादेना न हो. जी में आया तसवीर को उठा कर खिड़की से बाहर फेंक दूं कि तभी मां चाय ले कर आ गईं, ‘’अरे, तू फिर सो रहा है क्या? अभी तो पेपर पढ़ रहा था.‘’

मैं ने झटपट अपने चेहरे पर हाथ रख कर पलकों पर उंगलियां फिराते हुए अपने आंसू छिपाते हुए कहा, ‘’नहीं, सिर थोड़ा भारी लग रहा है.‘’

‘‘रात को देर से सोया होगा. पता नहीं रातरात भर जाग कर क्या लिखता रहता है? ले, चाय पी ले, इस से थोड़ी राहत मिलेगी,‘‘ चाय का कप हाथ में थमा कर

मेरे माथे पर स्नेहपूर्वक हाथ फेरते हुए मां ने कहा, ‘‘तेल ला कर थोड़ी मालिश कर देती हूं.’

‘‘नहीं ठीक है, मां, वैसा दर्द नहीं है. शायद देर से सोया था. इसलिए ऐसा लग रहा है,‘‘ मैं ने फिर बात बना कर कहा.

मां जब कमरे से निकल गईं तो मैं किसी तरह अपनेआप को समझाने की कोशिश करने लगा. पर दिल में उठ रही टीस, जैसे बढ़ती ही जा रही थी. मन कह रहा था, जा कर एक बार उस बेवफा से मिल आओ. आखिर उस ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? क्या वह इंतजार नहीं कर सकती थी? उन वादों, कसमों को वह कैसे भूल गई, जो हम ने स्कूल से विदाई की उस आखिरी घड़ी में, एकदूसरे के सामने खाई थीं.

न चाहते हुए भी मेरे मन में, रहरह कर सवाल उठ रहे थे. अपनेआप को समझाना जैसे मुश्किल होता जा रहा था. मन की पीड़ा जब बरदाश्त से बाहर होने लगी तो मैं फिर से बिस्तर पर लेट गया. उसी वक्त अचानक भाभी मेरे कमरे में आईं. उन्हें अचानक सामने देख कर मैं घबरा गया. किसी तरह अपने मनोभाव छिपा कर मैं बिस्तर से उठा.

कुछ देर पहले भाभी के मायके से फोन आया था. सुनयना की तबीयत बहुत खराब थी. वह कल ही तो यहां से गई थी. अचानक पता नहीं उसे क्या हो गया? भाभी काफी चिंतित थीं. भैया को औफिस के जरूरी काम से कहीं बाहर जाना था इसलिए मुझे भाभी के साथ सुनयना को देखने जाना पड़ा.

सुनयना बिस्तर पर पड़ी हुई थी. कुछ देर पहले डाक्टर दवा दे गया था. वह अभी भी बुखार से तप रही थी. उस की आंखें सूजी हुई थीं, देख कर ही लग रहा था, जैसे वह रातभर रोई हो.

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मैं सामने कुरसी पर चुपचाप बैठा था. भाभी उस के पास बैठीं, उस के बालों को सहला रही थीं. सुनयना बोली तो कुछ नहीं, पर उस की आंखों से छलछला रहे आंसू पूरी कहानी बयान कर रहे थे. सारा माजरा समझ कर भाभी मुझे किसी अपराधी की तरह घूरने लगीं. मैं सिर झुकाए चुपचाप बैठा था. कुछ देर बाद, भाभी कमरे से निकल गईं.

कमरे में सिर्फ हम दोनों थे. सुनयना जैसे शून्य में कुछ तलाश रही थी. उसे देख कर मेरी आंखों में भी आंसू आ गए. अचानक महसूस हुआ कि यदि अब भी मैं ने सामने स्थित जलाशय को ठुकरा कर मृगमरीचिका के पीछे भागने का प्रयास किया तो शायद अंत में पछतावे के सिवा मेरे हाथ कुछ नहीं लगेगा. मैं ने बिना देर किए सुनयना के पास जा कर, याचना भरे स्वर में कहा, ‘‘सुनयनाजी, मैं ने आप से जो कहा था, वह मेरा भ्रम था. मैं ने बचपन के खेल को प्यार समझ लिया था. मुझे आज ही पता चला कि उस लड़की ने एक दूसरे लड़के से प्रेम विवाह कर लिया है. मैं नादानी में आप से पता नहीं क्याक्या कह गया…‘’

सुनयना अपनी डबडबाई आंखों से अब भी शून्य में निहार रही थी. कुछ देर रुक कर, मैं ने फिर कहा, ‘‘कुदरत जिंदगी में सब को सच्चा हमदर्द देती है पर अकसर हम उसे ठुकरा देते हैं. मैं ने भी शायद, ऐसा ही किया है. लड़कपन से अब तक ख्वाबों के पीछे भागता रहा,’’ मेरा गला भर आया था.

सुनयना मुझे टुकुरटुकुर देख रही थी. उस की आंखों से टपकते आंसू उस के गालों पर लुढ़क रहे थे. मुझे पहली बार उस की आंखों में अपने लिए प्यार नजर आ रहा था.

मैं ने किसी छोटे बच्चे की तरह भावुक हो कर कहा, ‘‘देखो, मुझे मत ठुकराना, वरना मैं जी नहीं पाऊंगा,’’ और हाथ बढा़ कर उस के गालों को छू रहे आंसुओं को पोंछने लगा.

सुनयना के होंठ कुछ कहने के प्रयास में थरथरा उठे. पर जब वह कुछ बोल न पाई तो अचानक मुझ से लिपट कर जोरजोर से सुबकने लगी. मैं ने भी उसे कस कर अपनी बांहों में भर लिया. हम दोनों की आंखों से आंसू बह रहे थे. मैं सोच रहा था, ‘मुझे अब तक क्यों पता नहीं चला कि हमेशा चंचल, बेफिक्र और नादान सी दिखने वाली इस लड़की के दिल में मेरे लिए इतना प्यार छिपा था.’

भाभी दरवाजे के पास खड़ीं मुसकरा रही थीं. पर उन की आंखों में भी खुशी के आंसू थे.

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ई. एम. आई

प्यार की तलाश- भाग 2 : अतीत के पन्नों में खोई क्या थी नीतू की प्रेम कहानी?

दूसरे दिन सुनयना वापस जा रही थी. भाभी ने आ कर मुझे उसे घर तक छोड़ने को कहा. मैं जान रहा था, यह मेरे और सुनयना को ले कर घर वालों के मन में जो खिचड़ी पक रही है, उसी साजिश का हिस्सा है पर अंदर ही अंदर मैं खुश भी था… मैं मन ही मन सोच रहा था, ’आज रास्ते में सुनयना के सामने सारी बातें स्पष्ट कर दूंगा.’

सुनयना मेरे पीछे चिपक कर बैठी हुई थी. मैं आदतन सामान्य गति से मोटरसाइकिल चला रहा था. वह अपनी हरकतों से मुझे बारबार छेड़ने का प्रयास कर रही थी. मैं चाह कर भी उसे टोक नहीं पा रहा था. वह बीचबीच में ‘नदिया के पार’ फिल्म का गाना गुनगुनाने लगती और रास्तेभर तरहतरह की बातों से मुझे उकसाने का प्रयास करती रही. पर मैं थोड़ाबहुत जवाब देने के अलावा बस, कभीकभार मुसकरा देता.

जब हम शहर की भीड़भाड़ से बाहर, खुली सड़क पर निकले तो दृश्य भी ‘नदिया के पार’ फिल्म के जैसा ही था, बस अंतर इतना था कि मेरे पास ‘बैलगाड़ी’ की जगह मोटरसाइकिल थी. सड़क के दोनों किनारे कतार में खड़े बड़ेबड़े पेड़ थे. सामने दोनों तरफ खेतों में लहलहाती फसलें और वनों से आच्छादित पहाडि़यों की शृंखलाएं नजर आ रही थीं.

बड़ा ही मनोरम दृश्य था. मेरा मन अनायास ही उमंग से भर उठा. लगा जैसे सुनयना का साथ दे कर मैं भी कोई गीत गुनगुनाऊं. पर अचानक नीतू का खयाल आते ही मैं फिर से गंभीर हो उठा. मैं ने मन ही मन सोचा कि मुझे नीतू के बारे में सुनयना को स्पष्ट बता देना चाहिए. पर पता नहीं क्यों मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा. बहुत कोशिश के बाद, किसी तरह खुद को संयत करते हुए मैं ने कहा, ‘‘सुनयनाजी, मैं आप से एक बात कहना चाहता हूं.’’

‘‘जी…’’ शायद सुनयना ठीक से सुन नहीं पाई थी.

मैं ने मोटरसाइकिल की गति, धीमी करने के बाद, फिर से कहा, ‘‘मैं आप से एक बात कहना चाहता हूं.’’

‘‘क्या कोई सीरियस बात है?’’ सुनयना कुछ इस तरह मजाकभरे लहजे में बोली, जैसे मेरे जज्बातों से वह अच्छी तरह वाकिफ हो.

मगर मैं जो कहने जा रहा था, शायद उस से उस का दिल टूट जाने वाला था. सो मैं ने गंभीर हो कर कहा, ‘‘मैं आप को जो बताने जा रहा हूं, मैं ने आज तक किसी से नहीं कहा है. दरअसल, मैं एक लड़की से प्यार करता हूं. उस लड़की का नाम नीतू है. वह मेरे साथ पढ़ती थी. हम दोनों एकदूसरे को बहुत चाहते हैं और मैं उसी से शादी करना चाहता हूं.’’

‘‘आप कहीं मजाक, तो नहीं कर रहे…’’ सुनयना को मेरी बातों पर यकीन नहीं हुआ.

‘‘यह मजाक नहीं, सच है,’’ मैं ने फिर गंभीर हो कर कहा, ‘‘मैं यह बात बहुत पहले सब को बता देना चाहता था पर कभी हिम्मत नहीं कर पाया. दरअसल, मैं इस बात से डर जाता था कि कहीं घर वाले यह न समझ लें कि मैं पढ़नेलिखने की उम्र में भटक गया हूं. पर अब मेरे सामने कोई मजबूरी नहीं है. मैं अपने पैरों पर खड़ा हो चुका हूं.‘‘

‘‘शशिजी, आप सचमुच बहुत भोले हैं,’’ इस बार सुनयना के लहजे में भी गंभीरता थी, वह मुसकराने का प्रयास करती हुई बोली, ‘‘एक तरफ आप प्यार की बातें करते हैं और दूसरी तरफ रिऐक्शन के बारे में भी सोचते हैं. ये बात आप को बहुत पहले सब को बता देनी चाहिए थी. मुझे पूरी उम्मीद है कि आप की पसंद सब को पसंद आएगी. फिर बात जब शादी की हो तो मेरे विचार से अपने दिल की ही बात सुननी चाहिए. चूंकि यह पल दो पल का खेल नहीं, जिंदगीभर का सवाल होता है.’’ सुनयना सहजता से बोल गई. ऐसा लग रहा था, जैसे मेरे मन की बात जान कर उसे कोई खास फर्क न पड़ा हो.

इस तरह उस के सहयोगात्मक भाव से मेरे दिल का बोझ जो एक तरह से उस को ले कर था, उतरता चला गया.

सुनयना को घर छोड़ कर लौटते वक्त मेरे मन में हलकापन था. लेकिन अंदर कहीं एक खामोशी भी छाई हुई थी. पता नहीं क्यों? सुनयना की आंखों से जो दर्द, विदा लेते वक्त झलका था, मुझे बारबार अंदर ही अंदर कचोट रहा था.

रात को खाना खा कर मैं जल्दी ही बिस्तर पर लेट गया क्योंकि सुबह किसी भी हालत में मुझे नीतू के  पास जाना था. लेकिन नींद आ ही नहीं रही थी. बस करवटें बदलता रहा. मन में तरहतरह के विचार आजा रहे थे. इसी उधेड़बुन में कब नींद आ गई, पता ही न चला.

सुबह घर के सामने स्थित पीपल के पेड़ से आ रही चिडि़यों की चहचहाट से मेरी नींद खुली. चादर हटा कर देखा, प्र्रभात की लाली खिड़की में लगे कांच से छन कर कमरे के अंदर आ रही है. आज शायद मैं देर से सोने के बावजूद जल्दी उठ गया था क्योंकि देर होने पर मां जगाने जरूर आती थीं. मैं उठ कर चेहरे पर पानी छिड़क कर, कुल्ला कर के अपने कमरे से निकला.

बैठक में मेज पर अखबार पड़ा हुआ था. आदतन अखबार ले कर कुरसी पर बैठ गया और हमेशा की तरह खबरों की हैडलाइन पढ़ते हुए अखबार के पन्ने पलटने लगा. तभी अचानक मेरी नजर अखबार में छपी एक खबर पर अटक गई. मोटेमोटे अक्षरों में लिखा था, ‘थाना परिसर में प्रेमीप्रेमिका परिणयसूत्र में बंधे.’ हैडलाइन पढ़ कर मेरा दिल धक से रह गया, ‘नहीं, ऐसा नहीं हो सकता,‘ मैं ने सोचा.

खबर कोई अनोखी या विचित्र थी, ऐसी बात न थी, लेकिन जो तसवीर छपी थी मैं ने एक दीर्घ श्वास ले कर पढ़ना शुरू किया. वह नीतू ही थी. खबर में उस के घर का पताठिकाना स्पष्ट रूप से लिखा था. यहां तक कि वह लड़का भी उस के मामा  के महल्ले का ही था. दोनों के बीच 2 साल से प्रेम चल रहा था. घर वालों के विरोध के चलते दोनों भाग कर थाने आ गए थे.

खबर पढ़ कर मैं सन्न रह गया. मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा था कि नीतू ऐसा कर सकती है. मैं ने मन ही मन अपनेआप से ही प्रश्न किया, ‘अगर इस लड़के के साथ, यह उस का प्रेम है तो 4-5 साल पहले मेरे साथ जो हुआ था, वह क्या था? क्या 4-5 साल का अंतराल किसी के दिल से किसी की याद, किसी का प्यार भुला सकता है? मैं उसे हर दिन, हर पल याद करता रहा, उस की तसवीर अपने सीने से लगाए रहा और उस ने मेरे बारे में तनिक भी न सोचा. क्या प्यार के मामले में भी किसी का स्वभाव ऐसा हो सकता है कि उस पर विश्वास करने वाला अंत में बेवकूफ बन कर रह जाए? मैं ने तो अब तक सुना था, प्यार का दूसरा नाम, इंतजार भी होता है पर उस ने मेरा इंतजार नहीं किया.’

 

सिद्धू मूसेवाला मर्डर: शांत पंजाब में गोलियों की गूंज

पिछले कुछ समय से पंजाब सुर्खियों में रहा है. 3 कृषि कानूनों का विरोध सब से पहले इसी राज्य में हुआ था, जो एक किसान से दूसरे किसान तक होते हुए देशभर में फैल गया था. बाद में किसानों की जिद और जुनून के आगे नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार का अडि़यल रवैया घुटने टेक गया था और उस ने वे तीनों कृषि कानून वापस ले लिए थे.

पंजाब में तो कांग्रेस सरकार की चूलें तक हिल गई थीं. नतीजतन, हालिया विधानसभा चुनाव में प्रदेश से तो कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ हो गया. अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने वहां ऐतिहासिक जीत हासिल की और फिर भगवंत मान की नई सरकार ने कई वीआईपी लोगों की सिक्योरिटी में कटौती करनी शुरू कर दी.

पंजाबी गायक और कांग्रेस से जुड़े सिद्धू मूसेवाला को भी सरकार के इस फैसले का शिकार होना पड़ा था, पर उन्हें इस बात की इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, यह तो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था.

