Father’s Day Special- मौहूम सा परदा: भाग 3

‘अब्बू इतनी सुबह गए कहां’, इस प्रश्न पर सोचतेसोचते दोनों लड़के आपस में उलझ गए. साजिद ने साफ कह दिया, ‘‘गलती शाहिद भाई की है. अम्मी ने हमारे साथ कभी कोई बदसलूकी नहीं की. बल्कि हमेशा प्यार से हमारी परवरिश की. फिर शाहिद भाई के मन में ऐसे खयालात कैसे पैदा हुए जिन की वजह से कल उस ने अब्बू के सामने अम्मी के खिलाफ ऐसी बेहूदा बातें कीं. अगर किसी वजह से उन को निजी तौर पर अम्मी के खिलाफ कुछ शिकायत थी तो उसे मोहूम से परदे में ही रहने देते. इस तरह अब्बू के सामने उन्हें पेश कर के क्या हासिल हुआ. अरे, कुछ हासिल होना तो दूर, मुझे तो ऐसा लगता है कि हम कहीं अब्बू को खो न दें.’’ इतना कह कर साजिद चुप हो गया.

थोड़ी देर खामोशी पसरी रही, फिर साजिद ही बोला, ‘‘चलो, अब चल कर ढूंढ़ो तो सही, अब्बू गए कहां हैं, आखिरकार,’’ दोनों भाई चलने को तैयार हुए ही थे कि दरवाजे की घंटी बजी. गेट पर एक आटो चालक को खड़ा देख कर शाहिद भिनभिनाया, ‘‘अब यह कौन है, एक नई मुसीबत सुबह ही सुबह?’’

‘‘अरे चुप रहिए, देखिए, कहीं अब्बू ही न हों,’’ शाहिद की बीवी ने डांटते हुए कहा.

आटोरिक्शा वाला घर के लोगों को बाहर आया देख कर गेट खोल कर अंदर आ गया और बोला, ‘‘हजरात, आप जनाब डा. साहब के साहबजादे ही हैं न?’’

‘‘हां, मगर आप कौन हैं. और डाक्टर साहब यानी हमारे अब्बू कहां हैं?’’

दोनों के सवाल के जवाब में आटोचालक बोला, ‘‘साहबान, हमारा नाम रमजानी है, हम आप के पास की कच्ची बस्ती में ही रहते हैं. पहले यूनिवर्सिटी की डिलीवरी वैन चलाते थे. 3 साल से रिटायर हो गए. रिटायर होने से गुजरबसर में परेशानी होने लगी तो डाक्टर साहब ने हमें यह आटोरिक्शा अपनी जमानत पर फाइनैंस करा दिया. आज सवेरे 4 बजे के करीब डाक्टर साहब हमारे घर आए और बोले, ‘रमजानी, तुम्हें बेवक्त जगा कर तकलीफ दे रहे हैं लेकिन अगर तुम हमें अभी एअरपोर्ट छोड़ दोगे तो हमें सुबह 6 बजे दिल्ली के लिए फ्लाइट मिल जाएगी और वहां से शाम को हमें लंदन की फ्लाइट मिल जाएगी. तुम्हारी भाभी को वहां अपने इस पुराने सितार की बड़ी जरूरत है. अगर यह मेहरबानी कर दो तो काम बन जाएगा.’

‘‘हजरात, डाक्टर साहब के ये शब्द सुन कर हम तो शर्म से ऐसे गड़़ गए कि उन्हें सलाम करना तक भूल गए. जल्दी से कपड़े पहने, आटो निकाला और उन्हें बिठा कर चल दिए. एअरपोर्ट पहुंच कर वे आटो से उतरे, सितार निकाला और हजार का एक नोट हमारे हाथ में थमा कर बोले, ‘रमजानी, मेरे पास छुट्टा नहीं हैं, तुम्हारी बोहनी का समय है, रख लो. देखो, मना मत करना.’ यह कह कर हमारी मुट्ठी बंद कर के तेजी से एअरपोर्ट की बिल्ंिडग में दाखिल हो गए. हम तो बोडम की तरह देखते ही रह गए. भैया, हम डाक्टर साहब की बहुत इज्जत करते हैं. सो, एअरपोर्ट तक का किराया 120 रुपए रख लिया है. बाकी के यह 880 रुपए आप हजरात रखें.’’ कह कर उस ने कुछ नोट शाहिद के हाथ पर रख दिए. फिर बोला, ‘‘हां, यह खत भी दिया था. घर पर देने को,’’ कह कर कमीज की जेब से एक लिफाफा निकाल कर शाहिद के हाथ में थमा कर सलाम कर के वह चला गया.

आटोचालक के जाते ही साजिद ने शाहिद से तल्ख आवाज में कहा, ‘‘अब जनाब लिफाफा खोल कर खत पढ़ कर बताने की जहमत फरमाएं कि अब्बा हुजूर आप की तकरीर से खुश हो कर क्या पैगाम दे गए हैं.’’

शाहिद ने कांपते हाथों से लिफाफा खोला, कौपी के एक पन्ने पर शायद चलते वक्त कांपते हाथों से लिखा था, ‘‘शाहिद साहब, राबिया बेगम के बारे में आप ने अपने खयालात को आज तक मोहूम से परदे में रखा. उस के लिए शुक्रिया. अगर आप के खयालात उन की मौजूदगी में रोशन होते तो शायद वे तो शर्म और दुख से जीतेजी ही मर जातीं. हम कोशिश करेंगे कि अब इस घर में कभी वापस आना न हो. हमारे पास इल्म और फन के साथ आपसी प्यारमुहब्बत और विश्वास की जो अकूत दौलत है उस के सहारे

हम मजे से जिंदा रह लेंगे. तुम सब खुश रहो.’’ खत के अंत में उन्होंने हमेशा की तरह ‘तुम्हारा अब्बू’ नहीं लिख कर लिखा था, ‘‘किसी का कोई नहीं, जाकिर अली.’’

खत का मजमून सुन कर घर के सभी लोग थोड़ी देर गुमसुम खड़े रहे और शाहिद को तनहा छोड़ कर कोठी के अंदर चले गए.

