तू रुक, तेरी तो: रुचि की अनकही कहानी

‘‘चटाक…’’

समर्थ ने आव देखा न ताव, रुचि के गालों पर  झन्नाटेदार तमाचा आज फिर रसीद कर दिया. तमाचा इतनी जोर का था कि वह बिलबिला उठी. आंखों से गंगायमुना बह निकली. वह गाल पकड़े जमीन पर जा बैठी.

समर्थ रुका नहीं, ‘‘तू रुक तेरी तो बैंड बजाता हूं अभी,’’ कहते हुए खाने की थाली जमीन पर दे मारी, फिर इधरउधर से लातें ही लातें जमा कर अपना पूरा सामर्थ्य दिखा गया.

5 साल का बेटा पुन्नू डर कर मां की गोद में जा छिपा.‘‘चल छोड़ उसे, बाहर चल,’’ समर्थ उसे घसीटे जा रहा था, ‘‘चल, नहीं तो तू भी खाएगा…’’ वह गुस्से से बावला हो रहा था.‘‘नई…नई… जाना आप के साथ, आप गंदे हो,’’

पुनीत चीखते हुए रो रहा था.‘‘ठीक है तो मर इस के साथ,’’ समर्थ ने  झटके से उसे छोड़ा तो वह गिरतेगिरते बचा. अपने आंसू पोंछता हुआ भाग कर वह मां के आंसू पोंछने लगा.

रुचि का होंठ कोने से फट गया था, खून रिस रहा था.‘‘मम्मा, खून… आप को तो बहुत चोट आई है. गंदे हैं पापा. आप को आज फिर मारा. मैं उन से बात भी नहीं करूंगा. आप पापा से बात क्यों करते हो, आप कभी बात मत करना,’’

वह आंसुओं के साथ उस का खून भी बाजुओं से साफ करने लगा, ‘‘मैं डब्बे से दवाई ले आता हूं,’’ कह कर वह दवा लेने भाग गया.रुचि मासूम बच्चे की बात पर सोच रही थी, ‘कैसे बात न करूं समर्थ से. घर है, तमाम बातें करनी जरूरी हो जाती हैं, वरना चाहती मैं भी कहां हूं ऐसे जंगली से बात करना.

2 घरों से हैं, 2 विचार तो हो ही सकते हैं, वाजिब तर्क दिया जा सकता है कोई है तो, पर इस में हिंसा कहां से आ जाती है बीच में. समर्थ को बता कर ही तो सब साफ कर के खाना तैयार कर दिया था समय पर. अम्माजी को आने में देर हो रही थी.

फोन भी नहीं उठा रही थीं. खाना तैयार नहीं होता, तो भी सब चिल्लाते.’‘‘अपने को गलत साबित होते देख नहीं पाते ये मर्द. बस, यही बात है,’’

अपनी सूजी आंखों के साथ जब अपने ये विचार अंजलि को बताए तो वह हंस पड़ी.‘‘यार देख, मन तो अपना भी यही करता है.

कोई अपनी बात नहीं मानता तो उसे अच्छे से पीटने का ही दिल करता है. पर हम औरतों के शरीर में मर्दों जैसी ताकत नहीं होती, वरना हम भी न चूकतीं, जब मरजी, धुन कर रख देतीं, अपनी बात हर कोई ऊपर रखना चाहता है.’’

‘‘तू तो हर बात को हंसी में उड़ा देना चाहती है. पर बता, कोई बात सहीगलत भी तो होती है.’’‘‘हां, होती तो जरूर है पर अपनेअपने नजरिए से.’’‘‘फिर वही बात. ऐसे तो गोडसे और लादेन भी अपने नजरिए से सही थे. पर क्या वे वाकई में सही कहे जा सकते हैं?’’

अंजली को सम झ नहीं आ रहा था, वह रुचि का ध्यान कैसे हटाए. आएदिन मासूम सी रुचि के साथ समर्थ की मारपीट की घटनाएं उसे कहीं अंदर तक  झिझिक झोड़ रही थीं, बेचारे नन्हे पुन्नू के दिलोदिमाग पर क्या असर होता होगा. सारी बातें सुनी उस ने, किचन से सटे पूजाघर में सुबह से बह रहे दूध, बताशे, गुड़, खीर, मिष्ठान के चढ़ावे की सुगंध आकर्षित लग रही थी.

मक्खियों, चीटियों की बरात से परेशान हो कर रुचि ने लाईजोल डालडाल कर किचन के साथसाथ पूजाघर को भी अच्छी तरह चमका डाला था. किचन के चारों कोनों में पंडित मुखानंद के बताए 5-5 बताशे रख कर दूध चढ़ाने के टोटके का आज भी पालन कर के अपने भाई के घर गई.

सास को लौटने में देर हो रही थी. चींटियों, मक्खियों के बीच रात का खाना बनाना मुश्किल हो रहा था. रुचि ने तंग आ कर सफाई का कदम उठाया था, क्या गलत किया उस ने. रुचि की कोई गलती आज भी उसे नहीं लगी. और फिर, गलती हो भी तो क्या कोई जानवरों की तरह सुलूक करता है भला? रोजरोज ऐसे बेसिरपैर के टोटके, पूजा, पाखंड उन का चलता ही रहता.

हैरानी तो यह कि बहुत मौडर्न बनने वाला समर्थ भी ये सब मानता है. पहले ही मना किया था रुचि से कि समर्थ कुछ ज्यादा ही जता रहा है अपने को, अच्छे से एक बार और सोच ले, फिर शादी कर.

पर मानी नहीं. पापा के सिर का बो झ जल्द से जल्द उतार कर उन्हें खुश देखना चाहती थी वह तो?‘‘तू भी न, गौ बनी हुई है, गौ के भी 2 सींगें, 4 लातें और लंबी दुम होती है, वक्त आने पर इस्तेमाल भी करती है. पर तू तो बिलकुल सुशील, संस्कारी अबला नारी बनी हुई है, बड़ेबड़े मैडल मिलेंगे तु झे क्या?

इतनी ज्यादती सहती क्यों है? डिपैंडैंट है इसलिए…’’ इतनी पढ़ीलिखी है, बोला था जौब कर ले. पर नहीं, पतिपरमेश्वर नहीं मानते. अरे, मानेंगे कैसे भला, फुलटाइम की दासी जो छिन जाएगी,’’ उस ने चिढ़ते हुए उस की ही बात कही. अंजलि का घर रुचि से कुछ ही दूर था.

बचपन से कालेज तक साथ पढ़ी अंजलि अपनी शादी के 2 महीने बाद ही पति के हादसे में हुई मौत के बाद वापस आ कर उसी स्कूल में पढ़ाने लगी थी. पड़ोस के ब्लौक में ही रुचि की शादी हुई थी तो अकसर अंजलि लौटते समय रुचि से मिलने आ जाया करती.

खूबसूरत रुचि को स्मार्ट समर्थ ने अपने को खुलेदिमाग का जता, उस के पिता हरिभजन के आगे अपने को चरित्रवान बताया, महात्मा गांधी, विवेकानंद आदि पर अपना पुस्तक संग्रह दिखा कर अच्छे होने का प्रमाण देदे कर, उस से शादी तो कर ली पर शादी के बाद ही उस की 18वीं सदी की मानसिकता सामने आ गई.

खुलेदिमाग की हर तरह की सफाईपसंद रुचि जाहिलों में फंस कर रह गई. पिता के संस्कार थे, ‘बड़ों  की आज्ञा का पालन करना है सदैव, अवज्ञा कभी नहीं,’ सो, किए जा रही थी. मां तो थी नहीं. पर नेकी, ईमानदरी, सत्य पर चलने वाले पिता ने अच्छे संस्कार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी. पर यहां उन बातों की न इज्जत है न जरूरत.

अब रुचि को कौन सम झाए, उस ने तो पिता की बातें गांठ बांध अंतस में बिठा ली हैं. बात वही है, ‘सबकुछ सीखा हम ने, न सीखी होशियारी.’ क्या करूं इस लड़की का? रोज ही मार खाए जा रही है. पर पिता से बताती भी नहीं कि वे आघात सह नहीं पाएंगे. लेदे के वही तो हैं उस के परिवार में.पुन्नू घर पर होता तो वे रोतेरोते अपनी मासूम जबां से मम्मा के साथ घटी पूरी हिंसा का ब्योरा अंजलि मौसी को देने की कोशिश करता.

‘कैसे दादी, बूआ, चाचू सभी पापा की साइड लेते हैं. कोई मम्मा को बचाने नहीं आता. कहते हैं, और मारो और मारो.’ अंजलि सोचती, वे बचाने क्या आएंगे, सभी एक थाली के चट्टेबट्टे हैं. जंगली गंवई हूश. छोटे से बच्चे में दिनबदिन कितना आक्रोश भरता जा रहा है, अंजलि देख रही थी.

इतनी नफरत, इतना गुस्सा उस अबोध के व्यक्तित्व को बरबाद किए जा रहा है. पर करती भी क्या? रुचि तो हठ किए बैठी थी कि उस की मूक सेवाकभी तो रंग लाएगी, एक दिन प्रकृति सब ठीक करेगी. अब तो पुन्नू भी पापा, चाचू के जैसे चीजें तोड़नेफेंकने लगा है.

गुस्सा होता तो घरवालों की तरह चीखता है. खाना उठा कर जमीन पर दे मारता, तो रुचि थप्पड़ रसीद करती. तो रुचि को ही डांट पड़ने लगती. उसे तुरंत साफ करने के लिए आदेश हो जाता. घर के लोग शह भी देते उसे. कितनी बार देखासुना है उन्हें कहते हुए, ‘लड़का है, लड़की थोड़ी ही है. मर्द है वह क्यों करेगा भला.

बहू, चल साफ कर जल्दी से, मुखानंद महाराज आते ही होंगे, इस की कुंडली का वार्षिक फल विचार कर के. आजा मेरे लाल, तू तो हमारे घर का वारिस है. तेरा कोई कुछ भी नहीं बिगड़ेगा. तु झे तो, मिनिस्टर बनना है.

आज वे तेरे और तेरे पापा समर्थ के लिए असरदार टोटका बताने वाले हैं. नई तावीज भी लाएंगे तेरे लिए.’उस दिन अंजलि स्कूल से लौटी तो रुचि के घर के आगे ऐंबुलैंस खड़ी देख कर माथा ठनका, किस को क्या हो गया? उस ने पांव तेजी से बढ़ाए, पास पहुंची तो देखा लोग रुचि को स्ट्रैचर पर डाले ऐंबुलैंस से निकाल कर घर में ले जा रहे हैं. रुचि बेसुध थी.

खून से लथपथ सिर फट गया था, खून बह कर माथेचेहरेगरदन, कपड़ों पर जम चुका था. कुछ अभी भी सिर से बहे जा रहा था. पड़ोसियों ने बताया, ‘घर मैं काफी देर तक आएदिन की तरह चीखपुकार होती रही थी. 2 घंटे से रुचि यों ही पड़ी रही.

तब जा कर ऐंबुलैंस ले आने का इन्हें होश आया. तब तक देर हो चुकी थी. रुचि ने ऐंबुलैंस में जाते ही दम तोड़ दिया.’रुचि के पिता हरिभजन को किसी भले मानस ने खबर दे दी थी. वह ही उन्हें थाम कर रुचि के अंतिम दर्शन करवाने ले आया था.

वे रुचि के खून सने सिर पर हाथ रख कर बिलख उठे. पुन्नू को लिपटा कर फूटफूट कर रो पड़े थे. हादसे से अवाक अंजलि के रुंधे गले से शब्द ही नहीं निकल रहे थे. अंकल को क्या और कैसे ढाढ़स बंधाए. उस को देखते ही रुचि के पिता विलाप करते हुए बोल पड़े, ‘‘बेटी, इतना सब हो रहा था उस के साथ, तू ने कुछ बताया क्यों नहीं कभी.

