नाना पाटेकर की पर्दे पर शानदार वापसी, अजय देवगन ने शेयर की तस्वीर

अभिनेता अजय देवगन ने शुक्रवार को अपनी मराठी फिल्म ‘आपला मानुष’ का पहला लुक साझा किया. इसमें अभिनेता नाना पाटेकर एक आम आदमी के रूप में तूफानी रात में बाइक चलाते नजर आ रहे हैं. सतीश राजवाड़े निर्देशित इस फिल्म में सुमीत राघवन और इरावती हर्षे भी हैं. अजय ने तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा, “और यह रहा..हमारी मराठी फिल्म ‘आपला मानुष’ का पहला लुक नाना पाटेकर, सतीश राजवाड़े, सुमीत राघवन, इरावती हर्षे, सुधांशु वत्स.”

अजय ने एक बयान में कहा, “इतने सालों में मुझे जो प्यार और समर्थन मिला है, उसने मुझे हमेशा प्रशंसकों को और ज्यादा देने के लिए प्रेरित किया है. बतौर निर्माता ‘आपला मानुष’ महाराष्ट्र के लोगों के प्रति आभार जताने के लिए मेरा पहला प्रयास है और मैं उम्मीद करता हूं कि इसे सभी सराहेंगे.” इस फिल्म से वायकौम18 भी मराठी फिल्मों में आगाज कर रहा है.

वायकौम18 मोशन पिक्चर्स के सीओओ (चीफ औपरेटिंग औफिसर) अजीत अंधारे ने कहा, “हमने पिछले कुछ सालों में मराठी फिल्म उद्योग में बड़े पैमाने पर दर्शक वर्ग को उभरते देखा हैं, यह सिर्फ बौक्स औफिस पर प्रदर्शन के मामले में ही नहीं बल्कि विभिन्न विधाओं के मामले में भी है.” फिल्म ‘आपला मानुष’ अगले साल नौ फरवरी को रिलीज होने की उम्मीद है.

8 साल पहले शादी के बंधन में बंधा यह कपल लेने जा रहा है तलाक

सेट पर प्यार, इजहार और फिर शादी… बौलीवुड और टीवी इंडस्ट्री के सेलेब्स के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है. कुछ रिश्ते ताउम्र टिक जाते हैं तो वहीं कुछ तलाक में तब्दील हो जाते हैं. ऐसी ही कुछ खबरें पिछले कुछ महीनें से टीवी स्टार रहीं ‘कुमकुम’ की लीड एक्ट्रेस जूही परमार और उनके पति सचिन श्रौफ को लेकर आ रही थीं. लेकिन अब खबर पक्की हो चुकी है कि 8 साल पहले शादी के बंधन में बंधा यह कपल अब तलाक लेने की कगार पर आ गया है. जूही और सचिन ने फैमिली कोर्ट में तलाक लेने के लिए पेपर भी फाइल कर दिया है.

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खबरों के अनुसार एक इंटरव्यू में जूही ने बताया था कि सचिन को भूलने की बीमारी है जोकि उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं है. तो वहीं सचिन ने भी एक इंटरव्यू के दौरान खुलासा किया था कि जूही शौर्ट टेम्पर्ड (जल्द ही गुस्सा हो जाना) हैं. बताया जा रहा है कि तलाक के बाद चार साल की बेटी समायरा को जूही अपने पास ही रखेंगी.

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कब हुई मुलाकात

जूही ‘बिग बौस 5’ की विजेता भी रही हैं. वहीं सचिन श्रौफ ने भी श्रीकृष्ण की भूमिका से दर्शकों के दिल में बस गए थे. दोनों की मुलाकात एक टीवी शो के दौरान हुई थी. इसके पांच महीने बाद दोनों ने एक-दूसरे से प्यार का इजहार किया और फिर शादी के बंधन में बंध गए.

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बता दें कि टीवी शो ‘कुमकुम एक प्यारा सा बंधन’ के जरिए घर-घर में पहचान बनने वाली एक्ट्रेस जूही परमार ने साल 2009 में अभिनेता सचिन श्रौफ से शादी की थी. शादी के कुछ सालों के बाद से ही दोनों में रिश्ते बिगड़ने लगे थे. फिर 2013 में बेटी समायरा का जन्म हुआ था बेटी के जन्म के बाद जूही और सचिन के बीच रिश्ते फिर से सुधरे लेकिन पिछले एक साल से बात बिगड़ने की वजह से दोनों अलग रहने लगे थे और अब आपसी सहमति से उन्होंने तलाक लेने का फैसला कर लिया है.

तीन तलाक पर कांग्रेस बनाएगी साझा रणनीति

एक बार में तीन तलाक कहकर विवाह को समाप्त करने के खिलाफ (मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2017 लोकसभा में बिना किसी संशोधन के पारित हो गया लेकिन उच्च सदन में विपक्ष अपने संशोधनों के लिए दबाव बना सकता है. कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मामले में विपक्ष के साथ साझा रणनीति बनाकर कोई फैसला करेगी.

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि उच्च सदन में हम अपने संशोधनों पर दबाव बना सकते हैं. पार्टी तलाक को आपराधिक बनाने और पति के जेल जाने के बाद गुजारा भत्ता जैसे प्रावधानों को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान कराने का प्रयास करेगी. कांग्रेस का कहना है कि हम विधेयक का विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन विधेयक को मजबूत बनाने के लिए हम राज्यसभा में सरकार पर दबाव बनाने से नहीं हिचकेंगे जिससे मुस्लिम महिलाओं के हक को ज्यादा मजबूती दी जा सके.

उच्च सदन में विपक्ष के पास ताकत

कांग्रेस के अलावा सपा, माकपा जैसे दलों ने लोकसभा में विधेयक की जल्दबाजी पर सवाल खड़ा करते हुए इसे संसदीय समिति के पास भेजने की वकालत की है. यह सभी दल उच्च सदन में विधेयक पर ज्यादा विचार विमर्श के लिए समिति के पास भेजने की मांग दोहरा सकते हैं. उच्च सदन में विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या बल है इसलिए अगर विपक्ष एक साथ संशोधनों पर दबाव बनाए या फिर इसे संसदीय समिति के पास भेजने का आग्रह करे तो सरकार के लिए चुनौती हो सकती है.

उठाए गए हैं कई सवाल

लोकसभा में कांग्रेस ने विधेयक की कई खामियों का जिक्र करते हुए विधेयक को ज्यादा मजबूत बनाने की वकालत की थी. इसमें कहा गया था कि तीन तलाक साबित करने की जिम्मेदारी महिला पर डाली गई है. कांग्रेस का कहना है कि करीब महिलाएं यह साबित करने के लिए अदालतों के चक्कर काटती रहेंगी कि उन्हें तीन बार तलाक दिया गया कि नहीं. यह जिम्मेदारी पतियों पर डाल देनी चाहिए. इससे यह कानून और कठोर एवं महिलाओं के पक्ष में हो जाएगा.

विपक्षी दलों को आशंकाएं

तीन साल की सजा पर भी कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों को कुछ आशंकाएं हैं कि अगर पति जेल गया तो उसकी पत्नी एवं बच्चों का गुजारा भत्ता कौन देगा. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कई मसलों पर संशोधनों के जरिये विधेयक को मजबूती दी जा सकती है.

