शाहरुख खान: किसी को-एक्ट्रेस की शादी होती है तो मैं भावुक हो जाता हूं

रोमांस किंग शाहरुख खान का कहना है कि जब भी उनकी किसी को-एक्ट्रेस की शादी होती है तो वे बहुत भावुक हो जाते हैं. मुंबई में अपनी अगली फिल्म ‘जीरो’ के ट्रेलर लौन्च के मौके पर उन्होंने ये बात कही.

शाहरुख ने दीपिका और रणवीर को बधाई देते हुए कहा, “मैं उन्हें आशीर्वाद देता हूं. उनकी खुशियों की कामना करता हूं. मैं बहुत खुश होता हूं जब मेरी सह अभिनेत्रियों की शादी होती है, मैं भावुक हो जाता हूं. जब मैंने श्रीदेवी और माधुरी जी के साथ काम करना शुरू किया तो उनकी शादी हो गई. इसके बाद मेरे साथ काम करने वाली अभिनेत्रियों की दूसरी पीढ़ी की भी शादी हो गई और अब ये तीसरा सेट है, जिनकी शादियां हो रही हैं.”

उनसे जब दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी के बारे में पूछा गया कि वह उनकी शादी में क्या करेंगे तो इस पर उन्होंने कहा, “हर किसी को अपनी जिंदगी में शादी करनी चाहिए लेकिन मैं उनकी शादी में क्या करूंगा? बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना. उनकी शादी होगी, वो जिंदगी का लुत्फ उठाएंगे, उनके बच्चे होंगे. इसमें मैं क्या करूंगा? मेरी शादी बहुत पहले हो चुकी है तो क्या मुझे दोबारा शादी करनी चाहिए?”

सुनिश्चित थी यह हेराफेरी

चुनावी मंच पर खड़े हो कर कहना आसान है कि न खाऊंगा न खाने दूंगा पर जब देश में हरकोई खाने और निगलने को नहीं हड़पने को तैयार बैठा हो तो कैसा भी नेता हो बेईमानियां तो होंगी ही. नेताओं और अफसरों की बेईमानियां तो देश में कम नहीं हुईं ऊपर से बिल्डरों, उद्योगपतियों, व्यापारियों आदि की एक नई जमात पैदा हो गई है, जिस ने बेरहमी से बैंकों में आम गरीब जनता का पैसा ठीक उसी तरह हड़प लिया जैसे मृत्युभोज पर पंडे हड़पते हैं, जबकि मृतक के घर वाले हिसाब लगा रहे होते हैं कि कल से घर कैसे चलेगा.

पिछले 4 सालों में जब से नई सरकार कालाबाजारियों, कानून से बचने वालों, धनपतियों, बेईमानों को दुरुस्त करने के नाम पर आई है सरकारी व गैरसरकारी बैंकों ने 3,16,500 करोड़ रुपए की लेनदारी अपने खाते से हटा दी, क्योंकि पैसा वसूल करना असंभव था. इन्हीं

4 सालों में बैंकों के ऐसे कर्जों जिन्हें वसूलना नामुमकिन था बढ़ कर 7,70,000 करोड़ रुपए हो गए. यह पैसा जो कर्ज लेने वाले खा गए किस का है? यह पैसा आम छोटे खातेदारों का है.

यह विडंबना ही है कि इसी दौरान बारबार कहा गया कि कैशलैस अर्थव्यवस्था बनाई जाएगी और सभी लेनदेन बैंकों से होंगे. बैंकों तक जाना हरेक के लिए जरूरी बना दिया गया. बैंक अपनी मनमानी करने लगे हैं. क्रैडिट कार्ड वाले इस कैशलैस का फायदा उठा कर धन्ना सेठों, साहूकारों से भी कई गुना ज्यादा ब्याज वसूलने लगे हैं.

जब पहुंच वाले व्यापारी लाखोंकरोड़ों हड़प रहे थे, मंचों पर भाषणों का अमृत पिलाया जा रहा था कि अब सुख आएगा, शांति आएगी. सुख के पत्ते आए पर ज्वालामुखी फटने के बाद जलाने वाले लावे के साथ. नोटबंदी और जीएसटी को इन्हीं लाखोंकरोड़ों को वसूलने के लिए लाया गया पर दोनों से फायदा केवल बैंकों, सरकार को हुआ पर इस पैसे को भी खा लिया गया. खाने वाले कुछ बहुचर्चित तो देश छोड़ कर भाग गए पर जिन्हें अपने देश से प्रेम है या जो गरीब हैं वे भाग नहीं सकते, उस गुप्त अत्याचार को सहने को मजबूर हैं.

यह हेराफेरी बैंकों की मजबूरी नहीं थी, यह उन्होंने जानबूझ कर की. उन्हें एहसास हो गया कि नई सरकार बैंकों का उपयोग शास्त्रों और स्मृतियों की तरह कर रही है ताकि इन के माध्यम से जजमान जनता को लपेटा जा सके. बैंकों ने अपनी मनमानी कुंडलियां बनवा लीं और मांगने वाले रसूखदारों को भरभर कर्ज दिए. चूंकि बैंकों के मैनेजरों को महापुरोहितों का दर्जा दे दिया गया, उन से सवालजवाब करने बंद कर दिए गए. पाप और पुण्य का लेखाजोखा केवल आम जनता, जो जजमान कस्टमर बन कर रह गई, तक रह गया.

नतीजा सामने है. कुछ को पुण्य मिला है जो पैसा डकार गए, बाकियों के हाथों में पाप आ गए.

थाई मसाज की आड़ में

पहली अगस्त, 2017 को भीलवाड़ा के एडीशनल एसपी गोपालस्वरूप मेवाड़ा अपने औफिस में बैठे थानाप्रभारी से किसी आपराधिक मामले पर चर्चा कर रहे थे, तभी अंजान नंबर से उन के मोबाइल पर फोन आया. उस समय वह गंभीर मसले पर विचार कर रहे थे, इसके बावजूद उन्होंने फोन रिसीव कर के जैसे ही मोबाइल कान से लगाया, दूसरी ओर से फोन करने वाले ने कहा, ‘‘सर, आजकल आप शहर में रोजाना कोई न कोई बड़ा धमाका कर रहे हैं, इसलिए अपराधियों में दहशत छाई हुई है.’’

‘‘भई वह तो ठीक है, यह मेरी ड्यूटी भी है,’’ गोपालस्वरूप मेवाड़ा ने जवाब में कहा, ‘‘पर यह बताइए कि आप ने फोन क्यों किया है, आप कौन बोल रहे हैं?’’

‘‘सर, आप यही समझ लीजिए कि हम आप के शुभचिंतक हैं.’’ फोन करने वाले ने कहा.

‘‘चलो, यह भी ठीक है, पर मैं यह जानना चाहता हूं कि आप ने फोन क्यों किया है? आप को कोई शिकायत हो तो बताइए, अभी मैं थोड़ा व्यस्त हूं.’’ गोपालस्वरूप मेवाड़ा ने फोन करने वाले की चिकनीचुपड़ी बातें सुन कर पीछा छुड़ाने के लिए कहा.

society

‘‘सर, मेरी कोई शिकायत नहीं है. मैंने तो आप को यह बताने के लिए फोन किया था कि शहर में आजकल तितलियों की बहार आई हुई है.’’ फोन करने वाले ने कहा.

तितलियों की बात सुन कर एसपी साहब ने कहा, ‘‘तितलियों की बहार का क्या मतलब? तुम कहना क्या चाहते हो? जो भी कहना है, साफसाफ कहो.’’

‘‘सर, शहर में देशी ही नहीं, विदेशी तितलियां भी आने लगी हैं. ये तितलियां मसाज पार्लरों में आ रही हैं.’’ फोन करने वाले ने कहा.

‘‘क्या मसाज पार्लरों में गलत काम भी हो रहे हैं?’’ गोपालस्वरूप मेवाड़ा ने फोन करने वाले से पूछा.

‘‘सर, यह पता करना पुलिस का काम है. इस बारे में आप पता करवा लीजिए.’’ उस आदमी ने इतना कह कर फोन काट दिया.

फोन कटने के बाद गोपालस्वरूप मेवाड़ा उस आदमी की बातों पर विचार करने लगे. उन्हें मामला गंभीर लगा तो थानाप्रभारी से उस फाइल पर बाद में चर्चा करने की बात कह कर उसे भेज दिया. इस के बाद अपने खास मुखबिरों को फोन कर के यह पता लगवाया कि शहर में कहांकहां मसाज पार्लर और स्पा सैंटर चल रहे हैं, साथ ही यह भी पता करवाया कि इन मसाज पार्लरों में किस तरह की गतिविधियां चल रही हैं?

2-3 घंटे में ही उन्हें मुखबिरों से जो जानकारियां मिलीं, वे चौंकाने वाली थीं. उन्होंने तुरंत अपने सूचना तंत्र से उन जानकारियों की पुष्टि करवाई. वे जानकारियां सही निकलीं तो गोपालस्वरूप मेवाड़ा ने पुलिस अधिकारियों की एक टीम बनाई. टीम में शामिल प्रशिक्षु डीएसपी दिनेश परिहार को कुछ बातें समझा कर प्राइवेट कार से सामान्य कपड़ों में शहर के महावीर पार्क के पास स्थित स्पा पैलेस भेज दिया.

कोतवाली से करीब 3 सौ मीटर दूर स्थित इस स्पा पैलेस पर दिनेश परिहार एक पढ़ेलिखे व्यापारी की तरह कार से उतरे. उन्होंने एक नजर स्पा पैलेस की बिल्डिंग पर डाली. बाहर से वह किसी मध्यम शहर के मसाज पार्लर जैसा नजर आ रहा था. लेकिन वह स्पा पैलेस का शीशे का दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हुए तो वहां की चमकदमक देख कर दंग रह गए. अंदर दाखिल होते ही रिसैप्शन पर चुस्त पोशाक पहने बैठी युवती ने मुसकरा कर उन का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘वेलकम सर, मैं आप की क्या सेवा कर सकती हूं?’’

‘‘यार, मैं तो यहां घूमने आया था. आप के स्पा का नाम सुना तो आप से मिलने चला आया,’’ दिनेश परिहार ने एक शौकीनमिजाज नौजवान की तरह अपनी पैंट की जेब से महंगी सिगरेट का पैकेट निकालते हुए कहा, ‘‘क्या मैं यहां सिगरेट पी सकता हूं?’’

‘‘सौरी सर, यहां स्मोकिंग अलाऊ नहीं है. इसकी वजह यह है कि हमारे यहां विदेशी लड़कियां भी काम करती हैं. उन्हें स्मोकिंग से एलर्जी है. इस के अलावा हमारे कस्टमर भी ऐतराज करते हैं.’’ रिसैप्शनिस्ट ने मोहक मुसकान बिखेरते हुए कहा.

