Crime Story: जेठ के चक्कर में पति की हत्या- भाग 1

सौजन्य- सत्यकथा

राजस्थान के उदयपुर शहर को झीलों की नगरी के नाम से जाना जाता है. इसी शहर के प्रतापनगर थाने के अंतर्गत उदयसागर झील स्थित है. 17 नवंबर, 2020 को लोगों ने उदयसागर झील में एक बोरा पानी के ऊपर तैरता देखा. लग रहा था जैसे कि उस में कोई चीज बंधी हो. किसी ने इस की सूचना प्रतापनगर थाने में फोन द्वारा दे दी.

सूचना पा कर थानाप्रभारी विवेक सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर जा पहुंचे. उन्होंने झील से बोरा निकलवाया. जब बोरा खोला गया तो उस में किसी अधेड़ उम्र के व्यक्ति का शव निकला. मृतक की उम्र 45 वर्ष के आसपास लग रही थी.

मृतक ने पैंटशर्ट पहनी हुई थी. चेहरे से लग रहा था कि वह असम, मणिपुर इलाके का है. मृतक की जामातलाशी में कुछ नहीं मिला था, जिस से कि मृतक की शिनाख्त हो पाती. शव की शिनाख्त नहीं होने पर कागजी काररवाई कर शव को राजकीय अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया.

पुलिस ने अज्ञात शव की शिनाख्त कराने की पूरी कोशिश की. मगर किसी ने उस व्यक्ति की शिनाख्त नहीं की. एक सप्ताह तक मृतक की पहचान नहीं हुई तो पुलिस ने शव को लावारिस मान कर मैडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करा कर उस की अंत्येष्टि करा दी.

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प्रतापनगर थाने में अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने का मामला दर्ज कर लिया गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मृतक को गला दबा कर मारा गया था. यह हत्या का मामला था. मगर जब तक मृतक की शिनाख्त नहीं हो जाती, तब तक पुलिस काररवाई करती भी तो कैसे.

पुलिस ने खूब हाथपैर मारे कि शव की कोई तो पहचान करे. मगर किसी ने इस व्यक्ति को देखा नहीं था. पुलिस ने अपने मुखबिरों को भी अज्ञात शव की सुरागसी के लिए लगा रखा था. मगर साढ़े 4 महीने तक कुछ पता नहीं चला.

मगर अचानक उदयपुर पुलिस की जिला स्पैशल टीम के कांस्टेबल प्रह्लाद पाटीदार को मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग एक मृत व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की बात कहते हुए कई पंचायतों के चक्कर लगा रहे हैं.

तब प्रह्लाद पाटीदार एवं स्पैशल टीम के इंचार्ज हनुमंत सिह भाटी की टीम ने जब 2 लोगों पर निगरानी

रखी तो किसी व्यक्ति की मौत के बाद फरजी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की बात सामने आई.

टीम ने जब दोनों व्यक्तियों को हिरासत में ले कर सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने अपने 3 अन्य साथियों के साथ मिल कर असम के उत्तम दास की हत्या करने की बात स्वीकार की. उन्होंने बताया कि उत्तम दास की हत्या उस के बड़े भाई तपन दास ने कराई थी. आरोपियों ने पुलिस को यह भी बताया कि तपन दास ने उन्हें इस काम के लिए साढ़े 12 लाख रुपए की सुपारी दी थी.

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स्पैशल टीम और प्रतापनगर थाना पुलिस ने कड़ी से कड़ी जोड़ी तो फरजी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के मामूली से प्रयास के पीछे अपराध की बड़ी कहानी निकल आई. किसी ने ऐसा सोचा भी नहीं था.

इस खुलासे के बाद न सिर्फ घिनौना अपराध सामने आया बल्कि उदयसागर में 17 नवंबर, 2020 को मिली अज्ञात व्यक्ति की लाश की वह गुत्थी भी सुलझ गई, जो करीब पौने 5 माह से प्रतापनगर थाना पुलिस के लिए सिरदर्द बनी हुई थी.

