कास्टिंग काउच पर खुलकर बोलीं मल्लिका

बौलीवुड अदाकारा मल्लिका शेरावत अपने बोल्ड अवतार के साथ-साथ अपने बेबाक अंदाज के लिए भी जानी जाती हैं. साल 2003 में ‘ख्वाहिश’ फिल्म से डेब्यू करने वाली मल्लिका फिल्मों में अपने किसिंग सीन्स की वजह से सुर्खियों में आई थीं. 2004 में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘मर्डर’ ने तो उन्हें लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचा दिया. लेकिन ये सिलसिला ज्यादा समय तक ना चल सका.

हाल ही में थौमसन रौयटर्स फाउंडेशन ने अपने एक हालिया सर्वे में ये बताया था कि भारत महिलाओं के लिए दुनिया में सबसे खतरनाक देश है. इसी के मद्देनजर महिलाओं की बुरी स्थिति को लेकर मल्लिका यहां पर जमकर बरसी. मल्लिका ने यहां महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी खुलकर बात की. उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि भारत में महिलाओं और लड़कों दोनों के लिए अलग-अलग नियम हैं.

यहां उन्होंने बौलीवुड में अपने साथ हुए कास्टिंग काउच के बारे में भी बहुत कुछ बताया. मल्लिका ने यहां इस बात का भी खुलासा किया कि कैसे उन्‍हें एक फिल्‍म से सिर्फ इसलिए बाहर कर दिया गया क्‍योंकि उन्‍होंने अपने को-स्‍टार के साथ शूटिंग के बाद करीबी बढ़ाने से इंकार कर दिया था. मल्लिका ने बताया, ‘मुझे एक प्रोजेक्‍ट से सिर्फ इसलिए बाहर का रास्‍ता दिखा दिया गया क्‍योंकि हीरो ने कहा था, ‘तुम मेरे साथ नजदीकियां क्‍यों नहीं बढ़ा रही हो? जब तुम औनस्‍क्रीन यह कर सकती हो तो प्राइवेट में ऐसा करने में क्‍या दिक्‍कत है.’ यही वजह है कि मुझे कई प्रोजेक्‍ट्स से हाथ धोने पड़े. दरअसल मेरे साथ जो भी हुआ और आज महिलाओं के साथ जिस तरह का बर्ताव किया जाता है वह यह साफ करता है कि हमारे समाज में महिलाएं किन परिस्थितियों से जूझती हैं.’

मल्लिका ने अपनी जिंदगी का एक अहम वाकया शेयर करते हुए यह भी बताया कि एक शख्स मुझे फोन करके और लेटर लिखकर बदसलूकी किया करता था. उसको इस बात से दिक्कत थी कि मैं छोटी स्कर्ट क्यों पहनती हूं. वह मुझसे कहता कि आप छोटी स्कर्ट क्यों पहनती हैं. उसे इस बात से बेहद दिक्कत थी कि हरियाणा से आई ये लड़की छोटे कपड़े क्यों पहनती है? स्क्रीन पर क्यों ऐसा करती है? उस पर ये पागलपन सवार था कि वह मुझे साड़ी पहनाएगा. वह साड़ी पहनाकर और सिर पर पल्लू लाना चाहता था. जैसा हरियाणा की महिलाएं करती हैं. उसकी अपनी निजी राय हो सकती है लेकिन मैं क्या पहनूंगी या क्या करूंगी यह तय करने वाला वो कौन होता है.

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सुशांत सिंह के पास फिल्में ही फिल्में

बौलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने घमंडी और अड़ियल स्वभाव के चलते हमेशा विवादों में रहते हैं. सुशांत सिंह का लगभग हर निर्देशक व कलाकार के साथ पंगा होता रहता है. इतना ही नहीं अतीत में लगातार उनकी कई फिल्में बौक्स औफिस पर बुरी तरह से दम तोड़ चुकी हैं. इसके बावजूद उनके पास फिल्मों की संख्या कम नहीं हो रही है.

इन दिनों सुशांत सिंह राजपूत सितंबर माह में जैकलीन फर्नाडिस के साथ प्रदर्शित होने वाली  फिल्म ‘‘ड्राइव’’ को लेकर काफी उत्साहित हैं. इसके अलावा इन दिनों वह दो फिल्मों ‘केदारनाथ’ और ‘सोन चिरैया’’ की शूटिंग पूरी करने में व्यस्त हैं. इसके बाद वह नितीश तिवारी व साजिद नाड़ियादवाला की आगामी फिल्म के अलावा कास्टिंग डायरेक्टर फिल्म निर्देशक बने मुकेश छाबरा की फिल्म करने वाले हैं, जो कि हौलीवुड फिल्म ‘‘फाल्ट इन अवर स्टार’’ की रीमेक होगी. इसके अलावा सुशांत सिंह राजपूत का दावा है कि उनके पास छह फिल्में है, जिनकी शूटिंग के लिए वह अभी तक तारीख वह दे नही पा रहे हैं.

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रौनी स्क्रूवाला एक स्पोर्टस मैन की बायोपिक फिल्म का निर्माण करने वाले हैं, जिसमें सुशांत सिंह राजपूत होंगे. चर्चाएं हैं कि सफल फिल्म ‘‘धोनी’’ की सिक्वअल फिल्म ‘‘धोनी 2’’ भी करने वाले हैं. अब चर्चाएं गर्म है कि सुशांत सिंह राजपूत और कार्तिक आर्यन एक साथ फिल्म ‘‘आंखे 2’’ में भी नजर आएंगे.

‘‘आंखे 2’’ को लेकर कई तरह की खबरे है. यह फिल्म लगभग दो वर्ष पहले अमिताभ बच्चन सहित कई दिग्गज कलाकारों के साथ शुरू हुई थी, पर अदालती कार्रवाही में फंसने के कारण यह फिल्म लटक गयी थी. अब यह फिल्म कब शुरू होगी और क्या कलाकार बदले जाएंगे, कुछ स्पष्ट नहीं है. अब तो सुशांत सिंह के नजदीकी सूत्र दावा कर रहे हैं कि अपने समय की सफल हास्य फिल्म ‘‘अंदाज अपना अपना’’ के रीमेक में भी सुशांत सिंह राजपूत होंगे.

अब देखना यह है कि वास्तव में सुशांत सिंह वास्तव में किन फिल्मों में नजर आते हैं.

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प्यार किसी का, लुटा आशियाना किसी का

जिला सीतापुर के मिश्रिख थाना कोतवाली के अंतर्गत आने वाले गांव बदौव्वा में लालजी रहते थे. वह खेती करते थे. परिवार में उन की पत्नी रमा और 2 बेटी और 2 बेटे थे. उन सब में शशि सब से छोटी भी थी और अविवाहित भी. बाकी सभी का विवाह हो चुका था. शशि की उम्र 16 साल थी. उस ने गांव के ही सरकारी स्कूल से 8वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी. खूबसूरत, चंचल और अल्हड़ स्वभाव की शशि के शरीर की बनावट और कमनीयता किसी की भी नजरों में चढ़ जाती थी. गांव में सुंदर युवती हो और उस के आगेपीछे मंडराने वाले मनचले न हों, यह नहीं हो सकता.