न उस ने कभी कोई भनक लगने दी. लकवे के कारण एक पैर से लाचार मु झे यह कह कर कि ‘ससुराल में यहां पूजा, पंडित, शकुन, अपशकुन बहुत मानते विचार करते हैं, घर नहीं आने देती थी मु झे. खुद ही पुन्नू को ले कर हफ्ते में एकदो बार आ जाती थी. तू तो उस की पक्की सहेली थी.

तु झ से पूछता तो तू कहती बिलकुल ठीक है, आप उस की चिंता मत कीजिए. अब बता, ठीक है? चली गई मेरी रुचि. ‘वे अंजलि को, तो कभी रुचि के शव को पकड़ कर लगातार हिचकियों से रोए जा रहे थे.उन का कं्रदन सुन अंजलि का दिल टूकटूक हुआ जा रहा था.

अपनी आंखों के सैलाब को किसी तरह रोकते हुए वह बोली, ‘‘अंकल, संभालिए अपने को, आप की तबीयत पहले ही ठीक नहीं. इसी से रुचि ने कसम दे रखी थी आप से कुछ न कहूं. मैं क्या करती अंकल.

यहां आप की अच्छी सीख ने उसे बांधे रखा, जिन का इन जाहिलों के यहां कोई मोल नहीं था,’’ पुन्नू अंजलि को देखते ही उस से लिपट गया.‘‘अंजलि मौसी, इन सब ने मिल कर मेरी मम्मा को मारा. पापा ने दीवार पर मम्मा का सिर दे मारा था.

वे गिर पड़ीं. मम्मा तभी से मु झ से बोली नहीं बिलकुल भी. दादी ने पापा, चाचू को भगा दिया. अब  झूठ कह रही हैं कि मम्मा सीढ़ी से गिर पड़ी,’’ वह रुचि से लिपट कर जोरजोर से रोने लगा. ‘‘उठो न मम्मा, अपने पुन्नू से बोलो न. मैं छोड़ूंगा नहीं किसी को. बड़ा हो कर बैंड बजा दूंगा इन सब की,’’ वह समर्थ से सीखे हुए शब्दों को दोहराने लगा.

रोजरोज की चीखनेचिल्लाने व मारपीट की आवाजों से तंग आ कर आज किसी पड़ोसी ने 100 नंबर डायल कर दिया था. पुलिस आ गई. नन्हे पुन्नू के बयान पर तफ्तीश हुई.

2 दिन के अंदर पुलिस ने समर्थ और उस के भाई को धरदबोचा. उन्हें जेल हो गई. नन्हा पुनीत किस के पास रहता, समस्या थी. क्योंकि पुन्नू अपनी दादी, बूआ के पास रहने को बिलकुल तैयार न था. अंजलि उसे यह कह कर अपने साथ ले गई.

‘‘अंकल, आज के दौर में सज्जनता, सिधाई, संस्कारों का मोल सम झने वाले बहुत कम हैं. दुनिया के हिसाब से अपने को तैयार करना चाहिए और सामने आई चुनौतियों को सिधाई से नहीं, चतुराई से निबटना चाहिए. सिधाई से अकसर आज की दुनिया मूर्ख बनाती है, दबाती है, अपना उल्लू सीधा करती है.

जो, रुचि  झेलती रही. कितना सम झाया था उसे. अंकल, पुन्नू चाहे कहीं भी रहे मैं उस को दूसरा समर्थ कभी नहीं बनने दूंगी. आप निश्चित रहें अंकल. शादी के 2 महीने बाद ही दुर्घटना में पति प्रशांत की मौत के बाद निरुद्देश्य बंजर से मेरे जीवन को पुनीत के रूप में एक नया लक्ष्य मिल गया है.

अब आप भी मु झे अपनी रुचि ही सम िझए अंकल. मैं इसे ले कर आप से मिलने उसी के जैसे आती रहूंगी.’’ रुचि के पिता हरिभजन के कांपते बूढ़े हाथ अंजलि के सिर पर जा रुके थे. उन से कुछ बोलते न बना, केवल आंसू आंखों से बहे चले जा रहे थे. अंजलि भीगे मन से उन्हें पोंछने लगी.

पुन्नू ने दोनों हाथों से नाना और अंजलि मौसी को कस कर पकड़ लिया और आंखें मीचे वह गालों पर ढुलकते आंसुओं में अपनी मम्मा का एहसास ढूंढ़ रहा था.‘‘मम्मा…’’ उस की हिचकियों के साथ निकलता बारबार वह एक शब्द सभी के हृदय को बींध रहा था.

अनुगामिनी: क्यों पति को माफ करना चाहती थी सरिता ?

जि लाधीश राहुल की कार झांसी शहर की गलियों को पार करते हुए शहर के बाहर एक पुराने मंदिर के पास जा कर रुक गई. जिलाधीश की मां कार से उतर कर मंदिर की सीढि़यां चढ़ने लगीं.

‘‘मां, तेरा सुहाग बना रहे,’’ पहली सीढ़ी पर बैठे हुए भिखारी ने कहा.

सरिता की आंखों में आंसू आ गए. उस ने 1 रुपए का सिक्का उस के कटोरे में डाला और सोचने लगी, कहां होगा सदाशिव?

सरिता को 15 साल पहले की अपनी जिंदगी का वह सब से कलुषित दिन याद आ गया जब दोनों बच्चे राशि व राहुल 8वीं9वीं में पढ़ते थे और वह खुद एक निजी स्कूल में पढ़ाती थी. पति सदाशिव एक फैक्टरी में भंडार प्रभारी थे. सबकुछ ठीकठाक चल रहा था. एक दिन वह स्कूल से घर आई तो बच्चे उदास बैठे थे.

‘क्या हुआ बेटा?’

‘मां, पिताजी अभी तक नहीं आए.’

सरिता ने बच्चों को ढाढ़स बंधाया कि पिताजी किसी जरूरी काम की वजह से रुक गए होंगे. जब एकडेढ़ घंटा गुजर गया और सदाशिव नहीं आए तो उस ने राशि को घनश्याम अंकल के घर पता करने भेजा. घनश्याम सदाशिव की फैक्टरी में ही काम करते थे.

कुछ समय बाद राशि वापस आई तो उस का चेहरा उतरा हुआ था. उस ने आते ही कहा, ‘मां, पिताजी को आज चोरी के अपराध में फैक्टरी से निकाल दिया गया है.’

‘यह सच नहीं हो सकता. तुम्हारे पिता को फंसाया गया है.’

‘घनश्याम चाचा भी यही कह रहे थे. परंतु पिताजी घर क्यों नहीं आए?’ राशि ने कहा.

रात भर पूरा परिवार जागता रहा. दूसरे दिन बच्चों को स्कूल भेजने के बाद सरिता सदाशिव की फैक्टरी पहुंची तो उसे हर जगह अपमान का घूंट ही पीना पड़ा. वहां जा कर सिर्फ इतना पता चल सका कि भंडार से काफी सामान गायब पाया गया है. भंडार प्रभारी होने के नाते सदाशिव को दोषी करार दिया गया और उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया.

सरिता घर आ कर सदाशिव का इंतजार करने लगी. दिन भर इंतजार के बाद उस ने शाम को पुलिस में रिपोर्र्ट लिखवा दी.

अगले दिन पुलिस तफतीश के लिए घर आई तो पूरे महल्ले में खबर फैल गई कि सदाशिव फैक्टरी से चोरी कर के भाग गया है और पुलिस उसे ढूंढ़ रही है. इस खबर के बाद तो पूरा परिवार आतेजाते लोगों के हास्य का पात्र बन कर रह गया.

सरिता ने सारे रिश्तेदारों को पत्र भेजा कि सदाशिव के बारे में कोई जानकारी हो तो तुरंत सूचित करें. अखबार में फोटो के साथ विज्ञापन भी निकलवा दिया.

इस मुसीबत ने राहुल और राशि को समय से पहले ही वयस्क बना दिया था. वह अब आपस में बिलकुल नहीं लड़ते थे. दोनों ने स्कूल के प्राचार्य से अपनी परिस्थितियों के बारे में बात की तो उन्होंने उन की फीस माफ कर दी.

राशि ने शाम को बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया. राहुल ने स्कूल जाने से पहले अखबार बांटने शुरू कर दिए. सरिता की तनख्वाह और बच्चों की इस छोटी सी कमाई से घर का खर्च किसी तरह से चलने लगा.

इनसान के मन में जब किसी वस्तु या व्यक्ति विशेष को पाने की आकांक्षा बहुत बढ़ जाती है तब उस का मन कमजोर हो जाता है और इसी कमजोरी का लाभ दूसरे लोग उठा लेते हैं.

सरिता इसी कमजोरी में तांत्रिकों के चक्कर में पड़ गई थी. उन की बताई हुई पूजा के लिए कुछ गहने भी बेच डाले. अंत में एक दिन राशि ने मां को समझाया तब सरिता ने तांत्रिकों से मिलना बंद किया.

कुछ माह के बाद ही सरिता अचानक बीमार पड़ गई. अस्पताल जाने पर पता चला कि उसे टायफाइड हुआ है. बताया डाक्टरों ने कि इलाज लंबा चलेगा. यह राशि और राहुल की परीक्षा की घड़ी थी.

ट्यूशन पढ़ाने के साथसाथ राशि लिफाफा बनाने का काम भी करने लगी. उधर राहुल ने अखबार बांटने के अलावा बरात में सिर पर ट्यूबलाइट ले कर चलने वाले लड़कों के साथ भी मजदूरी की. सिनेमा की टिकटें भी ब्लैक में बेचीं. दोनों के कमाए ये सारे पैसे मां की दवाई के काम आए.

‘तुम्हें यह सब करते हुए गलत नहीं लगा?’ सरिता ने ठीक होने पर दोनों बच्चों से पूछा.

‘नहीं मां, बल्कि मुझे जिंदगी का एक नया नजरिया मिला,’ राहुल बोला, ‘मैं ने देखा कि मेरे जैसे कई लोग आंखों में भविष्य का सपना लिए परिस्थितियों से संघर्ष कर रहे हैं.’

दोनों बच्चों को वार्षिक परीक्षा में स्कूल में प्रथम आने पर अगले साल से छात्रवृत्ति मिलने लगी थी. घर थोड़ा सुचारु रूप से चलने लगा था.

सरिता को विश्वास था कि एक दिन सदाशिव जरूर आएगा. हर शाम वह अपने पति के इंतजार में खिड़की के पास बैठ कर आनेजाने वालों को देखा करती और अंधेरा होने पर एक ठंडी सांस छोड़ कर खाना बनाना शुरू करती.

इस तरह साल दर साल गुजरते चले गए. राशि और राहुल अपनी मेहनत से अच्छी नौकरी पर लग गए. राशि मुंबई में नौकरी करने लगी है. उस की शादी को 3 साल गुजर गए. राहुल भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में उत्तीर्ण हो कर झांसी में जिलाधीश बन गया. 1 साल पहले उस ने भी अपने दफ्तर की एक अधिकारी सीमा से शादी कर ली.

सरिता की तंद्रा भंग हुई. वह वर्तमान में वापस आ गई. उस ने देखा कि बाहर काफी अंधेरा हो गया है. हमेशा की तरह उस ने सदाशिव के लिए प्रार्थना की और घर के लिए रवाना हो गई.

‘‘मां, बहुत देर कर दी,’’ राहुल ने कहा.

सरिता ने राहुल और सीमा को देखा और उन का आशय समझ कर चुपचाप खाना खाने लगी.

‘‘बेटा, यहां से कुछ लोग जयपुर जा रहे हैं. एक पूरी बस कर ली है. सोचती हूं कि मैं भी उन के साथ हो आऊं.’’

‘‘मां, अब आप एक जिलाधीश की भी मां हो. क्या आप का उन के साथ इस तरह जाना ठीक रहेगा?’’ सीमा ने कहा.

