हाय मेरी बैटरी

कभी होस्टल जा रहे बेटे को मां पूछती थी, ‘बेटा, सभी कपड़े रख लिए हैं न, घी का कनस्तर, अचार का डब्बा ठीक से रख लेना और जो सूखे मेवे रखे हैं, उन्हें बराबर खाते रहना. चड्डीबनियान, तौलिया वगैरा मत भूल जाना.’

फिर सासबहू के सीरियल का दौर आया. मां की चिंता में शेविंग किट, ब्लैड, डिओ वगैरा आ गए. ‘एक से क्या होगा बेटा, 2 रख ले.’

‘मां, इस की एक बूंद ही काफी है एक बार की शेविंग में,’ बेटा कौन्फिडैंटली जवाब देता. बेटे की होशियारी पर मां मन ही मन बलैयां उतार लेतीं.

अब लेटैस्ट मां पूछ रही है, ‘बेटा, बैटरी फुल चार्ज है न. पावरबैंक जरूर रख लेना. ट्रेन में बैठते ही चार्जर पावर प्लग में लगा देना, नहीं तो कोई और ठूंस कर बैठ जाएगा. किसी से ज्यादा घुलनामिलना मत, कानों में हैडफोन लगा कर पूरा चौकन्ना रह कर आराम से गाने सुनते हुए जाना. बेटा संस्कार भले ही घर भूल कर चला जाए, लेकिन हैडफोन बिलकुल नहीं भूल सकता.

अकसर मांबाप कालेज जाते बेटे से यह पूछना भूल जाते हैं कि हैलमैट क्यों नहीं लगाया? लाइसैंस, नो पौल्यूशन कार्ड, इंश्योरैंस पेपर, आरसी वगैरा हैं साथ में?

लेकिन जब से हाथ में स्मार्टफोन आया है, बेटा काफी समझदार हो गया है. बस, बेटे का एक ही दुख है, बैटरी, बैटरी ज्यादा नहीं चलती. बीच मझदार में दम तोड़ देती है. वैसे बेटे के इस विराट दुख में सब का दुख समाहित है, हाय, बैटरी ज्यादा नहीं चलती.

देखा जाए, तो एक स्मार्टफोनधारी की मनोस्थिति उस मोर की तरह होती है जो अपने सुनहरे, सजीले पंखों को देख कर नाचता तो है, लेकिन पैरों की तरफ देख कर मन ही मन रोता है. उसी तरह स्मार्टफोन से जो खुशी मिलती है, थ्रिल जगता है, टच करते हुए गुदगुदी होती है, लेकिन बैटरी को देख कर वह काफूर हो जाती है. हाय, कितनी क्षणभंगुर है बैटरी लंबी है स्मार्टफोन में देखी जाने वाली चीजों की फेहरिस्त.

बैटरी पीडि़त के मन से अपनेआप ही काव्यनुमा आह फूट पड़ती है. परीक्षा के पर्सेंट से भी मूल्यवान बैटरी के पर्सेंट हो गए हैं. उस पर आदमी लगातार टकटकी लगाए रहता है. वह छीज रही है, दिल बैठ रहा है. एक अदद बैटरी के आगे इंसान खुद को कितना असहाय, निरुपाय, पराजित सा फील करता है.

आज हर हाथ को बतौर फोन स्मार्ट होने का भ्रम है. एक आंख इसे देख कर खुश होती है तो दूसरी बैटरी को घूर कर कुढ़ती है. हर्ष और विषाद मिश्रित ऐसे चेहरे देख कर लगता है, देश की सब से बड़ी समस्याएं आतंक, घुसपैठ, सीमा विवाद, लोकतंत्र, कट्टरता, बेरोजगारी, सरकार, भ्रष्टाचार, नोटबंदी, जीएसटी वगैरा नहीं, बल्कि एक अदद बैटरी है. बाकी समस्याएं तो क्षणिक आवेशभर की हैं, परमानैंट प्रौब्लम तो बैटरी की ही है.

बैटरी हमारी चिंता के केंद्रीय भाव में आ बैठी है. बैटरी चले, तो लाइफ चलती सी लगे. 2 लोग आपस में बातचीत भी करते हैं, तो बैटरी दन से बीच में  कूद पड़ती है. यार, इस बैटरी का कोई समाधान बताओ न. दोपहर भी नहीं पकड़ती?

‘सेम प्रौब्लम हीयर,’ सामने से जवाब आता है, अभी थोड़ी देर पहले 70 प्रतिशत थी, अभी देखा तो 24 प्रतिशत.

कुल वार्त्तालाप में आधे से भी ज्यादा को बैटरी हजम कर जाती है. बैटरी से शुरू हो कर वार्त्ता पावरबैंक पर खत्म हो जाती है.

इंसान आकुल है. कितने व्हाट्सऐप, कितने यूट्यूब, कितने फेसबुक, ट्विटर, वायरल सच, वीडियो जिंदगी में गहरे तक धंसे पड़े हैं, बैटरी बीतने से पहले सब से गुजर जाना है.

वैसे यह भी ताज्जुब की बात है कि आज फोन तो अच्छेखासे स्मार्ट हो रहे हैं और लगातार होते ही जा रहे हैं. सुबह जो फीचर थे, शाम तक कई फटीचर से हो जाते हैं. बावजूद बैटरी कतई बाबा आदमहव्वा के जमाने सी चल रही है. लगता है इस पर कोई काम ही नहीं हो रहा है. गोया कि सारा जोर तन साफ करने पर है, मन का मैल छांटने की फिक्र किसी को नहीं.

ऐसी बैटरी आदमी को दार्शनिक भी बना देती है. बेटा, जो है उसी से संतोष कर. यह  मान ले, बैटरी का कैरेक्टर नेताओं और उन के बयानों की तरह हो गया है. सुबह दिए, दोपहर को मुकरे, शाम तक कह देंगे, कौन सा बयान?

बैटरी सुबह चार्ज, दोपहर आतेआते पावरबैंक शरणागत. पावरबैंक भी कोई खास मदद नहीं कर पा रहे हैं. समय किस के पास है इत्ता. सबकुछ फास्ट चाहने वाली युवापीढ़ी के लिए यह भी धीमीगति के समाचारों की तरह है. यही हाल रहा, तो फ्यूचर में बैंकों से ज्यादा पावरबैंक खोलने पड़ेंगे. हर एकाध किलोमीटर पर होंगे, जहां से स्मार्टफोन वाले पावर लेंगे और अपनी आभासी दुनिया में मशगूल हो जाएंगे.

कभीकभी लगता है कि पूरा देश ही पावरबैंक है, जिस से हर कोई अपनेअपने हिसाब से चार्जिंग खींचने में लगा है. ऐसे बैंकों की खास टैगलाइन हो सकती है, ‘चलेगा फोन, बढ़ेगा देश.’ नारों के जरिए देश बहुत बढ़ जाया करते हैं.

देश भले ही गड्ढे में चला जाए, मगर हमारा फोन चलते रहना चाहिए. इसी फिक्र में हर व्यक्ति बैटरी सहेजने के मूड में और पावर सेविंग मोड में है. उन सब फीचर्स को फौलो कर रहा है जहां बैटरी की बचत हो सकती है. इतनी सेविंग तो लाइफ की भी नहीं होती. जिंदगी रहे न रहे, बस अंतिम समय तक बैटरी बची रहे दोस्तों.

चाह ऐसी है कि चाहे हाईटैक किस्म के प्लेन, डब्बे, रक्षा उपकरण, सिलेबस, स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, गवर्नमैंट इत्यादि भले मत बनाओ, चाहो तो डैवलपमैंट को भी एक बार पोस्टपौंड कर दो, भले छीन लो सारे रोजगार, लेकिन प्लीज बैटरी का कोई स्थायी इंतजाम कर दो.

‘बाबा, बैटरी को ले कर बहुत परेशान हूं, यह ज्यादा देर नहीं चलती, कोई समाधान बताइए?’

दुनिया में हर समस्या का समाधान बताने वाले बाबा लोग भी बैटरी के नाम पर बगलें झांकने लगेंगे, ‘बेटा, बैटरी तो हमारी भी नहीं चल पा रही, जो मिली है, उसी से काम चला. यों समझ ले जीवन की तरह यह भी क्षणभंगुर है.’

पब्लिक के हाल देख कर सरकारें आगे इस दिशा में बढ़ जाएं, तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए. सरकारों को चाहिए ऐसी ही पब्लिक, जो भेड़ों की तरह सिर दिनरात स्मार्टफोन की स्क्रीन में धंसाए रहे. ऊपर उठाए, तब तक 5 साल मजे से बीत जाएं.