शशि के आगेपीछे घूमने वाले मनचलों की कमी नहीं थी. शशि को उन की घूरती नजरों से कोई दिक्कत नहीं थी, बल्कि उसे यह सब अच्छा लगता था. धीरेधीरे कई युवक उस के संपर्क में आए, लेकिन कोई भी शशि को प्रभावित नहीं कर पाया.

एक दिन गांव में काफी चहलपहल थी, क्योंकि वहां एक बड़े यज्ञ का आयोजन किया गया था. चूंकि धार्मिक अनुष्ठान था, इसलिए गांव वाले काफी उल्लास में थे और यज्ञस्थल पर जाने के लिए उत्साहित भी. यज्ञ में शामिल होने वालों में सभी समुदायों के लोग थे.

शशि भी यज्ञस्थल पर जाने के लिए तैयार थी. वह अपनी सहेली मीना के घर पहुंची और चहकती हुई बोली, ‘‘मीना, तुम भी चलो न मेरे साथ यज्ञ देखने.’’

‘‘हां शशि, मैं ने भी सुना है यज्ञ के बारे में. मेरा भी मन यज्ञ देखने का हो रहा है.’’ मीना ने कहा.

‘‘तो फिर जल्दी से तैयार हो जाओ और मेरे साथ चलो.’’ शशि बोली.

थोड़ी देर बाद मीना तैयार हो कर शशि के साथ पैदल ही यज्ञस्थल की ओर चल दी. दोनों बहुत खुश थीं और बातें करते हुए यज्ञस्थल की ओर चली जा रही थीं.

थोड़ी देर में दोनों यज्ञस्थल पर पहुंच गईं. वहां का भव्य नजारा देख कर दोनों का दिल खुशी से झूम उठा. पंडितों द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ हवन किया जा रहा था. यज्ञ के धुएं से वातावरण सुगंधित था. शशि और मीना ने हाथ जोड़ कर नमन किया और वहीं बिछी दरी पर बैठ गईं.

अचानक शशि की नजर दूसरी ओर बैठे एक युवक पर चली गई. वह कोहरावां गांव का मोहम्मद एहसान था. कोहरावां बदौव्वा गांव के पास ही है. कोहरावां के मोहम्मद नवाब खेती और दूध की डेयरी का काम करते थे. मोहम्मद एहसान उन का ही बेटा था. वह पिता के दूध के काम में मदद करता था. 24 वर्षीय एहसान का एक बड़ा भाई था सलमान और एक छोटा मेराज.

शशि की जिंदगी में आया प्रेमी

शशि ने उसे देखा तो देखती ही रह गई. वह यह भी भूल गई कि वह धार्मिक अनुष्ठान में आई है. तभी एहसान की नजर शशि पर चली गई तो वह उसे एकटक देखता पा कर खुद भी उसे देखने लगा. शशि उसे देख कर मुसकरा दी तो एहसान को लगा जैसे उस के दिल पर किसी ने बरछी चला दी हो. वह अपनी सुधबुध खो बैठा. काफी देर तक दोनों एकदूसरे को निहारते रहे. तभी मीना शशि को ले कर वहां से जाने लगी तो एहसान का दिल छटपटा उठा. वह शशि को अपनी आंखों से ओझल नहीं होने देना चाहता था.

शशि भी जाते हुए बारबार पीछे मुड़ कर उसे ही देख रही थी. मीना ने आश्चर्य से पूछा, ‘‘क्या बात है शशि, कोई मिल गया क्या जिसे तुम बारबार पीछे मुड़ कर देख रही हो? अरे मुझे भी कुछ बताओ या फिर खुद ही खुश होती रहोगी. बोलो भी…’’

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दबाव देते हुए मीना ने पूछा तो शशि ऐसे सिटपिटा गई, मानो उस की चोरी पकड़ी गई हो. फिर भी उसे जवाब तो देना ही था. उस ने मीना को प्यार से झिड़कते हुए कहा, ‘‘ओह मीना, तुम भी शरारती हो गई हो. मैं भला यज्ञ की भव्यता के अलावा और किसे देख सकती हूं. तुम तो हमेशा मुझे शक की नजरों से देखती हो. अब चलो, किसी दुकान पर चाट खाई जाए.’’

‘‘हां, वह देखो सामने चाट की दुकान है. आओ, वहीं चलते हैं.’’ कहती हुई मीना शशि के साथ चाट की दुकान पर पहुंची और चाट खाने लगी.

शशि ने देखा कि एहसान भी यज्ञ छोड़ कर उस के पीछेपीछे बाहर चला आया था और उस से दूर खड़ा हो कर उसे एकटक देख रहा था. वह बारबार नजरें उस की तरफ घुमाती तो उसे अपनी ओर देखते हुए पाती. उस का दिल तेजी से धड़कने लगा, जैसे वह उस का काफी करीबी हो. पता नहीं क्यों वह शशि को अपना सा लग रहा था.

कुछ ऐसा ही एहसान को भी महसूस हो रहा था. उसे भी न जाने क्यों शशि अपने दिल के करीब लग रही थी. एहसान शशि के चेहरे को अपनी आंखों में बसा लेना चाहता था, ताकि वह दिल से ओझल न हो सके. शशि की नजर भी उस से नहीं हट रही थी. जब मीना ने देखा कि शशि एक खूबसूरत नौजवान को देख रही है तो उस ने शरारत करते हुए कहा, ‘‘अच्छा जी, तो ये बात है. लगता है, वह हमारी रानी को कुछ ज्यादा ही पसंद आ गया है.’’

‘‘धत, यह क्या बकवास कर रही है? मैं किसी को देखूंगी तो क्या वह मेरी पसंद का हो जाएगा? वह तो यूं ही उस पर मेरी नजर चली गई थी. अब चलो यहां से, नहीं तो तुम अपनी बकवास बंद नहीं करोगी.’’ शशि ने कहा.

‘‘हांहां, मैं कहां कह रही हूं कि तुम यहीं रुको, चलो यहां से.’’ कहती हुई मीना शशि का हाथ पकड़ कर चल दी तो एहसान मायूस हो गया. मानो कोई उस के दिल को चुरा कर ले जा रहा हो. वह शशि को तब तक देखता रहा, जब तक वह आंखों से ओझल नहीं हो गई.

घर पहुंच कर शशि एहसान के खयालों में खो गई. पता नहीं क्यों उस का दिल उस के लिए धड़क रहा था. रात में जबवह सोई तो उसे सपने में भी एहसान ही दिखाई दिया. वह उस से प्यार भरी बातें कर रहा था. शशि उस से मिल कर खुशी से चहक रही थी.

रात को सपने में कुछ ऐसा ही एहसान भी देख रहा था. अचानक उस की नींद टूट गई और वह हड़बड़ा कर उठ बैठा. मन की शांति के लिए उस ने गिलास ठंडा पानी पीया. फिर वह सोने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसे नींद नहीं आई. उस ने फैसला किया कि वह कल भी यज्ञस्थल पर जाएगा. हो सकता है, उस खूबसूरत लड़की से एक बार फिर मुलाकात हो जाए.

अगले दिन निर्धारित समय पर शशि अकेली ही यज्ञस्थल की ओर चल दी. उस वक्त उस के दिमाग में कई सवाल उमड़घुमड़ रहे थे. वह सवालों की उधेड़बुन में यज्ञस्थल पर पहुंच गई. जब शशि वहां पहुंची तो उसे यह देख कर हैरानी हुई कि एहसान भी वहीं बैठा था. उसे लगा मानो वह उसी का इंतजार कर रहा हो.

