इस अभिनेत्री ने लिया Kiki चैलेंज

बता दें कि पिछले कुछ समय से Kiki चैलेंज ने सोशल मीडिया पर धूम मचा रखी है. हौलीवुड, बौलीवुड के साथ साथ टीवी सेलब्स भी Kiki चैलेंज के रंग में रंगे हुए हैं. Kiki चैलेंज एक डांस चैलेंज है जिसमें आपको अपनी चलती कार से उतरकर मशहूर सिंगर ड्रेक के गाने In My Feelings पर परफौर्म करना होता है. वहीं मुंबई पुलिस ने इस चैलेंज को खतरनाक बताते हुए इसे न करने की चेतावनी दी है.

लेकिन श्रद्धा आर्या जो कि ‘कुंडली भाग्य’ में प्रीता के रोल में दिखाई दे रही हैं, उन्होंने मुंबई पुलिस की चेतावनी के बावजूद सड़क पर kiki चैलेंज लिया है. इतना ही नहीं मुंबई पुलिस की चेतावनी को नजरअंदाज कर उन्होंने अपना ये डांस वीडियो इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है. हालांकि श्रद्धा ने ये चैलेंज लेने के बाद लोगों को इसे ट्राइ न करने की चेतावनी भी दी है.

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श्रद्धा ने वीडियो पोस्ट करते हुए कैप्शन में लिखा है- ‘इसे व्यस्त सड़को पर कभी भी करने की कोशिश न करें. इसे करना खतरनाक है. मैं तो ये कहूंगी कि इसे बिल्कुल ट्राई न करें. हम फिल्म बिजनेस में हैं इसलिए हमें पता है कि इन सभी चीजों को सुरक्षित रुप से कैसे करना चाहिए.’

मौत के रहस्य में लिपट गई अर्पिता तिवारी

मायानगरी मुंबई के मलाड में 24 वर्षीय मशहूर टीवी एंकर, गायिका और अभिनेत्री अर्पिता तिवारी मीरा रोड स्थित एक फ्लैट में अकेली रहती थी. वह काफी बिंदास और जिंदादिल युवती थी और अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती थी. अपने काम में किसी का हस्तक्षेप करना या उस पर बंदिश लगाना उसे पसंद नहीं था. वह खुले आसमान में आजाद पक्षियों की तरह उड़ना चाहती थी.

त्रिवेणीनाथ तिवारी की 3 बेटियों में से वह सब से छोटी थी. बिगबौस सीजन-4 की विजेता, टीवी एंकर और भोजपुरी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री श्वेता तिवारी उन की सब से बड़ी बेटी है. श्वेता तिवारी अपने पति अभिनव कोहली और 2 बेटियों के साथ रहती हैं. वहीं त्रिवेणीनाथ तिवारी पत्नी निर्मला और मंझली बेटी विनीता के साथ मुंबई के घोड़ाबांधा के सरस्वती अपार्टमेंट में रहते थे.

हाईसोसायटी और हाइफाइ लाइफस्टाइल में जीने वाली अर्पिता तिवारी ने 9 दिसंबर, 2017 की सुबह तकरीबन 11 बजे पिता त्रिवेणीनाथ तिवारी को फोन कर के बताया कि वह एक इवेंट के लिए एस्सेल टावर जा  रही है. वहां कुछ जरूरी काम है, काम निपटा कर वह शाम तक लौट आएगी. वैसे भी अर्पिता जब भी घर से कहीं बाहर जाती थी तो पिता को जरूर सूचित करती थी. उस दिन भी घर से निकलते समय उस ने उन्हें बता दिया था.

देर रात 11 बजे तक जब अर्पिता का फोन नहीं आया तो त्रिवेणीनाथ थोड़े चिंतित हुए. उन का मन नहीं माना तो बेटी को फोन किया. अर्पिता घर लौट आई थी, उस ने पिता का फोन रिसीव कर के बताया कि वह घर आ चुकी है और डिनर भी कर लिया है, अब सोने जा रही है. बेटी का हालचाल मिल जाने के बाद त्रिवेणीनाथ को तसल्ली हो गई तो वह भी पत्नी के साथ सोने के लिए चले गए.

अगले दिन यानी 10 दिसंबर, 2017 की सुबह करीब 9 बजे त्रिवेणीनाथ तिवारी की मंझली बेटी विनीता के फोन पर एक काल आई. उस समय विनीता अपने औफिस में थी. फोन की स्क्रीन पर डिसप्ले हो रहे नंबर को देखा तो वह पहचान गई कि वह वह काल छोटी बहन अर्पिता के बौयफ्रैंड पंकज जाधव की है. विनीता ने काल रिसीव की तो पंकज ने उस से पूछा, ‘‘अर्पिता घर पर है?’’

यह सुन कर विनीता चौंक गई. उसे बड़ा अटपटा लगा कि वह यह बात क्यों पूछ रहा है. उस ने कहा, ‘‘वह घर पर है या नहीं, मुझे नहीं पता. लेकिन मैं पापा से पूछ कर अभी बताती हूं.’’

आधे घंटे बाद फिर पंकज का फोन आया. विनीता काल रिसीव करते हुए बोली, ‘‘सौरी पंकज, काम में बिजी थी. पापा से बात नहीं कर पाई. तुम कुछ टाइम दो, मैं अभी पापा से बात करती हूं.’’

‘‘रहने दो, अब इस की जरूरत नहीं है.’’ पंकज जाधव बोला.

‘‘क्या मतलब, तुम्हें अर्पिता की खबर मिल गई?’’ विनीता ने पूछा.

‘‘हां, मुझे खबर मिल गई है.’’ पंकज जाधव मायूस से स्वर में बोला.

‘‘क्या बात है पंकज, आज तुम्हारी जुबान कैसे लड़खड़ा रही है?’’

‘‘बात ही कुछ ऐसी है विनीता, तुम भी सुनोगी तो चक्कर खा जाओगी.’’

‘‘पहेलियां मत बुझाओ पंकज, सीधेसीधे बताओ कि तुम कहना क्या चाहते हो?’’

‘‘विनीता, एक बुरी खबर है.’’

‘‘बुरी खबर है…’’ विनीता घबरा गई, ‘‘कैसी बुरी खबर? जल्दी बताओ, ये मजाक का समय नहीं है.’’

‘‘अर्पिता अब इस दुनिया में नहीं रही. उस ने 15वीं मंजिल से कूद कर आत्महत्या कर ली है.’’

‘‘क्या बकवास कर रहे हो तुम, होश में भी हो, इस तरह की बात कर रहे हो. कहीं तुम ने सुबहसुबह चढ़ा तो नहीं ली?’’ विनीता घबराते हुए बोली.

‘‘मैं नशे में नहीं, पूरे होश में हूं.’’ पंकज जाधव ने सफाई देते हुए कहा, ‘‘विनीता, मैं सच बोल रहा हूं, अर्पिता ने बिल्डिंग से कूद कर जान दे दी है.’’

‘‘ये सब कब और कैसे हुआ?’’ विनीता ने खुद को संभालते हुए सवाल किया.

‘‘मलाड की मानवस्थल बिल्डिंग से…’’

इस के बाद पंकज जाधव पूरी कहानी बताता चला गया.

अर्पिता की मौत ने तिवारी परिवार को हिला दिया

बहन की मौत की सूचना पा कर विनीता का माथा घूम गया. उस के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया. वह समझ नहीं पा रही थी कि क्या करे. थोड़ी देर बाद जब उस ने खुद को संभाला तो पिता के पास फोन करने के बजाए बड़ी बहन श्वेता तिवारी को फोन किया. उस ने उसे पूरी बात बता दी. विनीता ने पिता को अर्पिता की मौत की खबर इसलिए नहीं दी क्योंकि वह कुछ दिनों पहले ही पथरी का औपरेशन करवा कर अस्पताल से लौटे थे. श्वेता ने जब बहन की मौत की खबर सुनी तो वह भी सन्न रह गई.

विनीता श्वेता से मौके पर पहुंचने की बात कहते हुए औफिस से मलाड स्थित मानवस्थल के लिए रवाना हो गई. तब तक अर्पिता की मौत की सूचना मालवणी थाने को मिल चुकी थी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी दीपक देशराज टीम के साथ मौके पर पहुंच चुके थे. डीसीपी जोन-11 विक्रम देशमाने भी वहां पहुंच गए. अर्पिता की लाश बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर एसी डक्ट पर अर्द्धनग्न अवस्था में पड़ी मिली.

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अर्पिता कोई छोटीमोटी हस्ती नहीं थी. ग्लैमर की दुनिया का एक बेहतरीन नगीना थी वह. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उस ने जी तोड़ मेहनत की थी. जीवन के सपनों को हकीकत में लाने के लिए उस ने दिनरात मेहनत की थी, तब कहीं जा कर वह टीवी एंकर, गायिका और हीरोइन बनी थी. उस की मौत की खबर पूरे बौलीवुड में फैल गई.

