बोल्ड सीन देने में माहिर हैं ये अभिनेत्रियां

बौलीवुड में फिल्म रिलीज होने से पहले उसे सेंसर बोर्ड देखती है. सेंसर बोर्ड न्यूडिटी और सेक्शुअलिटी की इजाजत नहीं देता है. लेकिन विदेशों में इस तरह के सीन्स पर कोई आपत्ति नहीं होती. बौलीवुड की कई एक्ट्रैसेस विदेशी फिल्मों और सीरियल्स में न्यूड और इंटीमेट सीन दे चुकी हैं. ऐसी ही एक्ट्रैसेस पर डालते हैं एक नजर…

–  बौलीवुड में प्रियंका को हॉट एक्ट्रैस के तौर पर जाना जाता है. उन्होंने ‘क्वांटिको’ से इंटरनेशनल टीवी पर डेब्यू किया. इस शो में प्रियंका के सेक्स सीन खूब सुर्खियां बटोर चुके हैं.

–  ‘मासूम’ और ‘हद कर दी आपने’ जैसी फिल्मों में नजर आईं हेलन बोरडी ने 1999 में अमेरिकन-इंडो ड्रामा टेल्स ऑफ़ द कामसूत्र 2 : मानसून में न्यूड सीन दिए थे.

– ‘मेरा नाम जोकर’ में न्यूड सीन देकर सिमी ग्रेवाल ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं. लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि इसके करीब 2 साल बाद उन्हें अमेरिकन फिल्म ‘सिद्धार्था’ में पूरी तरह न्यूड देखा गया था.

– अनु अग्रवाल ने शॉर्ट फिल्म ‘द क्लाउड डोर’ में काम किया. मणि कौल के डायरैक्शन में बनी इस फिल्म में अनु ने शाद अली के भाई मुराद अली के साथ न्यूड सीन दिया था.

– ‘गुलाब गैंग’ और ‘पार्च्ड’ जैसी फिल्मों की एक्ट्रैस तनिष्ठा चटर्जी ने 2015 में ऑस्ट्रेलियन रोमांटिक ड्रामा ‘अनइंडियन’ में न्यूड सीन दिए थे.

– ‘हेट स्टोरी’ फेम पाउली डैम फिल्म ‘मशरुम्स’ यानी ‘चत्रक’ में अनुब्रत बसु के साथ इंटिमेट होती नजर आती हैं. ये सीन्स असली हैं. इस इंडो-फ्रेंच फिल्म के सीन्स पर बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में काफी बवाल हुआ था.

– लीना यादव के डायरैक्शन में बनी फिल्म ‘पार्च्ड’ में राधिका आप्टे ने न्यूड सीन्स दिए हैं. मसलन एक सीन में उन्होंने तनिष्ठा चटर्जी और एक अन्य सीन में आदिल हुसैन के साथ न्यूड सीन दिया है.

– फिल्म ‘कामसूत्र 3D’ खूब विवादों में रही थी. फिल्म में शर्लिन चोपड़ा ने कई न्यूड और सैक्स सीन दिए थे.

– धार्मिक शो ‘यात्रा’ को होस्ट कर चुकीं दीप्ति भटनागर ने 1997 में ‘इन्फर्नो’ में खूब बोल्ड सीन दिए थे. फिल्म में उनके अपोजिट हॉलीवुड एक्टर डॉन विल्सन लीड रोल में थे.

जब सामने आया था इन अभिनेत्रियों का MMS

बात बॉलीवुड की हो और विवाद का जिक्र ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता है. एक कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि जिसका जितना नाम होता है, वह उतना ही ज्यादा बदनाम भी होता है. बॉलीवुड के सितारे इसमें सबसे आगे हैं. बॉलीवुड में शायद ही कोई ऐसा अभिनेता या अभिनेत्री होगी जिसका नाम विवादों में ना आया हो. हर कोई किसी ना किसी वजह से मीडिया की सुर्खियों में छाया रहता है. आज हम यहां अभिनेताओं की नहीं बल्कि अभिनेत्रियों की बात करेंगे. हम बॉलीवुड की उन अभिनेत्रियों के बारे में आपको बताएंगे जो अपने एमएमएस की वजह से सुर्खियों में छायी रही थीं.

बॉलीवुड की ज्यादातर अभिनेत्रियों के नाम विवादों से जुड़े हुए हैं. अब कंगना को ही ले लीजिये, भले ही वह बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्री हैं, लेकिन उनका नाम कई बार लड़ाई-झगड़ा करने में आ चुका है. लेकिन आज हम लड़ाई-झगड़े नहीं बल्कि उन एमएमएस की बात करेंगे जिनकी वजह से अभिनेत्रियां लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही हैं.

करीना कपूर

इनमें सबसे पहला नाम आता है करीना कपूर का, करीना और उनके पुराने ब्यॉयफ्रेंड शहीद कपूर के बारे में कौन नहीं जनता. जब ये दोनों साथ थे तब इनका एक किस वाला एमएमएस काफी वायरल रहा था. एक रेस्टोरेंट में दोनों को किस करते हुए किसी ने उनकी फोटो ले ली थी. फोटो वायरल होने के बाद करीना ने केस भी किया था.

प्रीती जिंटा

प्रीती जिंटा भी एक बार अपने एमएमएस की वजह से चर्चा का विषय बन चुकी हैं. होटल के बाथरूम में बिना कपड़ों के इनका एमएमएस खूब वायरल हुआ था. वह बाथरूम में बिना कपड़ों के शीशे के सामने खड़े होकर शावर ले रही थीं. यह फोटो आने के बाद काफ़ी हल्ला मचा था.

मल्लिका शेरावत

इनका नाम आते ही लोगों के दिमाग में अपने आप ही आ जाता है कि इनके लिए यह सब कोई नई बात नहीं है. इनका भी एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह बिना कपड़ों के एक विस्तर पर लेटी हुई थीं. वहां मल्लिका ने किसी अंजान विदेशी के साथ सम्बन्ध भी बनाया था.

सोनाक्षी सिन्हा

सोनाक्षी का नाम इस तरह के विवाद में आएगा ये किसी ने सोचा भी नहीं होगा. लेकिन कुछ दिनों पहले सोनाक्षी का भी एक एमएमएस इन्टरनेट पर वायरल हो चुका था. एमएमएस में दिखने वाली लड़की की पहचान दबंग अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा के रूप में की गयी है, जिसमें वह अपने घुटनों के बल झुकी हुई हैं और उनके पीछे कोई व्यक्ति खड़ा है.

राधिका आप्टे

राधिका का नाम भी एक बार एमएमएस मामले में सामने आ चुका है. इनकी भी एक फोटो इन्टरनेट पर वायरल हुई थी, जिसमे वह अपने कपड़े खोलकर सामने बैठे हुए व्यक्ति को कुछ दिखा रही थीं.

रात को तो छम्मक की जान ही निकल गई

VIDEO : अगर प्रमोशन देने के लिए बौस करे “सैक्स” की मांग तो…

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बातूनी बच्चों से कैसे निबटें

कानपुर के मालरोड पर बने एक पब्लिक स्कूल की बात है. कक्षा 4 में पढ़ने वाला छात्र प्रदीप हमेशा किसी न किसी से बात करता रहता था. ऐसे में स्कूल के बच्चे परेशान रहते थे. कई बार तो वह टीचर से भी ऐसे सवाल करता था कि टीचर को समझ में नहीं आता था कि वह उसे कैसे समझाए.