प्यार के पंछियों की पहली उड़ान

एहसान की नजर शशि से टकराई तो दोनों के दिल खुशी से धड़क उठे. अनायास ही शशि मुसकरा दी तो एहसान के दिल के फूल खिल गए. जवाब में वह भी मुसकरा दिया. शशि वहां से निकली और एहसान को देखते हुए यज्ञस्थल से बाहर आ गई. मानो उस ने इशारा किया हो कि वह भी बाहर आए.

आगेआगे शशि और पीछेपीछे एहसान चलते हुए दोनों सुरक्षित जगह पर पहुंचे और एकदूसरे को देखने लगे. अनायास एहसान शशि के करीब आया और उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘मेरा नाम एहसान है और मैं पास के गांव कोहरावां का रहने वाला हूं.’’

थोड़ा शरमाते हुए शशि बोली, ‘‘मेरा नाम शशि है और मैं इसी गांव में रहती हूं. मुझे तुम्हारा चेहरा जानापहचाना सा लग रहा था. शायद मैं ने कभी तुम्हें देखा हो, लेकिन कल ही मेरा ध्यान तुम पर गया.’’

‘‘शशि…बड़ा ही प्यारा नाम है. तुम सचमुच अप्सराओं की तरह सुंदर हो. मुझे तुम्हारा नाम और तुम दोनों ही बहुत पसंद हो. क्या मैं तुम्हें पसंद हूं?’’ एहसान ने उत्सुकता में पूछा.

शशि ने ‘हां’ में सिर हिला दिया, साथ ही कहा भी, ‘‘एहसान, सिर्फ परिचय से कोई एकदूसरे का नहीं हो जाता, बल्कि उस के लिए एकदूसरे के बारे में सारी बात जानना भी जरूरी होता है. तभी दो दिल एकदूसरे के करीब हो सकते हैं.’’

‘‘बिलकुल ठीक कहा शशि, आओ हम उस पेड़ के नीचे बैठ कर बातें करते हैं.’’ कहते हुए एहसान शशि के साथ पेड़ की छांव में जा बैठा और बातें करने लगा. दोनों ने एकदूसरे को विस्तार से अपनेअपने परिवारों के बारे में बताया.

एहसान ने कहा, ‘‘जिंदगी हमारी है, इसलिए अपनी जिंदगी के बारे में सिर्फ हम ही निर्णय ले सकते हैं. तुम मुझ से मिलने के लिए रोज यहीं आना. यहां लोगों की नजर हम पर नहीं पड़ेगी. बोलो, आओगी न?’’

‘‘हां एहसान, मैं जरूर आऊंगी. तुम मेरा इंतजार करना.’’ शशि ने कहा और वहां से अपने घर की ओर चल दी.

शशि आज ऐसे खुश थी, मानो कोई बड़ा खजाना मिल गया हो. वह एहसान की यादों में इतनी खो गई थी कि कब सवेरा हुआ और कब वह उस के पास पहुंच गई, उसे पता ही नहीं चला. एहसान भी उसी पेड़ की छांव में उस का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. दोनों एकदूसरे से मिल कर काफी खुश हुए. एहसान शशि से रोमांटिक बातें करने लगा तो शशि शरमा गई, लेकिन बोली कुछ नहीं. तब एहसान ने पूछा, ‘‘शशि, तुम्हें पता है कि तुम कितनी सुंदर हो?’’

‘‘हां, मुझे पता है, पर इस में मेरा क्या कुसूर है?’’ शशि ने पूछा.

‘‘इस में तुम्हारा कोई कुसूर नहीं है. कुसूर है तो सिर्फ तुम्हारी सुंदरता का, जिस ने मेरा दिल चुरा लिया है. मेरे इस दिल को अपने पास संभाल कर रखना. इसे कभी तोड़ना नहीं.’’ एहसान ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘यह कैसी बातें कर रहे हो? मैं भला तुम्हारा दिल कैसे तोड़ सकती हूं? हमारा मिलन तो जन्मजन्मांतर का है. तुम्हें देख कर मुझे पहली ही नजर में ऐसा लगा जैसे तुम मेरे हो और मैं तुम्हारे पास खिंची चली आई.’’ शशि ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा.

‘‘मैं कितना खुशकिस्मत हूं कि तुम मुझे यज्ञ में अनायास ही मिल गई. शायद मेरे नसीब में लिखा था तुम्हें पाना.’’ कहते हुए एहसान ने शशि के हाथ को चूमा तो वह शरमा गई.

उन दोनों का प्यार दिनोंदिन परवान चढ़ने लगा. लेकिन गांव का माहौल कुछ ऐसा होता है कि अधिक दिनों तक कोई भी बात किसी से छिपी नहीं रह सकती. एहसान और शशि के प्रेमिल संबंध भी लोगों से छिपे नहीं रह सके.

लालजी को पता चला तो उस ने शशि की खूब पिटाई की और उसे सख्त हिदायत दी कि वह आज के बाद एहसान से मिलने की भूल कर भी कोशिश न करे, नहीं तो उस से बुरा कोई नहीं होगा. उस के घर से निकलने पर भी पाबंदी लगा दी गई. लालजी अब जल्द से जल्द शशि के हाथ पीले कर देना चाहता था. शशि के कारण पूरे गांव में उस की बदनामी हो रही थी. मिश्रिख थानाक्षेत्र के ही अमजदपुर गांव में रामप्रसाद अपने परिवार के साथ रहते थे और खेतीकिसानी करते थे. परिवार में पत्नी रामकली के अलावा 3 बेटियां श्रीकांती, महिमा व सरिता थीं और 2 बेटे बबलू और सोनू.

रामप्रसाद अपनी 2 बेटियों का विवाह कर चुके थे. उन्होंने बड़े बेटे बबलू का भी विवाह कर दिया था. बबलू लखनऊ में रह कर ड्राइवरी करता था. जबकि सोनू अभी अविवाहित था. सोनू पिता के साथ खेती में हाथ बंटाता था.

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लालजी को एक रिश्तेदार के माध्यम से सोनू और उस के परिवार के बारे में पता चला तो वह सोनू के पिता रामप्रसाद से जा कर मिले. बात आगे बढ़ी और जल्द ही शशि का रिश्ता सोनू के साथ तय हो गया. शशि ने लाख विरोध किया लेकिन उस की एक नहीं चली.

प्यार में अड़ंगा, शशि हुई परेशान

इसी साल 9 मार्च को धूमधाम से शशि और सोनू का विवाह हो गया. शशि को न चाहते हुए भी विवाह कर के ससुराल जाना पड़ा. वह एहसान के साथ जिंदगी गुजारने का सपना देख रही थी, लेकिन उस के घर वालों ने उस के सपनों को तोड़ दिया था.

पगफेरे की रस्म के लिए जब शशि अपने मायके गई तो वह एहसान से मिली और उस के गले लग कर बिलखबिलख कर रोई. एहसान की भी आंखें गीली हो आईं. वह शशि की हालत देख कर बेचैन हो उठा. उस ने सांत्वना दे कर किसी तरह शशि को शांत किया. फिर उस से कहा कि हम कभी अलग नहीं होंगे, कोई भी हमें जुदा नहीं कर सकता.

