सबको दीवाना बनाने को तैयार है यह भोजपुरी एक्ट्रेस

आपको याद होगा, साल 1999 में शिल्‍पा शेट्टी ने अपनी अदाओं से यूपी और बिहार को लूटा था. मगर अब एक बार फिर से ऐसा ही कुछ करने जा रही हैं भोजपुरी की खूबसूरत अदाकारा शुभी शर्मा. खबर है कि शुभी शर्मा ने बिहार की राजधानी पटना को अपने लटके-झटकों से हिलाने का पूरा मन बना लिया है. उन्‍होंने इसके लिए काम भी शुरू कर दिया है. बता दें, वे जल्‍द ही अभिनेता राहुल सिंह के साथ एल्बम ‘हिले पटना राजधानी’ में नजर आएंगी, जिसकी शूटिंग मुंबई के मड आइलैंड स्थित नंदनवन में शुरू हो चुकी है.

हर बीट पर लोग थिरकने को मजबूर हो जाएंगे

अपने इस नए एल्बम के बारे में शुभी ने कहा, “भोजपुरी के दर्शक काफी प्‍यारे होते हैं और उन्‍हें ऐसे गानों का इंतजार होता है, जिस पर वे झूमने को मजबूर हो जाएं. इसलिए मैंने ‘हिले पटना राजधानी’ एल्बम में काम करने का मन बनाया और इसकी शूट कर रही हूं. यह गाना दर्शकों और श्रोताओं को इतनी पसंद आएगी कि वे हर बीट पर थिरकने को मजबूर हो जाएंगे. ‘हिले पटना राजधानी’ को संजय कोरियोग्राफ कर रहे हैं, जो इंडस्‍ट्री के बड़े काबिल कोरियोग्राफर हैं. उनके साथ काम करने में हर बार मजा आता है. साथ ही निर्देशक अनिल चौरसिया और निर्माता ब्रजेश पांडेय को भी धन्‍यवाद दूंगी, जिनकी वजह से मैं यह एल्बम कर रही हूं.”

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इस एल्बम में दो डांस नंबर गाने हैं

शुभी ने कहा, ‘इस एल्बम में दो गाने हैं. एक गाना टाइटल सौन्ग ही है, जो डांस नंबर है और दूसरा गाना ‘लाखों में बाडू एके पीस हो’ भी डांस नंबर है, मगर उसमें रोमांस भी है. इसमें मेरे अपौजिट राहुल सिंह हैं, जो काफी अच्‍छे अभिनेता हैं. उनके साथ हमारी जोड़ी खूब जम रही है. सच कहूं तो मैं इस एल्बम को लेकर एक्‍साइटेड हूं और मुझे भरोसा है कि इसके सभी गाने लोगों के दिलों पर राज करेंगे.’

इस एल्बम में आवाज बबलू भैया ने दी है

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गौरतलब है कि एमएफए मोशन पिक्‍चर्स कृत एल्बम ‘हिले पटना राजधानी’ का लिरिक्‍स आजाद सिंह और सुमित सिंह चंद्रवंशी ने लिखा है, जबकि फिल्‍म इंडस्‍ट्री के दो बड़े संगीतकार मधुकर आनंद और छोटे बाबा ने संगीत दिया है. वहीं, इसमें अपनी मधुर आवाज बबलू भैया ने दी है. एल्बम के पीआरओ संजय भूषण पटियाला की मानें तो एल्बम ‘हिले पटना राजधानी’ को लेकर उत्‍साहित शुभी शर्मा और राहुल सिंह ने शूट से पहले खूब पसीना बहाया है और दावा किया है कि उनकी औन स्‍क्रीन केमेस्‍ट्री लोगों को काफी पसंद भी आएगी.

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ईशा देओल इस अंदाज में करेंगी बड़े पर्दे पर वापसी

लंबे वक्त से सिल्वर स्क्रीन से गायब रहीं अभिनेत्री ईशा देओल एक बार फिर फिल्मों की तरफ लौटने को तैयार हैं. वह हिंदी लघु फिल्म ‘केकवौक’ से वापसी करने जा रही हैं. जिसका निर्देशन राम कमल मुखर्जी और अभ्र चक्रवर्ती करेंगे. बता दें, राम कमल ने हेमा मालिनी की बायोग्राफी लिखी है.

ईशा इस हिंदी लघु फिल्म ‘केकवौक’ में शेफ के किरदार में नजर आएंगी, जो हमारे समाज में महिला की पेशेवर और व्यक्तिगत यात्रा को दर्शाती है. अपने इस किरदार के बारे में बात करते हुए ईशा ने कहा, राम कमल के दिमाग में इस फिल्म को बनाने का विचार उस वक्त आया, जब वह मेरी मां पर किताब लिखने के लिए मेरा इंटरव्यू कर रहे थे.