अर्पिता की मौत की सूचना मिलते ही बौलीवुड के तमाम कलाकार मौके पर पहुंच चुके थे. विनीता के अलावा श्वेता भी अपने पति अभिनव कोहली के साथ मौके पर पहुंच चुकी थीं. पुलिस अपने काम में जुटी थी. लाश की अवस्था देख कर यही अनुमान लगाया जा रहा था कि अर्पिता के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसे ऊपर से फेंक दिया गया होगा. लेकिन शव नीचे आने के बजाय दूसरी मंजिल पर एसी डक्ट पर आ गिरा. पुलिस ने अनुमान लगाया कि निश्चय ही इस घटना को अंजाम देने में एक से अधिक लोग शामिल रहे होंगे.

कागजी खानापूर्ति पूरी कर के पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. श्वेता और विनीता दोनों बहनों ने साफसाफ कहा कि अर्पिता खुदकुशी नहीं कर सकती. वह बेहद जिंदादिल इंसान थी. अपने सपनों के साथ जीती थी. सपनों को हासिल करने के लिए जीतोड़ संघर्ष करती थी. उस का मर्डर हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि अर्पिता के प्रेमी पंकज जाधव का उस की हत्या में हाथ संभव है.

अर्पिता की मौत की खबर दोनों बहनें अपने पिता से भला कब तक छिपा कर रख सकती थीं. यह बात आखिर उन्हें पता लगनी ही थी, इसलिए उन्होंने पिता को भी यह सूचना दे दी. त्रिवेणीनाथ ने जैसे ही यह खबर सुनी, वे धम्म से बिस्तर पर जा गिरे. निर्मला देवी भी बेसुध हो कर बैठ गईं.

त्रिवेणीनाथ की समझ में यह नहीं आ रहा था कि जब देर रात 11 बजे अर्पिता से उन की बात हुई थी तो उस समय उस ने खुद को अपने फ्लैट में मौजूद होने की बात कही थी. फिर वह कब और कैसे मानवस्थल बिल्डिंग पहुंच गई. यह बात उन्हें परेशान कर रही थी.

उन्होंने यह सच्चाई जब बेटियों को बताई तो वे चौंके बिना नहीं रह पाईं. वाकई मामला पेचीदा और रहस्यमय बन गया था. जिस मंजिल पर अर्पिता की लाश मिली थी, उसी मंजिल पर उस के प्रेमी पंकज जाधव का फ्लैट था. इन दिनों अर्पिता और पंकज के बीच प्रेम संबंधों को ले कर विवाद चल रहा था.

श्वेता तिवारी का आरोप

अर्पिता पंकज से शादी करना चाहती थी, जबकि पंकज इस के लिए तैयार नहीं था. पिछले 8 सालों तक दोनों के बीच चले आ रहे प्रेम संबंध टूटने के कगार पर पहुंच चुके थे.

श्वेता तिवारी ने आरोप लगाया कि पंकज और अर्पिता के बीच अकसर लड़ाई होती रहती थी और दोनों जल्द ही अलग होना चाहते थे. अर्पिता की मौत किसी घटना का परिणाम है. यह न तो सुसाइड है और न ही एक्सीडेंट. यह सुनियोजित तरीके से रेप और मर्डर का मामला है. उस ने मांग की कि इस घटना में हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक कुछ भी कहने से बचने की कोशिश करती रही. 12 दिसंबर को अर्पिता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को मिल गई. रिपोर्ट ने उस की मौत को और रहस्यमय बना दिया था. एक ओर जहां परिवार वाले रेप के बाद हत्या का आरोप लगा रहे थे, वहीं अर्पिता की मौत के मामले में आई प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सभी को चौंका कर रख दिया.

रिपोर्ट के मुताबिक, उस के साथ किसी तरह की जोरजबरदस्ती नहीं की गई थी. लेकिन मौत की वजह मल्टीपल इंजरी बताई गई. ये इंजरी या तो कूदने की वजह से या फिर ऊपर से नीचे फेंकने की वजह से आई थीं. अर्पिता के सिर और शरीर के कई हिस्सों में चोट के गहरे निशान थे. यही नहीं, उस के खून में अल्कोहल की मात्रा भी पाई गई.

थानाप्रभारी इंसपेक्टर दीपक देशराज ने घटना की जांच शुरू की. घटनास्थल पर पहुंच कर उन्होंने बिल्डिंग के चौकीदार से पूछताछ की. चौकीदार ने उन्हें एक चौंकाने वाली जानकारी दी. उस ने बताया कि 9 दिसंबर की रात साढ़े 11 बजे के करीब अर्पिता अपने प्रेमी पंकज जाधव के साथ उस के फ्लैट पर आई थी. दोनों बहुत खुश थे. कमरे में जाते ही दोनों झगड़ने लगे. दोनों के बीच हाथापाई भी हुई थी. उस के बाद उन्होंने भीतर से दरवाजा बंद कर लिया. फिर क्या हुआ, कुछ पता नहीं चला.

पार्टी में ऐसा क्या हुआ था कि अर्पिता को मौत के मुंह में जाना पड़ा  पुलिसिया जांच पड़ताल में पता चला कि उसी रात पंकज जाधव के दोस्त और 3डी डिजाइनर अमित हाजरा, जोकि मानवस्थल बिल्डिंग में 15वीं मंजिल पर रहता है, ने अपने फ्लैट में एक पार्टी रखी थी. उस पार्टी में अर्पिता तिवारी, पंकज जाधव के अलावा अमित का पेइंगगेस्ट मनीष, उस का साथी श्रवण सिंह और कृष्णा मौजूद थे.

पार्टी भोर के 4 बजे तक चली थी. पार्टी में सभी ने जम कर ड्रिंक की थी. 4 बजे के बाद सभी सोने के लिए चले गए. पंकज जाधव, अर्पिता और अमित हाजरा हाल में जा कर सो गए, बाकी के 2 मनीष और कृष्णा कमरे में सोने चले गए. सुबह 9 बजे जब आंखें खुलीं तो वहां अर्पिता नहीं थी. खोजबीन करने पर उसी बिल्डिंग के दूसरी मंजिल पर उस की लाश डक्ट पर झूलती हुई मिली.

पुलिस ने कमरे की तलाशी ली तो कमरे में महंगी शराब की कई खाली बोतलें मिलीं. जांचपड़ताल से पता चला कि अर्पिता की मौत वाशरूम की खिड़की से गिरने से हुई थी. पुलिस ने जब वाशरूम का दरवाजा खोला तो वह भीतर से बंद था. फिर इस से अनुमान लगाया गया कि अर्पिता ने आत्महत्या के लिए वाशरूम की खिड़की तोड़ कर छलांग लगाई होगी. पुलिस वाशरूम का दरवाजा तोड़ कर भीतर दाखिल हुई. खिड़की के कांच के टुकड़े फर्श पर बिखरे पड़े थे, अब तक की परिस्थितियां आत्महत्या की ओर इशारा कर रही थीं.

जहां पुलिस अभिनेत्री अर्पिता तिवारी की मौत को एक हादसा मान कर चल रही थी, वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उस का नजरिया बदल गया. रिपोर्ट में मल्टीपल इंजरी यानी शरीर पर लगी जगहजगह चोट किसी और तरफ इशारा कर रही थी. यानी अर्पिता की मौत एक हादसा नहीं, बल्कि हत्या थी.

श्वेता जैसी बनना चाहती थी अर्पिता

त्रिवेणीनाथ तिवारी की तहरीर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मालवणी पुलिस ने मृतका के प्रेमी पंकज जाधव सहित 5 आरोपियों अमित हाजरा, श्रवण सिंह, मनीष जायसवाल और कृष्णा के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

जैसेजैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ती गई, वैसेवैसे अर्पिता की मौत का राज भी गहराता गया. पुलिस ने पांचों आरोपियों पंकज, अमित, श्रवण, मनीष और कृष्णा को थाने बुला कर उन से पूछताछ की.

एंकर अर्पिता तिवारी की रहस्यमयी मौत को तकरीबन एक महीना होने जा रहा था, लेकिन अभी तक मौत की वजह को ले कर पुलिस के हाथ खाली थे. इस गुत्थी को सुलझाने के लिए मुंबई पुलिस ने वारदात के दौरान अर्पिता के साथ मौजूद रहे पांचों लोगों का कलिना स्थित डाइरेक्टोरेट औफ फोरैंसिक साइंस लेबोरेटरी (डीएफएसएल) में लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया. डीएफएसएल स्टाफ ने पौलीग्राफी टेस्ट करने से पहले जांच करने वाले पुलिस अधिकारी से भी पूछताछ की.

5 लोग जिन में एक कुक भी था, उन्हें मालवणी पुलिस स्टेशन में बुला कर रोज पूछताछ की जा रही थी, लेकिन पुलिस पांचों आरोपियों द्वारा दिए गए बयानों की कडि़यों को मिलाने में नाकाम रही.

पुलिस ने इस मामले की गहराई से जांच की तो जो जानकारी सामने निकल कर आई, वह काफी दिलचस्प निकली.

24 वर्षीया अर्पिता त्रिवेणीनाथ तिवारी की 3 बेटियों में सब से छोटी और चुलबुली थी. तिवारीजी मूलत: झारखंड के जमशेदपुर जिले के रहने वाले थे. कालांतर में वे मुंबई में आ कर बस गए थे और घोड़ाबाधा के सरस्वती अपार्टमेंट में परिवार सहित रहने लगे थे.

