स्वप्नदोष बीमारी या समस्या…जानें यहां

युवाओं में  होने वाली कई शारीरिक बीमरियां हैं इसे होने पर या तो शर्म के मारे या हिचकिचाहट के मारे लड़के इसे छुपा कर रखते है जिससे ये परेशानी और बड़ जाती हैं. वो ये नही सोचते की इससे खतरा बड़ सकता हैं. किशोर या युवावस्‍था में आम तौर पर देखी जाने वाली समस्या है स्‍वप्‍नदोष (Night fall) की. रात को सोते समय लड़कों का स्‍वत: स्‍खलित हो जाना. यह चिपचिपा पदार्थ वीर्य (Pre sperm) के तौर पर जाना जाता है. इसे स्‍वप्‍नदोष इसलिए कहा जाता है क्‍योंकि यह सपने देखते हुए  उत्‍सर्जित होता है. हालांकि यह एक नेचुरल प्रक्रिया है. लेकिन, यदि यह बार-बार होता है तो इसमें एक्‍सपर्ट से सलाह लेनी जरूरी है. तो यदि आप भी इस समस्या से परेशान है तो घबराने की जरुरत नहीं हैं क्योंकि ये एक आम समस्या हैं जिसके बारे में आपको अच्छे से जानकारी के साथ- साथ इससे जुड़ी बाते भी पता होनी चाहिए.

तो क्या होता है स्वप्नदोष (Night fall) ?

किशोरावस्था से युवावस्था की और बढ़ते हुए नवयुवक अनेक कारणों से स्वप्नदोष की समस्या के शिकार हो जाते है. स्वप्नदोष से परेशान युवको की यौन रूचि, अश्लील विचार, अश्लील किताबो के पढ़ने से या ऐसी कोई फिल्म देखने से उत्तेजित हो जाते हैं और ऐसे में दिन या रात में सोते समय स्वप्नदोष हो जाता है.  इसकी सबसे बड़ा कारण है युवाओं में बढ़ता पौर्नोग्राफी का क्रेज. जिसे लेकर हमें जागरुक होने की जरुरत हैं क्योंकि अति किसी की  अच्छी नही होती.

तो क्या स्वप्नदोष (Night fall) को बीमारी के रुप में देखा जा सकता है? 

स्वप्नदोष कोई बीमारी नही बल्कि संकेत है की आप अब बड़े हो रहे हैं. स्वप्नदोष आज के समय में अब आम बात हो गई है. पर 10 में से 6 को ये परेशानी होना आम है. इसमें नींद की अवस्था में ही वीर्य स्त्राव हो जाता है. स्वप्नदोष होने में कोई खराबी नहीं है. यह बड़े होने का स्वाभाविक हिस्सा है. अगर आपको बहुत ज्यादा स्वप्नदोष भी होता है, इसका मतलब यह नहीं की आपके शरीर में कोई खराबी है और इस से आपके शरीर और सेहत पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता. कुछ लोगों को हफ्ते में कई बार स्वप्नदोष होता है. स्वप्नदोष 16 साल से लेकर 30 साल तक ज्यादा होता है. जैसे-जैसे आप उम्र में बड़े होते हैं, स्वप्नदोष होने की संभावना उतनी ही घट जाती है.

स्वप्नदोष (Night fall) के कारण

स्वप्नदोष हर किसी को होता है. बल्कि जो लोग हमेश सेक्स के बारे में सोचते रहते हैं उन्हीं को अधिक होने की संभावना रहती है. जैसा की हमने बताया की पोर्नोग्राफी का बढ़ता प्रचलन और अब तो सोशल मीडिया पर भी ऐसे तमाम वीडियों आसानी से मिल जाना अब काफी आम है जिसे देख लड़के सेक्स के बारे में जादा सोचते हैं इसी के चलते लड़कों के मन में अश्लील विचार आते हैं . या अश्लील किताबों को पढ़ते है तो आपको स्वप्नदोष की समस्‍या से सामना करना पड़ सकता है.

स्वप्नदोष (Night fall) होने पर क्या करना चाहिए? 

एक्सपर्टस का कहना है कि स्वप्नदोष एक मानसिक बीमारी है. इससे बचने के लिए यह बहुत जरूरी है कि अपने विचारों को सही रखें. जब भी नहाना हो तो अत्याधिक गर्म पानी का प्रयोग ना करें, संभव हो तो ठंडे पानी से ही नहाएं. अपने मन में हमेशा अच्छे ख्याल रखें. मन में अश्लील विचार को त्याग दे और जितना हो सके तो ऐसे दोस्त बनाए जो आपसे अच्छे विचार वाली बाते करें. किसी भी प्रकार का खेल भी एक अच्छा तरीका है खुद को स्वप्नदोष से बचाने के लिए.

यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसको लेकर बहुत ज्‍यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है. ध्‍यान रखने की बात यह है कि, आप अपने मन में उठने वाले अश्‍लील विचारों को नियंत्रित करें और अश्‍लील किताबों और पौर्न फिल्‍मों से दूर रहें. अगर इससे आपको ज्‍यादा परेशानी है तो आप किसी एक्‍सपर्ट की सलाह जरूर ले सकते हैं.

आन का फैसला : एक जमींदार की जिद

हालांकि फैसला सुनाते समय बिंदा प्रसाद उर्फ ‘भैयाजी’ का मन उन्हें धिक्कार रहा था, पर हमेशा की तरह उन्होंने अपने मन की आवाज को यों ही चिल्लाने दिया. इस मन के चक्कर में ही उन के हालात आज ऐसे हो गए हैं कि अब गांव में उन्हें कोई पूछता तक नहीं है. वे अब गांव के मुखिया नहीं थे, पर जब उन के पिताजी मुखिया हुआ करते थे, तब शान ही कुछ और थी.कामती भले ही छोटा सा गांव था, पर एक समय में इस गांव में बिंदा प्रसाद के पिताजी गया प्रसाद की हुकूमत चलती थी.

वे अपनी नुकीली मूंछों पर ताव देते हुए सफेद धोतीकुरते पर पीला गमछा डाल कर जब अपनी बैठक के बाहर दालान में बिछे बड़े से तख्त पर बैठते थे, तो लोगों का मजमा लग जाता था.गांव में किसी के भी घर में कोई भी अच्छाबुरा काम होता, तो वह उस की इजाजत सब से पहले गया प्रसाद से ही लेने आता था. गया प्रसाद हां कह देते तो हां और अगर उन्होंने न कह दिया तो फिर किसी की मजाल नहीं कि कुछ कर ले.

वे कहीं नहीं जाते थे, दिनभर अपने तख्त पर बैठेबैठे हुक्म बजाते रहते थे.बिंदा प्रसाद को याद है कि एक बार उन के पिताजी गया प्रसाद को शहर की ओर जाना था. बहुत दिनों बाद वे घर से निकल रहे थे. तांगा अच्छी तरह सजा कर तैयार कर दिया गया था.

गया प्रसाद को सिर्फ तांगे की सवारी ही पसंद थी. वैसे तो उन के घर पर एक कार भी थी, जिसे बाकी लोग ही इस्तेमाल किया करते थे, पर वे कभी उस में नहीं बैठे थे. गया प्रसाद का तांगा गांव के रास्ते से निकला. थोड़ा सा आगे सड़क के किनारे बने किसी घर की कंटीली बाड़ से उन का कुरता फट गया और वे आगबबूला हो गए.

