गुस्सैल प्रेमी को इस तरह प्रेम से करें कंट्रोल

प्रेमी प्रेमिका में भले कितना प्रेम हो, फिर भी कई बार छोटीछोटी बातों पर तूतू मैंमैं हो ही जाती है. ऐसे में अगर प्रेमी गुस्सैल है तो गुस्से में कुछ भी कह देता है या मिलने आना तक छोड़ देता है. ऐसे में अगर प्रेमिका सोचती है कि मैं क्यों मनाऊं, मैं क्यों झुकूं इस के सामने, कुछ दिन दूरी बनाए रखूंगी तो खुद ही कौल करेगा और इसे सबक भी मिलेगा, तो रिलेशन में यह ईगो कभी काम नहीं करती और अगर प्रेमी गुस्सैल है तो उम्मीद के विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है.

ऐसे में अगर ब्रेकअप हो जाए तो प्रेमीप्रेमिका अपनेअपने स्तर पर यह कहते पाए जाते हैं कि पार्टनर ने हमें प्रेम में धोखा दे दिया जबकि यह धोखा नहीं बल्कि ईगो का सवाल होता है. ऐसे में जरूरत है उसे प्यार से समझने व समझाने की, इस से धीरेधीरे आप उस का बिहेव भी अपने प्रति पौजिटिव देखने लगेंगी.

कैसे करें कंट्रोल

ऐक्शन में रिऐक्शन नहीं

आप के प्रेमी ने आप को मिलने के लिए बुलाया था लेकिन आप ट्रैफिक जाम या फिर अन्य किसी कारण से टाइम पर नहीं पहुंच पाईं जिस कारण प्रेमी को काफी देर तक वेट करना पड़ा और आते ही वह आप पर बरस पड़ा, तो आप भी चिल्लाने न लग जाएं कि तुम्हारी तो आदत ही ऐसी है, मैं ने गलती की जो तुम से मिलने आई.

ऐसे में दोनों तरफ गरमागरमी का माहौल होने के कारण बात बिगड़ सकती है. इसलिए खुद को कंट्रोल करते हुए कहें कि बेबी मेरे स्वीटहार्ट, नैक्स्ट टाइम से ऐसा नहीं होगा प्लीज, कूल डाउन. आप की यह बात सुन कर वह खुद को कूल करने पर मजबूर हो जाएगा. आप की इस समझदारी के कारण आप का रिलेशन भी मजबूत होगा.

छोेटी छोटी बात का इश्यू न बनाएं

आप का अपने प्रेमी के साथ कहीं घूमने जाने का प्रोग्राम था, लेकिन ऐन वक्त पर उस ने यह कह कर मना कर दिया कि मुझे आज राहुल के साथ शौपिंग पर जाना ज्यादा जरूरी है, इसलिए आज का प्लान कैंसिल.

उस की ऐसी बात सुन कर आप की नाराजगी जायज है, लेकिन चाहे आप को कितना भी गुस्सा आए, क्योंकि आप जानती हैं कि ऐन वक्त पर ऐसे नाटक करने की उसे आदत है, तब भी आप दिल पर न लें और न ही इस बात को ले कर इश्यू बनाएं. जब आप की तरफ से कोई रिऐक्शन नहीं होगा तो उसे भी अपनी गलती का एहसास होगा. इस से बात बिगड़ेगी नहीं और उस के मन में आप के लिए प्रेम भी बढ़ेगा.

रोमांस से करें कंट्रोल

प्रेमी अकसर प्रेमिका का स्पर्श चाहता है और अगर उसे एक बार स्पर्श मिल जाए तो चाहे वह कितने भी गुस्से में हो, उस का गुस्सा पल में छूमंतर हो जाता है.

ऐसे में जब वह गुस्सा करे तो उसे कौंप्लिमैंट दें कि वाहवाह तुम गुस्से में कितने स्मार्ट लगते हो, उस के लिप्स पर किस करें, उसे अपनी बांहों में लेते हुए कहें कि तुम ही मेरी दुनिया हो, हाथों में हाथ डालें, बारबार उस के हाथों पर किस करें. इस से आप उसे कंट्रोल में करने में कामयाब हो जाएंगी और वह  आप के इस रोमांटिक अंदाज के सामने अपना गुस्सा भी भूल जाएगा.

अकेले छोड़ कर न भागें, बात सुनें

हो सकता है आप का बौयफ्रैंड ऐसी सिचुऐशन से गुजर रहा हो, जिस के कारण उसे छोटीछोटी बातों पर गुस्सा आ जाता हो और वह आप को अपने मन की बात भी न बता पा रहा हो. ऐसे में यह सोच कर कि ऐसा मेरे साथ भी हो सकता है उस की प्रौब्लम को समझें. उसे अकेला छोड़ने की भूल न करें, क्योंकि ऐसे वक्त पता होने के बावजूद मेरी गलती है वह फिर भी आप का साथ चाहेगा. इसलिए चाहे वह कितना भी रूठा हो उसे मनाएं जरूर और अकेला न छोड़ें वरना इस से आप के बीच दूरियां ही बढ़ेंगी. धीरेधीरे हो सकता है वह भी अपनी आदतों को छोड़ दे.

नापसंद चीजों को अवौइड करें

आप अपने प्रेमी के नेचर को अच्छी तरह जानती हैं और उस की पसंदनापसंद से भी वाकिफ हैं, तो ऐसे में जब आप को पता है कि उसे लेट आना या फिर जब आप उस के साथ हों, तब किसी का फोन अटैंड करना पसंद नहीं है तो इन सब चीजों को अवौइड करें. आप की तरफ से इस तरह का एफर्ट आप के गुस्सैल प्रेमी को कंट्रोल में रखने में मददगार साबित होगा, क्योंकि उसे तो यही लगेगा कि आप सिर्फ दुख की साथी हैं सुख की नहीं.