बड़ी बेटी श्वेता तिवारी ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा तो उन की किस्मत के सितारे चमक उठे. एंकरिंग से कैरियर शुरू करने वाली श्वेता तिवारी ने कई धारावाहिकों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया. इस के बाद उन्होंने भोजपुरी फिल्मों में भी अभिनय कर के सफलता हासिल की.

बड़ी बहन की कामयाबी देख कर बचपन से ही अर्पिता के मन में भी फिल्मी दुनिया में जाने का शौक था. वह भी रुपहले परदे पर चमकते सितारों की तरह खुद दिखने के सपने देखने लगी थी. तब वह छोटी थी और जमशेदपुर के हिलटौप स्कूल में पढ़ती थी. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह मुंबई में पिता के पास आ कर रहने लगी, जिस के बाद उस ने इवेंट मैनेजमेंट का कोर्स किया और एक्टिंग भी सीखी.

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इसी दौर में उसे टेलीविजन पर एंकरिंग करने का मौका मिल गया. यहीं से उस के कैरियर की शुरुआत हुई. कैरियर के पहले पायदान पर कदम रखते ही उस की किस्मत के सितारे बुलंद होते गए. धीरेधीरे अर्पिता आगे बढ़ती गई. उस ने ऐंकरिंग से मौडलिंग और मौडलिंग से फिल्मी दुनिया में पांव जमाए. सफलता उस के कदम चूमती गई. अपनी मेहनत से उस ने करोड़ों रुपए कमाए थे.

बात उन दिनों की है जब अर्पिता 16-17 साल की रही होगी. तब उस के जीवन में पंकज जाधव ने कदम रखा. अर्पिता ने उसे अपने दिल में बसा लिया. दोनों एकदूसरे से प्यार करते थे. पंकज जाधव उस के पड़ोस में ही रहता था. वह बेहद खूबसूरत और कसरती बदन का लड़का था.

श्वेता तिवारी ने बताया कि अर्पिता एक कामयाब लड़की थी. लाखों कमा रही थी. जबकि पंकज जाधव बेरोजगार था. वहअपनी कमाई से पंकज को जेबखर्च देती थी.

प्रेम संबंधों का खेल बना मूल कारण

धीरेधीरे अर्पिता के मांबाप और बहनों को उस के प्रेमसंबंधों के बारे में पता चल गया था. आधुनिक खयालातों के त्रिवेणीनाथ तिवारी ने बेटी को अपना फैसला लेने के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया था. उन्हें उस पर पूरा भरोसा था कि वह जीवन में कोई ऐसा गलत कदम नहीं उठाएगी, जिस से घर वालों को शर्मिंदगी उठानी पड़े.

बाद के दिनों में अर्पिता ने मीरा रोड पर एक फ्लैट ले लिया. पंकज जाधव ने भी मलाड कच्चा रोड स्थित मानवस्थल बिल्डिंग में एक फ्लैट ले लिया था. दोनों अपने परिवारों से अलग अपनेअपने फ्लैट में रहते थे. अर्पिता के इस फैसले से न तो त्रिवेणीनाथ तिवारी को आपत्ति हुई और न ही किसी और को. बल्कि घर वाले उस के फैसले से खुश थे.

धीरेधीरे अर्पिता और पंकज जाधव के रिलेशनशिप को 8 साल बीत चुके थे. पंकज जाधव जहां 8 साल पहले खड़ा था, आज भी वहीं था. उस के स्वभाव में कोई परिवर्तन नहीं आया था. वह अर्पिता की कमाई पर ऐश कर रहा था.

अर्पिता पंकज पर शादी के लिए दबाव बना रही थी, जबकि वह शादी के लिए तैयार नहीं था. इन्हीं बातों को ले कर अकसर दोनों में झगड़ा भी हो जाता था. रोजरोज के झगड़े से अर्पिता ऊब चुकी थी. उस ने पंकज से अपने संबंधों को तोड़ने का फैसला कर लिया था.

अर्पिता की दोस्ती या प्यार पंकज जाधव से नहीं अमित हाजरा से था इस बीच दोनों के बीच एक नई कहानी ने जन्म ले लिया. इस कहानी में अर्पिता को चाहने वाला एक और प्रेमी आ गया जो अर्पिता को पंकज जाधव से कहीं ज्यादा प्यार करता था. वह कोई और नहीं, पंकज जाधव का दोस्त अमित हाजरा था. जिस बिल्डिंग में पंकज जाधव रहता था, उसी की 15वीं मंजिल पर अमित भी रहता था. पंकज के माध्यम से ही अमित का परिचय अर्पिता से हुआ था. बाद में मिलनसार अर्पिता से जल्द ही उस की दोस्ती हो गई.

अर्पिता और पंकज जाधव के रिश्ते टूटने और अलग हो जाने के बाद अमित की अर्पिता से ज्यादा नजदीकी हो गई. उस ने अर्पिता की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया. अर्पिता अमित की मंशा समझ गई थी. वह उस की ओर ध्यान देने के बजाय पंकज से संबंध सुधारने की कोशिश करने लगी. लेकिन पंकज अपनी आदतों में सुधार लाने को तैयार नहीं था.

घटना से करीब 4 दिन पहले अर्पिता और अमित हाजरा के बीच फेसबुक पर लंबी बातचीत हुई थी. अमित अर्पिता से संबंध बनाने के लिए उस पर दबाव बना रहा था. इस बात को ले कर दोनों के बीच खासा विवाद हुआ था. उस ने अर्पिता को देख लेने की धमकी तक दे डाली थी, लेकिन अर्पिता ने यह बात अपने तक ही सीमित रखी. घर में किसी को नहीं बताई.

बहरहाल, अब लौट कर क्राइम सीन पर आते हैं. एक महीने की जांचपड़ताल के बाद पार्टी में मौजूद रहे अमित के नौकर ने पुलिस के सामने चौंका देने वाला बड़ा खुलासा किया. उस ने उस रात अमित हाजरा को अर्पिता के कपड़े खोलते हुए देखा था. उस ने बताया कि 10 दिसंबर की सुबह करीब साढे़ 5 बजे उस की नींद खुली. उस ने देखा कि अमित अर्पिता के बेहद करीब सो रहा था. जबकि जब वे सोने गए थे तो तीनों अलगअलग सो रहे थे.

नौकर ने सब को चौंका दिया बयान दे कर  नौकर के मुताबिक उस ने उस दिन औरों के मुकाबले कम शराब पी थी, इसलिए उस की आंखें सुबह जल्दी खुल गईं. जब उस की आंखें खुलीं तो उस ने देखा कि अर्पिता के बगल में सोया अमित उस के कपड़े हटा रहा था. नौकर को जगा देख कर वह आंख बंद कर लेट गया. नौकर को लगा कि यह सब अर्पिता की मरजी से हो रहा है, इसलिए वह चुपचाप वहां से चला गया.

नौकर के बयान ने पुलिस को बुरी तरह उलझा दिया था. हालांकि जिस हालत में अर्पिता की लाश बरामद की गई थी, उसे देख कर यही लग रहा था कि उस के साथ दुष्कर्म किया गया होगा. लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सब का भ्रम तोड़ दिया. रिपोर्ट में अर्पिता के साथ कोई जोरजबरदस्ती वाली बात नहीं बताई. उस के बाद अर्पिता की मौत की गुत्थी उलझ कर रह गई. पुलिस अब भी उलझी हुई गुत्थी को सुलझाने में जुटी हुई थी.

अर्पिता की मौत के बाद सभी दोस्तों ने बयान दिए थे कि अर्पिता ने खुदकुशी की है. मगर बाद में पुलिस ने इसे हत्या बताया था और अब चारों दोस्तों में से एक अमित हाजरा को 15 जनवरी, 2018 को गिरफ्तार किया गया है. हालांकि जांच का दायरा बड़ा होने की बात कह कर पुलिस हत्या का मकसद अभी नहीं बता रही है.

पुलिस के मुताबिक अमित ने अलगअलग बयान बदले. पुलिस को दिए गए बयान और पौलीग्राफी टेस्ट में दिए गए बयान में अंतर पाया गया. पुलिस को शक है कि अमित हाजरा इस हत्याकांड में पुलिस को गुमराह कर रहा है. बस इसी आधार पर अमित हाजरा को गिरफ्तार किया गया है.

पुलिस ने पंकज जाधव को क्लीन चिट नहीं दी है. वह भी संदेह के दायरे में है. सबूत मिलने पर पंकज जाधव को भी गिरफ्तारी होगी. सूत्रों की मानें तो अमित हाजरा के बयान से पुलिस को कुछ ऐसे सबूत मिले हैं, जिस से हत्या में शामिल होने की पुष्टि होती है.

कथा लिखे जाने तक अमित हाजरा के वकील बी. हैटकर ने 8 फरवरी, 2018 को सेशन कोर्ट में उस की जमानत की अरजी दाखिल की, जो अदालत ने खारिज कर दी.

अमित अभी भी जेल में बंद है. बाकी के आरोपियों की जांच चल रही थी. पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही थी कि अर्पिता हत्याकांड में इन की भूमिका क्या है. फिलहाल कथा लिखे जाने तक पुलिस मौत की उलझी गुत्थी सुलझाने में जुटी हुई थी.