‘‘ओके, आप कह रही हैं तो हम सिगरेट नहीं पीते हैं.’’ दिनेश ने रिसैप्शन के पास दीवारों पर लगी मसाज के अलगअलग तरीकों वाली तसवीरों पर नजर डालते हुए कहा.

‘‘सर, पहले आप हमारे स्पा पर कभी नहीं आए?’’ रिसैप्शनिस्ट ने पूछा.

‘‘यू आर राइट, मैं जयपुर का रहने वाला बिजनैसमैन हूं. आप के स्पा पैलेस का नाम सुना तो मसाज कराने का मूड बन गया और आप के यहां चला आया.’’ दिनेश ने रिसैप्शनिस्ट के चेहरे को गौर से देखते हुए कहा.

‘‘यस सर, योर मोस्ट वेलकम.’’ युवती ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘सर, हमारे यहां 900 रुपए एंट्री फीस लगती है. पहले आप उसे जमा करा दीजिए, उस के बाद जैसा और जिस लड़की से मसाज करवाना चाहेंगे, आप को उस का अलग से पैसा देना होगा.’’

‘‘डोंट वरी,’’ दिनेश ने पैंट की जेब से नोटों से भरा पर्स निकाल कर उस में से 5-5 सौ रुपए के 2 नोट रिसैप्शनिस्ट को देते हुए कहा, ‘‘यह लीजिए, एंट्री फीस.’’

युवती ने एक हजार रुपए कैश काउंटर में रख कर सौ रुपए का नोट लौटाते हुए कहा, ‘‘सर, योर गुडनेम प्लीज.’’

‘‘व्हाय…’’ दिनेश ने सौ रुपए का नोट युवती को देते हुए कहा, ‘‘ये आप के लिए टिप है.’’

‘‘थैंक्स सर,’’ युवती ने कहा, ‘‘हम रजिस्टर मेंटेन करते हैं, इसलिए आप का नाम जानना चाहती हूं.’’

‘‘ठीक है, आप को फार्मैलिटी करनी है तो लिख लीजिए दिनेश फ्राम जयपुर.’’ दिनेश ने जानबूझ कर सरनेम छिपाते हुए कहा.

‘‘सर, आप मोबाइल नंबर भी बता दीजिए तो हम आप को भविष्य में हमारी नई सेवाओं की समयसमय पर जानकारी देते रहेंगे.’’ युवती ने कहा.

‘‘ओह नो, आप अभी मोबाइल नंबर छोडि़ए,’’ दिनेश ने कहा, ‘‘मुझे आप की सर्विसेज पसंद आईं तो मैं खुद ही मौका मिलने पर यहां हाजिर हो जाऊंगा.’’

society

‘‘ओके सर, प्लीज सिट औन सोफा,’’ युवती ने कहा, ‘‘हमारी मसाज गर्ल आप को ब्रोशर दिखाएगी. आप उन में से पसंद कर लीजिए कि कौन सी मसाज कराएंगे.’’

दिनेश सामने रखे सोफे पर बैठ गए. रिसैप्शनिस्ट ने इंटरकौम से एक युवती को बुला कर कहा, ‘‘यह सर मसाज कराना चाहते हैं, इन से बात कर लीजिए.’’

चुस्त कपड़े पहने वह युवती ब्रोशर ले कर दिनेश के बगल में बैठ गई और अपने उभारों को दिखाते हुए बोली, ‘‘सर, आप कैसी गर्ल्स से मसाज कराना चाहेंगे, इंडियन बेबी से या फौरनर बेबी से?’’

‘‘वाव, आप के यहां फौरनर गर्ल्स भी हैं?’’ दिनेश ने चौंकते हुए कहा, ‘‘तब तो आज मजा आ जाएगा. लेकिन पहले आप उस ब्यूटी के दीदार तो कराइए.’’

‘‘सर, आप मेरे साथ आइए.’’ युवती ने उठते हुए कहा.

वह युवती दिनेश को पहली मंजिल पर ले गई, जहां गलियारे के दोनों तरफ 8-10 कमरे बने हुए थे. पांच सितारा होटलों की तरह सजे गलियारे और उन कमरों में तमाम सुविधाएं थीं. कमरों में मद्धिम रोशनी के बीच एसी के अलावा बैड, मसाज टेबल और शौवर आदि लगे हुए थे.

दिनेश ने उस युवती के साथ चलते हुए एकदो कमरों में झांक कर देखा तो वहां की भव्यता देख कर दंग रह गए. युवती उन्हें एक कमरे में ले गई, जहां बैठी एक लड़की मोबाइल पर गेम खेल रही थी. लड़की की ओर इशारा कर के युवती ने कहा, ‘‘यह बेबी मिजोरम की है.’’

दिनेश की ओर दिलकश अदा से देखते हुए मिजोरम वाली लड़की ने कहा, ‘‘हाय हैंडसम.’’

दिनेश ने उस लड़की की ओर उपेक्षा से देखते हुए साथ आई युवती से कहा, ‘‘आप तो फौरनर ब्यूटी की बात कह रही थीं?’’

युवती ने अर्थपूर्ण मुसकराहट के साथ पूछा, ‘‘यह आइटम आप को पसंद नहीं आया?’’

दिनेश ने कुछ नहीं कहा तो युवती उन्हें दूसरे कमरे में ले गई, जहां 3 लड़कियां बैठी आपस में बातें कर रही थीं. युवती ने उन की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘जनाब, ये थाइलैंड की गर्ल्स हैं. आप इन में से पसंद कर लीजिए. आप कौन सी बेबी से मसाज कराना चाहेंगे? यह भी बता दीजिए कि आप फुल बौडी मसाज कराएंगे या केवल सिर की और कितनी देर की?’’

दिनेश ने उन में से एक लड़की को पसंद कर के अपने पास बुलाया. थाईलैंड की उस लड़की ने इशारों में सैक्स करने की बात कही तो नीचे से आई लड़की ने सैक्स के लिए 10 हजार रुपए मांगे. दिनेश ने रकम ज्यादा बताई तो सौदा 5 हजार रुपए में तय हो गया.

सौदा तय होने के बाद साथ आई युवती ने दिनेश से थाइलैंड की लड़की को एक कमरे में ले जाने को कहा. दिनेश चलने को हुए तभी जैसे उन्हें कुछ याद आया हो. उन्होंने कहा, ‘‘ओह सौरी, मैं नीचे सोफे पर अपना मोबाइल भूल आया हूं. पहले उसे ले आता हूं.’’

वह युवती कुछ कहती, उस के पहले ही दिनेश तेजी से सीढि़यां उतर कर ग्राउंड फ्लोर पर आ गए. सिगरेट पीने के बहाने वह बाहर आए और गोपालस्वरूप मेवाड़ा को मोबाइल फोन से अलर्ट कर दिया. एडीशनल एसपी साहब को उन्हीं के फोन का इंतजार था.

उन्होंने पहले से गठित टीम में शामिल सीओ सिटी राजेंद्र त्यागी, कोतवाली प्रभारी बिरदीचंद गुर्जर, थाना सदर के थानाप्रभारी यशदीप भल्ला, थाना सुभाषनगर के थानाप्रभारी प्रमोद शर्मा, थाना हमीरगढ़ के थानाप्रभारी गजराज चौधरी और एसआई पुष्पा कासोटिया आदि को स्पा पैलेस पर छापा मारने के लिए भेज दिया.

कुछ ही देर में पुलिस की कई गाडि़यों से आए पुलिस वालों ने स्पा पैलेस को घेर लिया. मसाज पार्लर की तलाशी में थाइलैंड की 3 और मिजोरम की एक लड़की को गिरफ्तार कर लिया गया. इन के साथ स्पा पैलेस के मैनेजर नवीन शर्मा और उस की एक सहयोगी महिला को भी गिरफ्तार किया गया.

मैनेजर नवीन शर्मा मूलत: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले का रहने वाला था. वह भीलवाड़ा में शास्त्रीनगर में रहता था. पुलिस सभी को थाने ले आई. पुलिस को हैरानी हो रही थी कि 10 दिन पहले ही कोटा में थाइलैंड की लड़कियां मसाज पार्लर की आड़ में अनैतिक कार्य करते हुए पकड़ी गई थीं, इस के बावजूद भीलवाड़ा में मसाज पार्लर चलाने वाले थाइलैंड की लड़कियों से अनैतिक धंधा करा रहे थे.

जांच में पता चला कि स्पा पैलेस नाम से मसाज का लाइसैंस मध्य प्रदेश के रतलाम शहर के रहने वाले व्यवसाई सुनील गोवानी के नाम था. सुनील के मध्य प्रदेश के शहर रतलाम, उज्जैन, इंदौर, नागदा, नीमच सहित राजस्थान के कई शहरों में मसाज पार्लर चल रहे थे. उसी ने थाइलैंड की इन लड़कियों को भीलवाड़ा पहुंचाया था. उस ने मिजोरम की लड़की के माध्यम से थाइलैंड की लड़कियों से संपर्क किया था. उस के बाद उन का वीजा तैयार करवाया था.

थाइलैंड से 2 लड़कियां इसी 8 जून को मुंबई उतरी थीं, जबकि एक लड़की 23 जून को हैदराबाद उतरी थी. इन सब को मुंबई और हैदराबाद से भीलवाड़ा लाया गया था. थाइलैंड की ये लड़कियां 3 महीने के टूरिस्ट वीजा पर भारत आई थीं. पुलिस को इन के पासपोर्ट मिले हैं. थाइलैंड की लड़कियों से पूछताछ में पुलिस को भाषा की परेशानी आई, क्योंकि ये हिंदी नहीं समझती थीं, लेकिन अंगरेजी फर्राटे से बोल रही थीं.

पूछताछ में पता चला कि थाइलैंड की ये तीनों लड़कियां पहली बार भारत आई थीं. वे मोटी कमाई के लालच में देहव्यापार में धकेल दी गई थीं. जबकि वहीं मिजोरम वाली लड़की इस के पहले इंदौर स्थित सुनील के स्पा में काम कर चुकी थी. भीलवाड़ा के इस पार्लर पर दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से भी लड़कियां आ चुकी हैं.

सुनील गोवानी के इस काम में भीलवाड़ा के शास्त्रीनगर का रहने वाला मनोज लालवानी भी जुड़ा था. उस की शास्त्रीनगर में इलैक्ट्रिक के सामानों की दुकान है. वह रोजाना शाम को स्पा पैलेस आ कर मैनेजर नवीन शर्मा से उस दिन की कमाई ले जाता था, जिसे वह और गोवानी आपस में बांट लेते थे.

स्पा पैलेस पर काम करने वाली लड़कियां भीलवाड़ा के शास्त्रीनगर में किराए के मकान में रहती थीं. मकान का किराया ही नहीं, उन के खानेपीने के खर्च के साथ स्पा पैलेस तक आनेजाने के लिए जो वैन लगी थी, उस का खर्चा मनोज ही देता था.