फिल्म के बारे में ईशा ने कहा, मुझे लगता है कि यह विचार राम कमल के दिमाग में विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं के साथ बातचीत के बाद आया. उन्होंने कहानी में उन घटनाओं को अच्छी तरह बुना है. फिल्म की कहानी और पटकथा राम कमल ने ही लिखी है.

अपनी फिल्म के बारें में राम कमल ने कहा, ईशा ने ही मुझे फिल्म का निर्देशन करने के लिए प्रेरित किया. फिल्म की शूटिंग मार्च के अंत में कोलकाता में होगी.

गौरतलब है कि ईशा ने फिल्म ‘कोई मेरे दिल से पूछे’ से बौलीवुड में एंट्री की थी लेकिन इसके बाद उन्होंने गिनी-चुनी फिल्में ही कीं. साल 2012 में उन्होंने बिजनसमैन भरत तख्तानी से शादी कर ली. पिछले साल अक्टूबर में ईशा देओल ने एक बेटी को जन्म दिया था जिसका नाम राध्या है.

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भारतीय जनता पार्टी की उम्मीद नहीं हुई पूरी

देश में अब 2 काफी बड़ी पार्टियां तो रहेंगी ही, यह गुजरात के और राजस्थान व मध्य प्रदेश के उपचुनावों ने साबित कर दिया है. भारतीय जनता पार्टी का कांग्रेस मुक्त भारत का सपना तो अब साकार होता नजर नहीं आ रहा. राजस्थान में 3 उपचुनाव सीटें भाजपा से छीन लेने के बाद मध्य प्रदेश में 2 सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखते हुए कांग्रेस ने जता दिया है कि उस के पैर कमजोर हैं पर कटे नहीं हैं.

भारतीय जनता पार्टी 2014 में आंधीतूफान की तरह आई और लोगों ने सोचा कि बदलाव का दौर शुरू होगा. कुछ बदला तो पर यह बदला लेने की नीयत का था. भारतीय जनता पार्टी दूसरे धर्मों, दूसरी जातियों, दूसरी सोच वालों से सैकड़ों सालों का बदला लेने पर उतारू हो गई. नोटबंदी के नाम पर नोट तक बदल डाले. जीएसटी से टैक्स जमा करने का तरीका बदल डाला. पर यह बदलाव नए की ओर नहीं और बहुत पुराने की ओर का था.

भारतीय जनता पार्टी से जिस सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त देश की उम्मीद थी वह नहीं आया. उस की जगह आ गया गलीगली में पेशवाई युग का कहर और तुगलकी युग का मनमरजी राज. जनता को अच्छे दिन तो मिले नहीं हां पर जो पहले से अच्छे थे उन की पौबारह दिखने लगी. न खाऊंगा न खाने दूंगा का झूठ दिखने लगा. गौरक्षा के नाम पर गुंडई बढ़ गई और इस का शिकार दलित और औरतें होने लगी हैं.

चुनाव किसी सरकार के अच्छे या खराब होने की निशानी नहीं है पर इन के कारण बहुत सी मनमानियां रुकती हैं. जब से उपचुनावों और राज्य सरकारों का दौर शुरू हुआ है, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के तेवर ढीले पड़े हैं. उस की सरकार भारीभरकम वादों के बावजूद कोई किला फतह नहीं कर पा रही है. जनता का रुख भी मिलाजुला है.

सरकारें लड़खड़ाती हों तो भी कैसे भी दौर में चलती ही रहती हैं. राजाओं के दौर में भी एक कमजोर राजा की सरकार भी चल ही जाती थी क्योंकि जनता खुद चाहती है कि कोई आका बना रहे, कोई सारे सिस्टम को संभाले रखे. भारतीय जनता पार्टी तो आज भी करोड़ों लोगों की मनचाही पार्टी है चाहे इस के पीछे जातीय स्वार्थ क्यों न हों. कांग्रेस व राज्यों की दूसरी पार्टियां आज भी भारतीय जनता पार्टी जैसा कैडर नहीं बना पा रहीं और उन का छिपा ढांचा भाजपाई सा ही है. जहां सत्ता में हैं वे वहां भी हर घर न्याय नहीं दे पा रहीं, न कांग्रेस के राज्यों में न कहीं और गैरभाजपाई राज्यों से ज्यादा सुखचैन है.

जहां भी कांग्रेस जीती है और भाजपा हारी है वहां बदलाव लाने की इच्छा पर वोट नहीं पड़े. बस अपना गुस्सा दिखाने के लिए वोट पड़े हैं. यह अच्छा ही है. भारत को चीन की तरह का शी जिनपिंग भी नहीं चाहिए जो सदासदा के लिए सत्ता में बने रहने की तैयारी कर रहा है.

