मुन्ना बजरंगी हत्याकांड : जेल में सब हो सकता है

9 जुलाई, 2018 की सुबह उत्तर प्रदेश की बागपत जेल में 2 बदमाश मुन्ना बजरंगी और सुनील राठी साथ बैठ कर चाय पी रहे थे. अचानक दोनों के बीच बातचीत का सुर बदल गया और जेल परिसर गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज गया. मुन्ना बजरंगी का शव जमीन पर पड़ा था. जेलर और बाकी स्टाफ वाले हक्केबक्के खड़े थे.

मुन्ना बजरंगी की हत्या से यह साफ हो गया कि जेलों में सबकुछ हो सकता है. सिक्योरिटी के कड़े इंतजाम होने के बाद भी जेल में पिस्तौल पहुंच गई.

मुन्ना बजरंगी की हत्या ने उत्तर प्रदेश में भाजपा की योगी सरकार की पोल खोल कर रख दी. अपराध जगत के जानकार कहते हैं कि मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय समेत कई दूसरे नेताओं की हत्या की थी, जिस की वजह से साजिशन उसे जेल में मार दिया गया.

मुन्ना बंजरगी की हत्या करने वाला सनील राठी उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली में दहशत की बड़ी वजह था. बागपत जिले के टीकरी गांव का रहने वाला सुनील राठी दोघट थाने का हिस्ट्रीशीटर अपराधी था.

18 साल पहले सुनील राठी तब चर्चा में आया था जब उस के पिता नरेश राठी की बड़ौत के पास हत्या कर दी गई थी. इस के बाद सुनील राठी ने महक सिंह और मोहकम सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी थी. इस आरोप में सुनील राठी को उम्रकैद की सजा हुई थी.

सुनील राठी पहले हरिद्वार जेल में था. जनवरी, 2017 में वह बागपत जेल में आया था. वह जेल से ही अपना गिरोह चला रहा था.

इस हत्या की गूंज राजधानी लखनऊ तक पहुंच गई. उत्तर प्रदेश सरकार ने आननफानन जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, हैड वार्डन अरजिंदर सिंह, वार्डन माधव कुमार को सस्पैंड कर दिया. जांच के लिए ज्यूडिशियल इनक्वायरी भी बनाई गई.

खौफ  का दूसरा नाम

मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह था. उस का जन्म साल 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था.

पारसनाथ सिंह के 4 बेटों में मुन्ना बजरंगी सब से बड़ा था. घरपरिवार पैसे के लिहाज से कमजोर था. मुन्ना बजरंगी अपने घर वालों की मदद के लिए बचपन से ही मजदूरी करता था. बाद में वह कालीन बुनने का काम करने लगा था. वहीं पहली बार उस के खिलाफ  मारपीट और बलवा करने का मुकदमा दर्ज हुआ था. इस के बाद ही प्रेम प्रकाश मुन्ना बजरंगी के नाम से बदनाम किलर बन गया था.

मुन्ना बजरंगी को किताबों के बजाय हथियार रखने का शौक हो गया था. यही वजह थी कि 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उस के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था. इस के बाद वह अपराध के दलदल में धंसता चला गया.

इसी दौरान मुन्ना बजरंगी को जौनपुर के दबंग माफिया गजराज सिंह का साथ हासिल हो गया था. वह अब उस के लिए काम करने लगा था. साल 1984 में उस ने लूट के लिए कालीन व्यापारी भुल्लन जायसवाल की हत्या कर दी थी.

मुन्ना बजरंगी पहली बार बड़ी चर्चा में तब आया था जब उस ने मई, 1993 में बक्शा थानाक्षेत्र के भुतहा निवासी भाजपा नेता जौनपुर के रहने वाले रामचंद्र सिंह, उन के सहयोगी भानु प्रताप सिंह और गनर आलमगीर की हत्या कचहरी रोड पर भरी भीड़ के बीच कर के पूर्वांचल में अपना दम दिखाया था. हत्या के बाद उस ने गनर की कारबाइन लूट ली थी.

24 जनवरी, 1996 को रामपुर थानाक्षेत्र के जमालपुर बाजार में उस समय के ब्लौक प्रमुख कैलाश दुबे, जिला पंचायत सदस्य राज कुमार सिंह और अमीन बांके तिवारी की हत्या हो गई थी. इस के बाद मुन्ना बजरंगी ने पूर्वांचल में छोटेछोटे अपराधियों की एक फौज बना ली थी. इस कांड में पहली बार एके 47 राइफल से हत्या हुई थी.

90 के दशक में मुन्ना बजरंगी पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और नेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया था. मुख्तार अंसारी ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक चुने गए. इस के बाद इस गैंग की ताकत बहुत बढ़ गई. मुन्ना बजरंगी सीधेतौर पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था.

लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते भाजपा के विधायक कृष्णानंद राय उन के लिए चुनौती बनने लगे. उन पर मुख्तार अंसारी के दुश्मन ब्रजेश सिंह का हाथ था, जिस से कृष्णानंद राय का गैंग फलफूल रहा था.

कृष्णानंद राय का बढ़ता असर मुख्तार अंसारी को रास नहीं आ रहा था. उन्होंने कृष्णानंद राय को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंप दी.

मुख्तार से फरमान मिल जाने के बाद मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को खत्म करने की साजिश रची और उसी के चलते 29 नवंबर, 2005 को कृष्णानंद राय को दिनदहाड़े मौत की नींद सुला दिया.

भाजपा विधायक की हत्या के अलावा कई मामलों में उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ  और सीबीआई को मुन्ना बजरंगी की तलाश थी, इसलिए उस पर 7 लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया गया, पर वह लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा. बाद में वह भाग कर मुंबई चला गया. उस ने एक लंबा अरसा वहीं गुजारा.

1997 में स्पैशल टास्क फोर्स ने मुन्ना बजरंगी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया. 11 सितंबर, 1998 को दिल्ली पुलिस के साथ मिल कर समयपुर बादली थानाक्षेत्र में उसे घेर लिया. इस मुठभेड़ में दोनों तरफ से ताबड़तोड़ गोलियां चलीं. मुन्ना बजरंगी को इस में कई गोलियां लगीं पर वह बच गया था.

अब मुन्ना बजरंगी को यह पता चल गया था कि अपराध की दुनिया से बाहर निकलना जरूरी है. ऐसे में वह राजनीति में कामयाब होना चाहता था. एक बार उस ने लोकसभा चुनाव में गाजीपुर लोकसभा सीट पर अपना एक डमी उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिश की थी. वह एक महिला को गाजीपुर से भाजपा का टिकट दिलवाने की कोशिश कर रहा था, जिस के चलते उस के मुख्तार अंसारी के साथ संबंध भी खराब हो रहे थे.

भाजपा से निराश होने के बाद मुन्ना बजरंगी ने कांग्रेस का दामन थामा. वह कांग्रेस के एक कद्दावर नेता की शरण में चला गया. कांग्रेस के वह नेता भी जौनपुर जिले के रहने वाले थे. मगर मुंबई में रह कर सियासत करते थे. मुन्ना बजरंगी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उन को सपोर्ट भी किया था.

29 अक्तूबर, 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना बजरंगी को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था. माना जाता है कि मुन्ना बजरंगी को अपने ऐनकाउंटर का डर सता रहा था, इसलिए उस ने खुद ही एक योजना के तहत दिल्ली पुलिस से अपनी गिरफ्तारी कराई थी.

मुन्ना बजरंगी की गिरफ्तारी के इस आपरेशन में मुंबई पुलिस को भी ऐन वक्त पर शामिल किया गया था. बाद में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि दिल्ली के विवादास्पद ऐनकाउंटर स्पैशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी का हाथ होने का शक है, इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया.

मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने अपने पति की हत्या को साजिश करार दिया तो दूसरी तरफ मुन्ना बजरंगी की गोली का शिकार हुए पूर्व विधायक कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय ने कहा कि जैसा उस ने किया था, वैसी सजा भी मिली.

गैंगस्टरों का खूनी खेल

22 मई 2018 की बात है. सुबह के करीब सवा 5 बजे होंगे. श्रीगंगानगर शहर के जवाहरनगर इलाके में मीरा चौक के पास स्थित मेटेलिका जिम के बाहर एक कार आ कर रुकी. इस कार में 5 युवक सवार थे. इन में से 2 युवक कार में ही बैठे रहे और 3 जिम की तरफ बढ़ गए.

जिम का मेनगेट खुला था. तीनों युवक जिम के औफिस में चले गए. जिधर एक्सरसाइज करने की मशीनें लगी हुई थीं, वहां के दरवाजे का लौक बायोमेट्रिक तरीके से बंद था. इस गेट के पास सोफे पर ट्रेनर साजिद सो रहा था. उन तीनों युवकों में से एक युवक ने साजिद को जगाया और उसे पिस्तौल दिखाते हुए गेट खोलने को कहा. साजिद ने मना किया तो उन्होंने उसे जान से मारने की धमकी दी. डर की वजह से घबराए साजिद ने बायोमेट्रिक मशीन में अंगुली लगा कर गेट खोल दिया.

गेट खुलते ही 2 युवक जिम के अंदर घुस गए और तीसरे युवक ने साजिद से उस का मोबाइल छीन कर तोड़ दिया. फिर तीसरा युवक भी जिम में घुस गया. जिम के अंदर विनोद चौधरी उर्फ जौर्डन मशीनों पर एक्सरसाइज कर रहा था. ज्यादा सुबह होने के कारण उस समय जिम में वह अकेला ही था.

जिम में घुसे तीनों युवकों ने पिस्तौलें निकालीं और विनोद को निशाना बना कर दनादन गोलियां दाग दीं. विनोद निहत्था था, उस ने जिम का शीशा तोड़ कर बाहर भागने की कोशिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हो सका.

लगातार गोलियां लगने से विनोद के शरीर से खून बहने लगा और वह छटपटाता हुआ एक तरफ लुढ़क गया. मुश्किल से 8-10 मिनट में विनोद को मौत के घाट उतार कर वे तीनों युवक वहां से चले गए. यह वारदात पुलिस चौकी से मात्र 200 मीटर की दूरी पर हुई थी.

जिम के ट्रेनर साजिद ने विनोद उर्फ जौर्डन की हत्या की सूचना तुरंत पुलिस और अन्य लोगों को दे दी. सूचना मिलने पर पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंच गए. शहर में चारों तरफ नाकेबंदी करा दी गई. जौर्डन की हत्या की खबर पूरे शहर में आग की तरह फैल गई. सैकड़ों लोग मौके पर जमा हो गए.