इस स्पा पैलेस का उद्घाटन करीब सवा साल पहले फिल्म अभिनेत्री मोनिका बेदी ने किया था. पार्लर में औनलाइन बुकिंग भी होती थी. इस के लिए वेबसाइट भी बनी थी. पार्लर में थाइलैंड एवं मिजोरम से बुलाई गई लड़कियों को 25-25 हजार रुपए वेतन के साथ इंसेंटिव भी दिया जाता था.

पार्लर में रोजाना 10 से 30 ग्राहक आते थे. पार्लर में मसाज का जो ब्रोशर ग्राहक को दिखाया जाता था, उस में 30 मिनट, 60 मिनट, 90 मिनट एवं 120 मिनट के मसाज के अलगअलग रेट निर्धारित थे.

पार्लर में काम करने वाली लड़कियों को सवा से डेढ़ महीने में बदल दिया जाता था. उन के स्थान पर दूसरे पार्लर से लड़कियां बुला ली जाती थीं, ताकि ग्राहकों को नईनई लड़कियां मिलती रहें, जिस से पार्लर से ग्राहक जुड़े रहें. स्पा पैलेस में सदस्य बना कर भी ग्राहकों को जोड़ा जाता था.

इस के लिए 11 हजार रुपए सदस्यता ली जाती थी. ये सदस्यता 3 महीने के लिए होती थी. इस अवधि में मसाज की संख्या तय कर दी जाती थी. इस बीच उस से कोई पैसा नहीं लिया जाता था. पुलिस को पार्लर की तलाशी में एक फाइल मिली है, जिस में सदस्यों के फोटो के साथ पूरा ब्यौरा दिया था.

स्पा पैलेस जिस बिल्डिंग में चल रहा था, उसे 80 हजार रुपए महीने किराए पर लिया गया था. पार्लर के रिसैप्शन से ले कर गैलरी और फर्स्ट फ्लोर के कमरों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगे थे. पुलिस ने इन कैमरों की हार्डडिस्क जब्त कर ली है. पुलिस उस की जांच कर रही है कि वहां कौनकौन लोग आते थे.

पुलिस ने रिसैप्शन से ग्राहकों का नाम एवं मोबाइल नंबर लिखा रजिस्टर भी जब्त कर लिया है. विदेशी युवतियों की तलाशी में पुलिस को करीब एक लाख रुपए नकद मिले हैं. इस के अलावा मसाज पार्लर से तमाम आपत्तिजनक चीजें जब्त की गई हैं. भीलवाड़ा पुलिस ने थाइलैंड की युवतियों के बारे में दिल्ली स्थित थाइलैंड दूतावास को सूचना दे दी थी.

कथा लिखे जाने तक पार्लर चलाने वाला सुनील गोवानी और उस का साथी मनोज लालवानी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया था. इस से पहले 21 जुलाई को कोटा शहर में स्पा सैंटर में चल रहे सैक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया गया था. पुलिस ने कोटा के गुमानपुरा में सैंटर स्क्वायर मौल में चौथी मंजिल पर चल रहे सौंदर्यम फैमिली स्पा एवं जवाहरनगर में डिस्ट्रिक्ट सैंटर में संचालित स्पा सैंटर पर छापा मार कर थाइलैंड की 8 एवं नगालैंड की एक लड़की सहित कुल 17 लोगों को गिरफ्तार किया था.

गुमानपुरा स्थित सौंदर्यम फैमिली स्पा को बूंदी का रहने वाला राजेश माधवानी चला रहा था, जबकि उस की पत्नी संजना माधवानी जवाहरनगर वाला स्पा चला रही थी. दोनों जगहों पर स्पा की आड़ में सैक्स रैकेट चल रहा था. पुलिस ने स्पा चलाने वाले राजेश माधवानी और उस की पत्नी संजना को गिरफ्तार कर लिया था.

इन में गुमानपुरा का सौंदर्यम फैमिली स्पा काफी समय से चल रहा था, जबकि जवाहरनगर वाला स्पा कुछ महीने पहले ही फ्रैंचाइजी के रूप में खोला गया था. सौंदर्यम फैमिली स्पा में 4 छोटेछोटे केबिन बने हुए थे, जिन में पलंग, गद्दे और स्पा की सामग्री के अलावा तमाम आपत्तिजनक चीजें रखी थीं.

इस स्पा सैंटर में 2 हजार रुपए सामान्य चार्ज लिया जाता था, जबकि सैक्स के लिए कोई कीमत तय नहीं थी. लड़कियां पहले स्पा करती थीं, उसी के साथ वे ग्राहक को ‘यू वांट…यू वांट…’ कह कर उकसाती थीं. इस के बाद स्पा संचालक के माध्यम से घंटे के हिसाब से सौदा तय होता था. पैसों का बंटवारा लड़की और स्पा संचालक के बीच आधाआधा होता था.

पूछताछ में राजेश माधवानी ने बताया था कि उस के संबंध मुंबई, दिल्ली और कोलकाता के कुछ लोगों से थे. उन्हीं के माध्यम से वह थाइलैंड से लड़कियां मंगाता था. वह भी महीने, डेढ़ महीने में स्पा की लड़कियों को बदल देता था. उस ने सौंदर्यम के नाम से बाकायदा वेबसाइट बनवा रखी थी, जिस में स्पा सैंटर के कमरों की लाइव तसवीरें देखी जा सकती थीं. रेट लिस्ट सहित कई अन्य जानकारियां वेबसाइट पर दी गई थीं.

ये सोशल मीडिया के जरिए ग्राहकों को विदेशी युवतियों की फोटो भेज कर बुकिंग करते थे. संजना ने पकड़े जाने से 3-4 दिन पहले ही थाइलैंड की लड़कियां दिल्ली और पुणे से बुलाई थीं. इन लड़कियों को वह 20 हजार रुपए महीने वेतन तथा सैक्स के नाम पर मिलने वाली रकम का आधा हिस्सा देती थी. ग्राहक की इच्छा पर लड़कियों को स्पा से बाहर भी भेजा जाता था.

दोनों स्पा सैंटरों से पुलिस को करीब 2 सौ लोगों की ऐसी सूची मिली है, जो वहां नियमित आते थे. थाइलैंट की लड़कियों ने पुलिस को बताया था कि उन के देश में इस तरह सैक्स अपराध नहीं है, इसलिए वे भारत आई थीं. कोटा में पकड़ी गई थाइलैंड की लड़कियां न हिंदी जानती थीं और न ही अंगरेजी. पुलिस ने नगालैंड की लड़की के माध्यम से उन लड़कियों से पूछताछ की, क्योंकि वह थाई भाषा जानती थी. राजेश और संजना जानबूझ कर थाइलैंड की इन लड़कियों को लाए थे, जिस से वे किसी अन्य दलाल के पास न जा सकें.

राजेश माधवानी पहले ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय करता था. उस में घाटा होने के बाद वह पत्नी के साथ कोटा में स्पा सैंटर चलाने लगा. उस का स्पा सैंटर अच्छा चल रहा था. पर मोटी कमाई के लालच में स्पा की आड़ में वह भारतीय और विदेशी लड़कियों से देहव्यापार कराने लगा. इसी साल मार्च में उस ने पहली बार थाइलैंड की लड़कियों को कोटा बुलाया था.

पहली बार विदेशी लड़कियों के आने से राजेश माधवानी की पौ बारह हो गई थी. उस के ग्राहकों की तादाद तेजी से बढ़ गई. थाई मसाज की आड़ में उस ने थाइलैंड की लड़कियों को देहव्यापार में उतार दिया. पकडे़ जाने तक वह 25 से ज्यादा थाई लड़कियों को कोटा बुला चुका था.

राजेश की पत्नी संजना कोटा से पहले जयपुर में ब्यूटीपार्लर चलाती थी. उसे इस का पूरा अनुभव था, इसलिए राजेश ने पत्नी को साथ रखा और पहले स्पा के नाम पर साख बनाई. वह स्पा के लिए सदस्य भी बनाता था. विदेशी लड़कियों को बिना सूचना दिए रखने और ठहराने के मामले में इंटेलीजेंस ब्यूरो ने राजेश माधवानी को नोटिस दिया है. किसी भी विदेशी नागरिक को अपने यहां नौकरी देने या ठहराने पर आईबी को सूचना देनी जरूरी होती है.

अदालत की ओर से न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने पर कोटा जेल प्रशासन ने थाइलैंड और नगालैंड की लड़कियों का जेके लोन अस्पताल में मैडिकल कराया था. मैडिकल में थाइलैंड की 20 साल की एक लड़की गर्भवती पाई गई थी. अभी वह अविवाहित है. सोनोग्राफी जांच में उस के पेट में 10 सप्ताह का गर्भ होने का पता चला है.

इस के अलावा थाइलैंड की एक लड़की के एचआईवी पौजिटिव होने की पुष्टि हुई है. इस से जेल और पुलिस प्रशासन की परेशानियां बढ़ गई हैं. इस के अलावा उन लोगों की भी चिंता बढ़ गई है, जो इन लड़कियों के संपर्क में आए थे. महानगरों की तरह राजस्थान के छोटे शहरों में भी मसाज पार्लर और स्पा सैंटरों की आड़ में विदेशी लड़कियों को देह व्यापार में धकेलने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं.

जयपुर में नवंबर, 2015 में बनीपार्क इलाके में बने एक मौल में स्पा सैंटर के नाम पर जिस्मफरोशी का रैकेट पकड़ा गया था. मौल की पहली मंजिल पर चल रहे 2 स्पा सैंटरों पर की गई कारवाई में थाइलैंड की 10 लड़कियों के अलावा 8 लड़कों को पकड़ा गया था. ये स्पा द थाई हारमोनी एवं क्रिस्टल स्पा सैंटर के नाम से करीब एक साल से चल रहे थे.

बहरहाल, इंसान की आदिकाल से चली आ रही सैक्स की भूख ने अब वैश्विक बाजार खड़ा कर दिया है. भारत के महानगरों में फैले इस बाजार में कई सालों से विदेशी लड़कियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रही हैं. अब छोटे शहर भी इस की चपेट में आते जा रहे हैं.

– कथा पुलिस सूत्रों एवं अन्य रिपोर्ट्स पर आधारित

अपने ही बुने जाल में फंसी अंशु

28 जून, 2017 की बात है. एक महिला मुरादाबाद के एसएसपी मनोज तिवारी के औफिस जा कर उन से मिली. उस महिला के साथ 3 वकील भी थे, जो मुरादाबाद कचहरी में प्रैक्टिस करते थे. महिला किसी अच्छे परिवार की लग रही थी. एसएसपी ने सभी को बैठने का इशारा किया.

महिला ने अपना नाम अंशु उर्फ रेनू सागर बताते हुए एसएसपी को एक तहरीर दी, ‘‘मेरा करीब एक साल से लाइनपार, प्रकाश नगर में रहने वाले राघव शर्मा से प्रेमसंबंध है. राघव के साथ मैं बाहर घूमनेफिरने भी जाती थी. पिछले दिनों हम हरिद्वार भी घूमने गए थे. वहां हर की पौड़ी के पास स्थित मंदिर में राघव और मैं ने शादी कर ली थी.’’ अंशु ने एसएसपी को शादी के समय राघव द्वारा उस की मांग भरते हुए फोटो भी दिखाए.