शशि जब तक मायके में रही, एहसान से मिलती रही. वहां से वापस ससुराल आई तो मोबाइल पर चोरीछिपे एहसान से बातें करने लगी.

30 मार्च को सोनू शशि को बाइक पर बैठा कर अपनी ससुराल गया, जो उस के गांव से महज 12 किलोमीटर की दूरी पर थी. एक दिन रुक कर उसे अकेले 31 मार्च को वापस घर आना था, लेकिन शशि की मौसी ने उस दिन आने नहीं दिया. 1 अप्रैल को शाम 4 बजे सोनू बाइक से अपनी ससुराल से घर जाने के लिए चल दिया. अभी वह साढ़े 4 बजे के करीब सहादतनगर गांव के पास पहुंचा ही था कि पीछे से आए बाइक पर बैठे 2 अज्ञात युवकों ने सोनू की कनपटी पर तमंचे से फायर कर दिया. गोली लगते ही सोनू बाइक समेत जमीन पर गिर पड़ा. कुछ पल छटपटाने के बाद उस ने दम तोड़ दिया.

कुछ लोगों ने काफी दूर से घटना होते देखी थी. जब तक वे वहां पहुंचे, तब तक हत्यारे फरार हो चुके थे. उन में से किसी ने इस की सूचना मिश्रिख कोतवाली को दे दी.

सूचना पा कर इंसपेक्टर अशोक सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. लाश का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने मृतक की शिनाख्त कराई तो उस की शिनाख्त सोनू के रूप में हो गई.

इंसपेक्टर अशोक सिंह ने सोनू के परिजनों को घटना की सूचना भेज दी. कुछ ही देर में सोनू के परिजन वहां पहुंच गए और लाश को देख कर रोनेबिलखने लगे. इंसपेक्टर अशोक सिंह ने सोनू के घर वालों से कुछ आवश्यक पूछताछ की, फिर लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया.

इस के बाद कोतवाली आ कर उन्होंने सोनू के भाई बबलू की लिखित तहरीर पर अज्ञात के विरुद्ध भादंवि की धारा 302 और एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया.

इंसपेक्टर अशोक सिंह ने इस मामले की जांच शुरू की तो उन्हें सोनू की पत्नी शशि पर शक हो गया. विवाह को एक माह भी नहीं बीता था और ससुराल से आते वक्त ही सोनू की हत्या हो गई थी. सोनू के साथ ही उन्होंने शशि के मोबाइल की भी काल डिटेल्स निकलवाई.

प्रेमी बना हत्यारा

सोनू के ससुराल से निकलने के पहले और बाद में भी शशि के नंबर से एक नंबर पर काल की गई थी. उस नंबर पर उस से पहले भी हर रोज कई बार काल की गई थी. उस नंबर की जानकारी की गई तो वह नंबर कोहरावां गांव निवासी एहसान का निकला. इस का मतलब था कि सोनू की हत्या में शशि का भी हाथ था.

12 अप्रैल को इंसपेक्टर अशोक सिंह ने शशि को अपनी हिरासत में ले लिया और महिला सिपाही की उपस्थिति में उस से कड़ाई से पूछताछ की. घबरा कर उस ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए सोनू की हत्या करने वाले अपने प्रेमी एहसान और उस के दोस्त रामशंकर का नाम भी बता दिया. इस के बाद दोनों को उसी दिन बढ़ैया गांव के पास से गिरफ्तार कर लिया गया.

विवाह के कुछ दिन में ही शशि की हरकतों से सोनू को शक हो गया था कि शशि चोरीछिपे किसी से बात करती है. उस ने इस का कई बार विरोध भी किया था. प्रेमी से मिलना तो दूर, बात करना भी मुश्किल होने लगा तो शशि तड़प उठी.  उस ने अपने प्रेमी एहसान से पूरी बात बताई. इस के बाद दोनों ने तय किया कि वे सोनू को रास्ते से हटा देंगे. क्योंकि उस को हटाए बिना वे कभी एक नहीं हो सकते. शशि के हाथों की मेहंदी भी नहीं छूटी थी कि उस ने अपनी मांग का सिंदूर मिटाने का फैसला कर लिया.

एहसान ने अपने दोस्त रामशंकर उर्फ छोटू निवासी परागपुर थाना मिश्रिख को सोनू की हत्या करने के लिए अपने साथ मिला लिया था. 1 अप्रैल को एहसान अपने दोस्त के साथ रास्ते में खड़ा हो कर सोनू के आने का इंतजार करने लगा. सोनू का दोपहर डेढ़ बजे ससुराल से निकलने का प्रोग्राम था, इसलिए एहसान पहले से ही आ कर उस के आने का इंतजार कर रहा था. लेकिन सोनू ससुराल से 4 बजे के करीब निकला. उस के निकलते ही शशि ने एहसान को फोन कर के बता दिया.

जैसे ही सोनू सामने से आता दिखा, रामशंकर ने बाइक स्टार्ट की. एहसान उस के पीछे बैठ गया. रामशंकर ने गाड़ी को स्पीड दे दी. सोनू की बाइक के करीब पहुंचते ही एहसान ने सोनू की कनपटी पर फायर कर दिया. गोली लगने से सोनू की मौत हो गई. गोली मारने के बाद दोनों वहां से फरार हो गया.

लेकिन उन का गुनाह छिप न सका. पुलिस ने उन के पास से हत्या में प्रयुक्त तमंचा, 2 कारतूस, एक कारतूस का खोखा और 4 मोबाइल बरामद किए. साथ ही हत्या में प्रयुक्त बाइक नंबर यूपी34 एन5189 भी बरामद कर ली गई. यह बाइक एहसान के भाई सलमान की थी. आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद तीनों अभियुक्तों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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जब विस्फोटक बन गए अनैतिक संबंध

रेखा ने वीरेंद्र को प्यार से समझाते हुए कहा था, ‘‘देखो वीरेंद्र, बात को समझने की कोशिश करो. जो तुम कह रहे हो वह संभव नहीं है. मेरा अपना एक घरसंसार है, पति है, 2 बच्चे हैं, अच्छीखासी गृहस्थी है हमारी. और तुम कहते हो मैं सब कुछ छोड़छाड़ कर तुम्हारे साथ भाग चलूं. नहीं, ऐसा नहीं हो सकता. हम दोनों अच्छे दोस्त हैं और हमेशा दोस्त ही रहेंगे. हमारे बीच जो रिश्ता है, जो संबंध है, वह हमेशा बना रहेगा. हां, एक बात का मैं वादा करती हूं कि जो रिश्ता हम दोनों के बीच है, उसे तोड़ने में मैं पहल नहीं करूंगी.’’

‘‘तुम मेरी बात समझने की कोशिश नहीं कर रही हो.’’ वीरेंद्र हताश सा बोला.

‘‘मैं सब समझ रही हूं वीरेंद्र, मैं कोई दूधपीती बच्ची नहीं हूं. तुम चाहते हो मैं अपने पति को, अपने बच्चों को हमेशा के लिए छोड़ कर तुम्हारे साथ चली आऊं. यह मुझे मंजूर नहीं है.’’

