नरेंद्र मोदी सी तेजी में दिख रहे हैं योगी आदित्यनाथ

प्रधानमंत्री बनने के बाद जिस तरह से नरेन्द्र मोदी ने सरकारी विभागों से लेकर संसद तक में सुधार और साफ सफाई का अभियान चलाया था कुछ उसी राह पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी चल रहे हैं. मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर हजरतगंज थाने तक उनकी यह तेजी दिखाई दी. आने वाले दिनों में दूसरे ऑफिसों में भी अभियान दिखेगा. देखने वाली बात यह होगी की इस अभियान का सरकारी कामकाज पर क्या असर पड़ता है? इससे जनता को सच में कितनी राहत का अनुभव होता है. सरकारी नौकर अभी ‘तेल देखो तेल की धार देखो’ के मुहावरे की तरह से पूरे अभियान को देख रहे हैं. कुछ साल पहले बसपा नेता से मुख्यमंत्री बनी मायावती भी अपने शुरूआती फैसलों से लोगों को चौकाने वाली काम करती थी. कई बार सड़क, नाली का औचक्क निरीक्षण करते समय अपने पैर की ठोकर मार कर देखती थी कि ईंटा कितना सही लगा है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में पहली बार प्रवेश किया तो संसद भवन की सीढियों के पैर छुये. उस समय शपथ ली थी कि संसद के इस पवित्र जगह को अपराधियों से मुक्त कर देंगे. यही नहीं स्वच्छता अभियान के तहत केन्द्र सरकार के मंत्रियों से लेकर सरकारी विभागों और विश्वविद्यालयों तक में सफाई अभियान शुरू हो गया. इसका प्रभाव कब तक चला और क्या असर हुआ किसी भी रेलवे स्टेशन पर जाकर देखा जा सकता है.

केन्द्र के सरकारी विभागों में कितना भ्रष्टाचार कम हुआ वहां पर काम कराने वाले लोगों को बेहतर तरह से पता है. प्रधानमंत्री ने हर सांसद को कहा था कि वह हर साल एक गांव को गोद लेकर उसका विकास करे. शुरूआत में उसका भी बहुत प्रचार हुआ. दूसरे साल किसी सांसद ने यह नहीं बताया कि अब उसने कौन सा गांव गोद लिया है जो गांव पिछले साल गोद लिया था उसको क्या हुआ.

मोदी जी की ही तरह योगी जी भी मुख्यमंत्री बनने के बाद तेजी में हैं. सरकारी सिस्टम को गतिशील और स्वच्छ बनाने की शपथ दे रहे हैं. सरकारी विभाग जितने बेहतर तरह से काम करे इससे अच्छा कुछ हो ही नहीं सकता. सरकारी विभागों में सुधार एक दिन में नहीं आयेगा. सरकारी नौकर जनता का काम बिना रिश्वत के समय पर कर दे इसके लिये केवल सिटीजन चार्टर लागू करने से काम नहीं होने वाला.

सरकारी नौकरों की कार्यशैली बदलनी होगी. इनकी पोशाक बदलने से कुछ नहीं होगा यह जनता के दर्द को समझ ऐसी सोंच डालनी होगी. पुलिस और तहसील सुधर जायें. किसानों की जमीनों पर से अवैध कब्जे हट जाये किसानों को जमीन की नापजोख के लिये दरदर भटकना न पड़े ऐसा प्रयास हो.

जब थाने की पुलिस पीड़ित की बात सुनने से लेकर उसपर कड़ी कारवाई करने लगे तो किसी भी तरह के एंटी रोमियो स्क्वायड की जरूरत नहीं होगी. पुलिस संवेदनशील हो जाये वह जनता और बदमाश के बीच के फर्क को बखूबी समझती है बस केवल महसूस नहीं करती. नेताओं और दंबगो की दबाव में आकर गलत काम करना बंद कर दे इससे बड़ा कोई सुधार नहीं हो सकता.

योगी जी आपको थाने जाने की जरूरत नहीं है. आपका इकबाल इतना है कि हर पुलिस थाना, तहसील और सरकारी ऑफिस सुधर सकता है. आपका संदेश ही काफी है. यह तेजी बनी रहे तो बहुत कुछ हो सकता है. अभी यह लोग समझ रहे है कि योगी जी की तेजी कुछ दिनों की है ऐसे में यह लोग बुरे दिनों की तरह जल्दी से इसको बीत जाने की राह देख रहे हैं. यह दिन लंबे चले तभी सार्थक प्रभाव पड़ सकेगा.

अभिनेत्री बनने के लिए सुंदरता ही जरूरी नहीं : अदा शर्मा

15 वर्ष की उम्र से अभिनय के क्षेत्र में उतरने वाली हंसमुख, विनम्र स्वभाव की अभिनेत्री अदा शर्मा ने विक्रम भट्ट की हौरर फिल्म ‘1920’ से अभिनय की शुरुआत की. उन्हें अभिनय से लगाव था. किसी भी रूप में उन्हें अभिनेत्री ही बनना था, जिस में साथ दिया उन के मातापिता ने, जिन्होंने हमेशा हर काम करने की आजादी दी. हिंदी के अलावा उन्होंने तमिल, तेलुगू और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया है. मुंबई की अदा शर्मा के पिता मर्चेंट नेवी में थे और उन की मां एक क्लासिकल डांसर हैं.