एक दिन स्कूल में प्रार्थना के दौरान प्रदीप ने अध्यापकों से प्रार्थना को ले कर कई सवाल कर डाले. इस से उस के दोस्त और टीचर के साथ प्रिसिंपल भी परेशान हो गए. जब प्रदीप के सवाल खत्म नहीं हुए तो प्रिसिंपल ने टीचर से कहा कि प्रदीप के मुंह पर टेप चिपका दो. टीचर ने प्रदीप के मुंह पर भूरे रंग की टेप चिपका दी. इस के बाद वह क्लास में गया तो वहां सभी बच्चे उस का मजाक उड़ाने लगे. परेशान हो कर प्रदीप वहां से बाहर चला आया.

इसी स्कूल में उस की मां क्षमा टीचर थी. दूसरे पीरियड की घंटी बजी तो प्रदीप मां के पास गया. मां ने पहले उस के मुंह पर से टेप हटाई और उस से इस के बारे में पूछा तो उस ने घटना की जानकारी दी. क्षमा ने प्रिसिंपल से बात की. प्रिंसिपल ने कहा कि प्रदीप बहुत बातूनी बच्चा है,

ऐसे में उस की वजह से पूरी क्लास और स्कूल डिस्टर्ब होता है. काफी समझानेबुझाने पर मामला सुलझा. प्रिंसिपल उसे क्लास में लेने को तैयार नहीं थे तो क्षमा ने पिं्रसिपल और टीचर के खिलाफ बच्चे के साथ मारपीट का मुकदमा दायर करने की धमकी दे दी.

हंगामा भी करते हैं बातूनी बच्चे

प्रदीप जैसे बातूनी बच्चे होना कोई नई बात नहीं है. बहुत से बच्चे ऐसे सवाल करते हैं कि उन के जवाब देने मुश्किल हो जाते हैं. ऐसे बातूनी बच्चे केवल बातें ही नहीं बनाते बल्कि कई बार ये अजबगजब शरारतें भी करते हैं, जिस की वजह से बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है.

नेहा को शिकायत है कि वह अपने बच्चे को जब भी किसी होटल में ले जाती है, वह वहां खाने की चीजों को ले कर बहुत सवाल करता है. इस के बाद कई खाने वाली चीजें मंगा लेता है और थोड़ाथोड़ा खा कर छोड़ देता है.

नेहा कहती है कि वह हद से ज्यादा बातें तो बनाता ही है, कई बार होटल में प्लेट और गिलास भी तोड़ देता है, जिस वजह से कई बार न चाहते हुए भी नेहा को बच्चे पर हाथ उठाना पड़ता है. बातूनी बच्चे केवल छोटी उम्र में ही परेशान नहीं करते, बड़े हो कर भी वे अपनी बातों से लोगों को परेशान करते हैं.

अनीता के जुड़वां बच्चे हैं. मजेदार बात यह है कि दोनों ही बहुत बातूनी हैं. स्कूल से ले कर घर तक दोनों की बातें चलती रहती हैं. बातों के चक्कर में वे स्कूल का होमवर्क भी नहीं करते. इस की वजह से स्कूल में रोज उन को सजा मिलती है. अनीता को समझ में नहीं आता कि वह कैसे अपने बच्चों को समझाए.

कई बार बच्चों का तनाव पति और घर के दूसरे सदस्यों पर निकल जाता है, उन से झगड़ा हो जाता है. बच्चों का तनाव घरपरिवार के संबंधों से ले कर दोस्तों तक पर भारी पड़ता है. अनीता कहती है कि उस ने अपने बच्चों की देखभाल के लिए नौकरानी रखी थी. बच्चों ने उसे इतना परेशान किया कि वह नौकरी छोड़ कर चली गई. वह बोली, ‘दीदी, आप के बच्चों को संभालना बहुत ही मुश्किल काम है.’

प्यार से संभालिए ऐसे बच्चे

बातूनी बच्चों को तनाव या गुस्से से मत संभालिए. उन्हें प्यार से संभालें. कई बार ऐसे बच्चों की हरकतों पर लोग गुस्सा हो जाते हैं और बच्चों के साथ मारपीट या सजा देने लगते हैं.

फिजियोथेरैपिस्ट और पेरैंट्स कोच नेहा आनंद कहती हैं, ‘‘बच्चों का ज्यादा बात करना, उन के द्वारा तरहतरह के सवाल किए जाना स्वाभाविक प्रक्रिया है. कई बार पेरैंट्स, बड़े भाईबहन, रिश्तेदार या टीचर इन सवालों को ठीक से जवाब नहीं देना चाहते. वे बच्चे को बिना ठीक से समझाए उस का मुंह बंद कराने के लिए चुप करा देते हैं. कई बार डांटडपट देते हैं. जब इस से भी बात नहीं बनती तो वे मारपीट या सजा देने तक पहुंच जाते हैं.’’

नेहा आनंद आगे बताती हैं, ‘‘जब बच्चा सवाल करे तो उसे धैर्यपूर्वक सुनें. सवाल गलत हो तो भी उस को प्यार से समझाएं. बच्चे की जिज्ञासा जब पूरी हो जाएगी तो वह संतुष्ट हो जाएगा. अगर सही से बच्चे को समझाया नहीं गया तो उस के मन में गलत बात घर कर जाएगी. ऐसे में कई बार बच्चों का मानसिक विकास रुक जाता है. यही वजह है कि आज बच्चों की शिक्षा में ऐसे तमाम सब्जैक्ट जोड़े गए हैं, जहां उन को सवाल करने की पूरी आजादी दी जाती है. सही जवाब न मिलने से बच्चा कुंठित हो जाता है, वह अपने सवालों के जवाब के लिए दूसरे लोगों के पास जा सकता है, जो हो सकता है कि सवाल के जवाब तो गलत दें ही, उस को गुमराह भी कर बैठें. पेरैंट्स को बच्चों के ये सवाल बहुत महत्त्वपूर्ण नहीं लगते. सही मानो में देखें तो बच्चों के लिए ये सवाल बड़े उपयोगी होते हैं.’’

सवाल दर सवाल

बातूनी बच्चे असल में एनर्जी से भरपूर और ऐक्टिव होते हैं. जब ऐसे बच्चों के साथ सही व्यवहार नहीं होता तो वे चिड़चिड़े और जिद्दी हो जाते हैं. अगर इन बच्चों को सही तरह से संभाल लिया जाए तो ये बहुत इंटैलिजैंट और जीनियस हो जाते हैं. सवाल करने के समय यदि इन बच्चों को रोका जाता है या इन्हें सही जवाब नहीं दिया जाता तो ये दब्बू बन जाते हैं. इन की सवाल करने की आदत खत्म हो जाती है. इस से उन का स्वाभाविक विकास प्रभावित होता है. इसलिए जरूरी है कि बच्चों की बातों को ठीक से सुना जाए और सही तरीके से उस का जवाब दिया जाए. यह बच्चों के स्वाभाविक विकास में सहायक होता है. बच्चे जिज्ञासू स्वभाव के होते हैं. वे अपने आसपास की चीजों को समझना चाहते हैं. जो बच्चे बातूनी होते हैं उन को एक्सट्रोवर्ट कहा जाता है. उन से किसी भी विषय पर बात करना अच्छा लगता है.

ऐसे बच्चों के सवालों के जवाब देने चाहिए. उन को हतोत्साहित नहीं करना चाहिए. ऐसे बच्चों को संभालना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है पर संयम से बात कर के संभाला जा सकता है.

ऐसे बच्चों से स्नेहपूर्वक बात करनी चाहिए. इस से ये अपनी बात को सरलता से कह लेते हैं. ऐसे बच्चों को जब संभाल लेंगे तो उन को सजा देने की जरूरत नहीं होगी. बच्चे भी अपने सवाल कर के आगे बढ़ सकेंगे. पेरैंट्स के साथसाथ ऐसे बच्चों को टीचर को भी सही तरीके से संभालना चाहिए, तभी इन का पूर्ण विकास हो सकेगा.

