प्रेम विवाह के लिए धर्म परिवर्तन जरूरी क्यों

हिंदू लड़कियों को मुस्लिम युवकों से प्रेम करने का अधिकार है या नहीं, आजाद भारत में यह सवाल अब महत्त्व का होता जा रहा है. केरल उच्च न्यायालय ने एक हिंदू लड़की हादिया के विवाह को खारिज कर दिया, क्योंकि उस ने धर्म परिवर्तन कर के एक मुसलिम युवक से विवाह किया था. कट्टर हिंदूवादी संगठन इस तरह के विवाहों को लव जिहाद कह रहे हैं.

उन का मानना है कि यह सुनियोजित ढंग से फिल्म ‘कुर्बान’ की तरह है जिस में सैफ अली खान पहले न्यूयौर्क की एक हिंदू प्रोफैसर करीना कपूर, जो अपने बीमार पिता को देखने भारत आती है, से विवाह करता है और फिर उसे लंदन ले जाता है, जहां उसे आतंकवादी षड्यंत्र में फ्रंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

धर्म परिवर्तन कर के प्रेम विवाह करना अपनेआप में सही नहीं है. यदि धर्म प्रेम में आडे़ नहीं आ रहा है, तो विवाह में भी नहीं आना चाहिए और बिना धर्म परिवर्तन किए ही विवाह करना चाहिए. भारतीय कानूनों में इस तरह के विवाह की स्पैशल मैरिज ऐक्ट के अंतर्गत सुविधा है और आम बोलचाल की भाषा में इसे कोर्ट मैरिज कहते हैं.

वैसे तो सभी विवाह बिना धार्मिक रीतियों के इस कानून के अंतर्गत होने चाहिए और जिस यूनिफौर्म सिविल कोड की बात हिंदूवादी कट्टर सोतेजागते करते हैं वह कांग्रेसी जमाने से मौजूद है. इस कानून के अंतर्गत विरासत का कानून भी धार्मिक बंधनों से मुक्त हो जाता है और संपत्ति बिना लागलपेट मृत्यु बाद बंटती है. तलाक भी सरल है और गोद लेनादेना भी.

जिन्हें जाति, गोत्र, ऊंचनीच की दीवारें तोड़ कर प्रेम विवाह करना है, उन्हें धर्म के बंधन को भी तोड़ना ही होगा. दो धार्मियों के बीच न हिंदू विवाह हो सकते हैं न मुसलिम अथवा फिर ईसाई.

इसलिए प्रेम के बाद विवाह की सोच रहे हैं, तो रस्मो रिवाजों का चक्कर तो छोड़ना ही होगा. धर्म परिवर्तन चाहे हिंदू से मुसलिम हो या मुसलिम से हिंदू गलत ही है. सामाजिक सुरक्षा चाहिए तो दोनों को अपना अपना धर्म छोड़ना होगा. वैसे भी इन विवाहों में घर वालों के छूटने का रिस्क तो रहता ही है.

केरल उच्च न्यायालय ने एक प्रेम विवाह को सामाजिक समस्या के आईने से न देख कर राजनीतिक मैग्नीफाइंग ग्लास से देखा है और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तथ्य पता करने के लिए नैशनल इनवैस्टीगेशन एजेंसी बैठा कर आदमी औरत के संबंध को समाज भर में नंगा कर दिया है. यह वही सुप्रीम कोर्ट है जिस ने हाल ही में निजता पर लंबा चौड़ा सुखद निर्णय दिया है. क्या विवाह करने का निजी अधिकार भी जांच एजेंसियों की मुहर के बाद लागू होगा?

लड़कियों पर हर फैशन जंचता है : पल्लवी गजानन कोली

पल्लवी गजानन कोली का बचपन बहुत ही जद्दोजेहद और दुख से भरा रहा था. जब वे 10वीं जमात में थीं, तब एक हादसे में उन के मातापिता की मौत हो गई थी. इस के बाद उन का पढ़ाई में मन नहीं लगता था. वे हमेशा अपने मातापिता के दुख में डूबी रहती थीं. ऐसा लग रहा था, जैसे उन की जिंदगी खत्म सी हो गई हो.

हर मिडिल क्लास परिवार की तरह पल्लवी के नाना और मामा ने भी यह सोचा कि अगर उन की शादी करा दी जाए, तो वे मातापिता के दुख से बाहर निकल सकती हैं.

लिहाजा, 18 साल की उम्र में पल्लवी की शादी हो गई. इस के बाद उन का पूरा नाम पल्लवी गजानन कोली हो गया. गजानन उन के पति का नाम है.

पल्लवी मुंबई के पनवेल इलाके में रहती हैं. शादी के बाद उन के 2 बच्चे हो गए. सास और पति ने ऐक्टिंग करने के लिए उन का हौसला बढ़ाया. इस के बाद उन्होंने भोजपुरी फिल्मों के साथसाथ हिंदी फिल्में और सीरियल करने शुरू किए. टैलीविजन के कौमेडी शो ‘भाभीजी घर पर हैं’ में वे अलगअलग तरह के किरदार निभा कर चर्चा में रही हैं.

पेश हैं, पल्लवी गजानन कोली के साथ हुई बातचीत के खास अंश:

बचपन में माता पिता वाले हादसे से आप की जिंदगी पर क्या असर पड़ा था?

माता पिता के न रहने पर मेरी जिंदगी रुक सी गई थी. मेरा पढ़ने में मन नहीं लगता था और मैं हमेशा रोती रहती थी.

मैं अपने मातापिता की एकलौती बेटी थी. उन के बिना मैं जिंदगी जीने की कल्पना भी नहीं कर सकी थी.

बाद में मेरे नाना और मामा ने मुझे अपने साथ रखा. वे लोग भी मेरी हालत देख कर परेशान थे. मुझे पढ़ाई के साथसाथ पेंटिंग और सिलाईकढ़ाई करने का भी बहुत शौक था, जो बंद हो गया था.

मेरी हालत देख कर परिवार वालों को लगा कि मेरी शादी करा दी जाए. शादी के बाद मुझे सास ने बहुत संभाला. वे मेरी दोस्त सी बन गईं.

सास के साथ रहते हुए मैं अपनी जिंदगी में वापस आई. सास और पति ने मेरा हौसला बढ़ाया, तब मैं ने सोचा कि अब ऐक्टिंग में अपना कैरियर बनाया जाए.

क्या ऐक्टिंग में कैरियर बनाना आसान था?

हर काम मुश्किल होता है. ऐक्टिंग मुझे पसंद थी. मैं मुंबई की फिल्मी दुनिया से दूर पनवेल इलाके में रहती हूं.

मैं वहां से रोज सुबह 10 बजे निकलती थी और रात 11 से 12 बजे के बीच घर लौटती थी. अलगअलग प्रोडक्शन हाउस में लोगों से मिलती थी. वहां आडिशन देती थी. कई जगह फेल हुई, पर हार नहीं मानी. यह सोच लिया था कि कुछ कर के ही रहूंगी.

कई लोगों ने झांसा दिया. काम दिलाने के नाम पर पैसा मांगा, पर मैं ने शौर्टकट नहीं अपनाया. इस के बाद मुझे भोजपुरी फिल्मों और हिंदी सीरियलों में काम करने का मौका मिला.

भोजपुरी फिल्मों में मैं ने दिनेश लाल यादव, पवन सिंह और खेसारीलाल यादव के साथ काम किया. कई फिल्में बहुत पसंद की गईं. मेरी कई नई भोजपुरी फिल्में आने वाली हैं.

मुझे टैलीविजन में काम करना ज्यादा पसंद था, ऐसे में मैं इधर ज्यादा ही बिजी रहने लगी.

आप को किस तरह के रोल करना पसंद है?

शुरुआत में मुझे दुखी से लगने वाले रोल ज्यादा पसंद आते थे. वैसे, भोजपुरी फिल्मों में मैं ने तड़क भड़क वाले रोल भी किए. धीरे धीरे हर तरह के रोल पसंद आने लगे.