पता नहीं कितना समय गुजर गया. अचानक अजब तरह के शोर से शाहिद चौंका. उस ने देखा एक मादा लंगूर कोठी के बाग के एक पुराने पेड़ की सब से ऊंची शाखा पर चढ़ कर वहां से हवेली की छत पर पहुंच कर महफूज पनाह पाने के जनून में पेड़ों के बीच में से निकल रहे बिजली के तारों की चपेट में आ कर शायद मर गई है. हाइटैंशन पावर के तार होने से उस का शरीर फट गया था. मगर पता नहीं कैसे उस की गोद में चिपका उस का छोटा सा बच्चा उस की गोद से गिर कर नीचे जमीन पर आ पड़ा था. मादा लंगूर को तारों में लटकता देख कर सारे लंगूर पेड़ पर चढ़ कर हूपहूप की आवाज में चिल्ला कर अपना आक्रोश प्रकट कर रहे थे.

उधर, मां की गोद से छिटक कर जमीन पर पड़ा छोटा सा बेसहारा बच्चा अपनी भाषा में अपनी मां को पुकार रहा था और रक्षा की गुहार लगा रहा था. लंगूर के बच्चे को जमीन पर पड़ा देख कर लंगूरों का जानी दुश्मन उन का पालतू शेफर्ड जाति का खूंखार कुत्ता उस की तरफ लपका. वह उस के करीब पहुंच ही गया था कि अचानक पेड़ की डाल से एक मादा लंगूर कूदी. उस ने झपट कर बच्चे को गोदी में चिपकाया और कुत्ते के ऊपर से छलांग लगा कर खिड़की के छज्जे पर बैठ गई. बच्चा, एक मां की गोद में आ कर, अब बेहद आश्वस्त हो गया था. उस ने चीखना बंद कर दिया था.

यह दृश्य देख कर शाहिद को अपने खुद के अंदर कुछ पिघलता हुआ लगा. उस की मां की मौत के बाद से राबिया बेगम के उन की मां बनने और उन के द्वारा की गई परवरिश के बाद अब कल उस के मुंह से उन्हें राबिया बेगम कहे जाने तक का सारा माही कुछ लमहों में उस की आंखों के सामने एक फिल्म की रील के दृश्यों की तरह तेजी से गुजर गया. उस की आंखों से आंसू बहने लगे. तभी उस की बीवी हाथ में मोबाइल फोन लिए लपकती हुए आई और बोली, लंदन से आप की अम्मी का फोन, वे अब्बू को पूछ रही हैं, क्या कहना है.’’

उस ने जलती नजरों से बीवी को देखा. मोबाइल फोन उस के हाथ से छीना और रुंधे स्वर में बोला, ‘‘अम्मी आदाब, अम्मी, मैं शाहिद, आप का बेटा शाहिद. अम्मी आप हमें किस बात की सजा दे रही हैं जो हमें एकदम तनहा छोड़ कर चली गई हो. आ जाओ, अम्मी. आप को हमारी…अपने बच्चों की खुशियों के लिए वापस आ जाओ, अम्मी. मैं आप के बिना अपने को बिलकुल तनहा महसूस कर रहा हूं. एक हफ्ते में आ जाइए.’’ कहतेकहते शाहिद की हिचकिया बंध गईं तो साजिद ने फोन ले कर अम्मी की मानमनौवल शुरू कर दी.

साजिद की अम्मी से मानमनौवल पूरी हो गई थी. वह बोला, ‘‘भाईजान, आप ने रात को भी कुछ नहीं खाया, आप कुछ नाश्ता कर लीजिए. मैं ने रहमत चाचा से कार निकालने के कह दिया है. अभी निकलेंगे तो अब्बू की फ्लाइट के लिए सिक्योरिटी चैकइन के लिए एअरपोर्ट पहुंचने तक हम भी

वहां पहुंच जाएंगे. उन्हें मना कर ले कर आएंगे.’’

‘‘साजिद, मैं ने रात को खाना नहीं खाया तो तुम ने कौन सा खाया था. तुम नाश्ता कर लो, मैं तो जब तक अब्बू से मिल कर माफी नहीं मांग लेता, नहीं खाऊंगा. तुम सब यही मनाओ कि अब्बू मिल जाएं और मुझे माफ कर दें.’’ इतना कह कर उस ने सिर झुका लिया.

Crime: मुझे बचा लो, पिताजी मुझे मार डालेंगे!

छत्तीसगढ़ के जिला कोरबा  के कटघोरा थाना अंतर्गत  छत्तीसगढ़ प्रदेश की प्राचीन राजधानी कहे जाने वाले  “तुमान” नामक ग्राम में हुए एक युवती की हत्या की गुत्थी को सुलझाने में पुलिस को बड़ी मशक्कत के बाद सफलता मिली .

कटघोरा थाना प्रभारी अविनाश सिंह  व पुलिस की टीम ने हत्या की तह तक जांच कर संदिग्ध आरोपी से कड़ी पूछताछ की और अंततः हत्यारे ने अपना गुनाह कबूल कर लिया.

हत्या की वजह प्रेम प्रसंग है- प्रेमी ने युवती कृष्णा कुमारी गोस्वामी( 21 वर्ष )की बेवफाई के शक में उसे मौत की नींद सुला दिया. कृष्णा हत्या कांड में पुलिस की गहन जांच में यह तथ्य सामने आया की एक टीवी सीरियल के अपराधिक कार्यक्रम को देखकर प्रेमी ने संगीन तरीके से हत्या की घटना को अंजाम  दिया . पुलिस अधिकारी ने हमारे संवाददाता को बताया कि  दिगपाल दास गोस्वामी की  बेटी कृष्णा  गोस्वामी का  एक युवक संजय चौहान के साथ पिछले कुछ वर्षों से प्रेम संबंध था. संजय कृष्णा कुमारी के घर भी आया जाया करता था.