बचपन से ही उन्हें कला का माहौल मिला है. अदा एक जिमनास्ट हैं. उन्होंने 3 साल की उम्र से डांस सीखना शुरू किया था. उन्होंने मुंबई के ‘नटराज गोपी किशन कथक डांस एकैडमी’ से कथक में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है. उन्होंने सालसा व जैज नृत्य भी सीखा है और वे एक अच्छी बैले डांसर भी हैं. उन्हें हर तरह की फिल्में करने का शौक है और किसी भी प्रकार के दृश्य अगर कहानी में जरूरत है, तो उन्हें करने से हिचकिचाती नहीं हैं. इन दिनों वे अपनी फिल्म ‘कमांडो 2’ को ले कर व्यस्त हैं, उन से मिल कर बात करना रोचक था. पेश हैं उन से हुई बातचीत के अंश.

इस फिल्म का मिलना कैसे संभव हुआ?

मैं 2 बड़ी फिल्में साउथ में तेलुगू में कर रही थी. एक कमर्शियल फिल्म ‘गरम’ और दूसरी ‘शनम’ जो रियलिस्टिक लव स्टोरी है. मैं ‘कमांडो 2’ का औडिशन दे कर हैदराबाद शूट के लिए चली गई थी. मुझे कोई फोन नहीं आया. ‘शनम’ फिल्म के रिलीज होने के बाद मैं साउथ में थी. वहां मुझे फोन आया कि मैं इस फिल्म में हूं और पूछा गया कि मैं कब मुंबई आ रही हूं. बस, यहीं से इस फिल्म से जुड़ गई.

इस फिल्म का ‘वाउ’ फैक्टर क्या था, जिस से आप आकर्षित हुईं?

यह एक ऐक्शन फिल्म है. मैं ने ऐसी भूमिका अभी तक नहीं निभाई है, साउथ की फिल्मों में मेरी भूमिका काफी सीरियस और इमोशनल ड्रामा वाली रही है. रोनाधोना बहुत है, इस तरह का किरदार मुझे पहले कभी नहीं मिला है. इस में दर्शकों को भी कुछ नया देखने को मिलेगा. इस के अलावा हैदराबादी तेलुगू भाषा, जो इस में मैं ने बोली है वह भी नई है. इस से पहले विद्या बालन ने हैदराबादी भाषा का प्रयोग किया है, लेकिन हैदराबादी तेलुगू का प्रयोग किसी ने नहीं किया है.

किस तरह की तैयारी आप ने की है?

मैं एक नैशनल जिमनास्ट हूं. मैं ने 4 साल की उम्र से इसे सीखा है. मेरी मां एक डांसर हैं. मैं ने मलखम्भ भी किया है. मैं एक छोटे से शहर विजयवाड़ा से हूं, लेकिन अब मुंबई में रहती हूं. इसलिए बहुत सारी बेसिक बातें ऐक्शन के बारे में जानती हूं. इस फिल्म में मैं एनकाउंटर स्पैशलिस्ट बनी हूं. इसलिए ‘गन ’ को सही पकड़ना आदि सभी ऐक्शन की ट्रेनिंग शैड्यूल से 20 दिन पहले मैं ने और विद्युत ने विदेश से लाए गए ट्रेनर से ली है. शारीरिक ट्रेनिंग में मेरी ‘किक्स’ और ‘पंचेस’ अब काफी अच्छे हो गए हैं.

फिल्मों में आने की प्रेरणा कहां से मिली? कितना संघर्ष था?

10वीं की परीक्षा देने के बाद मैं ने निर्णय लिया कि मैं फिल्मों में काम करूंगी, लेकिन पता नहीं यह कीड़ा कहां से आया था. मैं ने अपना पोर्टफोलियो बनवा कर औडिशन देना शुरू कर दिया था. मैं इंडस्ट्री से बाहर की हूं मुझे पता था कि कोई भी काम मुझे आसानी से नहीं मिलेगा. करीब 1 साल के बाद फिल्म ‘1920’ के लिए औडिशन हुआ. मैं अपनेआप को लक्की मानती हूं कि पहली फिल्म में मुझे अभिनय करने का मौका मिला. ऐक्टिंग के स्केल पर मैं जितना कर सकती थी किया. आज भी लोग उस फिल्म के बारे में बात करते हैं.

मेरे मातापिता हमेशा बहुत सहयोग देते हैं. मैं उन की इकलौती संतान हूं. बचपन में मैं हर तरह की फिल्में देखना पसंद करती थी. मुझे लगता है कि अगर फिल्म खराब है तो भी मैं देख लूं. इस से मुझे पता चलता है कि मुझे ऐसा काम नहीं करना चाहिए. सब के लिए एक्टिंग भी करती हूं. मुझे मिमिक्री करने का बहुत शौक है.