इस बीच मुझे कौमेडी सीरियल ‘भाभीजी घर पर हैं’ मिल गया. इस में मेरा रोल बहुत छोटा है. मैं कभी टीका मलखान की गर्लफ्रैंड बनती हूं, तो कभी कल्लो का रोल करती हूं, कभी एयर होस्टैस बन जाती हूं. कहानी के हिसाब से जो रोल पसंद आता है, वह मुझे मिल जाता है.

आप खुद को किस तरह से मैनेज करती हैं?

मैं हमेशा फ्रैश दिखना चाहती हूं. खुश रहती हूं. हर तरह के फैशन के कपड़े पहनती हूं. सभी से अच्छा बरताव करती हूं. मेहनत करने में मुझे कोई दिक्कत नहीं होती है.

मेरे साथी कलाकार इस बात से खुश रहते हैं कि जब मैं घर से आती हूं, तो टिफिन ले कर आती हूं. मुझे देख कर कई लोगों को यह नहीं लगता है कि मैं 2 बच्चों की मां हूं.

मैं ने खुद को फिट रखा है. मैं आज भी पेंटिंग बनाने का शौक रखती हूं. समय मिलने पर घरपरिवार का पूरा खयाल रखती हूं. सास और पति की मदद से मैं बच्चों की तरफ से निश्चिंत रहती हूं.

शोहरत पा कर आप को कैसा लगता है?

मेहनत का असर अब दिखने लगा है. कई जगहों पर अब मुझे स्टार की तरह बुलाया जाता है. जब मैं मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में गई थी, वहां के लोगों द्वारा किया गया स्वागत देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा था. मुझे शुरू से घूमने का शौक था, वह अब पूरा हो रहा है.

‘ब्रह्मास्त्र’ में दिखेगा टीवी की ‘नागिन’ का जलवा

अक्षय कुमार की फिल्म ‘गोल्‍ड’ के साथ बौलीवुड में एंट्री मार रही टीवी की सुपरहिट ‘नागिन’ यानी एक्‍ट्रेस मौनी रौय के लिए एक और बड़ी खुशखबरी है. वह अब जल्द ही बौलीवुड की एक और मल्‍टीस्‍टारर फिल्‍म का हिस्‍सा बनने वाली है.

जी हां, हमें मिली एक खबर के अनुसार मौनी अयान मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्‍म ‘ब्रह्मास्‍त्र’ का हिस्‍सा बन चुकी हैं. इस फिल्‍म  में रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की फ्रेश जोड़ी के साथ ही आमिताभ बच्‍चन भी नजर आएंगे. फिल्म में रणबीर कपूर ऐसा किरदार निभाएंगे जिसके पास कुछ विशेष शक्तियां होंगी.

अयान ने एक इंटरव्‍यू में कहा कि यह फिल्म एक्शन से भरपूर होगी, इसलिए इस फिल्म में शामिल होने वाले कलाकारों को काफी मेहनत करनी होगी. उनको जिमनास्टिक, घुड़सवारी, फाइटिंग आदि का प्रशिक्षण भी लेना होगा. इस फिल्म के लिए उनके खास दोस्त और अभिनेता रणबीर को घुड़सवारी और जिमनास्टिक सीखना पडे़गा. रणबीर को खासी शारीरिक मेहनत भी करनी होगी ताकि किरदार को वास्तविक रूप दिया जा सके.

बता दें कि ‘ब्रह्मास्‍त्र’ तीन फिल्‍मों की सीरीज होगी जिसकी अधिकारिक घोषणा कर दी गई है. अमिताभ इस फिल्‍म की तीनों सीरीज का हिस्‍सा होंगे. इस फिल्‍म की पहली सीरीज 15 अगस्‍त 2019 को रिलीज की जाएगी. निर्देशक अयान मुखर्जी की फिल्‍म ‘ब्रह्मास्‍त्र’ रहस्य, रोमांच एवं फंतासी पर आधारित होगी. इस सीरीज का निर्माण करण जौहर का धर्मा प्रोडक्‍शन करेगी.

इससे पहले अनुराग कश्‍यप, भी अपनी फिल्‍म ‘गैंग्‍स आफ वासेपुर’ को इसी अंदाज में 2 पार्ट में रिलीज कर चुके हैं और यह दोनों फिल्‍में ही काफी बड़ी हिट रही थीं. अब करण जौहर भी अपनी फिल्‍म के लिए शायद कुछ ऐसा ही ब्रह्मास्‍त्र अपना रहे हैं.

मालूम हो कि टीवी की ‘नागिन के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली मौनी रौय के बौलीवुड में एंट्री करने की काफी समय से खबरें आ रही थीं. मौनी ने अक्षय के साथ अपनी फिल्‍म ‘गोल्‍ड’ का पहला शेड्यूल यूके में पहले ही शुरू कर टुकी हैं और वह इन दिनों उसकी शूटिंग में काफी व्यस्त हैं. बता दें कि जहां मौनी की ‘गोल्‍ड’ अगले साल रिलीज होगी, तो वहीं ‘ब्रह्मास्‍त्र’ 2019 में रिलीज होगी.

दूदानी का काला कारनामा जिसने सबको हिला दिया

2016 के अप्रैल माह में जब महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस ने सोलापुर में एक फार्मा कंपनी ‘एवान लाइफ साइंसेज लिमिटेड’ पर छापा मार कर तकरीबन 2 हजार करोड़ की नशीली ड्रग एफिड्रिन की 20 करोड़ की खेप बरामद की थी तो आरोपियों में गुजरे जमाने की अभिनेत्री ममता कुलकर्णी और उस के तथाकथित पति अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर विक्की गोस्वामी का नाम सामने आया था. इस मामले में जांच के बाद जून 2016 में इस रैकेट के सरगना मनोज जैन समेत 5 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी. तब पुलिस ने कल्पना तक नहीं की थी कि इस रैकेट के तार राजस्थान के शहर उदयपुर से भी जुड़े हो सकते हैं. ज्ञातव्य हो कि एफिड्रिन का इस्तेमाल एक्सटेसी जैसी उच्चकोटि की नशीली टैबलेट बनाने में किया जाता है. कनाडा और अमेरिका के छात्रों और खिलाडि़यों के बीच इस की मांग ज्यादा है.

केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड के खुफिया निदेशालय डीआरडीआई ने जब मध्य अक्तूबर में उदयपुर जिले के कलड़वास औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्ट्री के गोदाम पर छापा मार कर लगभग 7 हजार करोड़ रुपए मूल्य की तकरीबन 24 टन नशीली ड्रग्स मेंड्रेक्स और मेथाक्यूलिन की गोलियां बरामद कीं तो राज्य की वसुंधरा सरकार के होश फाख्ता हो गए. इसे अब तक की दुनिया की सब से बड़ी बरामदगी बताया गया है.

राज्य सरकार में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया इसी शहर के रहने वाले हैं. अपने शहर में इतने बड़े रैकेट के खुलासे से वह स्तब्ध हैं.

घटना से जुड़े 2 बड़े खुलासों ने मुंबई अंडरवर्ल्ड को भी हैरानी में डाल दिया है. पहला यह कि समाजसेवी का मुखौटा ओढ़ कर सुभाष दूदानी और उस के भतीजे रवि दूदानी ने न केवल नशे का इतना बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया बल्कि अंडरवर्ल्ड डौन दाऊद इब्राहीम सरपरस्ती भी हासिल कर ली. और दूसरा यह कि इस रैकेट के दूसरे सिरे की डोर 90 के दशक की खूबसूरत, बोल्ड और सैक्स सिंबल कही जाने वाली अभिनेत्री ममता कुलकर्णी और उस के कथित प्रेमी विक्की गोस्वामी ने थाम रखी थी. डीआरडीआई के दावे को सही मानें तो ममता कुलकर्णी इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट में भी शामिल है.