उस घर में रहने वाला परिवार गया प्रसाद के पैरों पर लोट गया और माफी की गुहार लगाता रहा.गया प्रसाद ने उस परिवार को माफ भी कर दिया, पर उन्होंने शहर जाना छोड़ कर सब से पहले अपने आदमियों को बुला कर सड़क के किनारे लगी उस बाड़ को हटवाया.गांव के बहुत सारे लोग, जो रोजाना इस परेशानी से जूझ रहे थे, उन्होंने गया प्रसाद के इस काम के लिए उन का शुक्रिया अदा किया.गया प्रसाद जब तक जिंदा रहे, तब तक उन की शान बनी रही, पर उन के गुजर जाने के बाद धीरेधीरे इस शान में ग्रहण लगता चला गया.

इस के बाद बिंदा प्रसाद को मुखिया बनाया गया, पर सब उन्हें ‘भैयाजी’ कहते थे. वे अपने पिताजी से अलग थे. वे चूड़ीदार कुरतापाजामा और उस के ऊपर काली बंडी पहनते थे. वे हलकी दाढ़ीमूंछ रखते थे, जो उन्हें रोबीला बनाती थी.काफी दिनों तक तो लोग ‘भैयाजी’ को भी वैसे ही स्नेह देते रहे और उन से पूछ कर ही हर काम करते रहे, पर बाद में यह कम हो गया.

गांव के बच्चे शहर पढ़ने जाते थे और वहां से कुछ नया सीख कर आते थे. बच्चियां भी साइकिल से पढ़ने जाती थीं. शासन उन्हें साइकिल से ले कर ड्रैस तक दे रहा था.नए बच्चों में बिंदा प्रसाद की इस अघोषित गुलामी की प्रथा को ले कर गुस्सा पनप रहा था. पर ‘भैयाजी’ की नसों में जो खून दौड़ रहा था, वह इस सब को स्वीकार नहीं कर पा रहा था.‘भैयाजी’ के अपने बच्चे भी बाहर पढ़ रहे थे. वे अपने पिताजी को समझाते थे कि अब जमाना बदल गया है. कोई किसी का गुलाम नहीं है.

अपनी इज्जत बनाए रखनी है, तो इन के साथ मिल कर चलो.दूसरी तरफ ‘भैयाजी’ की बढ़ती उम्र के साथ गांव के लोग उन से अब पंचायत भी नहीं करा रहे थे. ज्यादातर मामले वे अपनी समाज की पंचायत में ही सुलझा लेते या फिर ग्राम पंचायत में बैठक हो जाती. ‘भैयाजी’ इसे अपनी शान के खिलाफ मान रहे थे. वे दिनभर तख्त पर बैठे रहते, पर 2-4 लोगों को छोड़ कर कोई उन से मिलने तक नहीं आता था.

गांव की एक सरोज काकी की एकलौती बेटी सावित्री ने कालेज में फर्स्ट आ कर गोल्ड मैडल जीता था. गांव में जश्न मनाया गया. सावित्री के साथ पढ़ने वाली लड़कियां भी गांव में आ कर इस जश्न में शामिल हुईं. बड़ीबड़ी गाडि़यों में बैठ कर कालेज के प्रोफैसर और अखबार वाले भी आए. सावित्री देखते ही देखते हीरो बन गई थी. ‘भैयाजी’ को भी सरोज काकी ने जश्न में बुलाया था, पर वे नहीं गए.

कल ही ‘भैयाजी’ की शादी के बाद पहली बार गांव में किसी और दूल्हे ने घोड़ी पर बैठ कर बरात निकाली थी. डीजे भी बज रहा था और जनरेटर से रोशनी भी की जा रही थी. ‘भैयाजी’ से यह सब बरदाश्त नहीं हो रहा था. उन्होंने उसे रोकने की कोशिश नहीं की. वे जानते थे कि ऐसा कर के वे कानूनी दांवपेंच में उलझ जाएंगे, पर उन के मन में एक टीस पैदा हो चुकी थी. वे अपनी और अपने पुरखों की हो रही इस बेइज्जती को सहन नहीं कर पा रहे थे. उन का मन अब काम में भी नहीं लगता था.

वैसे, ‘भैयाजी’ की खेतीकिसानी बहुत थी. दर्जनों नौकरचाकर काम करते थे. ‘भैयाजी’ खेत तो कभीकभार ही जाते थे, पर हिसाबकिताब पुख्ता रखते थे. मजाल है कि कोई उन की इजाजत के बिना एक बोरा भूसा भी ले जाए.भैयाजी की सारी खेतीकिसानी तख्त पर बैठेबैठे ही हो जाती थी. पहले दिनभर लोगों का आनाजाना लगा रहता था, पर अब उन की बैठक व्यवस्था खत्म सी हो चुकी है, तब उन्हें दिन काटना मुश्किल जान पड़ने लगा. वे इस का कुसूर गांव वालों और शहर में पढ़ रहे नौजवानों पर डालते थे.रामलाल ‘भैयाजी’ का खासमखास था. वह बचपन से उन के साथ साए की तरह लगा रहता था.

रामलाल को भी गांव के लोगों की यह अनदेखी सहन नहीं हो रही थी. वह मालिक को उदास देखता तो उस का खून खौलने लगता. धीरेधीरे उस के मन का गुस्सा भयानक रूप लेता जा रहा था.‘भैयाजी’ सरोज काकी के अलावा गांव के कुछ और लोगों को सबक सिखाने का मन बना चुके थे. वे जानते थे कि उन्हें कुछ ऐसा करना ही पड़ेगा कि गांव में उन की इज्जत फिर पहले जैसी हो जाए. वे इस के लिए कुछ भी करने को तैयार थे.मनसुख गांव का ईमानदार और मेहनती आदमी था.

कभी उस के पिताजी ‘भैयाजी’ के घर का गोबर डाला करते थे, पर मनसुख ने जब से होश संभाला, उस के परिवार ने तरक्की करनी शुरू कर दी थी.मनसुख गांव में गल्ला खरीदता और मंडी में ले जा कर बेच देता था. उस ने इस धंधे से ही पैसे कमाए थे. गांव वाले उस की ईमानदारी से खुश रहते थे. वह गांव के लोगों की मदद दिल खोल कर करता था. इस वजह से गांव में उस की बहुत इज्जत थी.‘भैयाजी’ ने मनसुख को अपने निशाने पर लिया था. मनसुख सरंपच का सगा भाई था.

‘भैयाजी’ एकसाथ कई निशाने लगाने की योजना में थे. सरोज काकी मनसुख के धंधे में मदद करती थीं. उन्हें भी दो पैसे मिल जाते थे. उन के पास यही एकमात्र रोजगार का साधन था. ज्यादा उम्र न तो मनसुख की हुई थी और न ही सरोज काकी की. इस वजह से ‘भैयाजी’ को उन के बारे में अफवाह फैलाने में कोई परेशानी भी नहीं हुई.‘भैयाजी’ तो गांव में कहीं आतेजाते नहीं थे, सो रामलाल ने गलीगली खबर फैलाने की जिम्मेदारी ले ली और इस अफवाह को पंख लग गए.

सरोज काकी ने मनसुख के यहां आनाजाना बंद कर दिया. कुछ ही दिन में मनसुख का धंधा चौपट हो गया. मनसुख इसे सहन नहीं कर पाया. गांव के लोगों को भरी दोपहरी में उस की लाश एक पेड़ से लटकी मिली.देखते ही देखते मनसुख के खुदकुशी कर लेने की खबर पूरे गांव में फैल गई. गांव वाले पुलिस के चक्कर में पड़ना नहीं चाहते थे, बल्कि यों कहें कि रामलाल ने खुदकुशी के मामले में पुलिस किस तरह से लोगों को परेशान कर सकती है की ऐसी भयानक कहानी गांव वालों को सुनाई थी कि गांव वाले इस मामले को गांव में ही निबटा लेने में भलाई समझने लगे थे.