हो सकता है, भविष्य में चुनाव बैटरी आधारित ही हो जाएं. घोषणापत्रों में शुमार हो जाए, हम देंगे मुफ्त बैटरी. एक दल लोक लुभावन घोषणा करेगा. दूसरा कूद पड़ेगा ‘जी, हम देंगे बैटरी का बाप बैटरा. भले हर हाथ को काम न दे पाएं सरकारें, मगर हर हाथ बैटरी जरूर देने लगेंगी.’

घरघर चार्जिंग की सप्लाई भी दे सकती हैं. फिर प्रैशर कुकर, साडि़यां, बरतन, चावल, टीवी मुफ्त देने का वादा करने वाले दल सूची में स्मार्टफोन भी जोड़ लेंगे.

‘अजी, उन को छोडि़ए, हम ऐसी बैटरी बनाएंगे, जिसे चार्ज करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. हमारी बैटरी पर मुहर लगाइए और चौबीस घंटे स्मार्ट रहिए, इस स्मार्टफोन ने लोगों को स्मार्टली बिना काम ही बिजी कर दिया.

घर, दफ्तर, सार्वजनिक स्थलों से बस, ट्रेन, प्लेन में देखिए. सफर शुरू होते ही सब हरकत में आते हैं और स्मार्ट फोन में बिजी हो जाते हैं. बगल में कोई बम भी फिट कर जाए, तो पता तभी चलेगा, जब वह फट जाएगा. तब भी शायद होश में न आएं सब से पहले स्मार्ट फोन संभालेंगे, फिर बैटरी चैक करेंगे. सैल्फी विद बौंब या लाइव हो जाएंगे आफ्टर बौंब.

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ई-वे बिल कारोबारियों के लिए मुसीबत

जीएसटी यानी वस्तु और सेवाकर से होने वाली परेशानियों को ध्यान में न रखते हुए केंद्र सरकार ने कारोबारियों के लिए नई ई-वे बिल व्यवस्था लागू कर दी है, जिस में बहुत से ऐसे नियम हैं जो व्यापारियों के लिए सुविधाजनक नहीं हैं. व्यापारियों का कहना है कि अभी हम जीएसटी के जंजाल से जूझ ही रहे थे कि ई-वे बिल के रूप में नई मुसीबत सामने खड़ी हो गई है. हालात यह है कि कारोबारी को बजाय कारोबार करने के, औनलाइन खानापूर्ति करने में ही अपना समय लगाना होगा.

वहीं, सरकार का दावा है कि ई-वे बिल से कारोबारियों की मुसीबतें कम होंगी. उन को टैक्स औफिस के चक्कर नहीं लगाने होंगे. वे अपने फोन से ही ई-वे बिल बना सकेंगे. इस से वे पूरे देश में कहीं भी अपना माल भेजने के लिए स्वतंत्र होंगे.

उधर, कारोबारियों की परेशानी यह भी है कि ई-वे बिल के दायरे में अब 20 वस्तुओं को शामिल कर लिया गया है. इस से कारोबारियों के सामने और ज्यादा परेशानियां आई हैं.

जिन वस्तुओं को ई-वे बिल के दायरे में लाया गया है उन में सुपारी, लोहा, इस्पात, सभी प्रकार के खा• तेल, वनस्पति घी, कोलतार, कोल, सभी प्रकार की टाइल्स, अखबारी कागज, सभी तरह के दूसरे कागज, स्टोन, सिगरेट, सिगार, टायरट्यूब, कत्था, खैनी, जरदा, तंबाकू से बने प्रोडक्ट्स, लुंब्रीकेंट्स, स्किम्ड पाउडर, पेंट, वार्निश, सेनिटरी वेयर और फिटिंग, वुड और टिंबर शामिल हैं. ऐसे में करीबकरीब हर कारोबारी इस दायरे में आ गया. ई-वे बिल की परिधि में आई ज्यादातर चीजें रोजमर्रा की हैं. ऐसे में कारोबारियों की मुसीबतें तो बढ़ेंगी ही, ये चीजें महंगी भी हो जाएंगी.

कैसे बनेगा ई-वे बिल

सरकार ने ई-वे बिल के लिए जीएसटीएन पोर्टल से अलग वैबसाइट बनाई है. इस के जरिए देशभर के सभी कारोबारी और ट्रेडर्स इस वैबसाइट पर ई-वे बिल को जनरेट कर सकेंगे. सरकार ने व्यापारियों की सुविधा के लिए एंड्रौएड फोन के लिए ई-वे बिल का ऐप भी लौंच किया है. इस को मोबाइल के प्लेस्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं. इस ऐप के जरिए भी कारोबारी ई-वे बिल को जनरेट कर सकते हैं. इस ऐप को डाउनलोड करने पर कारोबारी को अपनी डिटेल और जीएसटीएन नंबर रजिस्टर करना होगा.

इधर, कारोबारी ई-वे बिल की खामियों से खासे परेशान हैं. पोर्टल और इंटरनैट की दिक्कतों के साथ ही साथ उन्हें कई तरह की अव्यावहारिक दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है.

सरकार कहती है कि ई-वे बिल लागू होने से कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों को किसी भी टैक्स औफिस या चैकपोस्ट पर जाने की जरूरत नहीं होगी. कारोबारी ई-वे बिल को इलैक्ट्रौनिकली स्वयं निकाल पाएंगे. कारोबारी औफलाइन भी एसएमएस के जरिए ई-वे बिल बनवा सकेंगे.

जिन कारोबारियों के पास इंटरनैट की सुविधा नहीं होगी और जिन को एक दिन में ज्यादा ई-वे बिल जनरेट नहीं करने हैं, वे एसएमएस के जरिए ई-वे बिल को जनरेट करवा सकते हैं. इस के लिए कारोबारी को अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर कराना होगा. इसी नंबर से एसएमएस के जरिए ई-वे बिल की रिक्वैस्ट डिटेल दे कर वे ई-वे बिल जनरेट करवा सकते हैं. ई-वे बिल जनरेट करने पर क्यूआर कोड जनरेट होगा. इस कोड के जरिए ही जीएसटी अधिकारी कभी भी व्हीकल की चैकिंग कर सकते हैं. इस के जरिए ही व्हीकल को ट्रैस भी किया जा सकेगा.

कारोबारियों को ई-वे बिल बनाने के लिए वैबसाइट पर जा कर जीएसटी का यूजर पासवर्ड डालना होगा. इस के बाद ही वे अपना ई-वे बिल जनरेट कर सकेंगे. अगर कारोबारी ने अपना ई-वे बिल रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है तो उन्हें अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इस के बाद ई-वे बिल पर रजिस्ट्रेशन क्लिक करना होगा. यहां पर जीएसटीएन नंबर भरने से पासवर्ड मिल जाएगा. इस से ही वे अपना ई-वे बिल बना सकेंगे.

हड़बड़ी में लिया गया फैसला

ई-वे बिल को ले कर कारोबारियों को पोर्टल के अलावा भी कुछ दिक्कतें हैं. कारोबारी चाहते हैं कि सरकार इस में संशोधन करे. अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष संदीप बंसल कहते हैं, ‘‘ई-वे बिल किसी भी तरह से कारोबार के हित में नहीं है. इस के लागू होने के बाद वे कारोबारी भी जीएसटीएन नंबर लेने के लिए मजबूर हो गए हैं जो जीएसटी के दायरे में नहीं आते. सरकार ने जीएसटी लागू करने में जिस तरह की हड़बड़ी दिखाई, वैसी ही हड़बड़ी उस ने ई-वे बिल के लिए भी दिखाई. बिना पूरी तैयारी के इस को लागू किया गया है. जीएसटी में रोज नए बदलाव हो रहे हैं, जिस से कारोबारी परेशान हो रहे हैं. इस तरह के बदलावों से यह लगता है कि सरकार कारोबारियों के हित के बजाय उन का अहित करने का काम कर रही है.’’

वे कहते हैं, ‘‘आज भी देश में तमाम ऐसे कारोबारी हैं जो इंटरनैट और कंप्यूटर की जटिलताओं से दूर हैं. वे मेहनत और ईमानदारी से कारोबार करते हैं, समय पर टैक्स देते हैं. वे चाहते हैं कि सरकार टैक्स को सरल करे, जिस से उन्हें इस झमेले से मुक्ति मिल सके.