ममता कुलकर्णी और विक्की गोस्वामी के साथ सुभाष दूदानी की कारोबारी डोर जुड़ने की कहानी को समझने के लिए हमें नब्बे के दशक की शुरुआत में जाना होगा. उन दिनों विक्की गोस्वामी जब शराब तस्करी के धंधे में उलझा हुआ था, तभी उस की मुलाकात विपिन पांचाल नाम के शख्स से हुई. उस ने विक्की को ड्रग कारोबार की अहमियत समझाते हुए उस का परिचय मेंड्रेक्स और मेथाक्यूलिन से करवाया. इस के बाद वह विपिन पांचाल के साथ मिल कर ड्रग्स का धंधा करने लगा.

1993 में जब पांचाल पकड़ा गया तो कारोबार की पूरी बागडोर विक्की के हाथों में आ गई. विक्की ने मुंबई में पैर जमा कर इस कारोबार को पंख लगा दिए. ड्रग्स के कारोबार के चलते उस ने पहले तो अंडरवर्ल्ड में अपनी पैठ बनाई, फिर अपने बूते पर डौन दाऊद इब्राहीम तथा छोटा राजन से करीबी रिश्ते कायम कर लिए.

हाईप्रोफाइल पार्टियों की जान समझी जाने वाली मेंड्रेक्स की सप्लाई के दम पर उस ने कई फिल्मी हस्तियों से अपने नजदीकी ताल्लुकात बना लिए. इसी दौरान विक्की की जानपहचान ममता कुलकर्णी से हुई. दोनों के बीच कुछ ऐसी पटरी बैठी कि जल्दी ही दोनों रिलेशनशिप में साथसाथ रहने लगे.

यहां द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देना जरूरी होगा, जिस में कहा गया था कि नब्बे के दशक की शुरुआत के साथ ही हाईप्रोफाइल तबके में ड्रग पार्टियां सब से चर्चित सेनेरियो बन चुकी थीं.

दिलचस्प बात यह है कि यह वह दौर था, जब ममता और विक्की गोस्वामी मुंबई की हाईप्रोफाइल पार्टियों में दूदानी द्वारा निर्मित ड्रग्स टैबलेट सप्लाई करते थे. कहा जाता है कि इस खेल को निर्विघ्न बनाए रखने में गुजरात के 4 वरिष्ठ अधिकारियों की भी पूरी शह थी.

सुभाष दूदानी ड्रग कारोबार में कैसे आया, इस की शुरुआत भी नब्बे के दशक में हुई थी. दूदानी ने अपनी कारोबारी शुरुआत फिल्म ‘विकल्प’ के निर्माण से की, लेकिन फिल्म फ्लौप हो गई. अलबत्ता फिल्म निर्माण से उस के परिचय के दायरे में नामचीन फिल्मी हस्तियां जरूर आ गईं. उन में ममता कुलकर्णी भी शामिल थी.

कहते हैं, ममता कुलकर्णी ने ही उस की मुलाकात विक्की गोस्वामी से कराई. तब तक विक्की गोस्वामी जांबिया शिफ्ट हो चुका था और कुछ रसूखदार लोगों की मदद से मेंड्रेक्स बनाने की फैक्ट्री लगाने की फिराक में था. लेकिन बात नहीं बनी.

इस बीच वह पुलिस की निगाहों में चढ़ चुका था. इसी वजह से उस ने फैक्ट्री लगाने का इरादा छोड़ दिया और साथ ही जांबिया भी. जांबिया से भाग कर उस ने दुबई में पनाह ले ली. इस बीच वह सिर्फ इतना ही कर सका कि उस ने मेंड्रेक्स बनाने की पूरी योजना सुभाष दूदानी के हवाले कर दी.

कहा तो यहां तक जाता है कि दूदानी को मेंड्रेक्स की सप्लाई चेन उपलब्ध कराना भी विक्की गोस्वामी का ही काम था. फिलहाल भले ही ममता कुलकर्णी और विक्की गोस्वामी का ठिकाना केन्या में बताया जाता है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अगर दूदानी के कारोबार में लगातार बरकत हुई है तो उस की वजह विक्की और ममता कुलकर्णी के साथ उस का गठजोड़ है.

जिस समय दूदानी डीआरडीआई की गिरफ्त में आया, उस दौरान वह सप्लाई को सुलभ बनाने के लिए एक नया प्रयोग कर रहा था. उस ने सोचा था कि ड्रग्स को अगर केक की शक्ल में बना कर भेजा जाए तो संदेह की गुंजाइश कम हो सकती है. लेकिन वह अपनी योजना पर अमल कर पाता, इस से पहले ही वह डीआरडीआई की गिरफ्त में आ गया. सूत्रों के मुताबिक, जब्त किया गया 24 टन माल केक के रूप में बाहर भेजने की तैयारी थी. इसे मोजांबिक और मालवाई भेजा जाना था.

ड्रग तस्करी के कारोबार के लिए दूदानी के 3 ठिकाने थे मुंबई, दुबई और उदयपुर. उदयपुर उस का स्थाई निवास होने के कारण मेंड्रेक्स के निर्माण और तस्करी के लिहाज से सर्वाधिक सुरक्षित था. सुभाष दूदानी को मेंड्रेक्स बनाने का मशविरा दुबई के तस्कर लियोन ने भी दिया था. लियोन ने इस काम में तकनीकी मदद के लिए उसे सीरिया निवासी एक डाक्टर से भी मिलवाया था. वह डाक्टर सुभाष दूदानी के मकसद में काफी मददगार साबित हुआ. लियोन ने दूदानी को मेंड्रेक्स बनाने का रासायनिक फार्मूला तो दिया ही, साथ ही 10 करोड़ की मशीनें लगाने के लिए फाइनेंसर से भी मिलवा दिया.

लियोन का मशविरा दूदानी को इसलिए भी पसंद आया था, क्योंकि उस के कहे मुताबिक मेंड्रेक्स और मेथाक्यूलिन ड्रग्स खाड़ी देशों और यूके में सब से ज्यादा प्रचलित ड्रग हैं. लियोन का कहना था कि भले ही इस का उत्पादन खर्चीला है, लेकिन इस में मुनाफा भारीभरकम मिलता है.

पुलिस के निशाने पर आने के बाद अभिनेत्री ममता कुलकर्णी अपनी सफाई में बहुत कुछ कह चुकी है, मसलन मुझे आश्चर्य है कि मेरा नाम ड्रग तस्करी से जोड़ा जा रहा है, लेकिन दूदानी के साथ उजागर हुए नए रिश्तों ने एक बार फिर ममता और विक्की को कटघरे में खड़ा कर दिया है. अब जबकि सुभाष दूदानी अपने भतीजे रवि दूदानी के साथ गिरफ्त में आ गया है तो पुलिस को ममता और विक्की की भी बेसब्री से तलाश है.

जानकार सूत्रों की मानें तो सुभाष दूदानी की गिरफ्तारी के बाद इस बात का भी खुलासा हुआ है कि राजस्थान के पुष्कर में अकसर होने वाली रेव पार्टियों में मेंड्रेक्स की सप्लाई भी दूदानी द्वारा ही की जा रही थी. इस में कोई शक नहीं कि पुलिस ने रेव पार्टियों में नशेबाज पर्यटकों की धरपकड़ तो की, लेकिन नशे की सप्लाई के स्रोत को खंगालने में पूरी कोताही बरती.

दूदानी से पूछताछ में नशीली दवाओं के कारोबार की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जितनी लंबीचौड़ी चेन का खुलासा हुआ है, वह स्तब्ध करने वाला है. दिलचस्प बात यह है कि इन का नेटवर्क यूके, यूएस और दक्षिणी अफ्रीका समेत कई देशों में फैला हुआ है. यानी उदयपुर जैसे शांत शहर से नशे की इतनी बड़ी खेप भारत के विभिन्न इलाकों के अलावा नाइजीरिया और मंगोलिया आदि देशों तक जा रही थी.