दक्षिण की फिल्मों और बौलीवुड की फिल्मों में क्या अंतर महसूस करती हैं?

अंतर कुछ भी नहीं है. ये सब निर्देशक पर निर्भर करता है. निर्देशक के दिमाग में पूरी फिल्म होती है. इस के अलावा सारे तकनीशियन वहां से यहां भी आते हैं, काम करते हैं. सिर्फ भाषा अलग है.

विद्युत जामवाल के साथ काम करना कैसा लगा?

विद्युत एक मंजे हुए कलाकार हैं. उन के  साथ काम करना बहुत आसान और मजेदार था. वे सीरियस दृश्य भी आसानी से कर लेते हैं. सैट पर खूब मस्ती की है और अब हम दोनों अच्छे दोस्त बन चुके हैं.

फिल्म का कठिन भाग क्या था?

फिल्म में मेरा एक्सैंट बहुत कठिन था, क्योंकि निर्देशक ने सोचा था कि फिल्म की भाषा ऐसी हो, जो सब को समझ में आए. मेरी टीचर सुनीता मैडम ने मेरे साथ 2 महीने तक भाषा पर काम किया.

ग्लैमर वर्ल्ड में टिके रहने के लिए किस तरह की मनोदशा रखनी चाहिए?

हर क्षेत्र में लोग आप को नकारात्मक सोच देने के लिए लगे रहते हैं. ग्लैमर वर्ल्ड में यह बात कुछ अधिक है, नैगेटिविटी आप को यहां अधिक मिलती है. ‘पौजिटिविटी’ को बनाए रखना यहां बहुत कठिन होता है.

बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो आप को नीचा दिखाने की कोशिश करते रहते हैं. यहां मन से बहुत स्ट्रौंग रहने की जरूरत होती है. यह क्षेत्र बहुत शेकी है. आज जो ऊपर है कल कहां होगा, कुछ पता नहीं होता, कुछ सुरक्षा नहीं होती. इसलिए हमेशा पौजिटिव रहना, किसी के बारे में बुरा न सोचना बहुत जरूरी है. अगर आप उस में एक बार चले जाते हैं, तो किसी की बुराई करना, उसे भलाबुरा कहना आप की आदत बन जाती है, जिस में आप खुद ही फंस जाते हैं. यह शक्ति मुझे मेरे परिवार से मिली है. मेरे पिता ने हमेशा कहा है कि अपनेआप को ऊंचा दिखाने के लिए किसी को नीचा दिखाने की जरूरत नहीं है.

कोई ड्रीम प्रोजैक्ट है क्या?

मेरा स्ट्रौंग जोनर रोमांस है और भारतीय सिनेमा में रोमांस एक जबरदस्त भूमिका निभाता है. मुझे वैसी फिल्में करने में अच्छा लगता है.

मैं हर तरह की फिल्में करना चाहती हूं. मैं स्ट्रौंग अभिनेत्री की भूमिका हमेशा निभाना चाहती हूं, ताकि लोग हौल से निकल कर मेरी भूमिका को याद रखें. मैं सभी निर्देशकों के साथ काम करना चाहती हूं.

फिल्मों में इंटीमेट सीन करने में कितनी सहज हैं?

जब मैं अभिनय की ओर आई तो हमेशा सोचा कि मैं अपनेआप को किसी भी बात से न रोकूं, क्योंकि मैं ने देखा है कि लोग कुछ कहते हैं, लेकिन कुछ सालों बाद वही सीन करते हैं. मैं बहुत साहसी हूं और सच बोलना पसंद करती हूं. मैं काफी बोल्ड हूं. पहली फिल्म में दांतों पर कालाकाला रंग लगा कर परदे पर आना, चीखनाचिल्लाना किसी भी हीरोइन के लिए आसान नहीं होता. ऐसे में किसिंग सीन तो बहुत आसान हैं.

समय मिले तो क्या करती हैं?

हर तरह की फिल्में देखती हूं, पियानो बजाती हूं और डांस की प्रैक्टिस भी करती हूं.

कितनी फैशनेबल और फूडी हैं?

रियल लाइफ में मैं अधिक फैशनेबल नहीं हूं, लेकिन जरूरत के अनुसार कपड़े पहनती हूं. मैं किसी ब्रैंड के कपड़े पहनने में विश्वास नहीं करती, जो पसंद आए उसे पहन लेती हूं. मुझे स्टाइल पसंद है. मैं बहुत फूडी हूं और हर तरह की डिशेज खाती हूं. मैं शाकाहारी हूं. स्ट्रीट फूड में मुझे चाट बहुत पसंद है. हफ्ते में 4 बार पानीपूरी खाती हूं.

फिटनैस पर कितना ध्यान देती हैं?

मैं मलखंभ और डांस करती हूं. जो करीब 1 से 2 घंटे का होता है. इसे मैं समय के अनुसार करती रहती हूं.