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जिग्नेश मेवाणी पर अरुंधति की मेहरबानी

गुजरात के एक नए हीरो और युवा दलित नेता जिग्नेश मेवाणी को चुनाव लड़ने के लिए मशहूर और विवादित लेखिका अरुंधति राय ने 3 लाख रुपए दिए थे. यह अहम बात मंदिर, जनेऊ, मुगल और ऊंचनीच के शोर में दब कर रह गई. बड़गाम आरक्षित सीट से कांग्रेस के समर्थन से निर्दलीय लड़े जिग्नेश को यह बौद्धिक समर्थन अर्थरूप में अरुंधति ने दे कर एक संभावना को जिंदा रखने की ही कोशिश की थी.

आमतौर पर राजनीति से एक तयशुदा दूरी बना कर चलने वाली अरुंधति अहिंसा को हथियार नहीं मानतीं. दलित हितों की हिमायत करती रहने वाली इस बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका ने जता ही दिया कि लेखक इस तरह भी मदद कर सकते हैं. जिग्नेश ने क्राउड फंडिंग के जरिए 10 लाख रुपए जमा किए थे जिस में सब से बड़ा हिस्सा अरुंधति का था. हालांकि, इस पर किसी ने यह कह डाला कि अभी तो जिग्नेश को पाकिस्तान से भी पैसा मिलेगा.

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दबंगों का कहर झेलते दलित

रमेश वर्मा का गांव में अपना घर था. उस के घर के बराबर में 20 फुट का रास्ता था. कुछ दंबगों ने उस रास्ते पर कब्जा करने की कोशिश की. पहले तो रमेश चुप रहा, लेकिन जब पानी सिर से उतर गया, तो उस ने हिम्मत कर के विरोध शुरू कर दिया.

कुछ दिनों की खामोशी के बाद दबंगों ने उसे सबक सिखाने की ठान ली. एक दिन वे रमेश वर्मा के घर पहुंचे और दरवाजा तोड़ कर उस के मकान पर कब्जा करने की कोशिश की.

यह सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन उस ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की. इस से दबंगों के हौसले और भी बढ़ गए. फिर उन्होंने एक दिन रमेश के घर में पैट्रोल छिड़क कर आग लगा दी. इस आग में रमेश भी झुलस गया. बड़ी मुश्किल से उस की जान बची.

मामले के तूल पकड़ते ही पुलिस ने वारदात को अंजाम देने वाले दबंग शिशुपाल यादव व अमित ठाकुर समेत 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

यह वाकिआ उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद के नवाबाद थाना क्षेत्र में 26 मार्च, 2016 को सामने आया.

रमेश डर व दहशत के बीच दबंगों से कानूनी लड़ाई का मन बना चुका है. उस की यह लड़ाई किसी अंजाम तक पहुंचेगी, यह वह खुद भी नहीं जानता.

दबंगों का शिकार रमेश कोई पहला दलित नहीं रहा. हाल ही में 23 मार्च, 2016 को सीतापुर जिले के दौलतियापुर गांव के एक दलित जोड़े ने दबंगों का जुल्म सहा. मामूली किसान कमलेश अपनी जमीन पर गेहूं, गन्ना वगैरह बोता था. बाद में उस ने खेत ठेके पर दे दिया, लेकिन इस के बाद जैसे खेत से उस का हक खत्म सा हो गया.

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एक दिन कमलेश व उस की पत्नी नीलम ने दबंग संजय पक्ष से इस का विरोध किया, तो उन्होंने पतिपत्नी के कपड़े उतार कर खेत में पीटा. वहां जमा हुए लोग उन्हें बचाने की हिम्मत नहीं कर सके. बाद में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया.

अमेठी के गुन्नौर गांव की दलित औरत विमलेश गांव की प्रधान बन गई. यह बात दबंगों को बुरी तरह चुभ गई. उस की जीत को वे हजम नहीं कर पाए और उस से रंजिश रखने लगे.

पंचायत चुनाव से पहले कुछ लोगों ने उस के ससुर से उस के पुश्तैनी मकान का बैनामा करा लिया. विमलेश ने बैनामे की वैधता की शिकायत एसडीएम के यहां कर दी. मामला विचाराधीन हो गया.

यह बात दबंगों को अखर गई. लिहाजा, 2 फरवरी, 2016 को वे समूह में उस के घर पहुंचे और कच्चे मकान को गिरा दिया. दबंगों ने उसे प्रधानी नहीं करने की धमकी भी दी. पुलिस ने वहां पर किसी भी तरह की निर्माण की रोक लगा दी.

जालौन में भी दबंगों ने एक जोड़े और उस की बेटी को घर में घुस कर इसलिए मारा, क्योंकि वे अपने घर में पत्थर फेंकने का विरोध कर रहे थे.

