बागी 2 : टाइगर श्राफ के एक्शन के लिए देखें

2016 में प्रदर्शित सफल फिल्म ‘‘बागी’’ की सिक्वअल फिल्म है-‘बागी 2’, जिसमें इस बार टाइगर श्राफ के साथ दिशा पटनी ने मुख्य भूमिका निभायी है. एक्शन से भरपूर यह फिल्म इंटरवल तक दर्शकों को बांधकर रखती है. मगर इंटरवल के बाद दर्शक निराश होते हैं.

फिल्म शुरू होती है गोवा के एक स्कूल के सामने से. जहां नेहा (दिशा पटनी) अपनी चार वर्ष की बेटी रिया को स्कूल छोड़ने आयी है. अचानक उसकी कार के पीछे एक दूसरी गाड़ी आकर रुकती है, जिसमें से दो लोग निकलकर नेहा को उसकी गाड़ी से निकालकर घायल कर सड़क पर फेक देते हैं. और उसकी गाड़ी व बेटी रिया को लेकर भाग जाते हैं. फिर कहानी दो माह के बाद गुरुद्वारा से शुरू होती है, जहां नेहा मदद मांगने हर दिन आती रहती है.

गुरुद्वारा के ग्रंथी उसे आश्वासन देते हैं कि कोई न कोई उसकी मदद करेगा, तब उसे अपने पूर्व प्रेमी रौनी (टाइगर श्राफ) की याद आती है. और वह रौनी को फोन करती है. उधर कश्मीर मे सैनिक छावनी में रौनी उर्फ कमांडो रणवीर प्रताप सिंह (टाइगर श्राफ) को मानवाधिकार आयोग के सवालों का सामना कर रहा है. उस पर आरोप है कि आतंकवादियों की हत्या करने के बाद लोगों के पत्थरों से बचने के लिए एक इंसान को ढाल के तौर पर अपनी गाड़ी के आगे बोनट पर बांधने का. उसे साफ बरी कर दिया जाता है. तभी उसे नेहा का फोन मिलता है.

सात दिन की छुट्टी लेकर वह गोवा के लिए रवाना होता है. कश्मीर से गोवा पहुंचते पहुंचते रौनी को कौलेज दिनों में नेहा से अपनी पहली मुलाकात, प्यार और फिर किस तरह नेहा के पिता ने नेहा की शादी शेखर (दर्शन कुमार) से करा दी थी, वह सब याद आता है. इस प्यार में गम सहने के बाद वह गुस्से से आर्मी से जुड़ जाता है.

गोवा में नेहा, रौनी को बताती है किस तरह उसकी बेटी रिया का दो माह पहले अपहरण हुआ था, पर अब तक उसकी बेटी नहीं मिली. पुलिस ने यह मसला बंद कर दिया है. रौनी, नेहा के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचता है. पुलिस इंस्पेक्टर से कुते के गलत व्यवहार पर रौनी मारामारी कर लेता है. जिसके चलते उसे लौकअप में डाल दिया जाता है. रात में ढाई बजे डीआईजी शेरगिल (मनोज बाजपेयी) आकर उसे छोड़ देते हैं.bollywwod review

अब रौनी, उस्मान (दीपक डोबरियाल) से किराए पर गाड़ी लेकर रिया की तलाश में लग जाता है. एक दिन उसे पता चलता है कि शेखर का छोटा भाई सनी (प्रतीक बब्बर) हमेशा ड्रग्स में डूबा रहता है और उसका संबंध ड्रग्स के धंधे से है. इसी बीच उसकी मुलाकात हौटेल में अपने बगल वाले कमरे में ठहरे लखनऊ के पुलिस इंस्पेक्टर त्यागी से होती है. वह चालाकी से त्यागी का पहचान पत्र हथिया लेता है. अब वह उत्तर प्रदेश का पुलिस औफिसर त्यागी बनकर अपने मिशन में जुट जाता है. पर सफलता नहीं मिलती है. तब वह अखबार में रिया के लापता का विज्ञापन छपवा देता है.

विज्ञापन छपने के बाद रौनी के पास कई फोन आते हैं. वह एक इंसान से हौटेल में मिलता है, जो कि खुद को रिया का पिता बताता है और रिया का जन्म प्रमाणपत्र सहित सारी चीजें दिखाता है. उसका दावा है कि उसकी बेटी मुंबई में गुम हुई थी. तो वहीं शैखर, रौनी को बुलाता है और उसे एक नयी कहानी सुनाता है. शेखर के अनुसार उनकी अपनी कोई बेटी नहीं है. नेहा का गर्भपात हो गया था. इस सदमें वह पगला गयी है और नेहा को लगता है कि उसकी बेटी रिया थी, जबकि हमारी कोई बेटी नहीं है.

शेखर से सारा सच सुनने के बाद रौनी को भी यकीन हो जाता है कि रिया गलत है और वह नेहा के पास पहुंच कर कह देता है कि उसकी कोई बेटी नहीं है, फिर वह क्यों नाटक कर रही है? नेहा कहती है कि सारे लोग झूठ बोल रहे हैं. पर रौनी,नेहा की बात पर यकीन नहीं करता है. वह उसे अलविदा कह कर वापस आने लगता है, तो अचानक उसकी नजर दीवार पर लिखे कुछ वाक्यों पर पड़ती है और उसे अहसास हो जाता है कि नेहा सच बोल रही है. पर तब तक देर हो चुकी होती है. नेहा छठे माले से छलांग लगाकर आत्महत्या कर चुकी होती है.

इधर अब गोवा पुलिस स्टेशन में पंजाब के मशहूर पुलिस इंस्पेक्टर एलएसडी (रणदीप हुड्डा) का आगमन हो चुका हैं, जिनकी वेषभूषा पुलिस की नहीं, बल्कि चरसियों वाली है. बहुत तेज तर्रार है. एलएसडी के आने से डीआईजी शेरगिल भी अंदर से डर जाते हैं. नेहा की मौत की जांच करते हुए एलएसडी, शेखर से पूछताछ करते हुए कह देता है कि वह सब कुछ झूठ बोल रहा है.

उधर नेहा की मौत के बाद उस्मान, रौनी को बता देता है कि रिया, सनी के पास है. वास्तव में उस्मान भी सनी के ड्रग्स के व्यापार से जुड़ा हुआ है. रौनी, सनी के अड्डे पर उसे पकड़ने का प्रयास करता है, पर वह भागता है और बीच सड़क पर इन दोनों को एलएसडी पकड़ लेता है. पुलिस स्टेशन में पूछताछ के दौरान ही डीआईजी शेरगिल पहुंच जाते हैं और बडे़ नाटकीय तरीके से वह सनी को गोली मार देते हैं. फिर शेरगिल अपने घर रौनी को समझाते हैं कि वह ऐसा कदम ना उठाए, जिससे चीजें उलझ जाए. उसी दौरान वह किसी को फोन पर कहते हैं कि मैं तुम्हारे लिए कुछ भेज रहा हूं.

रौनी, शेरगिल के पास से निकलकर उस्मान के पास पहुंचता है, तो वहां पता चलता है कि उस्मान को दो लोगों ने अधमरा कर दिया है, रौनी गुस्से में उन दोनों की हत्या कर देता है. इस बीच उस्मान भी मर जाता है, तभी मेरे हुए इंसान का फोन बजता है. उससे रौनी को पता चलता है कि शेरगिल ने उसकी तस्वीर खींच कर इन आदमियों के पास भेजी थी, जिससे कि वह रौनी को मार सके.

अब रौनी को रिया के होने की जगह का पता चल जाता है. रौनी रवाना होता है. एलएसडी भी अपनी फौज के साथ उसका पीछा कर रहा है और जब लोग बीचपर बने फार्महाउस में तमाम हत्याएं करते हुए अंदर पहुंचते हैं. तो उसका सामना शेरगिल से होता है. एलएसडी की गोलियों से शेरगिल मारा जाता है. लेकिन उससे पहले शेरगिल कबूल कर लेता है कि पैसा कमाने के लिए असली ड्रग्स माफिया तो वही है, उसी के आदेश पर ही गोवा में सारा ड्रग्स का कारोबार फैला हुआ है.

रिया भी उसी के कब्जे में है. शेखर और सनी ने शेरगिल के कहने पर स्कूल सहित हर जगह पैसा खिला रखा था, वास्तव में शेखर को एक दिन पता चल जाता है कि नेहा कभी मां नहीं बन सकती. क्योंकि शेखर नपुंसक है. तब शेखर को अहसास हो जाता है कि रिया उसकी अपनी बेटी नहीं हैं और अब वह रिया को खत्म करने की कोशिश करता है. इसलिए सनी से कहकर उसने रिया का अपहरण करवाया, जो बाद में शेरगिल के पास पहुंच गयी. अंत में अब रौनी को अहसास होता है कि रिया, रौनी और नेहा की प्रेम की निशानी है, फिर वह बेटी को अपने साथ रख लेता है.

कथानक के स्तर पर नवीनता न होते हुए भी इंटरवल तक फिल्म की पटकथा अच्छी है, मगर इंटरवल के बाद फिल्म बिखर जाती हैं. फिल्म का जो रहस्य अंत में आता है, पटकथा लेखन की कमी के चलते उस रहस्य का आकलन दर्शक बीच में ही कर लेते हैं. इंटरवल के पहले ही दिशा पटनी का किरदार खत्म हो जाता है. फिल्म के संवाद ठीक ठाक हैं.

फिल्म का गीत संगीत प्रभावित नहीं करता. फिल्म में एक पुरानी फिल्म का अति मशहूर गाना ‘एक दो तीन ..’ का रीमेक किया गया है. पहले इस गाने पर माधुरी दीक्षित ने नृत्य किया था. मगर इस बार इस फिल्म में यह गाना जैकलीन फर्नांडिज पर फिल्माया गया है. यह गाना पुराने गीत की तुलना में कहीं नहीं ठहरता.

एक्शन प्रधान फिल्म के हिसाब से काफी अच्छे एक्शनन दृश्य है. मगर फिल्म के अंतिम तीस मिनट में एक्शन जबरन ठूंसा हुआ लगता है, जिसके चलते फिल्म भी लंबी हो गयी है. इतना ही नहीं टाइगर श्राफ द्वारा प्रतीक बब्बर का पीछा करने का सीन भी बेवजह टीवी सीरियल की तरह लंबा खींचा गया है. यदि इसे एडीटिंग टेबल पर कसा जाता तो बेहतर होता.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो टाइगर श्राफ व दिशा पटनी की केमिस्ट्री काफी अच्छी जमी है. वैसे भी निजी जीवन में उनके बीच जिस तरह के रिश्ते की चर्चाएं होती रहती हैं, उसे देखते हुए यह केमिस्ट्री अच्छी होनी ही थी. फिल्म में टाइगर श्राफ की मेहनत भी नजर आती है. मगर टाइगर श्राफ को अभी भी संवाद अदायगी पर मेहनत करने की जरुरत है. दिशा पटनी ने प्रेमिका व पत्नी दोनों ही किरदारों को बेहतर तरीके से जिया है. खुशी व गम हर तरह के भाव उनके चेहरे पर अच्छे ढंग से उभर कर आते हैं. जबकि टाइगर श्राफ ने अपने एक्शन दृश्यों पर मेहनत करने के अलावा अपने शरीर को दिखाने पर ही ज्यादा ध्यान दिया है.

छोटे किरदार में भी प्रतीक बब्बर निराश करते हैं. दर्शन कुमार की प्रतिभा को जाया किया गया है. ड्रग माफिया और डीआईजी शेरगिल दोनों ही किरदारों में मनोज बाजपेयी अपनी छाप छोड़ते नजर आते हैं, मगर उनके अभिनय में कई जगह दोहराव नजर आता है. दीपक डेाबरियाल ठीक ठाक ही हैं.

दो घंटे 14 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘बागी 2’’ का निर्माण साजिद नाड़ियादवाला ने किया है. फिल्म के निर्देशक अहमद खान, संवाद कथा लेखक हुसेन दलाल, पटकथा लेखक जो जो खान, अब्बास हैरापुरवाला, नीरज कुमार मिश्रा, संगीतकार जुलियस पक्कियम, मिठुन, संदीप शिरोड़कर, गौरव रोशिन व प्रणय रिजय, कैमरामैन संथाना कृष्णन व रविचंद्रन तथा फिल्म को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं – टाइगर श्राफ, दिशा पटनी, प्रतीक बब्बर, मनोज बाजपेयी,दर्शन कुमार, रणदीप हुड्डा, दीपक डोबरियाल और ‘एक दो तीन’ गाने में जैकलीन फर्नांडिज.

रणबीर और माहिरा के बीच क्या चल रहा है?