जौर्डन की हत्या से शहर में दहशत सी फैल गई. इस का कारण यह था कि 36 वर्षीय जौर्डन पर शहर के पुरानी आबादी, कोतवाली, सदर और जवाहरनगर थाने में मारपीट, छीनाझपटी और प्राणघातक हमले के करीब दरजन भर मामले दर्ज थे.

मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने जांचपड़ताल की. फिर जौर्डन की हत्या के एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी जिम के ट्रेनर साजिद से पूछताछ की. जिम में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकाली गई. विधिविज्ञान प्रयोगशाला की टीम भी बुला ली गई. इस टीम ने मौके से गोलियों के खोखे और अन्य साक्ष्य जुटाए. जौर्डन के शरीर पर सिर से पैर तक 15 से ज्यादा गोलियों के निशान थे. जरूरी काररवाई करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया.

जौर्डन ने दोस्ती नहीं स्वीकारी तो मिली गोली

जौर्डन के चाचा धर्मपाल ने उसी दिन जवाहरनगर थाने में उस की हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया. इस में बताया कि उस का भतीजा विनोद उर्फ जौर्डन अलसुबह पुरानी आबादी में उदयराम चौक के पास स्थित घर से जिम के लिए निकला था. वह अपने अतीत को भुला कर अब समाजसेवा के काम करता था. अब वह खिलाडि़यों का नेतृत्व करता था और बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाता था.

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जौर्डन को गैंगस्टर लारेंस, अंकित भादू, संपत नेहरा, अमित काजला, आरजू विश्नोई, झींझा और विशाल पचार ने जान से मारने की धमकी दी थी. इस के अलावा श्रीगंगानगर के ही रहने वाले सट्टा किंग राकेश नारंग व करमवीर ने भी उसे चेतावनी दी थी.

धर्मपाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जौर्डन ने एक बार मुझे बताया था कि इन लोगों ने उसे मरवाने के लिए 25 से 50 लाख रुपए में गैंगस्टर बुक कर उस की हत्या की सुपारी दे रखी थी.

जौर्डन की हत्या का मामला साफतौर पर अपराधी गिरोहों से जुड़ा हुआ था. इसलिए पुलिस ने सभी पहलुओं को ध्यान में रख कर जांचपड़ताल शुरू की. जांच में यह भी पता चला कि कुख्यात गैंगस्टर श्रीगंगानगर में अपने गैंग को बढ़ाना चाहता था. इस के लिए उस ने जौर्डन की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया था, लेकिन जौर्डन ने मना कर दिया.

इस बात को ले कर लारेंस उस से रंजिश रखने लगा. लारेंस ने जौर्डन को धमकी भी दी थी. लारेंस अब अजमेर जेल में बंद है. लारेंस गैंग के शूटर संपत नेहरा, अंकित भादू, रविंद्र काली, हरेंद्र जाट आदि ने दहशत पैदा करने के लिए श्रीगंगानगर में नवंबर, 2017 में पुलिस इंसपेक्टर भूपेंद्र सोनी के भांजे पंकज सोनी की सरेआम गोलियां मार कर हत्या कर दी थी.

इसी 26 जनवरी को श्रीगंगानगर के हिंदूमलकोट बौर्डर पर पंजाब पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर विक्की गोंडर, प्रेमा लाहौरिया समेत 3 बदमाशों का एनकाउंटर किया था. इस के बाद सतर्क हुई श्रीगंगानगर पुलिस ने पंकज सोनी हत्याकांड में 30 जनवरी को लारेंस गिरोह के 2 गुर्गे पकड़े थे.

पुलिस को इन बदमाशों के मोबाइल से अजमेर जेल में बंद गैंगस्टर लारेंस से वाट्सऐप पर हुई चैटिंग की जानकारी मिली. चैटिंग में दोनों गुर्गे हिस्ट्रीशीटर विनोद चौधरी उर्फ जौर्डन की रेकी की सूचनाएं लारेंस को दे रहे थे. इस से पुलिस को इस बात का अंदाजा हो गया था कि लारेंस जौर्डन को मरवाना चाहता था.

इस के बाद श्रीगंगानगर पुलिस ने जौर्डन को बुला कर सतर्क रहने को कहा था. कुछ दिन पहले कुछ लोगों ने भी जौर्डन को संभल कर रहने को कहा था. धमकियां मिलने के बाद जौर्डन काफी सतर्क रहता भी था. वह घटना से करीब 15 दिन पहले से ही जिम जाने लगा था. वह समय बदलबदल कर जिम जाता था.

अपनी कार को भी वह जिम के सामने न खड़ी कर के आसपास खड़ी करता था. लेकिन फिर भी बदमाशों ने उसे मौत के घाट उतार दिया था. इस का मतलब यह था कि कोई न कोई लगातार उस की हरेक गतिविधि पर नजर रखे हुए था.

श्रीगंगानगर में इसी तरह 17 अगस्त, 2016 को जिम में एक युवक की हत्या कर दी गई थी. उस समय पुरानी आबादी स्थित ग्रेट बौडी फिटनेस सेंटर में पुरानी लेबर कालोनी में रहने वाले दीपक उर्फ बिट्टू शर्मा की हत्या की गई थी. दीपक उस दौरान हत्या के प्रयास के मामले में जमानत पर छूटा हुआ था. पुलिस इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रख कर जांच करने लगी.

जौर्डन की हत्या वाले दिन ही शाम को उस के घर वाले और रिश्तेदार जवाहरनगर थाने पहुंचे और वहां धरना दे कर बैठ गए. उन्होंने मामले की जांच स्पैशल औपरेशन ग्रुप यानी एसओजी से कराने और हत्यारों को जल्द पकड़ने की मांग की. मांग पूरी नहीं होने तक उन्होंने जौर्डन का शव नहीं लेने की बात कही. पुलिस अधिकारियों ने थाने पहुंच कर उन्हें समझाया और आश्वासन दिया कि जांच एसओजी से करा कर हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. इस आश्वासन के बाद ही उन्होंने धरना समाप्त किया.

पंजाब और हरियाणा के बड़े आपराधिक गिरोह के तार जौर्डन की हत्या से जुड़े होने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने कई जगह छापेमारी कर के संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया. कई लोगों से पूछताछ की गई, लेकिन पुलिस को कोई ठोस जानकारी नहीं मिली.

जांच सौंपी गई एसओजी को

दूसरे दिन 23 मई को जौर्डन हत्याकांड की जांच एसओजी को सौंप दी गई. इस के लिए एसओजी के आईजी दिनेश एम.एन. ने एएसपी संजीव भटनागर के साथ एक टीम का गठन किया.

इस टीम को श्रीगंगानगर पुलिस के साथ समन्वय बना कर अंतरराज्यीय संगठित अपराधी गिरोहों के खिलाफ कड़ी काररवाई के निर्देश दिए गए. इस के साथ यह भी तय किया गया कि इस मामले में पंजाब पुलिस की ओकू (आर्गनाइज्ड क्राइम कंट्रोल यूनिट) टीम का भी सहयोग लिया जाएगा. पंजाब की ओकू टीम ने 26 जनवरी को गैंगस्टर विक्की गोंडर व उस के साथियों का एनकाउंटर किया था.

3 डाक्टरों के मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने के बाद जौर्डन का शव उस के परिजनों को सौंप दिया गया. पुलिस के पहरे में 4 घंटे तक चले पोस्टमार्टम में पता चला कि जौर्डन को 16 गोलियां लगी थीं. इन में 3 गोलियां उस के सिर, 6 सीने पर, 3 पेट में और 4 गोलियां उस के दोनों हाथों पर लगी थीं. परिजनों ने भारी पुलिस की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार कर दिया.

एसओजी की टीम जयपुर से उसी दिन श्रीगंगानगर पहुंच गई. एसओजी टीम के साथ एसपी हरेंद्र कुमार, एएसपी सुरेंद्र सिंह राठौड़, सीआई नरेंद्र पूनिया व जवाहरनगर थानाप्रभारी प्रशांत कौशिक ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. इस में एसओजी टीम ने कुछ महत्त्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए.

सीसीटीवी फुटेज भी देखी. दूसरी ओर श्रीगंगानगर पुलिस ने गैंगस्टर अंकित भादू और संपत नेहरा की तलाश में कई जगह छापे मारे. पुलिस की एक टीम घटनास्थल के आसपास वारदात के समय हुई मोबाइल काल्स खंगालने में जुटी रही.

तीसरे दिन भी श्रीगंगानगर पुलिस की 3 टीमें और एसओजी की टीम अलगअलग तरीके से जांच में जुटी रहीं. पुलिस ने कई जगह छापेमारी की, लेकिन अंकित भादू और संपत नेहरा का कोई सुराग नहीं मिला. अलबत्ता जांचपड़ताल में पुलिस को यह जानकारी मिली कि जौर्डन की हत्या के लिए अंकित भादू, संपत नेहरा और उन के साथी 22 मई को सफेद कार से हनुमानगढ़ की तरफ से श्रीगंगानगर में मेटेलिका जिम पहुंचे थे और वारदात के बाद उसी कार से हनुमानगढ़ रोड की ओर भाग गए थे.

सोशल मीडिया पर सक्रिय था गैंगस्टर लारेंस

श्रीगंगानगर पुलिस ने ओकू टीम की मदद से पंजाब में स्टूडेंट आर्गनाइजेशन औफ पंजाब यूनिवर्सिटी यानी सोपू से जुड़े कई युवाओं को भी इस मामले में तलाश किया. दरअसल, पंजाब व चंडीगढ़ इलाके में हजारों युवा सोपू संगठन से जुड़े हुए हैं. इन में चुनाव व सदस्यता को ले कर गुटबाजी भी है. इस में गैंगस्टर लारेंस की गैंग का काफी प्रभाव है. भादू और नेहरा भी इसी संगठन के जरिए लारेंस से जुड़े थे. इसीलिए पुलिस इस संगठन से जुड़े आपराधिक गतिविधियों में लिप्त युवाओं की तलाश कर रही थी.

बीकानेर आईजी विपिन पांडे ने रेंज की पुलिस को भादू और नेहरा को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए एक्शन मोड पर रहने के निर्देश दे रखे थे.

पुलिस की इन तमाम काररवाइयों के बीच 24 मई को सोशल मीडिया पर यह खबर चलती रही कि हनुमानगढ़ जिले के नोहराभादरा इलाके में राजस्थान पुलिस ने भादू और नेहरा का एनकाउंटर कर दिया है. इस खबर से दिन भर सनसनी फैली रही. एसपी हरेंद्र कुमार ने इन खबरों को अफवाह बताया, तब जा कर इस पर विराम लगा.