मसौदे पर केंद्रीय मंत्रालयों में नहीं थी एकराय

तीन तलाक विधेयक भले ही गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गया हो, लेकिन केंद्रीय मंत्रालयों के बीच इसके मसौदे पर एकराय नहीं थी. निचले सदन में जिस तरह के सवाल इस विधेयक पर उठे, ठीक उसी तरह के सवाल महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इसके प्रावधानों को लेकर उठाए थे. साथ ही कानून मंत्रालय को संबंधित प्रावधानों को और स्पष्ट करने का सुझाव दिया था.

कानून मंत्रालय ने तीन तलाक विधेयक के मसौदे पर केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों से सुझाव आमंत्रित किए थे. राज्य सरकारों ने इस अहम कानून के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने में खासी लापरवाही दिखाई, जबकि महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) मंत्रालय ने मसौदे के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए उन्हें और स्पष्ट करने को कहा था.

सूत्र बताते हैं कि कानून मंत्रालय की ओर से की गई रायशुमारी महज खानापूर्ति थी. शायद यही वजह है कि साथी मंत्रालय द्वारा दिए गए सुझावों को शामिल नहीं किया गया. कानून मंत्रालय को दिए गए जवाब में डब्ल्यूसीडी ने कहा था कि जब तीन तलाक देने पर पति को जेल भेज दिया जाएगा तो पीड़िता पत्नी को जेल से वह गुजारा भत्ता या हर्जाने का भुगतान कैसे कर पाएगा.

डब्ल्यूसीडी ने कानून मंत्रालय से कहा कि तीन तलाक को जब गैरकानूनी करार दिया जा रहा है तो किस आधार पर गुजारा भत्ता मुस्लिम महिला को मुहैया कराया जाएगा. कानून मंत्रालय को साथी मंत्रालय ने चेताया था कि जब तलाक गैरकानूनी करार दे दिया गया यानी तलाक हुआ ही नहीं तो फिर एक महिला को किस आधार पर बच्चों की देखरेख कैसे प्रदान की जा सकेगी, जैसा कि विधेयक में शामिल धारा-6 में अवस्यक बच्चों की कस्टडी मुस्लिम महिला को दिए जाने का प्रावधान है.

नहीं दिया जवाब

दूसरी ओर मंत्रालय की ओर से भेजे गए मसौदे पर महज 11 राज्यों की ओर जवाब भेजा गया. जवाब देने वाले 11 राज्यों में महज तमिलनाडु ही एक ऐसा राज्य था जो तीन तलाक के उस प्रावधान पर सहमत नहीं था जिसमें तीन साल की सजा देने को कहा गया है.

कांग्रेस की सरकार वाले राज्य भी चुप

गौरतलब है कि बाकी दस राज्यों ने केंद्र द्वारा भेजे गए मसौदे पर पूरी सहमति जताई. इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, अरूणाचल प्रदेश और आसाम समेत अन्य राज्यों ने केंद्र को दिए गए जवाब में पूरा समर्थन जताया. हालांकि अन्य राज्य चुप्पी साधे रहे और कोई प्रतिक्रिया नहीं थी. इनमें कांग्रेस सरकार वाले पंजाब, कर्नाटक जैसे राज्य भी शामिल हैं.

मुस्लिम महिलाएं अब चार शादी के खिलाफ हल्ला बोलेंगी

तीन तलाक पर सफलता हासिल करने के बाद मुस्लिम समुदाय की महिलाएं अपना संघर्ष रोकने के मूड में नहीं हैं. अब उन्होंने मुस्लिम धर्म में जारी बहुविवाह (चार शादी का प्रावधान) और निकाह हलाला के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है. तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई को सर्वोच्च अदालत तक ले जाने वाली उत्तराखंड के शायरा बानो ने बुधवार को कहा कि अब उनकी अगली लड़ाई बहुविवाह और निकाह हलाला के खिलाफ होगी. हमारे समाज में इसके लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए.

खुल्लमखुल्ला प्यार करेंगे हम दोनों

गे हो या लैस्बियन, अकसर लोग इन्हें देख कर नाकभौं सिकोड़ने लगते हैं. समलैंगिक संबंधों को हेयदृष्टि से देखा जाता है. आज तक हमारा समाज इन संबंधों को स्वीकार नहीं कर पाया है. समाज और धर्म के ठेकेदारों का मानना है कि आखिर एक युवक दूसरे युवक से कैसे प्यार और शादी कर सकता है. उसे तो युवती से ही प्यार करना चाहिए और युवती को भी हमेशा युवक से ही प्यार करना चाहिए. समलैंगिक संबंधों को समाज हमेशा गलत मानता रहा है, लेकिन समलैंगिक संबंध रखने वाले लोग अब खुल कर सामने आने लगे हैं.

समलैंगिक युवकयुवतियां अब परेड के माध्यम से अपने प्यार का खुल कर इजहार करने लगे हैं, न तो अब उन्हें किसी का डर है और न ही किसी की चिंता. यदि आप उन्हें स्वीकार नहीं करना चाहते तो न करें. इन्हें आप के नाकभौं सिकोड़ने से भी कोईर् फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि अब ये चल चुके हैं एक अलग रास्ते पर जहां इन की सब से अलग, सब से जुदा दुनिया है.

14 पौइंट्स समलैंगिक संबंधों पर

1. आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं

प्यार की परिभाषा सिर्फ महिला और पुरुष के प्यार तक सीमित नहीं है, प्यार किसी से भी हो सकता है. पुरुष को पुरुष से, औरत को औरत से. अगर 2 पुरुष या महिलाएं साथ रहना चाहती हैं तो इस में हर्ज ही क्या है भाई, रहने दो, उन को साथ, आप क्यों बीच में टांग अड़ा कर इसे गलत साबित करने में तुले हैं. जिंदगी उन की है उन्हें उन के तरीके से जीने दीजिए.

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2. लंबी है समलैंगिक संबंधों की लड़ाई

वक्तबेवक्त समलैंगिक सड़कों पर उतर कर अपनी आवाज बुलंद करते रहते हैं. सिर्फ इसलिए कि आप और हम इन्हें सामान्य नजरों से देखें. इन्हें कानूनी अधिकार मिल सकें.

समलैंगिक संबंध रखने वाले लोग परेड का आयोजन करते हैं, जिस में बड़ी तादाद में देशीविदेशी शिरकत करते हैं. दुनिया की बात तो छोड़ दीजिए, क्या भारत समलैंगिकता को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है? क्या गे, लैस्बियन, ट्रांसजैंडर को समान अधिकार दिए जाएंगे? अभी तो भारत में इसी पर बहस चल रही है.

सब से पहले लोग समलैंगिकता को ले कर अपना दृष्टिकोण बदल लें, सोच का दायरा बढ़ा लें, यही काफी होगा. अभी भी हमारे समाज में इन्हें मानसिक रोगी समझा जाता है.

3. समाज में फैली हैं भ्रांतियां

लैस्बियन और गे को ले कर समाज में कईर् तरह की गलतफहमियां हैं. लोग समलैंगिकता को एक विकल्प समझते हैं. वे सोचते हैं कि युवतियां जिम्मेदारियों से बचने के लिए लैस्बियन बनती हैं, ताकि उन पर कोई बोझ न पड़े, जबकि यह सरासर गलत है. साथ ही, लोगों में ये भी गलतफहमी है कि समलैंगिकों में एड्स की आशंका सब से अधिक रहती है, जबकि यह भी एक गलत धारणा है.