नशे के जहरीले कारोबार की बखिया उधेड़ने में जुटी डीआरडीआई की टीम ने सुभाष दूदानी से संपर्क रखने वाले मुंबई निवासी परमेश्वर व्यास और अतुल म्हात्रे को भी दबोच लिया है. जानकार सूत्रों के मुताबिक परमेश्वर व्यास पिछले 20 सालों से सुभाष दूदानी का मित्र होने के अलावा उस का वित्तीय और रासायनिक सलाहकार बना हुआ था. म्हात्रे से की गई पूछताछ में उस ने स्वीकार किया है कि वो कैमिकल इंजीनियर होने के नाते ड्रग्स के निर्माण के लिए तकनीकी सलाह देता था.

इस खुलासे के रहस्यों का पिटारा तो बहुत बड़ा है, लेकिन फिलहाल डीआरडीआई ने उदयपुर के इर्दगिर्द वह ‘स्वर्ण गलियारा’ खोज लिया है, जिसे सुभाष दूदानी ने अभिनेत्री ममता कुलकर्णी और उस के कथित पति विक्की गोस्वामी की मदद से मेंड्रेक्स सरीखी नशीली ड्रग की तस्करी का ट्रांजिट पौइंट बना दिया था. सुभाष दूदानी द्वारा केक और टैबलेट्स की शक्ल में तैयार की गई ड्रग्स को निर्विघ्न रूप से विदेशों में अपने कारोबारी संपर्कों तक भेजा जाना था.

इस के खुलासे से जो बातें पता चली हैं, उस से जाहिर होता है कि उस का इरादा खुफिया एजेंसियों की चौकसी को अंडरएस्टीमेट कर के अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने का था. इसी मुगालते में दूदानी द्वारा ड्रग्स की तस्करी को पुलिस की निगाहों से बचाने के लिए मौकड्रिल की जा रही थी.

पूछताछ में दूदानी ने बताया कि ड्रग्स बनाने की मशीनरी को समुद्री रास्ते से आयात किए जाने के दौरान ही उसे यह उपाय सूझा था. यानी एक तरफ ड्रग्स तैयार की जा रही थी तो दूसरी तरफ समुद्री रास्ते से सीमेंट और लाइम स्टोन पाउडर केक की शक्ल में बाहर भेजा जा रहा था.

यह मौकड्रिल खुफिया एजेंसियों के अफसरों को भ्रम में डालने के लिए थी ताकि जब भी वह ड्रग्स को केक की शक्ल में भेजे तो यह भ्रम ड्रग्स कारोबार को परदेदारी का अचूक हथियार बना रहे. इस योजना के तहत ही सुभाष दूदानी अडानी पोर्ट से 2 बार दिखावटी केक भेजने के बाद एक बार 5 मीट्रिक टन नशीली गोलियां भेजने में सफल भी रहा था. इस निर्विघ्न मौकड्रिल ने उस के हौसले बुलंद कर दिए थे.

इसी के चलते इस बार वह 24 टन की तैयारशुदा नशीली खेप भेजने की तैयारी में था. पूछताछ में सुभाष दूदानी ने बताया कि यह आखिरी खेप थी. इस के बाद उदयपुर की फैक्ट्री को बंद कर दिया जाता. उधर राजस्व अधिकारियों का कहना है कि ड्रग्स की यह बड़ी खेप अगर विदेशों में पहुंच जाती तो सुभाष दूदानी को लागत का चार गुना मुनाफा मिल जाता. इस के बाद संभवत: उसे कुछ करने की जरूरत नहीं रह जाती.

डीआरआई टीम ने जब फैक्ट्री पर छापा मारा, तब तक सारी मशीनें उखाड़ी जा चुकी थीं. कलपुर्जे अलगअलग कर के कबाड़ के भाव बेचे जा चुके थे. इस तोड़फोड़ का किसी को पता तक नहीं चला था. जेसीबी मशीन चला कर मशीनरी की बुनियाद तक को बराबर कर दिया गया था. सब कुछ नेस्तनाबूद करने का काम सिर्फ घोईदा फैक्ट्री में ही हो पाया था. गुडली और कलड़वास का माल भेजने के बाद वहां भी फैक्ट्रियों का भी नामोनिशान मिटा दिया जाता था, लेकिन उस से पहले ही दूदानी के काले कारनामों का परदाफाश हो गया.

दिलचस्प बात यह है कि इन फैक्ट्रियों की बुनियाद सन औप्टिकल और सीडी बनाने के नाम पर डाली गई थी. लेकिन सौ करोड़ की लागत की फैक्ट्रियों में कुछ दिन ही उत्पादन हो पाया. धंधे में आई मंदी के कारण इस काम को बंद करना पड़ा.

इस काम के लिए सुभाष दूदानी इंडियन ओवरसीज बैंक से 21 करोड़ का कर्ज ले चुका था, लेकिन भुगतान का सिलसिला कुछ समय तक ही चला. बाद में नुकसान बता कर दूदानी ने रकम चुकाने से इनकार कर दिया था. नतीजतन बैंक फैक्ट्री को सीज कर के नीलामी की तैयारी कर रहा था. लेकिन बैंक अधिकारी उस समय हैरान रह गए जब उन्हें सीज फैक्ट्री में काला कारोबार चलने की खबर मिली.

बहरहाल, सुभाष दूदानी शिकंजे में आया भी तो इसी वजह से. सीबीआई इंडियन ओवरसीज बैंक के कर्ज अदायगी के मामले में पहले ही सुभाष दूदानी के मुंबई स्थित ठिकाने पर छापा मार चुकी थी. उस ने यह काररवाई बैंक की शिकायत पर की थी.

शिकायत में कहा गया था कि दूदानी ने कर्ज में ली गई रकम निश्चित उद्देश्य पर खर्च करने के बजाय इधरउधर कर दी है. जिन कार्यों में रकम का निवेश बताया गया है, उस के कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. बैंक अधिकारियों ने माल निर्यात के बिलों और बिल्टियों को भी संदिग्ध बताया था. यह भी एक वजह रही कि सीबीआई के संदेह के घेरे में आ जाने के कारण सुभाष दूदानी बचा हुआ तैयारशुदा माल निर्यात करने में विफल रहा.

सुभाष दूदानी को विदेशों में ड्रग्स भेजने के तरीके और ठौरठिकानों का मशविरा भी दुबई का तस्कर लियोन देता था. पकड़ा गया माल मोजांबिक और मालवाई भिजवाना था. सूत्रों की मानें तो वर्ष 2004-05 के दरमियान दूदानी ने दुनिया में प्लेनेट औप्टिकल डिस्क बनाने का प्लांट लगाया था. इस प्लांट से उस ने काफी पैसा कमाया. नतीजतन उत्कर्ष के उस दौर में उसे प्रमुख उद्योगपति का सम्मान भी मिला. किंतु वर्ष 2010 में उस का धंधा चौपट हो गया.

तबाही के इस दौर में ही उस की मुलाकात लियोन से हुई थी. दूदानी को नशे के काले कारोबार में धकेलने का काम भी उसी ने किया. लियोन का उसे दिया गया व्यावसायिक मंत्र था ‘कौडि़यों के खर्च में करोड़ों का मुनाफा कमाओ’. उसी ने दूदानी का ज्ञानार्जन किया कि मेथाक्यूलिन से ड्रग्स कैसे बनाई जाती है.

नशीले कारोबार के लिए नेपाल और सिक्किम से मजदूर बुलाने की राय भी उसे लियोन ने ही दी. यहां तक कि उदयपुर में फैक्ट्री लगाने की सलाह भी उस ने यह कह कर दी थी कि यह शांत और सुरक्षित जगह है. साथ ही तुम्हारी जन्मभूमि भी. लोगों में तुम्हारा सम्मान है, कोई तुम पर शक नहीं करेगा.

ड्रग्स तस्करी की दुनिया के सब से बड़े मामले को ले कर कानूनी पेच में फंसे सुभाष दूदानी का हौसला चौंकता है. अदालत में पेश किए जाने के बाद कोर्ट के बाहर उस ने अपनी पत्नी से कहा कि मैं ही जल्दी बाहर आऊंगा. कोई कुछ भी साबित नहीं कर पाएगा. उस का यह भी कहना था कि मुझे किसी वकील की जरूरत नहीं है. अपना केस मैं खुद हैंडल करूंगा.