तांत्रिकों के जाल में दिल्ली

लोग चाहे कितने भी जागरूक हो गए हों, भले ही डिजिटल क्रांति आ गई हो लेकिन आज भी समाज में अंधविश्वास कायम है. कुछ अंधविश्वासी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए तांत्रिकों के पास पहुंचते हैं. तांत्रिक भी ऐसे लोगों की अंधी आस्था का लाभ उठाने से नहीं चूकते.

अंधविश्वास में डूबे ऐसे लोग आर्थिक शोषण के साथसाथ शारीरिक शोषण भी करा बैठते हैं. ऐसी बात नहीं है कि केवल अनपढ़ और निम्न तबके के लोग ही तांत्रिकों के पास पहुंचते हैं. सच्चाई तो यह है कि उच्च वर्ग के कई लोग भी तांत्रिकों की शरण में जाते हैं, मामूली पढ़ेलिखे नहीं बल्कि उच्चशिक्षित भी.

तथाकथित तांत्रिकों के चक्कर में फंस कर कई परिवार बरबाद हो चुके हैं, क्योंकि अपने स्वार्थ के लिए ये तांत्रिक कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं. दिल्ली के मंदिर मार्ग इलाके में एक तांत्रिक के क्रियाकलाप की ऐसी खौफनाक हकीकत सामने आई कि सुनने वाले का भी कलेजा कांप उठे.

सेंट्रल दिल्ली के थाना मंदिर मार्ग का एक इलाका है कालीबाड़ी, जो प्रसिद्ध बिड़ला मंदिर (लक्ष्मीनारायण मंदिर) के सामने है. वैसे इस इलाके में अधिकांशत: सरकारी फ्लैट बने हुए हैं, जिन में सरकारी कर्मचारी रहते हैं.

यहीं के एक फ्लैट में 44 साल की के.वी. रमा अपने पति डी.वी.एस.एस. शिव शर्मा (45 साल) और 2 बच्चों के साथ रहती थी. के.वी. रमा शर्मा भारत सरकार के एक मंत्रालय में स्टेनोग्राफर के पद पर नौकरी करती थी. जबकि पति शिव शर्मा डीएलएफ कंपनी में फाइनैंस मैनेजर थे. इस दंपति की बेटी 7वीं कक्षा में और बेटा 5वीं कक्षा में पढ़ रहे थे.

दोनों मियांबीवी कमा रहे थे, इसलिए घर पर हर महीने सैलरी के रूप में मोटी रकम आती थी. कुल मिला कर यह छोटा सा परिवार हर तरह से खुश और सुखी था.

कहते हैं जब किसी व्यक्ति के पास जरूरत से ज्यादा पैसा आने लगता है तो उस का दिमाग और ज्यादा सक्रिय हो जाता है. वह उस पैसे से और ज्यादा पैसे कमाने के उपाय खोजता है. शिव शर्मा भी अपने पैसे को और ज्यादा करने के उपाय खोजने लगे.

किसी ने उन्हें बताया कि शेयर मार्केट की कुछ कंपनियां ऐसी हैं, जिन में पैसे लगाने पर अच्छाखासा मुनाफा कमाया जा सकता है. यह बात शिव शर्मा को समझ आ गई. उन्हें शेयर मार्केट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लिहाजा उन्होंने इंटरनेट से अच्छा लाभांश देने वाली कुछ कंपनियों के बारे में जानकारी हासिल कर ली.

इस के बाद उन्होंने उन कंपनियों के शेयर खरीदने शुरू कर दिए. शुरुआत में उन्हें फायदा हुआ तो उन की दिलचस्पी और बढ़ती गई. उन्होंने शेयर मार्केट में और ज्यादा पैसा लगाया. इस में उन्हें मिलाजुला अनुभव मिलने लगा. कुछ शेयरों ने लाभ दिया तो कुछ में उन्हें नुकसान भी हुआ. हो चुके नुकसान की भरपाई के लिए उन्होंने मोटा निवेश किया.

इस का नतीजा यह निकला कि उन्हें इस में भारी नुकसान हुआ. इस से उन की जमापूंजी तो चली ही गई, साथ ही उन पर कई लाख रुपए का कर्ज भी चढ़ गया. औफिस के लोगों से भी उन्होंने काफी पैसे उधार ले लिए थे. जिन लोगों से शिव शर्मा ने पैसे उधार ले रखे थे, उन के पैसे समय पर नहीं लौटाए तो उन्होंने तकादा करना शुरू कर दिया. कुछ लोग पैसे मांगने उन के फ्लैट तक आने लगे.

फलस्वरूप शिव शर्मा तनाव में रहने लगे. पत्नी के.वी. रमा को भी लोगों की तकादा करने वाली बात अच्छी नहीं लगती थी. शिव शर्मा कर्ज निपटाने के लिए पत्नी से पैसे मांगते थे. उन का कर्ज उतारने में पत्नी भी सहयोग कर देती थी. इन सब बातों को ले कर पतिपत्नी में नोंकझोंक होने लगी. शिव शर्मा तनाव की वजह से चिड़चिड़े हो गए थे, इसलिए वह गुस्से में पत्नी की पिटाई कर देते थे.

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घर में शुरू हो गई कलह

नतीजतन जिस घर में पहले सभी लोग शांति से रहते थे, अब वहां कलह ने डेरा डाल लिया था. पत्नी सरकारी कर्मचारी थी, वह अच्छीखासी सैलरी पाती थी, इसलिए वह पति की तनाशाही सहने के बजाय करारा जवाब दे देती तो पति उस पर हाथ छोड़ देता.

के.वी. रमा महसूस करने लगी कि पति की वजह से ही वह शारीरिक और मानसिक समस्या से जूझ रही है. उधर शिव शर्मा लोगों के तकादे से परेशान थे. वह पत्नी से और पैसे मांगते तो वह मना कर देती कि अब उसे फूटी कौड़ी नहीं देगी.

एक दिन रमा ने अपने एक जानकार से अपने घर की समस्या के बारे में चर्चा की. उस जानकार ने बताया कि आप के पति पर किसी ऊपरी हवा का चक्कर हो सकता है. ऐसे में अगर किसी तांत्रिक से मिला जाए तो समस्या का समाधान हो सकता है.

रमा इस तरह के अंधविश्वास से दूर रहती थी. हालांकि उस ने कई सार्वजनिक स्थानों पर तांत्रिकों के पैंफ्लेट चिपके देखे थे, जिन में हर तरह की समस्या का समाधान कुछ घंटों में करने की बात लिखी होती थी. इस के अलावा लोकल केबल चैनल पर भी ऐसे तांत्रिकों के विज्ञापन देखे थे.

रमा तंत्रमंत्र, टोनेटोटकों आदि को केवल ढकोसला समझती थी. पर अब जब उन के एक जानकार ने घर की समस्या के बारे में तांत्रिक के पास जाने की सलाह दी तो रमा ने भी सोचा कि अगर घर का तनाव किसी तांत्रिक के पास जाने से ठीक हो जाए तो तांत्रिक के पास जाने में कोई बुराई नहीं है. यानी जिस बात को वह अंधविश्वास और ढकोसला बताती थी, अब जरूरत पड़ने पर वह उसी पर विश्वास करने लगी.

करना पड़ा तंत्रमंत्र पर विश्वास

रमा किसी तांत्रिक को नहीं जानती थी, उस के जानकार ने दिल्ली के दक्षिणपुरी इलाके रहने वाले तांत्रिक श्याम सिंह उर्फ भगतजी के बारे में बताया. उस से पता ले कर वह तथाकथित तांत्रिक श्याम सिंह के पास पहुंच गई. तांत्रिक ने सब से पहले बातों बातों में रमा से उस के परिवार की आर्थिक स्थिति को समझा. इस के बाद रमा ने पति के बारे में एकएक बात तांत्रिक को बता दी.

रमा की बात सुनने के बाद तांत्रिक ने अपनी आंखें मूंद लीं और अपनी गद्दी पर बैठेबैठे ही बोला, ‘‘आप के पति के साथ किसी ने कुछ कर दिया है, जिस की वजह से वह घर का एकएक सामान बेच देंगे. यानी वह घर की बरबादी कर के रहेंगे.’’

‘‘भगतजी, इस का उपाय क्या है. मैं चाहती हूं कि वह शेयर बाजार से एकदम दूर हो जाएं. इस शेयर बाजार ने तो हमारे घर की सुखशांति सब छीन ली है.’’ रमा ने कहा.

‘‘देखो, मैं समाधान तो कर दूंगा. वह शेयर में पैसे भी नहीं लगाएंगे, साथ ही बदसलूकी भी नहीं करेंगे. लेकिन इस में करीब एक लाख रुपए का खर्च आएगा.’’ तांत्रिक बोला.

‘‘कोई बात नहीं, हम आप को यह रकम दे देंगे. लेकिन हमें समस्या का समाधान चाहिए.’’ रमा ने कहा.

‘‘आप इस की चिंता न करें. आप हमारे रिसैप्शन पर 30 हजार रुपए जमा करा दीजिए, जिस से हम अपना काम शुरू कर सकें.’’ तांत्रिक ने कहा तो रमा ने पैसे रिसैप्शन पर बैठी लड़की को दे दिए.

वह इस विश्वास से घर चली आईं कि अब समस्या दूर हो जाएगी.

