एक बार फिर करीना कपूर खान बनीं दुल्हन

बौलीवुड आदाकारा करीना कपूर खान हमेशा अपने ग्लैमरस लुक को लेकर सुर्खियों में छायी रहती हैं. हाल ही में करीना का ब्राइडल लुक सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इन फोटोज़ में वह रेड कलर के लहंगे में नजर आईं.

 

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दरअसल, करीना का यह लुक ऐड शूट के लिए है, जिसमें उनके साथ टीवी एक्टर गुरमीत चौधरी भी नजर आ रहे हैं.

 

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लहंगे के साथ गोल्ड ज्वैलरी, चोकर नेकलेस, स्टेटमेंट ईयरिंग्स करीना के लुक को कंप्लीट कर रहे हैं. उनके इस ग्लैमरस लुक को काफी पसंद किया जा रहा है.

 

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अगर फिल्म की बात करें तो करें तो जल्द ही करीना अक्षय कुमार के साथ  ‘गुड न्यूज’ में नजर आएंगी. इसके अलावा मल्टीस्टारर मूवी ‘तख्त’ में भी नजर आने वाली है.

इंसाफ में देर है पर अंधेर नहीं

ऐसा लग रहा है यह कोई अपराध नहीं, बल्कि फिल्मी कहानी है. अगर कोई निर्माता इस पर फिल्म बनाने का निर्णय ले ले तो हैरानी भी नहीं होनी चाहिए. घटना की शुरुआत या अंत कुछ भी कह लें, जबलपुर के थाना कैंट के बिलहरी मोहल्ले से हुई, जो मंडला रोड पर स्थित है. यहां अनुसूचित जाति के लोग ज्यादा रहते हैं. ज्यादा नहीं, अब से कुछ साल पहले तक बिलहरी एक गांव हुआ करता था. लेकिन धीरेधीरे यहां लोग बसने लगे तो यह जबलपुर के कैंट इलाके का प्रमुख मोहल्ला इस लिहाज से हो गया, क्योंकि यहां आसपास के गांव वालों के अलावा दूसरे शहरों और राज्यों के भी लोग आ कर बसने लगे थे.

कुछ लोगों को छोड़ दें तो बिलहरी में रह रहे ज्यादातर लोग मेहनतमजदूरी कर रोज कमानेखाने वाले हैं और कच्चे मकानों या झुग्गियों में रहते हैं. रोजाना कई लोग आ कर इस इलाके में बसते हैं और फिर धीरेधीरे यहीं के हो कर जबलपुरिया कहलाने लगते हैं.

रोजगार की तलाश में ऐसा ही एक जोड़ा अप्रैल, 2015 में जबलपुर आया तो बिलहरी में किराए का मकान ले कर रहने लगा. पति का नाम मयूर मलिक था और पत्नी का रिंकी शर्मा. रहने का ठिकाना मिल गया तो मयूर इधरउधर काम करने लगा. कुछ दिनों बाद उसे एक दुकान में नौकरी मिल गई. जल्दी ही उन के यहां एक बेटा भी हो गया.

रिंकी हालांकि हंसमुख और मिलनसार स्वभाग की थी, लेकिन अड़ोसपड़ोस में उस का कम ही उठनाबैठना था. रोज होने वाली बातचीत में उस ने पड़ोसियों से अपने बारे में बताया था कि वह और मयूर बिहार के जिला मुजफ्फरपुर के एक गांव के रहने वाले हैं.

शादी के बाद रोजगार की तलाश में दोनों जबलपुर आ गए हैं. आमतौर पर वहां रहने वालों में बाहर से आए परिवारों की औरतें भी घरगृहस्थी चलाने के लिए मजदूरी या घरों में झाड़ूपोंछा, बरतन आदि का काम करती थीं, पर रिंकी ने ऐसा कुछ नहीं किया तो इस की एक खास वजह थी.

उस खास वजह का पता 9 मई, 2017 को तब पता चला, जब थाना कैंट के थानाप्रभारी मनजीत सिंह दलबल के साथ उस के घर पहुंचे. पुलिस को देख कर स्वाभाविक रूप से हलचल मचनी ही थी. मोहल्ले वाले सवालिया नजरों से एकदूसरे को देखने लगे कि आखिर हुआ क्या है? रिंकी और मयूर मलिक तो किसी झगड़ेफसाद में भी नहीं पड़ते थे.

किसी को अंदाजा नहीं था कि सीधेसादे दिखने और लगने वाले रिंकी और मयूर एक हैरतंगेज फसाद खड़ा कर यहां रह रहे थे, जिस की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. इसलिए जिस ने भी सुना, आंखें फाड़े हैरानी से यही कहा कि ‘हे भगवान! इतना बड़ा धोखा और जुर्म. कैसे लोग हैं ये?’

रिंकी और मयूर को थाना कैंट लाया गया. उन के गुनाह से परदा उठ चुका था. उन का गुनाह ऐसा था, जिस के बारे में मनजीत सिंह तो दूर, आला अफसरों ने भी नहीं सोचा था कि ऐसा भी होता है. सचमुच उन दोनों ने जो किया था, हैरान करने वाला था.

थाने में सिर झुकाए बैठी बेबस और थकीहारी रिंकी ने जो कहानी बताई, वह वाकई रहस्य और रोमांच से भरपूर थी, जिसे सुन कर हर किसी को उस आदमी पर तरस आया था, जिस का नाम मनोज शर्मा था. रिंकी की शादी बिहार के जिला मुजफ्फरपुर के गांव सरैया के रहने वाले मनोज शर्मा से फरवरी, 2015 में हुई थी. सरैया गांव थाना गुरका में आता है.

ससुराल में कुछ दिनों तक रहने के बाद एक दिन रहस्यमय तरीके से रिंकी गायब हो गई. उस की गुमशुदगी की खबर जब उस के पिता चंद्रशेखर शर्मा और मां बबीता को लगी तो उन्होंने थाने में रिपोर्ट लिखाई कि उन के दामाद मनोज और उस के घर वालों ने दहेज के लालच में उन की बेटी की हत्या कर दी है. यही नहीं, उन्होंने रिंकी की लाश भी पुलिस के सामने पेश कर दी थी, जो पूरी तरह से पहचान में नहीं आ रही थी.