रणबीर कपूर की जिंदगी में क्या चल रहा है, यह समझना बड़ा मुश्किल हो रहा है. पाकिस्तानी अदाकारा माहिरा खान के साथ उनकी पुरानी मुलाकातों पर परदा डाला जा चुका है. माहिरा खान भी कह चुकी हैं कि रणबीर कपूर से उन्हें कभी प्यार नहीं था और चर्चाएं हो रही थीं कि अब रणबीर कपूर व आलिया भट्ट के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं. रणबीर कपूर के ही चलते आलिया भट्ट ने सिद्धार्थ मल्होत्रा से भी रिश्ते खत्म कर लिए.

लेकिन अब सूत्रों से जो खबरें मिल रही हैं, वह काफी चैंकाने वाली हैं. सूत्रों का दावा है कि बल्गेरिया में अयान मुखर्जी के निर्देशन में आलिया भट्ट के साथ रणबीर कपूर फिल्म ‘‘ब्रम्हास्त्र’’ की शूटिंग कर रहे थे. शूटिंग खत्म होते ही आलिया भट्ट और अयान मुखर्जी सीधे मुंबई लौट आए, लेकिन रणबीर कपूर लंदन उतर गए. सूत्रों का दावा है कि इन दिनों माहिरा खान भी लंदन में अपनी विवादास्पद फिल्म ‘‘वर्णा’’ के प्रमोशन के लिए हैं. सूत्र दावा कर रहे हैं कि रणबीर कपूर ने लंदन में माहिरा खान से मुलाकात की. अब इस मुलाकात के क्या मायने हैं, यह कहना बड़ा मुश्किल है.

इतना ही नहीं रणबीर कपूर के अति नजदीकी सूत्र दावा करते हैं कि लंदन में रणबीर कपूर व माहिरा खान की मुलाकातें हुई, दोनों ने कुछ समय साथ में बिताया और माहिरा खान पाकिस्तान वापस जा चुकी हैं, मगर रणबीर कपूर लंदन में  हैं. वह फिल्म ‘‘ब्रम्हास्त्र’’ के एक्शन दृष्यों के लिए आवश्यक एक्शन की ट्रेनिंग ले रहे हैं. सूत्र दावा कर रहे हैं कि रणबीर कपूर लंदन में भारतीय मार्शल आर्ट मसलन कलारी पयट्टू और वर्मा कलाई की ट्रेनिंग ले रहे हैं. अब सवाल यह है कि भारतीय मार्शल आर्ट, वह भी कलारी पयट्टू के लिए भारत में केरला में ट्रेनिंग लेने की बजाय लंदन को रणबीर कपूर ने क्यों चुना?

बौलीवुड से जुड़े सूत्र दावा कर रहे हैं कि रणबीर कपूर अपनी जिदगी में कोई नई खिचड़ी पका रहे हैं.

श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव का क्रेजी अवतार क्या देखा आपने

श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव अपनी आने वाली फिल्‍म ‘स्‍त्री’ की शूटिंग में लगे हुए हैं. लेकिन इस शूटिंग के दौरान यह दोनों सितारे जबरदस्‍त मस्‍ती करते नजर आए हैं. इस मस्‍तीभरे माहौल का एक वीडियो श्रद्धा कपूर ने अपने इंस्‍टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें श्रद्धा, राजकुमार के साथ शाहरुख खान और मनीषा कोयराला की फिल्‍म ‘दिल से’ के टाइटल सौन्‍ग पर नाचते और गाते नजर आ रहे हैं.

लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल होते वीडियोज की यह कतार यहीं नहीं थमी है. श्रद्धा एक वीडियो में फिल्‍म ‘बीवी नंबर 1’ के गाने ‘आजा न छूले मेरी चुनरी,  पर भी थिरकती दिख रही हैं.

फिल्‍म ‘स्‍त्री’ की शूटिंग फिलहाल भोपाल में के चंदेरी में चल रही है. शूटिंग से मिले ब्रेक के दौरान फिल्‍म की सारी टीम काफी कूल अंदाज में नजर आई. कैंडल लाइट डिनर के साथ म्‍यूजिक और मस्‍ती के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. आप भी देखें श्रद्धा और राजकुमार राव के वायरल होते यह वीडियो.

@rajkummar_rao #STREE

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बता दें कि ‘स्‍त्री’ एक हौरर कौमेडी फिल्‍म है. फिल्म की शूटिंग भी असली भुतिया इलाके में हो रही हैं. फिल्म के फर्स्ट शेड्यूल की शूटिंग पूरी हो चुकी है. फिल्म को अमर कौशिक डायरेक्ट कर रहे हैं. वहीं फिल्म की कहानी राज और डीके ने लिखी है. राज डीके बौलीवुड की सुपरहिट फिल्मों की कहानी लिख चुके हैं. ‘स्‍त्री’ में पहली बार पर्दे पर श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव की जोड़ी नजर आएगी.

मोदी सरकार : हवा हो गईं विकास की सुर्खियां

देश में विकास की गंगा ला देने के वादों के साथ 3 साल पहले आई राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार के विकास की बातें हवाहवाई साबित हो रही हैं. विकास के अलावा हिंदुत्व के बुनियादी मुद्दों समेत गैरजरूरी बातें सुर्खियों में जरूर छाई हुई हैं और सरकार की वाहवाही हो रही है. जनता और नेता आत्ममुग्ध दिखाई दे रहे हैं. गंभीर बात यह है कि मीडिया में भी विकास की सुर्खियां गायब हो रही हैं. अब न रोजगार की खबरें दिख रही हैं, न तरक्की की. हम अपने ही लोगों से नस्लीय लड़ाई लड़ रहे हैं.

चुनाव प्रचार के दौरान किए गए एक करोड़ रोजगारों के वादे पर कहीं गंभीरता नहीं दिखती. योजनाओं और कार्यक्रमों का जमीनी लैवल पर कोई असर नजर नहीं आ रहा है. ‘सब का साथ, सब का विकास’ महज खोखला नारा लग रहा है. गैरबराबरी बढ़ाने वाली सोच का बोलबाला बढ़ रहा है. नौजवान नौकरियों के लिए जूझ रहे हैं. किसानों की खुदकुशी के मामले रुक नहीं रहे हैं और सैनिक सीमा पर मर रहे हैं.

मई, 2014 में जब नरेंद्र मोदी की सरकार चुनी गई थी, तब केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी इस सरकार से तमाम तरह के विकास को ले कर ठोस कदम उठाने की एक उम्मीद जगी थी, पर अब वह धुंधली नजर आ रही है. हालात ऐसे हैं कि बाजार ठप हैं. छोटी व मझोली कंपनियों में निराशा का माहौल बना हुआ है. कर्मचारियों में जोश नहीं है और तो और पड़ोसी देशों चीन, पाकिस्तान, नेपाल से संबंध तनावपूर्ण बनते जा रहे हैं. बेरोजगारी और महंगाई देश में अब बहस का मुद्दा ही नहीं रही हैं.

विपक्ष बेअसर दिखाई दे रहा है. विपक्षी दल सरकार को संसद और बाहर घेरने में नाकाम साबित हो रहे हैं. चमत्कारों, अवतारों पर भरोसा करने वाली जनता भी नरेंद्र मोदी को नए अवतार में देख कर खुश हो रही है. विकास की खबरें गायब हैं.

सरकार का काम शौचालयों को बनाना, साफसफाई, मन की बात में केवल अपनी बात कहना रह गया है. हर जगह भाषणों का बोलबाला है. सरकार का सारा जोर विपक्ष को कमजोर करने, उसे कोसने में लगा रहता है. राज्यों के चुनाव जीतने में लगा रहा है. घरवापसी, गौवध और गौमांस पर पाबंदी की खबरें हावी हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केदारनाथ यात्रा, वाराणसी यात्रा, गंगा सफाई, यमुना की स्वच्छता, नर्मदा की पूजा, योग दिवस, योग को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा दिलाने, संस्कृति की महानता के चर्चे और 120 करोड़ की आबादी का बारबार गुणगान करने जैसी बातें सुर्खियों में रहती हैं.

सरकार विकास की कोरी बातें कर रही है, पर विकास होगा कैसे, यह कोई नहीं बता रहा. चीन जैसे देश से हम प्रति व्यक्ति आय में पिछड़ते जा रहे हैं.

साल 2013 में जहां चीन की प्रति व्यक्ति आय 5721 डौलर थी, वहीं साल 2015 में बढ़ कर 6497 डौलर हो गई. यानी प्रति व्यक्ति आय 776 डौलर बढ़ी, जबकि भारत की इसी अवधि में 1551 डौलर और 1751 डौलर थी. इस दौरान भारत की प्रति व्यक्ति आय महज 200 डौलर बढ़ी. अब अगर इसी तरह प्रति व्यक्ति आय बढ़ती रही, तो भारत चीन से विकास के मामले में बहुत पीछे रह जाएगा.

विकास के मामले में चीन के नतीजे चौंकाने वाले हैं. वहां विकास की औसत दर 9 फीसदी  और पिछले तकरीबन 20 सालों में 30 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ चुके हैं, जबकि भारत में गरीबी स्थायी देन लगती है. शायद लोगों के पहले के जन्म के पापों के फल की वजह से यह टिकाऊ बन चुकी है. अब भला सरकार नियति के फैसले में कैसे दखल कर सकती है?

चीन की माली बढ़ोतरी आज 6 से 7 फीसदी है. नैशनल इंटैलीजैंस काउंसिल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की कामकाजी आबादी अपने चरम पर 99.4 करोड़ होगी, पर भारत की कामकाजी आबादी साल 2050 से पहले अपने चरम तक शायद ही पहुंच पाए.

चीन अकेला सब से बड़ा अर्थव्यवस्था वाला देश होगा और साल 2030 तक वह अमेरिका को भी पीछे छोड़ देगा. चीन के बुनियादी विकास की कामयाबी देखने लायक है. वहां दिनरात परियोजनाओं पर काम चल रहा है. उस ने गंवई इलाके में कामधंधे को बढ़ावा दिया और बड़ी मात्रा में पैसे को व्यवस्थित किया है. चीन जाने वाले भारतीय कारोबारी वहां से लौट कर बताते हैं कि वहां भारत से बेहतर काम होता है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चीन में पढ़ाईलिखाई की दर 95 फीसदी से ज्यादा है, जो वास्तव में पढ़ेलिखे हैं, जबकि भारत में करीब 75 फीसदी हैं, जो सिर्फ कुछ अक्षर समझ सकते हैं. भारत सरकार इस का देश की उत्पादकता का सही से इस्तेमाल नहीं कर पा रही है. वह ऐसी किसी तरह की कोई योजना बनाने में भी नाकाम दिख रही है. उलटा देश में धर्म के नाम पर लाखों निठल्लों की फौज बैठी है, जो किसी भी तरह की उत्पादकता से दूर है. ये परजीवी मेहनती लोगों पर बोझ बने हुए हैं. यहां 5 जने एक काम करने वाले के ऊपर निर्भर हैं.

भारतीय श्रम ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 2 सालों में रोजगार वृद्धि दर पिछले 8 सालों के मुकाबले अपने न्यूनतम स्तर पर है. साल 2015 में महज 1.55 लाख और साल 2016 में 2.31 लाख लोगों को ही नौकरी मिल पाई थी.

वहीं इस के उलट साल 2009 में सब से ज्यादा 10 लाख नौकरियों में भरती करने का ऐलान हुआ था. 7 फीसदी की दर से बढ़ती अर्थव्यवस्था की विकास दर का दंभ भरने वाली इस सरकार के लिए इतनी कम नौकरियों का होना न होने के बराबर है.

चीन, जापान जैसे देश इसलिए तरक्की कर रहे हैं कि वहां धर्म की दखलअंदाजी नहीं है. चीन में जो थोड़ाबहुत धर्म है, उस का असर ज्यादा नहीं है. हमारे यहां तो धर्म के अलावा कुछ है ही नहीं. मीडिया की तमाम सुर्खियां धर्म से पैदा हुई लगती हैं.

भारत सहित दुनिया के बहुत से देशों में धर्म की स्थापना के लिए धार्मिक क्रांतियां हो रही हैं. हमारे यहां हिंदू राष्ट्र के लिए जोर पकड़ रहा है. अमेरिका, ब्रिटेन और दूसरे यूरोपियन देश ईसाईयत के अलावा अब खुल कर दूसरे धर्मों से परहेज करते दिखने लगे हैं. वे अपने यहां दूसरों के घुसने पर रोक लगाने की कोशिशों में हैं.

मुसलिम देश भी कट्टरता का साथ छोड़ने को तैयार नहीं हैं. पाकिस्तान, बंगलादेश, अफगानिस्तान, सूडान, अल्जीरिया, ईरान, इराक, सऊदी अरब जैसे देश मजहब के खूनी पंजों से घायल हैं, फिर भी धर्म का दामन पकड़े हुए हैं. मुसलिम सुधारक मुस्तफा कमाल पाशा का तुर्की अब इसलामी देश बनने के सपने देख रहा है.