सरिता ने सीमा से बहस करने के बजाय, प्रश्न भरी नजरों से राहुल की ओर देखा.

‘‘मां, सीमा ठीक कहती है. अगले माह हम सब कार से अजमेर और फिर जयपुर जाएंगे. रास्ते में मथुरा पड़ता है, वहां भी घूम लेंगे.’’

अगले महीने वे लोग भ्रमण के लिए निकल पड़े. राहुल की कार ने मथुरा में प्रवेश किया. मथुरा के जिलाधीश ने उन के ठहरने का पूरा इंतजाम कर के रखा था. खाना खाने के बाद सब लोग दिल्ली के लिए रवाना हो गए. थोड़ी दूर चलने पर कार को रोकना पड़ा क्योंकि सामने से एक जुलूस आ रहा था.

‘‘इस देश में लोगों के पास बहुत समय है. किसी भी छोटी सी बात पर आंदोलन शुरू हो जाता है या फिर जुलूस निकल जाता है,’’ सीमा ने कहा.

राहुल हंस दिया.

सरिता खिड़की के बाहर आतेजाते लोगों को देखने लगी. उस की नजर सड़क के किनारे चाय पीते हुए एक आदमी पर पड़ गई. उसे लगा जैसे उस की सांस रुक गई हो.

वही तो है. सरिता ने अपने मन से खुद ही सवाल किया. वही टेढ़ी गरदन कर के चाय पीना…वही जोर से चुस्की लेना…सरिता ने कई बार सदाशिव को इस बात पर डांटा भी था कि सभ्य इनसानों की तरह चाय पिया करो.

चाय पीतेपीते उस व्यक्ति की निगाह भी कार की खिड़की पर पड़ी. शायद उसे एहसास हुआ कि कार में बैठी महिला उसे घूर रही है. सरिता को देख कर उस के हाथ से प्याली छूट गई. वह उठा और भीड़ में गायब हो गया.

उसी समय जुलूस आगे बढ़ गया और कार पूरी रफ्तार से दिल्ली की ओर दौड़ पड़ी. सरिता अचानक सदाशिव की इस हरकत से हतप्रभ सी रह गई और कुछ बोल भी नहीं पाई.

दिल्ली में वे लोग राहुल के एक मित्र के घर पर रुके.

रात को सरिता ने राहुल से कहा, ‘‘बेटा, मैं जयपुर नहीं जाना चाहती.’’

‘‘क्यों, मां?’’ राहुल ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘क्या मेरा जयपुर जाना बहुत जरूरी है?’’

‘‘हम आप के लिए ही आए हैं. आप की इच्छा जयपुर जाने की थी. अब क्या हुआ? आप क्या झांसी वापस जाना चाहती हैं.’’

‘‘झांसी नहीं, मैं मथुरा जाना चाहती हूं.’’

‘‘मथुरा क्यों?’’

‘‘मुझे लगता है कि जुलूस वाले स्थान पर मैं ने तेरे पिताजी को देखा है.’’

‘‘क्या कर रहे थे वह वहां पर?’’ राहुल ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘मैं ने उन्हें सड़क के किनारे बैठे देखा था. मुझे देख कर वह भीड़ में गायब हो गए,’’ सरिता ने कहा.

‘‘मां, यह आप की आंखों का धोखा है. यदि यह सच भी है तो भी मुझे उन से नफरत है. उन के कारण ही मेरा बचपन बरबाद हो गया.’’

‘‘मैं जयपुर नहीं मथुरा जाना चाहती हूं. मैं तुम्हारे पिताजी से मिलना चाहती हूं.’’

‘‘मां, मैं आप के मन को दुखाना नहीं चाहता पर आप उस आदमी को मेरा पिता मत कहो. रही मथुरा जाने की बात तो हम जयपुर का मन बना कर निकले हैं. लौटते समय आप मथुरा रुक जाना.’’

सरिता कुछ नहीं बोली.

सदाशिव अपनी कोठरी में लेटे हुए पुराने दिनों को याद कर रहा था.

3 दिन पहले कार में सरिता थी या कोई और? यह प्रश्न उस के मन में बारबार आता था. और दूसरे लोग कौन थे?

आखिर उस की क्या गलती थी जो उसे अपनी पत्नी और बच्चों को छोड़ कर एक गुमनाम जिंदगी जीने पर मजबूर होना पड़ा. बस, इतना ही न कि वह इस सच को साबित नहीं कर सका कि चोरी उस ने नहीं की थी. वह मन से एक कमजोर इनसान है, तभी तो बीवी व बच्चों को उन के हाल पर छोड़ कर भाग खड़ा हुआ था. अब क्या रखा है इस जिंदगी में?

खट् खट् खट्, किसी के दरवाजा खटखटाने की आवाज आई.

सदाशिव ने उठ कर दरवाजा खोला. सामने सरिता खड़ी थी. कुछ देर दोनों एक दूसरे को चुपचाप देखते रहे.

‘‘अंदर आने को नहीं कहोगे? बड़ी मुश्किलों से ढूंढ़ते हुए यहां तक पहुंच सकी हूं,’’ सरिता ने कहा.

‘‘आओ,’’ सरिता को अंदर कर के सदाशिव ने दरवाजा बंद कर दिया.

सरिता ने देखा कि कोठरी में एक चारपाई पर बिस्तर बिछा है. चादर फट चुकी है और गंदी है. एक रस्सी पर तौलिया, पाजामा और कमीज टंगी है. एक कोने में पानी का घड़ा और बालटी है. दूसरे कोने में एक स्टोव और कुछ खाने के बरतन रखे हैं.

सरिता चारपाई पर बैठ गई.

‘‘कैसे हो?’’ धीरे से पूछा.

‘‘कैसा लगता हूं तुम्हें?’’ उदास स्वर में सदाशिव ने कहा.

सरिता कुछ न बोली.

‘‘क्या करते हो?’’ थोड़ी देर के बाद सरिता ने पूछा.

‘‘इस शरीर को जिंदा रखने के लिए दो रोटियां चाहिए. वह कुछ भी करने से मिल जाती हैं. वैसे नुक्कड़ पर एक चाय की दुकान है. मुझे तो कुछ नहीं चाहिए. हां, 4 बच्चों की पढ़ाई का खर्च निकल आता है.’’

‘‘बच्चे?’’ सरिता के स्वर में आश्चर्य था.

‘‘हां, अनाथ बच्चे हैं,’’ उन की पढ़ाई की जिम्मेदारी मैं ने ले रखी है. सोचता हूं कि अपने बच्चों की पढ़ाई में कोई योगदान नहीं कर पाया तो इन अनाथ बच्चों की मदद कर दूं.’’

‘‘घर से निकल कर सीधे…’’ सरिता पूछतेपूछते रुक गई.

‘‘नहीं, मैं कई जगह घूमा. कई बार घर आने का फैसला भी किया पर जो दाग मैं दे कर आया था उस की याद ने हर बार कदम रोक लिए. रोज तुम्हें और बच्चों को याद करता रहा. शायद इस से ज्यादा कुछ कर भी नहीं सकता था. पिछले 5 सालों से मथुरा में हूं.’’

‘‘अब तो घर चल सकते हो. राशि अब मुंबई में है. नौकरी करती है. वहीं शादी कर ली है. राहुल झांसी में जिलाधीश है. मुझे सिर्फ तुम्हारी कमी है. क्या तुम मेरे साथ चल कर मेरी जिंदगी की कमी पूरी करोगे?’’ कहतेकहते सरिता की आंखों में आंसू आ गए.

सदाशिव ने सरिता को उठा कर गले से लगा लिया और बोला, ‘‘मैं ने तुम्हें बहुत दुख दिया है. यदि तुम्हारे साथ जा कर मेरे रहने से तुम खुश रह सकती हो तो मैं तैयार हूं. पर क्या इतने दिनों बाद राहुल मुझे पिता के रूप में स्वीकार करेगा? मेरे जाने से उस के सुखी जीवन में कलह तो पैदा नहीं होगी? क्या मैं अपना स्वाभिमान बचा सकूंगा?’’

‘‘तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम से दूर रहूं,’’ सरिता ने रो कर कहा और सदाशिव के सीने में सिर छिपा लिया.

‘‘नहीं, मैं चाहता हूं कि तुम झांसी जाओ और वहां ठंडे दिल से सोच कर फैसला करो. तुम्हारा निर्णय मुझे स्वीकार्य होगा. मैं तुम्हारा यहीं इंतजार करूंगा.’’

सरिता उसी दिन झांसी वापस आ गई. शाम को जब राहुल और सीमा साथ बैठे थे तो उन्हें सारी बात बताते हुए बोली, ‘‘मैं अब अपने पति के साथ रहना चाहती हूं. तुम लोग क्या चाहते हो?’’

‘‘एक चाय वाला और जिलाधीश साहब का पिता? लोग क्या कहेंगे?’’ सीमा के स्वर में व्यंग्य था.

‘‘बहू, किसी आदमी को उस की दौलत या ओहदे से मत नापो. यह सब आनीजानी है.’’

‘‘मां, वह कमजोर आदमी मेरा…’’

‘‘बस, बहुत हो गया, राहुल,’’ सरिता बेटे की बात बीच में ही काटते हुए उत्तेजित स्वर में बोली.

राहुल चुप हो गया.

‘‘मैं अपने पति के बारे में कुछ भी गलत सुनना नहीं चाहती. क्या तुम लोगों से अलग हो कर वह सुख से रहे? उन के प्यार और त्याग को तुम कभी नहीं समझ सकोगे.’’

‘‘मां, हम आप की खुशी के लिए उन्हें स्वीकार सकते हैं. आप जा कर उन्हें ले आइए,’’ राहुल ने कहा.

‘‘नहीं, बेटा, मैं अपने पति की अनुगामिनी हूं. मैं ऐसी जगह न तो खुद रहूंगी और न अपने पति को रहने दूंगी जहां उन को अपना स्वाभिमान खोना पड़े.’’

सरिता रात को सोतेसोते उठ गई. पैर के पास गीलागीला क्या है? देखा तो सीमा उस का पैर पकड़ कर रो रही थी.

‘‘मां, मुझे माफ कर दीजिए. मैं ने आप का कई बार दिल दुखाया है. आज आप ने मेरी आंखें खोल दीं. मुझे आशीर्वाद दीजिए कि मैं भी आप के समान अपने पति के स्वाभिमान की रक्षा कर सकूं.’’

सरिता ने भीगी आंखों से सीमा का माथा चूमा और उस के सिर पर हाथ फेरा.

‘‘मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा.’’

भोर की पहली किरण फूट पड़ी. जिलाधीश के बंगले में सन्नाटा था. सरिता एक झोले में दो जोड़े कपड़े ले कर रिकशे पर बैठ कर स्टेशन की ओर चल दी. उसे मथुरा के लिए पहली ट्रेन पकड़नी थी.

मिन्नी के पापा: क्या थी मिन्नी की कहानी ?

‘‘मेरे पापा कहां हैं मां?’’ अचानक यह सवाल सुन कर शांति हैरान रह गई, तभी मिन्नी ने फिर अपना सवाल दोहरा दिया, ‘‘मेरे पापा कहां हैं?’’

घबराई शांति ने बेटी को गोद में उठा कर चूम लिया, ‘‘तुम्हारे पापा विदेश गए हैं,’’ कहते हुए शांति का गला भर आया, आंखें भीग गईं.

‘‘विदेश क्या होता है मां?’’ मिन्नी ने छोटा सा सवाल कर दिया, तो शांति के दिल की धड़कनें तेज हो गईं. उस ने मिन्नी को कस कर भींच लिया और भारी मन से जवाब दिया, ‘‘विदेश मतलब बहुत दूर. वहां से तुम्हारे पापा तुम्हारे लिए ढेर सारे अच्छेअच्छे खिलौने लाएंगे.’’