फेवरिट डिश से करें गुस्सा ठंडा

आप ने बिजी होने के कारण उस का फोन नहीं उठाया. इस कारण वह आप से रूठ गया है, तो ऐसे में आप की जिम्मेदारी है कि आप उस का रोमांटिक अंदाज में गुस्सा ठंडा करें. इस के लिए उस की फेवरिट डिश खुद अपने हाथों से बना कर उस पर प्यार की बौछार कर दें और साथ ही उस की डैकोरेशन भी काफी सैक्सी अंदाज में करें कि उसे देख कर उस का खुद पर कंट्रोल ही न रहे.

सरप्राइज दें

किसी बात को ले कर आप में और आप के प्रेमी के बीच काफी समय से अनबन चल रही है, तो ऐसे में फोन पर बात करने से मिसअंडरस्टैंडिंग और बढ़ेगी ही. इस से अच्छा है कि उस के औफिस जा कर उसे सरप्राइज दें. इस से उसे काफी खुशी मिलेगी. उसे लगेगा कि आप की लाइफ में उस की वैल्यू है तभी आप उस के लिए इतनी दूर तक आई हैं. इस से वह भी आप को गले लगाने में देर नहीं लगाएगा.

उस की पसंद की चीजों में हामी भरें

भले ही आप दोनों की पसंद न मिलती हो, लेकिन फिर भी आप को अपने प्रेमी की खुशी के लिए उस की पसंद को अपनी पसंद बनाने की कोशिश करनी होगी. ऐसा बिलकुल न करें कि वह कोई भी चीज दिखाए और आप बस हर बार यही कहें कि मुझे तो यह बिलकुल पसंद नहीं बल्कि कहें कि तुम्हारी पसंद कितनी अच्छी है, मुझे भी बिलकुल ऐसी चीज ही पसंद आती है. आप के ऐेसे पौजिटिव ऐटिट्यूड को देख कर वह भी खुद को आप के लिए इंप्रूव करेगा.

पुरानी यादों से बिखेरें स्माइल

प्रेमी के चेहरे पर मुसकान लाने के लिए या फिर उसे कूल करने के लिए उस के सामने पुरानी यादों का पिटारा खोल डालिए, जिस में आप एकदूसरे को हग कर रहे थे, एकदूसरे के साथ खूबसूरत लमहे बिता रहे थे, एकदूसरे के हाथ में हाथ डाले हुए थे. जब वह पुरानी यादों को इन फोटोज के जरिए याद करेगा तो निश्चित ही वह कितने भी गुस्से में हो उस के चेहरे पर मुसकान लौट आएगी.

रोमांटिक पलों के लिए टाइम निकालें

हर प्रेमी चाहता है कि उस की प्रेमिका उस के साथ क्वालिटी टाइम बिताने के साथसाथ रोमांटिक टाइम भी बिताए और उस के कहे बिना जब आप उस के साथ खूबसूरत पलों को ऐंजौय करेंगी तो वह चाह कर भी आप से ज्यादा देर तक नाराज नहीं रह पाएगा.

इस तरह आप अपने गुस्सैल प्रेमी को प्रेम से बड़ी आसानी से कंट्रोल कर पाएंगी.

आलिया भट्ट के इस किरदार को निभाना चाहती हैं आंचल गोस्वामी

दिल्ली में जन्मी व दिल्ली के लक्ष्मीबाई कौलेज से राजनीति शास्त्र में स्नातक आंचल गोस्वामी भले ही तीन नवंबर को प्रदर्शि हो रही पिता पुत्र की कहानी वाली फिल्म ‘‘नारायण’’ के कारण सुर्खियों में हों, मगर अभिनय जगत में यह उनका पहला कदम नहीं है.

दिल्ली में पढ़ाई करने के साथ साथ नाटकों में अभिनय करने के अलावा कत्थक नृत्य सीखने में व्यस्त रही आंचल गोस्वामी ने सबसे पहले दूरदर्शन के ही सीरियल ‘‘डगर पनघट की’’ में अभिनय किया था. उसके बाद मुंबई पहुंचकर ‘वी’ चैनल के सीरियल ‘‘पी एस आई हेट यू’’ में अभिनय का जलवा दिखाया, जिसकी वजह से उन्हे फिल्मकार जोगेश सहदेवा ने उन्हें अपनी फिल्म ‘‘नारायण’’ की हीरोईन बना दिया.

इस फिल्म में एकलव्य कश्यप के संग उनकी रोमांटिक जोड़ी है. वैसे आंचल सोनी ‘जियो’ के विज्ञापन में जहीर खान तथा ‘न्यूट्रीलाइट बटर’ के विज्ञापन में संजीव कपूर के साथ भी नजर आ रही हैं.

खूबसूरत, आकर्षक व ग्लैमरस आंचल गोस्वामी से मुलाकात होने पर फिल्म ‘‘नारायण’’ की चर्चा करते हुए आंचल गोस्वामी ने खुद कहा ‘‘यूं तो यह फिल्म पिता पुत्र के आपसी रिश्तों की कहानी है. मगर इस कहानी में मेरा नेहा का किरदार काफी अहमियत रखता है.

नेहा स्कूल में पढ़ती है और अपने सहपाठी कबीर से प्यार करती है. नेहा को खुश करने के लिए कबीर अति महंगे उपहार लाकर देता है. इसी के चलते कबीर गलत लोगों की संगत में पड़ जाता है. उसके बाद कबीर के पिता अपने बेटे को सुधारने के लिए क्या क्या करते हैं, उसकी यह एक भावनात्मक कहानी है. इसमें मैंने कत्थक नृत्य भी किया है, अब तक जिन लोगों ने भी यह फिल्म देखी है, सभी ने मेरे अभिनय की तारीफ की है.’’