सालों बाद गांव के लोगों को ‘भैयाजी’ की याद आई. ‘भैयाजी’ का मन फूला नहीं समा रहा था, पर उन्होंने गांव वालों की इस गुजारिश को साफ शब्दों में ठुकरा दिया. गांव वाले निराश हो कर लौटने भी लगे, पर रामलाल ने हालात को संभाला और अपनी सेवाओं की दुहाई दे कर ‘भैयाजी’ से पंचायत करने की इजाजत ले ली.रामलाल को लगा कि आज उस ने मालिक का कर्ज अदा कर दिया और ‘भैयाजी’ को लगा कि रामलाल को खिलानापिलाना काम आ गया.पंचायत ‘भैयाजी’ के दालान में ही लगी. गांव के सारे लोग जमा हुए. सरोज काकी को बुलाया गया और सरपंच को भी.

सरपंच ने सारा कुसूर सरोज काकी पर मढ़ दिया. हालांकि उसे ऐसा करने की सलाह खुद ‘भैयाजी’ ने ही दी थी. सरपंच उन की गिरफ्त में आ चुका था.सरोज काकी के साथ कोई नहीं था. वे औरत थीं, इस वजह से वे बहुत खुल कर अपनी बात रख भी नहीं पाईं. सारा माहौल ऐसा बन गया था कि लोग उन के खिलाफ नजर आने लगे.‘भैयाजी’ की चाल कामयाब हो गई थी.

अब उन्हें अपना फैसला देने में कोई परेशानी नहीं थी. वे जानते थे कि लोग सरोज काकी के खिलाफ फैसला सुनना चाहते हैं और अगर वे ऐसा ही फैसला देंगे, तो गांव वालों की नजरों में उन की इज्जत बढ़ जाएगी.‘भैयाजी’ ने बहुत सोचनेविचारने के बाद कहा, ‘पंचायत सावित्री की मां को मनसुख की खुदकुशी के लिए कुसूरवार मानती है और फैसला देती है कि सावित्री की मां यानी सरोज काकी का दानापानी बंद किया जाता है और उसे गांव में घुसने की भी इजाजत नहीं होगी.’’पंचायत ऐसे ही फैसले का इंतजार कर रही थी.

इस वजह से किसी को भी कोई हैरत नहीं हुई सिवा रामलाल के, जो मुखिया का सब से खास राजदार था.‘भैयाजी’ को लग रहा था कि उन्होंने अपनी हारी हुई बाजी अपने हाथ में कर ली थी. सरपंच तो उन की चपेट में आ ही चुका था, गांव वाले भी उन के फैसले से खुश थे. सो, देरसवेर वे भी उन को सलाम करने लगेंगे.पर ऐसा हुआ नहीं. सरोज काकी को पंचायत के फैसले के हिसाब से गांव छोड़ना था.

वे इस की तैयारी भी कर रही थीं कि तभी सावित्री अपने दलबल के साथ वहां आ पहुंची. सावित्री को एकाएक अपने सामने देख कर सरोज काकी की आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली. सावित्री को सारे मामले की जानकारी तो पहले ही हो चुकी थी. इस वजह से तो वह गांव में आई थी.सावित्री अब बड़ी सरकारी अफसर बन चुकी थी. पुलिस उस के साथ रहती थी.

‘भैयाजी’ पुलिस के नाम से ही घबरा गए थे.सावित्री ने ‘भैयाजी’ की उम्र का लिहाज किया और बोली, ‘‘देखो अंकल, मैं चाहती तो अब तक आप सलाखों के पीछे होते, पर मैं आप की उम्र का लिहाज कर रही हूं. ‘‘मां को तो मैं अपने साथ ले जा रही हूं, पर आप को चेतावनी भी देती जा रही हूं कि भविष्य में ऐसा कुछ भी मत दोहराना, वरना…’’‘भैयाजी’ की बाजी पलट गई. वे मुंह लटकाए खड़े रह गए.

मिर्जापुर में फिर से दिखेगा मुन्ना भैया का भौकाल

16 नवंबर, 2018 को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई वैब सीरीज ‘मिर्जापुर’ ने दर्शकों का मनोरंजन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी.

इस वैब सीरीज में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा, विक्रांत मेस्सी, श्वेता त्रिपाठी, रसिका दुग्गल, जैसे ऐक्टर्स ने कमाल के रोल प्ले किए थे.

इस वैब सीरीज में दर्शकों ने कालीन भैया, मुन्ना भैया, गुड्डू पंडित और बबलू पंडित के अभिनय को बहुत पसंद किया था जोकि पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु शर्मा, अली फजल और विक्रांत मेस्सी द्वारा निभाए गए थे.

ऐक्शन और रोमांस का तड़का

इस वैब सीरीज में जम कर गालीगलौच और खूनखराबा दिखाया गया था और इस वजह से यह वैब सीरीज ए सर्टिफाइड थी. ‘मिर्जापुर’ वैब सीरीज को ज्यादातर युवाओं ने पसंद किया था.

तकरीबन 2 साल बाद 23 अक्तूबर, 2020 को ‘मिर्जापुर’ वैब सीरीज का ‘मिर्जापुर सीजन 2’ रिलीज किया गया था. ‘मिर्जापुर सीजन 2’ को भी दर्शकों ने खूब प्यार दिया और यह सीजन भी सुपरहिट साबित हुआ.

‘मिर्जापुर सीजन 2’ की सफलता के बाद दर्शकों ने ‘मिर्जापुर सीजन 3’ का बेसब्री से इंतजार करना शुरू कर दिया था. दर्शकों को यकीन था पिछले 2 सीजंस की तरह ‘मिर्जापुर सीजन 3’ भी सुपरहिट होगा लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं हुआ.

खत्म हुआ इंतजार

पूरे 4 साल के लंबे इंतजार के बाद 5 जुलाई, 2024 को ‘मिर्जापुर सीजन 3’ रीलीज हुआ जिस ने दर्शकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। वजह मुन्ना भैया यानी कि दिव्येंदु शर्मा इस सीरीज में नहीं थे.

दरअसल, ‘मिर्जापुर सीजन 3’ के शुरुआत में ही मुन्ना भैया की मृत्यु दिखा दी गई थी, जिस वजह से मुन्ना भैया पूरे सीजन में नजर नहीं आए. शो के मेकर्स को यह बात समझ आ चुकी होगी कि ‘मिर्जापुर सीजन 3’ के फ्लौप होने का कारण है मुन्ना भैया का इस सीरीज में न रहना.

हाल ही में अमेजन प्राइम वीडियो ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है जिस में उन्होनें ‘मिर्जापुर सीजन 3’ का एक बोनस ऐपिसोड रीलीज करने की घोषणा की है. आप को बता दें कि ‘मिर्जापुर सीजन 3’ का यह बोनस एपिसोड 30 अगस्त, 2024 को रिलीज हो रहा है जिस में मुन्ना भैया का कमबैक होता नजर आ रहा है.

देखने वाली बात

इस घोषित वीडियो से मिर्जापुर सीरीज के फैंस काफी खुश होते नजर आ रहे हैं. अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या क्या ‘मिर्जापुर सीजन 3’ का यह बोनस एपिसोड दर्शकों का मनोरंजन करने में सफल हो पाएगा या नहीं।

मर्दों के लिए ये है 5 ग्रूमिंग टिप्स, स्मार्टनेस हो जाएगी दोगुनी

लडके का स्मार्ट दिखना, स्टालिश होना इस बात की गवाही देता है कि वे अपनी ग्रूमिंग पर खास ध्यान देते है. ग्रूमिंग की खास बात ही ये है जो बताती है कि पुरुषों को सबसे अलग और खास दिखना आना चाहिए.