‘‘और फ्रौक भी?’’

‘‘हां बेटी, हां… सबकुछ. अब सो जाओ,’’ शांति की आंखें छलछला आईं. ‘‘अब बताऊंगी सीमा और चुन्नू को. कहते थे कि तुम्हारे पापा तुम को छोड़ कर भाग गए हैं,’’ मिन्नी हंसते हुए बोली. शांति चौंक उठी, ‘‘क्या कहा… मिन्नी, वे सब गंदे बच्चे हैं. उन के साथ मत खेला करो. तुम्हारे पापा अब इस दुनिया में नहीं हैं. नहींनहीं… मेरा मतलब है…’’ वह हड़बड़ा गई. मिन्नी कुछ न समझ सकी. बेटी ने दिल के जख्म कुरेद दिए थे. शांति उस को गोदी में चिपकाए देर रात तक रोती रही. जब से सुरजन गुम हुआ था, शांति पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था. एक बेसहारा जिंदगी, वह भी एक औरत की. गुजरबसर करने के लिए उसे कई घरों में काम करना पड़ता. पड़ोस के बच्चे अच्छेअच्छे कपड़ों में स्कूल जाते, तो मिन्नी भी जिद करती. मां की मजबूरियों से बेखबर वह कहती, ‘‘तुम बहुत कंजूस हो मां, मुझे भी मीरा की तरह कपड़े ला दो, मैं भी जाऊंगी स्कूल.’’ ‘‘हां, ला देंगे बेटी,’’ कह कर शांति अपनी बेबसी पर आंसू बहा देती.

मिन्नी न जाने कितने सवाल करती, पर शांति कोई झूठा सा बहाना बना कर टाल देती. अब उस का बरताव भी कुछ चिढ़चिढ़ा सा होता जा रहा था. वह कभीकभी मिन्नी की पिटाई भी कर देती. पछतावा भी होता, रो भी लेती. वह जिंदगी से ऊब चुकी थी, लेकिन फिर भी जीना था मिन्नी की खातिर.

समय गुजरता गया. मिन्नी 5 साल की हो गई. सुरजन को गए हुए भी 5 साल हो गए थे. ‘आज शादी की सालगिरह है,’ सोच कर शांति उदास हो गई. आज के दिन ही तो शांति की जिंदगी में वह हादसा हुआ था, एक भयानक हादसा. लेकिन उस का कुसूर भी तो कुछ नहीं था. शांति का पति सुरजन बहुत ज्यादा शराब पीता था. उस ने समझाया था कि शराब बुरी चीज है, इस ने लाखों घर बरबाद कर दिए हैं. इसे छोड़ सको तो छोड़ दो. यही तो वह कहती थी, कभी दबाव तो नहीं डाला. उस दिन भी जब सुरजन आया, तो नशे में चूर था. शांति ने पूछा, ‘‘साड़ी नहीं लाए क्या? भूल गए, आज हमारी शादी की सालगिरह है.’’ तब सुरजन ने बेहयाई से हंसते हुए बोतल सामने रख दी, ‘‘ले, आज मेरे साथ तू भी पी… अंगरेजी शराब है.’’

तब शांति को बहुत गुस्सा आया था. लेकिन उस ने इतना ही कहा, ‘‘आप थोड़ी सी पी लीजिए, पर मुझे मजबूर मत कीजिए. मुझे इस जहर से सख्त नफरत है.’’ अगर बात यहीं खत्म हो जाती, तो गनीमत थी. सुरजन ने बोतल मुंह से लगा ली और गटागटा पीते हुए आधी से ज्यादा खाली कर दी. फिर लड़खड़ाते हुए शांति का हाथ पकड़ कर वह बोला, ‘‘रानी, जब तक दारू जिंदा है, तुम्हारा आदमी मरने वाला नहीं. अरे, यह दारू नहीं अमृत है, अमृत. तुम बेकार के ढकोसले में पड़ी हो. लो, थोड़ी पी कर देखो.’’ फिर सुरजन ने जबरदस्ती शांति को पिलानी चाही. वह इनकार करती रही. तब उस ने जबरदस्ती बोतल उस के मुंह से लगा दी, तो वह तिलमिला उठी. उसे भी गुस्सा आ गया. बोतल छीन कर फेंकी तो वह जमीन पर गिर कर कई टुकड़ों में बिखर गई… और इसी के साथ उस की दुनिया भी बिखर गई.

सुरजन ने शांति को पीटना शुरू कर दिया. इतना पीटा कि वह बेहोश हो गई. होश में आने पर पता चला कि सुरजन कहीं चला गया है. उस समय मिन्नी पेट में थी. वह रोतीचिल्लाती इधरउधर भागी. पति को बहुत खोजा. महल्ले वाले भी दौड़े, लेकिन उस का कोई पता नहीं चला. वह जो गया तो चला ही गया. शाम होने वाली थी. अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई. शांति ने धीरे से पूछा, ‘‘कौन है?’’ और उठ कर दरवाजे की ओर चल पड़ी. मिन्नी आंगन में खेल रही थी.शांति ने धीरे से दरवाजा खोला. सामने देखा तो मानो जमीन पैरों के नीचे से खिसक गई. बदन थरथर कांपने लगा. अचानक ही मुंह से चीख निकल पड़ी, ‘‘मिन्नी, तेरे पापा आए…’’ और वह बेहोश हो कर धड़ाम से गिर गई. शायद इतनी बड़ी खुशी को उस का कमजोर शरीर बरदाश्त न कर सका.

सुरजन सामने सिर झुकाए खड़ा था. मिन्नी हक्कीबक्की सी दौड़ी आई. वह कभी सुरजन की ओर देखती, तो कभी जमीन पर पड़ी मां की ओर. तभी मिन्नी रोने लगी. महल्ले के कुछ लोग आ गए. शांति के मुंह पर पानी के छींटे मारे तो होश आया. फिर भी संभलने में उसे काफी समय लगा. वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई. तरहतरह के सवालजवाब होते रहे.रात काफी हो चली थी. हालचाल पूछने वाले लोग जा चुके थे. अब घर में 3 जने थे, शांति, सुरजन और मिन्नी. सभी चुप थे, जैसे उन के पास अब बोलने को कुछ रहा ही नहीं. फिर शांति ने भरे गले से पूछा, ‘‘ठीक तो हो?’’ ‘‘हां,’’ सुरजन ने उदासी भरी आवाज में कहा.

‘‘आज हमारी याद…’’ शांति से पूरा वाक्य न बोला गया, गला भर आया. सुरजन ने घोर शर्म और अफसोस भरी आवाज में कहा, ‘‘पहले मुझे माफ कर दो. वैसे, मैं माफी मांगने के लायक नहीं, फिर भी… अगर हो सके…’’‘‘नहींनहीं, ऐसा मत कहो. बस यही बता दो कि कहां रहे? कैसे रहे? किसी परेशानी में तो नहीं थे?’’सुरजन कुछ देर खामोश रहा. छत की तरफ देखा, जैसे वह कुछ पढ़ रहा हो. फिर धीरेधीरे वह बताने लगा, ‘‘मैं उसी दिन रात की गाड़ी से कोलकाता चला गया. वहां मेरा एक दोस्त रहता था. उसी की मोटर वर्कशौप में काम करने लगा. वहां जल्दी ही मुझे एक दूसरा साथी मिल गया. उस का नाम था दिलीप. बिलकुल अकेला, नंबर एक का पियक्कड़. फिर क्या था. हर शाम को महफिल जमती. कभी मेरे कमरे पर, तो कभी दिलीप के घर पर. ‘‘वह टैक्सी ड्राइवर था. हम दोनों इतना घुलमिल गए कि एकदूसरे के बगैर चैन न पड़ता. मैं अपनेआप को आजाद परिंदा समझता, जिसे न किसी चीज की कमी थी, न कोई परवाह. ‘‘इसी झूठी मौजमस्ती और शराबखोरी के अंधेरे कुएं में जिंदगी के 5 कीमती साल कब डूब गए, पता नहीं चला. शायद यह अंधेरा कभी खत्म न होता, अगर दिलीप गुवाहाटी न चला गया होता.’’ सुरजन कुछ देर के लिए चुप रहा, फिर आगे बोला, ‘‘दिलीप के जाने से मुझे बहुत अकेलापन महसूस होने लगा. फिर भी कोई परेशानी नहीं हुई, शराब जो मेरे साथ थी.

‘‘तकरीबन 2 महीने बाद मुझे मालूम हुआ कि दिलीप आ गया है. मैं तुरंत काम से छुट्टी ले कर अपने दोस्त से मिलने चल दिया. रास्ते में मैं ने एक बोतल खरीद ली. सोचा, काफी दिनों बाद मेरा दोस्त आया?है, आज जम कर पिएंगे. ‘‘दरवाजे पर दस्तक दी. दरवाजा खुला तो दिलीप सामने खड़ा था. हाथ मिलाते हुए वह बोला, ‘तुम आ गए, अच्छा ही हुआ. मैं खुद आने वाला था. एक मिनट रुको, मैं अभी आया.’ ‘‘वह अंदर चला गया. थोड़ी देर बाद मुझे आवाज दी. मैं भीतर गया तो देखा कि बैठक वाला कमरा बहुत करीने से और खूबसूरत ढंग से सजा हुआ?है. मैं कुछ सोच ही रहा था कि दिलीप ने हाथ पकड़ कर बैठाते हुए कहा, ‘बोलो, चाय चलेगी या शरबत?’ ‘‘मुझे उस की यह बात बड़ी अजीब सी लगी. मैं ने खीज कर कहा, ‘आज तुझे क्या हो गया है दिलीप? इतने दिनों बाद मिला है और पूछता है, चाय चलेगी या शरबत. अरे देख, तेरे वास्ते मैं खुद ले कर आया हूं. फटाफट 2 गिलास ले आ.’ ‘‘दिलीप ने मुंह फेरते हुए कहा, ‘इसे थैले में रख लो. मैं ने पीना छोड़ दिया है?’

‘‘मैं हैरान रह गया. कानों पर भरोसा नहीं हुआ. सोचा, कहीं दिलीप मजाक तो नहीं कर रहा. तभी उस ने आवाज दी, ‘सलमा, एक प्लेट में मीठा दे जाओ.’ ‘‘मैं चौंक उठा और पूछा, ‘यह सलमा कौन है?’ ‘‘दिलीप हंस दिया. वह जवाब देता, इस से पहले एक 5-6 साल की लड़की फुदकती हुई आई और दिलीप की गरदन में झूल गई. दिलीप ने उसे गोदी में उठा कर चूम लिया और बोला, ‘पिंकी, तुम ने चाचाजी को नमस्ते नहीं की… चलो, नमस्ते करो.’ ‘‘बच्ची ने दोनों हाथ जोड़ दिए. मैं ने नमस्ते का जवाब तो दे दिया, लेकिन मन और भी उलझ गया.

‘‘दिलीप ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘सुरजन, मैं ने शादी कर ली है. सलमा मेरी बीवी का नाम है. और यह है मेरी बेटी पिंकी?’ ‘‘तभी सलमा एक ट्रे में कुछ मीठा ले कर आ गई. 30-32 साल की उम्र, सांवला, छरहरा बदन, काफी सुंदर लग रही थी. दिलीप ने कहा, ‘सलमा, यह है मेरा जिगरी दोस्ती सुरजन.’‘‘सलमा ने नमस्ते की और अंदर चली गई. मैं ने दिलीप को शादी की बधाई दी. लेकिन बहुत से सवाल अब भी दिमाग में थे. आखिर पूछ ही लिया, ‘कहां से की शादी… यह सब चक्कर क्या है?’