अंशु ने बताया कि राघव शर्मा को जब पता चला कि वह दलित लड़की है तो उस ने शादी वाली बात से इनकार कर दिया. उस के साथ आए वकीलों ने भी इस मामले में उचित काररवाई करने का अनुरोध किया.

अंशु मुरादाबाद की पौश कालोनी मानसरोवर में रहती थी. यह कालोनी मझोला थाने के अंतर्गत आती थी, इसलिए एसएसपी ने अंशु से कहा कि वह थाना मझोला चली जाए, जहां उस की शिकायत पर उचित काररवाई की जाएगी. एसएसपी ने उसी समय मझोला के थानाप्रभारी आर.के. नागर को फोन कर के अंशु के मामले में यथाशीघ्र काररवाई करने के निर्देश दे दिए.

अंशु एसएसपी औफिस से सीधे थाना मझोला पहुंची और थानाप्रभारी आर.के. नागर को विस्तार से सारी बात बता दी. अंशु देखने में खूबसूरत थी, इसलिए थानाप्रभारी  को अंशु की बातों में सच्चाई नजर आ रही थी.

थानाप्रभारी को चूंकि एसएसपी ने जल्द काररवाई करने का आदेश दिया था, इसलिए वह आरोपी राघव शर्मा के प्रकाश नगर स्थित घर पहुंच गए. राघव घर पर ही मिल गया. वह उसे थाने ले आए. उसी समय एसपी (सिटी) आशीष श्रीवास्तव भी मझोला थाना पहुंच गए.

राघव भी एक प्रतिष्ठित परिवार से था. थानाप्रभारी के पूछताछ करने पर उस ने बताया कि अंशु से उस की केवल दोस्ती थी. शादी की बात एकदम झूठी है. थानाप्रभारी ने राघव को वह फोटो दिखाया, जिस में वह अंशु की मांग भर रहा था. फोटो देख कर राघव बोला, ‘‘सर, मैं और अंशु हरिद्वार घूमने गए थे. वहां हर की पौड़ी के पास स्थित मंदिर में शाम को हम गंगा आरती में शामिल हुए. आरती के बाद पुजारी सभी लोगों को तिलक लगा रहा था. वहां अंशु ने पुजारी के बजाय मुझ से तिलक लगवाया था. उसी समय उस ने अपना मोबाइल पुजारी को दे कर फोटो खिंचवा लिए थे.’’

crime

राघव की बात सुन कर थानाप्रभारी आर.के. नागर ने उस फोटो को एक बार फिर गौर से देखा तो वह फोटो मांग में सिंदूर भरने का नहीं, बल्कि टीका लगाने का था.

राघव ने थानाप्रभारी को बताया कि अंशु ने उस पर जो आरोप लगाए हैं, वे सरासर गलत हैं. असलियत में वह बहुत बड़ी ब्लैकमेलर है. लोगों को अपनी खूबसूरती के जाल में फांस कर वह उन से मोटी रकम वसूलती है, यही उस का धंधा है.

राघव ने यह भी बताया कि अंशु के पिता सीआईएसएफ में दरोगा हैं, जिन की वजह से वह किसी से नहीं डरती. राघव के अनुसार, अंशु उस से अब तक करीब 5 लाख रुपए ले चुकी है. फिलहाल वह उस से 50 लाख रुपए की और डिमांड कर रही है. चूंकि उस ने इतनी बड़ी रकम देने से मना कर दिया था, इसलिए वह दबाव बनाने के लिए इस तरह के झूठे आरोप लगा रही है.

राघव ने अंशु को पैसे देने के कुछ सबूत भी दिखाए. राघव की बातों से केस की तसवीर ही बदलती नजर आने लगी. एसपी (सिटी) ने राघव द्वारा बताई गई बातें एसएसपी को बताईं तो उन्हें भी लगा कि अंशु शातिर किस्म की महिला है.

एसपी (सिटी) ने जांच कर के सबूतों के साथ दोषी के खिलाफ काररवाई करने को कहा. इधर एसपी (सिटी) ने राघव को यह कह कर घर भेज दिया कि वह पुलिस को बिना बताए शहर से बाहर न जाए. जांच में उस की कभी भी जरूरत पड़ सकती है.

इस सब से शिकायतकर्ता अंशु ही शक के दायरे में आ गई थी. लेकिन थानाप्रभारी उस के खिलाफ जल्दबाजी में कोई काररवाई नहीं करना चाहते थे. उन्होंने अंशु के बारे में जानकारी जुटानी शुरू कर दी.

शुरुआती तफ्तीश में उन्हें अंशु के बारे में कई महत्त्वपूर्ण जानकारियां मिलीं. पता चला कि उस के संबंध उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही के साथ भी थे. उस के साथ वह 2 बार रंगेहाथों पकड़ी जा चुकी थी. मुरादाबाद के ही पंडित नगला के रहने वाले एक शख्स से भी उस ने 10 लाख रुपए ऐंठने की कोशिश की थी.

अंशु के बारे में पुलिस को एक के बाद एक नई जानकारियां मिल रही थीं. इन बातों से पुलिस को भी यही लग रहा था कि अंशु एक बेहद शातिर महिला है, जो पति से अलग रहती है और पैसे वालों से दोस्ती कर के उन्हें ब्लैकमेल करती है.

उच्चाधिकारियों के आदेश पर पुलिस अंशु को पूछताछ के लिए थाने ले आई. उस ने राघव के खिलाफ जो तहरीर दी थी, उसी के बारे में पूछताछ की गई तो वह यही कहती रही, ‘‘राघव ने मेरा शारीरिक और मानसिक शोषण कर के मुझे धोखा दिया है. अब वह शादी करने की बात से मुकर रहा है.’’

अंशु के बारे में थानाप्रभारी को जो सूचनाएं मिली थीं, उन के बारे में उन्होंने महिला पुलिस की मौजूदगी में सवाल किए तो उस के चेहरे का रंग उड़ गया. अपनी सच्चाई सामने आने पर वह थानाप्रभारी पर हावी होने की कोशिश करने लगी. इतना ही नहीं, उस ने धमकी भी दी कि अगर उन्होंने राघव के खिलाफ काररवाई नहीं की तो वह इस की शिकायत एसएसपी से करेगी.

चूंकि थानाप्रभारी आर.के. नागर को अंशु के बारे में काफी जानकारियां मिल चुकी थीं, इसलिए उन्होंने उसे वह फोटो दिखाते हुए कहा, ‘‘इस फोटो को ध्यान से देखो. इस में राघव तुम्हारे माथे पर टीका लगा रहा है न कि तुम्हारी मांग भर रहा है. राघव का कहना है कि वह तुम्हें 5 लाख रुपए दे चुका है और तुम अब भी उस से मोटी रकम की डिमांड कर रही हो.’’

‘‘यह बात सरासर गलत है. मैं ने उस से कुछ नहीं लिया.’’ अंशु बोली.

‘‘तो फिर जिस स्कूटी पर तुम घूमती हो, वह किस ने खरीदवाई है? उस की किस्तें कौन दे रहा है?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

यह सुन कर अंशु चुप हो गई. एक के बाद एक उस के झूठ की परतें खुलने लगीं. उन्होंने उसी समय उस के सामने अखबार की वह कटिंग रख दी, जिस में एक सिपाही के साथ उस के रंगेहाथों पकड़े जाने की खबर छपी थी. खबर देख कर अंशु ने अपनी नजरें झुका लीं. कुछ देर पहले तक जो अंशु पुलिस पर हावी होने की कोशिश कर रही थी, अब वही भीगी बिल्ली की तरह सहम गई.

‘‘देखिए मैडम, हमें तुम्हारे बारे में एटूजेड जानकारी मिल चुकी है. बेहतर यही होगा कि सारी सच्चाई तुम खुद ही बता दो, वरना सच्चाई उगलवाने के हमारे पास और भी तरीके हैं.’’

अंशु को लगा कि अब उस का झूठ चलने वाला नहीं है. इसलिए उस ने पुलिस को सच्चाई बताना उचित समझा. वह थानाप्रभारी के सामने गिड़गिड़ाते हुए बोली, ‘‘सर, मुझे माफ कर दीजिए. ऐसी गलती अब कभी नहीं करूंगी.’’

इस के बाद उस ने थानाप्रभारी आर.के. नागर को एकएक कर के सारी बातें बता दीं. उस की बातों से उस के जीवन की जो हकीकत निकल कर आई, वह इस प्रकार थी—

रेनू सागर उर्फ अंशु मूलरूप से मुरादाबाद के लाइनपार इलाके में चाऊ की बस्ती में रहती थी. इस के पिता सीआईएसएफ में सबइंसपेक्टर थे, जो इस समय हैदराबाद में तैनात हैं. अंशु ने शहर के ही हिंदू कालेज से बीए पास किया था. उसी के साथ प्रमोद कुमार का एक लड़का पढ़ता था, जो शहर के काजीपुरा मोहल्ले में रहता था. दोनों एक ही जाति के थे, इसलिए उन की आपस में अच्छी दोस्ती हो गई थी.

चूंकि अंशु खूबसूरत थी, इसलिए कालेज में और भी लड़कों से उस की दोस्ती हो गई थी. लेकिन उस की सब से ज्यादा घनिष्ठता प्रमोद के साथ ही थी. धीरेधीरे उन दोनों को एकदूसरे से प्यार हो गया. बीए करने के बाद दोनों ने कालेज छोड़ दिया था, पर फोन पर बातें होती रहती थीं. समयसमय पर वे मिलते भी रहते थे. इतना ही नहीं, उन्होंने शादी करने का फैसला भी कर लिया था.

उसी दौरान प्रमोद की सरकारी नौकरी लग गई. वह सिंचाई विभाग में नलकूप औपरेटर बन गया. अंशु बोल्ड स्वभाव की थी, इसलिए उस ने प्रमोद से शादी करने वाली बात अपनी मां को बता दी थी. बेटी के फैसले पर मां तुरंत मोहर कैसे लगा सकती थी. उन्होंने नौकरी पर तैनात पति से इस बारे में बात की. उन्होंने कह दिया कि जब अंशु अपने पसंद के लड़के से शादी करना चाहती है तो उस लड़के के बारे में जानकारी ले लो. सब कुछ ठीक होगा तो शादी करने में क्या हर्ज है.

अंशु की मां ने अपने जानकारों के माध्यम से प्रमोद के बारे में जानकारियां निकलवाईं तो पता चला कि उस का परिवार बेहद सीधासादा है. उस के पिता जगदीश सरकारी विभाग में ड्राइवर थे. प्रमोद भी सुंदर और हृष्टपुष्ट था. कुल मिला कर प्रमोद उन की बेटी के हिसाब से बहुत अच्छा तो नहीं था, पर ठीक था. बेटी की खुशी को देखते हुए उस के घर वाले राजी हो गए. दोनों परिवारों की रजामंदी के बाद सन 2005 में सामाजिक रीतिरिवाज से अंशु और प्रमोद की शादी हो गई.

