गुरमीतराम रहीम सिंह को एक लड़की से लगातार बलात्कार करने पर 20 साल की सजा सुनाई गई है. इस लड़की ने 2002 में एक पत्र लिख कर अधिकारियों, प्रधानमंत्री आदि से गुमनाम शिकायत की थी. उच्च न्यायालय के आदेश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उस लड़की को भी खोज लिया और दूसरी अन्य लड़कियों को भी खोज लिया जिन्हें राम रहीम ने बलात्कार का शिकार बनाया था.
लड़कियों का बलात्कार जबरन रात को उठा ले जा कर नहीं किया गया था बल्कि बाबा से माफी मांगने के लिए इन के मातापिता खुद रातरात भर के लिए उन्हें यहां छोड़ जाते थे. ये लड़कियां यौन संबंधों से उस समय खुश होती थीं या नहीं, यह नहीं कह सकते पर बलपूर्वक संबंध बनाए गए, इस के सुबूत नहीं हैं. बहलाफुसला कर, धोखा दे कर, गलत बात कह कर भी यौन संबंध बनाना बलात्कार ही है. हां, जब ऐसा व्यक्ति बलात्कार करने लगे जो लड़की की निगाह में आदर्श है, तो मामला गंभीर हो जाता है.
लड़कियां इतनी आसानी से यौन संबंध बनाने को तैयार क्यों हो जाती हैं, यह एक पहेली ही रहेगी. गुरमीत सिंह ही नहीं, सभी धर्मों के स्वामियों के इर्दगिर्द लड़कियां मंडराती रहती हैं. वे क्या सुख चाहती हैं और कौन सी तुष्टि उन्हें मिलती है?
यौन संबंध बनाना कोई सीखता नहीं है. यह तो प्रकृति की देन है. इस से बच तो कोई नहीं सकता. अफसोस यह है कि सभ्यता के आने के बाद अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी समाज ने लड़कियों पर डाल दी है. अगर वे एक पुरुष का संरक्षण चाहती हैं तो वे खुद एक पुरुष के खूंटे में बंध कर रहें और वह पुरुष, चाहे जितनी कुंआरियों या विवाहिताओं, विधवाओं के साथ संबंध बनाता रहे.
बलात्कार के बारे में लड़कियों को यही शिक्षा दी जाती है कि एक बार कुछ हो गया तो मुंह दिखाने मत आना. इसीलिए यौन संबंध चाहे प्रेम, भक्ति, आत्मसमर्पण, यौनसुख के लिए स्थापित हुए हों या जबरन, लड़कियां इस बारे में घर में चर्चा नहीं करतीं. वे इस बात को छिपाती हैं, क्योंकि समाज के नियमों से बंधे मातापिता सह नहीं पाएंगे.
यह सीख बलात्कार या विवाहपूर्व यौन संबंध को बढ़ावा ही देती है जिस में नुकसान लड़कियों का ही होता है. 21वीं सदी में औरतें आज उसी तरह वर्जिनिटी से सच्चरित्र मानी जाती हैं जैसी 2,500 वर्ष पूर्व. बलात्कार हुआ, इस बात को लड़की अगर अगली सुबह या जब मरजी चाहे खुल कर कह सके तो पुरुषों में इतना बल नहीं रहेगा कि वे लड़कियों को जबरन या फुसला कर बिस्तर तक ले जाएं.
राम रहीम नाम रख कर कोई दूध का धुला नहीं हो जाता, इस बलात्कार के मामले ने यह एक बार और साबित कर दिया है. यह लड़कियों पर है कि वे हिम्मत रखें और यौन संबंध सहर्ष स्वीकारें चाहे वह इच्छा से स्थापित हुए हों या अनिच्छा से.
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भारतीयों को उपरोक्त सीख विरासत में मिली है. लेकिन लगता है अब इस सीख की जरूरत नहीं है. न ही अब रात में जगने के लिए किसी को आह्वान किए जाने की दरकार है. चूंकि भूमंडलीकरण ने पूरी दुनिया को एक गांव में बदल दिया है, इसलिए अब इस गांव का सूरज कभी नहीं डूबता. जब गांव के एक कोने में रात होती है तो जाहिर है दूसरे कोने में दिन होता है. मगर चूंकि गांव एक ही हो गया है तो यह कहना सैद्धांतिक रूप से जरा मुश्किल हो गया है कि कब सोया जाए और कब जगा जाए? इस दुविधा ने वाकई नींद के सामने बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.
यह अकारण नहीं है कि चाहे आधुनिक विकास हो, जीवनशैली हो या भूमंडलीकरण, सब ने हमारी नींद पर हमला किया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमानित अध्ययन के मुताबिक, 70 के दशक से अगर तुलना करें तो आज की दुनिया की नींद औसतन 4.5 घंटा प्रति 24 घंटे कम हो गई है. वहीं शहरी भारत में भी 4 से 5 घंटे तक प्रति 24 घंटे कम हो गई है. ग्रामीण भारत में भी 2 से 3 घंटे की नींद पर खलल पड़ा है. इस के कई कारण हैं पर सब से बड़ा कारण जीवन जीने का ढंग और कामकाज की बदलती जीवनशैली है.
आधुनिक अर्थव्यवस्था ने ज्यादातर लोगों के कामकाज टाइमटेबल को बदल दिया है. नाइट ड्यूटी करना अब महज उत्पादन बढ़ाने का जरियाभर नहीं है बल्कि भूमंडलीकरण की जरूरत भी बन गया है.
जाहिर है इस के कारण ऐसे लोगों की तादाद निरंतर बढ़ती जा रही है जिन को पर्याप्त नींद नहीं मिल पा रही है. हाल ही में किए गए एक सर्वे के अनुसार, महानगरों में लगभग एकतिहाई भारतीय पर्याप्त नींद से वंचित हैं. इस कारण वे चिड़चिड़े हो रहे हैं, कई किस्म की बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं और बिना किसी बीमारी के भी स्वास्थ्य गिर रहा है. लेकिन इस का एक दूसरा पहलू भी है कि नींद की इस कमी ने लोगों की आर्थिक सेहत में इजाफा किया है.
हालांकि, नींद न आना कोई नई बात नहीं है. मतलब यह कि जब यह भूमंडलीकरण नहीं था, देररात तक होने वाली पार्टियों का चलन नहीं था, दिन जैसा माहौल पैदा करने वाली झकास रोशनी नहीं थी, तब भी कई लोग रातरातभर करवटें बदलते थे. लेकिन तब ऐसा व्यक्तिगत कारणों से था. तब नींद न आना बड़े पैमाने पर तमाम लोगों का रोग नहीं था, लेकिन आज ऐसा है. आज के युग में नींद न आना अलग बात है और तमाम वजहों से नींद में कमी हो जाना व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सार्वजनिक और न चाहने पर भी प्र्रभावित करने वाली वजह है. इस स्थिति में इसे एक महामारी की शक्ल में भी ढाल दिया गया है.
किशोरों व युवाओं के साथसाथ बच्चों तक को आज नींद न आने की या नींद में कमी होने की समस्या प्रभावित कर रही है. नींद न आने की वजहों में आज की जीवनशैली से पैदा हुए तनाव से ले कर इस के फायदे तक इस के कारण हैं. अति सक्रियता और हर चीज जानने के दबाव ने गैरजरूरी तनाव पैदा किया है. अति सक्रिय दिमाग व हाइपर टैक्नोलौजी वास्तव में अपर्याप्त नींद की बड़ी वजहें हैं.