दुनियाभर में धर्म, नस्ल, जाति के नाम पर अंदरूनी अघोषित गृहयुद्ध चल रहे हैं. धार्मिक देशों का हाल सामने है. तालिबान ने अफगानिस्तान को तबाह कर दिया. पाकिस्तान धार्मिक देश के तौर पर बरबादी के कगार पर खड़ा है.

सदियों से धर्म, जाति से चल रही माली व्यवस्था वाले भारत की माली नीतियों में अब भी अतीत की सोच हावी है. यहां अर्थव्यवस्था धर्म, जाति, नस्ल से बुरी तरह घिरी हुई है. गरीबी, पिछड़ापन, अपढ़ता, ऊंचनीच, भेदभाव, माली रूप से गैरबराबरी इसी का नतीजा है. यहां के नेता बिना ठोस योजनाओं के केवल बातें करना जानते हैं.

अंधेरा आश्रम : साक्षी की इज्ज्त से खेलता बाबा

गिरधारी लाल कसबे के बड़े कारोबारी थे. उन की पत्नी सुशीला देवी घर में पंडितों को भोज, पूजापाठ करवा कर आएदिन उन्हें दक्षिणा देती रहती थीं. वे आंख मींच कर पंडितों और बाबाओं पर भरोसा करती थीं.

वे आएदिन व्रतउद्यापन कराती थीं, सो उन के घर में दूसरी सहेलियों का आनाजाना भी लगा रहता था. हर उद्यापन के पहले शहर के बड़े साड़ी स्टोर से आदमी नए फैशन की साडि़यां ले कर घर आता और सुशीला देवी खटाखट 15 एकजैसी साड़ियां बांटने के लिए निकाल लेतीं. फिर एक भारी साड़ी वे खुद के लिए पसंद करतीं और बहू इंद्रा को भी पुकारतीं और कहतीं कि तुम भी एक अच्छी साड़ी पसंद कर लो.

सुशीला देवी के घर में एक नामी बाबाजी का भी आनाजाना था. उन के आशीर्वाद के बिना तो घर का पत्ता भी नहीं हिलता था. कुछ भी नया काम हो, बाबाजी उस का मुहूर्त निकालते और हवन करते, फिर उस काम की शुरुआत होती.

सुशीला देवी बाबाजी के आश्रम में जातीं और सेवा कर के आतीं. उन का विश्वास था कि घर में हर तरक्की बाबाजी के आशीर्वाद से होती है.

हकीकत यह थी कि सुशीला देवी व उन के जैसे ही दूसरे भक्तों की मदद से बाबाजी का आश्रम हराभरा हो रहा था. जब सुशीला देवी सेवा के लिए जातीं, तो अपनी बेटी साक्षी को भी साथ ले जातीं.

आश्रम में वे कहतीं, ‘‘बाबाजी के पैर छू कर आशीर्वाद लो बेटी.’’

बाबाजी भी साक्षी को आशीर्वाद देते और कहते, ‘‘देखना, हमारी साक्षी बेटी किसी राजा भोज को ब्याही जाएगी.’’

शकुंतला देवी बाबाजी के मुंह से शुभ वचन सुन कर धन्य हो जातीं.

साक्षी निकली भी बहुत खूबसूरत. 4-5 साल बाद वह कालेज जाने लगी थी. जब इम्तिहान का समय आता, बाबाजी घर आते, साक्षी को आशीर्वाद देते. साक्षी भी उन की शख्सीयत से बहुत प्रभावित थी. कभीकभी अगर शकुंतला देवी सेवा के लिए न जा पातीं, तो वे साक्षी को भेज देतीं.

सुशीला देवी की बहू इंद्रा पेट से हुई. सुशीला देवी तो बाबाजी के चरण पकड़ कर बैठ गईं और कहने लगीं, ‘‘कुछ ऐसा कीजिए बाबाजी, पहली बार में ही पोते का मुंह देखूं. पोता होते ही आप के पूरे आश्रम में एसी लगवाऊंगी.’’

बाबाजी ने बहू को पुकारा, ‘‘बेटी इंद्रा, जरा इधर आओ तो…’’

इंद्रा वहां आई. बाबाजी ने कुछ मंत्र बुदबुदाया और बहू को आशीर्वाद दिया.

पोते की आस लिए सुशीला देवी जीजान से अपनी एकलौती बहू की सेवा में जुटी रहीं. सुबह उठते ही मक्खनमिश्री मिला कर बहू को दे देतीं और आंखें मटका कर कहतीं, ‘‘रोज खाया करो, मक्खन सा गोरा बेटा पैदा होगा.’’

एक दिन शकुंतला देवी ने साक्षी से कहा, ‘‘बेटी, आज बाबाजी के आश्रम में तुम चली जाओ, मुझे कुछ काम है. और देखो, रसोई में सूखे मेवे रखे हैं, उन्हें ले जाना नहीं भूलना. बाबाजी के आशीर्वाद से पोता ही होगा… देख लेना तुम लोग.’’

साक्षी भी मां के कहे मुताबिक बाबाजी की सेवा में जुटी रहती थी. बहू इंद्रा के दिन चढ़ रहे थे और सुशीला देवी की चिंता बढ़ती जा रही थी. उधर साक्षी पर बाबाजी की सेवा का काम बढ़ता जा रहा था. वह आश्रम में जा कर बाबाजी का बिस्तर लगाती, उन की खड़ाऊं जगह पर रखती, उन की किताबें जमाती, यह सब कर के वह अपनेआप को धन्य समझती.

साक्षी सारीसारी रात बाबाजी के आश्रम में बिताती. सुशीला देवी कुछ पूछतीं, तो वह कहती, ‘‘मां, आज आश्रम में अखंड मंत्र जाप था. सो, उठ कर बीच में नहीं आ सकती थी. मुंहअंधेरे बाबाजी को हवन करना था, इसलिए उस की तैयारी कर रही थी और देर हुई तो वहीं सो गई.’’

सुशीला देवी भी चेहरे पर शांत भाव लाते हुए कहतीं, ‘‘हां बेटी, अच्छा ही है. हमारे घर में जो अच्छी आमदनी हो रही है न, सब बाबाजी की कृपा से ही है. अब बस इसे संभालने वाला एक वारिस और आ जाए, तो मैं बद्री नारायण के दर्शन कर आऊं.’’

साक्षी घर से सलवारकुरता पहन चुन्नी ओढ़ कर जाती और सांझ ढलते ही छोटेछोटे कपड़े पहन किसी अप्सरा का रूप धारण कर लेती. वह अपनी जवानी का बाबाजी के साथ भरपूर मजा ले रही थी.

अंधा क्या चाहे दो आंखें. सो, बाबाजी दिन में घर से लाए मेवों का भोग लगाते और रात में साक्षी का.

कभीकभी सुशीला देवी कहतीं, ‘‘बेटी साक्षी, तुम बहुत आश्रम में बहुत रहने लगी हो. अपनी पढ़ाई पर भी जरा ध्यान दो.’’

साक्षी कहती, ‘‘मां, आप चिंता न कीजिए. मैं खुद ध्यान दे रही हूं अपनी पढ़ाई पर.’’

इधर बाबाजी जब कभी घर आते, तो सुशीला देवी से कहते, ‘‘साक्षी बेटी पर यह साल भारी है, थोड़ा आश्रम में मंत्र जपेगी और हवन करेगी, तो दोष मुक्त होगी.’’

साक्षी तो बाबाजी से इतनी सम्मोहित हो चुकी थी कि घर में कुछ न बताती. जो चल रहा था, उस में वह बहुत खुश थी. कभीकभी साक्षी की सहेलियां उसे पार्टी के लिए बुलातीं, तो साक्षी बाबाजी से कहती, ‘‘बाबाजी, आज रात को मैं न आ सकूंगी.’’

बाबाजी कहते, ‘‘अब तुम बिन हमारा जीवन असंभव है. तुम भी नहीं चाहोगी कि यह राज खुल जाए. एक रात की भी छुट्टी नहीं तुम्हें.’’

साक्षी बाबाजी के डर के मारे जिद न करती और अपनी सहेलियों से कह देती कि घर में काम ज्यादा है, वह पार्टी में न आ सकेगी.

जल्दी ही सुशीला देवी के घर में खुशखबरी आ गई कि उन की बहू इंद्रा ने बेटे को जन्म दिया है.

सुशीला देवी तो खुशी के मारे आसमान में उड़ने लगी थीं. घर में बड़े ही जोरशोर से जश्न मनाया गया और बाबाजी का आश्रम सुशीला देवी की कृपा से चमचमा उठा.

अब पोते के साथ सुशीला देवी और ज्यादा बिजी हो गईं और उधर साक्षी बाबाजी के आश्रम में. वह बाबाजी के खिलाफ एक शब्द भी सुनना पसंद नहीं करती थी.

अब कभीकभी सुशीला देवी कहतीं, ‘‘बेटी साक्षी, अब तुम आश्रम जाना छोड़ दो. पोता हो गया, मैं तो गंगा नहा ली. अब मैं फिर से बाबाजी की सेवा में जुट जाती हूं.’’

साक्षी कहती, ‘‘मां, कहां तुम इस उम्र में आश्रम में दौड़भाग करोगी? अब तुम पोता संभालो, बाबाजी की सेवा में मैं कोई कमी न आने दूंगी.’’

यह सुन कर सुशीला देवी के चेहरे पर बड़ी सी मुसकराहट बिखर जाती. वे मन ही मन सोचतीं, ‘आजकल लड़कियां इतना डिस्को में जाती हैं, अच्छा है साक्षी को यह हवा नहीं लगी. क्या फायदा 4 बौयफ्रैंड्स बना लेगी और वहां नशा करेगी. इस से अच्छा है कि आश्रम में ही सेवा करे, कुछ पुण्य ही कमाएगी.’

सुशीला देवी निश्चिंत हो कर एक तीर्थ कर आईं. उन्हें आए अभी 3-4 दिन ही बीते थे कि अस्पताल से फोन आया, ‘आप की बेटी अस्पताल में भरती है. आप जल्दी यहां आइए.’

सुशीला देवी ने जैसे ही फोन सुना, उन के तो हाथपैर फूल गए. एक बार को तो उन्हें कुछ समझ ही नहीं आया कि वे क्या करें, लेकिन अपनेआप को सहज किया, फिर झट से ड्राइवर को गाड़ी निकालने को कहा.

वहां जा कर जब उन्हें सारी बात मालूम हुई, तो उन्हें कानों सुने पर विश्वास ही न हुआ. मालूम हुआ कि साक्षी अस्पताल में बच्चा गिरवाने आई थी और उस दौरान उस की अंदर की कोई नस फट गई, जिस के चलते उस के शरीर से बहुत खून बह गया और उस की जान को खतरा हो गया.

सुशीला देवी तो समझ ही नहीं पाईं कि यह कब और कैसे हो गया. साक्षी अभी बेहोशी की हालत में थी.

जब साक्षी को होश आया, तो सुशीला देवी ने उस के सिर पर हाथ फेरते हुए पूछा, ‘‘यह कैसे हो गया बेटी?’’

साक्षी सिर्फ इतना ही कह पाई, ‘‘बाबाजी…’’

यह सुन कर सुशीला देवी के तो जैसे तनबदन में आग लग गई. वे कहने लगीं, ‘‘क्या बाबाजी ने जबरदस्ती की तुझ से?’’

साक्षी बोली, ‘‘नहीं मां, सब मेरी मरजी से. मुझे नहीं मालूम कि क्या हो गया है, लेकिन बाबाजी का साथ मुझे अच्छा लगता है.’’

उस की बात सुन कर सुशीला देवी का गुस्सा बेकाबू हो गया. फिर भी अपनी व साक्षी की इज्जत की खातिर अपनेआप को शांत कर वे बोलीं, ‘‘बेटी, क्या सोचा और क्या पाया?’’

खैर, अस्पताल में तो उन्हें मुंह बंद रखने में ही समझदारी नजर आई. साक्षी को अस्पताल से डिस्चार्ज करवा कर वे घर लाईं.

सेठ गिरधारी लाल ने जब सचाई सुनी, तो उन के पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई. पर अब किया भी क्या जा सकता था. आखिर इस सब में साक्षी भी तो शामिल थी.

हां, सुशीला देवी का बेटा रमेश कहने लगा, ‘‘देखा मां, बाबाजी की अंधभक्ति का नतीजा. मैं ने तुम्हें कितनी बार समझाया था कि घर में जो कुछ है, वह पिताजी व मेरी मेहनत का फल है. बाबाजी के आशीर्वाद से कुछ नहीं होता है, लेकिन मां, तुम्हें तो उन पर इतना विश्वास था कि तुम मेरी एक भी बात ध्यान से सुनती तक नहीं.’’