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कृष्णा गोस्वामी के ब्वाय फ्रेंड संजय के अलावा अन्य लड़कों  से भी ,  हो गई थी और मोबाइल में बात चीत व चैटिंग किया करती थी. इस दरमियान  कृष्णा की  कटघोरा के एक युवक नेमेंद्र देवांगन से ऑनलाइन मोबाइल गेम के जरिये मित्रता हुई और दोनों के बीच मोबाइल से बातचीत भी होने लगी, जिसकी भनक  प्रेमी संजय को हो गई जिसके कारण संजय  कृष्णा से इस बात को लेकर सख्त नाराज़ रहने लगा था.

और उतारा मौत के घाट

प्रेमी संजय चौहान ने एक टेलीविजन सीरियल  को देखकर उसी अंदाज़ में प्रेमिका कृष्णा की हत्या को अंजाम दिया. घटना के दिन  संजय युवती कृष्णा के घर पहुँचा और कहने लगा – “तू मझे धोखा दे रही है देखना कहा मैं तुझे मार डालूंगा. तू किसी और लड़के से सम्बंध बना रही है.”

इस पर कृष्णा ने उसकी बातों को हंस कर ध्यान नहीं दिया. उसे घर में बिठाया  चाय पीने के बाद  वह वापस चला गया.

रात तकरीबन डेढ़ बजे संजय बिना चप्पल व मोबाइल के युवती के घर पहुँचा और कृष्णा को बहलाकर उसके मोबाइल से अपने मोबाइल व कटघोरा के युवक नेमेन्द्र के मोबाइल पर कृष्णा से मैसेज पोस्ट करवाया – “मुझे बचा लो, मेरे पिताजी मुझे मार डालेंगे” उसके बाद कृष्णा के घर पर रखी साड़ी से कृष्णा का गला दबाकर घर के पीछे की बाड़ी में ले जा कर  मार दिया. सुबह जब कृष्णा के पिता दिगपाल घर के पीछे बाडी में गया तो कृष्णा मृत अवस्था में पड़ी हुई मिली गले में साड़ी लिपटी हुई थी  उन्होंने कृष्णा के गले से साड़ी के फंदे को हटाया और देखा तो कृष्णा मर चुकी थी. घटना की सूचना  थाना में दी गई.

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 विवाद का फायदा उठाया प्रेमी ने

कटघोरा पुलिस  थाना प्रभारी  द्वारा की गई कड़ी पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली दिगपाल  अपनी  बेटी कृष्णा कुमारी गोस्वामी का विवाह जिला सूरजपुर में करना चाहता  था लेकिन बेटी कृष्णा इस शादी को लेकर इंकार कर रही थी. जिसे लेकर बाप बेटी में  विवाद होता था इस बात की जानकारी कृष्णा के प्रेमी संजय को थी और इस बात का फायदा उठाकर सबसे पहले घटना के दिन उसने कृष्णा को धमकाकर अपने व कटघोरा के युवक नेमेन्द्र देवांगन के मोबाइल में पिता के खिलाफ मैसेज करवाया जिससे पुलिस का शक कृष्णा के पिता पर चला जाए.

और पहले हुआ भी यही हत्या की जांच में पहुचे सायबर सेल व खोजी बाघा ने भी मृतका कृष्णा कुमारी गोस्वामी के पिता को ही संदेही हत्यारा बताया. सायबर सेल ने जांच में पाया की कृष्णा के मोबाइल से मैसेज किया गया है जिसमें कृष्णा के द्वारा लिखा गया था कि उसे पिता से उसको जान का खतरा है. और दिगपाल द्वारा सुबह मृतका के गले से साड़ी के फंदे को हटाना भी खोजी बाघा द्वारा दिगपाल को निधानदेही होना बताया गया था. लेकिन  पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह मीणा इस जांच से संतुष्ट नही थे.

तुमान हत्याकांड में युवती कृष्णा की हत्या में कृष्णा के पिता और भाई तथा प्रेमी संजय चौहान व कटघोरा के युवक नेमेन्द्र देवांगन को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू हुई लेकिन पिता ने बार बार  फरियाद की कि उसने बेटी की हत्या हत्या नहीं कि है. अंततः कटघोरा निरीक्षक ने कड़ी पूछताछ में आरोपी संजय चौहान ने हत्या का गुनाह कबूल‌ कर  लिया.

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पुलिस को सायबर से जानकारी मिली कि संजय अपना मोबाइल कभी बंद नहीं करता था और जब भी वो कृष्णा के घर जाता था तो भी मोबाइल लेकर जाता था लेकिन घटना के दिन उसका मोबाइल बंद था और वह मोबाइल लेकर नहीं गया  था कृष्णा के मोबाइल से मैसेज खुद न लिख कर उसने कृष्णा से मैसेज लिखवाया और पोस्ट करवाया ताकि हत्या के आरोप में  पिता जेल चला जाए और वह  पुलिस  पकड़ से दूर रहे. मगर उसकी चालाकी किसी काम नहीं आई.

यारियां फेम एक्टर Himansh Kohali के इस Music वीडियो को मिले 130 मिलियन से भी ज्यादा व्यूज, देखें Video

इन दिनों अभिनेता हिमांश कोहली के पैर हवा में हैं. उनके नए म्यूजिक वीडियो ‘‘वफा ना रास आयी’’ ने 130 मिलियन व्यूज का आंकड़ा छू कर एक नए इतिहास को रचा है. इस उपलब्धि से अभिनेता हिमांश कोहली खुश और अति उत्साहित हैं. वह कहते हैं-‘‘मैं उत्साहित, अभिभूत, अद्भुत महसूस कर रहा हूं और सब कुछ बहुत अच्छा है. मुझे इस गाने से काफी उम्मीदें थीं, क्योंकि मैंने अपने अभिनय के साथ इसमें नया प्रयोग किया और कुछ नया करने की कोशिश की.

लोगों ने मेरी इस नई कोशिश को स्वीकार मुझे सदैव नया करते रहने के लिए प्रेरित किया है. सच कहूं तो मैं स्वंय देखना चाहता था कि दर्शक मुझे इस नई भूमिका में स्वीकार करेंगे या नहीं. मुझे दर्शकों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली.”