यह बात दो तरह से चौंकाती है. पहली यह कि अपराध की गंभीरता को ले कर उस में जो बेफिक्रापन नजर आता था, वह. और दूसरा यह कि जिस स्त्री से उस का तलाक हो चुका था, वह अदालत में क्यों मौजूद थी? मौजूद थी भी तो सुभाष दूदानी का उसे तसल्लीबख्श बात कहने का क्या मतलब?

बावजूद इस के मुंबई से उस की पैरवी करने आए एनडीपीएस मामलों के विशेषज्ञ वकील चंद्रभूषण मिश्रा का कथन भी कुछ ऐसा ही है. उन्होंने कहा, ‘अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों से कुछ भी साबित नहीं हो पाएगा. दूदानी को छलपूर्वक फंसाया गया है.’

बहरहाल, सूत्रों के मुताबिक अंडरवर्ल्ड की इन सरगोशियों को भी खारिज नहीं किया जा सकता कि जिस के पीछे डौन दाऊद इब्राहीम हो, उसे कौन फंसा सकता है.

तलाकशुदा जिंदगी

विज्ञान से स्नातक डिग्रीधारी सुभाष दूदानी की काबिलियत समझें तो उस ने एक किताब भी लिखी है. जानकार सूत्रों का कहना है कि उस की शादी ज्यादा दिन नहीं चली. हालांकि उस की पत्नी एक बैंक अधिकारी है और उस की 2 बच्चे भी हैं. लेकिन बाद में दोनों का तलाक हो गया. दरकता दांपत्य जीवन ही उसे गलत धंधों की राह पर ले गया. बाद में उस ने उदयपुर में ही टाटा कंपनी में कार्यरत अपने भतीजे रवि दूदानी को भी अपने धंधे में उतार दिया.

सुभाष का सामाजिक रुतबा भी कम नहीं था. अनेक धार्मिक संस्थानों का ट्रस्टी होने के अलावा उस ने अपने समुदाय के लिए भी अच्छीखासी आर्थिक मदद की थी. इस मामले का खुलासा होने से कुछ दिन पहले उस ने एक शिव मंदिर के निर्माण के लिए 8 लाख रुपए की राशि दान की थी.

रवि दूदानी कलड़वास के औद्योगिक क्षेत्र में बनी फैक्ट्री का काम संभालता था. रात को जब वह फैक्ट्री की तरफ जाता था तो सिक्किमी और नेपाली मजदूर भी उस के साथ होते थे.

डीआरडीआई टीम के अधिकारियों ने इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया है कि आखिर पुलिस ने इस भेद को क्यों नहीं टटोला कि उदयपुर की फैक्ट्री में स्थानीय श्रमिकों के बजाए बाहरी मजदूर क्यों थे.

डीआरडीआई टीम के अधिकारियों ने इस गोरखधंधे में स्थानीय रसूखदारों का हाथ होने की पूरी आशंका जताई है. उन का कहना था कि इस काम में 10 करोड़ जैसा भारीभरकम निवेश किया गया था. दुबई से करोड़ों की मशीनें आई थीं. स्थानीय मैकेनिक बायलर सरीखे उपकरण भी तैयार कर रहे थे. यहां तक कि दुबई से एंथ्रालिक सरीखा संदिग्ध एसिड भी आ चुका था. इस के बावजूद किसी को जरा भी संदेह क्यों नहीं हुआ.

एंथ्रालिक एसिड मंगवाने के लिए सुभाष दूदानी ने गुजरात के नडियाड में माल रखने के लिए एक शेड किराए पर लिया था, जहां से उसे टाइल एडिसिव की आड़ में नशीली दवाओं का जखीरा निर्यात करना था. जानकार सूत्रों के मुताबिक दूदानी कुल 8 हिस्सों में तैयारशुदा माल को बाहर भेजना चाहता था. इस लिहाज से प्रति खेप ढाई टन माल बाहर भेजा जाना था. इस के लिए नए जहाज का बंदोबस्त भी कर लिया गया था. माल किसे भेजना है, इस के लिए रेडिमिक्स एडीसन टेक्नोलौजी नाम की फरजी फर्म भी बना ली गई थी.

उधड़ रही हैं परतें

नशीली गोलियों के इस नेटवर्क से अंतरराष्ट्रीय तस्करों के साथ मुंबई के नामचीन व्यापारी भी जुड़े रहे हैं. उदयपुर में बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद से जांच में जुटी डीआरडीआई ने सुभाष दूदानी से संपर्क रखने वाले परमेश्वर व्यास और अतुल म्हात्रे को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है. परमेश्वर व्यास दूदानी का वित्तीय सलाहकार भी था और उसे कच्चा माल भी सप्लाई करता था. फिलहाल डीआरडीआई टीम म्हात्रे की पूरी जन्मकुंडली खंगाल रही है कि इस काम में उस ने किसकिस से मदद ली.

इस मामले में ताजा गिरफ्तारी मलकानी की है. जयपुर स्थित प्रतापनगर से गिरफ्तार किए गए मलकानी की सुभाष दूदानी के कारोबार में 5 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी. कारोबार के मुख्य शेयरधारक के रूप में दुबई निवासी धनकानी के नाम का भी खुलासा हुआ है.

मलकानी सुभाष दूदानी का दोस्त भी है. मलकानी दूदानी के बंद हुए सीडी प्रोजेक्ट से भी जुड़ा रहा था.

इस काले कारोबार का खुलासा होने के बाद से सब से ज्यादा सवाल इस बात को ले कर उठ रहे हैं कि यह गोरखधंधा उदयपुर में पिछले 7 सालों से चल रहा था, लेकिन इंडस्ट्री के लिए जिम्मेदार रीको, जिला उद्योग केंद्र, सेल्स टैक्स, ड्रग कंट्रोलर, फैक्ट्री ऐंड बायलर तथा प्रदूषण नियंत्रण महकमे को भनक क्यों नहीं लगी?

हालांकि रीको के प्रभारी अफसर एम.के. शर्मा यह कह कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं कि किसी उद्योग पर नजर रखना या काररवाई करने का अधिकार हमें नहीं है. ड्रग कंट्रोलर का कहना है कि जब इस फैक्ट्री ने कोई लाइसेंस ही नहीं लिया तो जांच किस बात की करते.

अलबत्ता भारी मात्रा में मेंड्रेक्स और मेथाक्यूलिन का जखीरा हाथ लगने के बाद विश्व पटल पर बदनाम हुए उदयपुर के औषधि नियंत्रण विभाग की हकीकत समझें तो विभागीय नुमाइंदे ऐसे पदार्थ की प्रकृति और बिक्री से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं. इस पूरे मामले में गुजरात के 4 शीर्ष अधिकारियों के नामों का भी खुलासा हुआ है.

ड्रग्स बनाने का काम काफी जटिल और उबाऊ था. लेकिन सूत्र कहते हैं कि सुभाष दूदानी ने इस में भी कसर नहीं छोड़ी. मेथाक्यूलिन से मेंड्रेक्स बनाने के लिए उसे धोने और सुखाने तक का काम उस ने खुद किया.

इस के लिए उस ने फ्लूइड बेड ड्रायर काम में लिया. दूदानी इस सूखे मेथाक्यूलिन पाउडर को स्टार्च और मैग्नीशियम स्टीरेट व डाईकैल्शियम फास्फेट मिला कर मशीनों से प्रैस कर के इसे गोलियों की शक्ल देता था. फिर उन पर मुसकराहट का चिह्न भी लगाता था.

जीएसटी से देश को नुकसान होगा : राहुल गांधी

गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गांधीनगर में आयोजित रैली में केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने नोटबंदी, जीएसटी से लेकर बेरोजगारी जैसे तमाम मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र को घेरने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि जीएसटी को सरल नहीं बनाया तो देश को नुकसान होगा. इसके साथ ही राहुल ने पाटीदार नेता हार्दिक पटेल और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी को भी साथ आने का निमंत्रण दिया.

रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जीएसटी कांग्रेस की है और पार्टी एक कर की इस योजना को सरल रखना चाहती थी. 18 फीसदी की सीमा में. मगर वर्तमान में जो जीएसटी है, वह असल में ‘गब्बर सिंह टैक्स’ है.

राहुल गांधी ने कहा कि नोटबंदी ने अर्थव्यस्था को चौपट कर दिया था और अब जीएसटी. इसे सरल बनाना होगा नहीं तो देश को जबरदस्त नुकसान होगा. कांग्रेस उपाध्यक्ष ने अपने भाषण की शुरुआत ‘जय माता जी’, ‘जय सरदार’ और ‘जय भीम’ के नारे के साथ की. ये तीनो नारे गुजरात में ओबीसी, पाटीदार और दलित समुदाय के लोगों के हैं. पाटीदार नेता नरेंद्र पटेल द्वारा भाजपा पर रुपयों की पेशकश के आरोप पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला करते हुए उन्होंने कहा कि पैसों के दम पर गुजरात के युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता.

राहुल गांधी ने गुजरात यात्र के दौरान अपनी सभाओं में लगाए गए सभी आरोपों को एक बार फिर से दोहराया और कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था कुछ उद्योगपतियों के हाथ में चली गई है.

ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर कांग्रेस में शामिल

गांधीनगर में राहुल गांधी की विशाल रैली के बीच गुजरात के दिग्गज ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. अल्पेश ने नवसर्जन जनादेश रैली का आयोजन कर कांग्रेस का दामन थामा. अल्पेश की तारीफ करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि ऐसे युवा शांत नहीं रह सकते. कुछ ही दिन पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष से दिल्ली में मुलाकात के बाद अल्पेश ने पार्टी में शामिल होने की घोषणा की थी. अल्पेश ठाकोर पिछड़े वर्ग के नेता हैं, जिनकी छवि एक सामाजिक कार्यकर्ता की है. गुजरात में करीब 50 फीसदी मतदाता पिछड़े वर्ग से हैं.

पाटीदार नेता निखिल सवानी ने भाजपा छोड़ी

गुजरात में चुनावों से ठीक पहले पाटीदार नेता भाजपा के लिए परेशानी खड़ी करते दिख रहे हैं. नरेंद्र पटेल द्वारा भाजपा में शामिल होने के लिए रुपयों की पेशकश का आरोप लगाने के एक दिन बाद ही निखिल सवानी ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है.

निखिल सवानी का कहना है कि भाजपा ने पाटीदार समुदाय की मांग मानने का अपना वादा पूरा नहीं किया. उनके कांग्रेस में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से समय लेकर मिलना चाहते हैं.

इससे पहले रविवार को भाजपा में शामिल होने की घोषणा करने के कुछ घंटे बाद ही नरेंद्र पटेल अपने रुख से पलट गए थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा ने उन्हें निष्ठा बदलने के लिए एक करोड़ रुपये की पेशकश की थी, लेकिन वह अपने समुदाय के साथ छल नहीं करेंगे. रविवार देर रात उन्होंने पत्रकारों को 10 लाख रुपये की नकद राशि दिखाते हुए यह दावा भी किया था.

उधर, भाजपा प्रवक्ता भरत पांड्या ने कहा कि कांग्रेस के इशारे पर नरेंद्र पटेल ने यह किया. वह भाजपा में शामिल होने के लिए अपनी इच्छा से आए थे.

दान हो या टिप मुफ्तखोरी ही है

टिप देना बुरा है यह सुन कर कुछ अजीब लगा. नए रेलमंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि रेल कैटरिंग कर्मचारियों का खाना सर्व करने के बाद टिप लेना अवैध है और यह तुरंत बंद होना चाहिए. यह सच बात है कि रेल कैटरिंग के कर्मी अक्सर टिप के लिए जिद करते हैं और यदि कुछ लोग न दें तो उन्हें जलील करने से भी बाज नहीं आते. रेलवे के ज्यादातर कैटरिंग कर्मी सीधे रेलवे द्वारा नियुक्त नहीं होते. उन्हें वे कौंट्रैक्टर रखते हैं, जो रेलवे ने मोटी लाइसैंस फीस ले कर नियुक्त किए होते हैं.

रेलमंत्री ने टिप को बुरा कहा पर भाजपा के आकाओं की नीति तो दान देने की और रोज देने की है. जितने भी स्वामी, गुरु, बाबा, संतमहात्मा हैं सब हर समय बिना काम के पैसे देने की वकालत करते रहते हैं और हमें इन सब पर और इन के कथनों पर बड़ा गर्व रहता है. ‘भगवान टिप’ वसूलने के लिए हर मंदिर में कदम कदम पर दानपेटियों का इंतजाम होता है, जिन में 1 नहीं 7-7 ताले लगे होते हैं.

जहां संस्कृति और संस्कारों का मतलब बिना काम किए टिप या दान देना हो, वहां सेवा के बदले टिप मांगना और देना कैसे बुरा हो सकता है? आप को आप की सीट तक खाना पहुंचाया जा रहा है यह क्या कम कृपा है रेलवे कैटरिंग कौंट्रैक्टरों की? पैसे तो वे लेंगे ही पर टिप का अधिकार तो ऊपर से नीचे तक सब का है और यह कैसे बंद हो सकता है?

जरा देखिए तो कि जहां टिप नहीं वहां रेल कर्मचारी कैसा काम करते हैं. रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ होती है, अफरा तफरी होती है, क्योंकि यहां रेल कर्मचारियों को टिप नहीं मिलती. टिकट खिड़कियों पर टिकट लेने में घंटों लगते हैं, क्योंकि यहां कर्मचारियों को टिप नहीं मिलती. अगर भीड़ का दबाव न हो तो टिप न मिलने के कारण आप को प्लेटफार्म पर घुसने देने में भी आनाकानी होने लगेगी.

‘सेवा के लिए पैसा ले लिया गया तो टिप क्यों’ जैसी सोच ही गलत है, कम से कम हमारे यहां जहां हर नेता बिना सेवा किए ही जीने देने के लिए टिप लेता है. टिप तो एक अधिकार है जो सेवा देता है चाहे इसे अच्छी सेवा का इनाम माने या जबरन वसूली.

इस देश में सरकारी क्षेत्रों में ही नहीं प्राइवेट रेस्तराओं ने भी 10 से 15% जबरन टिप बिल में शामिल करनी शुरू कर दी है. उन्होंने टिप को विधिवत रूप दे दिया और फिर वेटर ऐसे खड़ा हो जाता है कि ग्राहक को टिप देनी ही होती है.

जापान ऐसा देश है जहां टिप का रिवाज बिलकुल नहीं है. उधर अमेरिका ऐसा देश है जहां पगपग पर टिप दी जाती है और अच्छी खासी दी जाती है.

टिप गलत है इस में संदेह नहीं. सेवा देने वाला अपनी पूरी सेवा का चाहे जो मूल्य तय कर ले उस पर ग्राहक का नियंत्रण नहीं है. उस के बाद जो पैसा चाहा जाए वह गलत है.

एक कर्मठ समाज को केवल मेहनत का मुआवजा मांगना चाहिए. मुफ्तखोरी चाहे वह दान हो या हफ्तावसूली केवल अपराध की गिनती में आना चाहिए.

मैं ने सुना है कि सुहागरात को ही पति को ज्ञात हो जाता है कि लड़की का कौमार्य भंग हो चुका है. क्या यह बात सही है.

सवाल
मैं 25 वर्षीय अविवाहित युवती हूं. इसी वर्ष के अंत तक घर वाले मेरी शादी कर देना चाहते हैं. मैं बहुत परेशान हूं, क्योंकि कालेज के दिनों में मेरे बौयफ्रैंड ने मुझे बरगला कर एक बार शारीरिक संबंध बना लिया था. उस के बाद मैं ने उस से सारे संबंध तोड़ लिए. इस बात को 4 साल हो चुके हैं. मैं ने सुना है कि सुहागरात को ही पति को ज्ञात हो जाता है कि लड़की का कौमार्य भंग हो चुका है. यदि ऐसा हुआ और पति ने मुझे अपमानित कर के छोड़ दिया तो क्या होगा? इस से तो अच्छा यही होगा कि मैं शादी ही न करूं? पर घर वालों से क्या कहूं कि मैं शादी क्यों नहीं करना चाहती? बड़ी उलझन में हूं. बताएं क्या करूं?