खर्रा गांव में कुछ दबंग दलित संतोष से रंजिश रखने लगे. इसी के चलते उन्होंने एक दिन उस के घर में राह चलते पत्थर उछाल दिए.

परिवार ने इस का विरोध किया, तो दबंगों का पारा चढ़ गया और उन्होंने घर में घुस कर मारपीट कर दी. मां को बचाने आई संतोष की बेटी का सिर फट गया. पुलिस की सख्ती पर दबंग घर छोड़ कर फरार हो गए.

ये चंद वारदातें उदाहरण भर हैं कि गांवों में दलितों के साथ किस तरह का बरताव किया जाता है. गांवदेहात के इलाकों में भेदभाव, छुआछूत की बीमारी बुरी तरह फैली है. दबंग अकसर उन्हें अपना शिकार बनाते हैं.

जो दलित गरीब, भूमिहीन व घरहीन हैं, उन की हालत और भी खस्ता है. वे हर तरह की मारपीट सहने को मजबूर होते हैं.

वे दलित जिन के पास रोजीरोटी कमाने का कोई जरीया नहीं हैं, वे दबंगों के खेतखलिहानों में काम करते हैं. चूंकि उन की रोजीरोटी वहीं से चलती है, इसलिए वे बोल भी नहीं पाते.

दबंग चाहते हैं कि दलित उन के सामने झुक कर रहें. उन की बराबरी या रहनसहन में नकल न करें. दलित ऐसा करते हैं, तो यह बात उन्हें खटकने लगती है और वे रंजिश रखने लगते हैं.

हरियाणा के सिरसा के मौजूंखेड़ा गांव का ही उदाहरण लीजिए. गांव के दबंगों ने सपने दिखा कर दर्जनों दलितों को अपने जाल में उलझा लिया. उन लोगों ने दलित बस्ती में 2 फीसदी ब्याज पर कर्जा देने की बात कही.

गांव के अमरजीत समेत ज्यादातर जरूरतमंदों ने बातों में आ कर 20 से 30 हजार रुपए बतौर कर्ज ले लिए.

दबंगों ने कोरे कागज पर उन गरीबों से दस्तखत भी करा लिए. अमरजीत ने 2 महीने तक 2 फीसदी के हिसाब से किस्तें चुकाईं, लेकिन दबंग 3 हजार रुपए प्रतिमाह के हिसाब से किस्त लेने पर अड़ गए. 3 सालों में अमरजीत 30 हजार के बदले 90 हजार रुपए दे चुका है, पर उस से जबरन किस्त लेने लगे.

विरोध करने पर मारपीट की जाने लगी. जान जाने का डर सताने लगा, तो दलितों ने इकट्ठा हो कर सिरसा के एसपी सतेंद्र गुप्ता से मिल कर शिकायत की.

दलितों की शिकायत पर असली हालात परखने की जिम्मेदारी जिन अफसरों को दी जाती है, वे भी उन के घरों का रुख नहीं करते.

अगर कोई अफसर दलित हो, तो उसे भी यह तबका अपनी हैसियत के सामने छोटा नजर आने लगता है. दबंगों के यहां बैठ कर ही फैसले हो जाते हैं. दबाव की नीति ऐसी जगह पूरी तरह से काम करती है.

राजनीतिक पार्टियां भी उन के मसीहा होने या उन की आवाज बनने की कोशिश सिर्फ वोट बैंक के लिए करती हैं. यह बात अलग है कि ऐसे नेताओं के राज में भी दलितों व पिछड़ों को सताना जारी रहता है.

आंकड़ों में बढ़ रहा है दलितों को सताना

दलितों की भलाई के तमाम सरकारी दावों व राजनीतिक बाजीगरियों के बीच देश में दलितों और पिछड़ों को सताने के मामले घटने के बजाय बढ़ रहे हैं. कई तरह के अपराध उन के खिलाफ होते रहते हैं. सभी मामले सामने आ जाएं, यह जरूरी नहीं होता, लेकिन जो मामले पुलिस रिकौर्ड में आ रहे हैं, वे चौंकाने वाली सचाई बयां करने के लिए काफी हैं. दलितों को सताने की घटनाएं उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश समेत पूरे देश को जैसे आईना दिखा रही हैं.

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2004 से साल 2013 तक देश में 6 हजार से ज्यादा दलितों की हत्याएं हुईं. साल 2014 में दलितों के खिलाफ 47,064 अपराध दर्ज हुए. इन में हत्या, बलात्कार, एससीएसटी ऐक्ट व मानवाधिकारों के मामले शामिल हैं.