4. समलैंगिक अप्राकृतिक संबंध नहीं

विषमलैंगिक संबंध रखने वाले ज्यादातर लोगों का मानना है कि समलैंगिकता अप्राकृतिक है. वे सोचते हैं कि शायद इन में कुछ अंदरूनी गड़बड़ है इसलिए ये ऐसे हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है. विज्ञान की नजर से देखें तो समलैंगिक संबंध बिलकुल सामान्य है.

5. क्रांतिकारी हैं समलैंगिक

समलैंगिक संबंध रखने वालों में प्यार की भावना विषमलैंगिकों से कहीं ज्यादा होती है. ये न सिर्फ अपने प्यार का खुल कर इजहार करते हैं बल्कि पूरी दुनिया के आगे उस की तसदीक करते हैं, जो आप और हम नहीं कर सकते. पौप गायिका लेडी गागा भी समलैंगिक संबंधों की वकालत कर चुकी हैं. गागा के मुताबिक, ‘‘समलैंगिक संबंध रखने वाले प्यार के क्रांतिकारी होते हैं.’’

6. फैशन नहीं है समलैंगिक संबंध

लोगों को लगता है कि समय तेजी से बदल रहा है. देश पाश्चात्य संस्कृति को अपना रहा है, लिहाजा, समलैंगिक संबंध का भी चलन है, इसलिए आजकल के युवा इस तरह की हरकत पर उतारू हैं. मनोवैज्ञानिकों की मानें तो यह कोई फैशन नहीं है, समलैंगिक संबंध किसी व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करते हैं कि वह किस से संबंध रखना चाहता है, कैसे संबंध रखना चाहता है. आप और हम उसे फैशन करार नहीं दे सकते. समलैंगिक संबंध बनाना उस का निजी फैसला है.

7. विदेशों में आमबात, भारत में हायतौबा

विदेशों में संबंध चाहे समलैंगिक हों या विषमलैंगिक, हर किसी को अपने तरीके से जिंदगी जीने की आजादी है. कोई कुछ भी करे, किसी को कोई मतलब नहीं, जबकि यहां स्थिति उलट है. समलैंगिक संबंधों को ले कर यहां खूब होहल्ला मचाया जाता है. चिल्लाने से अच्छा कि लोग पहले अपने गिरेबां में झांकें, फिर कुछ बोलें.

8. अदालत से मिली है मंजूरी

2013 में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक मैरिज को लीगल करार दिया था. जुलाई 2014 में समलैंगिक शादी को 19 राज्यों में लीगल माना गया था. 2012 में अमेरिका के राष्ट्रपति ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि मुझे लगता है कि समलैंगिक जोड़े शादी करने के लिए सक्षम हैं. 15 देश समलैंगिक शादी को मंजूरी दे चुके हैं. हालांकि अमेरिका के कोलोराडो में अब भी समलैंगिक शादी को मंजूरी नहीं दी गई है.

9. छिपाए जाते हैं संबंध

समलैंगिक संबंधों का खौफ अब भी बरकरार है. समलैंगिक जोड़े अकसर ये सोचते हैं कि क्या लोग उन्हें स्वीकार कर पाएंगे? क्या घर वाले उन की इच्छा जान पाएंगे? कई साल वे इसी कशमकश में निकाल देते हैं. कई रिश्ते घर वालों की मरजी की भेंट चढ़ जाते हैं. परिजन समलैंगिक संबंध को यह सोच कर स्वीकार नहीं कर पाते कि वे लोगों को क्या मुंह दिखाएंगे. रिश्तेदारों से क्या कहेंगे कि उन के बेटे या बेटी के समलैंगिक संबंध हैं या वे सम लिंग से शादी करना चाहते हैं.

देश में कई समलैंगिक जोड़े ऐसे हैं जिन्हें घर वालों का डर सताता रहता है और वे खुल कर अपनी बात नहीं रख पाते. कई बार तो वे घर वालों की मरजी से शादी तो कर लेते हैं, लेकिन पीठ पीछे समलैंगिकता का खेल भी चलता रहता है, जो एक न एक दिन सामने आ ही जाता है.

10. खुल कर रखें अपनी बात

यदि आप ऐसे किसी जोड़े को जानते हैं जिस के समलैंगिक संबंध हैं तो बजाय मजाक उड़ाने के, आप उन का साथ दें, ताकि वे अपनी बात खुल कर लोगों के सामने रख सकें. हर कोई खुल कर होहल्ला मचाए, यह जरूरी तो नहीं, हर इंसान का व्यवहार अलगअलग होता है. लिहाजा, समलैंगिक संबंध रखने वाले शरमाएं नहीं, खुल कर अपनी बात घर वालों के सामने रखें, उन्हें तैयार करें.

अपने संबंधों के लिए उन्हें बताएं कि यह कोई बीमारी नहीं है. सब चीजें उन के मनमुताबिक नहीं हो सकतीं. अब ऐसा तो है नहीं कि जो खाना हमें पसंद है ठीक वैसा ही खाना दूसरे को भी पसंद हो, हर व्यक्ति की पसंदनापसंद अलग होती है.

11. कई संस्थाएं करती हैं समर्थन

देशविदेश में कई संस्थाएं हैं जो समलैंगिक संबंधों की पक्षधर हैं और उन का खुल कर समर्थन करती हैं. उन में से एक नाम है उर्वशी वेद का भी है जो अमेरिकन ऐक्टिवस्ट के रूप में गे, लैस्बियन, ट्रांसजैंडर के लिए करीब 25 साल से काम कर रही हैं. भारत में ऐसी कई संस्थाएं हैं जिन में से एक है नाज फाउंडेशन, जो समलैंगिकों के अधिकारों के लिए लड़ रही है.

12. क्या है धारा 377

धारा 377 के तहत समलैंगिक संबंध गैरकानूनी हैं. समलैंगिक संबंध बनाने वाले स्त्रीपुरुष को 10 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. यह अपराध की श्रेणी में आता है, जिसे गैरजमानती माना गया है. इस कानून के जरिए पुलिस सिर्फ शक के आधार पर भी गिरफ्तारी कर सकती है.

13. गे थे चीन के पहले प्रधानमंत्री

हौंगकौंग के एक लेखक सोई विंग मुंई की एक किताब जारी हुई थी, जिस में दावा किया गया था कि चीन के पहले कम्युनिस्ट प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई गे थे.

14. जबरदस्ती नहीं बनाए जाते संबंध

यदि कोई गे या लैस्बियन है तो इस का मतलब यह कतई नहीं है कि वह आप की इच्छा के विरुद्घ आप से संबंध बनाएगा. अकसर लोग इस गलतफहमी के चक्कर में समलैंगिकों से कन्नी काट लेते हैं, जो सरासर अनुचित है.

समलैंगिकता का कोई इलाज नहीं

अगर किसी घर में कोई व्यक्ति समलैंगिक संबंध रखता है और यह बात घर वालों को पता चल जाती है तो परिवार वाले उस का डाक्टरी इलाज कराने में जुट जाते हैं. उन्हें लगता है कि समलैंगिकता बीमारी है जो डाक्टरी इलाज से ठीक हो जाएगी. डाक्टर्स के पास भी ऐसी कोई  घुट्टी नहीं है कि जिसे वे समलैंगिक संबंध रखने वाले व्यक्ति को पिलाएं और रोगी विषमलैंगिक बन जाए. इन संबंधों को जितनी जल्दी स्वीकार कर लेंगे उतना ही अच्छा होगा.