तांत्रिक ने कुछ मंत्र बुदबुदाने के बाद रमा को भभूत देते हुए कहा, ‘‘लो यह भभूत, तुम 7 शनिवार तक पति को शाम के खाने में मिला कर दे देना, सब कुछ ठीक हो जाएगा. ध्यान रखना केवल शनिवार को ही देना. इसे खाने में तब मिलाना जब मिलाते समय कोई टोके नहीं.’’

‘‘ठीक है भगतजी, मैं ऐसा ही करूंगी.’’ कह कर रमा घर चली आई. तांत्रिक के कहे अनुसार रमा ने ऐसा ही किया. वह हर शनिवार को शाम के खाने में पति के खाने में तांत्रिक द्वारा दी गई भभूत मिला कर देने लगी थी. उसे उम्मीद थी कि भभूत अपना असर जरूर दिखाएगी. पर 4-5 सप्ताह बाद भी पति के व्यवहार में कोई फर्क नहीं पड़ा तो रमा ने तांत्रिक को फोन किया. जवाब में तांत्रिक ने कहा कि 7 शनिवार होने दो, पूरा असर होगा. इस बीच रमा तांत्रिक से फोन पर बात करती रहती थी.

किसी तरह शिव शर्मा को इस बात का आभास हो गया था कि उस की पत्नी किसी तांत्रिक के पास जाती है. शिव शर्मा ने पत्नी से इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा.

7 शनिवार पति को भभूत खिलाने के बाद भी पति पर कोई असर नहीं हुआ तो रमा तांत्रिक के पास पहुंची. तांत्रिक ने फिर दूसरी भभूत दी.

इतना ही नहीं, तांत्रिक से उस के फ्लैट पर पूजा, हवन भी कराया. निश्चित दिनों तक भभूत खिलाने के बाद भी पति की आदतों में कोई फर्क नहीं पड़ा तो रमा फिर से तांत्रिक से मिली. चूंकि वह पति से अब ज्यादा ही परेशान हो चुकी थी, इसलिए उस ने तांत्रिक से शीघ्र समाधान करने के लिए कहा.

बना लिया मारने का प्लान

इस पर तांत्रिक ने रमा से कहा कि अब तो इस के लिए आरपार की लड़ाई लड़नी पड़ेगी. रमा ने भी कह दिया कि पति के स्थाई निदान के लिए वह तैयार है. इस के बाद तांत्रिक ने एक बोतल पानी में कुछ घोल कर दे दिया.

तांत्रिक श्याम सिंह उर्फ भगतजी मूलरूप से उत्तराखंड का रहने वाला था. वह दक्षिणपुरी में किराए के मकान में पिछले दोढाई साल से अपना धंधा चला रहा था.

वह पहाड़ों से कुछ जड़ीबूटियां लाता रहता था. उन में से ही कोई बूटी उस ने बोतल के पानी में घोल कर रमा को दे दी थी. घर पहुंच कर रमा ने एक गिलास में बोतल का पानी पति को देते हुए कहा, ‘‘लो, यह बाबाजी का दिया हुआ प्रसाद है. इसे पी लो, सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी.’’

पत्नी के विश्वास पर शिव शर्मा ने वह पानी पी लिया. पानी पीने के बाद उन की हालत बिगड़ने लगी. हालत बिगड़ने पर पत्नी उन्हें डा. राममनोहर लोहिया अस्पताल ले गई. पति को अस्पताल में भरती कराने के बाद रमा ने जब देखा कि पति की हालत गंभीर है तो वह वहां से घर चली आई. अस्पताल में कुछ देर बाद ही शिव शर्मा की मौत हो गई.

शिव शर्मा की मौत के बाद अस्पताल के लोगों ने रमा को ढूंढा पर वह नहीं मिली. इस पर अस्पताल प्रशासन द्वारा पुलिस को खबर दे दी गई. पुलिस ने लाश अस्पताल की मोर्चरी पहुंचवा दी. थाना मंदिर मार्ग के थानाप्रभारी आदित्य रंजन भी वहां पहुंच गए.

पुलिस छानबीन कर रमा के फ्लैट तक पहुंच गई. थाने बुला कर जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने स्वीकार कर लिया कि तांत्रिक श्याम सिंह द्वारा दिया गया पानी पीने के बाद ही उन की हालत बिगड़ी थी.

रमा की निशानदेही पर पुलिस ने दक्षिणपुरी से तांत्रिक श्याम सिंह को भी हिरासत में ले लिया. उस ने पूछताछ में स्वीकार कर लिया कि उस ने रमा को दिए गए पानी में जहर मिलाया था. पुलिस तांत्रिक को भी थाने ले आई.

उधर शिव शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी जहरीले पदार्थ के सेवन से मृत्यु होने की पुष्टि हो गई. तब पुलिस ने आरोपी के.वी. रमा और तांत्रिक श्याम सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

इस तरह एक तांत्रिक के चक्कर में फंस कर रमा ने अपनी गृहस्थी खुद ही उजाड़ ली.

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खजाना मिलने के लालच में गंवाए 17 लाख रुपए

कहते हैं लालच बुरी बला है. ज्यादा लालच हमेशा नुकसानदायक होता है. दिल्ली के मंगोलपुरी के रहने वाले किशनलाल (परिवर्तित नाम) के साथ ऐसा ही हुआ. मंगोलपुरी के वाई ब्लौक में रहने वाले किशनलाल के परिवार में पत्नी के अलावा 5 बच्चे हैं. उन की दवाई की दुकान है. उन का कारोबार अच्छाखासा चल रहा था. करीब 6 साल पहले उन के मकान में जाहिद नाम का एक युवक किराए पर रहता था.

एक दिन जाहिद किशनलाल के घर आया. वह काफी दिनों बाद आया था, इसलिए उन्होंने जाहिद की खूब खातिरतवज्जो की. बातचीत के दौरान जाहिद ने बताया कि वह तांत्रिक है. अपनी तंत्र विद्या से लोगों का भला करता है. उस ने किशनलाल ने कहा, ‘‘आप के इस घर में काला साया है. यह परिवार के लिए अहितकर है. यदि शीघ्र ही इस का समाधान नहीं किया गया तो परिवार में किसी की जान भी जा सकती है.’’

यह सुन कर किशनलाल घबरा गए. वह बोले, ‘‘इस का समाधान कैसे होगा. तुम तो तांत्रिक हो, इसलिए तुम्हीं बताओ.’’

‘‘आप परेशान मत होइए. समाधान हो जाएगा, लेकिन इस की पूजा आदि पर करीब 30 हजार रुपए खर्च होंगे.’’ जाहिद ने बताया.

जाहिद किशनलाल से पूजा के नाम पर 30 हजार रुपए ले गया. करीब 10 दिन बाद जाहिद फिर से किशनलाल के यहां आया. वह बोला, ‘‘10 दिन की पूजा के दौरान मुझे पता चला कि आप के घर में मुगलों की दौलत गड़ी हुई है. यही मुसीबत का साया है. अगर खुदाई कर के दौलत निकाल कर पूजा की जाए तो यह साया दूर हो जाएगा.’’

घर में खजाना गड़ा होने की बात सुन कर किशनलाल खुश हो गए. उन्होंने जाहिद से मकान में खुदाई करने को कहा तो जाहिद ने कहा यह काम बड़ा है. इस काम में 2 तांत्रिकों को और लगाया जाएगा. इस के लिए उस ने किशनलाल से 60 हजार रुपए और ले लिए.

जाहिद 2 तांत्रिकों को किशनलाल के घर ले आया. तांत्रिकों ने किशनलाल के घर में पूजा कर के बताया कि वास्तव में इस घर में भारी मात्रा में खजाना दबा हुआ है. यकीन दिलाने के लिए उन तांत्रिकों ने फर्श की खुदाई शुरू कर दी. थोड़ी खुदाई करने पर सोने का एक सिक्का मिला. सिक्का देख कर किशनलाल खुश हो गए. उन्होंने वह सिक्का एक ज्वैलर को दिखाया. ज्वैलर ने सिक्के की जांच कर के बताया कि सिक्का 100 प्रतिशत सोने का है.

इस के बाद किशनलाल को लालच आ गया. उन्होंने और खुदाई कराने को कहा तो जाहिद ने कहा कि आगे की खुदाई से पहले पूजा करनी होगी, वरना वह साया इस कार्य में व्यवधान डालेगा. जाहिद ने उन से 3 लाख रुपए के अलावा 110 लोगों को खाना खिलाने और उन्हें कपड़े दान दिए जाने का खर्च मांगा. किशनलाल ने वह भी दे दिया.

इस के बाद उन तांत्रिकों ने किशनलाल से पूजा आदि के नाम पर 11 लाख रुपए और ऐंठ लिए. किशनलाल ने भी यह सोच कर रकम दे दी कि जो खजाना निकलेगा, उस के मुकाबले यह रकम मामूली है. इसी लालच में उन्होंने इतनी बड़ी रकम उन तांत्रिकों को दे दी थी. जाहिद और उस के साथी किशनलाल से अब तक 17 लाख रुपए ऐंठ चुके थे. किशनलाल ने लालच में आ कर पैसे ब्याज पर ला कर दिए थे.