‘‘नारायण’’ के बाद फिल्में ही करेगी या पुन: टीवी सीरियल की तरफ मुड़ने वाली हैं?

इस सवाल पर आंचल गोस्वामी ने कहा -‘‘मेरे लिए काम अहमियत रखता है, माध्यम नहीं. अच्छा किरदार, अच्छी कहानी हो, तो मैं फिल्म या टीवी सीरियल दोनों कर सकती हूं. मेरी तमन्ना तो फिल्म ‘हाईवे’’ में जिस तरह का किरदार आलिया भट्ट ने किया था, वैसा ही किरदार निभाने की है.’’

देखिए सेक्सी विद्या बालन का मस्ती भरा अंदाज

‘बेगमजान’ और ‘द डर्टी पिक्चर’ जैसी फिल्मों मे अपने हाटनेस का जलवा बिखेरने वाली विद्या बालन इस बार काफी बदले बदले अंदाज में नजर आ रही हैं.

जी हां, इसबार उन्होंने अपना सेक्सी अवतार छोड़कर मस्ती भरा अंदाज अपना लिया है.

आप सोच रहें होंगे कि हम क्या कह रहे हैं और आखिर विद्या को हुआ क्या है तो अपकी जानकारी के लिए बता दें कि विद्या को कुछ नहीं हुआ हैं बल्कि उनकी आने वाली फिल्म ‘तुम्हारी सुलु’ का नया गाना ‘हवा हवाई 2.0’ रिलीज हुआ है.

इस गाने में वह झूमती, मस्ती करती और सेक्सी आवाज निकालने की कोशिश करती दिखाई दे रही हैं.

बताते चलें कि यह गाना श्रीदेवी और अनिल कपूर की फिल्‍म ‘मिस्‍टर इंडिया’ के गाने ‘हवा हवाई’ का रीमेक है. श्रीदेवी के इस गाने में विद्या बालन मस्‍ती भरे अंदाज में अपने शानदार एक्सप्रेशन के साथ डिस्‍को में नाचती दिख रही हैं.

नए म्‍यूजिक के साथ ‘हवा हवाई’ गाने में विद्या के साथ नेहा धूपिया और रेडियो से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने वाली आरजे मलिश्‍का भी डांस करती नजर आ रही हैं.

बता दें कि फिल्म ‘तुम्हारी सुलु’ 17 नवंबर को बाक्स आफिस पर रिलीज होगी. इस फिल्म की टैग लाइन है ‘मैं कर सकती है’. फिल्म में विद्या बालन एक लेट नाइट रेडियो जौकी के किरदार में नजर आएंगी, जो मुंबई में रहती है.

विद्या बालन के पति का रोल मानव कौल ने निभाया है जबकि विद्या की बौस के किरदार में नेहा धूपिया नजर आएंगी. इस फिल्म को सुरेश त्रिवेणी ने निर्देशित किया है. तनिष्‍क बाग्‍ची द्वारा रीक्रिएट किये गये ‘हवा हवाई’ गाने को गायिका कविता कृष्‍णमूर्ती ने अपनी अवाज दी है.

मायावती किसे दे रही हैं ‘बौद्ध धर्म’ की धमकी

अगर भाजपा नही सुधरी तो मायावती बौद्ध धर्म अपना लेंगी. खुद मायावती ने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में एक सभा में यह बात कही. मायावती का कहना है कि भाजपा ने दलितों, अति पिछडों, अल्पसंख्यकों और आदिवासियों के प्रति अपनी सोच नहीं बदली तो वह हिन्दू धर्म छोडकर बौद्ध धर्म अपना लेंगी. मायावती ने यह बात बसपा के एक कार्यकर्ता सम्मेलन में कही.

पूर्वांचल के आजमगढ़ में आयोजित इस सम्मेलन में आजमगढ़, वाराणसी और गोरखपुर के कार्यकर्ता हिस्सा ले रहे थे. मायावती की इस धमकी को फूलपुर लोकसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव से भी जोड़ कर देखा जा रहा है. मायावती की रणनीति यह है कि किसी भी तरह से वह चुनावी लड़ाई में सबसे प्रबल दावेदार बनी रहे. मायावती ने बौद्ध धर्म अपनाने की धमकी देकर नये सवालों को जन्म दे दिया है. लोगों को यह समझ नहीं आ रहा कि डाक्टर भीमराव अम्बेडकर की नीतियों पर चलने के बाद अब तक मायावती ने बौद्ध धर्म स्वीकार क्यों नहीं किया? क्या अब तक दलितों के साथ कोई भेदभाव नहीं हो रहा था?

हिन्दू धर्म में बढ़े भेदभाव, धार्मिक कर्मकांड और ऐसी ही तमाम कुरीतियों का विरोध करते हुये डाक्टर भीमराव अम्बेडकर ने हिन्दू धर्म को छोड कर बौद्ध धर्म अपना लिया. इसका प्रभाव भी पडा. कम से कम दलित बिरादरी में नई सोच का जनम हुआ था. दलित वर्ग के लोग खुद तो जागरुक हो ही रहे थे, अपने साथियों को भी जागरुक कर रहे थे.

जब दलित आन्दोलन को लेकर कांशीराम आगे बढ़े, तो वह भी बौद्ध धर्म अपना नहीं पाये थे. हालांकि कांशीराम बौद्ध धर्म अपनाना चाहते थे. मायावती ने दलित आन्दोलन से एकजुट बिरादरी का लाभ लेकर उत्तर प्रदेश में अपनी एक ताकत बनाई. 4 बार वह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी. वह दलित चेतना की बात को भूल गई. राजनीतिक ताकत के लिये दलित ब्राहमण गठजोड़ कर लिया. ऐसे में कभी भी यह नहीं लगा कि सामाजिक रूप से कहीं दलित और ब्राहमण एक साथ खड़े हों.

