लेखक- विजय पांडेय/श्वेता पांडेय
सौजन्य- मनोहर कहानियां
नेहा के साथ दाल न गलने पर आनंद और अजय परेशान हो गए. तब उन के मन में खयाल आया कि जब नेहा नहीं फंस रही तो क्यों न तरुण को अपने जाल में फंसा कर इस संपत्ति को बेचने के लिए मजबूर किया जाए.
तरुण अपने दोनों बहनोइयों की चाल में फंस गया. उन के बहकावे में आ कर वह अपनी प्रौपर्टी का सौदा करने को तैयार हो गया. इस के बाद अजय राय, आनंद राय और तरुण तीनों की आपस में खूब पटने लगी तो नेहा समझ गई कि उन्होंने तरुण को अपने जाल में फंसा लिया है. लिहाजा वह उन पर नजर रखने लगी.
एक दिन कमरे में बैठे तीनों जब संपत्ति को बेचने के बारे में बातें कर रहे थे, तब नेहा परदे की ओट में उन की बातें सुन रही थी. नेहा को लगा कि यदि अब वह खामोश रही तो सारी संपत्ति हाथ से निकल जाएगी. वह उसी समय दरवाजे की ओट से निकल कर ड्राइंगरूम में पहुंच गई. उन तीनों के सामने अचानक नेहा के पहुंचते ही ड्राइंगरूम में सन्नाटा छा गया.
नेहा को देखते ही अजय राय ने तुरंत टौपिक बदल दिया, लेकिन उन तीनों के चेहरों पर जो हवाइयां उड़ रही थीं, उस से नेहा समझ गई. फिर भी अनजान बनते हुए वह बोली, ‘‘आप तीनों के चेहरों पर हवाइयां कैसे उड़ रही हैं. आजकल तरुण से आप लोगों की बहुत ज्यादा पट रही है, आखिर इस की वजह क्या है?’’
‘‘ऐसी कोई बात नहीं है. दरअसल, काफी दिनों बाद साले साहब से रूबरू हुए तो घुलमिल कर बातें कर रहे थे.’’ आनंद राय बोला.
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‘‘लेकिन मुझे तो बात कुछ और ही नजर आ रही है. मेरे आने से पहले आप लोग प्रौपर्टी बेचने के बारे में कुछ बातें कर रहे थे,’’ नेहा कहा, ‘‘यदि मेरी बात गलत हो तो आप लोग बता दीजिए.’’
नेहा की बात सुन कर तीनों समझ गए कि उसे पूरी बात पता चल गई है. इसलिए वह हक्केबक्के हो कर एकदूसरे की तरफ देखने लगे. तभी अजय बोला, ‘‘दरअसल नेहा, जब तुम पूछ रही हो तो बताए देता हूं कि हमें बड़ी मुश्किल से इस बंगले का खरीदार मिला है, जो बंगले की अच्छी कीमत देने को तैयार है.
‘‘बारबार हमें ऐसा मौका नहीं मिलेगा. समझदारी इसी में है कि हम इसे बेच दें. हम लोग सोच रहे हैं कि इस बंगले को बेच कर जो रकम मिलेगी, उस से हम जमीन खरीद कर उस पर आलीशान फ्लैट्स बना कर
उन्हें बेच देंगे. इस से हमें करोड़ों रुपए का फायदा होगा.’’
‘‘जीजाजी, नेक सलाह के लिए हम आप के शुक्रगुजार हैं. लेकिन एक सलाह मेरी भी है कि आप दोनों जो स्कीम बता रहे हैं, उस की जगह अपनीअपनी संपत्ति बेच कर खुद कर लें. आप को लाखोंकरोड़ों का फायदा मिल जाएगा.’’ नेहा ने दोनों ननदोइयों से कहा.
‘‘देखो दामाद होने के नाते मैं आप दोनों का बड़ा सम्मान करती हूं लेकिन भविष्य में इस तरह की स्कीम और संपत्ति खरीदनेबेचने की बातें यहां कहने मत आना. आप मेरे पति को भी अपनी बातों में ले कर अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं.’’ नेहा ने कहा और अपने पति से वहां से उठने का इशारा किया.
नेहा की बात सुन कर आनंद राय और अजय के चेहरे सुर्ख हो गए. इस से उन्हें अपमान महसूस हुआ. उस समय रात हो गई थी. उन्होंने दीवार घड़ी की ओर देखा फिर दोनों भाई बंगले से बाहर निकल गए. तरुण या नेहा ने उन दोनों को रोकने की कोशिश नहीं की.
घर पहुंच कर दोनों भाइयों ने इस की शिकायत अपनीअपनी पत्नियों से की कि उन की भाभी नेहा ने किस तरह से उन का अनादर किया है. दोनों बहनों ने इस की शिकायत नेहा भाभी से की. जवाब में नेहा ने ननदों को पूरी बात बता दी.