‘‘दिलीप बोला, ‘अरे, मैं तो कब से एक जीवनसाथी की तलाश में था. अकेले आदमी की भी कोई जिंदगी होती है. जब मैं गुवाहाटी गया, वहीं सलमा से मुलाकात हो गई. बेचारी गरीब विधवा थी. इसे भी कोई सहारा चाहिए था और मुझे भी. फिर क्या था, हम दोनों ने शादी कर ली. ‘‘सलमा को भी सहारा मिल गया और मुझे पत्नी मिल गई. साथ ही, एक खिलौना भी मिला.’ ‘‘यह कह कर उस ने पिंकी के गालों को चूम लिया, ‘देखो, अब मैं कितना खुश हूं. मेरी जिंदगी में, इस सूने घर में जैसे बहार आ गई?है.’ ‘‘दिलीप ने मस्ती में भर कर कुछ ऐसे अंदाज में कहा कि मैं अंदर तक कांप गया. फिर भी बनावटी हंसी हंसते हुए कहा, ‘‘तब तो अब तुम से ही पिऊंगा… बड़े छुपे रुस्तम निकले, गुरु.’ ‘‘वह बोला, ‘नहीं, मैं ने शराब का नाम लेना ही छोड़ दिया है. मेरी और तुम्हारी दोस्ती अब सिर्फ इसी बात पर कायम रह सकती है कि तुम कभी मेरे सामने इस जहर का नाम भी मत लेना. मैं नहीं चाहता कि यह जहरीला पानी मेरे परिवार को तबाह कर दे. मेरी पत्नी भी तो इस से बहुत नफरत करती है.’ ‘वह एक पल के लिए चुप हो गया. फिर बोला, ‘सुरजन, मैं अकेलेपन को दूर करने के लिए शराब का झूठा सहारा लेता था. यही आदमी की सब से बड़ी भूल होती है. वैसे, इतनी बड़ी दुनिया में किसी चीज की कमी नहीं है. हो सके तो तुम भी शराब से तलाक ले कर कहीं घर बसा लो…’ ‘‘मैं ने गुस्से में कहा, ‘दिलीप, तुम्हारी गृहस्थी तुम को मुबारक. मैं आजाद पंछी की तरह जिंदगी बिताने में भरोसा रखता हूं, पिंजरे में कैद रह कर नहीं. मैं जा रहा हूं. मुझे नहीं चाहिए तुम्हारे उपदेश.’ ‘‘मैं उठ कर चल दिया. पता नहीं, क्यों मेरे पैर कांप रहे थे, तभी दिलीप का कहकहा गूंजा, ‘जाते हो तो जाओ, पर एक बात याद रखना, आजाद पंछी भी परिवार बसाने के लिए तड़पता है और फड़फड़ाता रहता है.’’’ इतना कह कर सुरजन खामोश हो गया. मिन्नी हैरानी से दोनों की ओर देख रही थी. शांति बुत की तरह बैठी सुन रही थी. वह धीरे से बोली, ‘‘फिर क्या हुआ?’’

सुरजन भीगी आवाज में बोला, ‘‘फिर क्या था, मेरे दिल में हाहाकार मच गया कि दिलीप एक विधवा औरत से शादी कर के, दूसरे की बच्ची को पालते हुए कितना खुश है. उस ने परिवार बसा कर शराब छोड़ दी. लेकिन, मैं ने शराब के लिए परिवार छोड़ दिया था. अपनी सुंदर पत्नी को छोड़ दिया. मुझे अपनी इस बच्ची के लिए भी मोह नहीं जागा, जिस का मुंह भी नहीं देखा था. ‘‘मैं नफरत और अपमान की आग में जलने लगा. बारबार खुद को धिक्कारा, ‘सुरजन, तू ने अपनी पत्नी को कहां बेसहारा बना कर छोड़ दिया? तू जालिम है, बहुत बड़ा मुजरिम है तू,’ ‘‘लेकिन, मुझे कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा था…’’ कहतेकहते सुरजन की आंखों से आंसू बह चले.

वह कुछ रुक कर आगे बोला, ‘‘मैं ने बोतल निकाल कर गंदे नाले में फेंक दी. मुझे घर की याद ने आ घेरा. सोचने लगा कि पता नहीं, तुम कहां होगी? किस हाल में होगी? हालात ने तुम्हें क्या बना दिया होगा? इन्हीं खयालों ने मन को बेचैन कर दिया.’’ अब शांति भी रो पड़ी. कुछ देर बाद आंसू पोंछते हुए वह बोली, ‘‘फिर क्या हुआ?’’

‘‘मैं सीधे अपने कमरे में चला गया. जल्दीजल्दी थोड़ाबहुत सामान बांधा और स्टेशन पर जा पहुंचा. मालिक के पास रुपए बाकी थे, वह भी लेने नहीं गया. मन करता था, कोई मुझे उड़ा कर पलभर में मेरे घर पहुंचा दे. ‘‘रात 11 बजे गाड़ी आई. एकएक पल मुझे सालों जैसा मालूम हो रहा था. रातभर के सफर के बाद गाड़ी यहां पहुंचने वाली थी. सुबह हो गई थी. रेल की पटरियों के किनारे टैलीफोन के खंभों पर बैठे परिंदे कुनकुनी धूप का मजा ले रहे थे. कुछ आसमान में उड़ रहे थे. परिदों का एक जोड़ा अपने नन्हे बच्चे को उड़ना सिखा रहा था. देख कर मन भर आया. तभी स्टेशन आ गया और धीरेधीरे गाड़ी रुक गई…’’

सुरजन चुप हो गया था. उस ने मिन्नी को अपनी गोद में खींच लिया.

मिन्नी धीरे से बोली, ‘‘पापा, अब कहीं मत जाना.’’

सुरजन ने मिन्नी का मुंह चूम लिया, ‘‘अब भला मैं अपनी रानी बेटी को छोड़ कर कहां जाऊंगा. एक टैक्सी खरीदूंगा, खूब पैसा कमाऊंगा, खूब अच्छीअच्छी चीजें लाया करूंगा तुम्हारे लिए. फिर तुम को और तुम्हारी मां को टैक्सी में बैठा कर सारा शहर घुमाया करूंगा.’’

‘‘और नानी के घर भी चलेंगे,’’ मिन्नी ने चहकते हुए कहा.

‘‘हां, सुनो शांति, झोले में मिठाई है. तुम भी खा लो और हमारी बेटी को भी दे दो.’’

शांति उठते हुए बोली, ‘‘आज हमारी शादी की सालगिरह है… सब तैयार हो जाओ, बाजार घूमने चलेंगे.’’ ‘‘हांहां, क्यों नहीं, चलो मिन्नी बेटी, फौरन तैयार हो जाओ. आज हम तुम्हें बहुत से खिलौने ले कर देंगे. फिर तुम्हारी मां को एक नई साड़ी और…’’ सुरजन खुश हो कर बोला. ‘‘बसबस, बहुत हो गया, आज के लिए इतनी खरीदारी ही काफी?है… ज्यादा खुशी हजम करना मुश्किल हो जाएगा,’’ शांति ने हंसते हुए कहा और कपड़े बदलने के लिए भीतर चली गई.

मैं घर लौटने में जरा भी देर करता हूं तो बीवी नाराज हो जाती है, क्या करूं?

सवाल

मैं 25 साल का हूं. मेरी शादी को 2 साल हो चुके हैं. एक बच्चा भी है. मुझ में और मेरी बीवी में बहुत प्यार है, मगर काम से घर लौटने में जरा सी देरी होने पर वह नाराज हो जाती है. मुझ से कई तरह के सवाल करती है, जिन का कोई मतलब नहीं होता. मैं क्या करूं?

जवाब

नईनई शादी में बीवी चाहती है कि पति हर वक्त उस के पास रहे. आप की बीवी की नाराजगी भी उस का प्यार ही है. आप उसे प्यार से समझाएं कि काम में थोड़ी देर हो ही जाती है. इस के अलावा आप जल्दी से जल्दी आने की कोशिश किया करें. वक्त के साथ बीवी गुस्सा करना छोड़ देगी.

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पतिपत्नी के रिश्ते में सब से खास बात एकदूसरे को शारीरिक सुख देना होता है. पर इसे भी बहुत से जोड़े किसी रूटीन काम की तरह निबटा देते हैं. पति को इस संबंध से कितना सुख मिला है, वह कभी उस से नहीं कहता है. इसी तरह पत्नी भी पति से कभी यह नहीं कहती कि उस की इच्छा पूरी हुई भी है या नहीं.

शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार होने में लड़कियों या औरतों को हमेशा थोड़ा समय लगता है, जबकि मर्दों को ज्यादा समय नहीं लगता. ज्यादातर पति इच्छा होते ही पत्नी तैयार है या नहीं, इस बात पर ध्यान न दे कर सैक्स के लिए तैयार हो जाते हैं, जबकि तैयार न होने के बावजूद पत्नी को पति का साथ देना पड़ता है.

ऐसे में पति तो अपनी इच्छा पूरी कर लेता है, पर पत्नी की इच्छा अधूरी ही रह जाती है. ज्यादातर पत्नियों के साथ ऐसा ही होता है. पति तेजी से सैक्स के लिए तैयार होता है और 2-3 मिनट में अपना काम पूरा कर के करवट बदल कर सो जाता है, जबकि कोई भी पत्नी इतने कम समय में सैक्स के लिए तैयार नहीं होती और यह भी सच है कि इतने कम समय में उस की कभी इच्छा पूरी नहीं होती.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

 

ये 10 टिप्स हनीमून की रात को यादगार बनाएंगे यादगार

सुहागरात पर नए जोड़े के मन में संकोच बना रहता है. यह सच है कि हर दंपती के जीवन का अनिवार्य हिस्सा है शारीरिक संबंध. लेकिन, इसे लेकर जो तमात आशंकाएं और बातें हमारे अवचेतन में कहीं बैठी हैं, उनके चलते कई लोग इसका भरपूर आनंद उठा नहीं पाते. भारतीय समाज में कामसूत्र जैसा महान ग्रंथ रचा गया, लेकिन बावजूद इसके हमारे यहां इस‍ विषय पर चर्चा करना वर्जनीय माना जाता है. जहां एक तरफ सुहागरात नई जिंदगी की शुरुआत है, वहीं दूसरी तरफ जिस्‍मानी संबंध भी इस रात का अहम हिस्‍सा माना जाता है. शादी की पहली रात को पुरुष शारीरिक संबंध के प्रति बेहद चिंतित रहते हैं. मन में यह चिंता होती है कि वे अपने साथी को खुश कर पाएंगे या नहीं. उन्‍हें इस बात का डर रहता है कि कहीं इस रात की कोई गलती उन्‍हें सारी उम्र के लिए परेशानी में न डाल दे. लेकिन हम आपको कुछ टिप्‍स बता रहे हैं जो आपकी मदद कर सकते हैं.

शादी की पहली रात सेक्‍स के 10 टिप्‍स

1 – सुहागरात में शारीरिक संबंध बनाने से पहले रोमांटिक माहौल बनाइए. अपने कमरे में विशेष प्रकार के रंग और खुशबू का प्रयोग कीजिए. ये सेक्‍स हार्मोन को उकसाते हैं. इसके लिए अरोमा कैंडल जलाइए, हल्‍का संगीत बजाइए, हल्‍की रोशनी रखिए.

2 – सेक्‍स क्रिया करने के लिए जल्‍दबाजी न करें. इससे पहले एक-दूसरे को समझने की कोशिश कीजिए. ऐसा करने से दोनों के एक-दूसरे के करीब आएंगे और सेक्‍स करने में ज्‍यादा झिझक नही होगी.

3 – सेक्‍सुअल होने से पहले अपने साथी से अच्‍छी तरह बात कीजिए. अपनी सारी शंकाओं का समाधान बातचीत के जरिए पहले निकाल लीजिए नहीं तो सेक्‍स के दौरान मन में झुंझलाहट बनी रहेगी.