एनकाउंटर की अफवाह उड़ने के दूसरे ही दिन 25 मई को लारेंस के गुर्गे अंकित भादू ने अपने फेसबुक अकाउंट को अपडेट करते हुए जौर्डन की हत्या की जिम्मेदारी ली. उस ने फेसबुक पर लिखा कि फेक आईडी बना कर कमेंट कर रहे हो.

एक बाप के हो तो डायरेक्ट मैसेज करो. जौर्डन को चैलेंज कर के ठोक्यो है. जिस को वहम हो, वो अपना मोबाइल नंबर इनबौक्स कर दे और बदला ले ले. यह भी समझना चाहिए कि बाप बाप ही होता है और बेटा बेटा रहता है. रही बात प्रेसीडेंट की तो वह भी खड़ा होगा और जीतेगा भी. जिस मां के लाल में दम हो वो आ जाए. थारो बाप 3 स्टेट पर राज करे है.

फेसबुक पर भादू की ओर से खुला चैलेंज दिए जाने के बाद पुलिस की साइबर सेल ने उस के फालोअर्स और फेसबुक पर भादू की पोस्ट पर कमेंट करने वाले लोगों को तलाशना शुरू कर दिया, ताकि भादू के बारे में सुराग मिल सके. उधर बीकानेर के आईजी विपिन पांडे भी श्रीगंगानगर पहुंच गए. उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों की बैठक कर जौर्डन हत्याकांड की पूरी जांच रिपोर्ट ली.

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पकड़े गए कई गुर्गे

छापेमारी के बीच पंजाब की अबोहर पुलिस ने 26 मई, 2018 को लारेंस के 3 गुर्गों को हथियारों सहित पकड़ा. इन में राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के सांगरिया इलाके का अभिषेक गोदारा, हनुमानगढ़ क्षेत्र की नोहर तहसील का विकास सिंह जाट और पंजाब के बल्लुआना क्षेत्र का नरेंद्र सिंह शामिल था.

इन में अभिषेक गैंगस्टर लारेंस की बुआ का बेटा है. वह जोधपुर में एमएससी का छात्र है, लेकिन कुछ समय से श्रीगंगानगर में रह रहा था. राजस्थान पुलिस को शक है कि लारेंस ने जौर्डन की रेकी के लिए अभिषेक को श्रीगंगानगर भेजा था. इसलिए वह किराए के मकान में रह रहा था. श्रीगंगानगर के एसपी हरेंद्र कुमार इन तीनों आरोपियों से पूछताछ के  लिए उसी दिन अबोहर पहुंच गए.

जौर्डन की हत्या के छठे दिन भी पुलिस ने राजस्थान, हरियाणा व पंजाब में कई जगह दबिश डाली लेकिन न तो भादू व नेहरा का पता चला और न ही जौर्डन हत्याकांड के ठोस सुराग मिले. इस दौरान श्रीगंगानगर पुलिस ने शहर में पेइंगगेस्ट हौस्टलों की भी जांचपड़ताल शुरू कर दी.

गैंगस्टर लारेंस के गिरोह की बढ़ती वारदातों के सिलसिले में 29 मई को हनुमानगढ़ में एटीएस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा की अध्यक्षता में पुलिस की अंतरराज्यीय समन्वय बैठक हुई. इस बैठक में हरियाणा, पंजाब व राजस्थान के पुलिस अफसर शामिल हुए.

इन में राजस्थान से उमेश मिश्रा के अलावा एडीजी राजीव शर्मा, एसओजी के आईजी दिनेश एम.एन., बीकानेर आईजी विपिन पांडे, चुरू एसपी राहुल बारहट, श्रीगंगानगर एसपी हरेंद्र कुमार, हनुमानगढ़ एसपी यादराम फांसल, हरियाणा से सिरसा के एसपी हमीद अख्तर, भिवानी एसपी गंगाराम पूनिया, हांसी एसपी प्रतीक्षा गोदारा आदि मुख्य थे.

बैठक का विषय जौर्डन हत्याकांड पर फोकस रहा. साथ ही तीनों राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बने गैंगस्टरों और उन के गुर्गों को पकड़ने तथा उन की आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने के संबंध में भी फैसले लिए गए.

इस बैठक के दूसरे ही दिन 30 मई, 2018 को अंकित भादू ने अपना फेसबुक अकाउंट अपडेट किया. भादू ने लिखा कि अगर परिस्थितियों पर आप की पकड़ मजबूत है तो जहर उगलने वाले आप का कुछ नहीं बिगाड़ सकते.

31 मई, 2018 को श्रीगंगानगर पुलिस ने पंजाब पुलिस के साथ मिल कर गैंगस्टर लारेंस विश्नोई के पंजाब स्थित पैतृक गांव दुतारांवाली विश्नोइयान और राजांवाली में छापेमारी की.  11 गाडि़यों में सवार हो कर पहुंचे 90 से ज्यादा पुलिस अधिकारियों व जवानों ने करीब 2 घटे तक सर्च अभियान चलाया. इस के अलावा 2 पुलिस टीमें भादू व नेहरा की तलाश में जुटी रहीं.

श्रीगंगानगर में चल रही जांचपड़ताल में पुलिस को पता चला कि जौर्डन की हत्या से पहले उस की रेकी की गई थी. पुलिस ने जौर्डन की रेकी करने के मामले में एक नाबालिग किशोर को 3 जून को जयपुर से पकड़ लिया. इस किशोर ने ही जौर्डन के घर से निकल कर जिम जाने की सूचना हत्यारों को दी थी. वह करीब एक साल से अंकित भादू के गिरोह से जुड़ा हुआ था और उस से कई बार मिल भी चुका था.

किशोरों को बनाया जाता था सहायक

यह किशोर श्रीगंगानगर के पुरानी आबादी इलाके का रहने वाला था. जौर्डन भी इसी इलाके का रहने वाला था. पूछताछ और घटनास्थल का सत्यापन कराने के बाद इस किशोर को निरुद्ध कर बाल न्यायालय में पेश कर सुधारगृह भेज दिया गया. 12वीं में पढ़ रहे इस किशोर ने पुलिस पूछताछ में गिरोह से जुड़े श्रीगंगानगर के रहने वाले कुछ सक्रिय सदस्यों के नाम भी बताए.

इस किशोर के पकडे़ जाने से पुलिस अधिकारियों के सामने यह बात आई कि गैंगस्टर कम उम्र के युवाओं व नाबालिगों को ग्लैमर दिखा कर अपने जाल में फांस लेते हैं और उन को संगठन से जोड़ कर पदाधिकारी बना देते हैं. इस के बाद उन को किसी काम का जिम्मा सौंप देते हैं. कम उम्र के युवा सही व गलत का अंदाज नहीं लगा पाते.

पुलिस ने बाद में सोपू संगठन से जुड़े 3 पदाधिकारियों सहित 5 युवाओं को गिरफ्तार कर भविष्य में इस संगठन से न जुड़ने की पाबंदी लगा दी. बाद में इन को जमानत पर छोड़ दिया गया. इन युवकों के परिजनों को भी उन पर नजर रखने की हिदायत दी गई.

एक तरफ पुलिस भादू और नेहरा की तलाश में जुटी थी, दूसरी तरफ 4 जून को एक नया मामला सामने आ गया. गैंगस्टर अंकित भादू और संपत नेहरा के नाम से श्रीगंगानगर के कांग्रेसी नेता जयदीप बिहाड़ी व अरोड़वंश ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष जोगेंद्र बजाज को वाट्सऐप काल कर 25 लाख रुपए की रंगदारी मांगी गई.

धमकियां मिलने से सहमे व्यापारियों के प्रतिनिधि मंडल ने एसपी से मुलाकात कर सुरक्षा मांगी. जिस मेटेलिका जिम में जौर्डन की हत्या की गई, उस जिम में जोगेंद्र बजाज का बेटा साझेदार था. धमकी मिलने पर बजाज के घर पर पुलिस तैनात कर दी गई. श्रीगंगानगर कोतवाली में बजाज को धमकी देने और रंगदारी मांगने के मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई.

कांग्रेस नेता जयदीप बिहाणी के पास 5 जून को इंटरनेशनल नंबर से दोबारा काल आई. हालांकि बिहाड़ी ने वह काल रिसीव नहीं की. विशेषज्ञों का मानना है कि धमकी देने वाला लैपटाप या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर काल कर रहा था. इस ऐप से जिस के पास काल आती है, उस के मोबाइल स्क्रीन पर इंटरनेशनल नंबर प्रदर्शित होते हैं.

गर्लफ्रैंड के चक्कर में पकड़ा गया संपत नेहरा

5 जून को आधी रात के बाद हरियाणा एसटीएफ की टीम ने जौर्डन की हत्या और व्यापारियों को धमका कर रंगदारी मांगने के आरोपी गैंगस्टर संपत नेहरा को आंध्र प्रदेश में दबोचने में सफलता हासिल कर ली. वह हैदराबाद की मइयापुर कालोनी के एक कौंप्लेक्स में छिपा हुआ था. पुलिस को उस के पास से अत्याधुनिक हथियार भी मिले. संपत नेहरा पर पंजाब पुलिस ने 5 लाख और हरियाणा पुलिस ने 50 हजार रुपए का ईनाम घोषित कर रखा था.

संपत नेहरा अपनी प्रेमिका को फोन करने के चक्कर में हरियाणा पुलिस के जाल में फंस गया. वह हिसार में रहने वाली अपनी प्रेमिका को फोन करता था. हरियाणा की एसटीएफ कई दिनों से उस की प्रेमिका की काल टेप कर रही थी. प्रेमिका का फोन टेप करने के दौरान ही पुलिस को संपत की लोकेशन की जानकारी मिल गई. इसी आधार पर पुलिस ने हैदराबाद में छापेमारी कर संपत को धर दबोचा.

संपत के पकड़े जाने पर उस की फेसबुक भी अपडेट होती रही. इस में समर्थकों ने पोस्ट डाल कर संपत की गिरफ्तारी की पुष्टि की. फेसबुक पोस्ट में कहा गया कि अपने भाई संपत नेहरा को हरियाणा पुलिस ने आंध्र प्रदेश से सहीसलामत पकड़ा है. उस के साथ पुलिस कुछ नाजायज कर सकती है. उस का एनकाउंटर भी किया जा सकता है.

मूलरूप से चंडीगढ़ का रहने वाला संपत नेहरा चंडीगढ़ पुलिस के ही एक जवान का बेटा है. वह 100 मीटर बाधा दौड़ का स्टेट लेवल का खिलाड़ी रहा है. चंडीगढ़ में पढ़ते हुए उस ने पंजाब के गैंगस्टर लारेंस विश्नोई के साथ मिल कर 3 राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में आतंक फैला रखा था. उस के खिलाफ लूट, फिरौती, सुपारी ले कर हत्या करने और हत्या के प्रयास जैसे कई संगीन मामले दर्ज हैं.