भाईभाभी, सुशीला देवी व गिरधारी लाल ने मिल कर साक्षी को बड़े प्यार से समझाया, ताकि वह बाबाजी के सम्मोहन से बाहर निकल सके.

फिर सुशीला देवी का बेटा रमेश व बहू इंद्रा साक्षी को एक काउंसलर के पास ले गए, ताकि वह उसे समझाबुझा कर उस के बीते कल से छुटकारा दिला सके. कुछ महीने के लिए सुशीला देवी उसे अपनी बहन के घर ले गईं. कुछ समय में साक्षी फिर से सामान्य हो गई थी.

अब सुशीला देवी समझ गई थीं कि बाबाजी ने उस की अंधभक्ति का इस्तेमाल किया और उस के विश्वास का फायदा उठा कर उसी की बेटी का सम्मोहन कर लिया था. लेकिन अब सुशीला देवी ने बाबाजी के लिए अपने घर के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर दिए थे.

बाबाजी ने भी सोचा कि शांत रहने में ही भलाई है, वरना कहीं गिरधारी लाल आगबबूला हो गए, तो पुलिस में रिपोर्ट कर देंगे और उन की पोलपट्टी खुल जाएगी. उन्होंने जो आश्रम में हवनकीर्तन के नाम पर कारोबार किया हुआ है और बाबाजी का मुखौटा पहना है, वह जनता के सामने न उतर जाए. कहीं उन्हें जेल की हवा न खानी पड़ जाए.

अब तो पकौड़े ही तलने पड़ेंगे

देश की आरतों को नीरव मोदी और गीतांजलि ज्वैलर्स को बचाने के लिए एकजुट हो जाना चाहिए. देश की औरतों से मतलब है पैसे वाली, ठसके वाली, जेवरों से लदीफंदी हुईं. नीरव मोदी, गीतांजलि ज्वैलर्स, गिली इंडिया, नक्षत्र जैसी कंपनियों ने ही उन्हें एक विशेष आभा दी है. पार्टियों में नीरव मोदी के हार पर हाथ फिराते हुए कहना कि ‘मैं तो सिर्फ नीरव मोदी ही’ पहनती हूं, वैसा ही हो गया था जैसे भगवाधारी कहें कि अब तक के सर्वोत्तम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं. उस नीरव मोदी या मेहुल चोकसी को भगोड़ा बताने का अर्थ है इन औरतों के लौकरों में रखे लाखों के जेवरों का पकौड़ा बना डालना. यह किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है.

सोने के लिए हर युग में, हर राजा और हर रंक ने हमेशा हर तरह के काम किए हैं. पिरामिडों के युग में राजेरानियां अपने साथ मरने के बाद भी सोना ले जाते रहे हैं, जो इन पिरामिडों में आज 5000 साल की लूट के बाद भी थोड़ाबहुत मिल जाता है और कुछ स्मगलरों के पास जाता है, कुछ संग्रहालयों में.

हिंदी फिल्मों का एक युग तो केवल सोने की स्मगलिंग पर ही टिका था. हर दूसरी फिल्म में एक तस्कर होता था, जो देशविदेश से सोना ले कर आता था या सोने को चुरा कर भागने वाला चोर होता था. रामजी ने रावण को भी तो इसी सोने के मोह के कारण मारा था. सीता ने राम से स्वर्णमृग लाने के लिए जिस तरह की जिद की थी आज की औरतों को भी उसी तरह की जिद नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे स्वर्णमृगों को बाइज्जत देश लाने के लिए करनी चाहिए.

सोना किसी तरह से गलत नहीं होता है. स्वर्ण भस्म का नाम ले कर लोगों को न जाने क्याक्या आयुर्वेदिक दवाओं में खिला दिया जाता है. उस सोने की उपलब्धि कराने के लिए क्या देश एक खट्टी डकार भी नहीं ले सकता?

यह औरतों का, अमीर पैसे वाली औरतों का, अपमान है कि उन की सेवा करने वाले नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के परिवार वालों को इस बुरी तरह लताड़ा जा रहा है.

हमारे नेता इस तरह की औरतों के गुणों और प्रभाव को जानते हैं तभी तो कभी दावोस, (स्विट्जरलैंड), कभी गुजरात, कभी शोरूमों में इन प्रतिभाशाली ज्वैलर्स की संगति में दिखते थे, वे औरतों के वोट इकट्ठे कर रहे थे. इन औरतों के लिए सोने की अवैलेबिलिटी को सुदृढ़ कर रहे थे.

क्या इन औरतों का यह कर्तव्य नहीं कि ये पंजाब नैशनल बैंक के सामने अपनी एअरकंडीशंड गाडि़यों में बैठ कर प्रदर्शन करें?

देखिए, अगर सेवा करानी है, तो कभीकभार कष्ट भोगना ही होगा. नीरव मोदी जैसों का अपमान करने की जुर्रत किसी में नहीं हो, इस के लिए कुछ करिए तुरंत वरना अगला चमचमाता हार नहीं मिलेगा.

शराब है खराब

एक बोध कथा है जिस में अलौकिकता पर न जाएं. कथा के  अनुसार, एक दिन शैतान मनुष्य के पास आया और बोला, ‘तुम सब मरने ही वाले हो. मैं तुम्हें मौत से बचा सकता हूं बशर्ते, तुम अपने नौकर को मार डालो, अपनी पत्नी की पिटाई करो या यह शराब पी लो.’

मनुष्य ने कहा, ‘मुझे जरा सोचने दीजिए अपने विश्वसनीय नौकर की हत्या करना मेरे लिए संभव नहीं, पत्नी के साथ दुर्व्यवहार करना बेतुकी बात होगी. हां, मैं यह शराब पी लूंगा.’ उस के बाद उस ने शराब पी ली और नशे में धुत हो कर पत्नी को पीटा तथा जब नौकर ने उस की पत्नी का बचाव करने की कोशिश की तो नौकर को मार डाला.

उपरोक्त बोधकथा से मद्यपान के हमारे जीवन पर पड़ने वाले कुप्रभाव को भलीभांति समझा जा सकता है. निसंहेद मद्यपान का हमारे जीवन पर घातक प्रभाव पड़ता है. किंतु इस के बावजूद आज जिधर देखो उधर युवाबूढ़े, स्त्रीपुरुष, अमीरगरीब सभी इस घातक जहर की चपेट में नजर आते हैं. शराब पीना आजकल फैशन सा बन गया है. फैशनपरस्त लोगों ने साजसिंगार तथा वेशभूषा तक ही सीमित न रह कर शराब को भी उस के दायरे में समेट लिया है. शराब पीने से इनकार करने वाले को अब पुराने विचारों का तथा रूढि़वादी करार दिया जाता है और अपने को आधुनिक व प्रभावशाली साबित करने का इच्छुक हर व्यक्ति उस के खतरों को नजरअंदाज करते हुए या जानेअनजाने में इस के जानलेवा जाल में फंसता जा रहा है.

क्यों पीते हैं शराब

इस के कई कारण हैं. अकसर देखने में आता है कि मानसिक तनाव के कारण लोग शराब पीते हैं. जब व्यक्ति किसी समस्या का हल पाने में असफल होता है तो शराब पी कर उसे भूलने की चेष्टा करता है. अधिकांश मामलों में यही देखा गया है कि हताशा मद्यपान का कारण बनती है. पारिवारिक कलह, आर्थिक अभाव या कभीकभी शारीरिक यंत्रणा से मुक्ति पाने के लिए लोग इसे मुंह से लगा बैठते हैं. किंतु क्या इसे उचित कहा जा सकता है? शराब किसी समस्या का समाधान तो नहीं हो सकती या शराब पी कर भूलने से आप की समस्या का अंत तो नहीं हो जाता. किसी भी परेशानी से घबरा कर शराब पीना एक और परेशानी को गले लगाना है, उस से छुटकारा पाना नहीं.

शराब पीने के लिए लोगों के पास बहानों की कमी नहीं है. कुछ व्यक्ति केवल इसलिए शराब पीते हैं कि लोग उन्हें विशिष्ट समझें, वे शराब को स्टेटस व संपन्नता का प्रतीक मानते हैं. वे यह भूल जाते हैं कि शराब का सेवन करना दिमागी खोखलेपन की निशानी भी है. दिनभर मेहनत करने के बाद शाम को शराब पीने वालों का तर्क होता है कि इस से थकान दूर हो जाती है. ये लोग शराब पीने के बाद डगमगा कर चलने व बेहोश हो जाने को ही शायद थकान का दूर होना समझते हैं.

आजकल किसी भी सामाजिक उत्सव या त्योहार पर गिलासों की खनखनाहट होनी आम बात होती है. ऐसे अवसरों पर अकसर ही यह सुना जाता है कि सोसायटी में रहना है तो उस के हिसाब से ही चलना होगा, और फिर सोसायटी में यह सब चलता ही है. इन चीजों को अपनाए बगैर कोई भी उन्नति नहीं कर सकता. यहां ये लोग शायद यह भूल जाते हैं कि कोई भी व्यक्ति अपने परिश्रम व लगन से उन्नति करता है, शराब पीने से नहीं.

शराब के संपर्क में आने के बाद व्यक्ति के पास चरित्र नाम की कोई चीज नहीं रह जाती है. कहने को इस के बचाव में वह कुछ भी कहता रहे, शराब पी कर वह केवल अपनेआप को धोखा देता है और जो व्यक्ति अपनेआप को धोखा देता है उस का क्या चरित्र हो सकता है.

विचारशक्ति खत्म होती है

कभीकभी कुछ व्यक्ति केवल झगड़ा करने के लिए शराब पीते हैं ताकि स्फूर्ति आ जाए. जबकि, ऐसा होता नहीं है. शराब पीने के बाद आदमी सामान्य नहीं रह पाता है क्योंकि हमारे मस्तिष्क में कुछ ऐसे तंत्र होते हैं जो हमारे बोलनेचालने या काम करने के तौरतरीके आदि को नियंत्रित करते हैं. शराब पीने के बाद वह नियंत्रण समाप्त हो जाता है और आदमी के सोचनेसमझने की शक्ति खत्म हो जाती है. वह उचितअनुचित का भेद नहीं कर पाता है और सभ्यता व शिष्टाचार की सीमा लांघ कर अपशब्द बोलने लगता है. इस के अतिरिक्त, कुछ व्यक्ति यह सोच कर भी शराब पीते हैं कि वे जिस से झगड़ा करने जा रहे हैं वह उन्हें नशे में देख कर डर जाएगा. पर मजा तो तब आता है जब इस का उलटा होता है और इन की पिटाई हो जाती है क्योंकि नशे में इन की प्रतिरोध क्षमता खत्म हो जाती है.

जो व्यक्ति शराब के आदी नहीं होते हैं वे कभीकभी मित्रों आदि पर रोब गांठने के लिए पी लेते हैं तो कुछ लोग यह सोचते हैं कि जहां अन्य सभी पीने वाले हों, वहां एक व्यक्ति शराब को हाथ नहीं  लगाता है तो लोग उसे बेवकूफ समझेंगे और उसे इग्नोर करने लगेंगे. इसलिए वह न चाहते हुए भी अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए पीतापिलाता रहता है. ऐसा कर के वह सोचता है कि वह भी आधुनिक और उच्च श्रेणी में आ गया है. किंतु पीने के बाद यही व्यक्ति नशें में धुत हो कर जब घर जाता है और अपनी पत्नी व बच्चों को पीटता है तो ऐसा कर के वह अपनी नीचता का ही प्रदर्शन करता है, आधुनिकता या श्रेष्ठता का नहीं.

छोटेछोटे बालक शुरू में अपने बड़ेबुजुर्गों की देखादेखी शराब पीना शुरू करते हैं, क्योंकि जब वे उन्हें पीता देखते हैं तो उन के बालसुलभ मन में भी वैसा ही करने की स्वाभाविक इच्छा जागृत होती है. इस तरह वे छिप कर शराब पीना शुरू कर देते हैं और आगे चल कर इस के आदी हो जाते हैं.

पीने की आदत

एक बार शराब का सेवन करने के बाद व्यक्ति इस की गिरफ्त में आ जाता है और फिर एक आदत बन जाती है. पहली बार शराब का सेवन करते समय आदमी यह सोचता है कि वह शराब का आदी थोड़े ही बन रहा है. पर वह यह नहीं जानता है कि एक बार पीना शुरू कर देने पर इतना विवेक किस में होता है कि अच्छाबुरा सोच सके.

शराब पीने की आदत पड़ जाने पर लोग पैसा न हो तो उधार ले कर पीना शुरू कर देते हैं. उधार न मिलने पर शराब प्राप्त करने के लिए लोग चोरी, जेबकतरी और रिश्वतखोरी आदि करते हैं. घर में कलह शुरू होता है और घर बरबाद हो जाता है. शराब के नशे में गाडि़यां चला कर दुर्घटनाएं, हत्याएं, बलात्कार व अन्य जघन्य अपराध करने के समाचार हम प्रतिदिन पढ़ते, सुनते व देखते हैं. ऐसा कौन सा कुकृत्य है जो शराब के नशे में और शराब को प्राप्त करने के लिए नहीं किया जाता.