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himansh

इससे पहले हिमांश कोहली का एक अन्य गीत ‘‘जिस दिन भुला दूं तेरा प्यार’’ भी 15 करोड़ को पार कर चुका है. इस पर वह कहते हैं-‘‘ मेरे लिए यह सब किसी वरदान से कम नहीं है. मैं यह देखने के लिए इंतजार कर रहा हूं कि यह कितना आगे जा सकता है और यह किस ऊंचाई को मापता है.”

फिल्म ‘‘यारियां’’ फेम अभिनेता हिमांश कोहली अपने इन दोनों गानों की सफलता से गदगद हैं. वह कहते हैं-‘‘देखिए,इन गानों और इनके वीडियो देखकर कुछ लोगो ने कहा है ‘हिमांश, आप एक अभिनेता के रूप में विकसित हुए हैं. ‘जब मैंने उन संदेशों और टिप्पणियों को पढ़ा तो मेरी आँखों को विश्वास नहीं हुआ. कुछ लोगा ने कहा, ‘आप पर और आपकी कड़ी मेहनत पर गर्व है‘ और यह कि ‘वफा ना रास आई‘ निश्चित रूप से आपके बेहतरीनस कामों में से एक है. बधाई हो!’”इस तरह की प्रतिक्रियाएं पढ़कर मैं बहुत भावुक हो गया.’’

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हिमांश आगे कहते हैं- ‘‘लॉकडाउन में म्यूजिक वीडियो ने काफी लोकप्रियता हासिल की.म्यूजिक वीडियो का फिल्मांकन करना आसान है,क्योंकि इसके लिए एक छोटे क्रू की आवश्यकता होती है और इसे कम दिनों में किया जा सकता है. तालाबंदी के दौरान लोग स्वतंत्र थे और मनोरंजक सामग्री की मांग अपने चरम पर थी.लोगों के पास अपने फोन, टीवी या लैपटॉप पर कुछ देखने के अलावा मनोरंजन का कोई अन्य व्यवहारिक साधन नहीं था.

 

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सोशल मीडिया नेटवर्किंग ऐप्स जैसे इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स आदि जैसे शॉर्ट वीडियो फीचर बनाने के कारण यह मांग और भी बढ़ गई. इसलिए संगीत वीडियो के प्रति यह आकर्षण अचानक बढ़ा है.’’

अब वह किस तरह के संगीत वीडियो करना चाहेंगें? इस सवाल पर हिमांश कोहली कहते हैं-‘‘मुझे लगता है कि अगर म्यूजिक वीडियो डांस नंबर है, तो मैं नोरा फतेही के साथ करना पसंद करूंगा. क्योंकि वह सचमुच सबसे हॉट डांसर हैं, और बेहद प्रतिभाशाली हैं.”

हिमांश कोहली ने अपने कैरियर की षुरूआत में काफी संगीत वीडियो किए हैं.अब पुनः इसका चलन होने से हिमांश काफी खुश हैं.वह कहते हैं- ‘’मुझे लगता है कि मैं इसे पुनः आरंभ करने वाला पहला व्यक्ति नहीं था.इमरान हाशमी ने अपना म्यूजिक वीडियो ‘मैं रहूं या न रहूं’ रिलीज किया.

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फिर टाइगर श्रॉफ ने ‘चल वहां जाते हैं’ और ऋतिक रोशन ने ‘धीरे धीरे से’ रिलीज किया.यह सभी अपने संगीत वीडियो जारी करने वालों में शामिल थ. संगीत वीडियो करने के पीछे मेरा विचार यह है कि संगीत हमेशा के लिए बना रहता है, और यह एक चलन से जुड़ा नहीं है जैसा कि इन दिनों सोशल मीडिया ऐप द्वारा कहा जा रहा है.हर संगीत ट्रैक एक मूड को दर्शाता है और लोग आपको उस ट्रैक के साथ याद करते हैं.हां, मैं इस बात से सहमत हूं कि इसने मेरे पक्ष में काम किया है, लेकिन मैं अभी भी अधिक से अधिक काम करके अपनी योग्यता साबित करना चाहता हूं.

अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के टीकाकरण पर उत्तर प्रदेश का जोर

लखनऊ . कोरोना टीकाकरण को लेकर मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की जनता से की गई अपील का असर मंगलवार को नजर आया. खासकर अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के लोगों में टीकाकरण को लेकर काफी उत्‍साह नजर आया. लख्‍नऊ के छोटे इमामबाड़े में बनाए गए कोविड टीकाकरण केन्‍द्र पर सुबह से ही टीका लगवाने के लिए लम्‍बी लाइन दिखाई दी. इसे पहले इस्‍लामिक सेंटर आफॅ इंडिया ईदगाह में वैक्‍सीनेशन सेंटर बनाया गया है. इस मौके पर शिया धर्मगुरू मौलाना कल्‍बे जवाद व जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने टीकाकरण केन्‍द्र पहुंच कर व्‍यवस्‍थाओं का जायजा लिया. इस दौरान उन्‍होंने लोगों को टीकाकरण के फायदे बताए .

यूपी में मंगलवार से विश्‍व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरूआत हुई है. इस पूरे अभियान के दौरान एक करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण किया जाएगा. उत्तर प्रदेश में 18 से 44 वर्ष की आयु के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में दो-दो और शहरी क्षेत्र में तीन-तीन विशेष टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं. बड़े जिलों में आवश्यकता के अनुसार दो केंद्र बढ़ाने की अनुमति दी गई है. वहीं 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के अभिभावकों के लिए भी दो-दो विशेष टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं.