यूथ के लिए क्या मैसेज देना चाहती हैं?

आज की लड़कियां अधिक सुंदर हैं. अगर आप में अभिनय की प्रतिभा है तो आप उसे आगे बढ़ाएं, उस पर ध्यान दें. केवल सुंदर होने से अभिनेत्री नहीं बना जा सकता कुछ अलग ऐक्स फैक्टर्स आप में होने चाहिए ताकि लोग चकित रह जाएं. आजकल अच्छी भूमिकाएं लड़कियों के लिए भी लिखी जा रही हैं.

किस बात से गुस्सा आता है?

जो लोग जानवरों के साथ खिलवाड़ करते हैं. उन पर गुस्सा आता है. मैं एनिमल लवर हूं और जानवरों को आजाद रखने में विश्वास करती हूं. उन्हें किसी फ्लैट या पिंजरे में कैद कर के रखना पसंद नहीं करती. मेरे फ्लैट में एक कौआ रोज आता है, जिसे मैं रोज खाना देती हूं.

महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे होने के बावजूद प्रताड़ित हो रही हैं, इस की क्या वजह मानती हैं?

यह सही है. इस का जिम्मेदार मैं परिवार में मातापिता की भूमिका को मानती हूं, जो जन्म के बाद से उन का पालनपोषण करते हैं. उन्हें सहीसही हर बात छोटी उम्र से बतानी चाहिए. परिवार में मां, बहन, दादी, नानी आदि सभी महिलाओं का सम्मान उन्हें बचपन से सिखाया जाना चाहिए. घर से परिवार और परिवार से समाज बनता है.

विचारों पर प्रतिबंध लगाती नरेंद्र मोदी की भाजपा

जैसेजैसे भारतीय जनता पार्टी की पहुंच केंद्र के बाद राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों में हो रही है, अलग बोलने की स्वतंत्रता और सामाजिक सुधारों की बातों का स्वर धीमा होता जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी की जीत के पीछे कट्टर धर्मवादियों का लगातार व मेहनती काम है जो वे धर्म और धर्म से पैदा होने वाले पैसों व पावर के लिए करते हैं. दूसरे दल अपने कार्यकर्ताओं को राजनीतिक लाभ तो दिला सकते हैं पर उन की हर गली, सड़क पर पैसा बनाने की धर्म की फैक्टरियां नहीं हैं जिन में वे अपने कर्मठ कार्यकर्ताओं को खपा सकें.

ओडिशा और महाराष्ट्र के स्थानीय चुनावों में भाजपा के अच्छे प्रदर्शन का मुख्य कारण है ही यह कि उस के कार्यकर्ता पूरे साल न केवल खुद लगे रहते हैं, सैकड़ों आमजनों को जोड़े भी रखते हैं. प्रभातफेरी, अखंड जागरण, स्वामी का प्रवचन, योग शिविर, अमरनाथ यात्रा, कुंभ स्नान, रामायणपाठ जैसे अनेक कार्यक्रम करते रहते हैं जिन के लिए उन्हें आसानी से चंदा मिल जाता है. और बड़ी बात यह है कि युवाओं, औरतों व खाली बैठे आदमियों को कुछ करने का मौका मिल जाता है.

दूसरी पार्टियों के पास अपने कार्यकर्ताओं को बांधे रखने के लिए कुछ नहीं होता. सोशल मीडिया में जितने भी संदेश धर्मसम्मत होते हैं, उन्हें तैयार करने वाले वे कट्टर ही होते हैं जो सोचते हैं कि ज्ञान की अंतिम सीमाएं तो धर्मग्रंथों में आ चुकी हैं.

इसलामी या ईसाई कट्टरपन भी इसी तरह चला. ईसाइयों का कट्टरपन आज फिर अमेरिका में उभर रहा है और इसलामी कट्टरपन तो अपने देशों को भी जलाने में लगा है. उस के खिलाफ कोई न बोले, यह हर कट्टर चाहता है और चूंकि उस के पास भीड़ होती है, वह यह आसानी से करा सकता है.

दिल्ली के रामजस कालेज में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के उदारवादी छात्र अपनी बात न कह सकें, इस के लिए कट्टरवादी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जम कर हंगामा किया. सोच पर पहरे की यह पहली जरूरत है. किसी को दूसरी तरह का विचार ही न रखने दो, समाज का एक वर्ग यह हमेशा चाहता है चाहे वह धर्म का अनुयायी हो या किसी खास राज्य का या किसी वाद का.

विचारों पर प्रतिबंध अब दिखने लगा है. धीरेधीरे समाजसुधार की बातों पर अंकुश लगने लगा है. पहरावा भी एक तरह का थोपा जा रहा है. ‘पर्व हमारे मनेंगे, तुम्हारे नहीं’ की भावना तेज हो रही है.

कांग्रेस भी बहुत उदार नहीं थी. फिर भी उस पर अंबेडकर, नेहरू जैसों का असर था जो असहमति के अधिकार को विकास का मूल मंत्र मानते थे. आज, सब से कहा जा रहा है, मिल कर बोलो, ‘‘जय … की.’’