इन सब बातों के विपरीत कोई शराबी यह नहीं चाहता कि उस की संतान शराब को हाथ लगाए. वह यह  भी नहीं चाहता कि उस के निवास स्थान के पास शराब की दुकान या होटल आदि हो. क्या यह तथ्य यह बात सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि एक शराबी भी शराब को घृणा की दृष्टि से देखता है.

इन सब बातों को जानते व समझते हुए भी बहुत से लोग शराब पीना छोड़ना नहीं चाहते हैं. कुछ लोग छोड़ना चाहते हुए भी कहते हैं कि क्या करें, छूटती ही नहीं. माना शराब मनुष्य की बहुत बड़ी कमजोरी है पर कमजोरियों पर विजय भी तो मनुष्य ने ही पाई है. ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जिसे मनुष्य पूरी इच्छा से करना चाहे और न कर सके. आवश्यकता केवल दृढ़प्रतिज्ञ होने की है.

गुरमीत राम रहीम : कलंक का बड़ा किरदार

दुनिया भर में प्रसिद्ध डेरा सच्चा सौदा की स्थापना 29 अप्रैल, 1948 को संत मस्ताना बलोचिस्तानी ने रूहानी संस्था के रूप में की थी. वह ‘हिज होलिनैस बेपरवाह मस्तानाजी महाराज’ के रूप में प्रसिद्ध हुए. इस डेरे का मुख्य मकसद था लोगों को धार्मिक शिक्षा देना. 18 अप्रैल, 1960 को मस्तानाजी के प्राण त्यागने के बाद 41 साल के शाह सतनाम सिंहजी को इस डेरे का मुखिया बनाया गया.

23 सितंबर, 1990 को महज 23 साल की उम्र में गुरमीत सिंह नाम के नौजवान ने डेरा की गद्दी संभाली. उस समय शाह सतनाम सिंहजी ने उन्हें नया नाम दिया था बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह. बाद में उन्होंने इस नाम के साथ ‘इंसां’ शब्द जोड़ लिया.

इस डेरे की पहले से ही काफी मान्यता थी. हरियाणा के शहर सिरसा में इस का मुख्यालय था, जहां प्रवचन सुनने के लिए हजारों अनुयायी आते थे. लेकिन गुरमीत राम रहीम सिंह के प्रमुख बनने के बाद डेरे की लोकप्रियता में जबरदस्त इजाफा हुआ. हिंदुस्तान में 46 जगहों पर इस के आश्रम स्थापित होने के अलावा अमेरिका, कनाडा, यूएई, आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में भी इस डेरे की शाखाएं खुल गईं.

डेरा प्रबंधकों का दावा था कि सच्चा सौदा के अनुयायियों की संख्या 6 करोड़ तक पहुंच गई थी. जो भी था, बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह को उन के अनुयायी भगवान का अवतार मानने लगे थे. सन 2015 में जारी सर्वाधिक शक्तिशाली भारतीयों की सूची में बाबा का नाम 96वें नंबर पर था.

लेकिन इस लोकप्रिय कथित ‘भगवान’ के खिलाफ डेरे की 2 साध्वियों की शिकायत पर दुष्कर्म के 2 मुकदमे दर्ज हो गए. इन मुकदमों की सुनवाई पंचकूला की सीबीआई अदालत में हो रही थी. 25 अगस्त, 2017 को अदालत में फैसला होना था कि दुष्कर्म के इन मामलों में बाबा गुरमीत राम रहीम इंसां दोषी हैं या नहीं?

अभी तक इन मुकदमों की सुनवाई वीडियो कौन्फ्रैंसिंग के जरिए हो रही थी, लेकिन 25 अगस्त को बाबा को अदालत में हाजिर होना जरूरी था. बाबा को पंचकूला आना था तो उन के अनुयायी भी पंचकूला आ सकते थे. बाबा के बरी होने पर उन के अनुयायियों से कोई खतरा नहीं था, लेकिन अगर कहीं अदालत ने बाबा को दोषी ठहरा दिया तो स्थिति तनावपूर्ण हो सकती थी. इस के लिए पुलिस का चौकस रहना जरूरी था.

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असमंजस में पुलिस

इस तरह की स्थिति से बचने के लिए पुलिस ने इलाके के असलहाधारकों को अपने हथियार थाने में जमा कराने के आदेश दे दिए. इस के बाद भी अगर किसी तरह का हंगामा होता है तो पुलिस ने उस से भी निपटने की व्यवस्था कर ली थी. हरियाणा के डीजीपी बलजीत सिंह संधू ने 20 अगस्त को ही कह दिया था कि रामपाल के मामले में बिगड़े हालात से पुलिस सबक ले चुकी है.

इसलिए इस बार स्थिति बिगड़ने नहीं दी जाएगी. अगर जरूरत पड़ी तो स्थिति से निपटने के लिए सेना भी बुलाई जा सकती है. इस बीच सिरसा स्थित डेरा के मुख्यालय पर डेरा प्रेमी इकट्ठे होने लगे थे, जिन की संख्या अब तक 20 हजार को पार कर चुकी थी. लेकिन यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी.

अब समस्या यह भी थी कि बाबा को सिरसा से पंचकूला किस रास्ते से ले जाया जाए. दरअसल, बाबा पर चल रहे मुकदमों में केवल दुष्कर्म वाले मुकदमों का फैसला आने वाला था. जबकि बाबा पर अन्य कई मुकदमे चल रहे हैं, जिन में 2 हत्या के भी हैं.

ये दोनों मुकदमे पत्रकार रामचंदर छत्रपति और डेरा प्रबंधन समिति के सदस्य रणजीत सिंह की हत्या के हैं. फिलहाल तय हुआ कि बाबा को सड़क मार्ग से न ला कर हवाई मार्ग से लाया जाए. इस के लिए हेलीकौप्टर की व्यवस्था तो कर ही ली गई, पंचकूला में सेक्टर-5 के परेड ग्राउंड को हेलीपैड के रूप में उपयोग करने की व्यवस्था की जाने लगी.

उधर पंचकूला में भी बाबा समर्थकों की भीड़ जुटने लगी थी. पहले यह संख्या सैकड़ों में थी. इस के बाद हजारों में हुई और फिर देखतेदेखते लाखों में पहुंच गई. इस भीड़ ने पंचकूला के ज्यादातर हिस्सों पर अपना कब्जा कर लिया था. पुलिस इन पर पैनी नजर रखे हुए थी.

पंचकूला और चंडीगढ़ में अस्थाई जेलों की व्यवस्था कर के इन लोगों की तलाशी भी ली जा रही थी. लेकिन इन लोगों से संदिग्ध जैसी कोई चीज बरामद नहीं हुई थी. इन लोगों का कहना था कि ये डेराप्रेमी हैं और अपने गुरु की एक झलक पाने के लिए यहां आए हैं. हालांकि स्थिति को देखते हुए ट्राइसिटी (मोहाली-चंडीगढ़-पंचकूला) के सभी शिक्षण संस्थान 3 दिनों के लिए बंद कर दिए गए थे.

शहर में बाबा समर्थक

पंचकूला पुलिस को लगता था कि जो भी डेरा समर्थक यहां इकट्ठा हो रहे हैं, अगर ये कोई हंगामा करते हैं तो इन्हें काबू कर लिया जाएगा. लेकिन लाखों की भीड़ देख कर पुलिस को यह असंभव सा लगने लगा. तब सेना की मदद मांगते हुए 3 दिनों के लिए वहां मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई. आखिर 25 अगस्त, 2017 का वह दिन आ गया, जब बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह ‘इंसां’ को आ कर पंचकूला की सीबीआई अदालत के विशेष जज जगदीप सिंह लोहान के सम्मुख पेश होना था.

पहले चर्चा थी कि बाबा हेलीकौप्टर से आएंगे, लेकिन बाद में कहा गया कि 100 से ज्यादा गाडि़यों के काफिले के साथ वह सड़क मार्ग से पंचकूला पहुंचेंगे.

सुबह 8 बजे बाबा का यह काफिला सिरसा से पंचकूला के लिए चल पड़ा. रास्ते में जगहजगह सड़क के दोनों ओर उन की एक झलक पाने के लिए उन के अनुयायी हाथ जोड़े खड़े थे.

जबकि किसी को पता नहीं था कि बाबा किस गाड़ी में हैं. काफिले में काले रंग की 4 ऐसी गाडि़यां थीं, जिन के शीशे गहरे काले रंग के थे. बिना नंबर की ये चारों गाडि़यां हूबहू एक जैसी थीं. लोगों का अनुमान था कि इन्हीं लग्जरी गाडि़यों में से किसी एक में बाबा हैं.

उम्मीद थी कि यह काफिला दोपहर एक बजे तक पंचकूला पहुंच जाएगा. लेकिन कैथल में मौजूद बाबा के अनुयायियों ने गाड़ी के आगे लेट कर काफिले को आगे बढ़ने से रोक लिया. करीब घंटे भर की जद्दोजहद के बाद किसी तरह यह काफिला वहां से आगे बढ़ पाया.

2 बजे के बाद यह काफिला पंचकूला की सीमा में घुसा तो अन्य तमाम वाहनों को रोक कर केवल उन काले रंग की चारों कारों को ही आगे जाने दिया गया. क्योंकि उन्हीं चारों कारों में से एक में बाबा थे. अदालत के गेट पर पहुंच कर उन में से भी 2 कारों को रोक लिया गया. अब केवल उन 2 कारों को ही कोर्ट परिसर में दाखिल होने दिया गया, जिन में से एक में बाबा थे और दूसरी में उन की जैड प्लस सिक्योरिटी.

ठीक ढाई बजे अदालत की काररवाई शुरू हुई. वकील और जज साहब पहले से ही अदालत में मौजूद थे. बाबा के नाम की पुकार हुई तो सिरसा से उन के साथ आई उन की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत इंसां भी उन के साथ अदालत के अंदर आ गईं. इस के लिए उन्होंने पहले से ही विशेष अनुमति ले रखी थी.

बाबा को दोषी ठहराया

इस के बाद सक्षम जज जगदीप सिंह ने अपने फैसले के बारे में बताना शुरू किया, ‘अभियुक्त बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह पर उन की 2 साध्वियों ने दुष्कर्म के जो आरोप लगाए हैं, उस के बारे में सारी काररवाई पूरी करते हुए बहस भी हो चुकी है. इस सारी काररवाई के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि सीबीआई की ओर से अभियोजन पक्ष का हर पहलू, हर दलील और हर प्रमाण मजबूत है.

‘दूसरी ओर बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत किसी भी दलील में ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया, जो किसी भी तरह से इस केस को कमजोर कर रहा हो. लिहाजा अभियुक्त बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह को इस केस में दोषी पाया जाता है, इसलिए उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जाए. इस मामले में सजा 28 अगस्त, 2017 को सुनाई जाएगी. अभियुक्त को उस दिन अदालत में पेश किया जाए.’

पुलिस ने बाबा को हिरासत में लेने की व्यवस्था करते हुए उन की जैड प्लस सिक्योरिटी सुविधा को निरस्त कर दिया. अपने वकीलों और पुलिस से घिरे बाबा कोर्टरूम से बाहर आ गए. जैसे ही बाबा को दोषी ठहराए जाने की खबर समर्थकों तक पहुंची, वे बेकाबू हो गए. जाने कहां से उन के हाथों में लोहे के सरिए और तलवारें आ गईं.

उन्हीं से न केवल पेड़ों की डालें काट कर डंडे बना लिए गए, बल्कि गोलाकार चौराहों को तोड़ कर पत्थरों की व्यवस्था कर ली गई. इस के बाद शुरू हो गए दहशतभरे वहशियाना हमले. थोड़ी ही देर में आगजनी का ऐसा खौफनाक मंजर दिखाई देने लगा, जिसे पंचकूला की धरती ने इस के पहले नहीं देखा था.

मीडियावालों को भी नहीं बख्शा गया. उन पर हमला कर के उन की ओबी वैनों को उलट कर उन में आग लगा दी गई. पुलिस और सेना इस स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही तैयार खड़ी थी. कुछ ही देर में वहां ऐसी स्थिति बन गई कि 2 दर्जन से ज्यादा लोग मारे गए तो 250 से ज्यादा लोग घायल हो गए.