चूंकि दोनों की शादी उन की मरजी से हुई थी, इसलिए दोनों बहुत खुश थे. समय का चक्र अपनी गति से घूमता रहा और अंशु 2 बच्चों की मां बन गई. शादी के बाद अंशु घर में कैद हो कर रह गई, जबकि वह आजाद पंछी की तरह रहने वाली महिला थी. घर में कैद हो कर रहना उसे अच्छा नहीं लग  रहा था. दूसरे पति की नौकरी भी उसे मामूली लगने लगी थी. उसे शौपिंग और घूमनेफिरने का शौक था. बच्चे बडे़ हो चुके थे. पति जब ड्यूटी पर चला जाता, तब वह अकेली ही घूमने निकल जाती.

crime

अंशु के पिता के घर से कुछ दूर रंजीत सिंह चौहान नाम का एक सिपाही किराए पर रहता था. उस की पोस्टिंग शहर के ही थाना गलशहीद में थी. वैसे वह मूलरूप से अमरोहा जिला के कस्बा हसनपुर का रहने वाला था. रंजीत के साथ अंशु के अवैध संबंध बन गए. पति के ड्यूटी पर जाने के बाद वह रंजीत के साथ घूमतीफिरती. ससुराल वालों को उस ने बता रखा था कि वह एक प्रौपर्टी डीलर के यहां नौकरी करती है.

अंशु के बातव्यवहार से उस के पति प्रमोद को उस पर शक होने लगा, पर उस की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह अंशु से इस बारे में कुछ पूछ पाता. बहरहाल, अंशु सिपाही रंजीत के साथ खूब मौजमस्ती करती. रंजीत भी 2 बच्चों का पिता था. छुट्टी के दिन भी वह अपने घर नहीं जाता था. पत्नी घर आने को कहती तो वह उस से छुट्टी न मिलने का बहाना बना देता था.

एक बार की बात है. रंजीत ने करवाचौथ के त्यौहार पर गांव जाने के लिए थाने से छुट्टी ली थी, लेकिन वह पत्नी के पास जाने के बजाय मुरादाबाद में अपने कमरे पर ही रहा. क्योंकि उस दिन उसे अपनी प्रेमिका अंशु के साथ रहना था. उधर घर पर रंजीत की पत्नी उस के आने का इंतजार कर रही थी. जब वह करवाचौथ के मौके पर भी घर नहीं पहुंचा तो उस की पत्नी हसनपुर से मुरादाबाद चली आई. उस ने पति का कमरा देखा ही था. वह चाऊ की बस्ती में उस के कमरे पर पहुंच गई.

रंजीत के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. खटखटाने के बाद अधनंगे पति ने दरवाजा खोला तो सामने पत्नी को देख कर उस के होश उड़ गए. वह कमरे में घुसी तो बैड पर अंशु लेटी थी. पति को किसी दूसरी महिला के साथ रंगेहाथ पकड़ने के बाद पत्नी का खून खौल उठा. उस ने वहीं पर दोनों को खरीखोटी सुनानी शुरू कर दी.

शोरशराबा सुन कर पड़ोसी और अन्य लोग आ गए. उसी दौरान किसी ने फोन कर के पुलिस को जानकारी दे दी. पुलिस मौके पर पहुंच गई, पर जब पता चला कि रंजीत भी उत्तर प्रदेश पुलिस में है तो वहां आए पुलिस वालों ने मामला वहीं पर निपटाने की कोशिश की.

लेकिन रंजीत की पत्नी नहीं मानी, वह अंशु के खिलाफ काररवाई कराना चाहती थी. बात बढ़ने पर पुलिस रंजीत और अंशु को थाने ले गई. मामला तत्कालीन एसएसपी लव कुमार के कानों तक पहुंचा तो उन्होंने रंजीत कुमार को तुरंत बर्खास्त कर दिया.

थाने में अंशु के ससुराल वाले भी पहुंच गए थे. अंशु की वजह से उन की काफी बदनामी हो रही थी. अंशु ने पति और ससुराल वालों से अपने किए की मांफी मांग ली. उन्होंने भी पहली गलती मान कर उसे माफ कर दिया. प्रमोद उसे अपने साथ ले गया.

इस घटना के कुछ दिनों बाद तक अंशु और रंजीत ने एकदूसरे से दूरी बनाए रखी. इस से प्रमोद को लगा कि अंशु को वाकई अपनी गलती पर पश्चाताप हुआ है. अंशु एक प्रौपर्टी डीलर के यहां नौकरी करती थी. प्रमोद उसे अपनी बाइक से उस के औफिस के नजदीक छोड़ आता था. इस के बाद अपनी ड्यूटी के लिए निकल जाता था. शाम को अंशु अकेली ही घर लौटती थी.

अंशु और रंजीत चौहान में से किसी का भी मन नहीं लग रहा था. दोनों ही एकदूसरे को अब भी जीजान से चाहते थे. सावधानी बरतते हुए उन्होंने फिर से फोन पर बातचीत करनी शुरू कर दी. बातचीत शुरू हुई तो उन्होंने चोरीछिपे मिलना भी शुरू कर दिया. अंशु ने रंजीत के कमरे पर जाना बंद कर दिया था. वहां के बजाय वे होटल वगैरह में मिल लेते थे. होटल में मिलना दोनों को सुरक्षित लगता था. इस तरह उन का पुराना सिलसिला फिर चल निकला. अंशु पति और ससुराल वालों की आंखों में धूल झोंक कर अपने प्रेमी रंजीत के साथ मौजमस्ती करती थी.

इसी दौरान अंशु ने प्रमोद को बताया कि रामगंगा विहार स्थित एक होटल में बतौर रिसैप्शनिस्ट उस की नौकरी लग गई है. इस के बाद प्रमोद सुबह उसे बाइक से रामगंगा विहार में सोनकपुर स्टेडियम के पास छोड़ने लगा. यह उस का रोज का काम था.

10 नवंबर, 2013 को भी प्रमोद ने ऐसा ही किया. उस दिन पत्नी को बाइक से उतारने के बाद वह वहां से गया नहीं, बल्कि देखने लगा कि आखिर वह जाती कहां है. अंशु कुछ दूर जा कर एक जगह खड़ी हो गई. प्रमोद ओट में छिप कर उस पर नजर रखे हुए था. 3-4 मिनट बाद प्रमोद ने देखा कि अंशु के पास एक मोटरसाइकिल आ कर रुकी. उस पर रंजीत सवार था.

अंशु रंजीत की मोटरसाइकिल पर बैठ गई. यह देख कर प्रमोद को पत्नी पर बहुत गुस्सा आया. वह सोचने लगा कि हमने तो इसे माफ कर दिया था, पर इस ने अपनी आदत नहीं बदली. बहरहाल, वह टाइम ज्यादा सोचने का नहीं था. प्रमोद यह जानना चाहता था कि अब वे दोनों कहां जाएंगे? लिहाजा उस ने भी फटाफट अपनी मोटरसाइकिल स्टार्ट की और काफी दूरी बना कर रंजीत का पीछा करने लगा.

रंजीत और अंशु रामगंगा विहार स्थित रीगल होटल में चले गए. प्रमोद उन के होटल में जाने का मकसद समझ गया. इसलिए वह रामगंगा विहार स्थित पुलिसचौकी पहुंच गया. प्रमोद ने पत्नी के चरित्र की बात चौकीइंचार्ज को बता कर कहा कि इस से पहले भी वह इसी रंजीत के साथ एक बार रंगेहाथ पकड़ी जा चुकी है.

प्रमोद की शिकायत पर रामगंगा विहार पुलिस ने रीगल होटल में छापा मार कर अंशु और रंजीत को रंगेहाथों पकड़ लिया. पुलिस दोनों को पुलिसचौकी ले आई. वहीं पर दोनों के घर वालों को भी बुला लिया गया. बर्खास्त सिपाही रंजीत की पत्नी ने पुलिस चौकी में ही अपने पति को खूब खरीखोटी सुनाई. एक बार उस ने खुद उसे अंशु के साथ रंगेहाथों पकड़ा था, अब दूसरी बार वह उसी के साथ फिर पकड़ा गया था.

बेटी के कुकृत्य की वजह से अंशु के घर वाले भी अपमान सह रहे थे. बहरहाल, पुलिस ने मामला रफादफा कर के दोनों को उन के घर वालों को सौंप दिया. चूंकि अंशु पति की शिकायत पर ही पकड़ी गई थी, इसलिए पति उसे सब से बड़ा दुश्मन नजर आने लगा. ससुराल के बजाय वह मायके चली गई. इस के कुछ दिनों बाद अंशु ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ दहेज एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया, जिस में प्रमोद और उस के मातापिता को जेल जाना पड़ा था.

रंजीत अपनी नौकरी से बर्खास्त तो था ही, वह हसनपुर स्थित अपने घर चला गया. उस की पत्नी का उस से विश्वास उठ चुका था. इसलिए वह उस पर पैनी नजर रखने लगी. उधर 2-2 बार रंगेहाथों पकड़ी जाने के बाद भी अंशु नहीं सुधरी. उस की दाल रंजीत के साथ गलने का मौका नहीं मिला तो उस ने दूसरे लोगों के साथ संबंध बना लिए.

इसी दौरान उस ने मुरादाबाद के ही करुला मोहल्ले के रहने वाले व्यवसाई तैयब अली को अपने रूप जाल में फंसा लिया. बताया जाता है कि अंशु ने तैयब अली को ब्लैकमेल करते हुए 10 लाख रुपए की मांग की, साथ ही पैसे न देने पर रेप के आरोप में फंसाने की धमकी दी. इतना ही नहीं, उस ने यह भी कहा कि वह उसे पूरे इलाके में बदनाम कर देगी.

डर की वजह से तैयब ने 28 मार्च, 2016 को 5 लाख रुपए का एक चैक काट कर उसे दे दिया. वह चैक 30 मार्च को डिशआर्डर हो गया तो बौखलाई अंशु ने वकीलों से सलाहमशविरा कर के तैयब अली के खिलाफ प्लौट दिलाने के नाम पर 5 लाख रुपए हड़पने का केस डाल दिया, जो अदालत में विचाराधीन है.

जब किसी महिला के कदम बाहर निकल जाते हैं तो उस से घर में नहीं बैठा जाता. अंशु का भी यही हाल था. एक तरह से वह घाटघाट का पानी पी चुकी थी. अब वह नएनए शिकार की तलाश में लगी रहती थी. उस ने दिल्ली रोड स्थित मौड्यूलर किचन तैयार करने वाली एक फर्म में नौकरी कर ली. यह फर्म किचन डिजाइनिंग का काम करती थी. सन 2015 में राघव शर्मा से उस की मुलाकात इसी फर्म में हुई थी.