दलित के साथ तब भी समाज में वहीं भेदभाव था जो आज है. मायावती को दलित बिरादरी के लिये सामाजिक रूप से जो करना था वह नहीं कर पाई. जिससे दलित को लगा कि क्यों न वह धर्म की शरण में जाकर ही अपना उद्वार कर ले. भाजपा ने इस बात का लाभ उठाया. दलितों में कुछ वर्गों को भाजपा ने अपने साथ मिला लिया. अब यह लोग अगडों की तरह पूजा करते हैं. यह लोग मंदिरों में जाकर पूजा पाठ करना चाहते हैं. इनको लगता है कि अगड़ी जातियों की बराबरी के लिये जरूरी है कि वह भी उस तरह का ही काम करे. यह वर्ग इसी सोच में फंस मायावती से दूर हट गया. भाजपा ने इस वर्ग को नव हिन्दुत्व का पाठ पढ़ा दिया.

मायावती की असल परेशानी यह है कि दलित नव हिन्दुत्व की विचारधारा में शामिल होकर भाजपा से क्यो जुड़ रहे हैं? अगर यह बात मायावती ने कुछ समय पहले स्वीकार की होती और इसमें सुधार किया होता, तो बसपा इतना पीछे नहीं जाती. अब मायावती के बौद्ध धर्म अपनाने से भाजपा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला. दलित समाज भी इसको लेकर बहुत गंभीर नहीं है. मायावती को अगर दलितों कों अपने से जोड़ना है तो उनको यह समझाना शुरू करें कि क्या उनके लिये अच्छा है और क्या बुरा?

दलित अब पहले की तरह मायावती की बातों को आंख मूंद कर भरोसा करने को तैयार नहीं है. मायावती की दलितों के बीच जो छवि 2007 में थी अब वह नहीं रह गई है. मायावती को अगर अपनी खोई जमीन हासिल करनी है तो खोई छवि भी वापस लानी होगी. तभी बसपा का भला होगा. बौद्ध धर्म के शिगूफे से कुछ हासिल नहीं होगा. दलितों की बड़ी बिरादारी बौद्ध धर्म और उसकी खूबियों से अब परिचित भी नहीं रह गई है. भाजपा की सेहत पर इस बात से क्या फर्क पड़ने वाला है कि मायावती हिन्दू धर्म अपनाये चाहे बौद्ध. कानूनी तौर पर बौद्ध धर्म अपनाने की प्रक्रिया जटिल है. इसकी अनुमति उसी तरह नहीं मिलती जिस तरह से पिछड़ों को दलित वर्ग का दर्जा नहीं दिया जा रहा है.

कंपनी की पीठ में छुरा न घोंपें

आजकल नौकरी या जौब बड़ी मुश्किल से मिलती है और यदि वह मिलने के बाद छूट जाए तो आप सड़क पर आ जाते हैं, खासतौर पर तब जब कंपनी से आप को निकाला या बरखास्त किया जाता है. ऐसी स्थिति में कुछ लोग कई बार आत्महत्या तक कर बैठते हैं.

पहले तो यह जानना जरूरी है कि आप को नौकरी से क्यों निकाला या बरखास्त किया गया? आमतौर पर नियोक्ता अपने यहां कार्यरत व्यक्ति को तब तक नौकरी से नहीं निकालता, जब तक उस के पास इस की कोई ठोस वजह न हो. प्राय: इस में दोष कर्मचारी का ही होता है. विभिन्न कारणों से आप को नौकरी से हाथ धोना पड़ता है.

यदि आप कंपनी या संस्थान की पीठ में छुरा घोंपने वाला कोई भी कार्य कर रहे हैं यानी व्यक्तिगत लाभ की खातिर कंपनी को चूना लगा रहे हैं अथवा उस के समानांतर अपना व्यवसाय चला रहे हैं तो इसे कंपनी भला कैसे बरदाश्त करेगी?

कुछ ऐसे भी लोग हैं जो कार्य तो अपनी कंपनी में करते हैं, तनख्वाह भी कंपनी से पाते हैं, लेकिन उन का संबंध किसी अन्य कंपनी से भी होता है. ऐसे में वे अपनी कंपनी की गोपनीय बातें, जैसे कच्चा माल कहां से खरीदते हैं, तैयार माल कहां बेचते हैं, उत्पादन की प्रक्रिया, कंपनी की फाइनैंशियल पोजिशन आदि की जानकारी वहां देते हैं और बदले में मोटी राशि प्राप्त करते हैं. लेकिन आप की इस काली करतूत का कंपनी को कभी न कभी पता लग ही जाता है. ऐसे में भला वह ऐसे दोगले कर्मचारी को क्यों अपने यहां रखेगी?

कुछ ऐसे भी कर्मचारी हैं जो अधिकतर भ्रष्टाचार में लिप्त रहते हैं. भ्रष्टाचार सरकारी क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि प्राइवेट सैक्टर भी इस से अछूता नहीं है. बड़ीबड़ी कंपनियां सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दे कर अपना काम निकलवाती हैं. इस के लिए कंपनी के किसी व्यक्ति को भेज कर रिश्वत की पेशकश की जाती है. ऐसे कर्मचारी भी हैं जो कंपनी से रिश्वत के नाम पर 10 लाख रुपए ले जाते हैं, लेकिन देते हैं 5 लाख और 5 लाख रुपए अपनी जेब में रख लेते हैं. रिश्वत की कोई रसीद तो होती नहीं. नियोक्ता तो यही सोचता है कि 10 लाख रुपए ही रिश्वत दी होगी, लेकिन कई बार जब यह पोल खुलती है तो कंपनी द्वारा कर्मचारी को नौकरी से निकाला जाना तय है.