पर इतनी बेइज्जती होने के बाद भी अजय राय और आनंद राय ने तरुण के बंगले पर जाना बंद नहीं किया. सपत्ति का विवाद दिन प्रतिदिन बढ़ता गया. लालच में अंधे हो कर वे अपमान की गठरी सिर पर लिए घूमते रहे. जब बात नहीं बनी तो दोनों भाइयों ने एक दिन यहां तक कह दिया कि पिता की संपत्ति में बेटियों का भी हक होता है
इस पर नेहा बोली, ‘‘मैं कब मना कर रही हूं कि संपत्ति में बेटियों का हक नहीं होता, लेकिन जो संपत्ति ससुर की है वह उसी में से हिस्सा ले सकती हैं. पर तुम तो सास और बुआ की संपत्ति पर अपनी नजरें गड़ाए बैठे हो. यह बात सरासर गलत है. ऐसा मैं हरगिज नहीं होने दूंगी. बताओ, कानून की कौन सी किताब में यह बात लिखी है कि बुआ की संपत्ति पर दामादों का हिस्सा बनता है.
‘‘जब कुन्नीबाई बुआ ने अपनी मरजी से 17 एकड़ भूमि का मुख्तियार तरुण को बनाया है तो आप लोगों को क्यों जलन हो रही है. आप को हिस्सा लेना ही था तो ससुर के सामने मांग लेते. उस समय तो आप लोग नहीं बोले. अब वह नहीं हैं तो उन की संपत्ति पर नजरें गड़ाए हुए हो.’’
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नेहा अपने दोनों ननदोइयों को इसी तरह बेइज्जत कर दिया करती थी. जिस से दोनों भाई नेहा से नफरत करने लगे थे. लालच में अंधा हुआ इंसान विवेकशून्य हो जाता है. दोनों भाइयों डा. आनंद राय और इंजीनियर अजय राय का भी यही हाल था. कोई रास्ता नहीं मिला तो अपनी मंशा पूरी करने के लिए उन्होंने एक आपराधिक योजना तैयार कर ली.
उन्होंने सोचा कि क्यों न तरुण को ही रास्ते से हटा दिया जाए. लेकिन इस योजना पर उन्होंने विराम लगा दिया.
इस की वजह यह थी कि तरुण की पत्नी नेहा साधनसंपन्न और दबंग परिवार से थी. उन्होंने सोचा कि तरुण के साथ कुछ भी किया तो वह उन्हें जीने नहीं देगी. वह कोई दूसरी योजना बनाने लगे.
नेहा ने अपने पति तरुण को भी समझा दिया था कि दोनों बहनोई लालची प्रवृत्ति के हैं. वे लालच में कुछ अहित भी कर सकते हैं. तरुण पत्नी की बात अच्छी तरह समझ गया था. लिहाजा उस ने अपनी बहनोइयों की बातों पर तवज्जो देनी बंद कर दी. जब कभी नेहा के ननदोई प्रौपर्टी को ले कर तरुण से बात करते तो नेहा खुद ही बीच में आ जाती और पति के बोलने से पहले ननदोइयों की बात काट देती थी. वह उन लोगों की निगाह में पति को अच्छा इंसान बनाना चाहती थी.
आनंद और अजय का लालच विकराल होता गया. नेहा उन के रास्ते का पत्थर बन गई थी. इस पत्थर को हटाए बिना उन्हें अपनी चाहत पूरी होती दिखाई नहीं दे रही थी.
नेहा को रास्ते से हटाने के लिए ये लोग उचित अवसर की तलाश में रहने लगे. सोचविचार कर दोनों भाइयों ने एक खौफनाक साजिश रच डाली. इस साजिश में उन्होंने अपने भतीजे दीपक सायतोडे को भी शामिल कर लिया.
योजना को दिया अंजाम
आखिरकार 30 जनवरी, 2021 को उन्हें सही मौका मिल गया. इस के लिए उन्होंने कुछ दिनों तक रेकी भी की. जब उन लोगों को पता चला कि तरुण अपने गांव गया है और उस का छोटा भाई इंद्रजीत भी घर पर नहीं है, तो मौका पा कर आनंद और अजय दीपक को ले कर खम्हारडी स्थित उन के बंगले पर पहुंच गए.
उस समय रात के करीब साढ़े 9 बजे थे. तीनों बेरोकटोक बंगले के मुख्य दरवाजे पर पहुंच गए. उस वक्त नेहा अपनी 9 साल की बेटी अनन्या उर्फ पीहू के साथ खेल रही थी. घंटी बजी तो अनन्या बोली, ‘‘देखो मम्मी, लगता है पापा आ गए हैं.’’
नेहा दरवाजा खोलने के लिए चली, तभी दोबारा घंटी बजी तो नेहा बोली, ‘‘रुको, आ रही हूं.’’
नेहा ने जैसे ही दरवाजा खोला. दोनों ननदोई और एक अपरिचित व्यक्ति सामने खड़े थे. उन्हें देखते ही वह बोली, ‘‘इस वक्त, खैरियत तो हैं?’’
‘‘हां, सब ठीक हैं. क्या हमें अंदर आने को नहीं कहोगी,’’ आनंद बोला.
नेहा एक तरफ होती हुई बोली, ‘‘आइए.’’
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