थोड़ा प्यार, थोड़ी समझ से संभालें अपने लाड़लों को

बातूनी यानी एक्सट्रोवर्ट बच्चों को संभालने के लिए सावधानीपूर्वक प्रयास करने चाहिए. कुछ टिप्स के सहारे यह काम सरल हो सकता है. इन टिप्स को धीरेधीरे बच्चों के साथ व्यवहार में ढाल लेंगे तो बातूनी बच्चों को सुधारा जा सकेगा :

–    बच्चों को बात करने पर कभी हतोत्साहित न करें. बच्चे बातों के जरिए ही अपनी फीलिंग्स और इमोशंस को जाहिर करते हैं.

–    कई बार वे आप का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ऐसे समय सवाल करते हैं जब आप व्यस्त होते हैं. इस दौरान भी बच्चों को झिड़कने के बजाय सही तरह से जवाब दें.

–    ऐसे बच्चों को संभालने के लिए घर में 10 से 15 मिनट का खेल खेलें, उस में उन्हें शामिल करें और उन्हें भी अपने साथ उतनी देर चुप रहने को कहें.

–    बच्चों की बातों को ध्यानपूर्वक सुनना शुरू करेंगे तो वे भी आप की बातें सुनेंगे. बच्चों के साथ बात करने से आपस में सामंजस्य बैठाना सरल होगा.

–    बच्चे एनर्जी का पावरहाउस होते हैं. उन की एनर्जी को सही दिशा में लगाना जरूरी होता है. आर्ट, क्राफ्ट, पेंटिंग और डांस जैसी गतिविधियों में उन को लगा कर उन की एनर्जी को सही दिशा में ले जा सकते हैं.

–    बच्चों को किताबें पढ़ना अच्छा लगता है. आप उन को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करें. इस से वे अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकेंगे, हर वक्त आप से सवाल नहीं करेंगे.

मोहब्बत पर भारी सियासत

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से महज 35 किलोमीटर दूर रायसेन जिले का एक कस्बा है, उदयपुरा. इस कस्बे की गिनती पिछड़े इलाकों में शुमार होती है. हालांकि आधुनिकता और नए गजेट्स उदयपुरा भी पहुंच चुके हैं, लेकिन वे चीजें इस कस्बे के पिछड़ेपन की पहचान मिटाने में नाकाम साबित हुई हैं.

उदयपुरा की राजनैतिक पहचान ठाकुर रामपाल सिंह हैं, जो इन दिनों राज्य के लोक निर्माण विभाग के मंत्री हैं. राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले जानते हैं कि जिन इनेगिने नेताओं से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के घरेलू संबंध हैं उन में से रामपाल सिंह भी हैं. विदिशा रायसेन संसदीय क्षेत्र से लगभग एक साथ राजनैतिक सफर शुरू करने वाले ये दोनों नेता एकदूसरे पर आंख बंद कर के विश्वास करते हैं. साल 2006 में विदिशा लोकसभा सीट से उपचुनाव की वजह से शिवराज सिंह चौहान की जिद ने रामपाल सिंह को ही उम्मीदवार बनाया गया था.

हालांकि रामपाल सिंह तब इतने बड़े और लोकप्रिय नेता नहीं थे, लेकिन उन्होंने भाजपा का परंपरागत गढ़ ढहने नहीं दिया था और भाजपा व शिवराज सिंह चौहान का भरोसा कायम रखा था. 2013 के विधानसभा चुनाव में वे रायसेन की ही सिलवानी सीट से जीते तो शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें कैबिनेट में शामिल किया था.

यह रामपाल सिंह की खूबी ही कही जाएगी कि कभी उन का नाम किसी विवाद में नहीं आया. वे आमतौर पर शांत रहने वाले नेता हैं. उन की पहुंच सीधे पार्टी आलाकमान तक है. भोपाल के शिवाजी नगर के लिंक रोड स्थित उन के सरकारी बंगले पर दूसरे मंत्रियों जितनी भीड़भाड़ नहीं दिखती. जो 2-4 लोग दिखते भी हैं वे उन के क्षेत्र उदयपुरा के भाजपा कार्यकर्ता या फिर मतदाता होते हैं.

रामपाल सिंह का पैतृक घर उदयपुरा के लक्ष्मी चौक मोहल्ले में है. वह पैतृक घर किसी चुनाव के वक्त या महत्त्वपूर्ण तीज त्यौहारों पर जा पाते हैं. जब भी वे उदयपुरा में होते हैं तो सभी से खासतौर पर अड़ोसियोंपड़ोसियों से मिल कर उन की कुशलक्षेम पूछते हैं. ऐसा सिर्फ नेतागिरि के लिए नहीं, बल्कि खुद के मिलनसार स्वभाव की वजह से होता है. शायद इसी विनम्रता के चलते उन की छवि अडि़यल और अक्खड़ ठाकुर की नहीं बन पाई.

रामपाल सिंह के घर के ठीक सामने एक किसान चंदनसिंह रघुवंशी का घर है. पड़ोसी होने के नाते दोनों में पारिवारिक संबंध थे. मंत्री बनने के बाद रामपाल सिंह का अधिकांश वक्त भोपाल में ही बीतता था, लिहाजा अपने क्षेत्र की बात तो दूर मोहल्ले और घर की जानकारियां भी उन्हें पहले की तरह नहीं रहती थीं.

उन्हें तो यह भी नहीं मालूम था कि उन के मंझले बेटे गिरजेश प्रताप सिंह ने चोरीछिपे चंदनसिंह की बेटी प्रीति से शादी कर ली है. 28 वर्षीय प्रीति खासी खूबसूरत थी और 10वीं क्लास से आगे नहीं पढ़ पाई थी. यही हाल गिरजेश का था, उस की भी पढ़ाईलिखाई में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी. दसवीं के बाद उस ने भी पढ़ाई से नाता तोड़ लिया था.

बीती 17 मार्च को सोशल मीडिया पर एक सनसनीखेज पोस्ट तेजी से वायरल हुई, जिस में लिखा था कि मंत्री रामपाल सिंह की बहू ने घर में फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली है. इस पोस्ट ने हर किसी को चौंकाया, जिस में लिखी इबारत का सार यह था कि सुबह तड़के 5 बजे रामपाल सिंह की बहू प्रीति रघुवंशी ने उदयपुरा स्थित अपने घर में फांसीं लगा कर जान दे दी है.

इस वायरल पोस्ट में प्रीति का एक फोटो भी संलग्न था, जिस में वह एक मंदिर के प्रांगण में रेलिंग से टिकी हुई दिखाई दे रही थी. सफेद गुलाबी रंग का सूट पहने प्रीति के चेहरे पर सौम्य मुसकराहट थी और वह फोटो में काफी खुश नजर आ रही थी.

जिस ने भी इस पोस्ट को देखा, पढ़ा उन में से हर किसी को पूरा किस्सा तो समझ नहीं आया, लेकिन इस पोस्ट को अधिकतर लोगों ने फारवर्ड किया. खुद रामपाल सिंह सहित उन के जानने वाले हैरान थे कि गिरजेश की तो अभी शादी ही नहीं हुई है, फिर प्रीति को क्यों उस की पत्नी बताया जा रहा है. जबकि पोस्ट में साफ तौर पर प्रीति को गिरजेश की पत्नी बताया गया था.