साल 2010 में यह आंकड़ा 33,712, साल 2011 में 33,719, साल 2012 में 33,655 व साल 2013 में 39,408 पर सिमटा हुआ था, जबकि साल 2004 में यह आंकड़ा 27 हजार तक ही था. अपराधों की फीसदी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. साल 2014 में दलितों के खिलाफ होने वाले अपराधों में साल 2013 के मुकाबले 19 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

संविधान के अनुच्छेद 15, 38, 39 व 46 में जाति, धर्म, नस्ल, लिंग व जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव न किए जाने का प्रावधान है. भारत सरकार ने दलितों को विभिन्न प्रकार के उत्पीड़न से बचाने व उन के हितों की रक्षा के लिए कानूनी तौर पर प्रोटैक्शन औफ सिविल राइट्स (1955) और एससीएसटी ऐक्ट (प्रिवैंशन औफ एट्रौसिटीज) 1989 जारी किया था. इस ऐक्ट के तहत भारतीय दंड संहिता के मुकाबले कठोर सजा का प्रावधान है.

मंदिर जाने पर झेलते हैं मार

पंडेपुजारी और दबंग मंदिरों और मठों पर भी अपना कब्जा रखते हैं. इन में छुआछूत की बीमारी पूरी तरह बसी होती है. उत्तराखंड के देहरादून के विकासनगर क्षेत्र के कुकुर्शी में एक देवता के पूजा स्थल पर दलितों के दाखिल होने पर विवाद खड़ा हो गया. 3 दलितों को इस बात के लिए पीट कर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. बाद में पुलिस ने दखल दे कर मामला निबटाया.

इसी क्षेत्र के मल्लावाला का बाशिंदा टीकम अपनी पत्नी कविता व ससुर दौलतू के साथ 18 नवंबर, 2015 को एक धर्म स्थल पर चला गया. इस दौरान दबंगों ने उसे देख लिया और धर्म स्थल को अपवित्र करने का आरोप लगाते हुए मारपीट कर दी. इतना ही नहीं, उन्होंने दोबारा कभी उधर का रुख करने पर जान से मारने की धमकी भी दी और बतौर जुर्माना 501 रुपए भी वसूल कर लिए. उन के कब्जे से छूटे दलित परिवार ने पुलिस में शिकायत की. मामला मीडिया में आया, तो पुलिस ने 2 पुजारियों समेत 3 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया.

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर के बिलगांव में तो एक दबंग ने हद ही लांघ दी. दरअसल, गांव का बुजुर्ग खीमी अहिरवार अपने परिवार के साथ एक धर्म स्थल में पहुंच गया. दबंग संजय तिवारी इस पर भड़क गया और उस ने मारपीट कर के शुद्धीकरण के लिए रुपयों की मांग की. बात बढ़ी, तो उस ने खीमा पर मिट्टी का तेल डाल कर उसे जिंदा जला दिया, जिस से खीमा की मौत हो गई. पुलिस ने उस दबंग को जेल भेज दिया. मेरठ जिले में दलित औरतों ने एक मंदिर में प्रवेश किया, तो उन्हें जातिसूचक शब्द कह कर बेइज्जत किया गया. इस पर दलित औरतों ने इकट्ठा हो कर जम कर हंगामा किया.

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बाहुबली फेम प्रभास के साथ पूजा करेंगी रोमांस..!

साउथ फिल्मों की फैमस अदाकारा पूजा हेगड़े जल्द ही साउथ के सुपरस्टार अभिनेता और बाहुबली फेम एक्टर प्रभास के साथ रोमांस करती नजर आ सकती हैं. चर्चा है कि पूजा हेगड़े एक रोमांटिक फिल्म में प्रभास के साथ स्क्रीन शेयर करेंगी. इस फिल्म का निर्माण यू वी क्रिएशन के बैनर तले किया जाएगा, जिसका निर्देशन राधा कृष्ण कुमार करेंगे.

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पूजा के एक करीबी सूत्र के मुताबिक, पूजा दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री के लोगों द्वारा मिल रहे प्यार से काफी खुश हैं. उन्हें इस बात की बहुत खुशी है कि वो साउथ के बड़े एक्टर्स के साथ उन्हें काम करने का मौका मिल रहा है. इस बात की खूब चर्चा है कि वह प्रभास के अलावा सुपरस्टार महेश बाबू, जूनियर एनटीआर के साथ भी नजर आ सकती हैं.

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जूनियर एनटीआर और महेश बाबू के साथ पूजा किस फिल्म में नजर आएंगी फिलहाल उसकी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. जहां प्रभास फिल्म ‘साहो’ की शूटिंग में व्यस्त हैं वहीं पूजा भी जूनियर एनटीआर की फिल्म में व्यस्त हैं.

खबर है कि प्रभास की जिस फिल्म के लिए पूजा को अप्रोच किया गया है वो फिल्म 2019 में रिलीज होगी. जबकी इस फिल्म की शूटिंग जून के अंत में शुरू होने की संभावना है. बता दें कि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है.