अल्‍पसंख्‍यक समुदाय में उत्‍साह

लखनऊ में हुसैनाबाद स्थित  छोटे इमामबाड़े में कोरोना वैक्‍सीनेशन के लिए बड़ा केन्‍द्र बनाया गया था. सुबह से ही लोग उत्‍साह के साथ टीकाकरण अभियान में शामिल हो रहे थे. इस मौके पर इमाम ए जुमा मौलाना कल्‍बे जवाद ने टीकाकरण केन्‍द्र पहुंच कर लोगों को टीके के फायदे बताए . उन्‍होंने कहा कि कोरोना से बचाव का एक मात्र तरीका कोरोना टीका है. उन्‍होंने लोगों से अपील की वह किसी भी तरह की अफवाह में न आए और अपना टीकाकरण कराए. टीकाकरण को लेकर अफवाहे फैलाने वाले मुस्लिम समुदाय के दुश्‍मन है.

हुसैनाबाद निवासी शहजाद ने बताया कि सरकार ने पुराने लखनऊ में बड़ा केन्‍द्र बनाकर लोगों को राहत दी है. पुराने लखनऊ के लोगों को टीका लगवाने के लिए काफी दूर जाना पड़ रहा था. ऐसे में जिन लोगों के पास साधन नहीं थे, वह टीका नहीं लगवा रहे थे. सरकार छोटा इमामबाड़े में केन्‍द्र लगाने से लोगों को काफी राहत पहुंची है. छोटे इमामबाड़े में 18 से 44 साल के लोगों का अलग टीकाकरण किया जा रहा था जबकि 44 से ऊपर के लोगों का टीकाकरण अलग से किया जा रहा था. टीकाकरण केन्‍द्र पर सेल्‍फी प्‍वाइंट भी बनवाया गया था. जहां पर युवाओं ने टीका लगवाने के बाद अपनी सेल्‍फी ली. वहीं, मौके पर मौजूद सिविल डिफेंस कर्मी लोगों के बीच सोशल डि‍स्‍टेंसिंग बनाने का काम कर रहे थे.

टीकाकरण केन्‍द्र पर बड़े पैमाने पर मुस्लिम महिलाएं भी उपस्थित थी. जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने छोटा इमामबाड़ा स्थित टीकाकरण केन्‍द्र का निरीक्षण किया. उन्‍होंने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से आसपास के इलाकों से टीकाकरण केन्‍द्र तक लाने के लिए विशेष बसों का संचालन भी किया गया था. इसमें बिल्‍लौचपुरा, अकबरीगेट आदि से बसें लोगों को टीकाकरण केन्‍द्र तक ला रही थी. वहीं, सरकार ने जून महीने में एक करोड़ टीके लगाकर इस संख्या को तीन करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.

‘Yeh Rishta’ में धूमधाम से होगी सीरत-रणवीर की शादी, पर कार्तिक के चेहरे पर छायी उदासी

स्टार प्लस का मशहूर सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) में इन दिनों लव ट्रैंगल दिखाया जा रहा है. कहानी का ट्रैक सीरत, कार्तिक और रणवीर के आसपास घूम रही है. शो में आए दिन नए-नए ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. आइए जानते हैं शो के आगे की कहानी.

शो में आपने देखा कि रणवीर के पिता नरेन्द्र नाथ चौहान की एंट्री से खूब धमाल हो रहा है और कहानी में जबरदस्त मोड़ आ चुका है. जिस होटल में रणवीर और सीरत की शादी की तैयारियां चल रही है. वहां रणवीर के पिता नरेन्द्रनाथ पहुंच गया है.

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एक तरफ कार्तिक सीरत को ग्रीन रूम में ले जाता है. वहां शादी के लिए तैयार होती है तो वहीं रणवीर और उसके पिता में बहस होती है. रणवीर कहता है कि हर बाप अपने बेटे की शादी पर खुश होता है और बेटे को आशीर्वाद देता है. लेकिन आपने मुझे क्या दिया, मेरे सीने पर गोली मारी.

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तो वहीं चौहान कहता है कि कौन-सा बेटा अपने पिता के खिलाफ शादी करता है. तुमने अपने पिता की प्रतिष्ठा और बिजनेस को बर्बाद कर दिया. फिर रणवीर कहता है कि मुझमें आपका खून है,. आपने मेरा प्यार छीना इसलिए अपना अपना कारोबार खो दिया.

तो उधर सीरत कार्तिक के साथ शादी के मंडप में पहुंचती है. सीरत दुल्हन के जोड़े में काफी खूबसूरत नजर आ रही है. मंडप में सीरत को देखते ही रणवीर खुश हो जाता है.  अब शो के अपकमिंग एपिसोड में  सीरत-रणवीर की शादी का ट्रैक देखना दिलचस्प होगा.

Rani Chatterjee का बॉयफ्रेंड से हुआ ब्रेकअप, शादी की कर रहे थे प्लानिंग

भोजपुरी इंडस्ट्री की मशहूर एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) इन दिनों अपने लवलाइफ को लेकर सुर्खियों में छायी हुई हैं. दरअसल रानी चटर्जी ने इस साल वैलेंटाइन डे पर अपने रिलेशनशिप को लेकर खुलासा किया था. और कुछ दिन पहले ये भी बताया जा रहा था कि एक्ट्रेस जल्द ही मंदीप बामरा (Mandeep Bamra) के साथ शादी करने वाली है. लेकिन अब खबर यह आ रही है कि उनका ब्रेकअप हो गया है.

जी हां, रिपोर्ट के मुताबिक, रानी और मंदीप काफी लंबे समय से रिलेशनशिप में थे. उन दोनों का परिवार भी चाहता था कि वे शादी कर लें. लेकिन अब दोनों के बीच अनबन हुआ है. रानी चटर्जी ने इस शादी से इनकार कर दिया है. इतना ही नहीं दोनों ने एक दूसरे को सोशल मीडिया पर अनफॉलो भी कर दिया है.

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आपको बता दें कि रानी ने सोशल मीडिया पर बताया था कि, यह एक लव-कम-अरेंज मैरिज है. उन्होंने आगे बताया कि  मैंने आखिरकार मनदीप बमरा के साथ अपने रिश्ते की घोषणा कर दी है. यह हमारा परिवार था जिसने इसे आधिकारिक बनाने का फैसला किया था.