पंजाब में जब आर्गनाइज्ड क्राइम कंट्रोल यूनिट (ओकू) बनी और गैंगस्टरों की धरपकड़ शुरू हुई तो फरीदकोट जेल में बंद लारेंस ने अपने शूटर संपत नेहरा, रविंद्र काली और हरेंद्र जाट के माध्यम से राजस्थान के जोधपुर में व्यापारियों को धमका कर रंगदारी मांगनी शुरू कर दी थी. गतवर्ष लारेंस के इशारे पर संपत, काली व हरेंद्र ने जोधपुर में व्यवसायी वासुदेव असरानी की हत्या कर दी थी. पिछले एक साल में इस गिरोह ने 5 हत्याएं कीं.

जून 2017 में संपत ने पंजाब के कोटकपुरा में लवी दचौड़ा नामक युवक की सरेआम गोलियां मार कर हत्या की थी. सीकर के पास एक पूर्व सरपंच की हत्या भी संपत ने ही की थी. पिछले साल 6 दिसंबर को उस ने श्रीगंगानगर में पुलिस इंसपेक्टर भूपेंद्र सोनी के भांजे पंकज सोनी की हत्या कर के सोनेचांदी के गहने और पौने 2 लाख रुपए लूट लिए थे.

पिछले साल ही 25 दिसंबर को उसी ने गुड़गांव में पूर्व केंद्रीय मंत्री नटवर सिंह के विधायक बेटे जगत सिंह की फार्च्युनर गाड़ी लूटी. इसी गाड़ी में सवार हो कर 17 जनवरी, 2018 को उस ने चुरू जिले के सादुलपुर में कोर्ट के अंदर गैंगस्टर अजय जैतपुरा की गोलियां मार कर हत्या कर दी थी.

संपत के खिलाफ हिसार में शराब ठेकेदार जयसिंह उर्फ धौलिया गुर्जर की गोली मार कर हत्या करने और संपत के इशारे पर उस के गुर्गों द्वारा बालरोग विशेषज्ञ डा. राजेश गुप्ता का पिस्तौल के बल पर अपहरण कर होंडा सिटी कार लूटने का मामला दर्ज है. हरियाणा में हत्या की 3 और लूट की 8 वारदातों के मामले दर्ज हैं.

सलमान खान को भी दी थी धमकी

गैंगस्टर लारेंस ने फिल्म अभिनेता सलमान खान को भी जोधपुर में मारने की धमकी दी थी. इसी तरह की खौफनाक वारदातों के दम पर डरा कर लारेंस का गिरोह व्यापारियों से रंगदारी वसूलता रहा. वासुदेव हत्याकांड में पूछताछ के लिए पुलिस लारेंस को पंजाब से जोधपुर ले गई थी. बाद में उसे अजमेर जेल में शिफ्ट कर दिया गया. आजकल लारेंस अजमेर जेल से ही अपने गैंग को औपरेट कर रहा है. उस के गिरोह में संपत नेहरा के अलावा अंकित भादू, काली, हरेंद्र आदि मुख्य हैं.

आरोप है कि संपत नेहरा ने श्रीगंगानगर के करीब 15 व्यापारियों से वाट्सऐप कालिंग कर के रंगदारी मांगी थी. इन में से 4 व्यापारियों ने उस तक रकम पहुंचा भी दी थी. पुलिस अब ऐसे व्यापारियों का पता लगा रही है, जिन्होंने संपत को रकम दी थी.

संपत की गिरफ्तारी के 2 दिन बाद ही 8 जून को कांग्रेस नेता और बिहाणी शिक्षा न्यास के अध्यक्ष जयदीप बिहाणी को धमकी भरा वाट्सऐप मैसेज आया. इस में कहा गया कि पुलिस उन की कितने दिन सुरक्षा करेगी. फिरौती के 50 लाख रुपए नहीं दिए तो अंजाम अच्छा नहीं होगा. पुलिस इस मामले की भी जांचपड़ताल करने लगी.

इस बीच श्रीगंगानगर पुलिस ने रिडमलसर निवासी हिमांशु खींचड़ उर्फ काका पिस्तौली को 7 जून को गिरफ्तार कर लिया. उस पर गैंगस्टरों का सहयोग करने और उन्हें शरण देने का आरोप है. वह ग्रैजुएट है और सोपू का सदस्य भी है. उस के पास अंतरराष्ट्रीय सिमकार्ड भी मिला.

श्रीगंगानगर पुलिस संपत नेहरा को हरियाणा से प्रोडक्शन वारंट पर ला कर पूछताछ करेगी. पुलिस का मानना है कि जौर्डन की हत्या में शामिल अंकित भादू और उस के बाकी साथी भी जल्दी ही सींखचों के पीछे होंगे.

देखें काजल राघवानी का हौट परफौर्मेंस

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर अदाकारा काजल राघवानी का वीडियो आए दिन इंटरनेट पर वायरल होता रहता है. इन दिनों इनका एक हौट वीडियो इंटरनेट पर काफी पसंद किया जा रहा है. इस वीडियो में काजल किसी कार्यक्रम में परफौर्म करती नजर आ रही हैं. बता दें कि काजल ने पवन सिंह और आम्रपाली दुबे के सुपरहिट गाने ‘रात दिया बुझा के’ पर भी डांस किया, जो लोगों को बेहद पसंद आ रहा है. इस वीडियो को खुद काजल राघवानी ने सोशल मीडिया पर अपलोड किया है, जिसे अब तक 646,679 बार देखा जा चुका है.

मालूम हो कि, काजल राघवानी की फिल्म ‘भौजी पटनिया’ हाल ही में बिहार और झारखंड में एक साथ रिलीज हुई है. महिला सशक्तिकरण पर आधारित इस फिल्म में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार एवं भ्रष्ट नेता के खिलाफ संघर्ष दिखाया गया है. यह फिल्म भ्रष्ट नेता के खिलाफ संघर्ष करके अपने परिवार और पूरे गांव को उसके चंगुल से मुक्त कराकर और बाकी सारे गांव वालों को प्रगती और उन्नती की ओर अग्रसर करने वाली महिला की कहानी है. संघर्षशील बहु के किरदार को काजल राघवानी बड़े ही शानदार रूप से अभिनीत किया है.

बता दें, 20 साल की उम्र में काजल ने भोजपुरी फिल्म में एंट्री मारी. काजल गुजराती हैं और पिछले 7 सालों से भोजपुरी फिल्म जगत से जुड़ी हुई हैं.

भूत ‘पालने’ पर हुक्कापानी बंद

पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर जिले के शालबनी थाने क्षेत्र के तहत आने वाले गांव भीमशोल में पंचायत बुला कर एक परिवार के लोगों को भूत पालने का सिर्फ कुसूरवार ही नहीं ठहराया गया, बल्कि परिवार का हुक्कापानी भी बंद कर दिया गया.

गांव भीमशोल में किसान मानिक महतो खेतीबारी से अपने घर का खर्च उठाते थे. उन का बेटा रमेश महतो 10वीं जमात तक ही पढ़ा था. पढ़ाई बीच में रुक जाने से वह अपने पिता के साथ खेतीबारी में हाथ बंटा देता था.

अच्छी फसल कैसे पैदा की जाए, इस के लिए रमेश ने वैज्ञानिक तरीके की खेतीबारी से जुड़ी कई किताबें पढ़ीं और धान समेत दूसरी फसलों की खेती भी की. इस से जमीन बेहतरीन फसलों से फूल की तरह खिल उठी.

मानिक महतो की जमीन पर अच्छी फसल देख कर गांव के कुछ लोग उन से जलने लगे. जल्दी ही यह अफवाह फैल गई कि कहीं इस के पीछे कोई चमत्कार या भूतप्रेत का हाथ तो नहीं है? मानिक महतो ने कहीं अपने घर में कोई भूत तो नहीं पाल रखा है?

मानिक महतो के घर में पालतू भूत का पता लगाने के लिए गांव भीमशोल में लोगों ने एक सालिशी सभा बुलाई. आदिवासी समाज में पंचायत को सालिशी कहा जाता है. सभा में एक जानगुरु को भी बुलाया गया. आदिवासी समाज में ओझा या तांत्रिक को जानगुरु कहते हैं.

जानगुरु ने तंत्रमंत्र कर के कहा, ‘‘मुझे तो मानिक महतो की जमीन में हुई भारी फसल के पीछे कोई चमत्कार या भूत का हाथ दिख रहा है. महतो के घर में कोई पालतू भूत है. उसी भूत की मदद से उस ने इतनी अच्छी फसल उगाई है.’’

जानगुरु की बातों की काट करते हुए रमेश महतो ने कहा, ‘‘मैं ने वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए कई किताबें पढ़ी हैं. उन्हीं तरीकों के मुताबिक फसलें उगाई हैं. इस के पीछे भूतप्रेत या किसी चमत्कार का कोई हाथ नहीं है.’’

पर जानगुरु की बातों को गांव के लोगों ने ज्यादा अहमियत दी. मानिक महतो के घर में वाकई भूत है, इस बात की जांच उन्होंने किसी दूसरे जानगुरु से कराने की सोची.

इस के बाद मानिक और उस के बेटे रमेश महतो और गांव के हर परिवार के एक सदस्य को एक गाड़ी से ओडिशा के मयूरभंज जिले के रायरांगपुर थाना क्षेत्र के गांव पटीपुर में विधातासम नामक एक जानगुरु के पास ले जाया गया.

उस जानगुरु ने गांव भीमशोल से आए हर एक सदस्य की हथेली पर 2-2 बूंद सरसों का तेल डाल कर मुट्ठी बंद करने को कहा. कुछ देर तक मंत्र पढ़ने के बाद उस जानगुरु ने एकएक शख्स की मुट्ठी खोल कर हथेली को देखना शुरू किया.

अचानक रमेश महतो की हथेली को देख कर जानगुरु ने कहा, ‘‘इस की हथेली पर सरसों के तेल में बाल का एक टुकड़ा है. इस के घर में ही भूत है. पालतू भूत के सहारे ही इस ने अपने खेत में अच्छी फसल उगाई है. पर चिंता की बात यह है कि इस भूत से गांव भीमशोल का भारी नुकसान होने का डर है.

‘‘जब तक मानिक महतो अपने घर से भूत को गांव से बाहर नहीं निकाल फेंकता है, तब तक मानिक और उस के पूरे परिवार का हुक्कापानी बंद कर दिया जाए.’’