इन में कुछ की हालत काफी गंभीर थी. 5 टीवी चैनलों की ओबी वैनें जलाने के अलावा 100 से अधिक अन्य वाहन जला दिए गए. इस तरह की वारदातों को अंजाम देते हुए तमाम डेरा समर्थक आसपास की कालोनियों के मकानों की दीवारें फांद कर घरों में घुस गए. एक हजार डेराप्रेमियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

इस के तुरंत बाद पंचकूला और आसपास के इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया. आखिर क्या था साध्वियों के साथ दुष्कर्म का वह मामला, जिस में बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह को दोषी ठहराया गया था. इस के लिए हमें 15 साल पीछे जाना होगा, जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे.

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साध्वियों का मामला

24 सितंबर, 2002 को हिंदी में लिखी एक लंबीचौड़ी चिट्ठी पीएमओ में पहुंची, जिसे पढ़ कर हर कोई चौंक उठा था. उस चिट्ठी को यहां हूबहू पेश करना ही ठीक रहेगा.

सेवा में,

प्रधानमंत्री महोदय

  श्री अटल बिहारी वाजपेयी

  विषय: सच्चे सौदे वाले महाराज द्वारा सैकड़ों लड़कियों के साथ किए गए बलात्कार के मामले की जांच के संबंध में

  श्रीमान जी,

  1. मैं पंजाब की रहने वाली एक लड़की हूं. मैं डेरा सच्चा सौदा, सिरसा (हरियाणा) में साध्वी के तौर पर पिछले 5 सालों से सेवा कर रही हूं. मेरे अलावा इस डेरे में और भी सैकड़ों लड़कियां हैं, जो रोजाना 18 घंटे सेवा करती हैं, पर हमारा शारीरिक शोषण होता है. डेरे के महाराज गुरमीत सिंह हम से बलात्कार करते हैं.

मैं बीए पास हूं. मेरे मातापिता उन के अंधभक्त हैं. उन के कहने पर मैं साध्वी बनी. साध्वी बनने के 2 साल बाद महाराज गुरमीत सिंह की एक खास चेली गुरजोत रात 10 बजे मेरे पास आई और कहा कि महाराज ने मुझे अपनी गुफा में बुलाया है. मैं खुश हुई कि महाराज ने मुझे अपनी गुफा में बुलाया है और मैं पहली बार महाराज के पास जा रही हूं.

जब मैं सीढि़यां उतर कर महाराज की गुफा में दाखिल हुई तो देखा कि महाराज बैड पर बैठे हुए हैं. उन के हाथ में टीवी का रिमोट था और वह ब्लू फिल्म देख रहे थे. उन के सिरहाने बिस्तर पर एक रिवौल्वर रखी थी. यह सब देख कर मैं घबरा गई. मैं ने महाराज के इस रूप के बारे में कभी सोचा भी नहीं था.

महाराज ने टीवी बंद कर दिया और मुझे अपने पास बिठा लिया. उन्होंने मुझे पानी पिला कर कहा कि मुझे इसलिए अपने पास बुलाया है, क्योंकि वह मुझे अपने करीब समझते हैं. यह मेरा पहला अनुभव था. महाराज ने मुझे अपनी जकड़ में ले कर कहा कि वह मुझे दिल से प्यार करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वह मेरे साथ प्यार करना चाहते हैं. मैं उन की चेली बनने के लिए अपना तनमनधन उन्हें सौंप चुकी हूं और उन्होंने मेरी यह भेंट स्वीकार कर ली है.

जब मैं ने इस पर ऐतराज किया तो उन्होंने कहा कि इस में कोई शक नहीं कि वह रब हैं, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि श्रीकृष्ण भी भगवान थे और उन के पास तमाम गोपियां थीं, जिन के साथ वह रासलीला रचाते थे. फिर भी लोग उन्हें भगवान मानते हैं, उन्हें कोई गलत नहीं कहता. इस में कोई हैरान होने वाली बात नहीं है.

  1. मैं इस रिवौल्वर से तुम्हें मार सकता हूं और तुम्हारी लाश भी यहीं दफन कर सकता हूं. तुम्हारे परिवार वाले मेरे पक्के भक्त हैं और उन्हें मुझ पर अंधा विश्वास है. मुझे यह अच्छी तरह पता है कि तुम्हारे परिवार वाले कभी भी मेरे खिलाफ नहीं जा सकते.
  2. सरकारों पर भी मेरा अच्छा असर है. हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री व कई केंद्रीय मंत्री मेरे यहां माथा टेकने आते हैं. वे मेरे खिलाफ कोई काररवाई नहीं कर सकते. मैं तुम्हारे परिवार वालों को नौकरियों से निकलवा सकता हूं. अपने सेवादारों से उन्हें कहीं मरवाखपवा भी सकता हूं.

हम उन की हत्या का कोई सबूत भी नहीं छोडें़गे. तुम्हें तो पता ही है कि हम ने पहले भी डेरे के मैनेजर फकीरचंद को गुंडों से मरवाया है. आज तक उस के कत्ल का कोई सुराग नहीं मिला है. डेरे की रोज 1 करोड़ रुपए की आमदनी है. हम नेता, पुलिस और यहां तक कि जज को भी खरीद सकते हैं.

  1. इतना सब कहने के बाद महाराज ने मेरे साथ जबरदस्ती की. महाराज पिछले 3 सालों से यह सब करते आ रहे हैं. हर 25-30 दिन बाद मेरी बारी आती है. मुझे यह भी पता चला है कि मुझ से पहले भी महाराज ने अपने पास जिन लड़कियों को बुलवाया है, उन के साथ भी वह यही सब करते आए हैं.

उन में से बहुत सारी लड़कियों की उम्र 35-40 साल है और वे शादी की उम्र पार कर चुकी हैं. उन के पास इस हाल में रहने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है. इन में से कई लड़कियां काफी पढ़ीलिखी हैं, जिन के पास बीए, एमए, बीएड की डिग्रिया हैं. पर वे डेरे में नर्क भोग रही हैं, क्योंकि उन के परिवार वालों को महाराज पर अंधी श्रद्धा है.

  1. हम सफेद कपड़े पहन कर और सिर पर सफेद पटका बांध कर रहती हैं. मर्दों की तरफ देख भी नहीं सकतीं और महाराज के आदेश के मुताबिक उन से 8-10 फुट की दूरी से ही बात कर सकती हैं. हम देखने वालों को देवियां लगती हैं, पर हम वेश्याओं की जिंदगी जी रही हैं.

मैं ने कई बार इस बारे में अपने घर वालों को बताने की कोशिश कि डेरे में सब कुछ अच्छा नहीं है. पर मेरे परिवार वालों ने मुझे डांटते हुए यही समझाया कि डेरे से अच्छी जगह कोई नहीं है, क्योंकि हम महाराज की संगत में हैं. उन्होंने कहा कि मैं ने डेरे के बारे में अपने मन में गलत सोच पैदा कर ली है. घर वालों ने मुझे सद्गुरु का नाम जपने को कहा.

  1. मैं यहां मजबूर हूं कि मुझे महाराज की हर बात माननी पड़ती है. महाराज के हर हुक्म का पालन करना पड़ता है. यहां किसी लड़की को दूसरी लड़की से बात करने की इजाजत नहीं है. महाराज के आदेश के मुताबिक कोई लड़की टेलीफोन पर भी अपने घर वालों से बात नहीं कर सकती. अगर कोई लड़की डेरे की असलियत के बारे में किसी से कुछ कहती है तो उसे महाराज के आदेश के मुताबिक सजा दी जाती है.

कुछ दिनों पहले बठिंडा की एक लड़की ने महाराज की करतूतों के बारे में कुछ कह दिया था. तब अन्य चेलियों ने उस की काफी पिटाई की थी, जिस से उस की रीढ़ की हड्डी में चोट आ गई थी. हड्डी में फ्रैक्चर होने की वजह से वह बिस्तर पर पड़ गई. इस के बाद उस के पिता ने डेरे की सेवादारी छोड़ दी और बेटी को ले कर अपने घर चले गए. वह महाराज और बदनामी के डर से किसी को कुछ बता भी नहीं पा रहे हैं.

  1. इसी तरह कुरुक्षेत्र की भी एक लड़की डेरा छोड़ कर अपने घर चली गई. जब उस ने सारी कहानी अपने घर वालों को बताई तो उस के भाई ने भी डेरा छोड़ दिया. वह भी यहां सेवादार के रूप में काम करता था. संगरूर की एक लड़की डेरा छोड़ कर अपने घर गई तो डेरे के हथियारबंद सेवादार/गुंडे उस के घर गए. दरवाजा अंदर से बंद कर के उन्होंने लड़की को जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि कोई बात बाहर नहीं जानी चाहिए.

इसी तरह मानसा, फिरोजपुर, पटियाला और लुधियाना की भी कई लड़कियां हैं, जो डेरे के बारे में कुछ भी कहने से डर रही हैं. वे डेरा छोड़ चुकी हैं, पर महाराज के सेवादारों की धमकी के डर से वे कुछ कह नहीं पा रही हैं. इसी तरह सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, हनुमानगढ़ और मेरठ जिलों की भी लड़कियां डेरे के गुंडों के डर से अपने साथ कई ज्यादतियों के बारे में कुछ कह नहीं पा रही हैं.

अगर मैं भी अपना नामपता बता दूं तो मेरी भी जान को खतरा है. मुझे और मेरे परिवार वालों को खत्म कर दिया जाएगा. लेकिन मैं आम लोगों को सच्चाई बताना चाहती हूं, क्योंकि अब मुझ से बरदाश्त नहीं हो रहा है. पर मुझे अपनी जान का खतरा है. अगर प्रैस या किसी और एजेंसी के जरिए जांच कराई जाए तो डेरे में रह रही 40-50 लड़कियां अपनी सच्चाई बताने को सामने आ जाएंगी.

हमारा मैडिकल भी करवाया जा सकता है कि हम कुंवारी चेलियां हैं या नहीं? इस की जांच की जाए कि हमारा कुंवारापन किस ने भंग किया है तो यह बात सामने आएगी कि महाराज राम रहीम सिंह डेरा सच्चा सौदा ने हमारी जिंदगियां बरबाद की हैं.

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 एक दुखी अबला

मामले की सीबीआई जांच

यह चिट्ठी तत्कालीन प्रधानमंत्री ने पढ़ी. इस के बाद कुछ चैनलों से निकलते हुए इस की जांच सीबीआई को सौंप दी गई. जांच कर के दिसंबर, 2002 में सीबीआई ने राम रहीम के खिलाफ भादंवि की धाराओं 376, 506 एवं 509 के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर के अपनी काररवाई शुरू कर दी.

इस के बाद डेरे की ओर से दिसंबर, 2003 में इस काररवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई. इस से अक्टूबर, 2004 तक मामले में स्टे लग गया. स्टे खत्म होते ही जांच में तेजी आ गई. सीबीआई ने 2 ऐसी साध्वियों को ढूंढ निकाला, जो बाबा के खिलाफ बयान देने को तैयार थीं. सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट में उन के बयान दर्ज करवा दिए गए.

आखिर अभियोजन पक्ष के 15 गवाहों की सूची के साथ इस केस की चार्जशीट 27 अक्तूबर, 2007 को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश कर दी गई. बचावपक्ष की ओर से 37 गवाहों की सूची अदालत को सौंपी गई. पहले यह केस अंबाला की सीबीआई कोर्ट में चला, बाद में इस की सुनवाई पंचकूला स्थित सीबीआई कोर्ट में होने लगी.

25 जुलाई, 2017 को कोर्ट ने रोजाना सुनवाई के आदेश कर दिए. 17 अगस्त को बहस होने के बाद फैसले की तारीख 25 अगस्त, 2017 तय कर दी गई. अभी तक ज्यादातर सुनवाई वीडियो कौन्फ्रैंसिंग के जरिए हो रही थी, लेकिन 25 अगस्त को बाबा का अदालत में हाजिर होना जरूरी था.

25 अगस्त को तामझाम के साथ बाबा अदालत पहुंचे. लेकिन जैसे ही उन्हें दोषी करार दिया गया, दंगे भड़क उठे. इस बीच बाबा को एक हेलीकौप्टर से रोहतक की सुनारिया जेल ले जाया गया. उन की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत इंसां भी उन के साथ जेल तक गईं. रात में वह सफेद रंग की कार एचआर26बी एस5426 से कुछ लोगों के साथ सिरसा लौट गईं.

इस बीच पंचकूला में हुए दंगों ने जैसे पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया. बस सेवा एवं रेल सेवा चरमरा गई. अनेक जगहों पर कर्फ्यू लगा दिया गया. उपद्रव में मरने वालों की संख्या 38 तक पहुंच गई. पंचकूला के डीसीपी अशोक कुमार के अलावा कोर्ट में बाबा का बैग उठा कर चलने वाले डिप्टी एडवोकेट जनरल गुरदास सिंह सलवारा को निलंबित कर दिया गया.