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खबर यह भी आ रही थी कि एक्ट्रेस ने  पब्लिकेशन के साथ अपनी शादी की योजनाओं के बारे में भी बात की थी और कहा था, ‘मैं अभी शादी की तारीख की पुष्टि नहीं कर सकती क्योंकि मुझे नहीं पता शायद मैं इस साल शादी कर लूं.  मैंने अपने करीबी दोस्तों को भी शादी के बारे में नहीं बताया है.

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करण मेहरा के खिलाफ निशा रावल ने दिया ये बयान तो भड़के Gaurav Chopra, जानिए क्या कहा

टीवी इंडस्ट्री की मशहूर जोड़ी  करण मेहरा (Karan Mehra) और निशा रावल (Nisha Rawal) की शादी टूटने के कगार पर है. कुछ टाइम पहले ही निशा रावल ने  करण मेहरा को लेकर बड़ा खुलासा किया था. निशा ने दवा किया था कि करण मेहरा (Karan Mehra) का किसी दूसरी महिला के साथ अफेयर चल रहा है, जिसके चलते वो उनके साथ मारपीट किया करते थे.

बीते दिनों से करण मेहरा और निशा रावल के रिश्ते को लेकर हर कोई जज करने में जुटा हुआ है.  इस बीच उनके कई दोस्तों ने सामने आकर इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी है. तो अब एक्टर गौरव चोपड़ा ने उन लोगों को  करारा जवाब दिया है, जो करण को खरी-खोटी सुना रहे हैं.

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एक रिपोर्ट के मुताबिक बिग बौस फेम गौरव चोपड़ा ने कहा है, अगर हम पब्लिक में रिलेशनशिप को लेकर बात करते हैं, भले ही वो मदद के लिए हो, जो भी ये सब पढ़ता है उसे पर्सनल स्पेस में घुसने का मौका मिल जाता है और लोग अपे अपने हिसाब से जजमेंट पास करने लगते हैं. मैं ऐसा तो अपने दोस्तों के साथ नहीं होने देना चाहूंगा. मैं चाहता हूं कि गरिमा बनाए रखी जाए.

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गौरव चोपड़ा ने इस कपल को जज करने वालों को  खूब सुनाया है. एक्टर का कहना है कि ये पर्सनल मामला है और किसी को भी हक नहीं है जज करने का..या इस मामले में दखल देने का. मैं नहीं चाहता हूं कि लोग पब्लिक में आकर ऐसे हर बात कहें.

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उन्होंने आगे ये भी कहा कि  मुझे नहीं लगता है कि मैं इतना सहज हो पाऊंगा या किसी एक की साइड ले पाऊंगा. मैं सालों से करण को भाई जैसा मानता हूं और निशा भी मेरी अच्छी दोस्त है.

आसरा- भाग 1: नासमझ जया को करन से प्यार करने का क्या सिला मिला

लेखक- मीनू सिंह

धूप का एक उदास सा टुकड़ा खिड़की पर आ कर ठिठक गया था, मानो अपने दम तोड़ते अस्तित्व को बचाने के लिए आसरा तलाश रहा हो. खिड़की के पीछे घुटनों पर सिर टिकाए बैठी जया की निगाह धूप के उस टुकड़े पर पड़ी, तो उस के होंठों पर एक सर्द आह उभरी. बस, यही एक टुकड़ा भर धूप और सीलन भरे अंधेरे कमरे का एक कोना ही अब उस की नियति बन कर रह गया है.

अपनी इस दशा को जया ने खुद चुना था. इस के लिए वह किसे दोष दे? कसूर उस का अपना ही था, जो उस ने बिना सोचेसमझे एक झटके में जिंदगी का फैसला कर डाला. उस वक्त उस के दिलोदिमाग पर प्यार का नशा इस कदर हावी था कि वह भूल गई कि जिंदगी पानी की लहरों पर लिखी इबारत नहीं, जो हवा के एक झोंके से मिट भी सकती है और फिर मनचाही आकृति में ढाली भी जा सकती है.

जिंदगी तो पत्थर पर उकेरे उन अक्षरों की तरह होती है कि एक बार नक्श हो गए तो हो गए. उसे न तो बदला जा सकता है और न मिटाया जा सकता है. अपनी भूल का शिद्दत से एहसास हुआ तो जया की आंखें डबडबा आईं. घुटनों पर सिर टिकाए वह न जाने कब तक रोती रही और उस की आंखों से बहने वाले आंसुओं में उस का अतीत भी टुकड़ेटुकड़े हो कर टूटताबिखरता रहा.

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जया अपने छोटे से परिवार में  तब कितनी खुश थी. छोटी बहन अनुपमा और नटखट सोमू दीदीदीदी कहते उस के चारों ओर घूमा करते थे. बड़ी होने की वजह से जया उन दोनों का आदर्श भी थी, तो उन की छोटी से छोटी समस्या का समाधान भी. मां आशा और पिता किशन के लाड़दुलार और भाईबहन के संगसाथ में जया के दिन उन्मुक्त आकाश में उड़ते पंछी से चहकते गुजर रहे थे.

इंटर तक जया के आतेआते उस के भविष्य को ले कर मातापिता के मन में न जाने कितने अरमान जाग उठे थे. अपनी मेधावी बेटी को वह खूब पढ़ाना चाहते थे. आशा का सपना था कि चाहे जैसे भी हो वह जया को डाक्टर बनाएगी जबकि किशन की तमन्ना उसे अफसर बनाने की थी.

जया उन दोनों की चाहतों से वाकिफ थी और उन के प्रयासों से भी. वह अच्छी तरह जानती थी कि पिता की सीमित आय के बावजूद वह  दोनों उसे हर सुविधा उपलब्ध कराने से पीछे नहीं हटेंगे. जया चाहती थी कि अच्छी पढ़ाई कर वह अपने मांबाप के सपनों में हकीकत का रंग भरेगी. इस के लिए वह भरपूर प्रयास भी कर रही थी.