पिछले एक दशक में एकतिहाई कामकाजी भारतीय पर्याप्त नींद से वंचित हुए हैं जिस कारण उन्हें स्वास्थ्य संबंधी तमाम समस्याएं पैदा हो गई हैं.
एक सर्वे के मुताबिक, 93 प्रतिशत भारतीय रात में 8 घंटे से भी कम की नींद ले पाते हैं. सवाल है क्या इन्हें इस कम नींद का खमियाजा भुगतना पड़ता है? जवाब है हां, ऐसा है. 58 प्रतिशत ऐसे लोग अपने कामकाज के दौरान 100 फीसदी परफौर्मेंस नहीं दे पाते. इसी के चलते 38 प्रतिशत लोग अपने कार्यस्थल पर सोते पकड़े गए हैं.
पर्याप्त नींद न मिल पाने से स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं. स्लीप डिसऔर्डर्स के 80 से अधिक प्रकार होते हैं. साथ ही, इस के कारण हार्ट अटैक, डिप्रैशन, हाई ब्लडप्रैशर, याददाश्त में कमी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. मोटापे को रोग समझने में दुनिया को तकरीबन 25 वर्ष लगे थे, अगर यही भूल नींद के सिलसिले में हुई तो निश्चित रूप से यह एक महामारी का रूप ले लेगी क्योंकि नींद में कमी एक खमोश कातिल की तरह है.
यह विडंबना ही है कि एक तरफ जहां नींद की कमी ने इसे बीमारी बना कर खरबों डौलर का खर्च पैदा कर दिया है वहीं इस अपर्याप्त नींद की समस्या ने अरबों डौलर का जबरदस्त नींदबहाली का कारोबार पैदा कर दिया है.
नींद को ले कर लोगों में सजगता, डर और इस के साथ जीनेमरने की आदत भी पैदा हो रही है, जैसे नींद पूरी न कर पाने की भरपाई आम कामकाजी लोग कार्यस्थल पर तरोताजा रहने के लिए एनर्जी ड्रिंक्स आदि लेने का प्रयास करते थे, लेकिन अब नींद न आने से परेशान लोग मैडिकल हस्तक्षेप को महत्त्व देने लगे हैं. यह इस समस्या के प्रति डर भी है और सजगता भी.
मगर कुछ भी हो, इस से देश में स्लीप क्लीनिक्स की बाढ़ सी आ गई है. नींद न आने से ऐसे रोगियों की भी संख्या बढ़ती जा रही है जिन को पोलीसोमोनोग्राम कराने की जरूरत पड़ती है. यह टैस्ट लगभग 15 से 20 हजार रुपए में होता है और इस टैस्ट से मालूम होता है कि नींद क्यों नहीं आ रही.
नींद की बीमारी से छुटकारा पाने के लिए विशेषरूप से तैयार किए गए गद्दों की मांग भी बढ़ती जा रही है. कुछ कस्टम मेड गद्दे, जिन के बारे में अच्छी नींद लाने का दावा किया जाता है, 1.8 लाख से 3.0 लाख रुपए तक में बिक रहे हैं.
ऐसा नहीं है कि नींद न आने के चलते सिर्फ नींद लाने वाले कारोबार ही फलफूल रहे हैं. हकीकत यह है कि कई दूसरे पेशे के लोग भी इस का फायदा उठा रहे हैं खासकर लेखन और इंटरनैट के जरिए अपनी कुशलता बेच कर पैसे कमाने वाले लोगों को इस से जबरदस्त फायदा हुआ है. ऐसे लोग इंटरनैट पर बैठ कर ब्लौगिंग व लेखन कर रहे हैं. अपनी विशेषज्ञता और कुशलता को दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक ले जा रहे हैं जिस से इन्हें भरपूर आर्थिक फायदा हो रहा है और वे बड़े मजे से कह रहे हैं जो जागत है सो पावत है…
इसलिए नहीं आती नींद
हम में से ज्यादातर लोग जानते हैं कि भरपूर नींद लेना स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. बावजूद इस के, हम इसे अमलीजामा नहीं पहनाते. इस के लिए कभी पसंदीदा टीवी सीरियलों को दोषी मानते हैं तो कभी दोस्तों को और कभी फेसबुक में चैटिंग की लत को. हम खुद को इस बात के लिए दोषी कम ही ठहराते हैं कि अनुशासन के साथ हम नींद हासिल करने कोशिश नहीं करते, लेकिन नींद न आने या नींद न मिलने का रोना जरूर रोते हैं.
बेहतर नींद पाने के लिए अगर आप नींद की गोलियां लेते हैं तो उन्हें सोने से 1 घंटा पहले लें या जागने से 10 घंटे पहले. इस से दिन में होने वाले आलस से बचे रहेंगे.
सोने से पहले कोई रिलैक्स करने वाली ऐक्सरसाइज तो हम करते नहीं, ऊपर से आइस्क्रीम, डेजर्ट्स या गरम कौफी पीते हैं. इस से नींद में खलल पड़ता है. बेहतर है हलकीफुलकी ऐक्सरसाइज करें लेकिन इतनी मेहनत न करें कि थकान महसूस हो.
सोने से पहले डरावनी फिल्में, झकझोर देने वाली डौक्यूमैंट्रीज न देखें, न ही उथलपुथल मचा देने वाली कहानियां पढ़ें. इन से नींद प्रभावित होती है. बहुत प्रतिस्पर्धी खेलों को भी देखने से बचें.
शाम को कैफीन का सेवन न करें.
बिस्तर में बैठ कर किताब न पढ़ें.
नींद लाने के लिए शराब का सेवन न करें.
खाली पेट या बहुत ज्यादा खा कर सोने के लिए न जाएं.
दूसरे व्यक्ति की नींद की गोलियां न खाएं. बिना डाक्टर की सलाह के नींद की गोलियां न लें.
दिन में ज्यादा न सोएं.
अपने शरीर को सोने का आदेश न दें. ऐसा करने से आप का शरीर व मन अधिक सतर्क हो जाता है.
अगर आप बिस्तर पर लेटने के बाद 20-30 मिनट जागे रहते हैं तो दूसरे कमरे में जाएं, किसी खामोश गतिविधि में शामिल हों जैसे पढ़ना या टैलीविजन देखना और जब नींद आने लगे तो वापस बिस्तर पर लौट आएं. रात में जितनी बार भी ऐसा करने की जरूरत पड़े, करें.
अच्छी नींद के लिए तनावमुक्त रहना भी जरूरी है. इसलिए जो बातें आप को तनावग्रस्त कर सकती हैं उन से बचें और अगर जीवन में कोई तनाव उत्पन्न करने वाली समस्या है तो उस का समाधान करने का प्रयास करें.
कैसे पाएं अच्छी नींद
संपन्नता कई किस्म की होती है. भरपूर नींद मिलना भी स्वास्थ्य के नजरिए से संपन्न होना ही है. इस बात की गांठ बांध लें कि अच्छी नींद का अर्थ केवल आंखें बंद कर लेना भर नहीं है. अच्छी नींद में शामिल है शरीर को आराम मिलना व ऊर्जा स्तरों को फिर हासिल करना.