मामला असम के रहने वाले एक परिवार में अवैध संबंधों का निकला, जिस में तपन दास को छोटे भाई उत्तम दास की पत्नी रूपा से प्यार हो गया तो आगे चल कर प्यार के इस खेल में उत्तम दास बलि का बकरा बन गया और उस की लाश हजारों किलोमीटर दूर उदयपुर की उदयसागर झील में फिंकवा दी. सुपारी किलर 5 युवकों से पूरी जानकारी एवं मृतक के भाई तपन दास का मोबाइल नंबर पुलिस ने हासिल कर लिया. इस के बाद एक विशेष पुलिस टीम गठित की गई.

इस टीम में जिला स्पैशल टीम के कांस्टेबल प्रह्लाद पाटीदार की विशेष भूमिका रही. इस के अलावा जिला स्पैशल टीम में प्रतापनगर थाने के एसआई मांगीलाल, एएसआई गोविंद सिंह, सुखदेव सिंह, विक्रम सिंह, अनिल पूनिया, मोड़ सिंह, कांस्टेबल अचलाराम, विश्वेंद्र सिंह, नंदकिशोर, उमेश, हरिकिशन, नवलराम, फिरोज, साइबर सेल से गजराज सिंह को शामिल किया गया.

फिर एसआई मांगीलाल, कांस्टेबल नंदकिशोर को फ्लाइट से गुवाहाटी भेजा गया. इन्होंने स्थानीय पुलिस की मदद से मुख्य आरोपी तपन दास की तलाश की.

तपन दास से पूछताछ के बाद मृतक की पत्नी रूपा दास को भी हिरासत में ले लिया. मृतक के परिजनों से भी पूछताछ की गई. उन लोगों ने बताया कि रूपा ने दिसंबर 2020 के दूसरे हफ्ते बताया कि उदयपुर में उत्तम दास की कोरोना से मृत्यु हो गई है.

कोरोना होने के कारण शव का वहीं अंतिम संस्कार कर दिया गया. इस के बाद मृतक के पैतृक निवास पर विधिविधान से अंतिम क्रियाएं की गई थीं. मृतक के परिजन तो उत्तम दास की मौत कोरोना से होने की मान रहे थे, मगर उदयपुर पुलिस ने घर वालों को बता दिया कि उत्तम की मृत्यु कोरोना से नहीं हुई थी, बल्कि बड़े भाई तपन दास ने साढ़े 12 लाख रुपए की सुपारी दे कर उस की हत्या कराई थी.

पुलिस से सच जान कर मृतक के परिजन बहू और हत्यारे बेटे तपन दास को कोसने लगे और विलाप करने लगे. पुलिस टीम दोनों आरोपियों रूपा दास और उस के जेठ तपन दास को गिरफ्तार कर उदयपुर ले आई.

उदयपुर में थाना प्रतापनगर में सातों आरोपियों से मृतक उत्तम दास की हत्या के संबंध में एसपी डा. राजीव पचार, एएसपी (सिटी) गोपालस्वरूप मेवाड़ा, डीएसपी राजीव जोशी, थानाप्रभारी (प्रतापनगर) विवेक सिंह ने कड़ी पूछताछ की.

पूछताछ में सभी आरोपियों ने उत्तम की हत्या करने का जुर्म कबूल कर के सारी कहानी बयां कर दी. इस के बाद एसपी डा. राजीव पचार ने 9 अप्रैल, 2021 को प्रैसवार्ता कर पत्रकारों को इस मामले की जानकारी दी.

पुलिस पूछताछ में अवैध संबंध में हत्या की जो कहानी प्रकाश में आई, वह इस प्रकार है.

अगले भाग में पढ़ें- उत्तम को अपने बड़े भाई की बात क्यों जंच गई 

सीरो सर्वे से पता लगेगा कितने लोगों में बन चुकी है एंटीबॉडी

लखनऊ . उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की गहन पड़ताल के लिए 04 जून से सीरो सर्वे शुरू किया जा रहा है. सभी 75 जिलों में होने वाले इस सर्वे के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि किस जिले के किस क्षेत्र में कोरोना का कितना संक्रमण फैला और आबादी का कितना हिस्सा संक्रमित हुआ. यही नहीं, इससे यह भी सामने आएगा कि कितने लोगों में कोरोना से लड़ने के लिए एंटीबाडी बन चुकी है.