शनिवार, 28 मई, 2022 को सिद्धू मूसेवाला की सरकारी सिक्योरिटी हटाई गई थी या कम कर दी गई थी और अगले ही दिन रविवार, 29 मई, 2022 को सरेआम की गई फायरिंग में सिद्धू मूसेवाला को मौत के घाट उतार दिया गया. यह वारदात मानसा जिले के गांव जवाहरके में हुई थी.

खबरों के मुताबिक, सिद्धू मूसेवाला अपने 2 साथियों के साथ गाड़ी से कहीं जा रहे थे. इसी बीच काले रंग की गाड़ी में आए 2 हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं. 30 राउंड फायरिंग में से 20 से ज्यादा गोलियां उन्हें लगी थीं.

अगर सिद्धू मूसेवाला के रुतबे की बात करें, तो साल 2020 में उन्हें ‘द गार्जियन’ द्वारा 50 नए कलाकारों में नौमिनेशन मिला था. पर उन का यह सफर इतना आसान भी नहीं रहा. उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत मशहूर गाने ‘लाइसैंस’ में बतौर लिरिक्स राइटर से की थी. इस गाने को निंजा ने गाया था.

सिद्धू मूसेवाला ने बतौर गायक अपने कैरियर की शुरुआत ‘जी वेगन’ से की थी. इस के बाद उन्होंने ब्राउन बौयज संग कई गानों पर काम किया था.

विवादित रहे मूसेवाला

सिद्धू मूसेवाला का असली नाम शुभदीप सिंह सिद्धू है. उन का जन्म 11 जून, 1993 को हुआ था. चूंकि वे मानसा जिले के मूसा गांव के रहने वाले थे, इसलिए उन का नाम सिद्धू मूसेवाला पड़ गया.

नौजवान तबके में मशहूर सिद्धू मूसेवाला अपने गानों में गन कल्चर को बढ़ावा देने के चलते विवादों में रहे थे. मई, 2020 में उन के 2 वीडियो वायरल हुए थे, जिन में वे बंदूक के साथ नजर आए थे. इन में से एक वीडियो में वे एके-47 राइफल के साथ ट्रेनिंग लेते नजर आए थे.

सिद्धू मूसेवाला का एक गाना ‘पंज गोलियां’ आया था. विवाद के बाद पंजाब पुलिस ने उन के खिलाफ आर्म्स ऐक्ट में हिंसा व बंदूक संस्कृति को बढ़ावा देने के मामले में केस दर्ज किया था.

खालिस्तान का समर्थन करने के मामले में भी सिद्धू मूसेवाला विवादों में रहे. दिसंबर, 2020 में उन का गाना ‘पंजाब : माय मदरलैंड’ आया था, जिस में वे खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले का समर्थन करते दिखे थे.

हत्या की वजह

पंजाब सरकार इस हत्याकांड को गैंगवार का नतीजा बता रही है. साथ ही, यह भी कह रही है कि उस ने उन की सिक्योरिटी हटाई नहीं, बल्कि कम की थी. सवाल उठता है कि कोई गायक किसी गैंगवार से कैसे जुड़ा हो सकता है?

पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ की छात्र राजनीति में उभरे गैंगस्टर लौरैंस बिश्नोई की पंजाब में दविंदर बंबीहा ग्रुप से गैंगवार चल रही है. लौरैंस बिश्नोई ग्रुप ने ही इस हत्याकांड की जिम्मेदारी ली है.

बता दें कि लौरैंस बिश्नोई फिलहाल जेल में बंद है और जेल से ही अपने गैंग को चला कर रहा है.

अफवाहों की सुनें, तो सिद्धू मूसेवाला बिश्नोई गैंग के विरोधी कैंप को सपोर्ट कर रहा था. याद रहे कि 8 अगस्त, 2021 को मोहाली में दिनदहाड़े उस विक्की मिद्दुखेड़ा की हत्या की गई थी, जो लौरैंस बिश्नोई का बेहद करीबी था. इस हत्याकांड में सिद्धू मूसेवाला के मैनेजर शगनप्रीत सिंह का नाम सामने आया था.