पुलिस ने इस मामले में यकीन शायद इसलिए कर लिया था, क्योंकि खुद लड़की के मांबाप ने लाश की पहचान की थी. लिहाजा दहेज मांगने और हत्या के जुर्म में मनोज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जिस की सुनवाई अदालत में चल रही थी.

मनोज की मां ललिता देवी को यकीन नहीं हो रहा था कि उन का सीधासादा बेटा अपनी पत्नी की हत्या कर सकता है. वह पुलिस वालों के सामने खूब रोईंगिड़गिड़ाईं, पर सब बेकार गया. तजुर्बेकार ललिता को बहू की हरकतें पहले दिन से ही संदिग्ध लग रही थीं. पर बेटा जेल में था और उस पर हत्या का आरोप था, इसलिए उन की समझ में नहीं आ रहा था कि वह बेटे की बेगुनाही कैसे साबित करें.

मां का दिल मां का होता है. उस की ममता और हिम्मत किसी सबूत की मोहताज नहीं होती. अपनी औलाद को खतरे में पड़ी देख कर उस की हिम्मत और बढ़ जाती है. ललिता ने ठान लिया था कि जैसे भी हो, बेटे की बेगुनाही साबित कर उसे जेल और हत्या के कलंक से मुक्त कराएंगी.

कानून की निगाहों में रिंकी मर चुकी थी. उस का अंतिम संस्कार भी हो चुका था. उस का हत्यारा पति अपने किए की सजा भुगत रहा था. जबकि ललिता का दिल बारबार यही कह रहा था कि कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है. पुलिस वालों को धोखा हुआ है. यही बात जब जानपहचान और नातेरिश्तेदार दोहराते तो उन का दिल डूबने लगता.

उन की समझ में एक बात यह नहीं आ रही थी कि अगर रिंकी मरी नहीं है तो वह लाश किस की थी, जिसे रिंकी समझ कर अंतिम संस्कार किया गया था. कम पढ़ीलिखी ललिता का दिमाग अब जासूसों सरीखा सोचने लगा था कि मुमकिन है कि इस साजिश में समधीसमधन के साथ रिंकी भी शामिल रही हो. लेकिन वे ऐसा क्यों करेंगे, यह सवाल भी अकसर मुंह बाए उस के सामने खड़ा रहता था.

आखिर तर्कों पर ममता भारी पड़ी और ललिता ने रिंकी का इतिहास यानी शादी के पहले की जिंदगी के बारे में खंगालना शुरू किया. उन्हें पहली बार में ही चौंकाने वाली बात यह पता चली कि रिंकी मयूर मलिक नाम के युवक को चाहती थी और यह बात हर कोई जानता था. उम्मीद की पहली किरण जागी तो दूसरी भी जल्द ही मिल गई. पता चला कि मयूर मलिक तभी से गायब है, जब से रिंकी की हत्या की बात कही गई थी. वह कहां है, यह किसी को नहीं मालूम था.

अब ललिता ने अपना पूरा ध्यान बहू के प्रेमी पर लगा दिया कि वह कहीं तो होगा और कभी न कभी तो अपने घर वालों से या फिर चंद्रशेखर और बबीता से संपर्क करेगा.

शक सच निकला. आखिरकार मई के पहले हफ्ते में ललिता को कहीं से पता चल गया कि मयूर मलिक उन की बहू रिंकी के साथ जबलपुर के बिलहरी इलाके में रह रहा है. देर न करते हुए उन्होंने यह जानकारी थाना सरैया पुलिस को दे दी.

पहली बार पुलिस ने ललिता की बात को गंभीरता से लिया और थानाप्रभारी ने तुरंत एएसआई शत्रुघ्न शर्मा की अगुवाई में एक टीम बना कर जबलपुर रवाना कर दिया. जबलपुर पहुंच कर शत्रुघ्न शर्मा ने थाना कैंट पहुंच कर थानाप्रभारी मनजीत सिंह को सारी बात बताई तो वह भी हैरान रह गए.

वह सोच कर रोमांचित थे कि अगर ऐसा है तो यह एक विरला मामला है. फौरन तैयारी कर के जब वह बिलहरी स्थित रिंकी के घर पहुंचे तो वाकई उन का सामना उस जिंदा लाश या औरत रिंकी शर्मा से हुआ, जो दुनिया और कानून की निगाह में 2 साल पहले मर चुकी थी. मयूर मलिक को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

रिंकी ने तुरंत स्वीकार कर लिया कि वह मनोज से शादी होने से पहले मयूर से प्यार करती थी और उसी से शादी करना चाहती थी. लेकिन घर वालों ने उस की शादी जबरदस्ती मनोज से कर दी थी. मनोज को वह मन से अपना पति नहीं स्वीकार पाई, जिस से ससुराल में उस का मन नहीं लगा.

यहां तक बात कतई हैरानी की या नई नहीं थी कि शादी के बाद लड़कियां अपने प्यार को भूल नहीं पातीं. ऐसे में वे भाग जाती हैं या फिर राज खुलने पर पति की निगाह में पत्नी का सम्मान और प्यार हासिल नहीं कर पातीं.

यही रिंकी के साथ हुआ. एक दिन मौका पा कर वह मयूर के साथ भाग गई और जबलपुर जा कर रहने लगी. अपनी नईनवेली पत्नी की गुमशुदगी के बारे में मनोज कुछ कर पाता, उस के पहले ही सासससुर ने उस पर परिवार सहित दहेज मांगने का आरोप लगा कर हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने भी उसे जेल भेज दिया. जेल में वह यही सोचता रहा कि आखिरकार उस का गुनाह क्या है?

इधर चंद्रशेखर शर्मा और बबीता ने बेटी की गलती को ढंकने के लिए एक लाश का इंतजाम किया और रोरो कर पुलिस वालों को यकीन दिला दिया कि लाश उन की बेटी रिंकी की है. साफ दिख रहा है कि पुलिस ने  इस मामले में घोर लापरवाही बरती, जिस का खामियाजा निर्दोष मनोज को भगुतना पड़ा.