नीट परीक्षा बन गई बेईमानी की सीढ़ियां

हम अपने युवाओं को पढ़ने के लिए नहीं परीक्षा में बैठने के लिए तैयार करते हैं. देशभर के मैडिकल इंजीनियरिंग, एमबीए, आर्किटैक्चर, फैशन डिजाइनिंग आदि कालेजों में क्या पढ़ा कर योग्य छात्रों को तैयार किया जाता है, यह चिंता कोई नहीं करता, इन सरकारी या प्राइवेट संस्थानों में दाखिला कैसे मिलता है, यह तैयारी कैसी हो, इस के नियमकानून कैसे हों, इसी पर सरकार, शिक्षा मंत्रालय, वाइस चांसलर, डीन, अदालतें दिमाग खपाती रहती हैं.

मैडिकल व डैंटल कोर्सों के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षाओं में कितनी बार छात्र बैठ सकते हैं इस पर हार कर सरकार ने 3 बारी को मान लिया है. हर राज्य का कोटा 85% हो, अपने राज्य के कालेजों में इस पर हल्ला जारी है. इन में आरक्षण की बात तो उठाई ही जाती है, प्रवेश परीक्षा देने की उम्र बढ़ाने की मांग भी की जा रही है.

यह हम अपने युवाओं के लिए खिलवाड़ क्यों कर रहे हैं. जो पैसा 6 लाख बच्चे प्रवेश परीक्षाओं में पास होने के लिए कोचिंग, किताबों, बरबाद हुए समय पर खर्च करते हैं, उस से न जाने कितने नए संस्थान खुल जाएं कि जो छात्र चाहे दाखिला पा सके. पर हम चाहते हैं कि ऊंची शिक्षा सिर्फ चुने हुओं को मिले. ऐरागैरा दाखिला न ले सके. तभी तो सिफारिशियों की गिनती बनती है. तभी तो नेताओं और अफसरों के यहां भीड़ जुटती है. तभी तो पैसा ले कर दाखिला मिलता है.

यह एक देश के दिमागी दिवालिएपन का नमूना है. हम एकलव्य बनाने में इतने इच्छुक नहीं हैं जितने खुद सीखे एकलव्य से दक्षिणा पाने को हैं. कोई भला पूछे कि उस द्रोणाचार्य को कैसे महान कहा जा सकता है जो बिना पढ़ाए किसी से फीस ले ले, और हम हैं कि उसी का राग अलापे जाते हैं, सड़कों का नाम, पुरस्कारों का नाम, विश्वविद्यालयों का नाम उस द्रोणाचार्य के नाम पर रखते हैं जिस ने एकलव्य के साथ बेईमानी की, जो बेईमानी आज के शिक्षकों में कूटकूट कर भरी है, जिस पर मध्य प्रदेश का व्यापम कांड हुआ पर अंत में दब गया.

भोलेभाले अबोध बच्चों को हमारा समाज और हमारी तिरंगी हों, लाल हों, हरी हों या भगवा, सरकारें बेईमानी की मशीन में ठूंस देती हैं. साफ मन को काला करने की कला हमें आती है. नीट परीक्षाएं कोई साफसूफ नहीं, बेईमानी की सीढि़यां हैं और इसीलिए इस में रोज बदलाव की मांग की जाती है. हर जवां चाहता है कि जो भी उस पर चढ़े वह काले रंग में रंग जाए, क्योंकि ज्ञान नहीं लेना, स्वर्ग के रास्ते पर घुसना है. मंदिर में घुस कर क्या होता है, क्या यह बताना जरूरी है?

फिर दिखा निया शर्मा का बोल्ड अवतार

‘जमाई राजा’ में रोशनी का किरदार निभाकर फेमस हुईं एक्ट्रेस निया शर्मा एक बार फिर अपने हॉट अवतार को लेकर चर्चा में हैं. दरअसल, निया प्रोड्यूसर विक्रम भट्ट की वेब सीरिज ‘ट्विस्टेड’ में ग्लैमरस रोल में नजर आएंगी. इसके प्रोमो में निया बोल्ड अवतार में दिख रही हैं. निया ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर इसके कुछ सीन पोस्ट किए हैं, जिनमें वो ब्लैक आउटफिट में काफी खूबसूरत लग रही हैं. बता दें, मर्डर मिस्ट्री पर बेस्ड यह वेब सीरीज 30 मार्च से VB On The Web नामक यू-ट्यूब चैनल पर रिलीज होगी.

हाल ही में निया की कुछ फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. जिसमें निया ब्लैक कलर की ड्रेस और में ब्लैक लिपिस्टिक लगाए नजर आई थीं. ये फोटोज निया के न्यू वीडियो सॉन्ग ‘रात की’ की शूटिंग के बाद कराए फोटोशूट की हैं. बता दें, इस सॉन्ग का टीजर रिलीज हो चुका है जिसमें निया काफी बोल्ड अवतार में नजर आई हैं.

निया ने ये फोटोशूट लिकर बॉटल्स वाले बैकग्राउंड में कराया है. जहां फोटोज में साफ-साफ ढेर सारी बॉटल्स दिखाई दे रही हैं, वहीं कुछ फोटोज में निया ब्लैक ड्रेस में पूल के पास खड़ी नजर आ रही हैं. निया के इन फोटोज में उनकी बोल्डनेस साफ देखी जा सकती है.

कुछ वक्त पहले निया ने अपने इंस्टाग्राम पर एक कॉन्ट्रोवर्शियल वीडियो शेयर किया था. इसमें एक छोटा बच्चा बार-बार बहन की गाली रिपीट कर रहा था. निया के इस वीडियो पर फैन्स ने ना सिर्फ उन्हें जमकर ट्रोल किया था बल्कि कई तीखे रिएक्शन भी दिए थे.

दिसंबर 2016 में निया शर्मा को एशिया की तीसरी सेक्सी महिला का खिताब मिला था. बता दें कि 2014 में ‘जमाई राजा’ से जुड़ी निया शर्मा को असली पहचान शो के कैरेक्टर ‘रोशनी’ से मिली. हालांकि निया 2016 में यह शो छोड़ चुकी हैं. वो ‘एक हजारों में मेरी बहना है’ में क्रिस्टल डिसूजा की छोटी बहन का रोल भी कर चुकी हैं.

निया शर्मा और सीरियल ‘जमाई राजा’ में उनकी को-एक्ट्रेस रेहाना मल्होत्रा एक फोटो को लेकर चर्चा में थीं. इस फोटो में दोनों एक्ट्रेस लिप-लॉक करती नजर आई थीं. खुद रेहाना ने यह फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की थी. हालांकि, जब फोटो वायरल हुई तो उन्होंने इसे वहां से डिलीट कर दिया. बता दें ‘जमाई राजा’ के साथ निया ‘कॉमेडी नाइट्स बचाओ ताजा’ में भी काम कर चुकी हैं.

निया ने कुछ दिनों पहले इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वो सेक्सी डांस मूव्स करती नजर आई थीं. इसके बाद यूजर्स ने अलग-अलग रिएक्शन दिए थे. कुछ ने तो कहा था कि तुम्हें पोर्न इंडस्ट्री चले जाना चाहिए.

राम मंदिर के दांव पर योगी आदित्यनाथ को सत्ता

उत्तर प्रदेश में भगवा वस्त्रधारी योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे अयोध्या के राममंदिर का मुद्दा है. भाजपा अब सीधे हिन्दुत्व पर भरोसा करने के बजाय प्रतीक के सहारे अपने वोटबैंक को साधना चाहती है. योगी आदित्यनाथ पूरी तरह से धर्मिक चेहरा हैं. ऐसे में भाजपा का कोर वोटर इस बात को लेकर खुश है कि केन्द्र सरकार ने राम मंदिर न सही पर प्रदेश की सत्ता हिदुत्व के अगुवा नेता के हवाले कर दी है. योगी गोरखपुर की गोरक्षा पीठ के मंहत हैं. पूर्वी उत्तर प्रदेश में उनका संगठन हिन्दू युवावाहिनी बहुत सक्रिय है. ऐसे में वह भाजपा के मददगार साबित होते हैं. 5 बार के सांसद योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के 32 वें मुख्यमंत्री हैं. पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो भगवा पहनते हैं और शादीशुदा नहीं हैं.

भाजपा योगी को चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने का पूरा मन बना चुकी थी. भाजपा के पूर्वी उत्तर प्रदेश के 2 बड़े नेता इस बात का विरोध कर रहे थे. ऐसे में योगी का नाम मुख्यमंत्री पद के लिये घोषित नहीं किया गया. योगी को इस बात की पूरी जानकारी पहले से मिल चुकी थी. यही वजह है कि विधानसभा चुनाव के पूरे प्रचार अभियान में वह सबसे प्रमुख चेहरे के रूप में सामने आते रहे. जैसे ही भाजपा को बहुमत हासिल हुआ उसने योगी को आगे कर दिया. मीडिया और भाजपा के दूसरे नेताओं को भ्रम में रखने के लिये भाजपा पूरे एक सप्ताह तक लोगों को भ्रमित करती रही.

जैसे ही गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड में सरकार बनाने के बाद पार्टी को मौका मिला उसने अपने मिशन उत्तर प्रदेश को अंजाम तक पहुंचाते हुये गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ को प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया. योगी को कामकाज में मदद करने के लिये उपमुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य और लखनऊ के मेयर डाक्टर दिनेश शर्मा को पद दे दिये गये. 1980 के बाद उत्तर प्रदेश में उपमुख्यमंत्री का पद दोबारा बहाल हुआ है. इसे एक तरह से सत्ता के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है. भाजपा योगी की छवि का प्रयोग राममंदिर को लेकर पार्टी पर उठ रहे सवाल के जवाब में करना चाहती है.

भाजपा को केन्द्र सरकार में पूर्ण बहुमत हासिल है. 282 लोकसभा सदस्य उसके पास हैं. देश के अलग अलग 16 राज्यों में उसकी सरकार है. उत्तर प्रदेश की विधानसभा में 325 विधायक उसके पास हैं. उत्तर प्रदेश में जीत के बाद 1 साल के अंदर राज्यसभा में भी भाजपा को बहुमत हासिल होगा. ऐसे में पहली बार देश में भाजपा सबसे पावरफुल रोल में है. भाजपा हमेशा से यह कहती रही है कि जैसे ही उसे देश और प्रदेश में स्पष्ट बहुमत हासिल होगा राममंदिर बन जायेगा. अब वह समय भाजपा के सामने है. भाजपा के लिये अब राममंदिर मुद्दे पर ‘यूटर्न‘ लेने का कोई रास्ता नहीं है. भाजपा के सामने एक ही रास्ता था कि वह ऐसे चेहरे को मुख्यमंत्री बनाये जिसके बनने से हिदुत्व की छवि को बचाया जा सके.

योगी खुद में राममंदिर के सबसे बडे समर्थक रहे हैं. ऐसे में 2019 के चुनाव तक हिन्दुत्व को मानने वाले वोटर राममंदिर के मुद्दे पर भाजपा को घेरने का कोई प्रयास नहीं करेंगे. भाजपा अपने वोटर को यह समझाने में सफल हो जायेगी कि उसने राममंदिर को दरकिनार नहीं किया है. हिन्दुत्व वाला वोटर भाजपा के अगर किसी नेता पर भरोसा कर सकता है तो वह योगी आदित्यनाथ ही थे. क्योंकि वह राममंदिर के मुद्दे पर गोलमोल जवाब नहीं देते थे. ऐेसे में भाजपा ने योगी को प्रदेश की कमान देकर अपने पर उठते सवालों की ढाल तैयार कर ली है. देखने वाली बात यह है कि अब तक राममंदिर पर स्पष्ट राय रखने वाले योगी अब क्या करते हैं?

नन बनी सोफिया ने कराया सबसे हॉट फोटोशूट

नन बन चुकीं सोफिया हयात ने फाइनली अपने मंगेतर की आइडेंटिटी रिवील कर दी है. एक लीडिंग वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने मंगेतर, शादी प्लान और अन्य मुद्दों पर खुलकर बात की. सोफिया ने बताया कि उनके मंगेतर कोई सेलेब्रिटी नहीं हैं. इसलिए वे उन्हें प्रोटेक्ट करना चाहती हैं. उनका नाम Vlad Stanescu है और वे रोमानिया बेस्ड इंटीरियर डिजाइनर हैं. Vlad ने सउदी अरबिया के किंग फाहद, स्वीडन की रानी स्लिविया और कैंब्रिज के प्रिंस विलियम ड्यूक सहित कई नामी लोगों के लिए काम किया है.”

सोफिया ने इंटरव्यू में बताया कि Vlad उनका पूरा ख्याल रखते हैं. वे डिनर के समय उनकी चेयर खिसकाते है, कार का डोर खोलते हैं. उनकी ख़ुशी से जुड़ी हर छोटी-छोटी बात का ध्यान रखते हैं. सोफिया के मुताबिक, एक डिनर के दौरान Vlad ने उन्हें ‘I Love You’ कहा और शादी के लिए प्रपोज कर दिया. उन्होंने हां कर दी और दो दिन बाद दोनों की सगाई हो गई.

सोफिया ने इस इंटरव्यू में यह खुलासा भी किया कि वे इसी साल 24 अप्रैल को शादी कर लेंगी. उनके मुताबिक, उनकी वेडिंग सेरेमनी में हिंदू, मुस्लिम, क्रिश्चियन और तिब्बतन सहित सभी धर्मों के रिवाज देखने को मिलेंगे. इतना ही नहीं, सोफिया की मानें तो वे और Vlad पहले ही मुस्लिम धर्म के अनुसार शादी कर चुके हैं.

जब सोफिया से यह सवाल किया गया कि पिछले साल वे कहती थीं कि कभी शादी नहीं करेंगी, सेक्स से दूर रहेंगी और बच्चे भी पैदा नहीं करेंगी. फिर इस साल उनका दिल कैसे बदल गया. उन्होंने जवाब दिया, “मेरा दिल नहीं बदला है. उस वक्त वह मेरी सच्चाई थी और आज यह मेरी सच्चाई है. दूसरे शब्दों में कुछ लोग तब शादी करते हैं, जब उन्हें कोई अच्छा लगने लगता है और कुछ लोग इसलिए तलाक लेते हैं कि उनका रिश्ता चल नहीं रहा होता है. इसका मतलब यह तो नहीं कि जब वे पहले प्यार में पड़े तो झूठ बोल रहे थे.”