सोमवार को राज्य स्तरीय टीम-09 की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीरो सर्वे को लेकर हो रही तैयारियों की जानकारी ली. अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि 04 जून से शुरू हो रहे इस सर्वे को लेकर कार्ययोजना तैयार हो चुकी है. सैम्पलिंग कर लिंग और आयु सहित विभिन्न मानकों पर सर्वेक्षण की रिपोर्ट तैयार की जाएगी. जिलेवार सर्वे करने वाले कार्मिकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके परिणाम जून के अंत तक आने को संभावना है.

पहली लहर में भी हुआ था सीरो सर्वे:

कोरोना की पहली लहर के दौरान पिछले साल सितंबर में 11 जिलों में सीरो सर्वे कराया गया था. यह सर्वे लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, आगरा, प्रयागराज, गाजियाबाद, मेरठ, कौशांबी, बागपत व मुरादाबाद में हुआ था. उस समय सीरो सर्वे में 22.1 फीसद लोगों में एंटीबाडी पाई गई थी.

‘सात फेरों के सात वचन’: इस भोजपुरी गाने ने 23 मिलियन व्यूज के साथ बनाया रिकॉर्ड, देखें VIDEO

इन दिनों विवाह का मौसम चल रहा है.विवाह के समय कई परंपराएं निभायी जाती हैं इन परंपराओं में नाच गाने का अपना एक महत्व है. जब किसी फिल्म में विवाह के अवसर पर गाया जाने वाले गीत का समावेष होता है, तो वह अतिलोकप्रिय हो जाता है.

कोरोना महामारी के बावजूद भीड़ न जुटाते हुए भी विवाह संपन्न हो रहे हैं. ऐसे ही विवाह के खास मौके के लिए सामाजिक मुद्दों को लेकर गाने बनाने के लिए मशहूर संगीत कंपनी ‘‘विजय लक्ष्मी म्यूजिक’’ का विवाह गीत ‘सात फेरों के सात वचन’ कुछ दिन पहले ही बाजार में आया था और बहुत ही कम समय में इसने 23 मिलियन व्यूज के साथ एक नया रिकॉर्ड बना दिया है.

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इस गाने को अब तक 23,680,937 व्यूज मिल चुके हैं. यह गाना इस बार शादी के मौसम में लोगों को खूब पसंद आ रहा है. यही वजह है कि इस पारम्परिक गाने को रिकॉर्ड व्यूज मिल रहे हैं.

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यह एक विशुद्ध रूप से पारम्परिक विवाह गीत है,जिसकी प्रस्तुति कमाल की है. इस गाने को ‘विजय लक्ष्मी भोजपुरी ट्यून’ पर रिलीज किया गया है. इस गाने में आनंद मोहन पांडेय, नेहा सिद्दीकी, राजेश मिश्रा और रूपा सिंह मुख्य भूमिका में हैं.

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इस गाने को अंजली भारती ने गाया है. इसके गीतकार अमन अलबेला,संगीतकार लार्ड जी, निर्देशक रंजीत कुमार सिंह, मेक अप मैन जय शर्मा और हृतिक का है. विवाह गीत ‘सात फेरों के सात बचन‘ में हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार हर वचन का महत्व बेहद सरलता से बताया गया है. हिन्दू विवाह इस रस्म के बिना अधूरा माना जाता है. इसलिए ‘सात फेरों के सात बचन’ की अहमियत बेहद अधिक होती है, जो इस गाने से लोग आसानी से समझ सकते हैं. यह अनमोल सात बचन इससे
पहले इतनी सरलता से किसी गाने में नहीं पिरोए गए हैं.

इस भोजपुरी गाने ने दिखाई शराबी आदमी की पत्नी की तड़प, देखें Video

शराब एक ऐसी सामाजिक बीमारी है,जिसके चलते आए दिन परिवारों के अंदर कलह होती रहती है.इतना ही नहीं शराब जैसी सामाजिक बीमारी के चलते लोग अपने शराब का सेवन करने वाले प्रियजनों को भी खो रहे हैं. इसी मुसीबत से हर इंसान व परिवार को बचाने के मकसद से बिहार सरकार ने शराब बंदी लागू की है.