राघव शर्मा मूलरूप से संभल जिले के देहरी गांव का रहने वाला था. वहीं पर उस का राममूर्ति देवी इंटर कालेज है. स्कूल के अलावा राघव मेंथा तेल का व्यवसाय करता था. उस के पिता सतेंद्र शर्मा शिक्षा विभाग में स्टैनोग्राफर हैं, जिन की तैनाती मुरादाबाद जिले में है. राघव का मुरादाबाद के प्रेमनगर में अपना मकान है. वह प्रेमनगर में रह रहा था.

राघव के एक दोस्त का मुरादाबाद में मकान बन रहा था. उसे अच्छे डिजाइन वाली मौड्यूलर किचन बनवानी थी. 27 मार्च, 2016 को राघव अपने दोस्त के साथ दिल्ली रोड स्थित के. इंटरनेशनल नाम के शोरूम पर पहुंचा. अंशु वहीं नौकरी करती थी. अंशु ने राघव और उस के दोस्त को मौड्यूलर किचन वाली एलबम दिखाई, जिस में से उन्होंने एक डिजाइन पसंद कर लिया. मौड्यूलर किचन बनाने का और्डर दे कर दोनों दोस्त वहां से चले गए.

वह शोरूम से बाहर निकले ही थे कि पीछे से अंशु ने आवाज दी, ‘‘एक्सक्यूज मी.’’

राघव ने पीछे मुड़ कर देखा तो वह वही खूबसूरत युवती थी, जिस ने मौड्यूलर किचन की एलबम दिखाई थी. राघव ने मुसकरा कर पूछा, ‘‘जी कहिए मैडम.’’

‘‘सर, मैं यह पूछना चाहती थी कि आप के दोस्त ने तो किचन का और्डर दे दिया, आप नहीं बनवाएंगे क्या?’’ अंशु बोली.

‘‘मैडम, अभी तो मेरी शादी भी नहीं हुई है. मकान बनवा रहा हूं. जैसे ही बन जाएगा, आप को सेवा का मौका जरूर दूंगा.’’ राघव ने कहा.

‘‘ठीक है सर, आप अपना मोबाइल नंबर दे दीजिए, मैं आप से इस बारे में बात करती रहूंगी.’’

खूबसूरत युवती को फोन नंबर देने पर राघव ने कोई ऐतराज नहीं किया और खुशीखुशी उसे अपना मोबाइल नंबर दे कर निकल गया. घर पहुंचने के बाद खूबसूरत अंशु का चेहरा और मधुर बातें राघव के जेहन में घूमती रहीं.

करीब 15 दिनों बाद राघव के मोबाइल पर अंशु का फोन आया, ‘‘सर, क्या आप मुझे भूल गए.’’

अंशु की आवाज सुनते ही उस का मुसकराता हुआ खूबसूरत चेहरा राघव के जेहन में घूम गया. वह बोला, ‘‘नहीं मैडम, आप को भला कोई कैसे भूल सकता है. थोड़ा बिजनैस में बिजी हो गया था, इसलिए बात करने का ध्यान नहीं रहा.’’

‘‘सर, मैं यह कह रही थी कि आप किचन  बनवाएं या न बनवाएं, पर फोन पर तो बात कर ही सकते हैं.’’ वह बोली.

इस के बाद उन दोनों के बीच काफी देर तक बात हुईं. फिर तो आए दिन बातों का सिलसिला शुरू हो गया. धीरेधीरे दोनों अनौपचारिक होते गए. इसी दौरान अंशु ने राघव को बताया, ‘‘मेरे साथ घटी एक घटना की वजह से मैं टूट चुकी हूं. दरअसल, मैं एक लड़के से प्यार करती थी, फिर हमारी बात शादी तक जा पहुंची. वह शादी करने का वादा करता रहा. पर मुझे दुख उस दिन हुआ, जब उस लड़के ने किसी दूसरी लड़की से शादी कर ली. इस का मुझे गहरा आघात पहुंचा, पर आप से बात करने के बाद मुझे बड़ा सहारा मिला है.’’

राघव अंशु और उस की बातों में दिलचस्पी लेने लगा था. 31 मार्च को राघव और अंशु रामगंगा विहार स्थित वेव मौल घूमने गए. वहां पहले दोनों ने फिल्म देखी, वहीं रेस्टोरेंट में खाना वगैरह खाने के बाद राघव ने उसे हजारों रुपए की शौपिंग भी कराई. इस के बाद अंशु ने राघव को पूरी तरह से अपने जाल में फांस लिया.

एक दिन अंशु ने उस से कहा, ‘‘देखो राघव, मेरे पापा तो नौकरी की वजह से बाहर रहते हैं. घर पर मैं और मां भाई के साथ रहती हूं. अगर किसी जानकार ने हम दोनों को साथ देख लिया तो मेरे घर वालों के अलावा तुम्हारी भी बदनामी होगी. ऐसा करो, मुझे कहीं किराए पर एक कमरा दिलवा दो, जहां हम दोनों मिल लिया करेंगे.’’

अंशु की यह सलाह राघव को अच्छी लगी. उस ने लाइन पार क्षेत्र के सूर्यनगर में जीत सिंह का मकान किराए पर ले लिया. राघव अब अकसर अंशु के पास कमरे पर ही रहता. उन दोनों की गतिविधियों पर मोहल्ले वालों को शक हुआ तो उन के विरोध के कारण उन्होंने वह मकान खाली कर दिया. इस की जगह राघव ने पौश कालोनी मानसरोवर में अपने दोस्त नितिन का मकान किराए पर ले लिया.

राघव अंशु का पूरा खर्च उठाता था. उस ने उस के लिए इनवर्टर तक लगवा दिया था. अंशु राघव पर कोर्टमैरिज के लिए दबाव डाल रही थी, पर राघव उस की बात टाल जाता था. इसी बीच अंशु की इच्छा पर राघव ने उसे स्कूटी खरीद कर दी. उस की किस्तें वह खुद जमा कर रहा था. शादी की बात को ले कर उन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा था. राघव उस पर करीब 5 लाख रुपए खर्च कर चुका था.

अंशु के कहने पर 4 जनवरी, 2017 को राघव उसे ले कर हरिद्वार पहुंचा. दोनों एक होटल में ठहरे, हरिद्वार में हर की पौड़ी पर शाम को रोजाना गंगा आरती का आयोजन होता है. अंशु और राघव भी उस आरती में शामिल हुए.

यहीं पर अंशु एक खतरनाक साजिश रचने जा रही थी, जिस का राघव को आभास तक नहीं हुआ. आरती के बाद पुजारी सभी को टीका लगा रहा था. जैसे ही अंशु का नंबर आया, उस ने पुजारी से कहा, ‘‘पंडितजी, मेरा टीका यह लगा देंगे. आप मेरे मोबाइल से हम दोनों का फोटो खींच दीजिए.’’

पुजारी ने फोटो खींचने के लिए अंशु का मोबाइल ले लिया. अंशु ने राघव से कहा, ‘‘तुम मेरा टीका मांग के पास लगाना.’’

टीका लगाते हुए अंशु ने फोटो खिंचवा लिए. यही नहीं, राघव का हाथ अपनी मांग के पास रख कर भी अंशु ने फोटो खिंचाए.

राघव अंशु की साजिश से अभी अनजान था. मुरादाबाद पहुंचने पर अंशु ने राघव पर शादी करने के लिए फिर दबाव बनाया, पर राघव टाल गया. राघव का कहना है कि एक दिन अंशु ने उस से 50 लाख रुपए मांगे. इतनी बड़ी रकम देने से जब उस ने इनकार कर दिया तो उस ने रेप के आरोप में फंसाने की धमकी दी. इस धमकी के बाद राघव को अंशु के असली रूप का पता चल गया.

जब राघव ने पैसे नहीं दिए तो अंशु ने अपने परिचित वकीलों से बात की. इस के बाद उस ने एसएसपी से मिल कर राघव पर रेप आदि के आरोप लगाए और उस के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने की मांग की.

अंशु उर्फ रेनू सागर से पूछताछ कर के थानाप्रभारी आर.के. नागर ने उस के खिलाफ भादंवि की धारा 420/384 और 406 के अंतर्गत केस दर्ज कर उसे 3 जुलाई, 2017 को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे मुरादाबाद के जिला कारागार में भेज दिया गया. अंशु की 5 साल की बेटी अपने पिता प्रमोद के साथ रह रही है और 11 साल का बेटा, जो उसी के साथ रह रहा था, उस की मां के पास है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

तो कंगना रानौट ने दिखा दिया अपना असली रंग

अब फिल्म ‘‘मणिकर्णिका’’ में निर्देशक के तौर पर कृष के साथ कंगना रानौट का भी नाम. ज्ञातब्य है कि अगस्त 2018 में जब फिल्म के निर्देशक कृष अपनी एक तेलगू फिल्म के निर्देशन मे व्यस्त हो गए,तो कंगना रानौट ने उस अवसर का फायदा उठाते हुए कुछ दृष्यों को ‘री शूट’/दोबारा फिल्माने की इच्छा जाहिर की. और सोनू सूद सहित कुछ कलाकारों को भी बदलते हुए कुछ दृश्य मुंबई में खुद ही अपने निर्देशन में फिल्माए.

इनमें से ज्यादातर एक्शन दृश्य थे, जिन्हे एक्शन निर्देशक ने निर्देशित किए थे. ज्ञातव्य है कि कंगना के हर कृत्य व हर कदम को लेखक प्रसून जोशी सहित कई दूसरे लोग खुलकर समर्थन देते आ रहे. बहरहाल, उस वक्त क्लैप बोर्ड पर निर्देशक के तौर पर कंगना रानौट का नाम था. तब कंगना ने सफाई देते हुए कहा था-‘‘फिल्म के निर्देशक कृष हैं और कृष ही रहेंगे. पर एडीटिंग टेबल पर एडीटर को नए व पुराने दृश्यों को लेकर कोई संशय न हो, इसलिए क्लैप बोर्ड पर मेरा नाम है, जिससे एडिटर को समझ में आएगा कि यह नए सीन हैं, जिन्हे फिल्म में रखना है.

मगर अब मुंबई के एक अंग्रेजी दैनिक से बात करते हुए फिल्म के निर्माता कमल जैन ने स्वीकार किया है कि फिल्म ‘‘मणिकर्णिका’’ की क्रेडिट में निर्देशक के तौर पर कृष व कंगना रानौट दोनों का नाम दिया जाएगा. कमल जैन ने कहा है-‘‘अंततः अब फिल्म वही रूप ले रही है, जैसा कि हमने सोचा था. कंगना परफैकनिस्ट है और हर विभाग पर वही निगाह रख रही हैं. हम उनके काम से खुश हैं और यदि वह फिल्म में कहीं क्रेडिट चाहती हैं, तो उसे देने में हमें कोई समस्या नहीं है. क्योंकि यदि हमने उन्हे क्रेडिट नहीं दिया, तो यह उनके साथ अन्याय होगा.’’