 

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लड़को के लिए खास टिप्स होते है जो उन्हे ग्रूमिंग के वक्त करने चाहिए. जो आपके लुक्स की खूबसूरती को बढ़ा सकें. परुषों को वीक के में एक बार ग्रूमिंग जरूर करनी चाहिए. अंदरूनी सफाई से लेकर बाहरी सफाई तक खास ध्यान देना चाहिए इससे आपकी सेहत भी बेहतर बनीं रहती है. बस आपको कुछ खास बातों पर ध्यान देना चाहिए.

नाखून काटने का पर्फेक्ट टाइम सीखिए

नाखूनों की केयर और साफ सफाई की जरूरी होती है. अगर आपके नेल सौफ्ट हैं, तो कभी भी आप नेल कट कर सकते हैं. लेकिन, अगर आपके नेल हार्ड हैं, तो शॉवर लेने के तुरंत बाद बढ़े हुए नाखूनों को काटना चाहिए.

इस समय नाखून बेहद नर्म और मुलायम रहते हैं. नाखून काटने के लिए ब्लेड या सीजर का इस्तेमाल करने से बेहतर है नेल कटर का ही इस्तेमाल करें.

ठंडे पानी से नहाए

यकीन मानिए यह एक ऐसा ग्रूमिंग टिप्स है, जो सर्दी के दिनों में भी बेहद कारगर माना जाता है. दरअसल कूल या कोल्ड शौवर कोई ट्रीटमेंट नहीं है. बात दरअसल यह है कि ठंडे पानी से स्कीन पर ईचिंग कम होती है. यह उनके लिए और भी कारगर है, जिनकी स्कीन आसानी से ड्राएं हो जाती है.

बालों को रेग्युलर साफ करें

बार-बार बाल धोने की जरुरत क्यों महसूस होती है? इसलिए कि बालों में धूल और पसीने से गंदगी जम जाती है. आप शैंपू कीजिए या साबुन लगाकर हेयर वाश कीजिए, यह आपके हेयर और स्किन दोनों को ड्राय कर देता है.इससे आपके बाल बेहद रूखे और बेजान नजर आने लगते हैं.

अगर आपके बाल ऐसे हैं, जिसे धोए बगैर काम नहीं चलने वाला, तो हेयर वाश करना आपकी मजबूरी समझी जा सकती है. लेकिन क्या यह बेहतर नहीं होगा कि आप इसे रोज न कर अल्टरनेट-डे पर करें.

नौर्मल कंडीशन में सप्ताह में दो से तीन दिनों से ज्यादा शैंपू करना नुकसानदायक माना जाता है. शैम्पू जब भी करें, कंडीशनर का इस्तेमाल करना न भूलें. यह डैमेज कंट्रोल करता है.

गर्दन के पीछे शेव करें

वीक में एक बार अपनी गर्दन के पीछे भी शेविंग करें. इसके लिए कहीं जाने की जरुरत नहीं है. खुद से इस काम को अंजाम दें. लेकिन, सवाल यह है कि खुद से आप अपने गर्दन के पीछे ट्रिम करेंगे कैसे? डरिए नहीं. यह कोई ज्यादा मुश्किल काम नहीं है. आजकल इस काम के लिए स्पेशली डेडिकेटेड ट्रिमर बाजार में उपलब्ध हैं. ये क्लिपर से छोटे होते हैं और आपके हेयर लाइन को ट्रिम करने के लिए स्पेशली डिजाइन किए गए होते हैं.

शेविंग क्रीम का विकल्प

शेविंग के पहले स्किन को सौफ्ट करने के लिए हम क्या इस्तेमाल करते हैं? शेविंग सोप, शेविंग क्रीम या फिर शेविंग फोमइ. न्हीं चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. हम इनका यूज तो करते हैं लेकिन ये स्किन को ड्राए कर देते हैं. तो इसकी जगह दूसरी चीज क्या आजमायी जा सकती है?

कंडीशनर या कुकिंग औयल का इस्तेमाल स्किन को ड्राई होने से थोड़ी राहत दिलाता देता है. बस इसे सर्कुलर मोशन में चेहरे पर थोड़ी देर मलें और जैसे शेविंग करते हैं, कर लें. शेविंग के बाद भी चिपचिपाहट बची है तो बस इसे धो लें. आप चाहें तो औलिव औयल का भी इस्तेमाल करें सकते है. यह सभी प्रकार की स्कीन के लिए परफेक्ट है.

तृप्ति और खुशियों का खजाना भी हैं कामुक किताबें

ज्ञान हासिल करना है तो किताबें पढ़ें, किसी की सक्सेज स्टोरी जाननी हो तो किताबें पढ़ें, तनाव खत्म करना हो तो किताबें पढ़ें, यहां तक कि दिल में बेचैनी हो, किसी चीज में मन न लग रहा हो, सब कुछ बोझिल सा महसूस हो रहा हो तो मनोविद कहते हैं कि कामुक किताबें पढ़ें. जी हां, आप बिल्कुल सही पढ़ रहे हैं. किताबें सेक्स में काफी सहायक सिद्ध होती हैं. हालांकि पिछले कुछ सालों से बड़े पैमाने पर किताबों को वीडियो ने रिप्लेस करने की कोशिश की है, लेकिन एक तो अभी ज्यादातर वीडियोज में उस तरह की मैच्योरिटी नहीं है, जो किताबों में है.

दूसरी बात वीडियो चूंकि हर कोई बना रहा है, चाहे उसे उस विषय के बारे में कोई ज्ञान हो या न हो, इसलिए अभी वीडियोज में वह स्टैंड नहीं है, जैसा किताबों में है. निःसंदेह बहुत सारे वीडियोज ऐसे हैं, लेकिन आमतौर पर वीडियोज किताबों से अभी बेहतर नहीं है.

खैर हमें तुलना में नहीं उलझना सिर्फ यह जानना है कि विशेषज्ञ आखिर कामुक किताबों के पढ़ने के फायदे क्या बताते हैं? कुछ सालों पहले एक अध्ययन में पाया गया कि कामुक कहानियां या फिर फोटोग्राफ्रस देखने से दिल तरोताजा हो जाता है. यही नहीं, ये कहानियां और तस्वीरें स्वास्थ्य के नजरिये से भी बहुत लाभदायक पायी गईं. यह सामग्री खास तौरपर उन कपल्स के लिए तो बहुत ही उपयोगी हैं, जिन्हें उत्तेजित होने में वक्त लगता है. शायद यूं ही नहीं कहा गया है कि किताबें हमारी सबसे अच्छी मित्र होती हैं. यह न सिर्फ तकनीकी रूप से मित्र होती हैं बल्कि ये हमारे एहसास का हिस्सा भी होती हैं.

दरअसल प्रेम कहानियां व साहित्य, कामुक कहानियां यह सब सीधे हमारे दिल के तार से जुड़ जाती हैं जिससे ये हमें सेक्सुअल एहसास में कई गुना ज्यादा आनंदित करती हैं. मनोविदो के मुताबिक कामुक किताबें हमारे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं. मनोविद उन दंपतियों को जो काफी मुश्किल से या देर से उत्तेजित होते हैं, उन्हें सेक्स से पहले कुछ इरोटिक किताबें पढ़ने का सुझाव देते हैं.