ऐसे कर्मचारियों की भी कमी नहीं है, जिन्हें खरीदबिक्री का जिम्मा मिला होता है. इन में भी कुछ कर्मचारी बेईमान होते हैं, वे खरीदते तो कम मूल्य पर हैं, लेकिन अधिक मूल्य का बिल बनवा लेते हैं और इस तरह से अपने फायदे के लिए कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं.

कुछ कर्मचारी कंपनी में चोरी करते या करवाते हैं या फिर अनधिकृत रूप से माल की निकासी करते हैं. कंपनी के गोदाम में माल के हिसाब में हेराफेरी करते हैं. इस से कंपनी को बड़ा नुकसान होता है. कई बार पुलिस जब तहकीकात करती है तो इस में कंपनी का ही कोई व्यक्ति शामिल पाया जाता है.

ऐसे भी कर्मचारी हैं जो अकाउंट में हेराफेरी करते हैं या कंपनी के पैसों का गबन करते हैं. ऐसे लोग चाहे जितने भी शातिर क्यों न हों, एक न एक दिन पकड़े अवश्य जाते हैं.

हर कर्मचारी को अपनी कंपनी के प्रति वफादार होना चाहिए. कोई भी कंपनी किसी भी व्यक्ति को जबरदस्ती अपने यहां काम पर नहीं रखती. व्यक्ति द्वारा आवेदन करने पर ही उसे रखा जाता है, यह सोच कर कि वह व्यक्ति ईमानदार और निष्ठावान होगा. अब यदि कोई कर्मचारी अपने व्यक्तिगत स्वार्थ को साधने की खातिर कंपनी को नुकसान पहुंचाता है तो यह कंपनी की पीठ में छुरा घोंपना ही होगा.

बस इसी तरह जपते रहियेगा ओम अच्छे दिनाय नम:

पिछले 3 सालों में देश का विकास हुआ या नहीं यह जानने के लिए तो आप को नरेंद्र मोदी द्वारा लगाए गए बड़ेबड़े होर्डिंगों पर विश्वास करना होगा पर आप के बैंक बैलेंस की रिटर्न कम हो गई, यह पासबुक साफसाफ बता रही है.

अगर आप पहले क्व50 लाख की एफडीआर से क्व40 हजार पा कर मजे में जिंदगी गुजार रहे थे तो अब बैंक आप को क्व30 हजार ही देगा पर नोटबंदी, पैट्रोल के दाम में वृद्धि, टमाटर प्याज के बढ़ते घटते दामों और महादानव जीएसटी से आप के ब्याज के पैसे और कम पड़ेंगे.

काले धन को मारने के चक्कर में मोदी सरकार ने संपत्ति से आप को भी नुकसान पहुंचाया है. अब न तो पहले खरीदी गई संपत्ति का दाम बढ़ रहा है और न ही किराया बढ़ रहा है, इसलिए वहां लगा पैसा भी अब विकास नहीं विनाश की ओर चल पड़ा है.

जिन्होंने शेयर बाजार में पैसा लगाया था उन्हें तो थोड़ी राहत है पर यह बाजार बेहद पेचीदा हो गया है और रातों रात मोदी सरकार के हर रोज बदलते फैसलों के कारण भाव बढ़तेघटते हैं और डिविडैंड की श्योरिटी नहीं रह गई है.

देश में बुलेट ट्रेन का सपना भले जम कर दिखाया जा रहा है पर उधार के पैसे से बनने वाली 1 लाख करोड़ रुपए की दिखावटी ट्रेन कोई मैट्रो नहीं है जोकि मुंबईअहमदाबाद के बीच सड़क या हवाईमार्ग के ट्रैफिक जाम को खत्म करने के लिए बनाई जा रही हो. अगर आप मुंबई या अहमदाबाद में रहते भी हों, तो यह आप की जेब में कुछ नहीं डालेगी.

आम महिला के द्वारा छिपा कर रखी गई हर संपत्ति अब विकास के खतरे में है. एक तरह से यह हमारे धर्म का सही प्रचार है कि व्रत करो, निर्वस्त्र रहो, नदी किनारे धूनी रमाओ, फलों पर जिंदा रहो व सारी संपत्ति गुणियों को दान कर दो. आप नहीं मानेंगे तो धर्म की व्यवस्था लागू करने के लिए विकास और अच्छे दिनों के नाम पर तरहतरह के कानून बना कर मनवा लेंगे.

हमारे यहां नई बहू बड़े चाव से घर में आती है पर आते ही पता चलता है कि उस के जेवर, कपड़े परिवार के विकास के लिए छीन लिए गए हैं. यही आम आदमी के साथ हो रहा है. बहू बस यही जपे: ओम पति सुखाय:, ओम विकास शिवाय:, ओम अच्छे दिनाय नम:.

क्या बता रहा है ‘टाइगर जिंदा है’ का पोस्टर

बौलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने पिछले दिनों दीवाली के मौके पर अपने फैंस को एक गिफ्ट दिया था. दीवाली के खास मौके पर सलमान ने अपनी फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ का फर्स्ट लुक जारी किया था.

वहीं अब इस फिल्म का पोस्टर रिलीज कर दिया गया है. फिल्म का पोस्टर बहुत ही इंट्रस्टिंग है. पोस्टर में कैटरीना कैफ और सलमान नजर आ रहे हैं, दोनों का लुक बहुत रफ एंड टफ लग रहा है.

कैटरीना पोस्टर में फाइटर वुमन लग रही हैं. वहीं सलमान हर बार की तरह अमेजिंग दिख रहे हैं. कैट और सलमान दोनों का एक्शन मोड चालू है. पोस्टर में देखा जा सकता है कैटरीना और सलमान ने अपने हाथों में बंदूकें पकड़ी हुई हैं.