मगर इसका खास असर बिहार में नजर नही आ रहा है. अभी भी लोग चोरी छिपे शराब खरीद रहे हैं और उसका सेवन कर रहे हैं. ऐसे में सामाजिक मुद्दों पर आधारित गाने लेकर आने वाली मशहूर संगीत कंपनी ‘‘विजय लक्ष्मी म्यूजिक’’ एक नया गाना ‘‘मिल गईल पियवा पियक्कड़” को बाजार में लेकर आयी है. यह गाना विजय लक्ष्मी भोजपुरी ट्यून पर रिलीज हुआ है, जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं. यह एक विशुद्ध रूप से सामाजिक सरोकारों वाला गाना है.

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यह गाना एक शराबी पुरूष की पत्नी की पीड़ा व वेदना को जगजाहिर करता है. इस गाने में अपने पति से पीड़ित पत्नी अपनी वेदना सुनाते हुए कहती है-‘‘मिल गईल पियवा पियक्कड़”. जिसे नीतू श्री ने अपनी मधुर व वेदनामयी आवाज मेें स्वरबद्ध किया है.

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नीतू श्री कहती हैं-‘‘वर्तमान दौर के एक ज्वलंत विषय पर आधारित है. इस गाने कापक्ष जितना मनोरंजक है, उतना ही यह समाज में जागृति लाने वाला भी है.

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यह ऐसा गाना है,जिसे हर पुरूष व नारी को सुनना चाहिए. बहुत मजा आएगा. आप भी गाने को सुने और दूसरे को भी सुनाएँ. ’’ गीत ‘‘मिल गईल पियवा पियक्कड़” के गीतकार अमन अलबेला ,संगीतकार लार्ड जी,निर्देशक रंजीत कुमार सिंह और नृत्य निर्देषक गणेश सपना है.

अक्षरा सिंह को लेकर नीलकमल सिंह ने गाया अश्लील गाना, तो फिल्म एसोसिएशन ने उठाया ये कदम

फिल्म मेकर एसोसिएशन के अध्यक्ष शशिनाथ दुबे ने अश्लीलता के खिलाफ मुहिम छेड़ने की ठान ली हैं. उन्होंने तय कर लिया हैं कि संगठन अश्लीलता के खिलाफ उच्च न्यायालय जाएगी. आए दिन देखा जाता रहा है कि भोजपुरी फिल्मों व सोशल मीडिया यूट्यूब आदि पर अश्लीलता अपने चरम पर है. खास कर भोजपुरी गायक अश्लील गीत संगीत परोस कर एक प्रकार से भोजपुरी समाज को बदनाम करने में लगें.

हाल ही में नीलकमल सिंह ने भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह से संबंधित अश्लील व शर्मनाक गीत गाया गया है. जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इस प्रकार के कई मामले आए दिन देखने को मिलते हैं. लेकिन,यह मामला जब गरमाया और भोजपुरी फिल्म के गायक नीलकमल सिंह ने अशोभनीय कुकृत्य करते हुए भोजपुरी की मशहूर अदाकारा को लेकर इतने गंदे व अभद्र शब्दों का प्रयोग किया. जिसे कोई भी अपनी पत्नी के सामने भी नहीं बोल सकता है.

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इस वायरल गाने में फिल्म अभिनेत्री अक्षरा सिंह, खेसारी लाल यादव और पवन सिंह के नाम के साथ गाना गाया हैं. जो आज के समय में सोशल मीडिया पर हड़कंप मचाया हुआ है. इसके विरोध में उत्तरप्रदेश फिल्म मेकर एसोसिएशन ऐसे गायको के खिलाफ कानूनी करवाई करने को लेकर तैयार हैं. संगठन के अध्यक्ष शशि नाथ दुबे निर्माता व वरिष्ठ पत्रकार हैं.

उनका कहना है कि भोजपुरी समाज में महिला को सम्मान दिया जाता हैं. ऐसे में अश्लील गीत संगीत व द्विअर्थी संवाद की फ़िल्मों का विरोध होना चाहिये. इस तरह के असामाजिक गीत संगीत और फ़िल्मों पर रोक लगानी  चाहिए.जिससे भोजपुरी समाज सुरक्षित रहें. वर्तमान समय में भोजपुरी समाज इतना अच्छा समाज हैं और भोजपुरी समाज की महिलायें संस्कारी हैं.

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ऐसे में अश्लीलता अनुचित व असभ्य हैं.इसके खिलाफ उतरप्रदेश फ़िल्म मेकर एसोसिएशन हाईकोर्ट इलाहाबाद में मामला दाखिल करने की योजना बना चुकी हैं.