नींद का स्वभाव चक्रात्मक होता है. आमतौर पर मस्तिष्क 2 प्रकार की नींदों के दौर से गुजरता है. ये दोनों दौर तकरीबन 90 मिनट में 5 चरणों से संपन्न होते हैं. यही नींद की गुणवत्ता तय करते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में 2 नींदें संपन्न होती हैं. रैपिड आई मूवमैंट स्लीप (आरईएम) और नौन रैपिड आई मूवमैंट स्लीप (एनआरईएम). यहां इन चक्रों की गहराई में जाने की जरूरत नहीं है, बस समझने की बात यह है कि अच्छी आरामदायक नींद के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए.
रोजाना सोने का समय निश्चित करें और उसी समय पर सोएं व जगें.
जैसे स्वस्थ रहने के लिए नियमित ऐक्सरसाइज जरूरी है उसी तरह अच्छी, खुशनुमा व गुणवत्तापूर्ण नींद के लिए भी नियमित ऐक्सरसाइज जरूरी है, खासकर यह सुबह की जानी चाहिए. नियमित ऐक्सरसाइज करने से आरामदायक नींद मिलने के साक्ष्य मौजूद हैं.
अच्छी नींद के लिए हवा, पानी और सूरज की रोशनी बहुत जरूरी है. दोपहर के बाद धूप का आनंद लें. इस से भी भरपूर नींद आती है.
बैडरूम में आरामदायक तापमान, शांति व अंधेरा रखें.
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सवाल मैं 23 साल की हूं. मेरी 3 साल की बेटी भी है. अजीब बात है, पर सच है कि मैं एक लड़की से प्यार करती हूं. वह लड़की कहती है कि मैं अपने पति को तलाक दे कर उस के साथ भाग जाऊं. मैं क्या करूं?
जवाब
आप पति व बच्चे का सुख भोग कर भी बेवकूफी की बात कर रही हैं. आप उस लड़की को बताएं कि पति का सुख कितना मजेदार होता है. आदमी का साथ पा कर वह लड़की भी लाइन पर आ जाएगी.
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बौलीवुड में एक्टर्स और एक्ट्रेस की किस्मत पलटते देर नहीं लगती. किस्मत के सितारे किसे कब अर्श से फर्श पर और किसे फर्श से अर्श पर पहुंचा दें इसका कुछ भी कहा नहीं जा सकता. ऐसा ही कुछ हुआ एक्ट्रेस शमा सिकंदर के साथ. करियर के शुरुआती दिनों में एक्ट्रेस शमा सिकंदर ने आमिर खान तक के साथ काम किया था.
हालांकि आज उनकी हालत यह है कि वह काम के लिए तरस रही हैं और वह वेब सीरीज में काम करने को मजबूर हैं. शमा के बारे में बता दें कि उन्होंने साल 1998 में फिल्म प्रेम अगन से अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद वह 1999 में आई फिल्म ‘मन’ में आमिर खान के साथ नजर आईं.
छोटे पर्दे की बात करें तो साल 2003 में वह पहली बार सोनी टीवी के शो “ये मेरी लाइफ है” में नजर आई थीं. इसके बाद उन्होंने सीआईडी, काजल, मन में है विश्वास और बाल वीर जैसे धारावाहिकों में काम किया. रिएलिटी शो की बात करें तो शमा एक खिलाड़ी एक हसीना, जेट सेट गो और बूगी वूगी जैसे रिएलिटी शो का हिस्सा रहीं.
साल 2016 में वह पहली बार वेब सीरीज माया में नजर आईं. वर्तमान समय में उनकी किसी भी फिल्म या टीवी शो के बारे में कोई खबर नहीं है. साल 2016 में वह आखिरी बार शौर्ट फिल्म सेक्सोहौलिक में नजर आईं थीं.
शमा ऐसी इकलौती एक्ट्रेस नहीं हैं जिनके करियर की शुरुआत शानदार रहा लेकिन फिर धीरे-धीरे उनका करियर ढलान की ओर बढ़ने लगा. इसी तरह से और भी कई एक्ट्रेस हैं जिन्होंने बौलीवुड के सुपरस्टार्स के साथ अपने करियर की शुरुआत की लेकिन फिर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने के चलते या पब्लिक द्वारा उनको नकार दिए जाने के चलते निर्माताओं और निर्देशकों ने उन्हें मौका देने से इनकार कर दिया.
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टेलीविजन रियलिटी शो ‘बिग बौस’ की एक्स कंटेस्टेंट गिजेल ठकराल को उनकी बोल्ड और बिंदास इमेज से जाना जाता है. हौट फीगर और बोल्डनेस के कारण उन्हें इंडियन किम कार्दशियां भी कहा जाता है. गिजेल फिल्म मस्तीजादे और क्या कूल हैं हम 3 में भी नजर आ चुकी हैं. साल 2016 के बाद से गिजेल फिल्मी पर्दे से दूर हो गई हैं. हालांकि किंगफीशर की कैलेंडर गर्ल गिजेल ठकराल लगातार अपने हुस्न के जलवों को सोशल मीडिया पर बिखेरकर अपने फैन्स और बाकी लोगों से जुड़ी रही हैं.
गिजेल ने हाल ही में झरने के नीचे सफेद साड़ी में एक बेहद ही हौट फोटोशूट कराया है. उन्होंने अपने इस फोटोशूट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी शेयर की हैं. उनकी इन तस्वीरों को देख कर आपको साल 1985 में आई फिल्म “राम तेरी गंगा मैली” की एक्ट्रेस मंदाकिनी का वो झरने वाला डांस याद आ जाएगा.
बता दें बौलीवुड एक्ट्रेस मंदाकिनी ने फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली हो गई’ में जमकर बोल्ड पोज दिए थे जिसमें पानी में भिगी सफेद साड़ी वाले उनके पोज आज भी सबसे ज्यादा मशूहर हैं. अब गिजेल बिलकुल मंदाकिनी के अंदाज में झरने के नीचे कभी अपने बालों से खेलती तो कभी चट्टानों के किनारे खड़ी होकर पोज देती नजर आ रही हैं.
गिजेल की इस तस्वीर पर सोशल मीडिया यूजर्स ‘मौडर्न मंदाकिनी’ और ‘न्यू जनरेशन मंदाकिनी’ जैसे कमेंट कर रहे हैं. हालांकि कुछ लोगों ने आपत्तिजनक कमेंट्स भी किए हैं. सोशल मीडिया पर गिजेल की ये तस्वीर सबसे ज्यादा वायरल हो रही है.
अंग्रेजी न्यूज पोर्टल से बातचीत में गिजेल ने इस फोटोशूट के बारे में बताया. उन्होंने कहा- मुझे भी ईश्वर ने अन्य पुर्तगालियों की तरह खूबसूरत लुक्स से नवाजा है. इस प्रोजेक्ट में भी मैं उस तरह से पोज देती नजर आ रही हूं जैसे पहले कभी नहीं किया. मेरे फैन्स मेरी तुलना किम कादर्शियां से करते हैं. गिजेल ने कहा- मैं चाहती हूं कि मेरे फैन्स और फौलोवर्स मुझे कुछ अलग लुक्स में देखें.