अगर किताबें उपलब्ध न हों तो इंटरनेट में जाकर पोर्न साइट्स को भी देखा जा सकता है. आजकल भारत में भी ऐसा खुलापन देखा जा रहा है. लड़कियां ऐसी साइट्स देखने में हिचकिचाती नहीं हैं बल्कि अपने पार्टनर को पूरा सपोर्ट करती हैं. उन्हें इस बात से कोई गुरेज नहीं है कि उनका पार्टनर इन साइट्स को देखने व दिखाने में इंटरेस्ट दिखा रहा है बल्कि अपने साथी को पूरा सहयोग करती हैं. वो भी दिल खोलकर. आमतौर पर सेक्सोलॉजिस्ट स्वीकारते हैं कि पोर्नोग्राफी और इरोटिक विषय, दिमाग से तनाव को दूर करते हैं. सो इसे रोगोपचार भी कहा जा सकता है.

यह एक ऐसा नुस्खा है जिसमें कोई चिकित्सा नहीं मगर बेहतर स्वास्थ्य पर बेहतर असर है. इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि अगर दंपति या पार्टनर्स साथ-साथ ऐसी किताबें पढ़ें तो उनके लिए ज्यादा लाभदायक होती हैं.

मुम्बई स्थित केईएम अस्पताल के डॉ-प्रकाश कोठारी बताते हैं कि उनके पास जितने भी दंपति चिकित्सा के लिए आते हैं उनमें से ज्यादातर इरोटिक किताबें, पोर्न साइट्स देखना पसंद करते हैं. वह कहते हैं, फ्इरोटिक किताबें पढ़ना आज के दौर में जीवन का एक हिस्सा जैसा बनता जा रहा है. यह एक किस्म से फोरप्ले का काम करता है. इससे उत्तेजित होने में आसानी होती है. इससे दोनों पार्टनर्स बहुत ही जल्द एक दूसरे में खो जाते हैं.य् चाहे नवदंपति हाें या फिर किसी की शादी के 20 साल गुजर चुके हों.

अगर सेक्स में नयापन चाहिए या फिर सेक्स में एकरसता आ गई हो और उसे दूर करना चाहते हों तो सबसे आसान उपाय यही है कि कुछ ऐसी तस्वीरें देखी जाएं जो उत्तेजित कर सकें या फिर ऐसी साइट सर्च की जाए जिसमें तस्वीरों के साथ-साथ रोमांच कर देने वाली कहानियां हाें.

इससे जीवन में खुशियां नए सिरे से शामिल हो जाएंगी. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दंपति कितने नए हैं या कितने पुराने हैं. यह न सिर्फ बिस्तर में काम करता है बल्कि सोच को भी सकारात्मक कर देता है.

ये कहानियां या किताबें कल्पनाओं तक सीमित होती हैं और कल्पनाओं की कोई सीमा नहीं होती. इसलिए हम जो कुछ अपनी कल्पनाओं में कर सकते हैं या करते हैं वह हम हकीकत में करने की सोच भी नहीं सकते. इस किस्म की किताबों को पढ़ने से हमारी सोच में तब्दीलियां आएंगी. एक किस्म से यह व्यक्ति के अंदर मौजूद ऊर्जा को बढ़ाती हैं. यह सिर्फ शारीरिक तौरपर ही लाभदायक नहीं हैं. इससे रिश्ते भी मजबूत होते हैं और भविष्य बेहतर होने की संभावना बरकरार रहती है. कई चिकित्सकों का मानना है कि अगर हम ‘फोरप्ले’ शब्द को परिभाषित करते हैं तो यह एक बहुत बड़ा विषय है जिसका विवरण हम चंद शब्दों में नहीं दे सकते.

इसलिए अगर कहें कि किताबें पढ़ना एक तरह से फोरप्ले ही है तो गलत न होगा. वास्तव में यह आसानी से पुरुषों को उत्तेजित कर सकता है और सेक्स के दौरान उन तमाम घटनाओं को अपनी कल्पना में शामिल कर सकता है जो कि उसने पढ़ी थी.

सेक्सोलॉजिस्ट, मनोविद और विशेषज्ञ ही इन तमाम बातों से सहमत नहीं हैं. इन तमाम बाताें को अपने जीवन में इख्तियार करने वाले दंपति भी इससे सहमत हैं. कामुक कहानियां पढ़ने वाले या इस तरह के साहित्य को किसी भी फॉर्मेट में देखने, सुनने या पढ़ने वाले दंपति जब एक दूसरे को छूते हैं तो उनका स्पर्श इतना प्यार भरा होता है कि शब्दों में बयान करना नामुमकिन होता है. इससे उनका सारे दिन का तनाव भी खत्म हो जाता है और हर आने वाला दिन नई ऊर्जा से भरा होता है.

लेकिन कई ऐसे दंपति भी हैं जो इस बात से सहमत नहीं हैं. ऐसा नहीं है कि वह किताबें पढ़ने या तस्वीर देखने को उत्तेजक न मानते हों. वह इसके खिलाफ भी नहीं हैं. दरअसल कई महिलाओं को लगता है कि हमारे पास जितनी भी किताबें या साइट्स में कहानियां या फोटोग्राफ उपलब्ध हैं, वह कहीं न कहीं हर रूप में मेल ओरिएंटेड यानी पुरुषों को जहन में रखकर बनाई गई हैं.

इसलिए उसमें महिलाओं को उत्तेजित करने वाले तथ्य मौजूद नहीं होते. पुरुष ही इन किताबों को पढ़कर उत्तेजित होते हैं. उत्सुक होते हैं और इस वजह से बिस्तर में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं_ लेकिन इसमें महिलाओं को कोई खास मदद नहीं मिलती.

इसलिए कई दंपति ऐसे हैं जहां पुरुष इन किताबों को अकेला पढ़ता है. उनकी पत्नियां उनका इन किताबों को पढ़ने में साथ देने को, अपने वक्त को जाया करना मानती हैं. लेकिन किसी हद तक यह भी सच है कि महिलाएं भी इन किताबों का पूरा आनंद लेना चाहती हैं. एक दौर था जब महिलाएं कामुक किताबों को पढ़ना तो दूर उन्हें अपने घर पर रखने की इजाजत भी नहीं देती थीं. मगर आज यह गुजरे जमाने की बीती बातें हो चुकी हैं.

आज हम इन पौराणिक विचारधाराओं को अपने जीवन से कोसो दूर छोड़ चुके हैं. आज न सिर्फ पुरुष बल्कि महिलाएं भी इन तमाम विषयों में बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी दर्शाती हैं. कई अविवाहित नवयुवक अपनी शारीरिक मांग को इन किताबों के जरिए शांत करते हैं.

उनका मानना है कि यह शरीर को ठंडक पहुंचाती है. यह इतना प्रभावशाली होता है कि इन कामुक किताबों को पढ़ने के बाद कोई भी कठिन से कठिन उलझन भी आसानी से सुलझ जाती है. सेक्सोलॉजिस्टों के मुताबिक पोर्नोग्राफी वाकई शरीर को तृप्त करने का एक बेहतरीन साधन है. अगर हम देखें कि जितने भी साधन किताबों, नेट या फिर कहीं भी उपलब्ध होते हैं, उनमें जो तस्वीरें मौजूद होती हैं वह पुरुषों को ज्यादा आकर्षित करती हैं, जबकि लिखित मैटर महिलाओं की उत्तेजना को बढ़ाता है.

खैर! जो भी है, हकीकत यही है कि इसमें सेक्स की कोई समस्या नहीं होती. किसी किस्म का कोई दबाव नहीं होता, किसी खास की तलाश करने की भी कोई जरूरत नहीं होती. यह तो कल्पनाओं की उड़ान को ऊंचा और ऊंचा और भी ऊंचा ले जाती है. जहां कोई तनाव, समस्या, परेशानियां नहीं होतीं.