शशिनाथ दुबे ने यह भी कहा कि वे अक्षरा सिंह के साथ हैं. सभी के घर परिवार में बहन माँ बेटी बहु है. नीलकमल सिंह के घर में शायद नहीं हैं.जिसके कारण वह असभ्य गीत संगीत से सुसज्जित गाने गाकर स्टार बनना चाहते हैं.जनता से अपील भी करते हुए शशिनाथ दुबे ने कहा दर्शक वर्ग भी आवाज उठाये कि भोजपुरी समाज में अश्लीलता गलत है.

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ एक्टर Karan Mehra हुए गिरफ्तार, पत्नी निशा रावल ने लगाया घरेलू हिंसा का आरोप

टीवी के मशहूर एक्टर Karan Mehra और उनकी पत्नी निशा रावल के बीच काफी दिनों से अनबन की खबरे आ रही थी. हालांकि उन्होंने इस खबर को झूठा करार दिया था. लेकिन अब खबर यह आ रही है कि मुंबई पुलिस ने करन मेहरा को गिरफ्तार कर लिया है.

दरअसल करन मेहरा की पत्नी निशा रावल ने डोमेस्टिक वायलेंस का केस दर्ज कराया है. रिपोर्ट के अनुसार निशा ने अपनी शिकायत में कहा है कि करन मेहरा ने उनके साथ पहले लड़ाई की और फिर मारपीट किए.

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इस शिकायत के बाद पुलिस ने करन मेहरा को गिरफ्तार किया. करन मेहरा पर पर धारा 336, 337, 332, 504, 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

 

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आपको बता दें कि हाल ही में करन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि जब मुझे कोविड हुआ था तो निशा ने उनका पूरा ख्याल रखा. करन ने ये भी बताया था कि वह पंजाबी प्रोजेक्ट को लेकर बिजी थी.

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एक्टर ने आगे बताया कि वह शूटिंग कर रहे थे कि इस दौरान उन्हें शरीर में दर्द हुआ और बहुत थके हुए महसूस कर रहे थे. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने शरीर में कोरोना के सिम्टम्स दिख रहे थे. जब उन्होंने टेस्ट करवाया तो उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आयी. साथ ही उन्होंने बताया,  मेरी तबियत ठीक नहीं थी. मेरी पत्नी निशा ने मेरा पूरा ख्याल रखा.

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वर्कफ्रंट की बात करे तो करन मेहरा ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में नैतिक के किरदार में काफी मशहूर हुए. करन और निशा की मुलाकात ‘हंसते-हंसते’ के सेट पर हुई. उन्होंने एक-दूसरे को 6 साल तक डेट किया और 2012 में शादी की. दोनों का 4 साल का बेटा भी है. ये कपल नच बलिए में भी साथ दिखाई दिए हैं.

कोरोना काल में योगी सरकार ने तोड़े गेंहू खरीद रिकार्ड

लखनऊ . उत्तर प्रदेश में किसानों को लाभ पहुंचाने वाली योगी सरकार प्रत्येक दिन नए मुकाम हासिल कर रही है. सूबे में अभी तक कुल 39.58 लाख मी.टन गेहं खरीद की जा चुकी है. इसके माध्यम से 828697 किसानों को सीधा लाभ मिला है. जबकि पिछले साल आज तक 23.92 लाख मी. टन गेहूं खरीद ही हो पाई थी. कोरोना की लड़ाई में पूरी ताकत से जुटी योगी सरकार किसानों के हित में हर संभव प्रयास करने में जुटी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किसानों की बकाया 7817.68 करोड़ की राशि में से 6029.27 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है. सरकार की ओर से किये जा रहे प्रयासों से यूपी के किसान काफी खुश है. उनका कहना है कि पिछली सरकारों में कभी उनको इतनी सहूलियत नहीं मिली थीं.