जवाब
अतीत में आप के साथ जो हुआ उसे भूल जाएं. कौमार्य या शील भंग जैसे शब्द आज बेमानी हो गए हैं. आप जब तक अपने मुंह से नहीं कहेंगी आप के भावी पति नहीं जान पाएंगे कि आप का किसी से संबंध बन चुका है. सुनीसुनाई बातों पर ध्यान न दें और भविष्य की सुखद कल्पना करें. सब अच्छा होगा. जरूरी है विवाह के बाद पतिपत्नी का एकदूसरे पर विश्वास हो. रिश्तों को ईमानदारी से निभाएंगे तो कोई समस्या नहीं होगी.

टौयलेट : एक फिसड्डी कथा

2 अक्तूबर, 2019 तक पूरे देश को खुले में शौच से छुटकारा दिलाने का टारगेट रखा गया है. सभी राज्यों को 31 दिसंबर, 2018 तक शौचालय बनाने का काम पूरा करना है. इस में देश के सभी राज्यों में बिहार ही सब से फिसड्डी है. टारगेट पूरा करने के लिए अब 15 महीने में राज्य में एक करोड़, 40 लाख शौचालय बनवाने होंगे, जो दूर की कौड़ी ही लग रहा है.

देश में शौचालय बनाने की राष्ट्रीय औसत 67 फीसदी है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा 32.5 फीसदी की रफ्तार से रेंग रहा है. देश के 192 जिले खुले में शौच से छुटकारा पा चुके हैं और इन में बिहार का एक भी जिला शामिल नहीं है.

शौचालय बनाने की अगर यही रफ्तार रही, तो बिहार साल 2022 तक भी खुले में शौच से नजात नहीं पा सकेगा.

साल 2019 तक राज्य में एक करोड़, 60 लाख शौचालय बनाने का टारगेट रखा गया है. इस को हासिल करने के लिए हरेक दिन 25 हजार शौचालय बनाने की जरूरत है. फिलहाल राज्य में रोजाना 8 हजार शौचालय ही बन पा रहे हैं.

बिहार में अभी तक महज 21 लाख, 85 हजार शौचालय ही बन सके हैं. यह राज्य सरकार की लापरवाही और नाकामी की कहानी बयां कर रहे हैं.

बिहार के पीएचईडी मंत्री विनोद नारायण झा का दावा है कि शौचालय बनाना और खुले में शौच पर रोक लगाना सरकार की प्राथमिकता है और इसे तय समय के अंदर पूरा कर लिया जाएगा. राज्य की एक हजार पंचायतें खुले में शौच से छुटकारा पा चुकी हैं.

इस साल 4,555 पंचायतों में पूरी तरह शौचालय बनाने का काम हो जाएगा. साल 2018-19 में 2,596 पंचायतों और 2019-20 में 1,240 पंचायतों को पूरी तरह से खुले में शौच से छुटकारा दिला दिया जाएगा.

शौचालय बनाने के मामले में फिसड्डी होने पर बिहार को फटकार लगाते हुए केंद्र सरकार ने उसे इस योजना को साल 2019 तक पूरा करने के लिए ऐक्शन प्लान बनाने को कहा है.

पिछले साल बिहार के नालंदा जिले के राजगीर ब्लौक के कई लड़कों ने रक्षाबंधन के मौके पर अपनी बहनों को शौचालय बना कर गिफ्ट करने की पहल कर इस योजना को रफ्तार देने की कोशिश की थी, पर किसी और जिले ने इसे बढ़ावा ही नहीं दिया.

राजगीर के रहने वाले किसान उमेश प्रसाद कहते हैं कि बहनों के लिए इस से बड़ा तोहफा क्या होगा कि उन्हें अब हर सुबह शौच के लिए घर से बाहर नहीं जाना पड़ेगा. जब सारी दुनिया गहरी नींद में डूबी रहती है, उस समय मांबहनें जाग कर शौच के लिए घरों से निकल जाती हैं. इस का फायदा उठा कर बदमाश छेड़खानी और बलात्कार की वारदात को आसानी से अंजाम देते रहे हैं.

व्यक्तिगत घरेलू शौचालय की एक यूनिट बनाने में 66 सौ रुपए की लागत आती है. इस में से 32 सौ रुपए केंद्र सरकार और 25 सौ रुपए राज्य सरकार मुहैया कराती है. शौचालय बनाने के इच्छुक लोगों को 9 सौ रुपए अपनी जेब से लगाने पड़ते हैं.

केंद्रीय पेयजल और स्वच्छता राज्यमंत्री एसएस अहलूवालिया ने पटना में कहा था कि शौचालय बनाने के लिए लोगों को बढ़ावा देने की जरूरत है. इस के लिए वे गांवों में जाएंगे और लोगों को टौयलेट के बारे में जागरूक करेंगे. शौचालय नहीं होने की वजह से होने वाले नुकसान को लोगों को बताने और समझाने की दरकार है.

क्या गरीब को इंसाफ नहीं मिलेगा?

मेरे गांव में 3 बच्चों की एक मां, जो बेहद गरीब बंजारा समुदाय से थी, के पति ने अपने झोंपड़ीनुमा घर में किसी वजह से खुद को आग लगा कर खत्म कर लिया था. गांव के कुछ लोगों ने इस खुदकुशी की वजह को अपने राजनीतिक इस्तेमाल के लिए एक ऐसे नौजवान के मत्थे मढ़ दिया, जिस का इस मामले में कुछ लेना देना नहीं था.

लोकल पुलिस के साथ मिल कर पंचायत चुनाव की दुश्मनी निकालते हुए तब के ग्राम प्रधान ने मरने वाले शख्स की बीवी और उस नौजवान के प्रेम प्रसंग के चलते उस के पति को जला कर मार देने के आरोप में मुकदमा दर्ज करा दिया.

औरत और उस के तथाकथित प्रेमी नौजवान को पुलिस ने जेल भेज दिया. बाद में उस नौजवान के घर वालों ने तो आरोपी नौजवान की जमानत करवा ली, पर उस औरत को किसी ने नहीं पूछा.

उस औरत की अदालत से बरी होने के बाद ही जेल से रिहाई मुमकिन हो सकी. चूंकि उस औरत के ससुराल और मायके पक्ष के लोग इतने गरीब थे कि वे इस मामले में वकील और जमानत की जरूरी शर्तों जैसे रुपएपैसों, जायदाद वगैरह को पूरा नहीं कर पाए, इसलिए उन्होंने अदालत में कभी जमानत की अर्जी भी नहीं दी थी.

इस तरह से उस औरत को बिना किसी अपराध के 7 साल तक जेल में सड़ना पड़ा. इस दौरान उस के मासूम बच्चों को जिंदा रहने के लिए सड़क पर भीख मांगनी पड़ी और होटल में बरतन धोने पड़े.

यह सिर्फ एक औरत की नहीं, बल्कि हर उस शख्स की कहानी है, जिसे भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था के साथ मिल कर कानून के फंदे में फंसा दिया जाता है. ऐसे लोगों का सालोंसाल ट्रायल चलता है और इंसाफ की आस में आंखें पथरा जाती हैं, लेकिन जमानत नहीं हो पाती है.

‘भिखारी का दोस्त भिखारी होता है’ कहावत तब सच हो जाती है, जब गरीबों से संबंधित मामलों में जमानत होने की बात आती है. कई ऐसे लोग जमानत मंजूर होने के बाद भी देश की जेलों से सिर्फ इसलिए रिहा नहीं हो पा रहे हैं, क्योंकि उन के पास जमानत की शर्तों को पूरा करने के लिए जरूरी रकम और जायदाद नहीं होती है.