पुलिस मैनेजर शगनप्रीत सिंह तक पहुंच पाती, उस के पहले ही वह भारत से फरार हो कर आस्ट्रेलिया पहुंच गया था. पंजाब पुलिस ने उस के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया हुआ है.

कनाडा में बैठे लौरैंस बिश्नोई के करीबी गोल्डी बराड़ ने दावा किया है कि विक्की मिद्दुखेड़ा के अलावा उस के खुद के भाई गुरुलाल बराड़ की हत्या के पीछे भी सिद्धू मूसेवाला था, लेकिन अपने रसूख के दम पर वह बच गया था.

इन पर भी हुआ हमला

साल 2018 में पंजाब के मशहूर गायक परमीश वर्मा पर हमला हुआ था. उन पर मोहाली में गोली चली थी, जो उन के घुटने में लगी थी. यह जानलेवा हमला फिरौती के लिए किया गया था और इस का आरोप गैंगस्टर दिलप्रीत बावा पर लगा था, जिस पर केस भी चल रहा है.

साल 1996 में उस दौर के मशहूर गायक दिलशाद अख्तर को भी पंजाब में अपराधियों ने अपना निशाना बनाया था. ऐसा माना जाता है कि एक कार्यक्रम के दौरान एक शख्स ने उन से पंजाबी गायक हंसराज ‘हंस’ का गाना ‘नची जो साड्डे नाल’ गाने को कह दिया, पर दिलशाद ने इसे गाने से मना कर दिया, क्योंकि यह गीत उन का गाया हुआ नहीं था.

दिलशाद अख्तर के मना करने पर वह शख्स नाराज हो गया और उस ने एक बौडीगार्ड से बंदूक छीन कर दिलशाद को गोली मार दी, जिस से दिलशाद की मौके पर ही मौत हो गई थी.

90 के दशक में पंजाब में बेहद चर्चित गायक, गीतकार, संगीतकार अमर सिंह ‘चमकीला’ और उन की पत्नी अमरजोत 8 मार्च, 1988 को अपनी गाड़ी से कहीं जा रहे थे कि उस वक्त उन पर हमला हो गया था और अपराधियों ने उन्हें गोली मार दी थी.

पैसा और पावर

सिद्धू मूसेवाला की बात करें, तो फिलहाल वे कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे और पैसे से भी ताकतवर थे. उन का लाइफ स्टाइल चकाचौंध कर देने वाला था. हाल ही में हुए पंजाब विधानसभा चुनाव में सिद्धू मूसेवाला ने जो हलफनामा दायर किया था, उस में उन्होंने बताया था कि उन के पास जीप, एसयूवी और टोयोटा फौर्च्यूनर जैसी गाडि़यां हैं. इस के अलावा उन के पास काले और सफेद रंग की रेंज रोवर गाड़ी भी थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धू मूसेवाला नाइट क्लब में एक शो के लिए बतौर फीस 6-8 लाख रुपए लेते थे, वहीं लाइव शो के लिए उन की फीस 15 से 20 लाख रुपए थी.

इतनी दौलत पाने के लिए सिद्धू मूसेवाला ने यकीनन काफी मेहनत की होगी, पर अगर वे सच में किसी गैंगवार का हिस्सा थे तो यह चिंता की बात है.

इस तरह की वारदातें उस पंजाब के लिए भी खतरे की घंटी हैं, जो पिछले कई सालों से शांत बना हुआ था. ड्रग्स और खालिस्तान की जड़ें अभी वहां से उखड़ी नहीं हैं, उस पर किसी नामी कलाकार की हत्या होना देश और समाज के लिए कोई अच्छा संदेश नहीं है.

यह चिंता तब और बढ़ जाती है, जब सिद्धू मूसेवाला की हत्या के कुछ घंटे बाद ही खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख्स फार जस्टिस के प्रमुख गुरुपतवंत सिंह पन्नू द्वारा पंजाबी गायकों को धमकी दी जाती है और उन से ‘खालिस्तानी मूवमैंट’ का समर्थन करने को कहा जाता है.

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