‘‘तुम मेरी बात सुनोगी भी या नहीं. तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुम्हें कितना प्यार करता हूं, तुम्हारे बिना एक पल रहने की कल्पना भी नहीं कर सकता. इसीलिए कह रहा हूं कि पति और बच्चों का मोह त्याग कर मेरे साथ चली चलो, हम अपनी एक नई दुनिया बसाएंगे, जहां सिर्फ मैं रहूंगा और तुम होगी. रहा सवाल बच्चों का तो हम दोनों के और बच्चे पैदा हो जाएंगे. तुम नहीं जानती, तुम मेरी कल्पना हो, तुम्हें पाना ही मेरा एकमात्र सपना है.’’

‘‘वाह वीरेंद्र बाबू, वाह.’’ रेखा ने वीरेंद्र का मजाक उड़ाते हुए कहा, ‘‘तुम्हारे सपने और कल्पनाओं को पूरा करने के लिए मैं अपने परिवार की बलि चढ़ा दूं? ऐसा हरगिज नहीं होगा.’’

‘‘अच्छी तरह सोच लो रेखा रानी. मैं तुम्हें बदनाम और बरबाद कर दूंगा.’’ अपनी बात मानते न देख वीरेंद्र ने रेखा को धमकी दी.

‘‘बदनाम करने की धमकी किसे दे रहे हो?’’ रेखा भी गुस्से में आ गई, ‘‘बरबाद तो मैं उसी दिन हो गई थी, जिस दिन मैं ने अपने सीधेसादे पति को धोखा दे कर तुम्हारे साथ संबंध बनाए थे. रहा बदनामी का सवाल तो तुम्हारे साथ संबंधों को ले कर पूरा मोहल्ला मुझ पर थूकता है, यहां तक कि मेरे पति को भी मेरे और तुम्हारे संबंधों के बारे में पता है.

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‘‘उन की जगह कोई और होता तो मुझे अपने घर से कब का निकाल कर बाहर कर दिया होता. यह उन की शराफत है कि उन्होंने कभी मुझे तुम्हारे नाम का ताना दे कर जलील तक नहीं किया. अरे ऐसे पति के तो पैर धो कर पीने चाहिए और तुम कहते हो कि मैं पति को छोड़ कर तुम्हारे साथ भाग जाऊं.’’

‘‘वाह क्या कहने, नौ सौ चूहे खा कर बिल्ली हज को चली है. पतिव्रता और सती सावित्री होने का ढोंग कर के दिखा रही है मुझे. वह दिन भूल गई, जब अपने उसी पति की आंखों में धूल झोंक कर मुझ से मिलने आया करती थी.’’

‘‘अपनी जिंदगी की इस भयानक भूल को मैं कैसे भूल सकती हूं, जब तुम्हारे सपनों के झूठे मायाजाल में फंस कर मैं ने अपना सब कुछ तुम्हें सौंप दिया था. आज मैं अपनी उसी गलती की सजा भुगत रही हूं.’’ कहते हुए एकाएक रेखा क्रोध से भड़क उठी और उस ने गुस्से में वीरेंद्र से कहा, ‘‘जाओ, निकल जाओ मेरे घर से. अपनी मनहूस शक्ल दोबारा मत दिखाना. तुम्हें जो करना है कर लेना, अब दफा हो जाओ.’’

लोकेश की बैकग्राउंड

रेखा का पति लोकेश मूलत: जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश के गांव कंबोह माजरा का रहने वाला था. साल 2006 में उस की शादी देहरादून, उत्तराखंड के गांव दंदोली निवासी ठेपादास की मंझली बेटी रेखा के साथ हुई थी. लोकेश साधारण शक्लसूरत का सीधासादा युवक था, जबकि रेखा खूबसूरत थी.

रेखा जैसी खूबसूरत पत्नी पा कर लोकेश अपने आप को बड़ा भाग्यशाली समझता था. वह रेखा से बहुत प्यार करता था और रेखा भी उसे प्यार करने लगी थी. कुल मिला कर पतिपत्नी दोनों एकदूसरे से संतुष्ट थे. वक्त के साथ लोकेश और रेखा अब तक 2 बच्चों 10 वर्षीय कार्तिक और 7 वर्षीय कृष के मातापिता बन गए थे.

लोकेश के मातापिता के पास थोड़ी सी खेती थी, जिस से घर खर्च भी बड़ी मुश्किल से चल पाता था, इसलिए 7 साल पहले लोकेश काम की तलाश में लुधियाना चला आया था. अपने पैर जमाने के लिए शुरू में वह छोटीमोटी नौकरियां करता रहा. साथ ही किसी अच्छे काम की तलाश में भी जुटा रहा. आखिर उसे सन 2014 में भारत की प्रसिद्ध साइकिल कंपनी हीरो में नौकरी मिल गई थी. वेतन भी अच्छा था और अन्य सुखसुविधाएं भी थीं.

हीरो साइकिल में नौकरी लगने के बाद लोकेश ने रहने के लिए सुरजीतनगर, 33 फुटा रोड, गली नंबर-1 ग्यासपुरा स्थित एक वेहड़े में किराए पर कमरा ले लिया और गांव से अपनी पत्नी रेखा और बच्चों को भी लुधियाना ले आया.

लुधियाना आने के बाद लोकेश ने अपने दोनों बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिल करवा दिया था. पतिपत्नी दोनों मजे में रहने लगे थे कि अचानक एक दिन वीरेंद्र सिंह उर्फ चाचा की नजर रेखा पर पड़ी. वीरेंद्र भी उसी गली नंबर-1 में लोकेश के घर के सामने ही रहता था.

वीरेंद्र की कामयाब चाल

शातिर वीरेंद्र की नजर जब खूबसूरत रेखा पर पड़ी तो वह उसे पाने के लिए छटपटाने लगा. उस ने रेखा को भी देखा था और उस के पति लोकेश को भी. साधारण शक्लसूरत वाले लोकेश की इतनी खूबसूरत बीवी देख वीरेंद्र के कलेजे पर सांप लोटने लगा था. वह हर हाल में रेखा से संबंध बनाना चाहता था.

इस के लिए 2-4 बार उस ने रेखा को छेड़ने की कोशिश भी की थी, पर रेखा ने उसे घास नहीं डाली तो शातिर दिमाग वीरेंद्र ने रेखा के निकट आने का एक दूसरा रास्ता अपनाया. उस ने रेखा के पति लोकेश के साथ दोस्ती कर ली और दोस्ती की आड़ ले कर वह लोकेश के घर आनेजाने लगा.

जबकि दूसरी ओर वीरेंद्र के नापाक इरादों से अनजान भोलाभाला लोकेश उसे अपना हितैषी समझ रहा था. रेखा को अपने जाल में फंसाने के लिए उस ने लोकेश और उस के बीच ऐसी दरार पैदा की कि घर में अकसर झगड़ा रहने लगा.

लोकेश की अधिकांश नाइट ड्यूटी होती थी, जिस का वीरेंद्र ने जम कर फायदा उठाया. शातिर वीरेंद्र ने रेखा को अपने प्रेम जाल में फंसा कर उस के साथ अवैध संबंध बना लिए. दोनों के बीच बने अवैध संबंधों ने उस समय गंभीर मोड़ ले लिया, जब वीरेंद्र ने रेखा पर पति व बच्चों को छोड़ कर साथ भागने का दबाव बनाना शुरू किया.