मेरी शादी को 14 महीने हो चुके हैं. मुझे शक है कि मेरी बीवी का कोई प्रेमी है. मुझे क्या करना चाहिए.

सवाल
मैं 28 साल का हूं. मेरी शादी को 14 महीने हो चुके हैं. मुझे शक है कि मेरी बीवी का कोई प्रेमी है. बीवी कहती है कि वह उसे छोड़ चुकी है. मैं उस से बहुत प्यार करता हूं. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब
शादी का रिश्ता प्यार व यकीन पर ही चल पाता है. जब बीवी कह रही है कि वह प्रेमी का साथ छोड़ चुकी है, तो आप को यकीन करना चाहिए. आप उसे प्यार करते ही हैं, तो अपने प्यार को इतना ज्यादा कर दें कि उस में दूसरे की गुंजाइश न रहे.

शादी से पहले जरूरी टैस्ट

कई फिल्मों में शादी के लिए कुंडली मिलान बहुत जरूरी बताया जाता है और कुंडली न मिलने पर पक्का रिश्ता भी टूट जाता है, लेकिन अधिकतर देखा गया है कि कुंडली मिला कर की गई शादियों में भी तलाक की दर बहुत अधिक है, इसलिए अब लोगों की सोच बदलने लगी है और उन्हें लगता है कि शादी के लिए कुंडली से ज्यादा जरूरी है कि दोनों एकदूसरे के लायक हों और शारीरिक रूप से फिट हों ताकि शादी के बाद किसी तरह की कोईर् परेशानी न आए.

शादी से पहले युवकयुवती को एकदूसरे के बारे में सबकुछ पता हो तो आगे चल कर सिचुएशन हैंडिल करने में काफी आसानी रहती है और दोनों एकदूसरे को उस की कमियों के साथ स्वीकारने की हिम्मत रखते हैं तो ऐसा रिश्ता काफी मजबूत बनता है. इसलिए दूल्हादुलहन शादी से पहले कई तरह के मैडिकल टैस्ट कराने से भी नहीं हिचकिचाते. आइए जानें, ये मैडिकल टैस्ट कौन से हैं और कराने क्यों जरूरी हैं :

एचआईवी टैस्ट

यदि युवक या युवती में से किसी एक को भी एचआईवी संक्रमण हो तो दूसरे की जिंदगी पूरी तरह से बरबाद हो जाती है. इसलिए शादी से पहले यह टैस्ट करवाना बहुत जरूरी है.  इस में आप की सजगता और समझदारी है.

उम्र का परीक्षण

कई बार शादी करने में काफी देर हो जाती है और उम्र अधिक होने के कारण युवतियों में अंडाणु बनने कम हो जाते हैं तथा बच्चे होने में परेशानी आ सकती है. इसलिए यदि बढ़ती उम्र में शादी कर रहे हैं तो टैस्ट जरूर कराएं.

प्रजनन क्षमता की जांच जरूरी

जिन कपल्स को शादी के बाद बच्चे पैदा करने में समस्या आती है, उन्हें प्रजनन क्षमता का टैस्ट जरूर कराना चाहिए ताकि पता चल सके कि कमी युवक में है या युवती में. वैसे तो यह टैस्ट शादी से पहले ही होना चाहिए, जिस से पता चल सके कि वे दोनों संतान पैदा करने योग्य हैं भी या नहीं.

ओवरी टैस्ट

इस टैस्ट को युवतियां कराती हैं ताकि पता चल सके कि उन्हें मां बनने में कोई मुश्किल तो नहीं है. कई युवतियां इस टैस्ट को कराने में हिचकिचाती हैं कि यदि कोई कमी पाई गई तो उन का रिश्ता होना मुश्किल हो जाएगा, जबकि ऐसा नहीं है. आज तो मैडिकल साइंस में हर चीज का इलाज है. अच्छा तो यह है कि समय रहते आप को प्रौब्लम के बारे में पता चल जाएगा. यदि टैस्ट सही आया तो आपको वैवाहिक जीवन में कोई तकलीफ नहीं होगी.

सीमन टैस्ट

इस टैस्ट में युवकों के वीर्य की जांच होती है कि वह बच्चा पैदा करने के लिए पूरी तरह से सक्षम है या नहीं और अगर कोई प्रौब्लम है तो उस का इलाज करवा कर पूरी तरह स्वस्थ हुआ जा सकता है. यह टैस्ट इसलिए करवाया जाता है ताकि पहले ही परेशानी के बारे में पता चल जाए और उसी के हिसाब से इलाज करवा कर बंदा शादी के लिए पूरी तरह से परफैक्ट हो जाए.

यौन परीक्षण

कुछ बीमारियां संक्रमित होती हैं, जो शारीरिक संपर्क के दौरान बढ़ती हैं. इन बीमारियों को सैक्सुअली ट्रांसमिटेड बीमारियां कहा जाता है और ये संभोग के बाद पार्टनर को भी बड़ी आसानी से लग जाती हैं. इसलिए ऐसी किसी भी बीमारी से बचने के लिए शादी से पहले ही यह जांच करवा लें ताकि भविष्य में किसी गंभीर बीमारी से पार्टनर और आप दोनों ही बच सकें.

ब्लड टैस्ट

ब्लड टैस्ट कराने से पता चल जाता है कि कहीं ब्लड में कोई ऐसी प्रौब्लम तो नहीं है, जिस का सीधा असर होने वाले बच्चे पर पड़ेगा. हीमोफीलिया या थैलेसीमिया ऐसे खतरनाक रोगों में से एक हैं जिन में बच्चा पैदा होते ही मर जाता है. इस में दोनों के ब्लड की जांच कराना आवश्यक है जिस से आर एच फैक्टर की सकारात्मकता व नकारात्मकता का पता चल सके. यह टैस्ट शादी से पहले कराना अतिआवश्यक है.

जैनेटिक टैस्ट

इस तरह के टैस्ट को परिवार की मैडिकल हिस्ट्री भी कहा जाता है. इस से जीन के विषय में पता चल जाता है कि आप को जैनेटिक डिजीज है भी या नहीं. इस टैस्ट से आनुवंशिक बीमारियों के बारे में भी पता चल जाता है जो पार्टनर को कभी भी हो सकती हैं.

सिंदूर मिटाने का जुनून : अवैद्य संबंधों के चलते पति की हत्या

कानपुर शहर के अरमापुर स्टेट के रहने वाले लोग सुबह टहलने के लिए निकले तो उन्हें कैलाशनगर पुलिया के पास सड़क के किनारे खून से लथपथ एक लाश पड़ी दिखाई दी. थोड़ी देर में वहां भीड़ लग गई. उसी भीड़ में से किसी ने इस बात की सूचना थाना अरमापुर पुलिस को दे दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी आशीष मिश्र पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर आ पहुंचे. घटनास्थल पर आने से पहले उन्होंने लाश पड़ी होने की सूचना पुलिस अधिकारियों को दे दी थी. यह 14 मई, 2017 की बात है.