केंद्र की भाजपा सरकार लगातार कारोबारियों को परेशान करने वाले कानून बना रही है. विपक्ष में रहते हुए कभी जिस एफडीआई का वह विरोध करती थी, आज खुद उस ने उसी को लागू कर दिया. महंगाई और पैट्रोलियम पदार्थों के दामों को ले कर वह पहले विरोध करती थी अब उस का समर्थन कर रही है. पूरे देश पर जीएसटी लागू किया पर पैट्रोलियम पदार्थों पर जीएसटी नहीं लगा रही है. अगर पैट्रोलियम पदार्थों पर जीएसटी लागू हो जाए तो ये काफी हद तक सस्ते हो जाएंगे.

बदलाव की मांग

कारोबारी ई-वे बिल के कुछ  प्रावधानों में बदलाव चाहते हैं.

•       30 किलोमीटर से ज्यादा दूर माल भेजने पर ई-वे बिल बनाना होगा.

—      कारोबारी चाहते हैं कि आज शहरों की घटती दूरी को देखते हुए यह कम है. इस में तो एक महल्ले से दूसरे महल्ले के बीच माल भेजने वाले को ई-वे बिल बनाना जरूरी हो जाएगा. ऐसे में ई-वे बिल के लिए कम से कम 60 किलोमीटर की दूरी का प्रावधान किया जाए.

•       50 हजार रुपए से ज्यादा का माल भेजने के लिए ई-वे बिल बनाना होगा.

—      कारोबारी कहते हैं कि इस नियम से सभी के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो जाएगा. तब जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट की बात बेमानी होगी. इसलिए यह सीमा बढ़ा कर कम से कम 2 लाख रुपए की जाए.

•       माल भेजने के लिए ट्रक का नंबर देना होगा.

—      कारोबारी कहते हैं कि कई बार ट्रांसपोर्ट वाले माल भेजते समय ट्रक बदल देते हैं. कोई दूसरी परेशानी भी खड़ी हो सकती है. ऐसे में ट्रक का नंबर बाद में बदलने का प्रावधान शामिल किया जाए.

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शादी का झांसा देने वाला फरजी सीबीआई अधिकारी

12 दिसंबर, 2017 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के थाना अशोका गार्डन में काफी भीड़भाड़ थी. धीरेधीरे यह भीड़ बढ़ती जा रही थी. लोग यह जानने के लिए उस भीड़ का हिस्सा बनते जा रहे थे कि आखिर यहां हो क्या रहा है? लोग उत्सुकता से एकदूसरे का मुंह भी ताक रहे थे कि यहां हो क्या रहा है? उधर से गुजरने वाला हर आदमी बिना ठिठके आगे नहीं बढ़ रहा था.

इस की वजह यह थी कि शायद माजरा उस की समझ में आ जाए. जब उन्हें सच्चाई का पता चला तो सभी के सभी हक्केबक्के रह गए. एक लड़की, जिस की उम्र 23-24 साल रही होगी, वह एक लड़के का गिरेबान पकड़ कर कह रही थी, ‘‘सर, इस ने मेरी जिंदगी बरबाद कर दी. इस ने मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा किया है.’’

इस के बाद उस लड़की ने थाना पुलिस को जो बताया, उस के अनुसार उस लड़के ने फरजी आईपीएस अधिकारी बन कर उसे शादी का झांसा दिया था. काफी समय तक वह उस की इज्जत को तारतार करते हुए उस के भरोसे से खेलता रहा. यही नहीं, शादी करने के नाम पर उस ने उस से लाखों रुपए भी लिए थे.

लड़की को जब लड़के की सच्चाई का पता चला तो उस ने फरार होने की कोशिश की, लेकिन लड़की ने घर वालों की मदद से उसे पकड़ लिया और थाने ले आई. हर मांबाप की यही ख्वाहिश होती है कि वह अपनी औलाद को पढ़ालिखा कर इस काबिल बना दे कि वह खूब तरक्की करे.

ऐसी ही ख्वाहिश याकूब मंसूरी की भी थी. वह अपनी बेटी जेबा को गेट की तैयारी करवा रहे थे. जबकि मुसलमानों में आमतौर पर यही माना जाता है कि लड़कियों को ज्यादा पढ़ालिखा कर उन से नौकरी थोड़ी ही करानी है. लेकिन याकूब मंसूरी की सोच इस के विपरीत थी. वह जेबा को पढ़ालिखा कर कुछ करने के लिए प्रेरित करने के साथसाथ हर तरह से उस की मदद भी कर रहे थे.

जेबा मंसूरी भी अपने वालिद के सपनों को साकार करने में पूरी ईमानदारी से जुटी थी. वह परीक्षा की तैयारी मेहनत से कर रही थी. वह पढ़ने में भी काफी होशियार थी. उसे पूरी उम्मीद थी कि इस साल वह गेट की परीक्षा पास कर लेगी. इस के लिए वह रातदिन मेहनत कर रही थी. लेकिन जो सपने उस ने बुने थे, उस पर समीर खान की नजर लग गई.

मैट्रीमोनियल साइट से हुई दोस्ती

जवान होती लड़की के लिए हर मांबाप की यही ख्वाहिश होती है कि उन की बेटी के लिए किसी भी तरह एक अच्छा सा लड़का मिल जाए. इस के लिए मांबाप लड़के वालों की तमाम तरह की मांगों को पूरी करने की कोशिश भी करते हैं. अच्छे रिश्ते के लिए ही याकूब मंसूरी ने शादी डाटकौम पर बेटी जेबा की प्रोफाइल बनाई थी.

उन्होंने ऐसा बेटी के सुखद भविष्य के लिए किया था. लेकिन हो गया उल्टा. शायद इसीलिए जहां शादी की शहनाई बजनी थी, वहां अब मातम पसरा था. समाज में आज इतना बदलाव आ गया है कि लड़केलड़कियां अपनी पसंद से शादी करने लगे हैं. इस में कोई बुराई भी नहीं है. क्योंकि जब लड़के और लड़की को जीवन भर साथ रहना है तो पसंद भी उन्हीं की होनी चाहिए.

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इसीलिए अब परिचय सम्मेलन आयोजित किए जाने लगे हैं. इस से सब से बड़ा फायदा यह हुआ है कि लड़के के साथ लड़की को भी अपनी पसंद का जीवनसाथी मिल जाता है. चूंकि जमाना हाइटेक हो चुका है, इसलिए अब विवाह के लिए जीवनसाथी तलाशने का काम औनलाइन भी होने लगा है. कई प्लेटफार्म लोगों की शादी के लिए अच्छा जरिया बन गए हैं.

जेबा मंसूरी ने थाना अशोका गार्डन पुलिस को जो तहरीर दी थी, उस के अनुसार शादी के नाम पर उस के साथ धोखा हुआ था. जेबा ने नए साल में अपने लिए तरहतरह के जो अरमान पाले थे, नए साल के कुछ दिनों पहले ही उस के साथ जो हुआ, उस से उस के सारे अरमान एक ही झटके में चकनाचूर हो गए.

उस ने क्या सोचा था और उस के साथ क्या हो गया. शादी के नाम पर उस लड़के ने उस के साथ बहुत भयानक खेल खेला था, जिसे वह चाह कर भी इस जनम में नहीं भुला पाएगी. जेबा ने जो शिकायत दर्ज कराई है, उस के अनुसार उस के शादी के नाम पर धोखा खाने की कहानी कुछ इस प्रकार है—

जेबा प्रतियोगी परीक्षा गेट की तैयारी कर रही थी. जवान होती बेटी की शादी के लिए पिता याकूब मंसूरी ने शादी डाटकौम पर प्रोफाइल बना दी थी. शादी डाटकौम के जरिए शादी के लिए उस की प्रोफाइल पर एक रिक्वेस्ट आई. रिक्वेस्ट में दिए मोबाइल नंबर पर याकूब मंसूरी ने बात की.

इस बातचीत में उस ने अपना नाम समीर खान बताया था. उस ने बताया कि वह चेन्नई में सीबीआई में बतौर अंडरकवर डीएसपी नौकरी करता है. याकूब ने उस के घर वालों से बात करने की इच्छा जाहिर की तो उस ने अपने पिता अनवर खान का नंबर दे दिया. अनवर खान से समीर खान के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि उन का बेटा समीर सीबीआई में अंडरकवर डीएसपी है. फिलहाल उस की पोस्टिंग चेन्नई में है.

बातचीत के लिए जेबा को ले गया होटल में

इस के बाद समीर ने याकूब मंसूरी से जेबा का मोबाइल नंबर यह कह कर मांग लिया कि वह उस से बात करेगा. अगर वह उसे पसंद आ गई तो वह इस जानपहचान को जल्दी ही शादी जैसे खूबसूरत रिश्ते में बदल देगा. याकूब मंसूरी ने समीर की बातों पर विश्वास कर के उसे जेबा का नंबर दे दिया.