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बता दें कि पूजा 2017 में साउथ की फिल्म दुव्वादा जग्गनाथं में काम कर के सुर्खियों में आई थीं. फिल्म में अल्लू अर्जुन ने उनके साथ अभिनय किया था. पूजा ने बौलीवुड में फिल्म ‘मोहेनजो दारो’ से डेब्यू किया था. इस फिल्म में उनके को-स्टार रितिक रोशन थे. फिल्म का निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया था, लेकिन फिल्म बौक्सऔफिस में कोई बड़ा कमाल दिखाने में असफल रही थी.

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क्या आपने देखा सपना चौधरी का यह नया वीडियो

हरियाणवी डांसर सपना चौधरी जब भी स्टेज पर परफौर्म करती हैं, उनके दर्शक झूमकर ही नाचते हैं. बिग बौस सीजन 11 में नजर आने के बाद तो सपना सिर्फ हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे देश में चर्चित हो गई हैं. लेकिन हाल ही में हरियाणा के झज्जर में हुए एक फैन ने सपना चौधरी के शो में कुछ ऐसे ठुमके लगाए कि खुद सपना चौधरी भी मंच से उसे ही देखने लगी. अक्‍सर देसी अंदाज में नाचने वाली सपना ने अपने इस नए स्‍टेज शो में वेस्‍टर्न डांसिंग मूव्‍ज भी दिखाए.

दरअसल यह शो कुछ दिन पहले ही आयोजित हुआ. शो की शुरुआत में एक दर्शक ने ऐसा डांस किया कि सपना चौधरी स्‍टेज से ही उसके हाथ जोड़ती नजर आईं. आप भी देखें नए गाने पर सपना चौधरी और उनके फैन का यह जबरदस्‍त डांस.

बिग बौस के सीजन 11 में नजर आईं सपना चौधरी इस शो के बाद फिल्‍मों में आने की तैयारी कर रही हैं. हाल ही में फिल्‍म ‘वीरे की वेडिंग’ में सपना का पहला हिंदी डांसिंग नंबर सामने आया. बता दें कि इसके अलावा वह जल्द ही बौलीवुड एक्टर अभय देओल के साथ एक फिल्म में नजर आने वाली हैं.

हिंदी सिनेमा के अलावा सपना की झलक जल्‍छ ही भोजपुरी सिनेमा में भी देखने को मिलेगी. वह फिल्म ‘बैरी पिया 2’ में आइटम डांस करती नजर आने वाली हैं. उन्होंने हाल ही में इस गाने की शूटिंग पूरी की है और यह फिल्म इसी साल रिलीज होने वाली है.

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सनी लियोनी ने मेरा नंबर पौर्न इंडस्ट्री वालों को दिया : राखी सावंत

आइटम गर्ल राखी सांवत को बौलीवुड जगत में कौन्ट्रोवर्सी क्वीन के नाम से जाना जाता है. राखी सांवत इन दिनों सनी लियोनी के साथ विवाद को लेकर चर्चा में हैं. राखी सांवत ने सनी लियोनी पर एक गंभीर आरोप लगाया है. एक बातचीत के दौरान राखी ने सनी पर आरोप लगाते हुए कहा कि सनी ने मेरा नंबर पोर्न इंडस्ट्री वालों को दे दिया है. इसके बाद मुझे लगातार फोन कौल करके लोग परेशान कर रहे हैं.

राखी ने कहा, ”सनी ने मेरा नंबर एडल्ड एंटरनेटमेंट इंडस्ट्री में दिया है, जिसके बाद कुछ लोग मुझे फोन कर रहे हैं. वे मेरे वीडियो और मेडिकल सर्टिफिकेट के बारे में पूछ रहे हैं और मुझे अच्छी रकम का औफर दे रहे हैं, लेकिन इस काम में मेरी बिल्कुल भी रुचि नहीं है. मैं मरना पंसद करूंगी, लेकिन उस दुनिया में जाना नहीं पसंद करूंगी.”

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राखी ने कहा, ”मैंने सनी के जुड़वां बच्चों के होने पर बधाई देने के लिए एक वीडियो पोस्ट किया था. बधाई देने के लिए वीडियो पोस्ट करने के बाद उन्होंने मुझे एक अंजान नंबर से कौल किया और पूछा क्या मैं उनसे जेलस फील करती हूं. मैं क्यों ईष्या करूंगी? मैंने बौलीवुड में अच्छा काम किया है. लोग परिवार के साथ बैठकर मेरा काम देखते हैं. बस, मेरा इतना कहना है कि पोर्न इंडस्ट्री से जुड़े लोग मेरे नंबर का गलत इस्तेमाल न करें.”