सलमान खान अपनी फिल्म के इस पोस्टर को शेयर करते हुए लिखते हैं, ‘टाइगर इज बैक’. अभी ईद के मौके पर सलमान अपने फैंस के लिए ‘ट्यूबलाइट’ लाए थे. लेकिन फिल्म बौक्स औफिस में खास कमाल नहीं दिखा पाई.

लेकिन इस बार सलमान साल के आखिर में अपनी कमर कसते हुए नजर आ रहे हैं. इस बार इस साल के एंड में सलमान अब ‘टाइगर जिंदा है’ लेकर आ रहे हैं. 18 अक्टूबर को सलमान की फिल्म का फर्स्ट लुक सामने लाया गया था. इसके बाद अब फिल्म का ये पोस्टर रिलीज किया गया है.

बता दें कि सलमान और कैटरीना इस फिल्‍म का आखिरी गाना शूट करने के लिए इन दिनों ग्रीस में हैं जहां से इन दोनों ने अपने काफी खूबसूरत फोटो शेयर किए हैं. कैटरीना के शेयर किए हुए एक फोटो में वह सलमान खान के साथ भी नजर आ रही हैं. इस फिल्‍म में यह जोड़ी पूरे 5 सालों बाद साथ नजर आने वाली है.

#Drama …….the calm before the storm

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फिल्म का ज्यादातर हिस्सा सितंबर के अंत तक पूरा कर लिया गया था, आखिरी हिस्सा यानी क्लाइमेक्स सीन अबु धाबी में फिल्माया गया. फिल्म को औस्ट्रिया के टाइरोल में भी फिल्माया गया है. ‘टाइगर जिंदा है’ साल 2012 में कबीर खान के निर्देशन में बनी फिल्म ‘एक था टाइगर’ का सीक्वल है जिसमें सलमान और कैटरीना जासूस टाइगर और जोया की अपनी-अपनी भूमिका को फिर से दुहराते हुए नजर आएंगे.

खैर, अब फिल्म की कहानी को लेकर कुछ और खुलासे भी हुए हैं. एक अखबार के रिपोर्ट की मानें तो टाईगर जिंदा है की कहानी के तार इराक और सीरिया में तबाही मचाने वाले आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े हैं.

बता दें, इस आतंकी संगठन ने कुछ समय पहले इराक में रह रही 46 भारतीय नर्सों को बंधक बना लिया था. लेकिन भारतीय सरकार ने अपनी कूटनीतिक सूझबूझ से सभी नर्सों को छुड़वा लिया. इस घटना में इराक में भारतीय राजदूत बीबी त्यागी एक हीरो की तरह उभरे थे.

लिहाजा, फिल्म में कहीं ना कहीं सलमान खान का किरदार बी बी त्यागी जैसा ही होगा. तो आतंकियों के चंगुल से बंधकों को छुड़वा कर भारत की जमीं पर लाएगा. इस काम में कैटरीना भी सलमान की मदद करती दिखेंगी. बहरहाल, कोई शक नहीं अली अब्बास जफर इस कहानी को उम्दा तरीके से पेश करेंगे. लेकिन कहीं ना कहीं यहां हमें एयरलिफ्ट से रंजित कत्याल, यानि की अक्षय कुमार की याद आ रही है. फिल्म के 22 दिसंबर को रिलीज होने की संभावना है.

इस वजह से सलमान नहीं करते “लिप लौक”

बौलीवुड का बदलता स्वरूप और समय का असर आज हर फिल्मों पर सर चढ़ कर बोल रहा है. आज के दौर में बौलीवुड की शायद ही कोई ऐसी फिल्म होगी जिसमें एक या दो ‘किसिंग’ सीन न फिल्माया गया हो. आज यहां जितने भी अभिनेता हैं वो सभी अपनी फिल्मों में किसिंग सीन करते हुए पर्दे पर नजर आ ही जाते हैं.

लेकिन बौलीवुड में एक ऐसा एक्टर भी है, जिन्होंने आज तक बड़े पर्दे पर किसी के भी साथ लिप लौक नहीं किया है. हमारा मतलब है किसी के भी साथ किसिंग सीन नहीं किया है. जी हां, हम बात कर रहे हैं बौलीवुड के दबंग खान यानी सलमान खान की. जिन्होंने अपने इतने लंबे फिल्मी करियर में हीरोइनों को गले तो खूब लगाया है, लेकिन किसी के भी साथ ‘किसिंग सीन’ नहीं किया है.

सलमान खान बौलीवुड के इकलौते ऐसे अभिनेता हैं, जिनकी फिल्म में आपको रोमांस भरपूर मिल जाएगा, पर किस नहीं. बता दें कि सलमान खान ने शुरू से ही यह फैसला किया हुआ है कि वह किसी भी हीरोइन के साथ बड़े पर्दे पर किसिंग सीन नहीं करेंगे.

सलमान ने एक बार किया था लिप लौक

सलमान खान ने अपना पहला और आखिरी लिप लौक सूरज बडज़ात्या की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ में अपनी को-एक्ट्रेस भाग्यश्री के साथ किया था, पर सलमान ने फिल्म के इस सीन को फिल्मातें वक्त भाग्यश्री को छुआ भी नहीं था.

फिर यह बात तो सोचनी लाजमी है कि जब सलमान ने उन्हें छुआ भी नहीं तो आखिर लिप लौक हुआ कैसे? तो आपको बता दें कि इस लिप लौक के पीछे भी एक दिलचस्प सी कहानी है. जिसके बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं और आप इस बात को सुनकर हैरान हो जाएंगे.

एक अजीब तरीके से हुआ था लिप लौक

फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ के डायरेक्टर सूरज बडज़ात्या ने सलमान खान से काफी मिन्नतें की थी अपनी फिल्म में किसिंग सीन को करने के लिए. सलमान के बाद भाग्यश्री ने भी इस सीन को करने से बिल्कुल इंकार कर दिया था. फिर क्या था सूरज बडज़ात्या ने दोनों को मनाने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े.