मानिक महतो के घर में भूत है, इसे साबित करने के बदले में उस जानगुरु ने गांव भीलशोल से आए लोगों से मोटी रकम भी वसूली थी.

गांव लौटने के बाद लोगों ने फिर सालिशी सभा बुलाई, जिस में मानिक महतो और उस के पूरे परिवार पर भूत पालने का आरोप लगाया गया. इस के बाद पंचायत ने फरमान जारी किया, ‘जब तक मानिक अपने घर से भूत को गांव से खदेड़ नहीं देता है, तब तक उस के पूरे परिवार का हुक्कापानी बंद रहेगा.’

पंचायत के इस फरमान के बाद अपने परिवार की सिक्योरिटी के लिए मानिक महतो ने पुलिसप्रशासन से मदद की गुहार लगाई. इस पर पुलिस ने गांव वालों को सचेत भी किया, लेकिन पुलिसप्रशासन की दखलअंदाजी के बाद महतो परिवार की मुश्किलें और बढ़ गईं.

आखिर में भूत पालने के झूठ से छुटकारा दिलवाने के लिए मानिक महतो ने भारतीय विज्ञान व युक्तिवादी समिति से लिखित रूप में मदद मांगी.

इस मामले का जिक्र करते हुए भारतीय विज्ञान व युक्तिवादी समिति के अध्यक्ष प्रबीर घोष ने इस रिपोर्टर से मोबाइल फोन पर कहा, ‘‘आप और सुमन दोनों समिति के कार्यकर्ता हो. आप को गांव भीमशोल का दौरा करना पड़ेगा. मानिक महतो के परिवार को भूत पालने के आरोप से छुटकारा दिलाना पड़ेगा. इस काम में युक्तिवादी समिति के पश्चिमी मिदनापुर जिले के कार्यकर्ता भी आप की मदद करेंगे.’’

प्रबीर घोष के सुझाव पर इस रिपोर्टर ने सुमन को साथ में ले कर गांव भीमशोल जाने की तैयारी शुरू कर दी. वे दोनों कोलकाता से टे्रन से मिदनापुर शहर पहुंचे, जहां समिति के कार्यकर्ता अनिंद्य सुंदर मंडल के साथ गांव भीमशोल में जाने से पहले एक बैठक की.

दूसरे दिन सुबह कुल 8 लोग एक बस से गांव भीमशोल के लिए रवाना हो गए. तकरीबन 3 घंटे के बाद वे शालबनी थाना इलाके के 7 नंबर सातपाटी की ग्राम पंचायत पहुंचे. वहां उन्होंने पंचायत की प्रधान आरती बास्के और उपप्रधान परिमल धर से मुलाकात की और उन से गांव भीमशोल जाने का इंतजाम करने को कहा.

उन की बातें मानते हुए पंचायत प्रधान ने जरूरी सामान के साथ उन के जाने का पूरा इंतजाम करा दिया.

तब तक प्रिंट और इलैक्ट्रौनिक मीडिया के कई पत्रकार भी उन के साथ दूसरी गाडि़यों से गांव भीमशोल के लिए रवाना हो गए. वहां मानिक महतो के घर के एक कमरे में कार्यक्रम का मंच तैयार कर दिया गया.

इस रिपोर्टर ने लाउडस्पीकर पर आवाज लगाई, ‘‘हम युक्तिवादी समिति के कार्यकर्ता हैं. कोलकाता से आए हैं. आप गांव वालों के सामने एक कार्यक्रम पेश करने वाले हैं.’’

गांव के बच्चे से ले कर बुजुर्ग कार्यक्रम मंच के सामने इकट्ठा होने लगे. तब तक समिति के बाकी सदस्य भी वहां पहुंच चुके थे.

सुमन ने मिट्टी से बनी एक कटोरी में थोड़ी सी सूखी लकड़ी मेज पर रखी. एक बोतल से पानी जैसा तरल पदार्थ एक चम्मच में ले कर उसे कटोरी में रखी सूखी लकड़ी पर बूंदबूंद गिराते हुए कोई मंत्र पढ़ना शुरू किया.

कुछ ही पलों में कटोरी से धुआं निकलने लगा और अचानक उस में आग जल उठी. यह देख कर गांव वाले हैरान रह गए.

एक खाली सूप और एक गमछा ले कर मंच पर पहुंचे अनिंद्य ने गांव वालों से पूछा, ‘‘क्या आप में से 2 लोग मेरी थोड़ी मदद कर सकते हैं?’’

भीड़ में से 2 लोग सामने आए. उन के हाथों में गमछा दे कर अनिंद्य ने कहा, ‘‘आप गमछे के दोनों किनारों को कस कर पकड़ें.’’

उन 2 लोगों के हाथों में गमछा थमा कर अनिंद्य ने एक मुट्ठी चावल ले कर पूछा, ‘‘चावल से मुड़ी बनाने के लिए क्याक्या लगता है?’’

दर्शकों ने बताया, ‘‘कड़ाही या हांड़ी, आग और बालू…’’

एक मुट्ठी चावल सूप पर फैला कर अनिंद्य ने सूप को गमछे के ऊपर हिलाते हुए मंत्र पढ़ने शुरू किए.

देखते ही देखते सूप मुड़ी से भर गया. यह देख कर सब हैरान हो गए. कार्यक्रम के बीच में एक पत्रकार आए और इस रिपोर्टर के कानों में बोले, ‘‘आप लोग गांव में कार्यक्रम कर रहे हैं, यह खबर गांव के मस्तानों के कानों तक पहुंच गई है. वे लोग किसी भी समय आप पर हमला कर सकते हैं.’’

‘‘पर क्यों?’’ रिपोर्टर ने पूछा.

पत्रकार ने बताया, ‘‘गांव के कई मस्तानों ने ही एक साजिश रच कर मानिक महतो के परिवार पर भूत पालने का आरोप लगाया है. ये मस्ताने चाहते हैं कि गांव के लोग भूत पालने के आरोप में मानिक महतो के परिवार की हत्या कर दें. इस के बाद वे उस की घरजमीन पर कब्जा कर लेंगे.

‘‘हम पत्रकारों ने पहले से ही यह खबर पिड़कांटा थाने को दे रखी है कि युक्तिवादी कार्यकर्ता गांव भीमशोल में जाने वाले हैं. आप कहेंगे तो पुलिस गांव में आ जाएगी.’’

‘‘आप पुलिस को गांव में आने के लिए सूचना दे दें.’’

थोड़ी ही देर में पिड़कांटा पुलिस चौकी से भारी पुलिस बल कार्यक्रम मंच के सामने आ पहुंचा. कुछ ही देर में पंचायत प्रधान आरती बास्के और उपप्रधान परिमल धर भी वहां आ गए.

अब मंच पर कांच का एक गिलास, एक बरतन में पानी और थोड़ा आटा रखा गया. पानी से आटा गूंदा गया और उस की छोटीछोटी कई गोलियां बना कर एक पत्तल में रखी गईं.

दर्शकों की भीड़ में खड़े रमेश महतो को पास बुला कर सुमन व अनिंद्य के साथ एक कतार में खड़ा कर दर्शकों से कहा गया, ‘‘आप ने देखा होगा कि गांव में किसी घर में भूतप्रेत का पता लगाने के लिए जानगुरु 2-4 कारनामे कर के दिखाते हैं. आज हम भी ऐसा ही कर के दिखाने वाले हैं.’’

गिलास पानी से भरा गया. पत्तल से आटे की एक गोली हाथ में ले कर कहा गया, ‘‘गोली में मंत्र पढ़ा हुआ है. कतार में खड़े एक के बाद एक आदमी का नाम लिया जाएगा और उस के नाम पर गोली गिलास के पानी में डाली जाएगी. जिस का नाम लेने पर गोली पानी में नहीं डूबी तो यह साबित होगा कि उस के घर में भूत बसा हुआ है.’’

जब अनिंद्य के नाम पर गिलास में गोली डाली तो वह तैरने लगी. यह देख कर दर्शक हैरानी में पड़ गए.

तभी दर्शकों की भीड़ में से एक आदमी ने ऊंची आवाज में कहा, ‘‘रमेश के घर में भूत है.’’

‘‘कौन कहता है कि रमेश के घर में भूत है?’’

‘‘जानगुरु ने तंत्रमंत्र कर के यह साबित कर के दिखाया है कि रमेश के घर में भूत है,’’ भीड़ में से एक आवाज आई.

‘‘क्या आप लोग उस जानगुरु को इस मंच पर हाजिर कर सकते हैं? अगर उस ने हमारे सामने दोबारा यह साबित कर दिया कि रमेश के घर में भूत है तो हम उसे 25 लाख रुपए का इनाम देंगे.’’

‘‘युक्तिवादी समिति के महासचिव प्रबीर घोष ने अपनी ‘अलौकिक नहीं, लौकिक’ नामक किताब में भूत होने का सुबूत देने वाले को 25 लाख रुपए का इनाम देने का ऐलान किया है.’’

अपने दावे के सुबूत के तौर पर दर्शकों को वह किताब भी दिखाई गई. भीड़ में मौजूद लोग एकदूसरे का मुंह देखने लगे.

‘‘रमेश के घर में भूत है, इसे बताने लिए जानगुरु ने जो कारनामा दिखाया था, उस में सिर्फ धोखाधड़ी है. भूतप्रेत की बात बकवास है. आत्माओं या भूतप्रेत का वजूद ही नहीं होता है और यह अंधविश्वास है. पर जानगुरु जैसे पाखंडी लोग अपना उल्लू सीधा करने के लिए भूतप्रेत के नाम का डर दिखा कर अंधविश्वास में डूबे लोगों को लूटते हैं. मानिक महतो के घर में भूत होने का आरोप भी सरासर बेबुनियाद है.’’

एक गांव वाले ने पूछा, ‘‘आप ने मंच पर जो भी कारनामा दिखाया है, उस के पीछे तंत्रमंत्र नहीं है?’’

इस रिपोर्टर ने कहा, ‘‘हम कोई जादूगर या चमत्कारी बाबातांत्रिक नहीं हैं. हमारे पास जादू की छड़ी नहीं है. हम ने तो सिर्फ लौकिक तरकीब से यह कारनामा दिखाया है.’’

‘‘बिना माचिस के मिट्टी की कटोरी में रखी लकड़ी में आग कैसे लग गई?’’ एक और आदमी ने सवाल दागा.

‘‘आप ने देखा होगा कि सुमन ने एक चम्मच से पानी जैसा तरल कटोरी में बूंदबूंद कर के गिराया था. वह कोई आम तरल नहीं, बल्कि ग्लिसरीन थी और कटोरी में पहले से ही लकड़ी के साथ एक कैमिकल पोटेशियम परमैगनेट रखा हुआ था. पोटेशियम परमैगनेट में ग्लिसरीन घुलते ही कटोरी में आग जल उठी थी.’’