‘होली पर रंग लगाने के बहाने मुझे यहां छुआ गया’

होली पर अभिनेत्री शहनाज ट्रेजरीवाला खुद को कभी सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं. शहनाज ट्रेजरीवाला ने इस बात का खुलासा अपने फैन्स के साथ किया है. शहनाज का कहना है कि मैं होली के त्यौहार पर खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती. इस मौके पर मुझे कई बार गलत ढंग से छूआ गया है. शहनाज ने ट्विटर पर लिखा, ‘मुझे ‘होली है’ के नाम पर गलत ढंग से छूआ गया, कारण दिया गया ‘होली है’. ऐसे में मैं ‘होली’ को लेकर उत्साहित नहीं हूं, मुझे माफ कीजिएगा. ‘देल्ही बेल्ही’ एक्ट्रेस ने कहा कि यह सब कुछ मानसिक आघात जैसा है. हालांकि इस बात के लिए मैं शर्मिंदा नहीं हूं. यह तो उनके लिए शर्मनाक है जो यह करते हैं.

साल 2014 में आखिरी बार शहनाज फिल्म मैं और मिस्टर राइट में नजर आई थीं. फिल्म कहानी थी एक ऐसी लड़की की जो खुद के लिए एक बेहतर इंसान की तलाश में निकली हैं. इस फिल्म से टीवी एक्टर बरुन सोबती ने फिल्मी पदार्पण किया था.

साल 2014 में अभिनेत्री शहनाज़ ने नरेंद्र मोदी, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान और अनिल अंबानी को खुला पात्र लिखा था जिन्होंने उन्होंने देश में बलात्कार के खिलाफ अपील की थी.

कंगना-करण विवाद बाथरूम रीडिंग मसाला : सोनम

बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर ने कंगना रनौत और करण जौहर विवाद पर तंज कसा है. सोनम ने अपने एक हालिया इंटरव्यू में कंगना-करण विवाद को बाथरूम रीडिंग मसाला कहा है. कंगना ने करण के शो ‘कॉफी विद करण’ में कई मुद्दों पर अपनी राय बेबाकी से व्यक्त करते हुए कहा था कि करण बॉलीवुड में नेपोटिज़्म (भाई-भतीजावाद) को बढा़वा देते हैं और वो मूवी माफिया हैं. बाद में करण ने कहा था कि कंगना ‘विक्टिम कार्ड’ खेल रही हैं और उन्हें बॉलीवुड इंडस्ट्री इतनी बुरी लगती है तो उन्हें इसे छोड़ देना चाहिए. कंगना ने अब इस पर पलटवार किया है. कंगना ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री एक छोटा सा स्टूडियो नहीं है जो करण को 20 साल की उम्र में उनके पिता ने दिया था, वो सिर्फ इसका एक छोटा सा हिस्सा हैं.

हाल ही में हुए इंटरव्यू में सोनम ने कंगना-करण विवाद पर कहा, ‘मुझे यह बहुत मनोरंजक लगा. यह सबसे बुरी तरह के कीचड़ उछालने जैसा है. मुझे कंगना बहुत मनोरंजक लगी और वो हैं भी. मैं इस पर कुछ ऐसी टिप्पणी नहीं करना चाहती जो अवसरवादी लगे. मेरा मानना ​​है कि आप महिलावादी हैं खासकर तब जब आप दूसरी महिलाओं को खास बनाते हैं. मैं अब तक उसके करियर और उनकी च्वॉइस का सम्मान करती हूं.’

इससे पहले कंगना ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू के दौरान कहा था, करण भाई-भतीजेवाद का क्या मतलब समझते हैं, वो मुझे नहीं पता. अगर उन्हें लगता है कि ये सिर्फ भतीजे, बेटियों और भाई-बहन तक सीमित है तो मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना.

कंगना ने आगे कहा, करण मुझे शो में बुलाने का मौका दे रहे थे, तो मैं बता दूं कि मैं उनके शो से पहले कई बड़े लोगों को अपना इंटरव्यू दिया है. बता दूं कि करण की टीम, मेरी डेट्स के लिए मेरी टीम के पीछे कई महीनों से पड़ी थी. मुझे वहां इन्वाइट किया गया था क्योंकि चैनल को टीआरपी चाहिए होती है और करण तो बस एक पेड होस्ट हैं. मैंने कोई ‘विक्टिम कार्ड’ या ‘वुमेन’ कार्ड नहीं खेला.

करण हाल ही में दो बच्चों के पिता बने हैं, जिनमें से एक बेटी भी हैं, तो कंगना ने कहा कि करण अब एक बेटी के पिता हैं तो ऐसे में उन्‍हें अपनी बेटी को ‘वुमेन कार्ड’, ‘विक्टिम कार्ड’ और ‘सेल्‍फ-मेड-इंडिपेंडेंट वुमेन कार्ड’ जैसे कार्ड्स देने चाहिए. रही बात इंडस्ट्री छोड़ने की तो मैंने अपनी मेहनत से इस इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई है, तो करण आप मुझे यहां से निकलने के लिए नहीं कह सकते.

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