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मुंबई में जुलाई का मौसम. रुखसार सुबह उठ कर रसोईघर में चाय बना ही रही थी कि हलकी बारिश होने लगी. उस ने चाय के साथसाथ गरमागरम पकौड़े भी तल दिए. इस के बाद तौलिया और नहाने के बाद पहनने वाले अंदरूनी कपड़े बाथरूम में रख दिए. बैडरूम में टैलीविजन पर कोई म्यूजिक चैनल चल रहा था.
पकौड़े तलने के बाद रुखसार ने खिड़की बंद कर दी और टैलीविजन की आवाज तेज कर दी. वह डांस करने लगी और मस्ती में खुद को दीवार पर लगे बड़े आईने में देखने लगी.
रुखसार ने काले रंग की नाइटी पहनी हुई थी. 35 साल की विधवा होते हुए भी उस ने अपने बदन को काफी मेंटेन किया हुआ था.
रुखसार मस्ती में डांस कर ही रही थी कि तभी दरवाजे की बैल बजी. उस ने टीवी की आवाज कम कर दी और एक दुपट्टा सिर पर रख लिया. रुखसार ने दरवाजा खोला. बाहर कूरियर वाला था. 25 साल का जवान लड़का. वह कहने लगा, ‘‘कूरियर है… रुखसार खान के नाम से.’’
रुखसार को याद आया कि उस ने औनलाइन शौपिंग साइट से अपने लिए एक मोबाइल फोन बुक किया था. वह बोली, ‘‘मेरा ही नाम रुखसार है.’’
लड़के ने दस्तखत करने के लिए उसे पैन दिया. पैन देते समय उस के हाथ रुखसार की उंगलियों को छू गए थे. रुखसार ने एक नजर उस की ओर देखा और दस्तखत कर दिए.
रुखसार ने 52 सौ रुपए दिए तो लड़के ने 2 सौ रुपए वापस कर दिए और बोला, ‘‘2 सौ रुपए डिस्काउंट चल रहा है.’’ रुखसार ने उस लड़के को ध्यान से देखा, जिस ने आज के बेईमानी के जमाने में भी ईमानदारी से सच कहा और 2 सौ रुपए वापस कर दिए.
थोड़ी देर बाद वह लड़का बोला, ‘‘थोड़ा पानी मिलेगा?’’
रुखसार ने पूरा दरवाजा खोला और बोली, ‘‘तुम तो काफी भीग भी गए हो. अंदर आ जाओ.’’
रुखसार ने मोबाइल वाला डब्बा अलमारी में रखा और रसोईघर में पानी लेने चली गई. उस ने अपनी छाती से दुपट्टे को अलग कर दिया था. कुछ देर बाद रुखसार ने लड़के को पानी दिया. पानी देते समय जैसे ही वह थोड़ा झुकी, लडके की नजर उस के उभारों पर जा टिकी. उस की आंखें बड़ीबड़ी हो गईं.
पानी पीतेपीते वह लड़का नजर बचा कर रुखसार के उभारों को देख रहा था कि अचानक उस ने छींक दिया. रुखसार बोली, ‘‘तुम्हें तो सर्दी लग गई है. अभी बारिश भी तेज है. तुम चाहो तो थोड़ी देर यहां रुक सकते हो.
‘‘तुम्हारे कपड़े भी काफी भीग गए हैं. चाहो तो बाथरूम में जा कर फ्रैश हो सकते हो.’’
वह लड़का बाथरूम में चला गया. दरवाजा बंद कर के लाइट जलाई. वहां रुखसार ने नहाने के लिए तौलिया और अंदरूनी कपड़े पहले से ही रखे हुए थे. लड़के ने कमीज निकाल कर उस तौलिए को पहले चूमा, फिर उसी से अपने बदन को पोंछा. उस ने रुखसार के ब्रा को अपने हाथ में लिया ही था कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई.
उस ने ब्रा को वहीं पर रख दिया और थोड़ा सा दरवाजा खोला. रुखसार ने उस को काले रंग का कुरता दिया और बोली, ‘‘यह लो, इसे पहन लेना.’’
लड़के ने वह कुरता पहन लिया और अपनी कमीज सूखने के लिए डाल दी.
वह बैडरूम में जा कर टैलीविजन देखने लगा. रुखसार रसोईघर से चाय और पकौड़े ले आई और उस से पूछा, ‘‘क्या नाम है तुम्हारा?’’
लड़का बोला, ‘‘जुनैद.’’
‘‘कहां के रहने वाले हो तुम?’’
‘‘आजमगढ़.’’
‘‘मैं भी आजमगढ़ की रहने वाली हूं. आजमगढ़ में कहां से हो तुम?’’
‘‘लालगंज तहसील.’’
‘‘मैं निजामाबाद की रहने वाली हूं. लालगंज में हमारे काफी रिश्तेदार रहते हैं. अम्मीं की भी वहां की पैदाइश है.
‘‘और कौनकौन रहता है आप के साथ?’’
‘‘सिर्फ मैं.’’
‘‘और आप के शौहर?’’
‘‘उन की मौत हो गई है.’’
‘‘माफ करना, पर कैसे?’’
रुखसार ने बताया कि साल 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगे में उस के शौहर के साथ ससुराल के सभी लोग मारे गए थे. यह बताते हुए रुखसार की आंखें नम हो गईं. जुनैद ने उस का दुख बांटने की कोशिश की और अपने बारे में बताया कि उस ने आजमगढ़ से बीटैक की पढ़ाई की है और वह मालवणी में अपने चाचा के साथ पिछले एक साल से रह रहा है. जब उसे अपनी फील्ड मेकैनिकल इंजीनियरिंग में कोई नौकरी नहीं मिली, तो उस ने कूरियर कंपनी में नौकरी शुरू कर दी.
उन दोनों को बातें करतेकरते एक घंटा हो गया था. रुखसार जुनैद को अपने निकाह की तसवीरें दिखाने लगी. जुनैद बोला, ‘‘तब आप किसी खूबसूरत अप्सरा से कम नहीं थीं.’’
रुखसार ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘अच्छा…’’ और वह खाली प्लेट और कप ले कर रसोईघर में चली गई. अब वह नहाने की तैयारी कर रही थी.
जुनैद उस समय की खूबसूरती को निहार रहा था. वह नहाने के लिए जा ही रही थी कि तभी वापस बैडरूम में गई. जुनैद हैरान रह गया.
रुखसार ने पूछा, ‘‘कैसे लगी निकाह की अलबम?’’
जुनैद बोला, ‘‘बहुत खूबसूरत,’’
वह रुखसार के गले के नीचे देख रहा था, ‘‘वैसे अभी भी आप कुछ कम नहीं हैं.’’ यह सुन कर रुखसार एक खास अदा में मुसकरा दी.
रुखसार नहाने चली गई. कुछ देर बाद बाथरूम से आवाज आई, ‘‘मैं अपना तौलिया लेना भूल गई हूं. दे दो मुझे.’’
जुनैद ने रुखसार को तौलिया दे दिया. कुछ देर बाद पानी की आवाज आने लगी. जुनैद ने सोचा कि रुखसार अब नहाने लगी है. वह अपने खूबसूरत बदन पर साबुन लगा रही होगी.
कुछ देर बाद पानी की आवाज धीमी हो कर बंद हो गई. रुखसार नहा कर बाहर आई. उस ने काले रंग का लहंगा और काले रंग की चोली पहनी थी. छाती पर दुपट्टा था और सिर पर तौलिया बंधा हुआ था. जुनैद रुखसार को देख कर भी अनजान बना टीवी देख रहा था. रुखसार आईने के सामने खड़ी थी. उस ने अपने पूरे बाल खोल दिए थे. खुले हुए लंबे बाल उस की खूबसूरती को बढ़ा रहे थे.