राखी सांवत कलर्स टीवी पर प्रसारित होने वाले शो ‘बिग बौस सीजन 1’ का भी हिस्सा रह चुकी हैं. शो में राखी अन्य कंटेस्टेंट्स के साथ लड़ती हुई भी नजर आ चुकी हैं. इसके साथ ही राखी सांवत स्वयंवर भी कर चुकी हैं. स्वयंवर के कारण राखी की टीवी जगत से लेकर फिल्म जगत तक काफी चर्चा हुई थी. बता दें कि राखी सांवत ने अपने करियर में कई फिल्मों में आइटम नंबर किए हैं. मालामाल वीकली, क्रेजी 4, एक खिलाड़ी एक हसीना और लूट जैसी फिल्मों में आइटम सौन्ग का तड़का लगा चुकी हैं.

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मेरी दिक्कत यह है कि मेरी बीवी का सेक्स का मन नहीं करता. उसे काफी दर्द महसूस होता है. बताइए कि मैं क्या करूं.

सवाल
मैं 28 साल का हूं. मेरी शादी को ढाई साल हो चुके हैं. मेरा 11 महीने का एक बेटा भी है. दिक्कत यह है कि बीवी का हमबिस्तरी करने का मन नहीं करता. उसे काफी दर्द महसूस होता है. फोरप्ले करने से भी उस के अंग में गीलापन नहीं होता है. बताइए कि मैं क्या करूं?

जवाब
हमबिस्तरी का सारा खेल मन से जुड़ा होता है. अगर आप की बीवी इस में मन से भाग नहीं लेगी, तो उसे तकलीफ होगी ही.

आप बीवी से खुल कर बात करें और कहें कि यह तो आप का हक है. उस से पूछें कि अगर उसे किसी तरह की कोई दिक्कत हो तो बताए, ताकि डाक्टर से उस का इलाज कराया जा सके. बीवी को प्यार से मनाएंगे, तो बात बन जाएगी.

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दांपत्य में घटता सैक्स

वर्तमान में विवाहित जोड़ों के जीवन से सैक्स बाहर होता जा रहा है. यह समस्या दिनदूनी रात चौगुनी गति से बढ़ रही है, जबकि बैस्ट सेलर उपन्यास ‘हाउ टु गैट द मोस्ट आउट औफ सैक्स’ के लेखक डैविड रूबेन का कहना है, ‘‘यदि सैक्स सही है तो सब कुछ सही है और यदि यह गलत है तो कुछ भी सही नहीं हो सकता. यही कारण है कि यह सहीगलत का समीकरण बहुतों के जीवन पर हावी हो रहा है.’’

27 वर्षीय माया त्यागी के जीवन पर भी यह समीकरण हावी हो रहा है. कुछ माह पहले हुए इस विवाह ने युवा मीडिया प्रोफैशनल के जीवन में सब गड़बड़ कर दिया, क्योंकि माया का पति कार्य के प्रति पूर्णतया समर्पित है, इसलिए उन के आपसी संबंधों पर काफी गहरा प्रभाव पड़ा है. माया का पति हमेशा व्यस्त रहता है. शाम को भी घर देर से आता है और इतना थका होता है कि उस के लिए कुछ भी करना मुश्किल होता है. शादी के बाद भी उस का व्यस्त कार्यक्रम नहीं बदला.

माया कहती है,‘‘वैसे, शुरू में सैक्स ज्यादा बड़ी समस्या नहीं थी. जब भी हम साथ होते थे तो सैक्स होता था और मुझे यह जीवनशैली बुरी नहीं लगती थी. लेकिन धीरेधीरे हमारे यौन संबंधों में कुछ दिन का अंतराल आने लगा और फिर धीरेधीरे यह अंतराल बढ़ता चला गया. मेरे पति को इस बात से जैसे अब कोई मतलब नहीं रहा. अब हम मुश्किल से महीने में 1 बार सैक्स करते होंगे और वह भी आननफानन में.’’

पहली रात में अलगाव

बहुत सारे ऐसे केस हैं जहां शारीरिक समस्याएं पहली रात से ही शुरू हो जाती हैं. सुनील व रेशमा के साथ ऐसा ही हुआ. वे शादी के बंधन में बंधने से पहले ही अच्छे दोस्त बन चुके थे. उन के बीच से अजनबीपन पूरी तरह से मिट गया था. लेकिन पहली बार बिस्तर पर सैक्स करने के बाद ही उन की समस्या की शुरुआत हो गई.

29 वर्षीय सुनील उस रात प्यार की सारी सीमाएं तोड़ना चाहता था, जबकि उस की मित्र से पत्नी बनी रेशमा अपनी सुंदर दोस्ती को बरबाद नहीं होने देना चाहती थी. रेशमा के प्रतिकार की वजह से उस रात उन्होंने कुछ नहीं किया और फिर यही सामान्यतया रोज होने लगा. आदमी रोजाना जिद करे और पत्नी मना करे तो क्लेश होता ही है.