मेरा बेटा बहुत जिद्दी है, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरा 6 साल का बेटा है. पता नहीं क्यों वह दिनोंदिन जिद्दी होता जा रहा है. जो भी कहते हैं, उस का उलटा करता है. जबान चलाता है जबकि हम उस की हर बात मानते हैं. इस के बावजूद वह हर वक्त नाराज व खिंचाखिंचा सा रहता है. हमारी छोटी सी फैमिली है. हम पतिपत्नी और यह हमारा इकलौता बेटा. मुझे उस की बहुत चिंता हो रही है. इस कारण मैं तनाव में रहने लगी हूं. कुछ उपाय बताएं.

जवाब

आजकल न्यूक्लियर फैमिली होती है और अकसर पेरैंट्स को यह प्रौब्लम फेस करनी पड़ती है. खैर, समस्या है तो हल निकालना पड़ेगा. सब से पहले तो आप को यह जानने की कोशिश करनी पड़ेगी कि कहीं आप के बेटे के मन में कुछ परेशानी तो नहीं चल रही. कोई वजह जिस से वह खुश न हो लेकिन आप को शेयर नहीं कर पा रहा तो सब से पहले वह बात जानने की कोशिश आप को करनी पड़ेगी.

यदि ऐसी कोई बात नहीं है तो आप को उसे दूसरी तरह से हैंडल करना पड़ेगा. सब से पहले यदि आप चाहती हैं कि आप का बच्चा आप का और आप के फैसलों का सम्मान करे तो आप को भी उस का सम्मान करना होगा, वरना आप का बच्चा आप की अथौरिटी बिलकुल बरदाश्त नहीं करेगा. बेटे को आदेश न दे कर उसे सु?ाव और विकल्प दें और यह करते हुए धैर्य रखें, अपना आपा न खोएं.

बेटे के साथ किसी भी बात को ले कर जबरदस्ती न करें. बच्चों से जबरन कुछ करवाने से वे वही करने लगते हैं जिस के लिए उन्हें मना किया जाता है. यदि बेटा टीवी देखने में लगा हुआ है. आप खुद भी उस के साथ बैठ जाइए. उस के प्रोग्राम में अपनी दिलचस्पी दिखाएंगी तो वह आप के प्रति ज्यादा जवाबदेह बनता जाएगा. बेटे को महसूस कराएं कि आप उस से जुड़े हुए हैं. जबतब उसे गले लगाएं.

बेटा जब भी अपनी कोई बात कहे उसे ध्यान से सुनें. कुछ बच्चे जिन की मजबूत इच्छाशक्ति होती है उन की राय भी मजबूत होती है और वे कई बार बहस करने लगते हैं. अगर आप बेटे की बात पर गौर नहीं करेंगी तो वह ज्यादा जिद्दी हो जाएगा.

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बच्चे को अपनी मरजी करने दें. यदि वह अपनी मरजी के कपड़े पहनना चाहता है तो पहनने दें. हां, यदि आप को लगता है कि उस के द्वारा सलैक्ट किए गए कपड़े मौके के हिसाब से ठीक नहीं हैं तो आप उसे दोतीन औप्शन दे दीजिए, इस से वह कन्फ्यूज नहीं होगा और आसानी से फैसला कर पाएगा.

एक बात और, बेटे के जिद करने पर आप उस पर चिल्लाएंगी तो शायद वह भी पीछे नहीं रहेगा. हमेशा याद रखें कि बेटे को सम?ाने में आप को उस की मदद करनी है. इन सब बातों का ध्यान रखें, तनाव बिलकुल न लें. खुद भी खुश रहिए, बच्चे को भी खुश रखिए. घर का माहौल बच्चे पर बहुत प्रभाव डालता है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

झारखंड में पहली ट्रांसजेंडर को मिली सरकारी नौकरी

झारखंड ने 29 अगस्त को यादगार दिन बना दिया. इन दिनों झारखंड सुर्खियों में छाया हुआ है. झारखंड में पहली बार किसी ट्रांसजेंडर को सरकारी नौकरी मिली है. ये दिन ट्रांसजेंडरो के लिए यादगार बना. 29 अगस्त को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कम्युनिटी हेल्थ ओफिसर CHO के पद पर 365 पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र बांटा.

 

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इस कार्यक्रम का आयोजन झारखंड मंत्रालय में आयोजित किया गया था. इस दौरान सभी 365 लोगों को नियुक्ति पत्र सौंपा गया, इसमें पश्चिम सिंहभूम की रहने वाली आमिर महतो भी शामिल थी. आमिर महतो पहली ट्रांसजेंडर हैं, जिन्हें सीएचओ पद पर रखा गया. हालांकि, पड़ोसी राज्य बिहार, यूपी व अन्य राज्यों में ट्रांसजेंडरों की बहाली की जा चुकी है.

आमिर महतो का कहना है कि उनके मां चाहती थी कि वे नर्स बनें. वे नर्स भी बनीं और अपनी मां का सपना पूरा किया. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पटना एम्स में भी वह अपनी सेवा दे चुकी है, लेकिन परिवार के साथ रहने के लिए उन्होंने पटना एम्स में जौब छोड़ दी और झारखंड में बस गई. आमिर महतो ने रांची के रिम्स अस्पताल से बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई की. इसके बाद संबलपुर नर्सिंग कौलेज से एमएससी की पढ़ाई की है.

आमिर महतो ने कहा कि वह ट्रांसजेडर है. उन्हें इसे लेकर भगवान से कोई शिकायत नहीं है. इसके साथ ही सीएम सोरेन का धन्यवाद देते हुए आमिर ने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी नियुक्ति सीएचओ से होगी. उन्होंने कहा कि मुझे कालेज में पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हुई. कौलेज में सभी ने काफी सपोर्ट किया और मैं आगे भी पढ़ाई जारी रखूंगी.

जब सोफे से उठा ‘सिकंदर’ सलमान खान, हैल्थ को लेकर हुआ ट्रोल

बौलीवुड के ‘भाईजान’ कहे जाने वाले सलमान खान इन दिनों मीडिया की लाइमलाइट में आ गए हैं. ऐक्टर सलमान खान अपनी फिल्म ‘सिंकदर’ को लेकर सुर्खियों में हैं. सलमान खान अपनी ऐक्टिंग के लिए खासा जाने जाते हैं. वे अपनी ऐक्टिंग और ऐक्शन को ले कर अपने फैंस के बीच छाए रहते हैं.

पर हाल ही में ऐसा कुछ हुआ जो सलमान खान की ‘दबंग’ इमेज के एकदम उलट था. दरअसल, सलमान खान हाल ही में एक इवैंट में पहुंचे थे, जहां वे पूरी तरह से लाइमलाइट में थे. सलमान खान का यह वीडियो धड़ल्ले से वायरल हो रहा है. इस वीडियो को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. लेकिन यहां उन के साथ कुछ ऐसा हुआ कि वे ट्रोलर्स के निशाने पर आ गए हैं.

 

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एक वीडियो में सलमान खान 25 साल बाद फिल्म हीरोइन सोनाली बेंद्रे से मिलते हुए दिखाई दिए. इस वीडियो को देख कर फैंस खुश हो गए. लेकिन इस दौरान जब सोनाली उन के पास आई तो उन्हें सोफे से उठने में परेशानी होने लगी. वे सीट से एकदम से उठ नहीं पाएं, जिस के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें ‘लेजेंड बूढ़ा’ कहना शुरू कर दिया.