डेरा सच्चा सौदा पूरी तरह संदेह के दायरे में आ गया था. अटकलों का बाजार पूरी तरह गरम था. सब से बड़ी अटकल यह थी कि पंचकूला पहुंचे अनुयायियों को 1 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से वहां बुलाया गया था. भीड़ अधिक हो गई, जिस से उस में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग घुस गए. कहा जाता है कि उन्हें 2 लाख रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से दिए गए. इन का काम बाबा को वहां से भगाना था.

बहरहाल, 28 अगस्त, 2017 भी आ गई, जिस दिन बाबा को सजा सुनाई जानी थी. सुरक्षा की दृष्टि से सुनारिया जेल के भीतर ही अस्थाई तौर पर अदालत बनाई गई. सजा सुनाए जाने के बारे में बाबा की ओर से कहा गया कि वह 50 वर्ष के हो चुके हैं और उन्हें हाइपरटेंशन, एक्यूट डायबिटीज व सघन कमर दर्द की शिकायत है. उन के साथ उन की वृद्ध मां भी रहती हैं, जो बुढ़ापे की कई बीमारियों से ग्रसित हैं. बाबा ने लोकसेवा में कई विश्व रिकौर्ड बनाए हैं. उन की कोशिश से तमाम स्कूल कालेज चल रहे हैं.

इन तथ्यों के आधार पर बाबा की ओर से दरख्वास्त की गई कि अदालत उन के मामले में नरमी बरतते हुए उन्हें कम से कम सजा दे. अभियोजन पक्ष की ओर से चंद शब्दों में पहले ही अदालत से अपील कर दी गई थी कि रेयर औफ रेयरेस्ट की श्रेणी में आने वाला यह एक ऐसा केस है, जिस में अभियुक्त ने शराफत, धर्म और महापुरुष का लबादा ओढ़ कर अपराध किया है. यही नहीं, उन्होंने उस अपराध को बारबार दोहराया है.

सजा के मुद्दे पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद विद्वान सीबीआई जज जगदीप सिंह ने अपना जो फैसला सुनाया, वह इस प्रकार था—

अदालत का फैसला

अपने ही आश्रम में अपने आधीन रहने वाली 2 साध्वियों को डराधमका कर उन से दुष्कर्म करने के आरोप में दोषी गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां को अलगअलग 10-10 सालों की कैद बामशक्कत दी जाती है.

पीडि़त युवतियों को हरजाना दिए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि फाइल के निरीक्षण से यह बात सामने आई है कि अभियुक्त अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए बारबार विदेश जाने की अदालत से अनुमति लेता रहा है. तब उसी की याचिका में यह बात भी सामने आती रही है कि फिल्म के निर्माण पर उस का करोड़ों रुपया लगा है, इसलिए विदेश जा कर इस का प्रमोशन करना उस के लिए बहुत जरूरी है. लिहाजा इस से पता चलता है कि उस के पास पैसों की कोई कमी नहीं है. इसलिए यह अदालत दोनों पीडि़ताओं को 15-15 लाख रुपए हरजाना देने का आदेश देती है.

फिलहाल अटकलों के साथसाथ बाबा की ऐसी कारगुजारियां सामने आ रही हैं, जिन से यह बात साफ हो जाती है कि डेरे के भीतर उस ने एक ऐसी सल्तनत बना रखी थी, जिस का सर्वेसर्वा अकेला वही था. देश के कानून का जैसे उसे कोई भय नहीं था.

लेकिन उसी कानून ने उसे राजमहल से जेल की कोठरी तक पहुंचा दिया. अब उस के वकील अदालत के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं.

एक्ट्रेस बिदिशा बेजबरुआ मर्डर केस: शक में गंवाई जान

मुंबई में मौजूद निशीथ झा ने अपनी पत्नी बिदिशा बेजबरुआ को कई बार फोन किया. उस के फोन की घंटी तो बजी, लेकिन वह फोन नहीं उठा रही थी. वह परेशान हो गए कि पता नहीं बिदिशा फोन क्यों नहीं उठा रही?

बिदिशा गुड़गांव के सेक्टर-43 स्थित सुशांत लोक में रहती थी. वह असम की मशहूर सिंगर और फिल्म अभिनेत्री थी. रणबीर कपूर की फिल्म ‘जग्गा जासूस’ में भी उस ने काम किया था. निशीथ ने 5 जुलाई, 2017 को ही गुड़गांव में यह फ्लैट किराए पर लिया था.

निशीथ ने जिस ब्रोकर के माध्यम से यह फ्लैट किराए पर लिया था, उसे अपना परिचय दे कर फोन कर के कहा, ‘‘मैं इस समय मुंबई में हूं. मेरी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं है. आप उसे किसी अच्छे डाक्टर को दिखा दीजिए.’’

इंसानियत के नाते ब्रोकर सुशांत एस्टेट की नवीं मंजिल स्थित उस फ्लैट पर पहुंच गया, जिसे उस ने कुछ दिनों पहले ही निशीथ को किराए पर दिलवाया था. फ्लैट का दरवाजा अंदर से बंद था. फ्लैटों में रहने वाले लोग वैसे भी अपने दरवाजे बंद ही रखते हैं. ब्रोकर ने घंटी का बटन दबा दिया और वह दरवाजा खुलने का इंतजार करने लगा. दरवाजा नहीं खुला तो उस ने दोबारा घंटी बजाई. इस बार भी किसी ने दरवाजा नहीं खोला.

कई बार घंटी बजाने के बाद भी जब किसी ने दरवाजा नहीं खोला तो ब्रोकर ने निशीथ को फोन कर के दरवाजा न खुलने की बात बता दी. निशीथ ने कहा कि हो न हो बिदिशा की तबीयत ज्यादा खराब हो गई हो और वह दरवाजा खोलने लायक ही न हो. उस ने उस से अनुरोध किया कि वह जल्द से जल्द फ्लैट का दरवाजा तोड़ कर उसे डाक्टर के पास ले जाए.

निशीथ से बात होने के बाद ब्रोकर दरवाजे को जोरों से धक्का मार कर तोड़ने लगा. दरवाजा तोड़ने की आवाज सुन कर पड़ोसी अपनेअपने फ्लैटों से बाहर आ गए. उन में ज्यादातर लोग उस ब्रोकर को जानते थे. उन्होंने ब्रोकर से दरवाजा तोड़ने की वजह पूछी तो उस ने फ्लैट के मालिक निशीथ से हुई बात उन लोगों को बता दी.

हकीकत से अनभिज्ञ थे पड़ोसी

पड़ोसियों को ब्रोकर की बात पर विश्वास नहीं हुआ तो उस ने निशीथ को फोन मिला कर स्पीकर औन कर के पड़ोसियों द्वारा दरवाजा तोड़ने का विरोध करने की बात बता दी. निशीथ ने पड़ोसियों को बताया कि फ्लैट में उस की पत्नी अकेली है और उस की तबीयत बहुत ज्यादा खराब है. उसे अभी डाक्टर के पास ले जाना है.

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पड़ोसियों को पता चला कि निशीथ की पत्नी की ज्यादा तबीयत खराब है तो उन्होंने भी दरवाजा तोड़ने में ब्रोकर की मदद की. थोड़ी कोशिश के बाद दरवाजा टूट गया. लोग अंदर दाखिल हुए तो वहां का नजारा देख कर सभी सन्न रह गए. निशीथ की पत्नी की लाश पंखे से लटक रही थी. ब्रोकर ने फोन द्वारा यह खबर निशीथ और थाना सुशांत लोक पुलिस को दे दी.

सुशांत एस्टेट थाने से कुछ ही दूर स्थित है, इसलिए खबर मिलते ही थानाप्रभारी गौरव, एसआई सतीश, एएसआई अर्जुन आदि के साथ वहां पहुंच गए. पुलिस नौवीं मंजिल स्थित निशीथ के फ्लैट पर पहुंची तो वहां बिदिशा की लाश पंखे से झूलती मिली. थानाप्रभारी ने इस की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को दे दी.

थोड़ी देर में क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम भी मौके पर पहुंच गई. उसी बीच डीसीपी (ईस्ट) दीपक सहारण भी वहां आ गए. मामला एक फिल्म अभिनेत्री की मौत का था, इसलिए वहां फ्लैटों में रहने वाले जिन लोगों को भी जानकारी मिली, वे बिदिशा के फ्लैट पर पहुंच गए.

पुलिस ने लोगों के सहयोग से लाश उतार कर कमरे की तलाशी ली, पर वहां कोई सुसाइड नोट नहीं मिला. पुलिस ने आसपास के फ्लैटों में रहने वाले लोगों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि बिदिशा कुछ दिनों पहले ही वहां रहने आई थी, इसलिए वे इस के बारे में ज्यादा नहीं जानते.

हां, उन्होंने इतना जरूर बताया कि बिदिशा का व्यवहार बहुत अच्छा था. बातचीत से कभी नहीं लगा कि उसे कोई तनाव था. वह जब भी मिलती थी, खुश दिखती थी.

मौके पर वह ब्रोकर भी मौजूद था, जिस ने बिदिशा को यह फ्लैट किराए पर दिलवाया था. पुलिस ने उस से पूछताछ की तो उस ने बताया कि बिदिशा और उस के पति निशीथ से उस की पहली मुलाकात तब हुई थी, जब वे लोग किराए पर फ्लैट लेने आए थे. पुलिस को ब्रोकर से बिदिशा के पति निशीथ का मोबाइल नंबर मिल गया था. थानाप्रभारी ने निशीथ को फोन कर के बिदिशा द्वारा आत्महत्या करने की सूचना दी. उस ने कहा कि इस समय वह मुंबई में है और कल तक गुड़गांव पहुंच जाएगा.

बिदिशा का फोन कमरे में ही था. उस में से पुलिस को उस के मातापिता का नबर मिल गया. पुलिस ने उस के पिता अश्वनी बेजबरुआ को फोन कर के बिदिशा के सुसाइड करने की बात बता दी. वह गुवाहाटी, असम में रहते थे. बेटी की मौत की खबर पा कर अश्वनी और उन की पत्नी रंजीता रोनेबिलखने लगी.

वे दोनों अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ फ्लाइट से सोमवार की रात को दिल्ली आ गए. दिल्ली से टैक्सी ले कर वे गुड़गांव पहुंचे. इस से पहले पुलिस ने मौके की जरूरी काररवाई कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया था.

मृतक अभिनेत्री बिदिशा के पिता अश्वनी ने थानाप्रभारी गौरव कुमार को बताया कि बिदिशा बहुत समझदार लड़की थी. पिछले साल ही निशीथ से उस की शादी हुई थी. शादी के बाद बिदिशा को पता चला कि निशीथ के किसी और लड़की से संबंध हैं.

बिदिशा निशीथ को उस लड़की से मिलने के लिए रोकती थी, पर वह नहीं मानता था. इसी बात को ले कर वह बिदिशा से झगड़ता रहता था. बिदिशा के तनाव की सब से बड़ी वजह यही थी. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि उन की बेटी की मौत का जिम्मेदार निशीथ है. उस के खिलाफ सख्त काररवाई की जानी चाहिए.

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निशीथ के खिलाफ केस दर्ज

मामला हाईप्रोफाइल था, इसलिए थानाप्रभारी ने डीसीपी दीपक सहारण से इस मसले पर बात की. उन्हीं के निर्देश पर थानाप्रभारी ने 18 जुलाई, 2017 को निशीथ के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कर लिया.

अगले दिन निशीथ गुड़गांव पहुंचा तो पुलिस ने उस से पूछताछ की. उस ने बताया कि वह बिदिशा को खुश रखता था. बस कभीकभी छोटेमोटे मतभेद हो जाते थे, जो अकसर हर घर में होते रहते हैं. पर ऐसी कोई बात नहीं थी, जिस से बिदिशा को जान देनी पड़ती. बिदिशा ने ऐसा क्यों किया, यह उस की भी समझ में नहीं आ रहा.

निशीथ भले ही खुद को बेकसूर बता रहा था, लेकिन बिदिशा के पिता ने उसी पर आरोप लगाया था, इसलिए पुलिस ने 18 जुलाई को निशीथ को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उस का मोबाइल फोन और लैपटौप भी कब्जे में ले लिया.

असम की गायिका और अभिनेत्री बिदिशा के सुसाइड का मामला असम में तूल पकड़ने लगा. वहां के लोग पूर्वोत्तर का मामला बता कर तूल देने लगे. इस से कुछ दिनों पहले ही वहां पूर्वोत्तर की एक लड़की से दुष्कर्म हुआ था. तब गुड़गांव पुलिस प्रशासन ने डीजीपी व गृह सचिव के माध्यम से सरकार को प्रस्ताव भिजवाया था कि यहां पूर्वोत्तर के पुलिस अफसरों को तैनात किया जाए. इस प्रस्ताव को अभी सरकार की मंजूरी नहीं मिली है.