उस के सारे प्रयास और आशा तथा किशन के सारे अरमान तब धरे के धरे रह गए जब जया की आंखों  में करन के प्यार का नूर आ समाया. करन एक बहार के झोंके की तरह उस की जिंदगी में आया और देखतेदेखते उस के अस्तित्व पर छा गया.

वह दिन जया कैसे भूल सकती है जिस दिन उस की करन से पहली मुलाकात हुई थी, क्योंकि उसी दिन तो उस की जिंदगी एक ऐसी राह पर मुड़ चली थी जिस की मंजिल नारी निकेतन के सीलन भरे अंधेरे कमरे का वह कोना थी, जहां बैठी जया अपनी भूलों पर जारजार आंसू बहा रही थी. लेकिन उन आंसुओं को समेटने के लिए न तो वहां मां का ममतामयी आंचल था और न सिर पर प्यार भरा स्पर्श दे कर सांत्वना देने वाले पिता के हाथ. वहां थी तो केवल केयरटेकर की कर्कश आवाज या फिर पछतावे की आंच में सुलगती उस की अपनी तन्हाइयां, जो उस के वजूद को जला कर राख कर देने पर आमादा थीं. इन्हीं की तपन से घबरा कर जया ने अपनी आंखें बंद कर लीं. आंखों पर पलकों का आवरण पड़ते ही अतीत की लडि़यां फिर टूट-टूट कर बिखरने लगीं.

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जया के घर से उस का स्कूल ज्यादा दूर नहीं था. मुश्किल से 10-12 मिनट का रास्ता रहा होगा. कभी कोई लड़की मिल जाती तो स्कूल तक का साथ हो जाता, वरना जया अकेले ही चली जाया करती थी. उस ने स्कूल जाते समय करन को कई बार अपना पीछा करते देखा था. शुरूशुरू में उसे डर भी लगा और उस ने अपने पापा को इस बारे में बताना भी चाहा, लेकिन जब करन ने उस से कभी कुछ नहीं कहा तो उस का डर दूर हो गया.

करन एक निश्चित मोड़ तक उस के पीछेपीछे आता था और फिर अपना रास्ता बदल लेता था. जब कई बार लगातार ऐसा हुआ तो जया ने इसे अपने मन का वहम समझ कर दिमाग से निकाल दिया और इस के ठीक दूसरे ही दिन करन ने जया के साथसाथ चलते हुए उस से कहा, ‘प्लीज, मैं आप से कुछ कहना चाहता हूं.’

जया ने चौंक कर उस की ओर देखा और रूखे स्वर में बोली, ‘कहिए.’

‘आप नाराज तो नहीं हो जाएंगी?’ करन ने पूछा, तो जया ने उपेक्षा से कहा, ‘मेरे पास इन फालतू बातों के लिए समय नहीं है. जो कहना है, सीधे कहो.’

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‘मैं करन हूं. आप मुझे बहुत अच्छी लगती हैं.’ करन ने कुछ झिझकते और डरते हुए कहा.

अपनी बात कहने के बाद करन जया की प्रतिक्रिया जानने के लिए पल भर भी नहीं रुका और वापस मुड़ कर तेजी से विपरीत दिशा की ओर चला गया. करन के कहे शब्द देर तक जया के कानों में गूंजते और मधुर रस घोलते रहे. उस की निगाह अब भी उधर ही जमी थी, जिधर करन गया था. अचानक सामने से आती बाइक का हार्न सुन कर उसे स्थिति का एहसास हुआ तो वह अपने रास्ते पर आगे बढ़ गई.

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सौजन्य-मनोहर कहानियां

मोहन सिंह रसाल कंवर से भी बड़ी चिकनीचुपड़ी बातें करता था. जब डूंगरदान मजदूरी करने चला जाता और उस के बच्चे स्कूल तो घर में रसाल कंवर अकेली रह जाती. ऐसे मौके पर मोहन सिंह उस के यहां आने लगा. मीठीमीठी बातों में रसाल को भी रस आने लगा. मोहन सिंह अच्छीखासी कदकाठी का युवक था.रसाल और मोहन के बीच धीरेधीरे नजदीकियां बढ़ने लगीं.

थोड़े दिनों के बाद दोनों के बीच अवैध संबंध कायम हो गए. इस के बाद रसाल कंवर उस की दीवानी हो गई. डूंगरदान हर रोज सुबह मजदूरी पर निकल जाता तो फिर शाम होने पर ही घर लौटता था.

रसाल और मोहन पूरे दिन रासलीला में लगे रहते. डूंगरदान की पीठ पीछे उस की ब्याहता कुलटा बन गई थी. दिन भर का साथ उन्हें कम लगने लगा था. मोहन चाहता था कि रसाल कंवर रात में भी उसी के साथ रहे, मगर यह संभव नहीं था. क्योंकि रात में पति घर पर होता था.

ऐसे में एक दिन मोहन सिंह ने रसाल कंवर से कहा, ‘‘रसाल, जीवन भर तुम्हारा साथ तो निभाऊंगा ही, साथ ही एक प्लौट भी तुम्हें ले कर दूंगा. लेकिन मैं चाहता हूं कि तुम्हारे बदन को अब मेरे सिवा और कोई न छुए. तुम्हारे तनमन पर अब सिर्फ मेरा अधिकार है.’’

‘‘मैं हर पल तुम्हारा साथ निभाऊंगी.’’ रसाल कंवर ने प्रेमी की हां में हां मिलाते हुए कहा.

रसाल के दिलोदिमाग में यह बात गहराई तक उतर गई थी कि मोहन उसे बहुत चाहता है. वह उस पर जान छिड़कता है. रसाल भी पति को दरकिनार कर पूरी तरह से मोहन के रंग में रंग गई. इसलिए दोनों ने डूंगरदान को रास्ते से हटाने का मन बना लिया. लेकिन इस से पहले ही डूंगरदान को पता चल गया कि उस की गैरमौजूदगी में मोहन सिंह दिन भर उस के घर में पत्नी के पास बैठा रहता है.