कुछ माह के बाद सुनील ने तलाक का केस दायर कर दिया. जब भी वह अलगाव का मुद्दा छेड़ता तो उस के विवाहित साथी उसे अलग होने को कहते जबकि अविवाहित साथी सुनील से कहते कि वह धैर्य रखे, उदास न हो, क्योंकि उस के पास पत्नी के रूप में एक बहुत अच्छी दोस्त है, जिस के साथ वह सब कुछ बांट सकता है और सैक्स तो वैसे भी कुछ सालों में हवा हो जाता है.

इन सब परेशानियों के होते हुए भी सुनील व रेशमा बाहर फिल्म, कला प्रदर्शनी देखने जाते, भोजन के लिए जाते. खास मौकों पर एकदूसरे को तोहफा भी देते. बल्कि रेशमा ने तो सुनील के जन्मदिन व विवाह की वर्षगांठ को भी बड़े अच्छे तरीके से मनाया. अब 3 साल बाद दोनों के रिश्ते में सैक्स भी है और प्यार भी.

सुनील का कहना है ,‘‘मैं रेशमा के साथ खुश हूं. वह एक बहुत अच्छी दोस्त है. मैं उसे औफिस में क्या हुआ से ले कर मां से लड़ाई तक सब कुछ बता सकता हूं. यद्यपि शुरू में हमारे बीच लड़ाई होती थी. मैं उस के साथ सैक्स करना चाहता था, परंतु वह कहती थी कि दोस्ती और सैक्स हमेशा साथ नहीं चल सकते. तब मेरी मरजी थी. हम में से किसी का विवाहेतर संबंध नहीं था, परंतु स्वयं आनंद भी अनदेखा नहीं किया जा सकता.’’

सैक्स में कमी क्यों

आज सैक्स शहरीकरण की बहुत बड़ी समस्या है. विशेषज्ञ शहरी जोड़ों में सैक्स से दूरी के अलगअलग कारण बताते हैं. कुछ जोड़ों की डबल इनकम, आलीशान जीवनशैली, उच्च वेतन वाली नौकरियां, ब्रैंड लेबल आदि सब सैक्स की कमी के लिए जिम्मेदार हैं. उच्च आय वाले कामकाजी जोड़े अपने बैडरूम से ज्यादा समय अपने औफिस में बिताते हैं. उन का व्यस्त जीवन सैक्स के लिए जगह नहीं छोड़ता और फिर वे कोशिश करने में भी पीछे रह जाते हैं. हर चीज से मिलने वाली तुरंत संतुष्टि एक आदत बन जाती है.

डा. मन्नु भोंसले का कहना है कि आज के युवा जोड़ों के पास अपने साथी को यौन संतुष्टि प्रदान करने के लिए समय का अभाव होता है तथा घंटों काम करने से होने वाली शारीरिक थकान उन्हें सैक्स से दूर करती है, नशा भी सैक्स से दूरी बढ़ाता है. पत्नी की सैक्स में रुचिहीनता भी एक कारण है, क्योंकि ज्यादातर पुरुष औनलाइन सैक्स व खुद आनंद के आदि हो जाते हैं. ध्यान रखें सैक्स पतिपत्नी के लिए एकदूसरे के करीब आने का जरूरी माध्यम है. इसे नजरअंदाज करना दोनों के अलगाव का कारण बन सकता है.

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वकील की अवमानना और चीफ जस्टिस की नाराजगी

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने वकीलों की तेज आवाज में बहस करने की आदत पर घोर नाराजगी जताते उदाहरण भी दे डाले कि दिल्ली सरकार वाले मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन के तर्क बेहद उद्दंड और खराब थे और अयोध्या विवाद में पैरवी कर रहे वकीलों का लहजा तो और भी खराब था. इस विरोधाभासी टिप्पणी से यह तय कर पाना मुश्किल है कि अदालत की घुड़की दलीलों के खोखलेपन पर थी या उन की तेज आवाज पर थी.

तेज आवाज में बहस करना वकीलों की आदत नहीं, बल्कि काबिलीयत मानी जाती है. निचली अदालतों में तो दलाल मुवक्किलों को यही दिखाने के लिए ले जाते हैं कि देखो, क्या जोरदार वकील है. इधर, दीपक मिश्रा की तल्खी से खफा राजीव धवन ने वकालत छोड़ने का ही फैसला कर लिया तो किसी ने नहीं कहा कि वकीलों की भी अपनी इज्जत होती है, वे वकालत छोड़ देंगे पर अपनी तेज आवाज पर पहरेदारी बरदाश्त नहीं करेंगे.

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