घटनास्थल पर पहुंच कर आशीष मिश्र लाश का बारीकी से निरीक्षण करने लगे. लाश सड़क के किनारे खून से लथपथ पड़ी थी. उस के पास ही एक मोटरसाइकिल खड़ी थी. हत्या किसी मजबूत और भारी चीज से सिर पर प्रहार कर के की गई थी. उस के बाद पहचान मिटाने के लिए उस के चेहरे को ईंट से बुरी तरह कुचल दिया गया था. खून से सनी सीमेंट वाली वह ईंट वहीं पड़ी थी.

आशीष मिश्र लाश का निरीक्षण कर रहे थे कि एसपी (पश्चिम) संजय कुमार यादव, सीओ ज्ञानेंद्र सिंह और नम्रता श्रीवास्तव भी आ पहुंची थीं. अधिकारियों के आदेश पर फोरैंसिक टीम भी आ गई थी. फोरैंसिक टीम ने अपना काम कर लिया तो पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया.

घटनास्थल पर सैकड़ों लोग जमा थे, पर कोई भी लाश की पहचान नहीं कर सका था. इस से स्पष्ट था कि मृतक कहीं और का रहने वाला था. जब लोग लाश की पहचान नहीं कर सके तो एसपी संजय कुमार यादव ने मृतक के कपड़ों की तलाशी लेने को कहा. सिपाही रामकुमार ने मृतक के पैंट की जेब में हाथ डाला तो उस में एक परिचयपत्र और ड्राइविंग लाइसैंस मिला.

लाइसैंस और परिचयपत्र पर एक ही नाम सुरेंद्र कुमार तिवारी पुत्र नीरज कुमार तिवारी लिखा था. इस का मतलब दोनों चीजें उसी की थीं. दोनों पर पता मसवानपुर कच्ची बस्ती दर्ज था. परिचयपत्र के अनुसार, वह रक्षा प्रतिष्ठान में संविदा कर्मचारी था.

लाइसैंस और परिचयपत्र से मिले पते पर 2 सिपाहियों रामकुमार और मेवालाल को भेजा गया तो वहां एक लड़का मिला. उसे परिचयपत्र और ड्राइविंग लाइसैंस दिखाया गया तो उस ने कहा, ‘‘अरे, यह परिचयपत्र और लाइसैंस तो मेरे पिताजी का है. वह कहां हैं, कल रात 10 बजे घर से निकले तो अभी तक लौट कर नहीं आए हैं?’’

सिपाहियों ने उस का नाम पूछा तो उस ने अपना नाम जय तिवारी बताया. इस के बाद सिपाहियों ने बताया कि अरमापुर स्टेट स्थित कैलाशनगर पुलिया के पास एक लाश मिली है. उसी की पैंट की जेब से यह परिचयपत्र और लाइसैंस मिला है. वह उन के साथ चल कर लाश देख ले, कहीं वह लाश उस के पिता की तो नहीं है.

जय अपने चाचा सर्वेश तिवारी को साथ ले कर सिपाहियों के साथ चल पड़ा. घटनास्थल पर पहुंच कर उस ने लाश देखी तो फफकफफक कर रोने लगा. रोते हुए उस ने कहा, ‘‘सर, यह लाश मेरे पिता सत्येंद्र तिवारी की है. पता नहीं किस ने इन की हत्या कर दी.’’

जय के साथ आए उस के चाचा सर्वेश ने भी लाश की पहचान अपने भाई सत्येंद्र तिवारी के रूप में कर दी थी. घटनास्थल पर मृतक का बेटा और भाई आ गए थे, लेकिन उस की पत्नी अभी तक नहीं आई थी. थानाप्रभारी आशीष मिश्र ने जय से उस की मां के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि उस की मां सुलभ विशधन गांव गई हैं.

थानाप्रभारी ने फोन द्वारा उसे सूचना दी तो थोड़ी देर में वह भी घटनास्थल पर आ गई. पति की लाश देख कर सुलभ बेहोश हो गई. तब साथ आई महिलाओं ने किसी तरह उसे संभाला. उस समय वह कुछ भी बताने की हालत में नहीं थी, इसलिए पुलिस उस से पूछताछ नहीं कर सकी.

सीओ ज्ञानेंद्र सिंह ने मृतक के बेटे जय से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस के पिता सत्येंद्र कल रात 10 बजे घर से यह कह कर निकले थे कि वह एक घंटे में वापस आ जाएंगे. जब काफी देर तक वह लौट कर नहीं आए तो उस ने यह बात अपने चाचा सर्वेश तिवारी को बताई. उस के बाद उस ने चाचा के साथ पिता की काफी खोज की, लेकिन उन का कुछ पता नहीं चला. सुबह सिपाहियों से पता चला कि उन की तो हत्या हो गई है.

थोड़ी देर बाद मृतक की पत्नी सुलभ सामान्य हुई तो पुलिस अधिकारियों ने उसे सांत्वना दे कर उस से भी पूछताछ की. उस ने बताया कि उस के पति आर्डिनैंस फैक्ट्री में ठेके पर काम करते थे. लेबर कौंट्रैक्ट कंपनी वृंदावन एसोसिएट्स द्वारा उन्हें ओएफसी में काम पर लगाया था.

इस कंपनी की ओर से मजदूरों का ठेका दिनेश खंडेलवाल और उन का मुंशी अमन लेता था. लगभग 5 महीने पहले उस के पति सत्येंद्र का पैसे के लेनदेन को ले कर ठेकेदार दिनेश और मुंशी अमन से झगड़ा हुआ था, जिस में मारपीट भी हुई थी.

इस के बाद से वह काफी परेशान रहते थे. वह शराब भी बहुत ज्यादा पीने लगे थे. कहीं ठेकेदार दिनेश और उस के मुंशी अमन ने ही तो उन की हत्या नहीं कर दी है. पूछताछ के बाद पुलिस ने जरूरी काररवाई कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए लालालाजपत राय अस्पताल भिजवा दिया.

इस के बाद थाने आ कर थानाप्रभारी आशीष मिश्र ने सत्येंद्र तिवारी की हत्या का मुकदमा दर्ज करा कर ठेकेदार दिनेश और उस के मुंशी अमन को हिरासत में ले लिया गया. थाने में दोनों से सत्येंद्र की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो दोनों ने साफ मना कर दिया.

अमन का कहना था कि पैसों को ले कर उस का सत्येंद्र से झगड़ा जरूर हुआ था, लेकिन वह झगड़ा ऐसा नहीं था कि बात हत्या तक पहुंच जाती. सत्येंद्र की पत्नी उसे गलत फंसा रही है. ऐसा ही दिनेश ने भी कहा था. उन की बातों से पुलिस को लगा कि दोनों निर्दोष हैं तो उन्हें छोड़ दिया गया था.

आशीष मिश्र को इस मामले में कोई सुराग नहीं मिल रहा था. जबकि अधिकारियों का उन पर काफी दबाव था. अंत में उन्होंने मुखबिरों का सहारा लिया. आखिर उन्हें मुखबिरों से मदद मिल गई. किसी मुखबिर से उन्हें पता चला कि सत्येंद्र की हत्या उस के बेटे जय ने ही की है. इस में उस की मां सुलभ और उस के प्रेमी दीपक कठेरिया का भी हाथ हो सकता है.