अक्तूबर महीने में एक दिन जेबा के मोबाइल पर समीर ने फोन किया. दोनों में काफी देर तक बातें हुईं. दोनों ने एकदूसरे को अपनेअपने घर परिवार और विचारों के बारे में बताया. समीर ने ऐसी लच्छेदार बातें कीं कि जेबा उस के दिखाए सब्जबाग में फंस गई. इस के बाद अकसर उन की बातें होने लगीं. वाट्सऐप पर भी संदेशों का आदानप्रदान होने लगा.

ऐसे में ही एक दिन समीर ने भोपाल आ कर जेबा से मिलने की ख्वाहिश जाहिर की, जिसे वह मना नहीं कर सकी. समीर के भोपाल आने की बात पर एक ओर जहां जेबा खुश हो रही थी, वहीं दूसरी ओर अंजाना सा डर भी सता रहा था. क्योंकि किसी से फोन पर बात करना अलग बात होती है और आमनेसामने मिलना अलग.

लेकिन शादी का मामला था, इसलिए जेबा ने मिलना मुनासिब समझा. आखिर वह समीर को लेने भोपाल रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई.  यह 22 नवंबर, 2017 की बात है. दोनों ने एकदूसरे को देखा तो पहली नजर में ही पसंद कर लिया.

समीर ने जेबा के घर जाने के बजाय उस के साथ स्टेशन से सीधे नूरउससबा पैलेस होटल पहुंचा. जबकि जेबा उसे घर ले जाना चाहती थी. लेकिन समीर की मरजी के आगे उस की एक न चली.

होटल में उस ने डबलबैड कमरा लिया था, जिस में दोनों 2 दिनों तक रुके. इस बीच समीर ने अपने परिवार के बारे में जेबा को खूब बढ़ाचढ़ा कर बताया. उस के बताए अनुसार, उस के परिवार के ज्यादातर लोग सरकारी नौकरियों में हैं. कोई जज है तो कोई इसी तरह की अन्य सरकारी नौकरी में. अपने पिता के बारे में उस ने बताया कि उन का मुंबई में कपड़ों का बहुत बड़ा बिजनैस है, इसलिए वह वहीं रहते हैं. वह बनारस का रहने वाला है, जहां उस की काफी जमीनजायदाद है.

समीर ने पसंद किया जेबा को

अपने घरपरिवार के बारे में बता कर समीर ने जेबा से कहा कि वह उसे पसंद है और उस से शादी के लिए तैयार है. समीर अच्छे घर का लड़का था और सीबीआई में अफसर था, इसलिए जेबा ने भी हामी भर दी. जेबा के हां करते ही समीर उस से छेड़छाड़ करने लगा. इस के बाद सारी मर्यादाएं लांघते हुए उस ने उस के साथ शारीरिक संबंध बना लिए.

जेबा भी उस के बहकावे में आ कर गुनाहों के ऐसे दलदल में जा फंसी, जहां से निकलना किसी भी लड़की के लिए बहुत मुश्किल होता है. भोपाल में 2 दिन रुकने के बाद समीर ने कहा कि औफिशियल काम से उसे दिल्ली जाना है. इस से जेबा को लगा कि वाकई उसे वहां जरूरी काम होगा.

लेकिन बाद में पता चला कि वह सब झूठ था. यह सब जेबा काफी बाद में जान पाई. दिल्ली जाने के बाद समीर ने उसे फोन किया. डरते हुए उस ने बताया कि उन के होटल में रुकने का पता उस के घर वालों को चल गया है, जिस से वे काफी नाराज हैं. उस की बातें सुन कर जेबा शौक्ड रह गई. वह यह क्या कह रहा है, अब क्या होगा, उस की कितनी बदनामी होगी?

समीर ने जेबा को समझाते हुए कहा कि वह बिलकुल परेशान न हो. यह बात भोपाल में किसी को पता नहीं है, सिर्फ उस के घर वालों को ही पता है. इस बात से वे काफी नाराज हैं. लेकिन घबराने की कोई बात नहीं है. कुछ दिनों में वह सब संभाल लेगा. वह बिलकुल परेशान न हो. वह उन्हें मना लेगा. वह फिर भोपाल आ रहा है. 2 दिन बाद समीर फिर भोपाल आया और नूरउससबा होटल के उसी कमरे में ही रुका. लेकिन इस बार जेबा होटल में उस के साथ नहीं रुकी, लेकिन उस से मिलने रोज आती रही.

अंत में जब समीर ने दबाव डाला तो वह 8 नवंबर से 23 नवंबर तक होटल में रुकी. समीर से उस के शारीरिक संबंध बन ही चुके थे, इसलिए इस बार भी वह उस से शारीरिक संबंध बनाता रहा.

जेबा ने ऐतराज जताया तो उस ने होटल में ही काजी को बुला लिया और उन के सामने कहा कि वह उस से निकाह कर के उसे अपनी बीवी मान रहा है. इस तरह से जेबा का निकाह समीर से हो गया. वह समीर की बीवी बन कर रहने लगी, जबकि उन के इस निकाह का कोई लिखित सबूत नहीं था.

इतने दिनों तक होटल में साथ रुकने के बाद जेबा समीर को अपने मम्मीपापा से मिलवाने के लिए सागर ले गई, जहां मकरोनिया सागर में उस का पुश्तैनी मकान था. वहां भी वह अपनी लच्छेदार बातों के जाल में फंसा कर जेबा के घर वालों के सामने एक अच्छा लड़का बना रहा. याकूब मंसूरी और उन की पत्नी को भी समीर पसंद आ गया था. अब इस रिश्ते में कोई अड़चन नहीं थी. कुछ समय तक सागर में रुक कर दोनों भोपाल लौट आए. समीर भोपाल स्थित जेबा के घर पर भी कई दिनों तक रुका. वहां भी दोनों ने जिस्मानी रिश्ते बनाए.

ट्रेनिंग के लिए जाने की बात कह कर ठगे लाखों रुपए

समीर ने जेबा के साथसाथ उस के घर वालों को भी इस बात का पक्का यकीन दिला दिया था कि वह सीबीआई में अंडरकवर डीएसपी है और उस का सिलेक्शन आईपीएस के रूप में हो गया है, जिस की ट्रेनिंग हैदराबाद में होनी है. आईपीएस की ट्रेनिंग पर वह इसलिए नहीं जा पा रहा था, क्योंकि किसी वजह से स्टे लगा था. लेकिन अब स्टे हट गया है, इसलिए उसे ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद जाना है.

ऐसे में ही जेबा ने उस से पूछ लिया कि वह वरदी क्यों नहीं पहनता तो उस ने कहा कि वह सीबीआई अफसर है, इसलिए उसे पहचान छिपा कर रखनी पड़ती है. जब कभी औफिस जाना होता है तो वह वरदी पहनता है.

जेबा के कहने पर एक दिन समीर ने उसे आईपीएस की वरदी पहन कर दिखाते हुए कहा कि जब कभी औफिशियल मीटिंग होती है, तब वह यह वरदी पहन कर जाता है. जेबा को उस वरदी पर संदेह हुआ, क्योंकि उस पर सीनियर अफसरों के बैज लगे थे. इस के बाद समीर ने उसे सील लगे हुए कई दस्तावेज दिखाए.

एक दिन समीर परेशान सा सोफे पर चुपचाप बैठा था. जेबा ने परेशानी की वजह पूछी तो उस ने धीमी आवाज में कहा, ‘‘क्या बताऊं, मुझे ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद जाना है, जिस के लिए काफी पैसों की जरूरत है. होटल में मिलने को ले कर पापा अभी तक नाराज हैं, इसलिए उन से किसी तरह की मदद की उम्मीद नहीं है. अब परेशानी यह है कि ट्रेनिंग का खर्च कहां से आएगा.’’

समीर की बातों में आ कर जेबा ने कहा, ‘‘आप परेशान मत होइए, मैं आप के लिए पैसों का इंतजाम कर दूंगी.’’

समीर मना करता रहा, इस के बावजूद कई बार में जेबा ने तकरीबन 2 लाख रुपए उसे दे दिए. क्योंकि उसे कभी उस पर संदेह नहीं हुआ था.