यह सुनते ही उस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. गुस्से से भरा डूंगरदान घर आ कर चिल्ला कर पत्नी से बोला, ‘‘मेरी गैरमौजूदगी में मोहन यहां क्यों आता है, घंटों तक यहां क्या करता है? बताओ, तुम से उस का क्या संबंध है?’’ कहते हुए उस ने पत्नी का गला पकड़ लिया.

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रसाल मिमियाते हुए बोली, ‘‘वह तुम्हारा दोस्त है और तुम्हें ही पूछने आता है. मेरा उस से कोई रिश्ता नहीं है. जरूर किसी ने तुम्हारे कान भरे हैं. हमारी गृहस्थी में कोई आग लगाना चाहता है. तुम्हारी कसम खा कर कहती हूं कि मोहन सिंह से मैं कह दूंगी कि वह अब घर कभी न आए.’’

पत्नी की यह बात सुन कर डूंगरदान को लगा कि शायद रसाल सच कह रही है. कोई जानबूझ कर उन की गृहस्थी तोड़ना चाहता है. डूंगरदान शरीफ व्यक्ति था. वह बीवी पर विश्वास कर बैठा. रसाल कंवर ने अपने प्रेमी मोहन को भी सचेत कर दिया कि किसी ने उस के पति को उस के बारे में बता दिया है. इसलिए अब सावधान रहना जरूरी है.

उधर डूंगरदान के मन में पत्नी को ले कर शक उत्पन्न तो हो ही गया था. इसलिए वह वक्तबेवक्त घर आने लगा. एक रोज डूंगरदान मजदूरी पर गया और 2 घंटे बाद घर लौट आया. घर का दरवाजा बंद था. खटखटाने पर थोड़ी देर बाद उस की पत्नी रसाल कंवर ने दरवाजा खोला. पति को अचानक सामने देख कर उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं.

डूंगरदान की नजर कमरे में अंदर बैठे मोहन सिंह पर पड़ी तो वह आगबबूला हो गया. उस ने मोहन सिंह पर गालियों की बौछार कर दी. मोहन सिंह गालियां सुन कर वहां से चला गया. इस के बाद डूंगरदान ने पत्नी की लातघूंसों से खूब पिटाई की. रसाल लाख कहती रही कि मोहन सिंह 5 मिनट पहले ही आया था. मगर पति ने उस की एक न सुनी.

पत्नी के पैर बहक चुके थे. डूंगरदान सोचता था कि गलत रास्ते से पत्नी को वापस कैसे लौटाया जाए. वह इसी चिंता में रहने लगा. उस का किसी भी काम में मन नहीं लग रहा था. वह चिड़चिड़ा भी हो गया था. बातबात पर उस का पत्नी से झगड़ा हो जाता था.

आखिर, रसाल कंवर पति से तंग आ गई. यह दुख उस ने अपने प्रेमी के सामने जाहिर कर दिया. तब दोनों ने तय कर लिया कि डूंगरदान को जितनी जल्दी हो सके, निपटा दिया जाए.

रसाल कंवर पति के खून से अपने हाथ रंगने को तैयार हो गई. मोहन सिंह ने योजना में अपने दोस्त मांगीलाल को भी शामिल कर लिया. मांगीलाल भीनमाल में ही रहता था.

साजिश के तहत रसाल और मोहन सिंह 12 जुलाई, 2019 को डूंगरदान को उपचार के बहाने बोलेरो गाड़ी में जालौर के राजकीय चिकित्सालय ले गए. मांगीलाल भी साथ था. वहां उस के नाम की परची कटाई. डाक्टर से चैकअप करवाया और वापस भीनमाल रवाना हो गए. रास्ते में मौका देख कर रसाल कंवर और मोहन सिंह ने डूंगरदान को मारपीट कर अधमरा कर दिया. फिर उस का गला दबा कर उसे मार डाला.

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इस के बाद डूंगरदान की लाश को ठिकाने लगाने के लिए बोलेरो में डाल कर बोरटा से लेदरमेर जाने वाले सुनसान कच्चे रास्ते पर ले गए, जिस के बाद डूंगरदान के शरीर पर पहने हुए कपड़े पैंटशर्ट उतार कर नग्न लाश वन विभाग की खाली पड़ी जमीन पर डाल कर रेत से दबा दी. उस के बाद वे भीनमाल लौट गए.

भीनमाल में रसाल कंवर ने आसपास के लोगों से कह दिया कि उस का पति जालौर अस्पताल चैकअप कराने गया था. मगर अब उस का कोई पता नहीं चल रहा. तब डूंगरदान की गुमशुदगी उस के रिश्तेदार शैतानदान चारण ने जालौर सिटी कोतवाली में दर्ज करा दी.

पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी मोहन सिंह आपराधिक प्रवृत्ति का है. उस ने अपने साले की बीवी की हत्या की थी. इन दिनों वह जमानत पर था. मोहन सिंह शादीशुदा था, मगर बीवी मायके में ही रहती थी. भीनमाल निवासी मांगीलाल उस का मित्र था. वारदात के बाद मांगीलाल फरार हो गया था.

थाना रामसीन के इंचार्ज छतरसिंह देवड़ा अवकाश से ड्यूटी लौट आए थे. उन्होंने भी रिमांड पर चल रहे रसाल कंवर और मोहन सिंह राव से पूछताछ की.

रिमांड अवधि समाप्त होने पर पुलिस ने 19 जुलाई, 2019 को दोनों आरोपियों रसाल कंवर और मोहन सिंह को फिर से कोर्ट में पेश कर दोबारा 2 दिन के रिमांड पर लिया और उन से पूछताछ कर कई सबूत जुटाए. उन की निशानदेही पर मृतक के कपड़े, वारदात में प्रयुक्त बोलेरो गाड़ी नंबर आरजे14यू बी7612 बरामद की गई. मृतक डूंगरदान के कपडे़ व चप्पलें रामसीन रोड बीएड कालेज के पास रेल पटरी के पास से बरामद कर ली गईं.

पूछताछ पूरी होने पर दोनों आरोपियों को 21 जुलाई, 2019 को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. पुलिस तीसरे आरोपी मांगीलाल माली को तलाश कर रही है.

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