यह पहला मौका है जब उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद के दौरान किसानों को भुगतान भी तेजी से किया जा रहा है. मात्र 72 घंटों के भीतर पैसा सीधे किसानों के एकाउंट में पहुंच रहा है. इतना ही नहीं ई-पॉप मशीनों का इस्तेमाल होने से मंडियों में बिचौलिये भी खत्म हो गये हैं. वर्षा की चेतावनी को देखते हुए सरकार हर सावधानी बरत रही है. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गेहूं खरीद में क्रांति लाते हुए पहली बार मंडियों में न केवल अत्याधुनिक सुविधाओं को बढ़ाया बल्कि किसानों के लिये मंडियों में पानी, बैठने के लिये छायादार व्यवस्था के सख्त निर्देश भी दिये.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार किसानों को उनके खेत के 10 किमी के दायरे में गेहूं खरीदकर उनकी दिक्कतों को समाप्त करने का बड़ा काम किया है. इससे यूपी के किसानों को गेहूं खरीद में काफी राहत मिली है. जीवन और जीविका को बचाने के उद्देश्य से योगी सरकार ने कोरोना काल में मंडियो में कोविड प्रोटोकाल का पूरा पालन कराने के निर्देश दिये. जिसके बाद से खरीद केंद्रों पर ऑक्सीमीटर, इफ्रारेड थर्मामीटर की व्यवस्था भी की गई है.

इथेनॉल के जरिए गन्ने को ग्रीन गोल्ड बनायेगी यूपी सरकार

लखनऊ . प्रदेश सरकार अब इथेनॉल के जरिए गन्ने को ग्रीन गोल्ड बनाने की मुहिम में जुट गई है. इसके तहत राज्य में गन्ने से इथेनॉल बनाने के 54 और चावल, गेहूं, जौ, मक्का तथा ज्वार से इथेनॉल बनाने के सात प्रोजेक्ट लगाए जाने की कार्रवाई चल रही हैं. गन्ने से इथेनॉल बनाने के 54  प्रोजेक्ट में से 27 प्रोजेक्ट पूरे हो गए हैं, जबकि 27 प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं, आगामी सितंबर के अंत तह यह भी पूरे हो जायंगे. चावल, गेहूं, जौ, मक्का तथा ज्वार से इथेनॉल बनाने संबंधी प्रोजेक्ट में भी अगले चंद महीनों में उत्पादन शुरू हो जाएगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गन्ने से इथेनॉल बनाने संबंधी प्रोजेक्टों की समीक्षा करते हुए इनमें जल्द से जल्द इनमें उत्पादन शुरू करने के निर्देश हैं. उत्पादन शुरू करने के लिए एनओसी जारी करने में को विलंब ना हो, यह भी मुख्यमंत्री ने कहा है.

गन्ना राज्य के किसानों की एक मुख्य नगदी फसल है. बुन्देलखंड को छोड़ कर राज्य के हर जिले में किसान गन्ने की पैदावार होती हैं. कुछ समय पहले तक चीनी मिले, खंडसारी और गुड के कारोबारी ही गन्ने पैदावार के खरीददार थे लेकिन अब गन्ने से इथेनॉल भी बनाई जाने लगी हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही पहल पर राज्य में इथेनॉल उत्पादन के क्षेत्र में निवेश करने के लिए लोगों ने रूचि दिखाई है. जिसके चलते अब किसानों को चीनी मिलों या खांडसारी करोबारियों के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. प्रदेश सरकार ने इथेनॉल उत्पादन को बढ़ाने की शुरुआत कर अब गन्ने को ग्रीन गोल्ड सरीखा बना दिया है. इस क्षेत्र में अब भारी निवेश हो रहा है. राज्य में गन्ने तथा अन्य अनाजों के जरिए इथेनॉल बनाने के लिए 61 प्रोजेक्ट लगाने के लिए लोगों का आगे आना इसका सबूत है. निवेश के इन प्रस्तावों के सूबे में आने से अब गन्ना उत्पादन में इजाफा होगा. सूबे के कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में राज्य में गन्ने तथा अन्य अनाजों से इथेनॉल बनाने संबंधी लगाए जा रहे कुल 61 प्रोजेक्टों से 25 लाख से अधिक किसानों को लाभ होगा.