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परिवार से मिलवाने की बात को टाल जाता था

जब भी जेबा समीर से घर वालों के बारे में पूछती या मिलवाने की बात कहती, वह कोई न कोई बहाना बना कर टाल जाता. जेबा को उस से मिले करीब 2 महीने हो गए थे, लेकिन उस ने अपने मम्मीपापा से मिलवाने की कौन कहे, फोन पर बात तक नहीं करवाई थी.

इन्हीं बातों से जेबा को उस पर शक होने लगा. संदेह गहराया तो उस ने अपने पापा से समीर के बारे में पता करने को कहा. उस ने और उस के मम्मीपापा ने समीर से उस की नौकरी और पढ़ाई के कागजात मांगे तो वह टालमटोल करने लगा. याकूब मंसूरी ने अपने कई परिचितों को समीर के बारे में पता करने के लिए लगा दिया. नतीजा यह निकला कि उस की असलियत का पता चल गया.

समीर को पता नहीं कैसे भनक लग गई कि उस की पोल खुल गई है. वह अपना बैग ले कर घर से भागने की फिराक में था, तभी जेबा ने कहा, ‘‘समीर, हमें तुम्हारी असलियत का पता चल गया है. अब मैं तुम्हें पुलिस के हवाले करूंगी, जिस से तुम्हारी जिंदगी जेल में कटेगी.’’

समीर डर गया. उस ने कहा, ‘‘अगर तुम लोगों ने मेरी शिकायत पुलिस में की तो मैं तुम सभी को जान से मार दूंगा.’’

लेकिन उस की इस धमकी से न जेबा डरी और न उस के मम्मीपापा. याकूब मंसूरी ने अपने दोस्तों की मदद से समीर को पकड़ लिया और थाना अशोका गार्डन ले गए, जहां वह खुद को पुलिस अधिकारी होने का भरोसा दिलाता रहा और वादा करता रहा कि जेबा से ही शादी करेगा.

लेकिन शादी का झांसा दे कर शारीरिक शोषण करने के साथ लाखों रुपए ऐंठने वाले समीर की असलियत जेबा को पता चल गई थी, इसलिए उस ने उस की किसी बात पर भरोसा नहीं किया. मामले की नजाकत को भांपते हुए अशोका गार्डन पुलिस ने समीर को तुरंत हिरासत में ले लिया.

समीर को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने याकूब मंसूरी के घर में रखे उस के बैग को कब्जे में ले कर तलाशी ली तो उस में से राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, सीबीआई सहित कई संस्थानों की फरजी मोहरें मिलीं. यही नहीं, उस के पास से डीआईजी रैंक के पुलिस अधिकारी की वरदी भी मिली. समीर ने एक गलती यह की थी कि उस ने जो वरदी खरीदी थी, वह डीआईजी रैंक के पुलिस अधिकारी की थी. 3 स्टार और अशोक चक्र लगी वरदी को पुलिस ने कब्जे में ले लिया था. पूछताछ में उस ने बताया कि यह वरदी उस ने बिहार के भागलपुर से खरीदी थी.

शातिर दिमाग है ठग समीर खान

एएसपी हितेश चौहान के अनुसार, समीर अनवर खान बहुत ही शातिर दिमाग था. उस ने बड़ी चालाकी से शादी डाटकौम पर अपनी प्रोफाइल बना कर जेबा मंसूरी जैसी पढ़ीलिखी लड़की को अपने जाल में फांस लिया था. बाद में पता चला कि उस ने ऐसा ही कारनामा पंजाब में किया था. मध्य प्रदेश पुलिस ने पंजाब पुलिस से जानकारी हासिल की तो पता चला कि ऐसे ही मामले में वह वहां भी गिरफ्तार किया गया था. जमानत पर रिहा होने के बाद वह फरार हो गया था.

पुलिस द्वारा की गई पूछताछ के अनुसार, समीर मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला वाराणसी का रहने वाला था. उस ने दिखावे के लिए एमटेक में अप्लाई कर रखा था. उस के पिता मुंबई में झुग्गीझोपड़ी में रहते थे और फेरी में कपड़े बेच कर गुजरबसर करते थे. उस ने जेबा से बताया था कि वाराणसी में उस की तमाम जमीनजायदाद है, लेकिन यह सब झूठ था.

मजे की बात यह थी कि उस ने पंजाब में जो धोखाधड़ी की थी, उस में उस ने 40-50 लाख रुपए की चपत लगाई थी. लेकिन कहीं से भी नहीं लगता था कि इतना पैसा उस के पास होगा.

थाना अशोका गार्डन पुलिस ने समीर के खिलाफ भादंवि की धारा 170, 419, 420, 471, 472, 473, 376 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया था. कथा लिखे जाने तक समीर पुलिस रिमांड पर था. पुलिस उस से कई पहलुओं पर पूछताछ कर रही थी. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में समीर ने जो बताया है, उस से जाहिर होता है कि वह छोटामोटा अपराधी नहीं है.

होटल प्रबंधन को भी लगाया लाखों का चूना

समीर कितना शातिरदिमाग है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह भोपाल के सब से मशहूर होटल नूरउससबा में 2 नवंबर, 2017  से 23 नवंबर, 2017 तक लड़की के साथ रुका रहा, लेकिन होटल प्रबंधन को उस की कारगुजारियों की तनिक भी भनक नहीं लगी. वह इतने बड़े होटल को लाखों का चूना लगा कर रफूचक्कर हो गया था.

अच्छा हुआ कि वक्त रहते जेबा मंसूरी को उस पर शक हो गया, वरना हाथ से निकलने के बाद फिर शायद ही कभी वह चंगुल में फंसता. नूरउससबा पैलेस होटल में 20 दिनों से ज्यादा रहने के बाद भी वह पैसे दिए बिना  वहां से फरार हो गया था. होटल प्रबंधन के बताए अनुसार, 2 नवंबर से 23 नवंबर, 2017 तक होटल में रहने और खानेपीने का बिल 2 लाख 15 हजार 311 रुपए बना था.

समीर ने चालाकी से काम लेते हुए होटल प्रबंधन को भरोसे में लेने के लिए 20 हजार रुपए एडवांस जमा करा दिए थे. उसे वहां 24 नवंबर तक रुकना था, लेकिन एक दिन पहले ही वह अपना बोरियाबिस्तर समेट कर वहां से चलता बना.

पंजाब में आईएएस बन कर कर चुका है फरजीवाड़ा

समीर के बताए अनुसार, उस ने पंजाब के कपूरथला में भी एक बीएससी की छात्रा के साथ जालसाजी की थी. वहां भी उस ने कुछ ऐसी ही कहानी गढ़ी थी. उस ने वहां बताया था कि उस का सिलेक्शन आईएएस में हो गया है. इस तरह उस के बहकावे में आ कर उस लड़की ने समीर से सन 2016 में निकाह कर लिया था. वहां उस ने अपना नाम शमशेर बताया था.

जब फरजी आईएएस का झूठ सामने आया तो कपूरथला के थाना फगवाड़ा पुलिस ने जनवरी, 2016 में शमशेर के खिलाफ धोखाधड़ी, दहेज अधिनियम और धमकाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर के उसे गिरफ्तार कर लिया था. शमशेर उर्फ समीर वहां 2 महीने तक जेल में बंद रहा. उस की दादी ने जमानत कराई तो जेल से बाहर आते ही वह फरार हो गया.

अब देखना यह है कि मध्य प्रदेश के साथसाथ पंजाब पुलिस समीर उर्फ शमशेर को धोखाधड़ी, पैसे ऐंठने, शारीरिक शोषण और फरजी पदों का गलत इस्तेमाल करने के अपराध में कितनी सजा दिलवा सकती है. पुलिस यह भी पता कर रही है कि यह काम समीर अकेला ही करता था या उस के साथ और कोई भी था.

एक्ट्रेस ने बेटे संग कराया बिकनी फोटोशूट

बोल्‍ड फोटोज को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाली बौलीवुड अदाकारा लीजा हेडन एक बार फिर अपने फोटोशूट की वजह से चर्चा में हैं. इस बार उन्होंने अपने बेटे जैक के साथ बिकनी पहनकर अंडर वाटर फोटोशूट कराया है. अपनी इन तस्वीरों को उन्होंने सोशलमीडिया पर पोस्ट किया है. लेकिन लगता है कि ये तस्वीरें लोगों को जरा भी पसंद नहीं आई है. तभी तो लोग उन्हें इस तस्वीरों को लेकर ट्रोल कर रहे हैं.