बहुत मुश्किलों और काफी मिन्नतें करने के बाद दोनों ही इस सीन को करने के लिए तैयार हुए थे. डायरेक्टर ने सलमान और भाग्यश्री के बीच एक कांच का गिलास रखा. उसके बाद दोनों के बीच इस सीन फिल्माया गया.

इस फिल्म के बाद से ही सलमान खान ने यह फैसला कर लिया कि वह अपनी आगे आने वाली किसी भी फिल्म में किसिंग सीन नहीं करेंगे.

उन्होंने यह फैसला किया था कि वह कभी भी लिप लौक नहीं करेंगे. ऐसा कहा जाता है कि सलमान जब फिल्मों में आए थे तब ही से उन्होंने अपने आप से यह वादा कर लिया था कि वह कभी भी किसी फिल्म में लिप लौक नहीं करेंगे. सलमान आजतक इसी वादे को निभाते आ रहे हैं और उन्होंने अपनी हर फिल्म में ”नो किस क्लाज” कर रखा है. सलमान अपनी फिल्म की स्क्रिप्ट पढने के बाद यह क्लियर कर देते हैं कि वह फिल्म में किसी भी तरह का किसिंग सीन नहीं करेंगे.

सलमान खान के किस न करने की यही असली वजह है. उनका कहना है कि उन्होंने अपने फिल्मी करियर में न किसिंग सीन किया है और न ही वह आगे करेंगे. वह भले ही फिल्मों में किसिंग सीन न करें पर वह हमेशा की तरह रोमांस जरूर करेंगे.

आतंकी सलाहुद्दीन का बेटा दिल्ली में गिरफ्तार

आतंक पर शिकंजा कसते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन के बेटे शाहिद यूसुफ को गिरफ्तार कर लिया है. वैश्विक आतंकी व संयुक्त जिहादी काउंसिल के अध्यक्ष सलाहुद्दीन के बेटे पर अपने पिता के नाम पर आतंकी फंडिग के लिए पैसा लेने का आरोप है.

सलाहुद्दीन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में रहता है. एनआईए ने बताया कि 42 वर्षीय शाहिद जम्मू कश्मीर सरकार के कृषि विभाग में कार्यरत है. उसे पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया गया था. बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

चोरी छिपे पैसा मंगाता था

एनआईए के मुताबिक यूसुफ को आतंकवादी गतिविधियों के लिए विदेश से हवाला के जरिए रकम मंगाने के 2011 के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है. शुरुआती जांच में इस बात के सबूत मिले हैं कि यूसुफ सीरिया में रहने वाले गुलाम मोहम्मद भट के जरिए 2011 से 2014 के बीच चोरी छिपे पैसे मंगाता रहा था. इन पैसों का इस्तेमाल भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए किया गया.

एनआईए पुराने मामलों की जांच कर रही

एनआईए ने अप्रैल 2011 में यह मामला दर्ज किया था. यह पाकिस्तान से दिल्ली के रास्ते जम्मू कश्मीर में रकम के स्थानांतरण से जुड़ा मामला है. एनआईए अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के सहयोगी जी एम भट, मोहम्मद गनई, गुलाम जीलानी के खिलाफ आरोपपत्र दायर कर चुकी है.

सऊदी अरब में रह रहे भगोड़े से शाहिद यूसुफ के संबंध

एनआईए के मुताबिक शाहिद को अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर माध्यमों के जरिए एजाज अहमद भट से रकम प्राप्त हुई. एजाज भगोड़ा आरोपी है और सऊदी अरब में रह रहा है. शाहिद भट के कई भारतीय संपर्को में से एक है, जो मनी ट्रांसफर कोड के जरिए मोबाइल फोन से संपर्क में रहता था.

धार्मिक प्रपंच में गौण हो रहे बुनियादी मुद्दे

उत्तर प्रदेश में सरकार जिस तरह से धर्मिक प्रपंच का सहारा ले रही है उससे बुनियादी मुद्दे पूरी तरह से हाशिये पर हैं. अयोध्या में दीपावली पूजन, चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की आरती, आगरा में ताज महल का विवाद, कांवर यात्रा पर फूल वर्षा, धार्मिक शहरों को प्रमुख पर्यटन क्षेत्र के रूप में प्रचार करना और मुख्यमंत्री के सरकारी आवास  को गंगा जल से पवित्र कराना कुछ ऐसे प्रपंच हैं जिनका प्रचार ज्यादा हो रहा है. सरकार इन मुद्दों पर भी केवल बातें ही कर रही है. वहां विकास की कोई योजना को लेकर मूलभूत काम नहीं कर रही.

अगर अयोध्या की बात करें तो वहां के खर्च के संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदियनाथ का कहना है कि अयोध्या का खर्च संत महात्माओं ने किया. सरकार ने कोई खर्च नहीं किया. यह बात किसी के गले उतरने वाली नहीं है. अयोध्या में दीवाली की तैयारी एक सप्ताह पहले से राजधानी लखनऊ के अफसर अपनी निगरानी में करा रहे थे. अखबारों में जो बड़े बड़े विज्ञापन छपे उनका खर्च क्या किसी महात्मा ने दिया?

किसी भी शहर में सड़क, बिजली, पानी का इंतजाम करना ही वहां का विकास करना नहीं होता है. लोगों को रोजगार मिले, बेरोजगारी कम हो, लोग काम धंधे में लगें, इससे ही समाज में अमन चैन आता है. सड़कें कितनी ही अच्छी बन जायें, अगर रोजगार नहीं होगा तो लोग अपराध करेंगे. अयोध्या का सच दीवाली के दिन नहीं दिखा. आयोजन की भव्य चकाचौंध में वह सच कहीं खो गया था. अयोध्या का सच दीवाली की अगली सुबह दिखा जब बच्चे घर में सब्जी बनाने के लिये जलाये गये दीयों में बचे तेल को एक जगह एकत्र कर रहे थे. असल में तो दीवाली की सुबह तो अयोध्या में रामराज होना चाहिये था. जहां किसी को कोई कष्ट नहीं होता. रामराज की असल परिकल्पना तभी सच हो सकती है. जब समाज का अंतिम आदमी खुशहाल नजर आये.