अगले दिन जाहिद ने किशनलाल को फोन कर के बताया कि उन्हें अशोक विहार थाना पुलिस ने पकड़ लिया है. पुलिस 6 लाख रुपए मांग रही है. किशनलाल थाना अशोक विहार गए तो पता चला कि पुलिस ने उन्हें नहीं पकड़ा है. तब उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें ठगा जा रहा है. किशनलाल को अपने साथ हुई ठगी का बड़ा अफसोस हुआ. उन्होंने इस की शिकायत पुलिस से की.

तांत्रिकों के चक्कर में पड़ कर कई परिवार बरबाद हो चुके हैं. 7 फरवरी, 2018 को उत्तर पश्चिमी दिल्ली के नेताजी सुभाष पैलेस क्षेत्र में तांत्रिक के बहकावे में आ कर एक व्यक्ति ने अपनी बेटी को ही उस के हवाले कर दिया. पीडि़त लड़की ने पुलिस को बताया कि तांत्रिक बुरी आत्माओं को भगाने के नाम पर पिछले 12 सालों से उस के साथ रेप करता रहा.

18 फरवरी, 2018 को भी एक महिला ने इसलिए खुदकुशी कर ली थी कि बच्चा न होने पर उस के ससुराल वालों ने उसे तांत्रिक के हवाले कर दिया था. पश्चिमी दिल्ली के जखीरा में एक महिला ने बेटे की चाह में अपनी दोनों बेटियों को मार दिया था. तांत्रिक के कहने पर वह महिला अपनी 5 साल और 6 माह की बेटी के ऊपर लेट गई थी, जिस से दोनों बेटियों की मौत हो गई थी.

दिल्ली में ही 22 फरवरी, 2018 को एक दोस्त की इसलिए हत्या कर दी थी क्योंकि तांत्रिक ने आरोपी से कहा था कि तुम्हारी बहन पर दोस्त ने जादू किया था, इसलिए बहन ने आत्महत्या कर ली थी.

आजकल तांत्रिकों ने भी अपने बिजनैस का ट्रेंड बदल दिया है. दिल्ली एनसीआर के तांत्रिकों का बिजनैस फेसबुक, वाट्सऐप और ट्विटर पर भी चल रहा है. तांत्रिक इन माध्यमों पर प्रचार कर के अपनी चमत्कारिक शक्तियों से कुछ ही घंटों में किसी भी समस्या का समाधान करने का दावा करते हैं. कई तांत्रिकों ने तो अपना प्रभाव जमाने के लिए आकर्षक वेबसाइट भी बनवा रखी है.

इन वेबसाइटों पर औनलाइन बुकिंग की भी विशेष सुविधा उपलब्ध करा रखी है. पेमेंट भी ये औनलाइन पहले ही जमा करा लेते हैं. अपनी समस्याओं का समाधान कराने के चक्कर में लोग जब तथाकथित तांत्रिकों द्वारा ठगे जाते हैं तो शर्म की वजह से यह बात किसी को बताने में हिचकते हैं. यानी ठगे जाने के बावजूद भी लोग बदनामी की वजह से चुप रहते हैं.

यही वजह है कि तांत्रिकों का अंधी आस्था के नाम पर ठगी का यह बिजनैस खूब फलफूल रहा है.

क्या जिताएंगे मोदी योगी को बनारस में लगाए पत्थर

उत्तर प्रदेश का बनारस शहर साल 2014 के लोकसभा चुनाव में चर्चा में था. तब अपने भाषणों में बनारस लोकसभा सीट से चुनाव लड़े नरेंद्र मोदी ने खुद को कभी गंगा का बेटा बताया तो कभी कहा कि वे बनारस आए नहीं हैं, उन को मां गंगा ने बुलाया है. कभी कहा कि गंगा की सफाई होगी, गंगा में पानी के जहाज चलेंगे वगैरह.

प्रधानमंत्री बनने के बाद 5 साल का समय गुजर रहा है. बनारस और उस के आसपास के शहरों में बदलाव की जो उम्मीद की जा रही थी, वह जरा भी पूरी नहीं हुई है. भाजपा सरकार इस बात को समझ रही है. इस वजह से ‘मोदीयोगी’ दोनों ही बनारस में पत्थरों को टांकने की झड़ी लगा रहे हैं.

2019 के आगामी लोकसभा चुनाव में बनारस और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल इलाके की अहमियत ज्यादा है. उत्तर प्रदेश का यह इलाका बिहार तक असर डालता है. उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों ही प्रदेश 2019 के लोकसभा चुनाव को ले कर अहम हैं.

अगर भाजपा यहां अपना प्रदर्शन दोहरा नहीं पाई तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य उत्तर प्रदेश के इलाकों की हार को पूरा नहीं कर पाएगी. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ‘कैराना’ लोकसभा सीट पर कोई धार्मिक धुव्रीकरण भाजपा के काम नहीं आया था. ऐसे में बनारस के ये पत्थर भी ‘मोदीयोगी’ को लोकसभा चुनाव में जीत नहीं दिला पाएंगे.

उत्तर प्रदेश में हालात लगातार खराब होते गए हैं. कानून व्यवस्था के साथसाथ हर शहरकसबे में भगवा गमछाधारी ऐंटी रोमियो और गौरक्षा करने वालों की एक भीड़ सी उमड़ पड़ी है. बनारस जैसे शहरों में सैलानी कम हुए हैं. अकेले लड़कालड़की साथ चलने में डरने लगे हैं. जानवरों का कारोबार करने वालों ने गौरक्षकों के डर से कारोबार बंद कर दिया है. पत्थर पूजन इस की अहम वजह है.

‘मोदीयोगी’ द्वारा बनारस में लगाए जाने वाले पत्थर क्या उन्हें चुनाव जिता पाएंगे? इस बारे में किए गए सवाल पर कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह राजपूत कहते हैं, ‘‘2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी और खुद अपना चुनावी प्रचार करते हुए नरेंद्र मोदी ने जो वादे किए थे, वे पूरे नहीं हुए. ऐसे में तरक्की के नए पत्थर जड़ने के जरीए एक बार फिर से जनता को वादों के मायाजाल में उलझाने की कोशिश की जा रही है.

‘‘भाजपा को यह समझ नहीं आ रहा है कि पिछले 5 सालों में गंगा में बहुत सारा पानी बह चुका है. जिन वादों पर जनता ने पहले भरोसा कर लिया था, अब उन का हिसाब देने का वक्त आ गया है. पत्थर पूजन के जरीए जनता को भरमाने की कोशिश की जा रही है.’’

पत्थर लगाने का दिखावा

बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30,000 करोड़ रुपए के विकास कामों के मौडल को जनता के बीच रखा. 4 साल में नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री के रूप में यह 13वां दौरा था. जुलाई महीने की अपनी बनारस यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 33 परियोजनाओं के पत्थर लगाए. बनारस के साथ ही साथ लखनऊ से गाजीपुर तक 341 किलोमीटर लंबे ‘पूर्वांचल ऐक्सप्रैसवे’ का पत्थर आजमगढ़ में लगाया.

‘पूर्वांचल ऐक्सप्रैसवे’ पर सपा यानी समाजवादी पार्टी का अपना दावा है. सपा का कहना है कि यह योजना मुख्यमंत्री रह चुके अखिलेश यादव की थी.

‘पूर्वांचल ऐक्सप्रैसवे’ को तरक्की की नई राह बताते हुए योगी आदित्यनाथ कहते हैं, ‘‘हमारी सरकार पूर्वांचल और बुंदेलखंड में ऐक्सप्रैसवे और इंडस्ट्रियल कौरीडोर बना रही है, जिस से रोजगार, पर्यटन और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा. ‘पूर्वांचल ऐक्सप्रैसवे’ अयोध्या, बनारस और गोरखपुर को जोड़ेगा. इस से तरक्की को नई रफ्तार मिलेगी.’’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके और सपा नेता अखिलेश यादव ने ‘पूर्वांचल ऐक्सप्रैसवे’ को अपनी सरकार की योजना बताते हुए कहा, ‘‘भारतीय जनता पार्टी समाजवादी पार्टी की सरकार के कामों का ही शिलान्यास और उद्घाटन कर रही है. समाजवादी पार्टी की सरकार ने ‘पूर्वांचल ऐक्सप्रैसवे’ के बलियाबिहार बौर्डर तक बढ़ाने की योजना बनाई थी, लेकिन भाजपा की सरकार ने इसे गाजीपुर तक ही सिमटा कर रख दिया है.

‘‘भाजपा सरकार ने इस योजना को शुरू करने में देर की जिस से इस की लागत बढ़ जाए. भाजपा समाजवादी पार्टी की सरकार की खड़ी फसल को काटने का काम कर रही है.’’

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डाक्टर महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा, ‘‘अखिलेश यादव ने ऐसी योजनाओं का फर्जी शिलान्यास कर दिया था. इस की डीपीआर तक नहीं बनी थी.’’

बनारस के बहाने…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी बनारस के दौरे पर आते हैं, केवल पत्थर पूजने का काम ही नहीं करते, बल्कि अपनी यात्रा को बड़े कैनवास में ले जाते हैं. वे अपने बनारस दौरे पर कई बार दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों को भी बतौर मेहमान ला चुके हैं.