ताजा फोटो में वह अपने एक साल के बच्चे के साथ पानी के अंदर इंज्वाय करती नजर आ रही हैं. उन्होंने बच्चे के साथ अंडरवाटर फोटोशूट कराया है. इस तस्वीर को देखने के बाद कुछ यूजर्स ने लीजा हेडन की आलोचना की तो कुछ ने उनकी तारिफ की है. यूजर्स ने लीजा को इस तरह बच्‍चे के साथ पानी में नहीं जाने की नसीहत दी है. उनका कहना है कि अपने फोटोशूट के चक्कर में वह बच्चे की जान लेने पर उतारू हैं. कुछ ने इस फोटोशूट को बच्चे के लिए खतरनाक बताया. वहीं एक यूजर ने लिखा ‘एक मां और महिला के रूप में आप प्रेरणा हैं’, वहीं अन्य यूजर ने कमेंट किया, ‘मैं भी अपने बच्चे के साथ ऐसी तस्वीर खिंचवाना चाहती हूं.

हालांकि, लीजा हेडन ने फोटो के साथ यह जानकारी भी दी थी कि स्वीमिंग क्लास के दौरान यह फोटोशूट कराया गया है और कई मां ने भी अपने बच्चे के साथ ऐसी तस्वीरें खिंचवाई हैं.

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बता दें कि इन दिनों लीजा फिल्मों से दूर अपना ज्यादा से ज्यादा वक्त बेटे जैक के साथ बिता रही हैं. वह अक्सर सोशल मीडिया पर अपने बेटे के साथ तस्वीरें पोस्ट करती हैं. बता दें कि इससे पहले भी लीजा अपनी प्रेगनेंसी के दौरान फोटोशूट के चलते सुर्खियों में रह चुकी हैं. लीजा ने अपने ब्वायफ्रेंड डिनो लालवानी से शादी की है. साल 2010 में उन्होंने सोनम कपूर की फिल्म ‘आयशा’ से बौलीवुड में एंट्री की थी. इसके अलावा वह फिल्म ‘क्वीन’, ‘शौकीन्स’ और ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में नजर आ चुकी हैं. लीजा हेडन ने माडलिंग से करियर की शुरुआत की थी.

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किराएदार-मकानमालिक

संपत्ति का अधिकार मुख्य मौलिक अधिकार है हालांकि एक संविधान संशोधन में इसे हलका करने की कोशिश की गई थी. यह अधिकार ही असल में अन्य अधिकारों का आधार है क्योंकि यदि संपत्ति न हो तो जेल हो या न हो, क्या फर्क पड़ता है. संपत्ति न हो तो जेल ही न होती. संपत्ति न हो तो कौन संस्थाएं बना सकेगा? यहां तक कि धर्म की दुकानें भी संपत्ति के अधिकार पर ही तो चल सकती हैं.

संपत्ति के इस अधिकार को पिछले 70-75 सालों से किराए कानूनों के माध्यम से छीना जा चुका है. देशभर में लाखों मकानमालिक अपने हक को खुल्लमखुल्ला किराएदार द्वारा खाता देख रहे हैं और सरकार किराएदार का समर्थन कर रही है. दिल्ली में एक कानून वर्षों से बना पड़ा है पर लागू नहीं हो रहा क्योंकि किराएदार दुकानदारों की धौंस चल रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने हाल में हरियाणा के बहादुरगढ़ के एक ऐसे विवाद में किराएदार को खंडहर होती दुकान में रहते रहने का आदेश दे दिया और 20 सालों से लड़ रहे मकानमालिक को रास्ता नपवा दिया. सुप्रीम कोर्ट चाहता तो इस फालतू के कानून को अलविदा कह सकता था.

मकानों में अचानक कमी आए तो किराएदार सुरक्षा कानून बनाने का औचित्य होता है पर जब मकान बने हों और किराएदार न मिल रहे हों तो किराया कानून निरर्थक हो जाता है. यह किराएदार के लिए असुरक्षित हो जाता है क्योंकि कानून संरक्षित सस्ते मकान में रह कर वह पुराने खंडहर में ही बना रहता है और नया जोखिम नहीं लेता.

सभी शहरों के पुराने व मैले इलाकों में ऐसे किराएदारों की भरमार है जो सस्ते किराए के मोह में बदबूदार इलाकों में बने रहते हैं. यह कानून न होता तो वे कब के बाहर निकल कर अच्छे मकानों में चले जाते. इन इलाकों में किराएदारों की वजह से अरबोंखरबों की संपत्तियां खाली पड़ी हैं. इतनी की ही संपत्तियां रखरखाव के अभाव में गिरने की हालत में हैं. पर सस्ते, सुरक्षित किराएदारों को अपनी संपत्तियों से निकालने की जहमत मकानमालिक उठाना नहीं चाहते.

जो मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे उन में तो मकानमालिकों को आधीपौनी राहत मिलनी ही चाहिए. सुप्रीम कोर्ट तक वही मकानमालिक जाएगा जो अपने हक को वाजिब समझता होगा.

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परमाणु समझौते से अलग हुआ अमेरिका

अपने यूरोपीय मित्रों की मान-मनौव्वल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जिद भारी पड़ी और अमेरिका ने ईरान के साथ परमाणु समझौते से अपने को अलग कर लिया. यह सब तब हुआ, जब किसी को भी परमाणु अप्रसार के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता पर कोई संदेह नहीं था. इजरायल और सऊदी अरब को छोड़कर ट्रंप के इस कदम की सभी देशों ने आलोचना की है.

दरअसल ट्रंप को समझ पाना आसान नहीं है, फिर भी कुछ तो समझ में आता है कि आखिर ऐसे सफल सौदे से उन्हें खुद को अलग करना क्यों ठीक लगा? दरअसल ट्रंप खुद को ऐसे युद्धपोतों से घिरा पाते हैं, जिनमें से अधिकतर इजरायल के करीब हैं और जो ईरान के साथ खुले टकराव से कम पर कुछ सुनना ही नहीं चाहते.

दूसरे, शायद यह कि अपने पूर्ववर्ती बराक ओबामा का हर बड़ा फैसला वह खत्म कर देना चाहते हैं. जो भी हो, समझौते को इस तरह तोड़ने ने शेष विश्व के साथ अमेरिका की प्रबिद्धताओं पर सवाल तो उठा ही दिए हैं. इसने आलोचकों को सवाल उठाने का मौका दो दिया है कि अगर अमेरिका एक बहुपक्षीय समझौते का सम्मान नहीं कर सकता, तो उसके बाकी वादों पर कैसे भरोसा किया जाए? वैसे भी मध्य-पूर्व एक जटिल इलाका है, जहां विभिन्न युद्धों में अलग-अलग खिलाड़ी अलग-अलग भूमिकाओं में हैं.

ऐसे में, ईरान की कुछ क्षेत्रीय गतिविधियों की आड़ लेकर समझौता तोड़ना दो अलग-अलग मुद्दों का घालमेल करने से ज्यादा कुछ नहीं है. इस पूरे प्रकरण में संसद में अमेरिकी झंडा जलाने की घटना छोड़ दें, तो ईरान ने अब तक सधी हुई प्रतिक्रिया ही दी है. राष्ट्रपति हसन रूहानी व यूरोपीय संघ के देशों ने भी समझौते के प्रति प्रतिबद्धता जताई है.

हालांकि एक बड़ा सवाल है कि यदि अमेरिका ने किसी राज्य को ईरान के साथ व्यापार की अनुमति दे रखी है, तो बदले हालात में ऐसा कोई समझौता कैसे टिकेगा? अभी तक इसका जवाब नहीं मिला है. पर इतना तो साफ है कि वाशिंगटन ने अपने तेवर यूं ही बनाए रखे, तो शक नहीं कि तेहरान भी वैसा ही जवाबी रुख अख्तियार कर ले, जो क्षेत्रीय शांति के लिए अच्छा नहीं हो.

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सेक्स में बिग 0 यानि चरमसुख पर चुप्पी क्यों

तनु के विवाह को 6 महीने हो गए थे. वह मायके आई हुई थी. विवाह के बाद अनुभव पूछते हुए उस की हमउम्र भाभी रेखा उस के साथ छेड़छाड़ करने लगी.

तब तनु ने बुझे स्वर में कहा, ‘‘मुझे तो कुछ अच्छा नहीं लगता. सब बोरिंग ही लगता है.’’

सुन कर रेखा हैरान हुई. फिर विस्तार से खुल कर बात करने पर रेखा को महसूस हुआ कि तनु ने अब तक चरमसुख का आनंद लिया ही नहीं है. सैक्स उसे एक रूटीन की तरह लग रहा है कि बस, पति का साथ देना, चाहे अच्छा लगे या बुरा.