अभी इस मामले में एक अहम राज खुलना बाकी है. चंद्रशेखर और बबीता ने जिस लाश को रिंकी की लाश बताया था, उस की व्यवस्था उन्होंने कहां से की थी? कथा लिखे जाने तक दोनों फरार थे, इसलिए इस का पता नहीं चल सका था. अब उन की गिरफ्तारी के बाद ही पूरी तसवीर साफ होगी.

बात वाकई हैरान करने वाली है कि मनोज अपनी उस पत्नी की हत्या के आरोप में 2 साल जेल में रहा, जिस की हत्या हुई ही नहीं थी. अगर यह रहस्य न खुलता तो उस की हत्या के जुर्म में उसे मुमकिन है उम्रकैद या फांसी की सजा हो जाती. अगर ललिता देवी भागदौड़ कर के उसे नहीं बचातीं तो जरूर मनोज अंधे कानून की बेरहमी का शिकार हो जाता.

इस घटना ने अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘अंधा कानून’ के उस दृश्य की याद दिला दी, जिस में अमिताभ बच्चन भरी अदालत में खलनायक अमरीश पुरी की हत्या कर देता है और अदालत उसे सजा नहीं दे पाती, क्योंकि वह उसी खलनायक की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा पहले ही भुगत चुका था.

हालांकि अब यह कहने में भी हर्ज नहीं है कि इंसाफ की चौखट पर देर है, अंधेर नहीं.

हाईटैक होता देह धंधा

शहरी चकाचौंध और ग्लैमर ने आज देह धंधे के माने ही बदल दिए हैं. यह काफी हाईटैक हो गया है. देश में आज तकरीबन 1370 रैडलाइट एरिया हैं. इन में सब से ज्यादा देह धंधे वाला एरिया कोलकाता और मुंबई का है. अकेले मुंबई रैडलाइट एरिया का ही करोड़ों रुपए का साप्ताहिक आंकड़ा है.

राजस्थान, उत्तर प्रदेश और ओडिशा ऐसे राज्य हैं, जहां देह धंधे की प्रथा का लंबा इतिहास रहा है. जयपुर ‘सवारियों’ के खेल में काफी तरक्की कर रहा है. इस वजह से गरम गोश्त के बेचने वालों की बांछें खिलती जा रही हैं.

प्रशासन या राज्य ने इस ओर इसलिए भी अपनी आंखें बंद कर रखी हैं, क्योंकि उन का इस से करीबी ताल्लुक है. आखिरकार नेताओं और अफसरों की मौजमस्ती का भी तो सवाल है.

राजस्थान का कोई भी शहर इस गरम गोश्त के कारोबार से अछूता नहीं है. इन इलाकों में ज्यादातर ‘सवारियों’ का धंधा होता है. या यों कहें कि इधर इस धंधे की खास क्वालिटी है, जिस का नाम ‘सवारी’ दिया गया है. यानी वे औरतें जिन्हें इस शहर से उस शहर में जिस्म के भिखारियों के आगे भेजा जाता है. जिस औरत का इस्तेमाल लोकल लैवल पर किया जाता है, उसे ‘गाड़ी’ कहते हैं.

राजस्थान में जहां ‘सवारियों’ का ज्यादा काम होता है, वे इलाके हैं जयपुर, कोटा, अलवर, डूंगरपुर, किशनगढ़, जोधपुर, गंगानगर, नागौर, जैसलमेर और सीकर. बाकी इलाकोें में ‘गाडि़यों’ और ‘सवारियों’ का खूब कारोबार होता है.

ये बातें देश के तमाम रैडलाइट एरिया में पिछले 3 सालों से रिसर्च कर रहे एक पत्रकार, लेखक मोहम्मद जावेद अनवर सिद्दीकी के आंकड़ों से हासिल हुई हैं.

‘सवारियों’ और ‘गाडि़यों’ के इस नायाब कारोबार से अजमेर भी अछूता नहीं रहा है. यहां गरम गोश्त के कारोबारी भी अपनी ‘सवारियों’ और ‘गाडि़यों’ के लिए मन्नतें मांगने आते हैं, क्योंकि यहां हर किसी की मुरादें पूरी होती हैं.

पिछले 4 साल से अख्तरी बेगम (बदला हुआ नाम) ‘सवारियों’ को लाने और उन्हें सफर पर भेजने तक का सारा कारोबार करती है. उस के पास दलाल माल ला कर बेचते हैं और ज्यादातर वह ट्रेनिंग पाई ‘सवारियों’ का ही कारोबार करती है.

अख्तरी बेगम का कहना है कि इस कारोबार में काहिल और बीमार हों, तब भी औरतें ‘सवारी’ पर जाती हैं और ‘गाडि़यों’ का काम शौकिया और पार्टटाइम कमाने वाली औरतों के लिए है. लेकिन धंधा चाहे ‘सवारी’ का हो या ‘गाड़ी’ का, एक बार जो औरत इस राह पर आ जाती है, उस का अंत उम्र ढल जाने के बाद या तो फुटपाथ पर पागलों की शक्ल में या कहीं दलालों के साथ कमीशनखोर के लैवल पर जा कर खत्म होता है. वे न तो मां रह पाती हैं, न बीवी, न बेटी और न बहन.

अजमेर और जयपुर में ज्यादातर ‘सवारियों’ को विदेश भेजा जाता है. विदेशों से आने वाले, जिन्हें यहां का गरम गोश्त भा जाता है, अपने देश में हमारे यहां से अपनी रातें रंगीन करने का सामान मंगाना ज्यादा पसंद करते हैं.

जाहिर है, इस कारोबार का रुतबा भी कम लुभावना नहीं होगा. इस में मोटी कमाई तो होती ही है, ज्यादा खतरा भी नहीं रहता. बस, अच्छी ‘सवारियों’ को इकट्ठा करना और उन्हें विदेशी भूखों के हवाले कर देना, बाकी वे जानें और उन का काम. उसे तो बस हवाईजहाज तक ले जाने की जिम्मेदारी निभानी होती है.

एक ‘सवारी’ से जो कारोबार का ग्राफ बनता है, जरा उस पर भी गौर करें. अमूमन देश के अलगअलग इलाकों से 12 साल से 21 साल की उम्र की लड़कियों को ‘सवारी’ के लिए चुन कर लाया जाता है.

आमतौर पर गरम गोश्त के विदेशी ग्राहक हमारे यहां के सौदागरों को अपनी पसंद और बजट भेजते हैं और उन्हें उन की पसंद की ‘सवारियां’ मुहैया करा दी जाती हैं. उन ‘सवारियों’ को विदेशों में काम के बहाने भेजा जाता है. कुछ ‘सवारियां’, जो पहली बार इस धंधे में आती हैं, उन्हें विदेश जा कर मोटी कमाई का लालच दे कर इस दलदल में उतार दिया जाता है.

‘सवारी’ एक बार विदेश क्या गई, उस का सबकुछ या तो लुट जाता है या फिर मिजाज ही ऐसा बन जाता है कि चाहत ही नहीं होती इस धंधे से बाहर आने की. जब तक हुस्न का जलवा रहता है, ‘सवारियां’ उड़नछू होती रहती हैं, फिर उम्र ढलने तक इतनी सोच उन में आ जाती है कि उन्हें इस कारोबार की सारी जानकारी हो जाती है और या तो वे इस कारोबार की रानी बन जाती हैं या अपनी जिंदगी अलगथलग काटने पर मजबूर हो जाती हैं.

राजस्थान से जो ‘सवारियां’ जाती हैं, वे काफी सैक्सी और कम उम्र की गठीली बालाएं होती हैं. जब वे सजतीसंवरती हैं, तो सचमुच बेहोश कर देती हैं. उन का भाव भी सब से ज्यादा होता है. खाड़ी देशों के गरम गोश्त के भूखे उन्हें देखते ही कुछ भी लुटाने को तैयार हो जाते हैं.

‘सवारियों’ में कुंआरियों का होना ही जरूरी नहीं है. इन में शादीशुदा भी होती हैं, जिन के मर्द इस बात से अनजान नहीं होते हैं कि उन की पटरानी किसी पराए मर्द की रातें रंगीन करने विदेश जा रही हैं. रही बात वीजा की, तो इस में भी कोई मुश्किल नहीं होती है.

औरतों को इन अंधी गलियों में धकेलने वाले कई देशों में फैले गिरोहों के लोगों द्वारा इन की सभी जरूरतें पूरी कर दी जाती हैं.

चांदी (बदला हुआ नाम) बताती है कि उसे एक ट्रक ड्राइवर से प्यार हो गया था. उस ने बड़ेबड़े सपने दिखाए थे और वह उस के साथ भाग आई अपने बंगाल से अजमेर. मांबाप, भाईबहन सब थे, मगर दुनिया की रंगीनियत देख कर वह बहक गई. पति था तो, लेकिन मनमौजी. वह भी कहीं कामधाम नहीं करता था और ऊपर से उसे मारतापीटता भी था.

सब से बड़ी बात तो यह थी कि उस मर्द से देह सुख भी चांदी को नहीं मिलता था. उस की सखीसहेलियां अपने पति की बातें उसे बताती रहती थीं, तो बेचारी चांदी सिसक कर रह जाती थी. शायद इसी कमजोरी को भांप गया था वह ट्रक ड्राइवर.

ट्रक ड्राइवर ने चांदी को खूब भोगा. उसी दौरान चांदी को मिल गई रजिया. रजिया ‘सवारियों’ को खाड़ी देशों में भेजने की ठेकेदार थी. उस ने उसे सारी बातें खूब समझा कर बताईं, जिसे सुन कर चांदी की समझ में बस इतनी बात आई कि अगर एक बार वह ‘सवारी’ बन गई, तो जिंदगीभर मौज से कटेगी. फिर तो अपने बापभाई को भी वह तार देगी. मायके की गरीबी छूमंतर हो जाएगी. उस ने ‘सवारी’ बन जाना कबूल कर लिया और दुबई चली गई.

बंगाल से दिल्ली, दिल्ली से जयपुर और जयपुर से अजमेर, इन तमाम जगहों पर लोगों ने चांदी को खूब भोगा और फिर वह दुबई चली गई. उस के साथ पहली बार दुबई जाने वाली एक और औरत थी. उस औरत के बारे में बताया गया कि वह अब तक अपने ही देश में जो विदेशी लोग आते हैं, उन को खुश करने होटलों में जाती रही है. सो, उसे उन लोगों के साथ रात बिताने की पूरी जानकारी है.

उस औरत के साथ चांदी को दुबई में एक होटल में ठहराया गया था. रोज सुबह उसी होटल में एक गाड़ी आ जाती थी, जो उसे ले कर शेखों के हरम तक पहुंचा आती थी.

शेख रातभर चांदी को खूब नोचखसोट कर सुबह तक तकरीबन बेहोशी की हालत में छोड़ दिया करते थे. फिर वही गाड़ी आती थी, जो उसे होटल में छोड़ आती थी.

होटल में आ कर जब चांदी को कुछ होश आता, तो अपनी ही अंटी में से पैसे जो उसे रात को शेख से मिलते थे, होटल और गाड़ी वाले को देने होते थे. वह खापी कर कुछ देर आराम करती और तब तक फिर से दूसरी रात के लिए बुकिंग आ जाती थी. इस तरह एक साल बीत गया और उस ने 19 हजार रियाल जमा कर लिए.

कुछ और पैसों के लालच में चांदी ने अपने एजेंटों से बात की, तो उस ने उसे वीजा के लिए किसी के बारे में बताया, लेकिन फिर क्या हुआ उसे पता ही नहीं, क्योंकि उसे जब उस रात शेख ने नोचने की शुरुआत की तो वह इतना वहशियाना था कि बेचारी बेहोश हो गई और जब होश में आई तो हवाईजहाज में थी. फिर दिल्ली में आ पहुंची.

अब वह ऐसा काम नहीं करेगी, इतना सोचते हुए बाहर आई. एयरपोर्ट पर एक गाड़ी खड़ी थी, जिस में चांदी को उस के एजेंट के आदमी बिठा ले गए. वह कुछ सोच पाती, उस से पहले उस के सपनों ने दम तोड़ दिया.

‘हिंदुस्तान के प्रमुख देह व्यापार और उस के बदलते परिदृश्य’ विषय पर रिसर्च करने वाले मोहम्मद जावेद अनवर सिद्दीकी ने जयपुर, अलवर, कोटा, नागौर, गंगानगर, जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, सीकर, बाड़मेर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, टोंक, हनुमानगढ़, भरतपुर, बूंदी और बांसवाड़ा में जा कर सभी रैडलाइट इलाकों की छानबीन की.

इस से जो खास बातें सामने आई हैं, उन के मुताबिक पूरे देश में राजस्थान तीसरा ऐसा प्रमुख राज्य है, जहां से देश के बाहर ‘सवारियां’ भेजने का कारोबार होता है.

यह चौंकाने वाली बात है कि अगर सरकार देह व्यापार की मंडियों से टैक्स वसूल करने लगे, तो अकेला यह व्यापार देश की तमाम पंचवर्षीय योजनाओं को पूरा करने के लिए काफी है.

कोटा, राजस्थान की 2 पढ़ीलिखी सहेलियां रूबी और सविता (बदला हुआ नाम) पिछले 5 साल से जिस्मफरोशी का धंधा कर रही हैं. अब वे पछतावा नहीं कर रही हैं, बल्कि कहती हैं कि इतनी रईसी क्या बाहर मिलेगी?

बनारस से धंधे की शुरुआत करते हुए इन दोनों ने अब तक 3 बार ‘सवारी’ का सफर पूरा किया है. अब तो वे अपने ही देश में रह कर इस धंधे को अंजाम दे रही हैं.

जिस्म की खरीदफरोख्त का काम अब बदनाम बस्तियों से होते हुए राज्य के गंवई इलाकों के घरों की चौखट तक को पार कर गया है. माहौल ऐसा बन गया है कि लोग अपनी पत्नी, सौतेली या कमजोर बहन, भांजी या दूसरी औरतों को गरम गोश्त की गलियों में खुद भेजते हैं, जिस के एवज में बैठेबिठाए बेहतर आमदनी हो जाती है.

यह बात भी कम चौंकाने वाली नहीं है कि कहींकहीं नौकरी की जरूरत ने भी कमसिन लड़कियों को जिस्म की तस्करी में फंसा दिया है.

साल 2015 में दिल्ली पुलिस ने नौकरी का झांसा दे कर जिस्मफरोशी के जाल में फांस कर गांव की औरतों और जवान होती कमसिन बालिकाओं को अरब देशों में बेचने वाले एक गिरोह का परदाफाश किया था. इस में 80 फीसदी राजस्थान की थीं, जो अपने घरबार की गरीबी, भुखमरी से जूझते लाचार मांबाप और कुपोषण की शिकार भाईबहनों की खातिर नौकरी करने घर से बाहर निकल गई थीं.

दिल्ली में पकड़े गए गरम गोश्त के सौदागरों ने जाहिर किया कि वे राजस्थान के जयपुर, अजमेर, ब्यावर और अलवर इलाकों से गांव की लड़कियों और औरतों को नौकरी का झांसा दे कर अपने जाल में लपेट लेते थे.

इन अबलाओं को दिल्ली में सब से पहले इस गहरी अंधेर नगरी से रूबरू कराया जाता है, फिर कुछ खास गुर बताते हुए इस पेशे में उतार दिया जाता है.

कभी एकएक दाने को मुहताज जयपुर बाजार के तंग महल्ले के टूटेफूटे मकान में रहने वाली शायरा (बदला हुआ नाम) ने 40 लाख रुपए में एक मकान खरीद कर लोगों को चौंका दिया.

इस की खबर पुलिस को भी मिली, तो उस ने फौरन शायरा को दबोच लिया और उस के बाद यह राज खुला कि शायरा ‘सवारियों’ की कारोबारियों में से एक है.

जयपुर और अजमेर से शायरा महिला डांस म्यूजिकल ग्रुप की आड़ में गांवों से लाई गई बेबस लड़की को विदेश भेजने का काम करती थी. किराए के गुंडेमवालियों के बल पर वह एक शातिर कारोबारी बन गई थी.

आज डांस स्कूल और म्यूजिकल ग्रुप की आड़ में राजस्थान के कई इलाकों में जिस्मफरोशी का काम चल रहा है. हकीकत यह है कि अजमेर इन दिनों इस धंधे की खास मंडी बना हुआ है.

मास्टरमाइंड और सब से बड़े रेगिस्तानी कारोबारी के रूप में सलाम उर्फ टोपीबाज का नाम सामने आया है. सलाम खुद तो मुंबई में रहता है, लेकिन जयपुर और अजमेर में इस के 3 खास एजेंट काम संभालते हैं.

इन एजेंटों के साथ उन की खास सैक्रेटरी की हैसियत से एकएक औरत भी रहती है. इन को एरिया में घूम रहे दलाल और सड़कछाप गुंडों के जरीए माल मिलता है.

बताते हैं कि सलाम का नैटवर्क पिछले 10-12 सालों से चल रहा है. इस पर हाथ क्या नजर तक उठाने के लिए पुलिस को कई बार सोचना पड़ता है.

चाहे सलाम मुंबई में रहे या अजमेरजयपुर में, उस का नैटवर्क अब इतना तगड़ा हो गया है कि किसी भी तरह की अड़चन इस के कारोबार को डिस्टर्ब नहीं कर सकती है.

अब तो सलाम ने अपना कारोबार कंप्यूटराइज्ड कर लिया है. इंटरनैट या मोबाइल फोन पर ही सारा काम निबटा लिया जाता है.

जिस्म के सौदागरों का काम करने का तरीका भी कुछ अजीब सा है. ये देहात से लाई गई लड़कियों को डांस की टे्रनिंग देते हैं. उन के घर वालों को कहा जाता है कि उन की लाड़ली को विदेश में काम करने के लिए ले जा रहे हैं, जहां ये बहुत सारा रुपया कमा सकेंगी.

मांबाप इजाजत देने से गुरेज नहीं करते, फिर उन्हें 20-25 हजार रुपए थमा दिए जाते हैं, जो उन्हें गरीबी के अंधेरे में किसी चांद से कम नहीं लगते. उन से यह भी कहा जाता है कि उनकी बेटी विदेश से उन्हें मोटी रकम भेजती रहेगी.

जब ये मासूम लड़कियां डांस की कुछ टे्रनिंग ले कर अरब देशों की जमीन पर उतार दी जाती हैं, तब जा कर इन्हें पता चलता है कि इन की मासूमियत को यहां शेखों की बांहों में मसला जाएगा.

क्या कोई बता सकता है कि लोग चंद सिक्कों में जो मासूम देह खरीदते हैं, वे आती कहां से हैं और कैसे?

इस सवाल का जवाब मिलेगा पश्चिम बंगाल के बागानों से, उत्तरपूर्व के पहाड़ों से, कश्मीर की सुनहरी वादियों से, दक्षिण भारत के समुद्री घाटों से और नेपाल के गांवों से. मुंबई के कमाठीपुरा, फारस रोड, फाकलैंड रोड और पीला हाउस जैसे इलाकों में हर महीने सैकड़ों नई नाबालिग लड़कियां पहुंचाई जाती हैं.

गरीबी की चक्की में पिसती ये भोलीभाली 10 से 12 साल की मासूम लड़कियों ने सिर्फ इतनी ही गलती की थी कि उन्होंने अपने लिए एक बेहतर जिंदगी का सपना देख लिया था. कई तो परिवार की सताई हुई होती हैं, कई दुबई जा कर खूब ज्यादा पैसा कमाने की तमन्ना लिए होती हैं, कइयों को मुंबई आ कर फिल्मी सितारे से शादी करनी होती है या खुद हीरोइन बनने का सपना देख रही होती हैं.

नेपाल बौर्डर पर तकरीबन हर थाने और सोनौली व भैरवाट्रांजिट कैंप में ऐसे बोर्ड लगे हैं, जिन पर नेपाल से गायब हुई ऐसी तमाम लड़कियों के फोटो चस्पां होते हैं, जिन्हें देह धंधे की भेंट चढ़ा दिया जाता है.

इन तथाकथित गुमशुदा नाबालिग और बालिग लड़कियों को कभी बरामद नहीं किया जा सका है, यह रिकौर्ड उन पुलिस थानों में मिल सकता है. अलबत्ता, उन में से तकरीबन 90 फीसदी लड़कियों के घर वाले जान चुके होते हैं कि उन की लाड़ली परदेश में पैसा कमा रही है. थानों में लगे पुराने फोटो उम्मीदों की तरह धुंधले भी होते जाते हैं.

मोईती, नेपाल के एक सदस्य के पास एक गांव का बाशिंदा आता है और अपनी पत्नी को किसी लोगों के द्वारा बहलाफुसला कर भगा ले जाने की बाबत शिकायत करता है, उस के बारे में जब तहकीकात की जाती है, तो पता चलता है कि उस की बीवी मुंबई में है और अच्छीखासी कमाई कर रही है. लिहाजा, उसे परेशान होने की जरूरत नहीं है.

इस खबर के साथ बेचारे के हाथ में एक हजार रुपए थमा दिए जाते हैं और बताया जाता है कि अब हर महीने उसे उस की बीवी की ओर से 2 हजार रुपए मिलेंगे, सो वह अपनी जबान बंद ही रखे.

वह आदमी कुछ दिनों तक तो यों ही खोजता फिरा, फिर बाद में जब पता लगा कि उस की बीवी पुणे के बुधवारपेठ रैडलाइट इलाके में एक कोठे पर काजल नामक बाई के पास है, तो वह थाने से पुलिस के साथ चल पड़ा अपनी बीवी की छुड़ाने को. जुगत काम आई और पुलिस दस्ते ने उस की बीवी को सुरक्षित बरामद कर लिया. पुलिस ने उस की बीवी के साथ 5 नेपाली दलालों को भी पकड़ लिया.

कुछ गिरोह नेपाल के पहाड़ों और तराई में बसे गांवों की गरीब नाबालिग लड़कियों के जत्थे को मुंबई की देह मंडी में झोंक देते हैं. इस बारे में कोई तय आंकड़ा भी मुहैया नहीं है, जिस से पता चले कि कितनी लड़कियां हर साल नेपाल की तराइयों से ला कर मुंबई में बेच दी जाती हैं.

लेकिन सरकारी सूत्रों की अगर मानें, तो जाहिर होता है कि 4 से 5 हजार लड़कियों को बहलाफुसला कर नेपाल के रास्ते भारत की सब से बड़ी देह मंडी कमाठीपुरा में बेच दिया जाता है. इन में से 40 फीसदी बहलाफुसला कर, 30 फीसदी जबरन, जिस में उन के घर और रिश्तेनातेदारों की रजामंदी होती है. 30 फीसदी पैसे कमाने की खातिर इस दलदल में आती हैं.

17 साल के लड़के ने हैक की ई-कौमर्स साइट

फोन और लैपटौप पर खेलते-खेलते महज 17 साल का लड़का हैकर बन गया. उसने एक ई-कामर्स वेबसाइट हैक कर उसके अकाउंट से 1.97 लाख रुपये की ट्रांजैक्शन कर डाला. उस रुपये से बिटकौइन खरीद लिए.

पुलिस के मुताबिक, उसने ‘काउंटर स्ट्राइक’ गेम खेलते हुए यूट्यूब से हैकिंग के गुर सीखे. नाबालिग की इस कारगुजारी के बावजूद हैक होने वाली वेबसाइट का मालिक इतना प्रभावित हुआ कि उसने कहा कि अगर वह गुनहगार नहीं होता तो मैं उसे अच्छे पैकेज पर नौकरी पर रख लेता.

पुलिस के मुताबिक, सरकारी बिलों के औनलाइन पेमेंट से जुड़ी एक वेबसाइट के मालिक ने इसी साल जनवरी में शिकायत दी थी कि किसी ने कंपनी के अकाउंट को हैक करके 1.97 लाख रुपये अलग-अलग 6 अकाउंट में ट्रांसफर कर लिए हैं.

मौरिस नगर थाने में तैनात SI और साइबर ऐक्सपर्ट रोहित और उनकी टीम ने आरोपी नाबालिग की पहचान की, उस पर 11 महीने निगाह रखी और सबूत जुटाकर गुरुवार रात पकड़ लिया.

खेल खेल में किया अपराध

17 साल के आरोपी की 12 मेल ID मिलीं, 5 मोबाइल सिम मिले

11वीं-12वीं में कंप्यूटर साइंस पढ़ी थी, जावा और C+ लैंग्वेज में माहिर

‘काउंटर स्ट्राइक’ गेम खेलकर यूट्यूब से सीखे हैकिंग के गुर

हैकिंग की इसी कोशिश में ई-कॉमर्स साइट में घुसपैठ की, निकाले रुपये

जानिए किससे करेंगे कपिल शादी, तय हो गई है तारीख

छोटे स्क्रीन के कौमेडी किंग कपिल शर्मा जल्दी ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. लंबे समय के अपने रिलेशनशिप को कपिल अंजाम देने वाले हैं. वो अपनी गर्लफ्रेंड गिन्नी के साथ शादी करने वाले हैं. खबरों की मानें तो दोनों साल के आखिर में, दिसंबर में गिन्नी के साथ शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. पहले इस बात को अफवाह बताने के बाद कपिल ने इस बार को स्वीकार कर लिया था कि वह गिन्नी से शादी करने जा रहे हैं.

kapil sharma marriage

मुंबई के एक अखबार की माने तो साल के आखिर में दोनों गिन्नी के होमटाउन में ट्रेडिशनल हिंदू रिवाज से शादी करेंगे. जालंधर के नजदीक स्थित फगवाड़ा में विवाह कार्यक्रम रखा गया है, जिसमें उनका परिवार व दोस्त शरीक होंगे. इसके बाद कपिल शर्मा के होमटाउन अमृतसर में रिसेप्शन रखा जाएगा.

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12 दिसंबर को दोनों का विवाह होगा. इसके बाद 14 दिंसबर को अमृतसर में रिसेप्शन पार्टी होगी. बताया जा रहा है कि इसके बाद कपिल और गिन्नी इंडस्ट्री के अपने दोस्तों के लिए खास पार्टी का आयोजन करेंगे.

मायावती की साख पर सवाल

चुनाव के पहले और चुनाव के बाद नेताओं की बदलती फितरत से पीछा छुड़ाना उनको भारी पड़ता है. जनता को उनकी कही बातों पर भरोसा नहीं होता है. उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से 3 बार मुख्यमंत्री बनने वाली मायावती जब मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव में भाजपा के साथ नहीं जाने की बात कहती है तो उनपर जनता को यकीन नहीं हो रहा है. छत्तीसगढ़ के चुनाव प्रचार में मायावती वहां के मुद्दो पर राय देने की जगह पर केवल अपनी सफाई देने की कोशिश कर रही हैं. वह कांग्रेस और भाजपा दोनो की सांपनाथ-नागनाथ कहती है. छत्तीसगढ की जनता को यह समझ नहीं आ रहा कि चुनाव में सांपनाथ-नागनाथ नजर आने वाली भाजपा-कांग्रेस के साथ चुनाव के बाद मायावती समझौता कैसे कर लेती हैं?

5 राज्यों के विधनसभा मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ, मणिपुर और तेलंगाना के पहले बसपा कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहती थी. अचानक बसपा ने यूटर्न लिया और खुद की चुनाव लड़ने का एलान कर दिया. मायावती उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की बात भले करती हो पर मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ में वह सपा के साथ भी नहीं है. यहां सपा-बसपा भी अलग अलग ही चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस नेता सुरेन्द्र सिंह राजपूत कहते हैं, असल में मायावती उसूल की नहीं अपने मुनाफे की राजनीति करती हैं. ऐसे में वह वहां अकेले चुनाव लड़ रही हैं. कांग्रेस हमेशा की साम्प्रदायिकता विरोधी विचारधरा को एकजुट करके चुनाव लड़ना चाहती है.

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ में मायावती की बसपा कहीं चुनावी लड़ाई में नहीं हैं. वह वोट काटने का काम करेंगी. जिसका प्रभाव कांग्रेस पर अधिक पड़ेगा. छत्तीसगढ में भाजपा और कांग्रेस के बीच पिछले चुनाव में सीट और वोट प्रतिशत दोनों के बीच बहुत ही कम फासला था. ऐसे में कुछ वोटों के कटने से ही जीत हार का गणित बदल सकता है. मायावती को लगता है कि छत्तीसगढ में अगर उनकी पार्टी कुछ सीटें भी ले आई तो वह किंगमेकर बन सकती है. जिसके बाद उनके लिये अपनी कोई भी बात मनवानी सरल होगी. चुनाव के पहले सांपनाथ-नागनाथ कहने वाली मायावती भाजपा-कांग्रेस के साथ नहीं जायेगी इसकी कोई गांरटी नहीं है.

गुदा की बीमारियों से बचाए सही खानपान

औरतें हों या मर्द, आमतौर पर शरीर के किसी भी भाग में कोई तकलीफ होने पर वे अपने परिचितों से चर्चा जरूर करते हैं और डाक्टर के पास अपना इलाज कराने के लिए पहुंच जाते हैं, पर अगर शरीर के गुप्तांगों में कोई तकलीफ होती है तो उसे वे न तो किसी परिचित को बताते हैं और न ही जल्दी डाक्टर को दिखाते हैं.

गुदा में होने वाली बवासीर, फिशर, भगंदर जैसी बीमारियों को ले कर भी इसी तरह की हिचक देखने में आती है.

नागपुर के डाक्टर प्रवीण जयप्रकाश गुप्ता के मुताबिक, गुदा संबंधी बीमारियों की वजह मुख्य रूप से ज्यादा तेल वाला मिर्चमसालेदार भोजन ही है. बच्चे को जन्म देते समय औरतों के ज्यादा जोर लगाने से भी इस बीमारी के होने का डर रहता है.

बवासीर

बवासीर के शुरुआती लक्षणों में गुदा के आसपास खुजली रहना व शौच करते समय बहुत तेज दर्द होना है. इस के अलावा शौच से निबटने के बाद मलद्वार से खून बहना, सफेद तरल चीज आना, मस्सों का बाहर आना भी बवासीर के लक्षण हो सकते हैं.

आजकल बवासीर की समस्या आम हो गई है. यह बीमारी कई वजहों से हो सकती है, लेकिन अहम वजह खानपान में गड़बड़ी है, जिस के चलते कब्ज होती है. कब्ज के चलते ही मलद्वार पर जोर लगाना पड़ता है और फिर यह समस्या शुरू होती है.

बवासीर में गुदा के निचले और अंदरूनी हिस्से की नसों में सूजन आ जाती है. इस की वजह से जगहजगह मस्से उभर आते हैं. ये मस्से कभी बाहर आ जाते हैं तो कभी अंदर ही रहते हैं. शौच करते वक्त जब इन नसों पर दबाव पड़ता है तो तेज दर्द होता है.

यह बीमारी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में भी हो सकती है. उम्र बढ़ने के साथसाथ यह समस्या भी बढ़ती जाती है.

यह है इलाज

डाक्टरों के मुताबिक, शुरुआती दौर में बवासीर का इलाज दवाओं से ही किया जा सकता है. मस्से छोटे होते हैं, इसलिए दवाओं से ही उन्हें खत्म किया जा सकता है.

गंभीर रूप ले लेने के बाद वे दवाओं से ठीक नहीं हो पाते हैं. गंभीर अवस्था में डाक्टर पहले इस बीमारी को इंजैक्शन से ठीक करने की कोशिश करते हैं. इसे एंडोस्कोपिक स्क्लरोथैरेपी भी कहते हैं.

इंजैक्शन के असर के चलते मस्से सूख जाते हैं. एक महीने बाद दोबारा इंजैक्शन लगाया जाता है. बचे हुए मस्से दूसरे इंजैक्शन से कंट्रोल में आ जाते हैं.

एक बार इंजैक्शन लगाने में तकरीबन 2,000 से 3,000 रुपए का खर्च आता है. जब मस्से बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं, तो हेमरौयडेक्टमी से ही उन्हें पूरी तरह से हटाया जाता है.

इस सर्जरी के दौरान मरीज को एनेस्थीसिया दे कर बेहोश किया जाता है. बाद में सर्जरी के दौरान गुदा के अंदरूनी और बाहरी मस्सों को काट कर शरीर से अलग कर दिया जाता है.

सर्जरी होने के बाद 2-3 दिनों तक मरीज को अस्पताल में ही रखा जाता है. ठीक होने में भी हफ्तेभर का समय लग जाता है.

आजकल लेजर तकनीक से बवासीर का इलाज आसान हो गया है. लेजर किरणों के द्वारा मस्सों को हटा दिया जाता है और मरीज को उसी दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है.

भगंदर

जब किसी आदमी को यह बीमारी हो जाती है तो उस के गुदाद्वार के पास सूजन हो कर फोड़ा बन जाता है. यह फोड़ा कुछ दिनों में फूट जाता है और छेद बन जाता है. उस में से मवाद व खराब खून निकलने लगता है.

यह फोड़ा कभीकभी बहुत चौड़ा व गहरा होता है. इस फोड़े के चलते मरीज को गुदाद्वार के पास बहुत तेज दर्द होता है.

जबलपुर के गुदा रोग विशेषज्ञ डाक्टर मुकेश श्रीवास्तव के मुताबिक, इस बीमारी का प्रमुख लक्षण गुदा में तेज दर्द होता है, जो बैठने पर बढ़ जाता है. गुदा के पास खुजली व सूजन होती है. चमड़ी लाल हो कर फट सकती है और वहां से मवाद या खून रिसता है और मल त्याग के समय तेज दर्द होता है.

इस बीमारी का एकमात्र इलाज सर्जरी है. सर्जरी के जरीए भीतरी रास्ते से ले कर बाहरी रास्ते तक की भगंदर को निकाल दिया जाता है. इस सर्जरी के बाद रिकवरी होने में 6 हफ्ते से ले कर 3 महीने तक का समय लग सकता है.

वीडियो असिस्टैड एनल फिस्टुला ट्रीटमैंट सुरक्षित और दर्दरहित इलाज है. इस में मरीज को एक दिन में ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है. इस सर्जरी में माइक्रो एंडोस्कोप का इस्तेमाल किया जाता है.

फिशर

गुदा संबंधी बीमारियों में एक नाम फिशर भी है. फिशर में गुदा के आसपास क्रैक जैसी हालत बन जाती है. ये क्रैक छोटे और बड़े दोनों तरह के होते हैं. कई बार इन से भी खून आता है. अकसर मरीज फिशर से ग्रस्त होने के बाद भी खुद को बवासीर से ग्रस्त समझता है. लेकिन फिशर और बवासीर अलगअलग बीमारियां हैं. बवासीर में गुदा के अंदर और बाहरी नसों में सूजन आ जाती है, जबकि फिशर में ऐसा नहीं होता है.

खानपान का रखें ध्यान

डाक्टर बीएल चौहान बताते हैं कि गुदा संबंधी बीमारियों से बचाव व इलाज में खानपान का ध्यान रखा जाना बेहद जरूरी है. सलाद से भरपूर भोजन करना चाहिए जो कब्ज दूर कर सके. खाने में फाइबर से भरपूर चीजों का इस्तेमाल करें. इस से पेट सही रहता है और कब्ज दूर होती है.

इस के लिए भोजन में साबुत अनाज और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें. ताजा फल और हरी सब्जियों में सब से ज्यादा मात्रा में एंटीऔक्सिडैंट पाया जाता है, इसलिए इन को खाने में नियमित रूप से शामिल करें.

भोजन में एंटीऔक्सिडैंट से भरपूर चीजों को शामिल करने से खून के दौरे में सुधार आता है. इस से मलद्वार के आसपास के टिशू में मजबूती आती है. इस के लिए नीबू, नारंगी वगैरह को भोजन में शामिल करें. अच्छे पाचन और कब्ज दूर करने के लिए दिनभर में कम से कम 12 लिटर पानी पीने की सलाह डाक्टरों द्वारा दी जाती है, क्योंकि कम पानी पीने से आंत की दीवारें पानी खींच लेती हैं. इस के चलते मल कड़ा हो जाता है.

मरीज ढीलेढाले अंदरूनी कपड़ों का इस्तेमाल करे. इस से बवासीर पर रगड़ नहीं लगेगी. शौच के दौरान जोर न लगाएं और गुदाद्वार के आसपास खुजली करने से बचें. इस से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है.

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