जब कमल जैन से पूछा गया कि क्या इस निर्णय से कृष वाकिफ है, तो उन्होंने कहा-मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहता. पर हम टीम के रूप में काम रहे हैं.तो वह टीम के निर्णय से सहमत होंगे.’’ सूत्र बताते हैं कि फिल्म ‘‘मणिकर्णिका’’ के लिए कंगना रानौट ने 45 दिन शूटिंग की. बतौर निर्देशक कुछ दृश्यों को पुनः फिल्माया. अमरीका से लौटने के बाद वह वीएफएक्स और एडीटिंग टेबल पर भी एडीटर रोमश्वर भगत के साथ बैठकर फिल्म को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही हैं. फिल्म के संगीत व फिल्म के फाइनल कट पर वही निर्णय ले रही हैं.

हाथ में बीड़ी लिए पूनम पांडे ने करवाया हौट फोटोशूट

अपनी बोल्ड और हौट अदाओं के लिए जाने वाली पूनम पांडे एक बार फिर अपने फैंस के दिल धड़काने के लिए तैयार हैं.पूनम पांडे को अच्छे से पता है कि उनके फैंस को उनका कौन सा अंदाज पसंद आएगा. पूनम में हाल ही में बेहद हौट फोटोशूट करवाया है जिसमें वो देसी अवतार में नजर आ रही हैं. इस फोटोशूट में पूनम लहंगा चोली पहने नजर आ रही हैं. लाल रंग के लहंगे के साथ पूनम ने नीले रंग का दुप्पटा लिए नजर आ रही हैं.

पूनम ने कहा था कि वो भी फिल्म के सेट पर गलत तरीके से छूने का शिकार हुईं थी इसलिए वो फिल्म के ट्रेलर लौन्च पर नहीं गई थी. वो उस एक्टर के साथ दोबारा कभी काम नहीं करना चाहती. अवतार के सात हाथों में बीड़ी लिए पूनम पांडे बेहद हौट पोज देती नजर आ रही हैं. फेस्टिव सीजन से पहले पूनम का ये देसी अवतार उनके फैंस के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है.

हाल ही में पूनम की फिल्म ‘जर्नी औफ कर्मा’ रिलीज हुई थी . फिल्म में पूनम पांडे एक्टर शक्ति कपूर के साथ स्क्रीन शेयर करते हुए नजर आईं थी. हालांकि, फिल्म बौक्स औफिस पर तो कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई. लेकिन फिल्म में पूनम के हौट और बोल्ड अवतार की खूब चर्चा हुई थी.

इतना ही नहीं फिल्म प्रमोशन्स के दौरान पूनम ने मीटू मुहिम पर बात करते हुए इशारों-इशारों में पूनम शक्ति कपूर पर गलत तरीके से छूने का इल्जाम लगाया था. हालांकि साफतौर पर पूनम ने किसी का नाम नहीं लिया था.

 

इश्तिहारों में पगलाया विकास

आजकल तो जनता गद्दार हो गई है. विकास को छिपा कर कहती है कि विकास मिला ही नहीं है. अब बेचारी सरकारें भी क्या करें? विकास जनता को मिला है, यह साबित करने के लिए कोशिश तो करेंगी ही, इसलिए सरकारें जश्न मना कर दिखा रही हैं कि देखो, हमारे यहां विकास पैदा हुआ है. बाकायदा  अखबारों व टैलीविजन में इश्तिहार दे कर सरकारें विकास को स्वीकार कराने के लिए जूझती नजर आ रही हैं.

अभी पिछले दिनों राजस्थान की वसुंधरा सरकार का अखबारों में पूरे 2 पन्ने का इश्तिहार छपा था, उस में 5 साल में किए गए कामों का ब्योरा दिया गया था. सब से मजेदार बात यह लिखी हुई थी कि 2.8 लाख नौजवानों को ‘कौशल विकास’ की ट्रेनिंग दी जा चुकी है और 13 लाख नौजवानों को रोजगार के मौके मुहैया करा दिए गए हैं.

अखबार देख कर बेरोजगार नौजवान आपस में फोन कर के पता करते दिखे कि नौकरी मिली किस को है, जबकि सरकारी आंकड़ा कहता है कि अभी तक महज 35,000 लोगों को ही नौकरी मिली है. किसानों को बांटी गई राहत के आंकड़े देख कर तो लगा कि जो किसान गड्ढों में बैठ कर सरकार की खिलाफत कर रहे हैं, सड़कों पर रैलियां निकाल रहे हैं, जगहजगह धरनेप्रदर्शन कर रहे हैं, वे तो सरकार के गद्दार हैं. जब सरकार ने किसानों को दिल खोल कर दिया है तो वे नाटक क्यों कर रहे हैं?

सब से ज्यादा आंकड़ों के जरीए विकास राजस्थान की सड़कों का हुआ है. जो सड़कें थीं वे तो टूट कर बिखर गई हैं. लोग गड्ढों में सड़क ढूंढ़ते नजर आते हैं, लेकिन सरकार ने 5 साल में उतनी सड़कें बना डाली हैं जितनी

60 साल में बनी थीं. नहीं दिखें तो इस में सरकार की गलती थोड़े ही है. सरकार ने तो जैसी आप ने चुनी वैसी सड़कें बना दीं. 73,000 किलोमीटर सड़कें बनी हैं. अब आप ढूंढि़ए ये सड़कें कहां बनी हैं.

सभी मरीजों के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में औपरेशन हो रहे हैं. आप निजी अस्पताल में लुट रहे हो तो इस में आप की गलती है, सरकार तो पूरा इंतजाम किए हुए बैठी है. नागौर के कुचामन वाली काकी इश्तिहार के जरीए कहती हैं, ‘‘सरकार ने काया रो कष्ट मेट दियो.’’

अब आप सब को काया का कष्ट नहीं मिटाना तो इस में सरकार क्या कर सकती है?

शहरी गरीबों को सस्ता व पौष्टिक खाना दिया जा रहा है. ये जो रैनबसेरों को सूखे हाड़मांस वाले लोग टौयलेट व कंबल का रोना रो रहे हैं, वे हैं ही बेवकूफ. जा कर पौष्टिक खाना खा लें तो ठंड भी कम लगेगी व शरीर में गरमी आ जाएगी तो बारबार ठंड में पेशाब भी नहीं आएगा. सरकार ने इंतजाम किया है लेकिन ये लोग सरकार को बदनाम करने के लिए नाटक कर रहे हैं.

सरकार ने पढ़ाईलिखाई के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव किए हैं. 450 से ज्यादा स्कूलों को तो वर्ल्ड क्लास स्कूल बना कर उन्हें आदर्श रूप प्रदान किया है.

पीपीपी मोड पर स्कूल देने का आरोप लगाने वाले लोग सरकार के खिलाफ साजिशें रच रहे हैं. सब से ज्यादा पीपीपी मोड पर 27 स्कूल नागौर से देने की खबर देखी तो वहां एक शिक्षक मित्र से बात की तो वे धीरे से बोले कि प्राइमरी स्कूल में अकेला ही हूं मैं. किसी को बताना मत, नहीं तो मुझे भी वह वाला प्रमाणपत्र मिल जाएगा.

सब को पेज थ्री पर आने के लिए बच्चों को निजी स्कूलों में ठेलना है तो ठेलने दीजिए, सरकार ने बेहतर इंतजाम किए हैं. अब विपक्ष को पता है कि अगला नंबर हमारा ही है व हमें भी इसी तरह के क्रांतिकारी बदलाव लाने हैं इसलिए चुपचाप बैठ कर अभी से ही मंत्री पद बांट लिए हैं व मुख्यमंत्री पद तय करने में लगे हुए हैं. अपनी जीत तय मान कर शादियों व दूसरे समारोहों में स्वादिष्ठ खानों का लुत्फ उठा रहे हैं.

अब जनता के पास रास्ता क्या है? राजा कोई भी हो, जनता को तो लुटना ही है. दिल्ली की गद्दी पृथ्वीराज चौहान के पास हो या अकबर के पास, गोरे अंगरेजों के पास हो या काले अंगरेजों के पास, क्या फर्क पड़ता है.

देखते रहिए विकास को नएनए तेवरों व नएनए रूपों में और खुश हो कर ताली बजाते रहिए. विकास ऐसा ही होता है. आप मान लीजिए. अगर नहीं मानोगे तो टैलीविजन व अखबारों में और ज्यादा इश्तिहार देंगे और आप ही के पैसे बरबाद होंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने 4 साल में विकास बताने के लिए 11,000 करोड़ रुपए फूंक दिए हैं. राजस्थान सरकार भी आप को विकास स्वीकार कराने के लिए और पैसे फूंकेगी. अब तो राजस्थान की जनता अपनी तरफ से चौकचौराहों पर बड़ेबड़े होर्डिंग लगा कर कह दे कि वह विकास को दिल से स्वीकार करती है.

बढ़ते बसपा के भाव 

1 अक्तूबर, 2018 के दिन इलाहाबाद हाईकोर्ट का एक अहम फैसला आया था जिस में मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने वह याचिका खारिज कर दी थी जिस में 1,400 करोड़ रुपए के स्मारक घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई थी. शशिकांत पांडेय की याचिका कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज की थी कि यह किसी निजी हित में दाखिल की गई है.

गौरतलब है कि बसपा प्रमुख मायावती के कार्यकाल में हुए इस भीमकाय घोटाले में शशिकांत का भाई संतोष पांडेय भी शामिल है.

मायावती इस घोटाले में भले ही आरोपी न हों लेकिन वे भी जांच के दायरे में आ सकती थीं, बशर्ते योगी आदित्यनाथ की अगुआई वाली भाजपा सरकार कोर्ट को यह भरोसा न दिलाती कि इस घोटाले की जांच सीबीआई या किसी दूसरी एजेंसी से कराने की कोई जरूरत नहीं, क्योंकि स्मारक घोटाले की विजिलैंस जांच तेजी से चल रही है और जल्द ही इसे पूरा भी कर लिया जाएगा.

गौरतलब यह भी है कि मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती ने लखनऊ और नोएडा में कई स्मारक और पार्क बनवाए थे जिन पर उन की सरकार ने तकरीबन 41 अरब, 48 करोड़ रुपए खर्च किए थे. तब मायावती सरकार पर घपलेघोटाले का आरोप लगा था. सरकार बदलने के बाद इस मामले की जांच तब के लोकायुक्त एनके मल्होत्रा को सौंपी गई थी.

लोकायुक्त ने 20 मई, 2013 को अपनी रिपोर्ट में कहा था कि हां, 14 अरब, 10 करोड़, 83 लाख, 43 हजार रुपए का घोटाला हुआ है. इस रिपोर्ट में कुल 199 लोगों को आरोपी बनाया गया था और जांच की मांग सीबीआई या एसआईटी से कराने की सिफारिश की गई थी.