जुनैद के मन में आया कि वह चुपके से उठ कर रुखसार की कमर पकड़ कर उसे पूरी तरह दबा दे. तभी रुखसार ने जुनैद की तरफ देखा. इस से जुनैद घबरा गया और अपनी चोर नजरों को टीवी पर लगा दिया. कुछ देर बाद रुखसार ने अलमारी से वह मोबाइल निकाला, जो जुनैद ले कर आया था. वह उस के फीचर के बारे में जुनैद से पूछने लगी और उस के पास आ कर बैठ गई.
जुनैद ने रुखसार को वह फोन चलाना सिखाया. वह अपनी उंगलियों से उस की मुलायम उंगलियों को पकड़ कर मोबाइल के अलगअलग फीचर बताने लगा. बीचीबीच में जुनैद का हाथ रुखसार के हाथ को छू भी जाता था, पर रुखसार ने बुरा नहीं माना.
इस से जुनैद हिम्मत की बढ़ गई. अब वह जानबूझ कर उस के हाथ को छूने लगा. धीरेधीरे उस की नजरें मोबाइल से हट कर रुखसार के गले के निचले हिस्से की तरफ गईं.
इसी तरह दोपहर के 2 बज गए. बारिश धीमी हो गई थी. वे दोनों खाना खाने लगे.
जुनैद ने पूछा, ‘‘आप दोबारा निकाह क्यों नहीं कर लेतीं?’’
रुखसार बोली, ‘‘तुम ने क्यों नहीं किया अभी तक निकाह?’’
‘‘अम्मी तो कई बार जिद करती रहती हैं निकाह के लिए, पर मैं ही टाल देता हूं कि अभी तक कोई लड़की पसंद नहीं आई. जब पसंद आएगी, तो कर लूंगा.’’
‘‘तो कैसी लड़की पसंद है तुम्हें?’’ रुखसार ने पूछा.
‘‘वही जो आप की तरह समझदार हो. घरेलू काम जानती हो. जो मुझे रोज गरमागरम चाय और बिलकुल आप जैसे पकौड़े बना कर खिला सके.’’ रुखसार उस का भाव समझते हुए बोली, ‘‘मैं तो तुम से 10 साल बड़ी हूं और विधवा भी हूं.’’
जुनैद बोला, ‘‘तो क्या हुआ?’’
‘‘पर क्या तुम्हारे अब्बू और अम्मी मानेंगे?’’
‘‘अरे, निकाह मुझे करना है या अम्मीअब्बू को. तुम ने वह कहावत नहीं सुनी कि जब मियांबीवी राजी, तो क्या करेगा काजी…’’
शाम के 5 बज चुके थे. तभी जुनैद का फोन आया. उस की अम्मी ने फोन किया था. वह बात करने के लिए रसोईघर में चला गया. रुखसार दीवार से कान लगाए जुनैद की बातें सुन रही थी. जुनैद ने भांप लिया था कि रुखसार पास ही है.
तभी जुनैद बोला, ‘‘नहीं अम्मी, अब लड़की देखने की जरूरत नहीं है. मुझे एक लड़की पसंद है.’’ यह सुन कर रुखसार शरमा गई और नजरें बचा कर जुनैद को देखने लगी. इस के बाद जुनैद ने फोन काट दिया. रुखसार पीछे से आ कर उस से लिपट गई. जुनैद ने उसे अपनी बांहों में भर लिया.
रुखसार बोली, ‘‘तुम ने तो अपनी अम्मी से बात कर ली है, मुझे भी अपने अम्मीअब्बू से बात करनी होगी. अच्छा, तुम्हें घर नहीं जाना क्या? रात के 7 बज चुके हैं.’’
जुनैद ने बताया, ‘‘चाचा किसी काम से आज ही बाहर गए हैं. घर में कोई नहीं है. खाना भी बाहर ही खाना होगा.’’ तभी बारिश दोबारा शुरू हो गई. रुखसार ने जुनैद को रोका. वह बोली, ‘‘अगर बुरा न मानो, तो आज यहीं रुक जाओ.’’
जुनैद का भी मन कर रहा था उस के साथ पूरी रात रुकने का. रुखसार ने खीर, पूरी और तरकारी बनाई थी. शायद इसी खुशी में कि उसे जुनैद जैसा जीवनसाथी मिला था.
जुनैद ने खाना खाते हुए कहा, ‘‘रुखसार, तुम खाना बहुत अच्छा बनाती हो, बिलकुल मेरी अम्मी की तरह.’’
रुखसार ने जुनैद के मुंह से पहली बार अपना नाम सुना. उसे बहुत अच्छा लगा. थोड़ी देर बाद रुखसार अपने अब्बू से फोन पर बात करने बाहर चली गई.
जब वह वापस आई, तो जुनैद बोला, ‘‘क्या कहा उन्होंने?’’
‘‘उन्होंने कहा कि अगर लड़का हमारी बिरादरी का है, नेक है और अपने पैरों पर खड़ा है, तो उन्हें कोई एतराज नहीं,’’ इतना कह कर रुखसार के चेहरे पर शर्म वाली मुसकराहट आ गई. रात के 10 बजे रुखसार बोली, ‘‘मैं रसोईघर में सो जाती हूं, तुम यहीं बैडरूम में सो जाओ.’’
‘‘नहीं, मैं वहां सो जाऊंगा. और तुम बैडरूम में सोना, क्योंकि यह घर तो तुम्हारा है.’’
‘‘पर निकाह के बाद तो तुम्हारा भी हो जाएगा,’’ रुखसार के मुंह से निकल गया.
यह सुन कर जुनैद ने उसे गले से लगा लिया और उस के गालों पर एक जोरदार चुंबन जड़ दिया. उस ने उस की छाती से दुपट्टा अलग कर दिया. रुखसार भी जुनैद से पूरी तरह लिपट गई. जुनैद ने अपने होंठ उस के गुलाबी होंठों पर रख दिए. रुखसार की आंखें बंद हो गईं. उस के बाद जुनैद ने कमरे की लाइट बंद कर दी.
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नौकरियों की कमी आने वाले सालों में एक बहुत बड़ा तूफान ला सकती है. देश में नए जवानों की गिनती तो तेजी से बढ़ रही है, पर नौकरियों की किल्लत भी बढ़ रही है. सरकार पहले लोगों से टैक्स लगा कर मिले पैसे से सरकारी नौकरियां दे कर कुछ को खुश रखती थी, पर अब टैक्स से आने वाला पैसा कम होने लगा है.
रेलवे ने चाहे कहा है कि वह एक लाख नौकरियां देगी, पर यह वादा है काले धन के 15 लाख रुपए खाते में जमा करने की तरह का. रेलों का देश में जो हाल है, उस से लगता नहीं कि नई नौकरियों की गुंजाइश है. वैसे भी जो जवान नौकरियों को लिए खड़े हैं, वे ज्यादातर चाहे पढ़लिख लें, पर कुशल हरगिज नहीं हैं. ज्यादातर नकल मार कर सर्टिफिकेट लिए घूम रहे हैं.