दरअसल, हाल ही में सलमान खान को कलाकार और कार्यकर्ता अमृता फडणवीस ने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए धन्यवाद किया और कहा कि उन्होंने दर्द के बावजूद अपना कमिटमैंट पूरा किया. वीडियो में सलमान अपनी पसलियों को दबाते और अपनी सीट से उठने के लिए स्ट्रगल करते हुए दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, इस के बावजूद वे इवैंट में फैंस के लिए डांस भी करते हुए नजर आए.

इस वीडियो को देख कर सलमान खान के फैंस रिऐक्शन देते हुए उन की हैल्थ की चिंता कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा कि सलमान खान को अपनी रिब की चोट पर ध्यान देना चाहिए. दूसरे यूजर ने लिखा कि हैल्थ से ज्यादा कुछ जरूरी नहीं है सलमान खान सर.

एक और यूजर ने लिखा कि सलमान खान को अपनी हैल्थ से ज्यादा जरूरी कुछ नहीं है. वहीं, जो फैंस उन की हैल्थ के बारे में जानते हैं, वर कह रहे हैं कि भाईजान बूढ़े हो रहे हैं. एक यूजर ने लिखा है कि हमारे बचपन के फेवरेट की उम्र बढ़ रही है और हमारी भी. यह एक रिमांडर है कि कुछ भी फोरएवर नहीं रहता है.

कंगना का किसान आंदोलन पर बयान, उठा तूफान

भारतीय जनता पार्टी की सांसद और फिल्म कलाकार कंगना राणावत के किसान आंदोलन पर दिए एक बयान ने देश में तूफान खड़ा कर दिया है. कंगना ने कहा कि पंजाब में किसान आंदोलन के नाम पर उपद्रव और हिंसा फैला रहे थे और वहां बलात्कार और हत्याएं हो रही थीं.

बिना किसी सुबूत के दिए इस बयान पर जैसा कि होना था, भाजपा ने कंगना के बयान से असहमति जताते हुए किनारा कर लिया और उन्हें भविष्य में ऐसे बयान न देने की हिदायत दी.

अखिल भारतीय किसान सभा ने कंगना राणावत के बयान की निंदा की और किसानों ने अदालत से दखलअंदाजी करने की गुजारिश की है.

कंगना राणावत के बयान ने किसान आंदोलन को ले कर विवाद खड़ा कर दिया है. किसान आंदोलन पिछले कई महीनों से जारी है और सरकार व किसानों के बीच बातचीत हो रही है. पर कंगना के बयान ने इस मुद्दे को और पेचीदा बना दिया है.

कंगना राणावत के बयान की निंदा करते हुए एआइकेएस ने कहा कि यह बयान किसानों के आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश है. किसानों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं और कंगना के बयान से उन्हें ठेस पहुंची है. वे कंगना के बयान के खिलाफ मामला दर्ज कराएंगे और अदालत से इंसाफ की मांग करेंगे.

कंगना राणावत के बयान से भाजपा भी मुश्किल में है. पार्टी ने कंगना से दूरी बना ली है और उन्हें भविष्य में ऐसे बयान न देने की हिदायत दी है.

इस पूरे मामले में एक बात साफ है कि किसान आंदोलन एक जटिल मुद्दा है और इस का समाधान निकालने के लिए सरकार व किसानों के बीच बातचीत जारी रहनी चाहिए.

कंगना राणावत के बयान से किसानों में भाजपा के प्रति नाराजगी है, जो आगामी चुनावों में पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकती है. साथ ही, विपक्षी दलों को भाजपा के खिलाफ हमला बोलने का मुद्दा दे दिया है, जिस से पार्टी की इमेज खराब हो सकती है और पार्टी के समर्थकों में निराशा बढ़ सकती है. वहीं, कंगना के बयान से किसान आंदोलन को बल मिल सकता है, जिस से केंद्र सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

यही नहीं, हरियाणा में कंगना राणावत के बयान से भाजपा को आगामी विधानसभा चुनावों में नुकसान हो सकता है खासकर किसान बहुल क्षेत्रों में. भाजपा के अंदरूनी मतभेद भी उभर सकते हैं.

इमेज पर असर

कंगना राणावत के बयान से उन की विवादित छवि और मजबूत हो सकती है, पर उन के प्रशंसकों में निराशा भी बढ़ सकती है. फिल्म उद्योग में उन के साथियों और निर्देशकों में नाराजगी बढ़ सकती है, जिस से उन के फिल्म कैरियर पर असर पड़ सकता है.

कंगना राणावत के बयान को मीडिया द्वारा काफी कवरेज दिया गया है, जिस से उन की छवि और खराब हो सकती है.

कंगना रनौत और भाजपा नेता

दरअसल, कंगना राणावत भाजपा की समर्थक हैं और अकसर पार्टी के समर्थन में बयान देती रहती हैं. भाजपा नेताओं ने कंगना के इस बयान को ले कर असहमति जताई है, जिस से लगता है कि यह बयान पार्टी के इशारे पर नहीं दिया गया है.

किसान आंदोलन एक संवेदनशील मुद्दा है और इस पर बयान देने से पहले किसी भी राजनीतिक दल या शख्स को सावधानी बरतनी चाहिए, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि कंगना के बयान भाजपा नेताओं के इशारे पर दिए गए हैं या नहीं, लेकिन यह जरूर है कि इस बयान से कंगना और भाजपा दोनों की छवि पर बुरा असर पड़ सकता है.

आरोपों की हकीकत

दरअसल, इस का मूल्यांकन करना मुश्किल है, क्योंकि यह एक जटिल और संवेदनशील मुद्दा है. सच है कि किसान आंदोलन एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक अधिकार है, जिस में किसान अपने अधिकारों और मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं.

किसान आंदोलन में शामिल ज्यादातर लोग शांतिपूर्ण और अहिंसक हैं और उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ने का पूरा हक है. किसान आंदोलन में कुछ उपद्रवी तत्त्व हो सकते हैं, लेकिन यह आंदोलन के उद्देश्य और मूल्यों को नहीं बदलता है.

कंगना राणावत के बयान में किसानों को ‘उपद्रवी’ और ‘हिंसक’ कहना गलत है, इसलिए कंगना राणावत के किसानों पर लगाए गए आरोपों को सही नहीं माना जा सकता है.

पहले भी किसानों पर हमला

एक समय कंगना राणावत ने किसान आंदोलन को ‘खालिस्तानी’ और ‘उपद्रवी’ कहा था, जिसे किसानों और उन के समर्थकों ने पूरी तरह से नकारा था. इस के बाद एक महिला ने कंगना को थप्पड़ मारा था, जिस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था.

यह घटना पंजाब में हुई थी, जहां किसान आंदोलन काफी मजबूत है. इस घटना के बाद कंगना ने माफी मांगने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वे अपने बयान पर कायम हैं.

नौजवानों की सैक्स पावर और नामर्दी

एक चीज ऐसी है, जो किसी भी नौजवान की मर्दानगी को ठेस पहुंचा सकती है और मनोवैज्ञानिक तौर पर उसे विनाशकारी बना सकती है, वह है उस की नामर्दी. भारत में इस की कोई सटीक जानकारी तो नहीं है, लेकिन एक अंदाज के मुताबिक 10 करोड़ लोग इस के शिकार हैं.

उम्रदराज मर्दों में सैक्स की मात्रा उन की उम्र के बजाय उन के लगाव और औरत साथी की उपलब्धता पर निर्भर करती है. नामर्दी की वजह मानसिक पाई गई है, लेकिन कई दूसरी वजहें भी हैं, जैसे कि मधुमेह, गुरदे की बीमारियां, दिल के दौरे, पुरानी न्यूरोलौजिकल बीमारियां वगैरह.