अखिलेश यादव की सरकार ने भी लोकायुक्त की सिफारिशों को दराज में रखते हुए इस मामले की जांच राज्य के विजिलैंस विभाग को सौंप दी थी. विजिलैंस विभाग ने 1 जनवरी, 2014 को लखनऊ के गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज की थी और मामला दर्ज होने के पौने 5 साल बाद भी न तो इस में चार्जशीट दाखिल हुई और न ही विजिलैंस विभाग जांच पूरी कर पाया.

घोटाले का एमपी कनैक्शन फिर भाजपा सत्ता में आई और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो पुराने मामले खंगाले जाने लगे, इस के पहले साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा जिस ऐतिहासिक दुर्गति का शिकार हुई वह किसी सुबूत की मुहताज नहीं. दुर्गति का यह सिलसिला विधानसभा चुनाव में भी दिखा तो जानकारों ने मान लिया कि बसपा गुजरे कल का नाम है जिस का परंपरागत दलित वोट उस के हाथ से छिटक चुका है और मायावती दलित समुदाय का भरोसा खो चुकी हैं.

पर उत्तर प्रदेश के फूलपुर, गोरखपुर और कैराना लोकसभा उपचुनाव में भाजपा हारी तो बसपा में फिर जान आती दिखी. सपा और कांग्रेस के साथ उस के महागठबंधन की जम कर चर्चा हुई और यह भी साबित हो गया कि भाजपा को बेदखल करना है तो पूरे विपक्ष को एकजुट होना पड़ेगा.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मायावती में फिर जोश दिखा और वे विपक्षी एकता की अहम धुरी बन गईं. इस संभावित महागठबंधन से भाजपा का बौखलाना और चिंतित होना स्वाभाविक बात थी क्योंकि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में बसपाकांग्रेस गठबंधन की चर्चा कुछ ऐसे हो रही थी मानो आजकल में यह हो ही जाएगा.

राजनीतिक माहिरों ने तो बाकायदा नतीजे भी घोषित करना शुरू कर दिए थे कि अगर बसपाकांग्रेस का गठबंधन हुआ तो उसे सत्ता में आने से कोई नहीं रोक सकता.

वजह, बसपा का मध्य प्रदेश के विंध्य और चंबल इलाकों की तकरीबन 60 सीटों पर गहरा असर है और भाजपा विरोधी वोट कांग्रेस और बसपा में बंटने से भाजपा को 40 सीटों पर फायदा होता है.

साल 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा 4 सीटों पर जीती थी और 10 पर दूसरे नंबर पर रही थी. इस के अलावा वह 30 सीटों पर अच्छेखासे वोट ले गई थी. अब अगर गठबंधन हुआ तो भाजपा को 230 सीटों में से 100 सीटों पर भी जीत पाना मुश्किल हो जाएगा.

राजनीति के इन गणितीय सूत्रों से परे देश और समाज के हालात तेजी से बदले हैं. सुप्रीम कोर्ट के एट्रोसिटी ऐक्ट पर आए फैसले से दलित गुस्सा हो उठे हैं.

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बिना जांच किए सवर्णों की गिरफ्तारी के प्रावधान को रद्द कर दिया था. इस फैसले के विरोध में दलितों ने 2 अप्रैल, 2018 को बंद का ऐलान किया था जिस का सब से ज्यादा असर भी मध्य प्रदेश में देखने को मिला था. 2 अप्रैल की हिंसा में दर्जनभर दलित और गैरदलित मारे गए थे.

इस दलित चेतना से हर कोई हैरान था. दलितों ने बगैर किसी लागलपेट के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिम्मेदार केंद्र सरकार को मानते हुए उसे न केवल मनुवादी करार दिया था बल्कि यह भी याद दिलाया था कि साल 2014 में भाजपा दलित वोटों की सीढि़यों पर चढ़ कर सत्ता की छत तक पहुंची थी. बात सच भी थी और दलित हिंसा के फिर भड़कने का डर था इसलिए केंद्र सरकार ने संसद में पुराने कानून को पास कर दिया.

इस पूरे घटनाक्रम में मायावती कहीं नहीं थीं. इस आंदोलन या बंद में आम दलितों ने अपने हक की लड़ाई खुद लड़ी थी लेकिन मायावती दलितों की जीत का क्रेडिट खुद को देती रहीं जिस पर दलितों ने कोई तवज्जुह नहीं दी क्योंकि हकीकत वे जानते थे.

संसद में सरकार के घुटने टेकने के बाद भड़कने की बारी सवर्णों की थी जो भाजपा को अपनी पार्टी समझते रहे थे. जल्द ही सवर्ण भी सड़कों पर आ गए और एट्रोसिटी ऐक्ट के विरोध में बंद का ऐलान करने लगे. उन का बंद भी कामयाब रहा लेकिन सरकार अब दलितों और सवर्णों के बीच फंस चुकी थी. इसी बिगड़ते सामाजिक माहौल में हर किसी ने याद दिलाया कि एट्रोसिटी ऐक्ट में गिरफ्तारी के प्रावधान में सब से पहली ढील दलितों की मसीहा कही जाने वाली मायावती ने ही अपने मुख्यमंत्री रहते दी थी तो दलितों का उन से बचाखुचा मोह भी भंग हो गया.

जब गठबंधन की बात चली तो मायावती फिर मुख्यधारा में आती दिखाई दीं क्योंकि दलित तबके को एक मजबूत राजनीतिक सहारे और सरपरस्ती की जरूरत महसूस होने लगी थी जो उसे इस गठबंधन में दिख रहा था. लेकिन न जाने क्यों भाजपा बेफिक्र थी और उस के दिग्गज नेता नरेंद्र मोदी, अमित शाह और शिवराज सिंह चौहान हर समय कहते भी रहे थे कि यह गठबंधन नहीं होगा. भाजपा से नाराज सवर्ण समाज जातिगत आरक्षण को भी खत्म करने की मांग बड़े पैमाने पर करने लगा था.

भाजपा नेताओं की भविष्यवाणी सही निकली. छत्तीसगढ़ में मायावती ने कांग्रेस से निकाले गए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत योगी की जनता कांग्रेस से गठबंधन किया तो मध्य प्रदेश और राजस्थान में बसपाकांग्रेस के गठबंधन पर विराम लग गया और यह साफ हो गया कि दोनों पार्टियां अपनी रोटियां अलगअलग सेंकेंगी जिस का फायदा पहले के चुनावों की तरह भाजपा को मिलेगा.

लेकिन यह किसी को समझ नहीं आ रहा था कि गठबंधन की राह पर निकल पड़ी मायावती हिचक क्यों रही हैं? इस सवाल का एक जवाब इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के वक्त मिला कि क्यों योगी सरकार ने स्मारक घोटाले की सीबीआई जांच की मांग अदालत में नहीं उठाई थी? सौदेबाजी में माहिर मायावती ने कोई डील अगर भाजपा से की है तो तय है कि वह दलितों के हितों को ताक पर रख कर की है जिसे जागरूक होता दलित समाज भी समझ रहा है और खुद मायावती को भी समझ आ रहा है कि मध्य प्रदेश में बसपा का प्रदर्शन चुनाव दर चुनाव गिर रहा है.

दिग्गज कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने मायावती की इसी दुखती रग पर हाथ यह कहते हुए रखा कि वे सीबीआई जांच से डर रही हैं तो मायावती शेरनी की तरह बिफर पड़ीं और कांग्रेस पर ही आरोप लगाने लगीं कि वह बसपा को खत्म करना चाह रही है और भाजपा का साथ दे रही?है. बसपा अपने उसूलों और गैरत से कोई समझौता न करते हुए अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ेगी.

मायावती के इन तेवरों से भाजपा और सवर्ण खुश हैं कि कांग्रेस की सत्ता वापसी का टं्रप कार्ड जाया हो गया लेकिन दलित तबका फिर गफलत में है कि अब क्या किया जाए, अगर भाजपा फिर से सत्ता में आई तो सवर्ण उस की मिट्टी पलीद कर देंगे.

कभी मायावती और बसपा के संस्थापक कांशीराम के बेहद नजदीकी रहे बहुजन संघर्ष दल के मुखिया फूल सिंह बरैया कहते हैं, ‘‘असल गलतफहमी और गरूर तो मायावती को है कि दलित वोटर अब भी उन के साथ हैं. मध्य प्रदेश में बसपा के पास अब जमीनी नेता तो दूर की बात है, प्रतिबद्ध कार्यकर्ता भी नहीं बचे हैं.’’

फूल सिंह बरैया यह भी कहते हैं कि मायावती तो कब की मनुवादियों के हाथ की कठपुतली बन चुकी हैं इसीलिए उत्तर प्रदेश में उन का सूपड़ा साफ हो चुका है. अब तो वे नाम की खा रही हैं और दलित हितों से खिलवाड़ कर रही हैं.

बकौल फूल सिंह बरैया, ‘‘दलित समाज बेचैन है. ऐसे में हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर बसपा के वोट घट कर 2 फीसदी रह जाएं. छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी अपने दम पर कुछ सीटें ले भी जाते, लेकिन मायावती का दामन थाम कर उन्होंने खुद अपनी संभावनाओं को खत्म कर लिया है. आज जिन दिग्विजय सिंह पर मायावती बरस रही हैं उन्हीं दिग्विजय सिंह के साथ उन्होंने साल 2003 में सौदा किया था जिस ने बसपा और कांग्रेस दोनों को मिटा दिया था. कोई वजह नहीं कि दलित समाज मायावती पर दोबारा भरोसा करेगा.

वह समझ रहा है कि अब बसपा अपने सिद्धांतों को झटक चुकी है जिस से मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में दलित खुद को महफूज नहीं समझ रहे हैं.’’

इधर कांग्रेस तेल देखो और तेल की धार देखो की तर्ज पर सब्र और समझ से काम लेते हुए अभी भी गठबंधन की उम्मीद जता रही है तो उस का मकसद दलित वोटरों को यह मैसेज देना है कि वह तो भाजपा को हराने के लिए कमर कस कर तैयार है, लेकिन मायावती ही गठबंधन नहीं कर रहीं तो दलित समाज खुद ही तय कर ले कि उस का भला कौन कर सकता?है. वह बसपा जो पूरा दम लगाने के बाद भी साल 2013 में 4 से ज्यादा सीटें नहीं जीत पाई थी या फिर कांग्रेस जो तीनों राज्यों में सब से बड़ी पार्टी है.

सवर्णों ने सपाक्स नाम की पार्टी बना ली है जो भाजपा का वोट बैंक था. अब अगर दलित वोट भी बंटा तो उत्तर प्रदेश में बैठी मायावती का तो कुछ नहीं बिगड़ना, घाटे में रहेंगे तो दलित जिन की हिफाजत बसपा नहीं कर सकती. मायावती तो खुद की हिफाजत में लगी हैं और साल 2019 में भगवा खेमे से उपप्रधानमंत्री बन जाने का सपना पाले बैठी हैं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें