Story in Hindi
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युवती ने एक ही बार में गिलास खाली कर दिया. पीने के बाद तीनों ने साथसाथ खाना खाया. खाना खातेखाते तीनों ही नशे में डूब चुके थे. खाना खाने के बाद भानु नंदन की ओर देख कर उठते हुए बोला, ‘‘थैंक्यू फौर ड्रिंक्स एंड डिनर. अब चलता हूं.’’
‘‘फोटो तो डिलीट कर दो. तुम ने वादा किया था.’’ नंदन माथुर ने कहा, तो भानु कोट की जेब में डाथ डालते हुए बोला, ‘‘हां, वादा तो किया था. वादा निभाने में भी मुझे कोई एतराज नहीं है.’’ भानु जेब से मोबाइल निकाल कर नंदन की ओर बढ़ाते हुए बोला, ‘‘लो, ये लो मोबाइल ही रख लो. तुम कोई गैर थोड़े ही हो. सुबह ले लूंगा.’’
नंदन ने मोबाइल लेने के लिए हाथ बढ़ाया तो भानु ने हाथ पीछे खींच लिया. वह युवती की ओर देख कर बोला, ‘‘दोस्त, मुझे फोटोग्राफी का बड़ा शौक है. अब एक क्लाइमेक्स सीन और बनाना है. उस के बाद मोबाइल तुम्हें दे दूंगा.’’
‘‘कौन सा सीन?’’
‘‘तुम दोनों एक बार गले लग जाओ.’’
‘‘ब्लैकमेल करना चाहते हो हमें’’ नंदन माथुर ने कहा, तो भानु बोला, ‘‘ब्लैकमेल ही करना होता तो इस सब की जरूरत नहीं थी. काफी सबूत जुटा लिए मैं ने नंदन माथुर को नंगा करने के लिए. तुम लोग हकीकत में एंजौय कर रहे हो और मैं केवल उस की एक झलक देखना चाहता हूं. चलो दोस्त, दोनों आलिंगनबद्ध हो जाओ. उस के बाद मैं इस कमरे की घुटन में एक पल भी नहीं रूकूंगा.’’
नंदन माथुर और युवती नशे में थे और भानु को किसी तरह टालना चाहते थे. अत: उसे खुश करने के लिए एकदूसरे की बाहों में सिमट गए. जब वे दोनों एकदूसरे की बांहों में सिमटे थे, तभी भानु ने तड़ातड़़ उन के 2-3 शौट खींच लिए.
फोटो खींचने के बाद भानु ने मोबाइल जेब में डाला और हाथ हिला कर दरवाजे की ओर बढ़ते हुए बोला, ‘‘गुड नाइट फ्रैंडस, सुबह चाय पर मुलाकात होगी.’’
‘‘भानु,’’ नंदन गुस्से में चीखे, ‘‘ये क्या बद्तमीजी है. तुम ने फोटो डिलीट करने की बात की थी. हम ने तुम्हारी हर बात मानी, अब मोबाइल दो मुझे.’’
भानु ने पीछे मुड कर नंदन की ओर देखा और मुस्कराते हुए व्यंग्य में बोला, ‘‘पता नहीं इतना बड़ा बिजनैस कैसे चलाते हो! अक्ल तो खाक की भी नहीं है तुम्हारे अंदर. जरा सोचो, जिस कैमरे में इतनी कीमती फोटो हों, उसे मैं तुम्हें मुफ्त में क्यों दूंगा.’’
‘‘ये बात पहले ही तय हो चुकी थी. तुम ने खुद ही वादा किया था.’’
भानु वापस लौट कर नंदन के पास आया और उस के कंधे पर हाथ रख कर बोला, ‘‘दोस्त, यह मामला रुपएपैसे या बिजनैस का नहीं है. ऐसे धंधों में वादा खिलाफी आम बात है. बड़ी सीधी सी बात है, इस हाथ लो, इस हाथ दो. मेरा खयाल रखोगे तो मैं मोबाइल तुम्हारे हाथ में थमा दूंगा.’’
‘‘और क्या चाहिए तुम्हें?’’ नंदन ने गुस्से में पूछा, तो भानु युवती की ओर देख कर मुस्कराते हुए बोला, ‘‘ये…क्या नाम है इस का? ओह, आईसी, जान का जंजाल. आज की रात तुम्हारी जान के जंजाल को अपनी जान का जंजाल बनाना चाहता हूं. बोलो, हां या न?’’
‘‘भानु.’’ नंदन गुस्से में चीखे तो भानु सहज स्वर में बोला, ‘‘गुस्सा सेहत के लिए हानिकारक तो होता ही है नंदन! कभीकभी इज्जत के लिए भी दुखदाई बन जाता है. ठंडे दिमाग से सोचो, इस मोबाइल में तुम्हारी और इस लड़की की जिंदगी की हकीकत कैद है. अगर तुम ने मेरी बात मान ली तो यह हकीकत यहीं दफन हो जाएगी और नहीं मानी तो यही हकीकत सजधज कर मेरठ की सड़कों पर भरतनाट्यम करेगी.’’
‘‘यह ठीक नहीं है भानु.’’ नंदन माथुर हथियार डालते हुए परेशान हो कर बोले, ‘‘किसी की इज्जत से इस तरह खेलना ठीक नहीं है.’’
‘‘मैं इज्जत से कहां खेल रहा हूं. मैं तो सिर्फ अपना हक मांग रहा हूं.’’ भानु युवती की ओर देख कर बोला, ‘‘बंद कमरे में तुम एक जवान लड़की के साथ ऐश कर सकते हो, तो क्या मैं नहीं कर सकता? मैं तो उम्र में भी तुम से साल 2 साल छोटा ही हूं.’’
‘‘ये लड़की कालगर्ल नहीं है भानु. मेरी…’’
‘‘तुम्हारी प्रेमिका है,’’ भानु नंदन का वाक्य पूरा करते हुए व्यंग्य से बोला, ‘‘दो बच्चों के बाप और चालीस साला आदमी की चौबीस साला कोई प्रेमिका भी हो सकती है, यह आज पहली बार पता चला. यह भी आज पहली बार जाना कि कोई शादीशुदा लड़की अधेड़ उम्र के अपने प्रेमी के लिए मायके जाने के नाम पर पति को धोखा दे कर ऐश करने के लिए मेरठ से दिल्ली आ सकती है.’’
पलभर रूक कर भानु युवती की बगल में खड़ा होते हुए बोला, ‘‘जो लड़की मानमर्यादा और पति को छोड अपने से डेढ़ गुनी उम्र वाले मर्द की बांहों में सिमट सकती है, वह कालगर्ल से कम नहीं होती.
तुम्हें क्या फर्क पड़ता है, जैसा तुम्हारा पति, वैसा ही नंदन और वैसा ही मैं. इज्जत का जरा भी खयाल है तो हां कर दो.’’
नंदन समझ चुके थे कि बाजी भानु के हाथों में है. अपनी इज्जत बचाने के लिए उन्हें मोबाइल हासिल करना जरूरी लगा. सोच विचार कर उन्होंने लड़की से बात की. युवती भी जान चुकी थी कि इज्जत बचाने का एक ही विकल्प है कि वह भानु के साथ जाए. उस ने हां कर दी, तो नंदन भानु से बोले, ‘‘मोबाइल दो, सुजाता तुम्हारे कमरे में जा रही है.’’
भानु ने इस बार कोइ नानुकुर नहीं की. सुजाता का हाथ थामते हुए उस ने जेब से मोबाइल निकाल कर नंदन की ओर बढ़ा दिया. जातेजाते वह नंदन की ओर देख कर बोला, ‘‘दोस्त बुरा मत मानना. इस पर दिल आ गया था, इसलिए इतना प्रपंच करना पड़ा. 2 घंटे बाद इसे वापस भेज दूंगा. सोना नहीं, इंतजार करना.’’
भानु सुजाता के साथ कमरे से बाहर निकल गया. नंदन मोबाइल हाथ में थामे खड़े रह गए. मोबाइल गौर से देखा तो याद आया, भानु पिछले महीने विदेशी टुअर से लौटा था तो एक जैसे 2 मोबाइल ले कर आया था, एक अपने लिए, एक उन के लिए. लेकिन उन्होंने लेने से इनकार कर दिया था. देखा, उस मोबाइल में उन का और सुजाता का कोई फोटो नहीं था. इस का मतलब भानु ने उन्हें दूसरा मोबाइल थमा दिया था.
हालांकि भानु ने कमरा नंबर बताया था. पर उन्हें भरोसा नहीं था कि उस ने सच बोला होगा. रात में तमाशा करना उन्हें वैसे भी ठीक नहीं लगा. वह बेड पर जा लेटे, लेकिन नशे के बावजूद वह सो नहीं सके. 2 घंटे बाद जब सुजाता वापस लौटी, तो वह जाग रहे थे. सुजाता नशे में भी थी और थकी हुई भी वह आते ही सो गई, लेकिन नंदन माथुर रातभर नहीं सो सके.
सुबह 7 बजे जब डोर बेल बजी तब भी नंदन जाग रहे थे. उन्होंने दरवाजा खोला, तो भानु को सामने खड़े पाया. वह कुछ कहते इस से पहले ही भानु बोला, ‘‘मैं जा रहा हूं. मेरा मोबाइल लौटा दो.’’
‘‘मैं ने तोड़ कर डस्टबिन में डाल दिया तुम्हारा मोबाइल. कहो तो ला दूं.’’ नंदन ने गुस्से में कहा, तो भानु ने मुस्कराते हुए जेब में हाथ डाल कर वैसा ही मोबाइल निकाल कर दिखाते हुए कहा, ‘‘कोई बात नहीं दोस्त, वो तुम्हारा ही था. मेरा मोबाइल तो मेरे पास है और उस में फोटो और रिकौर्डिंग दोनों हैं.’’
भानु अपनी बात कह कर आगे बढ़ गया नंदन मूक खड़े उसे जाते देखते रह गए.
अगले दिन शाम को भानु ने नंदन को पीनेपिलाने के लिए अपनी कंपनी में बुलाया तो वह डर की वजह से इनकार नहीं कर सके. दोनों आमनेसामने बैठे. हमेशा की तरह बातचीत कुछ नहीं.
एकएक पैग पीने के बाद भानु ने जेब से मोबाइल निकाल कर नंदन के सामने रखते हुए कहा, ‘‘मुंह मत बना, ले खुद सब कुछ डिलीट कर दे. तू दोस्त है मेरा. तेरी इज्जत मेरी इज्जत. तू सुजाता को छुपा रहा था, इसलिए ऐसा करना पड़ा. मैं ने तो हमेशा हिस्सा बांटा है तुम से.’’
वह शाम भी उस ने जूली के साथ बिताई. पूरे समय जूली उस का आभार प्रकट करती रही. उस ने मनोज को कसम खिलाई कि वह भारत वापस जा कर उसे भूलेगा नहीं और हमेशा उसे फोन करेगा.
दूसरे दिन मनोज भारत के लिए वापस निकल आया. जूली ने आंखों में आंसू भर कर उसे भावभीनी विदाई दी. उस ने वादा किया कि वह जल्द से जल्द उसे पैसे वापस करेगी.
भारत वापस आने पर मनोज का हर रोज जूली से बात करने का सिलसिला जारी रहा. बातों से ही उसे पता चला कि जूली अपने घर लौट गई है और उस ने शौप खोल ली है. वह हर रोज अपने कार्य की प्रगति के बारे में उत्साह से उसे बताती, जैसे आज उस ने क्या खरीदा, उसे शौप में कैसे जमाया, लोग उस की दुकान पर आने लगे हैं, उसे उस के पैसे जल्द से जल्द चुकाने हैं इसलिए वह ज्यादा से ज्यादा मेहनत कर रही है.
इधर, दिन, हफ्ते, महीने बीत गए पर जूली ने मनोज का एक भी पैसा वापस नहीं किया. मनोज को तो भावेश, सुरेश और बाकी लोगों के पैसे वापस करने ही पड़े. दोनों अकसर उसे कहते कि उस ने धोखा खाया है. जूली ने उसे बेवकूफ बनाया है पर मनोज का मन यह मानने को तैयार नहीं होता. लेकिन आजकल वह जब भी जूली से पैसे लौटाने की बात करता, वह टालमटोल करने लगती, अपनी परेशानियां गिनाने लगती. फिर एक दिन अचानक जूली ने अपना फोन बंद कर दिया. मनोज महीनों उसे फोन लगाता रहा पर वह नंबर स्विच औफ ही आता. अब तो मनोज भी समझ गया कि उस ने धोखा खाया.
वह रातदिन जूली को गालियां देता और अपनी मूर्खता पर पछताता. ठगे जाने से वह बुरी तरह तिलमिला रहा था. उसे सब से ज्यादा जलन इस बात पर हो रही थी कि उस के दोस्त इस से बहुत कम पैसों में लड़कियों के साथ ऐश कर आए और वह इतना सारा पैसा खर्च कर के भी सूखा रह गया. बेकार की भावनात्मक सहानुभूति में पड़ कर अच्छाभला चूना लग गया.
2 साल बीत गए. जूली का अतापता नहीं था. मनोज भी उस कसक को जैसेतैसे कर के भूल गया था.
एक दिन मुंबई में उस का एक दोस्त उस से मिलने आया. दोनों औफिस में मनोज के केबिन में बैठ कर बातें कर रहे थे. बातों ही बातों में उस के दोस्त अजय ने उसे बताया कि वह हाल ही में थाईलैंड के पटाया शहर गया था. और उस के बाद अजय की कहानी सुन कर मनोज सन्न रह गया. उसे लगा कि जैसे अजय उस की ही कहानी सुना रहा है. उस की कहानी का प्रत्येक शब्द और घटना वही थी जो
2 साल पहले मनोज के साथ घटी थी.
मनोज के घाव हरे हो गए. उस ने अजय को अपनी आपबीती सुनाई. सुन कर अजय भी बुरी तरह चौंक गया. उस ने तुरंत जूली को फोन लगाया क्योंकि उस के पास उस का नया नंबर था ही. उस ने स्पीकर औन कर के जूली से बात की. जूली की आवाज सुनते ही मनोज उसे पहचान गया. उस ने अजय को इशारे से बताया कि यह वही है. अब तो अजय भी बौखला गया और मनोज का तो गुस्से से बुरा हाल हो गया. उस के अंदर लावा उबलने लगा. वह जूली को अनापशनाप बोलने लगा. पहले तो वह अचकचा गई फिर मनोज को पहचान गई. मनोज उसे गालियां देने लगा तो जूली को भी गुस्सा आ गया.
‘‘देखिए, मिस्टर मनोज, जबान संभाल कर बात करिए. आप को कोई हक नहीं बनता मुझे बुराभला बोलने का,’’ जूली तीखे स्वर में बोली.
‘‘धोखेबाज, एक तो धोखा देती हो ऊपर से तेवर दिखाती हो. उलटा चोर कोतवाल को डांटे,’’ मनोज तिलमिला कर बोला.
‘‘धोखेबाज कौन है यह अपनेआप से पूछो,’’ जूली कड़वे स्वर में बोली, ‘‘तुम मर्द लोग विदेश जा कर कम उम्र की लड़कियों के साथ रंगरलियां मनाने और ऐश करने के लिए सदा लालायित रहते हो. दूसरी लड़कियों के साथ गुलछर्रे उड़ाने को आतुर रहते हो. लड़कियों के साथ घूमने और एंजौय करने, मौजमस्ती करते समय तुम्हें एक बार भी यह खयाल नहीं आता कि तुम अपनी पत्नियों के साथ धोखा कर रहे हो. लड़कियां तुम्हें हंस कर देख लें, तुम्हारे साथ मौजमस्ती कर लें तो तुम्हें अपना जीवन सार्थक और धन्य नजर आने लगता है. बोलो, तुम्हारा अंतर्मन एक बार भी तुम्हें कचोटता नहीं है?’’
फिर थोड़ा रुक कर –
‘‘मैं ने न तुम्हारी जेब काटी न बंदूक दिखा कर तुम्हें लूटा है. पैसे तुम ने अपनी मरजी से मुझे दिए थे.’’
‘‘लेकिन तुम ने पैसे वापस करने को तो कहा था न? उस का क्या?’’ मनोज गुस्से से बोला.
‘‘हां, कहा था. नहीं कहती तो क्या एक गरीब और असहाय लड़की की सहायता बिना किसी लालच के करते तुम लोग? नहीं, कभी नहीं करते. धोखा असल में मैं ने तुम्हें नहीं दिया, तुम्हारी गलत प्रवृत्ति ने तुम्हें दिया है. सचसच बताना, पैसा देने के बाद क्या तुम्हारे मन में मेरे साथ हमबिस्तर होने की तीव्र इच्छा नहीं हो रही थी? पैसे के एवज में क्या तुम लोग मेरा शरीर नहीं चाह रहे थे. वह तो मैं पूरे समय तुम्हें शराफत का वास्ता देती रही, इसलिए बच गई. और मैं तुम्हारी मर्यादा और चरित्र की झूठी तारीफें भी इसीलिए करती रहती थी कि तुम लोग अपनी हद में रहो.’’
जूली की बातों की सचाई ने मानो उन्हें नंगा कर दिया. दोनों एकदूसरे से नजरें चुराते हुए सिर नीचा कर के बैठे रहे और जूली बोलती रही.
‘‘सच कहूं तो पुरुषों को उन की प्रवृत्ति ही धोखा देती है. नया रोमांच, नया अनुभव पाने की इच्छा ही उन्हें डुबोती है. तुम लोग अपनी पत्नियों के प्रति वफादार होते नहीं और हमें गालियां देते हो. क्या बुरा करती हूं जो तुम जैसे मर्दों से पैसा ऐंठ कर मैं आज तक अपनी इज्जत बचाती आई हूं. आज के बाद मुझे कभी फोन मत करना क्योंकि यह नंबर मैं आज ही बंद कर दूंगी. अच्छा हुआ, जो अजय को भी सच पता चल गया. गुडबाय,’’ और जूली ने फोन काट दिया.
अजय और मनोज सन्न हो कर चुप बैठे थे, जूली ने उन्हें आईना दिखा दिया था. चिडि़यां खेत चुग चुकी थीं.