बात थोड़ा हैरान करने वाली थी, लेकिन अवैध संबंधों में कुछ भी हो सकता है. यह सोच कर आशीष मिश्र ने मसवानपुर स्थित मृतक सत्येंद्र तिवारी के घर छापा मार कर जय और उस की मां सुलभ को गिरफ्तार कर लिया.

थाने ला कर सुलभ और जय से सत्येंद्र की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो दोनों कसमें खाने लगे. लेकिन पुलिस के पास जो सबूत थे, उस से पुलिस ने उन की बातों पर विश्वास नहीं किया और उन से सख्ती से पूछताछ की. फिर तो मांबेटे ने सत्येंद्र की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

पता चला कि जय ने पड़ोस में रहने वाले दीपक कठेरिया की मदद से पिता की हत्या की थी. क्योंकि सुलभ के दीपक कठेरिया से अवैध संबंध थे. सत्येंद्र इस बात का विरोध करता था. शराब के नशे में वह अकसर पत्नी और बेटे की पिटाई करता था. उस की इसी हरकत से तंग आ कर बेटे और प्रेमी की मदद से सुलभ ने पति की हत्या करवा दी थी.

सत्येंद्र की हत्या में दीपक का नाम आया तो पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया. थाने में दीपक ने जय और सुलभ को देखा तो उस ने भी सत्येंद्र की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद दीपक और जय ने हत्या में प्रयुक्त लोहे की रौड और खून सने अपने कपड़े बरामद करा दिए थे, जो जय ने अपने घर में छिपा रखे थे. सभी से पूछताछ में सत्येंद्र तिवारी की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

कानपुर शहर से 40 किलोमीटर दूर जीटी रोड पर एक कस्बा बसा है बिल्हौर. इसी कस्बे से कुछ दूरी पर एक गांव है विशधन. ब्राह्मणबाहुल्य इस गांव में रमेशचंद्र दुबे अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटियां शुभि और सुलभ तथा एक बेटा अरुण था. रमेशचंद्र दुबे अध्यापक थे. उन के पास खेती की थोड़ी जमीन थी. इस तरह उन का गुजरबसर आराम से हो रहा था. बड़ी बेटी शुभि की शादी उन्होंने कन्नौज में की थी.

इस के बाद सुलभ शादी लायक हुई तो कानपुर शहर में मसवानपुर बस्ती में रहने वाले नीरज तिवारी के बेटे सत्येंद्र से उस की शादी कर दी. सत्येंद्र प्राइवेट नौकरी करता था. उस का रंग थोड़ा सांवला था और वह सुलभ से उम्र में भी बड़ा था. सुलभ काफी खूबसूरत थी. इस के बावजूद उस ने कभी कोई ऐतराज नहीं किया.

देखतेदेखते 5 साल कब बीत गए, पता ही नहीं चला. इस बीच सुलभ 2 बच्चों जय और पारस की मां बन गई. बच्चों के जन्म के बाद सत्येंद्र की नौकरी आर्डिनैंस फैक्ट्री में संविदा कर्मचारी के रूप में लग गई. लेबर कौंट्रैक्ट कंपनी वृंदावन एसोसिएट्स के तहत उसे काम पर रखा गया. यह कंपनी रक्षा प्रतिष्ठानों में मजदूर सप्लाई करने का ठेका लेती है. सत्येंद्र को वहां से ठीकठाक पैसे मिल रहे थे, इसलिए घर में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी.

बच्चे बड़े हुए तो घर में रहने की परेशानी होने लगी. सत्येंद्र बच्चों के साथ अलग मकान ले कर रहने लगा. सुलभ यही चाहती भी थी. बच्चे बड़े हुए तो खर्च बढ़ा, जिस से घर में पैसों को ले कर तंगी रहने लगी. उसी बीच सत्येंद्र शराब पीने लगा. उस की कमाई का एक हिस्सा शराब पर खर्च होने लगा तो घर खर्च को ले कर सुलभ परेशान रहने लगी. वह पति को शराब पीने को मना करती तो सत्येंद्र उस से लड़ाईझगड़ा ही नहीं करता, बल्कि मारपीट भी करता. इस का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ने लगा.

एक दिन सत्येंद्र के साथ एक युवक आया, जिस के बारे में उस ने सुलभ को बताया कि यह उस का दोस्त दीपक कठेरिया है. वह भी मसवानपुर में ही रहता था. दोनों साथसाथ खातेपीते थे. दीपक ने खूबसूरत सुलभ को देखा तो पहली ही नजर में उस पर मर मिटा. दीपक शरीर से हृष्टपुष्ट और सुलभ से कमउम्र का था, इसलिए सुलभ भी उस की ओर आकर्षित हो गई. दीपक उस दिन करीब एक घंटे तक घर में रहा. इस बीच दोनों एकदूसरे को ताकते रहे.

एक सप्ताह भी नहीं बीता था कि एक दिन सत्येंद्र फिर दीपक को घर ले आया. उस का आना सुलभ को अच्छा लगा. बातोंबातों में दीपक ने सुलभ का फोन नंबर ले लिया. इस के बाद दीपक ने बहाने से सुलभ को फोन किया तो उस ने बातचीत में दिलचस्पी दिखाई. फिर तो दोनों में बातें होने लगीं.

एक दिन सुलभ घर में अकेली थी. वह आंगन में खड़ी अपने बाल सुखा रही थी, तभी दीपक आ गया. उस दिन वह दीपक को कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लगी. उस की निगाहें सुलभ के चेहरे पर जम गईं. यही हाल सुलभ का भी था. अपनी स्थिति को भांप कर सुलभ ने चुप्पी तोड़ी, ‘‘तुम तो मुझे ऐसे देख रहे हो, जैसे पहली बार देखा है.’’

‘‘इस तरह अकेली तो पहली बार देख रहा हूं. इस के पहले तो चोरीचोरी देखना पड़ता था. आज खुल कर देखने का मौका मिला है. अब पता चला कि तुम कितनी खूबसूरत हो.’’

‘‘ऐसा क्या है मुझ में, जो मैं तुम्हें इतनी खूबसूरत लग रही हूं?’’ सुलभ ने दीपक की आंखों में आंखें डाल कर पूछा.

‘‘हीरे की परख जौहरी ही कर सकता है. मैं बड़ा नसीब वाला हूं, जिसे तुम्हारी खूबसूरती देखने का मौका मिला है.’’

‘‘वैसे आप हैं बहुत बातें बनाने वाले. बातों में उलझा कर आप मुझे फंसाना चाहते हैं. किसी की बीवी को फंसाने में तुम्हें डर नहीं लगता, ऐसा करते शरम नहीं आती?’’

‘‘कैसी शरम, खूबसूरत चीज को कौन नहीं पाना चाहता. अगर मैं तुम्हें पाना चाहता हूं तो इस में मेरा क्या दोष है?’’ कह कर दीपक ने सुलभ को अपनी बांहों में भर लिया.

सुलभ कसमसाई भी और बनावटी विरोध भी जताया, लेकिन उस के बाद खुद को समर्पित कर दिया. दीपक ने उस दिन सुलभ को जो सुख दिया, उस से वह भावविभोर हो उठी. दीपक से असीम सुख पा कर सुलभ उस की दीवानी बन गई. वह यह भी भूल गई कि वह 2 जवान बच्चों की मां है.