शहरों में पहले छोटेमोटे काम मिल जाते थे, पर लगता है कि जीएसटी की मार की वजह से छोटे कारखाने व छोटे व्यापारियों का काम ठप हो जाएगा और वे जो कम कुशल लोगों को नौकरी दे सकते थे, अब नहीं दे सकेंगे. खेतों में काम के मौके कम हो रहे हैं, क्योंकि वहां टै्रक्टर और मशीनों से काम होने लगा है. फिर वह काम 12 महीनों नहीं चलता. सेना भी अपने सैनिकों को कम करने वाली है.
नए जवान लड़कों की गिनती सरकार के लिए सिर्फ आंकड़ा भर है, क्योंकि सरकार को तो गौरक्षा, संस्कृति, राष्ट्रवाद, धर्म की ज्यादा पड़ी है. सरकार का आधा ध्यान तो टैक्सों को जमा करने के नएनए तरीकों पर लगा है. वह नए धंधे तैयार करने पर सोच ही नहीं रही है.
सिर्फ यह कहने से कि देश की कुल आय 6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है, काफी नहीं है, क्योंकि इस आय में बरबाद होने वाले कामों पर लगा पैसा भी शामिल है.
भारत में बेरोजगारी की हालत अभी इसलिए बहुत बुरी नहीं दिख रही, क्योंकि लोगों को अभी भी बहुत कम में गुजारा चलाने की आदत है. आप किसी बाजार, महल्ले, गांव, गली, खेत, फैक्टरी में चले जाएं, आप को खाली बैठे लोग नजर आ जाएंगे, जो वैसे बेरोजगार नहीं हैं. उन्हें कुछ वेतन मिलता है, पर चूंकि काम नहीं है, तो वही वेतन बहुत होता है. वे असल में देश व घर पर बोझ हैं.
यह सरकार कर सकती है कि देश में बेरोजगारी न हो. इस देश की जमीन ऐसी है कि वह हर हाथ को काम दे सकती है, पर यहां बरबादी और काम रोकने का रिवाज बना हुआ है. हर जना दूसरे का काम रोकता है और हर जना समय बरबाद कर रहा है. लोगों का अरबोंखरबों का काम हर साल बेकार में जाता है. धर्म तो इस बरबादी का सब से बड़ा नमूना है, जिस पर लोग, सरकार और समाज जीभर कर पैसा देते हैं और निठल्लों को पालते हैं.
अगर बेरोजगारों को किसी ने एक झंडे के नीचे खड़ा कर लिया, तो हर दल की मुसीबत हो जाएगी, यह पक्का है. और यह भी पक्का है चाहे सरकार बदल जाए, नई नौकरियां नहीं निकलेंगी.
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फिल्म ‘काबिल’ में सुप्रिया यानी गौतम जब बलात्कार का शिकार होती है तब रोहन यानी रितिक रोशन फटाफट उसे पुलिस स्टेशन व जांच के लिए हौस्पिटल ले जाता है ताकि सुप्रिया के गुनहगारों को सजा मिल सके. लेकिन पुलिस के अजीबोगरीब सवालों से वह इतना परेशान हो जाता है कि सुप्रिया की शारीरिक व मानसिक स्थिति पर ध्यान नहीं दे पाता. वह सुप्रिया को संभालने के बजाय उस से बात ही नहीं करता. वह यह सोचसोच कर खुद को दोषी मानने लगता है कि वह इस काबिल भी नहीं है कि सुप्रिया की रक्षा कर पाए? रोहन को इस तरह शांत देख कर सुप्रिया को लगने लगता है कि रेप की घटना की वजह से रोहन उस के साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है जिस का परिणाम यह होता है कि सुप्रिया रोहन मेरे कारण और परेशान न हो इसीलिए वह आत्महत्या कर लेती है.
यह तो कहानी है फिल्म की, लेकिन वास्तविक जीवन में भी जब प्रेमिका बलात्कार की शिकार होती है तो रिश्ते में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं. कुछ प्रेमी सोचते हैं काश, मैं ने उसे अकेला न छोड़ा होता, काश, मैं ने डिं्रक करने से मना किया होता, मैं उस के साथ होता तो ऐसा कभी नहीं होता और खुद को दोषी मानने लगते हैं.
कुछ प्रेमी प्रेमिका को इस का दोषी मान कर ब्रेकअप तक कर लेते हैं, जबकि यह समय ऐसा होता है जिस में पार्टनर को एकदूसरे के साथ की जरूरत होती है इस गम से बाहर निकालने में.
प्रेमिका बलात्कार की शिकार हो तो क्या करें
– मोरली सपोर्ट करें : इस वक्त प्यार व सपोर्ट की खास जरूरत होती है, इस से लगता है कि कोई है जिस के साथ जिंदगी गुजारी जा सकती है, क्योंकि इस तरह की घटना के बाद लड़की को ऐसा लगने लगता है कि कोई उस के साथ नहीं रहेगा. अब वह किसी काबिल नहीं है और वह खुद को दोषी मानने लगती है. इसलिए जब भी आप की प्रेमिका ऐसा कुछ कहे तो कुछ सकारात्मक बातें कहें ताकि उस का मनोबल बढ़े. इस वक्त परिवार को भी काफी सपोर्ट की जरूरत होती है, उन का भी साथ दें. जब जांचपड़ताल के मामले में उन्हें कहीं जाना हो तो साथ जाएं ताकि उन का हौसला बरकरार रहे.
– हर गम की दवा प्यार : गम कितना भी गहरा क्यों न हो, लेकिन प्यार से निभाया जाए तो कुछ भी मुश्किल नहीं होता, इसलिए प्यार से इस स्थिति से प्रेमिका को बाहर निकालें. ऐसा भी हो सकता है कि प्रेमिका के घर वाले उस का साथ न दें उसे भलाबुरा सुनाएं, लेकिन यह आप की जिम्मेदारी है कि आप उस के परिवार वालों को समझाएं कि इस में किसी का दोष नहीं है. उन की बेटी ने ऐसा कुछ भी नहीं किया कि आप उस के साथ ऐसा व्यवहार करें बल्कि आप अपनी बेटी का साथ दें, ताकि वह इस गम से बाहर निकल सके.
– स्मार्ट माइंड से लें स्मार्ट ऐक्शन : जब आप की प्रेमिका के साथ रेप हो रहा है तब आप हाथ पर हाथ रखे न बैठे रहें बल्कि स्मार्ट माइंड से स्मार्ट ऐक्शन लें. जैसे तुरंत पुलिस को कौल करें, फोन से पुलिस की गाड़ी का हौर्न बजाएं, वीडियो बना लें ताकि अपराधियों के खिलाफ सुबूत मिल सके.
– प्रीकौशन पिल्स दें : रेप हो गया है अब क्या करें, कितनी बदनामी होगी, ऐसी बातें ही न सोचते रहें बल्कि थोड़ा स्मार्ट बनें ताकि आप की प्रेमिका के साथ और बड़ा हादसा न हो. इसलिए प्रेमिका को प्रीकौशन पिल्स दें ताकि गर्भ न ठहरे, क्योंकि पता चला आप दोनों रेप के गम में डूबे रहें और कोई बड़ा हादसा हो जाए.