रेखा अपनी एक रिश्तेदार डाक्टर मीनाक्षी से बात कर तनु को उन के पास ले गई. दोनों को अकेले छोड़ वहां से हट गई. डाक्टर ने बातोंबातों में उसे और्गेज्म के बारे में समझाया तो तनु झिझकती हुई सब बातें सुनतीसमझती रही. अगली बार मायके आने पर जब उस का खिला, चमकता चेहरा देख रेखा ने फिर आंखों ही आंखों में शरारती सवाल पूछा तो तनु शरमा कर हंस दी. तब रेखा को तसल्ली हो गई कि अब उस की ननद शारीरिक और मानसिक रूप से वैवाहिक जीवन का पूरापूरा आनंद ले रही है.

सैक्स की हमारे जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका है. विशेष रूप से महिलाएं स्वयं को बहलाती हैं कि मजबूत रिश्ते के लिए अच्छा सैक्स जरूरी नहीं है. उन के लिए यह पार्टनर से जुड़े रहने के लिए ही है.

25 वर्षीय कविता का कहना है, ‘‘मेरा पार्टनर आसानी से उत्तेजित हो जाता था, जबकि मेरा मूड बनने में काफी समय लगता था. मैं उसी के लिए सैक्स करती थी. हर बार मुझे खाली और अधूरा लगता था.’’

फोरप्ले के महत्त्व के बारे में बताते हुए कंसल्टैंट मनोवैज्ञानिक हेल्थेनबेर इंडिया से अदिति आचार्य का कहना है, ‘‘जहां 90% पुरुष शारीरिक संबंध में चरमसुख का अनुभव करते हैं वहीं 30% महिलाओं ने अपने जीवन में चरमसुख का अनुभव कभी किया ही नहीं है. एक महिला को मानसिक रूप से इस खेल में शामिल होने में समय लगता है. 15 से 40 मिनट लगते हैं.’’

फुट स्पा, बौडी मसाज से यौवन, सौंदर्य वृद्धि होती है पर यह सब करवाना रोज तो

संभव नहीं हो सकता न? ‘द और्गेज्म आंसर गाइड’ में मनोवैज्ञानिक कैरल रिंकलेव एलिसन के द्वारा किए गए अध्ययन में एलिसन ने 23 से 90 साल उम्र की 2,632 महिलाओं का इंटरव्यू लिया था, जिस में पता चला था कि इन में से 39% ने ही स्वयं को रिलैक्स करने के लिए इस का आनंद उठाया है. विशेषज्ञ इस का श्रेय औक्सिटोसिन हारमोन को देते हैं. मनोवैज्ञानिक और सैक्सोलौजिस्ट डा. श्याम मिथिया बताते हैं, ‘‘जब एक महिला उत्तेजित होती है, तो औक्सीटोसिन नामक फीलगुड हारमोन हाइपोथेलेमस में नर्व्स सैल्स से खून में प्रवाहित होता है. औक्सीटोसिन न सिर्फ तनाव कम करता है, बल्कि जोश और आराम की भावना भी उत्पन्न करता है. यह रिश्ते को मजबूत करता है.’’

बिग 0 (चरमसुख) से शरीर को लाभ ही लाभ है. इस से यौनांगों में बेहतर रक्तप्रवाह होता है, शरीर को प्राकृतिक डिटौक्सीफिकेशन होता है, संतानोत्पत्ति की क्षमता बढ़ती है, याद्दाश्त सुधरती है, रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, स्वस्थ ऐस्ट्रोजन हारमोन का स्तर बढ़ता है. यह औस्टियोपोरोसिस, हृदयरोग और स्तन कैंसर से भी सुरक्षा करता है.

37 वर्षीय अध्यापिका कविता गोयल कहती हैं, ‘‘चाहे दिन कितना भी खराब बीते, मैं और मेरे पति लगभग प्रतिदिन अच्छे सैक्स का आनंद उठा कर ही सोते हैं. यह एक ऐस्प्रिन खाने से तो अच्छा ही है और जब आप हर सुबह चेहरे की प्राकृतिक चमक के साथ उठें तो मेकअप की भी क्या जरूरत है.’’

चरमसुख के दौरान उत्पन्न होने वाले ऐंडोर्फिंस हारमोन सिरदर्द, मासिक उथलपुथल, आर्थ्राइटिस के लिए दर्दनिवारक का काम करते हैं.

आप ने कभी सफल, आनंददायक सैक्स के बाद अपने चेहरे की चमक देखी है? उस का श्रेय डीएनईए को जाता है. यह हारमोन त्वचा की चमक बढ़ाता है, नष्ट हुए टिशूज की मरम्मत करता है और त्वचा को जवान बनाए रखता है. यह हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. काफी अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि जो लोग हफ्ते में कम से कम 3 बार शारीरिक संबंध बनाते हैं वे अपनी उम्र से 10 साल छोटे लगते हैं. सैक्स कोच आनंदिति सेन कहती हैं, ‘‘अरोमाथेरैपी वाली कैंडल्स के बारे में सोचो, लाइट्स हलकी करो, आंखें बंद कर के कल्पना के घोड़ों को दौड़ने दें.’’

फिल्मों में महिलाओं को सैक्सुअल आनंद में ही लीन दिखाया जाता है, जबकि वास्तविकता में 20% महिलाएं ही चरमसुख को पाती हैं. तो क्या अच्छी सैक्स लाइफ न होने से आप का रिश्ता प्रभावित होता है? इस संबंध में फिटनैस ट्रेनर शिवानी जोशी का कहना है, ‘‘बिलकुल. पार्टनर का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है. उसे साफसाफ बताना बहुत जरूरी है कि आप को क्या अच्छा लगता है क्या नहीं.’’

तो सारी चिंताएं, संदेह छोड़ कर पार्टनर के साथ सैक्स का आनंद लें. इसे बोझ नहीं, तनमन के लिए एक औषधि की तरह समझें. इस का अनुभव कर प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और सुखी रहें. पुरानी मानसिकता से बाहर निकलें, पार्टनर को अपनी पसंदनापसंद, इच्छाअनिच्छा बताएं और खुल कर जीएं.

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अखिल सचदेवा का नया एकल गीत ‘‘गल सुन’’ टीसीरीज से

‘घर से निकलते ही’, ‘ओ हमसफर’ और ‘रात कमाल है’ जैसे एकल गानों की सफलता से प्रेरित होकर टीसीरीज कंपनी अब गायक अखिल सचदेवा का एकल गीत ‘गल सुन’ लेकर आ रही है. अखिल सचेदवा द्वारा स्वरबद्ध इस गीत के गीतकार मनोज मुंताशिर हैं. वीडियो निर्देशक चरित देसाई ने इसका वीडियो अखिल सचदेवा और स्नेहा नमनंदी पर चानिया के सुरम्यद्वीप पर फिल्माया है.

चर्चित गीत ‘हमसफर’ के बाद अपना एकल गीत ‘गल सुन’ ला रहे अखिल सचदेवा कहते हैं- ‘‘मेरे लिए यह अद्भुत और बहुत ही अलग तरह का अनुभव रहा. इस गीत के वीडियो के फिल्मांकन के दौरान मैं अपना हाथ तुड़वा बैठा था. पर निर्देशक ने मेरा हौसला बढ़ाया और मैने दुर्घटना घटित होने के बाद भी शूटिंग की. मैंने सकारात्मक उर्जा के साथ शूटिंग की. सेट पर हम सभी दिल से गीत को आत्मसात कर चुके थे. इसे चानिया नामक सुरम्यद्वीप पर फिल्माया गया है, अब तक यहां पर न के बराबर ही शूटिंग हुई है.’’

अखिल कहते हैं- ‘‘असलियत में हमने इस गीत की धुन ‘हमसफर’ को बाजार में लाने से चार माह पहले ही बना ली थी. लगभग साढ़े तीन वर्ष पहले ही हमने इन गीतों को बनाया था. निजी स्तर पर ‘हमसफर’ की बनिस्बत ‘गल सुन’ गीत मेरे दिल के ज्यादा करीब है. मैं इसकी सफलता को लेकर आश्वस्त हूं. वीडियो में गीत के साथ एक रोचक कहानी भी है. यह कोई आम म्यूजिक वीडियो नहीं है.’’

VIDEO : दीपिका पादुकोण तमाशा लुक

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श्रीनगर में सीरियल ‘‘इश्क सुभान अल्लाह’’

मशहूर निर्माता धीरज कुमार इन दिनों कश्मीर और कश्मीर के निवासियों की तारीफ करते हुए नहीं थक रहे हैं. वास्तव में जीटीवी पर सोमवार से शुक्रवार रात दस बजे प्रसारित हो रहे अपने सीरियल ‘‘इश्क सुभान अल्लाह’’ की शूटिंग कश्मीर में लगातार 15 दिन करने के बाद धीरज कुमर वापस लौटे हैं.