4 – सेक्‍स करने से पहले पार्टनर को सरप्राइज करने की कोशिश कीजिए. इसके लिए आप उसे कोई गिफ्ट दीजिए, हनीमून पैकेज या ज्‍वैलरी देकर आप अपने पार्टनर को खुश कर सकते हैं.

5 – सुहागरात में सेक्‍स से पहले फोरप्‍ले बहुत जरूरी है. फोरप्‍ले करने से सेक्‍स करने का आनंद बढ़ जाता है. इसके लिए उसे किस कीजिए. उसके खास अंगों पर आपकी प्‍यार भरी छुअन सेक्‍स हार्मोन उत्‍तेजित करने में मदद करेंगे.

6 – सेक्‍सुअल फैंटेसीज का भी सहारा ले सकते हैं. सुहागरात में पार्टनर से सेक्‍सी बातें करें, इससे दोनों उत्‍तेजित होंगे और सेक्‍स की इच्‍छा बढ़ेगी. वात्‍स्‍यायन द्वारा रचित कामसूत्र के बारे में बात कर सकते हैं.

7 – सुहागरात में एल्‍कोहल और सिगरेट बिलकुल न पियें. क्‍योंकि सेक्स से तुरंत पहले ज्यादा एल्कोहल लेने से पुरुषों में इरेक्टाइल प्रॉब्लम्स और स्त्रियों में वजाइनल ड्राइनेस की समस्या हो सकती हैं. इससे सेक्‍स के दौरान समस्‍या हो सकती है.

8 – सुहागरात में भी सेक्‍स करने से पहले सुरक्षा का ध्‍यान दीजिए. इसके लिए कंडोम का प्रयोग करें. इससे यौन बीमारियों के होने का खतरा कम होता है और बिना प्‍लानिंग के प्रेग्‍नेंसी का डर भी नही होता है.

9 – मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक तौर पर फिट रहें. अंतरंग पलों से पहले अपने साथी की पसंदीदा ड्रेस पहनें. इससे सेक्स क्रिया रोमांचक बनेगी.

10 – किसी भी प्रकार का प्रयोग करने से बचें. सुहागरात में सेक्‍स संबंध बनाते वक्‍त ऐसे आसनों को अपनायें जो आसान हों और जिनको करने में कोई दिक्‍कत न हो.

‘Bajigar 2’ में दोबारा दिखेंगे शाहरुख और काजोल, बाजीगर के सीक्‍वेल की तैयारी शुरू

शाहरुख खान (Shahrukh khan) बौलीवुड की जान है और उनकी जोड़ी काजोल (Kajal) के साथ आज भी पर्दे पर या किसी रिएलिटी शो में देखने के लिए फैंस बेताब रहते हैं. उनकी जोड़ी दोनों की पहली फिल्म ‘बाजीगर’ से हिट हुई थी. इसी मूवी ने शाहरुख का पैर बौलीवुड में जमाने में मदद की . जल्‍दी ही फिल्म ‘बाजीगर’ का सीक्‍वेल बनने जा रही है. इसके लीड रोल में शाहरुख खान ही नजर आने वाले हैं, यही बात मूवी की एक्‍ट्रैस काजोल के लिए भी कही जा रही है.

मिली थी जान से मारने की धमकी

आपको बता दें कि इन दिनों शाहरुख खान सुर्खियों में है क्योंकि उनको जान से मारने की धमकियां मिल रही थी. इसी बीच शाहरुख के चाहने वालों के लिए ‘बाजीगर 2’ की खबर आ गई. बता दें कि ‘बाजीगर’ को रिलीज हुए 31 साल हो चुके हैं. फिल्म के प्रोड्यूसर रतन जैन का कहना है कि बाजीगर 2 के स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है. यह फिल्म जरूर बनेंगी और शाहरुख ही इस फिल्म में  हीरो का रोल करेंगे.

आपको बता दें, कि शाहरुख खान के करियर के शुरुआती दिनों की ये फिल्म है जिसमें उन्हें नेगेटिव रोल किया था. शाहरुख खान का यह रोल विलेन जैसा था. इन्होंने फिल्म में एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के किरदार का मर्डर किया था, फिर उसकी बहन काजोल को प्यार में फंसाया था. दरअसल वह ये सब अपनी पिता और बहन की मौत का बदला लेने के लिए करते हैं. कहा जाता है कि यह रोल शाहरुख खान से पहले अक्षय कुमार को औफर किया गया था लेकिन अक्षय ने नेगेटिव रोल को देख कर बाजीगर करने से इनकार कर दिया.

शाहरुख के करियर के शुरुआती दिनों में उनके लुक के बारे में यह कहा जाता था कि वह हीरो की तरह तो बिलकुल नहीं दिखते हैं. इस कारण वह हिंदी मूवीज में हीरो का रोल नहीं निभा पाएंगे. इस वजह से पहले उन्हें  दूरदर्शन पर  फौजी  नाम के सीरियल में एक्टिंग करने का मौका मिला. हिंदी मूवीज में बाजीगर को एक लैंडमार्क मूवी माना जा सकता है कि क्‍योंकि इसी के बाद हीरो के किरदार को ग्रे शेड में नजर आना शुरू हुआ, ग्रे से यहां मतलब है अच्‍छा और बुरा दोनों का अंश.

अब एक बार फिर से बाजीगर के मेकर्स में नई उम्मीद जागी है इसलिए वे ‘बाजीगर पार्ट 2’ लेकर आ रहे हैं इसमें शाहरुख नए रोल में पुराने एक्टर के तौर पर नजर आएंगे. मेकर्स का कहना है कि वे शाहरुख से इस बारे में बात कर रहे हैं लेकिन उनकी तरफ से अभी तक कोई रिएक्शन नहीं आया है. अभी स्क्रिप्ट की तलाश में है और डायरेक्‍शन भी नया रखना चाहते हैं. इस मूवी के तीनों स्‍टार शिल्‍पा शेट्टी, काजोल और शाहरुख खान आज बौलीवुड में अपनी जबरदस्‍त पहचान बना चुके हैं.

सलमान खान और अजय देवगन दिखेंगे साथ साथ, चुलबुल पांडे वर्सेज सिंघम

सालो पहले रोहित शेट्टी ने अजय देवगन को एक निडर पुलिस ओफिसर बाजीराव सिंघम  तौर पर सभी दर्शको से मिलवाया. दर्शक आज सिंघम बने अजय देवगन को टीवी पर देखने के लिए बेकरार रहते है.

अब इस आइकोनिक किरदार में नजर आ रहे है. हाल में एक इंटरव्यू में रोहिट शेट्टी ने बात पर खुलासा किया है कि क्या वे सलमान खान और अजय देवगन को स्टैंडओन फिल्म चुनबुल पांडे vs. सिंघम की योजना बना रहे है. जो उनके कौप यूनिवर्स से अलग है.

 

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मीडियो में रोहित और अजय से सवाल किया गया है कि क्या दर्शक बाजीराव सिंघम और चुलबुल पांडे को एक साथ देखना चाहेंगे. दर्शको का इस बात रिएक्शन आया कि हौल में ही खलबली मच उठी. जब उनसे पूछा गया कि इन दो किरदारों को आमने सामने देखना चाहते है. तो इस पर खुद अजय देवगन बोल उठे की ‘मुझे तो पता ही था.’

जब रोहित से फ्यूचर प्लांस के बारें में आगे पूछा जाता है तो उन्हे मजाक में कहा जाया है कि अभी तो सिंघम अगेन को एक हफ्ता भी नहीं हुआ है. थोड़ा वक्त दो.” साथ ही जब उनसे मिशन चुलबुल सिंघम के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “इसमें वक्त लगेगा.” उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर चुलबुल पांडे Vs सिंघम जैसी कोई फिल्म बनेगी, तो वह एक स्टैंडअलोन फिल्म होगी.

सलमान खान और अजय देवगन अपने बौन्ड को देखकर कि हमने साथ शुरुआत की थी.वो एक दो साल पहले आए थे. हमने हमेशा बढ़ियो बौन्ड शेयर किया.हम सभी ने जब शुरुआत की थी अच्छा रिश्ता शेयर करते थे. हम एक दूसरे को आधी रात में भी कौल कर देते थे. हमे पता है कि हम एक दूसरे के लिए खड़े रहते है.

सलमान खान की शूटिंग की बात करें तो वे इन दिनों फिल्म सिंकदर की शूटिंग में बीजी है. बता दें कि ईश 2025 को सलमान खान कि सिंकदर रीलीज होगी.  उम्‍मीद है कि फैंस को भी अजय और सलमान को आमने सामने देखने में ज्‍यादा मजा आएगा.

बेरहम बेटी : प्यार पाने के लिए कर दी अपने पिता की हत्या

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु देश का तीसरा सब से बड़ा नगर है. बेंगलुरु के राजाजी नगर थाना क्षेत्र में भाष्यम सर्कल के पास वाटल नागराज रोड स्थित पांचवें ब्लौक के 17वें बी क्रौस में जयकुमार जैन अपने परिवार के साथ रहते थे.

जयकुमार जैन का कपड़े का थोक व्यापार था. पत्नी पूजा के अलावा उन के परिवार में 15 वर्षीय बेटी राशि (काल्पनिक नाम) और उस से छोटा एक बेटा था. जयकुमार मूलरूप से राजस्थान के जयपुर जिले के विराटनगर के पास स्थित मेढ़ गांव के निवासी थे. पैसे की कोई कमी नहीं थी, इसलिए परिवार के सभी सदस्य ऐशोआराम की जिंदगी जीने में यकीन करते थे.

जैन परिवार को देख कर कोई भी वैसी ही जिंदगी की तमन्ना कर सकता था. इस परिवार में सब कुछ था. सुख, शांति और समृद्धि के अलावा संपन्नता भी. ये सभी चीजें आमतौर से हर घर में एक साथ नहीं रह पातीं. मातापिता अपनी बेटी व बेटे पर जान छिड़कते थे. 41 वर्षीय जयकुमार जैन चाहते थे कि उन की बेटी राशि जिंदगी में कोई ऊंचा मुकाम हासिल करे.

उन की पत्नी पूजा व बेटे को पुडुचेरी में एक पारिवारिक समारोह में शामिल होना था. जयकुमार जैन शाम 7 बजे पत्नी व बेटे को कार से रेलवे स्टेशन छोड़ने के लिए गए. इस बीच घर पर उन की बेटी राशि अकेली रही. यह बात 17 अगस्त, 2019 शनिवार की है.

पत्नी व बेटे को रेलवे स्टेशन छोड़ने के बाद जयकुमार घर वापस आ गए. घर आने के बाद बापबेटी ने साथसाथ डिनर किया. रात को उन की बेटी राशि पापा के लिए दूध का गिलास ले कर कमरे में आई और उन्हें पकड़ाते हुए बोली, ‘‘पापा, दूध पी लीजिए.’’

वैसे तो प्रतिदिन रात को सोते समय ये कार्य उन की पत्नी करती थी. लेकिन आज पत्नी के चले जाने पर बेटी ने यह फर्ज निभाया था. दूध पीने के बाद जयकुमार जैन अपने कमरे में जा कर सो गए. दूसरे दिन यानी 18 अगस्त रविवार को सुबह लगभग 7 बजे पड़ोसियों ने जयकुमार जैन के मकान के बाथरूम की खिड़की से आग की लपटें और धुआं निकलते देख कर फायर ब्रिगेड के साथसाथ पुलिस को सूचना दी. इस बीच जयकुमार की बेटी राशि ने भी शोर मचाया.सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ी बताए गए पते पर पहुंची और जयकुमार के मकान के अंदर पहुंच कर उन के बाथरूम में लगी आग को बुझाया. दमकलकर्मियों ने बाथरूम के अंदर जयकुमार जैन का झुलसा हुआ शव देखा.

कपड़ा व्यापारी जयकुमार के मकान के बाथरूम में आग लगने और आग में जल कर उन की मृत्यु होने की जानकारी मिलते ही मोहल्ले में सनसनी फैल गई. देखते ही देखते जयकुमार जैन के घर के बाहर पड़ोसियों की भीड़ इकट्ठा हो गई. जिस ने भी सुना कि कपड़ा व्यवसाई की जलने से मौत हो गई, वह सकते में आ गया.

आग बुझाने के दौरान थाना राजाजीपुरम की पुलिस भी पहुंच गई थी. मौकाएवारदात पर पुलिस ने पूछताछ शुरू की.

बेटी का बयान  मृतक जयकुमार की बेटी ने पुलिस को बताया कि सुबह पापा नहाने के लिए बाथरूम में गए थे, तभी अचानक इलैक्ट्रिक शौर्ट सर्किट से आग लगने से पापा झुलस गए और उन की मौत हो गई. घटना के समय जयकुमार के घर पर मौजूद युवक प्रवीण ने बताया कि आग लगने पर हम दोनों ने आग बुझाने का प्रयास किया. आग बुझाने के दौरान हम लोगों के हाथपैर भी झुलस गए.

मामला चूंकि एक धनाढ्य प्रतिष्ठित व्यवसाई परिवार का था, इसलिए पुलिस के उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया था. खबर पा कर सहायक पुलिस आयुक्त वी. धनंजय कुमार व डीसीपी एन. शशिकुमार घटनास्थल पर पहुंच गए. इस के साथ ही फोरैंसिक टीम भी आ गई. मौके से आवश्यक साक्ष्य जुटाने व जरूरी काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने व्यवसाई जयकुमार की लाश पोस्टमार्टम के लिए विक्टोरिया हौस्पिटल भेज दी.

पुलिस ने भी यही अनुमान लगाया कि व्यवसाई जयकुमार की मौत शौर्ट सर्किट से लगी आग में झुलसने की वजह से हुई होगी. लेकिन जयकुमार के शव की स्थिति देख कर पुलिस को संदेह हुआ. प्राथमिक जांच में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया, इसलिए पुलिस ने इसे संदेहास्पद करार देते हुए मामला दर्ज कर गहन पड़ताल शुरू कर दी.

डीसीपी एन. शशिकुमार ने इस सनसनीखेज घटना का शीघ्र खुलासा करने के लिए तुरंत अलगअलग टीमें गठित कर आवश्यक निर्देश दिए. पुलिस टीमों द्वारा आसपास रहने वाले लोगों व बच्चों से अलगअलग पूछताछ की गई तो एक चौंका देने वाली बात सामने आई.

पुलिस को मृतक जयकुमार की बेटी राशि व पड़ोसी युवक प्रवीण के प्रेम संबंधों के बारे में जानकारी मिली. घटना के समय भी प्रवीण जयकुमार के घर पर मौजूद था.

पुलिस को समझते देर नहीं लगी कि जरूर दाल में कुछ काला है. मकान में जांच के दौरान फोरैंसिक टीम को गद्दे पर खून के दाग मिले थे, जिन्हें साफ किया गया था. इस के साथ ही फर्श व दीवार पर भी खून साफ किए जाने के चिह्न थे.

दूसरे दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि मृतक के झुलसने से पहले उस की हत्या किसी धारदार हथियार से की गई थी. इस के बाद उच्चाधिकारियों को पूरी जानकारी से अवगत कराया गया. पुलिस का शक मृतक की बेटी राशि व उस के बौयफ्रैंड प्रवीण पर गया.

पुलिस ने दूसरे दिन ही दोनों को हिरासत में ले कर उन से घटना के संबंध में अलगअलग पूछताछ की. इस के साथ ही दोनों के मोबाइल भी पुलिस ने कब्जे में ले लिए. जब राशि और प्रवीण से सख्ती से पूछताछ की गई तो दोनों संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए और सवालों में उलझ कर पूरा घटनाक्रम बता दिया. दोनों ने जयकुमार की हत्या कर उसे दुर्घटना का रूप देने की बात कबूल कर ली.

डीसीपी एन. शशिकुमार ने सोमवार 19 अगस्त को प्रैस कौन्फ्रैंस में बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर गहन पड़ताल की. इस के साथ ही जयकुमार जैन हत्याकांड 24 घंटे में सुलझा कर मृतक की 15 वर्षीय नाबालिग बेटी राशि और उस के 19 वर्षीय प्रेमी प्रवीण को गिरफ्तार कर लिया गया.

उन की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल चाकू, जिसे घर में छिपा कर रखा गया था, बरामद कर लिया गया. साथ ही खून से सना गद्दा, कपड़े व अन्य साक्ष्य भी जुटा लिए गए. हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

जयकुमार जैन की बेटी बेंगलुरु शहर के ही एक इंटरनैशनल स्कूल में पढ़ती थी. उसी स्कूल में जयकुमार के पड़ोस में ही तीसरे ब्लौक में रहने वाला प्रवीण कुमार भी पढ़ता था. प्रवीण के पिता एक निजी कंपनी में काम करते थे.

कुछ महीने पहले उस के पिता सहित कई कर्मचारियों को कुछ लाख रुपए दे कर कंपनी ने हटा दिया था. ये रुपए पिता ने प्रवीण के नाम से बैंक में जमा कर दिए थे. इन रुपयों के ब्याज से ही परिवार का गुजारा चलता था. प्रवीण उन का एकलौता बेटा था.

राशि और प्रवीण में पिछले 5 साल से दोस्ती थी और दोनों रिलेशनशिप में थे. प्रवीण राशि से 3 साल सीनियर था. फिलहाल राशि 10वीं की छात्रा थी, जबकि इंटर करने के बाद प्रवीण ने शहर के एक प्राइवेट कालेज में बी.कौम फर्स्ट ईयर में एडमीशन ले लिया था. अलगअलग कालेज होने के कारण दोनों का मिलना कम ही हो पाता था. इस के चलते राशि अपने प्रेमी से अकसर फोन पर बात करती रहती थी.

मौडल बनने की चाह  अकसर देर तक बेटी का मोबाइल पर बात करना और चैटिंग में लगे रहना पिता जयकुमार को पसंद नहीं था. बेटी को ले कर उन के मन में सुनहरे सपने थे. राशि और प्रवीण की दोस्ती को ले कर भी पिता को आपत्ति थी. जयकुमार ने कई बार राशि को प्रवीण से दूर रहने को कहा था. राशि को पिता की ये सब हिदायतें पसंद नहीं थीं.

महत्त्वाकांक्षी राशि देखने में स्मार्ट थी. गठा बदन व अच्छी लंबाई के कारण वह अपनी उम्र से अधिक की दिखाई देती थी. उसे फैशन के हिसाब से कपड़े पहनना पसंद था. उस की सहेलियां भी उस के जैसे विचारों की थीं, इसलिए उन में जब भी बात होती तो मौडलिंग, फिल्मों और उन में दिखाए जाने वाले रोमांस की ही बात होती थी.

पुलिस जांच में सामने आया कि एक बार परिवार को गुमराह कर के राशि अपनी सहेलियों के साथ शहर से बाहर घूमने के बहाने बौयफ्रैंड प्रवीण के साथ मुंबई गई थी. मुंबई में 4 दिन रह कर उस ने कई फोटो शूट कराए थे और फैशन शो में भी भाग लिया.

उस ने मुंबई से अपनी मां को फोन कर बताया था कि वह मुंबई में है और 5 दिन बाद घर लौटेगी. बेटी के चुपचाप मुंबई जाने की जानकारी जब पिता जयकुमार को लगी तो वह बेहद नाराज हुए. राशि के लौटने पर उन्होंने उस की बेल्ट से पिटाई की और उस का मोबाइल छीन लिया.

जयकुमार को बेटी की सहेलियों से पता चला था कि राशि उन के साथ नहीं, बल्कि अपने बौयफ्रैंड प्रवीण के साथ मुंबई गई थी. इस जानकारी ने उन के गुस्से में आग में घी का काम किया.

बचपन को पीछे छोड़ कर बेटी जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी थी. पिता जयकुमार को बेटी के रंगढंग देख कर उस की चिंता रहती थी. जबकि राशि के खयालों में हरदम अपने दोस्त से प्रेमी बने प्रवीण की तसवीर रहती थी. वह चाहती थी कि उस का दीवाना हर पल उस की आंखों के सामने रहे. पिता द्वारा जब राशि पर ज्यादा पाबंदियां लगा दी गईं, तब दोनों चोरीचोरी शौपिंग मौल में मिलने लगे.

पिता द्वारा मोबाइल छीनने की बात जब राशि ने अपने प्रेमी को बताई तो उस ने राशि को दूसरा मोबाइल ला कर दे दिया. अब राशि चोरीछिपे प्रवीण के दिए मोबाइल से बात करने लगी. जल्दी ही इस का पता राशि के पिता को चल गया. उन्होंने उस का वह मोबाइल भी छीन लिया. इस से राशि का मन विद्रोही हो गया.

पिता की हिदायत व रोकटोक से नाराज राशि ने प्रवीण को पूरी बात बताने के साथ अपनी खोई आजादी वापस पाने के लिए कोई कदम उठाने की बात कही. हत्या के आरोप में गिरफ्तार मृतक की नाबालिग बेटी ने खुलासा किया कि वह पिछले एक महीने से पिता की हत्या की योजना बना रही थी.

इस दौरान उस ने टीवी सीरियल, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर हत्या करने के विभिन्न तरीकों की पड़ताल की थी. उस ने प्रेमी दोस्त प्रवीण के साथ मिल कर हत्या की योजना को अंजाम देने का षडयंत्र रचा. दोनों जुलाई महीने से ही जयकुमार की हत्या के प्रयास में लगे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी.

अंतत: 17 अगस्त को जब राशि की मां और भाई एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने पुडुचेरी गए तो उन्हें मौका मिल गया. यह कलयुगी बेटी अपने पिता की हत्या करने तक को उतारू हो गई. उस ने हत्या की पूरी योजना बना डाली.

जालिम बेटी  राशि ने घर में किसी के नहीं होने का फायदा उठा कर योजना के मुताबिक रात को खाना खाने के बाद पिता को पीने को जो दूध दिया, उस में नींद की 6 गोलियां मिला दी थीं. कुछ ही देर में पिता बेहोश हो कर बिस्तर पर लुढ़क गए.

पिता को सोया देख राशि ने उन्हें आवाज दे कर व थपथपा कर जाना कि वह पूरी तरह बेहोश हुए या नहीं.  संतुष्ट हो जाने पर राशि ने प्रवीण  को फोन कर घर बुला लिया. वह चाकू साथ ले कर आया था. घर में रखे चाकू व प्रवीण द्वारा लाए चाकू से दोनों ने बिस्तर पर बेहोश पड़े जयकुमार जैन के गले व शरीर पर बेरहमी से कई वार किए, जिस से उन की मौत हो गई. इस के बाद दोनों शव को घसीट कर बाथरूम में ले गए.

हत्या के सबूत मिटाने के लिए कमरे में फैला खून व दीवार पर लगे खून के छींटे साफ करने के बाद बिस्तर की चादर वाशिंग मशीन में धो कर सूखने के लिए फैला दी. इस के बाद दोनों आगे की योजना बनाने लगे. सुबह 7 बजते ही राशि घर से निकली और 3 बोतलों में पैट्रोल ले कर आ गई. दोनों ने बाथरूम में लाश पर पैट्रोल डाल कर आग लगा दी.

इस दौरान दोनों के पैर व प्रवीण के हाथ भी आंशिक रूप से झुलस गए. आग लगते ही पैट्रोल की वजह से तेजी से आग की लपटें और धुआं निकलने लगा. बाथरूम की खिड़की से आग की लपटें व धुआं निकलता देख कर पड़ोसियों ने फायर ब्रिगेड व पुलिस को फोन कर दिया था.