इन विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल के उत्पादन को बढ़ाने तथा उसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने संबंधी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस योजना से किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी क्योंकि इथेनॉल गन्ने,  मक्का और कई दूसरी फसलों से बनाया जाता है. ये विशेषज्ञों कहते हैं कि दो माह पहले केंद्र सरकार ने इथेनॉल को स्टैंडर्ड फ्यूल घोषित किया है. ऐसे में अब इथेनॉल की मांग में इजाफा होगा. जिसका संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने उचित समय पर इथेनॉल बनाने संबंधी प्रोजेक्ट लगाने में तेजी दिखाई है. प्रदेश सरकार के इस प्रयास से उत्तर प्रदेश इथेनॉल के उत्पादन सबसे अन्य राज्यों से बहुत आगे निकल जाएगा. अभी भी उत्तर प्रदेश से हर वर्ष 126.10 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति की जाती है. राज्य में करीब 50 आसवानियां इथेनॉल बना रही हैं. इस वर्ष इथेनॉल बनाने संबंधी नए प्रोजेक्टों में उत्पादन शुरू होने से इथेनॉल उत्पादन में प्रदेश देश में सबसे ऊपर होगा और राज्य के किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा. क्योंकि इन प्रोजेक्ट में गन्ना देने वाले किसानों को उनके गन्ने का भुगतान पाने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा. और किसान गन्ना की फसल बोने से संकोच नहीं करेंगे. गन्ना किसानों के किए सोने जैसा खरा साबित होगा. इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गन्ने से इथेनॉल बनाने संबधी प्रोजेक्ट पर विशेष ध्यान देते हुए उनके शुरू करने की कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिया हैं.

क्या होता है  इथेनॉल  :

अगर आसान शब्दों में कहें तो इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है. एथेनॉल का उत्पादन वैसे तो गन्ने से होता है लेकिन अब प्रदेश सरकार ने चावल, गेहूं, जौ, मक्का तथा ज्वार से भी इसे तैयार करने के सात प्रोजेक्ट स्थापित करने की अनुमति दी है. पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में स्थापित और नए लग रहे प्रोजेक्ट से उत्पादित इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर 35 फीसदी तक कार्बन मोनोऑक्साइड कम किया जा सकता है. साथ ही, इससे सल्फर डाइऑक्साइड को भी किया जा सकता है. मौजूदा समय में केंद्र सरकार सरकार ने 2030 तक 20 फीसदी इथेनॉल पेट्रोल में मिलाने का लक्ष्य रखा है.पिछले साल सरकार ने 2022 तक पेट्रोल में 10 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा था. सरकार के इस फैसले से आम लोगों को प्रदूषण से राहत मिलेगी. इथेनॉल का उत्पादन बढ़ने से गन्ना किसानों को सीधा फायदा होगा. क्योंकि शुगर मिलों के पास आसानी से पैसा उपलब्ध हो जाएगा.

मालिनी को पता चलेगा Imlie के असली पिता का नाम, अब क्या करेगी अनु

स्टार प्लस का मशहूर सीरियल ‘इमली’ के कहानी में नया ट्विस्ट एंड टर्न देखने को मिल रहा है. शो के बीते  एपिसोड में आपने देखा कि मालिनी पगडंडिया पता करने गई है कि आखिर इमली का पिता कौन है? मालिनी को शक होने लगा है कि  उसके पिता (देव) और इमली का जरूर कोई रिश्ता है. शो के नए एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए जानते हैं शो के आगे की कहानी.

शो में दिखाया जा रहा है कि मालिनी, मीठी से इमली के पिता का नाम जानने की पूरी कोशिश करेगी और उसे सच का पता भी चल जाएगा. मालिनी को पता चल जाएगा कि देव यानि उसके पिता ही इमली के भी पिता हैं.

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तो वहीं त्रिपाठी परिवार की लाज बचाने के लिए इमली ने बुखार में भी डांस किया है. यह बात अपर्णा और बाकी परिवार को पता चल जाएगा कि इमली ने समाज के सामने उसके परिवार की लाज बचाई. इसके लिए अपर्णा इमली को गले लगाकर शुक्रिया कहेगी और उसे माफ कर देगी.

 

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इमली के अपकमिंग एपिसोड में आप ये भी देखेंगे कि मालिनी इमली का हक दिलवाने के लिए सबसे लड़ेगी. वह किसी तरह इमली का हक दिलवाकर रहेगी. शो में ये देखना दिलचस्प होगा कि जब अनु को इमली और देव के रिश्ते के बारे में पता चलेगा तो उसका रिएक्शन होगा. और वह इमली के साथ क्या करेगी.

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