इस सीरियल की शूटिंग के लिए सीरियल के मुख्य कलाकार अदनान खान व ईशा सिंह कश्मीर गए थे.

सीरियल की कहानी के अनुसार दोनों निकाह करने के बाद हनीमून मनाने के लिए कश्मीर जाते हैं. इस सीरियल को श्रीनगर व पहलगाम की अति खूबसूरत लोकेशनों पर 15 दिन फिल्माया गया.

सीरियल ‘‘इश्क सुभान अल्लाह’’ के निर्माता धीरज कुमार कहते हैं-‘‘कश्मीर को लेकर जिस तरह की बातें की जा रही हैं,वह अर्थहीन हैं. हमें तो कश्मीर में शूटिंग करने में कोई तकलीफ नहीं हुई. वहां के लोगों ने हमारी काफी मदद की.’’

 

लापरवाही : संकट में सरहदी पहरेदार

पाकिस्तान से सटी भारत की पश्चिमी सरहद पर पहरे के लिए हम सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ और ‘रेगिस्तान के जहाज’ ऊंट पर निर्भर हैं, लेकिन हमारी बीएसएफ को कमजोर करने के लिए पिछले कुछ सालों से ऊंटों को खत्म करने की साजिश चल रही है.

इस सदी की शुरुआत में देश में 10 लाख ऊंट थे, जो अब साढ़े 3 लाख ही बचे हैं. यही वजह है कि कई इंटरनैशनल एजेंसियां तो औपचारिक रूप से भारतीय ऊंट को लुप्त होती प्रजाति घोषित कर चुकी हैं.

यह बात भी गौर करने लायक है कि क्या इस मामले में बड़े पैमाने पर विदेशी ताकत का हाथ है, जो हमारे देश में अपने लोगों के जरीए बहुत ही सोचीसमझी चाल के तहत हमारे देश के रक्षा तंत्र को कमजोर करने में लगी हैं, ताकि वे आसानी से देश में घुस सकें?

बीएसएफ केवल लड़ाई ही नहीं लड़ती, बल्कि उसे घुसपैठियों से भी निबटना होता है. सरहद पर हथियारों और नशीली चीजों की तस्करी होना तो आम बात है.

गुजरात और राजस्थान से लगती पाकिस्तान की सरहद तकरीबन 1,040 किलोमीटर लंबी है. जहां तक राजस्थान का सवाल है, तो यहां मीलों तक 30-30 फुट की ऊंचाई के टीले हैं. गरमियों में तापमान 50 डिगरी सैल्सियस तक पहुंच जाता है.

ज्यादातर इलाका रेतीला है और छोटीछोटी कंटीली झाडि़यों से भरा है. इस पर पानी मुहैया होना भी मुश्किल है, जो संकरे कुओं में ही मिलता है. इस इलाके में केवल ऊंटों के दम पर ही सरहद की निगरानी कर पाना मुमकिन है.

ऊंट दिनभर में कम से कम 4 से 5 किलोमीटर तक चल लेता है. ऊंट की ज्यादा ऊंचाई के चलते इस पर बैठा सवार दूर तक देख सकता है. रेतीली जमीन पर भी यह आसानी से दौड़ सकता है.

सब से बड़ी बात यह है कि ऊंट को दिशा की जबरदस्त जानकारी होती है और इसीलिए इसे रात के समय चौकसी के लिए सब से बेहतर समझा जाता है.

देश की हिफाजत करने वाली बीएसएफ के लिए ऊंट बहुत ही अहम पशु है. इस का इस्तेमाल केवल सवारी या चौकसी करने के लिए ही नहीं होता, बल्कि इस का इस्तेमाल सरहद पर बनी चौकियों तक जवानों को खाना पहुंचाने के लिए भी होता है.

इस के अलावा यह बहुत से सामान जैसे चिट्ठियां, दवाएं, सिलैंडर वगैरह पहुंचाने के काम आता है.

ऊंट उन रेतीले इलाकों में भी पहुंच सकता है, जहां दूसरे वाहन नहीं पहुंच पाते. ऊंट की इन्हीं खासीयतों के चलते राजस्थान के रेतीले इलाकों और गुजरात की दलदली जमीन पर बीएसएफ इसे इस्तेमाल करती है.

बीएसएफ की जरूरत

कच्छ और सिंध के निकट 7 सौ किलोमीटर की सरहद में आपराधिक हरकतें बहुत ज्यादा होती हैं. बीएसएफ इस से निबटने के लिए कैमल सफारी का आयोजन भी करती है. इस में वह स्थानीय लोगों को सरहद के पास तक ले कर जाती है और सरहद पर होने वाले अपराधों के बारे में बताती है. इस से बीएसएफ को गांव वालों की ओर से काफी मदद भी मिलती है.

तस्करों और घुसपैठियों को कई बार हमारे जवानों ने ऊंटों पर बैठ कर ही पकड़ा है. गुजरात में साल 2001 में जब भूकंप आया, तो ऊंटों पर सवार जवान ही सब से पहले पहुंच पाए थे, पर अब ऊंटों को ले कर बीएसएफ और गृह मंत्रालय के लिए चेतावनी की घंटी बज चुकी है.

ऊंटों के प्रजनन का काम न तो कोई सरकारी एजेंसी और न ही बीएसएफ देखती है. बीएसएफ तो गांव वालों से या फिर मेलों से 5 से 10 साल की उम्र के ऊंटों को खरीदती है. खरीदने के बाद इन ऊंटों को 21 दिन तक अलग रखा जाता है और इन्हें होने वाली बीमारियां खासकर सुर्रा बीमारी के टीके लगाए जाते हैं.

इस के बाद इन को जोधपुर के सब्सिडरी ट्रेनिंग सैंटर में ट्रेनिंग दी जाती है. बीएसएफ एक ऊंट को 16 सालों तक इस्तेमाल में लेती है, फिर उस की नीलामी कर देती है.

ऊंटों की तस्करी

राजस्थान सरकार ने ऊंटों को राज्य से बाहर ले जाने पर पाबंदी लगा रखी है. इस के बावजूद हर रोज कम से कम 2 सौ ऊंटों की तस्करी राजस्थान से हो रही है. यह सारी तस्करी बागपत, उत्तर प्रदेश के एक गिरोह द्वारा की जा रही है, जिस में राजस्थान और हरियाणा के बहुत से पुलिस वालों की मदद ली जाती है.

सवाल उठता है कि ये ‘गरीब किसान’ सैकड़ों ऊंटों को खरीदने के लिए पैसा कहां से लाते हैं? एकएक ऊंट की कीमत लाखों रुपए में होती है और जैसेजैसे इन की तादाद कम हो रही है, इन की कीमत में इजाफा ही हो रहा है. कौन इन्हें पैसा दे रहा है?

सैकड़ों ऊंट बंगलादेश जा रहे हैं. तमाम ऊंट बागपत, मेरठ और हैदराबाद में मारे जा रहे हैं. दर्जनों ऊंट दिल्ली से सटे मेवात इलाके में लाए जाते हैं और मारे जाते हैं.

जरा सोचिए कि क्या यह केवल ऊंटों के मांस के लिए हो रहा है? इन्हें दिल्ली या आसपास के इलाकों में क्यों लाया जा रहा है? क्या कुछ लोगों ने पिछले 10 सालों में अचानक ऊंट के मांस का स्वाद चख लिया है?

ऊंट का मांस सूखा, कड़ा, तेज गंध वाला होता है. इसे खा पाना और पचाना बहुत ही मुश्किल होता है. ऊंट के मीट को पकाने में ही बहुत अधिक समय लगता है. खाने के लिहाज से कोई अच्छी पसंद नहीं कहा जा सकता, तो फिर कहां और क्यों जा रहे हैं ऊंट?

बीएसएफ अगर अपने बेड़े में आधे ऊंट ही शामिल कर पाई, तब अगले 5 सालों में क्या हालात होंगे? ऊंटों के हिमायती एक संगठन ने पिछले 3 सालों में 15 सौ से ज्यादा ऊंट पकड़े हैं, जो तस्करी के लिए ले जाए जा रहे थे.

बड़ा सवाल यही है कि ऐसे हालात में ऊंटों को बचाने के लिए राजस्थान और हरियाणा की सरकारें क्या उपाय कर रही हैं?

VIDEO : दीपिका पादुकोण तमाशा लुक

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