भाजपा संस्थापक रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय की अंतोदय की परिकल्पना में भी समाज का वहीं अंतिम आदमी था. वह उसको ही खुशहाल बनाने का काम कर रहे थे. आज अंतिम आदमी का सच दीयों से तेल एकत्र करता दिखता है. किसी भी सरकार के लिये इससे शर्म की बात और क्या हो सकती है कि समाज के अंतिम आदमी का चेहरा ऐसा दिखता है. आजादी के बाद से हर सरकार हर बात में गरीबों के उद्वार की ही बात करती है. 70 साल के बाद भी भारत का गरीब दीयों से तेल एकत्र करता दिखता है. गरीब इस लिये गरीब है क्योंकि उसके पास काम नहीं है. देश में भीख मांगने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. हर जगह ऐसे लोग रोटी के एक एक टुकड़े के लिये संघर्ष करते देखे जा सकते हैं.

अगर धार्मिक प्रपंच को छोड़ कर सरकारों ने बुनियादी सुविधाओं ओर रोजगार की दिशा में काम किया होता तो गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती नहीं. सरकारी नीतियों से गरीबी रेखा के ऊपर और नीचे के लोग ही नहीं मध्यमवर्गीय परिवार भी गरीबी रेखा के करीब पहुंच गये हैं. बच्चे पढ़ रहे हैं, उनके पास कोई काम नहीं है. सरकारें दिखाने के लिये उनको ट्रेनिंग देने का काम करती है. इससे कितने युवाओं को रोजगार मिला यह देखने वाली बात है?

कौशल विकास को लेकर पूरे देश में बड़े जोरशोर से काम हो रहा है. कौशल विकास प्रशिक्षण पाये लोगों में से कितनों को रोजगार से जोड़ा जा सका, इसका सच सामने रखना चाहिये. सरकारी आंकडे पूरा सच नहीं दिखाते. ऐसे में सरकार को सामाजिक आंकड़ों को भी देखना चाहिये.

जिस अयोध्या के विकास के लिये पूरी सरकार एकजुट है कम से कम वहां तो रामराज कायम दिखना चाहिये. राम को आदर्श मानने वाले नेता क्या कभी रात में अपनी पहचान बदल कर अयोध्या की गलियों का सच देखने गये हैं? मंत्री के लिये अफसर रेड कारपेट बिछा कर सबकुछ ठीक होने का दावा हमेशा करते हैं. नेता की जिम्मेदारी होती है कि रेड कारपेट को हटा कर नीचे छिपे सच को देखे. संविधान ने इसी लिये उसे पढ़े लिखे अफसर से ऊपर का दर्जा दिया है. कागज में धर्म की नगरी को पर्यटन का दर्जा देने से वहां का भला नहीं होने वाला. अखिलेश सरकार के समय भी नैमिष और मिश्रिख को पर्यटन का दर्जा दिया गया था. सड़के बनी, बसे चली, विज्ञापन छपे इसके बाद भी यहां के हालात नहीं बदले. आज भी यहां के लोगों के पास कोई रोजगार नहीं है.

कांवर यात्रा के दौरान सरकार की तमाम सुविधाओं के बाद भी कांवर यात्रा करने वाले रास्ते भर परेशान और लोगों से मदद मांगते दिखे. सरकार ने कांवर मार्ग पर पुष्प वर्षा का वादा किया पर यह पुष्प कावंर यात्रा करने वालों के सफर को सुखद नहीं बना पाये. अगर पुष्प वर्षा से कांवर यात्रियों को सुविधा मिल जाती तो वह मदद क्यों मांगते दिखते? धर्म के नाम पर जनता को बहुत समय तक मुद्दों से दूर नहीं रखा जा सकता है. जरूरत इस बात की है कि बेरोजगारों के लिये काम के अवसर बढ़ाये जाएं. जब तक लोगों के लिये रोजगार नहीं होगा भुखमरी बनी रहेगी. न मजदूर खुश होगा न किसान. वह ऐसे ही दीयों के बचे तेल से अपने घर की सब्जी बनाने के इंतजाम करता रहेगा. सरकार कितने भी किसानों के लोन माफ कर दे, कुछ ही दिनों में फिर से वहीं हालात बन जायेंगे.

धार्मिक प्रपंच में जुटे लोग इस तथ्य को समझ लें कि इसी देश में कहा गया है कि ‘भूखे भजन न होय गोपाला’ इसका अर्थ है कि अगर कोई भूखा है तो वह किसी भी तरह से धार्मिक प्रवचन न कर सकता है और न सुन सकता है. जिस समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दीप जला कर अयोध्या में खुशियों की दीवाली मना रहे थे, भूखे पेट रहने वालों की नजर उन दीयों पर रही होगी, वह सोच रहे होंगे कि दीयें कितनी जल्दी बुझ जाये, जिससे दीयों का तेल बचा रह सके. उनकी असल खुशी दीयों के जलने से नहीं दियों के बुझने से थी. उनकी भूख जलने वाले दीयों से नहीं बुझे दीयों से बुझी, जिनसे उनको सब्जी बनाने के लिये तेल मिल सका. अयोध्या की ऐसी दीवाली के सच को समझ कर समाज के अंतिम आदमी की खुशहाली से समाज में बदलाव होगा. भूखे पेट तो धर्म की चर्चा भी नहीं होती.

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