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों बनारस में आए थे. दोनों को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनारस घुमाया.

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के साथ मोदी ने 382 एकड़ पर फ्रांस की कंपनी की मदद से बने सोलर पावर प्लांट का उद्घाटन किया था.

निशाने पर आजमगढ़

लखनऊ से गाजीपुर तक बनने वाले ‘पूर्वांचल ऐक्सप्रैसवे’ का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजमगढ़ जिले के मंदूरी गांव हवाईपट्टी में हुए एक कार्यक्रम में किया. यह हवाईपट्टी आजमगढ़ जिले से 14 किलोमीटर दूर थी. दिल्ली के बाटला हाउस ऐनकाउंटर में मारे गए लोगों का गांव संजरपुर आजमगढ़ में ही आता है. हवाईपट्टी से यह केवल 30 किलोमीटर दूर था.

वैसे तो पूर्वांचल में भाजपा का मजबूत जनाधार है,  इस के बावजूद भी आजमगढ़ उस की पकड़ से हमेशा ही दूर रहा है. नरेंद्र मोदी की सभा के बहाने भाजपा ने यहां पर अपना प्रचार किया. पूरे इलाके को सफेद केसरिया रंग से सराबोर कर दिया गया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस से हैलीकौप्टर द्वारा आजमगढ़ हवाईपट्टी तक आए. बरसात से बचने के लिए वाटरप्रूफ पंडाल का इंतजाम किया गया था. इस में तकरीबन 40,000 लोग बैठ सकते थे. मंच से दूर शिलान्यास की पट्टिका लगाई गई. रिमोट द्वारा मंच से इस का उद्घाटन किया गया था.

आजमगढ़ पूर्वांचल का प्रमुख जिला है. यहां से सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव सांसद हैं. 2014 की मोदी लहर में भी भाजपा यहां पर चुनाव नहीं जीती थी.

भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव में आजमगढ़ की सीट अपनी झोली में डालना जरूरी है. सपा ने कहा है कि मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. ऐसे में भाजपा के लिए यहां जीत आसान हो जाएगी.

भाजपा ने केवल 2009 के लोकसभा चुनाव में यह सीट जीती थी. तब रमाकांत यादव सांसद बने थे. 1991 की राम लहर और 2014 की मोदी लहर में भी यहां भाजपा चुनाव नहीं जीती.

कबीरदास पर निशाना

मार्च से जुलाई के बीच पिछले 5 महीने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 बार बनारस और एक बार कबीरदास के निर्वाण स्थल मगहर की यात्रा कर चुके हैं.

विचारधारा के लैवल पर देखें तो कबीरदास और राम दोनों अलगअलग विचारधाराओं को आगे बढ़ाते हैं. राम धार्मिक रहे तो कबीरदास धर्म का आडंबर का विरोध करते थे.

अपना जीवन बनारस में बिताने वाले कबीरदास धार्मिक आडंबर का विरोध करने के लिए ही अपने अंतिम समय मगहर चले आए थे.

राम और कबीरदास को एकसाथ ले कर चलना भाजपा की मजबूरी बन गई है.

दलित चिंतक रामचंद्र कटियार कहते हैं, ‘‘पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में दलित तबका भाजपा के साथ था. उत्तर प्रदेश और केंद्र में बनी ‘मोदीयोगी’ की सरकार में दलित सम्मान की बातें तो हुईं, पर असल में उस के लिए कुछ हुआ नहीं. भगवा गैंगों ने दलितों को सहारनपुर से ले कर भीमाकोरेगांव तक परेशान किया. अब दलित तबका भाजपा से टूट गया है.

‘‘उत्तर प्रदेश के 4 उपचुनावों में भाजपा की हार में दलित तबके का भाजपा से छिटकना बड़ी वजह था. अब समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का तालमेल होने के बाद भाजपा के सामने मजबूरियां बढ़ जाएंगी. ऐसे में दलितों को वापस पार्टी से जोड़ना जरूरी है.

‘‘इस के लिए भाजपा को कबीरदास की याद आई. भाजपा को साफ लग रहा है कि केवल राम और बनारस का नाम ले कर आगे नहीं बढ़ा जा सकता. दलितों को जोड़ने के लिए कबीरदास का महिमामंडन जरूरी है. कबीरदास को दलितों में गुरु सा भाव दिया जाता है. ऐसे में भाजपा भी कबीर को राम की तरह कब्र से निकाल कर राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहती है.’’

जिंदगी और मौत

इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले में व्यक्ति के अस्तित्व, गरिमा, आत्मसम्मान, स्वतंत्रता, विवेक आदि के उन हिस्सों पर बात करनी पड़ी जो दर्शनशास्त्र का हिस्सा हैं. जो न तो सुन सकता है, न बोल सकता है, न चल सकता है, न लिख सकता है और न ही उस की स्मरणशक्ति काम कर रही है, सुप्रीम कोर्ट ऐसे व्यक्ति के जीवन के प्रश्न पर विचार कर रहा था. ऐसा व्यक्ति केवल डाक्टरों के कारण मशीनों के सहारे जिंदा रखा जा रहा था.

क्या कोई व्यक्ति किसी मृत व्यक्ति की देह के साथ अपमानित व्यवहार कर सकता है? यह अपराध है या नहीं? इस बारे में कानून स्पष्ट है कि मृत व्यक्ति की देह के साथ कू्रुर व्यवहार करना अपराध है. सदियों से आदिवासी कबीले ही नहीं, अच्छेभले राजा भी हारे हुए दुश्मन को मार कर उस की मृतदेह की नुमाइश करते रहे हैं, उस के शरीर का प्रदर्शन करते रहे हैं. सभी समाजों ने इसे क्रूरता की पराकाष्ठा माना है.

इसी तरह की स्थिति उस व्यक्ति की है जो ट्यूबों और मशीनों से बंधा अस्पताल के बैड पर पड़ा है. रिश्तेदार और डाक्टर न तो उसे मृत मान सकते हैं न ही जीवित. एक आशा होती है कि शायद वह जी उठे पर बहुत कम. क्या डाक्टरों को अधिकार है कि वे पैसे मिलने पर उस व्यक्ति को कृत्रिम तौर पर जीवित रख सकते हैं? आमतौर पर जब पैसा न मिलने की आशंका होती है तो डाक्टर कृत्रिम उपाय हटा लेते हैं. पर वह उन की हार होती है और वे सभी रिश्तेदारों की सहमति मांगते हैं जिसे देने में सगेसंबंधी  हिचकिचाते हैं.

जीवन का अधिकार क्या एक व्यक्ति को यह अधिकार देता है कि वह पहले से घोषित कर दे कि उसे मैडिकल सुविधाओं से जिंदा न रखा जाए और डाक्टर को निर्देश दे सकता है कि उस के ठीक न हो सकने की हालत में उसे मशीनों से हटा लिया जाए?

एक अच्छे डाक्टर के लिए इस पर निर्णय लेना आसान नहीं है, क्योंकि उसे तो यही प्रशिक्षण दिया गया है कि वह अंतिम समय तक मरीज की बीमारी से लड़ता रहे. यदि डाक्टरों के पास लाए गए हर मरीज के साथ उस का घोषणापत्र भी लाया जाएगा कि उसे जबरदस्ती जिंदा न रखा जाए तो वे अपनी शिक्षा और अपने ध्येय से न्याय नहीं कर पाएंगे. फिर तो वे पशुओं के डाक्टर बन कर रह जाएंगे जो केवल उपयोगी पशुओं को ही जिंदा रखते हैं.

अनुपयोगी मानव को मरने देने की घोषणा का कोई अर्थ कानून की दृष्टि में नहीं होना चाहिए, क्योंकि बच्चे या अन्य रिश्तेदार बीमार वृद्धों को बहका, बहला या धमका कर उन से इस प्रकार की घोषणा करा सकते हैं. अरबपति भी एक समय असहाय हो सकता है जब वह जिंदा रहना चाहता हो पर निकटसंबंधी न चाहें. जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री थीं पर बीमार पड़ने पर शशिकला उन से किसी को मिलने नहीं दे रही थीं. हफ्तों बीमार रहने के बाद उन की मृत्यु हो गई पर मालूम नहीं हो सका कि मृत्यु का कारण क्या था.

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि जब केवल मशीनों पर व्यक्ति जीवित रखा जा रहा हो तो मरीज के होशोहवास में दिए गए घोषणापत्र पर डाक्टर विचार कर सकते हैं और मशीनें हटा सकते हैं. यदि कोई घोषणापत्र न हो तो व्यक्ति की गरिमा, आत्मसम्मान और जीवन के अधिकारों का संतुलन करते हुए निर्णय लेने में डाक्टर, कोर्ट के इस फैसले के बाद, स्वतंत्र हैं और तब मशीनें हटाना अपराध न होगा.