इस बीच राशि ने नाटक करते हुए मदद के लिए शोर मचाया और लोगों को बताया कि उस के पिता बाथरूम में नहाने गए थे तभी अचानक इलैक्ट्रिक शौर्ट सर्किट होने से आग लग गई, जिस से वह जल गए. इस तरह दोनों ने हत्या को दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो पाए.

बेटी को पिता की हत्या करने का फिलहाल कोई मलाल नहीं है. हत्याकांड का खुलासा होने के बाद पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार किया तब परिवार के सभी लोग अचंभित रह गए. सोमवार की शाम को राशि की मां व भाई भी लौट आए थे. मां ने कहा कि शायद हमारी परवरिश में ही कोई कमी रह गई थी.

हालांकि घर वालों ने उसे पिता के अंतिम संस्कार में भाग लेने को कहा, लेकिन राशि ने साफ इनकार कर दिया. उधर प्रवीण के मातापिता को अपने बेटे के प्रेम प्रसंग की कोई जानकारी नहीं थी.

प्रवीण राशि के पिता से नाराज था. उस ने गिरफ्तारी के बाद बताया कि उन्होंने उसे सार्वजनिक रूप से चेतावनी देते हुए अपनी बेटी से दूर रहने को कहा था. साथ ही कुछ दिन पहले उन्होंने राशि का मोबाइल छीन लिया था.

इस पर उस ने अपनी गर्लफ्रैंड को नया मोबाइल गिफ्ट किया तो उस के पिता ने वह भी छीन लिया. वह उस की गर्लफ्रैंड को पीटते, डांटते थे, जो उसे अच्छा नहीं लगता था. आखिर में प्रवीण ने अपनी गर्लफ्रैंड को पिता की प्रताड़ना से बचाने का फैसला लिया.

मंगलवार को हत्यारोपी बेटी से मिलने कोई भी रिश्तेदार नहीं पहुंचा. लड़की की मां भी घर पर ही रही. राशि ने पुलिस को बताया कि उस ने अपने पिता को चाकू नहीं मारा, लेकिन घटना के समय वह मौजूद थी.  राजाजीनगर पुलिस द्वारा मंगलवार को किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) के सामने राशि को पेश किया, जहां के आदेश के बाद उसे बलकियारा बाल मंदिर भेज दिया गया. राशि सामान्य दिखाई दे रही थी.

जब उसे जेजेबी के सामने ले जाया गया तो उस के चेहरे पर अपने पिता की हत्या करने का कोई पश्चाताप नहीं दिखा. वहीं राशि के प्रेमी प्रवीण को मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया गया.

हत्या करना इतना आसान काम नहीं होता. प्रवीण और राशि ने योजना बनाते समय अपनी तरफ से तमाम ऐहतियात बरती. दोनों हत्या को हादसा साबित करना चाहते थे. लेकिन वे भूल गए थे कि अपराधी कितना भी चालाक क्यों न हो, कानून के लंबे हाथों से ज्यादा देर तक नहीं बच सकता.

बेटा हो या बेटी, मांबाप को उन के चरित्र और व्यक्तित्व का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि मांबाप की आंखों में धूल झोंक कर गलत राहों पर उतर जाते हैं तो उन्हें संभाल पाना आसान नहीं होता.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

गर्लफ्रैंड के साथ सैक्स करने का मन करता है, उसे कैसे मनाऊं?

सवाल

मैं कालेज में पढ़ने वाला युवक हूं. इसी कालेज में एक लड़की से मेरी मुलाकात हुई. धीरेधीरे हम दोनों एकदूसरे के करीब आने लगे. हम दोनों एकदूसरे को प्यार भी करने लगे. अब उसे इस कदर चाहने लगा हूं कि उस के साथ सैक्स करना चाहता हूं. मैं उसे सैक्स के लिए किस तरह राजी करूं?

जवाब

अगर आप अपनी गर्लफ्रैंड के साथ सैक्स करना चाहते हैं तो यह आप की इच्छा है लेकिन इस के लिए अपनी गर्लफ्रैंड की राय भी आप को जान लेनी चाहिए कि क्या वह भी आप के साथ सैक्स करने को इच्छुक है?

आप दोनों ही रिलेशन में हैं और युवकयुवती हैं. इसलिए सैक्स का होना एक आम बात है मगर यह आपसी रजामंदी से हो तभी ठीक है। लेकिन आप की परेशानी यह है कि आप अपनी गर्लफ्रैंड को सैक्स के लिए कैसे मनाएं.

  • किसी भी युवती को सैक्स के लिए मनाने से पहले उस पर अपना भरोसा बनाएं. उसे हर बात की पहले जानकारी दें कि इस तरह या ऐसे करने से सैक्स होता है.
  • आप उसे कंडोम की जानकारी दें क्योंकि हो सकता है कि उसे इस बात की जानकारी न हो या फिर उसे डर हो कि सैक्स के बाद वह असमय प्रैगनैंट न हो जाए.
  • अलबत्ता, भरोसा जीतने के साथसाथ आप उस की बातों पर गौर करें कि वह क्या चाह रही है, उस के अंदर आप के लिए फीलिंग्स है या नहीं. इस तरह आप जान पाएंगे कि आप की गर्लफ्रैंड सैक्स करना चाहती है या नहीं क्योंकि रिलेशनशिप में किसी भी तरह की जोरजबरदस्ती करना बेकार है.
  • सैक्स के लिए यह भी जरूरी है कि अभी आप चोरीछिपे ही इस का आनंद उठाएं और भूल कर भी किसी तीसरे को जानकारी नहीं लगने दें। एक गर्लफ्रैंड इस शर्त पर भी सैक्स के लिए राजी होती है जब उसे यकीन हो जाता है कि बौयफ्रैंड इस की भनक किसी को नहीं चलने देगा. अकसर लड़के खुशीखुशी में बात को अपने रिश्तेदारों या दोस्तों से शेयर कर बैठते हैं, जो बिलकुल गलत है.
  • भरोसा, विश्वास और मजबूत संबंध के बावजूद भी अगर आप की गर्लफ्रैंड सैक्स के लिए राजी नहीं होती तो भूल कर भी जोरजबरदस्ती न करें. रिलेशनशिप को समय दें और यह अपनी गर्लफ्रैंड पर छोङ दें.

फिलहाल, बेहतर तो यही होगा कि दोनों पढ़ाई पर ध्यान दें और कैरियर बनाएं. इस के बाद ही अपनी लव लाइफ पर ध्यान दें. फिजिकल होना बेकार नहीं है, यह कुदरत का दिया एक अनमोल उपहार है और एकदूसरे के कनैक्शन को मजबूत करता है. लेकिन आप की गर्लफ्रैंड के लिए यह इमोश्नली बड़ा घातक है क्योंकि लड़कियां भावुक होती हैं और ज्यादा भावुक हो कर किसी से कुछ शेयर नहीं करतीं. उन्हें डर रहता है कि कहीं बात न फैल जाए.

इसलिए कालेज के दौरान आप पढ़ाई पर ध्यान दें. एकदूसरे के साथ रहें और कैरियर को पीछे छोड़ कर प्यार में न पड़ें.

अगर आप की भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सच्ची सलाह के लिए कैसी भी परेशानी टैक्स्ट या वौइस मैसेज से भेजें. मोबाइल नंबर : 08826099608

Sex Problem: क्या आपकी पत्नी को भी हैं ये 5 सैक्स समस्याएं

कहते हैं कि सफल दांपत्य जीवन में सैक्स एक बहुत बड़ी भूमिका निभाता है और विवाह के बिखराव का एक कारण सेक्स भी हो सकता है. आम धारणा है कि पुरुष को ही सैक्स में ज़्यादा रुचि होती है और महिला अमूमन इससे बचती है. लेकिन ऐसा नहीं है. पुरुष की तरह महिलाओं की भी सेक्स इच्छा होती है. अधूरा और सही समय पर संभोग के पूरा न होने पर महिलाओं को शारीरिक और मानसिक परेशानी होती है. दरअसल महिलाओं का सेक्स केवल संभोग तक सीमित नहीं होता, बल्कि स्पर्श, चुंबन आदि से भी उन्हें संतुष्टि मिलती है.

आइए हम आपको बताते है कि कौन कौन सी सैक्स समस्याएं आती है और उनका समाधान क्या है.

सैक्स में कमी

महिलाओं में सेक्स में कमी डिप्रेशन, थकान या तनाव की वजह से हो सकती है. इसके अलावा और भी वजह हो सकती है जैसे पार्टनर जिस तरह छूता है, वह पसंद नहीं आना, पसीना से या उसके मुंह से पान-तंबाकू वगैरह की बदबू आना आदि. कई महिलाओं को शरीर के कुछ खास हिस्सों पर हाथ लगाने से दर्द महसूस होता है या अच्छा नहीं लगता. इससे भी वे सेक्स से बचने लगती हैं.

लुब्रिकेशन की कमी

महिलाओं के जनन अंग (vagina) में लुब्रिकेशन (गीलापन) को उत्तेजना का पैमाना माना जाता है. कुछ महिलाओं को कम लुब्रिकेशन की शिकायत होती है और ज़ाहिर है ऐसे में सैक्स काफी तकलीफदेह हो जाता है. लुब्रिकेशन में कमी तीन वजहों से हो सकती है. इन्फेक्शन, हार्मोंस में गड़बड़ी या फिर तरीके से फोर प्ले न करना.

सैक्स के दौरान दर्द

कुछ महिलाओं को सैक्स के दौरान दर्द होता है. कई बार यह दर्द बहुत ज़्यादा होता है और ऐसे में महिला सेक्स से बचने लगती है. साथी को इस दर्द का अहसास नहीं होता और उसे लगता है कि साथी महिला की दिलचस्पी नही है या फिर सहयोग नहीं कर रही है.

और्गेज्म न होना

महिलाओं में यह शिकायत आम होती है कि उनका पार्टनर उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाता यानी उनका और्गेज्म नहीं हो पाता. कुछ को और्गेज्म नहीं होता और कुछ को होता तो है पर महसूस नहीं होता. कुछ महिलाओं को लुब्रिकेशन के दौरान ही जल्दी ऑर्गेज्म हो जाता है. कुछ को बहुत देर से और्गेज्म होता है.

वैजाइनल पेन

कभी-कभी महिलाओं को नाभि के नीचे और प्यूबिक एरिया के आसपास दर्द महसूस होता है. यह दर्द वैसा ही होता है, जैसा पीरियड्स के दौरान होता है. इसकी वजह यह है कि उत्तेजना होने पर प्राइवेट पार्ट के आसपास खून का बहाव होता है. ऐसे में लुब्रिकेशन होता है पर क्लाइमैक्स नहीं होता. इससे इस एरिया में खून जम जाता है और दर्द होने लगता है.

समाधान

सैक्स समस्या का सबसे बड़ा कारण है पति-पत्नी का सैक्स समस्याओं के बारे में बात ही नहीं करना. पति और पत्नी दोनों को इस मामले में खुलकर बात करनी चाहिए और कोई भी छुपाना नहीं चाहिए. हो सकता है इस मामले में पत्नी पहल न करें तो ऐसे में पति को चाहिए कि उनका व्यवहार ऐसा हो कि उनकी पत्नी उनसे हर बात शेयर कर सकें. यदि आप चाहते हैं कि आप अपने साथी से सभी समस्याओं खासकर सेक्स समस्याओं के बारे में बातचीत कर सकें तो आपको अपने साथी को विश्वास में लेना होगा. यदि आप अपने साथी को अपनी कोई सैक्स समस्या के बारे में बताना चाहते हैं तो आप उसे सीधे-सपाट शब्दों में ना कहें बल्कि उसके लिए थोड़ा समय लें और अपने साथी को बातचीत और प्यार से सहज करें. इसके बात सामान्य बातचीत के बाद ही अपनी समस्या बताएं.

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