आज भी इस देश में सब से ज्यादा दलित, मुस्लिम और आदिवासी समुदाय के लोग मामूली अपराधों के आरोप में महज इसलिए जेल में सड़ रहे हैं, क्योंकि उन के पास सांप्रदायिक और दलित आदिवासी विरोधी संगठित तंत्र से लड़ने के लिए कुछ भी नहीं है.

भले ही इस देश के लोकतंत्र में कानून के सामने बराबरी का भ्रामक जुमला फेंका जाता हो, लेकिन यह कड़वा सच है कि यहां आप को इंसाफ की उम्मीद तभी करनी चाहिए, जब आप के पास पैसा और जायदाद हो. अगर ऐसा नहीं है, तो फिर आप को इंसाफ नहीं मिल सकता और जमानत के बारे में तो सोचना भी नहीं चाहिए.

हमारी पूरी न्यायिक सोच ही इस बात पर टिकी होती है कि अगर आप के पास पैसा है, तभी आप को इंसाफ पाने का हक है. अगर यह सच नहीं होता, तो उस औरत को उस अपराध के लिए सजा नहीं मिलती, जिसे उस ने किया ही नहीं था. कम से कम जमानत तो उसे मिलनी ही चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

दरअसल, देश की आजादी के पहले का क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम अंगरेजों के साम्राज्यवादी फायदों को पूरा करने का वह हथियार था, जिस का इस्तेमाल कर के वे भारतीयों को डराते थे.

आजादी के बाद पुलिस, फौज और अदालत का जो ढांचा हम ने स्वीकार किया, वह आज भी घोर साम्राज्यवादी, भ्रष्ट, लुटेरा और अमीर लोगों को फायदा पहुंचाने वाला है.

भले ही हमें आजादी मिले 70 साल हो गए हैं, लेकिन आज भी इन बातों में कोई खास बदलाव नहीं किया गया. यही नहीं, सुधार के नाम पर पुलिस, फौज व अदालतों को और ज्यादा हक दिए गए और मनमानी का मौका सौंपा गया, ताकि संगठित लूट के खिलाफ कोई आवाज न उठ सके.

सच तो यह है कि आज भारत ग्लोबलाइजेशन के जिस दौर में पहुंच चुका है, वहां राज्य की जनहित भावना को खत्म कर दिया गया है और अब पोलिसी लैवल पर गरीबों को इंसाफ देने पर कोई बात नहीं होती. उन्हें बाजार के रहमोकरम पर छोड़ दिया गया है.

अब समूची राजनीति में इस बात पर बल देने की कोशिश चल रही है कि जिस के पास पैसा नहीं है, उसे इंसाफ पाने का भी कोई हक नहीं है. अब सबकुछ पैसों के रिश्तों में तबदील हो गया है. इस सोच को थोपा जा रहा है कि सरकार का काम केवल कारोबार के लायक माहौल बनाने और कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित है. बिना पैसों के इंसाफ देना उस का काम नहीं है.

यही नहीं, दूसरी तरफ गैरबराबरी का पक्ष लेती हुई नीतियों के खिलाफ लोगों के गुस्से से निबटने के लिए राजनीति द्वारा राजसत्ता को और ज्यादा तानाशाह बनाने पर लगातार काम चल रहा है.

चूंकि हमारा न्यायिक तंत्र भी इसी तंत्र का हिस्सा है, लिहाजा यह बेरहमी उस में भी दिखाई देती है, इसलिए इस बात की उम्मीद न के बराबर है कि राजनीतिक रूप से देश के क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को गरीबों की आसान पहुंच में बनाया जाएगा, ताकि माली आधार पर ही इंसाफ की सीढि़यां और पहुंच तय न हो.

आज हमारी नौकरशाही और न्यायपालिका जिस सोच में जी रही है, वह अपने चरित्र में घोर सामंतवादी और जातिवादी है.

चूंकि आदर्शवादी हालात में लोकतंत्र में जेल जाना एक अपवाद माना जाताहै, लेकिन जब जमानत की बात आती है, तो सचाई इस के ठीक उलट खड़ी हो जाती है.

आज हमारी राजनीति का चरित्र फासिस्ट और जनविरोधी हो गया है. वह इस बात पर लगातार काम कर रहा है कि कैसे इस तंत्र को और ज्यादा हिंसक बनाया जाए? फिर इस बात की उम्मीद ही नहीं है कि वह जायदाद के आधार पर इंसाफ और जमानत पाने की भावना को खारिज करेगा.

आज देश के एक बड़े तबके के पास जायदाद न के बराबर है. गरीब लगातार और भी गरीब होता जा रहा है. उसे इंसाफ से दूर किया जा रहा है. अगर हम अपने देश को तानाशाह के रूप में नहीं देखना चाहते हैं, तो हमें जमानत के लिए जायदाद की जरूरत को फौरन खत्म करना चाहिए. सस्ते और बेहतर इंसाफ तक सब की पहुंच को तय करना होगा.

बेहतर होगा कि जमानत के लिए वोटरकार्ड और आधारकार्ड को जायदाद के बतौर रखने का नियम अदालतें बनाएं, ताकि उस औरत जैसे गरीब बेगुनाह लोग बेवजह जेलों में न सड़ें.

कंडोम ऐड में दिखी करण और बिपाशा की केमिस्ट्री

बिपाशा और उनके पति करण सिंह ग्रोवर को बौलीवुड इंडस्ट्री के सबसे हौट और सिजलिंग कपल्स में से एक माना जाता है.

फिल्म ‘एलोन’ में एक दूसरे के साथ स्क्रीन शेयर कर चुकी यह जोड़ी एक बार फिर सुर्खियां बटोरती नजर आ रही है. जिसकी वजह कोई फिल्म नहीं बल्कि सिजलिंग केमिस्ट्री से भरा उनका लेटेस्ट कंडोम ऐड है.

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आपको बता दें कि बिपाशा और करण जल्द ही एक लेटेस्ट कंडोम के विज्ञापन में नजर आने वाले हैं. उन्होंने खुद इंस्टाग्राम पर अपने लेटेस्ट विज्ञापन का वीडियो जारी कर इसकी जानकारी दी है. तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो रहे इस वीडियो में करण जहां ज्यादातर सीन्स में शर्टलेस हैं, वहीं बिपाशा सिजलिंग और काफी हौट लग रही हैं.

वैसे देखा जाए तो दूसरे कंडोम विज्ञापन के मुकाबले इस विज्ञापन को कम से कम अश्लील बनाने का प्रयास किया गया है. इसमें पूरे समय आपको बिपाशा और करण का रोमांस दिखाई देता है और आखिर में आपको एक मैसेज मिलता है.

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वीडियो को शेयर करते हुए बिपाशा ने कैप्शन में लिखा- एक ऐसा देश जो दुनिया में जनसंख्या के लिहाज से दूसरे स्थान है, वहां हम अब भी सेक्स और कंडोम को लेकर असंगतियां रखे हुए हैं और वास्तविकता को मानने के लिए तैयार नहीं हैं. चलिए और बात करते हैं…और पढ़ते हैं…और सीखते हैं, उन चीजों के बारे में जिनके इस्तेमाल से बचाव किया जा सकता है. जिनकी मदद से परिवार नियोजन किया जा सकता है. सुरक्षित यौन संबंध बनाया जा सकता हैं. बिपाशा ने आगे लिखा, एक जोड़े के तौर पर हम इसमें विश्वास रखते हैं और इसीलिए हम इसका विज्ञापन कर रहे हैं.

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वीडियो के अलावा बिपाशा ने एड शूट के दौरान खींची गई तस्वीरें और इसका पोस्टर भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है जिसे दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं. हर तस्वीर को हजारों लाखों की तादाद में लोगों ने देखा और लाइक किया है.

बता दें, 2015 में आई फिल्म ‘एलोन’ के सेट पर बिपाशा और करण की नजदीकियां बढ़ी. एक साल डेटिंग के बाद जोड़ी ने अप्रैल 2016 को बंगाली रीति-रिवाज से सात फेरे लिए. यह बिपाशा की पहली और करण की तीसरी शादी है.

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