उस की बात सुन कर रेखा को अपनी गलती का अहसास हुआ कि उस ने अपने पति और बच्चों को धोखा दे कर अच्छा नहीं किया. लेकिन अब क्या हो सकता था, अब तो वह शैतान के जाल में फंस चुकी थी.

पहले तो रेखा उसे टालती रही, परंतु जब वह उसे अधिक परेशान करने लगा तो रेखा ने पति व बच्चों को छोड़ कर उस के साथ भागने से साफ इनकार कर दिया था. रेखा के स्पष्ट इनकार करने से वीरेंद्र तड़प कर रह गया. हर तरह के हथकंडे अपनाने के बाद भी जब वह नाकाम रहा तो उस ने रेखा को सबक सिखाने की ठान ली.

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रेखा द्वारा किए इनकार से गुस्साया वीरेंद्र 2 अप्रैल की सुबह मौका पा कर तब रेखा के घर पहुंचा, जब वह घर में अकेली थी. उस का पति लोकेश ड्यूटी पर व बच्चे स्कूल गए हुए थे. वीरेंद्र ने रेखा से साफ शब्दों में पूछा कि वह उस के साथ भागेगी या नहीं? रेखा के इनकार करने पर वीरेंद्र भाग कर रसोई से चाकू उठा लाया और रेखा के पेट में वार कर दिया.

वीरेंद्र ने खुद भी कोशिश की मरने की

अचानक हुए वार से रेखा घबरा गई. उसे वीरेंद्र से ऐसी उम्मीद नहीं थी. उस ने वीरेंद्र के वार से बचने की कोशिश की, लेकिन बचाव करते समय रेखा की एक अंगुली कट गई. इस के बाद वीरेंद्र ने उसे धक्का दे कर बैड पर गिरा दिया और उस के गले में चुनरी डाल गला घोंट कर उस की हत्या कर दी. वारदात को अंजाम देने के बाद वह अपने घर चला गया. अपने घर पर रखी चूहे मारने की दवा निगल कर उस ने आत्महत्या करने की कोशिश की.

इसी दौरान संदेह होने पर मोहल्ले के लोगों ने तुरंत पुलिस को फोन किया. सूचना मिलते ही एसीपी अमन बराड़ व डाबा थाने के प्रभारी इंसपेक्टर गुरविंदर सिंह घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने वीरेंद्र को काबू कर के जब लोकेश के घर जा कर देखा तो बिस्तर पर रेखा का शव पड़ा हुआ था. पुलिस ने शव कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया.

लोकेश की तहरीर पर इंसपेक्टर गुरविंदर सिंह ने रेखा की हत्या के अपराध में वीरेंद्र के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया, जहां अदालत के आदेश पर उसे जिला जेल भेज दिया गया था.

रेखा ने जो किया, उस का नतीजा उसे भोगना पड़ा. अपने पति से बेवफाई की सजा रेखा को अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी, पर इस सारे प्रकरण में लोकेश और उस के बच्चों का क्या दोष था, जिस की सजा वे आजीवन भोगते रहेंगे.

यह सच है कि लोकेश के मुकाबले उस की पत्नी रेखा कहीं अधिक खूबसूरत थी. पतिपत्नी के मजबूत रिश्ते में दरार डालने के लिए शातिर वीरेंद्र ने इसी फर्क को मुख्य वजह बनाते हुए हंसतेखेलते परिवार में जहर घोल दिया.

– पुलिस सूत्रों पर आधारित

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संगीतकार स्व.चित्रगुप्त के 101 वें जन्मदिवस पर मुंबई में ‘‘चित्रगुप्त चौक’’ का अनावरण

अपने समय के महान संगीतकार स्व. चित्रगुप्त को दो जुलाई, सोमवार के दिन उनके 101वें जन्मदिवस पर श्रृद्धांजली देते हुए उनके बेटे व संगीतकार जोड़ी आनंद मिलिंद यानी कि आनंद चित्रगुप्त व मिलिंद चित्रगुप्त ने एक भव्य समारोह का आयोजन किया. इसी अवसर पर मुंबई के उपनगर खार में 14वें रास्ते और खार डांडा रोड के कोने (त्रिभुवनदास भीमजी -हजयवेरी शोरूम) का नामकरण ‘‘स्व.चित्रगुप्त चौक’’ के रूप में किया गया.

‘‘स्व.चित्रगुप्त चौक’’ के नामकरण के अवसर पर आनंद चित्रगुप्त, मिलिंद चित्रगुप्त, उदित नारायण, आनंद जी शाह, अलका याज्ञनिक, अभिजीत भट्ट, राजू सिंह, ललित पंडित, समीर, शिवरानी सौमैया, जावेद अख्तर, राज जुत्शी सहित कई गायक, गीतकार, संगीतकार व भाजपा नेता आशीष शेलार खास तौर पर मौजूद थे.

स्व.चित्रगुप्त अपने समय के मैलोडियस संगीत परोसने वाले अति मशहूर संगीतकार थे. 1946 से 1988 के चालीस साल के संगीत करियर में 144 फिल्मों को संगीत से संवारा था.

इस समारोह की शुरुआत मशहूर गीतकार जावेद अख्तर और भाजपा नेता आशीष शेलार ने दीप प्रज्वलित कर किया. इसी अवसर पर स्व.चित्रगुप्त के दोनों बेटे आनंद व मिलिंद ने कहा- ‘‘हमारे पिता ने संगीत के क्षेत्र में जो रचनात्मक काम किया था, उसका यह सम्मान है. हमारे लिए यह गौरव की बात है. हमारे पिता ने संगीत के स्वर्णिम काल में बेहतरीन मैलोडियस संगीत परोसकर अपने करोड़ों प्रशंसक बनाए थे. संगीत जगत के इतिहास में पहली बार हमारे पिता को श्रृद्धांजली के तौर पर हमारे गीत ‘पापा कहते हैं’ का नोटेशन दिया गया. हमें गर्व है कि उन्होंने हम जैसे अपने बच्चों को उन्हें कुछ वापस देने योग्य बनाया. मेरे पिता ने अपने जीवन में खार के 14वें रोड पर रहते हुए देश को कई रत्न प्रदान किए.

उनके नाम पर चौक बनाने के उनके प्रशंसकों और परिवार के सदस्यों के लिए गर्व का क्षण है. हम उन सभी के शुक्रगुजार हैं जिन्होंने हमारे इस छोटे से प्रयास में अपना योगदान दिया. लोग आज भी मेरे पिता के बनाए हुए गीत ‘चल उड़ जा रे पंक्षी’ और ‘चली चली रे पतंग’ को गुनगुनाते रहते हैं.’’

इस अवसर पर जावेद अख्तर ने कहा- ‘‘मुझे इस बात की खुशी है कि संगीतकार जोड़ी आनंद मिलिंद ने अपने पिता की याद लोगों के दिलों में हमेशा बनाए रखने के लिए चैक के नामकरण के रूप में यह कदम उठाया है.’’

अलका याज्ञनिक ने चित्रगुप्त जी को याद करते हुए कहा- ‘‘मेरे लिए चित्रगुप्त जी पिता के समान थे. मुझे उनसे हमेशा ढेर सारा प्यार व अपनापन मिला. हम हमेशा कहते हैं- ‘पापा कहते हैं कि बड़ा नाम करेगा.’ पर चित्रगुप्त जी ने मुझे कहा था- ‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगी.’ यह उन दिनों की बात है, जब हर दिन लाइव संगीत रिकार्ड किया जाता था. हम एक साथ परिवार की तरह रिकार्डिंग स्टूडियो में पूरा पूरा दिन बिताते थे. जब मैं भोजपुरी गीत रिकार्ड करती थी, तब उनका हाथ मेरे सिर पर रहता था.जब मैं फिल्म उद्योग में नई नई थी, तब चित्रगुप्त जी निर्माताओं को समझाते थे कि उन्हें मुझसे कोई गीत क्यों गंवाना चाहिए. वह बहुत प्यारे इंसान थे. मैं हमेशा उन्हें उतना ही याद करती हूं, जितना मैं अपने पिता को याद करती हूं.’’

मशहूर गायक सुदेश भोसले ने कहा- ‘‘जिन्होंने स्व.चित्रगुप्त के नाम पर इस चौक का नामकरण करने की बात सोची, उन सभी को धन्यवाद देता हूं. आज हम सभी आपके नाम पर चौक के नामकरण समारोह में मौजूद हैं. हर कोई आपको तब तक याद करेगा, जब तक आपका काम जिंदा रहेगा, जो कि अमिट है.’’

संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के प्यारेलाल रामप्रसाद शर्मा ने कहा- ‘‘हमें उस वक्त अपार खुशी और गर्व का अहसास होता है, जब हमारे बच्चे कुछ अच्छा काम करते हैं.’’

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प्रोटीन खाएं, मसल्स बनाएं

सेहतमंद शरीर के लिए मजबूत मसल्स यानी मांसपेशियों का होना बहुत जरूरी है. नौजवान लड़केलड़कियां जिम में मेहनत करने चले तो जाते हैं लेकिन कसरत करने के बाद उन्हें क्या खानापीना चाहिए, इस के बारे में वे लापरवाही बरत जाते हैं. अब आप प्रोटीन को ही लीजिए. मसल्स को फिट रखने के लिए प्रोटीन से भरपूर भोजन करना बहुत जरूरी होता है.

प्रोटीन न सिर्फ मसल्स को बनाने में मदद करता है, बल्कि यह हमारे शरीर की टूटफूट की मरम्मत भी करता है. बैलैंस बौडी बनाने के लिए बैलैंस डाइट का होना भी बेहद जरूरी?है. इस के लिए आप के?भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का बैलैंस होना चाहिए. कुदरत की बात करें तो पालक और दूसरी हरी सब्जियां मसल्स के लिए बहुत फायदेमंद रहती हैं. भारी कसरत करने के बाद मसल्स को आराम की जरूरत होती है. हरी सब्जियां मसल्स को रिलैक्स करने में भी मदद करती हैं.

सूखे मेवों, पनीर, दूध वगैरह में भी खूब प्रोटीन पाया जाता है. कसरत करने वालों को इन का सेवन जरूर करना चाहिए. काजू, बादाम और अखरोट को भी सही मात्रा में खाना चाहिए. अगर आप मांसाहारी हैं तो प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए अंडा, मांस, चिकन और टर्की लीन मीट को भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है.

अगर कोई शख्स जिम में पसीना बहाता है और सही मात्रा में प्रोटीन नहीं ले पाता है तो समझ लीजिए कि मसल्स के लिए ईंधन रूपी प्रोटीन न मिलने से उस का ईंधन खत्म होता?है और मसल्स मजबूत बनने के बजाय और भी कमजोर हो जाती हैं. इस के अलावा प्रोटीन हमारी बौडी में ह्वाइट ब्लड सैल वगैरह बनाने में मदद करता है जो हमें कई बीमारियों से

बचाती हैं. कुदरत से मिलने वाले प्रोटीन के अलावा बाजार में कई तरह के प्रोटीन सप्लीमैंट भी मिलते हैं जो हमारे शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करते हैं.

ऐसे प्रोटीन किसी माहिर डाक्टर की सलाह पर लेने चाहिए क्योंकि जब से इन का बाजार बढ़ा है, तब से इन की क्वालिटी भी शक के दायरे में आ गई है.

जिम चलाने वाले?ट्रैनर लोगों को ऐसे प्रोटीन सप्लीमैंट लेने की सलाह दे तो देते हैं, लेकिन ज्यादातर यह नहीं बता पाते हैं कि बाजार में मुहैया कौन सा प्रोटीन सप्लीमैंट सेहत के लिए सही?है. अगर अच्छी क्वालिटी का प्रोटीन सप्लीमैंट मिल भी जाता है तो उसे कितनी मात्रा में खाना है, यह भी पता होना चाहिए. इन का ज्यादा सेवन करना भी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है.

अमूमन किसी बालिग को 50 से 70 ग्राम प्रोटीन अपने रोजाना के भोजन में शामिल करना चाहिए. अगर आप जिम में कसरत करते हैं तो किसी माहिर डाक्टर से अपने शरीर के हिसाब से प्रोटीन की मात्रा पता कर लेनी चाहिए.

इस मसले पर फरीदाबाद में अपना फिटनैस ग्रुप चलाने वाले कपिल गुप्ता ने बताया कि अब तो अखाड़ों में कुश्ती लड़ने वाले पहलवान भी डाइट चार्ट के मुताबिक खातेपीते हैं. प्रोटीन सप्लीमैंट की डिमांड भी खूब जोर पकड़ रही है, बस इस बात का खयाल जरूर रखना चाहिए कि किसी के लालच में आप नकली प्रोटीन सप्लीमैंट का सेवन तो नहीं कर रहे हैं, क्योंकि यह आप की सेहत के लिए खतरनाक भी साबित हो सकता है.

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मां की सेहत के लिए विटामिन

शादी के बाद हर लड़की का सपना होता है कि वह मां बनने का सुख भोगे. सरिता की शादी के 2 साल बाद उस के पैर भारी हुए. गांव में रहने के बावजूद पढ़ीलिखी सरिता ने अपनी और अपने होने वाले बच्चे की अच्छी सेहत का ध्यान रखना शुरू कर दिया. वैसे, जब कोई औरत पेट से होती है तो उसे डाक्टर के अलावा भी दूसरों से तमाम तरह की नसीहतें मिलनी शुरू हो जाती हैं कि कैसे चलनाफिरना है, कौनकौन से घर के काम करने हैं, क्याक्या खानापीना है वगैरह. गांव में आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता और शहरकसबे की डाक्टर भी उन्हें अपने खानपान पर खास ध्यान देने को कहती हैं.

इस मसले पर डाइटिशियन नेहा सागर का कहना है कि मां बनने वाली औरतों को संतुलित भोजन की बहुत ज्यादा जरूरत होती है क्योंकि उन में एक जान और पल रही होती है. उन के भोजन में कैल्शियम, विटामिन डी, विटामिन ए, आयरन, फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्त्व जरूर शामिल होने चाहिए.

पेट से हुई औरतें कभीकभार विटामिन लेने में कोताही बरतती हैं जबकि उन की कमी से उन्हें बड़ीबड़ी दिक्कतें भी पैदा हो सकती हैं. कुछ विटामिन तो उन के लिए बहुत ज्यादा जरूरी हो जाते हैं. अगर कोई औरत पेट से होने के बाद विटामिन बी 12 का सेवन नहीं करती है तो वह अपने साथ ज्यादती करती है. बच्चे के दिमागी विकास के लिए विटामिन बी 12 बहुत ज्यादा फायदेमंद रहता है. यह चिकन और मटन में बहुत ज्यादा पाया जाता है. अगर आप मांसाहारी नहीं हैं तो अंकुरित बींस खाने चाहिए. विटामिन बी 9 यानी फौलिक एसिड. यह सभी विटामिन बी कौंप्लैक्स में से सब से ज्यादा खास होता है. किसी औरत के पेट से होने के बाद डाक्टर फौलिक एसिड के सप्लीमैंट लेने की सलाह देते हैं. यह पालक, एवोकाडो, मटर वगैरह में खूब पाया जाता है.

इसी तरह विटामिन ए भी मां और बच्चे के लिए जरूरी होता है पर बेहद संतुलित मात्रा में, क्योंकि इस के ज्यादा सेवन से जन्म दोष की समस्या भी पैदा हो सकती है जो पेट में पलते बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है. यह विटामिन ज्यादातर संतरा, गाजर, हरी सब्जियों, मांसमछली, दूध, मक्खन, अंडा वगैरह में पाया जाता है. हड्डियों में किसी तरह की कमजोरी को दूर करने के लिए विटामिन डी का सेवन करना चाहिए. पैदा होने वाले बच्चे की हड्डियां मजबूत रहें, इसलिए मां को विटामिन डी से भरपूर भोजन करना चाहिए. मछली, मशरूम, अंडे और मीट में विटामिन डी पाया जाता है. सूरज की रोशनी से भी विटामिन डी की भरपाई की जा सकती है.

जब ये विटामिन भोजन से नहीं मिल पाते हैं तो डाक्टर की सलाह पर मल्टीविटामिन की दवाएं भी मां बनने वाली औरतों को दी जाती हैं. ये दवाएं गोलियों, कैप्सूल और टौनिक के रूप में बाजार में मिलती हैं.

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ट्रंप-किम भेंट

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बिगडै़ल देश उत्तर कोरिया को मेज पर बुला व बैठा कर उस से परमाणु नियंत्रण समझौता कर के सिद्ध कर दिया है कि आज भी अमेरिका की चल रही है और उस के जैसे सिरफिरे, बचकाने व्यवहार वाले राष्ट्रपति भी कई बार अनूठे काम कर जाते हैं. किम इल सुंग के पोते किम जोंग उन ने सिंगापुर आ कर न केवल समझौतों पर हस्ताक्षर किए, बल्कि अपने देश उत्तर कोरिया को दूसरों का खतरा न बनने देने का वादा भी किया.

उत्तर कोरिया कई दशकों से परमाणु बम बना रहा था और पाकिस्तान, ईरान आदि की सहायता से दुनियाभर में हर समय एक खतरा बना हुआ था कि कहीं उस का खब्ती, जिद्दी शासक न जाने कब इन बमों का दुरुपयोग कर डाले. अमेरिका उस का दुश्मन बना हुआ था क्योंकि 1953 में उसी ने कोरिया का विभाजन किया था जब अमेरिकी सेनाओं ने उत्तर कोरिया को दक्षिण कोरिया को जबरन कम्युनिस्ट बनाने से रोका था.

उत्तर कोरिया के शासक तभी से दक्षिण कोरिया समेत अमेरिका और पश्चिमी देशों को अपना दुश्मन मानते आ रहे हैं पर चीन से उन की लगातार बनती रही. पिछले साल तक बयानों के बमों से उत्तर कोरिया और अमेरिका सारी दुनिया को परमाणु युद्ध के खतरे से डराते रहे थे. पर इस साल के शुरू में न जाने क्यों और कैसे किम जोंग उन का हृदयपरिवर्तन हुआ और उन्होंने अमेरिकी बंदियों को छोड़ा, चीन की यात्रा की, बेहद सौहार्दपूर्ण तरीके से सीमा के निकट दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से मुलाकात की और सिंगापुर में अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत कर अहम फैसला लिया.

ट्रंप व किम की सिंगापुर में 12 जून को हुई मुलाकात दुनियाभर में फुटबौल मैचों से ज्यादा रुचि से देखी गई. अब दुनिया राहत की सांस ले सकती है. तानाशाह सद्दाम हुसैन, कर्नल गद्दाफी, ओसामा बिन लादेन की मौतों के बाद कठोर व कट्टर शासक किम का दोस्ताना हाथ बढ़ाना एक सुखद आश्चर्य की बात है. यह दिन बहुत सालों तक याद रहेगा.

उत्तर कोरिया के लिए यह समझौता वरदान साबित हो सकता है. उत्तर कोरिया के निवासी दक्षिण कोरिया में रह रहे अपने सगेसंबंधियों की तरह विकास की दौड़ में शामिल हो सकते हैं. वे हालांकि हमेशा ही पीछे रहेंगे पर फिर भी जिस 19वीं सदी में वे रह रहे हैं, वह स्थिति अब ज्यादा समय तक नहीं रहेगी.

डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते से अपने पर लगे बहुत से धब्बों को धो लिया है और शायद वे अमेरिका में अब और ज्यादा स्वीकारे जाने लगेंगे.

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नशा तस्करों के लिए फांसी की सजा का प्रस्ताव

पंजाब में नशे की जड़ें मजबूत हो रही हैं लेकिन अब नशे की तस्करी करने वालों की खैर नहीं है. इस पर लगाम के लिए पंजाब कैबिनेट ने फांसी की सजा देने का प्रस्ताव पास किया है और इसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेज दिया है. सरकार ने यह फैसला पिछले दिनों नशे के कारण हो रही युवाओं की मौतों को देखते हुए लिया है.

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि नशा तस्करों ने प्रदेश के युवाओं का भविष्य खोखला कर दिया है, इसलिए उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. सजा भी ऐसी हो कि एक उदाहरण बन जाए, ताकि लोग नशे की तस्करी करने से पहले सोचे. नशा तस्करों को फांसी की सजा के प्रस्ताव को केंद्र की मंजूरी मिलते ही लागू कर दिया जाएगा.

पंजाब में पिछले कुछ सालों से क्राइम का ग्राफ भी ऊपर ही रहा है, जिसकी मुख्य वजह नशा ही है. राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान नशा एक बड़ा मुद्दा रहा था, जिसको कांग्रेस पार्टी ने अपनी रैलियों और नुक्कड़ मीटिंगों में पूरी तरह कैश किया तथा सरकार बनने पर इसको पंजाब से समाप्त करने का वायदा किया था.

जैसे ही कांग्रेस ने पंजाब में सरकार की कमान सम्भाली तो पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने पंजाब पुलिस को प्रदेश भर में से नशा समाप्त करने की मुहिम छेडऩे के निर्देश जारी कर दिए पर पिछले कुछ दिनों से नशे के कारण हो रही नौजवानों की मौतों को लेकर यह अहम फैसला लिया गया है.

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