अवैध संबंधों का सिलसिला एक बार शुरू हुआ तो वक्त के साथ बढ़ता ही गया. ऐसे रिश्ते छिपे भी नहीं रहते. सत्येंद्र को भी इस की जानकारी हो गई. फिर तो वह सुलभ पर बरस पड़ा, ‘‘मैं तुम्हारे बारे में क्या अनापशनाप सुन रहा हूं, मेरा नहीं तो कम से कम बच्चों का तो खयाल किया होता?’’

‘‘तुम्हें तो लड़ने का बहाना चाहिए. मैं ने ऐसा क्या गलत कर डाला, जो लोग मेरे बारे में अनापशनाप बक रहे हैं?’’ सुलभ ने कहा.

‘‘मुझे पता चला है कि दीपक वक्तबेवक्त घर आता है. तुम उस से हंसहंस कर बातें करती हो. तुम्हारे दीपक के साथ नाजायज संबंध हैं. आखिर मेरी जिंदगी को नरक क्यों बना रही हो?’’

‘‘नरक तो तुम ने मेरी और बच्चों की जिंदगी बना रखी है. पत्नी और बच्चों को जो सुखसुविधा चाहिए, वह तुम ने कभी नहीं दी. तुम जो कमाते हो, शराब में उड़ा देते हो. दीपक हमारी मदद करता है तो उस पर इलजाम लगाते हो.’’

सुलभ अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाई थी कि सुरेंद्र का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा. वह सुलभ को बेरहमी से पीटने लगा. पीटते हुए उस ने कहा, ‘‘मेरा खाती है और मुझ से ही जुबान लड़ाती है.’’

इस के बाद यह रोज का नियम बन गया. देर रात सुरेंद्र नशे में धुत हो कर आता और बातबेबात सुलभ से मारपीट करता. दोनों बच्चे जय और पारस मां को बचाने आते तो वह उन्हें भी गालियां तो देता ही, उन की पिटाई भी कर देता. अब वह रातदिन नशे में डूबा रहने लगा था. कभी काम पर जाता, कभी नहीं जाता. वेतन कम मिलता तो वह ठेकेदार और मुंशी से भी लड़ने लगता.

रोजरोज की मारपीट से सुलभ और उस का बेटा जय आजिज आ चुका था. आखिर उन्होंने सत्येंद्र से छुटकारा पाने की योजना बना डाली. उस योजना में सुलभ ने अपने प्रेमी दीपक कठेरिया को भी शामिल कर लिया.

दीपक इसलिए योजना में शामिल हो गया था, क्योंकि सत्येंद्र उस के संबंधों में बाधक बन रहा था. सुलभ की पिटाई उसे भी चुभती थी. योजना के तहत दीपक मसवानपुर स्थित पवन औटो से एक लोहे की रौड खरीद लाया और मैडिकल स्टोर से एक पत्ता नशीली गोलियों को.

12 मई, 2017 को योजना के तहत सुलभ अपने मायके विशधन चली गई. अगले दिन रात 8 बजे सत्येंद्र घर आया तो उस की तबीयत ठीक नहीं थी. वह चारपाई पर लेट गया. तभी जय ने दीपक को बुला लिया. योजना के तहत जय ने जूस में नशीली गोलियां घोल कर पिता को पिता दीं.

कुछ देर बाद वह बेहोश हो गया तो दीपक और जय उसे उसी की मोटरसाइकिल पर बैठा कर अरमापुर स्टेट स्थित कैलाशनगर पुलिया पर ले गए.

वहां सन्नाटा पसरा था. दोनों ने सत्येंद्र को मोटरसाइकिल से उतारा और सड़क किनारे पुलिया के पास लिटा कर लोहे की रौड से उस के सिर पर कई वार किए, जिस से उस का सिर फट गया और वह तड़प कर मर गया. जय को पिता से इतनी नफरत थी कि उस ने सड़क के किनारे पड़ी सीमेंट की ईंट उठाई और उस के चेहरे को कुचल दिया. हत्या करने के बाद जय और दीपक पैदल ही घर आ गए.

18 मई, 2017 को पूछताछ के बाद थाना अरमापुर पुलिस ने अभियुक्त दीपक, जय और सुलभ को कानपुर की अदालत में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया. कथा संकलन तक उन की जमानतें नहीं हुई थीं.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

इस फोटो के लिये मंदिरा बेदी को होना पड़ा ट्रोल

आजकल सोशल मीडिया पर ट्रोल होना आम बात हो गई है. सेलेब्स कोई भी तस्वीर पोस्ट करें या कुछ भी ट्वीट करें, लोग उन्हें ट्रोल करना शुरू कर देते हैं. हाल ही में मंदिरा बेदी भी इसका शिकार हो गईं.

मंदिरा ने 27 दिसंबर को अपनी एक तस्वीर ट्वीट की. उनके ट्वीट करते ही कुछ लोग उस पर भद्दे कमेंट्स करने लगे. कुछ लोग उन्हें बुड्ढी कहने लगे तो कुछ पब्लिसिटी स्टंट. एक यूजर ने यह भी कहा कि आपको एक्सपोज करने की जरूरत नहीं है.

इस साल मार्च में अपनी बेस्ट फ्रेंड को लिप पर किस करने के कारण भी मंदिरा ट्रोल हो गई थीं.

मंदिरा ने 25 दिसंबर को अपने पति और डायरेक्टर राज कौशल के साथ एक फिटनेस ब्रान्ड के लिए ऐड शूट भी किया. इसी तारीख को 21 साल पहले राज और मंदिरा की पहली मुलाकात हुई थी.

मंदिरा सोशल मीडिया पर अक्सर अपनी ग्लैमरस तस्वीरें शेयर करती रहती हैं. वो फिटनेस फ्रीक हैं और अपनी बौडी पर खूब मेहनत करती हैं.

26 अक्टूबर, 2013 को मंदिरा बेदी ने अपना सिग्नेचर साड़ी स्टोर लौन्च किया. इसके अलावा वो पेटा (PETA) के लिए फ्लौक्स लेदर को भी प्रमोट करती हैं.

गौरतलब है कि टीवी की ‘शांति’ के नाम से विख्यात मंदिरा आज एक जाना पहचाना नाम है. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत टीवी से की थी. उसके बाद वो कुछ फिल्मों में भी नजर आई. मंदिरा ने अपनी छवि में बदलाव किए और और पहली क्रिकेट को होस्ट करने वाली महिला बनीं.

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इन दिनों वे इंस्टाग्राम पर काफी एक्टिव हैं और अपनी तमाम तरह की तस्वीरें पोस्ट करती रहती हैं. टीवी सीरियल ‘शांति’ से फेमस हुईं अभिनेत्री मंदिरा बेदी किसी पहचान की जरुरत नहीं हैं. मंदिरा का सफर साल 1995 में आई DDLJ से लेकर अनिल कपूर के हालिया टीवी सीरीज ’24’ तक का रहा है.

कोलकाता में पैदा हुई मंदिरा को खासतौर से 90 के दशक के टीवी शो ‘शांति’ के लीड रोल के लिए जाना जाता है. इस फैमिली शो में मंदिरा ने एक ऐसी लड़की (शांति) का किरदार निभाया था, जो अपने हक की लड़ाई लड़ती नजर आती है.