‘‘आटे की गोली पानी में कैसे तैरने लगती है?’’

‘‘आटे की गोलियों में तंत्रमंत्र की शक्ति नहीं है. पत्तल में रखी हुई गोलियों में से कइयों में पहले से थर्माकोल के छोटेछोटे टुकड़े भरे हुए थे. ऐसी गोली पानी में डूबने के बजाय तैरने लगी.

‘‘जानगुरु, तांत्रिक, बाबाजी के पास कोई भी अलौकिक शक्ति नहीं होती है. वे जो भी कारनामे दिखाते हैं उन्हें देख कर आम लोग समझने लगते हैं कि जानगुरु के पास अलौकिक शक्ति है.’’

यह सुन कर पंचायत प्रधान आरती बास्के ने कहा, ‘‘जानगुरु की बातों में आ कर गांव वालों ने बेगुनाह मानिक महतो के परिवार पर जुल्म ढाया. उन के परिवार को समाज से बाहर किया. इस के लिए हमें दुख है. महतो परिवार पर घर में भूत पालने का जो आरोप लगाया गया था, वह सरासर गलत है. आज से महतो परिवार पर लगाए गए सभी आरोपों से मुक्त कर दिया जाता है.’’

हद पर है गौरक्षकों की गुंडई

राजस्थान के अलवर में एक बार फिर तथाकथित गौरक्षकों ने एक शख्स की पीटपीट कर हत्या कर दी. हरियाणा के नूंह में रहने वाले अकबर को पीटपीट कर मार डाला गया. अलवर में गौरक्षकों के हाथों यह ऐसी तीसरी वहशी वारदात है जब भक्तों की भीड़ ने किसी को गौतस्करी के नाम पर मौत के घाट उतारा है. पिछले साल ऐसे ही पहलू खान और उमर खान की भी हत्या कर दी गई थी.

पुलिस के मुताबिक, अकबर पर शुक्रवार, 19 जुलाई, 2018 की आधी रात को उस वक्त हमला किया गया, जब वे 2 गायों के साथ पैदल हरियाणा जा रहे थे. उन के साथ असलम भी था. असलम ने भाग कर जान बचाई मगर भीड़ ने अकबर को गौतस्कर समझ कर इतना पीटा कि अस्पताल ले जाने के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया. प्रशासन की लापरवाही

अलवर में अस्पताल के बाहर मौजूद लोगों के बीच मौलाना हनीफ ने कहा, ‘‘अगर पहलू खान के मामले में सख्त कार्यवाही की गई होती तो उमर नहीं मारा जाता. ऐसे ही अगर उमर की हत्या पर भारतीय जनता पार्टी की हुकूमत कड़ा रुख अपनाती तो अकबर की जान नहीं जाती. इन वारदातों ने लोगों में डर पैदा कर दिया है. इस दुख की घड़ी में बहुसंख्यक समाज के लोग हमारे साथ खड़े हैं, यही हमारे लिए बड़ा संबल है.’’ कोलगांव के इस्हाक अहमद कहते हैं, ‘‘अकबर की पत्नी और बच्चों की हालत देखी नहीं जाती. अकबर के 7 बच्चे हैं. उस के परिवार को हौसला देने के लिए सभी तबकों के लोग पहुंचे हैं.’’

इस्हाक अहमद के मुताबिक, पहले अकबर के पिता दूध बेचते थे और डेरी चलाते थे. पिछले कुछ समय से अकबर ने अपने पिता का काम संभाल लिया था. इसी काम के लिए वे गाय खरीद कर ला रहे थे. मेव समुदाय के सद्दाम कहते हैं, ‘‘मेव बिरादरी के लोग पशुपालन और खेतीबारी कर के अपनी गुजरबसर करते हैं. सरकारी आंकड़ों के हिसाब से अलवर जिले में 2 लाख से ज्यादा गौधन हैं. यह क्षेत्र मेवात का हिस्सा है जो हरियाणा तक फैला हुआ है.’’

तथाकथित गौरक्षकों के हाथों पहलू खान की हत्या के बाद मानवाधिकार संगठनों ने सरकार की खूब खिंचाई की थी. पुलिस ने पहलू खान के मामले में 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया

था. मगर बाद में पुलिस ने जांच में उन में से 6 लोगों को यह कह कर क्लीन चिट दे दी थी कि उन के खिलाफ सुबूत नहीं मिले. आज तक गौरक्षक भगवा दुपट्टों के साए में छुट्टे सांड़ों की तरह घूम रहे हैं. राजस्थान में महज 5 दिनों में ही गौरक्षकों की गुंडई की यह दूसरी वारदात थी. इस के पहले कोटा में तथाकथित गौरक्षकों ने मध्य प्रदेश में दूध की डेरी चलाने वाले प्रवीण और उस के ड्राइवर अहमद को घेर कर पीटा था.

प्रवीण अपनी डेरी के लिए जयपुर से गाय खरीद कर देवास ले जा रहे थे. प्रवीण ने खुद के ब्राह्मण होने की दुहाई भी दी, मगर गौरक्षकों ने रहम नहीं किया. हिंसक बनते गौरक्षक

सितंबर, 2011. गुजरात के एक समारोह में मंच पर बैठे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी खेड़ा के इमाम शाही सैयद महंदी हुसैन बाबा के हाथ से मुसलिमों की गोल टोपी पहनने से इनकार कर देते हैं. राजस्थान के अलवर शहर में 13 साल का विपिन यादव अपने घर में टैलीविजन पर यह सब देख रहा?है. मार्च, 2017. रुद्राक्ष की भारी मालाओं से लदे हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी की एक गौशाला में गायों को हरा चारा और गुड़ खिलाते हैं.

विपिन यादव अब 19 साल का जवान ‘गौरक्षक’ बन चुका है और अपने घर में टैलीविजन पर प्रधानमंत्री मोदी की गौसेवा को भी देख रहा है. अप्रैल, 2017. अलवर के पास

55 साल के पहलू खान मेले से खरीदी गायों को एक ट्रक पर लाद कर अपने साथियों के साथ जा रहे हैं. लंबी दाढ़ी से ही पता चल जाता है कि वे मुसलिम हैं. रास्ते में गौरक्षकों का एक दल गाड़ी रोकता है, क्योंकि उसे शक है कि गायों को कसाईखाने ले जाया जा रहा है. वे लोग उस ट्रक को रोक कर पहलू खान और उस के साथियों को नीचे खींच लेते हैं और दौड़ादौड़ा कर पीटते हैं.

बाद में पुलिस कहती है कि विपिन यादव इन में सब से आगे था और पहलू खान बाद में अस्पताल में दम तोड़ देते हैं. आप पूछ सकते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गाय को चारा खिलाने या फिर गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर मुसलिम टोपी पहनने से इनकार करने और पहलू खान को पीटपीट कर मार डालने की घटना में क्या संबंध है?

कोई सीधा संबंध नहीं है. मुमकिन है कि विपिन यादव ने टैलीविजन पर वे सीन देखे ही न हों, लेकिन 13 साल के बच्चे से गौरक्षक बनने के सफर में जिन प्रतीकों ने उस पर असर डाला होगा, उन में वे नरेंद्र मोदी जरूर रहे होंगे जो मुख्यमंत्री होने के बावजूद मुसलिम की टोपी को खारिज करने में हिचकते नहीं हैं और प्रधानमंत्री बनने के बाद भी हजार काम छोड़ कर गौसेवा के लिए तैयार रहते हैं. कहां से मिली ताकत

जब नरेंद्र मोदी ने 2002 में गुजरात के मुसलिम विरोधी दंगों के बाद कहा था, ‘गुजरात में जो मैं ने किया है उस के लिए 56 इंच की छाती होनी चाहिए.’ तो इस बयान के पीछे का संदेश किसी से छिपा नहीं रहा था. यानी राजनीतिक गोलबंदी के लिए भीड़ का इस्तेमाल किया जाता रहा है. खुली सड़क पर अपने दुश्मन की निशानदेही कर उसे मार देने वाले लोगों को भरोसा रहता है कि परदे के पीछे से उन्हें शासनतंत्र की मदद और समर्थन मिलेगा, इसलिए तो अब वे अपनी हिंसक हरकतों के वीडियो तैयार कर के सोशल मीडिया पर भी डालने लगे हैं.

इसे और ताकत तब मिलती है, जब कोई जज रिटायर होने से एक दिन पहले गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की सिफारिश करता है या फिर अदालत के आदेश में गाय को राष्ट्रधन बताया जाता है.

ऐसे अदालती आदेशों से भीड़ की सोच और उस का जोश बढ़ता है कि वह सड़क पर उतर कर जो चाहे कर सकती है, पुलिस उस के खिलाफ कार्यवाही नहीं करेगी और अगर करेगी भी तो अदालत में जजों की ओर से भी उस के प्रति नरम रवैया अपना लिया जाएगा. सितंबर, 2015 में दादरी में हिंदुओं की भीड़ ने 50 साल के अखलाक को उन के घर से खींच कर बाहर निकाला और पीटपीट कर मार डाला, क्योंकि हमलावरों को शक था कि अखलाक ने अपने फ्रिज में गौमांस रखा था.

इस मामले में हमलावरों के प्रति सख्त रुख अपनाने के बजाय भाजपा नेता और मोदी कैबिनेट में संस्कृति मंत्री महेश चंद्र शर्मा का बयान आया कि इसे दुर्घटना माना जाए और इसे किसी भी तरह का सांप्रदायिक रंग न दिया जाए. और जब एक मुलजिम की जेल में बीमारी से मौत हो गई तो उस के शव को तिरंगे में लपेटा गया और महेश चंद्र शर्मा उस के सामने दोनों हाथ जोड़ कर ऐसे खड़े हुए जैसे सीमा पर दुश्मन से लड़ते हुए मारे गए किसी शहीद को श्रद्धांजलि दे रहे हों.

ऐसा समर्थन मिलने पर हिंसक गिरोह का हिस्सा बनना फख्र की बात हो जाती है. राजस्थान यूनिवर्सिटी से जुड़े समाजशास्त्री अजय चिरानियां कहते हैं, ‘‘यह नशे की लत की तरह होती है. मैं नशे का आदी हो जाता हूं और नशा करता हूं पर आप को यह पता नहीं लगेगा कि नशीली दवाओं का सप्लायर कौन है.’