ऐसी हालत में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि नामर्दी ज्यादा उम्र की वजह से है या अंग तक ठीक मात्रा में खून न पहुंचने के चलते है.

सभी नामर्दों में से तकरीबन आधों में शारीरिक समस्याएं होती हैं, जो इस हालत के लिए पूरी तरह या आंशिक रूप से जिम्मेदार होती हैं.

कुछ में मानसिक और जैविक दोनों ही बातें नामर्दी के लिए जिम्मेदार होती हैं. जब कोई सैक्स को ले कर जोश में होता है, तब तंत्रिका आवेग उस के दिमाग से अंग तक जाता है. नतीजतन, न्यूरो ट्रांसमिटेड टेनस निकलता है, जो कि अंग के अंदर स्पंज टिशू में खून के बहाव को बढ़ा देता है, जिस से वह कठोर और सीधा हो जाता है.

सामान्य हालत के बजाय बड़ी अवस्था में खून का दौरा तकरीबन 7 गुना ज्यादा होता है. जरूरी तनाव के लिए खून के दौरे, तंत्रिका तंत्र फंक्शन और हार्मोन टैस्टोस्टेरोन की मात्रा का सही होना बहुत जरूरी है.

दिमागी तौर पर होने वाली नामर्दी की सब से बड़ी वजह साधारण तनाव व चिंता होती है. केवल कुछ मामलों में यह डिप्रैशन जैसी गंभीर दिमागी विकारों से जुड़ी हो सकती है.

आमतौर पर दिमागी नामर्दी ‘प्रदर्शन की चिंता’ के चलते पैदा होती है. यह एक ऐसी हालत होती है, जब कोई मर्द यह चाहता है कि उस के अंग में तनाव पैदा हो, लेकिन वह ऐसा कर पाने में खुद को नाकाम पाता है.

इस की शुरुआत उन मर्दों में होती है, जो कि शराब पीते हैं, ड्रग्स लेते हैं या फिर दिमागी दबाव से पीडि़त होते हैं. आमतौर पर ऐसे मर्द अपने पहले अनुभव को याद करते हैं और उस के बाद अपनी ताकत के बारे में शक पैदा कर लेते हैं.

कुछ मर्द जोश को बनाए रखने में कामयाब नहीं होते, क्योंकि उन की साथी ठीक तरह से साथ नहीं देती या उस का मन नहीं होता. कई घरेलू समस्याओं का जिक्र करने पर भी तनाव शांत हो जाता?है. ऐसी हालत में वह दूसरी औरत के साथ कामयाब सैक्स कर सकता है या हस्तमैथुन द्वारा संतुष्ट हो सकता है.

दूसरी ओर तकरीबन 50 फीसदी मामलों में नामर्दी की वजह जैविक हो सकती है. जैसे कि फेफड़े की बीमारी, लिवर, गुरदे, दिल और अंत:स्रावी गं्रथि की बीमारी. मधुमेह के रोगियों में 2 से 5 गुना ज्यादा नामर्दी की बीमारी पाई जाती है, जो नामर्दी की सब से बड़ी शारीरिक वजह है.

50 फीसदी मधुमेह के रोगी 50 साल की उम्र के बाद नामर्द हो जाते हैं. यह तंत्रिका तंत्र में कमी की वजह से होता है. इसे स्वतंत्र शिरा रोग कहते हैं या अवरोधक संवहनी रोग के चलते अंग में खून का दौरा कम हो जाता है.

हाई ब्लडप्रैशर को कंट्रोल करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं भी अंग में जोश की कमी की वजह हो सकती हैं. इसी तरह डिप्रैशन और दूसरी दिमागी विकारों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं सैक्स की ताकत को बाधित कर सकती हैं. एंटीऐलर्जिक दवाओं से भी नामर्दी हो सकती है.

एंटी अल्सर दवा कुछ लोगों की सैक्स की पावर को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि यह दवा पुरुष हार्मोन का उत्पादन कम कर देती हैं. क्रोनिक धूम्रपान करने वालों, शराबियों और दूसरी नशीली दवाओं से नशा करने वालों को भी अकसर नामर्दी घेर लेती है.

आमतौर पर मर्दों में हर रात सोने के दौरान कई बार अंग में तनाव पैदा होता है. इस समय सपने देखने की अवस्था होती है, जिसे रैपिड आई मूवमैंट कहा जाता है, लेकिन शारीरिक वजहों से नामर्द लोगों में इस समय या अंग में तनाव बिलकुल नहीं हो पाता या फिर बहुत कम होता है.

लेकिन ऐसा माना जाता है कि मानसिक रूप से नपुंसक लोगों में रेम स्लीप सामान्य होती है. इस हालत का पता लगाने के लिए निशाचर पेनाइल टैमिशेंस टैस्ट किया जाता है, जो कि एक मशीन के द्वारा किया जाता है.

लेकिन इस से भी आसान और कम खर्चीले उपाय भी उपलब्ध हैं. ऐसा ही एक उपाय है, डाक टैस्ट. इस टैस्ट में रात में अंग पर साधारण डाक टिकट लगा दी जाती हैं. अगर सुबह ये फटी हुई मिलें, तो यह माना जाता है कि रात में अंग में तनाव पैदा हुआ था.

एक दूसरे तरीके में उम्र में खून के दबाव और दौरे को माप कर धमनियों की जैविक बाधा की जांच की जा सकती है. यह टैस्ट आसानी से हो जाता है और अस्पतालों में आमतौर पर यही टैस्ट किया जाता है.

अगर अंग का खून का दाब बाजू के खून से दाब से कम होता है, तो अंग की खून की सप्लाई को दोषपूर्ण माना जाता है. तंत्रिका तंत्र की कमी को ठीक करने के लिए खून में टैस्टोस्टेरोन के लैवल को ठीक किया जाता है.

मुख्य उपचार मनोवैज्ञानिक इलाज में छिपा है. अकसर दोनों भागीदारों को सैक्स करने की सलाह दी जाती है. दोनों भागीदारों को नतीजे की चिंता छोड़ कर शारीरिक स्पर्श और एकदूसरे की खुशी पर ध्यान देने के लिए कहा जाता है.

सैक्स से पहले किया जाने वाला फोरप्ले नतीजे की चिंता को कम करता है. वर्तमान समय में हार्मोनल विकार का भी इलाज किया जा सकता है.

अंग की ओर जाने वाली धमनियों में किसी तरह की रुकावट के चलते अगर नामर्दी होती है, तो आपरेशन द्वारा रुकावट को दूर किया जाता है.

अंग में तनाव पैदा करने के लिए ऐसी दवाएं भी उपलब्ध हैं, जिन्हें इंजैक्शन द्वारा अंग के स्पंजी ऊतकों में इंजैक्ट कर दिया जाता है. इस के लिए अकसर इंसुलिन इंजैक्शन का इस्तेमाल किया जाता है.

एक बात जो कि दोनों भागीदारों को अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए, वह है कि अंग में तनाव का नाकाम होना जिंदगी का अंत नहीं है. एकदूसरे के हस्तमैथुन और मुखमैथुन द्वारा भी सैक्स का मजा ले सकते हैं.

इन दोनों ही प्रक्रियाओं में सैक्स तनाव की उतनी जरूरत नहीं होती, जितनी अंग में प्रवेश के लिए जरूरी होती?है. इस तरह से काफी हद तक सेहतमंद सैक्स का मजा ले सकते हैं.

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