फन्ने खां : अति वाहियात फिल्म

अक्स’, ‘रंग दे बसंती’, ‘दिल्ली 6’, ‘भाग मिल्खा भाग’ और ‘मिर्जिया’ जैसी फिल्मों के सर्जक राकेश ओमप्रकाश मेहरा बतौर निर्माता एक डैनिश फिल्म ‘‘एवरी बडी इज फैमस’’ का भारतीयकरण कर ‘फन्ने खां’ नामक फिल्म लेकर आए हैं. अब तक अपनी मौलिक कहानियों पर काम करते रहे राकेश ओमप्रकाश मेहरा ‘फन्ने खां’ बनाते समय भूल गए कि ‘नकल के लिए भी अकल’ चाहिए. फिल्म के लेखक व निर्देशक अतुल मांजरेकर ने भी साबित कर दिखाया कि वह कितनी वाहियात और बेसिर पैर की फिल्म निर्देशित कर सकते हैं.

फिल्म ‘‘फन्ने खां’’ की कहानी के केंद्र में गायकी में सुपर स्टार न बन पाने वाले प्रशांत शर्मा (अनिल कपूर) हैं, जो कि अपने दोस्तों के बीच फन्ने खां के नाम से मशहूर हैं. प्रशांत के दो भगवान हैं मोहम्मद रफी और शम्मी कपूर और उसके खास दोस्त अधीर (राज कुमार राव) हैं. एक औक्रेस्टा में गाते हुए प्रशांत शर्मा अपने सपनों को पूरा करने के लिए काफी मेहनत करते हैं. यहां तक कि सुपरस्टार बनने के लिए वह शम्मी कपूर की पूजा तक करते नजर आते हैं. उनकी एकमात्र तमन्ना स्टारडम पाना है.

प्रशांत की पत्नी कविता (दिव्या दत्ता) भी उनके सपने को सच करने की दिशा में उनके साथ रहती है. मगर प्रशांत के सपने पूरे नहीं हो पाते हैं. प्रशांत एक फैक्टरी में नौकरी करते हैं. जब उनकी बेटी का जन्म होता है, तो वह उसका नाम लता रखते हैं और अब वह अपने सपने को अपनी बेटी लता के माध्यम से पूरा होते देखना चाहते हैं. जैसे जैसे लता बड़ी होती है, वह संगीत व नृत्य में अपना कौशल दिखाने लगती है. वह अच्छा गाती है और अच्छा नृत्य भी करती है. मगर शारीरिक रूप से मोटी होने के कारण जब लता (पिहू सैंड) स्टेज पर पहुंचती है, तो लोग उसका मजाक उड़ाते हैं.

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प्रशांत अपनी बेटी को सफल गायिका बनाने के लिए हर तरह के प्रयास करते हैं. इसी दौरान उनकी नौकरी चली जाती है तो वह टैक्सी चलाने लगते हैं. इस प्रक्रिया के दौरान प्रशांत को अपनी बेटी लता से फटकार भी सुननी पड़ती है. जबकि अब मशहूर पौप गायिका बेबी सिंह (ऐश्वर्या राय बच्चन) के लोग दीवाने बन चुके हैं. पर बेबी सिंह का मैनेजर चाहता है कि रियालिटी शो में बेबी सिंह के साथ कुछ गलत हो जाए. उधर प्रशांत चाहते हैं कि किसी तरह उनकी बेटी लता के गाए गीतों का एक संगीत अलबम बाजार में आ जाए.

जब एक दिन मशहूर पौप गायिका बेबी सिंह, प्रशांत की टैक्सी में यात्रा करती है, तो प्रशांत के दिमाग में आता है कि यदि बेबी सिंह का अपहरण कर लिया जाए तो उसका काम आसान हो सकता है. वह अपने मित्र अधीर की मदद से बेबी सिंह का अपहरण कर लेते हैं. उसके बाद बेबी सिंह के मैनेजर कक्कड़ (गिरीष कुलकर्णी) को फोनकर फिरौती मांगते हैं, मगर फिरौती में रकम नहीं मांगते. उसके बाद कहानी कई उतार चढ़ाव से गुजरती है.

एक सफल विदेशी फिल्म का भारतीयकरण करते समय लेखक व निर्देशक ने काफी गलतियां की हैं. मूल फिल्म ‘एवरी बडी इज फैमस’’ एक डार्क कौमेडी वाली छोटी फिल्म थी, जबकि ‘फन्ने खां’ मेलोड्रामैटिक और काफी लंबी फिल्म है. फिल्म का क्लायमेक्स सहित बहुत कुछ अविश्वसनीय लगता है. कहानी का ढांचा सही ढंग से बुना ही नहीं गया. एक संवेदनशील व बेहतरीन मुद्दे वाली फिल्म का हश्र ‘थोथा चना बाजे घना’ वाला हो गया.

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कथानक के स्तर पर कहीं कोई गहराई नहीं है. लता का अपने पिता के खिलाफ शिकायत करते रहने की बात समझ में नहीं आती. ऐश्वर्या राय बच्चन अभिनीत बेबी सिंह का किरदार भी ठीक से गढ़ा नहीं गया. मजेदार बात यह है कि इंटरवल से पहले भी फिल्म वाहियात है, मगर इंटरवल के बाद तो यह फिल्म और अधिक वाहियात हो गयी है.

निर्देशक के तौर पर अतुल मांजरेकर अफसल रहे हैं. फिल्म के मूल कथानक से ही वह भटक गए हैं. काश राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने यह फिल्म अतुल मांजरेकर की बनिस्बत किसी समझदार निर्देशक को सौंपी होती.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो एक भी कलाकार अपने अभिनय से प्रभावित नहीं करता. कमजोर पटकथा व कमजोर चरित्र चित्रण के चलते अनिल कपूर व राज कुमार राव जैसे बेहतरीन कलाकार भी फिल्म को डूबने से नहीं बचा सकते. राज कुमार राव व अनिल कपूर दोस्त हैं, मगर परदे पर इनकी केमिस्ट्री नजर ही नहीं आती. कैमरामैन तिरू की प्रशंसा की जा सकती है.

‘‘फन्ने खां’’ एक संगीत प्रधान फिल्म है. मगर संगीतकार अमित त्रिवेदी बुरी तरह से निराश करते हैं.

दो घंटे नौ मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘फन्ने खां’’ का निर्माण राकेश ओमप्रकाश मेहरा, अनिल कपूर, टीसीरीज, निशांत पिट्टी, वीरेंद्र अरोड़ा ने किया है. फिल्म के निर्देशक अतुल मांजरेकर, पटकथा लेखक अतुल मांजरेकर, हुसेन दलाल, अब्बास दलाल, संवाद लेखक हुसेन दलाल, संगीतकार अमित त्रिवेदी, कैमरामैन तिरू तथा फिल्म के कलाकार हैं – अनिल कपूर, ऐश्वर्या राय बच्चन, राज कुमार राव, पिहू सैंड, दिव्या दत्ता, करण सिंह छाबरा, अनैयथा नायर, गिरीष कुलकर्णी, स्वाती सेमवाल व अन्य.

इस टीवी एक्ट्रेस की होगी ‘बिग बौस 12’ में एंट्री

छोटे पर्दे के फेमस शो ‘बिग बौस’ के 12 वें सीजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं. पिछले कुछ दिनों से मीडिया में इस शो को लेकर लगातार कुछ ना कुछ अपडेट आ रहे हैं. एक बार फिर इस शो से जुड़ी एक नई खबर सामने आई है. अगर यह खबर पक्की साबित हुई तो ‘बिग बौस 12’ को अपना पहला सेलिब्रिटी कंटेस्टेंट मिल चुका है.

एक खबर के मुताबिक टीवी जगत की फेमस एक्ट्रेस सृष्टि रोडे ‘बिग बौस 12’ में नजर आने वाली हैं. सृष्टि बिग ने बौस के घर में जाने के लिए अपनी हामी भर दी है और शो मेकर्स के साथ कौन्ट्रैक्ट भी साइन कर लिया है. बता दें कि इस बार शो में कंटेस्टेंट जोड़ियों में भेजे जायेंगे, इसलिए शो के मेकर्स सृष्टि के मंगेतर और टीवी एक्टर मनीष नागदेव से भी बातचीत कर रहे है. अगर मनीष से बात फाइनल हो जाती है तो इस शो में सृष्टि के साथ मनीष भी नजर आ सकते हैं.

आपको बता दें कि सृष्टि कई फेमस टीवी सीरियल में नजर आ चुकी हैं. ‘ये इश्क़ हाए’ टीवी शो से सृष्टि ने अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद वह ‘छोटी बहू-2’ और ‘पुनर्विवाह’ में नजर आ चुकी हैं. फिलहाल सृष्टि पौपुलर टीवी सीरियल ‘इश्कबाज’ में नजर आ रही हैं, जिसमें वो फैजा का किरदार निभा रही हैं.

मीडिया में आ रही खबरों की माने तो इस बार शो का थीम और कंटेट ऐसा रखा गया है कि ‘बिग बौस 12’ अब तक का सबसे बोल्ड सीजन साबित होगा. एक खबर के मुताबिक इस बार शो के फौर्मेट को ज्यादा बोल्ड और कंट्रोवर्सियल बनाया जायेगा क्योंकि पिछला सीजन ‘बिग बौस 11’ टीआरपी के मामलें में कुछ खास कमाल नहीं कर पाया था. इस बार भी सुपरस्टार सलमान खान शो को होस्ट करेंगे लेकिन इसके साथ यह भी चर्चा है कि कैटरीना सलमान के साथ शो को होस्ट कर सकती हैं.

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