बुलेट की गति में ब्रेक

चीन के बीसियों शहर बुलेट ट्रेन जैसी तेज गति से चलने वाली रेलों से जुड़ चुके हैं जबकि भारत में पहली बुलेट ट्रेन, जो अहमदाबाद और मुंबई के बीच चलनी है, खतरे में है. मोदी सरकार ने सपने तो दिखाए पर अब पगपग पर बाधाएं आ रही हैं.

बुलेट ट्रेन के लिए नई पटरियां नए मार्ग पर बिछाई जानी हैं. किसान इस नए रेलमार्ग के लिए अपनी जमीन आसानी से देने को तैयार नहीं हैं. अदालतों में मामले जाने लगे हैं. हो सकता है किसानों से जमीन लेने में ही दसियों साल लग जाएं.

योजना के क्रियान्वयन में जितनी देरी होगी, उतना खर्च बढ़ता जाएगा, क्योंकि महंगाई की दर बढ़ती ही जा रही है. हालांकि बहुत सा पैसा जापान को सस्ते ब्याज पर देना है पर शेष पैसा देश में महंगे ब्याज पर लेना पड़ेगा. सरकार का खजाना अब खाली सा है और रेल मंत्रालय से साफ कह दिया गया है कि वह बुलेट ट्रेन के लिए बाजारभाव पर बैंकों या बौंडों से पैसा उगाहे.

ये दिक्कतें तकनीकी नहीं, मानसिक हैं. अहमदाबादमुंबई रेलमार्ग में गनीमत है कि न पहाड़ हैं और न समुद्र. चीन ने तो कई पहाड़ों को भेदा है. जापान ने सघन बस्तियों के बीच बुलेट ट्रेन चलाई है. यहां मामला असल में यह है कि सिवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के, किसी और की इस में रुचि नहीं है.

आम लोगों को मालूम है कि बुलेट ट्रेन का प्लेटफौर्म भी अलग होगा, रास्ता भी अलग. किराया कई गुना ज्यादा होगा. आम आदमी को फर्क नहीं पड़ता अगर दोचार घंटे का समय कम भी लगा. यहां तो लोग एक पाखंड के लिए लाइन में लग कर 10 घंटे इंतजार करने को तैयार रहते हैं. यहां लोगों के पास समय ही समय है.

बुलेट ट्रेनों की वहां जरूरत है जहां लोगों को अपने और दूसरों के वक्त की कीमत मालूम हो. जहां देश की तीनचौथाई जनता निठल्लीनिकम्मी हो वहां तो बुलेट भी चींटी की चाल चलेगी. अपने यहां की हवाई सेवाओं को ही देख लें. हर एयरपोर्ट पर समय की बरबादी की जाती है. एयरलाइन कहती है कि डेढ़ घंटे पहले पहुंचो ताकि 45 मिनट की यात्रा कर सको. ज्यादातर एयरपोर्टों पर हर काम धीरेधीरे होता है. शहर से एयरपोर्ट जाने के रास्तों पर अतिक्रमण के कारण ट्रैफिक जाम रहता है.

बुलेट ट्रेन तकनीकी कारणों से नहीं, दूसरे कारणों से न तीव्र गति से बनेगी, न ही तीव्र गति से चलेगी, यह तय है.

‘हिंदू पाकिस्तान’ देश को कर देगा तारतार

कुछ शब्द जन्म लेते ही सामाजिक सड़ांध को उजागर कर देते हैं. ‘हिंदू पाकिस्तान’ उन्हीं में से एक है. इस शब्द से यह मतलब कतई मत निकालना कि जल्दी ही हमारा तथाकथित दुश्मन देश पाकिस्तान इसलाम को छोड़ कर हिंदू देश बन जाएगा और इतिहास रच देगा, बल्कि यह बजबजाता शब्द हमारे भारत देश के उस भविष्य से जुड़ा है, जो कभी सच हो गया तो हमारी आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं कर पाएगी.

दरअसल, खूबसूरत तन और नैननक्श के मालिक पढ़ेलिखे कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया था जिस से देश के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया.

उन्होंने एक सार्वजनिक मंच पर बोल दिया था कि अगर साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी दोबारा सत्ता में आ गई तो वह संविधान बदल देगी और भारत को ‘हिंदू पाकिस्तान’ में बदल देगी.

शशि थरूर ने अपने इस बयान में यह भी कहा था कि संघ परिवार के सभी विचारक चाहते थे कि भारतीय संविधान को त्याग दिया जाए. भाजपा सरकार को बड़े बदलाव करने के लिए संविधान में बदलाव की जरूरत होगी. इस के लिए उसे लोकसभा और राज्यसभा में दोतिहाई बहुमत के साथसाथ आधे राज्यों में बहुमत की जरूरत है. अपने सहयोगियों के साथ उस के पास लोकसभा में दोतिहाई बहुमत है. उस के पास आधे से ज्यादा राज्य हैं. केवल राज्यसभा में बहुमत नहीं है. लेकिन 4-5 सालों में वह राज्यसभा में भी बहुमत हासिल कर सकती है.

शशि थरूर का कहना है कि जैसे ही भाजपा ये तीनों ताकतें हासिल कर लेगी, वह मौजूदा संविधान को उखाड़ फेंकेगी और एक नया संविधान लिखेगी. यह नया संविधान हिंदू राष्ट्र के जैसा होगा. वह अल्पसंख्यकों के लिए समानता वाले अधिकार हटा देगी. फिर भारत एक ‘हिंदू पाकिस्तान’ होगा. यह वह भारत नहीं होगा जिस के लिए गांधी, नेहरू और स्वतंत्रता सेनानी आजादी की लड़ाई लड़े थे.

चूंकि पाकिस्तान एक मुसलिम देश है और वहां पर धर्म की सत्ता सब से ज्यादा ताकतवर है, इसलिए शशि थरूर ने भारत को ‘हिंदू पाकिस्तान’ बनाने वाली बात पर जोर दिया और भाजपा के एजेंडे के पीछे छिपे मनसूबों को जगजाहिर करने की कोशिश की.

लेकिन भारत और पाकिस्तान में एक बुनियादी फर्क यह भी है कि अगर पाकिस्तान में धर्म को सब से ऊंचा दर्जा दिया गया है तो भारत में धर्म से भी ज्यादा बुरी बीमारी हावी है. यह बीमारी हमारे देश के तकरीबन हर शख्स की रगरग में बसी है जिसे जातिवाद कहते हैं.

पिछले 4 सालों में जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई है और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से देश में जातिवाद के नाग और ज्यादा ताकतवर हुए हैं, उन में उन्माद का नया जहर भर दिया गया है.

मसलन, पिछले 4 सालों में भारत में लव जिहाद के अलावा हिंदूमुसलिम, मंदिरमसजिद, हिंसा, आगजनी और तबाही, बलात्कार, घरवापसी, पाकिस्तान भागो जैसे मुद्दे उछाले गए. इस के अलावा जातिवाद के जहर ने भी अपना असली रंग दिखाया.

इसी सब पर शशि थरूर ने लेख भी लिखा कि जब से?भाजपा सत्ता में आई है, तब से हिंदुत्व का झंडा ले कर चलने वाली ताकतों की वजह से देश में कई जगह हिंसाएं हुई हैं. साल 2014 के बाद से अब तक अल्पसंख्यक विरोधी हिंसाओं में 389 लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं.

शशि थरूर ने आगे लिखा है कि पिछले 8 सालों में गौहत्या से जुड़ी 70 हिंसक घटनाएं हुई हैं जिन में से 97 फीसदी यानी 70 में से 68 वारदातें भाजपा के शासन में हुई हैं. इन वारदातों में 28 लोग मारे जा चुके हैं और 136 लोग घायल हुए हैं. इन वारदातों में 86 फीसदी शिकार मुसलिम हैं.

वैसे, गौभक्तों के निशाने पर केवल मुसलिम ही नहीं रहे हैं, बल्कि दलित भी उन का शिकार बने?हैं.

गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय अपराध रिकौर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि साल 2014 से साल 2016 के बीच देशभर में 2,885 सांप्रदायिक दंगे हुए हैं. बहुत से मामले पुलिस दर्ज करते हुए ही साधारण मारपीट के बना देती है पर फिर भी आंकड़े काफी भयावह हैं.

शशि थरूर जिस तरह से भाजपा पर इलजाम लगा रहे हैं या भविष्य में वह क्या कर सकती है, उस का आज ही जिक्र कर रहे हैं तो ऐसे सवाल जरूर सामने आते हैं कि उन के ऐसा कहने की वजह क्या है? आज की 21वीं सदी में जब दुनिया के वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर जिंदगी के सुराग ढूंढ़ रहे हैं, उस में भारतीय जनता पार्टी 1960 के आसपास के भारत की इमेज क्यों दुनिया के सामने पेश करना चाहती है?

1960 के आसपास की बात इसलिए उठाई है कि तब के भारत में अगर जातिवाद के दम पर नया भारत बनाने की बात कही या सुनी जाती तो कुछ पलों के लिए मान लिया जाता कि ऐसा हो सकता है, क्योंकि तब हम तकनीकी रूप से मजबूत नहीं हुए थे. पढ़ेलिखे लोगों की तब देश में कमी थी, खासकर गांवदेहात के स्कूलों में दलित समाज दिखता ही नहीं था. वह छिपा सा रहता था. आपसी तालमेल के लिए हमें एकदूसरे से रूबरू होना पड़ता था. दूरसंचार के साधनों की घोर कमी थी.

भारत तब गांवों में बसता था और चूंकि तब हमारे समाज पर जाति हावी थी, तो ऐसा माना जा सकता था कि इसे हथियार बना कर लोगों को बहकाया जा सकता?है.

भारत को आजाद हुए इतने साल बीतने के बाद भी देश में जातिवाद जैसी सामाजिक बुराई इस कदर हावी है कि आज भी अगर किसी शहर के पास कोई शख्स अपनी प्राइवेट कालोनी काट कर फ्लैट या घर बनवाता है, तो वह जिस जाति का होगा, चाहेगा कि उसी की जाति के लोग उस के प्लौट खरीदें ताकि पूरा इलाका एक ही जाति का हो जो आपस में खुल कर उठबैठ सके.

जहां ऊंची जाति के लोग ज्यादा होते हैं, वहां दलित या आदिवासी अपना आशियाना बनाने से कतराते हैं. अब तो यह ट्रैंड चल निकला है कि पूरी होम सोसाइटी ही ‘शाकाहारियों के लिए’ स्लोगन से बेची जाती है.

भारत में हिंदू धर्म के डर से शाकाहारी लोग बहुत कम हैं, उन में भी तथाकथित ऊंची जाति के ही हैं. ऐसे में मुसलिमों का ऐसी होम सोसाइटियों से पहले ही पत्ता साफ कर दिया जाता है.