बिल्डर समस्या और अदालत का फैसला

देशभर में बिल्डर लौबी बुरी तरह बदनाम है. आम आदमी बिल्डरों पर खलनायक, लुटेरा, सूदखोर, चोर, मुनाफाखोर और न जाने क्याक्या आरोप लगा कर उन्हें बदनाम करता है. गनीमत है कि इतनी बदनामी सहने के बावजूद इस उद्योग में आने वाले बिल्डरों की अभी तक कमी नहीं है और लोग हजारों की नहीं, लाखों की संख्या में देश के हर शहर, कसबे में बिल्डरों के बनाए मकानों में रह रहे हैं या व्यवसाय कर रहे हैं.

यह ऐसा व्यवसाय है जिस के बिना रहा भी न जाए और साथ निभाया भी न जाए. सरकार ने बिल्डरों के खिलाफ बने माहौल का बड़ा लाभ उठाया है और उन पर नए कानून थोपे हैं जो इस धंधे को शायद नष्ट ही कर डालेंगे. नए कानून के लागू होने से पहले ही सैकड़ों प्रोजैक्ट खटाई में पड़ चुके हैं और दिल्ली के कई नामी बिल्डर जेल में हैं या उन्हें भेजे जाने की तैयारी है.

अदालतें ग्राहकों की समस्या का उपाय केवल जुर्माना या जेल समझ रही हैं जबकि ग्राहकों को दोषियों को सजा से नहीं, मकानों के मिलने से संतुष्टि मिलेगी. जुर्माना भरने या जेल में जाने से मकान तो उग नहीं आएंगे पर आम प्रशासकों की तरह अदालतें भी समझती हैं कि सख्ती से हर जीव को नियंत्रित किया जा सकता है. अदालतें यह भूल जाती हैं कि जेल में बंद बिल्डर मकान के प्रोजैक्ट को आगे बढ़ा ही नहीं सकता.

इस उद्योग में मोटा पैसा बना या पैसा लेने के बाद देरी हुईर् तो आमतौर पर कारण सरकारी अड़ंगेबाजी है. सरकारों ने, जिन में बीसियों एजेंसियां होती हैं, बिल्डरों को सोने के अंडे देने वाली मुरगियां तो समझ रखा है पर उन को दानापानी देने का कोई इंतजाम नहीं कर रखा है. बिल्डर अनुमतियों के चक्कर में फंसे रहते हैं. हर अफसर ऐसे नए नियम बनाता रहता है जो कानून में होते ही नहीं हैं. अफसर की कलम का गलत लिखा सिर्फ अदालत हटा सकती है और अदालतें छोटेछोटे मामलों पर फैसला देने के लिए वर्षों का समय लेती हैं. अगर इन वर्षों के कारण ग्राहकों को मकान न मिल पाएं तो भी दोष न अफसर का होता है, न नियमों का, न कानून बनाने वालों का और न ही अदालतों का. दोष बिल्डरों का ही माना जाता है.

इस सब का पैसा ग्राहकों को देना पड़ता है. कानून की एक लाइन मकान की कीमत में 15 प्रतिशत तक वृद्धि कर सकती है. कुछ कानून तो 50 प्रतिशत तक दाम बढ़वा देते हैं. जब से अदालतों ने बिल्डरों को जेल भेजना शुरू किया है, मकान बनने बंद हो गए हैं. दिल्ली के आसपास कमसेकम 60 हजार मकान अधूरे बने पड़े हैं जिन में बिल्डरों, बैंकों और ग्राहकों का पैसा फंसा है. दोष सरकार और अदालतों का भी उतना ही है जितना बेईमान बिल्डरों का. पर पूरी जमात को गुनाहगार मान कर मकान नहीं बन सकते, यह पक्का है. सरकार खुद मकान बना कर देख चुकी है कि उस के बनाए मकानों में तो बेघर भी रहने से घबराते हैं कि वे न जाने कब ढह जाएं.

भ्रष्टाचार को बढ़ा रहे हैं एलजी : सिसोदिया

दिल्ली सरकार ने ‘सरकार आपके द्वार’ योजना को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है. उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को प्रेस वार्ता में कहा कि योजना को रोकने से जनता को असुविधा होगी.

जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार जो फैसले कर रही है, उन्हें रोका जा रहा है. सरकार की डोर स्टेप योजना को एक दिन पहलेही एलजी ने दोबार विचार करने के लिए सरकार को वापस भेजा है. दिल्ली सरकार एलजी के फैसले का विश्लेषण कर रही है और उसके बाद आगे की योजना बनाई जाएगी.

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और राजस्व मंत्री कैलाश गहलोत ने बुधवार को एलजी के फैसले पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि 16 नवंबर को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, लेकिन दिल्ली की जनता के पक्ष में बनाई गई योजना को लागू नहीं होने दिया जा रहा. उन्होंने एलजी की आपत्ति और सरकार का उस पर जवाब दिया.

उधर, भाजपा ने कहा कि दिल्ली वालों को वक्त पर सरकारी सेवाएं देने के लिए सख्ती के साथ प्रावधानों को लागू किया जाए. देरी करने वालों पर जुर्माना लगाया जाए. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बुधवार को यह मांग की. उन्होंने कहा कि इस संबंध में दिल्ली (समयबद्ध सेवा प्रद्धानार्थ नागरिक अधिकार) संशोधन बिल, 2017 नवंबर में विधानसभा से अनुमोदन के उपरांत राष्ट्रपति को स्वीकृति के लिए भेजा गया है.

स्वीकृति के उपरान्त इसे ऑनलाइन प्रणाली सेवा से लिंक किया जाना चाहिए. जब तक स्वीकृति नहीं प्राप्त होती तब तक ऑनलाइन सेवाओं को ही और अधिक व्यापक और मजबूत बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ‘डोर स्टेप सर्विस’ से सरकार और नागरिक, दोनों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा. एक ओर सरकार को प्रशिक्षण और इनसेंटिव पर बढ़ी राशि व्यय करनी होगी, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को भी भारी फीस देनी होगी. उन्होंने कहा कि सरकार यह मान बैठी है कि इस सेवा के लिए प्रत्येक नागरिक को 50 रुपये व्यय करने होंगे तो यह बहुत बड़ी गलतफहमी है.

एलजी की आपत्ति

– डोर स्टेप योजना की जगह डिजिटिलिकरण होना चाहिए.

– जो 40 योजनाएं बताई गई हैं, उनमे से 35 डिजिटल हैं.

– डिजिटल सिस्टम में गैप को दूर करना चाहिए.

– सरकार को सुविधा केंद्र खोलने के बारे में सोचना चाहिए.

– यह योजना सुरक्षा के लिए खतरा हो सकती है. इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा.

– आम लोगों के दस्तावेज के दुरुपयोग का खतरा है. प्रमाण पत्र मिलने में देरी होगी.

सरकार का जवाब

– डिजिटल योजना से आगे बढ़ने की जरूरत है. यह उसी दिशा में है.

– एलजी खुद मानते हैं कि 40 में से 35 योजनएं पहले से ही डिजिटल योजना में हैं.

– 25 लाख लोगों को सरकारी दफ्तरों में चक्कर काटना पड़ता है. ये गैप ठीक करने के लिए ही तो हम ये प्रोजेक्ट शुरू करना चाहते हैं.

– सुविधा केंद्र लगाने का प्रयोग जीवन केंद्र के नाम से सफल नहीं रहा.

– सेफ्टी-सिक्योरिटी पर खतरा कैसे हो सकता है.

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