– दोषी को मीडिया से करें हाईलाइट : खुद से हीरो बनने की कोशिश न करें बल्कि दोषी को हाईलाइट करने के लिए मीडिया का सहारा लें. अगर मीडिया मामले को उजागर करता है तो पुलिस भी तुरंत ऐक्शन लेती है. आप चाहें तो किसी एनजीओ की मदद भी ले सकते हैं. ऐसे कई एनजीओ हैं जो इस तरह के मामलों में सहायता करते हैं.
– गम से उभरने का वक्त दें : ऐसी उम्मीद न कर बैठ जाएं कि कुछ दिन बाद वह नौर्मल हो जाएगी. अगर वह नौर्मल नहीं होती तो आप उसे डांटने न लगें कि क्या ड्रामा कर रखा है, इतने दिन से समझा रहा हूं, लेकिन तुम्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है, बल्कि उसे इस गम से उभरने का वक्त दें. बारबार न कहते रहें कि जो हुआ भूल जाओ, ऐसा कर के आप उसे और गम में धकेलते हैं.
– काउंसलिंग न करें मिस : इस दौरान मैंटल और इमोशनल कई तरह की समस्याएं होती हैं. इन्हें काउंसलिंग द्वारा कंट्रोल किया जा सकता है. काउंसलिंग से न केवल गम से उभरने में मदद मिलती है बल्कि जीने की एक नई राह भी मिलती है, इसलिए काउंसलिंग कभी मिस न करें. संभव हो तो आप भी साथ जाएं ताकि ऐसा न लगे कि आप जबरन भेज रहे हैं.
– दूसरों के लिए मिसाल बनें : ऐसा न करें कि दब्बू बन कर चुपचाप बैठ जाएं और प्रेमिका को भी भूल जाने को कहें बल्कि इस के खिलाफ कठोर कदम उठाएं ताकि आप को देख कर बाकी युवाओं को हिम्मत व प्रेरणा मिले.
क्या न करें
– रिश्ता तोड़ने की गलती न करें : आप की प्रेमिका का बलात्कार हुआ है, आप उस के साथ रहेंगे तो लोग आप के बारे में भी तरहतरह की बातें करेंगे, ऐसी बातें सोचसोच कर रिश्ता तोड़ने की गलती न करें. जरा सोचिए, अगर आप की बहन का बलात्कार हुआ होता, तो क्या आप अपनी बहन से रिश्ता तोड़ लेते नहीं न? तो फिर इस रिश्ते में ऐसा क्यों? इसलिए रिश्ता तोड़ने के बजाय अपनी सोच का दायरा बढ़ाएं और पार्टनर का साथ दें.
– प्रेमिका को दोषी न मानें : इस हादसे के लिए कभी भी अपनी प्रेमिका को दोष न दें कि रात में बाहर घूमने व छोटे कपड़े पहनने की वजह से ऐसा हुआ है बल्कि उस पर विश्वास करें, उस की बातें सुनें. हो सकता है आप की प्रेमिका उस वक्त कुछ अजीब तरह की बातें करे, लेकिन आप उन बातों पर गुस्सा करने के बजाय सुनें और प्यार से समझाएं कि इस में उस की कोई गलती नहीं है.
– मरजी के बिना न करें सैक्स : यह ठीक है कि आप अपना प्यार प्रदर्शित करने के लिए प्रेमिका के करीब जाना चाहते हैं ताकि उसे इस बात का एहसास करा सकें कि वह आप के लिए अब भी वैसी ही है जैसी पहले थी, लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि वह इस घटना से इतनी डिस्टर्ब हो कि आप की इस भावना को समझ ही न पाए और आप पर गुस्सा करने लगे, जोरजोर से चिल्लाने लगे कि आप उस का रेप कर रहे हैं. इसलिए कभी भी खुद से सैक्स का प्रयास न करें.
अगर प्रेमिका सहमति से संबंध बनाना चाहती है तो उस का साथ दें, मना न करें. आप के ऐसा करने से प्रेमिका को लग सकता है कि उस का रेप हुआ है. इसलिए आप मना कर रहे हैं.
कभी ऐसा भी हो सकता है कि वह खुद पहल कर संबंध बनाए, लेकिन बाद में सारा दोष आप पर डाल दे और चिल्लाने लगे. ऐसी स्थिति के लिए भी खुद को तैयार रखें. ऐसा न करें कि आप भी उलटा चिल्लाने लगें कि तुम ही आई थी संबंध बनाने, मैं तो नहीं चाहता था, बल्कि धैर्य से काम लें.
– गलत कदम न उठाएं और न उठाने दें : कई बार युवा जोशजोश में ऐसे कदम उठा लेते हैं जिस का खमियाजा बाद में भुगतना पड़ता है इसलिए न तो आप गलत कदम उठाएं और न ही प्रेमिका को उठाने दें.
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‘मनुस्मृति’ के मुताबिक, समाज में वर्ण व्यवस्था जन्म के हिसाब से तय की जाती थी. ब्राह्मण को मुख, क्षत्रिय को हाथ, वैश्य को जांघ व शूद्र को पैर माना गया. पढ़ेलिखे व कामचोर पैसे वालों ने इस में चालाकी दिखाई. उन्होंने अपनी सहूलियत के काम छांट कर खुद कब्जा लिया. पैसे, ताकत व हक पर काबिज हो कर खुद ही अगड़े बन गए और कमरतोड़ मेहनत, खेतीबारी, मजदूरी, सेवा, साफसफाई व जानवरों की खाल उतारने जैसे काम गरीब, जाहिल, अनपढ़ व कमजोरों के जिम्मे तय कर दिए. इस से समाज का कमजोर तबका पीछे व नीचे हो गया. अगड़े फायदे में रहे. ताकतवर की हैवानियत व मतलबपरस्ती के चलते समाज में कमजोरों पर हमेशा जुल्म होते रहे हैं.
कामचोरी को तरजीह
आमतौर पर कहा जाता है कि अगर पेट भरना है, तो काम करो. मेहनत कर के खाओ, लेकिन अफसोस की बात है कि मेहनत कर के खाने की बात अगड़े व असरदार लोग सिर्फ दूसरों के लिए करते हैं. मेहनत के सभी काम खासकर नीची जातियों के कंधों पर हैं. सारी नसीहतें कमजोरों पर ही लागू होती हैं.
अगड़े और दाढ़ीचोटी वाले बिना करेधरे ही खीरपूरी खाते रहे हैं. अब भी वे अपनी खिदमत पिछड़ों, दलितों व कमजोरों से ही कराते हैं. दिमागी फुतूर व झूठी शान दिखाने के लिए कम से कम काम करने वालों को समाज में बड़ा व ऊंचा और काम करने वालों को छोटा व नीचा समझा जाता है, इसलिए निकम्मों की फौज बरकरार है.
हमारे समाज का ढांचा सदियों से ऐसा ही बेढब रहा है कि जो लोग कुछ नहीं करते, उन्हें ब्राह्मण बता कर सिरमाथे पर बिठाया गया. सब से ऊंचा दर्जा दिया गया. पंडेपुजारी जीने से मरने तक के कर्मकांड कराने में भोले भक्तों से दानदक्षिणा और चढ़ावा लेते रहे हैं, इसलिए उन के मेहनत करने का तो सवाल ही नहीं उठता.
यह कैसी चाल
मांग कर खाने वाले ऊंचे व अगड़े कैसे हो सकते हैं? लेकिन जातियों का जंजाल बनाने वालों ने उन्हें ज्ञानी व पूज्य बता कर जबरदस्ती समाज में ऊपर बिठाया. यह उलटबांसी है कि जो समाज में भीख मांग कर खाए, दूसरों को बेवकूफ बनाए, वह सब से ऊंचा यानी ब्राह्मण कहलाए.
जो राज करे, दूसरों को हुक्म दे, गरीबों से टैक्स वसूल कर मौज मारे, उन्हें क्षत्रिय कह कर समाज में दूसरे नंबर पर रखा गया. खुद काम करना उन की शान के भी खिलाफ था, इसलिए वे भी दासदासियों के सहारे ही रहे.
समाज में तीसरे नंबर पर तिजारत करने वाले सेठसाहूकारों को वैश्य बता कर रखा गया. कुछ को छोड़ कर लेनदेन, कर्ज, सूद व खरीदफरोख्त की आड़ में जमाखोरी, मुनाफाखोरी, कालाबाजारी, मिलावट, चालाकी व घटतोली की खरपतवारें भी खूब उगीं व फलींफूलीं, लेकिन इन सब के बावजूद हमारे समाज में केवल ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों को समाज में पैसा, रुतबा, शोहरत व इज्जत मिली.
कई बार तोड़ा गया
शूद्रों को ऊलजलूल बातें बता कर भरमाया गया कि पिछले जन्मों में तुम्हारे कर्म खराब रहे हैं. तुम ने बहुत से पाप किए हैं. इसलिए तुम तो सिर्फ अगड़ों की सेवा करने के लिए ही पैदा हुए हो. पापों से छुटकारा पाने के लिए खूब जी लगा कर बेगारी करो. तुम्हारा यही फर्ज है. तुम मैला उठाओ. सफाई करो. खेत जोतो. फसल काटो. रोड़ेपत्थर ढोओ.
इतना ही नहीं, अगड़ों ने शूद्रों को हमेशा बरगलाए रखा. उन्हें गलत समझाया व गलतियां करने के लिए उकसाया. उन्हें भरोसा दिया गया कि जीनेखाने के लिए जब भी जरूरत हो, तो हम से कर्ज ले लो, उसी में जीना सीखो. उसी में मरो, ताकि कम से कम अगले जन्म में तो तुम्हें पिछले पापों से छुटकारा मिल सके.
नीची जातियों पर दबंगों ने तरहतरह की पाबंदियां लगाईं. उन्हें अपवित्र बता कर एक ओर छुआछूत माना, वहीं दूसरी ओर उन की बहूबेटियों की इज्जत लूटी. विरोध करने पर उन्हें मारापीटा गया, बेइज्जत किया गया.
धर्म के ठेकेदारों ने भी उन्हें उलटा पाठ पढ़ा कर बहलायाफुसलाया. उन्हें तरहतरह के अंधवश्विसों में फंसाया. भूतप्रेत, भाग्य और भगवान के भरोसे रहना सिखाया. दानपुण्य, तीर्थ, तेरहवीं, मुंडन वगैरह करने में लगाया. गंडेतावीज की आड़ में उन्हें जम कर लूटा. ग्रहों के नाम पर उन्हें इतना डरा दिया गया कि वे बहस करने के लायक ही नहीं रहे और चढ़ावा चढ़ाते रहे.
कड़वी सचाई
यह बात भी जगजाहिर है कि हमेशा दिल लगा कर काम करने व मेहनत करने की सीख दी जाती है, लेकिन मेहनत के काम में पूरा भेदभाव हुआ. उस में भी बंटवारा किया गया.
यह कहां की तुक है कि पिछड़े व दलित अपनी कूवत से भी ज्यादा काम करें, ऊपर से अगड़ों के जुल्म सहें?
जब तक कामचोरों की फौज है या फिर जब तक साफसफाई करना सिर्फ सफाई मुलाजिमों की ही जिम्मेदारी है, तब तक लाख सफाई अभियान चलाओ, कुछ बदलने वाला नहीं है.
अमीरों के शहरी इलाके भले ही चमक जाएं, लेकिन गांवकसबों में बसे असल हिंदुस्तान में लगे कूड़े के ढेर बढ़ते रहेंगे, बजबजाती नालियां उफनती रहेंगी, बीमारियां भी पनपती रहेंगी, इसलिए जरूरत है गांवदेहात के लोगों में जागरूकता लाने, तालीम व हुनर को बढ़ाने व सोच को सुधार कर बदलने की. हम सब लोगों का नया नजरिया ही इस में बदलाव ला सकता है और देश खुशहाल हो सकता है.
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बौलीवुड एक्ट्रेस अमीषा पटेल द्वारा सोशल मीडिया पर उनकी बोल्ड तस्वीरें पोस्ट किया जाना जारी है और लोग उन्हें ट्रोल करना जारी रखे हुए हैं. इस बार अमीषा ने कोई बोल्ड तस्वीर तो अपलोड नहीं की लेकिन इस बार उन्हें डैमेज जींस पहन कर अपनी तस्वीरें खिंचवाना और उन्हें अपलोड करना भारी पड़ गया. कुछ ही घंटों में तस्वीर पर हजारों लाइक्स तो आ गएं लेकिन कमेंट बौक्स में यूजर्स ने जो प्रतिक्रियाएं दीं वह पिछली बार की तरह काफी रूखी थीं. एक यूजर ने लिखा- आपकी हालत वाकई में बड़ी फटीचर हो गई है. एक अन्य यूजर ने कमेंट बौक्स में लिखा- कपड़ा कम पड़ गया था क्या?
सय्यद नाम के एक यूजर ने लिखा- फटी जींस की भी तस्वीर अपलोड कर दी, कौन्फिडेंस लेवल तो हद है. हद तो तब हो गई जब एक यूजर ने कमेंट बौक्स में लिखा दिया कि बिचारी बूढ़ी आंटी के पास पैंट खरीदने तक के पैसे नहीं हैं, एक काम करो प्लेट लेकर मंदिर के सामने बैठ जाओ. इस तरह के तमाम कमेंट इस तस्वीर पर किए गए हैं.
हालांकि यह पहला मामला नहीं है कि जब सोशल मीडिया पर अमीषा पटेल को ट्रोल किया गया है. हाल ही में अमीषा पटेल ने अपने ट्विटर हैंडल से कुछ नई तस्वीरें शेयर की थीं. इन तस्वीरों में अमीषा व्हाइट कलर की टी-शर्ट पहनी हुई नजर आ रही हैं. अलग-अलग तस्वीरों में एक ही टी-शर्ट होने की वजह से उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल होना पड़ा है.
वर्क फ्रंट की बात करें तो अमीषा के पास इस वक्त बहुत ज्यादा काम नहीं है वह फिल्म शौर्टकट रोमियो में नजर आई थीं और अब साल 2018 में उनकी 2 फिल्में बौक्स औफिस पर रिलीज होने जा रही हैं. उनकी पहली फिल्म है देसी मैजिक जिसमें वह सोनिया सक्सेना का किरदार निभाएंगी और दूसरी है भईयाजी सुपरहिट जिसमें उनका रोल भूमिका नाम की एक लड़की का होगा. पिछले काफी वक्त से उनकी कोई भी फिल्म बौक्स औफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी है. देखना यह होगा कि उनकी आने वाली फिल्म बौक्स औफिस पर कैसा प्रदर्शन करती है.