मजबूरी में मुसलिम या दलित ऐसी जगह घर बनाते हैं या किराए पर रहते हैं जहां माहौल जैसा भी हो, लेकिन उन को अपनों का साथ मिल जाए.

जीने की बात छोडि़ए, पंजाब के शहर फगवाड़ा में हदिआबाद इलाके में अलगअलग जातियों के लिए अलगअलग श्मशान घाट बनाए गए हैं. बरसों से यह प्रथा चली आ रही है.

तेलंगाना की इंदिरा ऊंची जाति की हैं. तथाकथित अत्याचार के एक मामले में एक दलित साथी का साथ देना उन्हें भारी पड़ गया. इस बारे में इंदिरा ने बताया कि उन के पास 10 एकड़ जमीन है, जिस में से 2 एकड़ जमीन उन्होंने कोमापली लक्ष्मी को पट्टे पर दी है, जो उन की बचपन की दोस्त है और दलित समुदाय से ताल्लुक रखती है.

समस्या तब शुरू हुई जब पड़ोस के एक भूस्वामी ने लक्ष्मी को पट्टे पर दी गई जमीन के बगल में जमीन खरीदी. उस ने पट्टे पर ली गई जमीन पर एक दलित द्वारा खेती किए जाने पर एतराज जताया. इतना ही नहीं, अपनी जमीन में हो कर गुजरने पर भी रोक लगा दी. इतने से भी पेट नहीं भरा तो लक्ष्मी की फसल में आग लगा दी.

जब इस बात की शिकायत प्रशासन में की गई तो लक्ष्मी और इंदिरा पर हमला किया गया और यह दबाव डाला कि लक्ष्मी को दी गई जमीन वापस ले ली जाए. पर जब इंदिरा ने लक्ष्मी से दोस्ती होने की बात कह कर ऐसा करने से मना किया तो रेड्डी समुदाय ने इंदिरा को सामाजिक रूप से अलगथलग करने का ऐलान कर दिया.

रेड्डी समाज को बाकायदा यह कहना पड़ा कि इंदिरा से बात करने वाले पर 5,000 रुपए का जुर्माना लगेगा. इंदिरा के भाई पर उन की बेटी की शादी में शामिल होने पर 20,000 रुपए का जुर्माना देने पर मजबूर किया गया.

ऐसे एक नहीं बल्कि हजारों उदाहरण हैं जब किसी को जाति के नाम पर सताया गया है. कभी मूंछ रखने का बहाना,  कभी नाम के आगे ‘सिंह’ लगाने की तोहमत. और कोई बहाना नहीं मिलता तो कहते हैं कि दलित हो तो घोड़ी पर नहीं चढ़ोगे. बरात में डीजे नहीं बजाओगे. आजादी के दिन तिरंगा फहराने की हिम्मत मत करना या मिड डे मील देने के वक्त स्कूलों में दलित बच्चों को अलग बिठा कर खाना परोसने जैसी गैरइनसानी हरकतें हमारी नसों में बसे जातिवाद के जहर को उगाजर कर देती हैं. हर जाति के नौजवानों में यह जहर फैल रहा है और मारपीट करने में वे ही आगे रहते हैं.

ऐसा नहीं है कि जातिवाद के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी गई है. आज से कई साल पहले डाक्टर भीमराव अंबेडकर ने जाति की इस विषबेल के खिलाफ दलित और आदिवासी समुदाय को जागरूक करने का काम किया था.

उन का मानना था कि यह देश के लिए शर्म की बात है कि ऊंची जातियों में हिंदू उतने ही बुरे हैं जितने कि उन के नेता. ऐसे नेता हिंदुओं को मुसीबत की ओर ले जाते हैं. इस की अहम वजह है उन का हर चीज पर कब्जा करने का लालच और जिंदगी की अच्छी चीजों को दूसरों के साथ बांटने की अनिच्छा.

अगड़ों का पढ़ाईलिखाई और जमीनजायदाद पर तो पहले से ही पूरा कंट्रोल था, अब वे राजनीति के दम पर देश पर भी कब्जा जमा लेना चाहते थे. इस के लिए जरूरी था कि दलितों को पढ़ाईलिखाई से दूर रखा जाए. उन्हें खेतीबारी तो करने दी जाए पर वे जमीन के मालिक न बन सकें. इस के लिए अगड़ों ने धर्मग्रंथों का सहारा लिया और निचले तबके के दिमाग में कूटकूट कर यह भरा जाने लगा कि उन की जिंदगी का मकसद ही ऊंची जाति वालों की सेवा करना है. ऐसा करने से ही उन्हें मरने के बाद मोक्ष मिलेगा.

अब भारत में दोबारा से ऐसा माहौल बनाया जा रहा है. लोगों को जाति और धर्म के नाम पर बांट कर सियासी रोटियां सेंकने की पूरी तैयारी की जा रही है.

केंद्र की भाजपा सरकार लोगों की जातिगत भावनाओं को भड़का कर उस का फायदा उठाने में माहिर हो चुकी है. अब उस के नेता बेरोजगारी, गरीबी, खेतीबारी, रिजर्वेशन, पढ़ाईलिखाई, देश की तरक्की पर बात न कर के भीमराव अंबेडकर के कोट का नीला रंग भगवा में बदलने का खेल खेल रहे हैं. दलितों के घर जा कर खाना खाने की नौटंकी वे इसलिए कर रहे हैं ताकि दूसरे दलों के दलित वोट बैंक में सेंध लगा सकें.

ऐसे में शशि थरूर की चिंता भी जायज है, क्योंकि अगर उन के कहे मुताबिक भविष्य में भारत ‘हिंदू पाकिस्तान’ बनने की राह पर चल पड़ा तो इस से देश के मानचित्र और उस के देशवासियों के दिलों पर नफरत की ऐसी तलवारें चल जाएंगी जो पूरे समाज को तारतार कर देंगी.

इस्तीफे के बाद आशुतोष को मनाने का दौर शुरू

आशुतोष के आम आदमी पार्टी से इस्तीफे की घोषणा बाद उन्हें मनाने का प्रयास शुरू हो गया है. बुधवार देर शाम पार्टी नेता नोएडा स्थित उनके घर पहुंचे. ट्विटर पर भी ‘आप’ नेता आशुतोष को मनाते रहे. गोपाल राय और दिलीप पांडे उनसे मिलने पहुंचे, लेकिन आशुतोष से मुलाकात नहीं हो पाई.

लोकसभा चुनाव से पहले आशुतोष के इस्तीफे से पार्टी सकते में है. वे कुछ समय से पार्टी में ज्यादा सक्रिय नहीं थे. इसके बाद भी ‘आप’ के बड़े नेता आशुतोष के संपर्क में थे. बुधवार को इस्तीफे के बाद ‘आप’ के बड़े नेताओं का आशुतोष से संपर्क नहीं हो पाया है. पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा और उन्हें मनाया जाएगा.

आशुतोष को मनाने के लिए गोपाल राय और दिलीप पांडे उनके नोएडा स्थित आवास पर पहुंचे, लेकिन आशुतोष घर पर नहीं थे. सूत्रों के मुताबिक, संजय सिंह भी आशुतोष को मनाने के प्रयास में लगे हैं. आशुतोष कई बार इस्तीफे की पेशकश कर चुके थे, लेकिन बार-बार उन्हें मना कर दिया जाता था. इसके बाद उन्होंने बुधवार सुबह ट्विटर पर ‘आप’ छोड़ने की घोषणा कर दी.

सुशील गुप्ता ने पहले निशाना साधा, फिर पलटे

ट्विटर पर आशुतोष द्वारा इस्तीफे की घोषणा के बाद एक नाटकीय घटनाक्रम भी हुआ. आशुतोष की घोषणा के तुरंत बाद ही ‘आप’ के राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता ने कह दिया कि वे कुछ समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे. हालांकि, इसके कुछ देर बाद ही केजरीवाल ने इस्तीफा स्वीकार नहीं करने का ट्वीट किया. इसके तुरंत बाद गुप्ता ने पलटी मारते हुए ट्वीट कर आशुतोष से इस्तीफा वापस लेने की मांग की. हालांकि गुप्ता का दिया बयान वायरल हो गया. बाद में डैमेज कंट्रोल के लिए गुप्ता ने ट्वीट किया.

केजरीवाल के कई साथी कर चुके हैं किनारा

‘आप’ के गठन में अहम भूमिका निभाने वाले कई साथियों ने पार्टी छोड़ दी है. वरिष्ठ पत्रकार और ‘आप’ नेता आशुतोष के इस्तीफे को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. आशुतोष को केजरीवाल का करीबी माना जाता है. राज्यसभा चुनावों के बाद से आशुतोष पार्टी से नाराज थे. ‘आप’ के वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास अभी पार्टी में हैं, लेकिन वे लगातार कटाक्ष करते रहते हैं.

शाजिया इल्मी

‘आप’ की राष्ट्रीय कार्यकारणी में रहीं शाजिया इल्मी अन्ना आंदोलन से जुड़ी थीं. उन्होंने गाजियाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ा था. बाद में विवाद से शाजिया ने पार्टी छोड़ दी.

विनोद कुमार बिन्नी

दिल्ली में पहली बार ‘आप’ की सरकार बनने पर विनोद ‘बिन्नी‘ ने विरोध में आवाज उठाई थी. मंत्रालय बंटवारे से वे नाखुश थे.उन्हें पार्टी से 2014 में निकाल दिया गया.

प्रो. आनंद कुमार

आंदोलन का हिस्सा रहे प्रो. आनंद कुमार ने वर्ष 2014 में ‘आप’ से लोकसभा चुनाव लड़ा था. उन्हें भी 2015 में पार्टी विरोधी गतिविधियों में हटाया गया था.

योगेंद्र यादव

पार्टी में थिंक टैंक के तौर पर रहे योगेंद्र यादव ने आप को खड़ा करने में अहम रोल निभाया था. वे चुनाव की रणनीति बनाने में रहे. उन्हें भी प्रशांत भूषण के साथ हटाया गया था.

प्रशांत भूषण

पार्टी के गठन में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशांत भूषण ने 2015 में विधानसभा चुनावों के बाद सवाल उठाए थे. इसके बाद उन्हें पीएसी से बाहर कर दिया गया था.

कुमार विश्वास

कुमार ने पार्टी नहीं छोड़ी है, लेकिन उन्हें किनारे कर दिया गया है. विश्वास अलग-अलग मंचों से पार्टी पर निशाना साधते रहे हैं.

कपिल मिश्रा

‘आप’ सरकार में मंत्री रहे विधायक कपिल मिश्रा पार्टी के बागी हैं. 2017 के बाद से वह पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं.

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