रामपाल सिंह के बेहद नजदीकी और रिश्तेदार ही यह जानते थे कि 2 दिन पहले ही गिरजेश की सगाई बुंदेलखंड इलाके के टीकमगढ़ जिले से 60 किलोमीटर दूर खरियापुर में एक किले में हुई, फिर प्रीति उस की पत्नी कैसे कहीं जा रही है.

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17 मार्च की सुबह करीब 6 बजे प्रीति की मां रामाबाई जब उस के कमरे में पहुंची तो वहां का नजारा देख कर सन्न रह गईं. उन की लाडली बेटी फांसी के फंदे पर झूल रही थी. उन्होंने शोर मचाया तो वे घर के सारे सदस्य प्रीति के कमरे की तरफ दौड़े.

रामपाल सिंह के परिवार की तरह चंदन सिंह का परिवार भी संयुक्त है. सभी ने मिल कर आहिस्ता से प्रीति को नीचे उतारा और उस की नब्ज टटोली तो वह बंद हो चुकी थी. कुछ देर सोचविचार के बाद प्रीति को उदयपुरा के अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उस के मृत होने की पुष्टि कर दी.

सुबह 8 बजे से ले कर 10 बजे तक क्या हुआ, यह किसी को कुछ खास नहीं मालूम, लेकिन जो होने जा रहा था वह किसी हाहाकार से कम नहीं था. प्रीति की मौत की पुष्टि हो जाने के बाद एकाएक ही न केवल उदयपुरा, रायसेन और भोपाल बल्कि राज्यभर का पारा चढ़ते सूरज के साथ गरमा उठा था.

अस्पताल में खासी भीड़ जमा हो गई थी. इसी भीड़ के सामने प्रीति ने पिता ने यह रहस्योद्घाटन किया कि प्रीति की शादी पिछले साल 20 जून को मंत्री रामपाल सिंह के बेटे गिरजेश के साथ भोपाल के जवाहर चौक स्थित आर्य समाज मंदिर में हुई थी.

चंदन सिंह के इस रहस्योद्घाटन या स्वीकारोक्ति कुछ भी कह लें से मामले ने सियासी तूल भी पकड़ लिया. बवाल उस वक्त और मचा जब अपनी शिकायत उन्होंने उदयपुरा थाने में दर्ज कराई.

इस शिकायत से बहुत कुछ के साथ एक प्रेमकथा भी सामने आई. साथ ही सामने आई एक कस्बाई युवती की बेबसी की कहानी, जिस में उस के प्रेमी ने पहले उस के साथ चोरीछिपे शादी की और फिर मांबाप को दबाव में ले कर दूसरी जगह भी सगाई कर डाली. यानी प्यार में धोखा भी दिया.

प्रीति और गिरजेश बचपन से एकदूसरे को जानते थे. उन की यह पहचान जवानी आतेआते कब प्यार में बदल गई. उन्हें पता ही नहीं चला. एकदूसरे को दिल दे चुके थे और साथ जीनेमरने की कसमें भी खा ली थीं.

चूंकि गांव में खुलेआम मिलनाजुलना जोखिम वाली बात थी, इसलिए दोनों अकसर धार्मिक आयोजनों में मिलते थे और वहां भक्तों की आंखों में धूल झोंक कर प्यार भरी बातें करते रहते थे. गांव देहातों में प्रेमीप्रेमिकाओं के मिलने को लिए मौल, पार्क या कौफी हाउस तो होते नहीं, इसलिए उन्हें खेत खलिहान या बाग बगीचे में जगह ढूंढनी होती है.

धार्मिक या शादी ब्याह जैसे सामूहिक आयोजन भी उन की आंखों की प्यास बुझाने का जरिया बन जाते हैं. प्रीति और गिरजेश का भी यही हाल था.

इस बात का अहसास गिरजेश को भी था और प्रीति को भी कि घर वाले आसानी से नहीं मानेंगे. लेकिन दोनों ही प्रीत में पूरी तरह डूब चुके थे. इसलिए उन की स्थिति असमंजस भरी थी. प्यारप्यार में गिरजेश तो प्रीति से शादी करने का वादा कर चुका था. प्रीति का भी यही हाल था, वह गिरजेश को अपना सब कुछ मान चुकी थी.

गिरजेश में इतनी हिम्मत नहीं थी कि दिल की बात मांबाप से कर सके. लेकिन उस में प्रीति से चोरीछिपे शादी करने का साहस न जाने कहां से आ गया था. जून के दूसरे हफ्ते में दोनों योजना बना कर भोपाल आए. गिरजेश का तो भोपाल आनाजाना लगा रहता था, लेकिन प्रीति इलाज के बहाने अपने भाई को साथ ले आई थी.

14 जून को दोनों नेहरू नगर स्थित आर्य समाज मंदिर गए. वहां उन्होंने मंदिर के प्रभारी प्रमोद वर्मा से शादी करने के लिए जानकारी ली कि क्याक्या औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी और कौनकौन से कागज लगेंगे.

प्रमोद वर्मा के लिए यह हैरानी की बात नहीं थी, क्योंकि रोज कोई न कोई युगल आ कर ऐसी जानकारी हासिल करता था. बाद में उन में से कई शादी के लिए आते थे और भी शादी के ख्वाहिशमंद जोड़ों को बता दिया जाता था कि उन के फोटो, शपथ पत्र और आयु संबंधी प्रमाण पत्र के अलावा 2 गवाहों की जरूरत पड़ेगी.

यह जानकारी ले कर प्रीति और गिरजेश लौट आए और फिर 20 जून को जरूरी कागजात ले कर वहां पहुंच गए. दोनों के साथ नजदीकी रिश्तेदार या दोस्त भी थे. 20 जून की दोपहर को आर्य समाज पद्धति से दोनों की शादी हो गई और उन्हें शादी का प्रमाण पत्र भी जारी हो गया. इस से प्रीति और गिरजेश ने सुकून की सांस ली कि बिना किसी अड़ंगे के शादी संपन्न हो गई.

जुदा होते वक्त दोनों ने भविष्य के बारे में कुछ जरूरी बातें कीं और वापस अपने घर लौट गए. आर्य समाज मंदिर में गिरजेश ने अपना भोपाल का पता लिखवाया था.

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चोरीछिपे शादी तो कर ली पर दोनों को बाद की दुश्वारियों का अंदाजा नहीं था. अलबत्ता यह बात दोनों जानते थे कि ठाकुर सनातनी उसूलों के चलते औलाद की बलि तो चढ़ा सकते हैं पर उसूलों से कोई समझौता नहीं कर सकते.

बहरहाल शादी के 8 महीने तक दोनों अलगअलग रह कर एकदूसरे की जुदाई में तड़पते रहे. लेकिन गिरजेश की हिम्मत अपने मंत्री पिता को सच बताने की नहीं हुई. उलट इस के प्रीति के घर वालों को दूसरे दिन ही मंदिर में शादी की बात पता चल गई थी. लेकिन वे चुप थे, क्योंकि गिरजेश ने प्रीति से वादा किया हुआ था कि वह जल्द ही घर वालों को मना लेगा और उसे ससम्मान बहू की तरह घर ले जाएगा.

दुखी और गुस्साए चंदन सिंह उदयपुरा के अस्पताल में 17 मार्च को बेटी की लाश के पास खड़े हो कर यही आरोप लगा रहे थे, पर उन के निशाने पर गिरजेश नहीं बल्कि रामपाल सिंह थे. जाहिर है कि वे यह मानने को तैयार नहीं थे कि रामपाल सिंह को अपने बेटे की चोरीछिपे की गई शादी की खबर नहीं होगी.

चंदन सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शादी के बाद गिरजेश प्रीति को यह कह कर मायके छोड़ गया था कि वह जल्द ही अपने मांबाप को राजी कर लेगा. प्रीति को उस ने तब तक खामोश रहने के लिए कहा था. रामपाल सिंह ने गिरजेश की सगाई कहीं और तय कर दी तो प्रीति मानसिक तौर पर परेशान हो उठी थी. खुदकुशी के एक दिन पहले उस ने फोन कर पति से बात भी की थी.

चंदन सिंह के मुताबिक शादी से नाखुश मंत्री रामपाल सिंह और उन का पूरा परिवार प्रीति को प्रताडि़त कर रहा था और उन से भी यह कहा जा रहा था कि वे कुछ ले दे कर प्रीति की शादी कहीं और कर दें. रामपाल सिंह ने ही प्रीति की जिंदगी बरबाद की है.

इस बयान के साथ ही प्रीति का लिखा सुसाइड नोट भी सामने आया जो लाल स्याही से लिखा गया था. सुसाइड नोट की भाषा से ही पता चल रहा था कि प्रीति जिंदगी के कितने बड़े इम्तहान और कशमकश से गुजर रही थी और आत्महत्या के सिवाय उसे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था.

हादसे की रात गिरजेश प्रीति के घर के सामने वाले मकान में ही था, सुबह होने के पहले ही वह गायब हुआ था. इस के बाद प्रीति ने गिरजेश को उस का दिया हुआ मोबाइल फोन और 25 तोले सोने के गहने वापस लौटा दिए थे.

अपने सुसाइड नोट में प्रीति ने बारबार अपनी बड़ी गलती के लिए मांबाप से माफी मांगी थी और चंदन सिंह से आग्रह किया था कि वे मम्मी से न लड़ें और न ही चाचा को कुछ कहें.

प्रीति गिरजेश को किस हद तक चाहती थी, इस का अंदाजा उस के सुसाइड नोट से लगता है क्योंकि उस ने कहीं और उस का जिक्र नहीं किया था. तय है इसलिए कि वह गिरजेश की मजबूरी या बेवफाई कुछ भी कह लें समझ गई थी. वह चाहती तो गिरजेश की बेवफाई को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहरा सकती थी.

चंदन सिंह की शिकायत के बाद भी पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया तो राज्य का रघुवंशी समाज आक्रोशित हो उठा. मध्य प्रदेश में गुना, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, होशंगाबाद, बैतूल, नरसिंहपुर, जबलपुर और छिंदवाड़ा जिलों में रघुवंशी बहुतायत में हैं. प्रीति की मौत की खबर सुन कर लोग उदयपुरा पहुंचने लगे थे.

अब मोहब्बत पर सियासत होने लगी थी. भोपाल में कांग्रेसियों ने धरने प्रदर्शन शुरू कर दिए थे. कांग्रेसियों ने शिवराज सिंह मंत्रीमंडल के एक बेदाग छवि वाले मंत्री को घेरने का सुनहरा मौका हाथ से जाने नहीं दिया.

18 मार्च को बड़ी दिक्कत उस वक्त खड़ी हो गई, जब चंदन सिंह रघुवंशी और उन के परिजन इस जिद पर अड़ गए कि रामपाल सिंह प्रीति का शव लें और गिरजेश पति की जिम्मेदारी निभाते उस का अंतिम संस्कार करे. एफआईआर दर्ज न किए जाने पर रघुवंशी समाज ने भी आंदोलन की चेतावनी दे डाली थी और जगहजगह रामपाल सिंह के पुतले भी फूंके जा रहे थे.

दूसरी तमाम जातियों की तरह रघुवंशी जाति का भी अपना गौरवशाली इतिहास और अतीत है, जो इच्छावाकु से शुरू हो कर राम के बेटों लवकुश पर खत्म होता है. रघुवंशी समुदाय बड़े गर्व से खुद को राजा रघु और राम का वंशज बताता है.

यहां असल विवाद यही था जिसे हर कोई समझा कि असल लड़ाई जाति और ठसक की थी. रामपाल सिंह क्षत्रिय राजपूत हैं. हालांकि रसूख और हैसियत में रघुवंशी किसी से कम नहीं बैठते, जिन के बारे में इतिहास में यह दिलचस्प बात दर्ज है कि रघुवंशी जमींदार होते थे और वे खुद खेती नहीं करते थे, बल्कि करवाते थे.

अतीत के कई विवाद और जातिगत पूर्वाग्रह व किस्से कहानियां साकार हो रहे थे. रघुवंशी समुदाय ने जब साफ कह दिया कि मृतका प्रीति को रामपाल बहू मानें तभी उस का अंतिम संस्कार होगा तो अब बारी रामपाल सिंह की भी थी. वे या तो सर झुका कर इस मांग को मान लें या फिर अड़ कर भाजपा और शिवराज सिंह के लिए सिरदर्द खड़ा करें.

जब उन से इस बारे में सवाल किया गया तो वे साफ तौर पर बोले कि बेटे ने शादी कर ली है, यह उन्हें नहीं पता. गिरजेश सामने क्यों नहीं आ रहा, इस सवाल पर रामपाल सिंह का जवाब बड़ा मासूमियत भरा था कि उन की उस से बातचीत हुई है और वह साफ कह रहा है कि उसे फंसाया जा रहा है.

रामपाल सिंह ने अपने बचाव में यह भी कहा कि विपक्ष उन्हें और उन के परिवार को जानबूझ कर इस मामले में घसीट रहा है. यह बयान कितना खोखला है चालाकी भरा था, यह जल्द ही उजागर भी हो गया.

राज्य में माहौल गर्मा उठा था और 18 मार्च को ही उदयपुरा कस्बा पुलिस छावनी में तब्दील हो गया. किसी अनहोनी की आशंका से कोई इनकार नहीं कर रहा था.

कांग्रेस के ताबड़तोड़ हमलों से घबराए भाजपाई सब कुछ जानतेसमझते हुए भी रामपाल सिंह के बचाव को अपना धर्म या अधर्म जो भी समझ लें, निभा रहे थे. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह कहते पल्ला झाड़ लिया था कि प्रीति रघुवंशी की मौत की जांच चल रही है और जल्द ही सभी तथ्य सामने आ जाएंगे.

गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी रामपाल सिंह का बचाव करते हुए कहा कि सुसाइड नोट में पीडि़ता ने किसी का भी नाम नहीं लिखा है. जांच चल रही है और जांच के बाद दोषियों पर काररवाई की जाएगी.

इधर उदयपुरा के अस्पताल जहां प्रीति का शव रखा हुआ था में भी खासा बवाल मचा हुआ था. इस दिन प्रीति के परिवार वालों ने 3 प्रार्थना पत्र प्रशासन को दिए. इन प्रार्थनापत्रों में पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी की मांग के अलावा रामपाल सिंह से सुरक्षा की मांग की गई थी कि अगर भविष्य में उन को कुछ हुआ तो उस का जिम्मेदार रामपाल सिंह को माना जाए.

रायसेन की कलेक्टर और एसपी पूरी कोशिश कर रही थीं कि जैसे भी हो प्रीति का अंतिम संस्कार हो जाए. पर यह आसान काम नहीं था, क्योंकि रघुवंशी समाज रामपाल सिंह को मंत्री पद से हटाने की मांग करने लगा था. इधर भोपाल में भी कांग्रेसियों की तरफ से बयानबाजी जारी थी. नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का आरोप था कि पूरी सरकार रामपाल सिंह और उन के बेटे को बचाने में लगी हुई है, जबकि प्रथम दृष्टया प्रीति की मौत के जिम्मेदार ये दोनों ही हैं.

रायसेन की कलेक्टर भावना वालिंबे निष्पक्ष जांच की बात करती रहीं तो एसपी किरणलता केरकेड़ा ने साफ तौर पर कहा कि मामले में अभी आरोपों के प्रमाण नहीं आए हैं, जांच जारी है.

रायसेन से भोपाल के आर्य समाज मंदिर गई पुलिस टीम को मंदिर संचालक प्रमोद वर्मा ने प्रीति और गिरजेश की शादी का प्रमाणपत्र सौंपा, जिस की प्रति भी वायरल हुई तो लोगों के दिल से यह शक जाता रहा कि इन दोनों की शादी वास्तव में हुई थी भी या नहीं.

दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता करने वालों के साथसाथ भड़काने वालों की फौज भी इकट्ठा हो गई थी. एक पक्ष के लोगों की राय यह थी कि बगैर एफआईआर दर्ज हुए अंतिम संस्कार हुआ तो सारा मामला बेदम हो जाएगा.

मामला चूंकि ठाकुर रामपाल सिंह का था, इसलिए प्रशासन एफआईआर दर्ज करने की हिम्मत या हिमाकत नहीं कर पा रहा था. अब तक जो हुआ था, उस में गिरजेश की बुजदिली और रामपाल सिंह की चालाकी साफ दिखाई दे रही थी. इस पर यह दोहा सटीक बैठ रहा था कि समरथ को नहीं दोष गुसाईं.

प्रीति अगर जिंदा होती तो जरूर ये नजारे देख और चर्चे सुन कर शर्म से मर जाती. राजनैतिक उठापटक के बीच कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के दफ्तरों में बतियाते कार्यकर्ता अपनाअपना हिसाबकिताब पेश कर रहे थे कि जिस सिलवानी विधानसभा से रामपाल सिंह जीतते रहे हैं, उस में रघुवंशी मतदाताओं की तादाद 40 हजार से ज्यादा है.

ऐसे में अब भाजपा उन्हें सिलवानी तो क्या विदिशा रायसेन की किसी भी विधानसभा सीट से नहीं उतार सकती, क्योंकि हर जगह रघुवंशी वोट खासी तादाद में हैं, जो अब उन्हें नहीं मिलेंगे.

प्रीति के बौखलाए परिजनों ने उत्तेजना और आक्रोश में रामपाल सिंह के खिलाफ कुछ सच्चे और कुछ झूठे आरोप लगा दिए थे, पर इस के बाद क्या होगा यह सोच कर वे घबरा भी उठे थे.

society

अपना दबाव बढ़ाने की गरज से ये लोग दाह संस्कार से मना कर रहे थे, लेकिन स्थिति उस वक्त और अप्रिय हो उठी जब प्रीति के भाइयों ने उस का शव नैशनल हाइवे पर रख कर चक्का जाम करने की धौंस दे डाली.

बात में और दम लाने के लिए प्रीति के चाचा जयसिंह ने खुलासा किया कि प्रीति और गिरजेश की शादी में प्रीति का छोटा भाई नीरज भी मौजूद था. उस ने शादी के फोटो खींचने की कोशिश की थी, लेकिन गिरजेश के साथियों ने उसे फोटो नहीं खींचने दिए थे. शादी का प्रमाणपत्र भी प्रीति को नहीं दिया गया था, इसलिए फरवरी में वे लोग प्रमाणपत्र लेने गए थे.

प्रीति की मां रामाबाई ने नया रहस्योद्घाटन यह किया कि उन्हें शादी की जानकारी 21 जून को ही हो गई थी. कुछ दिन बाद दोनों परिवारों की मीटिंग भी हुई थी, जिस में गिरजेश की मां शशिप्रभा ने दोटूक कहा था कि वे प्रीति को अपनी बहू नहीं मानेंगी और जरूरत पड़ी तो गिरजेश को गोली मार देंगी.

इन सब बातों के बीच अंतिम संस्कार खटाई में पड़ता नजर आया तो समाज के कुछ बुजुर्ग आगे आए और सभी को समझाया. फलस्वरूप प्रीति के घर वाले क्रियाकर्म करने के लिए तैयार हुए. सूरज ढलने के कुछ देर पहले प्रीति को मुखाग्नि उस के भाई ने दी. प्रीति को बाकायदा दुलहन की तरह सजा कर, सुहागन की तरह दुनिया से विदा किया गया.

अब तक ये बातें बहुत आम हो चुकी थीं कि प्रीति और गिरजेश का प्रेमप्रसंग बीते 6 सालों से चल रहा था और उदयपुरा का बच्चाबच्चा जानता था कि दोनों शादी कर चुके हैं. लेकिन जाने क्यों बेटे की शादी की खबर दुनिया भर की खबर रखने वाले रामपाल सिंह को नहीं थी.

अब तक रामपाल सिंह की खासी छीछालेदर हो चुकी थी. व्यक्तिगत के बजाए हर कोई राजनैतिक नफानुकसान देखने और आंकने लगा था. कांग्रेस ने जगहजगह घेराव कर विधानसभा में हल्ला किया और विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान कर डाला, क्योंकि वे सदन में इस मामले पर बहस की इजाजत नहीं दे रहे थे.

एक बार दूसरे दिन फिर से पाला बदलते रामपाल सिंह ने चौंका देने वाला यह बयान दे डाला कि वे प्रीति को बहू का दर्जा देने को तैयार हैं, क्योंकि बेटे गिरजेश ने उस से शादी की थी.

इतना ही नहीं पत्नी के अंतिम संस्कार तक घर में दुबके बैठे गिरजेश को उन्होंने प्रीति की खारी उठाने भी भेज दिया. खारी का कार्यक्रम मुखाग्नि के तीसरे दिन होता है. कुछ लोग इसे तीजा भी कहते हैं. यह और बात है कि गिरजेश के साथ करीब 60 लोगों की फौज थी.

प्रीति के अंतिम संस्कार के बाद उस का यह डर सच साबित हुआ कि उस की मौत के बाद उस के घर वालों को परेशान किया जा सकता है. चंदन सिंह एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश करते रहे और पुलिस जांच की बात कहते उन्हें टालती रही. अब नेता तो नेता आम लोग भी शिवराज सिंह को कोसने लगे कि वे बडे़ फख्र से खुद को मामा तो कहलवाते हैं, लेकिन प्रीति नाम की भांजी को इंसाफ नहीं दिला पा रहे हैं.

23 मार्च को जब चंदन सिंह को बयान देने के लिए पुलिस ने भोपाल बुलाया तो उन से ऐसेऐसे बेतुके सवाल पूछे गए कि उन की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अस्पताल में भरती कराना पड़ा. प्रीति मांग भरती थी या नहीं, मंगलसूत्र और दूसरे सुहाग चिन्ह पहनती थी या नहीं, जैसे सवालों से जाहिर हो गया कि सत्ता पक्ष अब अपनी पर उतारू हो आया है.

इन पंक्तियों के लिखे जाने तक पुलिस ने गिरजेश या किसी और के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की थी. चंदनसिंह का परिवार हैरानपरेशान और घबराया हुआ था और उदयपुरा में खुद को असुरक्षित बता रहा था. लेकिन उन की सुनवाई कहीं नहीं हो रही थी. कांग्रेसी पहले की तरहतरह से रामपाल सिंह और शिवराज सिंह चौहान पर हमलावर थे. राज्य में लड़कियां सुरक्षित कैसे हैं, इन नारों को तरहतरह से उछाला जा रहा था.

प्रीति की प्र्रेमकथा का अंत दुखद हुआ, लेकिन विवाद का नहीं जो इस साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव में प्रमुख मुद्दा होगा और इस का असर भाजपा सरकार की छवि पर पड़ना अभी से तय नजर आ रहा है.

चोरीछिपे शादी करने का अंजाम अकसर खतरनाक साबित होता है और हर बार प्रेमी अपने वादे पर खरा उतरे यह जरूरी नहीं. प्रीति की मौत से ये बातें साबित हो रहीं हैं कि जो प्रेमी की बेवफाई पति की बुजदिली और ठाकुरों की ठसक का शिकार हुई.

देखा जाए तो इस मामले का बड़ा गुनहगार गिरजेश है, जिसे मंत्री पुत्र होने का फायदा मिला. प्रीति ने गिरजेश पर विश्वास किया था और एवज में विश्वासघात मिला तो उस ने मौत को गले लगा लिया.

आधार कार्ड की जकड़न

सुप्रीम कोर्ट ने आधारकार्ड पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है. क्या आधार नंबर को टैलीफोन, बैंक अकाउंट, परिचयपत्र, आयकर, पैनकार्ड से जोड़ना अनिवार्य होना चाहिए. दुनियाभर में निजता एक गंभीर मामला बनता जा रहा है. जहां चीन और रूस में सरकारें जानकारी को नागरिकों के अधिकारों को कुचलने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं, वहीं लोकतांत्रिक देशों में इस का उपयोग हर नागरिक के बारे में और जानने व उस को अपना माल बेचने को उकसाने के लिए किया जा रहा है. आधार जैसे तरीके से एकत्र की गई जानकारी की जम कर खरीदफरोख्त हो रही है. फेसबुक, व्हाट्सऐप, गूगल भी जबरन आम नागरिक की जानकारी जमा कर लेते हैं. यही जानकारी फिर नागरिकों को बहलानेफुसलाने में इस्तेमाल करते हैं.

अब आप के मैडिकल रिकौर्ड भी जमा हो रहे हैं. आप किसी भी अस्पताल में चले जाइए, आप का आधारकार्ड भी मांग लिया जाएगा और आधार से जुड़ी आप के खून की बूंदबूंद की जानकारी एक जगह इकट्ठी होती रहेगी. आप का मैडिकल रिकौर्ड अब सरकारी होता जा रहा है. आप का मैडिकल इतिहास गोपनीय होना चाहिए पर हर बड़े अस्पताल में यह बीसियों कंप्यूटरों में पड़ा है. आप का ईसीजी, स्कैन रिपोर्ट, लैब रिपोर्ट, कब किस डाक्टर ने आप को देखा सब कंप्यूटर पर है. जल्द ही आप ने कौन सी दवा कितनी खाई, यह जानकारी भी आधार से जुड़ी फार्मेसी से एक जगह जमा हो जाएगी. आप किसी से कोई बात छिपा नहीं सकेंगे. आप के हर पल पर सरकार का नियंत्रण होगा.

सरकारें चाहेंगी कि आप तंदुरुस्त गुलाम रहें, इसलिए चीन की तरह अंक देना शुरू कर देंगी, जैसे क्रैडिट कार्ड या हवाईजहाज वाले आप को पौइंट्स देते हैं. चीन तो सड़क पर चलते हुए अपने लाखों कैमरों से नागरिकों को देख रहा है और हरदम नागरिकों को अनुशासित कर रहा है. भारत में भी आधार को यदि सरकार की मनचाही छूट मिली तो यही होगा.

यदि मैडिकल डाटा उपलब्ध होगा तो नौकरियां मिलने में जांचा जाएगा. इंश्योरैंस कंपनी प्रीमियम बढ़ा देगी, एयरलाइंस कंपनी टिकट का दाम बढ़ा देगी, मकानमालिक किराया ज्यादा वसूलेगा, स्कूल बच्चों को मातापिता के मैडिकल रिकौर्ड के अनुसार दाखिला देगा. सरकारी या निजी क्षेत्र में पदोन्नति में मैडिकल रिकौर्ड देखा जाएगा. विवाहों में भी इसे इस्तेमाल किया जाएगा. हर नागरिक असल में जल्द ही कंप्यूटर की जंजीरों का गुलाम बनने जा रहा है और कोई कुछ नहीं कर सकता. ये जंजीरें हम ने खुद को पहनाई हैं.

पत्नी का स्वच्छता अभियान

उस दिन सुबहसुबह अपनी पत्नी की कोयल जैसी आवाज सुन कर मैं चौंक गया कि हर पल शेरनी जैसी दहाड़ने वाली मेरी श्रीमतीजी में यह कायापलट कैसे हो गया?

वे प्यार भरी आवाज में बोलीं, ‘‘अजी उठिए और गरमागरम चाय पीजिए.’’

मेरी आंखों को विश्वास ही नहीं हुआ कि ये मेरी ही धर्मपत्नी हैं.

मैं ने डरतेडरते पूछ ही लिया, ‘‘प्रिय, क्या तुम सचमुच मेरी पत्नी ही हो या मैं कोई सपना देख रहा हूं?’’

‘‘हांहां, मैं तुम्हारी ही धर्मपत्नी हूं. चलिए, जल्दी से चाय पी कर फारिग हो जाइए और घर के सारे काम निबटा दीजिए,’’ मेरी ‘स्वीटहार्ट’ मेरे गले में अपनी बांहें डालते हुए बोलीं.

मैं ने किसी अच्छे आज्ञाकारी कुत्ते की तरह अपनी दुम हिलाते हुए कहा, ‘‘ओके डार्लिंग, जब तुम आज हम पर इतनी मेहरबान हो, तो समझो कि घर का सारा काम भी हो ही गया.’’

मेरी महबूबा जोरजोर से हंसते हुए बोलीं, ‘‘यह हुई न मर्दों वाली बात.’’

हमारी सारी पड़ोसनें भी इसलिए तो जलीभुनी रहती हैं कि उन के ‘मर्द’ घर के किसी काम में हाथ नहीं डालते हैं, जबकि मैं हर रोज पत्नी के काम में हाथ बंटाता रहता हूं.

इस के बाद मेरी अप्सरा जैसी पत्नी ने किसी जासूस की तरह राज उगलते हुए कहा, ‘‘आज से मैं अपने महल्ले में ‘स्वच्छता अभियान’ की शुरुआत करूंगी, क्योंकि गलीगली में शोर है कि ‘स्वच्छ भारत’ बनाने के लिए साफसफाई अभियान रफ्तार पकड़ रहा है.’’

मैं ने अपनी समझदार बीवी का आइडिया सुना, तो हैरान रह गया. जिस औरत को टैलीविजन देखने, क्लब जाने का चसका लगा हो, उस के लिए अपने घर को साफसुथरा रखना बहुत मुश्किल काम है.

मैं बुदबुदाया, ‘जेब में नहीं धेला, चढ़ना रेला.’ मतलब, जेब में पैसा नहीं और सफर करना रेल का. अपने घर के अंदरबाहर चाहे गंदगी पसरी हो, पर सनक चढ़ी है महल्ले में ‘स्वच्छता अभियान’ में कुछ करदिखाने की.

मैं ने अपनी स्वप्नसुंदरी पत्नी को टोकते हुए पूछा, ‘‘डार्लिंग, क्या तुम अकेले ही पूरा महल्ला साफ करोगी?’’

‘‘नहींनहीं, मैं अकेले ही इस गंदगी में हाथ नहीं डालूंगी, बल्कि महल्ले की जो औरतें अपना टाइमपास करने के लिए एकदूसरे के घरों में सेंध लगा कर पारिवारिक रिश्तों को तोड़ने में माहिर हैं, उन को एक मंच दिया जा रहा है और मैं उन की रिंग लीडर हूं,’’ मेरी पत्नी किसी पहलवान की तरह अपनी छाती ठोंकते हुए बोलीं.

मुझे अपनी पत्नी की इन बचकानी हरकतों को जान कर बड़ी कोफ्त हुई. मैं फिर बुदबुदाया, ‘पता नहीं, घर में अब कौन सा जलजला आने वाला है.’

मेरी पत्नी मेरा चेहरा देख कर कहने लगीं, ‘‘शायद तुम मेरी कामयाबी के मनसूबे जान कर जलने लगे हो. आखिर मर्द हो न तुम… सारी की सारी अक्ल तुम्हीं में ही है.’’

मैं ने अपनी बीवी को प्यार से समझाया, ‘‘बेगम साहिबा, बड़ी मुश्किल से तुम मेरी जिंदगी में आई हो, फिर ऐसी दिल तोड़ने वाली बातें कर के क्यों मेरी लानतमलानत कर रही हो? आखिर तुम मेरी चांद जैसी खूबसूरत महबूबा हो.’’

थोड़ी देर बाद तिल का ताड़ बनाने वाली मेरी पत्नी जींस व टीशर्ट पहन कर हाथ में झाड़ू पकड़े हुए आईं और कहने लगीं, ‘‘सचसच बताओ कि मैं अब कैसी लग रही हूं?’’

मेरा दिल किया कि पत्नी को डांटते हुए कहूं, ‘तुम ‘स्वच्छता अभियान’ में जा रही हो या किसी फूहड़ मौडलिंग शो में?’ पर अपने दब्बू स्वभाव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह अपने ‘मन की बात’ नहीं कह सका.

तभी बाहर आंगन में बड़े जोर का शोर सुनाई दिया. महल्ले की वे औरतें जो महल्ले की गंदगी को साफ करने जाने वाली थीं, हमारे ही घर की ओर कूच कर रही थीं. साथ ही साथ बैनर व गत्तों पर लिखे नारों का शोर भी बड़ा कानफाड़ू था. ‘गलीगली में शोर है, साफसफाई का जोर है’, ‘जब तक सूरजचांद रहेगा, ‘सफाई अभियान’ का नाम रहेगा’, ‘जब भी नारी ने झाड़ू को उठाया, गंदगी ने सिर नहीं उठाया’, ‘मर्दों को हम देतीं ललकार, औरतों पर न करो अत्याचार’ वगैरह.

तभी मेरी पत्नी ने उन सब पड़ोसनों को कुछ टिप्स दिए कि ‘स्वच्छता अभियान’ को इस ढंग से चलाना है कि मीडिया व दूसरे लोगों को लगे कि सचमुच ही औरतें साफसफाई के प्रति गंभीर हैं. फिर कल जब चहुंओर हमारी चर्चा होगी, तो देखना कि कोई इस गांव को भी गोद ले लेगा. अखबारों में फोटो छपेंगे सो अलग.

इस के बाद वे सभी जब घर से चली गईं, तो मेरा दिल जोरजोर से धड़कने लगा कि पता नहीं मेरी जानलेवा बीवी कौन सा करिश्मा कर के आ जाएंगी कि मेरी बचीखुची जिंदगी भी समाज के लोगों के ताने सुन कर नासूर बन जाए.

मुझे तो दिनभर अपने दफ्तर में भी बौस की खरीखोटी सुननी पड़ती है, जबकि मेरे साथी पीठ पीछे यह कहने से नहीं चूकते हैं, ‘बेचारा क्या करे, यह तो जोरू का गुलाम है.’

दफ्तर से घर आओ, तो काम के बोझ के मारे वैसे ही दम निकल जाता है. और तो और घर का काम भी मेरे कंधों पर टिका है. बस, किसी तरह पत्नी खुश रहे, इसी गम में हर रोज मरताखपता रहता हूं. अगर किसी के पास इस समस्या से निबटने का इलाज है, तो जरूर बताए.

क्या देवेगौड़ा ने अपना इरादा बदल दिया है

पहले यह माना जा रहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा राजनीति से संन्यास ले सकते हैं. उन्होंने बीते दिनों ख़ुद इस तरह के संकेत दिए थे. लेकिन अब कहा जा रहा है कि उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने के अपना इरादा छोड़ दिया है. अब वे 2019 का लोक सभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं.

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक देवेगौड़ा इस बार मैसुरु या मांड्या सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. जबकि अपनी मौज़ूदा हासन सीट वे पौत्र प्रज्जवल रेवन्ना के लिए छोड़ सकते हैं. सूत्रों की मानें तो देवेगौड़ा हालांकि ख़ुद मैसुरु से चुनाव लड़ने में ज़्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं. यही नहीं कर्नाटक में अपनी पार्टी जनता दल-धर्मनिरपेक्ष (जेडीएस) के साथ सरकार चला रही कांग्रेस के लिए भी वे प्रदेश की 16 लोक सभा सीटें ही छोड़ने के मूड में हैं. बाकी 12 सीटों पर वे अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारना चाहते हैं.

सूत्रों की मानें तो देवेगौड़ा की योजना को 2019 की इस संभावना से जोड़कर देखा जा रहा है जब भारतीय जनता पार्टी और उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को केंद्र में सरकार बनाने लायक बहुमत न मिले. ऐसे में देवेगौड़ा खुद को प्रधानमंत्री पद के लिए संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार के तौर पर देख रहे हैं.

ग्लैमरस अंदाज में दिखी टीवी की यह संस्कारी बहू

टीवी की सबसे प्यारी और संस्कारी बहूओं में गिनी जाने वाली कलर्स टीवी के मशहूर सीरियल ‘उतरन’ की ‘इच्छा’ यानी टीना दत्ता एक बार फिर सुर्खियों में आ गईं हैं. सुर्खियों में आने की वजह कोई सिरियल नहीं बल्कि उनका एक फोटोशूट है. टीना अक्सर ही अपने संस्कारी बहू की इमेज से हटकर सोशल मीडिया पर हौट तस्वीरें पोस्ट करती रहती हैं. इस बार फिर वह अपनी खूबसूरत और ग्लैमरस तस्वीरों को लेकर लाइमलाइट में आ गई हैं.

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टीना ने हाल ही में अपने फोटोशूट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की हैं. जिसमें टीना ने लाइट पिंक और गोल्डन कलर के हैवी इवनिंग गाउन पहन रखी है. इन तस्वीरों में वह बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं और यूजर्स उनकी तारीफें करते नहीं थक रहे हैं. हाल ही में कराए इस फोटोशूट में टीना एकदम बार्बी डौल जैसी लग रही हैं, ऐसा फैंस सोशल मीडिया पर उनके कमेंट बौक्स में लिख रहे हैं.

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वैसे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि टीना के संस्कारी बेटी से इस हौट अंदाज ने सभी को चौंका कर रख दिया है. कुछ ही समय पहले टीना ने अमित खन्ना से फोटोशूट कराया था जिसने सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोरी थीं. फोटोशूट में टीना ने न्यूड मौडल की पीठ पर बैठकर पोज दिए थे.

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वैसे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि टीना के संस्कारी बेटी से इस हॅाट अंदाज ने सभी को चौंका कर रख दिया है. बता दें कि ऐश्वर्या राय की बंगाली फिल्म चोखर बाली में भी आप 16 साल की टीना को देख चुके हैं. टीना ने परिणीता में भी एक छोटी सी भूमिका निभाई हैं. इसके अलावा वो 2008 से 2015 तक लगातार उतरन की लीड एक्ट्रेस रही हैं.

VIDEO : मैटेलिक कलर स्मोकी आईज मेकअप

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