अभिनेत्री बिदिशा का मामला जब असम में ज्यादा ही तूल पकड़ने लगा तो वहां के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर से फोन पर बात की. उन्होंने बिदिशा के केस की जांच ठीक से कराने की बात कही. इस के बाद मनोहरलाल खट्टर ने गुड़गांव के पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की.

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद पुलिस गंभीरता से इस मामले की जांच में जुट गई. पुलिस ने निशीथ के फोन की काल डिटेल्स निकाल कर जांच की. इस जांच में ऐसे 2 फोन नंबर सामने आए, जिन पर निशीथ की काफी देर तक बातें होती थीं. एक फोन नंबर तो ऐसा था, जिस पर उस की शादी से पहले भी बातें होती रही थीं.

पुलिस ने निशीथ को एक दिन के रिमांड पर ले कर इस बारे में पूछताछ की तो उस ने स्वीकार किया कि शादी से पहले उस की एक लड़की से दोस्ती थी, जो अब भी है. उसी लड़की को ले कर बिदिशा उस पर शक करती थी. आगे की कहानी जानने से पहले आइए थोड़ा बिदिशा के बारे में जान लें कि वह चाय बागानों के इलाके से निकल कर बौलीवुड तक कैसे पहुंची?

27 साल की बिदिशा मूलरूप से गुवाहाटी के रहने वाले अश्वनी कुमार की बेटी थी. उन का एक बेटा था कौशिक बेजबरुआ, जो पुणे की किसी कंपनी में नौकरी कर रहा है.

बिदिशा बेहद खूबसूरत थी. उस ने गुवाहाटी के निकोल्स हाईस्कूल से सन 2007 में हायर सैकेंडरी की परीक्षा अच्छे नंबरों से पास की. पढ़ाई के साथसाथ वह स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती थी. उस की आवाज भी बड़ी मधुर थी, इसलिए वह गाने भी गाती थी.

इस के अलावा टीवी पर डांस देखतेदेखते बिदिशा ने डांस भी सीख लिया था. बिहू डांस की तो वह इतनी शौकीन थी कि स्कूल के अलावा वह सामाजिक संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भी बिहू डांस करने जाती थी. उस के डांस और गानों पर दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठते थे. फिल्म अभिनेत्री सोनम कपूर और कोंकणा सेन शर्मा की वह बड़ी फैन थी.

स्कूली पढ़ाई पूरी होने के बाद बिदिशा ने गुवाहाटी के कौटन कालेज से इंगलिश (लिटरेचर) से ग्रैजुएशन किया. कालेज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी वह बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती रही. अभ्यास करतेकरते वह एक अच्छी सिंगर बन गई.

उन्हीं दिनों उस की मुलाकात मशहूर पत्रकार अर्नब गोस्वामी से हुई. वह उन से इतनी प्रभावित हुई कि उस ने पत्रकार बनने का निर्णय ले लिया. ग्रैजुएशन करने के बाद उस ने दिल्ली के इंडियन इंस्टीट्यूट औफ मास कम्युनिकेशन से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया.

बिदिशा ने तमाम नाटकों में अभिनय किया था, जिन में उस की अलगअलग भूमिकाओं की खूब सराहना हुई थी. दर्शकों से मिलने वाले इस प्यार ने उसे नया फैसला लेने पर मजबूर कर दिया. कहां तो उस ने पत्रकार बनने के लिए कोर्स किया था, लेकिन अब वह कुछ और ही सोचने लगी थी. इसी के चलते पत्रकार बनने के बजाय उस ने अभिनय के क्षेत्र को चुन लिया. सुंदर तो वह थी ही, साथ ही उस की फिगर भी बहुत अच्छी थी. कभीकभी वह अपनी सुंदरता और फिगर की तुलना बौलीवुड की नई अभिनेत्रियों से करती तो खुद को उन से बेहतर पाती.

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फलस्वरूप गायिका के साथसाथ उस ने अभिनेत्री बनने के सपने संजोने शुरू कर दिए. लेकिन उस के सामने समस्या यह थी कि फिल्म इंडस्ट्री में उस का कोई गौडफादर नहीं था, जो फिल्म इडस्ट्री में उस की एंट्री करा देता. फिर भी उस ने हिम्मत नहीं हारी और मुंबई चली गई.

फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री करने के लिए हजारों लड़कियां मुंबई में रह कर स्ट्रगल करती रहती हैं. विभिन्न डायरेक्टरों और प्रोड्यूसरों के पास चक्कर लगातेलगाते उन के सैंडल, जूते घिस जाते हैं. इन में तमाम लड़कियां ऐसी भी होती हैं, जो फिल्मों में रोल पाने के लिए हर तरह का समझौता करने को तैयार रहती हैं. मुंबई पहुंच कर बिदिशा भी स्ट्रगल करने वाली लड़कियों में शामिल हो गई.

मुंबई में बिदिशा की मुलाकात निशीथ झा से हुई. निशीथ गुजरात का रहने वाला था. पहले वह ओएनजीसी में अच्छे पद पर नौकरी करता था. नौकरी छोड़ कर वह मुंबई में वह बिजनैस करने लगा था. अच्छे रसूख वाले निशीथ के संबंध फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोगों से थे.

निशीथ की कोशिश से बिदिशा को रणबीर कपूर की फिल्म ‘जग्गा जासूस’ में अभिनय करने का मौका मिल गया. इस फिल्म में बिदिशा ने बिहू डांस किया था. फिल्म में काम मिलने से बिदिशा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उस की निशीथ से अच्छी दोस्ती हो गई. धीरेधीरे उन की यह दोस्ती प्यार में बदल गई. घर वालों की मरजी से सन 2016 में दोनों की शादी हो गई. निशीथ का मुंबई में ही औफिस था. उस में काम करने वाली एक लड़की से उस की गहरी दोस्ती थी. घर पहुंच कर भी वह उस से बातें करता रहता था. उस के अलावा वह और भी कई लड़कियों से फोन पर बातें करता था.

कुछ दिनों तक तो बिदिशा यह सब देखती रही, पर बाद में उस ने पति को टोकना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं, उस ने अपने स्तर से पता लगा लिया कि निशीथ के एक और लड़की से गहरे संबंध हैं. बिदिशा ने इस बारे में उस से बात की तो उस ने उसे समझाते हुए कहा कि जिस लड़की को ले कर वह उस पर शक कर रही है, उस से केवल उस की दोस्ती है. इस से अलावा उस से कोई संबंध नहीं है.

पति पर शक

पर बिदिशा के दिमाग में शक बैठ गया था. शक ऐसी बीमारी है, जो मतभेद होने पर और बढ़ती है. बिदिशा क्या कोई भी युवती इस बात को हरगिज स्वीकार नहीं कर सकती कि उस का पति किसी और महिला से संबंध रखे. जब पति ने उस की बात को गंभीरता से नहीं लिया तो उस ने पति की शिकायत अपनी मां से कर दी.

मांबाप ने बेटी की गृहस्थी में इसलिए दखल नहीं दिया कि अभी कुछ दिन पहले तो दोनों की शादी हुई है. दखल देने से कहीं उन के संबंधों में दरार न आ जाए, इसलिए पिता अश्वनी ने बेटी को ही समझाया और निशीथ से भी बात की.

बिदिशा की मायके वालों से शिकायत करने की बात निशीथ को अच्छी नहीं लगी. इस का नतीजा यह निकला कि बिदिशा और निशीथ के बीच विवाद बढ़ गया. चूंकि बिदिशा अपने कैरियर के लिए चिंतित रहती थी, इसलिए वह पारिवारिक तनाव में उलझना नहीं चाहती थी. पर उस के दिमाग में पति को ले कर ऐसा शक बैठ गया था, जो निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था.

निशीथ उसे यकीन दिलाता रहता था कि उस के किसी भी लड़की से गलत संबंध नहीं हैं. पर बिदिशा उस की बात मानने को तैयार नहीं थी. घर में रोजरोज कलह न हो, इस के लिए निशीथ ने 5 जुलाई, 2017 को गुड़गांव के सुशांत लोक में एक फ्लैट किराए पर लिया और बिदिशा से कहा कि जब तक उस का मन करे वह यहां रहे और जब मन करे मुंबई आ जाए.

इतना ही नहीं, निशीथ ने यह भी कहा कि वह किसी और हिंदी फिल्म में उस के लिए काम तलाश रहा है. पति की बात मान कर बिदिशा गुड़गांव आ गई. गुड़गांव वाले फ्लैट में बिदिशा अकेली रहती थी. मन होने पर जब वह पति को फोन करती, उस का नंबर अकसर व्यस्त मिलता.

इस पर बिदिशा का शक बढ़ता गया और वह परेशान रहने लगी. जब कभी वह मांबाप को फोन कर के मन की बात बताती तो वे उसे समझाते हुए उस का डिप्रेशन दूर करने की कोशिश करते. धीरेधीरे वह इस तरह हतोत्साहित हो गई कि उसे यह जीवन नीरस लगने लगा.

बिदिशा ने पति को फोन किया तो बातचीत में उसे लगा कि बिदिशा की तबीयत ठीक नहीं है. उस ने उस से अपना खयाल रखने को कहा. उस दिन बिदिशा इतनी हताश हो गई कि गले में फंदा लगा कर पंखे से लटक गई, जिस से उस की मौत हो गई. शाम को निशीथ ने बिदिशा को फोन किया तो उस का फोन नहीं उठा.

गुड़गांव में उस का कोई जानकार तो था नहीं, जिसे वह फ्लैट में जा कर देखने को कहता. तब उसे उस ब्रोकर की याद आई, जिस के माध्यम से उस ने फ्लैट किराए पर लिया था. उसी ब्रोकर से उस ने पत्नी की तबीयत खराब होने की बात कह कर फ्लैट पर जाने को कहा.

जब ब्रोकर उस के फ्लैट पर पहुंचा तो पता चला कि मशहूर गायिका और अभिनेत्री बिदिशा बेजबरुआ की जीवनलीला समाप्त हो चुकी है. पुलिस ने निशीथ से पूछताछ कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया. केस की विवेचना एएसआई अर्जुन कर रहे हैं.

– कथा पुलिस सूत्रों एवं जनचर्चा पर आधारित

बिकिनी में नजर आईं शाहरुख की बेटी सुहाना

बौलीवुड स्‍टार किड्स का अपना अलग ही स्‍टारडम हैं. शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान लगातार खबरों का हिस्‍सा बनी रहती हैं. सुहाना का ड्रेस सेंस और उनका लुक अक्‍सर सोशल मीडिया पर वायरल होता रहता है. गर्मियां दस्‍तक दे चुकी हैं और सेलिब्रेटी के लुक्‍स ट्रेंड करना स्‍टार्ट हो चुके हैं. ऐसे एक बार फिर से सुहाना ने एंट्री ली है और उनका समर हौट लुक इंटरनेट पर सनसनी मचा रहा है.

बिकिनी पहनकर पूल साइड में दोस्‍तों के साथ एंजौय करती सुहाना की तस्‍वीरों को फैंस पसंद कर रहे हैं. स्‍टार किड्स में टौप लिस्‍ट में शामिल शाहरुख-गौरी की बेटी सुहाना के ग्‍लैमरस अंदाज उनके डेब्‍यू से पहले ही खबरों का हिस्‍सा बन रहे हैं.

इंस्‍टाग्राम पर फ्यूचर बौलीवुड के नाम से बने एक अकाउंट ने सुहाना की ये फोटो शेयर की हैं. नियोन कलर की बिकिनी में बिना मेकअप सुहाना का लुक काफी फ्रेश लग रहा है.

Suhana Khan #suhanakhan #fbsuhanakhan

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मुंबई के धीरूभाई अंबानी स्कूल में 10वीं करने के बाद सुहाना आगे की पढ़ाई लंदन से कर रही हैं. सोशल मीडिया पर सुहाना काफी एक्‍ट‍िव रहती हैं. वहीं उनकी मां गौरी खान भी सुहाना की फोटोज फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं. अपने पिता की तरह सुहाना भी बौलीवुड में करियर बनाना चाहती हैं. वह अपने स्कूल एक प्ले में अपनी एक्टिंग की कला दिखा चुकी हैं. उनके इस प्‍ले को सीनियर एक्‍ट्रेस शबाना आजमी ने भी काफी पसंद किया था.

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इतना ही नहीं सुहाना इतनी छोटी सी उम्र में अपनी ड्रेसेज से लेकर एक्‍सेसरीज तक की वजह से चर्चा में रहती हैं. सुहाना की मौम की पार्टी की गोल्‍डन ड्रेस हो या फिर पापा शाहरुख के बर्थडे पर पहना व्‍हाइट टौप, सुहाना के कपड़ों का प्राइज टैग भी काफी चर्चा में रहता है. फिलहाल सुहाना अपने दोस्‍तों के साथ समर का वेलेकम करती नजर आ रही हैं.

VIDEO : मौडर्न मौसैक नेल आर्ट

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